सर जगन्‍नाथ जी, मारीशस सरकार के मंत्रीपरिषद के सभी महानुभाव, सभी वरिष्‍ठ नागरिक भाईयों और बहनों,

सर जगन्‍नाथ जी ने कहा कि छोटे भारत में भारत के प्रधानमंत्री का स्‍वागत करता हूं। ये लघू भारत शब्‍द सूनते ही पूरे तन मन में एक वाइब्रेशन की अनुभूति होती है, एक अपनेपन की अनुभूति होती है। एक प्रकार से 1.2 मिलियन के देश को 1.2 बिलियन का देश गले लगाने आया है। ये अपने आप में हमारी सांस्‍कृतिक विरासत है। हम कल्‍पना कर सकते हैं कि सौ डेढ़ सौ साल पहले हमारे पूर्वज यहां श्रमिक के रूप में आए और साथ में तुलसीदासकृत रामायण, हनुमान चालीसा और हिंदी भाषा को ले करके आए। इन सौ डेढ़ सौ साल में अगर ये तीन चीज़ें न होती और बाकी सब होता, तो आप कहां होते और मैं कहां होता, इसका हम अंदाज कर सकते हैं। इसे हमने बचाए भी रखा है, बनाए भी रखा है और जोड़ करके भी रखा है।

684-16 PM in Mauritius At Bhawan Nirmaan Aarambh, World Hindi Secretariat (2)

1975 में, जब नागपुर में विश्‍व हिंदी सम्‍मेलन हुआ तब श्री शिवसागर जी वहां आए थे और आपने उस समय प्रस्‍ताव रखा था, एक विश्‍व हिंदी सचिवालय होना चाहिए। 1975 में इस विचार को स्‍वीकार किया गया था, लेकिन उस बात को आगे बढ़ते-बढ़ते सालों बीत गए। और मैं मानता हूं कि आज विश्‍व सचिवालय की एक नई इमारत का शिलान्‍यास हो रहा है, तो उसकी खुशी विश्‍वभर में फैले हिंदी प्रेमियों को तो होगी ही होगी, लेकिन मुझे विश्‍वास है कि सर शिवसागर जी जहां कहीं भी होंगे, उनको अति प्रसन्‍नता होगी कि उनके सपनों का यह काम आज साकार हो रहा है।

जब अटल जी की सरकार थी तो 1975 के विचार को आगे बढ़ाने की दिशा में प्रयास हुआ। डॉ. मुरली मनोहर जोशी जी यहां आए थे। फिर बाद में गाड़ी में रूकावट आ गई और शायद ये काम मेरे ही भाग्‍य में लिखा था। लेकिन मैं चाहूंगा कि अब ज्‍यादा देर न हो। आज जिसकी शुरूआत हो, अभी तय कर लें कि इतनी तारीख को उसका उद्घाटन हो जाए।

मॉरीशस ने हिंदी साहित्‍य की बहुत बड़ी सेवा की है। बहुत से सार्क देशों में हिंदी भाषा के प्रति प्रेम रहा है। अनेक भाषा भाषी लोगों ने हिंदी भाषा को सीखा है। दूनिया की अनेक युनिवर्सिटीज़ में हिंदी सिखाई जाती है। कई पुस्‍तकों का हिंदी में अनुवाद हुआ है। कई भाषाओं की किताबों का अनुवाद हुआ है। लेकिन जैसे मूर्धन्‍य साहित्‍यकार दिनकर जी कहते थे कि मॉरीशस अकेला एक ऐसा देश है जिसका, उसका अपना हिेंदी साहित्‍य है। ये मैं मानता हूं, बहुत बड़ी बात है।

अभी 2015 का प्रवासी भारतीय दिवस हुआ। इस बार के प्रवासी भारतीय दिवस में कार्यक्रम रखा गया था कि प्रवासी भारतीयों के द्वारा जो साहित्‍य सर्जन हुआ है, उसकी एक प्रदर्शनी लगाई जाए। दूनियाभर में फैले हुए भारतीयों ने जो कुछ भी रचनाएं की हैं, अलग-अलग भाषा में की हैं, उसकी प्रदर्शनी थी। और मैं आज गर्व से कहता हूं कि विश्‍वभर में फैले हुए भारतीयों के द्वारा लिखे गए साहित्‍य की इस प्रदर्शनी में डेढ़ सौ से ज्‍यादा पुस्‍तकें मॉरीशस की थीं। यानि यहां पर हिंदी भाषा को इतना प्‍यार किया गया है, उसका इतना लालन-पालन किया गया है, उसको इतना दुलार मिला है, शायद कभी कभी हिंदुस्‍तान के भी कुछ इलाके होंगे जहां इतना दुलार नहीं मिला होगा जितना मॉरीशस में मिला है।

भाषा की अपनी एक ताकत होती है। भाषा भाव की अभिव्‍यक्ति का एक माध्‍यम होता है। जब व्‍यक्ति अपनी भाषा में कोई बात करता है, तब वो दिमाग से नहीं निकलती है, दिल से निकलती है। किसी और भाषा में जब बात की जाती है तो पहले विचार, दिमाग में ट्रांसलेशन चलता है और फिर प्रकट होता है। सही शब्‍द का चयन करने के लिए दिमाग पूरी डिक्‍शनरी छान मारता है और फिर प्रकट होता है। लेकिन, अपनी भाषा भाव की अभिव्‍यक्ति का बहुत बड़ा माध्‍यम होती है। जयशंकर राय ने कहा था कि मारीशस की हिंदी.. ये श्रमिकों की भक्ति का जीता जागता सबूत है। ये जयशंकर राय ने कहा था।

