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Excerpts of Shri Narendra Modi’s interview with Navbharat Times:

करीब दो महीने तक चले मैराथन इलेक्शन कैंपेन में जमकर हुआ नमो-नमो का जाप। जाहिर है, बीजेपी के पीएम कैंडिडेट नरेंद्र मोदी को एनडीए जहां हीरो के रूप में पेश कर रहा था, वहीं यूपीए और अन्य दल उन्हें विलेन साबित करने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ रहे थे। लेकिन भारतीय लोकतंत्र में पहली बार ऐसा चुनाव देखने को मिला, जो सत्तापक्ष की मुखालफत के बजाय विपक्ष के एक 'कद्दावर' पीएम कैंडिडेट को केंद्र में रखकर लड़ा गया। ऐसे में मोदी का आभामंडल पूरे चुनावी अभियान के दौरान 'विराट' होता चला गया। मौजूदा चुनावी माहौल में जो कटुता देखने को मिली, उस बारे में मोदी का क्या नजरिया है? यदि मोदी पीएम बनते हैं, तो उनका विकास का रोड मैप क्या होगा? मोदी से एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में गुलशन राय खत्री और नरेंद्र नाथ ने ऐसे ही कई अहम सवाल पूछे, पेश है खास अंशः

1-एनबीटीः चुनाव प्रचार के दौरान विभिन्न राजनीतिक दलों में कड़वाहट बढ़ी है। क्या इससे बचा जा सकता था? क्या आने वाले दिनों में इसका असर सरकार और विपक्ष के संबंधों पर भी देखने को मिल सकता है?

नरेंद्र मोदीः यह बात सही है कि जैसे-जैसे चुनावी प्रचार परवान चढ़ता गया, भाषणों और वक्तव्यों में हमारे विरोधियों ने सारी मर्यादाएं तोड़ दी हैं, खासकर शुरुआती राउंड में भारी पोलिंग के बाद सहमे कांग्रेस और उसके साथी दलों ने गाली-गलौज करने में कोई कसर बाकी नहीं रखी। शुरुआत में हमने यह तय किया था कि इस पूरे चुनाव को विकास और सुशासन जैसे सकारात्मक मुद्दों पर लड़ेंगे। यदि अन्य राजनीतिक दल भी इस पहल में हमारा साथ देते तो शायद भारतीय चुनावी राजनीति में एक नया अध्याय जुड़ जाता। लेकिन अफसोस, हमारे विरोधी दलों ने चुनाव को उसी पुरानी जाति और संप्रदाय की राजनीति की तरफ धकेलने में ही अपना सारा जोर लगा दिया। इसके बावजूद यह पहला चुनाव है जिसमें बीजेपी जैसी कोई बड़ी पार्टी विकास और सुशासन के मुद्दे पर चुनाव लड़ रही है। पिछले छह महीने से मेरा यह ईमानदार और गंभीर प्रयास रहा है कि हम नागरिकों के असली मुद्दों को उठाएं।

मीडिया का यह कहना कि चुनाव के दौरान पैदा हुई कटुता का प्रभाव चुनाव के बाद भी देखने को मिलेगा, एक अतिशयोक्तिपूर्ण सोच है। दरअसल, जमीनी हकीकत ऐसी नहीं है। अक्सर आपने देखा होगा कि चुनावी समर में एक-दूसरे पर तीखे वार करने वाले नेता जब अनायास किसी हवाई अड्डे पर मिलते हैं, तब उनके बीच बड़े ही सहज ढंग से बातचीत होती है। ऐसा नहीं है कि चुनावी जंग की तल्खियां राजनेताओं के आपसी रिश्ते पर हावी हो जाती है। गर्मजोशी के साथ मिलने के बाद जब वे फिर रैलियों में पहुंचते हैं तो आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला भी शुरू हो जाता है। यह समझना होगा कि राजनीति में प्रतिस्पर्धा तो होती है, लेकिन दुश्मनी कतई नहीं। एक अहम बात और कहना चाहूंगा। इधर, पिछले कुछ समय से सार्वजनिक जीवन में व्यंग्य और विनोद का चलन खत्म-सा होता जा रहा है। सार्वजनिक जीवन में गंभीरता के साथ-साथ व्यंग्य और विनोद का होना भी जरूरी है, आपसी रिश्तों में उदासीनता के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए।

मालूम हो कि व्यंग्य, कार्टून तथा लतीफों की दुनिया में भी हम राजनेताओं की मौजूदगी व्यापक स्तर पर होती है। इन दिनों 'मॉरल पुलिसिंग' का दौर भी चल रहा है। एक हद तक तो यह सही है, लेकिन इसका अतिरेक निश्चित ही गैरजरूरी प्रतीत होता है। जहां तक आने वाले दिनों में इसके असर की बात है तो हम न तो बदले की भावना से कोई काम करेंगे और न ही चुनावी प्रतिद्वंद्विता को चुनाव पश्चात आगे ले जाएंगे। हम पूरी शालीनता के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन करेंगे और हमारे विरोधियों के साथ भी आपसी सहयोग से देश के विकास के लिए कार्यरत रहेंगे।

2-एनबीटीः अगर आप सत्ता में आते हैं तो यह देश आपसे क्या उम्मीद करे? आप विपक्ष को किस तरह से साथ लेकर चलेंगे और विपक्ष को साथ लेकर चलने के लिए क्या कदम उठाएंगे?

नरेंद्र मोदीः हम इतना सुनिश्चित करेंगे कि लोगों की जो आशाएं और अपेक्षाएं हमसे जगी हैं, उन्हें पूरा करने के लिए पुरजोर मेहनत करेंगे। हमारा यह प्रयास होगा कि देश का विकास करने और सुशासन प्रदान करने के लिए हम दिन-रात कार्यरत रहेंगे। देश की प्रगति और लोकतंत्र की मजबूती के लिए जागरुक विपक्ष का होना आवश्यक है। मुद्दों के आधार पर विरोध की गुंजाइश को समझा जा सकता है। इसके लिए हम खुले मन से चर्चा को तैयार रहेंगे। देश हित में आम राय बनाकर चलना हमारी कार्यशैली का हिस्सा होगा।

3-एनबीटीः इस देश में 90 के दशक में उदारवादी आर्थिक नीतियां शुरू हुई थीं। क्या ये आगे भी जारी रहेंगी या फिर वक्त के साथ इनमें कुछ बदलाव करने की जरूरत है?

