इस कार्यक्रम को मैं अभी देख रहा था। बहुत सी चीजें मैं अलग तरीके से देख रहा था। आपने देखा होगा, जिन्होंने ईनाम प्राप्त किया है, उनमें से ज्यादातर अहिन्दी भाषी राज्य के लोग हैं और योजना का नाम उन्होंने हिन्दी में दिया है, देखिये ‘नेशनल इंटीग्रेशन’। दूसरा आपने देखा होगा कि जिनके खाते खोले गए हैं, जो कपल आए थे, सभी बहनें फेस्टिवल मूड के कपड़ों में थीं। क्योंकि उन्हे यह इतना बड़ा हक मिला है, उनको यह बराबर समझ है। उनको पता है कि बैंक का खाता खुलेगा, खुद आपरेट कर पाएंगे, पैसे वहां जमा होंगे, इससे उन्हें जीवन में कितनी बड़ी सुरक्षा मिलेगी। उसके लिए इससे बड़ा कोई फेस्टिवल मूड हो ही नहीं सकता है।
यह आज खुशी की बात है कि आज बहुत सारे रिकार्ड ब्रेक हो रहे हैं। शायद इंश्योरेंस कंपनी के इतिहास में एक ही दिन में डेढ़ करोड़ लोगों का अकस्मात बीमा, दुर्घटना बीमा, एक लाख रुपये प्रति व्यक्ति का, शायद इंश्योरेंस कंपनी के जनमत से आज तक कभी नहीं हुआ होगा। यह अपने आप में एक बहुत बड़ा रिकार्ड है। बैंकिंग क्षेत्र के इतिहास में भी एक दिवस में डेढ़ करोड़ नागरिकों का खाता खुलना, यह शायद बैंकिंग इतिहास का एक बहुत बड़ा रिकार्ड होगा।
इससे सबसे बड़ा फायदा यह होने वाला है कि जो सरकार में बैठे हैं, भिन्न भिन्न विभागों में काम कर रहे हैं, उनका भी विश्वास प्रस्थापित होने वाला है। आज के बाद जो हम तय करें, वह हम कर सकते हैं और शासन चलता है, व्यवस्था में जुड़े हुए लोगों के विश्वास पर। उनको अपने पर विश्वास हो कि हां, यह कर सकते हैं। यह एक ऐसा अचीवमेंट है जो सिर्फ बैंकिंग सेक्टर को नहीं, शासन व्यवस्था में जुड़े हुए हर व्यक्ति के विश्वास को अनेक गुना बढ़ा देगा। और इस कारण भविष्य में जब भी कोई योजना पर, इस प्रकार का मिशन मोड में काम करना होगा तो हम बहुत आसानी से कर पाएंगे, यह विश्वास आज प्रस्थापित हुआ है।
भारत सरकार की परंपरा में भी शायद एक साथ 77000 स्थान पर साइमलटेनियस कार्यक्रम एक साथ होना, इस प्रकार से कि व्यवस्था को विशिष्ट कार्य के लिए आर्गनाइज करना, एक साथ सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों को लेकर इतना बड़ा कार्यक्रम करना, ये भी अपने आप में भारत सरकार के लिए एक पहला अनुभव है। वरना सरकुलर जाते हैं, मीटिंग होती है, फिर जानकारी आती है तब तक कि अच्छा नहीं हुआ, तो ठीक है, यह नहीं हुआ। इन सारी परंपराओं से हटकर इतना बड़ा अचीव करना, यह सरकार के लिए, सरकारी व्यवस्था के लिए, एक सुखद अनुभव है। और यह बात सही है कि सफलता नई सिद्धियों को पाने की प्रेरणा बन जाती है। सफलता नई सिद्धियों का गर्भाधान करती है। और ये सफलता देश को आगे ले जाने के अनेक जो प्रकल्प हैं, उसको एक नई ताकत देगी। यह आज के इस अवसर से मुझे लग रहा है।
