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मंच पर विराजमान यहां के राज्‍यपाल आदरणीय एन एन वोहरा जी, यहां के मुख्‍यमंत्री श्रीमान उमर अब्‍दुल्‍ला जी, केंद्र सरकार में मेरे साथी मंत्री, ऊर्जा मंत्री, श्रीमान पीयूष गोयल जी, राज्‍यसभा के सांसद श्री मुख्‍तार अब्बास नकवी जी, अभी –अभी जिनको आपने लोकसभा में भेजा है विजयी बनाकर के और आपके आशीर्वाद से लोकसभा में बैठ कर आपके विकास के कामों की दिन रात चिंता चर्चा करते हैं, ऐसे मेरे साथी श्री थूपस्‍टल चेवांग जी, एडिशनल सचिव ऊर्जा विभाग, श्रीमान देवेन्‍द्र चौधरी जी और विशाल संख्‍या में पधारे हुए, मेरे प्‍यारे भाइयो और बहनो। ये मेरा सदभाग्‍य है कि मुझे हिंदुस्‍तान के एक आखिरी छोर पर रहने वाले कारगिल के मेरे भाइयो–बहनो से बातचीत करने का अवसर मिला है।

मैं कारगिल पहले भी आया हूं और जैसे मुख्‍यमंत्री जी बता रहे थे कि आज जब मैं आया तो तालियों की गड़गड़ाहट सुन रहा हूं, लेकिन पहले तब भी आया था जब बम, बंदूक और पिस्‍तौल की आवाजें सुनाई दे रही थी। सीमापार से गोलियां चल रही थी, युद्ध जारी था। उसी समय मैं यहां पर था, आपके बीच रहता था। आज एक बात जो मेरे मन को छू गई थी मैं पत्रकार नहीं था, सबको मालूम था कि मैं भारतीय जनता पार्टी का कार्यकर्ता हूं, लेकिन जितना समय मैं रूका, मुझे किसी भी चीज की जरूरत पड़ी, यहां के लोगों ने मेरे से एक नया पैसा नहीं लिया था। यह एक बहुत बड़ी बात है। पानी पीओ, चाय पीयो, पकौड़े खाओ, खाना खाओं, रात रूकों, एक पैसा लेने को कोई तैयार नहीं था, वो कह रहे थे कि यह भी एक देश सेवा है और हम देश सेवा कर रहे हैं। मैं देख रहा था कि सेना के जवान जो लड़ाई लड़ रहे थे, उनको जितनी मदद जितना सहयोग आप नागरिकों की तरफ से मिलता था और जिसके कारण उनका हौंसला इतना बुलंद रहता था यह मैंने अपनी आंखों से देखा है।

जिस दिन टाइगर हिल जीता गया था का‍रगिल ने जिस दिन आनंद उत्‍सव मनाया था, वह आज भी मेरे आंखों के सामने है ओर इसलिए कारगिल के लोगों की देशभक्ति, भारत की रक्षा के लिए उनकी जागरूकता, ये पूरे देश को प्ररेणा देने वाली है और मैं इस धरती को वंदन करता हूं, यहां के लोगों का अभिनंदन करता हूं। भाइयो बहनो पुराने जमाने में कहा जाता था कि पानी और जवानी कभी पहाड़ के काम नहीं आती, ऐसा पुराने जमाने में कहा जाता था। भाइयो बहनो युग बदल चुका है। इस मान्‍यता को बदलना हमने ठान लिया है। पहले भले पानी और जवानी पहाड़ के काम न आती हो, हम ऐसी स्थिति पैदा करना चाहते हैं, पानी भी पहाड़ के काम आये, जवानी भी पहाड़ के काम आये। जब पानी से बिजली पैदा करते हैं, बिजली पहाड़ों को पहुंचाते है, वह पानी परोक्ष रूप से पहाड़ों को काम आता है और यहां की जवानी रोजी रोटी कमाने के लिए परिवार के नौजवान, बूढ़े मां-बाप को गांव व पहाड़ों में छोड़कर करके चले कही जाते हैं, रोजी रोटी कमाने के लिए। घर छोड़ने के लिए मजबूर हो जाते हैं। यार दोस्‍तों को छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ता है और कहीं जा करके रोजी रोटी कमाने के लिए, मजदूरी करने के लिए झुग्‍गी- झोपड़ी में गुजारा करना पड़ता है इधर-उधर, फुटपाथ पर रहना पड़ता है। क्‍या हम हमारी जवानी को ऐसे ही बेकार जाने देंगे। भाइयों, बहनों पहाड़ की जवानी भी पहाड़ को काम आ सकती है। अगर पहाड़ के जवानों के पास हुनर हो, कौशल्‍य हों, विकास का अवसर हो, रोजी रोटी कमाने के लिए अगर उसको मौका दिया जाएं तो पहाड़ के जवान को शहर की भीड़ में जिंदगी गुजारना अच्‍छा नहीं लगता है और इसलिए यह जो बिजली यहां पहुंची है वह सिर्फ घर के अंदर उजाला कराने के लिए नहीं है, लट्टू जलाने के लिए नहीं है, मोबाइल फोन सिर्फ चार्ज करने के लिए नहीं है, टी वी पर भिन्‍न-भिन्‍न प्रकार के सीरियल देखने के लिए सिर्फ नहीं हैं, यह बिजली यहां के औद्योगिक विकास के लिए उसकी प्राथमिकता है। छोटे-बड़े उद्योग शुरू हो अगर बिजली है तो उद्योग की संभावनाएं बढ़ती हैं। कृषि आधारित कामों को अवसर मिलें। यहां का जो पारंपरागत हुनर हैं, कला है, उसको आधुनिक रूप मिलें टेक्‍नॉलोजी का अवसर मिले। मुझे विश्‍वास है यहां का नौजवान अपने पसीने से पैसे कमा भी सकता है, अपने परिवार को चला भी सकता है और गौरवपूर्ण अपनी जिंदगी का गुजारा भी कर सकता है। ये दूर-सुदूर रहने वाले लोग जब बर्फ बीच में जाती है तो हिंदुस्‍तान से कट जाते हैं। हमको क्‍नेटिविटी चाहिए। हम प्रतिबद्ध हैं, उनको क्‍नेटिविटी के लिए आज मैंने लद्दाख में घोषणा की है। ये रोड का काम बंद पड़ा था, क्‍यों? क्‍योंकि टेंडर की जो रकम थी वह इतनी बड़ी आई थी कि कोई सरकार पैसे देने के लिए तैयार नहीं था सरकार आई, गई रोड वहीं के वहीं लटके रहे जो रोड बना नहीं। मैंने उसका जब रिव्‍यू किया तो ध्‍यान में आया कि जितना बजट हमने तय किया है उससे काम नहीं चलेगा,अतिरिक्‍त बजट की जरूरत पड़ेगी। भाइयों बहनों हमने तय किया है कि आठ हजार करोड़ रूपया लगा करके ये काम पूरा कर दिया जायेगा।

