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मैं सबसे पहले आप सबसे क्षमा चाहता हूं। मुझे आने में विलंब हुआ। आया तो समय पर था, लेकिन वरूण देवता की इतनी कृपा हो गई, कि हमारे हेलीकाप्‍टर के टेकआफ में विलंब हुआ, और इसके कारण इससे पूर्व के कार्यक्रम में भी जाने में विलंब हो गया और उसके कारण आप लोगों को प्रतीक्षा करनी पड़ी। लेकिन प्रतीक्षा के बाद लगता है मौसम ज्‍यादा अच्‍छा हो गया।

दुनिया बहुत तेजी से बदल रही है। भारत आजाद हुआ, उसके बाद जो देश आजाद हुए, छोटे-छोटे देश आजाद हुए। लेकिन प्रगति के नाम पर, विकास के नाम पर वे हिन्‍दुस्‍तान से भी आगे निकल गए। हम पीछे क्‍यों रह गए? और क्‍या सवा सौ करोड़ देशवासियों का भारत पीछे रह गया। हम पिछड़ गए, इसकी पीड़ा है क्‍या ? अगर हमारे दिल में ये पिछड़ेपन की पीड़ा न हो, कसक न हो, देश को आगे ले जाने का मकसद न हो और सवा सौ करोड़ देशवासियों का अगर ये सामूहिक सपना न हो, तो देश कभी आगे नहीं बढ़ सकता। दुनिया के जितने देश आगे बढ़े हैं, उस देश के हर नागरिक ने तय कर लिया है कि हम देश को बदलेंगे, हम देश को आगे बढाएंगे। मिल जुल कर के प्रयास करेंगे और यही राष्‍ट्रीय चरित्र होता है जो देश को नई ऊंचाइयों पर ले जाता है।

हिन्‍दुस्‍तान आजाद हुआ, ये देशवासियों की ताकत के कारण हुआ है। इस देश के कोटि कोटि जन कष्‍ट झेलने को तैयार हुए। अंग्रेजों से मुकाबला करने के लिए तैयार हुए। आजादी की ललक जगी और परिणाम ये आया कि अग्रेजों को जाना पड़ा। 60 साल बीत गए। बिना सत्‍ता, बिना शासन अगर ये देशवासी हिन्‍दुस्‍तान से अंग्रेजों को भगा सकते हैं, तो सवा सौ करोड़ देशवासी हिन्‍दुस्‍तान से गरीबी को भी भगा सकते हैं। जिस मिजाज से हम आजादी का जंग लड़े, जिस त्‍याग, तपस्‍चर्या, बलिदान से हमने गुलामी को, गुलामी की जंजीरों को तोड़ा है, उसी मिजाज से, उसी ताकत से सवा सौ करोड़ देशवासी इस गरीबी की जंजीरों से भी मुक्ति का विश्‍वास विजय प्राप्‍त कर सकते हैं। हिन्‍दुस्‍तान बहुत तेजी से अर्बनाइज हो रहा है, बहुत तेजी से शहरीकरण हो रहा है। अब क्‍या, हम इस शहरीकरण को संकट मानें? क्‍या हम, इस शहरीकरण की प्रक्रिया को चुनौती मानें? कि हम इस शहरीकरण की प्रक्रिया को अवसर मानें? अब तक हमारी सोच रही देश में कि शहरीकरण को हमने संकट माना, बोझ माना, चुनौती माना। मेरी सोच अलग है। मैं शहरीकरण को एक अवसर मानता हूं, एक आपरच्‍युनिटी मानता हूं। आर्थिक विकास की संभावनाओं का केन्‍द्र बिन्‍दु मानता हूं। और इसलिए अब तक उसके साथ व्‍यवहार हुआ है, शहरीकरण याने संकट। और परिणाम क्‍या हुआ, हमारे देश में पहले से प्‍लानिंग नहीं हुई है। 20 साल के बाद हमारा नगर कहां पहुंचेगा, 25 साल के बाद कहां पहुंचेगा, कितनी जनसंख्‍या बढ़ेगी, किनती पानी की व्‍यवस्‍था लगेगी, कितने रोड लगेंगे, कितना ट्रांसपोर्टेशन व्‍यवस्‍था लगेगी, ड्रेनेज किस साइज का लगेगा, यह हमारे यहां सोचा ही नहीं गया। बनता गया, बढ़ता गया। अब फिर इतना प्रेशर आया कि व्‍यवस्‍थाएं टूटने लग गई। अगर पहले से ही हमने योजना की होती तो ये मुसीबत न आती।

