मंच पर विराजमान यहां के राज्‍यपाल आदरणीय एन एन वोहरा जी, यहां के मुख्‍यमंत्री श्रीमान उमर अब्‍दुल्‍ला जी, केंद्र सरकार में मेरे साथी मंत्री, ऊर्जा मंत्री, श्रीमान पीयूष गोयल जी, राज्‍यसभा के सांसद श्री मुख्‍तार अब्बास नकवी जी, अभी –अभी जिनको आपने लोकसभा में भेजा है विजयी बनाकर के और आपके आशीर्वाद से लोकसभा में बैठ कर आपके विकास के कामों की दिन रात चिंता चर्चा करते हैं, ऐसे मेरे साथी श्री थूपस्‍टल चेवांग जी, एडिशनल सचिव ऊर्जा विभाग, श्रीमान देवेन्‍द्र चौधरी जी और विशाल संख्‍या में पधारे हुए, मेरे प्‍यारे भाइयो और बहनो। ये मेरा सदभाग्‍य है कि मुझे हिंदुस्‍तान के एक आखिरी छोर पर रहने वाले कारगिल के मेरे भाइयो–बहनो से बातचीत करने का अवसर मिला है।

मैं कारगिल पहले भी आया हूं और जैसे मुख्‍यमंत्री जी बता रहे थे कि आज जब मैं आया तो तालियों की गड़गड़ाहट सुन रहा हूं, लेकिन पहले तब भी आया था जब बम, बंदूक और पिस्‍तौल की आवाजें सुनाई दे रही थी। सीमापार से गोलियां चल रही थी, युद्ध जारी था। उसी समय मैं यहां पर था, आपके बीच रहता था। आज एक बात जो मेरे मन को छू गई थी मैं पत्रकार नहीं था, सबको मालूम था कि मैं भारतीय जनता पार्टी का कार्यकर्ता हूं, लेकिन जितना समय मैं रूका, मुझे किसी भी चीज की जरूरत पड़ी, यहां के लोगों ने मेरे से एक नया पैसा नहीं लिया था। यह एक बहुत बड़ी बात है। पानी पीओ, चाय पीयो, पकौड़े खाओ, खाना खाओं, रात रूकों, एक पैसा लेने को कोई तैयार नहीं था, वो कह रहे थे कि यह भी एक देश सेवा है और हम देश सेवा कर रहे हैं। मैं देख रहा था कि सेना के जवान जो लड़ाई लड़ रहे थे, उनको जितनी मदद जितना सहयोग आप नागरिकों की तरफ से मिलता था और जिसके कारण उनका हौंसला इतना बुलंद रहता था यह मैंने अपनी आंखों से देखा है।

