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भगवान बिरसा मुंडा की इस पवित्र धरती को प्रणाम करते हुए आप सबको भी, मैं बहुत बहुत शुभकामनाएं देता हूं। हमारे कृषि मंत्री, श्रीमान राधा मोहन सिंह जी ने विस्तार से सौ साल पहले कृषि अनुसंधान के क्षेत्र में, बिहार की धरती पर कैसे कार्य प्रारंभ हुआ और बाद में इसी काम से ये भूभाग कैसे अछुता रह गया, इसका वर्णन किया है।

मैं देख रहा हूं, आज यंहा सिर्फ झारखंड के ही नहीं दक्षिण बिहार से भी बड़ी संख्या में लोग नज़र आ रहे हैं..क्योंकि दक्षिण बिहार के लोगों को बराबर समझ है कि इस अनुसंधान केंद्र का लाभ सिर्फ झारखंड को ही मिलेगा, ऐसा नहीं, दक्षिण बिहार के लोग भी इसका सर्वाधिक लाभ उठा पाएंगे, ये उनको भली-भांति पता है।

भारत कृषि प्रधान देश है, ये बात हम सदियों से सुनते आए हैं। लेकिन यह भी एक दुर्भाग्य है कि देश के कृषि जगत को किसानों के नसीब पर छोड़ दिया गया है। उसी का नतीजा है कि सारा विश्व कृषि के क्षेत्र में जो प्रगति कर चुका है, भारत आज भी उससे बहुत पीछे है। चाहे ज़मीन का रख-रखाव हो, चाहे अच्छी क्वालिटी के बीज मुहैया कराना हो, चाहे किसान को पानी और बिजली उपलब्ध कराना हो, चाहे किसान जो उत्पादित करता है चीजें, उसके लिए सही बाज़ार मिले, सही दाम मिले, मूल्य वृद्धि की प्रक्रिया हो, कृषि के साथ सहायक उद्योग, पशुपालन हो, मतस्य उद्योग हो, शहद का काम हो..इन सारी बातों को ले करके एक संतुलित, एक comprehensive, integrated जब तक हम प्लान नहीं करते, हम हमारे गांव के आर्थिक जीवन को बदल नहीं सकते, हम किसानों के जीवन में बदलाव नहीं ला सकते हैं।

इसलिए दिल्ली में बैठी हुई वर्तमान सरकार..परंपरागत ये कृषि है, जो हमारे भाई बहन अपने पुरखों से सीख करके आगे बढ़ा रहे हैं। वह .. कृषि आधुनिक कैसे बने, वह कृषि वैज्ञानिक कैसे बने और आज जो प्रति हेक्टेयर उत्पान होता है, वह उत्पादन कैसे बढ़े, ये चिंता का विषय है। इस सबके उपाय नहीं हैं, ऐसा नहीं है। उसके लिए कोई रास्ते नहीं खोजे जा सकते, ऐसा नहीं है। आवश्यकता है कि सरकार की नीतियों के द्वारा, प्रशिक्षण के द्वारा, संसाधन मुहैया कराने की पद्धति से कृषि को आधुनिक और वैज्ञानिक बनाया जा सकता है।

जनसंख्या बढ़ती चली जा रही है, ज़मीन कम होती चली जा रही है। आज से पचास साल पहले जिस परिवार के पास सौ बीघा ज़मीन होगी..परिवार का विस्तार होते होते, बेटे, बेटे के बेटे, चचेरे भाई, उनके बेटे..ज़मीन के टुकड़े होते होते अब परिवार के पास दो बीघा, पांच बीघा ज़मीन रह गई होगी। ज़मीन छोटे छोटे टुकड़ों में बंट रही है, परिवार का विस्तार हो रहा है। जनसंख्या बढ़ रही है, ज़मीन कम हो रही है। ऐसी स्थिति में हमारे पास जो उपलब्ध ज़मीन है, उसमें अगर हमारी उत्पादकता नहीं बढ़ेगी, हम ज़्यादा फसल नहीं प्राप्त करेंगे, न तो देश का पेट भरेगा, न तो किसान का जेब भरेगा।

इसलिए कृषि का विकास ऐसे हो, जो देशवासियों का पेट भी भरे और किसान का जेब भी भरे और इसलिए सबसे पहली आवश्यकता है, हमारी परंपरागत कृषि में पुनः संशोधन करने की, research करने की। भारत इतना विशाल देश है, कि एक कोने में एक laboratory में काम होने से काम चलेगा नहीं। सभी agro climatic zone में, वहां की वायु के अनुसार, ज़मीन के अनुसार, परंपराओं के अनुसार संशोधन करने पड़ेंगे। तब जा करके उन संसाधनों का उपयोग होगा। अगर, केरल में जो प्रयोग सफल होता है, वहीं प्रयोग हम झारखंड में फिट करने जाएंगे तो कभी कभी..न तो किसान उसको स्वीकार करेगा और कभी कोई प्रयोग अगर विफल गया, तो कभी किसान हाथ नहीं लगाएगा।