मैं जब लाहुल स्पिति जाता था सब सीजन में काम करता था। मैं यहां भी काम करता हूं। मैं रोहतांग पास से जब रास्‍ता देखता था, तो मुझे लगता था कि लाहुल स्पिति से कारगिल अगर जुड़ जाये तो देश को कितनी बड़ी ताकत मिल जाएगी और वह ताकत देने के लिए हम प्रतिबद्ध हैं। यहां पर शिक्षा के लिए क्षेत्र खुले। यहां के नौजवानों को हिंदुस्‍तान के किसी भी नौजवान के साथ आंख से आंख मिलाकर के खड़ा हो सके, ऐसी शिक्षा उपलब्‍ध हो, ऐसे शिक्षा के विकास के लिए भी दिल्‍ली में बैठी हुई भारत सरकार प्रतिबद्ध और आने वाले दिनों में आप इसको देखेंगे। आज एक ट्रांसमिशन लाइन का शिलान्‍यास हुआ, ये सपना अटल बिहारी वाजपेयी जी ने देखा था, लेकिन बीच में बात ही रह गई। वाजपेयी जी का वह सपना पूरा करने के लिए हमने कदम उठाया है। करीब-करीब 18 सौ करोड़ रूपया लगा करके यह ट्रांसमिशन लाइन से बिजली की क्‍नेकटविटी सीधे आपके श्रीनगर के साथ जुड़ जायेगी। आप हिंदुस्‍तान के साथ जुड़ जाओगे ताकि बिजली की कभी कटौती का मुकाबला आपको करना पड़े। उस प्रकार की व्‍यवस्‍था होगी। भाइयों, बहनों जम्‍मू-कश्‍मीर आर्थिक विकास की धरोहर बन सकता है। विकास की नई ऊचांईयों को पार कर सकता है। उसकी समस्‍याओं को गिनती कर करके जन भावनाओं को लुभाने काम मेरा नहीं है, मैं एक एक समस्‍याओं को हाथ में ले करके उन समस्‍याओं के समाधान के लिए रास्‍ते खोजने वाला इंसान हूं और मेरी पूरी कोशिश यही है कि आप लोगों ने मुझे जो आशीर्वाद दिए हैं, आपने जो प्रेम दिया हैं, देश की जनता की आशा और आकांक्षाओं को पूरा करना, कारगिल की जनता की आशा और आकांक्षाओं को पूर्ण करना, इसमें मैं पूरी कोशिश करूंगा, पूरी ताकत लगाऊंगा और जी जान से जुटा रहूंगा। ये आपको मैं विश्‍वास दिलाता हूं।

अब देखिए जम्‍मू- कश्‍मीर का हाल यहां की पूरी जनसंख्‍या में करीब 20 प्रतिशत लोग विस्‍थापित है। इन विस्‍थापितों को भी अगर हम स्‍थापित नहीं करेंगे, उनको रोजी रोटी कमाने का अवसर नहीं देंगे, ये 20 प्रतिशत जनता जम्‍मू - कश्‍मीर के भाग्‍य को बदलने का हिस्‍सा बने, इसके लिए जो भी आवश्‍यक योजना हो उस पर कार्य करने के लिए हम प्रतिबद्ध है। 2 लाख से ज्‍यादा को विस्‍थापित वेस्ट पाकिस्तान के रिफ्यूजी हैं, 1 लाख से ज्‍यादा विस्‍थापित शंभ सेक्‍टर के हैं, 4 लाख से ज्‍यादा विस्‍थापित कश्‍मीरी पंडित हैं, 8-10 लाख लोग आंतकवादियों के कारण जिनका अपने परिवार को स्‍वजनों को खोना पड़ा है, बेहाल हो गये ये भी तो अपने भाई हैं, उनके जीवन की भी तो कुछ चिंता होनी चाहिए। इसलिए भाईयों और बहनों, ये 20 प्रतिशत के करीब जनसंख्‍या उनको गौरव के साथ जीने के लिए उनके मान-सम्‍मान क्‍योंकि उन्‍होंने भारत के लिए प्‍यार किया है, भारत के लिए वह जी रहे है, उनके लिए अब तक बहुत उदासीनता बरती गई है, नेग्लेक्ट किया गया। अब वह दिन चले गए मैं पूरे जम्‍मू कश्‍मीर के ऐसे विस्‍थापित भाई-बहनों किसी भी प्रकार के विस्‍थापित क्‍यों न हो, वो हमारे भाई है वो हमारे परिवार-जन हैं, उनका सुख-दु:ख हमारा सुख दु:ख है, उनकी प्रगति ये हमारा मकसद है, उनका विकास ही हमारा मकसद है और उस काम को आगे बढ़ाने के लिए यहां विकास की नित्‍य नवीन योजनाओं के द्वारा हम आगे बढ़ाना चाहते हैं।

