The central government is working day and night for the development of Jharkhand, says PM Modi in Hazaribagh
Today everyone in the state knows that Congress JMM and RJD's alliance is the biggest hindrance in the development of Jharkhand: PM Modi
The Congress never gave importance to the tribal community which made such a big contribution to the freedom struggle: PM Modi targets opposition
The JMM and Congress are running a marathon of scams in Jharkhand, says PM Modi in Jharkhand’s Hazaribagh
The RJD transformed Jharkhand into a center for their exploitation, brazenly looting its water, forests, and land: PM Modi

जय जोहार!

मैं हजारीबाग की इस पवित्र धरती पर मां भद्रकाली और मां छिन्नमस्तिका के चरणों में प्रणाम करता हूं। इस धरती ने जनजातीय संस्कृति को संजोया है, भगवान बिरसा मुंडा की प्रेरणाओं को संजोया है। आज गांधी जयंती के पावन अवसर पर मुझे यहां आने का सौभाग्य मिला है। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान 1925 में गांधी जी हजारीबाग आए थे। बापू के विचार, बापू की शिक्षाएं हमारे संकल्पों का हिस्सा हैं। मैं बापू को नमन करता हूं, उन्हें श्रद्धांजलि देता हूं।

साथियों,

इससे पहले साल 2015 में भी 2 अक्टूबर को गांधी जयंती के दिन मैं झारखंड आया था। तब मेरा खूंटी में कार्यक्रम हुआ था। मैंने वहां सोलर रूफटॉप पावर प्लांट का उद्घाटन किया था।

साथियों,

झारखंड के साथ भाजपा का, और मेरा अपना एक विशेष रिश्ता बन गया है। ये रिश्ता दिल का रिश्ता है, साझे सपनों का रिश्ता है। इसीलिए, झारखंड मुझे बार-बार बुलाता है और मैं भी बार-बार दौड़ा चला आता हूं। अभी कुछ ही दिन पहले मैं जमशेदपुर आया था। उस दिन बारिश, पानी, आंधी ने भी खूब रुकावटें डाली, हेलीकाप्टर भी नहीं उड़ सका, लेकिन, मैंने तय किया था, झारखंड आकर आप लोगों के दर्शन किए बिना वापस नहीं जाऊंगा। मैं सड़क से यात्रा करके अपने लोगों के बीच पहुंच गया। झारखंड को, जनजाति के मेरे साथियों को, यहां के नागरिकों को, लेकिन आज मैंने कहा कि मैं हरेक के बीच में जाकर दर्शन करके आऊंगा। तो मुझे अभी आपके बीच दर्शन करने का अवसर मिला। लेकिन उसके बावजूद भी पीछे हजारों लोग छूट गए जिनको मैं भी नहीं देख पाया और वे नहीं देख पाए, और यहां से मुझे उनकी मुंडी दिखती है सारे। मैं उन सबसे क्षमा मांगता हूं कि मैं आप तक आने के बाद भी आप तक नहीं पहुंच पाया। और इसलिए आपकी क्षमा चाहता हूं कि इतनी बड़ी संख्या में आप दूर-दूर तक खड़े हैं। ये आपका प्यार, ये आशीर्वाद मेरे लिए बहुत बड़ा अनमोल खजाना है।

साथियों,

झारखंड को सैकड़ों करोड़ रुपए की विकास परियोजनाएं मिलीं। उस दिन आपने देखा होगा, 6 नई वंदेभारत ट्रेनें यहां से शुरू हुईं। और आज भी, आप सबके बीच आने से पहले मैंने यहां 80 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा की विकास परियोजनाओं का लोकार्पण-शिलान्यास करके आया हूं। (ये ले लीजिए भाई एसपीजी के लोग, बच्चे कुछ लेकर आए हैं। ले लीजिए भाई। वो मुझे मिल जाएगा अगर आप देना चाहते हैं।) धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान, एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय, मोबाइल मेडिकल यूनिट्स, बिजली, पानी, सोलर एनर्जी, और ऐसी ही अन्य योजनाएं, इन सबका झारखंड के लोगों को बहुत बड़ा लाभ मिलेगा। खासकर, इन योजनाओं से यहां के आदिवासी समाज के जीवन में बहुत बड़ा बदलाव आएगा, उन्हें आगे बढ़ने का मौका मिलेगा। मैं एक बार फिर, झारखंड के सभी लोगों को इन विकास कार्यों के लिए बहुत-बहुत बधाई देता हूं।

साथियों,

हमारे देश में आदिवासी जन नायकों के साथ जैसा अन्याय किया गया, वैसा अन्याय किसी के साथ नहीं हुआ। कांग्रेस ने अपने एक परिवार को पहचान दिलाने के लिए, देश के कोने-कोने में बसे आदिवासी परिवारों की पहचान मिटा दी। आजादी की लड़ाई में इतना बड़ा योगदान देने वाले आदिवासी समाज को कांग्रेस ने कभी महत्व नहीं दिया। सारी योजनाएं एक ही परिवार के बेटे-बेटी के नाम पर, सारी सड़कें-इमारतें, एक ही परिवार के बेटे-बेटी के नाम पर, ऐसी परिवारवादी सोच ने देश का बहुत नुकसान किया। आज मुझे गर्व है कि हमारी सरकार, आदिवासी नायकों को पूरा सम्मान दिला रही है। ये भाजपा है जिसने आदिवासी म्यूज़ियम बनाने का अभियान शुरू किया है। रांची में भी भगवान बिरसा मुंडा को समर्पित म्यूज़ियम बना है। हमने भगवान बिरसा मुंडा के जन्मदिन पर जनजातीय गौरव दिवस मनाने की शुरुआत की है। अगले वर्ष हम भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती मनाएंगे। इसी कड़ी में आज का भी ये कार्यक्रम समर्पित है।

साथियों,

हम सब प्रेम से भगवान बिरसा मुंडा को धरती आबा कहते हैं। आज उनके नाम पर धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान शुरू हुआ है। इस योजना का फोकस है कि जिन भी आदिवासी भाई-बहनों को अब तक सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिला है, उन्हें हर लाभ से जोड़ा जाए। जनजातीय इलाकों में सभी के पास आयुष्मान कार्ड हो, सभी जनजातीय गांवों तक सड़क पहुंचे, सभी गांवों में मोबाइल कनेक्टिविटी हो, सभी के पास पक्का घर हो, घर में नल से जल हो, रसोई गैस का कनेक्शन हो, ऐसे अनेकों काम इस योजना के तहत किए जाएंगे। योजना के तहत आदिवासी भाई-बहनों के लिए ट्राइबल मार्केटिंग सेंटर बनाए जाएंगे, यही नहीं, धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के तहत आदिवासी युवाओं के कौशल विकास पर भी फोकस होगा। हमारे जनजातीय युवा skilled हों, उन्हें रोजगार के नए-नए अवसर मिलें, ये योजना इसमें बहुत बड़ी मदद करेगी। सैचुरेशन की अप्रोच पर चलते हुए सरकार के 15 से ज्यादा मंत्रालय एक साथ मिलकर इस अभियान पर काम करेंगे। और इसका बहुत बड़ा लाभ झारखंड के लोगों को होगा, आप सब भाई-बहनों को होगा। मैं आप सबको धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान की बधाई देता हूं।