आज गांव में कितना ही सुखी किसान क्‍यों न हो, सौ-दो सौ एकड़ भूमि हो, दो चार बेटे हों, वह भी चाहता है, एक-आध बेटा खेती में रहे, बाकी तीन बेटे शहर चले जाएं और वहीं अपना धंधा, रोजगार, नौकरी जो करना हो, करे। हर परिवार अपना एक सदस्‍य शहर भेजना चाहता है। शहर बढ़ने वाले हैं, शहरों की वृद्धि होने वाली है। आवश्‍यक यह है कि इसको हम एक अवसर मानें और अवसर मान कर के विकास का ब्‍लयू प्रिंट तैयार करें। और इसलिए नई सरकार ने कहा है, हमने बजट में भी इसकी चर्चा की है कि जिस तेजी से शहरीकरण हो रहा है, भारत को 100 स्‍मार्ट सिटी की जरूरत है। हर राज्‍य में पांच-छह, पांच-छह बड़े शहर तैयार हो जाएं, वहां पर आर्थिक प्रवृति हो, वर्क टू वर्क का कंसेप्‍ट हो, आधुनिक टेक्‍नोलोजी की पूरी सुविधा हो और दो-दो, पांच-पांच लाख की बस्‍ती के अच्‍छे शहर मैनेजेबल हों, इस दिशा में जितना जल्‍दी हम जाएं, जाने की आवश्‍यकता है और एक बार यह सिलसिला शुरू हुआ, शुरू में शायद एक दो शहर बनेंगे, 5 बनेंगे, 7 बनेंगे, बढ़ता चलेगा कारवां।

उसी प्रकार से आज पूरा विश्‍व ग्‍लोबल वार्मिग की चर्चा कर रहा है। इन्‍वायरामेंट की चिंता हो रही है। मानव जाति के कल्‍याण, प्रकृति से संवाद, प्रकृति से संघर्ष नहीं, यह भारत की विशेष संस्‍कृति रही है। हमारी रगों में है। हम वो लोग हैं, जो पौधे में भी परमात्‍मा देखते हैं। नदी में मां देखते हैं। पर्वत में टीका नजर आता है। हम प्रकृति को प्रेम करने वाली परंपरा की विरासत के धनी हैं। हमें दुनिया के किसी देश से प्रकृति प्रेम के पाठ पढ़ने की आवश्‍यकता नहीं है। यह हमारी रगों में है। लेकिन बदलते हुए युग में सुख सुविधा के बीच, बदलती हुई टेक्नोलोजी के युग में, ये पर्यावरण की रक्षा भी हम सबकी नैतिक जवाबदारी बनती है।

इसलिए ट्रांसपोर्टेशन के क्षेत्र में एक मास ट्रांसपोर्टेशन का कंसेप्‍ट आवश्‍यक बन जाता है। प्रकृति की रक्षा के लिए भी हर कोई अपना स्‍कूटर चलाये, हर कोई अपनी गाडियां चलाये तो ट्रेफिक की भी समस्‍याएं, पर्यावरण की भी समस्‍याएं। अगर उनसे मुक्ति लेनी है तो एक साथ हजारों लोग ट्रेवल कर सके, ऐसी व्‍यवस्‍थाओं को विकसित करना अनिवार्य हो गया है और उसी के तहत बड़े शहरों में, कम खर्च में, तेज गति से, पर्यावरण को नुकसान किए बिना, सामान्‍य से सामान्‍य व्‍यक्ति उसकी यातायात की व्‍यवस्‍था हो, उसमें से मेट्रो रेल का कंसेप्‍ट विकसित हुआ है।

