Text of PM's address at the Inauguration of Pravasi Bharatiya Divas

Published By : Admin | January 8, 2015 | 21:39 IST

विशाल संख्या में यहां पधारे हुए, विश्व के कोने-कोने से आए हुए, मेरे प्यारे भाइयों और बहनों,

100 वर्ष पहले, एक प्रवासी भारतीय भारत आए और आज 100 साल के बाद सभी प्रवासी भारतीयों का एक प्रवासी गुजराती स्वागत करता है। भारत के नागरिक विश्व के 200 से ज्यादा अधिक देशों में बसे हैं और मैं विश्वास से कह सकता हूं कि उन 200 देशों में सिर्फ कोई एक भारतीय मूल का व्यक्ति वहाँ बसा है ऐसा नहीं है, वहाँ एक प्रकार से पूरा भारत बसा हुआ है। आप सबके माध्यम से भारत वैश्विक बना हुआ है। 100-150 साल पूर्व, हमारे पूर्वजों ने, साहसिक पूर्वजों ने, विश्व में जहां-जहां संभावनाएं थीं, कुछ नया करने की उमंग थी, गुलाम हिन्दुस्तान में संभावनाएं नहीं थी, उन्होंने साहस जुटाया और साहस जुटाकर दुनिया के अनेक भू-भाग में पहुंचे। सामुद्रिक यात्रा रहती थी, कठिन यात्रा रहती थी, कभी-कभी लक्ष्य तक पहुंच भी नहीं पाते थे। लेकिन उनका प्रयास रहा... कि अंजान जगह पर जाना है और अपने कौशल के द्वारा, अपने सामर्थ्य के द्वारा, अपने संस्कारों के द्वारा वहां पर अपनी जगह बनाने का प्रयास।

कुछ कालखंड ऐसा भी आया कि आज भारत के शिक्षित लोग, Professionals, जीवन में और नई ऊंचाइयों को पाने के लिए, ज्ञान वृद्धि के लिए, Exposure के लिए, विश्व में गए, उन्होंने भारत की एक नई पहचान बनाई। लेकिन वो एक कालखंड था, जब आप अपना प्राण प्रिय देश छोड़कर के, अपने स्वजनों को छोड़कर के, यार-दोस्तों को छोड़कर के, दुनिया के किसी और छोर पर चले जाते थे। कभी साहसिक स्वभाव के कारण, तो कभी संभावनाओं को तलाशने के लिए, तो कभी अवसर खोजने के लिए। वो समय था जब शायद यह जरूरी था।

किंतु मैं आप सबका स्वागत करते हुए आपको विश्वास दिलाता हूं, जब हमारे पूर्वज गए थे- संभावनाओं को तलाशने के लिए। अब भारत की धरती पर संभावनाएं अब आपका इंतजार कर रही हैं। वक्त बहुत तेजी से बदल चुका है। भारत एक नए सामर्थ्य के साथ उठ खड़ा हुआ है। और विश्व, भारत के प्रति बहुत आशा भरी नजरों से देख रहा है। आज गयाना, साइथ अफ्रीका, मॉरिशस - विशेष मेहमान के रूप में हमारे बीच विराजमान हैं। मैं जब मुख्यमंत्री नहीं था, उसके पहले, मुझे इन सभी स्थानों पर जाने का अवसर मिला और गयाना के आदरणीय राष्ट्रपति जी अपनी पार्टी का और उनके Founder पूर्व राष्ट्रपति जी का उल्लेख कर रहे थे. उनके सुपुत्र भरत जगदेव जी जब राष्ट्रपति थे, तब मेरा काफी उनसे सतसंग हुआ था और गयाना के लोग किसी भी समाज के क्यों न हो, किसी भी भाषा को क्यों न बोलते हो, लेकिन जिस किसी को मिलो वे गयाना की आजादी में भारत की प्रेरणा का उल्लेख अवश्य करते हैं।

महात्मा गांधी 100 साल पहले South Africa से चले थे और मातृभूमि की सेवा का सपना लेकर भारत मां को गुलामी की जंजीरों से मुक्त कराने के लिए मानवतावाद में विश्वास लेकर इस धरती पर आए थे। वो निकले थे South Africa से और आए थे हिंदुस्तान। आज South Africa भी हमारे बीच मौजूद है, जहां से गांधी लौटे थे। और African Congress और African National Congress का जन्म 8 जनवरी को हुआ था। आज 8 जनवरी है। आज ही का दिवस और तब उस समय महात्मा गांधी ने दीर्घदृष्टि से उस समय गांधीजी ने African National Congress के जन्म के समय विश्व पर को जो संदेश दिया था, उस संदेश में एक विश्वास झलकता था। उन्होने कहा था कि ये नवजागरण का, प्रेरणा बिंदू बनकर रहेगा। यह बात, उस समय, महात्मा गांधी ने कही थी।

आज भी मॉरिशस में 2 अक्टूबर मनाई जाती है, कभी हमारे यहां नहीं मनाई जाती होगी, ऐसी दो अक्टूबर आज भी मॉरिशस में मनाई जाती है। और मुझे सबके साथ मॉरिशस में सबके साथ दो अक्टूबर मनाने के लिए जाने का अवसर मिला था। और आज भी उनका जैसा उनके यहां जैसे हमारे महात्मा मंदिर इस प्रकार के कार्यक्रमों का केंद्र बना है, उनके यहां भी महात्मा गांधी के नाम से गांधी सभा गृह उनका सबसे बड़ा केंद्र बिंदु है। यानी कि हम देख सकते हैं कि कितना अपनापन है। आज शायद दुनिया के 70-80 ज्यादा देश होंगे, जहां पर महात्मा गांधी की प्रतिमा लगी हुई है।

कुछ दिन पहले में ऑस्ट्रेलिया गया था, वहां भी मुझे सौभाग्य मिला महात्मा गांधी के प्रतिमा के अनावरण का। कहने का तात्पर्य यह है कि इस "विश्व मानव" की पहचान, इस "युग पुरुष" की पहचान, विश्व को जितनी ज्यादा होगी और समय रहते होगी, कभी-कभी उलझनों में घिरी इस दुनिया को वैचारिक स्वतंत्रता का संदेश देने की क्षमता आज भी गांधी रखते हैं। आज भी गांधी के विचार विश्व को, और खास करके मानवतावाद को केंद्र में रखकर समस्या का समाधान कैसे हो सकता है, विकास की राह कैसे सरल हो सकती है, आखिरी छोर पर बैठे व्यक्ति की जिंदगी में बदलाव कैसे आ सकता है - शायद गांधी से बढ़कर के चिंतन कहीं नहीं है।

और हम सबका गर्व है, हमारे लिए सौभाग्य की बात है कि महात्मा गांधी विदेश की उस सारी दुनिया को अलविदा करके हमारे गांव और गरीब लोगों के लिए खप गए थे। और तभी तो आज इतिहास हर पल उन्हें स्मरण कर रहा है।

हमारे देश के लोग जो बाहर गए – अगर आप गयाना जाएंगे, भाषा बोलना तो कठिन है हमारे लोगों को, लेकिन होली अगर आप देखोगे गयाना की, तो वैसी ही रंगों में रंग जाते हैं जैसे हिंदुस्तान की धरती पर हम रंग जाते हैं। जब दीवाली मनाते हैं तो आप को लगेगा कि क्या दीये जगमगाते हैं, ऐसा लगता है कि हिंदुस्तान में रहने वाले हिन्दुस्तानियों को गुयाना में जलता हुआ दीप हमें प्रेरणा देने की ताक़त रखता है। ये हमारे लोगों ने विरासतें खड़ी की हैं, एक ताक़त कड़ी की है. और इसी ताकत को एक सकारात्मक काम के लिए इस्तेमाल करना, इस सामर्थ्य को विश्व में सार्थक पहचान कराने का वक्त आ चुका है। अब हम बिखरे-बिखरे, एक अकेले, किसी देश के एक कोने में - भले ही एक हिंदुस्तानी वहां अकेला होगा, लेकिन उसके साथ पूरा हिंदुस्तान जिन्दा है।

