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मंच पर विराजमान राज्यपाल, श्रीमान राम नाइक जी, केंद्र सरकार में मेरे साथी मंत्री श्रीमान गंगवार जी, उपस्थित सभी वरिष्ठ महानुभाव भाईयों और बहनों...

ये सिक्योरिटी वालों ने जो पर्दें बंद कर दिये बगल में थोड़ा-थोड़ा खोल दो। थोड़ा-थोड़ा खोल कर रखो ताकि हवा आए अंदर, मुझे भी कुछ दिखाई दे। यहां तो कुछ दिखता ही नहीं मुझे। ये पीछे भी जो सिक्योरिटी वाले है जरा खोल दिजिए पर्दें क्या जाता है आपका। अंदर बैठे हुए लोगों को थोड़ी हवा भी मिल जाए। उनको जरा टेंशन रहता है न सिक्योरिटी का।

मैं उत्तर प्रदेश के मंत्री महोदय श्रीमान अहमद हसन जी विशेष रूप से आज उपस्थित रहे। मैं उनका आभार व्यक्त करता हूं। मैं आज यहां अपनों के बीच आया हूं। अब सरकारी व्यवस्था ऐसी रहती है कि व्यवस्था के कारण लगता है कि हम कोई मंच पर बैठने वाले व्यक्ति हैं और आप लोग उधर बैठने वाले व्यक्ति हो। लेकिन मेरे केस में वो नहीं है। मैंने बनारस को अपना एक ऐसा स्थान के रूप में पाया है कि जिस बनारस ने मुझे अपना बना लिया है और एक प्रकार से अपनों के बीच में आने का एक आनंद अलग होता है। कुछ समय पूर्व मैंने आना तय किया था लेकिन आंध्र में एक बहुत ही बड़ा cyclone आया उसके कारण मेरा वहां जाना जरूरी था उसके कारण मैं यहां नहीं आ पाया फिर कार्यक्रम में थोड़ा बदलाव हुआ। लेकिन मैं आज दो दिन के लिए आपके बीच हूं। आपके प्रतिनिधि के रूप में हूं। आपके सुख-दुख के साथी के रूप में हूं। आपके सेवक के रूप में आया हूं।

