मंच पर उपस्थित रक्षा मंत्री श्री मनोहर परिकर जी, रक्षा राज्‍य मंत्री श्रीमान इंद्रजीत जी, आर्मी, नेवी, एयरफोर्स के तीनों अध्‍यक्ष, NCC के मुखिया और देशभर से आए हुए NCC के सभी Cadets, पड़ोसी देशों से आए हुए हमारे सभी Cadet मेहमान, विशाल संख्‍या में उपस्थित भाईयों और बहनों। 

मुझे भी आज बचपन की यादें ताजा हो गई, क्‍योंकि मैं भी NCC में Cadet रहा, हमारे रक्षा मंत्री भी NCC के Cadet रहे हैं, हमारे रक्षा राज्‍य मंत्री भी NCC के Cadet रहे हैं, हमारे देश की प्रथम विदेश मंत्री महिला सुषमा जी भी Cadet थी। सीने जगत में जय बच्‍चन जी हैं वो भी कभी NCC की Cadet हुआ करती थी। इन दिनों खेल जगत में हिंदुस्‍तान का नाम रोशन करने वाले अंजलि भागवत हो, लज्‍जा गौस्‍वामी हो, ये लोग भी कभी न कभी NCC के Cadet रहे हैं। जिन्‍होंने बाद में पुलिस बेडे में सर्विस की.. किरण बेदी जैसे बहुत लोग है, जो पहले NCC के कैडेट रहे हैं। 

तो मेरे लिए सौभाग्‍य की बात है कि जहां से मुझे देशभक्ति के और समूह जीवन के संस्‍कार मिले उस माहौल में दोबारा एक बार आप सबके बीच आने का अवसर मिला है। मैं NCC कैडेट रहा लेकिन दिल्‍ली आने के लिए हमारा selection कभी नहीं हुआ। और इसलिए मैं समझ सकता हूं कि आपका selection हुआ होगा तो आपने वहां अपने आप को किस प्रकार से प्रस्‍थापित किया होगा। 

जब मैं स्‍कूल में पढ़ता था तो हमारे स्‍कूल से एक सुमन चौधरी नाम का लड़का Cadet था, उसको दिल्‍ली आने का मौका मिला था 26 जनवरी के दिन। और वो हमारे स्‍कूल का हीरो था। जब वो दिल्‍ली से वापस आया सारा स्‍कूल उसको मिलने जाना, पूछने जाना, अनुभव सुनना और हम उसे देखकर बड़ा गौरव अनुभव करते थे, क्‍योंकि वो हमारे स्‍कूल से 26 जनवरी को यहां आया था। आप लोग भी जिन लोगों के बीच से यहां आए हैं वहां भी आपके लिए एक गौरव का माहौल होगा। जब आप जाएंगे तो बहुत सी बाते आपसे वो पूछना चाहेंगे। 

आप लोग अब घर जाने के लिए बड़े उत्‍सुक भी होंगे, इच्‍छुक भी होंगे। आपको लगता होगा जल्‍दी छुट्टी हो जाए अच्‍छा होगा। जो लोग राजपथ पर जाते थे, रात में एक बजे उठना, तीन बजे जाकर के practice करना। जिनको राजपथ के लिए मौका नहीं मिला था उनको पांच बजे उठना और दिल्‍ली की इस ठंड में क्‍या-क्‍या अनुभव नहीं किया होगा आपने, और कभी सोचते भी होंगे अच्‍छा हो कल सुबह पेट में दर्द हो जाए। अच्‍छा हो सुबह उठाने वाले यह कमरा भूल जाए। बहुत सी बाते मन में आई होगी। लेकिन आज बार जब मैदान में आते होंगे फिर वही जज्‍बा, वही उमंग, वही तरंग, वही उत्‍साह। 

एक प्रकार से मेरे सामने लघु भारत है और भारत के भविष्‍य का लघु रूप है। एक Cadet के रूप में जब हम समूह जीवन का अनुभव लेते हैं चाहे अपने राज्‍य में समूह जीवन का अनुभव हो, या पूरे राष्‍ट्र के लोगों के बीच में हो। तब हम एकता के सूत्र की अनुभूति करते हैं। हम NCC में समाज जीवन में यह सुनते आते हैं - कच्‍छ हो या कोहिमा, अपना देश अपनी माटी। विविधताओं से भरा हुआ अपना देश। जब तक अपने देश के अन्‍य लोगों से मिलते नहीं है या वहां जाते नहीं है। हमारा देश कितनी विविधताओं से भरा हुआ है। और विविधताा में एकता यही हमारे देश का सौंदर्य है, यही हमारे देश की ताकत है, यही हमारे देश की स्‍मृद्धि है और वही हमें सदा सर्वदा एक नई प्रेरणा भी देती है। 