एक नई ज़िम्मेदारी मिलने के बाद, मुझे विश्व के 50 से अधिक राष्ट्राध्यक्षों से मिलने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है, बातचीत करने का मौका मिला है और इतने कम समय में इतनी बड़ी मात्रा में, करीब-करीब विश्व के सभी देशों के अध्यक्षों से मिलना और उनके साथ जो बातचीत हुई, खुले मन से बात हुई है। उन बातों से लगता है, दुनिया का समृद्ध से समृद्ध देश हो तब भी और दुनिया का गरीब से गरीब देश हो तब भी.... हर किसी की नजर हिंदुस्तान पर है। हर एक को लगता है कि हम जहां जाना चाहते हैं, शायद भारत के साथ कदम मिलाकर के हम चल सकते हैं। हर कोई अपनी एकाध-एकाध चीज के साथ भारत को जोड़कर के देख रहा है। ऐेसे अवसर बहुत कम आते हैं। अब हम हिंदुस्तान के लोग जो विदेशों में बसे हुए हैं, ये उनका कर्तव्य बनता है कि वे इस अवसर को मानव जाति के कल्याण की दृष्टि से और भारत की उत्कर्षता की दृष्टि हम काम में कैसे लगाएं? और मैं मानता हूं आज हर भारतीय एक शक्ति के रूप में वहां विराजित है। वो अगर संगठित शक्ति बनती है, अगर वे अपने आप में एक Driving force बनती है, तो हम अनेक नए परिणामों को प्राप्त कर सकते हैं।

विश्व में भारतीयों के प्रति जो आदर है, जो लगाव है, उसका कारण वहां रहने वाले भारतीयों के पास विपुल मात्रा में कोई सपंदा है, वो नहीं है। जिन मूल्यों को लेकर के वो जी रहे हैं, जिन सांस्कृतिक विरासत का वो प्रतिनिधित्व कर रहा है। और इसका परिणाम है आज दुनिया में किसी भी देश में वहां के नागरिक को जब पता चले कि हमारे पड़ोस वाले घर में कोई भारतीय परिवार रहने के लिए आने वाला है, तो सबसे ज्यादा खुशी उसको होती है कि “वाह बहुत अच्छा हो गया, हमारे बगल में भारतीय पड़ोसी आ गया है। हमारे बच्चों के विकास में बहुत काम आएगा।“

क्यों? क्योंकि Family values उसमें अपने आप सीख जाएगा। दुनिया के किसी भी देश में भारतीय को ये अनुभव नहीं आता है। नहीं-नहीं भाई हमारे मौहल्ले में नहीं, हमारी गली में नहीं, हमारी सोसायटी में नहीं, ऐसा कभी अनुभव नहीं आता है। ये कौनसी ताकत है? ये अपनापन, लगाव, दुनिया हमें स्वागत करने के लिए बांह फैलाकर के खड़ी रहती है उसका कारण क्या है? ये हमारे मूल्य हैं, हमारी सांस्कृति है, ये हमारे संस्कार हैं, हमारी इस विरासत को हम जी रहे हैं, उसी की वजह तो हो रहा है। और इसलिए हमारी ये जो बदौलत है उस बदौलत को हम कैसे आगे लेकर के जाएं। उस दिशा में हमें प्रयास करना चाहिए।

कभी-कभार लोगों को लगता है कि भई अब हम बाहर रहते हैं, सालों से चले गए, हम क्या कर सकते हैं? मैं समझता हूं ऐसा सोचने की जरूरत नहीं है। कोई एक-दो महीने पहले की घटना है मुझे किसी ने अखबार की एक कटिंग भेजी थी, Xerox भेजी थी उसकी और बड़ा Interesting था। मैं नाम वगैरह तो भूल गया। सूरत जिले में कोई एक NRI अपने गांव आते थे, हर साल आते थे। जब अपने गांव आते थे 15 दिन, महीना-दो महीना जितना दिन भी रुकते थे। वे सुबह झाड़ू लेकर के गांव की सफाई किया करते थे, गांव की गलियों में जाते थे कूड़ा-कचरा साफ किया करते थे और गांव वाले उनकी बड़ी मजाक उड़ाते थे। उनको लगता था इसका Screw ढीला हो गया है। सबको उनके प्रति बड़ी विचित्रता का भाव रहता था। लेकिन इस बार जब वो आए उन्होंने तो ये काम जब शुरू किया, वो तो पहले भी करते थे। अपने गांव में निकल पड़े, आते ही दुसरे दिन सुबह jetlag कुछ नहीं, बस वो ही काम। इस बार उन्होंने देखा पूरा गांव उनके साथ जुड़ गया था। और वो खबर मुझे किसी ने एक Press cutting भेजा था।

एक प्रवासी भारतीय मैं 100 साल पहले गांधी को देखता हूं – दुनिया को कैसे खड़ा कर दिया था। और एक छोटा सा नागरिक जिसका नाम-पहचान कुछ नहीं है लेकिन Commitment के साथ उसने अपने गांव को कैसे बदल दिया। इसका उदाहरण ये कहता हूं मैं ये। ऐसे तो एक हैं, अनेकों होंगे, अनेकों होंगे। जिन्होंने अपनी शक्ति, बुद्धि, समझ को रहते मां भारती की सेवा को लगाने का प्रयास किया होगा। और ये ही तो है हमारी ताकत।

आप देखिए दुनिया भारत को कितना प्यार कर रही है उसका उदाहरण देखिए। मुझे पहली बार UN में जाने का अवसर मिला। वहां मुझे भारत की तरफ से बोलना था तो बोलते-बोलते मैंने एक बात कही कि United Nation अनेक अंतरराष्ट्रीय दिवस मनाता है। Children day मनाता है, Women day मनाता है, Non-violence day मनाता है। क्यों न विश्व Yoga day मनाएं? अंतरराष्ट्रीय योग दिवस कैसे मनें, ये मैंने वहां प्रस्ताव रखा और United Nation के इतिहास की एक अद्भुत घटना घटी। 193 Countries है UN के Member. Out of 193 Countries 177 Countries ने Co-sponsor के नाते उस प्रस्ताव का समर्थन किया। इतना ही नहीं इस प्रकार के प्रस्तावों में आज तक जितना समर्थन मिला है ये Record breaking है। किसी भी प्रस्ताव को कभी भी इतने सारे देशों ने समर्थन किया ऐसा कभी नहीं हुआ। 40 से अधिक मुस्लिम Countries ने समर्थन किया। सामान्य रूप से इस प्रकार का प्रस्ताव पारित होने में उसकी प्रक्रिया बड़ी विशेष होने के कारण करीब-करीब दो साल लग जाते हैं। इस प्रस्ताव को पारित होने में मुश्किल से 100 दिन लगे। मैं इस चीज को विस्तार से इसलिए कह रहा हूं कि विश्व भारत को किस प्रकार से गले लगाने को तैयार है, ये उसकी एक छोटी सी झलक है।

इससे हम अंदाजा कर सकते हैं कि दुनिया हमें स्वीकार करने के लिए सज्य बैठी है और विश्व हमें स्वीकार करने के लिए सज्य बना है तब ये हमारा दायित्व बनता है कि हम अपने आप को विश्व की अपेक्षा के अनुसार अधिक सजग करें, अधिक सामर्थ्यवान बनाएं। दुनिया को देने के लिए हमारे पास क्या नहीं है? अगर आवश्यकता है, तो हमारे भीतर एक विश्वास की आवश्यकता है, अपने पर भरोसे की आवश्यकता है, और आखिरकार महात्मा गांधी ने आजादी दिलाई तो इसी मंत्र से दिलाई थी कि उन्होंने हर हिंदुस्तानी के दिल में आजादी की आग भर दी थी, आत्मविश्वास भर दिया था और झाड़ू लगाए तो भी आजादी के लिए करता हूं, बच्चों को पढ़ाएं तो भी आजादी के लिेए करता हूं, खादी पहने तो भी आजादी के लिए कर रहा हूं, सेवा का कोई प्रकल्प करें तो भी मैं आजादी के लिए कर रहा हूं। ऐसा एक जनांदोलन खड़ा कर दिया था।