भाईयो-बहनो एक बात मैं अपने अनुभव से कहना चाहता हूं। अब मुझे लगता है कि मैं कारगिल में वो बात करूगा तो अच्‍छा लगेगा। मैं जब गुजरात में काम करता था तो कभी भी हम कच्‍छ जाते थे तो हमेशा हम सीमा की समस्‍या,पाकिस्‍तान, वहां से आने वाली तकलीफें उसी की चर्चा करते थे, जो भी राजनेता जाए वहीं बोलता था मैं मुख्‍यमंत्री बना तो वहां से 5-7 लोग मुझसे मिले आए, क्‍योंकि भूंकप के बाद मैं मुख्‍यमंत्री बना था, भूंकप तो था भयानक बर्बादी हुई थी वहां तो, वह मुझसे मिलने आए थे, उन्‍होंने कहा साहब हमने सुना है आप शपथ के बाद तुरंत कच्‍छ पहुंच रहे हो, मैंने कहा हां शपथ के बाद मैं पहला काम करने वाला हूं कच्‍छ के भूंकप पीडि़तों को मिलने जा रहा हूं। उन्‍होंने कहा हमारा एक सुझाव है मैंने कहा क्‍या बोले मेहरबानी करके जब आप कच्‍छ आए तो सिर्फ सीमा, सीमा की समस्‍याएं, पाकिस्‍तान इसमें अपना टाइम बर्बाद मत किजिए। उसी चर्चा के अंदर सब नेताओं ने हर साल यही काम किया। आप भविष्‍य की बात करके जाइए। मैं भी पहले कच्‍छ जाता तो यही बातें करता, लेकिन उस दिन जब उन्‍होंने कहा तो मेरे मन मे स्‍पार्क हुआ, मुझे लगा हां इस बात को नए ढंग से सोचना चाहिए और मैं जब भी कच्‍छ गया मैं चार टाइम मुख्‍यमंत्री रहा, मैं जब भी कच्‍छ के लोगों के पास गया मैंने सिवा विकास के कोई बात नहीं की,आज विकास को महत्‍वपूर्ण पहलू बना दिया और कच्‍छ ऐसा जिला है हमारे यहां, जहां पूरे गुजरात की सबसे ज्‍यादा मुस्लिम पॉप्युलेशन इस जिले में है। कच्‍छ की एक ओर भी विशेषता है। हमारे जम्‍मू कश्‍मीर के गुजर लोग जो है वो जिस प्रकार के रंग-रंगीन कपड़े पहनते है जिस प्रकार का सर पर बांधते है मेरे कच्‍छ के अंदर भी वैसे ही बांधते है बिल्‍कुल, हमारा कच्‍छी मुसलमान और यहां का गुजर को खड़ा कर दो तो लगता है कि एक ही बिरादरी के लोग हैं, इतनी साम्‍यता है, इतनी निकटता है। मैं चार बार मुख्‍यमंत्री रहा इतने सालों तक वहां एक ही काम किया, डिवलेपमेंट का। सारे विषयों की चर्चा करना मैंने मेरे लेवल पर बंद कर दिया। भईयो-बहनो आज मैं गर्व से कहता हूं वो कच्‍छ जिला, हिन्‍दुस्‍तान का तेज गति से विकास करने वाला जिला बना गया जबकि वो कच्‍छ किसी समय माइनस ग्रोथ वाला रहा था। हर बार जनसंख्‍या लोग खाली करके चले जाते थे। उस अनुभव से मैं कहता हूं चाहे लेह हो, लद्दाख हो, कारगिल हो, सीमावर्ती इलाका हो, चाहे नॉर्थ-ईस्‍ट हो, मेरे लिए यहां की जीवन बदलने का सबसे उचित रास्‍ता जो मैं अनुभव से सीख कर आया हूं, वो है विकास, मुझे विकास के रास्‍ते पर चलना है, मुझे समस्‍याओं के समाधान का रस है। और मुझे जन-जन को अपने साथ लेकर आगे चलने में रस है। आपने हमारा साथ दिया है और आगे भी साथ देंगे, मुझे पूरा विश्‍वास है और हम सब मिलकर के जो भारत का भाग्‍य बदलने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन आज जो उस भाग्‍य को बदलने में दूर खड़े हैं उनको सबसे पहले आगे ले जाना है यह मकसद लेकर मैं काम कर रहा हूं।