जिस दिन टाइगर हिल जीता गया था का‍रगिल ने जिस दिन आनंद उत्‍सव मनाया था, वह आज भी मेरे आंखों के सामने है ओर इसलिए कारगिल के लोगों की देशभक्ति, भारत की रक्षा के लिए उनकी जागरूकता, ये पूरे देश को प्ररेणा देने वाली है और मैं इस धरती को वंदन करता हूं, यहां के लोगों का अभिनंदन करता हूं। भाइयो बहनो पुराने जमाने में कहा जाता था कि पानी और जवानी कभी पहाड़ के काम नहीं आती, ऐसा पुराने जमाने में कहा जाता था। भाइयो बहनो युग बदल चुका है। इस मान्‍यता को बदलना हमने ठान लिया है। पहले भले पानी और जवानी पहाड़ के काम न आती हो, हम ऐसी स्थिति पैदा करना चाहते हैं, पानी भी पहाड़ के काम आये, जवानी भी पहाड़ के काम आये। जब पानी से बिजली पैदा करते हैं, बिजली पहाड़ों को पहुंचाते है, वह पानी परोक्ष रूप से पहाड़ों को काम आता है और यहां की जवानी रोजी रोटी कमाने के लिए परिवार के नौजवान, बूढ़े मां-बाप को गांव व पहाड़ों में छोड़कर करके चले कही जाते हैं, रोजी रोटी कमाने के लिए। घर छोड़ने के लिए मजबूर हो जाते हैं। यार दोस्‍तों को छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ता है और कहीं जा करके रोजी रोटी कमाने के लिए, मजदूरी करने के लिए झुग्‍गी- झोपड़ी में गुजारा करना पड़ता है इधर-उधर, फुटपाथ पर रहना पड़ता है। क्‍या हम हमारी जवानी को ऐसे ही बेकार जाने देंगे। भाइयों, बहनों पहाड़ की जवानी भी पहाड़ को काम आ सकती है। अगर पहाड़ के जवानों के पास हुनर हो, कौशल्‍य हों, विकास का अवसर हो, रोजी रोटी कमाने के लिए अगर उसको मौका दिया जाएं तो पहाड़ के जवान को शहर की भीड़ में जिंदगी गुजारना अच्‍छा नहीं लगता है और इसलिए यह जो बिजली यहां पहुंची है वह सिर्फ घर के अंदर उजाला कराने के लिए नहीं है, लट्टू जलाने के लिए नहीं है, मोबाइल फोन सिर्फ चार्ज करने के लिए नहीं है, टी वी पर भिन्‍न-भिन्‍न प्रकार के सीरियल देखने के लिए सिर्फ नहीं हैं, यह बिजली यहां के औद्योगिक विकास के लिए उसकी प्राथमिकता है। छोटे-बड़े उद्योग शुरू हो अगर बिजली है तो उद्योग की संभावनाएं बढ़ती हैं। कृषि आधारित कामों को अवसर मिलें। यहां का जो पारंपरागत हुनर हैं, कला है, उसको आधुनिक रूप मिलें टेक्‍नॉलोजी का अवसर मिले। मुझे विश्‍वास है यहां का नौजवान अपने पसीने से पैसे कमा भी सकता है, अपने परिवार को चला भी सकता है और गौरवपूर्ण अपनी जिंदगी का गुजारा भी कर सकता है। ये दूर-सुदूर रहने वाले लोग जब बर्फ बीच में जाती है तो हिंदुस्‍तान से कट जाते हैं। हमको क्‍नेटिविटी चाहिए। हम प्रतिबद्ध हैं, उनको क्‍नेटिविटी के लिए आज मैंने लद्दाख में घोषणा की है। ये रोड का काम बंद पड़ा था, क्‍यों? क्‍योंकि टेंडर की जो रकम थी वह इतनी बड़ी आई थी कि कोई सरकार पैसे देने के लिए तैयार नहीं था सरकार आई, गई रोड वहीं के वहीं लटके रहे जो रोड बना नहीं। मैंने उसका जब रिव्‍यू किया तो ध्‍यान में आया कि जितना बजट हमने तय किया है उससे काम नहीं चलेगा,अतिरिक्‍त बजट की जरूरत पड़ेगी। भाइयों बहनों हमने तय किया है कि आठ हजार करोड़ रूपया लगा करके ये काम पूरा कर दिया जायेगा।

मैं जब लाहुल स्पिति जाता था सब सीजन में काम करता था। मैं यहां भी काम करता हूं। मैं रोहतांग पास से जब रास्‍ता देखता था, तो मुझे लगता था कि लाहुल स्पिति से कारगिल अगर जुड़ जाये तो देश को कितनी बड़ी ताकत मिल जाएगी और वह ताकत देने के लिए हम प्रतिबद्ध हैं। यहां पर शिक्षा के लिए क्षेत्र खुले। यहां के नौजवानों को हिंदुस्‍तान के किसी भी नौजवान के साथ आंख से आंख मिलाकर के खड़ा हो सके, ऐसी शिक्षा उपलब्‍ध हो, ऐसे शिक्षा के विकास के लिए भी दिल्‍ली में बैठी हुई भारत सरकार प्रतिबद्ध और आने वाले दिनों में आप इसको देखेंगे। आज एक ट्रांसमिशन लाइन का शिलान्‍यास हुआ, ये सपना अटल बिहारी वाजपेयी जी ने देखा था, लेकिन बीच में बात ही रह गई। वाजपेयी जी का वह सपना पूरा करने के लिए हमने कदम उठाया है। करीब-करीब 18 सौ करोड़ रूपया लगा करके यह ट्रांसमिशन लाइन से बिजली की क्‍नेकटविटी सीधे आपके श्रीनगर के साथ जुड़ जायेगी। आप हिंदुस्‍तान के साथ जुड़ जाओगे ताकि बिजली की कभी कटौती का मुकाबला आपको करना पड़े। उस प्रकार की व्‍यवस्‍था होगी। भाइयों, बहनों जम्‍मू-कश्‍मीर आर्थिक विकास की धरोहर बन सकता है। विकास की नई ऊचांईयों को पार कर सकता है। उसकी समस्‍याओं को गिनती कर करके जन भावनाओं को लुभाने काम मेरा नहीं है, मैं एक एक समस्‍याओं को हाथ में ले करके उन समस्‍याओं के समाधान के लिए रास्‍ते खोजने वाला इंसान हूं और मेरी पूरी कोशिश यही है कि आप लोगों ने मुझे जो आशीर्वाद दिए हैं, आपने जो प्रेम दिया हैं, देश की जनता की आशा और आकांक्षाओं को पूरा करना, कारगिल की जनता की आशा और आकांक्षाओं को पूर्ण करना, इसमें मैं पूरी कोशिश करूंगा, पूरी ताकत लगाऊंगा और जी जान से जुटा रहूंगा। ये आपको मैं विश्‍वास दिलाता हूं।