हमारे देश में कृषि क्षेत्र के बाद सबसे अधिक रोजगार देने वाला अगर कोई क्षेत्र है तो वो टैक्सटाइल है और कम पूंजी से ज्यादा लोग अपनी आजीविका चला सकते है। यह ऐसा क्षेत्र है कि जिसमें मजदूर और मालिक के बीच में खाई संभव ही नहीं है, दीवार संभव ही नहीं है, ऐसा क्षेत्र है। खेती में भी कभी अगर किसान मालिक है और मजदूर काम करता है तो एक खाई नजर आती है। यह एक क्षेत्र है कि जहां पर हैंडलुम हो, पावरलुम हो, उसका मालिक हो, उसके काम करने वाले और कोई बाहर के लोग हो, लेकिन पूरा माहौल एक परिवार के जैसे होता है। न कोई जाति बीच में होती है न कोई सम्प्रदाय होता है। एक अपनेपन का माहौल होता है और जैसे कपड़े के तानेबाने बुने जाते हैं वैसे ही ये बुनने वाले समाज के भी तानेबाने बुनते रहते हैं। यह गंगा-जमुना तहजीब की बात हो रही है ना। वो यही समाजिक ताना-बाना है। जो हमें हर हथकरघे से हर पावरलुम के साथ जुड़ा हुआ नजर आता है। और यह भारत की भी विरासत है। बनारस की विशेष विरासत है, लेकिन अगर समय रहते इन क्षेत्रों में अगर बदलाव नहीं आता है। इन क्षेत्रों में विकास नहीं होता है तो आप काल भय हो जाते हैं। ये क्षेत्र ऐसे है कि जिसमें एक तो customer को संतोष देना होता है। अब customer के पास आधुनिक युग में रोज नई variety आती है। वो पुरानी variety पर जाना नहीं चाहता। उसे नई variety चाहिए, नई product चाहिए। नया डिजाइन चाहिए, नया fabric चाहिए, नया finishing चाहिए, नया पैकेजिंग चाहिए, नया colour चाहिए। और जो यह बदलाव को समझ नहीं पाता है और अपना सालों पुराना काम करता रहता है। तो उसके, निश्चित जो परिवार रहते हैं वो तो उसके साथ खरीदी करते रहते है। लेकिन न उसका विस्तार होता है न उसका कोई बढ़ावा होता है और इसलिए अगर भारत में यह एक उद्योग ऐसा है जो सर्वाधिक लोगों को रोजगार देता है, गरीब लोगों को रोजगार देता है, हमारे जुलाहे परिवार को रोजगार देता है और समाज के सब वर्ग के लोग इसमें जुड़े हुए होते हैं। उसे भी दुनिया के साथ ताल मिलाने वाला बनाना पड़ता है। आधुनिक जो modernisation हो रहा है उसके सामने वो टिक सके यह व्यवस्था विकसित करना आवश्यक होती है। और इसलिए सिर्फ रुपये दें, पमपिंग करे इससे काम बनता नहीं है। एक comprehensive vision के साथ इस काम को आगे बढ़ाना पढ़ता है और आज उसका शुभारंभ बनारस की धरती से हो रहा है। सिर्फ रुपये पैसों से, कोई बैंक लोन दें दे। इसी से काम चल जाएगा ऐसा नहीं है और इसलिए यह आवश्यक है कि उसके हर छोटे विषय को कैसे Develop किया जाए। आज समय कह सकता है कुछ लोग प्रयोग भी कर रहे है कि computer डिजाइनिंग के द्वारा weaving का काम आसानी से किया जा सकता है। स्पीड भी बढ़ाई जा सकती है और wastage कम से कम हो यह संभावना बनी है। हम उस दिशा में कैसे आगे बढ़े। Technology up gradation कैसे करे। उसी प्रकार से human resource development यह जरूरी नहीं है कि हथकरघा और पावरलुम चलाने वाले हमारे कारीगरों को NIFT में यह NID में जाकर के पढ़ेंगे और बड़ी डिग्री लेकर आएंगे तब काम करेंगे। यह जरूरी नहीं है। यह ज्ञान उनको आसानी से उनके यहां भी दिया जा सकता है, उनके स्थान पर दिया जा सकता है और सरकार की कोशिश यह है कि डिजाइनिंग के क्षेत्र में हमारे इस क्षेत्र में जुड़े हुए निचले तबके के लोग भी अगर उनके साथ जुड़ जाते हैं उनको इसका लाभ मिलता है, तो प्रोडक्शन में, स्पीड में, क्वालिटी में, डिजाइन में एकदम से improvement लाने के संभावना रहती है। और इसलिए सरकार ने जो पूरी योजना को लागू करने का प्रयास किया है, उसमें एक तो Technology up gradation हो। हम दुनिया का मुकाबला कर सके भले ही वो Handloom हो या Power loom हो। हम दुनिया का मुकाबला कर सके इस प्रकार से Technology up gradation की दिशा में रिसर्च हो। उस Technology के अनुकुल यंत्रों का Manufacturing हो, वो उनको प्राप्त हो। उस दिशा में प्रयास करने की आवश्यकता है। और सरकार ने उस दिशा में काम उठाया है। दूसरा जैसे मैंने कहा कि Human Resource Development आधुनिक से आधुनिक डिजाइन क्योंकि जो इस क्षेत्र में काम कर रहा है, उसको स्वभावगत मालूम है। यह बदलाव करूंगा तो अच्छा लगेगा, लेकिन अगर उसको scientific ढंग से जब train किया जाए, काम करते-करते train किया जाए। जरूरी नहीं कि बहुत बड़े-बड़े कॉलेज में जाना पड़े। वो अपने यहां रहकर भी इन चीजों को सीख सखता है। उस काम को हम आगे बढ़ाना चाहते है।