इसको सफल करने वाले वित्त विभाग के सभी बंधु, सरकार के सभी बंधु, बैंकिंग क्षेत्र के सभी लोग, सभी राज्य सरकारें, ये सब अभिनंदन के अधिकारी हैं और हम सब मिल कर के किसी एक लक्ष्य को पाना चाहें तो कितनी आसानी से पा सकते हैं, यह हमें ध्यान में आता है।
आप कल्पना कर सकते हैं, 1969 में जब बैंकों का नेशनलाइजेशन किया गया, राष्ट्रीयकरण किया गया, तब कैसे कैसे सपने बोये गए थे। उस समय के सारे विधान निकालिये, सारे बैंकों का राष्ट्रीयकरण गरीबों के लिए होता है, पूरे देश के गले उतार दिया गया था। लेकिन आजादी के 68 वर्ष के बाद, 68 प्रतिशत लोगों के पास भी अर्थव्यवस्था के इस हिस्सा से कोई संबंध नहीं है और इसलिए लगता है कि जिस मकसद से इस काम का प्रारंभ हुआ था, वह वहीं की वहीं रह गई। मैं यह मानता हूं कि जब कोई व्यक्ति बैंक में खाता खोलता है, तो अर्थव्यवस्था की जो एक मुख्य धारा है, उस धारा से जुड़ने का पहला कदम बन जाता है।
आज डेढ़ करोड़ परिवार या व्यक्ति, जो भी जुड़े हैं, वे अर्थव्यवस्था की मुख्यधारा में अपना पहला कदम रख रहे हैं। यह अपने आप में देश की आर्थिक व्यवस्था को गति देने के लिए एक महत्वपूर्ण सफलता है। आजादी के इतने साल के बाद और जो देश के गरीबों के खिलाफ लड़ाई लड़ रहा है, और गरीबी के खिलाफ लड़ाई लड़ने में अर्थव्यवस्था सबसे महत्वपूर्ण इकाई होती है। अगर उससे वह अछूत रह जाए, मुझे यह शब्द प्रयोग करना अच्छा तो नहीं लगता, पर मन करता है कि कहूं यह फाइनेंसियल अनटचेबिलिटी है। देश के 40 प्रतिशत लोग, जो भारत की अर्थव्यवस्था के हकदार नहीं बन पाते, उसके लाभार्थी नहीं बन पाते, तो हम फिर गरीबी को हटाने के काम में सफल कैसे हो सकते हैं।
इसलिए हमारा मकसद है, अगर महात्मा गांधी ने सामाजिक छुआछूत को मिटाने का प्रयास किया, हमें गरीबी से मुक्ति पानी है, तो हमें फाइनेंसियल अनटचेबिलिटी से भी मुक्ति पानी होगी। हर व्यक्ति को भी फाइनेंसियल व्यवस्था से जोड़ना होगा और उसी के तहत इस अभियान को पूरी ताकत के साथ उठाया है।
आज भी गांव के गरीब परिवारों में जब जाते हैं तो देखते हैं, कि माताएं-बहनें बहुत मेहनत करके पैसे बचाती हैं। लेकिन उसको हर बार परेशानी रहती है, अगर पति को बुरी आदतें लगी हैं, व्यसन की आदत लग गई है। तो उस महिला को चिंता लगी रहती है कि शाम को पैसे कहां छुपायें, कहां रखें, बिस्तर के नीचे रखें, वह ढ़ूंढ के निकाल लेता है। लेकर के बैठ जाता है, उसको नशे की आदत लगी है। जब खाता खुल जाएगा तो महिलाओं का कितना आशीर्वाद मिलेगा हमलोगों को। इसलिए बैंकिंग सेक्टर के जिन महानुभावों ने इस काम को किया है, आपने 20 साल की नौकरी की होगी, 25 साल की नौकरी की होगी, आपने बड़े-बड़े मल्टी मिलेनियर के खाते खोले होंगे, उनको पैसे दिये होंगे, लेकिन आशीर्वाद पाने की घटना आज हुई है। वह महिला जब खाता खोलेगी, आपको आशीर्वाद देगी और आपके जीवन में सफलता प्राप्त होगी। यह छोटा काम नहीं किया है आपलोगों ने। यह एक ऐसा काम किया है, जिसमें लाखों लोगों, लाखों गरीब माताओं का आशीर्वाद आपको मिलने वाला है।