स्‍वामी विवेकानंद जी के जीवन को हम जानते हैं। उन्‍होंने पूरे भारत का एक परिराजक के रूप में भ्रमण किया था। वो देश को आत्‍मसात करना चाहते थे। महात्‍मा गांधी अफ्रीका से आए तो उन्‍होंने ट्रेन में पूरे हिंदुस्‍तान का भ्रमण किया। वे पूरे भारत को आत्‍मसात करना चाहते हैं, हिंदुस्‍तान के हर साथ को वो जी लेना चाहते थे। अब्‍दुल कलाम जी की अगर आप जीवन चरित्र पढ़ोगें तो वो भी कहते हैं कि अपने गांव में पहली बार जब दिल्‍ली जाने के लिए निकला तो कितने परिवेश, कितने प्रकार के खान-पान कितने प्रकार की बोलियां - मुझे एक भारत का एहसास हुआ। उसी प्रकार से आपको इस एक महीने में एक संपूर्ण भारत उसकी विविधताओं का एहसास होगा और यह एहसास आपके अपने भीतर को विशालता की ओर ले जाता है। छोटे दायरे से बहुत बड़े विशाल फलक पर ले जाता है। अपने आप में एक संस्‍कार होते हैं। औरो के साथ जीना, औरो को जानना, ये भी अपने आप में बहुत बड़ा कौशल्‍य होता है. और ये इस disciplined life के दौरान हमे एक हमें जीने का अवसर मिलता है। 

जब हम परेड करते हैं तो सिर्फ कदम नहीं मिलते हैं। जब कदम मिलते हैं तो मन भी मिलता है और जब कदम मिल जायें मन मिल जाये तो मकसद भी मिल जाता है और इसीलिए... और वही मकसद होता है जो हमे आगे जाने की प्रेरना देता है, ताक़त देता है। 11 लाख से भी अधिक कैडेट एक साथ discipline के साथ यूनिफार्म के लाइफ के साथ और भारत में सीमा पर रक्षा करने वाले अपने जवान उनके प्रति एक एकात्मता की अनुभूति करता है। स्कूल में विद्यार्थी NCC की यूनिफार्म पहनता है तो मन से उसे लगता है मैं भी भारत माता की रक्षा करने वाले सीमा पर बैठे हुए उसी में से एक हूँ। ये जो राष्ट्र रक्षा की अनुभूति होती है उसके साथ जो एकात्मता का भाव आता है ये हमारी ज़िन्दगी की एक बहुत बड़ी ताक़त बन जाता है. 

मुझे विश्वास है की आप जिनको यहाँ आने का मौका मिला है वे और जो 11 लाख से अधिक NCC के कैडेट हैं उनको भी, और वे देश हम कितने भाग्यवान हैं 65% जनसंख्या आज हमारे देश की 35 साल से भी कम उम्र की है। जो देश इतना जवान हो, जिस देश के सपने इतने जवान हो, जिस देश की उर्जा इतनी जवान हो उस देश के कदम भी उसी जवानी के मुताबिक होते हैं। उस देश की सिद्धियां भी उसी जवानी को शोभा दे वैसी होती है। और इसलिए आपके माध्‍यम से पूरे राष्‍ट्र की युवा शक्ति इस बात की अनुभूति करे, गौरव करे, एहसास करे कि हम इन ऊंचाईयों को पार कर सकते हैं। 

हमने देखा बहुत बड़ी मात्रा में Girl Cadets भी हैं और कल तो आपने देखा होगा 26 जनवरी की परेड एक प्रकार से स्‍त्री शक्ति को समर्पित हो गई। देश ने देखा कि हमारे पास न सिर्फ रानी लक्ष्‍मीबाई, न सिर्फ जीजा माता लेकिन अब हर गांव, हर परिवार में रानी लक्ष्‍मीबाई और जीजा माता पैदा हो रही हैं। यह सामर्थ्‍य, देश की नारी शक्ति की यह अनुभूति देश, की अपने आप एक बहुत बड़ी नई धरोहर बनती है, नई ताकत बनती है। 