साथियों,

आज एक ओर केंद्र सरकार झारखंड के विकास के लिए दिन रात मेहनत कर रही है। दूसरी ओर, झारखंड सरकार, झारखंड के विकास को पटरी से उतारने में लगी हैं। आज झारखंड का बच्चा बच्चा जान चुका है, झारखंड के विकास में सबसे बड़ी बाधा कांग्रेस-JMM और RJD का गठजोड़ है। झारखंड तभी आगे जाएगा, जब ये सरकार हटेगी! झारखंड तभी आगे जाएगा, जब यहां परिवर्तन होगा! इसीलिए, पूरे झारखंड में परिवर्तन यात्रा का जन-आंदोलन चल रहा है। ये परिवर्तन यात्रा केवल एक राजनैतिक यात्रा नहीं है। ये झारखंड के विकास के लिए, जन-जन के सपनों को पूरा करने के लिए एक संकल्प यात्रा भी है। इस यात्रा को झारखंड के लोगों का आशीर्वाद मिला है। इस यात्रा को झारखंड की माताओं-बहनों का स्नेह मिला है। इसे समाज के हर वर्ग का अपार जनसमर्थन मिला है। आज से झारखंड में परिवर्तन की शुरुआत हो गई है। झारखंड के विकास के लिए- परिवर्तन! हर गरीब को घर के लिए- परिवर्तन! हर घर जल के लिए- परिवर्तन! भ्रष्टाचार के खात्मे के लिए- परिवर्तन! जल, जंगल, जमीन की हिफाज़त के लिए- परिवर्तन! बहन बेटियों की सुरक्षा के लिए- परिवर्तन! आदिवासी समाज के अधिकारों के लिए- परिवर्तन!

साथियों,

बीजेपी वो पार्टी है, जिसने आप सबके साथ मिलकर झारखंड राज्य के सपने को देखा भी, उसे पूरा भी किया। अटल जी ने सरकार में आते ही शांति और सहमति के साथ झारखंड राज्य बनाया था। हम झारखंड का विकास चाहते थे। हम यहां के आदिवासी समाज के सपनों को पूरा करना चाहते थे। लेकिन, इन सपनों को पूरा करने में हमारी लड़ाई किससे थी? RJD जैसी पार्टियों से! RJD के लोगों ने झारखंड को अपनी लूट का ठिकाना बना रखा था! जल-जंगल-जमीन की खुलेआम लूट होती थी! इस इलाके को इन्होंने अपराधियों-माफियाओं का सेफ-हाउस बना रखा था। और RJD वालों को दिल्ली से कौन शह दे रहा था? कांग्रेस पार्टी! कांग्रेस RJD के इस पाप में बराबर की हिस्सेदार थी। इसीलिए, RJD के लोग कहते थे कि झारखंड नहीं बनने देंगे। और, कांग्रेस पार्टी ये सुनिश्चित करती थी कि झारखंड की मांग कभी पूरी न हो!

भाइयों बहनों,

आज मुझे अफसोस है कि अब JMM भी कांग्रेस और RJD के रंग में रंग गई है। ये वो पुरानी JMM नहीं है। आज JMM पर कांग्रेस के ecosystem ने कब्जा कर लिया है। आज JMM पर कांग्रेस का भूत सवार है - भाषा बदली, चरित्र बदला, और अब ये झारखंड की आत्मा को ही बदलने चले हैं।

साथियों,

आज JMM सरकार झारखंड के विकास में बड़ी बाधा बन गई है। कोई कल्पना कर सकता है, जल-जंगल-जमीन के नाम पर आदिवासियों से वोट लेने वाले लोग ऐसी खुली लूट करेंगे? आज प्रदेश सरकार में जमीन के दलालों की तूती बोल रही है। आप इनकी हिम्मत देखिए, इन्होंने गरीब आदिवासियों की ज़मीनों को लूटा! इन्होंने सेना तक की जमीन को नहीं छोड़ा! झारखंड में कोयले की खुली लूट चल रही है। ठेके-पट्टे के नाम पर बालू की लूट हो रही है। जो खनिज झारखंड के विकास की पूंजी हैं, ये सरकार उसकी भी लूट में लगी है। ये लोग गरीबों के नाम पर, आदिवासियों के नाम पर योजनाएं निकालते हैं, उसका भी पैसा खा जाते हैं। अबुआ आवास योजना, मुख्यमंत्री मईया योजना, ये सब भ्रष्टाचार का ठिकाना बन गई हैं। प्रदेश सरकार के संरक्षण में यहां पेपरलीक कराने वाले गिरोह चल रहे हैं। लाखों रुपए में एक-एक पेपर बेचकर यहां के युवाओं का हक मारा जा रहा है। करोड़ों-करोड़ों रुपए कमाए जा रहे हैं, ये पैसा ऊपर तक जा रहा है। पूरी सरकार भ्रष्टाचार में डूबी है। मेरे नौजवान मित्र आज बहुत बड़ी मात्रा में यहां आए हैं। पेपरलीक ने उनकी जिंदगी को तबाह करके रखा है। ऐसी सरकार क्या झारखंड के युवाओं का भला कर सकती है?

साथियों,

केंद्र सरकार की योजनाओं में भी प्रदेश सरकार भ्रष्टाचार करने से पीछे नहीं हट रही है। ये गरीब के राशन का पैसा डकार रहे हैं। ये गरीब के पानी का पैसा हड़प रहे हैं, जल-जीवन मिशन में भ्रष्टाचार कर रहे हैं। अरे हमारे देश में पानी के लिए तो वो परंपरा रही है, गरीब आदमी भी अपने घर के बाहर पानी का मटका रखता है ताकि आने-जाने वाला राहगीर अगर प्यासा है तो उसे पानी मिल जाए। गरीब आदमी भी पानी पिलाता है। ये सरकार, जल जीवन मिशन में, पानी के काम में भ्रष्टाचार कर रही है। भ्रष्टाचार का ऐसा खुला खेल, पैसे की ऐसी बंदरबांट, यहां कांग्रेस के नेताओं के ठिकानों से सैकड़ों करोड़ बरामद होते हैं, यहां नेताओं के नौकरों के घरों से भी करोड़ों रुपए पकड़े जाते हैं। मैं इतने साल मुख्यमंत्री रहा, इतने साल प्रधानमंत्री रहा, इतने सालों से सार्वजनिक जीवन में रहा, मैंने कभी अपनी आंखों से नोटों के ऐसे ढेर नहीं देखे, जैसा झारखंड में चोरी किए पैसे पकड़े जा रहे हैं। मैं वो ढेर टीवी पर देख रहा हूं। जैसे JMM और कांग्रेस वाले झारखंड में घोटालों का मैराथन कराने में लगे हैं। मैंने तो सुना है, अब जब इनकी विदाई होने को है, तो इन्होंने भ्रष्टाचार की स्पीड और बढ़ा दी है और कहते हैं स्केल भी बढ़ा दिया है। मुझे पता चला है, पिछले दो हफ्ते में झारखंड में हजारों ट्रान्सफर हुए हैं। लोग बता रहे हैं, इस ट्रान्सफर पोस्टिंग के बहाने करोड़ों रुपए का खेल JMM ने किया है। लेकिन, मैं इन्हें बताना चाहता हूं, ये खेल अब ज्यादा दिन नहीं चलने वाला है। जल्द ही झारखंड में सरकार भी बदलेगी, और इस लूट का हिसाब भी होगा। पाई-पाई का हिसाब होने वाला है।