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और मैं मानता हूं कि मॉरीशस में जो हिंदी साहित्‍य लिखा गया है, वो कलम से निकलने वाली स्‍याही से नहीं लिखा गया है। मॉरीशस में जो साहित्‍य लिखा गया है, उस कलम से, श्रमिकों की पसीने की बूंद से लिखा गया है। मॉरीशस जो हिंदी साहित्‍य है, उसमें यहां के पसीने की महक है। और वो महक आने वाले दिनों में साहित्‍य को और नया सामर्थ्‍य देगी। और जैसा मैंने कहा कि भाव की अभिव्‍यक्ति .. हर भाषा का भाषातंर संभव नहीं होता है। और भाव का तो असंभव होता है।

जैसे हमारे यहां कहा गया है- "राधिका तूने बांसूरी चुराई।" अब यहां बैठे हुए जो लोग भी हिंदी भाषा को जानते हैं, उन्‍हें पूरी समझ है कि मैं क्‍या कह रहा हूं। “राधिके तूने बांसूरी चुराई।“ लेकिन यही बात बहुत बढिया अंग्रेजी़ में मैं ट्रांसलेट करके कहूंगा तो ये कहूंगा कि “Radhika has stolen the flute. Go to police station and report.” भाषा भाव की अभिव्‍यक्ति का एक बहुत बड़ा माध्‍यम होता है। भाषा से अभिव्‍यक्‍त होने वाले भाव सामर्थ्‍य भी देते हैं। हम हमारे प्रधानमंत्री श्री अनिरूद्ध जगन्‍नाथ जी को जानते हैं। नाम भी बोलते हैं लेकिन हमें पता नहीं होगा शायद कि जगन्‍नाथ में से ही अंग्रेजी डिक्‍शनरी में एक शब्‍द आया है और मूल शब्‍द वो जगन्‍नाथ का है.. और अंगेज़ी में शब्‍द आया है- Juggernaut. यानी ऐसा स्रोत,ऐसी शक्ति का स्रोत जिसे रोका नहीं जा सकता। इस के लिए और अंगेज़ी में शब्‍द आया है- Juggernaut. ये जगन्‍नाथ से गया है।

क्योंकि जब पुरी में जगन्‍नाथ जी यात्रा निकलती है और जो दृश्‍य होता है, उसमें जो शब्‍द वहां पहुंचा है। मैं एक बार Russia के उस क्षेत्र में गया जो हिंदूस्‍तान से सटा हुआ है। वहां के लोगों को tea शब्‍द पता नहीं है लेकिन चाय पता है। Door मालूम नहीं लेकिन द्वार पता है। कभी कभार ये भी अवसर होता है।

और मैं चाहूंगा कि ये जो हमारा विश्‍व हिंदी सचिवालय जो बन रहा है, वहां टेक्‍नॉलॉजी का भी भरपूर उपयोग हो। दूनिया की जितनी भाषाओं में हिंदी ने अपनी जगह बनाई है, किसी न किसी रूप में, पिछले दरवाजे से क्‍यों न हो, लेकिन पहूंच गई है, उसको भी कभी खोज कर निकालना चाहिए कि हम किस किस रूप में पहुंचे और क्‍यों स्‍वीकृति हो गई। विश्‍व की कई भाषाओं में हमारी भाषा के शब्‍द पहुंचे हैं। जब ये जानते हैं तो हमें गर्व होता है। ये अपने आप में एक राष्‍ट्रीय स्‍वाभिमान का कारण बन जाता है।

विश्‍व में फैले हुए हिंदी प्रेमियों के लिए ये आज के पल अत्‍यंत शुभ पल हैं। आज 12 मार्च है, जब मॉरीशस अपना राष्‍ट्रीय दिवस मना रहा है। मैं मॉरीशस के लिए सवा सौ करोड़ देशवासियों की सवा सौ करोड़ शुभकामनाएं ले करके आया हूं।

आज का वो दिन है, 12 मार्च,1930, जब महात्‍मा गांधी ने साबरमती के तट से दांडी यात्रा का आरंभ किया था। दांडी यात्रा भारत की आज़ादी के आंदोलन का एक turning point बनी थी। उसी साबरमती के तट से निकला था जिस साबरम‍ती का पानी पीकर मुझे भी तो बड़े होने का सौभाग्‍य मिला है। आज उसी 12 मार्च को ये अवसर आया है। महात्‍मा गांधी मॉरीशस आए थे। महात्‍मा गांधी ने मॉरीशस को भरपूर प्‍यार दिया था। सौ साल पहल.. महात्‍मा गांधी से जिनको बहुत प्रेम रहता था, एसे मणिलाल डॉ.. सौ वर्ष पूर्व उन्‍होंने यहां पर हिंदी अख़बार शुरू किया था.. हिंदुस्‍तानी। उस अख़बार की यह विशेषता थी.. कि अभी भी जब कुछ लोग भाषाओं के झगड़े करते हैं, लेकिन उस डॉ मणिलाल ने महात्‍मा गांधी की प्रेरणा से रास्‍ता निकाला था। वो हिंदुस्‍तानी अखबार ऐसा था जिसमें कुछ पेज गुजराती में छपते थे, कुछ हिंदी में छपते थे और कुछ अंग्रेज़ी में छपते थे और एक प्रकार से three language formula वाला वो अख़बार सौ साल पहले निकलता था।

684-16 PM in Mauritius At Bhawan Nirmaan Aarambh, World Hindi Secretariat (3)