मैंने देखा अभी आपने एक टेबलो दिखाया, स्‍वच्‍छ भारत का। स्‍वच्‍छ भारत, यह कार्यक्रम नहीं है। स्‍वच्‍छ भारत, यह कोई event नहीं है। स्‍वच्‍छ भारत, यह स्‍वभाव बदलने का प्रयास है। जब तक हिंदुस्‍तान के सवा सौ करोड़ नागरिकों में स्‍वच्‍छता यह स्‍वभाव नहीं बनता है, तब तक हम लोगों को काम करना होगा। और मैं मानता हूं यह सब संभव है। एक बार बचपन से भी यह संस्‍कार शुरू हो जाए तो जीवनभर वो बाते रहती है मन में। आप NCC के Cadets के माध्‍यम से, एक तरफ तो हम स्‍वच्‍छता के लिए जरूर काम करे। लेकिन लेकिन साथ-साथ जिस स्‍कूल में हो, कॉलेज हो, जिस गांव में, जिस परिवार में हो, समाज में हो हर पल स्‍वच्‍छता एक स्‍वभाव कैसे बने? हम स्‍वच्‍छता के संबंध में कितने जागरूक हो? गलती से भी गंदगी न करे। आप देखिए भारत जिसके पास इतनी महान विरासत है अगर उसमें एक बार स्‍वच्‍छता जुड़ जाएगी तो पूरे विश्‍व में भारत के तरफ देखने का नजरिया बदल जाएगा। भारत के प्रति गौरव से देखेंगे लोग। और मैं मानता हूं यह भी भारत मां की सेवा करने का उत्‍तम रास्‍ता है। 

21 जून, United Nation ने विश्‍व योगा दिवस के रूप में घोषित किया है। जो जो भी लोग योगा में भरोसा करते हैं, योगा के विषय में जानते हैं उन सबके लिए ये एक गौरव की घटना है। अब योग यह किसी सीमा से सिमटा हुआ नहीं है। किसी एक ही भाषा के लोगों को विषय नहीं रहा। न ही किसी एक उम्र के लोगों का विषय रहा। आज योग दुनिया के हर कोने में पहुंचा है। हर समाज में पहुंचा है, हर भाषा भाषी में पहुंचा है, हर उम्र के लोगों में पहुंचा है, स्‍त्री और पुरूष में भी पहुंचा है। योग ने एक वैश्विक रूप ले लिया है। लेकिन तब भारत की एक विशेष जिम्‍मेवारी बनती है कि जिस धरती पर से योग की कल्‍पना का जन्‍म हुआ, हमें विश्‍व को सही योग का परिचय करवाना होगा। योग की सभी बातें विश्‍व तक पहुंचानी होगी और वो भी एक संतुलित संपन्‍न और सशक्‍त मानवजात के लिए आवश्‍यक है, इस रूप में योग की प्रस्‍तुति हो। मैं देशभर के एनसीसी के कैडेट से आग्रह करता हूं कि अभी से आप योजना बनाइये। 21 जून को एक साथ, एक समय सारे हिंदुस्‍तान में योग हो, दुनिया के सारे रिकॉर्ड टूट जाए इतनी बड़ी संख्‍या में हो, इतने उत्‍तम तरीके से हो और उस काम के लिए अभी से हम लग जाए। दुनिया के अंदर इन Cadets के माध्‍यम से हम एक बहुत बड़ा मजबूत संदेश और एक बहुत बड़ा प्रेरक संदेश हम विश्‍व को दे सकते हैं। 

NCC के संबंध में भी बदलती हुई दुनिया में आज सेना में सभी रूप सिर्फ शारीरिक ताकत पर निर्भर नहीं हैं। युद्ध जीतने में मानसिक ताकत सबसे बड़ी शक्ति होता है, लेकिन अब उसके साथ जुड़ा है टेक्‍नोलोजी, वैज्ञानिक सामर्थ्‍य। पढ़े लिखे लोगों.. सबसे ज्‍यादा पढ़े लिखे लोग आधुनिक से आधुनिक टेक्‍नोलोजी के जानकार लोग, इनकी अब सेना में बहुत आवश्‍यकता रही है। सारे NCC के Cadet अपने व्यक्तिगत जीवन में सर्वाधिक ऊंचाइयां प्राप्‍त करे और फिर मां भारती को अपने आप में समर्पित करे तो देश की सैन्‍य शक्ति में भी qualitative change आ सकता है और हमने उस दिशा में प्रयास करना चाहिए। 

कुछ छोटे-मोटे बदलाव भी हम करना चाहते हैं। मैंने Naval NCC के लिए कहा था कि क्‍यों न हमारे समुद्र तट के जो शहर है, छोटे नगर है और जहां NCC का यूनिट है। हमें कोशिश करनी चाहिए कि समुद्र तट के सभी एनसीसी यूनिट हो सके तो Naval यूनिट हो ताकि उनका समुद्र से नाता होता है, और समुद्र से नाता होता है तो आगे चलकर Navy में career बनाना भी उनको सहज स्‍वभाविक लगता है। और मुझे अच्‍छा लगा इस बार Naval के जो कैम पहले कभी यूनिवर्सिटी के कैम्‍पस में लगते थे या फिर स्‍कूल के कैम्‍पस में लगते थे। इस बार समुद्र के अंदर जहाज के अंदर NCC के लोगों के कैम्‍प लगे। NCC Naval के कैम्‍प लगे। यह अपने आप में एक अच्‍छा बदलाव है और इसी प्रकार से हम ज्‍यादा बदलाव लाना समायानुकूल बदलाव लाना और हमारी इस ताकत को राष्‍ट्र की एक अमोल धरोहर के रूप में हम कैसे आगे बढ़ाए उस दिशा में हम प्रयास करना चाहते हैं। 

