Text of PM's remarks at the NCC Rally 2015

Published By : Admin | January 28, 2015 | 19:55 IST

मंच पर उपस्थित रक्षा मंत्री श्री मनोहर परिकर जी, रक्षा राज्‍य मंत्री श्रीमान इंद्रजीत जी, आर्मी, नेवी, एयरफोर्स के तीनों अध्‍यक्ष, NCC के मुखिया और देशभर से आए हुए NCC के सभी Cadets, पड़ोसी देशों से आए हुए हमारे सभी Cadet मेहमान, विशाल संख्‍या में उपस्थित भाईयों और बहनों। 

मुझे भी आज बचपन की यादें ताजा हो गई, क्‍योंकि मैं भी NCC में Cadet रहा, हमारे रक्षा मंत्री भी NCC के Cadet रहे हैं, हमारे रक्षा राज्‍य मंत्री भी NCC के Cadet रहे हैं, हमारे देश की प्रथम विदेश मंत्री महिला सुषमा जी भी Cadet थी। सीने जगत में जय बच्‍चन जी हैं वो भी कभी NCC की Cadet हुआ करती थी। इन दिनों खेल जगत में हिंदुस्‍तान का नाम रोशन करने वाले अंजलि भागवत हो, लज्‍जा गौस्‍वामी हो, ये लोग भी कभी न कभी NCC के Cadet रहे हैं। जिन्‍होंने बाद में पुलिस बेडे में सर्विस की.. किरण बेदी जैसे बहुत लोग है, जो पहले NCC के कैडेट रहे हैं। 

तो मेरे लिए सौभाग्‍य की बात है कि जहां से मुझे देशभक्ति के और समूह जीवन के संस्‍कार मिले उस माहौल में दोबारा एक बार आप सबके बीच आने का अवसर मिला है। मैं NCC कैडेट रहा लेकिन दिल्‍ली आने के लिए हमारा selection कभी नहीं हुआ। और इसलिए मैं समझ सकता हूं कि आपका selection हुआ होगा तो आपने वहां अपने आप को किस प्रकार से प्रस्‍थापित किया होगा। 

जब मैं स्‍कूल में पढ़ता था तो हमारे स्‍कूल से एक सुमन चौधरी नाम का लड़का Cadet था, उसको दिल्‍ली आने का मौका मिला था 26 जनवरी के दिन। और वो हमारे स्‍कूल का हीरो था। जब वो दिल्‍ली से वापस आया सारा स्‍कूल उसको मिलने जाना, पूछने जाना, अनुभव सुनना और हम उसे देखकर बड़ा गौरव अनुभव करते थे, क्‍योंकि वो हमारे स्‍कूल से 26 जनवरी को यहां आया था। आप लोग भी जिन लोगों के बीच से यहां आए हैं वहां भी आपके लिए एक गौरव का माहौल होगा। जब आप जाएंगे तो बहुत सी बाते आपसे वो पूछना चाहेंगे। 

आप लोग अब घर जाने के लिए बड़े उत्‍सुक भी होंगे, इच्‍छुक भी होंगे। आपको लगता होगा जल्‍दी छुट्टी हो जाए अच्‍छा होगा। जो लोग राजपथ पर जाते थे, रात में एक बजे उठना, तीन बजे जाकर के practice करना। जिनको राजपथ के लिए मौका नहीं मिला था उनको पांच बजे उठना और दिल्‍ली की इस ठंड में क्‍या-क्‍या अनुभव नहीं किया होगा आपने, और कभी सोचते भी होंगे अच्‍छा हो कल सुबह पेट में दर्द हो जाए। अच्‍छा हो सुबह उठाने वाले यह कमरा भूल जाए। बहुत सी बाते मन में आई होगी। लेकिन आज बार जब मैदान में आते होंगे फिर वही जज्‍बा, वही उमंग, वही तरंग, वही उत्‍साह। 