लेकिन वो हिंदुस्‍तानी अख़बार मॉरीशस के लोगों को जोड़ने का एक बहुत बड़ा माध्‍यम बना हुआ था। तो महात्‍मा गांधी के विचारों का प्रभाव उसमें अभिव्यक्त होता था। और स्‍वदेश प्रेम स्‍वदेशी भाषा से उजागर हो जाता है। अपनी भाषा से उजागर होता है। भाषा के बंधनों में बंधन वाले हम लोग नहीं हैं। हम तो वो लोग हैं जो सब भाषाओं के अपने गले लगाना चाहते हैं, क्‍योंकि वही तो समृद्धि का कारण बनता है। अगर अंग्रेजी ने जगन्‍नाथ को गले नहीं लगाया होता तो juggernaut शब्‍द पैदा नहीं होता। और इसलिए, भाषा की सम़द्धि भी बांधने से बंधती नहीं है। एक बगीचे से जब हवा चलती है तो हवा उसकी सुगंध को फैलाती जाती है। भाषा की भी वो ताकत होती है कि वो अपने प्रवाह के साथ सदियों तक नई चेतना, नई उर्जा, नया प्राण प्रसारित करती रहती है।

उस अर्थ में आज मेरे लिए बड़ा गर्व का विषय है कि मॉरीशस की धरती पर विश्‍व हिंदी सचिवालय के नए भवन का निर्माण हो रहा है। भाषा प्रेमियों के लिए, हिंदी भाषा प्रेमियों के लिए, भारत प्रेमियों के लिए, और महान विरासत जिस भाषा के भीतर नवप‍ल्‍लवित होती रही है, उस महान विरासत के साथ विश्‍व को जोड़ने का जो प्रयास हो रहा है, उसको मैं बहुत बहुत शुभकामनाएं देता हूं। और इस अवसर पर मुझे आपके बीच आने का अवसर मिला उसके लिए मैं आपका बहुत आभारी हूं।

बहुत बहुत धन्‍यवाद।

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উত্তৰ প্ৰদেশৰ হৰদোইত গংগা এক্সপ্ৰেছৱে’ৰ উদ্বোধনৰ সময়ত প্ৰধানমন্ত্ৰীৰ ভাষণৰ মূল পাঠ
April 29, 2026
This transformative infrastructure project will boost connectivity and drive progress across Uttar Pradesh: PM
Just as Maa Ganga has been the lifeline of UP and this country for thousands of years, similarly, in this era of modern progress, this expressway passing near her, will become the new lifeline of UP's development: PM
Recently, I had the opportunity to dedicate the Delhi-Dehradun Expressway to the nation.
I had then remarked that these emerging expressways are the lifelines shaping the destiny of a developing India, and these modern pathways are today heralding India's bright future: PM
Ganga Expressway will not only connect one end of UP to the other, it will also bring limitless possibilities of the NCR closer: PM

ভাৰত মাতাৰ জয়।

গংগা মাতাৰ জয়।

গংগা মাতাৰ জয়।

উত্তৰ প্ৰদেশৰ ৰাজ্যপাল আনন্দিবেন পেটেল, মুখ্যমন্ত্ৰী যোগী আদিত্যনাথ জী, উপ মুখ্যমন্ত্ৰী কেশৱ প্ৰসাদ মৌৰ্য আৰু ব্রিজেশ পাঠক জী, কেন্দ্ৰীয় মন্ত্ৰীসভাত মোৰ সহকৰ্মী জিতিন প্ৰসাদ জী তথা পংকজ চৌধুৰী জী, উত্তৰ প্ৰদেশ চৰকাৰৰ মন্ত্ৰী, সাংসদ আৰু বিধায়ক, অন্যান্য জন প্ৰতিনিধি আৰু ইয়াত বিশাল সংখ্যাত উপস্থিত থকা মোৰ মৰমৰ ভাই-ভনীসকল।

সৰ্বপ্ৰথমে, মই ভগৱান নৰসিংহৰ এই পুণ্যভূমিক প্ৰণাম জনাইছো। ইয়াৰ পৰা কেইকিলোমিটাৰমান দূৰত মা গংগা সুন্দৰভাৱে বৈ গৈছে। সেয়েহে, এই সমগ্ৰ অঞ্চলটো কোনো তীৰ্থতকৈ কম নহয়। আৰু মই বিশ্বাস কৰোঁ যে উত্তৰ প্ৰদেশলৈ এক্সপ্ৰেছৱে’ৰ এই উপহাৰো মা গংগাৰ আশীৰ্বাদ। এতিয়া আপুনি কেইঘণ্টামানৰ ভিতৰতে সংগমলৈ যাব পাৰে আৰু কাশীত বাবাক সাক্ষাৎ কৰি উভতিও আহিব পাৰে।

 

বন্ধুসকল,

হাজাৰ হাজাৰ বছৰ ধৰি মা গংগা উত্তৰ প্ৰদেশ আৰু এই দেশৰ জীৱনৰেখা হিচাপে পৰিগণিত হৈ অহাৰ দৰে আধুনিক প্ৰগতিৰ এই যুগত, তেওঁৰ ওচৰলৈ যোৱা এই এক্সপ্ৰেছৱে উত্তৰ প্ৰদেশৰ উন্নয়নৰ নতুন জীৱনৰেখা হৈ উঠিব। এয়াও এক বিস্ময়কৰ কাকতালীয় ঘটনা যে যোৱা চাৰি-পাঁচ দিনত মই মা গংগাৰ ওচৰত আছিলো। ২৪ এপ্ৰিলত মই বংগত থাকি গংগাৰ দৰ্শন কৰাৰ পাছত কালি মই কাশীত আছিলো। আজি ৰাতিপুৱা মই পুনৰ বাবা বিশ্বনাথ, মা অন্নপূৰ্ণা আৰু মা গংগা দৰ্শন কৰাৰ সৌভাগ্য লাভ কৰিছো। আৰু এতিয়া মা গংগাৰ নামত নিৰ্মিত এই এক্সপ্ৰেছৱে উৎসৰ্গা কৰাৰ সুযোগ পালো। মই সুখী যে উত্তৰ প্ৰদেশ চৰকাৰে এই এক্সপ্ৰেছৱে’টোৰ নাম মা গংগাৰ নামেৰে ৰাখিছে। ই আমাৰ উন্নয়নৰ দৃষ্টিভংগী আৰু আমাৰ ঐতিহ্যৰ দৃষ্টিভংগীও প্ৰতিফলিত কৰে। গংগা এক্সপ্ৰেছৱে’ৰ বাবে মই উত্তৰ প্ৰদেশৰ কোটি কোটি লোকক অভিনন্দন জনাইছো।