तीसरी बात है हमारी नई पीढ़ी। हमारी नई पीढ़ी इस क्षेत्र में मजबूरी के कारण नहीं, गौरव के साथ कैसे जुड़े इस विषय में हमने गंभीरता से सोचना चाहिए। अब यह तो संभव नहीं कि कोई पेट भूखा रखकर के नई-नई योजनाओं से जुड़ता रहेगा। उनकी income के संबंध में assured व्यवस्था होनी चाहिए, गारंटी होनी चाहिए। लेकिन हम यह समझे आज पूरे हिंदुस्तान भर में कोई महिला ऐसी नहीं होगी, कोई महिला। गरीब से गरीब क्यों न हो, अनपढ़ से अनपढ़ क्यों न हो। जिसके कान में ‘बनारसी साड़ी’ ये शब्द न पड़ा हो। अब आज जो यहां लोग हैं उनको पूछा जाए कि यह बात पहुंचाने में भई तुम्हारा क्या Contribution है। तो आज जो लोग यहां बैठे हैं, उनका कोई विशेष Contribution नहीं है। लेकिन हमारे पूर्वजों ने इस काम को जिस साधना के साथ किया, जिस पवित्रता के साथ किया और ऊंचाई देखिए हमारे पूर्वजों ने एक ऐसी नींव रखी है कि हर मां अपनी बेटी की शादी जो जीवन का सबसे अमूल्य अवसर होता है, उसके मन का एक सपना रहता है कि बेटी को शादी में बनारसी साड़ी पहनाए। यह कितनी बड़ी विरासत हमारे पास है। न हमें कोई Marketing करने की जरूरत है क्योंकि लोगों को मालूम है। आप कल्पना कर सकते है कि भारत की सवा सौ करोड़ जनसंख्या है। आने वाले कुछ वर्षों में कम से कम 20 करोड़ से ज्यादा बेटियों की शादी होगी। मतलब 20 करोड़ साड़ी का मार्केट है। अब बनारस वाले सोचे कि सोचा है कभी इतना बड़ा मार्केट। आपने कभी सोचा है कि इतना बड़ा मार्केट आपके लिए wait कर रहा है, इंतजार कर रहा है। लेकिन हमने क्या किया, हम जितना कर सकते थे उतना किया। जितना जिसके पास पहुंचा उतना पहुंचा फिर बाकी लोगों ने क्या किया आर्टिफिशल माल जहां से मिलता था वो ले लिया। हम इस Production quantum को इतना बढ़ाए, ताकि भारत के हर परिवार की need है, हर परिवार एक पीढ़ी में जितनी बेटियां है उतनी ज्यादा साडि़यां खरीदने की इच्छा रखता ही रखता है। यानी आपका मार्केट assured मार्केट है और जिनका assured मार्केट हो उनका काम यही होता है कि उस कस्टमर को कैसे बनाए रखे और बनाए रखने को तरीका होता है आपकी क्वालिटी, आपके डिजाइन, आपकी सर्विस, आपका ये परंपराएं। और उन कामों को करने के लिए आज जो Trade Facilitation जो बन रहा है जमीन की अगर लागत जोड़ दे तो यह शायद 500 करोड़ का प्रोजेक्ट हो जाएगा। लेकिन अगर जमीन की लागत में न गिनू तो भी आज बनारस को डेढ़ सौ करोड़ रुपये का एक बड़ा प्रोजेक्ट मिल रहा है। और यह सिर्फ डेढ़ सौ करोड़ का मसला नहीं है। जब ये पूरा सेंटर तैयार हो जाएगा। काशी में आने वाला कोई भी भारतीय या विदेशी टूरिस्ट ऐसा नहीं होगा, जो यहां की मुलाकात नहीं लेगा। यह एक ही जगह पर यहां की शिल्पकृतियां, यहां के टेक्सटाइल की चीजें, जो यहां की विरासत है, उस विरासत को एक जगह पर प्राप्त न कर सके ऐसा कोई भी टूरिस्ट नहीं होगा। वो पूजा-पाठ के लिए आया होगा तो भी आएगा, वो गंगा स्नान के लिए आया होगा तो भी आयेगा। वो पुरातन शहर को देखने के लिए दुनिया के किसी कोने से आया है तो भी जाएगा, यानी आपको घर बैठे गंगा जैसे माहौल होने वाला है। और इसलिए यह Facilitation centre यह आपका काम है कि आप इसमें किस प्रकार से भागीदार बनते है। आप इसमें किस प्रकार से जुड़ते है। आप अपनी चीजों को किस प्रकार से वहां डिसप्ले करते हैं। आप मार्केट को आकर्षित करने के लिए कौन से आधुनिक तरीकों को अपनाते हैं।