हम भी - इस मानवतावाद की आज सबसे बड़ी ज़रूरत है तब - इन्हीं आदर्शों को लेकर के विश्व के सामने भारत एक आशा की किरण लेकर के बैठा है तब - अपने आप को सज्य करने का प्रयास हमारे लिए बहुत बड़ी आवश्यकता है।

ये प्रवासी भारतीय दिवस, जब अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री थे, तब 2003 में प्रारंभ हुआ और निरंतर चल रहा है। लेकिन बीच में थोड़ा-थोड़ा, आप लोगों का आने का मन नहीं करता था, बहुत कम लोग आते थे, कुछ लोग इसलिए आते थे कि आना पड़ता था। कुछ लोग इसलिए आते थे कि आए बिना रह नहीं सकते थे। लेकिन मैं हर बार आता था। और शायद केरल में जब हुआ था एक बार, तब मैं रूबरू तो नहीं जा पाया था तब मैंने Video Conferencing से प्रवासी भारतीय दिवस में हिस्सा लिया था। मैं समय इसलिए देता था, मैं जाने के लिए इसलिए उत्सुक रहता था, कि मैं Conviction से मानता हूं कि विश्व भर में फैला हुआ जो हिंदुस्तानी नागरिक है, वो आज के वैश्विक परिवेश में भारत की बहुत बड़ी ताकत है, भारत की पूंजी है। और इस पर हम जितना ध्यान देंगे, हम आसानी से विश्व फलक पर अपनी जगह बना सकते हैं।

और इसलिए, जिस प्रकार से विश्व में रहने वाले भारतीयों के साथ भारत का नाता महत्वपूर्ण है, उतना ही भारत के लिए, विश्व में रहने वाले भारतीयों के प्रति, नाभि का नाता उतना ही जरूरी है। ये one way नहीं है। ये दो तरफा है। और इस दो तरफा को बल देने का हमारा प्रयास है।

विश्व में रहने वाला हमारा हिंदुस्तानी, एक बात मैंने बराबर देखी है कि भारत में अगर कोई भी पीड़ादायक घटना हुई हो, कोई हादसा हुआ हो - हो सकता हो सालों से हिंदुस्तान छोड़कर गया हो, भाषा भी मालूम न हो, घटना घटी हो, भौगोलिक रूप से वो कहां है, वो भी मालूम न हो लेकिन हिंदुस्तान में हुआ है - इतना कान पर पड़ते ही या टीवी पर आंख से देखते ही दुनिया के किसी भी कोने में रहने वाले आंख में से आंसू टपकते हैं। उसको उतना ही दर्द होता है, जितना दर्द हिंदुस्तान में जो इस घटना को अनुभव कर रहा है, उसको पीड़ा होती है, उतनी ही मेरे देशवासी जो दुनिया में बसे हैं, उनको पीड़ा होती है।

मुझे याद है जब गुजरात में कच्छ का भूकंप आया था, विश्व का कोई हिंदुस्तानी ऐसा नहीं होगा, जिसने उस समय गुजरात के आंसू पोंछने का प्रयास न किया हो। ये विश्व भर में फैला हुआ हमारा भाई - जिसको हिंदुस्तान के प्रति इस प्रकार का लगाव है, इस प्रकार का नाता है। यहां के दुख के लिए दुखी, यहां के सुख के लिए सुखी। जब मंगलयान की सफलता हुई, Mars orbit पर हम लोग पहुंचे, पहले प्रयास में पहुंचे। सिर्फ हिंदुस्तान नाचा था, नहीं, दुनिया भर में पहुंचा हुआ हिंदुस्तानी भी नाचा था। उसके लिए गर्व की बात थी कि मेरा देश ये प्रगति कर रहा है। इस ताकत को हम कैसे आगे बढ़ाएं, उस दिशा में हम सोच रहे हैं।

मैं जानता हूं जब मैं मुख्यमंत्री भी नहीं था, प्रधानमंत्री भी नहीं था, तब भी मैं विश्व के कई लोगों से मिलता था तो मैं उनकी शिकायतें भी जरा सुनता रहता था। तब मैं देखता था कि भरी शिकायतें रहती थीं। हमने आने के बाद कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की थीं। जब मैं विदेश प्रवास पर था तो चाहे ऑस्ट्रेलिया हूं, चाहे फिजी रहा, चाहे अमेरिका गया। जो बातें मैंने बताई थीं कि हम ये करेंगे। आज मैं गर्व के साथ आपको हिसाब देता हूं कि हमने जो कहा था वो सब पूरा कर दिया है। हमने कहा था कि PIO card holder को आजीवन वीजा दिया जाएगा - वो काम हो चुका है। अब आपको Embassy के चक्कर काटने की जरूरत नहीं पड़ेगी। दूसरी एक समस्या थी - वो क्यों थी वो अभी भी मेरी समझ मैं नहीं आता है - जो PIO card holder थे और भारत में आकर के रहते थे, उनको हर सप्ताह पुलिस स्टेशन जाना पड़ता था। कुछ सिखाने के लिए नहीं - हाजिरी लगानी पड़ती थी। और मैं जब ये सुनता था तो मैं सोचता था कि क्यों ये सब हो रहा है? लेकिन जब ये काम करने की जिम्मेवारी मेरी आई, ये नियम अब समाप्त कर दिया गया है। ये एक स्वाभिमान का विषय है, सम्मान का विषय है, ये सिर्फ कोई Administrative decision के रूप में न देखा जाए। आज सरकार में बैठे हुए लोगों के लिए आपके सम्मान का महत्व क्या है, वो इस निर्णय में दिखाई देता है।

एक मैंने कहा था क्योंकि कईयों ने मुझे कहा था कि ये PIO अलग OCI अलग क्यों - ये हमारे साथ भेद-भाव क्यों? तो मैंने हमारे अफसरों से पूछा, गोलमोल-गोलमोल जवाब आते रहते थे। आगे का मैंने कहा, जो होगा, सो होगा कर दो एक बार। अब हमने घोषणा तो कर दी। जब हम यहां आये तो सारा कानून बदलना था, बड़ी लंबी प्रक्रिया थी। खैर उस प्रक्रिया से भी हम निकल चुके हैं, और आज मैं गर्व के साथ आपको हिसाब दे सकता हूं कि अब PIO और OCI card दोनों व्यवस्थाओं को merge कर दिया गया है और सबको एक ही प्रकार की सुविधाएं मिल पाएंगी।

उसी प्रकार से - Visa on Arrival। आप जानते हैं, आपको क्या-क्या तकलीफें झेलनी पढ़ी हैं भूतकाल में। मैं जानता हूं। और इसलिए अब Visa on Arrival। इसलिए अब Visa on Arrival। आपके लिए ये सुविधा कर दी गई है। करीब दुनिया के 43 Countries को इसका benefit already हमने कर दिया है। उसी प्रकार से Electronic travel authorization - ये व्यवस्था भी कर दी है ताकि Online Correspondence से भी आप ये काम कर सकते हैं। आपका समय सबसे ज्यादा बचे और हमारी Embassy एक प्रकार से आपके लिए सर्वाधिक उपयोगी हो उस दिशा के महत्वपूर्ण कदम इस सरकार ने already उठा लिए हैं।

दिल्ली में एक प्रवासी भारतीय केंद्र, उसकी स्थापना का निर्णय हुआ था। अब उसका भवन तैयार हो गया है। थोड़े ही दिनों में वो भी प्रारंभ हो जाएगा और मैं मानता हूं कि इसका लाभ आने वाले दिनों में सभी प्रवासी भारतीयों को मिलेगा।