 

বন্ধুসকল,

আজি গণতন্ত্ৰ উদযাপনৰ বাবেও এক গুৰুত্বপূৰ্ণ দিন। বংগত বৰ্তমান দ্বিতীয় পৰ্যায়ৰ ভোটদান চলি আছে, আৰু যি প্ৰতিবেদন আহিছে তাৰ পৰা ধাৰণা কৰা হৈছে যে বংগত ব্যাপকভাৱে ভোটদান হৈছে। প্ৰথম পৰ্যায়ৰ দৰে, জনসাধাৰণে ভোটদান কৰিবলৈ বৃহৎ সংখ্যাত নিজৰ ঘৰৰ পৰা ওলাই আহিছে, দীঘলীয়া শাৰীৰ ফটো ছ’চিয়েল মিডিয়াত বিয়পি পৰিছে। যোৱা ৬-৭ দশকত যি হোৱা নাছিল, যিটো কল্পনা কৰাটো কঠিন আছিল, এইবাৰ বংগত নিৰ্ভীক পৰিৱেশত ভোটদান অনুষ্ঠিত হৈছে। জনসাধাৰণে ভয় নোহোৱাকৈ ভোটদান কৰিছে। ই দেশৰ সংবিধান আৰু দেশৰ শক্তিশালী গণতন্ত্ৰৰ এক গুৰুত্বপূৰ্ণ প্ৰতীক। নিজৰ অধিকাৰৰ প্ৰতি ইমান সচেতন আৰু বৃহৎ সংখ্যাত ভোটদান কৰাৰ বাবে মই বংগৰ মহান জনসাধাৰণৰ প্ৰতি কৃতজ্ঞতা প্ৰকাশ কৰিছো। ভোটদান সমাপ্ত হ’বলৈ বহু ঘণ্টা বাকী থকাৰ সময়তে, মই বংগৰ জনসাধাৰণক গণতন্ত্ৰৰ এই উৎসৱত একে উৎসাহেৰে অংশগ্ৰহণ কৰিবলৈ আহ্বান জনাইছো।

 

বন্ধুসকল,

কিছুদিন পূৰ্বে বিহাৰত নিৰ্বাচন অনুষ্ঠিত হোৱাৰ সময়ত বিজেপি এনডিএ-য়ে এক বৃহৎ বিজয় লাভ কৰি ইতিহাস ৰচনা কৰিছিল। কালিহে গুজৰাটৰ পৌৰ নিগম, পৌৰসভা, জিলা পঞ্চায়ত, নগৰ পঞ্চায়ত, তহচিল পঞ্চায়তৰ নিৰ্বাচনৰ ফলাফল আহিছে। আৰু আমাৰ উত্তৰ প্ৰদেশৰ জনসাধাৰণ সুখী হ'ব যে ৮০ৰ পৰা ৮৫ শতাংশ পৌৰসভা আৰু পঞ্চায়তত বিজেপিয়ে জয়লাভ কৰিছে। আৰু মই আত্মবিশ্বাসী যে এই পাঁচখন ৰাজ্যৰ নিৰ্বাচনতো বিজেপিয়ে ঐতিহাসিক বিজয়ৰ হেট্ৰিক ৰেকৰ্ড কৰিব। ৪ মে’ৰ ফলাফলে উন্নত ভাৰতৰ সংকল্পক শক্তিশালী কৰিব, দেশৰ উন্নয়নৰ গতি নতুন শক্তিৰে পূৰণ কৰিব।

 

বন্ধুসকল,

দেশৰ দ্ৰুত উন্নয়নৰ বাবে আমি দ্ৰুতগতিত আধুনিক আন্তঃগাঁথনিও নিৰ্মাণ কৰিব লাগিব। ২০২১ৰ ডিচেম্বৰত মই গংগা এক্সপ্ৰেছৱে’ৰ আধাৰশিলা স্থাপন কৰিবলৈ শ্বাহজাহানপুৰলৈ আহিছিলো। এতিয়া ৫ বছৰতকৈও কম সময় হৈছে, আৰু আপোনালোকে দেখিব, দেশৰ সৰ্ববৃহৎ এক্সপ্ৰেছৱে’সমূহৰ ভিতৰত অন্যতম, উত্তৰ প্ৰদেশৰ দীৰ্ঘতম গ্ৰীণ কৰিডৰ এক্সপ্ৰেছৱে’ ৫ বছৰৰ ভিতৰত সম্পূৰ্ণ হৈছে। আজি ইয়াক হাৰদোইৰ পৰাও উদ্বোধন কৰা হৈছে। কেৱল এয়াই নহয়, এফালে গংগা এক্সপ্ৰেছৱে’ৰ নিৰ্মাণ সম্পূৰ্ণ হোৱাৰ লগতে ইয়াৰ সম্প্ৰসাৰণৰ পৰিকল্পনাৰ কামো আৰম্ভ হৈছে। অতি সোনকালেই গংগা এক্সপ্ৰেছৱে’ মীৰাটৰ পৰা আগবাঢ়ি হৰিদ্বাৰলৈ সম্প্ৰসাৰিত হ’ব। ইয়াৰ অধিক উন্নত ব্যৱহাৰৰ বাবে ফাৰুখাবাদ লিংক এক্সপ্ৰেছৱে’ নিৰ্মাণ কৰি ইয়াক অন্যান্য এক্সপ্ৰেছৱে’ৰ সৈতেও সংযোগ কৰা হ’ব। এয়া হৈছে দ্বৈত ইঞ্জিন চৰকাৰৰ দৃষ্টিভংগী! এই গতিৰে বিজেপি চৰকাৰে কাম কৰিছে! এয়া বিজেপি চৰকাৰৰ কাম কৰাৰ পদ্ধতি!

