मंच पर विराजमान राज्यपाल, श्रीमान राम नाइक जी, केंद्र सरकार में मेरे साथी मंत्री श्रीमान गंगवार जी, उपस्थित सभी वरिष्ठ महानुभाव भाईयों और बहनों...

ये सिक्योरिटी वालों ने जो पर्दें बंद कर दिये बगल में थोड़ा-थोड़ा खोल दो। थोड़ा-थोड़ा खोल कर रखो ताकि हवा आए अंदर, मुझे भी कुछ दिखाई दे। यहां तो कुछ दिखता ही नहीं मुझे। ये पीछे भी जो सिक्योरिटी वाले है जरा खोल दिजिए पर्दें क्या जाता है आपका। अंदर बैठे हुए लोगों को थोड़ी हवा भी मिल जाए। उनको जरा टेंशन रहता है न सिक्योरिटी का।

मैं उत्तर प्रदेश के मंत्री महोदय श्रीमान अहमद हसन जी विशेष रूप से आज उपस्थित रहे। मैं उनका आभार व्यक्त करता हूं। मैं आज यहां अपनों के बीच आया हूं। अब सरकारी व्यवस्था ऐसी रहती है कि व्यवस्था के कारण लगता है कि हम कोई मंच पर बैठने वाले व्यक्ति हैं और आप लोग उधर बैठने वाले व्यक्ति हो। लेकिन मेरे केस में वो नहीं है। मैंने बनारस को अपना एक ऐसा स्थान के रूप में पाया है कि जिस बनारस ने मुझे अपना बना लिया है और एक प्रकार से अपनों के बीच में आने का एक आनंद अलग होता है। कुछ समय पूर्व मैंने आना तय किया था लेकिन आंध्र में एक बहुत ही बड़ा cyclone आया उसके कारण मेरा वहां जाना जरूरी था उसके कारण मैं यहां नहीं आ पाया फिर कार्यक्रम में थोड़ा बदलाव हुआ। लेकिन मैं आज दो दिन के लिए आपके बीच हूं। आपके प्रतिनिधि के रूप में हूं। आपके सुख-दुख के साथी के रूप में हूं। आपके सेवक के रूप में आया हूं।

