भगवान बिरसा मुंडा की इस पवित्र धरती को प्रणाम करते हुए आप सबको भी, मैं बहुत बहुत शुभकामनाएं देता हूं। हमारे कृषि मंत्री, श्रीमान राधा मोहन सिंह जी ने विस्तार से सौ साल पहले कृषि अनुसंधान के क्षेत्र में, बिहार की धरती पर कैसे कार्य प्रारंभ हुआ और बाद में इसी काम से ये भूभाग कैसे अछुता रह गया, इसका वर्णन किया है।

मैं देख रहा हूं, आज यंहा सिर्फ झारखंड के ही नहीं दक्षिण बिहार से भी बड़ी संख्या में लोग नज़र आ रहे हैं..क्योंकि दक्षिण बिहार के लोगों को बराबर समझ है कि इस अनुसंधान केंद्र का लाभ सिर्फ झारखंड को ही मिलेगा, ऐसा नहीं, दक्षिण बिहार के लोग भी इसका सर्वाधिक लाभ उठा पाएंगे, ये उनको भली-भांति पता है।

भारत कृषि प्रधान देश है, ये बात हम सदियों से सुनते आए हैं। लेकिन यह भी एक दुर्भाग्य है कि देश के कृषि जगत को किसानों के नसीब पर छोड़ दिया गया है। उसी का नतीजा है कि सारा विश्व कृषि के क्षेत्र में जो प्रगति कर चुका है, भारत आज भी उससे बहुत पीछे है। चाहे ज़मीन का रख-रखाव हो, चाहे अच्छी क्वालिटी के बीज मुहैया कराना हो, चाहे किसान को पानी और बिजली उपलब्ध कराना हो, चाहे किसान जो उत्पादित करता है चीजें, उसके लिए सही बाज़ार मिले, सही दाम मिले, मूल्य वृद्धि की प्रक्रिया हो, कृषि के साथ सहायक उद्योग, पशुपालन हो, मतस्य उद्योग हो, शहद का काम हो..इन सारी बातों को ले करके एक संतुलित, एक comprehensive, integrated जब तक हम प्लान नहीं करते, हम हमारे गांव के आर्थिक जीवन को बदल नहीं सकते, हम किसानों के जीवन में बदलाव नहीं ला सकते हैं।

इसलिए दिल्ली में बैठी हुई वर्तमान सरकार..परंपरागत ये कृषि है, जो हमारे भाई बहन अपने पुरखों से सीख करके आगे बढ़ा रहे हैं। वह .. कृषि आधुनिक कैसे बने, वह कृषि वैज्ञानिक कैसे बने और आज जो प्रति हेक्टेयर उत्पान होता है, वह उत्पादन कैसे बढ़े, ये चिंता का विषय है। इस सबके उपाय नहीं हैं, ऐसा नहीं है। उसके लिए कोई रास्ते नहीं खोजे जा सकते, ऐसा नहीं है। आवश्यकता है कि सरकार की नीतियों के द्वारा, प्रशिक्षण के द्वारा, संसाधन मुहैया कराने की पद्धति से कृषि को आधुनिक और वैज्ञानिक बनाया जा सकता है।

जनसंख्या बढ़ती चली जा रही है, ज़मीन कम होती चली जा रही है। आज से पचास साल पहले जिस परिवार के पास सौ बीघा ज़मीन होगी..परिवार का विस्तार होते होते, बेटे, बेटे के बेटे, चचेरे भाई, उनके बेटे..ज़मीन के टुकड़े होते होते अब परिवार के पास दो बीघा, पांच बीघा ज़मीन रह गई होगी। ज़मीन छोटे छोटे टुकड़ों में बंट रही है, परिवार का विस्तार हो रहा है। जनसंख्या बढ़ रही है, ज़मीन कम हो रही है। ऐसी स्थिति में हमारे पास जो उपलब्ध ज़मीन है, उसमें अगर हमारी उत्पादकता नहीं बढ़ेगी, हम ज़्यादा फसल नहीं प्राप्त करेंगे, न तो देश का पेट भरेगा, न तो किसान का जेब भरेगा।

इसलिए कृषि का विकास ऐसे हो, जो देशवासियों का पेट भी भरे और किसान का जेब भी भरे और इसलिए सबसे पहली आवश्यकता है, हमारी परंपरागत कृषि में पुनः संशोधन करने की, research करने की। भारत इतना विशाल देश है, कि एक कोने में एक laboratory में काम होने से काम चलेगा नहीं। सभी agro climatic zone में, वहां की वायु के अनुसार, ज़मीन के अनुसार, परंपराओं के अनुसार संशोधन करने पड़ेंगे। तब जा करके उन संसाधनों का उपयोग होगा। अगर, केरल में जो प्रयोग सफल होता है, वहीं प्रयोग हम झारखंड में फिट करने जाएंगे तो कभी कभी..न तो किसान उसको स्वीकार करेगा और कभी कोई प्रयोग अगर विफल गया, तो कभी किसान हाथ नहीं लगाएगा।

इसलिए वो जिस भू-भाग में रहता है, जिस प्राकृतिक अवस्था में रहता है, जिस परंपरा से खेती करता है, उसी में अगर हम संशोधन करेंगे, उसी में वैज्ञानिकता लाएंगे, तो किसान उसको सहज रूप में स्वीकार भी करेगा और किसान को वो उपकारक भी होगा। इसलिए हमने दूर-सुदूर इलाकों के विद्यार्थियों को.. कृषि के क्षेत्र में आधुनिक शिक्षा मिले, उनको research करने का अवसर मिले और वो अपने अपने क्षेत्र में, उस भूभाग के किसानों का भला करने की दिशा में नए संशोधन करे, जिसको आगे चल करके लागू किया जाए, उस दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास..जिसके तहत आज एक कृषि अनुसंधान के क्षेत्र में एक इंस्टीट्यूट झारखंड को मिल रहा है। इसका लाभ इस पूरे इलाके को मिलने वाला है।

