Share
 
Comments
For us, good governance, development and national building is conviction, to do the right things and break the status quo: PM Modi
India has become an important part of the global economy: PM Modi
People who keep talking of justice won't hesitate to denigrate the apex court if one verdict goes against their expectations: PM Modi

ग्लोबल बिजनेस समिट के इस मंच पर, दुनिया भर से आए एक्सपर्ट्स के बीच, The Economic Times ने मुझे अपनी बात रखने का अवसर दिया है।आज सुबह से,आप जब से यहाँ बैठें हैं , यहां अनेक विषयों पर चर्चा हुई है, बिजनेस वर्ल्ड की प्रोमिनेंट लोगो ने अपने Ideas दिए हैं। और विचारों के इस प्रवाह में जो कॉमन Thread है, वो है - Collaborate To Create.Sustainable Growth के लिए Collaborate To Create का ये विजन, आज की आवश्यकता भी है और भविष्य का आधार भी।और हम सब जानते हैं ये विजन अचानक बीते कुछ वर्षों के विचारों से निकलकर आया हो, ऐसा भी नहीं है।विघटन से क्या-क्या नुकसान होता है, इसका दुनिया को अनुभव है।जब साथ चले तो संभल गए। जब आमने-सामने हुए तो बिखर गए।

Collaborate To Create का विचार जितना पुराना है, उतना ही प्रासंगिक भी है।हर युग में नए-नए challenges सामने आते हैं - हमारी Collaborate To Create की spirit को test करने के लिए उसे और मज़बूत करने के लिए।

जैसे आज “करोंना वाइरस” के रूप में एक बहुत बड़ा चैलेंज दुनिया के सामने है।Financial Institutions ने इसे आर्थिक जगत के लिए भी बहुत बड़ा challenge माना है। आज हम सब को मिल कर इस चुनौती का सामना करना है। Collaborate To Create की संकल्प शक्ति से हमें विजयी होना है।

Friends,

Fractured World की फिलॉसफी पर भी आप यहाँ मंथन करनेवालेहैं। Real Fractures, Over-Imagined Fractures और इसके जिम्मेदार कारकों पर भी चर्चा होगी।

साथियों,एक दौर ऐसा था जब एक खास वर्ग के Predictions के अनुसार ही चीजें चला करती थीं।जो राय उसने दे दी, वही फाइनल समझा जाता था। लेकिन Technology के विकास से और Discourse के ‘डेमो-क्रेटाइ-जेशन’ से, अब आज समाज के हर वर्ग के लोगों की Opinion Matter करती है। आज सामान्य जनता अपनी Opinion को बहुत मजबूती के साथ, जमे-जमाए So Called Wisdom के विपरीत, बड़ी ताकत के साथ रजिस्टर करवा रही है।पहले इसी सामान्य जनता की आशाओं-अपेक्षाओं पर, इस खास वर्ग के तर्क और Theories हावी हो जाती थी।ये एक बहुत बड़ी वजह थी कि जब हम.. आप लोगो ने हमें सेवा करने का अवसर दिया… 2014 में पहली बार इस कार्य को संभाला तो देश की आबादी का बहुत बड़ा हिस्सा, टॉयलेट्स, इलेक्ट्रिसिटी कनेक्शन, गैस कनेक्शन, अपना घर, इन जैसी Basic Amenities के लिए तरस रहा था।

साथियों, हमारे सामने मार्ग था कि पहले से जो चलता आ रहा है, उसी मार्ग पर चलें या फिर अपना नया रास्ता बनाएं, नई अप्रोच के साथ आगे बढ़ें।हमने बहुत सोच विचार करके तय किया… हमने नया मार्ग बनाया, नई अप्रोच के साथ आगे बढ़े और इसमें सबसे बड़ी प्राथमिकता दी- लोगों के Aspirations को।

इस दौरान देश में चुनाव भी हुआ, हमारे कार्यों पर मुहर भी लगी लेकिन एक और दिलचस्प बात सामने आई।आज ग्लोबल बिजनेस समिट में, मैं आपके सामने इसे भी साझा करना चाहता हूं।यहां इस हॉल में बैठे साथी, ज़रूर मेरी इस बात पे ध्यान देंगे!!!

Friends,

जिस वर्ग की बात मैं आपसे कर रहा था उसकी एक बहुत बड़ी पहचान है- ‘Talking The Right Things’. यानि हमेशा सही बात बोलना। सही बात कहने में कोई बुराई भी नहीं हैं।लेकिन इस वर्ग को ऐसे लोगों से नफरत है, चिढ़ है, जो ‘Doing The Right Things’ पर चलते हैं। इसलिए जब Status Quo में बदलाव आता है, तो ऐसे लोगों को कुछ खास तरह के Disruptions दिखाई देने लगते हैं।आप गौर करिए,जो लोग खुद को Gender Justice का मसीहा बताते हैं, वो तीन तलाक के खिलाफ कानून बनाने के हमारे फैसले का विरोध करते हैं।जो लोग दुनिया भर को शरणार्थी अधिकारों के लिए ज्ञान देते हैं, वो शरणार्थियों के लिए जब CAA का कानून बन रहा है विरोध करते हैं।जो लोग दिन रात संविधान की दुहाई देते हैं, वो आर्टिकल 370 जैसी अस्थाई व्यवस्था हटाकर, जम्मू-कश्मीर में पूरी तरह संविधान को लागू करने का विरोध करते हैं।जो लोग न्याय की बात करते हैं, वो सुप्रीम कोर्ट का एक फैसला उनके खिलाफ जाने पर देश की सर्वोच्च अदालत की नीयत पर ही सवाल खड़े कर देते हैं।