 

ভাই-ভনীসকল,

মাত্ৰ কেইদিনমান পূৰ্বে মই দিল্লী-ডেৰাডুন এক্সপ্ৰেছৱে’ উৎসৰ্গা কৰাৰ সুযোগ পাইছিলো। তেতিয়া মই কৈছিলো যে এই নতুন এক্সপ্ৰেছৱে'সমূহ হৈছে উন্নয়নশীল ভাৰতৰ হস্তৰেখাসদৃশ আৰু এই আধুনিক হস্তৰেখাসমূহে আজি ভাৰতৰ বাবে এক উজ্জ্বল ভৱিষ্যতৰ সূচনা কৰিছে।

বন্ধুসকল,

সেই দিনবোৰ পাৰ হৈ গ’ল যেতিয়া এটা পথৰ বাবে কেইবা দশক ধৰি অপেক্ষা কৰিবলগীয়া হৈছিল! এবাৰ ঘোষণা কৰাৰ পাছত, ফাইলসমূহ বছৰ বছৰ ধৰি চলি থাকিল! নিৰ্বাচনৰ বাবে প্ৰতিবন্ধকতা আহি পৰিছিল, তাৰ পিছত চৰকাৰ আহিছিল আৰু গৈছিল, কিন্তু কামৰ কোনো চিহ্ন নাছিল। কেতিয়াবা, জ্যেষ্ঠ বিষয়াসকলে পুৰণি ফাইলবোৰ বিচাৰি উলিয়াবলৈ দুবছৰ ধৰি কঠোৰ পৰিশ্ৰম কৰিবলগীয়া হৈছিল। দ্বৈত ইঞ্জিন চৰকাৰত আধাৰশিলাও স্থাপন কৰা হয় আৰু উদ্বোধনো যথাসময়ত হয়। সেয়েহে, যদি আজি উত্তৰ প্ৰদেশৰ এক্সপ্ৰেছৱে’তকৈ দ্ৰুত গতি যদি কৰবাত আছে, তেন্তে সেয়া হৈছে উত্তৰ প্ৰদেশৰ উন্নয়নৰ গতি।

 

বন্ধুসকল,

এই এক্সপ্ৰেছৱে’ কেৱল উচ্চ গতিৰ পথ নহয়। ই হৈছে নতুন সম্ভাৱনা, নতুন সপোন, নতুন সুযোগৰ প্ৰৱেশদ্বাৰ। গংগা এক্সপ্ৰেছৱে’ প্ৰায় ৬০০ কিলোমিটাৰ দীঘল। পশ্চিম উত্তৰ প্ৰদেশৰ মীৰাট, বুলন্দচহৰ, হাপুৰ, আমৰোহা, সম্ভল আৰু বদাউন। মধ্য উত্তৰ প্ৰদেশৰ শ্বাহজাহানপুৰ, হৰদোই, উন্নাও, ৰায় বাৰেলী। পূব উত্তৰ প্ৰদেশৰ প্ৰতাপগড় আৰু প্ৰয়াগৰাজ তথা আন কাষৰীয়া জিলাসমূহৰ অধীনৰ এই অঞ্চলসমূহৰ কোটি কোটি লোকৰ জীৱন গংগা এক্সপ্ৰেছৱে’ৰ জৰিয়তে সলনি হ’ব।

 

বন্ধুসকল,

এই অঞ্চলবোৰ গংগা আৰু ইয়াৰ উপনৈসমূহৰ উৰ্বৰ মাটিৰে ধন্য। কিন্তু, আগৰ চৰকাৰসমূহে কৃষকসকলক যিধৰণে অৱহেলা কৰিছিল, কৃষকসকলক বিপথগামী কৰি পেলাইছিল! ইয়াৰ কৃষকসকলৰ শস্য ডাঙৰ ডাঙৰ বজাৰলৈ যাব পৰা নাছিল। শীতল ভাণ্ডাৰৰ অভাৱ আছিল। ৰছদপাতিৰ অভাৱ আছিল। কৃষকসকলে তেওঁলোকৰ কঠোৰ পৰিশ্ৰমৰ বাবে সঠিক মূল্য লাভ কৰা নাছিল। এতিয়া সেই সমস্যাবোৰো দ্ৰুতগতিত সমাধান হ'ব। গংগা এক্সপ্ৰেছৱেই কম সময়ৰ ভিতৰতে মুখ্য বজাৰসমূহলৈ প্ৰৱেশাধিকাৰ প্ৰদান কৰিব। ইয়াত কৃষিৰ বাবে প্ৰয়োজনীয় আন্তঃগাঁথনিৰ বিকাশ হ'ব। ই আমাৰ কৃষকসকলৰ উপাৰ্জন বৃদ্ধি কৰিব।

 