हमारे देश ने प्रथम कृषि क्रांति देखी है, लेकिन उसको बहुत साल हो गए। अब समय की मांग है कि देश में दूसरी कृषि क्रांति बिना विलंब होनी चाहिए। ये दूसरी कृषि क्रांति होने की संभावना कहां है? मैं जानकारियों के आधार पर कह सकता हूं कि अब हिंदूस्तान में दूसरी कृषि क्रांति की संभावना अगर कहीं है, तो वह पूर्वी उत्तर प्रदेश, झारखंड, बिहार, उड़ीसा, पश्चिम बंगाल, असम, ये भारत के जो पूर्वी इलाके हैं, वहीं पर से दूसरी कृषि क्रांति की संभावना है। इसलिए सरकार ने पूरा अपना ध्यान इस क्षेत्र के विकास की ओर केंद्रित किया है और इस क्षेत्र के विकास के लिए जिस प्रकार से एक research institute का हम आरंभ कर रहे हैं, उसी प्रकार से.. किसान को fertilizer चाहिए, यूरिया चाहिए। इस इलाके में यूरिया के खातर के कारखाने बंद पड़े हैं। हमारी सरकार ने निर्णय किया.. चाहे गोरखपुर का कारखाना हो, चाहे सिंदरी का कारखाना हो, चाहे पश्चिम बंगाल, असम में कारखाने लगाने की बात हो, बिहार में लगाने की बात हो, अरबों, खरबों रूपयों की लागत से इन कारखानों को लगाया जाएगा, चालू किया जाएगा ताकि यहां के किसानों को खाद मिले, यूरिया मिले, उनको खातर मिले और पास में जो उत्पादन होता है, transportation का जो बोझ लगता है, उससे भी उसको मुक्ति मिले और यहां पर खाद के कारखाने लगें तो यहां के नौजवान को रोज़गार भी मिले।

सरकार ने एक महत्वपूर्ण initiative लिया है। आजकल, अगर हम बिमार होते हैं तो डाक्टर दवाई देने से पहले कहता है कि pathology laboratory में जाइए, रक्त परीक्षण करवाईए, यूरिन टेस्ट करवाइए, ब्लड टेस्ट करवाइए, उसके बाद तय करेंगे कि क्या बिमारी है और उसके बाद दवाई देंगे। गांव के अंदर भी आजकल डाक्टर सीधी दवाई देने के बजाए आपको ब्लड टेस्ट कराने के लिए भेजता है। शरीर के अंदर क्या कमी आई है, उसका पता पहले लगाया जाता है, उसके बाद दवाई दी जाती है। जैसा शरीर का स्वाभाव है, वैसा ही हमारी इस धरती माता का भी स्वभाव है। जैसे हम बिमार होते है, वैसे ही ये हमारी धरती माता भी बिमार होती है। जैसे हम अपने शरीर की चिंता करते हैं, वैसे हमें धरती माता की तबियत की भी चिंता करना ज़रूरी है। हमारी धरती माता को क्या बिमारी है? क्या कमियां आईं हैं? हमने किस प्रकार से हमारी धरती माता का दूरूपयोग किया है? कितना हमने उसको चूस लिया है? इसका अध्ययन ज़रूरी है..और इसलिए सरकार ने पूरे देश में हर खेत के लिए soil health card बनाना तय किया है। धरती के परीक्षण के द्वारा उसका एक कार्ड निकाला जाएगा। जैसे इंसान का health card होता है, वैसे किसान की धरती माता का भी health card होगा। आपकी धरती में क्या कमियां है, क्या बिमारियां हैं, आपकी धरती किस फसल के लिए उपयुक्त है, कौन से pesticide लगाना अच्छा है, कौन से लगाना बुरा है, कौन सा fertilizer डालना ठीक है, कौन सा डालना बुरा है, इसकी पूरी समझ किसान को अगर पहले से मिल जाए तो किसान तय कर सकता है कि मेरी ये धरती है, इसमें धान पैदा होगा, दलहन पैदा होंगे, क्या पैदा होगा, वो तय कर सकता है। एक बार यदि अपनी ज़मीन के हिसाब से फसल बोता है, तो उसको ज्यादा आय भी होती है, ज्यादा फसल पैदा होती है। पूरे हिंदूस्तान में वैज्ञानिक तरीके से हम ये बदलाव लाने के लिए लगे हैं ..और ये काम धीरे धीरे नौजवानों को रोज़गार देने वाला भी काम बन सकता है।

आज हिंदुस्तान में जितनी pathology laboratories हैं, वो सरकार कहां चलाती है? सरकार की तो बहुत कम हैं। लोग चलाते हैं, लोग अपना pathology laboratory बनाते हैं, patient आते हैं, परीक्षण करते हैं, अपना खर्चा वो ले लेते हैं, रोज़ी रोटी कमाते हैं, लोगों की तबियत की भी चिंता करते हैं। धीरे धीरे हम देश में नौजवानों को soil health card तैयार करने की laboratory का जाल बिछाने के लिए तैयार करना चाहते हैं। ताकि नौजवान का अपना व्यवसाय बन जाए..ज़मीन, मिट्टी का परीक्षण करने का उसका रोज़गार शुरू हो जाए और गांव का नौजवान गांव में ही कमाई करने लग जाए। उसके रोज़गार के भी द्वार खुल जाएं और ज़मीन के संबंध में किसान को सही जानकारी मिल जाए ताकि वो सही उत्पादन की दिशा में आगे बढ़ सके, उस दिशा में हम काम कर रहे हैं।

