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मैं सबसे पहले आप सबसे क्षमा चाहता हूं। मुझे आने में विलंब हुआ। आया तो समय पर था, लेकिन वरूण देवता की इतनी कृपा हो गई, कि हमारे हेलीकाप्‍टर के टेकआफ में विलंब हुआ, और इसके कारण इससे पूर्व के कार्यक्रम में भी जाने में विलंब हो गया और उसके कारण आप लोगों को प्रतीक्षा करनी पड़ी। लेकिन प्रतीक्षा के बाद लगता है मौसम ज्‍यादा अच्‍छा हो गया।

दुनिया बहुत तेजी से बदल रही है। भारत आजाद हुआ, उसके बाद जो देश आजाद हुए, छोटे-छोटे देश आजाद हुए। लेकिन प्रगति के नाम पर, विकास के नाम पर वे हिन्‍दुस्‍तान से भी आगे निकल गए। हम पीछे क्‍यों रह गए? और क्‍या सवा सौ करोड़ देशवासियों का भारत पीछे रह गया। हम पिछड़ गए, इसकी पीड़ा है क्‍या ? अगर हमारे दिल में ये पिछड़ेपन की पीड़ा न हो, कसक न हो, देश को आगे ले जाने का मकसद न हो और सवा सौ करोड़ देशवासियों का अगर ये सामूहिक सपना न हो, तो देश कभी आगे नहीं बढ़ सकता। दुनिया के जितने देश आगे बढ़े हैं, उस देश के हर नागरिक ने तय कर लिया है कि हम देश को बदलेंगे, हम देश को आगे बढाएंगे। मिल जुल कर के प्रयास करेंगे और यही राष्‍ट्रीय चरित्र होता है जो देश को नई ऊंचाइयों पर ले जाता है।

हिन्‍दुस्‍तान आजाद हुआ, ये देशवासियों की ताकत के कारण हुआ है। इस देश के कोटि कोटि जन कष्‍ट झेलने को तैयार हुए। अंग्रेजों से मुकाबला करने के लिए तैयार हुए। आजादी की ललक जगी और परिणाम ये आया कि अग्रेजों को जाना पड़ा। 60 साल बीत गए। बिना सत्‍ता, बिना शासन अगर ये देशवासी हिन्‍दुस्‍तान से अंग्रेजों को भगा सकते हैं, तो सवा सौ करोड़ देशवासी हिन्‍दुस्‍तान से गरीबी को भी भगा सकते हैं। जिस मिजाज से हम आजादी का जंग लड़े, जिस त्‍याग, तपस्‍चर्या, बलिदान से हमने गुलामी को, गुलामी की जंजीरों को तोड़ा है, उसी मिजाज से, उसी ताकत से सवा सौ करोड़ देशवासी इस गरीबी की जंजीरों से भी मुक्ति का विश्‍वास विजय प्राप्‍त कर सकते हैं। हिन्‍दुस्‍तान बहुत तेजी से अर्बनाइज हो रहा है, बहुत तेजी से शहरीकरण हो रहा है। अब क्‍या, हम इस शहरीकरण को संकट मानें? क्‍या हम, इस शहरीकरण की प्रक्रिया को चुनौती मानें? कि हम इस शहरीकरण की प्रक्रिया को अवसर मानें? अब तक हमारी सोच रही देश में कि शहरीकरण को हमने संकट माना, बोझ माना, चुनौती माना। मेरी सोच अलग है। मैं शहरीकरण को एक अवसर मानता हूं, एक आपरच्‍युनिटी मानता हूं। आर्थिक विकास की संभावनाओं का केन्‍द्र बिन्‍दु मानता हूं। और इसलिए अब तक उसके साथ व्‍यवहार हुआ है, शहरीकरण याने संकट। और परिणाम क्‍या हुआ, हमारे देश में पहले से प्‍लानिंग नहीं हुई है। 20 साल के बाद हमारा नगर कहां पहुंचेगा, 25 साल के बाद कहां पहुंचेगा, कितनी जनसंख्‍या बढ़ेगी, किनती पानी की व्‍यवस्‍था लगेगी, कितने रोड लगेंगे, कितना ट्रांसपोर्टेशन व्‍यवस्‍था लगेगी, ड्रेनेज किस साइज का लगेगा, यह हमारे यहां सोचा ही नहीं गया। बनता गया, बढ़ता गया। अब फिर इतना प्रेशर आया कि व्‍यवस्‍थाएं टूटने लग गई। अगर पहले से ही हमने योजना की होती तो ये मुसीबत न आती।