आज विश्व में ई-बिजनेस बढ़ता चला जा रहा है। ग्लोबल मार्केट के लिए संभावनाएं, टेक्नोलोजी के कारण बनी है। विदेशों में भी बनारसी शब्द नया नहीं है। मैं एक बार सालों पहले बोस्टन गया था। बोस्टन एक प्रकार से विद्वानों की नगरी मानी जाती है, तो बोस्टन में मुझे दो चीजों का बड़ा आश्चर्य हुआ था। मुझे एक गली में ले गए दिखाने के लिए। बहुत चौड़ी नहीं थी पतली गली थी, अमरीका में जिस प्रकार का रहता है ऐसा नहीं, थोड़ी पतली गली थी। मुझे वहां ले गए और वहां के लोगों ने मुझे बताया कि यह जो पूरा मार्ग है इसे हमारे यहां बनारस स्ट्रीट के रूप में जाना जाता है। तो मैंने कहा कि क्या कारण है यह जरा थोड़ी साकड़ी, संकडी है इसलिए है क्या, narrow है इसलिए है क्या उन्होंने कहा कि नहीं हमारे यहां यूनिवर्सिटी के जो top most टीचर हैं वे सब इस इलाके में रहते हैं और इसलिए यह विद्वानों की जगह है और हम लोग भी उनको यहां गुरू शब्द से बुलाते हैं। तो एक तो उस गली में गुरू शब्द और दूसरा उस गली का नाम बनारस स्ट्रीट। ये मेरे लिए एक ऐसा आनंद और गौरव के पल थे। मैं 15-20 साल पहले की बात बता रहा हूं। आप कल्पना कर सकते हैं कि बनारस शब्द ये शब्द दुनिया के लिए अपरिचित नहीं है। हमारे पूर्वजों के प्रयास से हो चुका है। e-commerce के द्वारा, ये जो विरासत है। इस विरासत का हम एक Strategically use करें, हम Global market को छूने का प्रयास करें और Global requirement के अनुसार हम अपने आप को modify करें। मुझे विश्वास है कि हम इस पूरे उद्योग को और तेज गति से आगे बढ़ा सकते हैं और नई ऊचाइयों पर ले जा सकते हैं।

भारत सरकार ने एक और भी निर्णय किया है कि यह बात सही है कि इस क्षेत्र में काम करने वालों को सरकार की मदद मिलना जरूरी है, आर्थिक सहायता आवश्यक है और इसलिए हमने तय किया है कि जो प्रधानमंत्री जन-धन योजना बनी है, बैंक में खाते खोले हैं अब ये जो लाभार्थी होंगे। इनको उनके खाते में Direct पैसे जमा कराना तय किया है इसलिए न कहीं रुकावट आएगी, न कहीं लीकेज आएगा, न परेशानी होगी और न ही इस मदद को लेने के लिए आपको चक्कर काटना पड़ेगा। ये कैसे Smooth हो व्यवस्थाएं। सामान्य मानवीय और गरीब से गरीब व्यक्ति, उनको इसका लाभ कैसे मिले, उस पर हमारा ध्यान केंद्रित है।

बनारस! किसी एक शहर के पास इतनी सारी विरासत हो। ऐसा शायद दुनिया में कहीं नहीं होगा। कला हो, नृत्य हो, नाट्य हो, संगीत हो, शिल्प हो, मंदिर हो, पवित्रता हो, Spirituality हो, भाईचारा हो। क्या कुछ नहीं है आपके पास। ये ऐसी विरासत है। इसी विरासत को लेकर के हम एक आधुनिक गतिविधि वाला, आधुनिक सोच वाला और पुरातन नींव का गौरव करने वाला अपने बनारस का विकास कैसे करे। मेरे मन में बहुत सारी योजनाएं हैं इस काम को करने के लिए। मैं आज बोलूंगा कम क्योंकि लोगों को लगता है कि मोदी जी आज आएंगे तो ये घोषणा करेंगे, वो घोषणा करेंगे। वो अपने आप ही ये सब कहते रहते हैं। मेरी जिम्मेवारी है कुछ करके दिखाना और जैसे-जैसे काम होता जाएगा, मैं आपको बताता जाऊंगा। करने से पहले बड़ी-बड़ी बातें नहीं करूंगा और मुझे विश्वास है कि आप लोगों के साथ विचार-विमर्श कर-करके जो भी सुझाव आ रहे हैं उन्हें पूरा करने का पूरा प्रयास है।

ये Centre थोड़ा काशी से बाहर बन रहा है। हमारी कोशिश ये थी कि शहर के पास ही ये बन जाए। उत्तर प्रदेश सरकार से उनकी अपनी एक जमीन थी वो उनसे हमने मांगी थी लेकिन वो हमें मिली नहीं इसलिए थोड़ा हमें दूर आना पड़ा लेकिन फिर भी ये विकास भी, बनारस के विकास में एक बड़ी अहम भूमिका निभाएगी।