हमारे देश में कृषि क्षेत्र के बाद सबसे अधिक रोजगार देने वाला अगर कोई क्षेत्र है तो वो टैक्सटाइल है और कम पूंजी से ज्यादा लोग अपनी आजीविका चला सकते है। यह ऐसा क्षेत्र है कि जिसमें मजदूर और मालिक के बीच में खाई संभव ही नहीं है, दीवार संभव ही नहीं है, ऐसा क्षेत्र है। खेती में भी कभी अगर किसान मालिक है और मजदूर काम करता है तो एक खाई नजर आती है। यह एक क्षेत्र है कि जहां पर हैंडलुम हो, पावरलुम हो, उसका मालिक हो, उसके काम करने वाले और कोई बाहर के लोग हो, लेकिन पूरा माहौल एक परिवार के जैसे होता है। न कोई जाति बीच में होती है न कोई सम्प्रदाय होता है। एक अपनेपन का माहौल होता है और जैसे कपड़े के तानेबाने बुने जाते हैं वैसे ही ये बुनने वाले समाज के भी तानेबाने बुनते रहते हैं। यह गंगा-जमुना तहजीब की बात हो रही है ना। वो यही समाजिक ताना-बाना है। जो हमें हर हथकरघे से हर पावरलुम के साथ जुड़ा हुआ नजर आता है। और यह भारत की भी विरासत है। बनारस की विशेष विरासत है, लेकिन अगर समय रहते इन क्षेत्रों में अगर बदलाव नहीं आता है। इन क्षेत्रों में विकास नहीं होता है तो आप काल भय हो जाते हैं। ये क्षेत्र ऐसे है कि जिसमें एक तो customer को संतोष देना होता है। अब customer के पास आधुनिक युग में रोज नई variety आती है। वो पुरानी variety पर जाना नहीं चाहता। उसे नई variety चाहिए, नई product चाहिए। नया डिजाइन चाहिए, नया fabric चाहिए, नया finishing चाहिए, नया पैकेजिंग चाहिए, नया colour चाहिए। और जो यह बदलाव को समझ नहीं पाता है और अपना सालों पुराना काम करता रहता है। तो उसके, निश्चित जो परिवार रहते हैं वो तो उसके साथ खरीदी करते रहते है। लेकिन न उसका विस्तार होता है न उसका कोई बढ़ावा होता है और इसलिए अगर भारत में यह एक उद्योग ऐसा है जो सर्वाधिक लोगों को रोजगार देता है, गरीब लोगों को रोजगार देता है, हमारे जुलाहे परिवार को रोजगार देता है और समाज के सब वर्ग के लोग इसमें जुड़े हुए होते हैं। उसे भी दुनिया के साथ ताल मिलाने वाला बनाना पड़ता है। आधुनिक जो modernisation हो रहा है उसके सामने वो टिक सके यह व्यवस्था विकसित करना आवश्यक होती है। और इसलिए सिर्फ रुपये दें, पमपिंग करे इससे काम बनता नहीं है। एक comprehensive vision के साथ इस काम को आगे बढ़ाना पढ़ता है और आज उसका शुभारंभ बनारस की धरती से हो रहा है। सिर्फ रुपये पैसों से, कोई बैंक लोन दें दे। इसी से काम चल जाएगा ऐसा नहीं है और इसलिए यह आवश्यक है कि उसके हर छोटे विषय को कैसे Develop किया जाए। आज समय कह सकता है कुछ लोग प्रयोग भी कर रहे है कि computer डिजाइनिंग के द्वारा weaving का काम आसानी से किया जा सकता है। स्पीड भी बढ़ाई जा सकती है और wastage कम से कम हो यह संभावना बनी है। हम उस दिशा में कैसे आगे बढ़े। Technology up gradation कैसे करे। उसी प्रकार से human resource development यह जरूरी नहीं है कि हथकरघा और पावरलुम चलाने वाले हमारे कारीगरों को NIFT में यह NID में जाकर के पढ़ेंगे और बड़ी डिग्री लेकर आएंगे तब काम करेंगे। यह जरूरी नहीं है। यह ज्ञान उनको आसानी से उनके यहां भी दिया जा सकता है, उनके स्थान पर दिया जा सकता है और सरकार की कोशिश यह है कि डिजाइनिंग के क्षेत्र में हमारे इस क्षेत्र में जुड़े हुए निचले तबके के लोग भी अगर उनके साथ जुड़ जाते हैं उनको इसका लाभ मिलता है, तो प्रोडक्शन में, स्पीड में, क्वालिटी में, डिजाइन में एकदम से improvement लाने के संभावना रहती है। और इसलिए सरकार ने जो पूरी योजना को लागू करने का प्रयास किया है, उसमें एक तो Technology up gradation हो। हम दुनिया का मुकाबला कर सके भले ही वो Handloom हो या Power loom हो। हम दुनिया का मुकाबला कर सके इस प्रकार से Technology up gradation की दिशा में रिसर्च हो। उस Technology के अनुकुल यंत्रों का Manufacturing हो, वो उनको प्राप्त हो। उस दिशा में प्रयास करने की आवश्यकता है। और सरकार ने उस दिशा में काम उठाया है। दूसरा जैसे मैंने कहा कि Human Resource Development आधुनिक से आधुनिक डिजाइन क्योंकि जो इस क्षेत्र में काम कर रहा है, उसको स्वभावगत मालूम है। यह बदलाव करूंगा तो अच्छा लगेगा, लेकिन अगर उसको scientific ढंग से जब train किया जाए, काम करते-करते train किया जाए। जरूरी नहीं कि बहुत बड़े-बड़े कॉलेज में जाना पड़े। वो अपने यहां रहकर भी इन चीजों को सीख सखता है। उस काम को हम आगे बढ़ाना चाहते है।