साथियों,

आज JMM को वो लोग चला रहे हैं जो झारखंड की पहचान को बदलना चाहते हैं। झारखंड की सदियों पुरानी पहचान को मिट्टी में मिलाना चाहते हैं। ये लोग, और कांग्रेस में बैठे इनके आका झारखंड में आदिवासी समाज को अल्पसंख्यक बनाना चाहते हैं। ये जानते हैं, इन्होंने हमेशा आदिवासी समाज को ठगा है। इन्होंने कभी भी आदिवासियों को आगे नहीं बढ़ने दिया है। इसलिए, सत्ता में बने रहने के लिए ये लोग झारखंड में अपना एक नया वोटबैंक बनाने में लगे हैं। झारखंड को बलि चढ़ा करके ये वोट बैंक का खेल चल रहा है। झारखंड की विरासत को बलि चढ़ाना, झारखंड की अस्मिता को बलि चढ़ाना, ये खतरनाक खेल। इनका खेल कितना खतरनाक है,संथाल परगना इसका सबूत है! संथाल परगना में आदिवासी आबादी लगातार कम हो रही है। वहीं दूसरी आबादी, घुसपैठियों की आबादी लगातार बढ़ रही है। डेमोग्राफी में इतना तेज बदलाव, आदिवासियों की, हिन्दुओं की घटती हुई आबादी। मैं आपसे पूछता हूं, झारखंड में ये बदलाव आपको दिख रहा है या नहीं दिख रहा? बांग्लादेशी घुसपैठियों की संख्या तेजी से बढ़ी है या नहीं बढ़ी है? घुसपैठिए यहां की ज़मीनों पर कब्जा कर रहे हैं या नहीं कर रहे? झारखंड की बेटियां, आदिवासी समाज की बेटियां इनके निशाने पर हैं या नहीं?

साथियों,

आप सबको ये खतरा दिखता है! आपको डेमोग्राफी में ये बदलाव दिखता है। लेकिन झारखंड सरकार को ये नहीं दिखता! जो यहां के गांव के इंसान को दिखता है वो सरकार में बैठे लोगों को नहीं दिखता है। वो ये मानने को तैयार ही नहीं हैं कि झारखंड में जनसंख्या संतुलन बिगड़ रहा है, आदिवासियों की आबादी घट रही है। हालत ये है, हाइकोर्ट इस गंभीर मामले पर चिंता जता रहा है। लेकिन, JMM सरकार कोर्ट में हलफनामा दायर करके घुसपैठ से इंकार कर देती है। आप मुझे बताइये, क्या ये लोग झारखंड की पहचान को सुरक्षित रख पाएंगे क्या? घुसपैठियों की बढ़ती आबादी, आदिवासी समाज की घटती संख्या—ये JMM और कांग्रेस की सत्ता की भूख का नतीजा है! JMM और कांग्रेस झारखंड के साथ-साथ पूरे देश की सुरक्षा से खिलवाड़ कर रहे हैं। इसीलिए, परिवर्तन यात्रा में हर परिवार ने एक नारा दिया। झारखंड के नागरिकों ने एक संकल्प सुनाया। झारखंड के हर गांव से एक दर्द दिखता था। एक आह सुनाई देती थी, एक बड़ी पीड़ा नजर आती थी। और परिवर्तन यात्रा में ये देखने के बाद एक संकल्प लिया गया है। ये संकल्प है ‘रोटी, बेटी, माटी’ हमें तीनों को बचाना है। ये झारखंड की लड़ाई सत्ता पाने की लड़ाई नहीं है। ये झारखंड की लड़ाई ‘रोटी, बेटी और माटी’ बचाने की लड़ाई है। आप सब तैयार हैं, ये लड़ाई लड़नी है। घर-घर लोगों को जगाना है। रोटी बचनी चाहिए कि नहीं बचनी चाहिए? माटी बचनी चाहिए कि नहीं बचनी चाहिए? बेटी बचनी चाहिए कि नहीं बचनी चाहिए? ‘रोटी, बेटी, माटी’ बचाना है कि नहीं बचाना है। अब जागना है कि नहीं जागना है। अब निकल पड़ना है कि नहीं पड़ना है। साथियों, यहां कुछ ही महीनों में बीजेपी सरकार बनेगी, और मैं झारखंड को गारंटी देता हूं, झारखंड में जब बीजेपी की सरकार बनेगी, झारखंड में अगर एनडीए की सरकार बनेगी, झारखंड में जब हमारी सरकार बनेगी ‘रोटी, बेटी, माटी’ की सुरक्षा सुनिश्चित कर दी जाएगी।

साथियों,

JMM अब झूठे वादों की बदौलत अपने आपको बचाना चाहती है। जिन्होंने 5 साल तक जनता का हक छीना, अब वो चुनाव में बड़े-बड़े वादे करके आपका भरोसा जीतना चाहते हैं। आपकी आंख में धूल झोंकना चाहते हैं। झारखंड के लोगों को इन झूठ की दुकान वालों से सावधान रहना है। मैं भी इनसे पूछना चाहता हूं, झूठ की नई जलेबियां परोसने से पहले पुराना हिसाब तो दे दो! इन्होंने बेरोजगार युवाओं को बेरोजगारी भत्ता देने का वादा किया था। उस वादे का क्या हुआ? वादा पूरा हुआ क्या? इन्होंने युवाओं के लिए भर्ती के नाम पर वादा किया था। मुझे बताइए, वादा पूरा हुआ क्या? उन्होंने काम किया क्या? कांस्टेबल भर्ती के नाम पर इतने सारे युवाओं की मौत हो गई। युवाओं को गुमराह करने वाली JMM सरकार ने असंवेदनशीलता की सारे सीमाएं तोड़ दीं।

साथियों,

आप याद करिए, इन्होंने महिलाओं को हर महीने 2 हजार रुपया चूल्हा भत्ता देने का वादा किया था। वादा किया था कि नहीं किया था? उस चूल्हे भत्ते कहां खो गया? उनके चूल्हे में पड़ा हुआ है? JMM ने विधवा महिलाओं को हर महीने पेंशन देने की बात कही थी। बेटियों को शादी में 51 हजार रुपया, सोने का सिक्का, ऐसे कितने ही वादे किए थे। क्या ये सोने के सिक्के जो अलमारियों में से नोटों की गड्डी निकली उसमें दब गए थे क्या? गद्दे के नीचे से नोटें निकलीं क्या ये सोने के सिक्के उसमें पड़े थे क्या? मैं जरा झारखंड की माताओं-बहनों को पूछना चाहता हूं, कितनी बहनों को इन योजनाओं का लाभ मिला? लेकिन अब फिर से नए झूठ, झूठे वादे? नई जलेबियां ये बांटने निकले हैं। झूठ की दुकान अब बार बार नहीं सजेगी।