आज गांव में कितना ही सुखी किसान क्‍यों न हो, सौ-दो सौ एकड़ भूमि हो, दो चार बेटे हों, वह भी चाहता है, एक-आध बेटा खेती में रहे, बाकी तीन बेटे शहर चले जाएं और वहीं अपना धंधा, रोजगार, नौकरी जो करना हो, करे। हर परिवार अपना एक सदस्‍य शहर भेजना चाहता है। शहर बढ़ने वाले हैं, शहरों की वृद्धि होने वाली है। आवश्‍यक यह है कि इसको हम एक अवसर मानें और अवसर मान कर के विकास का ब्‍लयू प्रिंट तैयार करें। और इसलिए नई सरकार ने कहा है, हमने बजट में भी इसकी चर्चा की है कि जिस तेजी से शहरीकरण हो रहा है, भारत को 100 स्‍मार्ट सिटी की जरूरत है। हर राज्‍य में पांच-छह, पांच-छह बड़े शहर तैयार हो जाएं, वहां पर आर्थिक प्रवृति हो, वर्क टू वर्क का कंसेप्‍ट हो, आधुनिक टेक्‍नोलोजी की पूरी सुविधा हो और दो-दो, पांच-पांच लाख की बस्‍ती के अच्‍छे शहर मैनेजेबल हों, इस दिशा में जितना जल्‍दी हम जाएं, जाने की आवश्‍यकता है और एक बार यह सिलसिला शुरू हुआ, शुरू में शायद एक दो शहर बनेंगे, 5 बनेंगे, 7 बनेंगे, बढ़ता चलेगा कारवां।

उसी प्रकार से आज पूरा विश्‍व ग्‍लोबल वार्मिग की चर्चा कर रहा है। इन्‍वायरामेंट की चिंता हो रही है। मानव जाति के कल्‍याण, प्रकृति से संवाद, प्रकृति से संघर्ष नहीं, यह भारत की विशेष संस्‍कृति रही है। हमारी रगों में है। हम वो लोग हैं, जो पौधे में भी परमात्‍मा देखते हैं। नदी में मां देखते हैं। पर्वत में टीका नजर आता है। हम प्रकृति को प्रेम करने वाली परंपरा की विरासत के धनी हैं। हमें दुनिया के किसी देश से प्रकृति प्रेम के पाठ पढ़ने की आवश्‍यकता नहीं है। यह हमारी रगों में है। लेकिन बदलते हुए युग में सुख सुविधा के बीच, बदलती हुई टेक्नोलोजी के युग में, ये पर्यावरण की रक्षा भी हम सबकी नैतिक जवाबदारी बनती है।

इसलिए ट्रांसपोर्टेशन के क्षेत्र में एक मास ट्रांसपोर्टेशन का कंसेप्‍ट आवश्‍यक बन जाता है। प्रकृति की रक्षा के लिए भी हर कोई अपना स्‍कूटर चलाये, हर कोई अपनी गाडियां चलाये तो ट्रेफिक की भी समस्‍याएं, पर्यावरण की भी समस्‍याएं। अगर उनसे मुक्ति लेनी है तो एक साथ हजारों लोग ट्रेवल कर सके, ऐसी व्‍यवस्‍थाओं को विकसित करना अनिवार्य हो गया है और उसी के तहत बड़े शहरों में, कम खर्च में, तेज गति से, पर्यावरण को नुकसान किए बिना, सामान्‍य से सामान्‍य व्‍यक्ति उसकी यातायात की व्‍यवस्‍था हो, उसमें से मेट्रो रेल का कंसेप्‍ट विकसित हुआ है।

जिस तेजी से नागपुर आगे बढ़ रहा है, पूरे विदर्भ की बडी आर्थिक प्रगति का केन्‍द्र बना हुआ है, उसको देखते हुए नागपुर में भी ये मेट्रो रेल की आवश्‍यकता है। और इस मेट्रो रेल की पूर्ति के लिए भारत सरकार ने नागपुर को प्राथमिकता दी है। और उस प्राथमिकता के तहत नागपुर बहुत ही जल्‍द, नागपुर के नागरिकों के लिए मेट्रो ट्रेन की सुविधा मिल जाएगी। इतना ही नहीं, इन दिनों मेट्रो रेलवे ये स्‍टेटस सिंबल भी बना हुआ है। एक प्रकार से शहर की पहचान के साथ मेट्रो रेलवे जुड़ गई है। नागपुर जब मेट्रो के मैप पर जा जाएगा तो हिन्‍दुस्‍तान के प्रगतिशील शहरों में नागपुर का भी नाम जुड़़ जाएगा। आधुनिक शहर में नागपुर का नाम जुड़ जाएगा और इस दिशा में हम प्रयास कर रहे हैं। और भी एक बात है, हम शहरों का विकास किस रूप में करना चाहते हैं, हम शहरों को किस दिशा में आगे ले जाना चाहते हैं। मैने 15 अगस्‍त को लाले किले से एक बात की विस्‍तार से चर्चा की है। और मैं नागपुर के मेयर अनिल जी को बधाई देता हूं, उन्‍होंने स्‍वच्‍छता की ओर, नागपुर के लोगों की भागीदारी से कई नए-नए कदम उठाए हैं। मैं नागपुर पचासों बार आया हूं और हमेशा ही नाग नदी का दृष्‍य देख कर पीड़ा होती है। अब उसके सफाई का काम भी कर रहे हैं, यह मैंने सुना है। यह हमारी अपनी संपत्ति है।