अब देखिए जम्‍मू- कश्‍मीर का हाल यहां की पूरी जनसंख्‍या में करीब 20 प्रतिशत लोग विस्‍थापित है। इन विस्‍थापितों को भी अगर हम स्‍थापित नहीं करेंगे, उनको रोजी रोटी कमाने का अवसर नहीं देंगे, ये 20 प्रतिशत जनता जम्‍मू - कश्‍मीर के भाग्‍य को बदलने का हिस्‍सा बने, इसके लिए जो भी आवश्‍यक योजना हो उस पर कार्य करने के लिए हम प्रतिबद्ध है। 2 लाख से ज्‍यादा को विस्‍थापित वेस्ट पाकिस्तान के रिफ्यूजी हैं, 1 लाख से ज्‍यादा विस्‍थापित शंभ सेक्‍टर के हैं, 4 लाख से ज्‍यादा विस्‍थापित कश्‍मीरी पंडित हैं, 8-10 लाख लोग आंतकवादियों के कारण जिनका अपने परिवार को स्‍वजनों को खोना पड़ा है, बेहाल हो गये ये भी तो अपने भाई हैं, उनके जीवन की भी तो कुछ चिंता होनी चाहिए। इसलिए भाईयों और बहनों, ये 20 प्रतिशत के करीब जनसंख्‍या उनको गौरव के साथ जीने के लिए उनके मान-सम्‍मान क्‍योंकि उन्‍होंने भारत के लिए प्‍यार किया है, भारत के लिए वह जी रहे है, उनके लिए अब तक बहुत उदासीनता बरती गई है, नेग्लेक्ट किया गया। अब वह दिन चले गए मैं पूरे जम्‍मू कश्‍मीर के ऐसे विस्‍थापित भाई-बहनों किसी भी प्रकार के विस्‍थापित क्‍यों न हो, वो हमारे भाई है वो हमारे परिवार-जन हैं, उनका सुख-दु:ख हमारा सुख दु:ख है, उनकी प्रगति ये हमारा मकसद है, उनका विकास ही हमारा मकसद है और उस काम को आगे बढ़ाने के लिए यहां विकास की नित्‍य नवीन योजनाओं के द्वारा हम आगे बढ़ाना चाहते हैं।