चाहे हवाई कनेक्टिविटी हो, रेल कनेक्टिविटी हो, रोड कनेक्टिविटी हो, टेलिकॉम कनेक्टिविटी सब प्रकार से हिन्‍दुस्‍तान का कोई कोना अछूत नहीं रहना चाहिए। उसके विकास के लिए पूरा प्रयास होना चाहिए लेकिन सबसे पहली प्राथमिकता है रोजगार मेरे नौजवान को रोजगार मिले उसके लिए हर वो जो उपलब्‍ध संसाधन है उसी को केन्‍द्र में रखकर के आगे बढ़ना है। पशमिना हमारी पहचान थी धीरे-धीरे हम खो रहे है। इसी बजट में हमने कहा है पशमिना प्रमोशन के लिए पी-3 प्रोजेक्‍ट शुरू करने वाले है ताकि यहां से दूर-दूर पहाड़ों में रहने वाले लोगों को एक नया अवसर मिले। यहां का केसर दुनिया के अच्‍छे क्‍वालिटी के केसर में जम्‍मू कश्‍मीर का केसर है यह दुनिया के बाजार में अपना डंका क्‍यों न जमाएं और अगर एक बार विश्‍व के बाजार में जम्‍मू कश्‍मीर के केसर की पहचान बन गई तो मार्केट अपने आप मिलेगा तब यहां का मेरा किसान आर्थिक रूप से संपन्‍न होगा। पैकेजिंग की भी इंडस्‍ट्री आएगी, मार्केटिंग की इंडस्‍ट्री आएगी, एक्‍सपोर्ट करने वाले यूनिट आ जाएंगे तो यहां का किसान कमाना शुरू कर देगा। फलों से लदे हुए इलाके हैं हमारे पास। हम एपल की खेती करते हैं लेकिन एपल बाजार में पहुंचते पहुंचते बिगड़ जाता है, बेचारे किसान का 15-20 प्रतिशत नुकसान वहीं हो जाता है। लेकिन अगर हम वॅल्यू एडिशन करें, और जब जब बिजली आ रही हो तो छोटे-छोटे यूनिट लगा करके, वॅल्यू एडिशन करके, पैक टीन के अंदर उनका जूस हों, उसके कट फ्रूट हो , या एप्‍पल को ऐसे ही सुरक्षित रखना हो,वो सब संभव है टैक्‍नालाजी से। हमारे यहां जो कृषि उत्‍पादन है, उसको वॅल्यू आडेलीशन करके, उद्योगिक इकाइयों को जोड़ करके हमारे यहां के किसान को हम ताकतवर बनाना चाहते हैं। मजबूत बनाना चाहते है।

भाइयो एवं बहनो, विकास तो करना है। लेकिन मैं अनुभव से कहता हूं, इस देश को आगे बढ़ने के लिए पैसों की कमी नहीं है। इस देश को आगे बढ़ाने के लिए देश के नागरिकों के पसीने में खोट नहीं है। पुरूषार्थ में भी खोट नहीं है, पैसों में भी खोट नहीं है, उसके बाद भी हमारा देश वहीं का वहीं न जाने कहां ठप्‍प हो गया है। सामान्‍य मानव की जिन्‍दगी में बदलाव क्‍यों नहीं आता, उसका एक महत्‍वपूर्ण कारण है, भ्रष्‍टाचार ने हमें तबाह करके रखा है। आप मुझे बताइए भाइयों एवं बहनों, भ्रष्‍टाचार से मुक्ति चाहिए या नहीं चाहिए? भ्रष्‍टाचार जाना चाहिए कि नहीं जाना चाहिए? हिंदुस्‍तान के हर कोने से भ्रष्‍टाचार जाना चाहिए कि नहीं जाना चाहिए? भाईयों एवं बहनों, मैंने बेड़ा उठाया है। मेरा तो मंत्र है न खाउंगा न खाने दूंगा। इतने पैसे अगर भ्रष्‍टाचार के पापाचार में बंद हो जाए, उन्‍हीं पैसों से देश को आगे बढ़ाया जा सकता है। लोगों की, नौजवानों की इच्‍छाओं को पूर्ण किया जा सकता है। मुझे आपसे मदद चाहिए भ्रष्‍टाचार के खिलाफ लड़ाई लड़ने के लिए, मुझे आपका आशीर्वाद चाहिए भ्रष्‍टाचार के खिलाफ लड़ाई लड़ने के लिए, मुझे आपकी तरफ से ताकत चाहिए ताकि भ्रष्‍टाचार मुक्‍त शासन को विकसित करें, ताकि गरीब से गरीब आदमी की भलाई के लिए हमें अवसर मिले और पैसे आयेंगे, जाएंगे, कोई भलाई ही नहीं। बात बिगड़ती चली जाती है, मुझे बात को बनाना है। इसलिए भाईयों एवं बहनों अटल बिहारी बाजपेयी जी ने जम्‍मू और कश्‍मीर के लिए जो सपने देखे थे, उन सपनों को हमें पूरा करना है। यहां के जनसामान्‍य को ताकत देनी है। भाइयों एवं बहनों कोई हिंदुस्‍तान के किसी कोने में कल्‍पना नहीं कर सकता लेह लद्दाख हो या कारगिल हो, इतनी बड़ी जनसभा को संबोधन करने का हमें अवसर मिला। हिंदुस्‍तान में कई लोगों को कल्‍पना तक नहीं है। आज जब टीवी पर चीजें देखेंगे पूरा देश चकित हो जाएगा, आपकी देशभक्ति से चकित हो जाएगा, आपके उत्‍साह से चकित हो जाएगा, और हिंदुस्‍तान के कई कोनों के लोगों को भी कारगिल के उत्‍साह से भी प्रेरणा मिलेगी, ये प्रेरणा लेकर आज मैं जा रहा हूं।

मैं फिर एक बार आप सब का हृदय से धन्‍यवाद करता हूं। विकास के लिए दिल्‍ली में बैठी हुई सरकार पीछे मुड़कर देखने वाली नहीं है। आप आशा आकांक्षाओं की पूर्ति के लिए दिल्‍ली बैठी हुई सरकार जितना भी कर सकती है करने के लिए प्रतिबद्ध है, क्‍योंकि दिल से हम जुड़े हुए हैं। और उसी के कारण हम इसे आगे बढ़ाना चाहते हैं। बहुत-बहुत धन्‍यवाद।

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On May 2 Didi will get certificate of Bengal ex-chief minister by the people of the state: PM Modi
April 17, 2021
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People from all corners of India are seen in Asansol. But the misgovernance of Bengal governments affected Asansol: PM Modi
PM Modi says on May 2, which is the day of assembly election results, Didi will be given the certificate of Bengal ex-chief minister by the people of the state
In Asansol, PM Modi says Mamata Banerjee has skipped several meetings called by the Centre to discuss many key issues
PM Modi promises to implement all the welfare schemes of the central government in West Bengal if BJP is elected to power in the state

 

नमोष्कार !