ये कैसी व्यवस्था हमने विकसित की है, मैं किसी को दोष नहीं देता हूं, मैं आत्मचिंतन कर रहा हूं। ये कैसी व्यवस्था हमने विकसित की है, कि इस देश का अमीर व्यक्ति कम से कम ब्याज पर धन पा सकता है। बैंक उसके बिजनेस हाउस पर जा करके, कतार लगा करके खड़ी होती है कि आप हमारे साथ बिजनेस कीजिए। बिजनेस के लिए यह आवश्यक होगा। वह कोई गलत करते हैं, ऐसा मैं नहीं कह रहा हूं, लेकिन यही स्थिति है और जो गरीब हैं, जिनको कम से कम ब्याज पर पैसा मिलना चाहिए, वह अमीर से पांच गुना ब्याज पर पैसे लेता है। उस साहूकार से पैसे लेता है, और उसके कारण उसका शोषण भी होता है, एक्सप्लाइटेशन होता है। हर प्रकार से उसके जीवन में संकट पैदा होने के कारण संकट की शुरूआत हो जाती है। एक बार साहूकार से वह पैसे लिया तो कभी वह उसके चंगुल से मुक्त नहीं हो पा रहा है। कर्ज में डूबा हुआ वह व्यक्ति आत्महत्या की ओर चला जाता है। परिवार तबाह हो जाता है। क्या, इस देश की इतनी बड़ी बैंकिंग व्यवस्था, इतनी बडी फाइनेंसियल सिस्टम, उसका दायित्व नहीं है, इस दुष्चक्र से गरीबों को मुक्ति दिलाये?
आज गरीबों की दुष्चक्र से मुक्ति का, आजादी का, मैं पर्व मना रहा हूं। 15 अगस्त को जिस योजना की घोषणा की, 15 दिन के भीतर भीतर योजना को लागू किया, और आज डेढ़ करोड़ परिवारों तक पहुंचने का काम सफलतापूर्वक पूरा हुआ। आगे चल कर के उसकी विश्वसनीयता बनेगी, बैंकिंग व्यवस्था में विश्वसनीयता बनेगी। उसके कारण बैंकिंग सेक्टर भी एक्सटेंड होने वाला है। कई नई ब्रांच खुलेगी। कई उसके नए एजेंट तय होंगे। लाखों नौजवानों को इसके कारण रोजगार मिलने वाला है। इस व्यवस्था को आगे बढ़ाने के लिए स्थायी व्यवस्था विकसित होगी। 2000 से ऊपर की जनसंख्या वाले जितने गांव हैं, वहां कोई न कोई बैंकिंग दृष्टि से काम आएगा। इवन पोस्टआफिस, आज ईमेल के जमाने में, एसएमएस के जमाने में, पोस्टल विभाग की गतिविधियां कम हुई है, लेकिन उसकी व्यवस्थाएं तो वैसी की वैसी हैं। उन व्यवस्थाओं का उपयोग बैकिंग सेक्टर के लिए किया जाएगा। इन गरीबों के लिए किया जाएगा। तो उसके कारण अपने आप ऐसी व्यवस्थाएं मिलेंगी, जिन व्यवस्थाओं के कारण गरीब को गरीबी के खिलाफ लड़ने के लिए बहुत बड़ी ताकत मिलने वाली है और हम सब मिल कर के, गरीबी के खिलाफ लड़ते हैं तो गरीबी से मुक्ति मिल सकती है। यह मेरा पूरा विश्वास है।
हम हमेशा कहते हैं, कि भाई सरकार हो, सरकार की संपत्ति हो, वह गरीबों के लिए है। लेकिन आज वह शब्दों में नहीं, वह हकीकत में परिवर्तित हो रहा है। उसके कारण आगे चल कर के बैंक से उसको 5000 रुपये तक का कर्ज मिलेगा।सामान्य मानव को इससे ज्यादा कर्ज की आवश्यकता नहीं पड़ती है। उसको अपनेaass रोजमर्रा के काम के लिए चाहिए और अनुभव यह है, गरीब व्यक्ति जो बैंक के अंदर आता है, 99 प्रतिशत वह समय से पहले पैसे जमा कराता है। वह बेचारा हमेशा डरता रहता है। उसमें यदि बहनों के पास हो तो वह 100 प्रतिशत पेमेंट पहले कर देती हैं। ये बैंकिंग सेक्टर के लोगों का अनुभव है और बड़े-बड़े लोग । हमें मालूम है, क्या होता है और इसलिए यह सारा प्रयास गरीबों के लिए है। गरीबी से मुक्ति चाहने वालों के लिए एक अभियान का हिस्सा है। और उसी के लिए उसको आगे बढाया जा रहा है।