तीसरी बात है हमारी नई पीढ़ी। हमारी नई पीढ़ी इस क्षेत्र में मजबूरी के कारण नहीं, गौरव के साथ कैसे जुड़े इस विषय में हमने गंभीरता से सोचना चाहिए। अब यह तो संभव नहीं कि कोई पेट भूखा रखकर के नई-नई योजनाओं से जुड़ता रहेगा। उनकी income के संबंध में assured व्यवस्था होनी चाहिए, गारंटी होनी चाहिए। लेकिन हम यह समझे आज पूरे हिंदुस्तान भर में कोई महिला ऐसी नहीं होगी, कोई महिला। गरीब से गरीब क्यों न हो, अनपढ़ से अनपढ़ क्यों न हो। जिसके कान में ‘बनारसी साड़ी’ ये शब्द न पड़ा हो। अब आज जो यहां लोग हैं उनको पूछा जाए कि यह बात पहुंचाने में भई तुम्हारा क्या Contribution है। तो आज जो लोग यहां बैठे हैं, उनका कोई विशेष Contribution नहीं है। लेकिन हमारे पूर्वजों ने इस काम को जिस साधना के साथ किया, जिस पवित्रता के साथ किया और ऊंचाई देखिए हमारे पूर्वजों ने एक ऐसी नींव रखी है कि हर मां अपनी बेटी की शादी जो जीवन का सबसे अमूल्य अवसर होता है, उसके मन का एक सपना रहता है कि बेटी को शादी में बनारसी साड़ी पहनाए। यह कितनी बड़ी विरासत हमारे पास है। न हमें कोई Marketing करने की जरूरत है क्योंकि लोगों को मालूम है। आप कल्पना कर सकते है कि भारत की सवा सौ करोड़ जनसंख्या है। आने वाले कुछ वर्षों में कम से कम 20 करोड़ से ज्यादा बेटियों की शादी होगी। मतलब 20 करोड़ साड़ी का मार्केट है। अब बनारस वाले सोचे कि सोचा है कभी इतना बड़ा मार्केट। आपने कभी सोचा है कि इतना बड़ा मार्केट आपके लिए wait कर रहा है, इंतजार कर रहा है। लेकिन हमने क्या किया, हम जितना कर सकते थे उतना किया। जितना जिसके पास पहुंचा उतना पहुंचा फिर बाकी लोगों ने क्या किया आर्टिफिशल माल जहां से मिलता था वो ले लिया। हम इस Production quantum को इतना बढ़ाए, ताकि भारत के हर परिवार की need है, हर परिवार एक पीढ़ी में जितनी बेटियां है उतनी ज्यादा साडि़यां खरीदने की इच्छा रखता ही रखता है। यानी आपका मार्केट assured मार्केट है और जिनका assured मार्केट हो उनका काम यही होता है कि उस कस्टमर को कैसे बनाए रखे और बनाए रखने को तरीका होता है आपकी क्वालिटी, आपके डिजाइन, आपकी सर्विस, आपका ये परंपराएं। और उन कामों को करने के लिए आज जो Trade Facilitation जो बन रहा है जमीन की अगर लागत जोड़ दे तो यह शायद 500 करोड़ का प्रोजेक्ट हो जाएगा। लेकिन अगर जमीन की लागत में न गिनू तो भी आज बनारस को डेढ़ सौ करोड़ रुपये का एक बड़ा प्रोजेक्ट मिल रहा है। और यह सिर्फ डेढ़ सौ करोड़ का मसला नहीं है। जब ये पूरा सेंटर तैयार हो जाएगा। काशी में आने वाला कोई भी भारतीय या विदेशी टूरिस्ट ऐसा नहीं होगा, जो यहां की मुलाकात नहीं लेगा। यह एक ही जगह पर यहां की शिल्पकृतियां, यहां के टेक्सटाइल की चीजें, जो यहां की विरासत है, उस विरासत को एक जगह पर प्राप्त न कर सके ऐसा कोई भी टूरिस्ट नहीं होगा। वो पूजा-पाठ के लिए आया होगा तो भी आएगा, वो गंगा स्नान के लिए आया होगा तो भी आयेगा। वो पुरातन शहर को देखने के लिए दुनिया के किसी कोने से आया है तो भी जाएगा, यानी आपको घर बैठे गंगा जैसे माहौल होने वाला है। और इसलिए यह Facilitation centre यह आपका काम है कि आप इसमें किस प्रकार से भागीदार बनते है। आप इसमें किस प्रकार से जुड़ते है। आप अपनी चीजों को किस प्रकार से वहां डिसप्ले करते हैं। आप मार्केट को आकर्षित करने के लिए कौन से आधुनिक तरीकों को अपनाते हैं।