नरेंद्र मोदीः कोई भी देश या समाज यदि एक ही जगह स्थिर रह जाए तो वह विकास नहीं कर सकता। समयानुरूप बदलाव की आवश्यकता हर देश में होती है। अर्थव्यवस्था में भी निरंतर गति बनाए रखने के लिए सुधार जरूरी है। हम हर उस कदम को उठाएंगे, जिससे अर्थव्यवस्था सुधरे, विकास की गति बढ़े और रोजगार के अवसर पैदा हों।

4-एनबीटीः जीएसटी और मल्टी-ब्रांड रिटेल  में एफडीआई पर आपकी क्या राय है? क्या यह होना चाहिए या नहीं?

नरेंद्र मोदीः जीएसटी राजस्व में बढ़ोतरी का सरल और बेहतर उपाय है। राज्यों को मिलने वाली सहायता राशि में भेदभावपूर्ण रवैया अपनाने की वजह से जीएसटी स्थगित हो गया है। लेकिन हमारी सरकार जीएसटी की सभी बाधाओं और उसमें होने वाले करप्शन और अनुचित देरी की संभावनाओं को दूर करने के लिए सकारात्मक भूमिका अदा करेगी। जीएसटी के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए आईटी नेटवर्क का देशव्यापी ढांचा खड़ा करना जरूरी है, मगर यूपीए सरकार ने इस दिशा में एक कदम भी नहीं बढ़ाया। तमाम अहम मामलों में देरी या कहें कि 'पॉलिसी पैरालिसिस' की स्थिति के लिए राज्य सरकारों को बदनाम करने की यूपीए सरकार की बीमार मानसिकता रही है। मल्टी-ब्रांड रिटेल में एफडीआई का जहां तक सवाल है, हमारी पार्टी का आधिकारिक रुख हमारे मेनिफेस्टो में साफ कर दिया गया है।

5-एनबीटीः आप अक्सर देश में बुलेट ट्रेनें चलाने और सौ नए शहर बसाने की वकालत करते रहे हैं। इससे देश का आर्थिक विकास तो तेज होगा, लेकिन इसके लिए भारी-भरकम राशि का इंतजाम कहां से होगा? मुंबई-अहमदाबाद के बीच ही एक बुलेट ट्रेन चलाने के लिए करीब 60 हजार करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है तो क्या इस तरह की बुलेट ट्रेनें देश भर में चलाने पर वे आर्थिक लिहाज से कामयाब होंगी?

नरेंद्र मोदीः हमारे देश का दुर्भाग्य यह है कि अब तक जिस प्रकार की सरकारें यहां चलाई गईं, उसमें मानों गरीबी एक अभिशाप नहीं वरन एक वरदान हो, एक आवश्यकता हो। भले वह चाहे वोट बैंक की राजनीति के लिए हो या सत्तारूढ़ राजनेताओं में दीर्घदृष्टि के अभाव चलते हो। नतीजा यह, कि हम न कुछ बड़ा सोच पाते हैं, न कुछ विश्वस्तरीय करने का प्रयास करते हैं। दूसरी तरफ, आजादी के समय भारत जैसी ही हालात वाले साउथ कोरिया जैसे छोटे देश एक व्यापक सोच के कारण विकास की बुलंदियों को छू रहे हैं। अटल जी की सरकार में स्वर्णिम चतुर्भुज जैसी योजनाओं को लागू करने की एक अहम शुरुआत हुई। वह एक प्रयास था कि भारतीय नागरिकों को भी वर्ल्ड क्लास इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध करवाया जाए। दुर्भाग्यवश पिछले दस साल में हम उस दिशा में आगे बढ़ने के बजाय बहुत पीछे धकेल दिए गए हैं। मेरा मानना है कि यदि हमारा विजन बड़ा हो, उसके अनुरूप पुरुषार्थ करने की क्षमता और तैयारी हो तो हमारा देश भी प्रगति के पथ पर आगे बढ़ सकता है। हम भी अपने नागरिकों को क्रमशः हर क्षेत्र में वर्ल्ड क्लास इंफ्रास्ट्रक्चर मुहैया करा सकते हैं। रही पैसों की बात मुझे नहीं लगता कि मौजूदा समय में ऐसी योजनाओं के लिए पैसे जुटाना मुश्किल है।

6-एनबीटीः पाक समेत पड़ोसी देशों के साथ इस वक्त भारत के रिश्तों की आपको जानकारी है? क्या इन रिश्तों को बेहतर बनाने के लिए आपके दिमाग में कोई योजना है? यदि हां, तो वह क्या है?

नरेंद्र मोदीः आज जब आतंकवाद ने पूरी दुनिया को हिला कर रख दिया है और हमारा देश भी कई मोर्चों पर इससे मुकाबला कर रहा है। ऐसे में, यह जरूरी हो जाता है कि एक स्वस्थ और मजबूत रिश्ते की बुनियाद आतंकवाद के खिलाफ साथ मिलकर लड़ने की रणनीति पर रखी जाए। जब तक कोई भी पड़ोसी देश भारत के खिलाफ आतंकवाद को बढ़ावा देगा तब तक उसके साथ अच्छे रिश्ते बनाना मुश्किल है। मेरा मानना है कि हमारी विदेश नीति आपसी सम्मान और भाईचारे पर आधारित होनी चाहिए। इसी तरह अन्य देशों के साथ हमारे संबंध भी बराबरी और परस्परता पर आधारित होने चाहिए। देश हित सर्वोपरि रखा जाना चाहिए। हम न किसी को आंख दिखाना चाहते हैं और न ही चाहते हैं कि कोई हमें आंख दिखाए। हम चाहते हैं आंख से आंख मिलाकर बात करें।

7-एनबीटीः केंद्र और राज्यों के बीच भी आप पीएम और सीएम टीम की बात करते रहे हैं, लेकिन क्या राज्यों में विपक्षी दलों की सरकारों के होते हुए भी यह संभव है? यदि हां, तो केंद्र और राज्यों के बीच संबंधों को किस तरह से और कौन सी नई शक्ल देंगे?