मां कल्याणेश्वरी और घाघर बूढ़ी चंडी...आज मेरे लिए अवसर है इस पवित्र धरती को श्रद्धापूर्वक प्रणाम करने का। बांग्ला नव वर्ष शुरू होने के बाद आज बंगाल में मेरी ये पहली सभा है। नव वर्ष में बंगाल में बीजेपी की डबल इंजन की सरकार बनने जा रही है।

चार दोफार मोतोदान, टीएमसी होलो खान-खान !

(चार दौर का मतदान, टीएमसी खंड-खंड हो गई)। 

बाकी चार दोफार मोतोदान, दीदी-भाइपो टिकिट कटान ! 

(बाकी चार बार का मतदान, दीदी भाइपो का पत्ता साफ)।

पांचवें चरण के मतदान में भी कमल के फूल पर बटन दबा करके भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनाने के लिए आज सुबह से बहुत बड़ी तादाद में लोग निकले हैं। बहुत भारी मतदान हो रहा है। मैं अब तक मतदान करने वाले सभी मतदाताओं का हृदय से बहुत-बहुत अभिनंदन करता हूं और उनका धन्यवाद करता हूं।  

साथियो

आसनसोल हो, दुर्गापुर हो, इस पूरे क्षेत्र में बंगाल ही नहीं, बल्कि देश के औद्योगिक विकास का प्रमुख केंद्र बनने की क्षमता बहुत पहले से है हमेशा से है। द्वारकानाथ टैगोर जी, राजेन मुखर्जी, बीरेंद्रनाथ मुखर्जी जैसे अनेक व्यक्तित्वों ने इस क्षेत्र की संपदा को देश की आत्मनिर्भरता के संकल्प के रूप में आगे बढ़ाया।

साइकिल से लेकर रेल तक, पेपर से लेकर स्टील तक, एल्यूमिनियम से लेकर ग्लास तक, ऐसे अनेक कारखानों में, यहां की फैक्ट्रियों में काम करने के लिए पूरे देश से लोग यहां आते हैं। आसनसोल एक प्रकार से लघु भारत है, हिन्दुस्तान का हर व्यक्ति यहां मिल जाएगा। लेकिन बंगाल में जो सरकारें रहीं, उनके कुशासन ने आसनसोल को कहां से कहां पहुंचा दिया। जहां लोग चाकरी के लिए आते थे, आज यहां से पलायन कर रहे हैं। मां-माटी-मानुष की बात करने वाली दीदी ने, यहां हर तरफ माफिया राज फैला दिया है। आसनसोल की प्राकृतिक संपदा को लूटने के लिए कोयला माफिया, नदियों की बालू को लूटने के लिए अवैध खनन माफिया, सरकारी जमीन पर कब्जे के लिए भू-माफिया।

साथियो

यहां सालनपुर, बाराबनी, जमुरिया रानीगंज, उखड़ा, बल्लालपुर से लेकर बांकुड़ा बॉर्डर तक अवैध कोयला खनन का साम्राज्य फैला हुआ है। यहां के कोयला, रेत और दूसरे खनिजों का काला माल कहां तक पहुंचता है, किस-किस तक पहुंचता है, ये हर कोई जानता है। बंगाल के ट्रक वालों को, ट्रांसपोर्ट से जुड़े साथियों को, यहां के उद्यमियों को जो भाइपो टैक्स देना पड़ता है, वो भी बंगाल के लोग भली-भांति जानते हैं। 

साथियो

इस चुनाव में आपका एक वोट सिर्फ टीएमसी को साफ करेगा, इतना ही नहीं है बल्कि आपका एक वोट यहां से माफिया राज को भी साफ करेगा। आपको पता है आपके वोट की ताकत क्या है? आपका एक वोट पूरे माफिया राज को यहां साफ कर देगा। ये ताकत है आपके वोट की।  

भाइयो-बहनो 

आज आपसे शिकायत करना चाहता हूं...करूं ?...आपके खिलाफ है शिकायत...करूं ?...बुरा तो नहीं मानोंगे न...लेकिन मेरी शिकायत जरा देखिए…मैं यहां दोबार आया हूं.... लोकसभा के चुनाव में....जब मुझे प्रधानमंत्री बनना था और आप से वोट मांगने आया था। बाबुल जी के लिए वोट मांगने आया था। लेकिन पहले जब आया, तब तो मेरे लिए वोट मांगा था, फिर भी एक चौथाई भी लोग नहीं थे सभा में। लेकिन आज चारों तरफ...मैंने ऐसी सभा पहली बार देखी है। अब बताइए, मेरी शिकायत मिठी है कि कड़वी है। आज आपने ऐसा दम दिखा दिया है। ऐसी ताकत दिखा दिए...मैं जहां देख सकता हूं...मुझे लोग ही लोग दिखते हैं...बाकी कुछ दिखता ही नहीं है। क्या कमाल कर दिया है आप लोगों ने। लेकिन आगे का काम बहुत महत्वपूर्ण है। और वो है वोट देने के लिए जाना, वोट देने के लिए औरों को ले जाना। करोंगे...पक्का करोंगे...सब लोग करोंगे...देखिए तभी यहां से ये माफिया राज समाप्त होगा। ये माफियाशाही तभी समाप्त होगी।

और भाइयो-बहनो

मैं बंगाल जहां भी गया हूं यही माहौल है। और उधर क्या है?

दीदी, ओ दीदी, 

देखिए दीदी...ओ दीदी...2 मई में अब सिर्फ आधा महीना बचा है। आधा चुनाव हो चुका है। सिर्फ कुछ दिन और। कोयला धुले, मोयला जाय ना !