एक प्रकार से मेरे सामने लघु भारत है और भारत के भविष्‍य का लघु रूप है। एक Cadet के रूप में जब हम समूह जीवन का अनुभव लेते हैं चाहे अपने राज्‍य में समूह जीवन का अनुभव हो, या पूरे राष्‍ट्र के लोगों के बीच में हो। तब हम एकता के सूत्र की अनुभूति करते हैं। हम NCC में समाज जीवन में यह सुनते आते हैं - कच्‍छ हो या कोहिमा, अपना देश अपनी माटी। विविधताओं से भरा हुआ अपना देश। जब तक अपने देश के अन्‍य लोगों से मिलते नहीं है या वहां जाते नहीं है। हमारा देश कितनी विविधताओं से भरा हुआ है। और विविधताा में एकता यही हमारे देश का सौंदर्य है, यही हमारे देश की ताकत है, यही हमारे देश की स्‍मृद्धि है और वही हमें सदा सर्वदा एक नई प्रेरणा भी देती है। 

स्‍वामी विवेकानंद जी के जीवन को हम जानते हैं। उन्‍होंने पूरे भारत का एक परिराजक के रूप में भ्रमण किया था। वो देश को आत्‍मसात करना चाहते थे। महात्‍मा गांधी अफ्रीका से आए तो उन्‍होंने ट्रेन में पूरे हिंदुस्‍तान का भ्रमण किया। वे पूरे भारत को आत्‍मसात करना चाहते हैं, हिंदुस्‍तान के हर साथ को वो जी लेना चाहते थे। अब्‍दुल कलाम जी की अगर आप जीवन चरित्र पढ़ोगें तो वो भी कहते हैं कि अपने गांव में पहली बार जब दिल्‍ली जाने के लिए निकला तो कितने परिवेश, कितने प्रकार के खान-पान कितने प्रकार की बोलियां - मुझे एक भारत का एहसास हुआ। उसी प्रकार से आपको इस एक महीने में एक संपूर्ण भारत उसकी विविधताओं का एहसास होगा और यह एहसास आपके अपने भीतर को विशालता की ओर ले जाता है। छोटे दायरे से बहुत बड़े विशाल फलक पर ले जाता है। अपने आप में एक संस्‍कार होते हैं। औरो के साथ जीना, औरो को जानना, ये भी अपने आप में बहुत बड़ा कौशल्‍य होता है. और ये इस disciplined life के दौरान हमे एक हमें जीने का अवसर मिलता है। 

जब हम परेड करते हैं तो सिर्फ कदम नहीं मिलते हैं। जब कदम मिलते हैं तो मन भी मिलता है और जब कदम मिल जायें मन मिल जाये तो मकसद भी मिल जाता है और इसीलिए... और वही मकसद होता है जो हमे आगे जाने की प्रेरना देता है, ताक़त देता है। 11 लाख से भी अधिक कैडेट एक साथ discipline के साथ यूनिफार्म के लाइफ के साथ और भारत में सीमा पर रक्षा करने वाले अपने जवान उनके प्रति एक एकात्मता की अनुभूति करता है। स्कूल में विद्यार्थी NCC की यूनिफार्म पहनता है तो मन से उसे लगता है मैं भी भारत माता की रक्षा करने वाले सीमा पर बैठे हुए उसी में से एक हूँ। ये जो राष्ट्र रक्षा की अनुभूति होती है उसके साथ जो एकात्मता का भाव आता है ये हमारी ज़िन्दगी की एक बहुत बड़ी ताक़त बन जाता है. 

मुझे विश्वास है की आप जिनको यहाँ आने का मौका मिला है वे और जो 11 लाख से अधिक NCC के कैडेट हैं उनको भी, और वे देश हम कितने भाग्यवान हैं 65% जनसंख्या आज हमारे देश की 35 साल से भी कम उम्र की है। जो देश इतना जवान हो, जिस देश के सपने इतने जवान हो, जिस देश की उर्जा इतनी जवान हो उस देश के कदम भी उसी जवानी के मुताबिक होते हैं। उस देश की सिद्धियां भी उसी जवानी को शोभा दे वैसी होती है। और इसलिए आपके माध्‍यम से पूरे राष्‍ट्र की युवा शक्ति इस बात की अनुभूति करे, गौरव करे, एहसास करे कि हम इन ऊंचाईयों को पार कर सकते हैं। 