भाईयो-बहनो एक बात मैं अपने अनुभव से कहना चाहता हूं। अब मुझे लगता है कि मैं कारगिल में वो बात करूगा तो अच्‍छा लगेगा। मैं जब गुजरात में काम करता था तो कभी भी हम कच्‍छ जाते थे तो हमेशा हम सीमा की समस्‍या,पाकिस्‍तान, वहां से आने वाली तकलीफें उसी की चर्चा करते थे, जो भी राजनेता जाए वहीं बोलता था मैं मुख्‍यमंत्री बना तो वहां से 5-7 लोग मुझसे मिले आए, क्‍योंकि भूंकप के बाद मैं मुख्‍यमंत्री बना था, भूंकप तो था भयानक बर्बादी हुई थी वहां तो, वह मुझसे मिलने आए थे, उन्‍होंने कहा साहब हमने सुना है आप शपथ के बाद तुरंत कच्‍छ पहुंच रहे हो, मैंने कहा हां शपथ के बाद मैं पहला काम करने वाला हूं कच्‍छ के भूंकप पीडि़तों को मिलने जा रहा हूं। उन्‍होंने कहा हमारा एक सुझाव है मैंने कहा क्‍या बोले मेहरबानी करके जब आप कच्‍छ आए तो सिर्फ सीमा, सीमा की समस्‍याएं, पाकिस्‍तान इसमें अपना टाइम बर्बाद मत किजिए। उसी चर्चा के अंदर सब नेताओं ने हर साल यही काम किया। आप भविष्‍य की बात करके जाइए। मैं भी पहले कच्‍छ जाता तो यही बातें करता, लेकिन उस दिन जब उन्‍होंने कहा तो मेरे मन मे स्‍पार्क हुआ, मुझे लगा हां इस बात को नए ढंग से सोचना चाहिए और मैं जब भी कच्‍छ गया मैं चार टाइम मुख्‍यमंत्री रहा, मैं जब भी कच्‍छ के लोगों के पास गया मैंने सिवा विकास के कोई बात नहीं की,आज विकास को महत्‍वपूर्ण पहलू बना दिया और कच्‍छ ऐसा जिला है हमारे यहां, जहां पूरे गुजरात की सबसे ज्‍यादा मुस्लिम पॉप्युलेशन इस जिले में है। कच्‍छ की एक ओर भी विशेषता है। हमारे जम्‍मू कश्‍मीर के गुजर लोग जो है वो जिस प्रकार के रंग-रंगीन कपड़े पहनते है जिस प्रकार का सर पर बांधते है मेरे कच्‍छ के अंदर भी वैसे ही बांधते है बिल्‍कुल, हमारा कच्‍छी मुसलमान और यहां का गुजर को खड़ा कर दो तो लगता है कि एक ही बिरादरी के लोग हैं, इतनी साम्‍यता है, इतनी निकटता है। मैं चार बार मुख्‍यमंत्री रहा इतने सालों तक वहां एक ही काम किया, डिवलेपमेंट का। सारे विषयों की चर्चा करना मैंने मेरे लेवल पर बंद कर दिया। भईयो-बहनो आज मैं गर्व से कहता हूं वो कच्‍छ जिला, हिन्‍दुस्‍तान का तेज गति से विकास करने वाला जिला बना गया जबकि वो कच्‍छ किसी समय माइनस ग्रोथ वाला रहा था। हर बार जनसंख्‍या लोग खाली करके चले जाते थे। उस अनुभव से मैं कहता हूं चाहे लेह हो, लद्दाख हो, कारगिल हो, सीमावर्ती इलाका हो, चाहे नॉर्थ-ईस्‍ट हो, मेरे लिए यहां की जीवन बदलने का सबसे उचित रास्‍ता जो मैं अनुभव से सीख कर आया हूं, वो है विकास, मुझे विकास के रास्‍ते पर चलना है, मुझे समस्‍याओं के समाधान का रस है। और मुझे जन-जन को अपने साथ लेकर आगे चलने में रस है। आपने हमारा साथ दिया है और आगे भी साथ देंगे, मुझे पूरा विश्‍वास है और हम सब मिलकर के जो भारत का भाग्‍य बदलने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन आज जो उस भाग्‍य को बदलने में दूर खड़े हैं उनको सबसे पहले आगे ले जाना है यह मकसद लेकर मैं काम कर रहा हूं।

चाहे हवाई कनेक्टिविटी हो, रेल कनेक्टिविटी हो, रोड कनेक्टिविटी हो, टेलिकॉम कनेक्टिविटी सब प्रकार से हिन्‍दुस्‍तान का कोई कोना अछूत नहीं रहना चाहिए। उसके विकास के लिए पूरा प्रयास होना चाहिए लेकिन सबसे पहली प्राथमिकता है रोजगार मेरे नौजवान को रोजगार मिले उसके लिए हर वो जो उपलब्‍ध संसाधन है उसी को केन्‍द्र में रखकर के आगे बढ़ना है। पशमिना हमारी पहचान थी धीरे-धीरे हम खो रहे है। इसी बजट में हमने कहा है पशमिना प्रमोशन के लिए पी-3 प्रोजेक्‍ट शुरू करने वाले है ताकि यहां से दूर-दूर पहाड़ों में रहने वाले लोगों को एक नया अवसर मिले। यहां का केसर दुनिया के अच्‍छे क्‍वालिटी के केसर में जम्‍मू कश्‍मीर का केसर है यह दुनिया के बाजार में अपना डंका क्‍यों न जमाएं और अगर एक बार विश्‍व के बाजार में जम्‍मू कश्‍मीर के केसर की पहचान बन गई तो मार्केट अपने आप मिलेगा तब यहां का मेरा किसान आर्थिक रूप से संपन्‍न होगा। पैकेजिंग की भी इंडस्‍ट्री आएगी, मार्केटिंग की इंडस्‍ट्री आएगी, एक्‍सपोर्ट करने वाले यूनिट आ जाएंगे तो यहां का किसान कमाना शुरू कर देगा। फलों से लदे हुए इलाके हैं हमारे पास। हम एपल की खेती करते हैं लेकिन एपल बाजार में पहुंचते पहुंचते बिगड़ जाता है, बेचारे किसान का 15-20 प्रतिशत नुकसान वहीं हो जाता है। लेकिन अगर हम वॅल्यू एडिशन करें, और जब जब बिजली आ रही हो तो छोटे-छोटे यूनिट लगा करके, वॅल्यू एडिशन करके, पैक टीन के अंदर उनका जूस हों, उसके कट फ्रूट हो , या एप्‍पल को ऐसे ही सुरक्षित रखना हो,वो सब संभव है टैक्‍नालाजी से। हमारे यहां जो कृषि उत्‍पादन है, उसको वॅल्यू आडेलीशन करके, उद्योगिक इकाइयों को जोड़ करके हमारे यहां के किसान को हम ताकतवर बनाना चाहते हैं। मजबूत बनाना चाहते है।

