नवभारत टाइम्स के साथ श्री नरेन्द्र मोदी के इंटरव्यू के प्रमुख अंश:

करीब दो महीने तक चले मैराथन इलेक्शन कैंपेन में जमकर हुआ नमो-नमो का जाप। जाहिर है, बीजेपी के पीएम कैंडिडेट नरेंद्र मोदी को एनडीए जहां हीरो के रूप में पेश कर रहा था, वहीं यूपीए और अन्य दल उन्हें विलेन साबित करने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ रहे थे। लेकिन भारतीय लोकतंत्र में पहली बार ऐसा चुनाव देखने को मिला, जो सत्तापक्ष की मुखालफत के बजाय विपक्ष के एक 'कद्दावर' पीएम कैंडिडेट को केंद्र में रखकर लड़ा गया। ऐसे में मोदी का आभामंडल पूरे चुनावी अभियान के दौरान 'विराट' होता चला गया। मौजूदा चुनावी माहौल में जो कटुता देखने को मिली, उस बारे में मोदी का क्या नजरिया है? यदि मोदी पीएम बनते हैं, तो उनका विकास का रोड मैप क्या होगा? मोदी से एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में गुलशन राय खत्री और नरेंद्र नाथ ने ऐसे ही कई अहम सवाल पूछे, पेश है खास अंशः

1-एनबीटीः चुनाव प्रचार के दौरान विभिन्न राजनीतिक दलों में कड़वाहट बढ़ी है। क्या इससे बचा जा सकता था? क्या आने वाले दिनों में इसका असर सरकार और विपक्ष के संबंधों पर भी देखने को मिल सकता है?

नरेंद्र मोदीः यह बात सही है कि जैसे-जैसे चुनावी प्रचार परवान चढ़ता गया, भाषणों और वक्तव्यों में हमारे विरोधियों ने सारी मर्यादाएं तोड़ दी हैं, खासकर शुरुआती राउंड में भारी पोलिंग के बाद सहमे कांग्रेस और उसके साथी दलों ने गाली-गलौज करने में कोई कसर बाकी नहीं रखी। शुरुआत में हमने यह तय किया था कि इस पूरे चुनाव को विकास और सुशासन जैसे सकारात्मक मुद्दों पर लड़ेंगे। यदि अन्य राजनीतिक दल भी इस पहल में हमारा साथ देते तो शायद भारतीय चुनावी राजनीति में एक नया अध्याय जुड़ जाता। लेकिन अफसोस, हमारे विरोधी दलों ने चुनाव को उसी पुरानी जाति और संप्रदाय की राजनीति की तरफ धकेलने में ही अपना सारा जोर लगा दिया। इसके बावजूद यह पहला चुनाव है जिसमें बीजेपी जैसी कोई बड़ी पार्टी विकास और सुशासन के मुद्दे पर चुनाव लड़ रही है। पिछले छह महीने से मेरा यह ईमानदार और गंभीर प्रयास रहा है कि हम नागरिकों के असली मुद्दों को उठाएं।

मीडिया का यह कहना कि चुनाव के दौरान पैदा हुई कटुता का प्रभाव चुनाव के बाद भी देखने को मिलेगा, एक अतिशयोक्तिपूर्ण सोच है। दरअसल, जमीनी हकीकत ऐसी नहीं है। अक्सर आपने देखा होगा कि चुनावी समर में एक-दूसरे पर तीखे वार करने वाले नेता जब अनायास किसी हवाई अड्डे पर मिलते हैं, तब उनके बीच बड़े ही सहज ढंग से बातचीत होती है। ऐसा नहीं है कि चुनावी जंग की तल्खियां राजनेताओं के आपसी रिश्ते पर हावी हो जाती है। गर्मजोशी के साथ मिलने के बाद जब वे फिर रैलियों में पहुंचते हैं तो आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला भी शुरू हो जाता है। यह समझना होगा कि राजनीति में प्रतिस्पर्धा तो होती है, लेकिन दुश्मनी कतई नहीं। एक अहम बात और कहना चाहूंगा। इधर, पिछले कुछ समय से सार्वजनिक जीवन में व्यंग्य और विनोद का चलन खत्म-सा होता जा रहा है। सार्वजनिक जीवन में गंभीरता के साथ-साथ व्यंग्य और विनोद का होना भी जरूरी है, आपसी रिश्तों में उदासीनता के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए।

मालूम हो कि व्यंग्य, कार्टून तथा लतीफों की दुनिया में भी हम राजनेताओं की मौजूदगी व्यापक स्तर पर होती है। इन दिनों 'मॉरल पुलिसिंग' का दौर भी चल रहा है। एक हद तक तो यह सही है, लेकिन इसका अतिरेक निश्चित ही गैरजरूरी प्रतीत होता है। जहां तक आने वाले दिनों में इसके असर की बात है तो हम न तो बदले की भावना से कोई काम करेंगे और न ही चुनावी प्रतिद्वंद्विता को चुनाव पश्चात आगे ले जाएंगे। हम पूरी शालीनता के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन करेंगे और हमारे विरोधियों के साथ भी आपसी सहयोग से देश के विकास के लिए कार्यरत रहेंगे।

2-एनबीटीः अगर आप सत्ता में आते हैं तो यह देश आपसे क्या उम्मीद करे? आप विपक्ष को किस तरह से साथ लेकर चलेंगे और विपक्ष को साथ लेकर चलने के लिए क्या कदम उठाएंगे?

नरेंद्र मोदीः हम इतना सुनिश्चित करेंगे कि लोगों की जो आशाएं और अपेक्षाएं हमसे जगी हैं, उन्हें पूरा करने के लिए पुरजोर मेहनत करेंगे। हमारा यह प्रयास होगा कि देश का विकास करने और सुशासन प्रदान करने के लिए हम दिन-रात कार्यरत रहेंगे। देश की प्रगति और लोकतंत्र की मजबूती के लिए जागरुक विपक्ष का होना आवश्यक है। मुद्दों के आधार पर विरोध की गुंजाइश को समझा जा सकता है। इसके लिए हम खुले मन से चर्चा को तैयार रहेंगे। देश हित में आम राय बनाकर चलना हमारी कार्यशैली का हिस्सा होगा।

3-एनबीटीः इस देश में 90 के दशक में उदारवादी आर्थिक नीतियां शुरू हुई थीं। क्या ये आगे भी जारी रहेंगी या फिर वक्त के साथ इनमें कुछ बदलाव करने की जरूरत है?