नरेंद्र मोदीः मेरी सोच के मुताबिक टीम इंडिया में प्रधानमंत्री और सभी मुख्यमंत्री शामिल होने चाहिए। प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री साथ मिलकर बतौर टीम काम करें। यदि सब साथ मिलकर काम करें, तभी हम सही मायने में प्रगति कर सकते हैं। सारी निर्णय प्रक्रिया में राज्यों को बराबर का भागीदार बनाया जाए। बड़े प्रॉजेक्ट को मंजूरी के वक्त राज्य सरकार को भी साथ रखा जाए। यह हमारी प्राथमिकता होगी कि सभी राज्यों को विकास की प्रक्रिया में बराबर का साझीदार समझा जाए। जब हम भागीदारी की बात करते हैं, तो इससे हमारी साफ नीयत का पता चलता है। यदि नीयत सही है, तो राज्यों में विपक्षी दल की सरकार का होना रुकावट की वजह नहीं बनेगा।

8-एनबीटीः इस वक्त महंगाई की मार से देश के लोग त्रस्त हैं। महंगाई, राज्य सरकारों की पहल के बिना खत्म नहीं हो सकती। ऐसे में राज्यों को इसके लिए कैसे तैयार करेंगे?

नरेंद्र मोदीः महंगाई को नियंत्रित करने के लिए डिमांड-सप्लाई मिसमैच यानी कि मांग-आपूर्ति के असंतुलन को दूर करने की आवश्यकता है। इसके लिए खाद्यान्न और अन्य पदार्थों की पर्याप्त मात्रा में उपलब्धि सुनिश्चित कराना जरूरी है। यह तभी संभव हो पाएगा, जब कृषि पर आवश्यक बल दिया जाए और सिंचाई सुविधाओं का विकास किया जाए। इस बारे में एक नई सोच के साथ काम करने की जरूरत है। हमारी पार्टी के मेनिफेस्टो में कृषि क्षेत्र में क्रांतिकारी सुधार के लिए 'प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना' का उल्लेख किया गया है। इसके अलावा, आज हमारे देश में कृषि क्षेत्र का कोई रीयल टाइम डेटा उपलब्ध नहीं है। लिहाजा, कृषि विकास के लिए योजनाएं बनाने का कोई सटीक मतलब नहीं रह जाता। हम कृषि क्षेत्र का रीयल टाइम डेटा हासिल कर उसके मुताबिक पॉलिसी और प्रोग्राम बनाएंगे। खाद्यान्न की कीमतों को स्थिर रखने के लिए विशेष फंड बनाया जाएगा। हम गुजरात की श्वेत क्रांति का देशभर में प्रसार करना चाहेंगे।

9-एनबीटीः इस वक्त देश की जनता की इतनी सारी उम्मीदें आपसे जुड़ गई हैं। क्या आपको इन उम्मीदों का बोझ महसूस होता है? इन पर खरा उतरने के लिए आपकी क्या तैयारी है?

नरेंद्र मोदीः दरअसल, पिछले दशकों के दौरान राजनीति के स्तर में जो गिरावट आई है, उसके चलते सरकारों के प्रति आम जनमानस में निराशा और तिरस्कार की भावना बन गई थी। बड़े लंबे समय बाद चुनावी राजनीति में लोगों की दिलचस्पी वापस आई है, मतदाताओं का भरोसा पुनःस्थापित होता दिख रहा है। समूचे देश में एक आशा का संचार हुआ है। मुझे इस बात का अहसास है कि बीजेपी से देशभर में बहुत ज्यादा उम्मीदें बांधी जा रही हैं। लेकिन मुझे लगता है कि अपने नागरिकों को भी सपने संजोने का हक है, आशावादी होने का अधिकार है। उम्मीदें बांधने की इजाजत होनी चाहिए, इसमें कुछ बुरा नहीं है। इन सारी बातों का हमें पूरा ख्याल है और उसी के अनुसार कठिन से कठिन परिश्रम करने की मानसिक तैयारी हम कर चुके हैं।

10-एनबीटीः विदेश से काला धन लाना आसान नहीं है? कई विदेशी कानून इसमें अड़चन बने हुए हैं। आप इन्हें कैसे दूर करेंगे और यदि काला धन वापस आता है तो इससे देश के लोगों को क्या फायदा होगा? आपकी नजर में कितना काला धन हो सकता है?

नरेंद्र मोदीः सबसे पहली बात है काला धन वापस लाने की मंशा और संकल्पशक्ति। बीजेपी ने काले धने को वापस लाने की अपनी मंशा साफ तौर पर व्यक्त की है। हम मानते हैं कि काले धन की समस्या एक बड़ी चुनौती है। यह सिर्फ टैक्स चोरी ही नहीं बल्कि देशद्रोही प्रवृत्ति भी है। काला धन जो पैदा हुआ है और विदेशों में जमा हो रहा है, वह आगे चलकर गैर-कानूनी और देशद्रोही गतिविधियों की दिशा में चला जाता है। हमारे लिए यह अत्यंत अहम मुद्दा है। मैं देशवासियों को भरोसा दिलाता हूं कि काला धन वापस लाने की मेरी व्यक्तिगत प्रतिबद्धता है और हम तत्काल ही एक टास्क फोर्स का गठन करेंगे और इसके लिए जरूरी कानूनी सुधार के साथ-साथ कानूनी फ्रेमवर्क-ढांचे में जरूरी बदलाव भी लाएंगे। इतना ही नहीं, देश में ऐसा काला धन वापस लाकर उसका आंशिक हिस्सा ईमानदार करदाताओं विशेषकर सैलरीज क्लास के टैक्स पेयर्स को प्रदान करेंगे। यह जरूरी है कि हमारी कर-व्यवस्था-टैक्स सिस्टम ईमानदार टैक्स पेयर्स को प्रोत्साहन और इनाम देने वाली कर चोरों के खिलाफ सख्ती से पेश आने वाली हो।

11-एनबीटीः इस वक्त लोकसभा चुनाव अंतिम चरण में है? आपको क्या लग रहा है कि अगली लोकसभा का सीन क्या रहने वाला है?

नरेंद्र मोदीः अब तस्वीर बिल्कुल साफ हो गई है कि देश की जनता बदलाव चाहती है। महंगाई, भ्रष्टाचार और घोटालों के दलदल में फंसी यूपीए सरकार ने देशवासियों को सिवाय नाउम्मीदी के कुछ और नहीं दिया। अब तक 9 में से 8 चरणों का मतदान पूरा हो चुका है। और इन चरणों में हुए मतदान के रुझान से साफ हो गया है कि यूपीए सरकार का सत्ता से जाना वोटरों ने तय कर दिया है। वहीं, बीजेपी और साथी दलों की सरकार की नींव भी रख दी गई है। अब सिर्फ 41 सीटों पर पोलिंग होनी है। मुझे आशा है कि देश के अन्य राज्यों की ही तरह जहां मतदान होना बाकी है, वहां मतदाता बीजेपी और साथी दलों को अपार समर्थन देने वाले हैं।

12-एनबीटीः आप कहते हैं कि कांग्रेस का आंकड़ा दहाई तक ही पहुंच पाएगा तो आपको क्या लगता है कि सबसे बड़ा विपक्षी दल कौन होगा?