বন্ধুসকল,

গংগা এক্সপ্ৰেছৱে'ই উত্তৰ প্ৰদেশৰ এটা প্ৰান্তৰ পৰা আনটো প্ৰান্তলৈ সংযোগ কৰিছে। ই এন. চি. আৰৰ সীমাহীন সম্ভাৱনাসমূহ ওচৰলৈ লৈ আহিব। গংগা এক্সপ্ৰেছৱে’ত কেৱল ৰে’ল চলাচল কৰাই নহয়, ইয়াৰ সমান্তৰালভাৱে নতুন ঔদ্যোগিক সুযোগ বিকশিত হ’ব। ইয়াৰ বাবে হাৰদোইৰ দৰে আন জিলাসমূহতো ঔদ্যোগিক কৰিডৰ বিকশিত কৰা হৈছে। ই হৰদোই, শ্বাহজাহানপুৰ, উন্নাওকে ধৰি ১২ খন জিলাতে নতুন উদ্যোগ আনিব। ভেষজ, বস্ত্ৰ আদিৰ দৰে বিভিন্ন খণ্ডৰ গোট বিকশিত কৰা হ’ব। যুৱক-যুৱতীসকলৰ বাবেও নতুন নিযুক্তিৰ সুযোগ সৃষ্টি কৰা হ’ব।

 

বন্ধুসকল,

আমাৰ যুৱক-যুৱতীসকলেও মুদ্ৰা যোজনা আৰু অ’ড’পিৰ দৰে আঁচনিৰ জৰিয়তে নতুন অভিলেখ গঢ়িছে। ইয়াত ক্ষুদ্ৰ উদ্যোগ, এমএছএমইসমূহে উৎসাহ লাভ কৰিছে। উন্নত সংযোগৰ সুবিধা প্ৰদান কৰিলে তেওঁলোকৰ বাবেও নতুন পথ মুকলি হ’ব। মীৰাটৰ ক্ৰীড়া উদ্যোগ, সম্ভলৰ হস্তশিল্প, বুলন্দচহৰৰ মৃৎশিল্প, হৰদোইৰ হস্ততাঁত, উন্নাওৰ চামৰা, প্ৰতাপগড়ৰ আমলা সামগ্ৰী, এই সকলোবোৰ দেশ আৰু বিশ্বৰ বজাৰলৈ ব্যাপকভাৱে আহিব। ইয়াৰ ফলত লাখ লাখ পৰিয়ালৰ উপাৰ্জন বৃদ্ধি পাব। আপোনালোকে মোক কওক, পূৰ্বৰ সমাজবাদী পাৰ্টী চৰকাৰে হাৰদোই, উন্নাওৰ দৰে জিলাসমূহত ঔদ্যোগিক কৰিডৰ নিৰ্মাণৰ কথা কল্পনা কৰিছিল নেকি? কোনোবাই কেতিয়াবা কল্পনা কৰিব পাৰিলেনে যে এক্সপ্ৰেছৱেও আমাৰ হৰদোইৰ মাজেৰে পাৰ হ’ব? এয়া কেৱল বিজেপি চৰকাৰৰ অধীনতহে সম্ভৱ।

 

বন্ধুসকল,

পূৰ্বতে উত্তৰ প্ৰদেশক পিছপৰা আৰু ৰুগীয়া প্ৰদেশ বুলি কোৱা হৈছিল। সেই একেই উত্তৰ প্ৰদেশ আজি ১ ট্ৰিলিয়ন ডলাৰৰ অৰ্থনীতিত পৰিণত হোৱাৰ দিশত আগবাঢ়িছে। সেইটো এটা ডাঙৰ লক্ষ্য। কিন্তু ইয়াৰ আঁৰতো সমানেই এক বৃহৎ প্ৰস্তুতি আছে। কিয়নো, উত্তৰ প্ৰদেশত এনে অসীম সম্ভাৱনা আছে। দেশৰ ইমান বৃহৎ যুৱ জনসংখ্যাৰ সম্ভাৱনা উত্তৰ প্ৰদেশত আছে। আমি এই শক্তি ব্যৱহাৰ কৰি উত্তৰ প্ৰদেশক এক উৎপাদন কেন্দ্ৰ হিচাপে গঢ়ি তুলিছো। উত্তৰ প্ৰদেশত নতুন উদ্যোগ আৰু কাৰখানা স্থাপন কৰা হ'ব, যেতিয়া ইয়াত বৃহৎ পৰিমাণৰ বিনিয়োগ আহিব, তেতিয়া ইয়াত অৰ্থনৈতিক প্ৰগতিৰ দুৱাৰ মুকলি হ'ব আৰু যুৱক-যুৱতীসকলৰ বাবে নিযুক্তিৰ সুযোগ সৃষ্টি হ'ব।

 

ভাই-ভনীসকল,

এই দৃষ্টিভংগীৰ আধাৰত, বছৰ বছৰ ধৰি নিৰন্তৰ কাম কৰা হৈছে। আপোনালোক সকলোৱে এইটোও উপলব্ধি কৰিছে যে পূৰ্বতে প্ৰব্ৰজনৰ বাবে পৰিচিত উত্তৰ প্ৰদেশ আজি বিনিয়োগকাৰী সন্মিলন আৰু ঔদ্যোগিক কৰিডৰৰ বাবে জনাজাত। দেশ আৰু বিশ্বৰ বিভিন্ন প্ৰান্তৰ কোম্পানীসমূহে উত্তৰ প্ৰদেশৰ বিনিয়োগকাৰী সন্মিলনত অংশগ্ৰহণ কৰে। উত্তৰ প্ৰদেশত হাজাৰ হাজাৰ কোটি টকা বিনিয়োগ কৰা হৈছে। আজি, যদি ভাৰত বিশ্বৰ দ্বিতীয় সৰ্ববৃহৎ মোবাইল নিৰ্মাতা হয়, তেন্তে ইয়াত উত্তৰ প্ৰদেশৰ এক বৃহৎ অৱদান আছে। আজি, ভাৰতে নিৰ্মাণ কৰি থকা আধা মোবাইল আমাৰ উত্তৰ প্ৰদেশত নিৰ্মাণ কৰা হৈছে। মাত্ৰ কেইসপ্তাহমান পূৰ্বে মই নয়ডাত ছেমিকণ্ডাক্টৰ প্ৰকল্পৰ আধাৰশিলাও স্থাপন কৰিছো।