नरेंद्र मोदीः कोई भी देश या समाज यदि एक ही जगह स्थिर रह जाए तो वह विकास नहीं कर सकता। समयानुरूप बदलाव की आवश्यकता हर देश में होती है। अर्थव्यवस्था में भी निरंतर गति बनाए रखने के लिए सुधार जरूरी है। हम हर उस कदम को उठाएंगे, जिससे अर्थव्यवस्था सुधरे, विकास की गति बढ़े और रोजगार के अवसर पैदा हों।

4-एनबीटीः जीएसटी और मल्टी-ब्रांड रिटेल  में एफडीआई पर आपकी क्या राय है? क्या यह होना चाहिए या नहीं?

नरेंद्र मोदीः जीएसटी राजस्व में बढ़ोतरी का सरल और बेहतर उपाय है। राज्यों को मिलने वाली सहायता राशि में भेदभावपूर्ण रवैया अपनाने की वजह से जीएसटी स्थगित हो गया है। लेकिन हमारी सरकार जीएसटी की सभी बाधाओं और उसमें होने वाले करप्शन और अनुचित देरी की संभावनाओं को दूर करने के लिए सकारात्मक भूमिका अदा करेगी। जीएसटी के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए आईटी नेटवर्क का देशव्यापी ढांचा खड़ा करना जरूरी है, मगर यूपीए सरकार ने इस दिशा में एक कदम भी नहीं बढ़ाया। तमाम अहम मामलों में देरी या कहें कि 'पॉलिसी पैरालिसिस' की स्थिति के लिए राज्य सरकारों को बदनाम करने की यूपीए सरकार की बीमार मानसिकता रही है। मल्टी-ब्रांड रिटेल में एफडीआई का जहां तक सवाल है, हमारी पार्टी का आधिकारिक रुख हमारे मेनिफेस्टो में साफ कर दिया गया है।

5-एनबीटीः आप अक्सर देश में बुलेट ट्रेनें चलाने और सौ नए शहर बसाने की वकालत करते रहे हैं। इससे देश का आर्थिक विकास तो तेज होगा, लेकिन इसके लिए भारी-भरकम राशि का इंतजाम कहां से होगा? मुंबई-अहमदाबाद के बीच ही एक बुलेट ट्रेन चलाने के लिए करीब 60 हजार करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है तो क्या इस तरह की बुलेट ट्रेनें देश भर में चलाने पर वे आर्थिक लिहाज से कामयाब होंगी?

नरेंद्र मोदीः हमारे देश का दुर्भाग्य यह है कि अब तक जिस प्रकार की सरकारें यहां चलाई गईं, उसमें मानों गरीबी एक अभिशाप नहीं वरन एक वरदान हो, एक आवश्यकता हो। भले वह चाहे वोट बैंक की राजनीति के लिए हो या सत्तारूढ़ राजनेताओं में दीर्घदृष्टि के अभाव चलते हो। नतीजा यह, कि हम न कुछ बड़ा सोच पाते हैं, न कुछ विश्वस्तरीय करने का प्रयास करते हैं। दूसरी तरफ, आजादी के समय भारत जैसी ही हालात वाले साउथ कोरिया जैसे छोटे देश एक व्यापक सोच के कारण विकास की बुलंदियों को छू रहे हैं। अटल जी की सरकार में स्वर्णिम चतुर्भुज जैसी योजनाओं को लागू करने की एक अहम शुरुआत हुई। वह एक प्रयास था कि भारतीय नागरिकों को भी वर्ल्ड क्लास इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध करवाया जाए। दुर्भाग्यवश पिछले दस साल में हम उस दिशा में आगे बढ़ने के बजाय बहुत पीछे धकेल दिए गए हैं। मेरा मानना है कि यदि हमारा विजन बड़ा हो, उसके अनुरूप पुरुषार्थ करने की क्षमता और तैयारी हो तो हमारा देश भी प्रगति के पथ पर आगे बढ़ सकता है। हम भी अपने नागरिकों को क्रमशः हर क्षेत्र में वर्ल्ड क्लास इंफ्रास्ट्रक्चर मुहैया करा सकते हैं। रही पैसों की बात मुझे नहीं लगता कि मौजूदा समय में ऐसी योजनाओं के लिए पैसे जुटाना मुश्किल है।

6-एनबीटीः पाक समेत पड़ोसी देशों के साथ इस वक्त भारत के रिश्तों की आपको जानकारी है? क्या इन रिश्तों को बेहतर बनाने के लिए आपके दिमाग में कोई योजना है? यदि हां, तो वह क्या है?

नरेंद्र मोदीः आज जब आतंकवाद ने पूरी दुनिया को हिला कर रख दिया है और हमारा देश भी कई मोर्चों पर इससे मुकाबला कर रहा है। ऐसे में, यह जरूरी हो जाता है कि एक स्वस्थ और मजबूत रिश्ते की बुनियाद आतंकवाद के खिलाफ साथ मिलकर लड़ने की रणनीति पर रखी जाए। जब तक कोई भी पड़ोसी देश भारत के खिलाफ आतंकवाद को बढ़ावा देगा तब तक उसके साथ अच्छे रिश्ते बनाना मुश्किल है। मेरा मानना है कि हमारी विदेश नीति आपसी सम्मान और भाईचारे पर आधारित होनी चाहिए। इसी तरह अन्य देशों के साथ हमारे संबंध भी बराबरी और परस्परता पर आधारित होने चाहिए। देश हित सर्वोपरि रखा जाना चाहिए। हम न किसी को आंख दिखाना चाहते हैं और न ही चाहते हैं कि कोई हमें आंख दिखाए। हम चाहते हैं आंख से आंख मिलाकर बात करें।

7-एनबीटीः केंद्र और राज्यों के बीच भी आप पीएम और सीएम टीम की बात करते रहे हैं, लेकिन क्या राज्यों में विपक्षी दलों की सरकारों के होते हुए भी यह संभव है? यदि हां, तो केंद्र और राज्यों के बीच संबंधों को किस तरह से और कौन सी नई शक्ल देंगे?