किसी काम को जब तब समय सीमा में बांध कर निर्धारित लक्ष्य को पाने का प्रयास नहीं किया जाए, और पूरी शक्ति से उसमें झोंक न दिया जाए, तो परिणाम नहीं मिलते और एक बार ब्रेक थ्रू हो जाए तो गाड़ी अपने आप चलने लग जाती है। आज के इस ब्रेक थ्रू के बाद मैं नहीं मानता हूं कि यह रूकने वाला है। शुरू में जैसे वित्त मंत्री जी कहते थे, 2015 अगस्त तक का समय चल रहा था। मैंने कहा, भाई इस झंडावंदन से अगले झंडावंदन तक में हमको काम करना है। 15 अगस्त को झंडावंदन किया और योजना घोषित की। 26 जनवारी तक इसे पूरा करें हम। 15 अगस्त 2015 तक क्यों इंतजार करें। और मैं वित्त विभाग का आभारी हूं, इस डिपार्टमेंट के सभी अधिकारियों का आभारी हूं, बैंकिंग सेक्टर का आभारी हूं कि उन्होंने बीड़ा उठा लिया है और उन्होंने मुझे वादा किया है कि हम जनवरी 26 पहले इस काम को पूरा कर लेंगे।
आज जो रुपे में जो क्रेडिट कार्ड मिल रहा है इन डेढ़ करोड़ लोगों को, हम दुनिया के जो पोपुलर वीजा कार्ड वगैरह हैं, उससे परिचित हैं, जो विश्व में चलता है। क्या हम लोगों के इरादा नहीं होना चाहिए क्या कि हमारा रूपे कार्ड दुनिया के किसी भी देश में चल सके, इतनी ताकत हमारी होनी चाहिए कि नहीं होनी चाहिए? उसकी इतनी क्रेडिबिलिटी होनी चाहिए। होनी चाहिए कि नहीं होनी चाहिए? आज से इस इवेंट के बाद उसकी पूरी संभावना पैदा होगी। इस देश के डेढ़ करोड़ लोग होंगे, जैसे अमीर लोग कई बड़े रेस्टोंरेंट में जाते हैं, तो खाना खाते हैं तो अपना कार्ड देते हैं ओर वो कार्ड में से डेबिट होता है। अब मेरे गरीब के पास भी वो कार्ड होगा। वह भी अपना डेबिट करवाएगा, कोई सब्जी बेचता होगा। देखिए अमीर और गरीब की खाई भरने का कितना बड़ा इनीशिएटिव है ये। आज गरीब आदमी भी अपने हाथ में भी मोबाइल होता है तो वो दूसरे के बराबर, अपने को समझता है। उसके पास भी मोबाइल और मेरे पास भी मोबाइल है। अब वो, उसके पास भी कार्ड है और मेरे पास भी कार्ड है, इस मिजाज से काम करेगा। एक मनोवैज्ञानिक परिवर्तन इससे आता है। आखिरकर मानसिक रूप से पक्का कर ले, हां मैं किसी की भी बराबरी कर सकता हूं, आगे बढ़ने में कोई रोक नहीं सकता इसको। वो आगे बढ सकता है। इसलिए स्पेशल स्कीम और भी जोड़ रहे हैं हम आज। हम 26 जनवरी तक, जिसमें आज जो डेढ़ करोड़ लोगों ने किया है, उनका भी समावेश होगा, 26 जनवरी तक जो लोग अपने खाते खुलवाएंगे, उनको एक लाख रुपये का दुर्घटना बीमा के अलावा 30 हजार रुपये का लाइफ इंश्योरेंस भी मिलेगा। जो परिवार में कोई बीमार हुआ , कोई जरूरत पड़ी तो उनको काम आएगा। 26 जनवरी तक ये लाभ मिलेगा। गरीब परिवार को एक लाख रुपये की व्यवस्था, किसी भी गरीब के लिए काम आएगी। उसके परिवार के लोगों को काम आएगी। कभी कभी ये बहुत से बातें, बड़े लोगों को समझ नहीं आती हैं, लेकिन सामान्य मानव तेजी से पकड़ता है।