साथियों,

झारखंड का विकास, आदिवासी समाज का कल्याण, ये केवल भारतीय जनता पार्टी और NDA ही कर सकते हैं। हमने झारखंड को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए दिन-रात काम किया है। आज हमारी सरकार में आदिवासी समाज के गौरव को सही पहचान मिल रही है। आप देखिए, हमने देश में गरीब को मुफ्त इलाज देने के लिए आयुष्मान योजना शुरू की। ये योजना झारखंड की धरती से शुरू की गई। हमने भगवान बिरसा मुंडा की जन्मजयंती पर पीएम-जनमन योजना का शुभारंभ किया। जो आदिवासी इलाके दशकों से विकास की मुख्यधारा से दूर थे, जहां सड़क, पानी, बिजली जैसी मूलभूत सुविधाएं भी नहीं पहुंचीं थीं, पीएम-जनमन योजना ऐसे सभी आदिवासी इलाकों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ रही है। आज लाखों जनजातीय परिवारों का जीवन बदल रहा है, उन्हें जरूरी सुविधाएं मिल रही हैं, बेहतर जीवन मिल रहा है। आप बीजेपी के 10 साल का रेकॉर्ड देखिए, हमने करोड़ों गरीबों को पक्के घर दिये। अपने तीसरे कार्यकाल में हम 3 करोड़ नए पीएम-आवास बना रहे हैं। हमने करोड़ों घरों तक पानी पहुंचाया। हमने गरीबों के लिए शौचालय बनवाए! हमने हर गरीब का जनधन खाता खुलवाया! इसका सबसे बड़ा लाभ किसे मिला? हमारे वंचित समाज को, आदिवासी समाज को! लेकिन इतने दशकों तक सरकारों ने क्या किया? उन्होंने गरीबों को जीवन की जरूरतों से वंचित रखा।

भाइयों बहनों,

कांग्रेस ने आदिवासी युवाओं को शिक्षा और रोजगार के अवसरों से भी वंचित रखा। आदिवासी इलाकों में अच्छे स्कूल तक नहीं खोले गए! अब हमारी सरकार आदिवासी आबादी वाले ब्लॉकों में एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय बना रही है। देशभर में ऐसे 700 से ज्यादा स्कूल बनाए जा रहे हैं। आज 30 लाख से ज्यादा आदिवासी छात्र-छात्राओं को स्कॉलरशिप मिल रही है। आदिवासी समाज के बच्चे भी डॉक्टर, इंजीनियर बन रहे हैं। कितने ही युवाओं को विदेश में पढ़ाई करने के लिए भी स्कॉलरशिप दी जा रही है। क्या ये काम हमारे से पहले कांग्रेस सरकारों में नहीं हो सकता था? कभी नहीं, क्योंकि उनकी नियत में खोट थी।

भाइयों बहनों,

कांग्रेस का चरित्र ही दलित, वंचित, आदिवासी विरोधी है। इन्होंने ऐसी नीतियां बनाईं थीं, ऐसे सरकार चलाई थी कि SC, ST, OBC के लोग आगे न बढ़ पाएं। इसीलिए, कांग्रेस हमेशा SC, ST, OBC के आरक्षण का विरोध करती रही है। आज भी कांग्रेस आरक्षण को खत्म करने की बात कर रही है। SC, ST, OBC का आरक्षण छीनकर कांग्रेस, अपने खास वोटबैंक को देना चाहती है। अभी जनजातीय समूह की मुखियाओं से मिला, उनकी शिकायत थी कि उनके हक के जो आरक्षण मिले हुए हैं, वो औरों को बांट दिए जा रहे हैं। लेकिन मैं आज डंके की चोट पर कह रहा हूं, जब तक बीजेपी है, SC, ST, OBC का आरक्षण कोई छीन नहीं सकता। आरक्षण केवल बीजेपी के कारण ही सुरक्षित है।

साथियों,

जो कांग्रेस पार्टी देश के सबसे भ्रष्ट परिवार की सेवा में लगी हो, जो JMM वाले उसके पीछे चल रहे हों, गांव-गरीब के विकास के लिए उनसे छुटकारा पाना बहुत जरूरी है। तभी विकास संभव होने वाला है। इसके लिए, बीजेपी और NDA ही एकमात्र विकल्प है। हमें साथ मिलकर कांग्रेस और JMM के कुशासन से झारखंड को मुक्ति दिलानी है। हमें साथ मिलकर झारखंड की उस विकासयात्रा को पूरा करना है, जिसकी शुरुआत भाजपा सरकार ने की थी। मुझे विश्वास है, आने वाले चुनाव इस दिशा में निर्णायक साबित होंगे। आज जो परिवर्तन यात्रा यहां पूरी हुई है, ये झारखंड के लिए नई सुबह की शुरुआत साबित होगी। मेरा आप सबसे अनुरोध है, आप सब आने वाले दिनों में घर-घर जाइए! बीजेपी के संदेश को, मेरी प्रार्थना को, झारखंड की जनता तक पहुंचाइए। और हमारा एक ही नारा है- रोटी, बेटी और माटी। इसके लिए हम झारखंड में परिवर्तन लाकर रहेंगे।

इसी आग्रह के साथ, आप सभी का बहुत धन्यवाद!

मेरे साथ दोनों हाथ ऊपर करके पूरी ताकत से बोलिए...

भारत माता की जय!

भारत माता की जय!

भारत माता की जय!

भारत माता की जय!

भारत माता की जय!

Explore More
Today, the entire country and entire world is filled with the spirit of Bhagwan Shri Ram: PM Modi at Dhwajarohan Utsav in Ayodhya

Popular Speeches

Today, the entire country and entire world is filled with the spirit of Bhagwan Shri Ram: PM Modi at Dhwajarohan Utsav in Ayodhya
'Will walk shoulder to shoulder': PM Modi pushes 'Make in India, Partner with India' at Russia-India forum

Media Coverage

'Will walk shoulder to shoulder': PM Modi pushes 'Make in India, Partner with India' at Russia-India forum
NM on the go

Nm on the go

Always be the first to hear from the PM. Get the App Now!
...
Today, India is becoming the key growth engine of the global economy: PM Modi
December 06, 2025
India is brimming with confidence: PM
In a world of slowdown, mistrust and fragmentation, India brings growth, trust and acts as a bridge-builder: PM
Today, India is becoming the key growth engine of the global economy: PM
India's Nari Shakti is doing wonders, Our daughters are excelling in every field today: PM
Our pace is constant, Our direction is consistent, Our intent is always Nation First: PM
Every sector today is shedding the old colonial mindset and aiming for new achievements with pride: PM