इसलिए वो जिस भू-भाग में रहता है, जिस प्राकृतिक अवस्था में रहता है, जिस परंपरा से खेती करता है, उसी में अगर हम संशोधन करेंगे, उसी में वैज्ञानिकता लाएंगे, तो किसान उसको सहज रूप में स्वीकार भी करेगा और किसान को वो उपकारक भी होगा। इसलिए हमने दूर-सुदूर इलाकों के विद्यार्थियों को.. कृषि के क्षेत्र में आधुनिक शिक्षा मिले, उनको research करने का अवसर मिले और वो अपने अपने क्षेत्र में, उस भूभाग के किसानों का भला करने की दिशा में नए संशोधन करे, जिसको आगे चल करके लागू किया जाए, उस दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास..जिसके तहत आज एक कृषि अनुसंधान के क्षेत्र में एक इंस्टीट्यूट झारखंड को मिल रहा है। इसका लाभ इस पूरे इलाके को मिलने वाला है।

हमारे देश ने प्रथम कृषि क्रांति देखी है, लेकिन उसको बहुत साल हो गए। अब समय की मांग है कि देश में दूसरी कृषि क्रांति बिना विलंब होनी चाहिए। ये दूसरी कृषि क्रांति होने की संभावना कहां है? मैं जानकारियों के आधार पर कह सकता हूं कि अब हिंदूस्तान में दूसरी कृषि क्रांति की संभावना अगर कहीं है, तो वह पूर्वी उत्तर प्रदेश, झारखंड, बिहार, उड़ीसा, पश्चिम बंगाल, असम, ये भारत के जो पूर्वी इलाके हैं, वहीं पर से दूसरी कृषि क्रांति की संभावना है। इसलिए सरकार ने पूरा अपना ध्यान इस क्षेत्र के विकास की ओर केंद्रित किया है और इस क्षेत्र के विकास के लिए जिस प्रकार से एक research institute का हम आरंभ कर रहे हैं, उसी प्रकार से.. किसान को fertilizer चाहिए, यूरिया चाहिए। इस इलाके में यूरिया के खातर के कारखाने बंद पड़े हैं। हमारी सरकार ने निर्णय किया.. चाहे गोरखपुर का कारखाना हो, चाहे सिंदरी का कारखाना हो, चाहे पश्चिम बंगाल, असम में कारखाने लगाने की बात हो, बिहार में लगाने की बात हो, अरबों, खरबों रूपयों की लागत से इन कारखानों को लगाया जाएगा, चालू किया जाएगा ताकि यहां के किसानों को खाद मिले, यूरिया मिले, उनको खातर मिले और पास में जो उत्पादन होता है, transportation का जो बोझ लगता है, उससे भी उसको मुक्ति मिले और यहां पर खाद के कारखाने लगें तो यहां के नौजवान को रोज़गार भी मिले।

सरकार ने एक महत्वपूर्ण initiative लिया है। आजकल, अगर हम बिमार होते हैं तो डाक्टर दवाई देने से पहले कहता है कि pathology laboratory में जाइए, रक्त परीक्षण करवाईए, यूरिन टेस्ट करवाइए, ब्लड टेस्ट करवाइए, उसके बाद तय करेंगे कि क्या बिमारी है और उसके बाद दवाई देंगे। गांव के अंदर भी आजकल डाक्टर सीधी दवाई देने के बजाए आपको ब्लड टेस्ट कराने के लिए भेजता है। शरीर के अंदर क्या कमी आई है, उसका पता पहले लगाया जाता है, उसके बाद दवाई दी जाती है। जैसा शरीर का स्वाभाव है, वैसा ही हमारी इस धरती माता का भी स्वभाव है। जैसे हम बिमार होते है, वैसे ही ये हमारी धरती माता भी बिमार होती है। जैसे हम अपने शरीर की चिंता करते हैं, वैसे हमें धरती माता की तबियत की भी चिंता करना ज़रूरी है। हमारी धरती माता को क्या बिमारी है? क्या कमियां आईं हैं? हमने किस प्रकार से हमारी धरती माता का दूरूपयोग किया है? कितना हमने उसको चूस लिया है? इसका अध्ययन ज़रूरी है..और इसलिए सरकार ने पूरे देश में हर खेत के लिए soil health card बनाना तय किया है। धरती के परीक्षण के द्वारा उसका एक कार्ड निकाला जाएगा। जैसे इंसान का health card होता है, वैसे किसान की धरती माता का भी health card होगा। आपकी धरती में क्या कमियां है, क्या बिमारियां हैं, आपकी धरती किस फसल के लिए उपयुक्त है, कौन से pesticide लगाना अच्छा है, कौन से लगाना बुरा है, कौन सा fertilizer डालना ठीक है, कौन सा डालना बुरा है, इसकी पूरी समझ किसान को अगर पहले से मिल जाए तो किसान तय कर सकता है कि मेरी ये धरती है, इसमें धान पैदा होगा, दलहन पैदा होंगे, क्या पैदा होगा, वो तय कर सकता है। एक बार यदि अपनी ज़मीन के हिसाब से फसल बोता है, तो उसको ज्यादा आय भी होती है, ज्यादा फसल पैदा होती है। पूरे हिंदूस्तान में वैज्ञानिक तरीके से हम ये बदलाव लाने के लिए लगे हैं ..और ये काम धीरे धीरे नौजवानों को रोज़गार देने वाला भी काम बन सकता है।