जब 15 अगस्त को लाल किले से मैंने एक बात को कहा तो दूसरे दिन ज्यादा उसकी चर्चा सुनी नहीं। शाम में टीवी डिबेट में भी उसको सुना नहीं। लेकिन मुझे एक दो सज्जन मिलने आए तो उन्होंने कहा कि मेरा ड्राइवर बहुत खुश है, मैंने कहा क्यों, उसने कहा मोदी जी ने एक लाख रुपये का इंश्योरेंस दे दिया। गरीब आदमी को चीजों की कितनी समझ है, कितनी तेजी से वह चीजों को पकड़ता है, उसका एक उदाहरण है। विधिवेत्ताओं को शायद पता नहीं होगा एक लाख का इंश्योरेंस दिया गया है वह बहुत बड़ी योजना है। हिन्दुस्तान के एक ड्राइवर, एक गरीब आदमी को पता है, उसके भाग्य को बदलने की शुरूआत 15 अगस्त को तिरंगा झंडा फहराने के साथ हुई है, यह बात उस तक पहुंच गई है। यह ही चीजें हैं जो कि बदलाव लाती है। और बदलाव लाने की दिशा में हमारा प्रयास है।
हमारे यहां शास्त्रों में ऐसा कहा गया है सुखस्य मूलम धर्म, धर्मस्य मूलम अर्थ, अर्थस्य मूलम राज्यम। यानी सुख के मूल में धर्म यानी आचरण, लेकिन धर्म के मूल में आर्थिक, इकोनोमिकल स्टेबिलिटी है। इकोनोमिकल स्टेबिलिटी के मूल में राज्य का दायित्व है। यह राज्य की ज़िम्मेवारी है, फाइनेंसियल इंक्लूजन की। यह चाणक्य से भी पहले हमारे पूर्वजों ने कहा हुआ है और इस लिए राज्य अपना दायित्व निभाने का प्रयास कर रहा है कि जिसमें सामान्य व्यक्ति की भी अब आर्थिक स्थिति सामान्य होगी तो उसके जीवन के अंदर सुख और संतोष की स्थिति तक वह पहुंच जाएगा। इसलिए अब हमलोगों का प्रयास है और मैं मानता हूं कि आज जो योजना का आरंभ हुआ है, नौजवानों को रोजगार की संभावनाएं बढ़ने वाली है। गरीब आदमी के हाथ में पैसा आएगा, बचेगा अपने आप में।
जैसा वित्त मंत्री जी कहते थे, आने वाले दिनों में जो इंडिविजुअल स्कीम्स है उसका सीधा सीधा लाभ इन बैंक अकाउंट में जाएगा तो भ्रष्टाचार के खिलाफ जो लड़ाई है, उसमें एक बहुत बड़ा उपयोगी शस्त्र बनने वाला है। जो भ्रष्टाचार के खिलाफ भी लड़ने की ताकत देगा। बैंक में खाता, वैसे हमारे खास करके हिन्दुस्तान और ज्यादातर एशियन कंट्रीज में, सदियों से हम लोगों का एक स्वभाव रहा है, हमारे संस्कार रहे हैं, वह संस्कार है, बचत । दुनिया के बाकी देशों में यह प्रकृति नहीं है। वहां तो ऋणम कृत्वा, घृतम पीवेत, कर्ज कर के घी पीओ। अब वो घी पीते नहीं, जो पीतें हैं वह पीते हैं। लेकिन ये फिलोस्फी गलत है। हमारे यहां परंपरा रही है, सेविंग की। और हमारे देश की ऐसी विशेषता खास एशियन कंट्रीज की ऐसी रही है। कि अपना ही सोचना ऐसा नहीं है, अपने बच्चों का भी सोचना, आने वाली पीढ़़ी का सोचना, यह हमारी सदियों क परंपरा रही है। ऐसा नहीं कर्ज करो और जियो बाद में, जो आएगा वह भुगतेगा, वह करेगा। क्रेडिट कार्ड के भरोसे जीने वाले हमलोग नहीं हैं। स्वभाव से सेविंग हमारी प्रकृति रही है, और उसके कारण बैंकिंग व्यवस्था अपने आप में एक लाभ है।