नरेंद्र मोदीः मेरी सोच के मुताबिक टीम इंडिया में प्रधानमंत्री और सभी मुख्यमंत्री शामिल होने चाहिए। प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री साथ मिलकर बतौर टीम काम करें। यदि सब साथ मिलकर काम करें, तभी हम सही मायने में प्रगति कर सकते हैं। सारी निर्णय प्रक्रिया में राज्यों को बराबर का भागीदार बनाया जाए। बड़े प्रॉजेक्ट को मंजूरी के वक्त राज्य सरकार को भी साथ रखा जाए। यह हमारी प्राथमिकता होगी कि सभी राज्यों को विकास की प्रक्रिया में बराबर का साझीदार समझा जाए। जब हम भागीदारी की बात करते हैं, तो इससे हमारी साफ नीयत का पता चलता है। यदि नीयत सही है, तो राज्यों में विपक्षी दल की सरकार का होना रुकावट की वजह नहीं बनेगा।

8-एनबीटीः इस वक्त महंगाई की मार से देश के लोग त्रस्त हैं। महंगाई, राज्य सरकारों की पहल के बिना खत्म नहीं हो सकती। ऐसे में राज्यों को इसके लिए कैसे तैयार करेंगे?

नरेंद्र मोदीः महंगाई को नियंत्रित करने के लिए डिमांड-सप्लाई मिसमैच यानी कि मांग-आपूर्ति के असंतुलन को दूर करने की आवश्यकता है। इसके लिए खाद्यान्न और अन्य पदार्थों की पर्याप्त मात्रा में उपलब्धि सुनिश्चित कराना जरूरी है। यह तभी संभव हो पाएगा, जब कृषि पर आवश्यक बल दिया जाए और सिंचाई सुविधाओं का विकास किया जाए। इस बारे में एक नई सोच के साथ काम करने की जरूरत है। हमारी पार्टी के मेनिफेस्टो में कृषि क्षेत्र में क्रांतिकारी सुधार के लिए 'प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना' का उल्लेख किया गया है। इसके अलावा, आज हमारे देश में कृषि क्षेत्र का कोई रीयल टाइम डेटा उपलब्ध नहीं है। लिहाजा, कृषि विकास के लिए योजनाएं बनाने का कोई सटीक मतलब नहीं रह जाता। हम कृषि क्षेत्र का रीयल टाइम डेटा हासिल कर उसके मुताबिक पॉलिसी और प्रोग्राम बनाएंगे। खाद्यान्न की कीमतों को स्थिर रखने के लिए विशेष फंड बनाया जाएगा। हम गुजरात की श्वेत क्रांति का देशभर में प्रसार करना चाहेंगे।

9-एनबीटीः इस वक्त देश की जनता की इतनी सारी उम्मीदें आपसे जुड़ गई हैं। क्या आपको इन उम्मीदों का बोझ महसूस होता है? इन पर खरा उतरने के लिए आपकी क्या तैयारी है?

नरेंद्र मोदीः दरअसल, पिछले दशकों के दौरान राजनीति के स्तर में जो गिरावट आई है, उसके चलते सरकारों के प्रति आम जनमानस में निराशा और तिरस्कार की भावना बन गई थी। बड़े लंबे समय बाद चुनावी राजनीति में लोगों की दिलचस्पी वापस आई है, मतदाताओं का भरोसा पुनःस्थापित होता दिख रहा है। समूचे देश में एक आशा का संचार हुआ है। मुझे इस बात का अहसास है कि बीजेपी से देशभर में बहुत ज्यादा उम्मीदें बांधी जा रही हैं। लेकिन मुझे लगता है कि अपने नागरिकों को भी सपने संजोने का हक है, आशावादी होने का अधिकार है। उम्मीदें बांधने की इजाजत होनी चाहिए, इसमें कुछ बुरा नहीं है। इन सारी बातों का हमें पूरा ख्याल है और उसी के अनुसार कठिन से कठिन परिश्रम करने की मानसिक तैयारी हम कर चुके हैं।

10-एनबीटीः विदेश से काला धन लाना आसान नहीं है? कई विदेशी कानून इसमें अड़चन बने हुए हैं। आप इन्हें कैसे दूर करेंगे और यदि काला धन वापस आता है तो इससे देश के लोगों को क्या फायदा होगा? आपकी नजर में कितना काला धन हो सकता है?

नरेंद्र मोदीः सबसे पहली बात है काला धन वापस लाने की मंशा और संकल्पशक्ति। बीजेपी ने काले धने को वापस लाने की अपनी मंशा साफ तौर पर व्यक्त की है। हम मानते हैं कि काले धन की समस्या एक बड़ी चुनौती है। यह सिर्फ टैक्स चोरी ही नहीं बल्कि देशद्रोही प्रवृत्ति भी है। काला धन जो पैदा हुआ है और विदेशों में जमा हो रहा है, वह आगे चलकर गैर-कानूनी और देशद्रोही गतिविधियों की दिशा में चला जाता है। हमारे लिए यह अत्यंत अहम मुद्दा है। मैं देशवासियों को भरोसा दिलाता हूं कि काला धन वापस लाने की मेरी व्यक्तिगत प्रतिबद्धता है और हम तत्काल ही एक टास्क फोर्स का गठन करेंगे और इसके लिए जरूरी कानूनी सुधार के साथ-साथ कानूनी फ्रेमवर्क-ढांचे में जरूरी बदलाव भी लाएंगे। इतना ही नहीं, देश में ऐसा काला धन वापस लाकर उसका आंशिक हिस्सा ईमानदार करदाताओं विशेषकर सैलरीज क्लास के टैक्स पेयर्स को प्रदान करेंगे। यह जरूरी है कि हमारी कर-व्यवस्था-टैक्स सिस्टम ईमानदार टैक्स पेयर्स को प्रोत्साहन और इनाम देने वाली कर चोरों के खिलाफ सख्ती से पेश आने वाली हो।

11-एनबीटीः इस वक्त लोकसभा चुनाव अंतिम चरण में है? आपको क्या लग रहा है कि अगली लोकसभा का सीन क्या रहने वाला है?

नरेंद्र मोदीः अब तस्वीर बिल्कुल साफ हो गई है कि देश की जनता बदलाव चाहती है। महंगाई, भ्रष्टाचार और घोटालों के दलदल में फंसी यूपीए सरकार ने देशवासियों को सिवाय नाउम्मीदी के कुछ और नहीं दिया। अब तक 9 में से 8 चरणों का मतदान पूरा हो चुका है। और इन चरणों में हुए मतदान के रुझान से साफ हो गया है कि यूपीए सरकार का सत्ता से जाना वोटरों ने तय कर दिया है। वहीं, बीजेपी और साथी दलों की सरकार की नींव भी रख दी गई है। अब सिर्फ 41 सीटों पर पोलिंग होनी है। मुझे आशा है कि देश के अन्य राज्यों की ही तरह जहां मतदान होना बाकी है, वहां मतदाता बीजेपी और साथी दलों को अपार समर्थन देने वाले हैं।

12-एनबीटीः आप कहते हैं कि कांग्रेस का आंकड़ा दहाई तक ही पहुंच पाएगा तो आपको क्या लगता है कि सबसे बड़ा विपक्षी दल कौन होगा?

