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उपस्थित सभी महानुभावों

मैं जब न्‍यूयॉर्क गया था, उस समय GE के लोग मुझे मिले थे, उन्‍होंने आग्रह किया था कि पुणे में हमारी यूनिट का Expansion हुआ है। आप आइए, आज वैसे भी मुझे महाराष्‍ट्र आना था तो मैंने कहा कि ठीक है मैं आता हूं और देखना चाहता हूं। मैंने आज State of art facility Manufacturing sector में कैसी हो सकती है, आधुनिक Industrial infrastructure कैसा हो सकता है, आधुनिक Technology का कैसा दौर हो सकता है, उसे आज मैंने प्रत्‍यक्ष रूप से देखा है। मैं GE को बहुत-बहुत बधाई देता हूं। उन्‍होंने अमेरिका के बाद भारत में यह सबसे बड़ा Project प्रारंभ किया है और आज उन्‍होंने और अधिक आगे बढ़ने की घोषणा भी की है। Make in India के हमारे Mission में आज यह घोषणा अवश्‍य ही एक नई ताकत के रूप में उभरेगी।

मैं आपको बहुत-बहुत बधाई देता हूं और मैं आपको विश्‍वास दिलाता हूं कि विकास के क्षेत्र में भारत के नौजवानों को रोजगार देने के क्षेत्र में, औद्योगिक विकास के क्षेत्र में मेरा सबको निमंत्रण है कि आइए भारत में विकास की आपार संभावना है और भारत के विकास में आपका विकास भी जुड़ा हुआ है और आज Global Economy के जमाने में Competitive World के जमाने में, मैं दुनिया के उद्योगकारों को विश्‍वास दिलाता हूं कि भारत एक ऐसी उर्वरा भूमि है। यहां एक ऐसा Talented Youth है कि आप यहां का Manufacturing competitive world के अंदर पूरी ताकत के साथ आप खड़े रह सकते हैं, आगे बढ़ सकते हैं और अधिक आगे-आगे बढ़ने की संभावनाओं का वहां पर शिलान्‍यास कर सकते हैं। इतनी संभावनाएं इस देश में पड़ी हुई हैं।

पिछले दिनों पूरे विश्‍व में भारत की तेज गति से हो रहे आर्थिक विकास की चर्चा हुई है। हम लम्‍बे अर्से से सुनते थे कि 21वीं सदी एशिया की सदी है, लेकिन बाद में सुई हिंदुस्‍तान तक पहुंचती नहीं थी। कहीं-न-कहीं इधर-उधर अटक जाती थी। लेकिन पिछले कुछ महीनों में एक के बाद एक जो निर्णय हुए हैं, जो Initiative लिए गए हैं। जिस Priority के साथ ,जिस Vision के साथ हम आगे बढ़ रहे हैं। आज दुनिया जो “21वीं सदी एशिया की सदी” सोच रही है, अब उनकी सुई हिंदुस्‍तान की तरफ मुड़ चुकी है। और मुझे विश्‍वास है 21वीं सदी एशिया की सदी हो। उसमें भारत की अहम भूमिका होगी, यह मैं साफ देख रहा हूं। Manufacturing Sector में हम और अधिक आगे बढ़ना चाहते हैं। अभी-अभी भारत के GDP के जो figures आए हैं, 7.4% और दुनिया के गणमान्‍य आर्थिक जगत के लोगों ने लिखा है कि आज विश्‍व में सबसे तेज गति से आगे बढ़ने वाली कोई Economy है तो वो Economy हिंदुस्‍तान की है। इसको हमें और आगे बढ़ाना है, इसको हमें sustain करना है और उसको करने के लिए हम तीनों क्षेत्रों पर बल दे रहे हैं – Manufacturing, Agriculture and Service sector.