लेकिन बैंकों की स्थिति क्या है, मैं अपने जीवन की एक घटना सुनाना चाहता हूं। मैं मेरे गांव मे स्कूल में पढ़ता था, और देना बैंक के लोग हमारे स्कूल में आए थे। तो देना बैंक के लोग वो कोई मिस्टर वोरा करके थे। मुझे इतना याद है कि सबको समझा रहे थे, गुल्लक देते थे, पैसा बचाना चाहिए, बच्चों को पैसा बचाना चाहिए वगैरह वगैरह। खाता खोलते थे, हमने भी खुलवा दिया था, हमको भी एक गुल्लक मिला था। लेकिन हमारा गुल्लक में कभी एक रुपया पड़ा नहीं। क्योंकि हमारा वह बैकग्रांउड नहीं था कि हम वो कर पायें। अब खाता तो खुल गया, हम स्कूल छोड़ दिया, हम गांव छोड़ दिया, हम बाहर भटकने चले गए, तो बैंक वाले मुझे खोज रहे थे। शायद उन्होंने मुझे 20 साल तक खोजा, कहां हैं ये। और क्यों खोज रहे थे, खाता बंद करवाने के लिए। वह बोले भई, हर साल तुम्हारे खाते को कैरी फारवर्ड करना पड़ता है। कागजी कार्रवाई इतनी करनी पड़ रही है, तुम मुक्ति दो हमको। बाद में बताया गया कि मुझे खोजा जा रहा है, तो मैंने बाद में उन्हें मुक्ति दे दी।
तो वह एक समय था जब खाता बंद करवाने के लिए भी कोशिश की जाती थी। आज खाता खोलने के लिए कोशिश हो रही है। मैं मानता हूं, यहीं से, यहीं से गरीबों की जिंदगी के सूर्योदय का आरंभ होता है। मैं इस काम को करने वाले बैंकिंग सेक्टर के लोगों को बधाई देता हूं। और आज, मैंने एक चिट्ठी लिखी थी, करीब सात लाख लोगों को अभी मैंने एक ईमेल भेजा था, शायद यह भी किसी प्रधानमंत्री को यह काम पहली बार करने का सौभाग्य मिला होगा। बैंक के सभी व्यक्तियों को यह चिट्ठी गई है और मैंने इनसे आग्रह किया है कि यह बहुत बड़ा पवित्र और सेवा का काम है। इसको हमने करना है और सबने इसको किया।
इस बात को जिस प्रकार से बैंकिग सेक्टर के प्रत्यक्ष कार्य करने वाले लोगों ने उठा लिया है, मैं हृदय से उनका अभिनंदन करता हूं और मैं आशा करता हूं कि हमें 26 जनवरी तक इंतजार नहीं करना पड़े और 26 जनवरी से पहले हम लक्ष्य को प्राप्त करें, और देश में जो आर्थिक छुआछूत का जो एक माहौल है उससे मुक्ति दिलायें और ब्याज के दुष्चक्र की वजह से आत्महत्या की ओर जा रहे उन परिवारों को बचायें और उनके जीवन में भी सुख का सूरज निकले, इसके लिए प्रयास करें।
इसी अपेक्षा के साथ सबको बहुत बहुत धन्यवाद, सबको बहुत बहुत शुभकामनाएं।
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Popular Speeches
Media Coverage
Nm on the go
Your Excellency Prime Minister of नॉर्वे,
दोनों देशों के delegates,
मीडिया के साथियों,
नमस्कार!