आप सभी को नमस्कार।

यहां हिंदुस्तान टाइम्स समिट में देश-विदेश से अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित हैं। मैं आयोजकों और जितने साथियों ने अपने विचार रखें, आप सभी का अभिनंदन करता हूं। अभी शोभना जी ने दो बातें बताई, जिसको मैंने नोटिस किया, एक तो उन्होंने कहा कि मोदी जी पिछली बार आए थे, तो ये सुझाव दिया था। इस देश में मीडिया हाउस को काम बताने की हिम्मत कोई नहीं कर सकता। लेकिन मैंने की थी, और मेरे लिए खुशी की बात है कि शोभना जी और उनकी टीम ने बड़े चाव से इस काम को किया। और देश को, जब मैं अभी प्रदर्शनी देखके आया, मैं सबसे आग्रह करूंगा कि इसको जरूर देखिए। इन फोटोग्राफर साथियों ने इस, पल को ऐसे पकड़ा है कि पल को अमर बना दिया है। दूसरी बात उन्होंने कही और वो भी जरा मैं शब्दों को जैसे मैं समझ रहा हूं, उन्होंने कहा कि आप आगे भी, एक तो ये कह सकती थी, कि आप आगे भी देश की सेवा करते रहिए, लेकिन हिंदुस्तान टाइम्स ये कहे, आप आगे भी ऐसे ही सेवा करते रहिए, मैं इसके लिए भी विशेष रूप से आभार व्यक्त करता हूं।

साथियों,

इस बार समिट की थीम है- Transforming Tomorrow. मैं समझता हूं जिस हिंदुस्तान अखबार का 101 साल का इतिहास है, जिस अखबार पर महात्मा गांधी जी, मदन मोहन मालवीय जी, घनश्यामदास बिड़ला जी, ऐसे अनगिनत महापुरूषों का आशीर्वाद रहा, वो अखबार जब Transforming Tomorrow की चर्चा करता है, तो देश को ये भरोसा मिलता है कि भारत में हो रहा परिवर्तन केवल संभावनाओं की बात नहीं है, बल्कि ये बदलते हुए जीवन, बदलती हुई सोच और बदलती हुई दिशा की सच्ची गाथा है।

साथियों,

आज हमारे संविधान के मुख्य शिल्पी, डॉक्टर बाबा साहेब आंबेडकर जी का महापरिनिर्वाण दिवस भी है। मैं सभी भारतीयों की तरफ से उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं।

Friends,

आज हम उस मुकाम पर खड़े हैं, जब 21वीं सदी का एक चौथाई हिस्सा बीत चुका है। इन 25 सालों में दुनिया ने कई उतार-चढ़ाव देखे हैं। फाइनेंशियल क्राइसिस देखी हैं, ग्लोबल पेंडेमिक देखी हैं, टेक्नोलॉजी से जुड़े डिसरप्शन्स देखे हैं, हमने बिखरती हुई दुनिया भी देखी है, Wars भी देख रहे हैं। ये सारी स्थितियां किसी न किसी रूप में दुनिया को चैलेंज कर रही हैं। आज दुनिया अनिश्चितताओं से भरी हुई है। लेकिन अनिश्चितताओं से भरे इस दौर में हमारा भारत एक अलग ही लीग में दिख रहा है, भारत आत्मविश्वास से भरा हुआ है। जब दुनिया में slowdown की बात होती है, तब भारत growth की कहानी लिखता है। जब दुनिया में trust का crisis दिखता है, तब भारत trust का pillar बन रहा है। जब दुनिया fragmentation की तरफ जा रही है, तब भारत bridge-builder बन रहा है।

साथियों,

अभी कुछ दिन पहले भारत में Quarter-2 के जीडीपी फिगर्स आए हैं। Eight परसेंट से ज्यादा की ग्रोथ रेट हमारी प्रगति की नई गति का प्रतिबिंब है।

साथियों,

ये एक सिर्फ नंबर नहीं है, ये strong macro-economic signal है। ये संदेश है कि भारत आज ग्लोबल इकोनॉमी का ग्रोथ ड्राइवर बन रहा है। और हमारे ये आंकड़े तब हैं, जब ग्लोबल ग्रोथ 3 प्रतिशत के आसपास है। G-7 की इकोनमीज औसतन डेढ़ परसेंट के आसपास हैं, 1.5 परसेंट। इन परिस्थितियों में भारत high growth और low inflation का मॉडल बना हुआ है। एक समय था, जब हमारे देश में खास करके इकोनॉमिस्ट high Inflation को लेकर चिंता जताते थे। आज वही Inflation Low होने की बात करते हैं।

साथियों,

भारत की ये उपलब्धियां सामान्य बात नहीं है। ये सिर्फ आंकड़ों की बात नहीं है, ये एक फंडामेंटल चेंज है, जो बीते दशक में भारत लेकर आया है। ये फंडामेंटल चेंज रज़ीलियन्स का है, ये चेंज समस्याओं के समाधान की प्रवृत्ति का है, ये चेंज आशंकाओं के बादलों को हटाकर, आकांक्षाओं के विस्तार का है, और इसी वजह से आज का भारत खुद भी ट्रांसफॉर्म हो रहा है, और आने वाले कल को भी ट्रांसफॉर्म कर रहा है।

साथियों,

आज जब हम यहां transforming tomorrow की चर्चा कर रहे हैं, हमें ये भी समझना होगा कि ट्रांसफॉर्मेशन का जो विश्वास पैदा हुआ है, उसका आधार वर्तमान में हो रहे कार्यों की, आज हो रहे कार्यों की एक मजबूत नींव है। आज के Reform और आज की Performance, हमारे कल के Transformation का रास्ता बना रहे हैं। मैं आपको एक उदाहरण दूंगा कि हम किस सोच के साथ काम कर रहे हैं।

साथियों,

आप भी जानते हैं कि भारत के सामर्थ्य का एक बड़ा हिस्सा एक लंबे समय तक untapped रहा है। जब देश के इस untapped potential को ज्यादा से ज्यादा अवसर मिलेंगे, जब वो पूरी ऊर्जा के साथ, बिना किसी रुकावट के देश के विकास में भागीदार बनेंगे, तो देश का कायाकल्प होना तय है। आप सोचिए, हमारा पूर्वी भारत, हमारा नॉर्थ ईस्ट, हमारे गांव, हमारे टीयर टू और टीय़र थ्री सिटीज, हमारे देश की नारीशक्ति, भारत की इनोवेटिव यूथ पावर, भारत की सामुद्रिक शक्ति, ब्लू इकोनॉमी, भारत का स्पेस सेक्टर, कितना कुछ है, जिसके फुल पोटेंशियल का इस्तेमाल पहले के दशकों में हो ही नहीं पाया। अब आज भारत इन Untapped पोटेंशियल को Tap करने के विजन के साथ आगे बढ़ रहा है। आज पूर्वी भारत में आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर, कनेक्टिविटी और इंडस्ट्री पर अभूतपूर्व निवेश हो रहा है। आज हमारे गांव, हमारे छोटे शहर भी आधुनिक सुविधाओं से लैस हो रहे हैं। हमारे छोटे शहर, Startups और MSMEs के नए केंद्र बन रहे हैं। हमारे गाँवों में किसान FPO बनाकर सीधे market से जुड़ें, और कुछ तो FPO’s ग्लोबल मार्केट से जुड़ रहे हैं।