 

বন্ধুসকল,

আপোনালোক সকলোৱে জানে যে এআইৰ এই যুগত ছেমিকণ্ডাক্টৰবোৰ ইমান ডাঙৰ ক্ষেত্ৰত পৰিণত হৈছে। ইউপিয়ে সেই ক্ষেত্ৰতো অগ্ৰগতি লাভ কৰিবলৈ আগবাঢ়ি আছে। ভৱিষ্যতে, উত্তৰ প্ৰদেশৰ জনসাধাৰণৰ বাবে অপৰিসীম সুযোগ থকা এক বিশাল ক্ষেত্ৰ মুকলি হ’ব।

বন্ধুসকল,

উত্তৰ প্ৰদেশৰ ঔদ্যোগিক বিকাশো আজি ভাৰতৰ কৌশলগত শক্তি হৈ পৰিছে। আজি দেশৰ দুটা প্ৰতিৰক্ষা কৰিডৰৰ ভিতৰত এটা উত্তৰ প্ৰদেশত আছে। বৃহৎ প্ৰতিৰক্ষা কোম্পানীসমূহে ইয়াত তেওঁলোকৰ কাৰখানা স্থাপন কৰি আছে। ব্ৰহ্ম’ছৰ দৰে মিছাইল, যাৰ সামৰ্থ্যক বিশ্বই স্বীকৃতি দিছে, আজি উত্তৰ প্ৰদেশত নিৰ্মাণ কৰা হৈছে। এমএছএমইসমূহে প্ৰতিৰক্ষা সঁজুলি নিৰ্মাণত প্ৰয়োজনীয় সৰু সৰু অংশৰ যোগানৰ বাবে কাম লাভ কৰে। ইয়াৰ পৰা উত্তৰ প্ৰদেশৰ এমএছএমই খণ্ড যথেষ্ট লাভান্বিত হৈছে। আনকি সৰু সৰু জিলাসমূহতো যুৱক-যুৱতীসকলে এতিয়া ডাঙৰ উদ্যোগসমূহত যোগদান কৰাৰ সপোন দেখিব পাৰে।

 

বন্ধুসকল,

আজি উত্তৰ প্ৰদেশে ইমান দ্ৰুত গতিত বিকাশ লাভ কৰিছে, কিয়নো উত্তৰ প্ৰদেশে পুৰণি ৰাজনীতিও সলনি কৰিছে, আৰু এক নতুন পৰিচয় সৃষ্টি কৰিছে। মনত ৰাখিব, উত্তৰ প্ৰদেশক এসময়ত গাঁতৰ বাবে পৰিচিত আছিল। আজি সেই উত্তৰ প্ৰদেশখনেই দেশৰ ভিতৰতে সৰ্বাধিক এক্সপ্ৰেছৱে থকা ৰাজ্য হিচাপে পৰিগণিত হৈছে। পূৰ্বতে ইয়াৰ চুবুৰীয়া জিলালৈ যোৱাটোও অতি কঠিন আছিল। কিন্তু আজি উত্তৰ প্ৰদেশত ২১টা বিমানবন্দৰ, ৫টা আন্তঃৰাষ্ট্ৰীয় বিমানবন্দৰ আছে। এতিয়া নয়ডা আন্তঃৰাষ্ট্ৰীয় বিমানবন্দৰো উদ্বোধন কৰা হৈছে। নয়ডা আন্তঃৰাষ্ট্ৰীয় বিমানবন্দৰ গংগা এক্সপ্ৰেছৱেৰ পৰা মাত্ৰ কেইঘণ্টামানৰ দূৰত্বত।

 

ভাই-ভনীসকল,

আমাৰ উত্তৰ প্ৰদেশ ভগৱান ৰাম আৰু ভগৱান কৃষ্ণৰ ভূমি। কিন্তু, পূৰ্বৰ চৰকাৰসমূহে তেওঁলোকৰ শোষণৰ বাবে অপৰাধ আৰু জংঘল ৰাজক উত্তৰ প্ৰদেশৰ পৰিচয় কৰি তুলিছিল। উত্তৰ প্ৰদেশৰ মাফিয়াসকলৰ ওপৰত চলচ্চিত্ৰ নিৰ্মাণ কৰা হৈছিল। কিন্তু, এতিয়া সমগ্ৰ দেশতে উত্তৰ প্ৰদেশৰ আইন-শৃংখলাৰ উদাহৰণ পোৱা গৈছে।

 

ভাই-ভনীসকল,

সম্পদ ভাগ-বতৰা কৰা যিসকল লোকে ক্ষমতা হেৰুৱাইছে, তেওঁলোকে উত্তৰ প্ৰদেশৰ এই প্ৰগতি পচন্দ কৰা নাই। তেওঁলোকে উত্তৰ প্ৰদেশক আকৌ এবাৰ পুৰণি যুগলৈ ঠেলি দিব বিচাৰে। তেওঁলোকে আকৌ এবাৰ সমাজক বিভাজন আৰু দ্বিখণ্ডিত কৰিব বিচাৰে।