आज विश्व में ई-बिजनेस बढ़ता चला जा रहा है। ग्लोबल मार्केट के लिए संभावनाएं, टेक्नोलोजी के कारण बनी है। विदेशों में भी बनारसी शब्द नया नहीं है। मैं एक बार सालों पहले बोस्टन गया था। बोस्टन एक प्रकार से विद्वानों की नगरी मानी जाती है, तो बोस्टन में मुझे दो चीजों का बड़ा आश्चर्य हुआ था। मुझे एक गली में ले गए दिखाने के लिए। बहुत चौड़ी नहीं थी पतली गली थी, अमरीका में जिस प्रकार का रहता है ऐसा नहीं, थोड़ी पतली गली थी। मुझे वहां ले गए और वहां के लोगों ने मुझे बताया कि यह जो पूरा मार्ग है इसे हमारे यहां बनारस स्ट्रीट के रूप में जाना जाता है। तो मैंने कहा कि क्या कारण है यह जरा थोड़ी साकड़ी, संकडी है इसलिए है क्या, narrow है इसलिए है क्या उन्होंने कहा कि नहीं हमारे यहां यूनिवर्सिटी के जो top most टीचर हैं वे सब इस इलाके में रहते हैं और इसलिए यह विद्वानों की जगह है और हम लोग भी उनको यहां गुरू शब्द से बुलाते हैं। तो एक तो उस गली में गुरू शब्द और दूसरा उस गली का नाम बनारस स्ट्रीट। ये मेरे लिए एक ऐसा आनंद और गौरव के पल थे। मैं 15-20 साल पहले की बात बता रहा हूं। आप कल्पना कर सकते हैं कि बनारस शब्द ये शब्द दुनिया के लिए अपरिचित नहीं है। हमारे पूर्वजों के प्रयास से हो चुका है। e-commerce के द्वारा, ये जो विरासत है। इस विरासत का हम एक Strategically use करें, हम Global market को छूने का प्रयास करें और Global requirement के अनुसार हम अपने आप को modify करें। मुझे विश्वास है कि हम इस पूरे उद्योग को और तेज गति से आगे बढ़ा सकते हैं और नई ऊचाइयों पर ले जा सकते हैं।

भारत सरकार ने एक और भी निर्णय किया है कि यह बात सही है कि इस क्षेत्र में काम करने वालों को सरकार की मदद मिलना जरूरी है, आर्थिक सहायता आवश्यक है और इसलिए हमने तय किया है कि जो प्रधानमंत्री जन-धन योजना बनी है, बैंक में खाते खोले हैं अब ये जो लाभार्थी होंगे। इनको उनके खाते में Direct पैसे जमा कराना तय किया है इसलिए न कहीं रुकावट आएगी, न कहीं लीकेज आएगा, न परेशानी होगी और न ही इस मदद को लेने के लिए आपको चक्कर काटना पड़ेगा। ये कैसे Smooth हो व्यवस्थाएं। सामान्य मानवीय और गरीब से गरीब व्यक्ति, उनको इसका लाभ कैसे मिले, उस पर हमारा ध्यान केंद्रित है।

बनारस! किसी एक शहर के पास इतनी सारी विरासत हो। ऐसा शायद दुनिया में कहीं नहीं होगा। कला हो, नृत्य हो, नाट्य हो, संगीत हो, शिल्प हो, मंदिर हो, पवित्रता हो, Spirituality हो, भाईचारा हो। क्या कुछ नहीं है आपके पास। ये ऐसी विरासत है। इसी विरासत को लेकर के हम एक आधुनिक गतिविधि वाला, आधुनिक सोच वाला और पुरातन नींव का गौरव करने वाला अपने बनारस का विकास कैसे करे। मेरे मन में बहुत सारी योजनाएं हैं इस काम को करने के लिए। मैं आज बोलूंगा कम क्योंकि लोगों को लगता है कि मोदी जी आज आएंगे तो ये घोषणा करेंगे, वो घोषणा करेंगे। वो अपने आप ही ये सब कहते रहते हैं। मेरी जिम्मेवारी है कुछ करके दिखाना और जैसे-जैसे काम होता जाएगा, मैं आपको बताता जाऊंगा। करने से पहले बड़ी-बड़ी बातें नहीं करूंगा और मुझे विश्वास है कि आप लोगों के साथ विचार-विमर्श कर-करके जो भी सुझाव आ रहे हैं उन्हें पूरा करने का पूरा प्रयास है।

ये Centre थोड़ा काशी से बाहर बन रहा है। हमारी कोशिश ये थी कि शहर के पास ही ये बन जाए। उत्तर प्रदेश सरकार से उनकी अपनी एक जमीन थी वो उनसे हमने मांगी थी लेकिन वो हमें मिली नहीं इसलिए थोड़ा हमें दूर आना पड़ा लेकिन फिर भी ये विकास भी, बनारस के विकास में एक बड़ी अहम भूमिका निभाएगी।