भाईयों-बहनों, हमारे कृषि के साथ पशुपालन का भी उतना ही महत्व है, मतस्य पालन का भी उतना ही महत्व है, मुर्गी पालन का भी उतना ही महत्व है, शहद का काम करना भी उतने ही महत्व का है। हमारी खेती अगर 6 महीना – 8 महीना चलती है तो बाकी समय में ये चीज़ें किसान की आर्थिक स्थिति में लाभ करते हैं। आज हमारे पास जितने पशु हैं, उसकी तुलना में हमारा दूध कम है। दुनिया में पशु कम हैं, दूध का उत्पादन ज्यादा है। हमारे यहां पशु ज्यादा है, दूध का उत्पादन कम है। ये स्थिति हमें पलटनी है। प्रति पशु ज्यादा से ज्यादा दूध कैसे उत्पादन हो..ताकि जो पशुपालक हैं, जो किसान हैं, उसके लिए पशुपालन कभी मंहगा नहीं होना चाहिए। पशुपालन का जितना खर्चा होता है, उससे ज्यादा आय उसको दूध में से मिलना चाहिए। इसलिए हमने डेयरी के क्षेत्र में, झारखंड को भी सेवाएं मिलें, ये अभी अभी निर्णय कर लिया है। झारखंड में भी डेयरी का विकास हो, पशुपालकों को लाभ हो, किसान को खेती के साथ साथ पशुपालन की भी व्यवस्था मिले, उस दिशा में हम प्रयास कर रहे हैं।

मैं एक बार बिहार में भ्रमण कर रहा था, तो वहां लोगों ने मुझे बताया कि बिहार में हर वर्ष करीब 400 करोड़ रूपए की मछली दूसरे राज्यों में से import करके खाते हैं। अब ये 400 करोड़ रूपया कहीं और चला जाता है। अगर वहीं पर सही तरीके से मतस्य उद्योग हो, वहां के नौजवानों को रोज़गार मिले, वहां के लोगों की आवश्यकता की पूर्ति हो तो 400 करोड़ रूपए वहीं बच जाएंगे। उन 400 करोड़ रूपयों से कितने लोगों को रोजी-रोटी मिल जाएगा।

इसलिए हम व्यवस्थाओं को विकसित करना चाहते हैं। हमारे देश में कुछ इलाके ऐसे हैं कि जहां किसान मधुमक्खी के पालन में लगा हुआ है और कुछ किसान तो ऐसे हैं जो शहद के उत्पादन से, मधु के उत्पादन से लाखों रूपयों की कमाई करते हैं। क्या हम हमारे देश में, हर राज्य में कम से कम एक जिला..वहां के किसानों को तैयार करें, मधु के लिए तैयार करें, शहद के लिए तैयार करें। और हर राज्य का एक जिला..जहां के किसान अपनी खेती, पशुपालन के साथ साथ मधु उत्पादन का भी काम करें। मधु खराब भी नहीं होता है। बोतल में पैक करके रख दिया। सालों तक चलता है। आज दुनिया में उसकी मांग है। हम हमारे किसान को आधुनिक रूप से बदलाव लाने की दिशा में ले जाना चाहते हैं।

आज किसान जागरूक हुआ है, Vermicompost की ओर बढ़ा है। क्या हम तय नहीं कर सकते कि पिछली बार हमारे पास सौ किलो earthworm थे.. पिछली बार अगर हमारे पास सौ किलो केंचुए थे, इस बार अगर हमने दो सौ किए। आपको तो सिर्फ एक गड्ढा खोद कर उसमें कूड़ा कचरा डालना है। बाकी काम अपने आप परमात्मा कर देता है। आपकी ज़मीन को भी वो संभालता है और आजकल केंचुओं का बाज़ार भी बहुत बड़ा होता जा रहा है। हमारी ज़मीन भी बचेगी, यूरिया का खपत भी बचेगा। यूरिया के कारण हमारी ज़मीन बरबाद हो रही है, वो भी बचेगी और Vermi-compost के द्वारा हम उत्पादन में वृद्धि ला सकते हैं, ये अपने घर में बैठ करके करने वाले काम हैं, उसको हम कर सकते हैं। इसलिए हम एक integrated approach के साथ हमारे कृषि क्षेत्र में बदलाव लाने की दिशा में एक के बाद एक कदम उठाने जा रहे हैं।

हमारे देश में आज भी..जब हमारे देश के प्रधानमंत्री थे, लाल बहादुर शास्त्री, उन्होंने एक बार कहा- जय जवान, जय किसान। देश के किसानों को कहा कि अन्न के भंडार भर दो, फिर इस देश के किसान ने कभी पीछे मुड़ करके देखा नहीं। उसने इतनी मेहनत की, इतनी मेहनत की, अन्न के भंडार भर दिए। अब विदेशों से खाने के लिए अन्न नहीं मंगवाना पड़ता। लेकिन मेरे किसान बहनों, भाईयों हमने अन्न के भंडार तो भर दिए, लकिन आज देश के लोगों को, खास करके गरीब लोगों को अपने खाने में दलहन की बड़ी आवश्यकता होती है। प्रोटीन उसी से मिलता है, दाल से मिलता है। हमारे यहां दाल का उत्पादन बहुत कम है, विदेशों से लाना पड़ता है। मैं देश के किसानों से आग्रह करता हूं कि अगर आपके पास पांच एकड़ भूमि है तो चार एकड़ भूमि में आप परंपरागत जो काम करते हैं, करिए। कम से कम एक एकड़ भूमि में आप दलहन की खेती कीजिए। देश को जो pulses बाहर से लाने पड़ते हैं, वो लाने न पड़ें और गरीब से गरीब व्यक्ति को जो दाल चाहिए, वो दाल हम उपलब्ध करा सकें। इसीलिए सरकार ने.. जो minimum support price देते हैं, उसमें pulses के लिए एक विशेष पैकेज दिया है - जो दाल वगैरह पैदा करेंगे, मूंग, चने वगैरह पैदा करेंगे, उनको अतिरिक्त minimum support price मिलेगा ताकि देश में दाल के उत्पादन को बढ़ावा मिले और देश की आवश्यकता हमारे देश का किसान पूर्ण करे।