नरेंद्र मोदीः जी हां! इन चुनावों में कांग्रेस अपने चुनावी इतिहास के सबसे खराब प्रदर्शन का एक नया रेकॉर्ड बनाने जा रही है। बहुत संभव है कि वह दहाई के आंकड़े तक ही सिमट कर रह जाएगी। इन सबके बीच कांग्रेस के आला नेता पार्टी को प्रासंगिक बनाए रखने की खातिर परिस्थितियों को किस तरह मैनेज करते हैं, यह तो भविष्य के गर्भ में छिपा है। हम तो चाहते हैं कि सबसे बड़ा विपक्ष चाहे कोई भी हो, वह सकारात्मक राजनीति करे और देश की प्रगति और खुशहाली के लिए जिम्मेदार राजनीति की एक स्वच्छ परंपरा का पालन करे।

13-एनबीटीः आप कांग्रेस में किसी नेता को पीएम लायक मानते हैं? यदि हां, तो वह कौन है?

नरेंद्र मोदीः देखिए, मैं समझता हूं कि आज कांग्रेस नेतृत्वविहीन पार्टी हो गई है। जनता से जुड़ा कोई कद्दावर नेता, जिसकी आवाज कश्मीर से कन्याकुमारी तक गूंजती हो, कांग्रेस के पास नहीं है। गांधी परिवार की भक्ति और परिक्रमा ही कांग्रेस के नेताओं का एकसूत्रीय अजेंडा है। ऐसे में पीएम पद के लायक नेता ढूंढ़ना बहुत दूर की कौड़ी है। इंदिरा जी के जमाने से ही किसी नेता का कद इतना बड़ा नहीं होने दिया गया कि वह आगे चलकर गांधी परिवार के लिए चुनौती साबित हो।

14-एनबीटीः डॉ. मनमोहन सिंह को निजी तौर पर कैसे आंकते हैं? क्या वे पीएम के रूप में ही अच्छे साबित नहीं हुए या फिर निजी तौर पर उनमें अच्छे गुण भी हैं?

नरेंद्र मोदीः देखिए, किसी भी इंसान के आकलन/मूल्यांकन के लिए उसे करीब से देखना जरूरी है। डॉ. मनमोहन सिंह के साथ बहुत ज्यादा मुलाकात तो नहीं हुई। हां, कुछ आधिकारिक मुलाकातें जरूर हुई हैं, लेकिन उन चंद मुलाकातों के आधार पर मैं उनके बारे में कोई राय कायम करना उचित नहीं समझता। रही बात बतौर प्रधानमंत्री उनके आकलन की तो उनके निराशाजनक कार्यकाल को देखकर देश हकीकत समझ चुका है।

15-एनबीटीः अगर आप सत्ता में आए तो वे ऐसे पांच काम कौन से हैं, जो आप सबसे पहले करना चाहेंगे?

नरेंद्र मोदीः सरकार और सरकारी व्यवस्था में भरोसा लौटाना हमारा पहला काम होगा। दूसरा, अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करने के लिए कारगर कदम उठाना हमारी प्राथमिकता होगी। तीसरा, महंगाई को नियंत्रित करने के लिए त्वरित कदम उठाए जाएंगे और चौथा, सरकारी व्यवस्था में जान फूंकना और निर्णय प्रक्रिया को कारगर बनाना होगा। पांचवां काम पॉलिसी पैरालिसिस से निजात पाना होगा।

16-एनबीटीः क्या आपको लगता है कि आपके पीएम पद तक पहुंचने की राह में कोई रुकावट बन सकता है?

नरेंद्र मोदीः देखिए, एक सामान्य परिवार का बेटा आज यहां तक पहुंचा है। इस लंबे सामाजिक और राजनीतिक सफर में न जाने कितने लोगों का समर्थन, आशीर्वाद और दुआएं मुझे मिली हैं। मैं समझता हूं यह एक काल्पनिक सवाल है, जिसका हकीकत से कोई वास्ता नहीं है।

17-एनबीटीः वाजपेयी जी की याद आती है? क्या आपकी सरकार में उनके कामकाज की छवि नजर आएगी?

नरेंद्र मोदीः बीजेपी का एक सिपाही होने के नाते निश्चित रूप से वाजपेयी जी की याद तो आती ही है। भारत के इतिहास में एकमात्र पूर्णकालिक गैर-कांग्रेसी सरकार चलाने का यश उन्हें जाता है। आम जनता को ध्यान में रखते हुए ऐसे कई कार्य वाजपेयी जी ने किए थे, जो आज भी याद किए जाते हैं। चूंकि मैंने अपना राजनीतिक सफर वाजपेयी जी की छत्रछांव में ही तय किया है, लिहाजा यह लाजिमी है कि काम करने की उनकी विशिष्ट शैली और आम जनता से हमेशा सरोकार रखने की उनकी शिद्दतभरी आतुरता का मैं कायल रहा हूं। सबसे बड़ी बात, कांग्रेस शासनकाल में महंगाई से त्रस्त देश की जनता को जिस तरह से वाजपेयी जी की सरकार ने राहत दी थी, हम चाहेंगे कि आम जन को यह राहत एक बार फिर से मिले।

Courtesy: Navbharat Times

 

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"भारत को दुनिया की टॉप तीन AI सुपरपावर में से एक होना चाहिए": पीएम मोदी ने तय किया 2047 का विजन
February 17, 2026

इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026, देश की राजधानी में शुरू हो चुका है। यह पहली बार है जब ग्लोबल साउथ में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर इतने बड़े लेवल पर कोई ग्लोबल मीटिंग हो रही है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ANI की टेक्स्ट सर्विस को दिए एक खास इंटरव्यू में "सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय" की थीम के तहत होने वाले इस समिट की गाइडिंग स्पिरिट पर जोर दिया। इस समिट में विभिन्न देशों के राष्ट्राध्यक्ष और सरकार प्रमुख, मंत्री, ग्लोबल टेक्नोलॉजी लीडर्स नेता और उद्योग जगत के प्रतिनिधि शामिल हो रहे हैं। वे इस बात पर चर्चा करेंगे कि AI का इस्तेमाल कैसे समावेशी विकास को आगे बढ़ाने, सार्वजनिक व्यवस्थाओं को मजबूत करने और सतत विकास को गति देने में किया जा सकता है।

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने इंटरव्यू में इस नए युग के लिए भारत के विजन पर जोर दिया और कहा कि AI को पूरी तरह से ह्यूमन-सेंट्रिक रहते हुए ग्लोबल डेवलपमेंट को तेज करना चाहिए। इंटरव्यू का पूरा विवरण इस प्रकार है:

ANI: भारत ग्लोबल साउथ में पहली बार AI इम्पैक्ट समिट 2026 होस्ट कर रहा है। समिट का मोटो है "सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय"। इस समिट का विजन क्या है, और यह मोटो क्यों है?