मैंने 15 अगस्‍त को कहा था, 2019 में महात्‍मा गांधी की 150वीं जयंति आएगी। महात्‍मा गांधी ने हमें आजादी दी, हम तय करें, हम महात्‍मा गांधी को कैसा हिन्‍दुस्‍तान देंगे। जिस महापुरूष ने हमारी इतनी बड़ी सेवा की, उस महापुरूष के सपनों के अनुरूप हम क्‍या करेंगे। और मैं नहीं मानता हूं, आज के युग में प्रेरणा के लिए माहात्‍मा गांधी से बाहर देखने की जरूरत है। महात्‍मा जी को स्‍वच्‍छता प्रिय थी और वे स्‍वच्‍छता के आग्रही थे। क्‍या स्‍वच्‍छता, ये नागरिकों की जिम्‍मेवारी है या नहीं है।

हम सिंगापुर जाते हैं, आ कर के बातें करते हैं, यार इतना साफ-सुथरा था, कहीं गंदगी नजर नहीं आती थी। ऐसा अपने यार-दोस्‍तों को बताते हैं। दुबई जाते हैं, तो यार दोस्‍तों को बताते हैं, क्‍या दुबई है, कहीं गंदगी नहीं है, कोई कूड़ा कचरा नहीं है। कुछ नहीं, बहुत अच्‍छा लगता है। अच्‍छा लगात है ना, नागपुर वाले, अच्‍छा लगता है ना। सिंगापुर आपने साफ-सुथरा आपने साफ सुथरा देखा कि नहीं देखा, दुबई साफ सुथरा दिखता है कि नहीं दिखता है। वहां किसी को गंदगी करते हुए देखा था क्‍या। कोई नागरिक को कूडा-कचरा फेंकते देखा था क्‍या कोई पान खा करके पिचकारी लगाते देखा था क्‍या ? ये जिम्‍मेवारी हमारी नहीं है क्‍या। अगर हम तय करें, हम गंदगी नहीं करेंगे तो कोई म्‍यूनिसिपल कारपोररेशन की ताकत नहीं है कि नागपुर को गंदा कर सके। कोई सरकार गंदा नहीं कर सकती, अगर जनता तय करे कि हमें साफ-सुथरा रखना है।

इस मिशन के तहत एक सपना मेरे मन में चल रहा है, इस देश के 500 नगर को पसंद करके, उन पांच सौ नगर में जैसे यहां फ्लाईओवर की कल्‍पना हो रही है, मेट्रो की कल्‍पना हो रही है, हाउसिंग स्‍कीम्‍स की कल्‍पना हो रही है, स्‍मार्ट्स सिटी की कल्‍पना हो रही है, वह जरूरी है। वह होने वाला है, करना भी चाहिए। लेकिन मैं एक और काम की ओर ध्‍यान देना चाहता हूं। पूरे देश में 500 नगर , महानगर हों, छोटे नगर हों, मेट्रो सिटीज हो, नगर पालिकायें हो, पूरे देश में 500 नगर पसंद करे, और पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल पर सोलिड वेस्‍ट मैनेजमेंट और वेस्‍ट वाटर ट्रीटमेंट, इसका पूरा एक अभियान चलायें। जितना कूड़ा कचरा है, कचरे में से कंचन बनाने का बीड़ा उठायें। और नगरों की सफाई भी होगी, उसके कूड़े-कचरे में से बिजली पैदा हो सकती है। फर्टिलाइजर तैयार हो सकता है, गैस उत्‍पादन हो सकता है, ये वैल्‍यू एडिशन करें हम, कचरे कूड़े कचरे पर। और जो गंदा पानी है, उसको शुद्ध बना करके, वेस्‍ट वाटर ट्रीटमेंट कर के, जो नगर होते हैं, नगर के अरोस-पड़ोस के जो गांव होते हैं, वे ज्‍यादातर सब्‍जी की खेती करते हैं क्‍योंकि शहर में उनकी सब्‍जी बिक जाती है। अधिकतम बड़े शहरों के अगल बगल के गावों में सब्‍जी की खेती बहुत मात्रा में चलती है। इन अरोस-पड़ोस के गांवों को ये जो आर्गेनिक फर्टिलाइजर है, ये उनको दिया जाए। और वो सब्‍जी पैदा करें, वे भी केमिकल फर्टिलाइजर से न करें, आर्गेनिक फर्टिलाइजर से करें और सब्‍जी अगर शहर में आएगी तो शहर के लोगों के स्‍वास्‍थ्‍य में भी लाभ होगा। शहर में से कूड़ा कचरा जाएगा, शहर के लोगों के स्‍वास्‍थ्‍य में लाभ होगा और स्‍वास्‍थ्‍य में लाभ होगा तो आरोग्‍य विभाग के जो खर्च होते हैं, उसमें कटौती आएगी। आर्गेनिक फर्टिलाइजर गांव में जाएगा तो केमिकल फर्टिलाइजर का उपयोग कम होगा। उसके कारण सब्सिडी बचेगी। ये जो सब्सिडी बचेगी, उसको वाइबिलिटी गैप फंडिंग में दिया जाए ताकि नगरों की सफाई के लिए काम आए और जो वेस्‍ट वाटर है, वो ट्रीटमेंट करके गांव के लोगों को खेतों में वापिस दिया जाए। खेती के काम आता है वह पानी। वह एक प्रकार का वह फर्टिलाइजर बन जाता है।