आज हिंदुस्तान में जितनी pathology laboratories हैं, वो सरकार कहां चलाती है? सरकार की तो बहुत कम हैं। लोग चलाते हैं, लोग अपना pathology laboratory बनाते हैं, patient आते हैं, परीक्षण करते हैं, अपना खर्चा वो ले लेते हैं, रोज़ी रोटी कमाते हैं, लोगों की तबियत की भी चिंता करते हैं। धीरे धीरे हम देश में नौजवानों को soil health card तैयार करने की laboratory का जाल बिछाने के लिए तैयार करना चाहते हैं। ताकि नौजवान का अपना व्यवसाय बन जाए..ज़मीन, मिट्टी का परीक्षण करने का उसका रोज़गार शुरू हो जाए और गांव का नौजवान गांव में ही कमाई करने लग जाए। उसके रोज़गार के भी द्वार खुल जाएं और ज़मीन के संबंध में किसान को सही जानकारी मिल जाए ताकि वो सही उत्पादन की दिशा में आगे बढ़ सके, उस दिशा में हम काम कर रहे हैं।

भाईयों-बहनों, हमारे कृषि के साथ पशुपालन का भी उतना ही महत्व है, मतस्य पालन का भी उतना ही महत्व है, मुर्गी पालन का भी उतना ही महत्व है, शहद का काम करना भी उतने ही महत्व का है। हमारी खेती अगर 6 महीना – 8 महीना चलती है तो बाकी समय में ये चीज़ें किसान की आर्थिक स्थिति में लाभ करते हैं। आज हमारे पास जितने पशु हैं, उसकी तुलना में हमारा दूध कम है। दुनिया में पशु कम हैं, दूध का उत्पादन ज्यादा है। हमारे यहां पशु ज्यादा है, दूध का उत्पादन कम है। ये स्थिति हमें पलटनी है। प्रति पशु ज्यादा से ज्यादा दूध कैसे उत्पादन हो..ताकि जो पशुपालक हैं, जो किसान हैं, उसके लिए पशुपालन कभी मंहगा नहीं होना चाहिए। पशुपालन का जितना खर्चा होता है, उससे ज्यादा आय उसको दूध में से मिलना चाहिए। इसलिए हमने डेयरी के क्षेत्र में, झारखंड को भी सेवाएं मिलें, ये अभी अभी निर्णय कर लिया है। झारखंड में भी डेयरी का विकास हो, पशुपालकों को लाभ हो, किसान को खेती के साथ साथ पशुपालन की भी व्यवस्था मिले, उस दिशा में हम प्रयास कर रहे हैं।

मैं एक बार बिहार में भ्रमण कर रहा था, तो वहां लोगों ने मुझे बताया कि बिहार में हर वर्ष करीब 400 करोड़ रूपए की मछली दूसरे राज्यों में से import करके खाते हैं। अब ये 400 करोड़ रूपया कहीं और चला जाता है। अगर वहीं पर सही तरीके से मतस्य उद्योग हो, वहां के नौजवानों को रोज़गार मिले, वहां के लोगों की आवश्यकता की पूर्ति हो तो 400 करोड़ रूपए वहीं बच जाएंगे। उन 400 करोड़ रूपयों से कितने लोगों को रोजी-रोटी मिल जाएगा।