साथियों,

भारत की नारीशक्ति तो आज कमाल कर रही हैं। हमारी बेटियां आज हर फील्ड में छा रही हैं। ये ट्रांसफॉर्मेशन अब सिर्फ महिला सशक्तिकरण तक सीमित नहीं है, ये समाज की सोच और सामर्थ्य, दोनों को transform कर रहा है।

साथियों,

जब नए अवसर बनते हैं, जब रुकावटें हटती हैं, तो आसमान में उड़ने के लिए नए पंख भी लग जाते हैं। इसका एक उदाहरण भारत का स्पेस सेक्टर भी है। पहले स्पेस सेक्टर सरकारी नियंत्रण में ही था। लेकिन हमने स्पेस सेक्टर में रिफॉर्म किया, उसे प्राइवेट सेक्टर के लिए Open किया, और इसके नतीजे आज देश देख रहा है। अभी 10-11 दिन पहले मैंने हैदराबाद में Skyroot के Infinity Campus का उद्घाटन किया है। Skyroot भारत की प्राइवेट स्पेस कंपनी है। ये कंपनी हर महीने एक रॉकेट बनाने की क्षमता पर काम कर रही है। ये कंपनी, flight-ready विक्रम-वन बना रही है। सरकार ने प्लेटफॉर्म दिया, और भारत का नौजवान उस पर नया भविष्य बना रहा है, और यही तो असली ट्रांसफॉर्मेशन है।

साथियों,

भारत में आए एक और बदलाव की चर्चा मैं यहां करना ज़रूरी समझता हूं। एक समय था, जब भारत में रिफॉर्म्स, रिएक्शनरी होते थे। यानि बड़े निर्णयों के पीछे या तो कोई राजनीतिक स्वार्थ होता था या फिर किसी क्राइसिस को मैनेज करना होता था। लेकिन आज नेशनल गोल्स को देखते हुए रिफॉर्म्स होते हैं, टारगेट तय है। आप देखिए, देश के हर सेक्टर में कुछ ना कुछ बेहतर हो रहा है, हमारी गति Constant है, हमारी Direction Consistent है, और हमारा intent, Nation First का है। 2025 का तो ये पूरा साल ऐसे ही रिफॉर्म्स का साल रहा है। सबसे बड़ा रिफॉर्म नेक्स्ट जेनरेशन जीएसटी का था। और इन रिफॉर्म्स का असर क्या हुआ, वो सारे देश ने देखा है। इसी साल डायरेक्ट टैक्स सिस्टम में भी बहुत बड़ा रिफॉर्म हुआ है। 12 लाख रुपए तक की इनकम पर ज़ीरो टैक्स, ये एक ऐसा कदम रहा, जिसके बारे में एक दशक पहले तक सोचना भी असंभव था।

साथियों,

Reform के इसी सिलसिले को आगे बढ़ाते हुए, अभी तीन-चार दिन पहले ही Small Company की डेफिनीशन में बदलाव किया गया है। इससे हजारों कंपनियाँ अब आसान नियमों, तेज़ प्रक्रियाओं और बेहतर सुविधाओं के दायरे में आ गई हैं। हमने करीब 200 प्रोडक्ट कैटगरीज़ को mandatory क्वालिटी कंट्रोल ऑर्डर से बाहर भी कर दिया गया है।

साथियों,

आज के भारत की ये यात्रा, सिर्फ विकास की नहीं है। ये सोच में बदलाव की भी यात्रा है, ये मनोवैज्ञानिक पुनर्जागरण, साइकोलॉजिकल रेनसां की भी यात्रा है। आप भी जानते हैं, कोई भी देश बिना आत्मविश्वास के आगे नहीं बढ़ सकता। दुर्भाग्य से लंबी गुलामी ने भारत के इसी आत्मविश्वास को हिला दिया था। और इसकी वजह थी, गुलामी की मानसिकता। गुलामी की ये मानसिकता, विकसित भारत के लक्ष्य की प्राप्ति में एक बहुत बड़ी रुकावट है। और इसलिए, आज का भारत गुलामी की मानसिकता से मुक्ति पाने के लिए काम कर रहा है।

साथियों,

अंग्रेज़ों को अच्छी तरह से पता था कि भारत पर लंबे समय तक राज करना है, तो उन्हें भारतीयों से उनके आत्मविश्वास को छीनना होगा, भारतीयों में हीन भावना का संचार करना होगा। और उस दौर में अंग्रेजों ने यही किया भी। इसलिए, भारतीय पारिवारिक संरचना को दकियानूसी बताया गया, भारतीय पोशाक को Unprofessional करार दिया गया, भारतीय त्योहार-संस्कृति को Irrational कहा गया, योग-आयुर्वेद को Unscientific बता दिया गया, भारतीय अविष्कारों का उपहास उड़ाया गया और ये बातें कई-कई दशकों तक लगातार दोहराई गई, पीढ़ी दर पीढ़ी ये चलता गया, वही पढ़ा, वही पढ़ाया गया। और ऐसे ही भारतीयों का आत्मविश्वास चकनाचूर हो गया।

साथियों,

गुलामी की इस मानसिकता का कितना व्यापक असर हुआ है, मैं इसके कुछ उदाहरण आपको देना चाहता हूं। आज भारत, दुनिया की सबसे तेज़ी से ग्रो करने वाली मेजर इकॉनॉमी है, कोई भारत को ग्लोबल ग्रोथ इंजन बताता है, कोई, Global powerhouse कहता है, एक से बढ़कर एक बातें आज हो रही हैं।

लेकिन साथियों,

आज भारत की जो तेज़ ग्रोथ हो रही है, क्या कहीं पर आपने पढ़ा? क्या कहीं पर आपने सुना? इसको कोई, हिंदू रेट ऑफ ग्रोथ कहता है क्या? दुनिया की तेज इकॉनमी, तेज ग्रोथ, कोई कहता है क्या? हिंदू रेट ऑफ ग्रोथ कब कहा गया? जब भारत, दो-तीन परसेंट की ग्रोथ के लिए तरस गया था। आपको क्या लगता है, किसी देश की इकोनॉमिक ग्रोथ को उसमें रहने वाले लोगों की आस्था से जोड़ना, उनकी पहचान से जोड़ना, क्या ये अनायास ही हुआ होगा क्या? जी नहीं, ये गुलामी की मानसिकता का प्रतिबिंब था। एक पूरे समाज, एक पूरी परंपरा को, अन-प्रोडक्टिविटी का, गरीबी का पर्याय बना दिया गया। यानी ये सिद्ध करने का प्रयास किया गया कि, भारत की धीमी विकास दर का कारण, हमारी हिंदू सभ्यता और हिंदू संस्कृति है। और हद देखिए, आज जो तथाकथित बुद्धिजीवी हर चीज में, हर बात में सांप्रदायिकता खोजते रहते हैं, उनको हिंदू रेट ऑफ ग्रोथ में सांप्रदायिकता नज़र नहीं आई। ये टर्म, उनके दौर में किताबों का, रिसर्च पेपर्स का हिस्सा बना दिया गया।