हमने देखा बहुत बड़ी मात्रा में Girl Cadets भी हैं और कल तो आपने देखा होगा 26 जनवरी की परेड एक प्रकार से स्‍त्री शक्ति को समर्पित हो गई। देश ने देखा कि हमारे पास न सिर्फ रानी लक्ष्‍मीबाई, न सिर्फ जीजा माता लेकिन अब हर गांव, हर परिवार में रानी लक्ष्‍मीबाई और जीजा माता पैदा हो रही हैं। यह सामर्थ्‍य, देश की नारी शक्ति की यह अनुभूति देश, की अपने आप एक बहुत बड़ी नई धरोहर बनती है, नई ताकत बनती है। 

मैंने देखा अभी आपने एक टेबलो दिखाया, स्‍वच्‍छ भारत का। स्‍वच्‍छ भारत, यह कार्यक्रम नहीं है। स्‍वच्‍छ भारत, यह कोई event नहीं है। स्‍वच्‍छ भारत, यह स्‍वभाव बदलने का प्रयास है। जब तक हिंदुस्‍तान के सवा सौ करोड़ नागरिकों में स्‍वच्‍छता यह स्‍वभाव नहीं बनता है, तब तक हम लोगों को काम करना होगा। और मैं मानता हूं यह सब संभव है। एक बार बचपन से भी यह संस्‍कार शुरू हो जाए तो जीवनभर वो बाते रहती है मन में। आप NCC के Cadets के माध्‍यम से, एक तरफ तो हम स्‍वच्‍छता के लिए जरूर काम करे। लेकिन लेकिन साथ-साथ जिस स्‍कूल में हो, कॉलेज हो, जिस गांव में, जिस परिवार में हो, समाज में हो हर पल स्‍वच्‍छता एक स्‍वभाव कैसे बने? हम स्‍वच्‍छता के संबंध में कितने जागरूक हो? गलती से भी गंदगी न करे। आप देखिए भारत जिसके पास इतनी महान विरासत है अगर उसमें एक बार स्‍वच्‍छता जुड़ जाएगी तो पूरे विश्‍व में भारत के तरफ देखने का नजरिया बदल जाएगा। भारत के प्रति गौरव से देखेंगे लोग। और मैं मानता हूं यह भी भारत मां की सेवा करने का उत्‍तम रास्‍ता है। 

21 जून, United Nation ने विश्‍व योगा दिवस के रूप में घोषित किया है। जो जो भी लोग योगा में भरोसा करते हैं, योगा के विषय में जानते हैं उन सबके लिए ये एक गौरव की घटना है। अब योग यह किसी सीमा से सिमटा हुआ नहीं है। किसी एक ही भाषा के लोगों को विषय नहीं रहा। न ही किसी एक उम्र के लोगों का विषय रहा। आज योग दुनिया के हर कोने में पहुंचा है। हर समाज में पहुंचा है, हर भाषा भाषी में पहुंचा है, हर उम्र के लोगों में पहुंचा है, स्‍त्री और पुरूष में भी पहुंचा है। योग ने एक वैश्विक रूप ले लिया है। लेकिन तब भारत की एक विशेष जिम्‍मेवारी बनती है कि जिस धरती पर से योग की कल्‍पना का जन्‍म हुआ, हमें विश्‍व को सही योग का परिचय करवाना होगा। योग की सभी बातें विश्‍व तक पहुंचानी होगी और वो भी एक संतुलित संपन्‍न और सशक्‍त मानवजात के लिए आवश्‍यक है, इस रूप में योग की प्रस्‍तुति हो। मैं देशभर के एनसीसी के कैडेट से आग्रह करता हूं कि अभी से आप योजना बनाइये। 21 जून को एक साथ, एक समय सारे हिंदुस्‍तान में योग हो, दुनिया के सारे रिकॉर्ड टूट जाए इतनी बड़ी संख्‍या में हो, इतने उत्‍तम तरीके से हो और उस काम के लिए अभी से हम लग जाए। दुनिया के अंदर इन Cadets के माध्‍यम से हम एक बहुत बड़ा मजबूत संदेश और एक बहुत बड़ा प्रेरक संदेश हम विश्‍व को दे सकते हैं। 