जिस तेजी से नागपुर आगे बढ़ रहा है, पूरे विदर्भ की बडी आर्थिक प्रगति का केन्‍द्र बना हुआ है, उसको देखते हुए नागपुर में भी ये मेट्रो रेल की आवश्‍यकता है। और इस मेट्रो रेल की पूर्ति के लिए भारत सरकार ने नागपुर को प्राथमिकता दी है। और उस प्राथमिकता के तहत नागपुर बहुत ही जल्‍द, नागपुर के नागरिकों के लिए मेट्रो ट्रेन की सुविधा मिल जाएगी। इतना ही नहीं, इन दिनों मेट्रो रेलवे ये स्‍टेटस सिंबल भी बना हुआ है। एक प्रकार से शहर की पहचान के साथ मेट्रो रेलवे जुड़ गई है। नागपुर जब मेट्रो के मैप पर जा जाएगा तो हिन्‍दुस्‍तान के प्रगतिशील शहरों में नागपुर का भी नाम जुड़़ जाएगा। आधुनिक शहर में नागपुर का नाम जुड़ जाएगा और इस दिशा में हम प्रयास कर रहे हैं। और भी एक बात है, हम शहरों का विकास किस रूप में करना चाहते हैं, हम शहरों को किस दिशा में आगे ले जाना चाहते हैं। मैने 15 अगस्‍त को लाले किले से एक बात की विस्‍तार से चर्चा की है। और मैं नागपुर के मेयर अनिल जी को बधाई देता हूं, उन्‍होंने स्‍वच्‍छता की ओर, नागपुर के लोगों की भागीदारी से कई नए-नए कदम उठाए हैं। मैं नागपुर पचासों बार आया हूं और हमेशा ही नाग नदी का दृष्‍य देख कर पीड़ा होती है। अब उसके सफाई का काम भी कर रहे हैं, यह मैंने सुना है। यह हमारी अपनी संपत्ति है।

मैंने 15 अगस्‍त को कहा था, 2019 में महात्‍मा गांधी की 150वीं जयंति आएगी। महात्‍मा गांधी ने हमें आजादी दी, हम तय करें, हम महात्‍मा गांधी को कैसा हिन्‍दुस्‍तान देंगे। जिस महापुरूष ने हमारी इतनी बड़ी सेवा की, उस महापुरूष के सपनों के अनुरूप हम क्‍या करेंगे। और मैं नहीं मानता हूं, आज के युग में प्रेरणा के लिए माहात्‍मा गांधी से बाहर देखने की जरूरत है। महात्‍मा जी को स्‍वच्‍छता प्रिय थी और वे स्‍वच्‍छता के आग्रही थे। क्‍या स्‍वच्‍छता, ये नागरिकों की जिम्‍मेवारी है या नहीं है।

हम सिंगापुर जाते हैं, आ कर के बातें करते हैं, यार इतना साफ-सुथरा था, कहीं गंदगी नजर नहीं आती थी। ऐसा अपने यार-दोस्‍तों को बताते हैं। दुबई जाते हैं, तो यार दोस्‍तों को बताते हैं, क्‍या दुबई है, कहीं गंदगी नहीं है, कोई कूड़ा कचरा नहीं है। कुछ नहीं, बहुत अच्‍छा लगता है। अच्‍छा लगात है ना, नागपुर वाले, अच्‍छा लगता है ना। सिंगापुर आपने साफ-सुथरा आपने साफ सुथरा देखा कि नहीं देखा, दुबई साफ सुथरा दिखता है कि नहीं दिखता है। वहां किसी को गंदगी करते हुए देखा था क्‍या। कोई नागरिक को कूडा-कचरा फेंकते देखा था क्‍या कोई पान खा करके पिचकारी लगाते देखा था क्‍या ? ये जिम्‍मेवारी हमारी नहीं है क्‍या। अगर हम तय करें, हम गंदगी नहीं करेंगे तो कोई म्‍यूनिसिपल कारपोररेशन की ताकत नहीं है कि नागपुर को गंदा कर सके। कोई सरकार गंदा नहीं कर सकती, अगर जनता तय करे कि हमें साफ-सुथरा रखना है।