कुछ लोगों को लगता है कि प्रवासी भारतीयों के साथ ये जो मेल-मिलाप है कुछ अपेक्षाओं से है। मैं समझता हूं कि ये अपेक्षाओं के लिए नहीं है। अपनों से मिलना, यही अपने आप में एक ताकत होती है। मिल-बैठकर के एक-दूसरे के सुख-दुख बांटना ये भी अपने आप में एक बहुत बड़ा ऊर्जा का केंद्र बन जाता है और इसलिए ये हमारा मेल-मिलाप उसकी अपनी एक विशेषता है - और अब तो युवा पीढ़ी जिनका जन्म ही वहां हुआ Second generation, Third generation है। वे युवक भी इन दिनों बहुत बड़ी मात्रा में शरीख होते हैं कयोंकि उनको भी भारत के लिए कुछ न कुछ करने की उमंग रहती है।

जिनके मन में कुछ करना है उनके लिए बहुत कुछ है। लेकिन हर चीज पाउंड और डॉलर से ही होती है, ये मानने की आवश्यकता नहीं है। मैंने ऐसे लोग देखे हैं, गुजरात में हम जब भूकंप के लिेए काम कर रहे थे, Canada से एक बच्ची आई थी उससे मैं मिला था, मुस्लिम परिवार से थी। उसका जन्म शायद African country में हुआ और बाद में उसका परिवार Canada में Shift हुआ था। उसके पिता ने, उसकी माता ने कभी हिंदुस्तान देखा नहीं था लेकिन कच्छ के भूक्ंप के बाद वो आई, कच्छ में रही और महीनों तक उसने कच्छ में काम किया था। ये ताकत जो है, इसको हमने समझने की आवश्यकता है।

हमारे पास ज्ञान है, हमारे पास अनुभव है, हमारे पास एक विशिष्ट परिस्थिति में काम करने का Exposure है, हम एक अलग प्रकार के Discipline से गुजरे हुए लोग हैं। ये वो चीजें हैं जो हम अपने यहां Inject कर सकते हैं, इसको ला सकते हैं। और यहां रहकर के, कुछ समय अपने लोगों के साथ कुछ समय बिताकर के हम इन चीजों को कर सकते हैं। और ये भी देश की बहुत बड़ी सेवा होती है।

इन दिनों स्वच्छ भारत का एक अभियान चलाया है। लेकिन एक बहुत बड़ा महत्वपूर्ण काम, जो मैं जानता हूं कि आप सब के दिलों में भी वो उतनी ही ताकत रखता है। आप के दिलों को भी छूने के लिए उस बात में उतना ही सामर्थ्य है। और वो है मां गंगा की सफाई। आप इस प्रकार की Technology से परिचित हैं, आप इस तरह के काम से परिचित हैं। एक नमामी गंगे फंड create भी किया गया है कि दुनिया के जो भी लोग गंगा के अंदर अपना योगदान चाहते हैं वो आर्थिक मदद करना चाहते हैं वो दे सकते हैं, जो आकर के समय देना चाहते हैं वो दे सकते हैं। जो ज्ञान परोसना चाहते हैं वो ज्ञान दे सकते हैं, जो Technology लाना चाहते हैं वो Technology ला सकते हैं। एक प्रकार से विश्व भर में फैले हुए समाज जिसके मन में गंगा के प्रति और गंगा की क्या ताकत है।।। पूरे मॉरिशस को कोई एक जगह जोड़ती है, कोई एक जगह आंदोलित करती है तो मॉरिशस का गंगा सागर है। तालाब तो मॉरिशस के लोगों ने खुद बनाया है, तालाब है, लेकिन गंगा जी से लेकर के वहां जाकर जल डाला है। जल तो थोड़ा ही डाला लेकिन उन्होंने उसमें से एक भाव जब पैदा किया कि ये गंगा का प्रतिनिधित्व करती है और आज भी शिवरात्रि का मेले देखो तो पूरे मॉरिशस के मूल भारतीयों को जोड़ने का कोई एक जगह है तो वो गंगा सागर है। हिंदुस्तान से दूर गंगा नाम से बना हुआ एक तालाब भी पूरे मॉरिशस को सांस्कृतिक विरासत को जगाने की प्रेरणा दे सकता है और जब शौकत अली जी को सुनोगे तो आपक पता चलेगा किस प्रकार से उसने वहां के जीवन को बदला है। यो मां गंगा है - ढाई-तीन हजार किलोमीटर लंबी, हिंदुस्तान की 40 प्रतिशत जनसंख्या जिसके साथ सीधी-सीधी जुड़ी हुई है - और मेरे लिए गंगा की सफाई जिस प्रकार से Environment का विषय है, गंगा की सफाई श्रृद्धा का विषय है, गंगा की सफाई सांस्कृतिक विरासत का विषय है, उसी प्रकार से गंगा की सफाई उन 40 प्रतिशत उस भू-भाग में रहने वाले भाईयों-बहनों की आर्थिक उन्नति का बी प्रतीक बन सकता है और इसलिए उस काम को हमें करना है और जिन राज्यों से मां गंगा गुजरती है। वहां पर आर्थिक उन्नति के लिए हम जितना करे उतना कम है। चाहे उत्तर प्रदेश हो, बिहार हो, झारखंड हो, उत्तराखंड हो, पश्चिम बंगाल हो - ये सारा इलाका है, जहां पर आर्थिक उन्नति की बहुत संभावनाएं पड़ी और उन संभावनाओं को तराशने के लिए मां गंगा एक बहुत बड़ा केंद्र बिंदू बन सकती है। गंगा के किनारे पर विकास हो सकता है, 120 से ज्यादा शहर हैं गंगा के किनारे पर, छह हजार से ज्यादा गांव हैं, ढाई हजार किलोमीटर लंबा है और काशी जैसा तीर्थ क्षेत्र हो, हरिद्वार, ऋषिकेश, गंगोत्री, यमुनोत्री हो क्या कुछ नहीं है!

इस विरासत को लेकर कर हम आगे बढ़ना चाहते हैं। मैं आपको निमंत्रण देता हूं। आइए। आपका ज्ञान, बुद्धि, सामर्थ्य जो कुछ भी हो इसके साथ जुडि़ए। जो Environment में विश्वास करते हैं उनके लिए भी वहां भरपूर काम है, जो Inclusive growth में विश्वास करते हैं, उनके लिए वहां भरपूर काम है, जो Rural development में विश्वास करते हैं, उनके लिए वहां भरपूर काम है, जो Adventure चाहते हैं उनके लिए भी भरपूर काम है।

मां गंगा सबको समेटे हुए हैं, मां गंगा से जुडऩे का अवसर मतलब है हजारों साल से पुरानी संस्कृति से जुडने का अवसर। इस अवसर को हम लें, और उसी का उपयोग करें, यह मैं आपसे प्रार्थना करता हूँ। आज भारत विकास यात्रा पर कहां से कहां पहंच रहा है, उसके लिए आपका समय नहीं लेना चाहता। क्योंकि 11 तारीख को मैं एक दुसरे अवसर पर फिरसे इस सभाग्रह में आ रहा हूँ। उस समय काफी विस्तार से बातें करनी होंगी क्योंकि आर्थिक विषयों से जुड़ा हुआ वह कार्यक्रम है लेकिन मैं चाहता हूं कि आपकी शक्ति और सामर्थ्य, हमारे यहां शास्त्रों में एक बहुत ही बढ़िया श्लोक विदेश में रहने वाले लोगों के लिए है, बहुत अच्छा है। मैं उसका ज़िक्र यहाँ करना चाहता हूँ। शास्त्र कहते हैं:

यस्तु संचरते देशान् सेवते यस्तु पण्डितान् | तस्य विस्तारिता बुधिस्तैलबिन्दुरिवाम्भसि ||

उसका सीधा meaning यह है, कि जो विश्व में भ्रमण करता है, वो इतना ज्ञान और अनुभव अर्जित करता है, और वो ज्ञान-अनुभव इतना पैना होता है, इतना ताकतवर होता है, कि कितना ही गहरा समंदर क्यों न हो, पानी का कितना ही बड़ा सागर क्यों न हो, लेकिन उसपर एक तेल बिंदु पड़े, तो जिस प्रकार से वो उसपर प्रभावी होकर के फैल जाता है – यह विश्व भर में भ्रमण करके पाया हुआ ज्ञान भी उतना ही ताक़तवर होता है, यह मन्त्र कह रहा है। और वो ताक़त के धनी आप हैं। वो ताक़त के धनी आप हैं।