भाइयो एवं बहनो, विकास तो करना है। लेकिन मैं अनुभव से कहता हूं, इस देश को आगे बढ़ने के लिए पैसों की कमी नहीं है। इस देश को आगे बढ़ाने के लिए देश के नागरिकों के पसीने में खोट नहीं है। पुरूषार्थ में भी खोट नहीं है, पैसों में भी खोट नहीं है, उसके बाद भी हमारा देश वहीं का वहीं न जाने कहां ठप्‍प हो गया है। सामान्‍य मानव की जिन्‍दगी में बदलाव क्‍यों नहीं आता, उसका एक महत्‍वपूर्ण कारण है, भ्रष्‍टाचार ने हमें तबाह करके रखा है। आप मुझे बताइए भाइयों एवं बहनों, भ्रष्‍टाचार से मुक्ति चाहिए या नहीं चाहिए? भ्रष्‍टाचार जाना चाहिए कि नहीं जाना चाहिए? हिंदुस्‍तान के हर कोने से भ्रष्‍टाचार जाना चाहिए कि नहीं जाना चाहिए? भाईयों एवं बहनों, मैंने बेड़ा उठाया है। मेरा तो मंत्र है न खाउंगा न खाने दूंगा। इतने पैसे अगर भ्रष्‍टाचार के पापाचार में बंद हो जाए, उन्‍हीं पैसों से देश को आगे बढ़ाया जा सकता है। लोगों की, नौजवानों की इच्‍छाओं को पूर्ण किया जा सकता है। मुझे आपसे मदद चाहिए भ्रष्‍टाचार के खिलाफ लड़ाई लड़ने के लिए, मुझे आपका आशीर्वाद चाहिए भ्रष्‍टाचार के खिलाफ लड़ाई लड़ने के लिए, मुझे आपकी तरफ से ताकत चाहिए ताकि भ्रष्‍टाचार मुक्‍त शासन को विकसित करें, ताकि गरीब से गरीब आदमी की भलाई के लिए हमें अवसर मिले और पैसे आयेंगे, जाएंगे, कोई भलाई ही नहीं। बात बिगड़ती चली जाती है, मुझे बात को बनाना है। इसलिए भाईयों एवं बहनों अटल बिहारी बाजपेयी जी ने जम्‍मू और कश्‍मीर के लिए जो सपने देखे थे, उन सपनों को हमें पूरा करना है। यहां के जनसामान्‍य को ताकत देनी है। भाइयों एवं बहनों कोई हिंदुस्‍तान के किसी कोने में कल्‍पना नहीं कर सकता लेह लद्दाख हो या कारगिल हो, इतनी बड़ी जनसभा को संबोधन करने का हमें अवसर मिला। हिंदुस्‍तान में कई लोगों को कल्‍पना तक नहीं है। आज जब टीवी पर चीजें देखेंगे पूरा देश चकित हो जाएगा, आपकी देशभक्ति से चकित हो जाएगा, आपके उत्‍साह से चकित हो जाएगा, और हिंदुस्‍तान के कई कोनों के लोगों को भी कारगिल के उत्‍साह से भी प्रेरणा मिलेगी, ये प्रेरणा लेकर आज मैं जा रहा हूं।

मैं फिर एक बार आप सब का हृदय से धन्‍यवाद करता हूं। विकास के लिए दिल्‍ली में बैठी हुई सरकार पीछे मुड़कर देखने वाली नहीं है। आप आशा आकांक्षाओं की पूर्ति के लिए दिल्‍ली बैठी हुई सरकार जितना भी कर सकती है करने के लिए प्रतिबद्ध है, क्‍योंकि दिल से हम जुड़े हुए हैं। और उसी के कारण हम इसे आगे बढ़ाना चाहते हैं। बहुत-बहुत धन्‍यवाद।

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July 10, 2024

भारत माता की जय!

भारत माता की जय!

भारत माता की जय!

तो मैं शुरू करूं? His Excellency Minister of Economy & Labour of Austria, Indian Diaspora के मेरे सभी साथियों, भारत के सभी दोस्त, शुभचिंतक आप सब को नमस्कार।

गुटिन्टाग !