पीएम नरेन्द्र मोदी: आज, AI एक सिविलाइज़ेशनल बदलाव के पॉइंट पर है। यह इंसानी काबिलियत को ऐसे तरीकों से बढ़ा सकता है जो पहले कभी नहीं हुए, लेकिन अगर इसे बिना गाइडेंस के छोड़ दिया जाए तो यह मौजूदा सोशल बुनियाद को भी टेस्ट कर सकता है। इसीलिए हमने जानबूझकर इस समिट को इम्पैक्ट के आस-पास बनाया है जो सिर्फ़ इनोवेशन ही नहीं, बल्कि सार्थक और बराबरी वाले नतीजे भी पक्का करता है। गाइड करने वाली भावना, "सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय", भारत की सिविलाइज़ेशनल सोच को दिखाती है। टेक्नोलॉजी का आखिरी मकसद 'सबका भला, सबकी खुशी' होना चाहिए। टेक्नोलॉजी इंसानियत की सेवा के लिए है, उसे बदलने के लिए नहीं। यह समिट लोगों, धरती और तरक्की के आस-पास बना है। AI सिस्टम दुनिया भर के समाजों में पैदा हुए ज्ञान और डेटा पर आधारित हैं। इसलिए, हम चाहते हैं कि AI के फायदे सभी तक पहुँचें, न कि सिर्फ़ शुरुआती अपनाने वाले ही इसे जमा करें। ग्लोबल साउथ में हो रहे पहले ग्लोबल AI समिट के तौर पर, भारत एक ऐसा प्लेटफॉर्म बना रहा है जो कम रिप्रेजेंटेशन वाली आवाज़ों और डेवलपमेंट की प्राथमिकताओं को बढ़ावा देता है। AI गवर्नेंस, इनक्लूसिव डेटासेट, क्लाइमेट एप्लीकेशन, एग्रीकल्चरल प्रोडक्टिविटी, पब्लिक हेल्थ और कई भाषाओं तक पहुँच हमारे लिए बाहरी मुद्दे नहीं हैं। वे सेंट्रल हैं। हमारा विज़न साफ़ है: AI को पूरी तरह से ह्यूमन-सेंट्रिक रहते हुए ग्लोबल डेवलपमेंट को तेज़ करना चाहिए।

ANI: आपने हमेशा एम्पावरमेंट और डेवलपमेंट के लिए टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल की बात की है। आप विकसित भारत 2047 में AI की भूमिका को कैसे देखते हैं?

पीएम नरेन्द्र मोदी: AI, भारत के विकसिट भारत 2047 के सफ़र में एक बड़ा बदलाव लाने वाला मौका है। AI का विवेकपूर्ण, स्ट्रेटेजिक नज़रिए से इस्तेमाल करने से, पूरी तरह से नए आर्थिक मौके बनाने, सबको साथ लेकर चलने वाले विकास को मुमकिन बनाने, शहर-गांव के बीच की खाई को पाटने और मौकों तक पहुंच बढ़ाने के साथ-साथ विकास से जुड़ी गहरी चुनौतियों का सामना करने में मदद मिलती है। हेल्थकेयर में, AI पहले से ही असर डाल रहा है। हम प्राइमरी और डिस्ट्रिक्ट हेल्थ सेंटर्स पर ट्यूबरकुलोसिस, डायबिटिक रेटिनोपैथी, मिर्गी और कई दूसरी बीमारियों का जल्दी पता लगाने के लिए AI-बेस्ड सॉल्यूशन देख रहे हैं। एजुकेशन में, भारतीय भाषाओं में AI-पावर्ड पर्सनलाइज़्ड लर्निंग प्लेटफॉर्म, गांव और सरकारी स्कूलों के स्टूडेंट्स को कस्टमाइज़्ड एकेडमिक सपोर्ट पाने में मदद कर रहे हैं। एक बहुत ही अनोखी पहल में, अमूल हज़ारों गांवों में 36 लाख महिला डेयरी किसानों तक पहुंचने के लिए AI का इस्तेमाल कर रहा है, मवेशियों की हेल्थ और प्रोडक्टिविटी पर गुजराती में रियल-टाइम गाइडेंस दे रहा है, और ज़मीनी स्तर की महिला प्रोड्यूसर्स को मज़बूत बना रहा है। खेती में, भारत विस्तार पहल का मकसद AI को फसल सलाह, मिट्टी के एनालिटिक्स और मौसम की जानकारी में जोड़ना है, जिससे किसानों को बेहतर, लोकल फैसले लेने में मदद मिलेगी। विरासत को बचाने में भी, AI पुरानी किताबों के डिजिटाइज़ेशन और मतलब को मुमकिन बना रहा है, जिससे भारत के सभ्यता से जुड़े ज्ञान के सिस्टम खुल रहे हैं। ऐसे समय में जब दुनिया AI से बढ़ती दूरियों को लेकर परेशान है, भारत इसका इस्तेमाल दूरियों को मिटाने के लिए कर रहा है। हम इसे हर गांव, हर जिले और हर नागरिक को हेल्थकेयर, शिक्षा और आर्थिक मौके देने के लिए एक अच्छा टूल बना रहे हैं।

ANI: पेरिस में AI एक्शन समिट 2025 में अपनी स्पीच में, आपने AI के बायस और लिमिटेशन पर ज़ोर दिया था। अब से, क्या सिनेरियो बदला है? आप भारत को इस मुद्दे को कैसे देखते हैं?