साथियों,

गुलामी की मानसिकता ने भारत में मैन्युफेक्चरिंग इकोसिस्टम को कैसे तबाह कर दिया, और हम इसको कैसे रिवाइव कर रहे हैं, मैं इसके भी कुछ उदाहरण दूंगा। भारत गुलामी के कालखंड में भी अस्त्र-शस्त्र का एक बड़ा निर्माता था। हमारे यहां ऑर्डिनेंस फैक्ट्रीज़ का एक सशक्त नेटवर्क था। भारत से हथियार निर्यात होते थे। विश्व युद्धों में भी भारत में बने हथियारों का बोल-बाला था। लेकिन आज़ादी के बाद, हमारा डिफेंस मैन्युफेक्चरिंग इकोसिस्टम तबाह कर दिया गया। गुलामी की मानसिकता ऐसी हावी हुई कि सरकार में बैठे लोग भारत में बने हथियारों को कमजोर आंकने लगे, और इस मानसिकता ने भारत को दुनिया के सबसे बड़े डिफेंस importers के रूप में से एक बना दिया।

साथियों,

गुलामी की मानसिकता ने शिप बिल्डिंग इंडस्ट्री के साथ भी यही किया। भारत सदियों तक शिप बिल्डिंग का एक बड़ा सेंटर था। यहां तक कि 5-6 दशक पहले तक, यानी 50-60 साल पहले, भारत का फोर्टी परसेंट ट्रेड, भारतीय जहाजों पर होता था। लेकिन गुलामी की मानसिकता ने विदेशी जहाज़ों को प्राथमिकता देनी शुरु की। नतीजा सबके सामने है, जो देश कभी समुद्री ताकत था, वो अपने Ninety five परसेंट व्यापार के लिए विदेशी जहाज़ों पर निर्भर हो गया है। और इस वजह से आज भारत हर साल करीब 75 बिलियन डॉलर, यानी लगभग 6 लाख करोड़ रुपए विदेशी शिपिंग कंपनियों को दे रहा है।

साथियों,

शिप बिल्डिंग हो, डिफेंस मैन्यूफैक्चरिंग हो, आज हर सेक्टर में गुलामी की मानसिकता को पीछे छोड़कर नए गौरव को हासिल करने का प्रयास किया जा रहा है।

साथियों,

गुलामी की मानसिकता ने एक बहुत बड़ा नुकसान, भारत में गवर्नेंस की अप्रोच को भी किया है। लंबे समय तक सरकारी सिस्टम का अपने नागरिकों पर अविश्वास रहा। आपको याद होगा, पहले अपने ही डॉक्यूमेंट्स को किसी सरकारी अधिकारी से अटेस्ट कराना पड़ता था। जब तक वो ठप्पा नहीं मारता है, सब झूठ माना जाता था। आपका परिश्रम किया हुआ सर्टिफिकेट। हमने ये अविश्वास का भाव तोड़ा और सेल्फ एटेस्टेशन को ही पर्याप्त माना। मेरे देश का नागरिक कहता है कि भई ये मैं कह रहा हूं, मैं उस पर भरोसा करता हूं।

साथियों,

हमारे देश में ऐसे-ऐसे प्रावधान चल रहे थे, जहां ज़रा-जरा सी गलतियों को भी गंभीर अपराध माना जाता था। हम जन-विश्वास कानून लेकर आए, और ऐसे सैकड़ों प्रावधानों को डी-क्रिमिनलाइज किया है।

साथियों,

पहले बैंक से हजार रुपए का भी लोन लेना होता था, तो बैंक गारंटी मांगता था, क्योंकि अविश्वास बहुत अधिक था। हमने मुद्रा योजना से अविश्वास के इस कुचक्र को तोड़ा। इसके तहत अभी तक 37 lakh crore, 37 लाख करोड़ रुपए की गारंटी फ्री लोन हम दे चुके हैं देशवासियों को। इस पैसे से, उन परिवारों के नौजवानों को भी आंत्रप्रन्योर बनने का विश्वास मिला है। आज रेहड़ी-पटरी वालों को भी, ठेले वाले को भी बिना गारंटी बैंक से पैसा दिया जा रहा है।

साथियों,

हमारे देश में हमेशा से ये माना गया कि सरकार को अगर कुछ दे दिया, तो फिर वहां तो वन वे ट्रैफिक है, एक बार दिया तो दिया, फिर वापस नहीं आता है, गया, गया, यही सबका अनुभव है। लेकिन जब सरकार और जनता के बीच विश्वास मजबूत होता है, तो काम कैसे होता है? अगर कल अच्छी करनी है ना, तो मन आज अच्छा करना पड़ता है। अगर मन अच्छा है तो कल भी अच्छा होता है। और इसलिए हम एक और अभियान लेकर आए, आपको सुनकर के ताज्जुब होगा और अभी अखबारों में उसकी, अखबारों वालों की नजर नहीं गई है उस पर, मुझे पता नहीं जाएगी की नहीं जाएगी, आज के बाद हो सकता है चली जाए।

आपको ये जानकर हैरानी होगी कि आज देश के बैंकों में, हमारे ही देश के नागरिकों का 78 thousand crore रुपया, 78 हजार करोड़ रुपए Unclaimed पड़ा है बैंको में, पता नहीं कौन है, किसका है, कहां है। इस पैसे को कोई पूछने वाला नहीं है। इसी तरह इन्श्योरेंश कंपनियों के पास करीब 14 हजार करोड़ रुपए पड़े हैं। म्यूचुअल फंड कंपनियों के पास करीब 3 हजार करोड़ रुपए पड़े हैं। 9 हजार करोड़ रुपए डिविडेंड का पड़ा है। और ये सब Unclaimed पड़ा हुआ है, कोई मालिक नहीं उसका। ये पैसा, गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों का है, और इसलिए, जिसके हैं वो तो भूल चुका है। हमारी सरकार अब उनको ढूंढ रही है देशभर में, अरे भई बताओ, तुम्हारा तो पैसा नहीं था, तुम्हारे मां बाप का तो नहीं था, कोई छोड़कर तो नहीं चला गया, हम जा रहे हैं। हमारी सरकार उसके हकदार तक पहुंचने में जुटी है। और इसके लिए सरकार ने स्पेशल कैंप लगाना शुरू किया है, लोगों को समझा रहे हैं, कि भई देखिए कोई है तो अता पता। आपके पैसे कहीं हैं क्या, गए हैं क्या? अब तक करीब 500 districts में हम ऐसे कैंप लगाकर हजारों करोड़ रुपए असली हकदारों को दे चुके हैं जी। पैसे पड़े थे, कोई पूछने वाला नहीं था, लेकिन ये मोदी है, ढूंढ रहा है, अरे यार तेरा है ले जा।

साथियों,

ये सिर्फ asset की वापसी का मामला नहीं है, ये विश्वास का मामला है। ये जनता के विश्वास को निरंतर हासिल करने की प्रतिबद्धता है और जनता का विश्वास, यही हमारी सबसे बड़ी पूंजी है। अगर गुलामी की मानसिकता होती तो सरकारी मानसी साहबी होता और ऐसे अभियान कभी नहीं चलते हैं।