साथियों,आप में से कुछ ने रामचरित मानस की ये चौपाई जरूर सुनी होगी-

Friends,

अलग-अलग सेक्टरों पर, अलग-अलग क्षेत्रों में इसके परिणाम स्पष्ट दिखाई दे रहे हैं। 6 साल पहले देश में Highways Construction की Speed, करीब 12 किलोमीटर Per Day थी। आज ये 30 किलोमीटर के आसपास है।6 साल पहले स्थिति ये थी कि एक साल में 600 किलोमीटर रेलवे लाइन का Electrification हो रहा था। पिछले साल हमने 5300 किलोमीटर रेलवे रूट का बिजलीकरण किया है।6 साल पहले, हमारे एयरपोर्ट्स करीब 17 करोड़ पैसेन्जर्स को हैंडल कर रहे थे। अब 34 करोड़ से ज्यादा को हैंडल कर रहे हैं।

6 साल पहले, हमारे Major Ports पर कार्गो हैंडलिंग करीब 550 मिलियन टन के आसपास थी। अब ये बढ़कर 700 मिलियन टन के पास पहुंच गई है। और एक महत्वपूर्ण चीज हुई है, जिसकी तरफ भी आपका ध्यान देना जरूरी है।ये है Major Ports पर Turn Around Time.6 साल पहले Ports पर Turn Around Time करीब-करीब 100 घंटे के आसपास होता था। अब ये घटकर 60 घंटे पर आ चुका है। इसे और कम करने के लिए निरंतर काम हो रहा है।

साथियों, ये 5-6 उदाहरण Connectivity से जुड़े हुए हैं। यहां इस हॉल में बैठे प्रत्येक व्यक्ति को मालूम है कि connecticivty, infrastructure, governance.. इसका Economic Activities परकितना प्रभाव पड़ता है। क्या इतना बड़ा परिवर्तन ऐसे ही हो गया?नहीं।हमने सरकार के विभागों में Silos को ख़तम करने के लिए प्रयास किया, systematic efforts किए और Collaboration पर बल दिया। बिल्कुल ग्राउंड लेवल पर जाकर चीजों को ठीक किया। आज जो एयरपोर्ट्स पर काम हो रहा है, रेलवे स्टेशनों पर काम हो रहा है, वो आप भी देख रहे हैं।हमारे देश के लोग क्या डिजर्व करते हैं और उन्हें क्या मिला था, इसका फर्क समझना भी बहुत जरूरी है।

साथियों, कुछ साल पहले आए दिन रेलवे क्रॉसिंग्स पर हादसों की खबर आती थी।क्यों?क्योंकि 2014 से पहले देश में ब्रॉडगेज लाइन पर करीब-करीब 9 हजार Unmanned Level Crossings थीं। 2014 के बाद हमने अभियान चलाकर ब्रॉडगेज रेलवे लाइन को Unmanned Level Crossings से मुक्त कर दिया है।कुछ ऐसा ही हाल बायो-टॉयलेट्स का भी था।पहले की सरकार के समय, तीन साल में 9 हजार 500 बायो-टॉयलेट्स बने थे।हमारी सरकार ने पिछले 6 वर्षों में रेलवे कोचेज में सवा दो लाख से भी ज्यादा बायो-टॉयलेट्स लगवाए हैं।कहाँ 9 हजार और कहाँ सवा दो लाख..

Friends, कोई कल्पना नहीं कर सकता था… कि भारत में ट्रेन लेट होना…शायद यह खबरों के दायरों से बहार निकल गया…यह तो होता ही है.. ट्रेन तो लेट होती ही है।इस देश में पहली बार उस कल्चर को लाया गया है जहाँ पर ट्रेन लेट होने पर पैसेन्जर्स को रीफंड दिया जा रहा है…शुरुवात की है।तमाम एयरलाइन्स भी लेट होने पर रीफंड नहीं देतीं, लेकिन आज ट्रेन लेट होने पर पैसेन्जर्स को रीफंड दिया जा रहा है।तेजस ट्रेन से चलने वालों को हमने ये सुविधा दी है।हमें पता है हमने ये कितना रिस्की काम किया है।तुरंत RTI वाले आज रात को ही RTI डालेंगे… पत्रकार भी निकल पड़ेंगे…पूछेंगे कि कितना रीफंड किया,… लेकिन हमें संतोष है कि इतना कॉन्फिडेंस है कि देश को उस दिशा में ले जा सकते हैं…जिसमे अगर ट्रेन लोटे होगी तो सरकार जिम्मेदार होगी ।

साथियों,

Economic हो या सोशल, आज देश परिवर्तन के एक बड़े दौर से गुजर रहा है।

बीते कुछ वर्षों में भारत Global Economy System का और भी मजबूत अंग बना है।लेकिन अलग-अलग कारणों से अंतर्राष्ट्रीय स्थितियां ऐसी हैं कि Global Economy कमजोर और कठिन हालत में है। फिर भी, इसका असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर कम से कम कैसे हो.. इसपे जितने हम initiatives लेसकतेहैं…जितने प्रोएक्टिव एक्शन्स ले सकते हैं.. हम लेते रहे हैं.. और उसका लाभ भी मिला है।हमारी नीतियां स्पष्ट हैं, हमारे फंडामेंटल्स मजबूत हैं।अभी हाल ही में भारत विश्व की 5th largest economy बना है।जब 2014 में हम आये थे तब हम 11 पेथे.. अब पांच पे पहुंचे हैं