इसलिए हम व्यवस्थाओं को विकसित करना चाहते हैं। हमारे देश में कुछ इलाके ऐसे हैं कि जहां किसान मधुमक्खी के पालन में लगा हुआ है और कुछ किसान तो ऐसे हैं जो शहद के उत्पादन से, मधु के उत्पादन से लाखों रूपयों की कमाई करते हैं। क्या हम हमारे देश में, हर राज्य में कम से कम एक जिला..वहां के किसानों को तैयार करें, मधु के लिए तैयार करें, शहद के लिए तैयार करें। और हर राज्य का एक जिला..जहां के किसान अपनी खेती, पशुपालन के साथ साथ मधु उत्पादन का भी काम करें। मधु खराब भी नहीं होता है। बोतल में पैक करके रख दिया। सालों तक चलता है। आज दुनिया में उसकी मांग है। हम हमारे किसान को आधुनिक रूप से बदलाव लाने की दिशा में ले जाना चाहते हैं।

आज किसान जागरूक हुआ है, Vermicompost की ओर बढ़ा है। क्या हम तय नहीं कर सकते कि पिछली बार हमारे पास सौ किलो earthworm थे.. पिछली बार अगर हमारे पास सौ किलो केंचुए थे, इस बार अगर हमने दो सौ किए। आपको तो सिर्फ एक गड्ढा खोद कर उसमें कूड़ा कचरा डालना है। बाकी काम अपने आप परमात्मा कर देता है। आपकी ज़मीन को भी वो संभालता है और आजकल केंचुओं का बाज़ार भी बहुत बड़ा होता जा रहा है। हमारी ज़मीन भी बचेगी, यूरिया का खपत भी बचेगा। यूरिया के कारण हमारी ज़मीन बरबाद हो रही है, वो भी बचेगी और Vermi-compost के द्वारा हम उत्पादन में वृद्धि ला सकते हैं, ये अपने घर में बैठ करके करने वाले काम हैं, उसको हम कर सकते हैं। इसलिए हम एक integrated approach के साथ हमारे कृषि क्षेत्र में बदलाव लाने की दिशा में एक के बाद एक कदम उठाने जा रहे हैं।

हमारे देश में आज भी..जब हमारे देश के प्रधानमंत्री थे, लाल बहादुर शास्त्री, उन्होंने एक बार कहा- जय जवान, जय किसान। देश के किसानों को कहा कि अन्न के भंडार भर दो, फिर इस देश के किसान ने कभी पीछे मुड़ करके देखा नहीं। उसने इतनी मेहनत की, इतनी मेहनत की, अन्न के भंडार भर दिए। अब विदेशों से खाने के लिए अन्न नहीं मंगवाना पड़ता। लेकिन मेरे किसान बहनों, भाईयों हमने अन्न के भंडार तो भर दिए, लकिन आज देश के लोगों को, खास करके गरीब लोगों को अपने खाने में दलहन की बड़ी आवश्यकता होती है। प्रोटीन उसी से मिलता है, दाल से मिलता है। हमारे यहां दाल का उत्पादन बहुत कम है, विदेशों से लाना पड़ता है। मैं देश के किसानों से आग्रह करता हूं कि अगर आपके पास पांच एकड़ भूमि है तो चार एकड़ भूमि में आप परंपरागत जो काम करते हैं, करिए। कम से कम एक एकड़ भूमि में आप दलहन की खेती कीजिए। देश को जो pulses बाहर से लाने पड़ते हैं, वो लाने न पड़ें और गरीब से गरीब व्यक्ति को जो दाल चाहिए, वो दाल हम उपलब्ध करा सकें। इसीलिए सरकार ने.. जो minimum support price देते हैं, उसमें pulses के लिए एक विशेष पैकेज दिया है - जो दाल वगैरह पैदा करेंगे, मूंग, चने वगैरह पैदा करेंगे, उनको अतिरिक्त minimum support price मिलेगा ताकि देश में दाल के उत्पादन को बढ़ावा मिले और देश की आवश्यकता हमारे देश का किसान पूर्ण करे।

इन बातों को ले करके हमने एक और काम का बीड़ा उठाया है। वो है- प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना। बहुत ही महत्वपूर्ण काम है। अगर हमारे किसान को पानी मिल जाए तो मिट्टी में से सोना पैदा करने की वो ताकत रखता है। आज हमारे देश की ज्यादातर कृषि आसमान पर निर्भर है, ईश्वर पर निर्भर है। बारिश ठीक हो गई तो काम चल जाता है। बारिश अगर ठीक नहीं हुई तो मामला गड़बड़ा जाता है। उसे पानी चाहिए। अगर हम पानी पहुंचाने का प्रबंध ठीक से कर पाते हैं तो सिर्फ एक फसल नहीं, वो दो फसल दे सकता है, कोई तीन फसल ले सकता है और बाकी समय में भी कुछ न कुछ उत्पादन करके वो रोजी-रोटी कमा सकता है। प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना से पूरे हिंदूस्तान में खेतों में पानी पहुंचाने का, एक बहुत बड़ा भगीरथ काम उठाने की दिशा में ये सरकार आगे बढ़ रही है और आने वाले वर्षों में उस काम को हम पूर्ण करना चाहते हैं।