इस मिशन के तहत एक सपना मेरे मन में चल रहा है, इस देश के 500 नगर को पसंद करके, उन पांच सौ नगर में जैसे यहां फ्लाईओवर की कल्‍पना हो रही है, मेट्रो की कल्‍पना हो रही है, हाउसिंग स्‍कीम्‍स की कल्‍पना हो रही है, स्‍मार्ट्स सिटी की कल्‍पना हो रही है, वह जरूरी है। वह होने वाला है, करना भी चाहिए। लेकिन मैं एक और काम की ओर ध्‍यान देना चाहता हूं। पूरे देश में 500 नगर , महानगर हों, छोटे नगर हों, मेट्रो सिटीज हो, नगर पालिकायें हो, पूरे देश में 500 नगर पसंद करे, और पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल पर सोलिड वेस्‍ट मैनेजमेंट और वेस्‍ट वाटर ट्रीटमेंट, इसका पूरा एक अभियान चलायें। जितना कूड़ा कचरा है, कचरे में से कंचन बनाने का बीड़ा उठायें। और नगरों की सफाई भी होगी, उसके कूड़े-कचरे में से बिजली पैदा हो सकती है। फर्टिलाइजर तैयार हो सकता है, गैस उत्‍पादन हो सकता है, ये वैल्‍यू एडिशन करें हम, कचरे कूड़े कचरे पर। और जो गंदा पानी है, उसको शुद्ध बना करके, वेस्‍ट वाटर ट्रीटमेंट कर के, जो नगर होते हैं, नगर के अरोस-पड़ोस के जो गांव होते हैं, वे ज्‍यादातर सब्‍जी की खेती करते हैं क्‍योंकि शहर में उनकी सब्‍जी बिक जाती है। अधिकतम बड़े शहरों के अगल बगल के गावों में सब्‍जी की खेती बहुत मात्रा में चलती है। इन अरोस-पड़ोस के गांवों को ये जो आर्गेनिक फर्टिलाइजर है, ये उनको दिया जाए। और वो सब्‍जी पैदा करें, वे भी केमिकल फर्टिलाइजर से न करें, आर्गेनिक फर्टिलाइजर से करें और सब्‍जी अगर शहर में आएगी तो शहर के लोगों के स्‍वास्‍थ्‍य में भी लाभ होगा। शहर में से कूड़ा कचरा जाएगा, शहर के लोगों के स्‍वास्‍थ्‍य में लाभ होगा और स्‍वास्‍थ्‍य में लाभ होगा तो आरोग्‍य विभाग के जो खर्च होते हैं, उसमें कटौती आएगी। आर्गेनिक फर्टिलाइजर गांव में जाएगा तो केमिकल फर्टिलाइजर का उपयोग कम होगा। उसके कारण सब्सिडी बचेगी। ये जो सब्सिडी बचेगी, उसको वाइबिलिटी गैप फंडिंग में दिया जाए ताकि नगरों की सफाई के लिए काम आए और जो वेस्‍ट वाटर है, वो ट्रीटमेंट करके गांव के लोगों को खेतों में वापिस दिया जाए। खेती के काम आता है वह पानी। वह एक प्रकार का वह फर्टिलाइजर बन जाता है।