साथियों,

ऑस्‍ट्रिया का ये मेरा पहला दौरा है। जो उत्साह, जो उमंग मैं यहां देख रहा हूं वो वाकई अद्भुत है। 41 वर्षों के बाद भारत के किसी प्रधानमंत्री का यहां आना हुआ है। आप में से बहुत लोग ऐसे होंगे, जिनके जन्म के पहले कोई प्रधानमंत्री यहां आए थे। आपको क्या लगता है ये इंतजार कुछ ज्यादा ही लंबा हो गया है ना? चलिए अब ये इंतजार खत्म हो गया है। अब तो आप खुश हैं ना? मुझे बताने के लिए कह रहे हैं कि real में खुश हैं? सच्चा?

और साथियों,

ये इंतजार खत्म भी एक ऐतिहासिक अवसर पर हुआ है। आप में से बहुत लोगों को शायद पता नहीं होगा भारत और ऑस्‍ट्रिया अपनी दोस्ती के 75 वर्ष celebrate कर रहा है। मैं Chancellor कार्ल नेहमर को इस शानदार स्वागत के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद देता हूं। मैं Economy & Labour मंत्री मार्टिन कोकर का भी आभार व्यक्त करता हूं। आपका यहां आना ये दिखाता है कि ऑस्ट्रिया के लिए यहां बसे भारतीय कितने खास हैं, कितने विशेष हैं।

Friends,

भौगोलिक दृष्टि से तो भारत और ऑस्‍ट्रिया दो अलग-अलग छोर पर हैं, लेकिन हम दोनों के बीच अनेक समानताएं हैं। Democracy हम दोनों देशों को कनेक्ट करती है। Liberty, Equality, Pluralism और rule of law का respect ये हमारी shared values हैं। हम दोनों समाज multi cultural और multilingual है। दोनों देश, हमारे समाज में हम दोनों देशों की आदत है Diversity को celebrate करना। और हमारी इन values को reflect करने वाला एक बड़ा माध्यम चुनाव है। ऑस्ट्रिया में कुछ महीनों के बाद चुनाव होने वाला है। जबकि भारत में हमने अभी-अभी लोकतंत्र का पर्व आन-बान-शान के साथ मनाया है। भारत में दुनिया का सबसे बड़ा चुनाव संपन्न हुआ है।

साथियों,

आज दुनिया के लोग भारत के election के बारे में सुनकर हैरान रह जाते हैं। जो चुनाव कुछ सप्ताह पहले ही खत्म हुआ है, उसमें 650 मिलियन से ज्यादा लोगों ने वोट डाले हैं। मतलब हुआ शायद 65 ऑस्‍ट्रिया, और सोचिए इतना बड़ा चुनाव होता है, लेकिन कुछ ही घंटों में चुनाव के नतीजे clear हो जाते हैं। ये भारत की electoral machinery और हमारे democracy की ताकत है।

साथियों,

भारत के इन चुनावों में सैंकड़ों Political Parties के आठ हजार से ज्यादा उम्मीदवारों ने हिस्सा लिया। इस लेवल का contest, इतना diverse contest तब जाकर के देश में जनता ने अपना mandate दिया है। और देश ने mandate क्या दिया? साठ साल के बाद एक सरकार को लगातार तीसरी बार सेवा करने का अवसर भारत में मिला है। हमने तो दुनिया में Post Covid Era में चारों तरफ Political instability देखी है। ज्यादातर देशों में सरकारों के लिए survive करना आसान नहीं रहा। दोबारा चुनकर आना तो एक प्रकार से बहुत बड़ा चैलेंज रहा है। ऐसी स्थिति में भारत की जनता ने मुझ पर, मेरी पार्टी पर, एनडीए पर भरोसा किया। ये mandate इस बात का भी प्रमाण है कि भारत stability चाहता है, भारत continuity चाहता है। ये continuity बीते 10 साल की पॉलिसी और प्रोग्राम्स की है। ये continuity good governance की है। ये continuity बड़े संकल्पों के लिए समर्पित होकर के काम करने की है।