Manufacturing में भारत में आपार संभावनाएं पड़ी हुई है। हमारे पास Demographic Dividend है। 65% Population 35 से नीचे की Age Group की है। जिस देश के पास इतना युवाधन हो, वो देश हिंदुस्‍तान को धनवान बनाने में कभी भी पीछे नहीं रह सकता है, यह ताकत हिंदुस्‍तान के युवाधन में है और मैं यह देख रहा हूं अगर विश्‍व के धन को भारत में आकर्षित करना है तो भारत का युवाधन एक बहुत बड़ी Magnetic Power को लेकर बैठा है। हमारी युवाधन की Magnetic Power विश्‍व के धन को भारत में खींचने के लिए पूरी सार्मथ्यवान है और इसलिए विकास के केंद्र बिंदु में हमने हमारे देश के युवा को रखा है। Job creation हो, Job creation के लिए Human Resource Development हो, Resource Development में skill Development में बल दिया जाए और Skill development के लिए सरकार ने पहली बार एक अलग मंत्रालय बनाया है, जो पूरी तरह भारत की युवाशक्ति के Skill development पर बल देगा और मैं मानता हूं कि भारत का Skilled Manpower पूरे विश्‍व को आकर्षित करने की एक बहुत बड़ी ताकत रख सकती है। हमारे पास Talent है और मैं मानता हूं कि भारत के नौजवानों के पास वो Talent है जो दुनिया की Technology को आकर्षित करने की ताकत रखते हैं। दुनिया इस बात को जानकार हैरान हो गई कि एक Hollywood की फिल्‍म बनाने में जितना खर्चा लगता है, उससे कम खर्चें में हिंदुस्‍तान के युवा Talent ने Mars Orbit पर हमारा मंगलयान भेजा। Hollywood फिल्‍म से भी कम खर्चे में, दुनिया यह जानकार के हैरान हो गई और यह हमारे talent के नतीजे हैं। इस Talent के आधार पर हम विश्‍व को.... इस Talent और उनकी Technology, इन दोनों का मिलन हो जाए तो भिन्‍न-भिन्‍न Situation बनेगी और हम नए miracle को प्राप्‍त कर सकते हैं और उस दिशा में हम बल देना चाहते हैं।

कभी-कभार शासन के निर्णय जब स्‍पष्‍ट होते हैं और दुनिया में कोई भी व्‍यक्ति भरोसा कर सकता है, predicable हो तो विश्‍वास करेगा। हमारी कोशिश रही है कि हमारी व्‍यवस्‍थाओं के संबंध में, हमारे कानूनों के संबंध में, हमारी योजनाओं के संबंध में predictability होनी चाहिए। तब जाकर कोई भी भरोसा करेगा कि, हां भई हिंदुस्‍तान के पास सब है, यहाँ अब सरकार की सुविधाएं हैं, हम पहुंचेंगे। पिछले दिनों में Make In India के तहत काफी कदम उठाए गए हैं। अभी देवेंद्र जी बता रहे थे कि Business के लिए अकेले महाराष्‍ट्र ने जो initiative लिए हैं। हिंदुस्‍तान के कई राज्‍यों को वो प्रेरणा देने वाले हैं। एक समय था Maharashtra Industrial development corporation (MIDC) जो यहां की सरकार की व्‍यवस्‍था है, लेकिन bureaucracy इस प्रकार से वहां छाई हुई थी। सरकारी कानून, नियम इस प्रकार से कब्‍जा लेकर के बैठे हुए थे कि सरकारी व्‍यवस्‍था में भी किसी को उद्योग लगाना था तो 70-80 permission के लिए दो-दो, चार-चार साल तक उनको भटकना पड़ता था। देवेंद्र जी ने आकर के उस permission की प्रक्रिया को 70-80 से कम करके 30-35 पर ला दिया है और वो मुझे कह रहे थे कि मैं इसे और भी कम करने वाला हूं।