नॉर्वे की यात्रा करके मुझे बहुत खुशी हो रही है। यह देश नेचर और human progress के बीच हार्मनी का एक सुंदर उदाहरण है।
सबसे पहले, मैं प्रधान मंत्री जी का इस आत्मीयता भरे स्वागत के लिए हृदय से आभार व्यक्त करता हूँ। और कल नॉर्वे के Constitution Day के महत्वपूर्ण अवसर पर, मैं विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र की ओर से, नॉर्वे जैसे सुदृढ़ और जीवंत लोकतंत्र की जनता को हार्दिक शुभकामनाएं देता हूँ।
मैं पिछले वर्ष नॉर्वे आने वाला था, लेकिन पहलगाम में हुए आतंकी हमले के कारण वह यात्रा स्थगित करनी पड़ी। उस कठिन समय में Norway ने आतंकवाद के विरुद्ध भारत के साथ मजबूती से खड़े होकर सच्ची मित्रता का परिचय दिया। आज जब मैं Norway आया हूँ, तो मैं उस solidarity के लिए हृदय से आभार व्यक्त करता हूँ।
Friends,
आज विश्व एक अस्थिरता और अनिश्चितता के दौर से गुजर रहा है। यूक्रेन हो या वेस्ट एशिया, दुनिया के कई हिस्सों में संघर्ष की स्थिति बनी हुई है। ऐसे में, भारत और यूरोप, अपने संबंधों के एक नए स्वर्णिम युग में प्रवेश कर रहे है।
पिछले वर्ष, भारत और यूरोपियन फ्री ट्रैड एसोसिएशन ने, एक ऐतिहासिक ट्रैड एण्ड इकनॉमिक पार्ट्नर्शिप अग्रीमन्ट लागू किया। यह अग्रीमन्ट भारत और नॉर्वे के बीच, Shared प्रोग्रेस और प्रास्पेरिटी सुनिश्चित करने का ब्लू प्रिन्ट है। इस अग्रीमन्ट में, अगले पंद्रह वर्ष में भारत में, one hundred बिलियन डॉलर इनवेस्टमेंट, और one मिलियन jobs क्रीऐट करने का लक्ष्य है। आज, हम दोनों ने, इस अग्रीमन्ट के promise को outcomes में बदलने के लिए, कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं।

Friends,
आज हम भारत-नॉर्वे संबंधों को, एक ग्रीन स्ट्रटीजिक पार्ट्नर्शिप का स्वरूप दे रहे हैं। इस स्ट्रटीजिक पार्ट्नर्शिप से, क्लीन एनर्जी से लेकर क्लाइमेट रिज़िल्यन्स, ब्लू ईकानमी से लेकर ग्रीन शिपिंग, हर क्षेत्र में भारत की स्केल, स्पीड और टैलेंट को, नॉर्वे की टेक्नॉलजी और कैपिटल के साथ जोड़कर, हमारी कम्पनीस ग्लोबल सोल्युशंस डिवेलप करेंगी।
Friends,
रिसर्च, एजुकेशन, और इनोवैशन भी, हमारे संबंधों के मजबूत pillars बन रहे हैं। आज हमने सस्टेनिबिलिटी, ओशन एनर्जी, जिऑलोजी और हेल्थ जैसे क्षेत्रों में, रिसर्च को-ऑपरेशन बढ़ाने पर सहमति बनाई।
इंजीनियरिंग, AI, साइबर, और डिजिटल जैसे सेक्टर में हम अपनी university और स्टार्ट-अप एकोसिस्टम को जोड़कर अपने पार्ट्नर्शिप को फ्यूचर रेडी बनाएंगे। स्किल डेवलपमेंट और टैलेंट मोबिलिटी में भी हमारा सहयोग और व्यापक होने जा रहा है।
Friends,
नॉर्वे आर्कटिक रीजन का एक महत्वपूर्ण देश है। आर्कटिक और पोलर रिसर्च में हमारा लंबे समय से सहयोग रहा है। भारत के आर्कटिक रिसर्च स्टेशन "हिमाद्रि” के ऑपरेशन के लिए हम नॉर्वे के आभारी हैं। ISRO और नॉर्वे स्पेस एजेंसी के बीच आज हो रहा MoU, हमारे स्पेस को-ऑपरेशन को भी नए आयाम देगा।
इन सभी क्षेत्रों में गहरे सहयोग से हमारे scientists, क्लाइमेट चेंज को समझने, फ्रैजाइल एकोसिस्टम को प्रोटेक्ट करने, और human फ्यूचर को सिक्युर करने में योगदान देंगे।
Friends,