आज गांव के लोगों की शिकायत रहती है हमें पानी नहीं मिलता है, शहर वाले उठा ले जाते हैं। हम ऐसी स्थिति पैदा करें कि शहर वाले गांव को पानी वापस दें। वेस्‍ट वाटर ट्रीटमेंट के जरिये दें। पानी उनके खेतों में उपयोग में आए, उनकी आय बढ़े। सब्‍जी विपुल मात्रा में शहर में आए, गरीब से गरीब व्‍यक्ति भी सस्‍ते में सब्‍जी खा सके, उसके लिए हेल्‍थ को वे फायदा देगी। एक ऐसा चक्र शहरी विकास का, मानवीय हितों को ध्‍यान में रख कर के एक ऐसी व्‍यवस्‍था को हम विकसित करना चाहते हैं। अगर 500 नगरों में आने वाले दिनों में बहुत बड़ी मात्रा में इस काम को करने वाले प्राइवेट लोग आए, पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल पर हो, ये विन विन सिचुएशन का काम है। और एक बार नगर में सफाई हो गई तो बीमारी का नामो निशान नहीं रहता है। शुद्ध पानी पीने को मिलता है, जीवन में बदलाव आना शुरू होता है और इन शहरों के जीवन को बदला जा सकता है।

और इसलिए भाइयों-बहनों, आज जब नागपुर शहर में शहरी जीवन की सुविधाओं के कार्यक्रम के लिए आया हूं, तब, बड़े आत्‍मविश्‍वास के के साथ आपके सामने विजन मैं पहली बार प्रस्‍तुत कर रहा हूं। और मुझे विश्‍वास है कि जितने भी नगरपालिका की, महानगर पालिका की बाडीज हैं, चुने हुए जन प्रतिनिधि हैं, वह अपने शहर की स्‍वच्‍छता के लिए, इन व्‍यवस्‍थाओं को विकसित करने के लिए आगे आएंगे। दिल्‍ली में बैठी हुई सरकार भी एक विशिष्‍ट योजना लेकर आएगी। और ये काम करने के लिए कोई बहुत बड़ी सदियां नहीं लगती हैं। अगर पीछे लग जाएं, एक के बाद एक काम शुरू करें ते बहुत तेजी से इन कामों को किया जा सकता है। इसलिए आने वाले दिनों में शहरी विकास पर हम उस प्रकार से बल देना चाहते हैं।

शहरी गरीब- उस पर ध्‍यान केन्द्रित करना आवश्‍यक है। वह गांव छोड़ कर के शहर आता है, रोजी-रोटी कमाने आता है। अपने गरीब बूढ़े मां-बाप को मनीआर्डर भेज करके उनका जीवन चले, इसकी चिंता करने आता है। ये जो गांव से आने वाले नौजवान हैं, उनके लिए रोजगार की संभावनाएं शहरों में हमें तलाशनी पड़ेगी। इसलिए शहरों में आर्थिक प्रवृतियां कैसे बढ़़े, सर्विस सेक्‍टर को बल कैसे मिले, उद्योगों का विकास कैसे हो, और इसके हेतु स्किल डेवलपमेंट आने वाले दिनों में, वह नौजवान जो बेचारा गरीबी के कारण पांचवीं कक्षा छोड़ दी, सातवीं कक्षा में छोड़ दिया, आठवी-दसवीं कक्षा में पढ़ाई छोड़ दी, क्‍या उसको ऐसे ही असहाय छोड़ा जाएगा। ये गरीब मां-बाप का बेटा जाएगा कहां ? अगर, उसके हाथ में हुनर हो तो पत्‍थर पर भी लात मार कर के रोजी-रोटी कमाने की वह ताकत पैदा हो जाती है। और इसलिए शरही गरीबों को, स्किल डेवलपमेंट का अवसर मिले, उसके हाथ में हुनर हो, वह अपने आप रोजी-रोटी कमाना शुरू हो जाएगा।