आज गांव के लोगों की शिकायत रहती है हमें पानी नहीं मिलता है, शहर वाले उठा ले जाते हैं। हम ऐसी स्थिति पैदा करें कि शहर वाले गांव को पानी वापस दें। वेस्‍ट वाटर ट्रीटमेंट के जरिये दें। पानी उनके खेतों में उपयोग में आए, उनकी आय बढ़े। सब्‍जी विपुल मात्रा में शहर में आए, गरीब से गरीब व्‍यक्ति भी सस्‍ते में सब्‍जी खा सके, उसके लिए हेल्‍थ को वे फायदा देगी। एक ऐसा चक्र शहरी विकास का, मानवीय हितों को ध्‍यान में रख कर के एक ऐसी व्‍यवस्‍था को हम विकसित करना चाहते हैं। अगर 500 नगरों में आने वाले दिनों में बहुत बड़ी मात्रा में इस काम को करने वाले प्राइवेट लोग आए, पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल पर हो, ये विन विन सिचुएशन का काम है। और एक बार नगर में सफाई हो गई तो बीमारी का नामो निशान नहीं रहता है। शुद्ध पानी पीने को मिलता है, जीवन में बदलाव आना शुरू होता है और इन शहरों के जीवन को बदला जा सकता है।

और इसलिए भाइयों-बहनों, आज जब नागपुर शहर में शहरी जीवन की सुविधाओं के कार्यक्रम के लिए आया हूं, तब, बड़े आत्‍मविश्‍वास के के साथ आपके सामने विजन मैं पहली बार प्रस्‍तुत कर रहा हूं। और मुझे विश्‍वास है कि जितने भी नगरपालिका की, महानगर पालिका की बाडीज हैं, चुने हुए जन प्रतिनिधि हैं, वह अपने शहर की स्‍वच्‍छता के लिए, इन व्‍यवस्‍थाओं को विकसित करने के लिए आगे आएंगे। दिल्‍ली में बैठी हुई सरकार भी एक विशिष्‍ट योजना लेकर आएगी। और ये काम करने के लिए कोई बहुत बड़ी सदियां नहीं लगती हैं। अगर पीछे लग जाएं, एक के बाद एक काम शुरू करें ते बहुत तेजी से इन कामों को किया जा सकता है। इसलिए आने वाले दिनों में शहरी विकास पर हम उस प्रकार से बल देना चाहते हैं।

शहरी गरीब- उस पर ध्‍यान केन्द्रित करना आवश्‍यक है। वह गांव छोड़ कर के शहर आता है, रोजी-रोटी कमाने आता है। अपने गरीब बूढ़े मां-बाप को मनीआर्डर भेज करके उनका जीवन चले, इसकी चिंता करने आता है। ये जो गांव से आने वाले नौजवान हैं, उनके लिए रोजगार की संभावनाएं शहरों में हमें तलाशनी पड़ेगी। इसलिए शहरों में आर्थिक प्रवृतियां कैसे बढ़़े, सर्विस सेक्‍टर को बल कैसे मिले, उद्योगों का विकास कैसे हो, और इसके हेतु स्किल डेवलपमेंट आने वाले दिनों में, वह नौजवान जो बेचारा गरीबी के कारण पांचवीं कक्षा छोड़ दी, सातवीं कक्षा में छोड़ दिया, आठवी-दसवीं कक्षा में पढ़ाई छोड़ दी, क्‍या उसको ऐसे ही असहाय छोड़ा जाएगा। ये गरीब मां-बाप का बेटा जाएगा कहां ? अगर, उसके हाथ में हुनर हो तो पत्‍थर पर भी लात मार कर के रोजी-रोटी कमाने की वह ताकत पैदा हो जाती है। और इसलिए शरही गरीबों को, स्किल डेवलपमेंट का अवसर मिले, उसके हाथ में हुनर हो, वह अपने आप रोजी-रोटी कमाना शुरू हो जाएगा।

आज शहरों में एक तरफ बेरोजगार लोग हैं, और दूसरी तरफ आपको घर में प्‍लंबर चाहिए, प्‍लंबर नहीं मिलता, ड्राइवर चाहिए, ड्राइवर नहीं मिलता है, कुक चाहिए, कुक नहीं मिलता है, चौकीदार चाहिए, चौकीदार नहीं मिलता है। एक तरफ बेकार लोग हों, और दूसरी तरफ आपकी आवश्‍यकता की पूर्ति न हो, ऐसी कैसी व्‍यवस्‍था? और इसलिए जो आवश्‍यकता के अनुसार, इन नौजवानों का स्किल डेवलपमेंट हो, ताकि उनको रोजगार मिल जाए, वह अपने पैरों पर खडा हो जाए, बलबूते पर खड़ा हो जाए, और इसलिए रोजगार की संभावनाओं को, शहरों में गरीब जो रहते हैं, उनके लिए बहुत बड़ी आवश्‍यकता है। गावं में अगर कोई गरीब है, गांव का स्‍वभाव है, गांव उसको संभाल लेता है। लेकिन शहर में कोई किसी को पहचानता नहीं है। फ्लैट में बगल वाले को भी नहीं जानता है। ऐसी स्थिति में एक नए स्‍वरूप में समाज की चिंता करने की आवश्‍यकता हुई है। शहरी गरीबों की तरफ विशेष ध्‍यान देने की आवश्‍यकता खड़ी हुई है। और उस दिशा में ये नई सरकार कुछ न कुछ करने के लिए संकल्‍पबद्ध है।