पिछले हमने एक बहुत बड़ा निर्णय किया है। आपने सुना होगा मैं चुनाव के समय एक बात कहा करता था। सामान्य रूप से राजनेताओं का स्वभाव ये रहता है कि बातों को भुला देना और अगले चुनाव में नई बातें लेकर के आना, ये सामान्य रूप से स्वभाव रहता है लेकिन मैं उस प्रकार की राजनीति में से पैदा नहीं हुआ हूं। मैं तो आपके प्यार के कारण आया हूं और जो कुछ भी मैं बना हूं आपको प्यार के कारण बना हूं लेकिन मेरे मन में मन से लग रहा है हमेशा कि हमें, भारत को विकास करना है तो भारत का सिर्फ पश्चिमी छोर का विकास हो तो ये देश कभी विकास नहीं कर सकता है। भारत के पूर्वी छोर का विकास भी उतना ही आवश्यक है। एक हाथ मजबूत हो और दूसरा हाथ अपंग हो तो शरीर मजबूत नहीं माना जाता। हमारी भारत माता तब मजबूत होती है अगर उसका पश्चिमी छोर मजबूत है तो उसका पूर्वी छोर भी मजबूत होना चाहिए और उसमें चाहे हमारा पूर्वी उत्तर प्रदेश हो, चाहे हमारा झारखंड हो, बिहार हो, असम हो, North-East हो, उड़ीसा हो। ऐसे राज्य हैं कि जहां पर विकास की संभावनाओं को और तलाशना और प्रयास करना ताकि पूरा देश सामान्य रूप से आगे बढ़े और इसलिए मैंने अपना पूरा ध्यान हिंदुस्तान के इस पूर्वी हिस्से पर केंद्रित किया है।

पिछले हफ्ते हमने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया था। मैं नहीं जानता कि यहां के अखबारों में आया कि नहीं आया। उत्तर प्रदेश की उसमें भी खासकर पूर्वी उत्तर प्रदेश की 16 जिलों की बैंकें बंद पड़ी हैं। आर्थिक संकट के कारण, कुछ घोटालों के कारण, कुछ राजनीतिक विकुरीतियों के कारण और उसके कारण नुकसान सबसे ज्यादा मध्यम वर्ग के, निम्न वर्ग के, छोटे किसान इनको हुआ है। इन बैंकों को जिंदा करना बहुत जरूरी था और इन बैंकों में ताकत नहीं थी कि वो अपने आप जिंदा हो जाएं। इनके लिए कोई मदद की आवश्यकता थी तो पिछले सप्ताह भारत सरकार ने करीब 2375 करोड़ रूपए का पैकेज देना तय किया है, घोषित किया है और उसके तहत इस इलाके में 16 बैंक देवरिया, बहराइच, सिद्धार्थनगर, सुल्तानपुर, जौनपुर, हरदोई, बस्ती, बलिया, आजमगढ़, गोरखपुर, फतेहपुर, सीतापुर, वाराणसी, इलाहाबाद, गाजीपुर and फैजाबाद, ये बैंकें जीवित हो जाएंगी और इसके कारण यहां का सामान्य व्यापारी, गरीब व्यक्ति इन बैंकों के साथ अपना व्यवहार शुरू कर सकता है। ये काम जितना तेजी से जल्दी हो और मेरा राज्य सरकार से आग्रह रहेगा कि अगर इन बैंकों को पैसे तो दिए हैं लेकिन बैंकें तब बच पाएंगी और सामान्य मानवी का भला तब होगा जब वहां पर राजनीति को थोड़ा बाहर रखा जाए। एक बार बैंक जिंदा करके सामान्य मानवी का भला करने की दिशा में काम हो और सभी दल के लोग उसमें होंगे। ऐसा नहीं है कि एक ही दल के लोग होंगे। बैंकों के कारोबार में सभी दल के लोग होते हैं। सब मिलकर के, राजनीति से ऊपर उठकर के इन बैंकों की तरफ ध्यान देंगे तो इस पूर्वी उत्तर प्रदेश सबसे ज्यादा जिले इस पूर्वी उत्तर प्रदेश के बैंक के हैं। ये अगर इसके कारण revive हो जाती है तो यहां की आर्थिक गतिविधि में बहुत लाभ होगा।

मैं आज और कल यहां हूं, कई लोगों से मिलने वाला हूं बहुत सी बातें करने वाला हूं और मैं आपको इतना विश्वास दिलाता हूं। आपने मुझ पर भरोसा किया है, आपने मुझे भरपूर प्यार दिया है, मैं आपका हूं, आपके लिए हूं और मुझे ईश्वर ने जितनी बुद्धि क्षमता, शक्ति दी है। पूरा उपयोग इस क्षेत्र के विकास के लिए यहां के गरीबों की भलाई के लिए मैं करता रहूंगा फिर एक बार मैं आपका बहुत-बहुत आभारी हूं।