नरेंद्र मोदीः जी हां! इन चुनावों में कांग्रेस अपने चुनावी इतिहास के सबसे खराब प्रदर्शन का एक नया रेकॉर्ड बनाने जा रही है। बहुत संभव है कि वह दहाई के आंकड़े तक ही सिमट कर रह जाएगी। इन सबके बीच कांग्रेस के आला नेता पार्टी को प्रासंगिक बनाए रखने की खातिर परिस्थितियों को किस तरह मैनेज करते हैं, यह तो भविष्य के गर्भ में छिपा है। हम तो चाहते हैं कि सबसे बड़ा विपक्ष चाहे कोई भी हो, वह सकारात्मक राजनीति करे और देश की प्रगति और खुशहाली के लिए जिम्मेदार राजनीति की एक स्वच्छ परंपरा का पालन करे।

13-एनबीटीः आप कांग्रेस में किसी नेता को पीएम लायक मानते हैं? यदि हां, तो वह कौन है?

नरेंद्र मोदीः देखिए, मैं समझता हूं कि आज कांग्रेस नेतृत्वविहीन पार्टी हो गई है। जनता से जुड़ा कोई कद्दावर नेता, जिसकी आवाज कश्मीर से कन्याकुमारी तक गूंजती हो, कांग्रेस के पास नहीं है। गांधी परिवार की भक्ति और परिक्रमा ही कांग्रेस के नेताओं का एकसूत्रीय अजेंडा है। ऐसे में पीएम पद के लायक नेता ढूंढ़ना बहुत दूर की कौड़ी है। इंदिरा जी के जमाने से ही किसी नेता का कद इतना बड़ा नहीं होने दिया गया कि वह आगे चलकर गांधी परिवार के लिए चुनौती साबित हो।

14-एनबीटीः डॉ. मनमोहन सिंह को निजी तौर पर कैसे आंकते हैं? क्या वे पीएम के रूप में ही अच्छे साबित नहीं हुए या फिर निजी तौर पर उनमें अच्छे गुण भी हैं?

नरेंद्र मोदीः देखिए, किसी भी इंसान के आकलन/मूल्यांकन के लिए उसे करीब से देखना जरूरी है। डॉ. मनमोहन सिंह के साथ बहुत ज्यादा मुलाकात तो नहीं हुई। हां, कुछ आधिकारिक मुलाकातें जरूर हुई हैं, लेकिन उन चंद मुलाकातों के आधार पर मैं उनके बारे में कोई राय कायम करना उचित नहीं समझता। रही बात बतौर प्रधानमंत्री उनके आकलन की तो उनके निराशाजनक कार्यकाल को देखकर देश हकीकत समझ चुका है।

15-एनबीटीः अगर आप सत्ता में आए तो वे ऐसे पांच काम कौन से हैं, जो आप सबसे पहले करना चाहेंगे?

नरेंद्र मोदीः सरकार और सरकारी व्यवस्था में भरोसा लौटाना हमारा पहला काम होगा। दूसरा, अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करने के लिए कारगर कदम उठाना हमारी प्राथमिकता होगी। तीसरा, महंगाई को नियंत्रित करने के लिए त्वरित कदम उठाए जाएंगे और चौथा, सरकारी व्यवस्था में जान फूंकना और निर्णय प्रक्रिया को कारगर बनाना होगा। पांचवां काम पॉलिसी पैरालिसिस से निजात पाना होगा।

16-एनबीटीः क्या आपको लगता है कि आपके पीएम पद तक पहुंचने की राह में कोई रुकावट बन सकता है?

नरेंद्र मोदीः देखिए, एक सामान्य परिवार का बेटा आज यहां तक पहुंचा है। इस लंबे सामाजिक और राजनीतिक सफर में न जाने कितने लोगों का समर्थन, आशीर्वाद और दुआएं मुझे मिली हैं। मैं समझता हूं यह एक काल्पनिक सवाल है, जिसका हकीकत से कोई वास्ता नहीं है।

17-एनबीटीः वाजपेयी जी की याद आती है? क्या आपकी सरकार में उनके कामकाज की छवि नजर आएगी?

नरेंद्र मोदीः बीजेपी का एक सिपाही होने के नाते निश्चित रूप से वाजपेयी जी की याद तो आती ही है। भारत के इतिहास में एकमात्र पूर्णकालिक गैर-कांग्रेसी सरकार चलाने का यश उन्हें जाता है। आम जनता को ध्यान में रखते हुए ऐसे कई कार्य वाजपेयी जी ने किए थे, जो आज भी याद किए जाते हैं। चूंकि मैंने अपना राजनीतिक सफर वाजपेयी जी की छत्रछांव में ही तय किया है, लिहाजा यह लाजिमी है कि काम करने की उनकी विशिष्ट शैली और आम जनता से हमेशा सरोकार रखने की उनकी शिद्दतभरी आतुरता का मैं कायल रहा हूं। सबसे बड़ी बात, कांग्रेस शासनकाल में महंगाई से त्रस्त देश की जनता को जिस तरह से वाजपेयी जी की सरकार ने राहत दी थी, हम चाहेंगे कि आम जन को यह राहत एक बार फिर से मिले।

Courtesy: Navbharat Times

 

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अमर उजाला से विशेष साक्षात्कार में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बोले : सरकारी योजनाओं के लाभार्थी सियासत का हिस्सा नहीं... वे विकास योद्धा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमर उजाला से खास बातचीत में यूपी-पंजाब सहित पांच प्रदेशों में चुनाव के साथ देश में शिक्षा की हालत, चिकित्सा शिक्षा के विकास, रोजगार वृद्धि और यूक्रेन में युद्ध से पैदा हुए अंतरराष्ट्रीय हालात पर विस्तार से अपनी राय रखी। उन्होंने 2022 में यूपी विधानसभा चुनाव में जीत के साथ पहली बार 2024 के भावी लोकसभा चुनाव में भी विकास को मुद्दा बताते हुए जीत का दावा किया। डॉ. इंदुशेखर पंचोली से बातचीत में प्रमुख मुद्दों, प्रश्नों और विषयों पर जानिये प्रधानमंत्री की राय...