Friends,

मेरा हमेशा ये मत रहा है कि दो देशों के बीच के रिश्ते सिर्फ सरकारों से नहीं बनते। रिश्तों को मजबूती देने में जन भागीदारी बहुत जरूरी है। इसलिए मैं आप सभी के रोल को इन रिश्तों के लिए बहुत अहम मानता हूं। आपने दशकों पहले मोसार्ट और श्त्रूदल्स की धरती को अपना बना लिया। लेकिन मातृभूमि का संगीत और स्वाद आज भी आपके दिल में बसा है। आपने Vienna की सड़कों में ग्राथ्स, लिंत्स, इंसब्रुक, साल्सबुग और दूसरे शहरों में भारत के रंग भर दिए हैं। आप दीवाली हो या क्रिसमस, एक जैसे उत्‍साह से मनाते हैं। आप तोर्ते और लड्डू, दोनों बड़े चाव से बनाते भी हैं और खाते भी हैं और खिलाते भी हैं। आप Austria की Football Team और भारत की Cricket Team को एक ही जूनून से cheer करते हैं। आप यहां की Coffee को enjoy करते हैं, साथ ही भारत के अपने शहर वाली चाय की दुकान को भी याद करते हैं।

Friends,

भारत की तरह ही Austria का इतिहास और कल्चर भी काफी पुराना है, शानदार रहा है। एक दूसरे के साथ हमारे संपर्क भी ऐतिहासिक रहे हैं और इसका फायदा दोनों देशों को हुआ है। ये फायदा कल्चर में भी हुआ है और कॉमर्स में भी हुआ है। करीब 200 साल पहले ही Vienna की University में संस्कृत की पढ़ाई शुरू हो गई थी। 1880 में Indology के लिए एक Independent Chair की स्थापना से इसे और ऊंचाई मिली। आज मुझे यहां कुछ जाने माने Indologist से मिलने का अवसर भी मिला। उनकी बातों से साफ झलक रहा था कि भारत को लेकर उनकी रूचि बहुत ज्यादा है। भारत के अनेक महान लोगों ने भी Austria से बहुत प्यार पाया है। Vienna ने रबीन्द्रनाथ टैगोर और नेताजी सुभाष जैसे हमारे अनेक महान व्यक्तित्वों की मेजबानी की है और गांधी जी की शिष्या मीराबेन का अंतिम समय Vienna में ही बीता है।

साथियों,

हमारा सिर्फ कल्चर और कॉमर्स का ही रिश्ता नहीं है, बल्कि साइंस भी हमें जोड़ती है। बहुत साल पहले Vienna University में हमारे नोबेल पुरस्कार विजेता सर सी.वी. रमन का लेक्चर हुआ था। आज मुझे नोबेल पुरस्कार विजेता Anton Zeilinger से मुलाकात करने का अवसर मिला है। इस दोनों महान वैज्ञानिकों को Quantum ने कनेक्‍ट किया है। Quantum Computing पर Anton Zeilinger, उनका काम दुनिया को प्रेरित और प्रोत्साहित करता है।

Friends,

आज भारत के बारे में पूरी दुनिया में बहुत चर्चा हो रही है। हो रही है कि नहीं हो रही है? हर कोई भारत के बारे में जानना-समझना चाहता है। आपका भी यही अनुभव है ना? लोग बहुत कुछ पूछते हैं ना आपको? ऐसे में भारत आज क्या सोच रहा है? भारत क्या कर रहा है? इसको लेकर एक Better Informed World बनाना जरूरी है। भारत 1/6th Humanity को represent करता है और ग्लोबल ग्रोथ में भी करीब-करीब इतना ही contribute कर रहा है। हजारों वर्षों से हम दुनिया के साथ Knowledge और Expertise share करते रहे हैं। हमने युद्ध नहीं दिए, हम सीना तान करके दुनिया को कह सकते हैं, हिन्‍दुस्‍तान ने युद्ध नहीं बुद्ध दिए हैं। जब मैं बुद्ध की बात करता हूं तो इसका मतलब है कि भारत ने हमेशा Peace और Prosperity ही दी है। इसलिए 21वीं सदी की दुनिया में भी भारत अपनी इस भूमिका को सशक्त करने वाला है। आज जब दुनिया भारत को विश्व बंधू के रूप में देखती है तो ये हमारे लिए गर्व की बात है। आपको भी डगर-डगर पर गर्व महसूस होता है कि नहीं होता है?