पिछले हमने एक बहुत बड़ा निर्णय किया है। आपने सुना होगा मैं चुनाव के समय एक बात कहा करता था। सामान्य रूप से राजनेताओं का स्वभाव ये रहता है कि बातों को भुला देना और अगले चुनाव में नई बातें लेकर के आना, ये सामान्य रूप से स्वभाव रहता है लेकिन मैं उस प्रकार की राजनीति में से पैदा नहीं हुआ हूं। मैं तो आपके प्यार के कारण आया हूं और जो कुछ भी मैं बना हूं आपको प्यार के कारण बना हूं लेकिन मेरे मन में मन से लग रहा है हमेशा कि हमें, भारत को विकास करना है तो भारत का सिर्फ पश्चिमी छोर का विकास हो तो ये देश कभी विकास नहीं कर सकता है। भारत के पूर्वी छोर का विकास भी उतना ही आवश्यक है। एक हाथ मजबूत हो और दूसरा हाथ अपंग हो तो शरीर मजबूत नहीं माना जाता। हमारी भारत माता तब मजबूत होती है अगर उसका पश्चिमी छोर मजबूत है तो उसका पूर्वी छोर भी मजबूत होना चाहिए और उसमें चाहे हमारा पूर्वी उत्तर प्रदेश हो, चाहे हमारा झारखंड हो, बिहार हो, असम हो, North-East हो, उड़ीसा हो। ऐसे राज्य हैं कि जहां पर विकास की संभावनाओं को और तलाशना और प्रयास करना ताकि पूरा देश सामान्य रूप से आगे बढ़े और इसलिए मैंने अपना पूरा ध्यान हिंदुस्तान के इस पूर्वी हिस्से पर केंद्रित किया है।

पिछले हफ्ते हमने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया था। मैं नहीं जानता कि यहां के अखबारों में आया कि नहीं आया। उत्तर प्रदेश की उसमें भी खासकर पूर्वी उत्तर प्रदेश की 16 जिलों की बैंकें बंद पड़ी हैं। आर्थिक संकट के कारण, कुछ घोटालों के कारण, कुछ राजनीतिक विकुरीतियों के कारण और उसके कारण नुकसान सबसे ज्यादा मध्यम वर्ग के, निम्न वर्ग के, छोटे किसान इनको हुआ है। इन बैंकों को जिंदा करना बहुत जरूरी था और इन बैंकों में ताकत नहीं थी कि वो अपने आप जिंदा हो जाएं। इनके लिए कोई मदद की आवश्यकता थी तो पिछले सप्ताह भारत सरकार ने करीब 2375 करोड़ रूपए का पैकेज देना तय किया है, घोषित किया है और उसके तहत इस इलाके में 16 बैंक देवरिया, बहराइच, सिद्धार्थनगर, सुल्तानपुर, जौनपुर, हरदोई, बस्ती, बलिया, आजमगढ़, गोरखपुर, फतेहपुर, सीतापुर, वाराणसी, इलाहाबाद, गाजीपुर and फैजाबाद, ये बैंकें जीवित हो जाएंगी और इसके कारण यहां का सामान्य व्यापारी, गरीब व्यक्ति इन बैंकों के साथ अपना व्यवहार शुरू कर सकता है। ये काम जितना तेजी से जल्दी हो और मेरा राज्य सरकार से आग्रह रहेगा कि अगर इन बैंकों को पैसे तो दिए हैं लेकिन बैंकें तब बच पाएंगी और सामान्य मानवी का भला तब होगा जब वहां पर राजनीति को थोड़ा बाहर रखा जाए। एक बार बैंक जिंदा करके सामान्य मानवी का भला करने की दिशा में काम हो और सभी दल के लोग उसमें होंगे। ऐसा नहीं है कि एक ही दल के लोग होंगे। बैंकों के कारोबार में सभी दल के लोग होते हैं। सब मिलकर के, राजनीति से ऊपर उठकर के इन बैंकों की तरफ ध्यान देंगे तो इस पूर्वी उत्तर प्रदेश सबसे ज्यादा जिले इस पूर्वी उत्तर प्रदेश के बैंक के हैं। ये अगर इसके कारण revive हो जाती है तो यहां की आर्थिक गतिविधि में बहुत लाभ होगा।