आज शहरों में एक तरफ बेरोजगार लोग हैं, और दूसरी तरफ आपको घर में प्‍लंबर चाहिए, प्‍लंबर नहीं मिलता, ड्राइवर चाहिए, ड्राइवर नहीं मिलता है, कुक चाहिए, कुक नहीं मिलता है, चौकीदार चाहिए, चौकीदार नहीं मिलता है। एक तरफ बेकार लोग हों, और दूसरी तरफ आपकी आवश्‍यकता की पूर्ति न हो, ऐसी कैसी व्‍यवस्‍था? और इसलिए जो आवश्‍यकता के अनुसार, इन नौजवानों का स्किल डेवलपमेंट हो, ताकि उनको रोजगार मिल जाए, वह अपने पैरों पर खडा हो जाए, बलबूते पर खड़ा हो जाए, और इसलिए रोजगार की संभावनाओं को, शहरों में गरीब जो रहते हैं, उनके लिए बहुत बड़ी आवश्‍यकता है। गावं में अगर कोई गरीब है, गांव का स्‍वभाव है, गांव उसको संभाल लेता है। लेकिन शहर में कोई किसी को पहचानता नहीं है। फ्लैट में बगल वाले को भी नहीं जानता है। ऐसी स्थिति में एक नए स्‍वरूप में समाज की चिंता करने की आवश्‍यकता हुई है। शहरी गरीबों की तरफ विशेष ध्‍यान देने की आवश्‍यकता खड़ी हुई है। और उस दिशा में ये नई सरकार कुछ न कुछ करने के लिए संकल्‍पबद्ध है।

भाइयों-बहनों, देश भ्रष्‍टाचार के कारण बहुत परेशान है। भ्रष्‍टाचार ने देश को तबाह करके रखा है। अगर हम सब तय करें, तो यह भयंकर से भयंकर बीमारी भी जा सकती है। आप मुझे साथ दीजिए भाइयों-बहनों, यह क्‍यों सहन करें हम ? साठ साल हुए, देश लूटा गया है। और सिर्फ राजनेताओं ने नहीं लूटा है, जिसको भी मौका मिला, सबने लूटा है। और उसके कारण अगर मुसीबत झेलनी पड़ी है तो मध्‍यम वर्ग, निम्‍न मध्‍यम वर्ग के लोगों को झेलनी पड़ी है। जब मैं भ्रष्‍टाचार के खिलाफ आवाज उठाने लगा हूं, तो कुछ राजनीतिक दल बहुत परेशान हो जाते हैं। अब आप मुझे बताइए, मुझे कुछ राजनीतिक दलों की खुशी के लिए काम करना है कि आपकी खुशी के लिए करना है। और इसलिए, भाइयों-बहनों, आपकी खुशी के लिए, देश की प्रगति के लिए, और दुनिया के समृद्ध देशों की बराबरी में हमारा देश भी आ जाए। जिस देश के अंदर 65 प्रतिशत नौजवान 35 साल की उमर के हों, वह देश कभी पीछे नहीं रह सकता भाइयों। यह देश कभी पीछे नहीं रह सकता। अब पीछे रहना भी क्‍यों चाहिए। क्‍यों पीछे रहना चाहिए। क्‍या नहीं है हमारे पास। जिस देश के पास इतना सामर्थ्‍य है, वह देश दुनिया के काम आए, ऐसी ताकत रख सकता है। और वह स्थिति हमें फिर से पैदा करनी है। इसी सपने को ले कर के आगे बढ़ना है। फिर एक बार नागपुर वासियों को मेरी बहुत बहुत शुभकामनाएं। बहुत ही जल्‍द मेट्रो ट्रेन दौड़ने लग जाए, फ्लाईओवर बन जाए, नितिन जी जो बीड़ा उठाया है, वह बीड़ा पूरा हो जाए, इस अपेक्षा के साथ मेरे साथ बोलिये- भारत माता की जय।

