A landmark day for India's semiconductor journey; the CG SEMI OSAT facility in Sanand will strengthen the chip manufacturing ecosystem, boost technological self-reliance and enhance India's position in the global semiconductor value chain: PM
The Semicon India programme is gathering rapid momentum; Step by step, Brick by brick, Chip by chip: PM
The expansion of the semiconductor industry in India did not happen overnight; it is the next step in the electronics revolution that has taken place in India over the past decade: PM
First products, then components and now semiconductors; India is building the entire electronics value chain, This is the roadmap to Viksit Bharat, This is the next phase of Make in India: PM
Our goal is to build a complete semiconductor ecosystem in India, from chip design to fabrication and packaging: PM
India's youth will power the AI, robotics and next-gen tech revolution with Made in India chips: PM

कैसे हो सब मजे में। गुजरात के लोकप्रिय मुख्यमंत्री भूपेंद्र भाई पटेल, केंद्रीय मंत्रिमंडल में मेरे सहयोगी अश्विनी वैष्णव, ऊर्जावान उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी, गुजरात सरकार के मंत्रीगण, सांसद और विधायकगण, CG पावर के चेयरमैन वेल्लायन सुबैया जी, रेनेसास इलेक्ट्रॉनिक्स की प्रेसिडेंट मालिनी जी, सीजी सेमी के चेयरमैन गिरीश जी, यहां मौजूद अन्य सभी इंडस्ट्री लीडर्स, देवियों और सज्जनों!

आज का ये कार्यक्रम इस बात का प्रमाण है कि भारत जो ठान लेता है, वो करके दिखाता है। 5 साल पहले भारत ने संकल्प लिया था कि देश को सेमीकंडक्टर हब बनाएंगे। हम Design in India, Make in India के मंत्र को लेकर आगे बढ़ें। और आज देश के तीसरे सेमीकंडक्टर प्लांट में भी चीफ पैकेजिंग का कमर्शियल प्रोडक्शन शुरू हो रहा है।

साथियों,

2024 में इस प्लांट का शिलान्यास करने का अवसर मुझे मिला था। 2025 के अगस्त महीने में यहां टेस्टिंग चिप्स का काम शुरू हुआ, और आज, इस प्लांट का उद्घाटन हो गया है। शिलान्यास से प्रोडक्शन तक का ये सफर, निश्चित रूप से अनेक साथियों के परिश्रम का परिणाम है। सुबैया जी जैसे लोगों के नेतृत्व का परिणाम है। अभी मंच पर आने से पहले, मुझे इस प्रोजेक्ट से जुड़े अनेक साथियों से बातचीत करने का भी मौका मिला। एक प्रकार से लगता है कि इस परिसर में एक मिनी इंडिया बसता है। हर भाषा के, हर पहनावे के, हर खान-पान के लोग यहां हैं। यानी एक अलग सा माहौल मैंने अनुभव किया। Exhibition Visit के दौरान भी, मैंने कई बेटे–बेटियों से बातचीत की। और एक बात जिसको मैं बड़े गर्व से उल्लेख करना चाहूंगा, इन बच्चों का कॉन्फिडेंस लेवल। जिस आत्मविश्वास से वो बातें रहे थे, टेक्नॉलोजी के संदर्भ में जो उनका विश्वास था कहने का, कम से कम मैं तो इंप्रेस हो गया।