Friends,

जब आप भारत में हो रहे तेज बदलावों के बारे में पढ़ते हैं, सुनते हैं तो क्या होता है? क्या होता है? क्या होता है? मुझे पक्का विश्वास है साथियों, आपका सीना भी 56 इंच का हो जाता है। भारत आज 5th Largest Economy है। 2014 में जब मैं आया इस सेवा के कार्य में तब हम 10 नंबर पर थे, 10 नंबरी नहीं कह रहा हूं। आज हम 5 नंबर पर पहुंच गए हैं। ये सब सुनते हैं तो आपको क्या लगता है? गर्व होता है कि नहीं होता है दोस्तों? आज भारत एक परसेंट के रेट से ग्रो कर रहा है। इस स्पीड के साथ क्या होगा मैं बताऊं? बताऊं? आज हम 5 नंबर पर हैं, हम टॉप 3 में पहुंचेंगे और साथियों मैंने देशवासियों को कहा था कि मेरे तीसरे टर्म में मैं देश को दुनिया की टॉप 3 इकोनॉमी में लेकर के जाऊंगा और ये बात मैं आपको बता दूं कि हम सिर्फ टॉप पर पहुंचने के लिए ही ये मेहनत नहीं कर रहे हैं, हमारा मिशन 2047 है। 1947 में देश आजाद हुआ, 2047 में देश शताब्‍दी मनाएगा। लेकिन वो शताब्‍दी विकसित भारत की शताब्दी होगी। भारत हर प्रकार से विकसित होगा। हम आने वाले 1000 वर्षों के भारत की मजबूत नींव आज डाल रहे हैं।

Friends,

भारत आज एजुकेशन, स्किल, रिसर्च और इनोवेशन में अभूतपूर्व स्‍केल पर काम कर रहा है। 10 सालों में, ये आंकड़ा याद रखना जरा… 10 सालों में हर दिन everyday दो नए कॉलेज भारत में खुले हैं। आगे बताऊं? हर हफ्ते एक नई University खुली है। पिछले साल हर दिन 250 से ज्यादा Patents Grant किए गए हैं। भारत आज दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम है। आज दुनिया का हर 10वां यूनिकॉर्न भारत में है। बाकी पूरी दुनिया में जितना real time digital transaction आज होता है, उतना अकेला भारत में होता है। हमारे payments digital हैं, हमारे process भी digital हैं। भारत less paper, less cash लेकिन seamless economy की तरफ बढ़ रहा है।

Friends,

आज भारत Best, Brightest, Biggest और Highest milestone के लिए काम कर रहा है। हम आज भारत को Industry 4.O और green future के लिए तैयार कर रहे हैं। Green Hydrogen Mission का लक्ष्य 2070 तक net Zero गोल्स हासिल करने का है। हम Green Mobility पर बल दे रहे हैं। और भारत की जो ये unprecedented growth story है, उसका फायदा ऑस्ट्रिया को भी हो रहा है। आज भारत के अलग-अलग सेक्टर्स में 150 से अधिक ऑस्ट्रियन कंपनियां काम कर रही हैं। ये भारत के Infrastructure से जुड़ी aspirations को पूरा करने में मदद कर रही है। मेट्रो, डैम ऐसे अनेक projects, टनल जैसे अनेकों Infra projects में ऑस्ट्रिया की कंपनियां भारत में काम कर रही हैं, और मुझे उम्मीद है कि आने वाले समय में यहां की कंपनियां, यहां के इन्वेस्टर ज्यादा से ज्यादा भारत में अपना विस्तार करेंगे।

Friends,

ऑस्‍ट्रिया में रह रहे भारतीयों की संख्या बहुत बड़ी नहीं है। लेकिन ऑस्‍ट्रिया के समाज में आपका योगदान प्रशंसनीय है। खासतौर पर यहां के हेल्थकेयर सेक्टर में आपके रोल की बहुत प्रशंसा होती है। हम भारतीयों की पहचान ही care और compassion के लिए होती है। मुझे खुशी है कि ये संस्कार आप अपने profession में यहां भी साथ लेकर चलते हैं। आप सभी इसी तरह ऑस्‍ट्रिया के विकास में सहभागी बने रहिये। मैं एक बार फिर आप सबका इतनी बड़ी तादाद में यहां आने के लिए आभार जताता हूं, आप सबके इस उत्साह और ऊर्जा के लिए मेरी तरफ से बहुत-बहुत धन्यवाद।

साथियों,

ऑस्ट्रिया का ये पहला दौरा बहुत ही सार्थक रहा है। एक बार फिर यहां की सरकार और यहां की जनता का भी मैं आभार व्यक्त करता हूं। आप सबको मेरी बहुत-बहुत शुभकामनाएं हैं। मुझे विश्वास है इस बार 15 अगस्त पुराने सारे रिकॉर्ड तोड़ने वाली होनी चाहिए। होगा ना? पक्का होगा? मेरे साथ बोलिए–

भारत माता की– जय!

भारत माता की– जय!

भारत माता की– जय!

वंदे मातरम!

वंदे मातरम!

वंदे मातरम!

वंदे मातरम!

वंदे मातरम!

वंदे मातरम!

वंदे मातरम!

वंदे मातरम!

वंदे मातरम!

वंदे मातरम!

बहुत-बहुत धन्यवाद!