पीएम नरेन्द्र मोदी: AI में बायस और लिमिटेशन को लेकर चिंताएं बहुत ज़रूरी हैं। जैसे-जैसे AI को अपनाने की रफ़्तार बढ़ रही है, रिस्क भी बढ़ रहे हैं। AI सिस्टम अनजाने में जेंडर, भाषा और सोशियो-इकोनॉमिक बैकग्राउंड से जुड़े बायस को बढ़ावा दे सकते हैं। AI इम्पैक्ट समिट 2026 अलग-अलग स्टेकहोल्डर्स को एक साथ ला रहा है और AI के बायस और लिमिटेशन जैसे मामलों पर ग्लोबल अवेयरनेस पैदा कर रहा है। यह एक ऐसा मुद्दा है जिसके लिए ग्लोबल कोऑपरेशन की ज़रूरत है। खास तौर पर भारत के लिए, हम यूनिक चैलेंज और मौकों का सामना कर रहे हैं। हमारी डायवर्सिटी - लिंग्विस्टिक, कल्चरल, रीजनल - का मतलब है कि AI बायस ऐसे तरीकों से दिख सकता है जो वेस्टर्न कॉन्टेक्स्ट में साफ़ न हों। एक AI सिस्टम जो मुख्य रूप से इंग्लिश डेटा या शहरी कॉन्टेक्स्ट पर ट्रेन किया गया है, वह रूरल यूज़र्स या रीजनल भाषाएं बोलने वालों के लिए खराब परफॉर्म कर सकता है। पॉजिटिव डेवलपमेंट यह है कि भारत इसे ज़्यादा सिस्टमैटिक तरीके से एड्रेस करना शुरू कर रहा है। हम ऐसे डायवर्स डेटासेट बनाने पर ज़्यादा फोकस देख रहे हैं जो भारत की प्लूरलिटी को दिखाते हैं, रीजनल भाषाओं में AI डेवलपमेंट पर ज़्यादा ज़ोर दिया जा रहा है, और इंडियन एकेडमिक इंस्टीट्यूशन और टेक कंपनियों में फेयरनेस और बायस पर रिसर्च बढ़ रही है।

ANI: आधार और UPI जैसे कम लागत वाले डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) बनाने में भारत की सफलता शानदार है। DPI और AI का मेल पब्लिक सर्विस डिलीवरी को काफी बेहतर बना सकता है। इस बारे में भारत क्या सीख रहा है, जिससे ग्लोबल साउथ को मदद मिल सके?

पीएम नरेन्द्र मोदी: भारत की डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर यात्रा ग्लोबल साउथ के लिए ज़रूरी और प्रैक्टिकल सबक देती है। DPI और AI का मिलना इनक्लूसिव डेवलपमेंट का अगला फ्रंटियर है। आधार, UPI और दूसरी डिजिटल पब्लिक चीज़ों के साथ हमारी सफलता अचानक नहीं हुई। यह कुछ ऐसे सिद्धांतों से आई जिन्हें दोहराया जा सकता है। सबसे पहले, हमने डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को एक पब्लिक गुड के तौर पर बनाया, न कि किसी प्रोप्राइटरी प्लेटफॉर्म के तौर पर। इस ओपन और इंटरऑपरेबल आर्किटेक्चर ने इनोवेशन को एक कॉमन बेस लेयर के ऊपर फलने-फूलने दिया। दूसरा, हमने पहले दिन से ही स्केल और इनक्लूजन के लिए डिज़ाइन किया। हमारे सिस्टम 1.4 बिलियन लोगों के लिए काम करते हैं, चाहे उनकी सोशियो-इकोनॉमिक स्थिति, लिटरेसी लेवल, क्षेत्र या भाषा कुछ भी हो। जब AI को इस फाउंडेशन पर लेयर किया जाता है, तो गवर्नेंस कहीं ज़्यादा रिस्पॉन्सिव और एफिशिएंट बन सकता है। AI वेलफेयर टारगेटिंग को बेहतर बना सकता है, फ्रॉड का पता लगाने को मज़बूत कर सकता है, इंफ्रास्ट्रक्चर के प्रेडिक्टिव मेंटेनेंस को इनेबल कर सकता है, अर्बन प्लानिंग को सपोर्ट कर सकता है, और पब्लिक सिस्टम में ट्रांसपेरेंसी बढ़ा सकता है। साथ ही, हम पूरे समाज में मज़बूत डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, मज़बूत डेटा प्राइवेसी प्रोटेक्शन, सोच-समझकर रेगुलेटरी फ्रेमवर्क और AI लिटरेसी के महत्व को समझते हैं। ह्यूमन-सेंट्रिक डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने के अपने अनुभव के साथ, भारत यह पक्का करने के लिए सबसे अच्छी स्थिति में है कि AI के फायदे आखिरी छोर तक, गांवों में किसानों, छोटे शहरों के स्टूडेंट्स, MSMEs, महिला एंटरप्रेन्योर्स, इनफॉर्मल वर्कर्स और ग्रामीण और शहरी भारत के युवाओं तक पहुंचें, और यह सिर्फ शहरी अमीर लोगों तक ही सीमित न रहे। टेक्नोलॉजी को हर नागरिक की मदद करनी चाहिए, चाहे वह किसी भी इलाके, जेंडर या इनकम का हो। मकसद सिर्फ अपने फायदे के लिए AI को अपनाना नहीं है। यह AI ही है जो सच में नागरिकों को मजबूत बनाता है और 2047 तक भारत को एक डेवलप्ड देश बनने की राह में तेजी लाता है, और ग्लोबल साउथ के लिए एक स्केलेबल मॉडल देता है।

ANI: भारत इंजीनियरिंग टैलेंट का पावरहाउस है। हम दुनिया को एक बड़ी टेक वर्कफोर्स देते हैं। AI के दौर में हम इसे और कैसे बढ़ा सकते हैं?