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मानते हैं कि सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों का वर्ग चुनावी सियासत या लाभ-हानि का हिस्सा नहीं है। ये समूह दरअसल विकास योद्धा हैं, जो अपनी बुनियादी जरूरतों से आगे बढ़कर देश के विकास में दमखम दिखाने को तैयार हैं। इससे देश को जो लाभ मिलने वाला है, वह कल्पना से परे है। यह सत्ता में दशकों तक बैठे लोगों को आईना भी दिखाने वाला है। पीएम ने कहा, लोग चौथी बार जातिवाद-परिवारवाद से ऊपर उठकर अब विकासवाद व राष्ट्रवाद के नाम पर वोट कर रहे हैं।

उत्तर प्रदेश समेत पांच राज्यों के चुनाव में सकारात्मक नतीजों के प्रति आशान्वित पीएम मोदी ने आखिरी चरण के मतदान से पहले ‘अमर उजाला’ से शनिवार को खास बातचीत की। प्रधानमंत्री यूपी चुनाव को अगले लोकसभा चुनाव की तैयारी और समीकरणों के तौर पर नहीं देखते। मोदी ने कहा, चुनाव रिपोर्ट कार्ड और भविष्य का विजन सामने रखने का माध्यम होता है। जन कल्याण के लिए काम करने वालों के लिए अगले चुनाव की तैयारी उसी दिन से शुरू हो जाती है, जिस दिन वे पिछला चुनाव जीतते हैं।

पीएम ने कहा, चुनाव गुणा-भाग नहीं, बल्कि जनता के बीच आपकी केमिस्ट्री से चलते हैं। ऐसी केमिस्ट्री जहां लोग प्रगति के लिए उत्सुक हैं और सरकार उनकी सेवा करने के लिए। ऐसी केमिस्ट्री जो लोगों को एक बेहतर कल के लिए एकसाथ लाती है। उन्होंने कहा, यूपी या पंजाब नहीं, सभी राज्य एक ही धागे से जुड़े हैं। सबकी आंखों में सपने हैं। इसलिए वे एक सकारात्मक राजनीति की ओर देख रहे हैं, जो प्रगति और विजन पर केंद्रित हो, परिवारवाद या विभाजन पर नहीं।

पहले डीबीटी का मतलब था डायरेक्ट बेनिफिट टु फैमिली, अब सीधा जनता तक लाभ पहुंच रहा है। आकांक्षा की राजनीति की ओर यह रुझान 2014 से पूरे देश में देखा गया है। ये 2019 के बाद और भी मजबूत हो गया है। लोगों ने देखा कि संकट के समय में विकास-केंद्रित सरकार कितनी महत्वपूर्ण होती है। यही रुझान अब आपको हर चुनाव में दिखाई दे रहा है और आगे भी दिखाई देगा।

70 वर्षों में जितने डॉक्टर तैयार हुए उतने अब अगले 10 वर्षों में ही बनेंगे
प्रधानमंत्री मोदी ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा, 2014 तक देश में लगभग 385 मेडिकल कॉलेज थे। अब इनकी संख्या 600 से ज्यादा है। पहली बार निजी से ज्यादा सरकारी मेडिकल कॉलेज हो गए। आजादी के बाद के 70 वर्षों में जितने डॉक्टर देश में तैयार हुए, उतने डॉक्टर अब अगले 10 वर्षों में बनेंगे।

ऑपरेशन गंगा : कई देशों की सरकारों से तालमेल
मोदी बोले, ऑपरेशन गंगा के तहत भारत सरकार कई देशों की सरकारों के साथ तालमेल बिठाकर काम कर रही है। मैंने भी कई राष्ट्राध्यक्षों से बात की है और उन्हें कहा कि भारतीयों की सुरक्षित वतन वापसी हमारे लिए सर्वोच्च प्राथमिकता है।

युवाओं के लिए भविष्य में और अधिक होंगे अवसर
पीएम मोदी ने कहा कि काम मांगने वाले हों या काम देने वाले, दोनों के लिए ही भारत की अर्थव्यवस्था ढेरों अवसर पैदा कर रही है। हम सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था हैं। निकट भविष्य में युवाओं के लिए अवसर और ज्यादा बनने वाले हैं।

सभी लोग चाहते हैं कि उनके राज्य का हो विकास
सभी लोग चाहते हैं कि उनके राज्य का विकास हो। वे सभी अपने और अपने बच्चों के बेहतर भविष्य की कामना कर रहे हैं। इसलिए जाति, धर्म, वंशवाद की राजनीति करने वाले दलों को जनता लगातार कमजोर कर रही है। - नरेंद्र मोदी, प्रधानमंत्री

जातिवाद-परिवारवाद पर भारी विकास की रफ्तार... इसी से बनेगी निर्णायक सरकार

हमारे ईमानदार प्रयासों से यूपी के लोगों में एक नया विश्वास जगा
डबल इंजन की सरकार का फायदा लोग समझने लगे हैं। डबल इंजन की सरकार की तेज गति के आगे घोर परिवारवादियों की सरकारों की सुस्त चाल कहीं टिक नहीं सकती।

आपने यूपी में प्रत्येक चरण के चुनाव में रैलियां की हैं, अब इस रण के आखिरी चरण पर पहुंच कर क्या तस्वीर देख रहे हैं?
मैं सबसे पहले यूपी के लोगों का, हमारी माताओं-बहनों-बेटियों और नौजवानों-किसानों का आभार व्यक्त करना चाहता हूं। छह चरणों में ही उन्होंने भाजपा और सहयोगी दलों की प्रचंड बहुमत वाली सरकार सुनिश्चित कर दी है। अपना भाई, बेटा, साथी मानकर उन्होंने हमें खूब आशीर्वाद दिया है। भाजपा पहले जैसी मजबूत और निर्णायक सरकार बनाएगी। लोग चौथी बार लगातार जातिवाद-परिवारवाद से ऊपर उठकर विकासवाद और राष्ट्रवाद के नाम पर वोट कर रहे हैं।