26 जनवरी को आप लोगों ने भारत की आन, बान, शान बढ़ाने के लिए महीने भर यहां तपस्‍या की है। आप ही की यह तपस्‍या है, जिसने रंग दिखाया है। और इसलिए मैं आप सबको हृदय से बहुत-बहुत बधाई देता हूं, बहुत अभिनंदन करता हूं। 

और आज मुझे फिर उन पुरानी यादों के साथ आपके बीच आने का अवसर मिला, इसलिए मैं स्‍वयं को भी बहुत गौरवान्वित महसूस कर रहा हूं। मेरी आप सबको बहुत-बहुत शुभकामनाएं 

वंदेमातरम, वंदेमातरम, वंदेमातरम। 

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युवाओं को राष्ट्र को दासता की मानसिकता से मुक्त करने का संकल्प लेना चाहिए: प्रधानमंत्री

केंद्रीय मंत्रिमंडल के मेरे साथी, सभी सांसदगण, विकसित भारत यंग लीडर्स चैलेंज के विनर्स, अन्य महानुभाव और देशभर से यहां आए मेरे सभी युवा साथी, विदेशों से जो नौजवान आएं हैं, उनको भी यहां एक नया अनुभव मिला होगा। आप लोग थक नहीं गए? दो दिन से यही कर रहे हैं, तो अब क्या सुन- सुनके थक नहीं जाओगे? वैसे तो बैक सीट में मैंने जितना कहना था, कह दिया था। जब मैंने पहली बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी, तब मैं समझता हूं आप में से बहुत सारे युवा ऐसे होंगे, जिनका जन्म भी नहीं हुआ होगा। और जब मैंने 2014 में प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी, तब आप में से ज्यादातर लोगों को बच्चा कहा जाता होगा। लेकिन पहले मुख्यमंत्री के रूप में और फिर अभी प्रधानमंत्री के रूप में, मुझे हमेशा युवा पीढ़ी पर बहुत ज्यादा विश्वास रहा है। आपका सामर्थ्य, आपका टैलेंट, मैं हमेशा आपकी एनर्जी से, खुद भी एनर्जी पाता रहा हूं। और आज देखिए, आज आप सभी विकसित भारत के लक्ष्य की बागडोर थामे हुए हैं।

साथियों,

साल 2047 में, जब हमारी आजादी के 100 साल होंगे, वहां तक की यात्रा भारत के लिए भी अहम है, और यही वो समय है, जो आपके जीवन में भी सबसे महत्वपूर्ण है, यानी बड़ी golden opportunity है आपके लिए। आपका सामर्थ्य, भारत का सामर्थ्य बनेगा, आपकी सफलता, भारत की सफलता को नई ऊंचाइयां जरूर देगी। मैं आप सभी को विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग में सहभागिता के लिए बहुत-बहुत बधाई देता हूं। मैं इस विषय पर आगे विस्तार से बात जरूर करूंगा, लेकिन पहले बात आज के विशेष दिन की।

साथियों,

आप सभी जानते हैं कि आज स्वामी विवेकानंद जी की जन्म जयंती है। स्वामी विवेकानंद जी के विचार, आज भी हर युवा के लिए प्रेरणा हैं। हमारे जीवन का लक्ष्य क्या है, purpose of life क्या है, कैसे हम नेशन फर्स्ट की भावना के साथ अपना जीवन जीएं। हमारे हर प्रयास में समाज का,देश का हित हो, इस दिशा में स्वामी विवेकानंद जी का जीवन हम सभी के लिए बहुत बड़ा मार्गदर्शक है, प्रेरक है। स्वामी विवेकानंद का स्मरण करते हुए, हर साल 12 जनवरी को हम राष्ट्रीय युवा दिवस मनाते हैं, और उन्हीं की प्रेरणा आज 12 जनवरी को विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग के लिए चुना गया है।