NCC के संबंध में भी बदलती हुई दुनिया में आज सेना में सभी रूप सिर्फ शारीरिक ताकत पर निर्भर नहीं हैं। युद्ध जीतने में मानसिक ताकत सबसे बड़ी शक्ति होता है, लेकिन अब उसके साथ जुड़ा है टेक्‍नोलोजी, वैज्ञानिक सामर्थ्‍य। पढ़े लिखे लोगों.. सबसे ज्‍यादा पढ़े लिखे लोग आधुनिक से आधुनिक टेक्‍नोलोजी के जानकार लोग, इनकी अब सेना में बहुत आवश्‍यकता रही है। सारे NCC के Cadet अपने व्यक्तिगत जीवन में सर्वाधिक ऊंचाइयां प्राप्‍त करे और फिर मां भारती को अपने आप में समर्पित करे तो देश की सैन्‍य शक्ति में भी qualitative change आ सकता है और हमने उस दिशा में प्रयास करना चाहिए। 

कुछ छोटे-मोटे बदलाव भी हम करना चाहते हैं। मैंने Naval NCC के लिए कहा था कि क्‍यों न हमारे समुद्र तट के जो शहर है, छोटे नगर है और जहां NCC का यूनिट है। हमें कोशिश करनी चाहिए कि समुद्र तट के सभी एनसीसी यूनिट हो सके तो Naval यूनिट हो ताकि उनका समुद्र से नाता होता है, और समुद्र से नाता होता है तो आगे चलकर Navy में career बनाना भी उनको सहज स्‍वभाविक लगता है। और मुझे अच्‍छा लगा इस बार Naval के जो कैम पहले कभी यूनिवर्सिटी के कैम्‍पस में लगते थे या फिर स्‍कूल के कैम्‍पस में लगते थे। इस बार समुद्र के अंदर जहाज के अंदर NCC के लोगों के कैम्‍प लगे। NCC Naval के कैम्‍प लगे। यह अपने आप में एक अच्‍छा बदलाव है और इसी प्रकार से हम ज्‍यादा बदलाव लाना समायानुकूल बदलाव लाना और हमारी इस ताकत को राष्‍ट्र की एक अमोल धरोहर के रूप में हम कैसे आगे बढ़ाए उस दिशा में हम प्रयास करना चाहते हैं। 

26 जनवरी को आप लोगों ने भारत की आन, बान, शान बढ़ाने के लिए महीने भर यहां तपस्‍या की है। आप ही की यह तपस्‍या है, जिसने रंग दिखाया है। और इसलिए मैं आप सबको हृदय से बहुत-बहुत बधाई देता हूं, बहुत अभिनंदन करता हूं। 

और आज मुझे फिर उन पुरानी यादों के साथ आपके बीच आने का अवसर मिला, इसलिए मैं स्‍वयं को भी बहुत गौरवान्वित महसूस कर रहा हूं। मेरी आप सबको बहुत-बहुत शुभकामनाएं 

वंदेमातरम, वंदेमातरम, वंदेमातरम। 

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Role of newspapers is crucial in the journey to Viksit Bharat: PM Modi at inauguration of INS Towers in Mumbai
July 13, 2024
“Role of newspapers is very important in the journey to Viksit Bharat in the next 25 years”
“The citizens of a country who gain confidence in their capabilities start achieving new heights of success. The same is happening in India today”
“INS has not only been a witness to the ups and downs of India’s journey but also lived it and communicated it to the people”
“A country’s global image directly affects its economy. Indian publications should enhance their global presence”

महाराष्ट्र के गवर्नर श्रीमान रमेश बैस जी, मुख्यमंत्री श्रीमान एकनाथ शिंदे जी, उप मुख्यमंत्री भाई देवेंद्र फडणवीस जी, अजित दादा पवार जी, इंडियन न्यूज़पेपर सोसाइटी के प्रेसिडेंट भाई राकेश शर्मा जी, सभी वरिष्‍ठ महानुभाव, देवियों और सज्जनों!