उत्तर प्रदेश में योगी जी के नेतृत्व में कानून का राज स्थापित हुआ है। केंद्र और राज्य की डबल इंजन की सरकार का फायदा लोग समझने लगे हैं। चाहे गरीबों को घर, गैस कनेक्शन, बिजली, नल से जल देना हो या नई सड़कों व नए हाईवे का निर्माण, डबल इंजन की सरकार की तेज गति के आगे, घोर परिवारवादियों की सरकारों की सुस्त चाल कहीं टिक नहीं सकती। वैश्विक महामारी के इस दौर में पिछले 2 साल से यूपी के 15 करोड़ लोगों को मुफ्त राशन दिया जा रहा है।

इतनी बड़ी आबादी वाले प्रदेश में हमने अभूतपूर्व तेजी से टीकाकरण किया। टीके के सुरक्षा कवच की वजह से स्कूल-कॉलेज खुले हैं और व्यापार-कारोबार में भी तेजी आई है। भाजपा सरकार के ईमानदार प्रयासों की वजह से यूपी के लोगों में एक नया विश्वास पैदा हुआ है। आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, आध्यात्मिक हर क्षेत्र में विकास के हमारे कार्यों की जनता सराहना कर रही है। 10 मार्च के बाद भाजपा सरकार, इन कार्यों को और तेजी से आगे बढ़ाएगी। पहले डीबीटी का मतलब होता था डायरेक्ट बेनिफिट टु फैमिली उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर में लोग हमें दोबारा अवसर देना चाहते हैं। पंजाब के मेरे भाई-बहन वहां की भ्रष्ट, परिवारवादी और नाकाम सरकारों से त्रस्त हो चुके हैं।

पंजाब, उत्तराखंड, गोवा व मणिपुर में भी आपने रैलियां की हैं, आपका क्या आकलन है ?

देखिए, भाजपा की सरकार, चाहे किसी राज्य में हो, लोगों की सेवा की भावना से काम करती है। गरीबों व मध्य वर्ग का जीवन आसान बने, व्यापार-कारोबार और निवेश के लिए उचित वातावरण रहे, यह हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता होती है। उत्तराखंड, गोवा, मणिपुर के भी लोग पहले की सरकारों के रवैये और हमारी सरकार की कार्यसंस्कृति के फर्क को साफ महसूस करते हैं। भाजपा की सरकारों ने आगे बढ़कर गरीबों को समस्त विकास योजनाओं का फायदा पहुंचाया है। पहले की सरकारों के लिए डीबीटी का मतलब होता था, डायरेक्ट बेनिफिट टु फैमिली।

हमारी सरकार ने डीबीटी को डायरेक्ट बेनिफिट टु पीपल बनाया। इससे भ्रष्टाचार कम हुआ है, सरकार की योजनाओं का लाभ, बिना लीकेज सीधे लोगों के बैंक खातों में जा रहा है। वे लोग टेक्नोलॉजी को तोड़-मरोड़ कर, अनेकों फर्जी कंपनियां तैयार कर, अनेकों कागजी लोग बनाकर, जनता का पैसा लूटते थे। हमारी सरकार ये सुनिश्चित कर रही है कि टेक्नोलॉजी का सही इस्तेमाल करके लोगों को उनका वाजिब हक मिले। यह एक बड़ी वजह है कि लोगों में जातिवादी और परिवारवादी नेताओं पर आश्रित रहने की भावना खत्म होने लगी है।

अब हर जगह विकास, कानून-व्यवस्था और सुरक्षा के मुद्दे को जगह मिलने लगी है। उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर में लोगों ने हमारे इन सब कार्यों को देखा है, इसलिए वे सब हमें सेवा का दोबारा अवसर देना चाहते हैं। पंजाब के मेरे भाई-बहन अब वहां की भ्रष्ट, परिवारवादी और नाकाम सरकारों से त्रस्त हो चुके हैं। उनमें बदलाव की गहरी इच्छा दिखी है। वे भाजपा को उम्मीद भरी नजरों से देख रहे हैं।

यूपी का हर व्यक्ति इस बात का गर्व करता है कि उत्तर प्रदेश बीमारू राज्य नहीं रहा, बल्कि देश के विकास में एक नया अध्याय जोड़ रहा है

आप बार-बार कह रहे हैं, जीतेंगे तो योगी ही, आपने कहा, यूपी प्लस योगी यानी उपयोगी। क्या सीएम योगी के चेहरे पर ही भाजपा चुनाव लड़ रही है?

योगी जी ने यूपी की माताओं-बहनों-बेटियों, नौजवानों के हृदय में जगह बनाई है। यूपी में माफिया और अपराधियों पर लगाम कसी जा सकती है, पहले की सरकारों में इसकी उम्मीद तक यूपी के लोग छोड़ चुके थे। योगी जी ने एक तरफ ऐसे अराजक तत्वों पर सख्ती की, तो दूसरी तरफ गरीबों के लिए पूरी संवेदनशीलता से काम किया। भाजपा के कार्यकर्ताओं को भी गर्व है कि भाजपा की सरकार ने इस सेवा भाव से काम किया है। इसलिए योगी जी यूपी की माताओं-बहनों-बेटियों, किसानों-नौजवानों सभी के प्रतिनिधि हैं।

पहले की सरकारों ने यूपी को बड़ी-बड़ी घोषणाओं और झूठे वादों के सिवाय कुछ नहीं दिया। आज लोग देख रहे हैं कि योगी जी किस तरह स्थितियों को बदलने के लिए, यूपी के विकास के लिए निरंतर परिश्रम कर रहे हैं। इसीलिए यूपी की जनता कह रही है-यूपी+योगी, बहुत उपयोगी। मैं एक और पंक्ति जोड़ देता हूं-जीतेंगे तो योगी ही और उनकी जीत से जीतेगा सबका विकास, जीतेगा सबका विश्वास, जीतेगा सबका प्रयास।

योगी सरकार ने कानून-व्यवस्था को कायम करने में कहां तक सफलता हासिल की है?

उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था सुधर भी सकती है, लोग कभी इसकी कल्पना भी नहीं कर सकते थे। आप लोगों ने भी 2017 से पहले गुंडे-बदमाशों, अपराधी तत्वों और माफिया की करतूतों को विस्तार से रिपोर्ट किया है। कुशासन की वो यादें न तो अखबारों के आर्काइव से मिटी हैं और न ही हमारी बहन-बेटियां के मस्तिष्क से मिट पाएंगी। जिन दलित, पिछड़े परिवारों के घर जलाए गए, घरों-जमीनों पर अवैध कब्जे हुए और थाने में रिपोर्ट तक दर्ज नहीं होती थी, उनको वो अंधेरगर्दी आज भी याद है।

आज अगर राज्य की कानून-व्यवस्था आपको पटरी पर नजर आ रही है, तो यह योगी सरकार के दृढ़ संकल्प और अथक परिश्रम का ही परिणाम है। यूपी में यह कानून का राज ही है, जिसके चलते राज्य में होने वाले दंगे इतिहास का हिस्सा बन चुके हैं। बीते पांच साल में हर जाति-धर्म के त्याेहार सौहार्द भरे माहौल में संपन्न हुए हैं।

बीते पांच साल में यूपी के विकास को आप किस दृष्टि से देखते हैं?