भारत और नॉर्वे की ग्रीन स्ट्रटीजिक पार्ट्नर्शिप, पूरे विश्व के लिए लाभदायक होगा। हमे बहुत खुशी है कि नॉर्वे आज, इंडो-पेसिफिक oceans इनिश्येटिव से जुड़ रहा है।
दो बड़े मैरीटाइम देश होने के नाते, हम साथ मिलकर मरीन ईकानमी, मैरीटाइम सिक्युरिटी और कपैसिटी बिल्डिंग में सहयोग को मजबूत करेंगे। आज हमने triangular डेवलपमेंट को-ऑपरेशन अग्रीमन्ट किया है। अब हम मिलकर ग्लोबल साउथ के देशों में, भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स से, human development में योगदान देंगे।
Friends,
भारत और नॉर्वे, दोनों, rules based order, डायलॉग और डिप्लोमसी में विश्वास रखते हैं। हम एकमत हैं कि मिलिटरी कॉन्फ्लिक्ट से किसी भी मुद्दे का समाधान नहीं निकल सकता। यूक्रेन हो या पश्चिमी एशिया, हम संघर्ष की शीघ्र समाप्ति और शांति के हर प्रयास का समर्थन करते हैं और समर्थन करते रहेंगे।
हम इस बात पर भी एकमत हैं, कि बढ़ते हुए ग्लोबल challenges के समाधान के लिए Global institutions का रिफॉर्म अनिवार्य है। और terrorism के हर रूप को जड़ से समाप्त करना हमारी साझी प्रतिबद्धता है।
Excellency,
आर्कटिक से outer space तक, ग्रीन शिपिंग से ब्लू ईकानमी तक, एनर्जी सिक्युरिटी से लेकर फूड सिक्युरिटी तक, हमारा सहयोग नए frontiers को छू रहा है। आइए हम अपनी ग्रीन स्ट्रटीजिक पार्ट्नर्शिप के माध्यम से, एक ट्रस्टेड, फ्यूचरिस्टिक और long-term पार्ट्नर्शिप का नया अध्याय लिखे।
आपका बहुत-बहुत धन्यवाद।
मैं पिछले वर्ष नॉर्वे आने वाला था, लेकिन पहलगाम में हुए आतंकी हमले के कारण वह यात्रा स्थगित करनी पड़ी।
— PMO India (@PMOIndia) May 18, 2026
उस कठिन समय में Norway ने आतंकवाद के विरुद्ध भारत के साथ मजबूती से खड़े होकर सच्ची मित्रता का परिचय दिया।
आज जब मैं Norway आया हूँ, तो मैं उस solidarity के लिए हृदय से आभार…
पिछले वर्ष, भारत और यूरोपियन फ्री ट्रैड एसोसिएशन ने, एक ऐतिहासिक trade and economic partnership agreement लागू किया।
— PMO India (@PMOIndia) May 18, 2026
यह अग्रीमन्ट भारत और नॉर्वे के बीच, shared progress और prosperity सुनिश्चित करने का blueprint है: PM @narendramodi
हमे बहुत खुशी है कि नॉर्वे आज, Indo-Pacific oceans initiative से जुड़ रहा है।
— PMO India (@PMOIndia) May 18, 2026
दो बड़े maritime देश होने के नाते, हम साथ मिलकर marine economy, maritime security और capacity building में सहयोग को मजबूत करेंगे: PM @narendramodi
भारत और नॉर्वे, दोनों, rules based order, dialogue और diplomacy में विश्वास रखते हैं।
— PMO India (@PMOIndia) May 18, 2026
हम एकमत हैं कि, केवल military conflict से किसी भी मुद्दे का समाधान नहीं निकल सकता।
यूक्रेन हो या पश्चिमी एशिया, हम संघर्ष की शीघ्र समाप्ति और शांति के हर प्रयास का समर्थन करते रहेंगे: PM…
हम इस बात पर भी एकमत हैं कि बढ़ते हुए global challenges के समाधान के लिए Global institutions का reform अनिवार्य है।
— PMO India (@PMOIndia) May 18, 2026
और terrorism के हर रूप को जड़ से समाप्त करना हमारी साझी प्रतिबद्धता है: PM @narendramodi