Friends, भारत 5 ट्रिलियन डॉलर की इकॉनॉमी के लक्ष्य को प्राप्त करे, इसके लिए हमारी सरकार चार अलग-अलग स्तरों पर काम कर रही है।

पहला- प्राइवेट सेक्टर के साथ Collaboration

दूसरा- Fair Competition

तीसरा- Wealth Creation

और चौथा- आर्किक लॉज का डिलिशन

साथियों, हमने Infrastructure के क्षेत्र में 100 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा के निवेश का रोडमैप तैयार किया है।हमने PPP से PPP को बल देने का मार्ग चुना है।Public-Private Partnership से देश के विकास को Powerful Progressive Push !!!

ये भी एक अनुभव रहा है जिस क्षेत्र में प्राइवेट सेक्टर को Compete करने की छूट दी जाती है, वो तेजी से आगे बढ़ता है।इसलिए हमारी सरकार अर्थव्यवस्था के ज्यादा से ज्यादा सेक्टर्स को Private Sector के लिए खोल रही है।

साथियों,

ईमानदारी के साथ जो आगे बढ़ रहा है, कंपटीशन दे रहा है, Wealth Create कर रहा है, सरकार उसके साथ मज़बूती से खड़ी है। उसके लिए कानून को निरंतर सरल किया जा रहा है, पुराने कानूनों को समाप्त किया जा रहा है।Fair Competition को बढ़ाने के लिए, हम Corruption और क्रोनिज्म, दोनों से सख्ती से निपट रहे हैं। बैंकिंग हो, FDI पॉलिसीज हों, या फिर Natural Resources का Allotment, क्रोनिज्म को हर जगह से हटाया जा रहा है। हमने ध्यान दिया है – Simplification पर, Rationalization पर, Transparency पर।टैक्स विवादों को सुलझाने के लिए अब हम इसबजटमें“विवाद से विश्वास” नाम की नई योजना लेकर आए हैं।लेबर रीफॉर्म की दिशा में भी हम तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। अभी परसों ही, सरकार ने कंपनी एक्ट में बड़ा बदलाव करते हुए, कई प्रावधानों को डी-क्रिमिनलाइज कर दिया है।

साथियों, आज भारत दुनिया के उन प्रमुख देशों में है, जहां Corporate Tax सबसे कम है।Ease of Doing Business की रैंकिंग में सिर्फ 5 साल में रिकॉर्ड 77 रैंक का सुधार करने वाला देश भी भारत ही है।सरकार के इन प्रयासों के बीच, विदेशी निवेशकों का भी भारतीय अर्थव्यवस्था में भरोसा लगातार बढ़ रहा है।कुछ देर पहले ही यहाँ पर आपने ब्लैकस्टोन के ceo को सुना।वह कह रहे थे भारत दुनिया में सबसे ज़्यादा return देता है और वह अपना इन्वेस्टमेंट डबल करने की प्लानिंग कर रहे हैं।

साथियों, 2019 में देश में करीब 48 Billion Dollar का Foreign Direct Investment आया। ये ग्रोथ रही 16 परसेंट से ज्यादा।इसी तरह भारत में पिछले साल 19 Billion Dollars का Private Equity And Venture Capital Investment आया। इसमें भी ग्रोथ रही 53 परसेंट से ज्यादा।देश Foreign Portfolio Investors भी अब निवेश बढ़ा रहे हैं। पिछले साल ये निवेश करीब 19 Billion Dollars का था। साफ है कि, नए विकल्प तलाश रहे निवेशक भी अब भारत की तरफ बढ़ रहे हैं।

साथियों,

हमारी सरकार सारे स्टेकहोल्डर्स के साथ निरंतर संपर्क में है, लगातार फीडबैक लेते हुए, हर स्तर पर बड़े फैसले ले रही है। Status Quo से देश को मुक्ति दिलाते हुए, हम राष्ट्रीय स्तर पर ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी Collaboration से Creation की तरफ बढ़ रहे हैं।आपको याद होगा, जब संयुक्त राष्ट्र में इंटनेशनल योगा डे का प्रस्ताव आया था तो भारत को करीब करीब पूरी दुनिया का समर्थन मिला था।और शायद UN के इतिहास में किसी एक resolution को दुनिया के इतने देशों का समर्थन मिला हो यह पहली बार हुआ।और योग का प्रभाव यह है की शायद पहली बार आप की समिट में किसी ने मैडिटेशन करवाया होगा।

Friends,

आज भारत Peace Keeping Forces में सर्वाधिक भागीदारी करने वालों देश में से एक बन गया… दूसरे देशों के नागरिकों की रक्षा के लिए भी सबसे पहले आगे आ रहा है।इतना ही नहीं, आज भारत, अंतरराष्ट्रीय स्तर की संस्थाओं के निर्माण में भी बड़ी भूमिका निभा रहा है।International Solar Alliance हो या फिर Coalition for Disaster Resilient Infrastructure, भविष्य को दिशा देने वाले ऐसे संस्थान भारत की पहल पर ही शुरु हुए हैं और आज पूरी दुनिया इसके साथ जुड़ने लगी है।लेकिन Friends, Status Quo का समर्थन करने वाली, बदलावों का विरोध करने वाली जैसी ताकतें हमारे देश में हैं, वैसी ही शक्तियां अब Global Level पर भी मजबूती से एकजुट हो रही हैं।