ऐसे नहीं, नागपुर में आया हूं, तो दोनों मुट्ठी बंद कर के पूरी ताकत से बोलिये, भारत माता की जय। भारत माता की जय। भारत माता की जय।

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July 31, 2021
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You are lucky to enter Service in the 75th Year of Azadi, next 25 years are critical for both you and India: PM
“They fought for ‘Swarajya’; you have to move forward for ‘Su-rajya’”: PM
Challenge is to keep police ready in these times of technological disruptions: PM
You are the flag-bearers of ‘Ek Bharat -Shreshth Bharat’, always keep the mantra of ‘Nation First, Always First’ foremost: PM
Remain friendly and keep the honour of the uniform supreme: PM
I am witnessing a bright new generation of women officers, we have worked to increase the participation of women in police force: PM
Pays tribute to members of the Police Service who lost their lives serving during the pandemic
Officer trainees from the neighbouring counties underline the closeness and deep relation of our countries: PM

I enjoyed talking to all of you. It is my endeavor every year that I interact with young friends like you, so as to know about your thoughts. Your words, questions and inquisitiveness help me too to deal with the challenges of the future.

Friends,

This discussion is happening at a time when India is celebrating the Amrit Mahotsav of 75 years of its Independence. The date of August 15 this year brings with it the 75th anniversary of Independence. In the last 75 years, India has tried to build a better police service. The infrastructure related to police training has also improved a lot in recent years. Today, when I am talking to you, I can see the youths who will participate in ensuring law and order in India for the next 25 years. This is a huge responsibility. Therefore, we have to move forward with a new beginning and a new resolution.

Friends,

I do not know much as to how many of you have gone to Dandi or have seen the Sabarmati Ashram. But I want to remind you of the Dandi Yatra of 1930. Gandhiji had talked about shaking the foundation of British rule on the basis of Salt Satyagraha. He also said that "when the means are just and right, God also stands by".

 

 

Friends,

Mahatma Gandhi left the Sabarmati Ashram with a small group. As days passed, people, wherever they were, started joining the Salt Satyagraha. When Gandhiji completed his journey in Dandi after 24 days, the entire country stood up in unison. From Kashmir to Kanyakumari and Attock to Cuttack, the entire India had become animated. Remember that emotion and the will-power. It was this fervor and solidarity that fired the power of collectivism for India's freedom struggle. The country is demanding the same spirit for change and willpower from the youth. The tide that rose in the country between 1930 and 1947, the way the youth of the country came forward and the entire young generation got united for one goal, today the same spirit is expected from you as well. We all have to live in this spirit and stick to this resolution. At that time, the people of the country, especially the youth, had fought for Swaraj (self-rule). Today you have to work wholeheartedly for Surajya (good rule). At that time people were ready to die for the freedom of the country. Today you have to move forward with the spirit of living for the country. How our police service will be, how strong it will be after 25 years, when 100 years of India's independence will be completed, it will depend on your actions today. You have to build the foundation on which the edifice of the grand and disciplined India of 2047 will be built. Time has chosen youth like you to fulfill this resolve. And I consider it a great privilege for all of you. You are starting your career at a time when India is going through a phase of transformation in every field and every level. The next 25 years of your career will also be the most important 25 years of India's development. Therefore, your preparation, your state of mind should be in line with this greater goal. In the next 25 years, you will work in different positions in different parts of the country and play different roles. You all have a huge responsibility of building a modern, effective and sensitive police service. Therefore, you always have to remember that you are on a special mission for 25 years, and India has specially chosen you for that.

Friends,

Experiences around the world show that when a nation moves forward on the path of development, the challenges from outside the country and from within the country also mount equally. Therefore, your challenge is to continuously prepare policing in this era of technological disruption. Your challenge is to stop new modes of crime with even more innovative ways. You will also have to develop and apply new experiments, research and methods, especially regarding cyber security.