पीएम नरेन्द्र मोदी: भारत में AI पावरहाउस बनने के लिए टैलेंट और एंटरप्रेन्योर एनर्जी है, सिर्फ़ एक कंज्यूमर के तौर पर ही नहीं, बल्कि एक क्रिएटर के तौर पर भी। हमारे स्टार्टअप, रिसर्च इंस्टीट्यूशन और टेक इकोसिस्टम ऐसे AI सॉल्यूशन बना सकते हैं जो मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ाएंगे, गवर्नेंस को बेहतर बनाएंगे और नई नौकरियां पैदा करेंगे। मुझे भरोसा है कि हमारे युवा भारतीय हकीकत के लिए AI सॉल्यूशन बना सकते हैं, जो किसानों, MSMEs, महिला एंटरप्रेन्योर और जमीनी स्तर के इनोवेटर्स के लिए डिज़ाइन किए गए हैं। हम अपने टैलेंटेड युवाओं की हर कोशिश को मज़बूत करने के लिए कमिटेड हैं ताकि AI इनोवेशन और इनक्लूजन के लिए एक फोर्स-मल्टीप्लायर बन सके। यूनियन बजट 2026-27 इस विज़न को और मज़बूत करता है। यह डेटा सेंटर और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए सपोर्ट बढ़ाता है, जिससे घरेलू कंप्यूट कैपेसिटी मज़बूत होती है। IndiaAI फ्रेमवर्क के तहत, स्टार्टअप और रिसर्च इंस्टीट्यूशन को हाई-परफॉर्मेंस AI कंप्यूट रिसोर्स तक एक्सेस के साथ सपोर्ट दिया जा रहा है। सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स PLI, AI सेंटर्स ऑफ एक्सीलेंस और डिजिटल स्किलिंग के लिए लगातार कोशिश हार्डवेयर और ह्यूमन कैपिटल दोनों की नींव को मज़बूत करती है। शॉर्ट में, हम सिर्फ़ टैलेंट को ही नहीं बढ़ा रहे हैं, बल्कि हम भारत को AI क्रांति में हिस्सा लेने से लेकर उसे आकार देने तक के लिए ज़रूरी इंफ्रास्ट्रक्चर, पॉलिसी इकोसिस्टम और स्किल बेस बना रहे हैं।

ANI: भारत में एक वाइब्रेंट IT सेक्टर है जो हमारे सर्विस एक्सपोर्ट में अहम योगदान दे रहा है। आप AI को हमारे IT सेक्टर पर कैसे असर डालते हुए देखते हैं? और सरकार हमारे IT सेक्टर को मज़बूत करने के लिए क्या कदम उठा रही है?

पीएम नरेन्द्र मोदी: भारत का IT सेक्टर हमारे सर्विस एक्सपोर्ट की रीढ़ और इकोनॉमिक ग्रोथ का एक मुख्य ड्राइवर रहा है। AI इस सेक्टर के लिए एक ज़बरदस्त मौका और चुनौती दोनों पेश करता है। AI मार्केट के अनुमान बताते हैं कि भारत का IT सेक्टर 2030 तक $400 बिलियन तक पहुँच सकता है, जो AI-इनेबल्ड आउटसोर्सिंग और डोमेन-स्पेसिफिक ऑटोमेशन की नई लहरों से प्रेरित है। बुनियादी बदलाव यह है कि AI IT सेक्टर की जगह नहीं ले रहा है। यह इसे बदल रहा है। जबकि जनरल-पर्पस AI टूल्स आम हो गए हैं, एंटरप्राइज़-ग्रेड AI को अपनाना अभी भी खास सेक्टर्स में ही केंद्रित है, और मौजूदा IT फर्म मुश्किल बिज़नेस समस्याओं को हल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। एक मज़बूत भारतीय AI इकोसिस्टम को सक्षम करने के लिए, सरकार ने IndiaAI मिशन पर केंद्रित एक व्यापक रणनीति के साथ जवाब दिया है। हम पहले ही GPU के अपने शुरुआती टारगेट को पार कर चुके हैं और हम स्टार्टअप्स और एंटरप्राइज़ेज़ के लिए वर्ल्ड-क्लास AI इंफ्रास्ट्रक्चर तक सस्ती पहुँच प्रदान करने के लिए और अधिक करने के लिए कमिटेड हैं। हमने हेल्थकेयर, एग्रीकल्चर, एजुकेशन और सस्टेनेबल शहरों में चार सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस और स्किलिंग के लिए पाँच नेशनल सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस स्थापित किए हैं ताकि हमारे कर्मचारियों को इंडस्ट्री-संबंधित AI विशेषज्ञता से लैस किया जा सके। हम चाहते हैं कि हमारा IT सेक्टर न सिर्फ़ सर्विस डिलीवरी में, बल्कि भारत और दुनिया के लिए काम करने वाले AI प्रोडक्ट्स, प्लेटफ़ॉर्म और सॉल्यूशन बनाने में भी लीड करे।

ANI: हमने AI के गलत इस्तेमाल के कई उदाहरण देखे हैं। हम AI टेक्नोलॉजी के संभावित नुकसान से भारतीयों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित कर रहे हैं?

पीएम नरेन्द्र मोदी: टेक्नोलॉजी एक पावरफुल टूल है, लेकिन यह इंसानी इरादे के लिए सिर्फ़ एक फ़ोर्स-मल्टीप्लायर है। यह पक्का करना हम पर है कि यह अच्छे के लिए एक फ़ोर्स बने। AI इंसानी क्षमताओं को बढ़ा सकता है, लेकिन फ़ैसले लेने की आखिरी ज़िम्मेदारी हमेशा इंसानों की ही रहनी चाहिए। दुनिया भर में, समाज इस बात पर बहस कर रहे हैं कि AI का इस्तेमाल और उसे कैसे कंट्रोल किया जाना चाहिए। भारत यह दिखाकर इस बातचीत को आकार देने में मदद कर रहा है कि मज़बूत सेफ़गार्ड लगातार इनोवेशन के साथ-साथ रह सकते हैं। इसके लिए, हमें AI पर एक ग्लोबल कॉम्पैक्ट की ज़रूरत है, जो कुछ बुनियादी सिद्धांतों पर बना हो। इनमें असरदार इंसानी निगरानी, ​​सेफ़्टी-बाय-डिज़ाइन, ट्रांसपेरेंसी और डीपफ़ेक, क्राइम और आतंकवादी गतिविधियों के लिए AI के इस्तेमाल पर सख़्त रोक शामिल होनी चाहिए। भारत AI रेगुलेशन में ज़्यादा स्ट्रक्चर्ड गवर्नेंस अप्रोच की ओर बढ़ रहा है। जनवरी 2025 में इंडियाAI सेफ़्टी इंस्टीट्यूट के लॉन्च के साथ, देश ने AI सिस्टम के नैतिक, सुरक्षित और ज़िम्मेदार डिप्लॉयमेंट को बढ़ावा देने के लिए एक डेडिकेटेड मैकेनिज़्म बनाया। जैसे-जैसे AI और एडवांस्ड होता जाएगा, हमारी ज़िम्मेदारी की भावना और मज़बूत होनी चाहिए। भारत के अप्रोच को जो बात खास बनाती है, वह है लोकल रिस्क और सामाजिक असलियत पर इसका फ़ोकस। नया रिस्क असेसमेंट फ्रेमवर्क नेशनल सिक्योरिटी की चिंताओं के साथ-साथ कमज़ोर ग्रुप्स को होने वाले नुकसान पर भी विचार करता है, जिसमें महिलाओं को टारगेट करने वाले डीपफेक, बच्चों की सुरक्षा के जोखिम और बुज़ुर्गों को प्रभावित करने वाले खतरे शामिल हैं। डीपफेक वीडियो में बढ़ोतरी के कारण इन सुरक्षा उपायों की ज़रूरत सभी को साफ़ हो रही है। इसके जवाब में, भारत ने AI से बने कंटेंट की वॉटरमार्किंग और नुकसानदायक सिंथेटिक मीडिया को हटाने के लिए नियम नोटिफ़ाई किए। कंटेंट सुरक्षा उपायों के साथ-साथ, डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट डिजिटल इकोसिस्टम में डेटा सुरक्षा और यूज़र अधिकारों को मज़बूत करता है। भारत का कमिटमेंट ग्लोबल लेवल पर भी है। जैसे एविएशन और शिपिंग में बॉर्डर पार सुरक्षा और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए ग्लोबल नियम हैं, वैसे ही दुनिया को AI में भी आम सिद्धांतों और स्टैंडर्ड्स की दिशा में काम करना चाहिए। चाहे 2023 GPAI डिक्लेरेशन में अपनी भूमिका के ज़रिए, पेरिस AI चर्चाओं में, या मौजूदा समिट में, भारत ने हमेशा सुरक्षित और सबको साथ लेकर चलने वाले #AIForAll के लिए सुरक्षा उपाय बनाते हुए इनोवेशन को आगे बढ़ाने के संतुलित रास्ते की वकालत की है।