साथियों,इतिहास में एक Time-Period ऐसा था, जिसमें हर कोई संघर्ष के रास्ते पर ही चल पड़ा था। तब कहा जाता था- Might is Right.फिर एक ऐसा Era आया, जिसमें ये सोच हावी रही कि हम इस गुट के साथ रहेंगे, तभी टिक पाएंगे।वह समय भी गया।फिर एक ऐसा समय भी आया - लोगों ने गुट-निरपेक्षता का भी प्रयास किया।फिर ऐसा भी एक युग आया जिसमें उपयोगिता के आधार पर संबंधों को विकसित करने की सोच हावी हो गई।

अब आज का युग देखिए।टेक्नोलॉजी के इस युग में आज दुनिया Inter-Connected है, Inter-Related है और Inter-Dependent भी है।यह इसी एक शताब्दी के बदलाव हैं…. वैश्विक स्तर के आये हुए बदलाव हैं।

लेकिन फिर भी, एक Global एजेंडा के लिए, किसी वैश्विक लक्ष्य के लिए,एक बहुत बड़ा संकल्प - विश्व की गरीबी को दूर कैसे करें, आतंकवाद को कैसे ख़तम करें , climate change issues कोकैसे handle करें.. आज भी दुनिया एक मंच पर नहीं आ पा रही।आज पूरे विश्व को इसकी प्रतीक्षा है, लेकिन ऐसा हो नहीं रहा।

साथियों,

21वीं सदी अपने आप में बहुत सी संभावनाओं से भरी हुई है।इन संभावनाओं के बीच, आज एक Common Global Voice की कमी महसूस हो रही है।एक ऐसी Voice, जिसमें स्वर भले अलग-अलग हों, लेकिन ये मिलकर एक सुर का निर्माण करें, एक सुर में अपनी आवाज उठाएं।आज पूरे विश्व के सामने ये सवाल है कि बदलती हुई परिस्थितियों में किसी तरह एडजस्ट होकर गुजारा करे या फिर नए तरीके से नए मार्ग का विकास करे।

साथियों,

बदलती हुई वैश्विक परिस्थितियों के बीच, भारत ने भी बहुत व्यापक बदलाव किए हैं।एक कालखंड था, जब भारत तटस्थ था, हम तटस्थ थे, लेकिन देशों से समान दूरी बनी रही।बदलाव कैसे आया है --- आज भी भारत तटस्थ है, हम तटस्थ हैं, लेकिन दूरी के आधार पे नहीं,दोस्ती के आधार पे।हम Saudi Arabia के साथ भी दोस्ती करते हैं…. Iran के साथ भी दोस्ती करते हैं।हम America के साथ भी दोस्ती करते हैं…. Russia के साथ भी दोस्ती करते हैं।फिर भी हम तटस्थ हैं… एक समय था जब लोग समान दूरी बनाकर तटस्थ थे, हम समान दोस्ती करके तटस्थ हैं।उस कालखंड में दूरी रखकर, बचने की कोशिश की गई।आज हम दोस्ती रखकर, साथ चलने की कोशिश कर रहे हैं।ये भारत की आज की विदेश नीति, भारत की आज की अर्थ नीति का बहुत बड़ा सार है।

साथियों,मैं महात्मा गांधी जी की एक बात के साथ अपनी बात समाप्त कर रहा हूं।गांधी जी कहते थे कि “मैं भारत का उत्थान इसलिए चाहता हूं कि सारी दुनिया उसका लाभ उठा सके”। इस एक पंक्ति में Globalisation की भारतीय सोच भी है और आगे के लिए Collaboration का मंत्र भी है।

मैं फिर एक बार इतने महत्वपूर्ण विषय पर आपने मंथन की जो योजना बनायीं है,उसके लिए मैं आपको बहुत शुभकामनाएं देता हूँ। और मुझे आपके बीच आने का अवसर मिला इसके लिए मैं आपका धन्यवाद करता हूँ। आप सभी को ह्रदय से धन्यवाद करते हुए मैं अपनी वाणी को विराम देता हूँ। thankyou!!!

Share your ideas and suggestions for Mann Ki Baat now!
PM invites participation for ‘Pariksha Pe Charcha 2022'
Explore More
Kashi Vishwanath Dham is a symbol of the Sanatan culture of India: PM Modi

Popular Speeches

Kashi Vishwanath Dham is a symbol of the Sanatan culture of India: PM Modi
 Grant up to Rs 10 lakh to ICAR institutes, KVKs, state agri universities for purchase of drones, says Agriculture ministry

Media Coverage

Grant up to Rs 10 lakh to ICAR institutes, KVKs, state agri universities for purchase of drones, says Agriculture ministry
...