कितने जलाशय बने हुए हैं। लेकिन उन जलाशयों में खेतों तक पानी ले जाने की व्यवस्था नहीं है। मैं हैरान हूं..बिजली का कारखाना लग जाए लेकिन बिजली वहन करने के लिए जो तार नहीं लगेंगे तो कारखाना किस काम का? जलाशय बन जाए, पानी भर जाए, लेकिन उस पानी को पहुंचाने के लिए अगर नहर नहीं होगी तो उस पानी को देख करके क्या करेंगे? इसलिए देश भर में जलाशयों के बूंद बूंद पानी का उपयोग कैसे हो, हमारा किसान उससे लाभान्वित कैसे हो, उस दिशा में हम काम कर रहे हैं।

भारत जैसे देश में पानी भी बचाना पड़ेगा। इसलिए हमारा आग्रह है- per drop more crop. पानी के हर बूंद से फसल पैदा होनी चाहिए। एक एक बूंद का उपयोग करना चाहिए। micro-irrigation का उपयोग करना चाहिए..टपक सिंचाई, sprinkler, जहां जहां किसानों ने इस आधुनिक technology से पानी का उपयोग किया है, मेहनत भी कम हुई है, खर्चा भी कम हुआ है, उत्पादन ज्यादा बढ़ा है, मुनाफा भी ज्यादा बढ़ा है।

मैं किसानों से आग्रह करता हूं, देश भर के किसानों से आग्रह करता हूं कि आइए, ये हम flood irrigation..क्योंकि किसान का स्वभाव है, जब तक वो खेत में, लबालब पानी से भरा हुआ उसको खेत दिखता नहीं है, तब तक उसको लगता है कि पता नहीं फसल होगी कि नहीं होगी। ये सोच गलत है। फसल को इतने पानी की ज़रूरत नहीं होती है। पानी का प्रभाव भी फसल को नुकसान करता है, पानी का अभाव भी फसल को नुकसान करता है। अगर सही मात्रा में पानी पहुंचे तो उससे सर्वाधिक लाभ होता है। इसलिए micro-irrigation के द्वारा, टपक सिंचाई के द्वारा फसल का लाभ हम कैसे उठाएं, पानी पहुंचा पहुंचा कर कैसे लाभ उठाएं..।

आपने देखा होगा कि अगर कोई बच्चा घर में बीमार रहता है, और आपने अगर सोचा हो कि एक बाल्टी भर दूध ले लें, दूध के अंदर केसर, पिस्ता, बादाम डाल दें और उस बाल्टी भर दूध से रोज़ बच्चे को नहलाना शुरू कर दें। क्योंकि बच्चे की तबियत ठीक नहीं रहती, वजन नहीं बढ़ता है,ढीला ढाला रहता है और पूरे दिन पड़ा रहता है, बच्चे की तरह वो हंसता, खेलता, दौड़ता नहीं है तो एक बाल्टी भर दूध..बादाम हो, पिस्ता हो, केसर हो, उससे उसको नहलाएं, आप मुझे बताएं कि बच्चे को इतने बढि़या दूध से नहलाने से उसकी तबियत ठीक होगी क्या, उसका वजन बढ़ेगा क्या? उसकी सेहत में सुधार होगा क्या? नहीं होगा। लेकिन अगर समझदार मां एक एक चम्मच से एक एक बूंद दूध पिलाती है, शाम तक चाहे 100 ग्राम दूध पिला दे, बच्चे के स्वास्थ्य में सुधार नज़र आना शुरू हो जाता है। फसल का भी ऐसा ही है, जैसे बच्चे को एक एक चम्मच दूध से बदलाव आता है, फसल को भी, एक एक बूंद पानी अगर उसके मूंह में जाता है तो उसको सचमुच में विकास करने का अवसर मिलता है। जिस प्रकार से हम बच्चे का लालन पालन करते हैं, उसी प्रकार हम फसल का भी लालन पालन कर सकते हैं। इसलिए मैं सभी किसान भाईयों को micro irrigation के लिए, टपक सिंचाई के लिए फ़वारे वाली सिंचाई के लिए आग्रह करता हूं। पानी बचाएंगे, पैसा भी बचेगा और फसल ज्यादा पैदा होगी, इसकी मैं आपको गारंटी देने आया हूं।