साथियों,

मुझे खुशी है कि बहुत ही कम समय में विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग इतना बड़ा प्लेटफॉर्म बन गया है। एक ऐसा प्लेटफॉर्म, जहां देश के विकास की दिशा तय करने में युवाओं की सीधी भागीदारी होती है। करोड़ों नौजवानों का इससे जुड़ना, 50 लाख से अधिक नौजवानों की रजिस्ट्री, 30 लाख से अधिक युवाओं का विकसित भारत चैलेंज में हिस्सा लेना, देश के विकास के लिए अपने विचार शेयर करना, इतने बड़े स्केल पर युवाशक्ति का एंगेज होना, अपने आप में अभूतपूर्व है। दुनिया के अनेक देशों में आमतौर पर थिंक टैंक, यह शब्द बहुत प्रचलित है। थिंक टैंक की चर्चा भी होती है। और उस थिंक टैंक का प्रभाव भी बहुत होता है। वे एक प्रकार से ओपिनियन मेकर्स का एक समूह बन जाता है। लेकिन शायद, आज जो मैंने प्रेजेंटेशन देखें और जिस प्रकार से challenging होते-होते आप लोगों ने, यहां तक जो लाए हैं। मैं समझता हूं कि ये अपने आप में, ये इवेंट institutionalized तो हुआ है, एक अपने आप में, दुनिया में अनोखी थिंक टैंक के रूप में उसने अपनी जगह बना ली। एक निश्चित विषय को लेकर, निश्चित लक्ष्य को लेकर के लाखों लोगों का मंथन होना, इससे बड़ा थिंकिंग क्या हो सकता है? और मुझे लगता है कि इसके साथ थिंक टैंक शब्द बैठता नहीं है, क्योंकि टैंक शब्द इसलिए आया होगा, छोटा सा होता है, ये तो विशाल है, सागर से भी विशाल है और समय से भी आगे है, और विचारों में समंदर से भी ज्यादा गहरा है। और इसलिए थिंक टैंक शब्द, टैंक वाले शब्द से भी सीमित नहीं किया जा सकता, ऐसा इसका अनुभव है। और जिन विषयों को आज आपने चर्चा में लिया हैं, जैसे खासतौर पर Women Led Development और Youth Participation in Democracy, ऐसे गंभीर विषयों पर जिस प्रकार से विचार आपने रखें हैं, ये प्रशंसनीय है। थोड़ी देर पहले आपने यहां जो प्रजेंटेशन रखे, अलग-अलग थीम्स को लेकर प्रभावी बात रखी है। ये दिखाता है कि हमारी अमृत पीढ़ी, विकसित भारत के निर्माण के लिए कितनी संकल्पित है। इससे ये भी स्पष्ट होता है कि भारत में जेन-ज़ी का मिज़ाज क्या है। भारत का जेन-ज़ी कितनी creativity से भरा हुआ है। मैं आप सभी युवा साथियों को मेरा युवा भारत संगठन से जुड़े सभी नौजवानों को इस आयोजन के लिए और इसकी सफलता के लिए, मैं बहुत-बहुत बधाई देता हूं, आप सबका अभिनंदन करता हूं।

साथियों,

मैंने जब अभी आपसे बातचीत शुरू की तो 2014 का जिक्र किया था। तब यहाँ बैठे ज़्यादातर युवा 8–10 साल के ही रहे होंगे। अखबार पढ़ने की उनकी आदत भी नहीं डेवलप हुई होगी। आपने पॉलिसी पैरालिसिस का वो पुराना दौर नहीं देखा, जब उस समय की सरकार की इसलिए आलोचना होती थी कि वो समय पर फैसले नहीं लेती। और जो फैसले होते भी थे, वो ज़मीन पर ठीक से लागू नहीं होते थे। नियम-कायदे ऐसे थे, जिससे हमारा नौजवान कुछ नया करने के बारे में सोच भी नहीं सकता था। देश का युवा परेशान था कि इतनी बंदिशों में वो जाए तो, जाए कहां।

साथियों,

हालत ये थी कि अगर किसी एग्जाम के लिए, जॉब के लिए अप्लाई करना होता था, तो सर्टिफिकेट अटेस्ट कराने के लिए अफसरों और नेताओं के साइन लेने में ही दम निकल जाता था। फिर फीस का डिमांड ड्राफ्ट बनाने के लिए बैंकों और पोस्ट-ऑफिस के चक्कर लगाने पड़ते थे। अपना कोई बिजनेस शुरु करना होता था, तो बैंक कुछ हज़ार रुपए के लोन के लिए 100 गारंटी मांगते थे। आज ये बातें बहुत असामान्य लगती हैं, लेकिन एक दशक पहले तक यही सबकुछ चलता था।