Nm on the go

Always be the first to hear from the PM. Get the App Now!
...
Text of PM’s unveils the hologram statue of Netaji at India Gate
January 23, 2022
Share
 
Comments
Also confers Subhas Chandra Bose Aapda Prabandhan Puraskars
Gujarat was the first state to enact disaster related law in 2003
“In disaster management, emphasis is on Reform along with stress on Relief, Rescue and Rehabilitation”
“Disaster management is no longer just a government job but it has become a model of 'Sabka Prayas'”
“We have a goal to fulfil the dreams of independent India. We have the goal of building a new India before the hundredth year of independence”
“It is unfortunate that after Independence, along with the culture and traditions of the country, the contribution of many great personalities was also tried to be erased”
“The freedom struggle involved ‘tapasya’ of lakhs of countrymen, but attempts were made to confine their history as well. But today the country is boldly correcting those mistakes”
“We have to move ahead taking inspiration from Netaji Subhash's 'Can Do, Will Do' spirit”

इस ऐतिहासिक कार्यक्रम में उपस्थित मंत्रीपरिषद के मेरे साथी श्री अमित शाह, श्री हरदीप पूरी जी, मंत्रिमंडल के अन्य सदस्य, INA के सभी ट्रस्टी, NDMA के सभी सदस्यगण, jury मेम्बर्स, NDRF, कोस्ट गॉर्ड्स और IMD के डाइरेक्टर जनरल्स, आपदा प्रबंधन पुरस्कारों के सभी विजेता साथी, अन्य सभी महानुभाव, भाइयों एवं बहनों!

भारत मां के वीर सपूत, नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 125वीं जन्मजयंती पर पूरे देश की तरफ से मैं आज कोटि-कोटि नमन करता हूं। ये दिन ऐतिहासिक है, ये कालखंड भी ऐतिहासिक है और ये स्थान, जहां हम सभी एकत्रित हैं, वो भी ऐतिहासिक है। भारत के लोकतंत्र की प्रतीक हमारी संसद पास में है, हमारी क्रियाशीलता और लोकनिष्ठा के प्रतीक अनेक भवन भी हमारे साथ पास में नजर आ रहे हैं, हमारे वीर शहीदों को समर्पित नेशनल वॉर मेमोरियल भी पास है। इन सबके आलोक में आज हम इंडिया गेट पर अमृत महोत्सव मना रहे हैं और नेताजी सुभाषचंद्र बोस को आदरपूर्वक श्रद्धांजलि दे रहे हैं। नेताजी सुभाष, जिन्होंने हमें स्वाधीन और संप्रभु भारत का विश्वास दिलाया था, जिन्होंने बड़े गर्व के साथ, बड़े आत्मविश्वास के साथ, बड़े साहस के साथ अंग्रेजी सत्ता के सामने कहा था- “मैं स्वतंत्रता की भीख नहीं लूंगा, मैं इसे हासिल करूंगा"। जिन्होंने भारत की धरती पर पहली आज़ाद सरकार को स्थापित किया था, हमारे उन नेताजी की भव्य प्रतिमा आज डिजिटल स्वरूप में इंडिया गेट के समीप स्थापित हो रही है। जल्द ही इस होलोग्राम प्रतिमा के स्थान पर ग्रेनाइट की विशाल प्रतिमा भी लगेगी। ये प्रतिमा आज़ादी के महानायक को कृतज्ञ राष्ट्र की श्रद्धांजलि है। नेताजी सुभाष की ये प्रतिमा हमारी लोकतान्त्रिक संस्थाओं को, हमारी पीढ़ियों को राष्ट्रीय कर्तव्य का बोध कराएगी, आने वाली पीढ़ियों को, वर्तमान पीढ़ी को निरंतर प्रेरणा देती रहेगी।

साथियों,

पिछले साल से देश ने नेताजी की जयंती को पराक्रम दिवस के रूप में मनाना शुरू किया है। आज पराक्रम दिवस के अवसर पर सुभाषचंद्र बोस आपदा प्रबंधन पुरस्कार भी दिए गए हैं। नेताजी के जीवन से प्रेरणा लेकर ही इन पुरस्कारों को देने की घोषणा की गई थी। साल 2019 से 2022 तक, उस समय के सभी विजेताओं, सभी व्यक्तियों, सभी संस्थाओं को जिने आज सम्मान का अवसर मिला है। उन सबको भी मैं बहुत-बहुत बधाई देता हूं।

साथियों,

हमारे देश में आपदा प्रबंधन को लेकर जिस तरह का रवैया रहा था, उस पर एक कहावत बहुत सटीक बैठती है- जब प्यास लगी तो कुआं खोदना। और जिस मैं काशी क्षेत्र से आता हूं वहां तो एक और भी कहावत है। वो कहते हैं - भोज घड़ी कोहड़ा रोपे। यानि जब भोज का समय आ गया तो कोहड़े की सब्जी उगाने लगना। यानि जब आपदा सिर पर आ जाती थी तो उससे बचने के उपाय खोजे जाते थे। इतना ही नहीं, एक और हैरान करने वाली व्यवस्था थी जिसके बारे में कम ही लोगों को पता है। हमारे देश में वर्षों तक आपदा का विषय एग्रीकल्चर डिपार्टमेंट के पास रहा था। इसका मूल कारण ये था कि बाढ़, अतिवृष्टि, ओले गिरना, ऐसी जो स्थितियों पैदा होती थी। उससे निपटने का जिम्मा, उसका संबंध कृषि मंत्रालय से आता था। देश में आपदा प्रबंधन ऐसे ही चलता रहता था। लेकिन 2001 में गुजरात में भूकंप आने के बाद जो कुछ हुआ, देश को नए सिरे से सोचने के लिए मजबूर किया। अब उसने आपदा प्रबंधन के मायने बदल दिए। हमने तमाम विभागों और मंत्रालयों को राहत और बचाव के काम में झोंक दिया। उस समय के जो अनुभव थे, उनसे सीखते हुए ही 2003 में Gujarat State Disaster Management Act बनाया गया। आपदा से निपटने के लिए गुजरात इस तरह का कानून बनाने वाला देश का पहला राज्य बना। बाद में केंद्र सरकार ने, गुजरात के कानून से सबक लेते हुए, 2005 में पूरे देश के लिए ऐसा ही Disaster Management Act बनाया। इस कानून के बाद ही National Disaster Management Authority उसके गठन का रास्ता साफ हुआ। इसी कानून ने कोरोना के खिलाफ लड़ाई में भी देश की बहुत मदद की।