इन बातों को ले करके हमने एक और काम का बीड़ा उठाया है। वो है- प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना। बहुत ही महत्वपूर्ण काम है। अगर हमारे किसान को पानी मिल जाए तो मिट्टी में से सोना पैदा करने की वो ताकत रखता है। आज हमारे देश की ज्यादातर कृषि आसमान पर निर्भर है, ईश्वर पर निर्भर है। बारिश ठीक हो गई तो काम चल जाता है। बारिश अगर ठीक नहीं हुई तो मामला गड़बड़ा जाता है। उसे पानी चाहिए। अगर हम पानी पहुंचाने का प्रबंध ठीक से कर पाते हैं तो सिर्फ एक फसल नहीं, वो दो फसल दे सकता है, कोई तीन फसल ले सकता है और बाकी समय में भी कुछ न कुछ उत्पादन करके वो रोजी-रोटी कमा सकता है। प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना से पूरे हिंदूस्तान में खेतों में पानी पहुंचाने का, एक बहुत बड़ा भगीरथ काम उठाने की दिशा में ये सरकार आगे बढ़ रही है और आने वाले वर्षों में उस काम को हम पूर्ण करना चाहते हैं।

कितने जलाशय बने हुए हैं। लेकिन उन जलाशयों में खेतों तक पानी ले जाने की व्यवस्था नहीं है। मैं हैरान हूं..बिजली का कारखाना लग जाए लेकिन बिजली वहन करने के लिए जो तार नहीं लगेंगे तो कारखाना किस काम का? जलाशय बन जाए, पानी भर जाए, लेकिन उस पानी को पहुंचाने के लिए अगर नहर नहीं होगी तो उस पानी को देख करके क्या करेंगे? इसलिए देश भर में जलाशयों के बूंद बूंद पानी का उपयोग कैसे हो, हमारा किसान उससे लाभान्वित कैसे हो, उस दिशा में हम काम कर रहे हैं।

भारत जैसे देश में पानी भी बचाना पड़ेगा। इसलिए हमारा आग्रह है- per drop more crop. पानी के हर बूंद से फसल पैदा होनी चाहिए। एक एक बूंद का उपयोग करना चाहिए। micro-irrigation का उपयोग करना चाहिए..टपक सिंचाई, sprinkler, जहां जहां किसानों ने इस आधुनिक technology से पानी का उपयोग किया है, मेहनत भी कम हुई है, खर्चा भी कम हुआ है, उत्पादन ज्यादा बढ़ा है, मुनाफा भी ज्यादा बढ़ा है।

मैं किसानों से आग्रह करता हूं, देश भर के किसानों से आग्रह करता हूं कि आइए, ये हम flood irrigation..क्योंकि किसान का स्वभाव है, जब तक वो खेत में, लबालब पानी से भरा हुआ उसको खेत दिखता नहीं है, तब तक उसको लगता है कि पता नहीं फसल होगी कि नहीं होगी। ये सोच गलत है। फसल को इतने पानी की ज़रूरत नहीं होती है। पानी का प्रभाव भी फसल को नुकसान करता है, पानी का अभाव भी फसल को नुकसान करता है। अगर सही मात्रा में पानी पहुंचे तो उससे सर्वाधिक लाभ होता है। इसलिए micro-irrigation के द्वारा, टपक सिंचाई के द्वारा फसल का लाभ हम कैसे उठाएं, पानी पहुंचा पहुंचा कर कैसे लाभ उठाएं..।

आपने देखा होगा कि अगर कोई बच्चा घर में बीमार रहता है, और आपने अगर सोचा हो कि एक बाल्टी भर दूध ले लें, दूध के अंदर केसर, पिस्ता, बादाम डाल दें और उस बाल्टी भर दूध से रोज़ बच्चे को नहलाना शुरू कर दें। क्योंकि बच्चे की तबियत ठीक नहीं रहती, वजन नहीं बढ़ता है,ढीला ढाला रहता है और पूरे दिन पड़ा रहता है, बच्चे की तरह वो हंसता, खेलता, दौड़ता नहीं है तो एक बाल्टी भर दूध..बादाम हो, पिस्ता हो, केसर हो, उससे उसको नहलाएं, आप मुझे बताएं कि बच्चे को इतने बढि़या दूध से नहलाने से उसकी तबियत ठीक होगी क्या, उसका वजन बढ़ेगा क्या? उसकी सेहत में सुधार होगा क्या? नहीं होगा। लेकिन अगर समझदार मां एक एक चम्मच से एक एक बूंद दूध पिलाती है, शाम तक चाहे 100 ग्राम दूध पिला दे, बच्चे के स्वास्थ्य में सुधार नज़र आना शुरू हो जाता है। फसल का भी ऐसा ही है, जैसे बच्चे को एक एक चम्मच दूध से बदलाव आता है, फसल को भी, एक एक बूंद पानी अगर उसके मूंह में जाता है तो उसको सचमुच में विकास करने का अवसर मिलता है। जिस प्रकार से हम बच्चे का लालन पालन करते हैं, उसी प्रकार हम फसल का भी लालन पालन कर सकते हैं। इसलिए मैं सभी किसान भाईयों को micro irrigation के लिए, टपक सिंचाई के लिए फ़वारे वाली सिंचाई के लिए आग्रह करता हूं। पानी बचाएंगे, पैसा भी बचेगा और फसल ज्यादा पैदा होगी, इसकी मैं आपको गारंटी देने आया हूं।