साथियों,

सीजी सेमी का ये प्लांट, भारत, जापान और थाईलैंड के हमारे इंडस्ट्री पार्टनर्स के साझा प्रयासों का भी प्रतीक है। ये केवल एक बिजनेस वेंचर नहीं है, ये टेक्नोलॉजी, भरोसे और साझेदारी का ऐसा मॉडल है, जो भारत की सेमीकंडक्टर जर्नी को नई गति देने वाला है। बीते सवा दो सालों में, आप सभी ने स्क्रैच से स्केल तक, इस पूरी फैसिलिटी को आकार दिया है। आज हम इसके कॉमर्शियल प्रोडक्शन की शुरुआत कर रहे हैं। मुझे बताया गया है कि अभी यहां से हर साल 20 करोड़ चिप्स निकलेंगी। 20 करोड़, आपको लगता होगा कि मोदी जी ने गलती कर दी, 20 लाख को 20 करोड़ बोल दिया, इसलिए ताली बजाने में देर हो गई, 20 करोड़। और मुझे बताया गया आप सभी यहीं नहीं रुकने वाले हैं। आपने हर साल 500 करोड़ चिप्स का लक्ष्य रखा है। यानी हर दिन डेढ़ करोड़ से ज्यादा। मेरा पक्का विश्वास है कि आप उसे बहुत जल्द हासिल करके रहेंगे। ये भरोसा इस बात का भी है कि सेमीकॉन इंडिया प्रोग्राम तेज गति पकड़ रहा है, Step by step, brick by brick और अब chip by chip. मैं, सीजी सेमी की पूरी टीम को, राज्य सरकार और पूरे देश को बहुत-बहुत बधाई देता हूं।

साथियों,

मुझे जरा इस बात का थोड़ा आनंद ज्यादा है, आपको लगता होगा कि ऐसा क्या हो गया कि मोदी जी को जरा आनंद ज्यादा है, इसका कारण ये है कि 20 साल पहले, शायद उससे भी पहले मैंने गुजरात में सेमी कंडक्टर प्लांट लगाने के लिए सारी योजना बनाई, गांधीनगर और प्रांतिज के पास साढ़े तीन सौ, चार सौ एकड़ जमीन तय कर ली, कुछ कंपनियों से बातचीत भी की, भारत सरकार भी उस समय बड़े बड़े बयान दे रही थी, तो कुछ कंपनियां बातचीत करने के लिए आती भी थीं, लेकिन पता नहीं भारत सरकार को उस समय क्या हो गया, कि उनके पैरों में बेडि़यां लग गई, और बात आगे नहीं चली। आज जब मैं इसे देखता हूं तो मेरा 20-22 साल पुराना जो सपना, और उस समय देश में इन विषयों की चर्चा कोई करता नहीं था, और मैं जब करता था तो मीडिया वाले मेरी मजाक उड़ाते थे। उस समय नहीं हो पाया, लेकिन आज जब हो रहा है तो सर्वाधिक खुशी मैं अपने भीतर से अनुभव कर रहा हूं। आप देखिए, अभी कुछ हफ्ते पहले खबर आई। मुझे हैरानी है कि मीडिया ने जितना उस पर ध्यान जाना चाहिए उतना गया नहीं। भारत में बना हुआ C295 विमान बड़ौदा में बना और हवा में उड़ान भी भरी। एक जमाना था साईकिल बनाने वाला भी कोई आ जाए ना तो हम मिठाई बाँटते थे दोस्तों, आज हवाई जहाज बनाने वाले आ रहे हैं।

साथियों,

आप सभी जानकार लोग यहां बैठे हैं, मैं देख रहा हूं, बहुत सारे युवा साथी भी यहां मौजूद हैं, हम अगर दुनिया के औद्योगिक इतिहास को देखेंगे, तो एक बात स्पष्ट होती है। दुनिया की कोई भी ग्लोबल इंडस्ट्रियल पावर, किसी एक अकेली फैक्ट्री से नहीं बनी। इंडस्ट्रियल पावर की नींव क्लस्टर्स होते हैं। अमेरिका की सिलिकॉन वैली, ताइवान का शिन-चु साइंस पार्क, जापान का सिलिकॉन आइलैंड, सुकुबा साइंस सिटी, ये सब क्लस्टर के महत्व को दर्शाते हैं। आज साणंद भी उसी दिशा में अपने कदम बढ़ा रहा है।