साथियों,

डिजास्टर मैनैजमेंट को प्रभावी बनाने के लिए 2014 के बाद से हमारी सरकार ने राष्ट्रीय स्तर पर चौतरफा काम किया है। हमने Relief, Rescue, Rehabilitation उस पर जोर देने के साथ-साथ ही Reform पर भी बल दिया है। हमने NDRF को मजबूत किया, उसका आधुनिकीकरण किया, देश भर में उसका विस्तार किया। स्पेस टेक्नालजी से लेकर प्लानिंग और मैनेजमेंट तक, best possible practices को अपनाया। हमारे NDRF के साथी, सभी राज्यों के SDRFs, और सुरक्षा बलों के जवान अपनी जान की बाजी लगाकर, एक-एक जीवन को बचाते हैं। इसलिए, आज ये पल इस प्रकार से जान की बाजी लगाने वाले, औरों की जिंदगी बचाने के लिए खुद की जिंदगी का दांव लगाने वाले चाहे वो NDRF के लोग हों, चाहे SDRF के लोग हों, हमारे सुरक्षाबलों के साथी हों, ये सब के सब उनके प्रति आज आभार व्यक्त करने का, उनको salute करने का ये वक्त है।

साथियों,

अगर हम अपनी व्यवस्थाओं को मजबूत करते चलें, तो आपदा से निपटने की क्षमता दिनों-दिन बढ़ती चली जाती है। मैं इसी कोरोना काल के एक-दो वर्षों की बात करूं तो इस महामारी के बीच भी देश के सामने नई आपदाएँ आकर खड़ी हो गईं। एक तरफ कोरोना से तो लड़ाई लड़ ही रहे थे। अनेक जगहों पर भूकंप आए, कितने ही क्षेत्रों में बाढ़ आई। ओड़िशा, पश्चिम बंगाल समेत पूर्वी तटों पर cyclones आए, गोवा, महाराष्ट्र, गुजरात, पश्चिमी तटों पर cyclones आए, पहले, एक-एक साइक्लोन में सैकड़ों लोगों की मृत्यु हो जाती थी, लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ। देश ने हर चुनौती का जवाब एक नई ताकत से दिया। इसी वजह से इन आपदाओं में हम ज्यादा से ज्यादा जीवन बचाने में सफल रहे। आज बड़ी-बड़ी अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां, भारत के इस सामर्थ्य, भारत में आए इस बदलाव की सराहना कर रही हैं। आज देश में एक ऐसा end-to-end cyclone response system है जिसमें केंद्र, राज्य, स्थानीय प्रशासन और सभी एजेंसियां एक साथ मिलकर के काम करती हैं। बाढ़, सूखा, cyclone, इन सभी आपदाओं के लिए वार्निंग सिस्टम में सुधार किया गया है। Disaster risk analysis के लिए एडवांस्ड टूल्स बनाए गए हैं, राज्यों की मदद से अलग अलग क्षेत्रों के लिए Disaster risk maps बनाए गए हैं। इसका लाभ सभी राज्यों को, सभी स्टेक होल्डर्स को मिल रहा है। और सबसे महत्वपूर्ण, डिजास्टर मैनेजमेंट - आपदा प्रबंधन, आज देश में जनभागीदारी और जन-विश्वास का विषय बन गया है। मुझे बताया गया है कि NDMA की ‘आपदा मित्र’ जैसी स्कीम्स से युवा आगे आ रहे हैं। आपदा मित्र के रूप में जिम्मेवारियां उठा रहे हैं। यानी जन भागीदारी बढ़ रही है। कहीं कोई आपदा आती है तो लोग विक्टिम्स नहीं रहते, वो वॉलंटियर्स बनकर आपदा का मुकाबला करते हैं। यानी, आपदा प्रबंधन अब एक सरकारी काम भर नहीं है, बल्कि ये ‘सबका प्रयास’ का एक मॉडल बन गया है।

और साथियों,

जब मैं सबका प्रयास की बात करता हूँ, तो इसमें हर क्षेत्र में हो रहा प्रयास, एक holistic approach भी शामिल है। आपदा प्रबंधन को प्राथमिकता देते हुए, हमने अपने एजुकेशन सिस्टम में भी कई सारे बदलाव किए हैं। जो सिविल इंजीनियरिंग के कोर्सेस होते हैं, आर्किटेक्चर से जुड़े कोर्सेस होते हैं, उसके पाठ्यक्रम में डिजास्टर मैनेजमेंट से जोड़ा, इन्फ्रासट्रक्चर की रचना कैसी हो उसपर विषयों को जोड़ना, ये सारे काम प्रयासरत हैं। सरकार ने Dam Failure की स्थिति से निपटने के लिए, डैम सेफ्टी कानून भी बनाया है।