सबले पहले मैं इंडियन न्यूज़पेपर सोसाइटी के सभी सदस्यों को बहुत-बहुत बधाई देता हूं। आज आप सभी को मुंबई में एक विशाल और आधुनिक भवन मिला है। मैं आशा करता हूँ, इस नए भवन से आपके कामकाज का जो विस्तार होगा, आपकी जो Ease of Working बढ़ेगी, उससे हमारे लोकतंत्र को भी और मजबूती मिलेगी। इंडियन न्यूज़पेपर सोसाइटी तो आज़ादी के पहले से अस्तित्व में आने वाली संस्‍थाओं में से एक है और इसलिए आप सबने देश की यात्रा के हर उतार-चढ़ाव को भी बहुत बारीकी से देखा है, उसे जिया भी है, और जन-सामान्‍य को बताया भी है। इसलिए, एक संगठन के रूप में आपका काम जितना प्रभावी बनेगा, देश को उसका उतना ही ज्यादा लाभ मिलेगा।

साथियों,

मीडिया केवल देश के हालातों का मूकदर्शक भर नहीं होता। मीडिया के आप सभी लोग, हालातों को बदलने में, देश को दिशा देने में एक अहम रोल निभाते हैं। आज भारत एक ऐसे कालखंड में है, जब उसकी अगले 25 वर्षों की यात्रा बहुत अहम है। इन 25 वर्षों में भारत विकसित बने, इसके लिए पत्र-पत्रिकाओं की भूमिका भी उतनी ही बड़ी है। ये मीडिया है, जो देश के नागरिकों को जागरूक करता है। ये मीडिया है, जो देश के नागरिकों को उनके अधिकार याद दिलाता रहता है। और यही मीडिया है, जो देश के लोगों को ये एहसास दिलाता है कि उनका सामर्थ्य क्या है। आप भी देख रहे हैं, जिस देश के नागरिकों में अपने सामर्थ्य को लेकर आत्मविश्वास आ जाता है, वो सफलता की नई ऊंचाई प्राप्त करने लगते हैं। भारत में भी आज यही हो रहा है। मैं एक छोटा सा उदाहरण देता हूं आपको। एक समय था, जब कुछ नेता खुलेआम कहते थे कि डिजिटल ट्रांजेक्शन भारत के लोगों के बस की बात नहीं है। ये लोग सोचते थे कि आधुनिक टेक्नोलॉजी वाली चीजें इस देश में नहीं चल पाएंगी। लेकिन भारत की जनता की सूझबूझ और उनका सामर्थ्य दुनिया देख रही है। आज भारत डिजिटल ट्रांजेक्शन में दुनिया में बड़े-बड़े रिकॉर्ड तोड़ रहा है। आज भारत के UPI की वजह से आधुनिक Digital Public Infrastructure की वजह से लोगों की Ease of Living बढ़ी है, लोगों के लिए एक स्थान से दूसरे स्थान तक पैसे भेजना आसान हुआ है। आज दुनियाभर में हमारे जो देशवासी रहते हैं, खासकर के गल्‍फ के देशों में, वो सबसे ज्यादा रेमिटेंस भेज रहे हैं और उनको जो पहले खर्च होता था, उसमें से बहुत कमी आ गई है और इसके पीछे एक वजह ये डिजिटल रेवेल्यूशन भी है। दुनिया के बड़े-बड़े देश हमसे टेक्नोलॉजी और हमारे implementation model को जानना-समझने को प्रयास कर रहे हैं। ये इतनी बड़ी सफलता सिर्फ सरकार की है, ऐसा नहीं है। इस सफलता में आप सभी मीडिया के लोगों की भी सहभागिता है औऱ इसलिए ही आप सब बधाई के भी पात्र हैं।