বন্ধুসকল,

সমাজবাদী পাৰ্টি উন্নয়ন বিৰোধী আৰু মহিলা বিৰোধী। শেহতীয়াকৈ দেশখনে পুনৰ এবাৰ এছ পি আৰু কংগ্ৰেছৰ দৰে দলসমূহৰ প্ৰকৃত মুখ দেখিছে। কেন্দ্ৰৰ এন ডি এ চৰকাৰে সংসদত নাৰী শক্তি বন্দনা সংশোধনী আনিছিল। এই সংশোধনীখন গৃহীত হ’লে ২০২৯ চনৰ নিৰ্বাচনৰ পৰাই মহিলাসকলে বিধানসভা আৰু লোকসভাত সংৰক্ষণ লাভ কৰিব পাৰিলেহেঁতেন! আমাৰ বহু সংখ্যক মাতৃ আৰু ভগ্নী সাংসদ আৰু বিধায়ক হিচাপে দিল্লী-লক্ষ্ণৌত উপস্থিত হৈছিল। সেয়াও, আন কোনো শ্ৰেণীৰ আসন হ্ৰাস নকৰাকৈ! কিন্তু এছপিয়ে এই সংশোধনী বিধেয়কৰ বিৰুদ্ধে ভোটদান কৰিলে।

 

বন্ধুসকল,

এই বিধেয়কখনে সকলো ৰাজ্যৰ আসন বৃদ্ধি কৰিব পাৰে। আমি সংসদত স্পষ্টকৈ কৈছিলো যে সকলো ৰাজ্যতে সমান অনুপাতত আসন বৃদ্ধি হ’ব। কিন্তু ডিএমকেৰ দৰে দল, যিয়ে উত্তৰ প্ৰদেশক গালি পাৰি ৰাজনীতি কৰিছিল, তেওঁলোকৰ আপত্তি আছিল যে উত্তৰ প্ৰদেশৰ আসন কিয় বৃদ্ধি হ’ব? আপুনি দেখিছে, সমাজবাদী দলে সংসদত তেওঁৰ তেওঁৰ সুৰতেই কথা কৈছিল। এই এছ পিৰ লোকসকলে ইয়াৰ পৰা আপোনাৰ ভোট লৈ সংসদলৈ যায়, আৰু সংসদত উত্তৰ প্ৰদেশৰ জনসাধাৰণক গালি দিয়া লোকসকলৰ সৈতে থিয় দিয়ে। সেয়েহে, উত্তৰ প্ৰদেশৰ জনসাধাৰণে কয়, সমাজবাদী পাৰ্টি কেতিয়াও উন্নত হ’ব নোৱাৰে। এই লোকসকলে সদায় মহিলা বিৰোধী ৰাজনীতি কৰিব। এইবোৰ সদায় তুষ্টিকৰণ আৰু অপৰাধীৰ সৈতে থিয় দিব। এছ পি-য়ে কেতিয়াও পৰিয়ালবাদ আৰু জাতিবাদৰ ওপৰত উঠিব নোৱাৰে। এই লোকসকলে সদায় উন্নয়ন বিৰোধী ৰাজনীতি কৰিব। উত্তৰ প্ৰদেশে এছ পি আৰু ইয়াৰ মিত্ৰশক্তিৰ পৰা সাৱধান হ’ব লাগিব।

 

বন্ধুসকল,

আজি দেশখনে এটা সংকল্প লৈ আগবাঢ়ি আছে-উন্নত ভাৰতৰ সংকল্প! এই সংকল্প পূৰণ কৰাত উত্তৰ প্ৰদেশৰ এক বৃহৎ ভূমিকা আছে। আপোনালোক সকলোৱে লক্ষ্য কৰি আছে যে আজি সমগ্ৰ বিশ্ব কেনেকৈ যুদ্ধ, অস্থিৰতা আৰু অস্থিৰতাত আবদ্ধ হৈ আছে। বিশ্বৰ বৃহৎ দেশসমূহত পৰিস্থিতি অধিক বেয়া। অৱশ্যে, ভাৰতে একে গতিৰে উন্নয়নৰ পথত আগবাঢ়ি আছে। বাহিৰৰ শত্ৰুসকলে এইটো পচন্দ নকৰে। ভিতৰত বহি থকা কিছুমান লোকে ক্ষমতাৰ ভোকত ভাৰতক হেয়জ্ঞান কৰিবলৈ চেষ্টা কৰিছে। তথাপিও, আমি কেৱল সুৰক্ষিত নহয় বৰঞ্চ উন্নয়নৰ নতুন অভিলেখ স্থাপন কৰিছো। আমি আত্মনিৰ্ভৰ ভাৰত অভিযানক আগুৱাই লৈ গৈছো। আমি আধুনিক আন্তঃগাঁথনি নিৰ্মাণ কৰি আছো। গংগা এক্সপ্ৰেছৱে এই দিশত আন এক শক্তিশালী পদক্ষেপ। মই আত্মবিশ্বাসী যে উত্তৰ প্ৰদেশৰ জনসাধাৰণে তেওঁলোকৰ কঠোৰ পৰিশ্ৰম আৰু প্ৰতিভাৰে গংগা এক্সপ্ৰেছৱেই আমাৰ দুৱাৰমুখলৈ অনা সম্ভাৱনাবোৰ উপলব্ধি কৰি থাকিব। এই সংকল্পৰ সৈতে আপোনালোক সকলোকে বহুত বহুত অভিনন্দন। বহুত বহুত ধন্যবাদ!

 

ভাৰত মাতাৰ জয়।

ভাৰত মাতাৰ জয়।

বন্দে মাতৰম।

বন্দে মাতৰম।

বন্দে মাতৰম।

বন্দে মাতৰম।

বন্দে মাতৰম।

বহুত বহুত ধন্যবাদ!