धन्यवाद।

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Text of PM Modi's Speech at public meeting in Mathurapur, West Bengal
May 16, 2019
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The election results of 23rd May will provide a reality check to the arrogant and repressive regime of Mamata Didi: PM Modi
With renewed supprt from the people, the BJP will make reviving Bengali culture a priority: Prime Minister Modi

 

भारत माता की…जय

भारत माता की…जय

भारत माता की…जय

गंगा के तट पर बसे आप सभी साथियो को गंगा मां के इस बेटे का प्रणाम।

भाइयो और बहनो, 2019 के इस चुनाव अभियान में पूरे देश ने अपने इस सेवक को भरपूर समर्थन दिया है, लेकिन पश्चिम बंगाल के लोग एक विशिष्ट दायित्व निभाने जा रहे हैं। उनका ये सेवक एक मजबूत सरकार बना पाए, बुलंद हौसले वाली सरकार बना पाए, इसीलिए पश्चिम बंगाल कि जनता ने ठान लिया है की वो बीजेपी को 300 सीटें पार कराएगी। भाइयो-बहनो, अभी मैं हेलीपैड से उतरा, मुझे वहां गाड़ी से बाहर निकल कर रोड शो करना पड़ा। जितने लोग मैं यहां देख रहा हूं, इससे 3 गुना ज्यादा वहां हेलीपैड के पास दोनों तरफ खड़े थे। ये आपका अद्भुत प्यार मैं आपका हृदय से आभार व्यक्त करता हूं। ये जो मंच पर चढ़ गए उनको नीचे उतारिए, ये पूरा मंच नीचे गिरेगा। वो लाल शर्ट वाले सज्जन, आप नीचे आइए भैया, जो ऊपर हैं सब नीचे आ जाइए। देखिए आपका कोई भी नुकसान वो मेरा नुकसान है। कृपा करके नीचे आ जाइए। देखिए कभी चोट लग जाएगी तो मुझे बहुत दुख होगा भैया। शाबाश, बहुत समझदार लोग हैं।

बहनो और भाइयो, बीजेपी पर इस विशेष आशीर्वाद के साथ ही बंगाल की जनता, दीदी को लोकतंत्र का मतलब भी समझाने जा रही है। जिस प्रकार दीदी, पश्चिम बंगाल को अपनी और अपने भतीजे की जागीर समझ बैठी है, जिस तरह की हरकतें कर रही है, उसे देश भली-भांति जान गया है।

साथियो, चुनाव प्रचार के दौरान और खासकर बीते 3-4 दिन से यहां जो हो रहा है, वो आप सभी देख रहे हैं। टीएमसी के गुंडों ने जो नर्क यहां बना रखा है, जिस प्रकार की हिंसा यहां फैला रखी है, उसके कारण गणतंत्र बदनाम हुआ है। टीएमसी के इन गुंडों ने जिस प्रकार का तूफान मचा दिया और एक कमरे में बंद जहां ताला लगा हुआ है, वहां पर रात को महान शिक्षाविद्, समाज सुधारक ईश्वर चन्द्र विद्यासागर जी की मूर्ति को तोड़ दिया गया। उस कॉलेज में CCTV कैमरा लगे हुए हैं। क्या कारण है सरकार जैसे नारदा-शारदा के सबूत मिटाए, वैसे इसके सबूत भी मिटाने में लगी है। ये साफ दिखाता है कि वोटबैंक की राजनीति के लिए दीदी किस स्तर पर जा सकती है।  

साथियो, ईश्वर चन्द्र विद्यासागर जी सिर्फ बंगाल के ही नहीं पूरे देश के सपूत थे। उनकी मूर्ति को नुकसान पहुंचाकर, जिन लोगों ने काम किया है, ये पाप किया है मूर्ति को नुकसान पहुंचाने वालों को कड़ी कार्रवाई की जानी, कड़ी से कड़ी सजा होनी चाहिए, ये मेरी मांग है। भाइयो और बहनो, स्वामी विवेकानंद से लेकर श्यामा प्रसाद मुखर्जी तक भारतीय जनता पार्टी के चिंतन को गढ़ने में बंगाल की संस्कृति का बहुत बड़ा योगदान रहा है। बंगाल के गौरव की रक्षा करना, ये भारतीय जनता पार्टी की प्राथमिकता है। आज ईश्वर चन्द्र विद्यासागर जी जहां भी होंगे, वो देख रहे होंगे की कौन सा दल बंगाल के गौरव की रक्षा के लिए लड़ रहा है और कौन घुसपैठियों की रक्षा लिए काम कर रहा है।   