साथियों,

कुछ ही महीनों में यहां माइक्रोन, केयान्स और सीजी सेमी ने प्रोडक्शन शुरु कर दिया। यानी देश में एक Semiconductor Cluster जन्म ले रहा है। और आज यहां चिप्स की पैकेजिंग हो रही है। कल यहां विशेष कंपनियां आएंगी, केमिकल्स का उत्पादन होगा, नई टेस्टिंग लैब्स बनेंगी, मशीनों की सर्विस करने वाले उद्योग आएंगे, डिजाइन सेंटर्स खुलेंगे, और फिर यहां से नए स्टार्टअप्स भी निकलेंगे। यही क्लस्टर की ताकत होती है। एक उद्योग, सैकड़ों उद्योगों को जन्म देता है। सैकड़ों उद्योग, लाखों रोजगार पैदा करते हैं। और ये लाखों रोजगार, पूरे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था बदल देते हैं। और ये सिर्फ साणंद में ही नहीं हो रहा, देश के अनेक राज्यों में भी सेमीकंडक्टर के क्लस्टर बन रहे हैं।

साथियों,

आज भारत में सेमीकंडक्टर सेक्टर के इस उभार से सभी उत्साहित है। देश-दुनिया में इसकी चर्चा हो रही है। अक्सर लोग इसको आइसोलेशन में देखते हैं। लेकिन ऐसा नहीं है। भारत में सेमीकंडक्टर उद्योग का विस्तार अचानक नहीं हुआ है। ये पिछले एक दशक में, भारत में आई इलेक्ट्रॉनिक्स क्रांति का next step है।

साथियों,

हमने शुरुआत मोबाइल फोन मैन्युफेक्चरिंग से की। एक समय था जब भारत अपनी ज़रूरत से भी अधिकांश स्मार्ट फोन, ज्यादातर स्मार्ट फोन, हम विदेश से ही मंगाता था। और आज भारत में मोबाइल फोन प्रोडक्शन पहले के मुकाबले 33 गुना ज्यादा हुआ है। आज भारत यानी जो 2014 के पहले मोबाइल फोन बाहर से लाता था, आपने मुझे जब गुजरात से दिल्ली भेजा, तो भारत मोबाइल दुनिया में भेज रहा है। आज भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल मैन्युफेक्चरर है, और दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल exporter भी है।

साथियों,

बीते वर्षों में हमने पूरे इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम को मजबूत किया है। आज भारत का टोटल इलेक्ट्रॉनिक्स प्रोडक्शन 2014 के मुकाबले, लगभग सात गुना बढ़ चुका है। इलेक्ट्रॉनिक्स एक्सपोर्ट लगभग ग्यारह गुना बढ़ चुका है।

साथियों,

हमारा प्रयास, सिर्फ फाइनल प्रोडक्ट में आत्मनिर्भरता तक सीमित नहीं है। हमारा प्रयास, कंपोनेंट्स में भी आत्मनिर्भरता की तरफ है। और इसीलिए अब भारत का अगला कदम उठ रहा है। हम केवल मोबाइल नहीं बनाएंगे, हम केवल इलेक्ट्रॉनिक्स नहीं बनाएंगे, हम उन चिप्स का निर्माण भी करेंगे, जिनसे इलेक्ट्रॉनिक्स की पूरी दुनिया चलती है। और यही हमारी रणनीति है। पहले Product, फिर कंपोनेंट्स और अब Semiconductor, यानी इलेक्ट्रॉनिक्स की पूरी Value Chain भारत में होगी। यही विकसित भारत का रोडमैप है, यही Make in India का अगला चरण है।