भाइयों-बहनों, देश भ्रष्‍टाचार के कारण बहुत परेशान है। भ्रष्‍टाचार ने देश को तबाह करके रखा है। अगर हम सब तय करें, तो यह भयंकर से भयंकर बीमारी भी जा सकती है। आप मुझे साथ दीजिए भाइयों-बहनों, यह क्‍यों सहन करें हम ? साठ साल हुए, देश लूटा गया है। और सिर्फ राजनेताओं ने नहीं लूटा है, जिसको भी मौका मिला, सबने लूटा है। और उसके कारण अगर मुसीबत झेलनी पड़ी है तो मध्‍यम वर्ग, निम्‍न मध्‍यम वर्ग के लोगों को झेलनी पड़ी है। जब मैं भ्रष्‍टाचार के खिलाफ आवाज उठाने लगा हूं, तो कुछ राजनीतिक दल बहुत परेशान हो जाते हैं। अब आप मुझे बताइए, मुझे कुछ राजनीतिक दलों की खुशी के लिए काम करना है कि आपकी खुशी के लिए करना है। और इसलिए, भाइयों-बहनों, आपकी खुशी के लिए, देश की प्रगति के लिए, और दुनिया के समृद्ध देशों की बराबरी में हमारा देश भी आ जाए। जिस देश के अंदर 65 प्रतिशत नौजवान 35 साल की उमर के हों, वह देश कभी पीछे नहीं रह सकता भाइयों। यह देश कभी पीछे नहीं रह सकता। अब पीछे रहना भी क्‍यों चाहिए। क्‍यों पीछे रहना चाहिए। क्‍या नहीं है हमारे पास। जिस देश के पास इतना सामर्थ्‍य है, वह देश दुनिया के काम आए, ऐसी ताकत रख सकता है। और वह स्थिति हमें फिर से पैदा करनी है। इसी सपने को ले कर के आगे बढ़ना है। फिर एक बार नागपुर वासियों को मेरी बहुत बहुत शुभकामनाएं। बहुत ही जल्‍द मेट्रो ट्रेन दौड़ने लग जाए, फ्लाईओवर बन जाए, नितिन जी जो बीड़ा उठाया है, वह बीड़ा पूरा हो जाए, इस अपेक्षा के साथ मेरे साथ बोलिये- भारत माता की जय।

ऐसे नहीं, नागपुर में आया हूं, तो दोनों मुट्ठी बंद कर के पूरी ताकत से बोलिये, भारत माता की जय। भारत माता की जय। भारत माता की जय।

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PM's speech at the launch of e-RUPI digital payment solution
August 02, 2021
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e-RUPI voucher is going to play a major role in strengthening the DBT scheme: PM Modi
e-RUPI will help in assuring targeted, transparent and leakage-free delivery for all: PM Modi
e-RUPI is a person as well as a purpose-specific payment platform: PM Modi

नमस्‍कार,

इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में देशभर से जुड़े सभी राज्‍यपाल महोदय, लेफ्टिनेंट गवर्नर्स, केंद्रीय मंत्रिमंडल के मेरे साथीगण, रिजर्व बैंक के गवर्नर, राज्यों के मुख्य सचिव, अलग अलग Industry Associations से जुड़े साथी गण, Start Up, FinTech की दुनिया से जुड़े मेरे युवा साथी, बैंकों के वरिष्ठ अधिकारीगण और मेरे प्‍यारे भाइयों और बहनों,

आज देश, डिजिटल गवर्नेंस को एक नया आयाम दे रहा है। e-RUPI वाउचर, देश में Digital Transaction को, DBT को और प्रभावी बनाने में बहुत बड़ी भूमिका निभाने वाला है। इससे Targeted, Transparent और Leakage Free Delivery में सभी को बड़ी मदद मिलेगी। 21वीं सदी का भारत, आज कैसे आधुनिक टेक्नोलॉजी की मदद से आगे बढ़ रहा है, टेक्नोलॉजी को लोगों के जीवन से जोड़ रहा है, e-RUPI उसका भी एक प्रतीक है। और मुझे खुशी है कि ये शुरुआत, उस समय हो रही है, जब देश आजादी के 75 वर्ष पर अमृत महोत्सव मना रहा है। और ऐसे समय में देश ने Futuristic Reform का एक और अहम कदम बढ़ाया है।