साथियों,

आपने यहां स्टार्ट-अप्स को लेकर प्रेजेंटेशन दिया, मैं आपको स्टार्ट-अप इकोसिस्टम का ही उदाहरण देता हूं, कि इसमें जो परिवर्तन होता है, वो कैसे हुआ है। दुनिया में 50-60 साल पहले स्टार्ट अप कल्चर शुरु हुआ, धीरे-धीरे वो मेगा-कॉर्पोरेशन्स के युग में बदल गया, लेकिन इस पूरी जर्नी के दौरान भारत में स्टार्ट अप्स के बारे में बहुत कम चर्चा होती थी। साल 2014 तक तो देश में 500 से भी कम रजिस्टर्ड स्टार्ट-अप हुआ करते थे। स्टार्ट अप कल्चर के अभाव में, हर क्षेत्र में सरकार का ही दखल हावी रहा। हमारा युवा टैलेंट, उसका सामर्थ्य, उसे अपने सपने पूरे करने का मौका ही नहीं मिला।

साथियों,

मुझे अपने देश के युवाओं पर भरोसा है, आपके सामर्थ्य पर भरोसा है, इसलिए हमने एक अलग राह चुनी। हमने युवाओं को ध्यान में रखते हुए, एक के बाद एक नई स्कीम्स बनाई, यहीं से Startup Revolution ने भारत में असली गति पकड़ी। Ease of Doing Business reforms, Startup India, Digital India, Fund of Funds, Tax और compliance simplification, ऐसे अनेक Initiatives लिए गए। ऐसे सेक्टर,जहां पहले सिर्फ सरकार ही सबकुछ थी, सबकुछ उसी की चलती थी, उनको युवा इनोवेशन, युवा एंटरप्राइज़ के लिए ओपन किया गया। इसका जो प्रभाव हुआ, वो भी एक अलग ही सक्सेस स्टोरी बन चुका है।

साथियों,

आप स्पेस सेक्टर को ही लीजिए, 5-6 साल पहले तक स्पेस सेक्टर को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी सिर्फ ISRO पर थी। हमने स्पेस को प्राइवेट एंटरप्राइज के लिए ओपन किया, इससे जुड़ी व्यवस्थाएं बनाईं, संस्थाएं तैयार कीं और आज स्पेस सेक्टर में 300 से अधिक स्टार्ट-अप्स काम कर रहे हैं। देखते ही देखते हमारे स्टार्टअप Skyroot Aerospace ने अपना रॉकेट 'विक्रम-S' तैयार कर लिया है। एक और स्टार्ट अप अग्निकुल Cosmos ने दुनिया का पहला 3D प्रिंटेड इंजन बनाकर सबको चौंका दिया, ये सब स्टार्टअप की कमाल है। भारत के स्पेस स्टार्टअप्स अब लगातार कमाल करके दिखा रहे हैं।

साथियों,

मैं अब आपसे एक सवाल करता हूं। आप कल्पना करिए कि अगर ड्रोन उड़ाने पर चौबीसों घंटे अनेकों तरह की पाबंदी लगी रहती, तो क्या होता? ये थी। पहले हमारे यहां ड्रोन उड़ाना या बनाना, दोनों कानूनों के जाल में फंसा हुआ था। लाइसेंस लेना पहाड़ चढ़ने जैसा काम था और इसे केवल सुरक्षा के नजरिए से ही देखा जाता था। हमने नए नियम बनाए, नियम आसान किए, इसके कारण आज हमारे यहां कितने ही युवाओं को ड्रोन से जुड़े सेक्टर में आगे बढ़ने का मौका मिला है। युद्ध-क्षेत्र में मेड इन इंडिया ड्रोन देश के दुश्मनों को धूल चटा रहे हैं, और कृषि क्षेत्र में हमारी नमो ड्रोन दीदियां खेती में ड्रोन टेक्नोलॉजी का उपयोग कर रही हैं।

साथियों,

डिफेंस सेक्टर भी पहले सरकारी कंपनियों पर ही निर्भर था। हमारी सरकार ने इसको भी बदला, भारत के डिफेंस इकोसिस्टम में स्टार्ट अप्स के लिए दरवाजे खोले। इसका बहुत बड़ा फायदा हमारे युवाओं को ही मिला। आज भारत में 1000 से अधिक डिफेंस स्टार्ट अप्स काम कर रहे हैं। आज एक युवा ड्रोन बना रहा है, तो दूसरा युवा एंटी-ड्रोन सिस्टम बना रहा है, कोई AI कैमरा बना रहा है, कोई रोबोटिक्स पर काम कर रहा है।