सरकार ने एक open university.. किसानों को रोज़मर्रा जानकारियां देने के लिए, रोज़मर्रा प्रशिक्षण करने के लिए, सरकार ने किसान चैनल चालू किया हैं। हमारे देश में कार्टून फिल्मों की चैनल होती है, स्पोर्ट्स की, समाचारों की चैनल होती है, मनोरंजन के लिए चैनल होती है, लेकिन किसानों के लिए चैनल नहीं थी। भारत सरकार ने पिछले महीने सिर्फ और सिर्फ किसानों की आवश्यकताओं के लिए एक किसान चैनल चालू किया। आपने भी अब देखना शुरू किया होगा, उसमें सारी जानकारियां बताई जाती हैं। किसान के सवालों के जवाब दिए जाते हैं, देशभर में कृषि क्षेत्र में क्या क्या प्रगति हुई, उसकी जानकारी दी जाती है। मैं चाहता हूं ये किसान चैनल हमारे देश के किसानों के लिए एक open university के रूप में काम करे। घर घर आ करके हर किसान को वो गाइड करे। किसान और किसान चैनल, कृषि में आधुनिकता कैसे आए कृषि में वैज्ञानिकता कैसे आए, कृषि में बदलाव कैसे आए, उस दिशा में काम करे।

आज जो झारखंड की इस धरती में जो प्रयास आरंभ हुआ है, वो उत्तम स्तर कक्षा के कृषि वैज्ञानिकों को तैयार करेगा, कृषि क्षेत्र के निष्णातों को तैयार करेगा और हमारी कृषि को आधुनिक बनाने की दिशा में झारखंड की धरती पर से एक नया युग प्रारंभ होगा, इसी एक विश्वास के साथ मैं आप सबको, खास करके मेरे किसान भाइयों को हृदय से बहुत बहुत शुभकामनाएं देता हूं। झारखंड को भी बहुत ही जल्द, ये संस्थान निर्माण हो जाए, बहुत तेजी से यहां के विद्यार्थियों को लाभ मिले, उस दिशा में आगे बढ़ें, इन्हीं शुभकामनाओं के साथ आप सबको बहुत बहुत धन्यवाद। जय जवान, जय किसान।

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April 23, 2024
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कोसा, कासा और कंचन की धरती पर आज एक अलग ही उत्साह नज़र आ रहा है। कुछ महीने पहले मैं विधानसभा चुनाव में भाजपा के लिए आपसे आशीर्वाद मांगने आया था। भाजपा के हर साथी को आप सबने बहुत आशीर्वाद दिया, हमारे सेवाभाव को मान दिया, इसके लिए सबसे पहले तो मैं आप सबका हृदय से बहुत-बहुत आभार व्यक्त करता हूं। अब मैं आज फिर से आपके पास आशीर्वाद मांगने आया हूं। तीसरी बार भाजपा सरकार के लिए आपके भरपूर आशीर्वाद लेने के लिए मैं आपके पास आया हूं। पिछले 10 साल में अपना देश बहुत आगे आया है, लेकिन बहुत सारा काम बाकी है। और छत्तीसगढ़ में तो मुझे पिछली सरकार ने मेरे कोई काम यहां आगे बढ़ने ही नहीं दिए। अब विष्णुदेव जी हैं तो वो काम भी मुझे पूरे करने हैं।

10 साल आपने मुझे देखा है, मैं लागातार आपके लिए दौड़ता रहता हूं कि नहीं दौड़ता हूं। काम करता रहता हूं कि नहीं करता रहता हूं। एक भी छुट्टी लिए बिना करता हूं कि नहीं करता हूं। भरपूर मेहनत करता हूं कि नहीं करता हूं। और सब आप ही के लिए कर रहा हूं न। मुझे बताइए आप ही के लिए कर रहा हूं न। मेरे लिए तो नहीं कर रहा हूं न। बाकी नेताओं को तो अपने बच्चों के लिए कुछ करना होता है। मोदी के लिए तो आप ही मेरा परिवार हैं। अब मुझे बताइए, आपलोग तो बहुत उदार हैं, बहुत आशीर्वाद देने वाले लोग हैं। और मैंने जब-जब आपसे आशीर्वाद मांगा, आपने कोई कमी नहीं रखी। लेकिन आज मैं आपसे आग्रह करने आया हूं। अगर मोदी आप कहते हैं इतना काम करता है, सबलोग। सोशल मीडिया में कहते हैं मोदी कितना काम करता है। अब मैं आपसे एक और बात कहना चाहता हूं। अब मोदी इतना सारा करता है, क्या आपको मोदी के लिए एक घंटा निकालना चाहिए कि नहीं निकालना चाहिए। 7 मई को वोट देने के लिए, मोदी के लिए एक घंटा निकालोगे। जरा हाथ ऊपर करके बताओ निकालोगे। मोदी को वोट करोगे। पक्का करोगे। आपको जांजगीर-चंपा से हमारी छोटी बहन कमलेश जांगडे और रायगढ़ से हमारा छोटा भाई राधेश्याम राठिया जी को भारी मतों से जिताकर दिल्ली में मेरी मदद के लिए भेजना है। भेजेंगे। ये दोनों मेरे साथी, भारत को शक्तिशाली बनाने के लिए एक मजबूत सरकार बनाने के लिए दिल्ली में मेरा साथ देने वाले हैं। करेंगे? मुझे मां चंद्रहासिनी, अष्टभुजी मैया, शिवरीनारायण, गिरोधपुरी धाम, तुर्री धाम, दमाखेड़ा की कृपा, और आप जनता-जनार्दन के आशीर्वाद पर अटूट भरोसा है। इसी भरोसे के कारण ही छत्तीसगढ़ कह रहा है- फिर एक बार...मोदी सरकार ! फिर एक बार...मोदी सरकार ! फिर एक बार...मोदी सरकार !