विकास की योजनाओं को लेकर पहले की सरकारों का ढीला-ढाला कामकाज और भाजपा सरकार की तेज गति आज आंकड़ों में भी साफ नजर आती है। आज यूपी में एक्सप्रेस-वे डबल हो रहे हैं, हवाईअड्डों की संख्या भी डबल हो रही है। यूपी देश का एकमात्र राज्य है, जहां 5 शहरों में मेट्रो रेल हैं और 5 पर काम चल रहा है। पिछली सरकार के समय तक जहां 17 सरकारी मेडिकल कॉलेज थे, आज यह संख्या 35 से ज्यादा हो चुकी है। हर जिले में एक मेडिकल कॉलेज बनाने के लिए हम तेजी से काम कर रहे हैं।

साल 2017 तक जहां यूपी में मेडिकल की सिर्फ 1900 सीटें थीं, वहीं बीते 5 साल में 2100 नई सीटें जोड़ी गईं। शिक्षा क्षेत्र में देखें, अनेक नई यूनिवर्सिटी पांच साल में तैयार हुई। पिछली सरकार अपने कार्यकाल में जहां गरीबों के लिए कुछ हजार ही घर बनवा पाई थी, योगी जी की सरकार ने अपने पांच साल में 34 लाख से ज्यादा घर गरीबों को बनाकर दिए। पिछली सरकार में विकास का मतलब एक ही परिवार का विकास था। इन परिवारवादियों के राज में विकास इनसे शुरू होकर, इन पर ही खत्म होता था।

जबकि भाजपा सरकार सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास के मंत्र पर काम कर रही है। इस मंत्र पर चलते हुए गरीबों, दलितों, वंचितों, पिछड़ों, छोटे किसानों, महिलाओं, युवाओं और मध्य वर्ग समेत सभी लोगों की भलाई के लिए योजनाएं बनाई गईं और बिना किसी जातिगत और धार्मिक भेदभाव के लागू भी किया। आज यूपी का हर व्यक्ति इस बात का गर्व करता है कि उत्तर प्रदेश बीमारू राज्य नहीं रहा, बल्कि देश के विकास में एक नया अध्याय जोड़ रहा है।

डबल इंजन की सरकार ने हर परिस्थिति में, हर जरूरतमंद की, कतार में खड़े अंतिम व्यक्ति तक की सेवा के संकल्प को पूरा करने का प्रयास किया है

सूबे में सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों का नया वर्ग खड़ा हो गया है। इससे भाजपा को कितना लाभ मिलने की संभावना है?

आप जिसे लाभार्थियों का नया वर्ग कह रहे हैं, मैं उन्हें विकास का नया योद्धा मानता हूं। ये वैसे लोग हैं, जो अब अपनी जरूरतों से आगे बढ़कर देश के विकास में दमखम दिखाने को तैयार हैं। आप ये पूछ रहे हैं कि इससे भाजपा को क्या लाभ मिलने वाला है, लेकिन इससे देश को जो लाभ मिलने वाला है, उसकी तो आप कल्पना भी नहीं कर सकते। यही नहीं, आपका सवाल अगर जनता-जनार्दन की दुखती रग पर हाथ रखने जैसा है, तो सत्ता में दशकों तक बैठे लोगों को आईना भी दिखाने वाला है।

आज उत्तर प्रदेश के लोगों को अगर मकान, बिजली-पानी कनेक्शन, शौचालय, गैस कनेक्शन मिल रहे हैं, तो यह हमारी उपलब्धियों के साथ-साथ पुरानी सरकारों के कुशासन का भी प्रतिबिंब हैं। इतने दशकों तक इतनी मूल सुविधाओं से सामान्य जन को वंचित रखने का पाप इन्होंने किया है। हमारी डबल इंजन की सरकार ने हर परिस्थिति में, हर जरूरतमंद की, कतार में खड़े अंतिम व्यक्ति तक की सेवा के संकल्प को पूरा करने का प्रयास किया है।

भाजपा के अधिकतर नेताओं का चुनाव अभियान नकारात्मक हो गया है, विकास और किसानों, युवाओं के मुद्दे गायब हैं?

देखिए मैं अमर उजाला की संपादकीय टीम को एक टास्क देता हूं। आप लोग हमारे संबोधनों का एक वर्ड क्लाउड बनाइए और खुद देखिए। जो शब्द प्रमुखता से बोले गए हैं, वो होंगे घर, राशन, वैक्सीन, कानून व्यवस्था, किसान, इथेनॉल ब्लेंडिंग, हाईवे-एक्सप्रेसवे, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार के अवसर, यूपी का इन्फ्रास्ट्रक्चर। वर्ड क्लाउड में 90 प्रतिशत शब्द आपको यही मिलेंगे। हां, 10 प्रतिशत ऐसा भी हो सकता है कि जहां हम विरोधियों की झूठी घोषणाओं और झूठे आरोपों का जवाब दे रहे होंगे।

मैंने हमेशा अपने संबोधनों में महिला हितों, नौजवानों-किसानों के हितों, रोजगार के अवसरों की बात की है। शुरू से ही सकारात्मकता, सर्वांगीण और समावेशी विकास की सोच को अपनाया है। भाजपा का पूरा चुनाव प्रचार अभियान केंद्र सरकार और राज्य सरकार यानी डबल इंजन की सरकारों द्वारा किए गए चौतरफा विकास के इर्द-गिर्द ही रहा है।

खेती में सुधार के तीन कानून वापस ले लिए गए। अब खेती और खेतिहर की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए क्या रणनीति होगी?

किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए पिछले 7 वर्षों में हम एक केंद्रित और व्यापक रणनीति के साथ काम कर रहे हैं। पहले सिर्फ उत्पादन बढ़ाने पर ध्यान दिया जाता था, हमने उत्पादन के साथ-साथ किसानों के लाभ पर भी फोकस किया। हमने बीज से बाजार तक किसानों के लिए नई व्यवस्था बनाने का प्रयास किया, उनमें सुधार का प्रयास किया। छोटे किसानों की छोटी-छोटी जरूरतों को समझा और उसके लिए कार्य किया। पीएम किसान सम्मान निधि हो, करोड़ों किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड हो, फसल बीमा योजना का विस्तार हो, दशकों से अधूरी पड़ी सिंचाई परियोजनाएं पूरी हों, किसानों को आसानी से कम ब्याज दरों पर ऋण मिले, हमने इन सबका ध्यान रखा। हमने पशुपालकों और मछुआरों को भी किसान क्रेडिट कार्ड सुविधा से जोड़ा।

ये हमारी ही सरकार है जो एमएसपी पर सरकारी खरीद पर इतना जोर दे रही है। मैं अमर उजाला के पाठकों को कुछ आंकड़े भी दूंगा। 2007 से 2014 के बीच किसानों से करीब 2.5 लाख करोड़ रुपये का धान खरीदा गया था। हमारी सरकार के दौरान सात साल में लगभग 7.5 लाख करोड़ रुपये का धान किसानों से एमएसपी पर खरीदा गया है। इसी तरह दलहन के लिए एमएसपी भुगतान लगभग 75 गुना बढ़ा है। एक और अहम बात यह भी है कि एमएसपी का यह पैसा डीबीटी के जरिये सीधे किसानों के खाते में पहुंच रहा है।

किसानों की आय बढ़ाने के लिए हमारी सरकार कृषि निर्यात को भी बढ़ावा दे रही है। हम खेती को आधुनिक तकनीक से भी जोड़ रहे हैं। आप देख ही रहे हैं कि किसानों में ड्रोन को लेकर कितना उत्साह है। ड्रोन किसानों की फसलों की देखभाल से लेकर उपज को बाजारों तक पहुंचाने तक, अनेक प्रकार से किसानों की मदद करेंगे। किसानों के लिए हमारे प्रयास एकाध कदम पर आधारित नहीं रहे हैं। यह एक संपूर्ण और व्यापक योजना है, जिस पर हम काम कर रहे हैं और यह फलदायी भी हो रहा है।

यूपी से 2024 के समीकरण साधने की तैयारी अभी से शुरू हो गई है?

समीकरण उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है, जो चुनावी राजनीति को गणित के खेल के रूप में देखते हैं। इसको जोड़ो, उसे तोड़ो तो चुनाव जीत जाएंगे। लेकिन चुनाव अब गुणा-भाग नहीं, बल्कि जनता के बीच आपकी केमिस्ट्री से चलते हैं। ऐसी केमिस्ट्री, जहां लोग प्रगति के लिए उत्सुक हैं और सरकार उनकी सेवा करने के लिए। ऐसी केमिस्ट्री जो लोगों को एक बेहतर कल के लिए एक साथ लाती है। चुनाव आते हैं और चले जाते हैं, लेकिन इन चुनावों के बीच आपका काम लोगों के लिए मायने रखता है। जन कल्याण के लिए काम करने वालों के लिए अगले चुनाव की तैयारी उसी दिन से शुरू हो जाती है, जिस दिन वो पिछला चुनाव जीतते हैं। क्योंकि वे पहले दिन से ही काम कर रहे हैं।

पंजाब में आप लंबे अरसे बाद अकाली दल के बिना चुनाव लड़े हैं, नए सहयोगियों के साथ कैसा रिस्पांस मिला?

पंजाब बॉर्डर स्टेट है, मेहनतकश और राष्ट्रभक्ति से भरे हुए लोगों का प्रदेश। स्वाभाविक है कि पंजाब के लोग भाजपा को अपना आशीर्वाद देंगे। जो भारत की सुरक्षा के प्रति ही गंभीर नहीं, जो भारत को एक राष्ट्र ही नहीं मानते, देश की अखंडता व पंजाब की सुरक्षा उनके हवाले नहीं की जा सकती, यह लोग जानते हैं। भाजपा के नेतृत्व में एनडीए गठबंधन ने पंजाब की सुरक्षा और विकास का जो संकल्प सामने रखा है, उसको पंजाब की जनता ने भरपूर आशीर्वाद दिया है। पंजाब के लोग भी डबल इंजन की सरकार की ताकत को समझते हैं।

ड्रग्स, सीमा पार से तस्करी की कोशिशें, किसानों की स्थिति, रोजगार के अवसर, अहम मुद्दे हैं। आज आप देखिए, इतनी संभावनाओं से भरा पूरा पंजाब, लेकिन इंडस्ट्री? वो तो पंजाब को छोड़कर जा रही हैं। कांग्रेस सरकार की नीतियों के कारण पंजाब में निवेश को लेकर उत्साह बहुत कम रहा है। इन स्थितियों को डबल इंजन की सरकार ही बदल सकती है। हमने अपने घोषणा-पत्र में अनेक संकल्प लिए हैं। पंजाब में बेहतर इन्फ्रास्ट्रक्चर होगा, पारदर्शी सरकार होगी तो न उद्योगों को पलायन करना पड़ेगा, न नौजवानों को!

काशी में आखिरी दो दिन प्रवास के मायने?

देखिए, काशी में बिताया हर पल मेरे लिए अनमोल होता है। मुझे लगता है कि काशी के लोगों ने मुझे इतना स्नेह दिया है, इतना आशीर्वाद दिया है कि मैं काशी के लिए जितना करूं, वो कम ही है। मैं यहां आता हूं तो अपने संसदीय क्षेत्र के लोगों से मिलता हूं, बनारस की सड़कों पर टहलता हूं, कभी ठंडई, कभी चाय पीता हूं, मां गंगा को स्पर्श कर आने वाली हवा मुझे अभिभूत कर देती है।

इस पुरातन शहर में जो ऊर्जा हर गली, हर घाट, हर क्षेत्र में हजारों वर्षों से व्याप्त है, उसे मैं भीतर तक महसूस करता हूं। ये अनुभव ही कुछ और होता है। मेरे लिए तो पूरा बनारस ही एक मंदिर की तरह है। यहां का हर जन, मेरे लिए देवी-देवता है। उनकी सेवा करने के लिए, साथ समय बिताने के लिए कई बार तो मुझे दो दिन भी कम लगते हैं।
समाज को आपस में लड़ाकर आगे बढ़ने वालों की राजनीति में संभावनाएं अब हो रहीं खत्म

Source : Amar Ujala