भाइयो और बहनो, 

सोनार बांग्ला के संकल्प के साथ बीजेपी सरकार यहां आपकी हर मुश्किल कम करने के लिए काम करेगी। बंगाल में कानून व्यवस्था का राज स्थापित किया जाएगा। कानून के राज में यहां नए उद्योग लगेंगे, बंगाल में निवेश बढ़ेगा। बीजेपी सरकार में हर कोई अपना काम करेगा। आपके जीवन में टीएमसी के तोलाबाजों की जो घुसपैठ हुई है, उसे जीरो किया जाएगा, उसे दूर किया जाएगा। पुलिस अपनी जिम्मेवारी निभाएगी, अपना काम करेगी, राज्य सरकार के अलग-अलग विभाग अपने जनसेवा का दायित्व निभाएंगे, अपना काम पूरा करेंगेप्रशासन अपनी जिम्मेवारियों को निभाते हुए जनता जनार्दन की अपेक्षाओं को पूरा करने के लिए दिन-रात काम करेगा। और सरकार अपनी जिम्मेवारियों को पूरा करने के लिए काम करेगी। और बीजेपी कार्यकर्ता...मैं आपको विश्वास दिलाता हूं आपकी सेवा में हरदम खड़ा रहेगा। और इसमें जो भी खेला करने की कोशिश करेगा, उस पर कानून के तहत उतनी ही सख्त कार्रवाई भी होगी।

भाइयो और बहनो,

दीदी ने बीते दस सालों में विकास के नाम पर आपके साथ विश्वासघात किया है। विकास के हर काम में, हर काम के आगे दीदी दीवार बनकर खड़ी हो गई हैं। केंद्र सरकार ने 5 लाख रुपए के मुफ्त इलाज की सुविधा दी, तो दीदी दीवार बन गईं। केंद्र सरकार ने शरणार्थियों की मदद के लिए कानून बनाया, तो दीदी इसका भी विरोध करने लगीं। केंद्र सरकार ने मुस्लिम बहनों को तीन तलाक से मुक्ति के लिए कानून बनाया, तो दीदी फिर आगबबूला हो गईं। केंद्र सरकार ने किसानों को बिचौलियों से मुक्त करने वाले कानून बनाए, तो दीदी विरोध में उतर आईं। केंद्र सरकार ने किसानों के बैंक खातों में सीधे पैसे ट्रांसफर करने शुरू किए, तो दीदी ने इससे भी किसानों को वंचित रख दिया। 

साथियो

बंगाल को विकास रोकने वाली नहीं, डबल इंजन की सरकार चाहिए। बंगाल की बीजेपी सरकार, आपका लाभ कराने वाली हर उस योजना को लागू करेगी, जिन्हें दीदी की सरकार ने रोका हुआ है। पहली ही कैबिनेट में पीएम किसान सम्मान निधि पर बड़ा फैसला लिया जाएगा। बंगाल के हर किसान के खाते में 18 हजार रुपए सीधे ट्रांसफर हो, जिसको दीदी ने रोकने की कोशिश की। 2 मई के बाद नई सरकार बनने के बाद दीदी नहीं रोक पाएंगी। क्योंकि सरकार आपने बनाई है...आपके लिए बनाई है...और वो आपके लिए काम करेगी।

भाइयो और बहनो

आप मुझे बताइए... दीदी को अगर आप लोगों के दु:ख-दर्द की परवाह होती, तो क्या वो आपकी भलाई के...आपके हित वाले कामों को रोकने का काम कभी करती क्या ? ये रुकावटे डालती क्या ? दीवार बनती क्या ? दीदी को अगर आपकी तकलीफ की चिंता होती, तो क्या वो तोलाबाजी होने देतीं क्या ? जरा इधर से जवाब दीजिए तोलाबाजी होने देतीं क्या ?  सिंडिकेट को आगे बढ़ाती क्या ? कटमनी वसूलने देतीं क्या ?

साथियो

दीदी, अपने अहंकार में दीदी इतनी बड़ी हो गई हैं कि हर कोई उन्हें अपने आगे छोटा दिखता है। केंद्र सरकार ने अनेक बार अनेक विषयों पर बात करने के लिए बैठकें बुलाई हैं, लेकिन दीदी कोई न कोई कारण बताकर इन बैठकों में नहीं आतीं। जैसे कोरोना पर पिछली दो बैठकों में बाकी मुख्यमंत्री आए, लेकिन दीदी नहीं आईं। नीति आयोग की गवर्निंग काउंसिल की बैठक में बाकी मुख्यमंत्री आए, लेकिन दीदी नहीं आईं। मां गंगा की सफाई के लिए देश में इतना बड़ा अभियान शुरू हुआ, लेकिन दीदी उससे जुड़ी जो बैठक होती है, उसमें भी नहीं आईं। एक-दो बार न आने का तो समझ में आता है साथियों, लेकिन दीदी ने यही तरीका बना लिया है। दीदी बंगाल के लोगों के लिए कुछ देर का समय नहीं निकाल पातीं। ये उन्हें समय की बर्बादी लगता है। और जब दीदी के तोलाबाज, कोरोना के दौरान भेजे गए राशन को लूटते हैं, तो वो उन्हें खुली छूट देती हैं। 

केंद्रीय टीमें चाहे सहयोग के लिए आएं या फिर करप्शन की जांच के लिए, दीदी उनको रोकने के लिए पूरे संसाधन लगा देती हैं। दीदी केंद्रीय वाहिनी ही नहीं, सेना तक को बदनाम करती हैं, राजनीति के लिए झूठे आरोप लगाती हैं। दीदी, खुद को देश के संविधान से ऊपर समझती हैं। दीदी चोखे ओहोन्कारेर पोरदा। (दीदी की आंखों पर अहंकार का पर्दा चढ़ा हुआ है।)