साथियों,

आज मेरा सौभाग्य है। आज यहां मंच पर मेरे साथ पूज्य आचार्य मेहत्तर राम जी रामनामी और माता सेत बाई रामनामी भी रूबरू हमें आशीर्वाद देने आए हैं। मेरे लिए तो खुशी है कि 22 जनवरी को अयोध्या में आकरके भी मुझे आशीर्वाद दिया था। रामनामी समाज, अपनी भक्ति, अपने भजन, श्रीराम के प्रति अपने समर्पण और प्रकृति प्रेम के लिए जाना जाता है। कहते हैं, रामनामी समाज के पूर्वजों ने डेढ़ सौ साल पहले ही बता दिया था कि राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा कब होगी। मोदी को जिस मंदिर के प्राण-प्रतिष्ठा का सौभाग्य मिला। अयोध्या के जिस मंदिर की उम्मीद देश छोड़ चुका था, सबने मान लिया था, अब मामला खतम, नहीं होगा, उस उम्मीद को पूरा करने का काम भाजपा ने किया है। ये कमल वालों ने किया है। कांग्रेस के लोग हम पर तंज करते थे, हर चुनाव में हमें पूछा जाता था मंदिर कब बनेगा। कांग्रेस वाले तो आए-दिन गली मोहल्ले में अरे बताओ मंदिर कब बनेगा। और नारा देते थे - मंदिर वहीं बनाएंगे, तारीख नहीं बताएंगे। हमने उन्हें तारीख भी बताई, समय भी बताया, निमंत्रण भी भेजा, लेकिन कांग्रेस के सातवें आसमान के अहंकार ने वो अपने आप को राम से भी बड़ा मानते हैं। प्रभु राम से भी बड़ा मानते हैं, और उन्होंने प्राण प्रतिष्ठा के कार्यक्रम का निमंत्रण ठुकरा दिया। हमारे ऐसे संतों का अपमान है कि नहीं है। माता शबरी का अपमान है कि नहीं है। और ये क्षेत्र तो माता शबरी का स्थान है, छत्तीसगढ़ तो प्रभु श्रीराम का ननिहाल है। मैं आपसे पूछता हूं क्या ये छत्तीसगढ़ का अपमान नहीं है? ये छत्तीसगढ़ का अपमान है कि नहीं है? क्या ये माता शबरी का अपमान है कि नहीं है?

साथियों,

धर्म के नाम पर देश को बांटने वाली कांग्रेस आजादी के बाद भी, पहले दिन से तुष्टिकरण में लगी हुई थी। तुष्टिकरण, वोट बैंक की राजनीति कांग्रेस के DNA में है। तुष्टिकरण के लिए कांग्रेस को दलितों-पिछड़ों-आदिवासियों का हक भी छीनना पड़े तो वो एक सेकेंड नहीं लगाएंगे। जबकि भाजपा, सबका साथ-सबका विकास के मंत्र पर चलने वाली पार्टी है। हमारी प्राथमिकता गरीब, युवा, महिला और किसानों का कल्याण है। कांग्रेस ने 60 साल तक देश में गरीबी हटाओ का नारा दिया और अपने नेताओं की तिजोरी भरती रही। लेकिन मोदी ने नारेबाजी नहीं की, मोदी ने आपसे नाता जोड़ा, नारा नहीं दिया और मोदी ने 10 वर्ष में 25 करोड़ देशवासियों को जो गरीबी में जिंदगी जीते थे, जो मुसीबत में जीते थे, जिनके सपने बचे नहीं थे। उन 25 करोड़ गरीबों को गरीबी से बाहर निकाला है।

साथियों,

गरीब कल्याण के लिए हमारी नीति भी सही है और उससे भी ज्यादा हमारी नीयत सही है। और जब नीयत सही होते हैं नतीजे भी सही मिलते हैं। और उसके कारण 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर आए। हमारे पिछले 10 साल का ट्रैक रिकॉर्ड यही है। हम जो कहते हैं, उसको करने के लिए मेहनत करने में कोई कमी नहीं रखते। हर चुनौती को चुनौती देते हैं। और उसे पूरा करके रहते हैं। अब देखिए यहां हमारा धान का उदाहरण ले लो। पानी होने के बावजूद यहां का किसान कम फसल उगाता था। फसल कम इसलिए उगाता था क्योंकि खरीद कम होती थी, भाव कम मिलता था, ऊपर से पैसा समय पर नहीं मिलता था। लेकिन आपने देखा है, हमारे नए मुख्यमंत्री भाई विष्णु देव साय जी और उनकी पूरी टीम ने आते ही कमाल कर दिया है। 2 साल का बाकी बकाया था न वो भी आपके चरणों में सुपुर्द कर दिया। रिकॉर्ड MSP पर प्रति एकड़ रिकॉर्ड खरीद भी की गई है। 45 हज़ार करोड़ रुपए इतने कम समय में यहां धान किसानों को मिल चुके हैं। छत्तीसगढ़ में तेंदुपत्ता संग्राहकों को दी गारंटी भी पूरी हुई है। छत्तीसगढ़ के लाखों किसानों को पीएम किसान सम्मान निधि के भी 7 हज़ार करोड़ रुपए मिले हैं। और अब मोदी की गारंटी है कि ये पैसे ऐसे ही आगे भी किसानों को मिलता रहेगा।

साथियों,

भाजपा सरकार खेती में हमारी माताओं-बहनों की भागीदारी को भी कई गुणा बढ़ाने में जुटी है। ड्रोन जैसी आधुनिक तकनीक खेती की लागत कम करने वाली है। और ये जो ड्रोन क्रांति आने वाली है, इसका नेतृत्व हमारी बहनें करेंगी, आदिवासी बहनें करेंगी। नमो ड्रोन दीदी योजना से बहनों को पहले ड्रोन पायलट की ट्रेनिंग दी जा रही है और सरकार उनको महंगे ड्रोन भी दे रही है। छत्तीसगढ़ की महतारी वंदन योजना की देशभर में बहुत चर्चा है। यहां लाखों बहनों को हर महीने सीधी मदद पहुंच रही है। मोदी ने भी गारंटी दी है कि 3 करोड़ बहनों को लखपति दीदी बनाएंगे। (बेटी आप कबसे ये फोटो लेकर खड़ी हो, थक जाओगी। क्या करना है, मुझे देना चाहती हो। मुझे देने के लिए लाई हो, भाई जरा लेकरके मेरे एसपीजी के लोगों को दे दीजिए। बेटा पीछे अपना नाम पता लिख देना। अपना नाम पता लिख देना, मैं तुम्हे चिट्ठी भेजूंगा। अच्छा इधर भी है। ये कौन है, किसने किया है। ये बहुत मेहरबान लोग हैं।) साथियों, ये जो नमो ड्रोन दीदी वाला मेरा अभियान है, इससे स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी, वनधन केंद्रों से जुड़ी यहां की लाखों बहनों को सीधा लाभ होगा।