साथियों,

सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम का Next step है, क्रिटिकल मिनरल्स और हाई-टेक मटीरियल्स में आत्मनिर्भरता, और अभी सुबैया जी बीच-बीच में गुजराती भी बोलते थे, उन्होंने गुजराती कहावत सुनाई, निशान चूक माफ, लेकिन नहीं माफ नीचा निशान, और इसलिए मेरा भी वही स्वभाव है, मैं लक्ष्य छोटे नहीं रखता, मैं सोच छोटी नहीं रखता, अगर स्टैच्यू भी बनाता हूं तो दुनिया में सबसे बड़ा बनाकर रख देता हूं। और जैसा सुबैया जी ने कहा, सुनते हो ना विनोद काम बोलता है। ये जो प्रोग्रेस दिख रही है, ये जो अचीवमेंट दिख रहे हैं, इससे जुड़ी सप्लाई चेन को मजबूत करना, ये भी हमारा लक्ष्य है। आज भारत इसी दिशा में व्यापक प्रयास कर रहा है। हमारा लक्ष्य है कि चिप डिजाइन से लेकर फैब्रिकेशन और पैकेजिंग तक का पूरा इकोसिस्टम भारत में ही विकसित हो। और भारत चिप तो बनाएगा ही, भारत का युवा मेड इन इंडिया चिप्स पर, AI, रोबोटिक्स और नेक्स्ट जेन टेक क्रांति को भी गति देगा। मुझे भारत की युवाशक्ति पर, भारत की युवा टैलेंट पर अटूट विश्वास है। मेरे देश की युवा शक्ति और उनके सामर्थ्य पर मेरा पूरा भरोसा है।

साथियों,

मैं इस अवसर पर देश की युवाशक्ति से एक बात जरूर कहना चाहता हूं। जब भी दुनिया में कोई नई औद्योगिक क्रांति आती है, तो सबसे अधिक अवसर युवाओं के लिए पैदा होते हैं। एक समय आईटी क्रांति आई, तो उसमें लाखों भारतीय युवाओं को अपना सामर्थ्य दिखाने का मौका मिला। फिर स्मार्ट फोन और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग का दौर आया। उससे भी लाखों युवाओं को नए अवसर मिले। ये जो Semiconductor रेवोल्यूशन और AI रेवोल्यूशन का दौर है, ये भी अनगिनत नए अवसर लेकर के आ रहा है। रिसर्च और डिजायन से लेकर, Startup Innovation और सप्लाई चेन मैनेजमेंट तक, अनेक अवसर हैं।

साथियों,

ज़रूरत नई स्किल्स की है, नए Ideas की है। अब मायने ये रखता है कि आपके पास नया Idea है या नहीं? आपके पास कुछ नया सीखने, नया करने का जज्बा है या नहीं? मैं आज इन बेटियों से मिला, झारखंड, बालागढ़, मध्यप्रदेश, कोई केरल से, कोई छत्तीसगढ़ से और जय जोहार से ही हमारी बात शुरू हुई। क्योंकि मैं उस क्षेत्र में रहा हूं तो मुझे पता है। उन बेटियों ने जिस तेजी से चीजों को सीखा है, और जिस तरीके से वो चीजों को वहां कंडक्ट कर रही थी, गर्व होता है मेरे देश की युवा शक्ति पर।

साथियों,

आने वाले समय में AI आपके सामने नई स्किल्स, नई एक्सपर्टाइज का पूरा संसार खोल देने वाली है। इसलिए, भारत के युवाओं को अब ये अवसर गंवाना नहीं है। और मैं नौजवानों आपको कहता हूं- आईडिया आपका, साथ मेरा।