सरकार ने एक open university.. किसानों को रोज़मर्रा जानकारियां देने के लिए, रोज़मर्रा प्रशिक्षण करने के लिए, सरकार ने किसान चैनल चालू किया हैं। हमारे देश में कार्टून फिल्मों की चैनल होती है, स्पोर्ट्स की, समाचारों की चैनल होती है, मनोरंजन के लिए चैनल होती है, लेकिन किसानों के लिए चैनल नहीं थी। भारत सरकार ने पिछले महीने सिर्फ और सिर्फ किसानों की आवश्यकताओं के लिए एक किसान चैनल चालू किया। आपने भी अब देखना शुरू किया होगा, उसमें सारी जानकारियां बताई जाती हैं। किसान के सवालों के जवाब दिए जाते हैं, देशभर में कृषि क्षेत्र में क्या क्या प्रगति हुई, उसकी जानकारी दी जाती है। मैं चाहता हूं ये किसान चैनल हमारे देश के किसानों के लिए एक open university के रूप में काम करे। घर घर आ करके हर किसान को वो गाइड करे। किसान और किसान चैनल, कृषि में आधुनिकता कैसे आए कृषि में वैज्ञानिकता कैसे आए, कृषि में बदलाव कैसे आए, उस दिशा में काम करे।

आज जो झारखंड की इस धरती में जो प्रयास आरंभ हुआ है, वो उत्तम स्तर कक्षा के कृषि वैज्ञानिकों को तैयार करेगा, कृषि क्षेत्र के निष्णातों को तैयार करेगा और हमारी कृषि को आधुनिक बनाने की दिशा में झारखंड की धरती पर से एक नया युग प्रारंभ होगा, इसी एक विश्वास के साथ मैं आप सबको, खास करके मेरे किसान भाइयों को हृदय से बहुत बहुत शुभकामनाएं देता हूं। झारखंड को भी बहुत ही जल्द, ये संस्थान निर्माण हो जाए, बहुत तेजी से यहां के विद्यार्थियों को लाभ मिले, उस दिशा में आगे बढ़ें, इन्हीं शुभकामनाओं के साथ आप सबको बहुत बहुत धन्यवाद। जय जवान, जय किसान।

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Corona period has proved importance of skill, re-skill and up-skill: PM Modi
June 18, 2021
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One lakh youth will be trained under the initiative in 2-3 months: PM
6 customized courses launched from 111 centres in 26 states
Virus is present and possibility of mutation is there, we need to stay prepared: PM
Corona period has proved importance of skill, re-skill and up-skill: PM
The pandemic has tested the strength of every country, institution, society, family and person of the world: PM
People below 45 years of age will get the same treatment for vaccination as for people above 45 years of age from June 21st: PM
PM Lauds ASHA workers, ANM, Anganwadi and health workers deployed in the dispensaries in the villages

नमस्कार, केंद्रीय मंत्रिमंडल के मेरे सहयोगी श्रीमान महेंद्र नाथ पांडे जी, आर के सिंह जी, अन्य सभी वरिष्ठ मंत्रीगण, इस कार्यक्रम में जुड़े सभी युवा साथी, प्रोफेशनल्स, अन्य महानुभाव और भाइयों और बहनों,

कोरोना के खिलाफ महायुद्ध में आज एक महत्वपूर्ण अभियान का अगला चरण प्रारंभ हो रहा है। कोरोना की पहली वेव के दौरान देश में हजारों प्रोफेशनल्स, स्किल डवलपमेंट अभियान से जुड़े। इस प्रयास ने देश को कोरोना से मुकाबला करने की बड़ी ताकत दी। अब कोरोना की दूसरी वेव के बाद जो अनुभव मिले हैं, वो अनुभव आज के इस कार्यक्रम का प्रमुख आधार बने हैं। कोरोना की दूसरी वेव में हम लोगों ने देखा कि कोरोना वायरस का बदलना और बार-बार बदलता स्वरूप किस तरह की चुनौतियां हमारे सामने ला सकता है। ये वायरस हमारे बीच अभी भी है और जब तक ये है, इसके म्यूटेट होने की संभावना भी बनी हुई है। इसलिए हर इलाज, हर सावधानी के साथ-साथ आने वाली चुनौतियों से निपटने के लिए हमें देश की तैयारियों को और ज्यादा बढ़ाना होगा। इसी लक्ष्य के साथ आज देश में 1 लाख फ्रंटलाइन कोरोना वॉरियर्स तैयार करने का महाअभियान शुरु हो रहा है।