साथियों,

मीडिया की स्वाभाविक भूमिका होती है, discourse create करना, गंभीर विषयों पर चर्चाओं को बल देना। लेकिन, मीडिया के discourse की दिशा भी कई बार सरकार की नीतियों की दिशा पर निर्भर होती है। आप जानते हैं, सरकारों में हमेशा हर कामकाज के अच्छा है, बुरा है, लेकिन वोट का गुणा-भाग, उसकी आदत लगी ही रहती है। हमने आकर के इस सोच को बदला है। आपको याद होगा, हमारे देश में दशकों पहले बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया गया था। लेकिन, उसके बाद की सच्चाई ये थी कि 2014 तक देश में 40-50 करोड़ गरीब ऐसे थे, जिनका बैंक अकाउंट तक नहीं था। अब जब राष्ट्रीयकरण हुआ तब जो बातें कही गई और 2014 में जो देखा गया, यानी आधा देश बैंकिंग सिस्टम से बाहर था। क्या कभी हमारे देश में ये मुद्दा बना? लेकिन, हमने जनधन योजना को एक मूवमेंट के तौर पर लिया। हमने करीब 50 करोड़ लोगों को बैंकिंग सिस्टम से जोड़ा। डिजिटल इंडिया और भ्रष्टाचार विरोधी प्रयासों में यही काम हमारा सबसे बड़ा माध्यम बना है। इसी तरह, स्वच्छता अभियान, स्टार्टअप इंडिया, स्टैंडअप इंडिया जैसे अभियानों को अगर हम देखेंगे! ये वोट बैंक पॉलिटिक्स में कहीं फिट नहीं होते थे। लेकिन, बदलते हुए भारत में, देश के मीडिया ने इन्हें देश के नेशनल discourse का हिस्सा बनाया। जो स्टार्ट-अप शब्द 2014 के पहले ज्यादातर लोग जानते भी नहीं थे, उन्हें मीडिया की चर्चाओं ने ही घर-घर तक पहुंचा दिया है।

साथियों,

आप मीडिया के दिग्गज हैं, बहुत अनुभवी हैं। आपके निर्णय देश के मीडिया को भी दिशा देते हैं। इसलिए आज के इस कार्यक्रम में मेरे आपसे कुछ आग्रह भी हैं।

साथियों,

किसी कार्यक्रम को अगर सरकार शुरू करती है तो ये जरूरी नहीं है कि वो सरकारी कार्यक्रम है। सरकार किसी विचार पर बल देती है तो जरूरी नहीं है कि वो सिर्फ सरकार का ही विचार है। जैसे कि देश ने अमृत महोत्सव मनाया, देश ने हर घर तिरंगा अभियान चलाया, सरकार ने इसकी शुरुआत जरूर की, लेकिन इसको पूरे देश ने अपनाया और आगे बढ़ाया। इसी तरह, आज देश पर्यावरण पर इतना ज़ोर दे रहा है। ये राजनीति से हटकर मानवता के भविष्य का विषय है। जैसे कि, अभी ‘एक पेड़ मां के नाम’, ये अभियान शुरू हुआ है। भारत के इस अभियान की दुनिया में भी चर्चा शुरू हो गई है। मैं अभी जी7 में गया था जब मैंने इस विषय को रखा तो उनके लिए बड़ी उत्सुकता थी क्योंकि हर एक को अपनी मां के प्रति लगाव रहता है कि उसको लगता है कि ये बहुत क्लिक कर जाएगा, हर कोई कह रहा था। देश के ज्यादा से ज्यादा मीडिया हाउस इससे जुड़ेंगे तो आने वाली पीढ़ियों का बहुत भला होगा। मेरा आग्रह है, ऐसे हर प्रयास को आप देश का प्रयास मानकर उसे आगे बढ़ाएं। ये सरकार का प्रयास नहीं है, ये देश का है। इस साल हम संविधान का 75वां वर्ष भी मना रहे हैं। संविधान के प्रति नागरिकों में कर्तव्य बोध बढ़े, उनमें जागरूकता बढ़े, इसमें आप सभी की बहुत बड़ी भूमिका हो सकती है।