उस ताक़त का उपयोग, माँ भारती की सेवा के लिए कैसे लगे, आने वाले दिनों में, भारत जो विकास की ऊचाइयों को पार कर रहा है, आप भी उसके साथ जुड़िये, इस महान सांस्कृतिक विरासत से विश्व को परिचित कराइए, और जिस मन्त्र को लेकर के, हमारे पूर्वजों ने कल्पना की थी – हम ही तो लोग थे, जिन्होंने पहली बार विशवास से कहा था: “वसुधैव कुतुम्भकम”। The whole world is a family।

पूरे विश्व को जिसने परिवार माना है, वो हमारा DNA है। वो हमारी संस्कृति है। पूरे विश्व को जिसने परिवार माना है, उसका एक दायित्व बनता है कि मानवतावाद के विषय को लेकर के पूरे विश्व में हम एक ताक़त के साथ पहुंचें। फिर एक बार – Guyana के राष्ट्रपतिजी हमारे बीच आये, उनका स्वागत करता हूँ, उनका आभार व्यक्त करता हूँ। South Africa की विदेश मंत्रीजी हमारे बीच आयीं, उनका भी स्वागत करता हूँ, उनका अभिनन्दन करता हूँ। और Mauritius के उप-प्रधान मंत्रीजी हमारे बीच आये, मैं उनका भी आभार व्यक्त करता हूँ।

आज के अवसर पर, राष्ट्र्पिताजी के 100 साल पहले वापिस आने की ख़ुशी में भारत सरकार ने सौ रूपएका और दस रूपए का सिक्का आज हमें दिया है, और उसकी प्रकार से पोस्टल स्टाम्प भी आपके सामने रखा है। पोस्टल स्टाम्प, और ये सिक्के इतिहास की धरोहर बनते हैं। आज भी आपने देखा होगा, पुरातात्त्विक विभाग जो रहता है – Archaeological Department – वो इतिहास की कड़ी जोड़ने के लिए, पुराने coin जो मिलते हैं, वो उसकी सबसे बड़ी ताक़त होते हैं। उसके आधार पर वो तय करते हैं, कि 400 साल पहले कहाँ कौन सी currency थी, और वो currency 2000km दूर, सात समंदर पार, कहाँ-कहाँ पर दिखाई दी – उसके आधार पर 1000 साल पहले कैसा विश्व व्यापार था, किस प्रकार के सांस्कृतिक सम्बन्ध थे, ये सारी कड़ी जोड़ने में यह काम आता है। सिक्कों का महत्त्व आज भी उतना ही है, और विश्व में कई ऐसे लोग हैं, जो इस प्रेरणा को लेकर के चलते हैं।

मेरे मन में एक विचार है। विदेश में रहे हुए हमारे मित्र उस काम को अगर कर सकें तो ज्यादा अच्छा होगा। क्या हम इस प्रवासी भारतीय दिवस पर - विशेष योगदान करने वाले लोगों का तो हमें सम्मान करने का सौभाग्य मिलता है – जिन्होंने अपने-अपने, जो अपनी कर्म भूमि है, वहां भारत का झंडा ऊंचा रखने के लिए कुछ न कुछ योगदान किया होगा। लेकिन क्या भविष्य में, अगर विदेश की जो Young Team है, वो आगे आये तो।।। मैं इस कार्यक्रम को भारत के माध्यम से करना नहीं चाहता – बाहर के लोग करें तो मेरे मनन में विचार है – कि हम आज का जो Information Technology का युग है, Communication की नयी दुनिया है, उसका उपयोग करते हुए, “भारत को जानो” – ऐसी एक प्रति वर्ष एक Quiz Competition कर सकते हैं? Online Quiz Competition।

भारत के सम्बन्ध में ही सवाल हों। और भारत से बाहर रहने वाले लोग उसमें शरीक हों, उसमें हिस्सा लें। और उसमें जिसका नंबर आये, उनका सम्मान प्रवासी भारतीय दिवस में होता रहे, ताकि साल भर हमारी युवा पीढी को online जाकर के, Quiz Competition में जुड़ करके, ज्यादा से ज्यादा marks पाने का प्रयास हो, और पूरे विश्व में, भारत को जानने का एक बहुत बढ़ा आन्दोलन खड़ा हो जाए। उस दिशा में हम प्रयास कर सकते हैं।

मैं फिर एक बार आप सबको प्रवासी भारतीय दिवस पर बहुत बहुत शुभकामनायें देता हूँ। और पूज्य बापू ने, भारत आकर के, भारत को गुलामी की जंजीरों से मुक्त कराया। और इतना ही नहीं, भारत के मानवतावाद का सन्देश था, उसे पूरे विश्व को पहुंचाया, ऐसे युगपुरुष के भारत आगमन का यह शताब्दी का पर्व हम मना रहे हैं। तब हम भी, जहां भी हों – नाभि से नाता जुडा रहे। मिट्टी से नाता जुडा रहे। अपनों के लिए कुछ न कुछ कर गुजरने का हौसला बुलंद बना रहे – इसी अपेक्षा के साथ, सबको बहुत बहुत शुभकामनायें।

धन्यवाद।

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New India is spending more and more to provide modern education to its present generation: PM Modi
February 20, 2024
Dedicates to nation campuses of several important education institutes like IIT Bhilai, IIT Tirupati, IIITDM Kurnool, IIM Bodh Gaya, IIM Jammu, IIM Visakhapatnam and Indian Institute of Skills (IIS) Kanpur
Inaugurates, dedicates and lays the foundation stone of multiple projects for upgrading infrastructure in several higher educational institutes across the country
Inaugurates AIIMS Jammu
Lays foundation stone of new terminal building of Jammu Airport and Common User Facility Petroleum depot at Jammu
Dedicates to nation and lays the foundation stone of several significant road and rail connectivity projects in Jammu and Kashmir
Inaugurates and lays foundation stone for several projects for strengthening the civic and urban infrastructure across Jammu and Kashmir
“Today’s initiatives will propel holistic development in Jammu and Kashmir”
“We will ensure a Viksit Jammu Kashmir”
“To create a Viksit Jammu and Kashmir, the government is focussed on the poor, farmers, youth and Nari Shakti”
“New India is spending more and more to provide modern education to its present generation”
“The mantra of Sabka Saath, Sabka Vikas, Sabka Vishwas and Sabka Prayas is the foundation of the development of Jammu and Kashmir”
“For the first time, the common people of Jammu and Kashmir are receiving the assurance of social justice given in the Constitution of India”
“A new Jammu Kashmir is coming into being as the biggest hurdle to its development was removed with the abrogation of article 370”
“World is excited for a Viksit Jammu and Kashmir”

भारत माता की जय।

भारत माता की जय।

भारत माता की जय।

जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा जी, मंत्रिमंडल में मेरे सहयोगी जितेंद्र सिंह जी, संसद में मेरे साथी जुगल किशोर जी, गुलाम अली जी और जम्मू-कश्मीर के मेरे प्रिय भैनों ते भ्राओ, जै हिंद, इक बारी परतियै इस डुग्गर भूमि पर आइयै मिगी बड़ा शैल लग्गा करदा ऐ। डोगरे बड़े मिलन सार ने, ए जिन्ने मिलनसार ने उन्नी गै मिट्ठी…इंदी भाशा ऐ। तां गै ते…डुग्गर दी कवित्री, पद्मा सचदेव ने आक्खे दा ऐ- मिठड़ी ऐ डोगरेयां दी बोली ते खंड मिठे लोग डोगरे।