ANI: युवाओं के कुछ हिस्से में यह डर है कि AI उनकी नौकरियां छीन लेगा। अगर ऐसा हुआ तो भारत के डेमोग्राफिक डिविडेंड का फ़ायदा उठाना मुश्किल होगा। भारत सरकार इस चुनौती से कैसे निपट रही है?

पीएम नरेन्द्र मोदी: मैं जॉब मार्केट में AI से होने वाली रुकावटों को लेकर हमारे युवाओं की चिंता समझता हूँ। तैयारी ही डर का सबसे अच्छा इलाज है। इसीलिए हम AI से चलने वाले भविष्य के लिए अपने लोगों की स्किलिंग और री-स्किलिंग में इन्वेस्ट कर रहे हैं। सरकार ने दुनिया की सबसे बड़ी स्किलिंग पहलों में से एक शुरू की है। हम इसे भविष्य की समस्या के तौर पर नहीं देख रहे हैं, बल्कि इसे अभी की ज़रूरत मान रहे हैं। मैं AI को एक फ़ोर्स-मल्टीप्लायर के तौर पर देखता हूँ जो हमें उन सीमाओं को आगे बढ़ाने में मदद करेगा जो हमने मुमकिन समझी थीं। यह डॉक्टरों, टीचरों और वकीलों को ज़्यादा लोगों तक पहुँचने और उनकी मदद करने में मदद करेगा। इतिहास ने दिखाया है कि टेक्नोलॉजी की वजह से काम गायब नहीं होता। इसका नेचर बदलता है और नई तरह की नौकरियाँ बनती हैं। जहाँ कुछ नौकरियाँ फिर से तय हो सकती हैं, वहीं डिजिटल बदलाव भारत की इकोनॉमी में नई टेक नौकरियाँ भी जोड़ेगा। सदियों से, यह डर रहा है कि इनोवेशन और टेक्नोलॉजिकल क्रांतियाँ नौकरियाँ खत्म कर देंगी। फिर भी इतिहास हमें सिखाता है कि जब भी इनोवेशन होता है, नए मौके सामने आते हैं। AI के ज़माने में भी यही सच होगा। भारत इस बदलाव के हिसाब से ढलने के लिए पहले से ही पूरी तरह तैयार है। स्टैनफोर्ड ग्लोबल AI वाइब्रेंसी इंडेक्स 2025 में, भारत तीसरे नंबर पर रहा, जो AI R&D, टैलेंट और इकोनॉमी में मज़बूत ग्रोथ को दिखाता है। इनोवेशन को इनक्लूजन के साथ मिलाकर, हमें भरोसा है कि AI भारत के वर्कफोर्स को मज़बूत करेगा। सही स्किल्स और तैयारी के साथ, हमारे युवा काम के भविष्य को लीड करेंगे।

ANI: आपके नेतृत्व में, भारत ने 4G और 5G जैसी स्वदेशी टेक्नोलॉजी के साथ-साथ ड्रोन टेक्नोलॉजी भी विकसित की है। आत्मनिर्भर भारत के लिए AI पर आपका क्या विजन है?

पीएम नरेन्द्र मोदी: आत्मनिर्भर भारत की ओर हमारा सफ़र एक बुनियादी उसूल पर बना है: भारत को सिर्फ़ टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए, बल्कि उसे बनाना चाहिए। आत्मनिर्भर भारत में AI के लिए मेरा विज़न तीन पिलर पर टिका है: सॉवरेनिटी, इनक्लूसिविटी और इनोवेशन। मेरा विज़न है कि भारत दुनिया भर में टॉप तीन AI सुपरपावर में से एक हो, सिर्फ़ AI के इस्तेमाल में ही नहीं, बल्कि बनाने में भी। हमारे AI मॉडल दुनिया भर में इस्तेमाल किए जाएँगे, जो अरबों लोगों को उनकी अपनी भाषाओं में सर्विस देंगे। हमारे AI स्टार्टअप की वैल्यू सैकड़ों अरबों में होगी, जिससे लाखों हाई-क्वालिटी जॉब्स बनेंगी। हमारी AI-पावर्ड पब्लिक सर्विसेज़ की दुनिया भर में कुशल, बराबर गवर्नेंस के लिए बेंचमार्क के तौर पर स्टडी की जाएगी। और सबसे ज़रूरी बात, हर भारतीय AI को मौके देने वाला, काबिलियत बढ़ाने वाला और इंसानी गरिमा का सेवक समझेगा, न कि अपनी आजीविका के लिए खतरा या कंट्रोल का ज़रिया। AI में आत्मनिर्भर भारत का मतलब है कि भारत डिजिटल सदी के लिए अपना कोड खुद लिखे, और IndiaAI मिशन के ज़रिए, हम यह पक्का कर रहे हैं कि वह कोड हमारी वैल्यूज को दिखाए, हमारे लोगों की सेवा करे, और भारत को दुनिया के लिए एक रेसपॉन्सिबल AI लीडर बनाए।

स्रोत: ANI News