मैं आज और कल यहां हूं, कई लोगों से मिलने वाला हूं बहुत सी बातें करने वाला हूं और मैं आपको इतना विश्वास दिलाता हूं। आपने मुझ पर भरोसा किया है, आपने मुझे भरपूर प्यार दिया है, मैं आपका हूं, आपके लिए हूं और मुझे ईश्वर ने जितनी बुद्धि क्षमता, शक्ति दी है। पूरा उपयोग इस क्षेत्र के विकास के लिए यहां के गरीबों की भलाई के लिए मैं करता रहूंगा फिर एक बार मैं आपका बहुत-बहुत आभारी हूं।

धन्यवाद।

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This year’s Union Budget reinforces our commitment to sustaining and strengthening economic growth: PM Modi
March 03, 2026
This year’s Union Budget reinforces our commitment to sustaining and strengthening economic growth: PM
Our direction is clear, our resolve is clear,Build more, produce more, connect more, export more: PM
The world is looking for reliable and resilient manufacturing partners, and today India has the opportunity to firmly fulfill this role: PM
India has signed Free Trade Agreements with many countries, a very large door of opportunities has opened for us, and in such a situation, it is our responsibility to never compromise on quality: PM
The Carbon Capture, Utilisation and Storage Mission is an important initiative, integrating sustainability in core business strategy will be essential: PM
The industries that invest in clean technology in time will be able to build better access to new markets in the coming years: PM
A major transformation is happening in the world economy today, as markets now look not only at cost but also at sustainability: PM

नमस्कार !

गत् सप्ताह, बजट वेबिनार सीरीज के पहले वेबिनार का आयोजन हुआ, और मुझे ऐसा बताया गया कि वो बहुत सफल रहा, और बजट प्रावधानों के Implementation को लेकर हर किसी ने काफी उत्तम सुझाव दिए, सबकी सक्रिय भागीदारी का मैं स्वागत करता हूं और आज इस सीरीज के दूसरे वेबिनार का आयोजन हो रहा है। और मुझे बताया गया कि आज हजारों की तादाद में, ढेर सारे विषयों पर अनगिनत लोग अपने सुझाव देने वाले हैं। विषय के जो एक्सपर्ट्स हैं, वे भी हमसे जुड़ने वाले हैं। इतनी बड़ी तादाद में बजट पर चर्चा, ये अपने आप में एक बहुत सफल प्रयोग है। आप सब समय निकाल करके इस वेबिनार में जुड़े। मैं आप सभी का अभिनंदन करता हूं, आपका स्वागत करता हूं। इस वेबिनार की थीम देश की Economic Growth को निरंतर मजबूती देने से जुड़ी हुई है। आज जब भारत अपनी मजबूत economy से पूरे विश्व की उम्मीद बना हुआ है, आज जब ग्लोबल सप्लाई चैन re-shape हो रही है, तब अर्थव्यवस्था की तेज प्रगति विकसित भारत का भी बहुत बड़ा आधार है। हमारी दिशा स्पष्ट है, हमारा संकल्प स्पष्ट है, Build more, produce more, connect more और अब जरूरत है Export more, और निश्चित तौर पर इसमें आज आपके बीच जो मंथन होगा, इस मंथन से जो सुझाव निकलेंगे, उनकी बड़ी भूमिका होगी।

साथियों,

आप सब जानते हैं, मैन्युफैक्चरिंग, लॉजिस्टिक्स, हमारे MSME's, लघु उद्योग, कुटीर उद्योग, इतना ही नहीं, हमारे छोटे-बड़े शहर, ये अर्थव्यवस्था के पिलर्स के तौर पर दिखने में तो अलग-अलग लगते हैं, लेकिन वे सभी interconnected हैं। जैसे, मजबूत मैन्युफैक्चरिंग नए अवसर तैयार करती है, और इससे निर्यात में बढ़ोतरी होती है। Competitive MSMEs से flexibility और इनोवेशन को बढ़ावा मिलता है। बेहतर लॉजिस्टिक्स से लागत कम होती है। Well-planned शहर investment और talent दोनों को अपनी ओर खींचते हैं। इन सभी पिलर्स को इस साल के बजट ने बहुत मजबूती दी है।

लेकिन साथियों,

कोई भी दिशा अपने आप परिणाम नहीं बन जाती, जमीन पर बदलाव तब आता है, जब industry, financial institutions, राज्य सरकारें, मिलकर उसे वास्तविकता बनाते हैं। मेरी अपेक्षा है, इस वेबिनार में आप सभी अपने मंथन में कुछ विषयों को जरूर प्राथमिकता दें, जैसे मैन्युफैक्चरिंग और प्रॉडक्शन, ये कैसे बढ़े, Cost structure को कैसे कंपटीटिव बनाया जा सकता है, निवेश का प्रवाह कैसे तेज हो, और विकास कैसे देश के कोने-कोने तक पहुंचे। इस दिशा में आपके सुझाव बहुत अहम साबित होंगे।