 

Friends,

Your role is important in ensuring that the countrymen, who have been given whichever rights by the Constitution and the democracy of the country, perform the duties expected of them. Therefore, the expectations from you are high and your conduct is always monitored. There will also be a lot of pressure on you. You don't have to think only within the boundaries of the police station or the police headquarters. You also have to be familiar with every role in the society, be friendly and always keep the dignity of the uniform supreme. One more thing you always have to keep in mind. You will be serving in different districts and cities of the country. Therefore, you have to remember one mantra all the time. Whatever decision you take while in the field, it should be in the interest of the country, it should have a national perspective. Your scope of work and problems will often be local, so this mantra will be very useful while dealing with them. You have to always keep in mind that you are the flag bearer of ‘Ek Bharat, Shrestha Bharat’ (One India, Supreme India) too. Therefore, your every action should reflect the spirit of Nation First, Always First.

Friends,

I can also see a new generation of glorious women officers in front of me. Over the years, a continuous effort has been made to increase the participation of girls in the police force. Our daughters inculcate the values ​​of humility, spontaneity and sensitivity along with efficiency and accountability in the police service. Similarly, the states are also working to implement the commissioner system in cities with a population of more than one million. So far, this system has been implemented in many cities of 16 states. I am sure that positive steps will be taken in other places as well.

Friends,

To make policing futuristic and effective, it is very important to work with collectiveness and sensitivity. Even in this Corona period, we have seen how our colleagues in the police have played a big role in handling the situations. Our policemen have worked shoulder to shoulder with the countrymen in the fight against Corona. Many police personnel have had to sacrifice their lives in this effort. I pay my respectful homage to all those jawans, police comrades, and on behalf of the country, I extend my condolences to their families.

 

Friends,

I want to put one more aspect before you. These days we see that wherever natural calamity, floods, cyclonic storms or landslides occur, our NDRF comrades are there with full readiness. The name of NDRF during the disaster instills confidence among the people. NDRF has created this credibility with its excellent work. Today people have faith that NDRF personnel will save them in times of disaster even by putting their lives on the line. NDRF also, mostly, has personnel from police force, who are your own companions. But do the police command this feeling and respect in the society? There are policemen in the NDRF. NDRF also has respect. The police personnel working in NDRF are also respected. But is the social system like that? Why is it so? You also know the answer to this. The negative perception of the police in the public mind is a big challenge in itself. At the beginning of the Corona period, it was felt that this perception had changed a bit. Because people were watching the videos on social media of policemen serving the poor, feeding the hungry, cooking food and delivering it to the poor. Therefore, there was a change in the perception in society towards the police. But the same old situation has returned again. After all, why does the people’s trust not improve, why does the credibility not improve?

Friends,

Our police personnel even sacrifice their lives for the security of the country, to maintain law and order and to eliminate terror. You are unable to go home for many days and you often have to stay away from your family even during festivals, but when it comes to the image of the police, the attitude of the people changes. It is the responsibility of the new generation joining the police to change this image; this negative perception of the police should end. You have to do this. You have to come face-to-face every day with the established traditions of the police department that have been prevalent for years while you undergo training. It depends on your training, willpower and your morale whether the system changes you or you change the system. What are your intentions? What ideals are you attached to? With what resolve are you proceeding while fulfilling those ideals? That only matters about your behavior. In a way, this will be another test for you. And I am sure you will be successful in this too.

Friends,

I would also like to extend my best wishes to the young officers of our neighboring countries here. Be it Bhutan, Nepal, Maldives or Mauritius, we are not only neighbors but we also have a lot in common in our thinking and social fabric. We are all companions of happiness and sorrow. Whenever there is any calamity or problem, we are the first to help each other. We have experienced this even in the Corona period. Therefore, our partnership is bound to grow for development in the years to come. Mutual coordination is more important especially today when crime and criminals are beyond borders. I am sure that the days you spent at Sardar Patel Academy will help you in cementing your career, your national and social commitment and friendship with India. Once again wishing you all the very best! Thank you!