अभी President ओबामा जब आए थे, तो हिंदुस्‍तान के और अमेरिका के CEO की एक मिटिंग थी। हिंदुस्‍तान के Tourism को बढ़ावा मिले हम करना चाहते हैं, लेकिन अगर एक होटल बनाना है तो एक सौ दस से ज्‍यादा हमें permission लेनी पड़ती है। 110 से ज्‍यादा सरकारी दफ्तरों में हमें चक्‍कर काटने पड़ते हैं। एक permission लेने में अगर एक महीना लग जाए तो एक सौ दस महीने तो हमारे कागज़ ही घूमते रहते हैं। और तब हमारी Construction cost अनेक गुणा बढ़ जाती है और जब जाकर हमने जो project के लिए सोचा होता है वो viable रहता है। कम से कम इसके लिए तो कुछ सोचिए। यह सुनने के बाद मैंने संबंधित लोगों से बात की और मुझे आज खुशी है कि देवेंद्र जी मुझे आज बता रहे थे कि Hospitality industry के लिए जो 110-120 permission थी उसको कम करके हम 20 पर ले आ रहे हैं। Good Governance, यह development की गारंटी होता है, Is of doing business किसी को भी आगे बढ़ने के लिए अवसर देता है और भारत को नई ऊंचाईयों पर ले जाने के लिए हम उस पर बल देना चाहते हैं। आने वाले दिनों में औद्यागिक विकास में हम नई ऊंचाईयों को पार करे।

GE के मित्र मैं अभी उनको देख रहा था और मैंने उनसे कहा कि हमारे यहां विकास की कल्‍पना जल, थल और नभ तीनों को लेकर के होती है। हमने कहा आप थल में तो हैं नभ में भी है, लेकिन जल में नजर नहीं आ रहे हैं। भारत में Shipbuilding industry की बहुत बड़ी संभावना है। इतना समुद्री तट है। Steel manufacturing होता है। विपुल मात्रा में skilled Manpower है। अगर हम shipping के Engine बनाने की दिशा में अगर तेज गति से आगे बढ़ते हैं तो shipbuilding की भी संभावनाएं बढ़ती है और हमारे समुद्र तट के सभी राज्‍यों के नौजवानों को रोजगार की नई ताकत मिलती है और दूसरा मैंने इनसे कहा है कि आप यहां पर components बनाते हैं, parts बनाने हैं और Final Product बाहर बनता है और भारत Defense के क्षेत्र में बहुत बड़ी ताकत से आगे बढ़ना चाहता है। Defense manufacturing की बहुत संभावनाएं हैं हमारे यहां। भारत स्‍वयं में अपने आप में एक बहुत बड़ा Buyer है लेकिन same time third worlds country को हम बहुत कम दाम में Defense equipment export कर सकते हैं। यह जो संभावनाएं हैं उसको लेकर के भारत सरकार ने initiative लिया है। Defense manufacturing में 49% FdI के लिए हमने निर्णय किया है। GE के पास वो संभावनाएं हैं, वो उसमें आगे आएं और भी Defense के क्षेत्र में काम करने वाले लोगों को लाना चाहते हैं।

पुणे एक प्रकार से education का भी Hub बना हुआ है। वहां के engineering college में Defense Engineering के courses शुरू हो, ताकि अच्‍छा manpower तैयार हो। Defense manufacturing के लोग पुणे के पास आएं और यहां की जो Engineering capability है। इन दिनों एक प्रकार से पुणे Engineering centre of India के रूप में उभर रहा है, वहां engineering capacity है इसको हम किस प्रकार से आगे बढ़ाए और यह अगर हम आगे बढ़ाते हैं तो आने वाले दिनों में मुझे विश्‍वास है कि हम Defense के क्षेत्र में बहुत आगे बढ़ सकते हैं।