साथियों,

मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में आज देश कोर इंडस्ट्रियल क्षमताओं को मजबूत कर रहा है। और इस मार्ग में जो चुनौतियां हैं, उन्हें भी दूर किया जा रहा है। Dedicated Rare Earth Corridors, कंटेनर मैन्युफैक्चरिंग, ऐसे सेक्टर्स पर फोकस करके हम अपने ट्रेड इकोसिस्टम को मजबूत करने का प्रयास कर रहे हैं। बजट में बायोफार्मा शक्ति मिशन की घोषणा भी की गई है। इस मिशन का उद्देश्य है, भारत को biologics और next-generation थेरेपीज के क्षेत्र में ग्लोबल हब बनाना। हम Advanced Biopharma Research और मैन्युफैक्चरिंग में लीडरशिप की ओर बढ़ना चाहते हैं।

साथियों,

आज दुनिया विश्वसनीय और resilient manufacturing partners की तलाश में है। भारत के पास यह अवसर है कि वह इस भूमिका को मजबूती से निभाए। इसके लिए आप सभी स्टेकहोल्डर्स को बहुत आत्मविश्वास के साथ निवेश करना होगा, नई टेक्नोलॉजी अपनानी होगी और रिसर्च में जो कंजूसी करते हैं ना, वो जमाना चला गया, अब हमें रिसर्च में बड़ा इनवेस्टमेंट करना होगा, और ग्लोबल स्टैंडर्ड के अनुरूप क्वालिटी भी सुनिश्चित करनी होगी, और मैं बार-बार कहता हूं कि अब हमें आगे बढ़ने के जब अवसर आए हैं, तो हमारा एक ही मंत्र होना चाहिए, क्वालिटी-क्वालिटी-क्वालिटी।

साथियों,

भारत ने बहुत सारे देशों के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट किए हैं। हमारे लिए अवसरों का, यानि अवसरों का बहुत बड़ा द्वार खुला है। ऐसे में हमारी ज़िम्मेदारी है कि हम क्वालिटी पर कभी भी समझौता ना करें, अगर किसी एक चीज पर सबसे ज्यादा ताकत, बुद्धि, शक्ति, समझ लगानी है, तो हमें क्वालिटी पर बहुत ज्यादा जोर देना चाहिए। हमारे प्रोडक्ट्स की क्वालिटी ग्लोबल स्टैंडर्ड, इतना ही नहीं, उससे भी बेहतर हो। और इसके लिए हमें दूसरे देशों की जरूरतों को, वहां के लोगों की अपेक्षाओं को भी, उसका अध्ययन करना पड़ेगा, रिसर्च करनी पड़ेगी, उसे समझना होगा। हमें दूसरे देशों के लोगों की पसंद और उनके कंफर्ट को स्टडी करना, ये सबसे बड़ी आवश्यकता है, और रिसर्च करनी चाहिए। मान लीजिए कोई छोटा पुर्जा मांगता है, और वो बहुत बड़ा जहाज बना रहा है, लेकिन हम पुर्जे में चलो भेज दो, क्या है? तो कौन लेगा आपका पुर्जा? भले आपके लिए वह छोटा पुर्जा है, लेकिन उसकी एक बहुत बड़ी जो मैन्युफैक्चरिंग की यूनिट है, उसमें बहुत बड़ा महत्व रखता है। और इसलिए आज दुनिया में हमारे लिए क्वालिटी ही इस कंपिटिटिव वर्ल्ड के अंदर सुनहरा अवसर बना देती है। हमें उनके हिसाब से यूजर फ्रेंडली प्रोडक्ट बनाने होंगे। तभी हम उन अवसरों का लाभ उठा पाएंगे, और जो फ्री ट्रेड एग्रीमेंट तैयार हो चुका है, अब ये विकास का महामार्ग आपके लिए तैयार है। मैं उम्मीद करता हूं कि इस वेबिनार में इस विषय पर फोकस करते हुए भी आप सब जरूर चर्चा करेंगे।

 