साथियों,

सरकार ही नहीं, अगर कोई सामान्य संस्था या संगठन किसी के इलाज में, किसी की पढाई में या दूसरे काम के लिए कोई मदद करना चाहता है तो, वो कैश के बजाय e-RUPI दे पाएगा। इससे सुनिश्चित होगा कि उसके द्वारा दिया गया धन, उसी काम में लगा है, जिसके लिए वो राशि दी गई है। अभी शुरुआती चरण में ये योजना देश के हेल्थ सेक्टर से जुड़े बेनिफिट्स पर लागू की जा रही है।

मान लीजिए, कोई ऑर्गनाइजेशन, सेवा भाव से, सरकार, भारत सरकार के द्वारा जो मुफ्त वैक्‍सीन दे जा रही है उसका लाभ लेना नहीं चाहता है, लेकिन जो प्राइवेट अस्‍पतालों में जहां कुछ कीमत दे करके वैक्‍सीन चल रही है, उसमें भेजना चाहता है। अगर वो 100 गरीबों को वैक्‍सीन लगवाने की उसकी इच्‍छा है तो वो उन 100 गरीबों को e-RUPI वाउचर दे सकता है। e-RUPI वाउचर ये सुनिश्चित करेगा कि उसका इस्तेमाल वैक्सीन लगवाने में ही हो, किसी औऱ काम में नहीं। समय के साथ इसमें और भी चीजें जुड़ती चली जाएंगी। जैसे कोई किसी के इलाज पर खर्च करना चाहता है, कोई टीबी के मरीज को सही दवाओं और भोजन के लिए आर्थिक मदद देना चाहता है, या फिर बच्चों को, गर्भवती महिलाओं को भोजन और पोषण से जुड़ी दूसरी सुविधाएं पहुंचाना चाहता है, तो e-RUPI उनके लिए बहुत मददगार साबित होगा। यानि e-RUPI, एक तरह से Person के साथ-साथ Purpose Specific भी है।

जिस मकसद से कोई मदद या कोई बेनिफिट दिया जा रहा है, वो उसी के लिए प्रयोग होगा, ये e-RUPI सुनिश्चित करने वाला है। कोई अब अगर चाहेगा कि वो वृद्धाश्रम में 20 नए बेड लगवाना चाहता है, तो e-RUPI वाउचर उसकी मदद करेगा।

कोई किसी क्षेत्र में 50 गरीबों के लिए भोजन की व्यवस्था करना चाहता है, तो e-RUPI वाउचर उसकी मदद करेगा। अगर कोई गौशाला में चारे की व्यवस्था करना चाहता है, तो e-RUPI वाउचर उसकी भी मदद करेगा।

इसे अब अगर राष्ट्रीय परिपेक्ष्य में देखें तो, अगर सरकार द्वारा किताबों के लिए पैसा भेजा गया है, तो e-RUPI ये सुनिश्चित करेगा कि किताबें ही खरीदी जाएं। अगर यूनिफॉर्म के लिए पैसा भेजा है, तो उससे यूनिफॉर्म ही खरीदी जाए।

अगर सब्सिडाइज्ड खाद के लिए मदद दी है, तो वो खाद खरीदने के ही काम आए। गर्भवती महिलाओं के लिए दिए गए कैश से सिर्फ पोषक आहार ही खरीदा जा सके। यानि पैसा देने के बाद, हम उसका जो इस्तेमाल चाहते हैं, e-RUPI वाउचर उसे सिद्ध करेगा।

साथियों,

पहले हमारे देश में कुछ लोग चाहते थे और वो कहते भी थे कि technology तो केवल अमीरों की चीज है, भारत तो गरीब देश है, इसलिए भारत के लिए टेक्नोलॉजी का क्या काम? जब हमारी सरकार technology को mission बनाने की बात करती थी तो बहुत से राजनेता, कुछ खास किस्म के एक्सपर्ट्स उस पर सवाल खड़ा करते थे। लेकिन आज देश ने उन लोगों की सोच को नकारा भी है, और गलत भी साबित किया है।

आज देश की सोच अलग है, नई है। आज हम technology को गरीबों की मदद के, उनकी प्रगति के एक टूल के रूप में देख रहे हैं। आज दुनिया देख रही है-कैसे भारत में technology पारदर्शिता और ईमानदारी ला रही है! कैसे technology नए अवसरों को पैदा करने में, उन्हें गरीबों को सुलभ बनाने का काम कर रही है। और कैसे technology सरकार और लालफीता-शाही पर सामान्य मानवी की निर्भरता को कम कर रही है।

आप आज के ही unique product को देखिए, आज हम यहाँ तक इसलिए पहुंचे हैं क्योंकि देश ने जनधन खातों को खोलने, उन्हें मोबाइल और आधार से जोड़ने, और JAM जैसी व्यवस्था के लिए वर्षों मेहनत की है। जब JAM को शुरू किया गया था तब बहुत से लोग इसके महत्व को नहीं समझ पा रहे थे। लेकिन इसकी अहमियत को हमने लॉकडाउन के समय देखा। जब दुनिया के बड़े बड़े देश परेशान थे कि लॉकडाउन में कैसे अपने गरीबों की मदद करें। लेकिन भारत के पास एक पूरी व्यवस्था तैयार थी। दूसरे देश अपने यहां के पोस्ट ऑफिस और बैंक खुलवा रहे थे तो वहीं भारत, महिलाओं के बैंक खातों में सीधे आर्थिक मदद भेज रहा था।