साथियो, ये भाजपा ही है जिसने बंगाल में हो रहे अत्याचार के खिलाफ सबसे पहले आवाज उठाई। यहां दुर्गा पूजा को लेकर दिक्कत है, सरस्वती पूजा को लेकर दिक्कत है, जय श्री राम बोलना भी यहां गुनाह हो गया है। बंगाल की जनता कुछ वर्षों से इन बातों से बहुत ज्यादा परेशान थी। इन विषयों को राष्ट्रीय पटल पर कौन लेकर के आया, कौन सी पार्टी आज बंगाल की आवाज बनी है? इसका जवाब एक ही है और वो है भारतीय जनता पार्टी।

भाइयो और बहनो, हार की हताशा दीदी को इस तरह से डरा रही है कि वो सरेआम धमकियों पर उतर आई है। आज सुबह-सुबह ही मुझे जेल भेजने की धमकी दी गई है। कल मीडिया में मैंने देखा कि दीदी ने बीजेपी के दफ्तर पर, बीजेपी के ऑफिस पर कब्जा करने की भी धमकी दी है। दीदी, बीजेपी के कार्यकर्ताओं के घर पर कब्जा करने की भी धमकी दे रही है। दीदी, जनता के बीच आपकी जो पहचान बनी है, उसका कारण जमीन और प्रॉपर्टी के लिए आपकी अंधी दौड़ है। इसी मानसिकता से अब आपको बीजेपी के कार्यालयों को भी हड़पना है, इसी मानसिकता से पश्चिम बंगाल आपसे परेशान है और आपका बोरिया-बिस्तर पैक करने की ठान चुका है। ममता दीदी, चुनाव में जय और पराजय तो आता जाता रहता है। ये लोकतंत्र का हिस्सा है। कभी इसी बंगाल की जनता ने आपको इतना स्नेह दिया था, आज वही जनता आज खुले आम आपको हटाना चाहती है। भयभीत मत होइए दीदी, ये बंगाल की सच्चाई को स्वीकार कीजिए।

भाइयो और बहनो, दीदी को पश्चिम बंगाल के सामान्य मानवी की जरा भी चिंता नहीं है, सिर्फ और सिर्फ सत्ता का अहंकार है। वो भारत के प्रधानमंत्री को, अपना प्रधानमंत्री नहीं मानती, लेकिन पाकिस्तानी प्रधानमंत्री की प्रशंसा करते वो थकती नहीं हैं। वो बंगाल के बच्चों को, बंगाल की बेटियों को बात-बात पर जेल में ठूंस देती है, लेकिन घुसपैठियों और तस्करों को उन्होंने खुली छूट दी है। दीदी के गुंडे बीजेपी के कार्यकर्ताओं पर हमले करते हैं, उन्हें फांसी पर लटका देते हैं, लेकिन दीदी ऐसा करने वालों को और आगे बढ़ाती है। आखिर किस दिशा में बंगाल को वो ले जाना चाह रही है।

भाइयो और बहनो, अपने भतीजे के साथ मिलकर इन्होंने टोलाबाजों और तस्करों का एक सिंडिकेट चला रखा है। जिसने बंगाली मानुष को परेशान कर के रखा है और पश्चिम बंगाल के विकास पर स्पीड ब्रेकर लगा रखा है।

भाइयो और बहनो, पूरे देश में किसानों के बैंक के खाते में मोदी सरकार सीधे पैसे जमा कर रही है, लेकिन दीदी की सरकार सोई हुई है। पूरे देश में गरीब परिवारों को हर वर्ष पांच लाख रुपए तक के मुफ्त इलाज की सुविधा मिली है, लेकिन दीदी ने उसमें भी यहां के गरीबों को वंचित कर दिया है।  

भाइयो और बहनो, गरीबों की जिंदगी आसान बनाने वाले हर काम में दीदी लूट का रास्ता निकाल रही है। दिल्ली से आपका ये सेवक, जो आपके लिए मदद भेजता है उसमें वो अपना स्टीकर लगाती है ताकि आसानी से टोलाबाजी की जा सके। भाइयो बहनो, ये जगह बहुत छोटी है, आप आगे आने की कोशिश मत कीजिए, आपके प्यार के लिए मैं आपका आभारी हूं। आप एक दूसरे को धक्का मत लगाइये। देखिए कुछ माताएं छोटे बच्चे भी लेकर आयी हैं, उनको परेशानी नहीं होनी चाहिए। आप इतना प्यार दे रहे हो, इतना आशीर्वाद दे रहे हो, बस थोड़ी धीरज रखो।  