साथियों,

मैंने जैसा कहा मेरा नाता करीब 40 साल से भी ज्यादा पुराना आप लोगों से लगातार रहा है। बहुत कार्यक्रम मैंने किए हैं, बहुत बार आया हूं और अभी जितेंद्र सिंह ने बताया इस मैदान में भी किया है। लेकिन आज का ये जन सैलाब, आज का आपका जुनून, आपका ये उत्साह और मौसम भी विपरित, ठंड भी है, बारिश भी हो रही है और आप में से एक हिलता भी नही है। और मुझे तो बताया गया कि ऐसे तीन स्थान यहां पर हैं, जहां पर बहुत बड़ी मात्रा में स्क्रीन लगाकर के लोग बैठे हुए हैं। जम्मू-कश्मीर के लोगों का ये प्यार, आप इतनी बड़ी संख्या में यहां दूर-दूर से आए हैं, ये हम सभी के लिए बहुत बड़ा आशीर्वाद है। विकसित भारत को समर्पित ये कार्यक्रम सिर्फ यहीं तक सीमित नहीं है। आज देश के कोने-कोने से, अनेक शिक्षण संस्थानों से हमारे साथ लाखों लोग जुड़े हैं। इतना ही नहीं, इस कार्यक्रम में अभी मुझे मनोज जी बता रहे थे कि 285 ब्लॉक्स में ऐसे ही स्क्रीन लगाकर के वीडियो के माध्यम से इस कार्यक्रम को सुना जा रहा है, देखा जा रहा है। शायद एक साथ इतने स्थान पर बहुत ही well organized इतना बड़ा कार्यक्रम और वो भी जम्मू-कश्मीर की धरती पर, प्रकृति हर पल जहां चुनौती देती है, प्रकृति हर बार हमारी कसौटी करती है। वहां भी इतना आन-बान-शान के साथ कार्यक्रम होना वाकई जम्मू-कश्मीर के लोग अभिनंदन के अधिकारी हैं।

साथियों,

मैं सोच रहा था कि मुझे आज यहां भाषण करना चाहिए कि नहीं करना चाहिए क्योंकि अभी जम्मू-कश्मीर के कुछ लोगों से मुझे जो बात करने का मौका मिला, जिस उमंग से, जिस उत्साह से, जिस clarity के साथ वो सारे अपनी बातें बता रहे थे, देश में जो भी व्यक्ति उनकी बातें सुनता होगा ना उसका हौसला बुलंद हो जाता होगा, उसका विश्वास अमर हो जाता होगा और उसको लगता होगा कि गारंटी का मतलब क्या होता है, इन 5 लोगों ने हमारे साथ बातचीत करके सिद्ध कर दिया है। मैं उन सभी को बहुत-बहुत बधाई दता हूं।

साथियों,

विकसित भारत, विकसित जम्मू-कश्मीर को, इस मकसद को लेकर जो उत्साह है, वाकई अभूतपूर्व है। ये उत्साह हमने विकसित भारत संकल्प यात्रा के दौरान भी देखा है। जब मोदी की गारंटी वाली गाड़ी गांव-गांव तक पहुंच रही थी, तो आप लोगों ने उसका शानदार स्वागत किया। जम्मू-कश्मीर के इतिहास में ये पहली बार हुआ, जब कोई सरकार उनके दरवाज़े पर आई है। कोई भी सरकार की योजना के लाभ, कोई भी जो इसका हकदार है वो छूटेगा नहीं...और यही तो मोदी की गारंटी है, यही तो कमल का कमाल है! और अब हमने संकल्प लिया है, विकसित जम्मू-कश्मीर का। मुझे आप पर विश्वास है। हम विकसित जम्मू-कश्मीर बनाकर के ही रहेंगे। 70-70 साल से अधूरे आपके सपने, आने वाले कुछ ही वर्षों में मोदी पूरे करके देगा।

भाइयों और बहनों,

एक वो दिन भी थे, जब जम्मू-कश्मीर में से सिर्फ निराशा की खबरें आती थीं। बम-बंदूक, अपहरण, अलगाव, ऐसी ही बातें जम्मू-कश्मीर का दुर्भाग्य बना दी गई थीं। लेकिन अब आज जम्मू-कश्मीर, विकसित होने के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है। आज ही यहां 32 हज़ार करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट्स उसका शिलान्यास और कुछ का लोकार्पण किया गया है। ये शिक्षा-कौशल, रोज़गार, सेहत, उद्योग और कनेक्टिविटी से जुड़े प्रोजेक्ट्स हैं। आज यहां से देश के अलग-अलग शहरों के लिए औऱ भी ढेर सारी परियोजनाओं का उद्घाटन हुआ है। अलग-अलग राज्यों में IIT और IIM जैसी संस्थाओं का विस्तार हो रहा है। इन सारी विकास परियोजनाओं के लिए जम्मू- कश्मीर को, पूरे देश को, देश की युवा पीढ़ी को बहुत-बहुत बधाई। आज यहां सैकड़ों नौजवानों को सरकारी नियुक्ति पत्र भी सौंपे गए हैं। मैं सभी नौजवान साथियों को भी बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं।

साथियों,

जम्मू-कश्मीर बहुत दशकों तक परिवारवाद की राजनीति का शिकार रहा है। परिवारवाद की राजनीति करने वालों ने हमेशा सिर्फ अपना स्वार्थ देखा है, आपके हितों की चिंता नहीं की है। और परिवारवाद की राजनीति का सबसे ज्यादा अगर कोई नुकसान उठाता है, तो हमारे युवा उठाते हैं, हमारे नौजवान बेटे-बेटी उठाते हैं। जो सरकारें सिर्फ एक परिवार को आगे बढ़ाने में जुटी रहती हैं, वो सरकारें अपने राज्य के दूसरे युवाओं का भविष्य ताक पर रख देती हैं। ऐसी परिवारवादी सरकारें युवाओं के लिए योजनाएं बनाने को भी प्राथमिकता नहीं देतीं। सिर्फ अपने परिवार की सोचने वाले लोग, कभी आपके परिवार की चिंता नहीं करेंगे। मुझे संतोष है कि जम्मू-कश्मीर को इस परिवारवादी राजनीति से मुक्ति मिल रही है।

भाइयों और बहनों,

जम्मू-कश्मीर को विकसित बनाने के लिए हमारी सरकार गरीब, किसान, युवाशक्ति और नारीशक्ति पर सबसे ज्यादा फोकस कर रही है। उस बच्ची को परेशान मत करो भई, बहुत छोटी गुड़िया है, अगर यहां होती मैं उसे बहुत आशीर्वाद देता, लेकिन इस ठंड में उस बच्ची को परेशान मत कीजिए जी। कुछ समय पहले तक यहां के नौजवानों को उच्च शिक्षा के लिए, प्रोफेशनल एजुकेशन के लिए दूसरे राज्यों में जाना पड़ता था। आज देखिए, जम्मू कश्मीर शिक्षा और कौशल विकास का बहुत बड़ा केंद्र बनता जा रहा है। बीते 10 वर्षों में देश में शिक्षा को आधुनिक बनाने का जो मिशन हमारी सरकार ने चलाया है, उसका आज यहां और विस्तार हो रहा है। मुझे याद है, साल 2013 के दिसंबर में, जिसका जितेंद्र जी अभी उल्लेख कर रहे थे, जब मैं बीजेपी की ललकार रैली में आय़ा था, तो इसी मैदान में आपसे कुछ गारंटी देकर गया था। मैंने सवाल उठाया था कि यहां जम्मू में भी IIT और IIM जैसे आधुनिक शिक्षा संस्थान क्यों नहीं बन सकते? वो वायदे हमने पूरे करके दिखाए। अब जम्मू में IIT भी है और IIM भी है। और इसलिए लोग कहते हैं- मोदी की गारंटी यानि, गारंटी पूरा होने की गारंटी! आज यहां IIT जम्मू के एकैडमिक कॉम्प्लेक्स और हॉस्टल का लोकार्पण हुआ है। मैं देख रहा हूं नौजवानों का उत्साह, अद्भुत दिखता है। इसके साथ-साथ IIT भिलाई, IIT तिरुपति, IIIT-DM कुरनूल Indian Institute of Skills कानपुर, उत्तराखंड और त्रिपुरा में सेंट्रल संस्कृत यूनिवर्सिटीज़ के पर्मानेंट कैंपस का भी लोकार्पण किया गया है। आज IIM जम्मू के साथ-साथ IIM बोधगया बिहार में और IIM विशाखापट्टनम कैंपस आंध्र में, उसका भी उद्घाटन यहीं से हुआ है। इसके अलावा आज NIT दिल्ली, NIT अरुणाचल प्रदेश, NIT दुर्गापुर, IIT खड़कपुर, IIT बॉम्बे, IIT दिल्ली I.I.S.E.R बेहरामपुर, ट्रिपल आईटी लखनऊ, जैसे उच्च शिक्षा के आधुनिक संस्थानों में एकैडमिक ब्लॉक्स, हॉस्टल, लाइब्रेरी, ऑडिटोरियम ऐसे कई सुविधाओं का भी लोकार्पण हुआ है।