भारत में अब तक Direct benefit transfer के जरिए करीब साढ़े सत्रह लाख करोड़ रुपए सीधे लाभार्थियों के खातों में भेजे जा चुके हैं। आज केंद्र सरकार 3 सौ से ज्यादा योजनाओं का लाभ डीबीटी के माध्यम से लोगों तक पहुंचा रही है। लगभग 90 करोड़ देशवासियों को इसके तहत किसी ना किसी रूप में लाभ हो रहा है। राशन हो, एलपीजी गैस हो, इलाज हो, स्कॉलरशिप हो, पेंशन हो, मज़दूरी हो, घर बनाने के लिए मदद हो, ऐसे अनेक लाभ डीबीटी से मिल रहे हैं। पीएम किसान सम्मान निधि के तहत 1 लाख 35 हज़ार करोड़ रुपए सीधे किसानों के बैंक अकाउंट में पहुंचाए गए हैं। इस बार तो किसानों से जो गेहूं की सरकारी खरीद हुई है, उसका लगभग 85 हज़ार करोड़ रुपए सीधा किसानों के बैंक खातों में ही ट्रांसफर किया गया है। इन सारे प्रयोगों का बहुत बड़ा लाभ ये हुआ है कि देश के क़रीब क़रीब पौने दो लाख करोड़ रुपए से अधिक, गलत हाथों में जाने से बचे हैं।

साथियों,

भारत आज दुनिया को दिखा रहा है कि technology को adopt करने में, उससे जुडने में वो किसी से भी पीछे नहीं हैं। Innovations की बात हो, service डिलीवरी में technology का इस्तेमाल हो, भारत दुनिया के बड़े देशों के साथ मिलकर Global leadership देने की क्षमता रखता है। पिछले 7 सालों में भारत ने अपनी प्रगति को जो गति दी है, उसमें technology के सही इस्तेमाल की बड़ी भूमिका है। आप सोचिए, क्या 8-10 साल पहले किसी ने कल्पना की थी कि टोल बूथ्स पर करोड़ों गाडियाँ बिना किसी फ़िज़िकल transaction के, लेन-देन के निकलेंगी? आज के Fastag से ये संभव हुआ है।

क्या 8-10 साल पहले किसी ने सोचा था कि दूर-सुदूर गांव में बैठा कोई हस्तशिल्पी, अपने प्रॉडक्ट दिल्ली के किसी सरकारी दफ्तर में सीधे बेच पाएगा? आज GeM यानि गवर्नमेंट ई मार्केट प्लेस पोर्टल से ये मुमकिन है।

क्या 8-10 साल पहले किसी ने सोचा था कि हमारे certificates, documents हर समय digitally हमारी जेब में होंगे, और हर जगह एक क्लिक पर इस्तेमाल हो पाएंगे? आज ये Digi-locker से मुमकिन है।

क्या 8-10 साल पहले किसी ने सोचा था कि भारत में MSME सेक्टर के उद्यमियों को सिर्फ 59 मिनट में लोन approve  हो पाएगा। आज भारत में ये भी मुमकिन है। और इसी तरह, 8-10 साल पहले क्या आपने सोचा था कि आप किसी काम के लिए एक डिजिटल वाउचर भेजेंगे, और काम हो जाएगा? आज ये भी e-Rupi के जरिए मुमकिन हो चुका है।

मैं ऐसे कितने ही उदाहरण आपको गिना सकता हूं। इस महामारी के दौरान भी देश ने तकनीक की ताकत को महसूस किया है। आरोग्य सेतु ऐप का उदाहरण भी हमारे सामने है। आज ये ऐप सबसे ज्यादा downloaded apps में से एक है। इसी तरह कोविन पोर्टल भी आज हमारे वैक्सीनेशन प्रोग्राम में, वैक्सीनेशन सेंटर के चयन में, रजिस्ट्रेशन में, वैक्सीन certificate प्राप्त करने में देशवासियों की बड़ी मदद कर रहा है।

पुरानी व्यवस्था चल रही होती तो वैक्सीनेशन लगवाने के बाद सर्टिफिकेट के लिए दौड़ना पड़ रहा होता। दुनिया के कई बड़े देशों में भी आज पेपर पर हाथ से लिखकर सर्टिफिकेट दिये जा रहे हैं। लेकिन भारत के लोग एक क्लिक में डिजिटल सर्टिफिकेट डाउनलोड कर रहे हैं। इसीलिए, आज भारत का कोविन सिस्टम, दुनिया के कई देशों को आकर्षित कर रहा है। भारत इसे दुनिया के साथ साझा भी कर रहा है।