साथियों,

भाजपा सरकार जो कहती है, वो करके दिखाती है। यहां जांजगीर-चांपा में करीब पचास हजार परिवारों को पक्के घर मिले हैं। जांजगीर-चांपा में ही, करीब 2 लाख नल कनेक्शन दिए हैं। करीब 3 लाख बहनों को यहां सस्ते सिलेंडर वाला उज्जवला कनेक्शन मिला है। भाइयों और बहनों, मेरे लिए आप ही मेरा परिवार है। मेरा भारत, मेरा परिवार। परिवार के हर सुख-दुख की चिंता करना मेरा भी दायित्व है। इसलिए मैंने तय किया है कि मुफ्त राशन देने वाली योजना आने वाले 5 साल तक चलती रहेगी। आयुष्मान भारत के तहत 5 लाख रुपए तक के मुफ्त इलाज की गारंटी यहां के लाखों परिवारों को मिल रही है। अब छत्तीसगढ़ के जितने भी परिवार हैं, उनमें जो भी बुजुर्ग हैं, 70 साल से ऊपर के जो भी लोग हैं। अब अगर आपके परिवार में 70 साल से ऊपर के माता-पिता, दादा-दादी, नाना-नानी, चाचा-चाची अगर कोई बीमार हो जाए। तो आप इलाज कराने में जरा भी कंजूसी मत करना। अच्छे से अच्छे अस्पताल में इलाज करना, खर्चा आपका बेटा देगा।

भाइयों और बहनों,

2014 से पहले करीब 60 वर्ष तक कांग्रेस के एक ही परिवार ने सीधा या रिमोट से सरकार चलाई। कांग्रेस कभी नहीं चाहती कि दलित-पिछड़े-आदिवासियों की भागीदारी बढ़े। 2014 में आपने अपने बीच से आए मोदी को इतनी बड़ी जिम्मेदारी दी। मैं आपलोगों के बीच निकला हुआ हूं। मैं गरीबी को जी करके आया हूं। जिन मुसीबतों को आपके माता-पिता ने झेला है न, वो मैंने भी झेली है। आज देखिए इसी के कारण भाजपा ने एक दलित परिवार के बेटे को देश का राष्ट्रपति बनाया। और कांग्रेस ने उनका विरोध किया। आजादी के इतने साल बाद भाजपा ने देश को पहली आदिवासी महिला राष्ट्रपति देने का फैसला किया। अब मुझे बताइए कांग्रेस का क्या जाता था भाई। कांग्रेस ने स्वागत करना चाहिए था नहीं करना चाहिए था। कांग्रेस ने साथ देना चाहिए था कि नहीं देना चाहिए था। लेकिन आदिवासियों की घोऱ विरोधी कांग्रेस ने एक आदिवासी बेटी जब राष्ट्रपति बन रही थी, उनका भी विरोध किया और जीत गई तो अनाप-शनाप बोल करके उनका अपमान भी किया। यहां छत्तीसगढ़ में आपने भरोसा जताया तो हमने मेरे साथी अरुण साव जी को इतनी बड़ी जिम्मेदारी दी। लेकिन कांग्रेस को गरीब, दलित, पिछड़े, आदिवासी परिवारों की सत्ता में ये भागीदारी पच नहीं रही।

भाइयों और बहनों,

कांग्रेस ने अब एक और बड़ा खेल शुरु कर दिया है। पहले कर्नाटका से कांग्रेस के सांसद ने कहा कि दक्षिण भारत को अलग देश घोषित कर देंगे। अब कांग्रेस के गोवा के उम्मीदवार कह रहे हैं कि गोवा पर भारत का संविधान लागू नहीं होता। वो साफ-साफ कह रहे हैं कि गोवा पर देश का संविधान थोपा गया और उन्होंने ये बातें कांग्रेस के शहज़ादे को बताई हैं। ये बाबासाहेब अंबेडकर का अपमान है कि नहीं है। ये बाबासाहेब अंबेडकर का अपमान है कि नहीं है। ये भारत के संविधान का अपमान है कि नहीं है। ये भारत के संविधान के साथ छेड़छाड़ है नहीं है। कांग्रेस का उम्मीदवार कह रहा है कि गोवा में संविधान नहीं चलेगा। ये जम्मू कश्मीर के लोग भी कहा करते थे। आपने मोदी को आशीर्वाद दिया आज उनकी बोलती बंद हो गई, और देश का संविधान वहां चल रहा है। बाबासाहेब अंबेडकर का संविधान जो जम्मू-कश्मीर में नहीं चलता था वो भी लागू हो गया। भाइयों-बहनों कांग्रेस का उम्मीदवार कह रहा है कि उसने उनके नेता को कहा है। और ये सार्वजनिक करता है उसका मतलब, उस नेता ने उसको मूक सहमति दी है। ये सोची समझी चाल है देश को तोड़ने की। कांग्रेस को देश के एक बड़े हिस्से ने नकार दिया है। इसलिए वो देश में ही ऐसे टापू बनाना चाहती है। आज गोवा में संविधान को नकार रहे हैं, कल पूरे देश में बाबा साहब अंबेडकर के संविधान को नकारने का पाप करेंगे। यही करेंगे।