साथियों,

10 साल पहले तक शिक्षा और कौशल के क्षेत्र में इस स्केल पर सोचना भी मुश्किल था। लेकिन ये नया भारत है। नया भारत अपनी वर्तमान पीढ़ी को आधुनिक शिक्षा देने के लिए ज्यादा से ज्यादा खर्च करता है। बीते 10 साल में देश में रिकॉर्ड संख्या में स्कूल, कॉलेज और यूनिवर्सिटीज का निर्माण हुआ है। यहां जम्मू-कश्मीर में ही करीब 50 नए डिग्री कॉलेज स्थापित किए जा चुके हैं, 50। ऐसे 45 हजार से ज्यादा बच्चों का स्कूल में दाखिला कराया गया है, और ये वो बच्चे जो पहले स्कूल नहीं जाते थे। और मुझे खुशी है कि इन स्कूलों का सबसे ज्यादा फायदा हमारी बेटियों को हुआ है। आज वे घर के पास ही बेहतर शिक्षा हासिल कर पा रही हैं। एक वो दिन थे, जब स्कूल जलाए जाते थे, एक आज का दिन है, जब स्कूल सजाए जा रहे हैं।

और भाइयों और बहनों,

आज जम्मू कश्मीर में स्वास्थ्य सेवाओं में भी तेजी से सुधार हो रहा है। 2014 से पहले जम्मू कश्मीर में मेडिकल कॉलेज की संख्या सिर्फ 4 थी। यही, वही आज मेडिकल कॉलेज की संख्या बढ़कर 4 से बढ़कर 12 हो गई है। 2014 में MBBS की 500 सीटों के मुकाबले आज 1300 से अधिक MBBS की सीट यहां पर हैं। 2014 से पहले यहां पर एक भी मेडिकल पीजी की सीट नहीं थी, वही आज उनकी संख्या बढ़कर साढ़े 6 सौ से अधिक हो गई है। 4 सालों में यहां करीब 45 नए नर्सिंग और पैरामेडिक कॉलेज खोले जा चुके हैं। इनमें सैकड़ों नई सीटें जोड़ी गई हैं। जम्मू-कश्मीर देश का ऐसा राज्य है जहां 2 एम्स बन रहे हैं। इनमें से एक, एम्स जम्मू का उद्घाटन आज करने का मुझे सौभाग्य मिला है। जो बड़ी उम्र के साथी यहां आए हैं, जो मुझे सुन रहे हैं, उनके लिए तो ये कल्पना से भी परे था। आज़ादी के बाद के अनेक दशकों तक दिल्ली में ही एक एम्स हुआ करता था। गंभीर बीमारी के इलाज के लिए आपको दिल्ली जाना पड़ता था। लेकिन मैंने आपको यहां जम्मू में ही एम्स की गारंटी दी थी। और ये गारंटी मैंने पूरी करके दिखाई है। बीते 10 वर्षों में देश में 15 नए एम्स स्वीकृत हुए हैं। उनमें से एक जम्मू में आज आपकी सेवा के लिए तैयार है। और AIIMS कश्मीर पर भी तेजी से काम चल रहा है।

भाइयों और बहनों,

आज हम एक नया जम्मू-कश्मीर बनते हुए देख रहे हैं। प्रदेश के विकास में सबसे बड़ी दीवार आर्टिकल-370 की थी, आर्टिकल-370 की थी। इस दीवार को भाजपा की सरकार ने हटा दिया है। अब जम्मू कश्मीर, एक संतुलित विकास की ओर बढ़ रहा है। और मैंने सुना है शायद इसी हफ्ते ये 370 को लेकर के कोई फिल्म आने वाली है। मुझे लगता है आपका जय-जय कार होने वाला है पूरे देश में। मुझे पता नहीं है फिल्म कैसी है, मैंने कल ही कही, किसी टीवी पर सुना कि ऐसी कोई 370 पर फिल्म आ रही है। अच्छा है, लोगों को सही जानकारी मिलने में काम आएगी।

साथियों,

ये 370 की ताकत देखिए, 370 जाने के कारण आज मैंने हिम्मत के साथ देशवासियों को कहा है कि अगले चुनाव में भाजपा को 370 दीजिए और NDA को 400 पार कर दीजिए। अब प्रदेश का कोई भी इलाका पीछे नहीं रहेगा, सब मिलकर आगे बढ़ेंगे। यहां जो लोग दशकों तक अभाव में जी रहे थे, उन्हें भी आज सरकार के होने का ऐहसास हुआ है। आज आप देखिए, गांव-गांव एक नई राजनीति की लहर चल पड़ी है। परिवारवाद, भ्रष्टाचार और तुष्टिकरण के खिलाफ यहां के नौजवानों ने बिगुल फूंक दिया है। आज जम्मू-कश्मीर का हर नौजवान अपना भविष्य खुद लिखने के लिए आगे निकल रहा है। जहां कभी बंद औऱ हड़ताल का सन्नाटा रहता था, वहां अब ज़िंदगी की चहल-पहल दिखाई देती है।

साथियों,

जिन लोगों ने जम्मू-कश्मीर में दशकों तक सरकार चलाई, उन्होंने कभी आपकी आशाओं-आकांक्षाओं की परवाह नहीं की। पहले की सरकारों ने तो यहां रहने वाले हमारे फौजी भाइयों तक का सम्मान नहीं किया। कांग्रेस सरकार 40 साल तक फौजियों से झूठ बोलती रही कि वन रैंक वन पेंशन लाएगी। लेकिन वन रैंक वन पेंशन का वायदा भाजपा सरकार ने पूरा किया। OROP की वजह से यहां जम्मू के ही पूर्व सैनिकों को, फौजियों को 1600 करोड़ रुपए से ज्यादा मिले हैं। जब संवेदनशील सरकार हो, जब आपकी भावनाएं समझने वाली सरकार हो, तो ऐसे ही तेज गति से काम करती है।

साथियों,

भारत के संविधान में जिस सामाजिक न्याय का भरोसा दिया गया है, वो भरोसा पहली बार जम्मू-कश्मीर के सामान्य जन को भी मिला है। हमारे शरणार्थी परिवार हों, वाल्मिकी समुदाय हो, सफाई कर्मचारी हों, उनको लोकतांत्रिक हक मिला है। वाल्मिकी समुदाय को SC कैटेगरी का लाभ मिलने की वर्षों पुरानी मांग पूरी हुई है। 'पद्दारी जनजाति', 'पहाड़ी जातीय समूह', 'गड्डा ब्राह्मण' और 'कोली' समुदाय को अनुसूचित जनजाति में शामिल किया गया है। अनुसूचित जनजातियों के लिए विधानसभा में सीटें आरक्षित हुई हैं। पंचायत, नगर पालिका और नगर निगम में ओबीसी को आरक्षण दिया गया है। सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास यही मंत्र तो विकसित जम्मू-कश्मीर की बुनियाद है।

साथियों,

जम्मू-कश्मीर में हो रहे विकास कार्यों का बहुत बड़ा लाभ हमारी माताओं-बहनों-बेटियों को हुआ है। हमारी सरकार जो पक्के घर बनवा रही है, उनमें से ज्यादातर घर महिलाओं के नाम हैं...हर घर जल योजना ने...हजारों की संख्या में शौचालयों के निर्माण ने...आयुष्मान योजना के तहत 5 लाख रुपए तक के मुफ्त इलाज ने...यहां की बहनों-बेटियों का जीवन बहुत आसान बनाया है। आर्टिकल 370 हटने के बाद हमारी बहनों को वो हक भी मिले हैं, जिनसे पहले उन्हें वंचित रखा गया था।