साथियों,

ये फैसिलिटी, ये प्रोजेक्ट भी इस बात का प्रमाण है, कि भारत के युवा कैसे नई संभावनाओं से जुड़ रहे हैं। यहां काम करने वाली बहनें-बेटियां, जैसे मैंने कहा झारखंड, छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, सारा ट्राइबल बेल्ट से आई हुई बेटियां हैं। उन बेटियों ने जब मुझे फैक्ट्री दिखाई, और बड़े जोश और उत्साह के साथ, एक-एक चीज के बारे में विस्तार से मुझे बता रही थी। साधारण परिवार, साधारण स्कूल, ITI की पढ़ाई, हमारे यहां तो आईटीआई में कोई दाखिल होता है तो मां बाप किसी को बताते नहीं हैं, कि आईटीआई पढ़ता है, शर्म आती है। अब वक्त बदल चुका है, आईटीआई वालों का जमाना है। पढ़ाई भले आईटीआई में हुई हो, इनके सपने असाधारण हैं। इनमें से कई बेटियों के परिवार में कभी किसी ने पासपोर्ट तक नहीं बनवाया था, देखा तक नहीं था। इनमें से कई बेटियों ने तो दिल्ली-मुंबई तक नहीं देखा था, विदेश जाने की तो बात ही छोड़ दीजिए। लेकिन वही बेटियां ट्रेनिंग के लिए मलेशिया गईं, दुनिया की सबसे आधुनिक सेमीकंडक्टर तकनीक सीखी, और आज ये सभी मेड इन इंडिया चिप निर्माण प्रक्रिया का हिस्सा हैं। मुझे याद है, जब सुबैया जी ने मुझे एक बार दिल्ली में एक वीडियो दिखाया था, तीन मिनट का वीडियो था, इन बेटियों के जीवन पर था वो जंगलों में कैसे रहती थीं, खटिया पर बैठकर कैसे पढ़ती थीं और फिर एयरपोर्ट पर अपना चैकअप के लिए खड़ी हुई हैं और जा रही है वो क्लियरेंस करके मलेशिया के लिए। तो मैंने तुरंत उनको कहा था, कि मैं हो सके उतना जल्दी जब भी गुजरात आऊंगा, तो गर्वनर हाउस में इन बेटियों को बुलाकर इनसे बातचीत करूंगा, वो तो मैं नहीं कर पाया, लेकिन आज मुझे वो अवसर मिल गया, Thank You सुबैया जी। मैं इन सभी बेटियों को, उनके परिवार को बहुत-बहुत बधाई देता हूं।

साथियों,

आज का ये अवसर, इस बात का भी प्रमाण है कि भारत को विकसित बनाने के लिए हम कितने अधीर हैं। इस वर्ष की शुरुआत में, मैंने कहा था कि वर्ष 2026 में चार सेमीकंडक्टर फैसिलिटीज शुरु हो जाएंगी। और आज मेरे मंत्री ने कह दिया नहीं 4 नहीं 5 हो जाएंगी। और मुझे खुशी है कि 6 महीने में तीन प्रोजक्ट्स में प्रोडक्शन शुरु हो चुका है। यानी आज का भारत बड़े लक्ष्य भी रखता है और उन्हें समय पर पूरा भी करता है। भारत, यही भरोसा पूरी दुनिया को, हर इंवेस्टर को भी देता है। हमारी नीतियों में स्थिरता है, हमारे निर्णयों में स्पष्टता है, और हमारे एग्जीक्यूशन में गति है। मैं सीजी सेमी के मैनेजमेंट को, अन्य इन्वसेटर्स को भी आश्वस्त करता हूं, रिफॉर्म्स का जो रास्ता भारत ने चुना है, जिस रिफार्म एक्सप्रेस पर हम चल पड़े हैं, वो और गति पकड़ेगा। आज का भारत ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस के लिए पूरी तरह से कमिटेड है। इसी कमिटमेंट से ही 140 करोड़ भारतवासी, 2047 तक भारत को विकसित बनाकर रहेंगे। और आज 18-20 साल के नौजवान हैं ना, ये मोदी इसलिए मेहनत करता है कि जब आप 40-45 साल के हो, जब आपके घर मे बच्चे बड़े हो रहे हों, तब आप अपने बच्चों को विकसित भारत में बड़े करते देख सकें, इसलिए मैं मेरी जिंदगी खपा रहा हूं आपके बच्चों के भविष्य के लिए।

साथियों,

हम विकास की राह पर चल पड़े हैं, हम प्रगति की नई-नई ऊचाईयों को छू रहे हैं और इसमें सेमीकंडक्टर का ये क्षेत्र एक बहुत बड़ी शक्ति बनकर के नया विश्वास पैदा कर रहा है। मैं आप सबको अनेक-अनेक शुभकामनाएं देता हूं। आप भी ऊंचे लक्ष्य लेकर के चलें, निशान चूक होगा तो देखा जाएगा, लेकिन हम चल पड़ें, आप सबको मेरी बहुत-बहुत शुभकामनाएं, बहुत-बहुत धन्यवाद।

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