भाइयों और बहनों,

कांग्रेस के पास ना देश के लिए कोई विजन है और ना ही गरीब कल्याण की उसे ABCD आती है। अब आप मुझे बताइए गरीब मां बेटा भी डॉक्टर बनना चाहे तो बनना चाहिए कि नहीं बनना चाहिए। गरीब मां बेटा इंजीनियर बनना चाहिए कि नहीं बनना चाहिए। गरीब मां बेटा साइंटिस्ट बनना चाहिए कि नहीं बनना चाहिए। लेकिन उन्होंने ऐसी स्थिति बनाई थी कि अगर आप अंग्रेजी नहीं पढ़े हैं तो डॉक्टर नहीं बन सकते, इंजीनियर नहीं बन सकते, साइंटिस्ट नहीं बन सकते। मोदी ने आकर तय कर दिया, अब गरीब मां का बेटा भी डॉक्टर बनेगा, वो अपनी मातृभाषा में पढ़ेगा। अंग्रेजी नहीं आएगी, गांव के स्कूल में पढ़कर आएगा, अगर डाक्टर बनना चाहता है तो वो बनेगा। ये काम हम करते हैं। मोदी आत्मनिर्भर भारत की बात करता है तो कांग्रेस कहती है ये तो मुद्दा ही नहीं है। यहां का कोसा, हमारा कोसा सिल्क दुनियाभर में छा जाए, मोदी इसके लिए समर्पित है। इसलिए मैं वोकल फॉर लोकल की बात करता हूं। यहां जो हमारे विश्वकर्मा साथी हैं, कांसे को शानदार कला में ढालते हैं, दूसरे शिल्प में जुटे हैं। ऐसे साथियों के लिए हमने 13 हजार करोड़ रुपए की विश्वकर्मा योजना बनाई है। हम ऐसे विश्वकर्मा साथियों को आर्थिक मदद दे रहे हैं। छत्तीसगढ़ की जो सबसे पिछड़ी जनजातियां हैं, उनके लिए भी पीएम जनमन योजना बनाई है। इस योजना पर भी करीब 25 हजार करोड़ रुपए खर्च किए जा रहे हैं। लेकिन साथियों, गरीब सेवा के मोदी के इन प्रयासों पर यहां कांग्रेस वाले क्या कहते हैं? यहां कांग्रेस वाले कहते हैं- मोदी का सिर फोड़ देंगे। अरे जबतक मेरे देश की माताएं-बहनें बैठी हैं न कोई मोदी को कुछ नहीं कर सकता। ये माताएं-बहनें मेरा रक्षा कवच है। ये माताएं-बहनें मेरा रक्षा कवच है। कोई कुछ नहीं कर सकता है। अब ये कैसे लोग हैं, कांग्रेस के नेता ने पूरे मोदी समाज को गालियां दी थी। साहू समाज को गालियां दी थी। अब मोदी का सिर फोड़ने की बात करते हैं। ओबीसी समाज को गालियां दी थी। भाजपा ने ओबीसी कमीशन को संवैधानिक दर्जा दिया...मेडिकल की पढ़ाई में आरक्षण दिया। गरीबों की संतानें भी डॉक्टर-इंजीनियर बन सकें, इसलिए मैंने मेडिकल और इंजीनियरिंग की पढ़ाई स्थानीय भाषा में भी शुरू करने का काम किया। लेकिन यहां कांग्रेस के एक नेता कहते हैं कि मोदी मर जाए। अब बताइए माला जप रहे, जहां 140 करोड़ लगों का आशीर्वाद होता है न वहां मौत को भी लंबे समय तक इंतजार करना पड़ता है।

साथियों,

ये जो बौखलाहट है, ये मोदी से नहीं है, ये आपके एक वोट की ताकत है न इसलिए ये कांप रहे हैं। ये महादेव घोटाले, शराब घोटाले, भर्ती घोटाले में चल रही तेज़ जांच की बौखलाहट है। मैं कहता हूं भ्रष्टाचार हटाओ, वो कहते हैं भ्रष्टाचारी बचाओ। ये कितनी भी गालियां दें, धमकियां दें, सर फोड़ने की बातें करें, मारने-मरने की बातें करें, जब तक आपका सुरक्षा कवच है, छत्तीसगढ़ महतारी का आशीर्वाद है, ये मोदी का कुछ नहीं बिगाड़ पाएंगे। और साथियों, आपने देखा होगा पिछले 30 साल जब भी चुनाव आता है तो एक ही घिसी पिटी टेप रिकार्ड बजाते रहते हैं...कानों-कानों में कहते रहते, देखो भाजपा वाले आएंगे संविधान खतम कर देंगे। भाजपा वाले आएंगे आरक्षण खतम कर देंगे। अरे कितने दिन झूठ चलाते रहोगे। मेरे शब्द लिख के रखिए, मोदी तो छोड़िए, भाजपा तो छोड़िए, अरे खुद बाबासाहेब अंबेडकर भी आकरके के कहे न तो भी होने वाला नहीं है। कोई संविधान बदल नहीं सकता है। और मेरी एक बात याद रखेंगे? इंडी गठबंधन को दिया आपका वोट केंद्र में सरकार नहीं बना सकता। BJP-NDA को दिया आपका वोट विकसित भारत बनाएगा। इसलिए, आपको हर बूथ पर कमल खिलाना है। कमल खिलाएंगे? घर-घर जाएंगे, ज्यादा से ज्यादा मतदान करवाएंगे। पोलिंग बूथ जीतेंगे। अच्छा मेरा एक काम करेंगे। मेरा काम करेंगे। जरा हाथ ऊपर करके बताओ न करेंगे। देखिए घर-घर जाना और कहना मोदी जी आए थे, मोदी जी ने जोहार कहा है, मोदी जी ने राम-राम कहा है। कह देंगे।

भारत माता की जय!

भारत माता की जय!

भारत माता की जय!