साथियों,

आपने नमो ड्रोन दीदी योजना के बारे में भी सुना होगा। मोदी की गारंटी है कि हमारी बहनों को ड्रोन पायलट बनाया जाएगा। मैं कल एक बहन का इंटरव्यू देख रहा था वो कह रही थी मुझे तो साइकिल चलाना भी नहीं आता था और आज मैं ट्रेनिंग के बाद ड्रोन पायलट बनकर के घर जा रही हूं। देश में बहुत बड़ी संख्या में बहनों की ट्रेनिंग शुरु भी हो चुकी है। इसके लिए हमने हज़ारों स्वयं सहायता समूहों को ड्रोन देने का निर्णय लिया है। लाखों रुपए के इन ड्रोन्स से खेती और बागवानी में मदद मिलेगी। खाद हो, कीटनाशक हो, इनके छिड़काव का काम बहुत आसान हो जाएगा। और बहनों को इससे अतिरिक्त कमाई होगी।

भाइयों और बहनों,

पहले भारत के बाकी हिस्से में एक काम होता था और जम्मू-कश्मीर में उसका लाभ या तो मिलता ही नहीं था, या फिर बहुत देर से मिलता था। आज विकास के सारे कार्य पूरे देश में एक साथ हो रहे हैं। आज देशभर में नए एयरपोर्ट बन रहे हैं, तो जम्मू-कश्मीर भी किसी से पीछे नहीं है। आज जम्मू एयरपोर्ट के विस्तार का काम भी शुरु हुआ है। कश्मीर से कन्याकुमारी को रेल से जोड़ने का सपना भी आज और आगे बढ़ा है। थोड़ी देर पहले ही श्रीनगर से संगलदान और संगलदान से बारामुला के लिए ट्रेनें चलीं हैं। वो दिन दूर नहीं जब कश्मीर से ट्रेन में बैठकर लोग पूरे देश के सफर पर निकल पाएंगे। आज जो पूरे देश में रेलवे के बिजलीकरण का इतना बड़ा अभियान चल रहा है, उसका बड़ा लाभ इस क्षेत्र को भी मिला है। आज जम्मू कश्मीर को अपनी पहली इलेक्ट्रिक ट्रेन मिली है। इससे प्रदूषण को कम रखने में बहुत मदद मिलने वाली है।

साथियों आप देखिए,

जब देश में वंदे भारत के रूप में आधुनिक ट्रेन शुरु हुई, तो हमने इसके शुरुआती रूट्स में जम्मू-कश्मीर को भी चुना। हमने माता वैष्णो देवी तक पहुंचना और आसान बनाया। मुझे खुशी है कि आज जम्मू कश्मीर में 2 वंदे भारत ट्रेनें चल रही हैं।

साथियों,

गांव की सड़कें हों, जम्मू शहर के अंदर की सड़कें हों, या फिर नेशनल हाईवे, जम्मू-कश्मीर में चौतरफा काम चल रहा है। आज अनेक सड़कों का लोकार्पण और शिलान्यास हुआ है। इसमें श्रीनगर रिंग रोड का दूसरा चरण भी शामिल है। ये जब बनकर तैयार होगी, तो मनसबल झील और खीरभवानी मंदिर आना, वहां जाना और आसान हो जाएगा। जब श्रीनगर-बारामूला-उरी ये हाईवे का काम पूरा होगा, तो इससे किसानों और टूरिज्म सेक्टर को और ज्यादा लाभ होगा। दिल्ली-अमृतसर-कटरा एक्सप्रेसवे इसके विस्तार से जम्मू और कटरा के बीच की सुविधा और बेहतर होगी। जब ये एक्सप्रेसवे बनकर तैयार होगा तो जम्मू और दिल्ली के बीच आना-जाना बहुत आसान हो जाएगा।

साथियों,

विकसित होते जम्मू कश्मीर को लेकर आज पूरी दुनिया में बहुत उत्साह है। मैं तो हाल में ही, गल्फ देशों के दौरे से लौटा हूं। वहां जम्मू-कश्मीर में निवेश को लेकर बहुत पॉजिटिविटी है। आज जब दुनिया, जम्मू-कश्मीर में G-20 का आयोजन होते देखती है, तो इसकी गूंज बहुत दूर तक पहुंचती है। पूरी दुनिया जम्मू-कश्मीर की सुंदरता, यहां की परंपरा, यहां की संस्कृति और आप सभी के स्वागत से बहुत प्रभावित हुई है। आज हर कोई जम्मू-कश्मीर आने के लिए तत्पर है। पिछले वर्ष जम्मू-कश्मीर में 2 करोड़ से ज्यादा पर्यटक आए, जो एक रिकॉर्ड है। अमरनाथ जी और श्री माता वैष्णो देवी के दर्शन करने वाले तीर्थयात्रियों की संख्या पिछले एक दशक में सबसे ज्यादा हो गई है। आज जिस गति से यहां इंफ्रास्ट्रक्चर बन रहा है, उसको देखते हुए, ये संख्या आने वाले समय में कई गुणा बढ़ने वाली है। पर्यटकों की बढ़ती हुई ये संख्या, यहां रोजगार के भी अनेकों नए अवसर बनाने वाली है।

भाइयों और बहनों,

बीते 10 वर्षों में भारत 11वें नंबर से 5वें नंबर की आर्थिक ताकत बना हैं। जब देश की आर्थिक ताकत बढ़ती है, तो क्या होता है? तब सरकार के पास, लोगों पर खर्च करने के लिए ज्यादा पैसा आता है। आज भारत गरीबों को मुफ्त राशन, मुफ्त इलाज, पक्के घर, गैस, टॉयलेट, पीएम किसान सम्मान निधि जैसी अनेक सुविधाएं दे रहा है। ये इसलिए क्योंकि भारत की आर्थिक ताकत बढ़ी है। अब हमें आने वाले 5 वर्षों में भारत को दुनिया की तीसरी बड़ी आर्थिक ताकत बनाना है। इससे गरीब कल्याण और इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च करने की देश की क्षमता कई गुणा और बढ़ जाएगी। यहां ऐसा इंफ्रास्ट्रक्चर बनेगा कश्मीर की वादियों में लोग स्विट्ज़रलैंड जाना भूल जाएंगे। इसका फायदा जम्मू-कश्मीर के हर परिवार को होगा, आपको होगा।

आप हम सभी पर अपना आशीर्वाद बनाए रखिए। और आज जम्मू-कश्मीर के इतिहास में इतना बड़ा विकास उत्सव हुआ है, हमारे पहाड़ी भाई-बहनों के लिए, हमारे गुर्जर भाई-बहनों के लिए, हमारे पंडितों के लिए, हमारे बाल्मीकि भाइयों के लिए, हमारी माताओं-बहनों के लिए ये जो विकास उत्सव हुआ है, मैं आपसे एक काम कहता हूं करोगे? करोगे? एक काम करोगे? अपना मोबाइल फोन निकालकर के फ्लैश लाइट जलाकर के, आप इस विकास उत्सव को जरा आनंद लुटाइए। सब अपने मोबाइल की फ्लैश चालू कीजिए। जो, जहां खड़ा है सब अपने मोबाइल की फ्लैश चालू करें, और विकास उत्सव को, उसका स्वागत करें हम, सबके मोबाइल फोन की फ्लैश लाइट चालू हो जाए। सबके मोबाइल के, ये विकास उत्सव सारा देश देख रहा है कि जम्मू चमक रहा है, जम्मू-कश्मीर की रोशनी देश में पहुंच रही है...शाबाश। मेरे साथ बोलिए-

भारत माता की जय।

भारत माता की जय।

भारत माता की जय।

बहुत-बहुत धन्यवाद।