भाइयो और बहनो,

दीदी की राजनीति सिर्फ विरोध और गतिरोध तक सीमित नहीं है। बल्कि दीदी की राजनीति, प्रतिशोध की खतरनाक सीमा को भी पार कर गई है। बीते 10 साल में बीजेपी के अनेकों कार्यकर्ताओं की हत्या की गई है। अभी मेरी... यहां ऊपर आने से पहले... कई पीड़ित परिवारों से बात हुई है। दीदी की वजह से न जाने कितनी माताओं ने अपने बेटों को खोया है, न जाने कितनी बहनें आज भी अपने भाई का इंतजार कर रही हैं। दीदी की निर्ममता, उनकी असंवेदनशीलता हमें कुछ दिन पहले ही फिर एकबार दिखाई दी है, सुनाई दी है।

साथियो

कूचबिहार में जो हुआ, उस पर कल एक ऑडियो टेप आपने सुना होगा। ऑडियो टेप सुना क्या आपने ? 5 लोगों की दुखद मृत्यु के बाद दीदी किस तरह राजनीति कर रही हैं, ये इस ऑडियो टेप के अंदर साफ-साफ खुल गया है, सामने आता है। इस ऑडियो टेप में कूचबिहार के टीएमसी नेता को कहा जा रहा है कि मारे गए लोगों के शवों के साथ रैली निकालो। दीदी, वोटबैंक के लिए कहां तक जाएंगी आप ? सच्चाई ये है कि दीदी ने कूचबिहार में मारे गए लोगों की मृत्यु से भी अपना सियासी फायदा करने की सोची। शवों पर राजनीति करने की दीदी को बहुत पुरानी आदत है।

साथियो

दीदी ने बंगाल में ये हाल बना दिया है। जनता ने भी जब उनके विरोध की कोशिश की, तो उसको कुचल दिया गया है। बंगाल की जनता के अधिकार, दीदी के लिए कोई मायने नहीं रखते। 2018 के पंचायत चुनाव पश्चिम बंगाल कभी नहीं भूल सकता। बर्धमान से लेकर बांकुरा, बीरभूमि, मुर्शीदाबाद के लोगों को आज भी याद है कैसे उनके अधिकारों को छीना गया।

आप सोचिए

बंगाल में 20 हजार से ज्यादा पंचायतों में सीधे दीदी के तोलाबाजों को निर्वाचित कर दिया गया। दीदी ने इतना आतंक फैलाया कि एक तिहाई से भी ज्यादा पंचायतों में कैंडिडेट पर्चा तक नहीं भर पाए। हमले के डर से WhatsApp तक पर नॉमिनेशन फाइल करने पड़े। जीत के बाद भी जनप्रतिनिधियों को पड़ोसी राज्यों में शरण लेनी पड़ी। लोकतंत्र के इस अपमान से, लोकतंत्र को इस तरह कमजोर किए जाने से सुप्रीम कोर्ट तक ने नाराजगी जताई। लेकिन दीदी ने लोकतंत्र का सम्मान नहीं किया, लोकतंत्र की परवाह नहीं की।

साथियो

बंगाल और भारत के लिए रोबी ठाकुर का आदर्श है - चित्तो जेथा, भॉय- शुन्नो। हृदय जहां भय मुक्त रहे। लेकिन दीदी का प्रयास रहता है- चित्तो जेथा भॉया-क्रांतो। हृदय जहां भयाक्रांत रहे। दीदी को इस बार के चुनाव में छप्पा वोट नहीं करने दिया जा रहा, तो वो और बौखला गई हैं। दीदी को गुंडागिरी-मस्तानगिरी का खैला नहीं करने दिया जा रहा है, तो दीदी बौखला गई हैं। दीदी द्वारा हर पैंतरा आजमाया जा रहा है ताकि बंगाल के लोगों को वोट देने से रोका जाए। टीएमसी द्वारा अभियान चलाए जा रहे हैं, चुनाव आयोग पर दबाव बनाया जा रहा है। दिल्ली से लेकर बंगाल तक दीदी ने मोदी के खिलाफ मोर्चा खुलवा दिया है।

दीदी, ओ दीदी, ओ आदरणीय दीदी

आप जितनी चाहे साजिशें कर लीजिए, जितनी चाहे कोशिशें कर लीजिए। इस बार आपकी साजिश बंगाल के लोग खुद ही नाकाम कर रहे हैं। इस बार बंगाल के लोगों ने ही आपके खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। बंगाल के लोगों ने आप पर अभूतपूर्व विश्वास किया था। अब वो आपको हमेशा-हमेशा के लिए एक ऐसा सॉर्टिफिकेट देने वाली है बंगाल की जनता इस चुनाव में, जो आप जीवन भर घर में लटका कर रख सकती हो। कौन सा सॉर्टिफेकट जनता देने वाली है, जो 2 मई को आने वाला है ? वो सॉर्टिफिकेट आने वाला है भूतपूर्व मुख्यमंत्री। यानि दीदी, ये बंगाल की जनता आपको आजीवन एक सॉर्टिफिकेट देने वाली है भूतपूर्व मुख्यमंत्री...लेकर घुमते रहना। 

भाइयो-बहनो

बंगाल के लोग, बंगाल के लोगों से आपकी नफरत भी महसूस कर रहे हैं। दीदी के करीबी, शिड्यूल्ड कास्ट के मेरे भाइयों और बहनों को भिखारी कहते हैं, दीदी चुप रहती हैं। दीदी के करीबी बीजेपी को वोट देने वालों को बंगाल से बाहर फेंकने की धमकी देते हैं, दीदी चुप रहती हैं। किसी की दुखद मृत्यु पर दीदी की संवेदना भी वोटबैंक का फिल्टर लगाकर ही प्रकट होती है।

दीदी

पश्चिम बंगाल आपकी दुर्नीति से परेशान है, इतना ही नहीं है, बल्कि बंगाल को आपकी नीयत पर भी शक है। इसलिए पश्चिम बंगाल के कोने-कोने से एक ही आवाज़ सुनाई दे रही है-   