साथियों,

इस महामारी ने दुनिया के हर देश, हर संस्था, हर समाज, हर परिवार, हर इंसान के सामर्थ्य को, उनकी सीमाओं को बार-बार परखा है। वहीं, इस महामारी ने साइंस, सरकार, समाज, संस्था और व्यक्ति के रूप में भी हमें अपनी क्षमताओं का विस्तार करने के लिए सतर्क भी किया है। पीपीई किट्स और टेस्टिंग इंफ्रास्ट्रक्चर से लेकर कोविड केयर और ट्रीटमेंट से जुड़े मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर का जो बड़ा नेटवर्क आज भारत में बना है, वो काम अब भी चल रहा है और वो इसी का परिणाम है। आज देश के दूर-सुदूर में अस्पतालों तक भी वेंटिलेटर्स, ऑक्सीजन कंसंट्रेटर्स पहुंचाने का भी तेज गति से प्रयास किया जा रहा है। डेढ़ हजार से ज्यादा ऑक्सीजन प्लांट्स बनाने का काम युद्ध स्तर पर जारी है और हिन्दुस्तान के हर जिले में पहुंचने का एक भगीरथ प्रयास है। इन प्रयासों के बीच एक स्किल्ड मैनपावर का बड़ा पूल होना, उस पूल में नए लोग जुड़ते रहना, ये भी उतना ही जरूरी है। इसी को देखते हुए, कोरोना से लड़ रही वर्तमान फोर्स को सपोर्ट करने के लिए, देश में करीब 1 लाख युवाओं को ट्रेन करने का लक्ष्य रखा गया है। ये कोर्स दो-तीन महीने में ही पूरा हो जाएगा, इसलिए ये लोग तुरंत काम के लिए उपलब्ध भी हो जाएंगे और एक ट्रेन्ड सहायक के रूप में वर्तमान व्यवस्था को काफी कुछ सहायकता देंगे, उनका बोझ हल्का करेंगे। देश के हर राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों की मांग के आधार पर, देश के टॉप एक्सपर्ट्स ने क्रैश कोर्स डिजायन किया है। आज 6 नए कस्टमाइज़्ड कोर्स लॉन्च किए जा रहे हैं। नर्सिंग से जुड़ा सामान्य काम हो, होम केयर हो, क्रिटिकल केयर में मदद हो, सैंपल कलेक्शन हो, मेडिकल टेक्निशियन हों, नए-नए उपकरणों की ट्रेनिंग हो, इसके लिए युवाओं को तैयार किया जा रहा है। इसमें नए युवाओं की स्किलिंग भी होगी और जो पहले से इस प्रकार के काम में ट्रेन्ड हो चुके हैं, उनकी अप-स्किलिंग भी होगी। इस अभियान से, कोविड से लड़ रही हमारी हेल्थ सेक्टर की फ्रंटलाइन फोर्स को नई ऊर्जा भी मिलेगी और हमारे युवाओं रोजगार के नए अवसर के लिए उनके लिए सुविधा भी बनेगी।

साथियों,

Skill, Re-skill और Up-Skill, ये मंत्र कितना महत्वपूर्ण है, ये कोरोना काल ने फिर सिद्ध किया है। हेल्थ सेक्टर के लोग Skilled तो थे ही, उन्होंने कोरोना से निपटने के लिए बहुत कुछ नया सीखा भी। यानि एक तरह से उन्होंने खुद को Re-skill किया। इसके साथ ही, उनमें जो स्किल पहले से थी, उसका भी उन्होंने विस्तार किया। बदलती परिस्थितियों के अनुसार अपनी स्किल को अपग्रेड या वैल्यू एडिशन करना, ये Up-Skilling है, और समय की यही मांग है और जिस गति से टेक्नोलॉजी जीवन के हर क्षेत्र में प्रवेश कर रही है तब लगातार dynamic व्यवस्था Up-Skilling की अनिवार्य हो गई है। Skill, Re-skill और Up-Skill, के इसी महत्व को समझते हुए ही देश में Skill India Mission शुरु किया गया था। पहली बार अलग से कौशल विकास मंत्रालय बनाना हो, देशभर में प्रधानमंत्री कौशल विकास केंद्र खोलना हो, ITI's की संख्या बढ़ाना हो, उनमें लाखों नई सीट्स जोड़ना हो, इस पर लगातार काम किया गया है। आज स्किल इंडिया मिशन हर साल लाखों युवाओं को आज की जरूरत के हिसाब से ट्रेनिंग देने में बहुत बड़ी मदद कर रहा है। इस बात की देश में बहुत चर्चा नहीं हो पाई, कि स्किल डवलपमेंट के इस अभियान ने, कोरोना के इस समय में देश को कितनी बड़ी ताकत दी। बीते साल जब से कोरोना की चुनौती हमारे सामने आई है, तब से ही कौशल विकास मंत्रालय ने देशभर के लाखों हेल्थ वर्कर्स को ट्रेन करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। Demand Driven Skill Sets तैयार करने की जिस भावना के साथ इस मंत्रालय को बनाया गया था, उस पर आज और तेजी से काम हो रहा है।