साथियों,

हमें अपने देश को पूरी तरह से, हर क्षेत्र में गुलामी की मानसिकता से पूर्ण रूप से मुक्त करना है। अभी कुछ दिन पहले मैंने देश से एक अपील की है। मैं आने वाले 10 साल का एक टाइम-फ्रेम लेकर, देशवासियों को मेरे साथ, मेरी बातों को ये कुछ करने के लिए प्यार से आग्रह कर रहा हूं, हाथ जोड़कर विनती कर रहा हूं। 140 करोड़ देशवसियों की मदद के बिना ये मैं कर नहीं पाऊंगा, और इसलिए मैं देशवासियों से बार-बार हाथ जोड़कर कह रहा हूं, और 10 साल के इस टाइम फ्रैम में मैं क्या मांग रहा हूं? मैकाले की जिस नीति ने भारत में मानसिक गुलामी के बीज बोए थे, उसको 2035 में 200 साल पूरे हो रहे हैं, Two hundred year हो रहे हैं। यानी 10 साल बाकी हैं। और इसलिए, इन्हीं दस वर्षों में हम सभी को मिलकर के, अपने देश को गुलामी की मानसिकता से मुक्त करके रहना चाहिए।

साथियों,

मैं अक्सर कहता हूं, हम लीक पकड़कर चलने वाले लोग नहीं हैं। बेहतर कल के लिए, हमें अपनी लकीर बड़ी करनी ही होगी। हमें देश की भविष्य की आवश्यकताओं को समझते हुए, वर्तमान में उसके हल तलाशने होंगे। आजकल आप देखते हैं कि मैं मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत अभियान पर लगातार चर्चा करता हूं। शोभना जी ने भी अपने भाषण में उसका उल्लेख किया। अगर ऐसे अभियान 4-5 दशक पहले शुरू हो गए होते, तो आज भारत की तस्वीर कुछ और होती। लेकिन तब जो सरकारें थीं उनकी प्राथमिकताएं कुछ और थीं। आपको वो सेमीकंडक्टर वाला किस्सा भी पता ही है, करीब 50-60 साल पहले, 5-6 दशक पहले एक कंपनी, भारत में सेमीकंडक्टर प्लांट लगाने के लिए आई थी, लेकिन यहां उसको तवज्जो नहीं दी गई, और देश सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग में इतना पिछड़ गया।

साथियों,

यही हाल एनर्जी सेक्टर की भी है। आज भारत हर साल करीब-करीब 125 लाख करोड़ रुपए के पेट्रोल-डीजल-गैस का इंपोर्ट करता है, 125 लाख करोड़ रुपया। हमारे देश में सूर्य भगवान की इतनी बड़ी कृपा है, लेकिन फिर भी 2014 तक भारत में सोलर एनर्जी जनरेशन कपैसिटी सिर्फ 3 गीगावॉट थी, 3 गीगावॉट थी। 2014 तक की मैं बात कर रहा हूं, जब तक की आपने मुझे यहां लाकर के बिठाया नहीं। 3 गीगावॉट, पिछले 10 वर्षों में अब ये बढ़कर 130 गीगावॉट के आसपास पहुंच चुकी है। और इसमें भी भारत ने twenty two गीगावॉट कैपेसिटी, सिर्फ और सिर्फ rooftop solar से ही जोड़ी है। 22 गीगावाट एनर्जी रूफटॉप सोलर से।

साथियों,

पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना ने, एनर्जी सिक्योरिटी के इस अभियान में देश के लोगों को सीधी भागीदारी करने का मौका दे दिया है। मैं काशी का सांसद हूं, प्रधानमंत्री के नाते जो काम है, लेकिन सांसद के नाते भी कुछ काम करने होते हैं। मैं जरा काशी के सांसद के नाते आपको कुछ बताना चाहता हूं। और आपके हिंदी अखबार की तो ताकत है, तो उसको तो जरूर काम आएगा। काशी में 26 हजार से ज्यादा घरों में पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के सोलर प्लांट लगे हैं। इससे हर रोज, डेली तीन लाख यूनिट से अधिक बिजली पैदा हो रही है, और लोगों के करीब पांच करोड़ रुपए हर महीने बच रहे हैं। यानी साल भर के साठ करोड़ रुपये।

साथियों,

इतनी सोलर पावर बनने से, हर साल करीब नब्बे हज़ार, ninety thousand मीट्रिक टन कार्बन एमिशन कम हो रहा है। इतने कार्बन एमिशन को खपाने के लिए, हमें चालीस लाख से ज्यादा पेड़ लगाने पड़ते। और मैं फिर कहूंगा, ये जो मैंने आंकडे दिए हैं ना, ये सिर्फ काशी के हैं, बनारस के हैं, मैं देश की बात नहीं बता रहा हूं आपको। आप कल्पना कर सकते हैं कि, पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना, ये देश को कितना बड़ा फायदा हो रहा है। आज की एक योजना, भविष्य को Transform करने की कितनी ताकत रखती है, ये उसका Example है।

वैसे साथियों,

अभी आपने मोबाइल मैन्यूफैक्चरिंग के भी आंकड़े देखे होंगे। 2014 से पहले तक हम अपनी ज़रूरत के 75 परसेंट मोबाइल फोन इंपोर्ट करते थे, 75 परसेंट। और अब, भारत का मोबाइल फोन इंपोर्ट लगभग ज़ीरो हो गया है। अब हम बहुत बड़े मोबाइल फोन एक्सपोर्टर बन रहे हैं। 2014 के बाद हमने एक reform किया, देश ने Perform किया और उसके Transformative नतीजे आज दुनिया देख रही है।

साथियों,

Transforming tomorrow की ये यात्रा, ऐसी ही अनेक योजनाओं, अनेक नीतियों, अनेक निर्णयों, जनआकांक्षाओं और जनभागीदारी की यात्रा है। ये निरंतरता की यात्रा है। ये सिर्फ एक समिट की चर्चा तक सीमित नहीं है, भारत के लिए तो ये राष्ट्रीय संकल्प है। इस संकल्प में सबका साथ जरूरी है, सबका प्रयास जरूरी है। सामूहिक प्रयास हमें परिवर्तन की इस ऊंचाई को छूने के लिए अवसर देंगे ही देंगे।

साथियों,

एक बार फिर, मैं शोभना जी का, हिन्दुस्तान टाइम्स का बहुत आभारी हूं, कि आपने मुझे अवसर दिया आपके बीच आने का और जो बातें कभी-कभी बताई उसको आपने किया और मैं तो मानता हूं शायद देश के फोटोग्राफरों के लिए एक नई ताकत बनेगा ये। इसी प्रकार से अनेक नए कार्यक्रम भी आप आगे के लिए सोच सकते हैं। मेरी मदद लगे तो जरूर मुझे बताना, आईडिया देने का मैं कोई रॉयल्टी नहीं लेता हूं। मुफ्त का कारोबार है और मारवाड़ी परिवार है, तो मौका छोड़ेगा ही नहीं। बहुत-बहुत धन्यवाद आप सबका, नमस्कार।