साथियों,

दुनिया में जब भी कोई आपदा आती है तो उसमें लोगों की दुखद मृत्यु की चर्चा होती है, कि इतने लोगों की मृत्यु हो गई, इतना ये हो गया, इतने लोगों को हटाया गया, आर्थिक नुकसान भी बहुत होता है। उसकी भी चर्चा की जाती है। लेकिन आपदा में जो इंफ्रास्ट्रक्चर का नुकसान होता है, वो कल्पना से परे होता है। इसलिए ये बहुत आवश्यक है कि आज के समय में इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण ऐसा हो जो आपदा में भी टिक सके, उसका सामना कर सके। भारत आज इस दिशा में भी तेजी से काम कर रहा है। जिन क्षेत्रों में भूकंप, बाढ़ या साइक्लोन का खतरा ज्यादा रहता है, वहां पर पीएम आवास योजना के तहत बन रहे घरों में भी इसका ध्यान रखा जाता है। उत्तराखंड में जो चार धाम महा-परियोजना का काम चल रहा है, उसमें भी आपदा प्रबंधन का ध्यान रखा गया है। उत्तर प्रदेश में जो नए एक्सप्रेसवे बन रहे हैं, उनमें भी आपदा प्रबंधन से जुड़ी बारीकियों को प्राथमिकता दी गई है। आपात स्थिति में ये एक्सप्रेसवे, विमान उतारने के काम आ सकें, इसका भी प्रावधान किया गया है। यही नए भारत का विज़न है, नए भारत के सोचने का तरीका है।

साथियों,

Disaster Resilient Infrastructure की इसी सोच के साथ भारत ने दुनिया को भी एक बहुत बड़ी संस्था का विचार दिया है, उपहार दिया है। ये संस्था है- CDRI - Coalition for Disaster Resilient Infrastructure. भारत की इस पहल में ब्रिटेन हमारा प्रमुख साथी बना है और आज दुनिया के 35 देश इससे जुड़ चुके हैं। दुनिया के अलग-अलग देशों के बीच में, सेनाओं के बीच में हमने Joint Military Exercise बहुत देखी है। पुरानी परंपरा है उसकी चर्चा भी होती है। लेकिन भारत ने पहली बार डिजास्टर मैनेजमेंट के लिए Joint ड्रिल की परंपरा शुरू की है। कई देशों में मुश्किल समय में हमारी डिजास्टर मैनेजमेंट से जुड़ी एजेंसियों ने अपनी सेवाएँ दी हैं, मानवता के प्रति अपने कर्तव्य का निर्वाह किया है। जब नेपाल में भूकंप आया, इतनी बड़ी तबाही मची, तो भारत एक मित्र देश के रूप में उस दुख को बाटने के लिए जरा भी देरी नहीं की थी। हमारे NDRF के जवान वहां तुरंत पहुंच गए थे। डिजास्टर मैनेजमेंट का भारत का अनुभव सिर्फ हमारे लिए नहीं बल्कि पुरी मानवता के लिए आप सभी को याद होगा 2017 में भारत ने साउथ एशिया जियो-स्टेशनरी communication satellite को लान्च किया। weather और communication के क्षेत्र में उसका लाभ हमारे दक्षिण एशिया के मित्र देश को मिल रहा है।

साथियों,

परिस्थितियां कैसी भी हों, अगर हममे हौंसला है तो हम आपदा को भी अवसर में बदल सकते हैं। यही संदेश नेताजी ने हमे आजादी की लड़ाई के दौरान दिया था। नेताजी कहते थे कभी भी स्वतंत्र भारत के सपने का विश्वास मत खोना। दुनिया की कोई ताकत नहीं है जो भारत को झकझोर सके"। आज हमारे सामने आज़ाद भारत के सपनों को पूरा करने का लक्ष्य है। हमारे सामने आज़ादी के सौंवे साल से पहले, 2047 के पहले नए भारत के निर्माण का लक्ष्य है। और नेताजी को देश पर जो विश्वास था, जो भाव नेताजी के दिल में उभरते थे। और उनके ही इन भावों के कारण मैं कह सकता हूँ कि, दुनिया की कोई ताकत नहीं है जो भारत को इस लक्ष्य तक पहुंचने से रोक सके। हमारी सफलताएँ हमारी संकल्पशक्ति का सबूत हैं। लेकिन, ये यात्रा अभी लंबी है। हमें अभी कई शिखर और पार करने हैं। इसके लिए जरूरी है, हमें देश के इतिहास का, हजारों सालों की यात्रा में इसे आकार देने वाले तप, त्याग और बलिदानों का बोध रहे।