साथियों,

मुझे याद है कि 4 साल पहले जब BHIM app लॉन्च किया गया था, तब मैंने कहा था कि वो दिन दूर नहीं जब अधिकांश बिजनेस ट्रांजेक्शन नोट और सिक्कों के बजाय डिजिटली होंगे। तब मैंने ये भी कहा था कि इस बदलाव से सबसे अधिक गरीबों, वंचितों, छोटे व्यापारियों, किसानों, आदिवासियों का सशक्तिकरण होगा, वो Empower होंगे। आज हम ये साक्षात अनुभव कर रहे हैं। हर महीने UPI Transaction के नए रिकॉर्ड बन रहे हैं। जुलाई महीने में 300 करोड़ से अधिक Transaction UPI से हुए हैं, जिसमें 6 लाख करोड़ रुपए का लेनदेन हुआ है। आज चाय, जूस और फल-सब्ज़ी का ठेला लगाने वाले भी इसका उपयोग कर रहे हैं।

वहीं भारत का RuPay कार्ड भी देश का गौरव बढ़ा रहा है। सिंगापुर-भूटान में भी इसे लॉन्च किया जा चुका है। आज देश में 66 करोड़ RuPay कार्ड हैं और देश में हजारों करोड़ रुपए का Transaction RuPay कार्ड से भी हो रहा है। इस कार्ड ने गरीब को भी सशक्त किया है। उसे इस भावना से भरा है कि वो भी अपने पास डेबिट कार्ड रख सकता है, उसका इस्तेमाल कर सकता है।

साथियों,

Technology कैसे गरीबों को सशक्त करती है, इसका एक और उदाहरण है- पीएम स्वनिधि योजना। हमारे देश में जो रेहड़ी-पटरी वाले, ठेला चलाने वाले भाई-बहन हैं, उनके Financial Inclusion के बारे में पहले कभी नहीं सोचा गया था। अपना काम आगे बढ़ाने के लिए उन्हें बैंक से मदद मिलना असंभव था। जब Digital Transaction की कोई हिस्ट्री ही नहीं हो, कोई Document ना हो, तो बैंक से लोन लेने के लिए हमारे रेहड़ी-पटरी वाले साथी, पहला कदम भी नहीं बढ़ा पाते थे। इसी को समझते हुए हमारी सरकार ने पीएम स्वनिधि योजना की शुरुआत की। आज देश के छोटे-बड़े शहरों में, 23 लाख से अधिक रेहड़ी-पटरी और ठेले वालों को इस योजना के तहत मदद दी गई है। इसी कोरोना काल में करीब-करीब 2300 करोड़ रुपए उन्हें दिए गए हैं। ये गरीब साथी अब Digital Transaction कर रहे हैं और अपना लोन चुका रहे हैं। यानि अब उनके लेन-देन की एक Digital History बन रही है।

पीएम स्वनिधि में ये व्यवस्था की गई है कि 10 हजार रुपए का पहला लोन चुकाने पर 20 हजार का दूसरा लोन और दूसरा लोन चुकाने पर 50 हजार का तीसरा लोन रेहड़ी-पटरी वाले साथियों को दिया जाएगा। आपको जानकर खुशी होगी कि आज सैकड़ों रेहड़ी-पटरी और ठेले वाले भाई-बहन अब तीसरा लोन प्राप्त करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

साथियों,

देश में Digital Infrastructure और Digital Transaction के लिए जो काम पिछले 6-7 वर्षों में हुआ है, उसका लोहा आज दुनिया मान रही है। विशेषकर भारत में फिनटेक का बहुत बड़ा आधार तैयार हुआ है। ऐसा आधार तो बड़े-बड़े देशों में भी नहीं है। देशवासियों का पॉजिटिव माइंडसेट, FinTech Solutions को adopt करने की उनकी क्षमता भी असीम है। इसलिए ये आज भारत के युवाओं, भारत के स्टार्ट अप इकोसिस्टम के लिए भी बेहतरीन मौका है। भारत के स्टार्ट अप्स के लिए फिनटेक में अनेकों संभावनाएं हैं।

साथियों,

मुझे विश्वास है कि e-Rupi वाउचर भी सफलता के नए अध्याय लिखेगा। इसमें हमारे बैंकों और दूसरे पेमेंट गेटवे का बहुत बड़ा रोल है। हमारे सैकड़ों प्राइवेट अस्पतालों, कॉर्पोरेट्स, उद्योग जगत, NGOs और दूसरे संस्थानों ने भी इसको लेकर बहुत रुचि दिखाई है। मेरा राज्य सरकारों से भी आग्रह है कि अपनी योजनाओं का सटीक और संपूर्ण लाभ सुनिश्चित करने के लिए e-RUPI का अधिक से अधिक उपयोग करें। मुझे विश्वास है कि हम सभी की ऐसी ही सार्थक साझेदारी एक ईमानदार और पारदर्शी व्यवस्था के निर्माण को और गति देगी।

एक बार फिर सभी देशवासियों को इस बड़े रिफॉर्म के लिए बहुत-बहुत बधाई देता हूं। बहुत-बहुत शुभकामनाएं!

धन्यवाद !