साथियों,

डिजिटल इंडिया ने भी भारत में क्रिएटर्स की एक नई कम्युनिटी खड़ी कर दी है। भारत आज 'ऑरेंज इकोनॉमी' यानि कल्चर, कंटेंट और क्रिएटिविटी का अभूतपूर्व विकास होते देख रहा है। भारत मीडिया, फिल्म, गेमिंग, म्यूज़िक,डिजिटल कंटेंट,VR-XR जैसे क्षेत्रों में एक बड़ा ग्लोबल सेंटर बन रहा है। अभी यहां पर एक प्रेजेंटेशन में हमारे कल्चर को एक्सपोर्ट करने की बात आई। मैं तो आप नौजवानों से आग्रह करता हूं, हमारी जो कहानियां हैं, कहानी- किस्से हैं, रामायण है, महाभारत है, बहुत कुछ है। क्या हम उसमें गेमिंग की दुनिया में ले जा सकते है, इन चीजों को? पूरी दुनिया में गेमिंग एक बहुत बड़ा मार्केट है, बहुत बड़ी इकोनॉमी है। हम अपनी माइथोलॉजी की कथाओं को लेकर के भी गेमिंग की दुनिया में नए-नए खेल ले जा सकते हैं, हमारे हनुमान जी पूरी दुनिया की गेमिंग को चला सकते हैं। हमारा कल्चर भी एक्सपोर्ट हो जाएगा, आधुनिक रूप में हो जाएगा, टेक्नोलॉजी का उपयोग होगा। और आजकल भी मैं देख रहा हूं, हमारे देश के इस कई स्टार्टअप है, जो गेमिंग की दुनिया में बहुत बढ़िया भारत की बातें कह रहे हैं, और बच्चों को भी खेलते-खेलते भारत को समझना सरल हो जाता है।

साथियों,

'वर्ल्ड ऑडियो-विजुअल एंड एंटरटेनमेंट समिट' यानि WAVES युवा क्रिएटर्स के लिए एक बहुत बड़ा लॉन्च-पैड बन गई है। यानि सेक्टर कोई भी हो, आपके लिए आज भारत में अनंत संभावनाओं के द्वार खुल रहे हैं। इसलिए मेरा आज यहां इस आयोजन से जुड़े सभी युवाओं से, देश के युवाओं से आह्वान है, आप अपने आइडिया के साथ आगे बढ़िए, रिस्क लेने से पीछे मत हटिए, सरकार आपके साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रही है।

साथियों,

बीते दशक में बदलाव का, रिफॉर्म्स का जो सिलसिला हमने शुरु किया, वो अब रिफॉर्म एक्सप्रेस बन चुका है। और इन रिफॉर्म्स के केंद्र में आप हैं, हमारी युवाशक्ति है। GST में हुए नेक्स्ट जेनरेशन रिफॉर्म्स से युवाओं और आंत्रप्रन्योर्स के लिए प्रोसेस और आसान हो गई है। अब 12 लाख रुपए तक की इनकम पर टैक्स ज़ीरो हो गया है, इससे नई नौकरी वालों या नया बिजनेस शुरु करने वाले नौजवानों को, उनके पास बहुत ज्यादा बचत होने की संभावना बढ़ गई है ।

साथियों,

आप सभी जानते हैं, आज बिजली सिर्फ रोशनी का माध्यम नहीं है, आज AI, Data सेंटर्स, सेमीकंडक्टर, मैन्युफेक्चरिंग, ऐसे हर इकोसिस्टम के लिए ज्यादा बिजली की ज़रूरत है। इसलिए आज भारत Assured Energy सुनिश्चित कर रहा है। सिविल न्यूक्लियर एनर्जी से जुड़ा रिफॉर्म यानि शांति एक्ट इसी लक्ष्य के साथ किया गया है। इससे न्यूक्लियर सेक्टर में तो हज़ारों नये जॉब्स पैदा होंगे ही, बाकी सेक्टर्स पर भी इसका मल्टीप्लायर effect होने वाला है।

साथियों,

दुनिया के अलग-अलग देशों की अपनी जरूरतें हैं,अपनी डिमांड है। वहां वर्कफोर्स लगातार घट रही है। हमारा प्रयास है कि भारत के युवा दुनियाभर में बन रहे अवसरों के लिए तैयार हों। इसलिए, स्किल डवलपमेंट से जुड़े सेक्टर्स में भी लगातार रिफॉर्म किया जाना चाहिए, और हम कर रहे हैं। नई नेशनल एजुकेशन पॉलिसी के बाद, अब हायर एजुकेशन से जुड़े रेगुलेशन्स को रिफॉर्म किया जा रहा है। विदेशी यूनिवर्सिटीज़ भी अब भारत में अपने कैंपस खोल रही हैं। हाल में ही हज़ारों करोड़ रुपए के निवेश के साथ पीएम सेतु प्रोग्राम शुरु किया गया है। इससे हमारे हज़ारों ITI अपग्रेड किए जाएंगे, ताकि युवाओं को इंडस्ट्री की वर्तमान और भविष्य की ज़रूरतों के हिसाब से ट्रेन किया जा सके। बीते समय में दुनिया के अलग-अलग देशों के साथ भारत ने ट्रेड डील्स की हैं। ये भी भारत के युवाओं के लिए नए-नए अवसर लेकर आ रही हैं।