साथियों,

हमारी जनसंख्या को देखते हुए, हेल्थ सेक्टर में डॉक्टर, नर्स और पैरामेडिक्स से जुड़ी जो विशेष सेवाएं हैं, उनका विस्तार करते रहना उतना ही आवश्यक है। इसे लेकर भी पिछले कुछ वर्षों में एक फोकस्ड अप्रोच के साथ काम किया गया है। बीते 7 साल में नए AIIMS, नए मेडिकल कॉलेज और नए नर्सिंग कॉलेज के निर्माण पर बहुत ज्यादा बल दिया गया। इनमें से अधिकांश ने काम करना शुरू भी कर दिया है। इसी तरह, मेडिकल एजुकेशन और इससे जुड़े संस्थानों में रिफॉर्म्स को प्रोत्साहित किया जा रहा है। आज जिस गति से, जिस गंभीरता से हेल्थ प्रोफेशनल्स तैयार करने पर काम चल रहा है, वो अभूतपूर्व है।

साथियों,

आज के इस कार्यक्रम में, मैं हमारे हेल्थ सेक्टर के एक बहुत मजबूत स्तंभ की चर्चा भी जरूर करना चाहता हूं। अक्सर, हमारे इन साथियों की चर्चा छूट जाती है। ये साथी हैं- हमारे आशा-एनम-आंगनवाड़ी और गांव-गांव में डिस्पेंसरियों में तैनात हमारे स्वास्थ्य कर्मी। हमारे ये साथी संक्रमण को रोकने से लेकर दुनिया के सबसे बड़े टीकाकरण अभियान तक में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। मौसम की स्थितियां, भौगौलिक परिस्थिति कितनी भी विपरीत हों, ये साथी एक-एक देशवासी की सुरक्षा के लिए दिन-रात जुटे हुए हैं। गांवों में संक्रमण के फैलाव को रोकने में, दूर-सुदूर के क्षेत्रों में, पहाड़ी और जनजातीय क्षेत्रों में टीकाकरण अभियान को सफलता पूर्वक चलाने में हमारे इन साथियों ने बहुत बड़ी भूमिका अदा की है। 21 जून से जो देश में टीकाकरण अभियान का विस्तार हो रहा है, उसे भी हमारे ये सारे साथी बहुत ताकत दे रहे हैं, बहुत ऊर्जा दे रहे हैं। मैं आज सार्वजनिक रूप से इनकी भूरि-भूरि प्रशंसा करता हूं, इन हमारी सभी साथियों की सराहना करता हूं।

साथियों,

21 जून से जो टीकाकरण अभियान शुरू हो रहा है, उससे जुड़ी अनेक गाइडलाइंस जारी की गई हैं। अब 18 साल से ऊपर के साथियों को वही सुविधा मिलेगी, जो अभी तक 45 साल से ऊपर के हमारे महानुभावों को मिल रही थी। केंद्र सरकार, हर देशवासी को टीका लगाने के लिए, 'मुफ्त' टीका लगाने के लिए, प्रतिबद्ध है। हमें कोरोना प्रोटोकॉल का भी पूरा ध्यान रखना है। मास्क और दो गज़ की दूरी, ये बहुत ज़रूरी है। आखिर में, मैं ये क्रैश कोर्स करने वाले सभी युवाओं को बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं। मुझे विश्वास है, आपकी नई स्किल्स, देशवासियों का जीवन बचाने में लगातार काम आएगी और आपको भी अपने जीवन का एक नया प्रवेश एक बहुत ही संतोष देगा क्योंकि आप जब पहली बार रोजगार के लिए जीवन की शुरूआत कर रहे थे तब आप मानव जीवन की रक्षा में अपने आप को जोड़ रहे थे। लोगों की जिन्दगी बचाने के लिए जुड़ रहे थे। पिछले डेढ़ साल से रात-दिन काम कर रहे हमारे डॉक्टर, हमारी नर्सिस इतना बोझ उन्होंने झेला है, आपके आने से उनको मदद मिलने वाली है। उनको एक नई ताकत मिलने वाली है। इसलिए ये कोर्स अपने आप में आपकी जिन्दगी में एक नया अवसर लेकर के आ रहा है। मानवता की सेवा का लोक कल्याण का एक विशेष अवसर आपको उपलब्ध हो रहा है। इस पवित्र कार्य के लिए, मानव सेवा के कार्य के लिए ईश्वर आपको बहुत शक्ति दे। आप जल्द से जल्द इस कोर्स की हर बारीकी को सीखें। आपने आप को उत्तम व्यक्ति बनाने का प्रयास करें। आपके पास वो स्किल हो जो हर किसी की जिन्दगी बचाने के काम आए। इसके लिए मेरी तरफ से आपको बहुत-बहुत शुभकामनाएं हैं।

बहुत-बहुत धन्यवाद !