कीच्छू नेइ तृनोमूल, एबार भोट पॉद्दोफूले। (कुछ नहीं अब तृणमूल में, इस बार वोट कमल-फूल में।)

भाइयो और बहनो,

10 साल तक दीदी ने बंगाल को भेदभाव और पक्षपात वाली सरकार दी है। हालात तो ये है कि स्पोर्ट्स क्लबों, खिलाड़ियों तक की मदद में भी दीदी ने भेदभाव किया। जो स्पोर्ट्स क्लब दीदी का गुणगान करे, उनके गीत गाए, उन्हें पैसा। जो खेल पर अपना ध्यान दे, बंगाल का नाम रोशन करे, वो स्पोर्ट्स क्लब यहां पैसे के लिए तरसते हैं। दीदी की इसी दुर्नीति की वजह से बुज़ुर्गों को मिलने वाला ‘भाता’ तक सभी लाभार्थियों तक नहीं पहुंच पा रहा है। गांव की सड़क को भी दीदी की सरकार ने राजनीति का शिकार बना दिया। मनरेगा की मज़दूरी हो या फिर आपदा की राहत हो, दीदी की सरकार ने सबमें भेदभाव किया, पक्षपात किया। आपको तीन साल पहले की रामनवमी याद है? आसनसोल-रानीगंज के दंगे कौन भूल सकता है! इन दंगों में सैकड़ों लोगों की जीवन भर की मेहनत राख हो गई। सबसे ज्यादा नुकसान गरीबों का हुआ, पटरी पर दुकान लगाने वाले और छोटे व्यापारियों का हुआ। 

दंगाइयों का साथ किसने दिया? - दीदी ने।

तुष्टिकरण की नीति किसने पनपाई? – दीदी ने।

किसके कारण पुलिस दंगाइयों के पक्ष में खड़ी रही? –  दीदी के।

एक ही जवाब है न...एक ही जवाब है न...हर कोई कह रहा है दीदी के कारण...दीदी के कारण...।

भाइयो और बहनो,

जो विकास पर विरोध को, विश्वास पर प्रतिशोध को, सुशासन पर राजनीति को, प्राथमिकता देती है, ऐसी सरकार पश्चिम बंगाल का भला नहीं कर सकती। इसलिए बंगाल को आशोल पोरिबोरतोन चाहिए। आशोल पोरिबोरतोन बंगाल में सबका साथसबका विकाससबका विश्वास के लिए, आशोल पोरिबोरतोन बंगाल के युवाओं को रोजगार के लिए, आशोल पोरिबोरतोन बंगाल में कानून के राज के लिए, आशोल पोरिबोरतोन बंगाल की भलाई के लिए।

साथियो

दीदी के राज में महिलाओं के साथ जो अत्याचार हुआ है, उसकी चर्चा तक दीदी ने नहीं होने दी है। राज्य सरकार के आंकड़े छिपाकर, महिलाओं पर अत्याचार की खबरों को दबाकर दीदी ने सबसे बड़ा खेला, बंगाल की महिलाओं के साथ ही किया है। मैं आज विशेष रूप से बंगाल की बहन-बेटियों को एक बात के लिए आश्वस्त करता हूं। बीजेपी की सरकार हर वर्ग, हर मत-मज़हब को उसकी बेटी की सुरक्षा और सम्मान को सुनिश्चित करेगी। दीदी की सरकार ने यहां रेप जैसे संगीन अपराध के दोषियों को जल्द से जल्द सजा सुनाने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट पर अड़ंगा डाला, उसको रोक दिया। देश भर में ऐसी एक हजार अदालतें खोली जा रही हैं लेकिन दीदी ने बेटियों को न्याय दिलाने वाली ऐसी एक भी अदालत खोलने नहीं दी। बीजेपी सरकार में फास्ट ट्रैक कोर्ट का भी तेजी से निर्माण किया जाएगा। गरीब, दलित, आदिवासी बेटियों को यहां से दूसरे राज्यों में भेजने का जो अवैध काम किया जाता है, उस पर रोक लगाने के लिए सख्त कदम उठाए जाएंगे।

साथियो,

सोनार बांग्ला का यही संकल्प बंगाल बीजेपी ने अपने संकल्प पत्र में रखा है। बंगाल में Ease of Living, Ease of Doing Business का माहौल बनाया जाएगा। यहां के इंफ्रास्ट्रक्चर पर, रोड, रेल, एयर, इंटरनेट, हर प्रकार की कनेक्टिविटी को डबल इंजन सरकार, डबल स्पीड के साथ आधुनिक बनाएगी। इस क्षेत्र को आर्सेनिक युक्त ज़हरीले पानी से मुक्ति मिले, इसके लिए पाइप से हर घर जल के प्रकल्प को तेज़ी से यहां लागू किया जाएगा। दीदी ने जो कुछ भी लाभ आप तक पहुंचने से रोका है, वो तेज़ी से मिलेगा। डबल इंजन की सरकार में डबल बेनिफिट और डायरेक्ट बेनिफिट मिलेगा। 

एबार शोंघात नॉय, शॉहोजोगिता होबे!

एबार बिरोध नॉय, बिकाश होबे!

एबार मोने भय नॉय, पेटे भात होबे!

एबार शिक्खा होबे, शिल्पो होबे, कोर्मो-शोंस्थान होबे! 

आप इतनी बड़ी तादाद में आशीर्वाद देने के लिए आए...मैं आपका बहुत-बहुत आभार व्यक्त करता हूं। दोनों हाथ ऊपर करके मेरे साथ बोलिए 

भारत माता की जय !

भारत माता की जय !

भारत माता की जय !

बहुत-बहुत धन्यवाद !