भाइयों और बहनों,

आज़ादी के अमृत महोत्सव का संकल्प है कि भारत अपनी पहचान और प्रेरणाओं को पुनर्जीवित करेगा। ये दुर्भाग्य रहा कि आजादी के बाद देश की संस्कृति और संस्कारों के साथ ही अनेक महान व्यक्तित्वों के योगदान को मिटाने का काम किया गया। स्वाधीनता संग्राम में लाखों-लाख देशवासियों की तपस्या शामिल थी लेकिन उनके इतिहास को भी सीमित करने की कोशिशें हुईं। लेकिन आज आजादी के दशकों बाद देश उन गलतियों को डंके की चोट पर सुधार रहा है, ठीक कर रहा है। आप देखिए, बाबा साहब आंबेडकर से जुड़े पंचतीर्थों को देश उनकी गरिमा के अनुरूप विकसित कर रहा है। स्टेचू ऑफ यूनिटी आज पूरी दुनिया में सरदार वल्लभ भाई पटेल के यशगान की तीर्थ बन गई है। भगवान बिरसा मुंडा की जयंती को जनजातीय गौरव दिवस के रूप में मनाने की शुरुआत भी हम सबने कर दी है। आदिवासी समाज के योगदान और इतिहास को सामने लाने के लिए अलग-अलग राज्यों में आदिवासी म्यूज़ियम्स बनाए जा रहे हैं। और नेताजी सुभाषचंद्र बोस के जीवन से जुड़ी हर विरासत को भी देश पूरे गौरव से संजो रहा है। नेताजी द्वारा अंडमान में तिरंगा लहराने की 75वीं वर्षगांठ पर अंडमान के एक द्वीप का नाम उनके नाम पर रखा गया है। अभी दिसम्बर में ही, अंडमान में एक विशेष ‘संकल्प स्मारक’ नेताजी सुभाष चंद्र बोस के लिए समर्पित की गई है। ये स्मारक नेताजी के साथ साथ इंडियन नेशनल आर्मी के उन जवानों के लिए भी एक श्रद्धांजलि है, जिन्होंने आज़ादी के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया था। ये मेरा सौभाग्य है कि पिछले वर्ष, आज के ही दिन मुझे कोलकाता में नेताजी के पैतृक आवास भी जाने का अवसर मिला था। जिस प्रकार से वो कोलकाता से निकले थे, जिस कमरे में बैठकर वो पढ़ते थे, उनके घर की सीढ़ियां, उनके घर की दीवारें, उनके दर्शन करना, वो अनुभव, शब्दों से परे है।

साथियों,

मैं 21 अक्टूबर 2018 का वो दिन भी नहीं भूल सकता जब आजाद हिंद सरकार के 75 वर्ष हुए थे। लाल किले में हुए विशेष समारोह में मैंने आजाद हिंद फौज की कैप पहनकर तिरंगा फहराया था। वो पल अद्भुत है, वो पल अविस्मरणीय है। मुझे खुशी है कि लाल किले में ही आजाद हिंद फौज से जुड़े एक स्मारक पर भी काम किया जा रहा है। 2019 में, 26 जनवरी की परेड में आजाद हिंद फौज के पूर्व सैनिकों को देखकर मन जितना प्रफुल्लित हुआ, वो भी मेरी अनमोल स्मृति है। और इसे भी मैं अपना सौभाग्य मानता हूं कि हमारी सरकार को नेताजी से जुड़ी फाइलों को सार्वजनिक करने का अवसर मिला।

साथियों,

नेताजी सुभाष कुछ ठान लेते थे तो फिर उन्हें कोई ताकत रोक नहीं सकती थी। हमें नेताजी सुभाष की ‘Can Do, Will Do’ स्पिरिट से प्रेरणा लेते हुए आगे बढ़ना है। वो ये जानते थे तभी ये बात हमेशा कहते थे भारत में राष्ट्रवाद ने ऐसी सृजनात्मक शक्ति का संचार किया है जो सदियों से लोगों के अंदर सोई पड़ी थी। हमें राष्ट्रवाद भी जिंदा रखना है। हमें सृजन भी करना है। और राष्ट्र चेतना को जागृत भी रखना है। मुझे विश्वास है कि, हम मिलकर, भारत को नेताजी सुभाष के सपनों का भारत बनाने में सफल होंगे। आप सभी को एक बार फिर पराक्रम दिवस की बहुत बहुत शुभकामनायें देता हूं और मैं आज एनडीआरएफ, एसडीआरएफ के लोगों को भी विशेष रूप से बधाई देता हूं। क्योंकि बहुत छोटे कालखंड में उन्होंने अपनी पहचान बना दी है। आज कहीं पर भी आपदा हो या आपदा के संबंधित संभावनाओं की खबरें हों, साईक्लोन जैसी। और जब एनडीआरएफ के जवान यूनिफार्म में दिखते हैं। सामान्य मानवीय को एक भरोसा हो जाता है। कि अब मदद पहुंच गई। इतने कम समय में किसी संस्था और इसकी यूनिफार्म की पहचान बनना, यानि जैसे हमारे देश में कोई तकलीफ हो और सेना के जवान आ जाएं तो सामान्य मानवीय को संतोष हो जाता है, भई बस अब ये लोग आ गये। वैसा ही आज एनडीआरएफ और एसडीआरएफ के जवानों ने अपने पराक्रम से ये करके दिखाया है। मै पराक्रम दिवस पर नेताजी का स्मरण करते हुए, मैं एनडीआरएफ के जवानों को, एसडीआरएफ के जवानों को, उन्होंने जिस काम को जिस करुणा और संवेदनशीलता के साथ उठाया है। बहुत – बहुत बधाई देता हूं। उनका अभिनंदन करता हूं। मैं जानता हूं इस आपदा प्रबंधन के काम में, इस क्षेत्र में काम करने वाले कईयों ने अपने जीवन भी बलिदान दिए हैं। मैं आज ऐसे जवानों को भी श्रद्धांजलि देता हूं जिन्होंने किसी की जिंदगी बचाने के लिए अपनी जिंदगी दांव पर लगा दी थी। ऐसे सबको में आदरपूवर्क नमन करते हुए मैं आप सबको भी आज पराक्रम दिवस की अनेक – अनेक शुभकामनाएं देते हुए मेरी वाणी को विराम देता हूं। बहुत बहुत धन्यवाद !