साथियों,

कोई भी देश बिना आत्मविश्वास के आत्मनिर्भर नहीं हो सकता,विकसित नहीं हो सकता। और इसलिए,अपने सामर्थ्य,अपनी विरासत,अपने साजो-सामान पर गौरव का अभाव, हमें खलता है, हमारे पास उसके प्रति एक कमिटमेंट चाहिए, गौरव का भाव होना चाहिए। और हमें बड़ी मजबूती के साथ, गौरव के साथ मजबूत कदमों से आगे बढ़ना चाहिए। आपने ब्रिटिश राजनेता मैकाले के बारे में ज़रूर पढ़ा होगा, उसने गुलामी के कालखंड में शिक्षा-तंत्र के माध्यम से भारतीयों की ऐसी पीढ़ी बनाने के लिए काम किया, जो मानसिक रूप से गुलाम हो। इससे भारत में स्वदेशी के प्रति,अपनी परंपराओं के प्रति,अपने प्रोडक्ट्स,अपने सामर्थ्य के प्रति हीन-भावना पनपी। सिर्फ स्वदेशी होना और इंपोर्टेड होना ही, विदेशी होना और इंपोर्टेड होना ही, इसी को श्रेष्ठता की गारंटी मान लिया, अब ये कोई गले उतरने वाली चीज है क्या? हमें मिलकर गुलामी की इस मानसिकता को खत्म करना है। दस साल बाद, मैकाले के उस दुस्साहस को 200 वर्ष पूरे हो रहे हैं, और ये पीढ़ी की जिम्मेवारी है कि 200 साल पहले का जो पाप है ना, वो धोने के लिए अभी 10 साल बचे हैं हमारे पास। और ये युवा पीढ़ी धोकर के रहेगी, मुझे पूरा भरोसा है। और इसलिए देश के हर युवा को संकल्प लेकर इस मानसिकता से देश को बाहर निकालना है।

साथियों,

हमारे यहां शास्त्रों में कहा गया है, और यहां पर स्टार्टअप, यहां जो प्रेजेंटेशन हुआ, उसमें भी उसका उल्लेख किया गया- आ नो भद्राः क्रतवो यन्तु विश्वतः यानि हमारे लिए सभी दिशाओं से कल्याणकारी और शुभ और श्रेष्ठ विचार आने दें। आपको भी दुनिया की हर बेस्ट प्रेक्टिस से सीखना है, लेकिन अपनी विरासत, अपने आइडियाज़ को कमतर आंकने की प्रवृत्ति को कभी हावी नहीं होने देना है। स्वामी विवेकानंद जी का जीवन हमें यही तो सिखाता है। उन्होंने दुनियाभर में भ्रमण किया, वहां की अच्छी बातों की प्रशंसा की, लेकिन उन्होंने भारत की विरासत को लेकर फैलाए गए भ्रम को तोड़ने के लिए निरंतर प्रयास किए, कठोरता उन्होंने घाव किए उस पर। उन्होंने विचारों को सिर्फ इसलिए नहीं स्वीकार किया, क्योंकि वे पॉपुलर थे, बल्कि उन्होंने कुरीतियों को चैलेंज किया, स्वामी विवेकानंद जी एक बेहतर भारत बनाना चाहते थे। उसी स्पिरिट के साथ, आज आप युवाशक्ति को आगे बढ़ना है। और यहां, अपनी फिटनेस का भी ध्यान रखना है, खेलना है, खिलखिलाना है। मुझे आप सभी पर अटूट भरोसा है। आपका सामर्थ्य,आपकी ऊर्जा पर मेरा विश्वास है। इन्हीं शब्दों के साथ आप सभी को एक बार फिर से युवा दिवस की बहुत-बहुत शुभकामनाएं। मैं एक और सुझाव देना चाहता हूं। ये जो हमारा डायलॉग का कार्यक्रम चल रहा है, क्या आप कभी योजना करके अपने स्टेट में, स्टेट को विकसित बनाने के लिए डायलॉग, ये कार्यक्रम शुरू करें। और थोड़े समय के बाद हम डिस्ट्रिक्ट को विकसित बनाने के लिए भी डायलॉग शुरू करें, इस दिशा में जाएंगे। लेकिन हर राज्य में एक कार्यक्रम राज्य के नौजवान मिलकर के ताकि एक थिंक टैंक, जिसको कहा गया, ये थिंक वेब बन जाएगा, ये दिशा में हम करें। मेरी पूरी शुभकामनाएं आपके साथ हैं। बहुत-बहुत धन्यवाद दोस्तों।