साथियों,

हमने MSME classification में जो Reforms किए, उसका व्यापक प्रभाव दिख रहा है। इससे enterprises का ये डर खत्म हुआ है कि वो अपना विस्तार करेंगे, तो उन्हें सरकार की ओर से मिलने वाले फायदे बंद हो जाएंगे। क्रेडिट तक MSME's की आसान पहुंच बनाने, टेक्नोलॉजी अपग्रेडेशन को बढ़ावा देने और कपैसिटी बिल्डिंग की दिशा में लगातार प्रयास हुए हैं।

लेकिन साथियों,

इन प्रयासों का असर तभी दिखाई देगा, जब MSMEs ज्यादा से ज्यादा कंपटीशन में उतरेंगे, और विजयी होने का लक्ष्य लेकर उतरेंगे। अब समय है कि MSMEs अपनी प्रोडक्टिविटी और बढ़ाएं, क्वालिटी स्टैंडर्ड्स को ऊंचा करें, डिजिटल प्रोसेस और मजबूत वैल्यू चैन से जुड़ें। इस दिशा में, इस वेबिनार में आपके सुझाव बहुत अहम होंगे।

साथियों,

इंफ्रास्ट्रक्चर और लॉजिस्टिक्स हमारी growth strategy के कोर पिलर्स हैं। इस वर्ष के बजट में रिकॉर्ड कैपिटल एक्सपेंडिचर का प्रस्ताव है। High-capacity transport systems का निर्माण, रेलवे, हाइवे, पोर्ट, एयरपोर्ट, वाटरवे के बीच बेहतर तालमेल, अलग-अलग फ्रेट कॉरिडोर और मल्टी-मोडल कनेक्टिविटी का विस्तार, ये सभी कदम खर्च कम करने और efficiency improve करने के लिए आवश्यक है। इसलिए, नए वाटरवेज, शिप रिपेयर फैसिलिटी और Regional Centres of Excellence हमारे लॉजिस्टिक इकोसिस्टम को मजबूत करेंगे। सात नए हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर विकास के ग्रोथ कनेक्टर बनने वाले हैं। लेकिन आप भी जानते हैं, इस इंफ्रास्ट्रक्चर का वास्तविक लाभ तभी मिलेगा, जब उद्योग और निवेशक अपनी रणनीतियों को इस विजन के अनुरूप में ढालेंगे। ये रणनीतियां क्या होगी, इस पर भी आपको विस्तार से चर्चा करनी चाहिए, और मुझे पूरा विश्वास है कि आप जरूर इन बातों पर ध्यान देंगे।

 

साथियों,

भारत की विकास यात्रा में अर्बनाइजेशन, शहरीकरण का भी बहुत अहम रोल है। भारत की future growth इस बात पर निर्भर करेगी कि हम अपने शहरों को कितना effectively plan और manage करते हैं। हमारे Tier-II और Tier-III शहर, नए growth anchors कैसे बनें, इसके लिए भी इस बजट वेबिनार में आपके सुझाव बहुत अहम होंगे।

साथियों,

आज दुनिया की अर्थव्यवस्था में एक बड़ा परिवर्तन चल रहा है। बाजार अब केवल लागत नहीं देखते हैं, वे sustainability भी देखते हैं। इस दिशा में Carbon Capture, Utilisation and Storage Mission एक महत्वपूर्ण पहल है। अब sustainability उसको आपको core business strategy का हिस्सा बनाना ही होगा। जो उद्योग समय रहते क्लीन टेक्नोलॉजी में निवेश करेंगे, वे आने वाले वर्षों में नए-नए बाजारों तक बेहतर पहुंच बना पाएंगे। इस साल बजट ने नई दिशा दी है। मेरा आग्रह है कि उद्योग, निवेशक और विभिन्न संस्थान मिलकर इस पर आगे बढ़ें।

साथियों,

विकसित भारत का लक्ष्य collective ownership से ही हासिल किया जा सकता है। ये बजट वेबिनार भी सिर्फ discussion का प्लेटफॉर्म ना बने, सिर्फ अपने ज्ञान को हम बटोरते रहे, ऐसा नहीं होना चाहिए, बल्कि इसमें collective ownership दिखे, ये बहुत जरूरी है। बजट ने framework दिया है, अब आपको मिलकर momentum पैदा करना है। आपको हमारे प्रयासों में सहभागी बनना है। आपका हर सुझाव, हर अनुभव जमीन पर बेहतरीन नतीजें लाने की क्षमता रखता है। आपके सुझाव देश की प्रगति में माइलस्टोन बनें, इसी विश्वास के साथ आपका बहुत-बहुत धन्यवाद।

नमस्कार !