भाइयो बहनो, सस्ते राशन की योजना हो, घर बनाने की योजना, सड़क बनाने की योजना और सभी केंद्रीय योजनाओं पर दीदी ने अपना स्टीकर लगा दिया है। अरे! स्टीकर दीदी, अपना स्टीकर लगाएं इसे मुझे कोई परेशानी नहीं है, लेकिन जरा काम तो ढंग से करिए, काम तो जरा देश के लिए करिए। ये देश का काम है, गरीबों का है इतना तो ईमानदारी रखिए, अरे आपको भी पुण्य मिलेगा।

भाइयो और बहनो, पूरे देश में गांव की सड़कें तेज गति से बन रही है लेकिन पश्चिम बंगाल में हालत खराब है। गंगा जी पर पुल तक यहां की सरकार नहीं बना पा रही है, जबकि हमारा प्रयास की है देश के समुद्री किनारों की कनेक्टिविटी सशक्त हो। इसके लिए देश भर में सागरमाला के तहत बंदरगाहों को सड़कों से जोड़ा जा रहा है। गंगा जी पर जैसे हल्दिया से वाराणसी तक जल मार्ग को विकसित किया गया है, वैसे ही दूसरी नदियों के जल मार्ग पर भी काम चल रहा है। इससे समुद्री किनारे पर बसे क्षेत्रों को लाभ मिलेगा, यहां रोजगार के अवसर पैदा होंगे।

भाइयो और बहनो, हमारे मछुआरे साथियो की सुविधा के लिए हम व्यापक काम कर रहे हैं। हमने घोषणा की है कि मछुआरों के लिए एक अलग मंत्रालय विभाग बनाया जाएगा। अभी तक पशुपालन विभाग के तहत ही मछली के कारोबार का संचालन होता था। अब अलग विभाग ये सारे काम करेगा। इतना ही नहीं अब मछुआरों के लिए भी किसानों की तरह किसान क्रेडिट कार्ड की सुविधा दी गई है।   

साथियो, एक तरफ हम लोगों का जीवन आसान बनाने में जुटे हैं, वही तृणमूल अपनी गुंडागर्दी के दम पर आपका जीवन मुश्किल बना रही है, इस गोरख धंधे को बंद करना जरूरी है। आपको एक ही बात याद रखनी है, चुप चाप-कमल छाप

 

मेरे साथ एक नारा बोलेंगे, आप सब मेरे साथ एक नारा बोलेंगे, सब के सब बोलेंगे, सब के सब बोलेंगे? मैं कहूंगा चुप चाप आप कहेंगे कमल छाप। चुप चाप...कमल छाप, चुप चाप...कमल छाप, चुप चाप...कमल छाप, चुप चाप...कमल छाप, चुप चाप...कमल छाप और दूसरा नारा बुलवाता हूं, बूथ-बूथ से टीएमसी साफ, बूथ-बूथ से टीएमसी साफ। बूथ=-बूथ से...टीएमसी साफ, बूथ-बूथ से...टीएमसी साफ, बूथ-बूथ से...टीएमसी साफ, बूथ-बूथ से...टीएमसी साफ। चुप चाप...कमल छाप, चुप चाप...कमल छाप, चुप चाप...कमल छाप।   

भाइयो-बहनो, कमल छाप पर पड़ा हर वोट मोदी के खाते में जाएगा। भाइयो-बहनो, इनकी सरकार, उनके गुंडे, उनका जुल्म, आपको कुछ नहीं कर सकता। बूथ में जाइए और किसी और को बटन मत दबाने देना, आप खुद अपनी उंगली से कमल के निशान पर बटन दबाना। मतदान करने जाएंगे, सब के सब जाएंगे, भारी मतदान करेंगे, भाजपा को जिताएंगे?

मैं आपका बहुत-बहुत आभारी हूं। आप इतनी बड़ी मात्रा में आशीर्वाद देने आए, अब दोनों हाथ ऊपर कर के मुट्ठी बंद कर के मेरे साथ बोलिए

भारत माता की...जय

भारत माता की...जय

भारत माता की...जय

बहुत बहुत धन्यवाद।