साथियों,

एक विषय है टूरिज्म से जुड़ा हुआ भी। टूरिज्म सिर्फ सरकार की नीतियों से ही नहीं बढ़ता है। जब हम सब मिलकर देश की ब्रांडिंग और मार्केटिंग करते हैं तो, देश के सम्मान के साथ-साथ देश का टूरिज़्म भी बढ़ता है। देश में टूरिज्म बढ़ाने के लिए आप लोग अपने तरीके निकाल सकते हैं। अब जैसे मान लीजिए, महाराष्ट्र के सभी अखबार मिलकर के तय करें कि भई हम सितम्बर महीने में बंगाल के टूरिज्म को प्रमोट करेंगे अपनी तरफ से, तो जब महाराष्ट्र के लोग चारों तरफ जब बंगाल-बंगाल देखें तो उनको करें कि यार इस बार बंगाल जाने का कार्यक्रम बनाएं, तो बंगाल का टूरिज्‍म बढ़ेगा। मान लीजिए आप तीन महीने के बाद तय करें कि भई हम तमिलनाडु की सारी चीजों पर सब मिलकर के, एक ये करें के एक दूसरा करें ऐसा नहीं, तमिलनाडु फोकस करेंगे। आप देखिए एक दम से महाराष्ट्र के लोग टूरिज्‍म में जाने वाले होंगे, तो तमिलनाडु की तरफ जाएंगे। देश के टूरिज्म को बढ़ाने का एक तरीका हो और जब आप ऐसा करेंगे तो उन राज्यों में भी महाराष्ट्र के लिए ऐसे ही कैम्पेन शुरू होंगे, जिसका लाभ महाराष्‍ट्र को मिलेगा। इससे राज्यों में एक दूसरे के प्रति आकर्षण बढ़ेगा, जिज्ञासा बढ़ेगी और आखिरकार इसका फायदा जिस राज्य में आप ये इनिशिएटिव ले रहे हें और बिना कोई एक्‍स्‍ट्रा प्रयास किए बिना आराम से होने वाला काम है।

साथियों,

आप सभी से मेरा आग्रह अपनी ग्लोबल प्रेजेंस बढ़ाने को लेकर भी है। हमें सोचना होगा, दुनिया में हम नहीं है। As far as media is concerned हम 140 करोड़ लोगों के देश हैं। इतना बड़ा देश, इतना सामर्थ्य और संभावनाएं और बहुत ही कम समय में हम भारत को third largest economy होते देखने वाले हैं। अगर भारत की सफलताएं, दुनिया के कोने-कोने तक पहुंचाने का दायित्व भी आप बहुत बखूबी ही निभा सकते हैं। आप जानते हैं कि विदेशों में राष्ट्र की छवि का प्रभाव सीधे उसकी इकोनॉमी और ग्रोथ पर पड़ता है। आज आप देखिए, विदेशों में भारतीय मूल के लोगों का कद बढ़ा है, विश्वसनीयता बढ़ी है, सम्मान बढ़ा है। क्योंकि, विश्व में भारत की साख बढ़ी है। भारत भी वैश्विक प्रगति में कहीं ज्यादा योगदान दे पा रहा है। हमारा मीडिया इस दृष्टिकोण से जितना काम करेगा, देश को उतना ही फायदा होगा और इसलिए मैं तो चाहूंगा कि जितनी भी UN लैंग्वेज हैं, उनमें भी आपके पब्लिकेशंस का विस्तार हो। आपकी माइक्रोसाइट्स, सोशल मीडिया accounts इन भाषाओं में भी हो सकते हैं और आजकल तो AI का जमाना है। ये सब काम आपके लिए अब बहुत आसान हो गए हैं।

साथियों,

मैंने इतने सारे सुझाव आप सबको दे डाले हैं। मुझे मालूम है, आपके अखबार में, पत्र पत्रिकाओं में, बहुत लिमिटेड स्पेस रहती है। लेकिन, आजकल हर अखबार पर और हर एक के पास एक publication के डिजिटल editions भी पब्लिश हो रहे हैं। वहाँ न स्पेस की limitation है और न ही distribution की कोई समस्या है। मुझे भरोसा है, आप सब इन सुझावों पर विचार करके, नए experiments करेंगे, और लोकतंत्र को मजबूत बनाएँगे। और मैं पक्‍का मानता हूं कि आपके लिए एक, भले ही दो पेज की छोटी एडिशन जो दुनिया की UN की कम से कम languages हों, दुनिया का अधिकतम वर्ग उसको देखता है, पढ़ता है… embassies उसको देखती हैं और भारत की बात पहुंचाने की एक बहुत बड़ा source आपके ये जो डिजिटल एडिशंस हैं, उसमें बन सकता है। आप जितना सशक्त होकर काम करेंगे, देश उतना ही आगे बढ़ेगा। इसी विश्वास के साथ, आप सभी का बहुत-बहुत धन्यवाद! और आप सबसे मिलने का मुझे अवसर भी मिल गया। मेरी आपको बहुत शुभकामनाएं हैं! धन्‍यवाद!