रेलवे, यहां Locomotive का काम हो रहा है लेकिन हम चाहते हैं कि भारत रेलवे में Self-Sufficient बने। हमारी रेलवे technology में हम Upgradation हो, हम रेलवे का विस्‍तार भी करें, रेलवे की speed भी बढ़ाएं और रेलवे सिर्फ यातायात का साधन नहीं, रेलवे भारत की economy का driving force बन सकती है, उस रूप में रेलवे को आगे ले जाया जा सकता है। उसके manufacturing के लिए भी बहुत सारी संभावनाएं पड़ी है। उसको भी बल देने का प्रयास हम करना चाहते हैं और मैं यह विश्‍वास से कहता हूं कि भारत आने वाले दिनों में अपनी युवाशक्ति के बल पर talented manpower के बल पर maximum resource के optimum utilization के माध्‍यम से, हम हमारी economy को एक नई ऊंचाईयों पर ले जाना चाहते हैं और मुझे विश्‍वास है चाहे infrastructure का क्षेत्र हो, चाहे manufacturing का, हम Phase-ii पर पहुंचना चाहेंगे। और global competitive पर हम आगे बढ़ पाएं उस दिशा में जाएंगे।

भारत का नौजवान विश्‍व में आर्थिक विकास की दुनिया में अपनी एक अहम भूमिका निभा सकता है और उस काम के लिए भारत बहुत तेजी से आगे बढ़ना चाहता है।

मैं फिर एक बार जी के नये साहसिक निर्णयों के लिए भी स्‍वागत करता हूं और दुनियाभर के पूंजी निवेशकों को विश्‍वास दिलाना चाहता हूं कि भारत आपार संभावनाओं से भरा हुआ है और भारत सरकार उन संभावनाओं को साकार करने के लिए, जो भी आवश्‍यक निर्णय करने की आवश्‍यकता होगी उसको करने में तेज गति से आगे बढ़ रही है, जो भारत economy को आगे लेकर जाएगी।

मैं फिर एक बार मुझे यहां बुलाने पर मैं आपको बहुत-बहुत धन्‍यवाद करता हूं और मेरी आप सबको बहुत-बहुत शुभकामनाएं हैं।

धन्‍यवाद।

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Government of India to provide free vaccine to all Indian citizens above 18 years of age: PM Modi
June 07, 2021
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Government of India to provide free vaccine to all Indian citizens above 18 years of age
25 per cent vaccination that was with states will now be undertaken by Government of India: PM
Government of India will buy 75 per cent of the total production of the vaccine producers and provide to the states free of cost: PM
Pradhan Mantri Garib Kalyan Anna Yojna extended till Deepawali: PM
Till November, 80 crore people will continue to get free food grain every month: PM
Corona, Worst Calamity of last hundred years: PM
Supply of vaccine is to increase in coming days: PM
PM informs about development progress of new vaccines
Vaccines for children and Nasal Vaccine under trial: PM
Those creating apprehensions  about vaccination are playing with the lives of people: PM

मेरे प्यारे देशवासियों, नमस्कार! कोरोना की दूसरी वेव से हम भारतवासियों की लड़ाई जारी है।  दुनिया के अनेक देशों की तरह, भारत भी इस लड़ाई के दौरान बहुत बड़ी पीड़ा से गुजरा है। हममें से कई लोगों ने अपने परिजनों को, अपने परिचितों को खोया है। ऐसे सभी परिवारों के साथ मेरी पूरी संवेदनाएं हैं।

साथियों,

बीते सौ वर्षों में आई ये सबसे बड़ी महामारी है, त्रासदी है। इस तरह की महामारी आधुनिक विश्व ने न देखी थी, न अनुभव की थी। इतनी बड़ी वैश्विक महामारी से हमारा देश कई मोर्चों पर एक साथ लड़ा है। कोविड अस्पताल बनाने से लेकर ICU बेड्स की संख्या बढ़ानी हो, भारत में वेंटिलेटर बनाने से लेकर टेस्टिंग लैब्स का एक बहुत बड़ा नेटवर्क तैयार करना हो, कोविड से लड़ने के लिए बीते सवा साल में ही देश में एक नया हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया गया है। सेकेंड वेव के दौरान अप्रैल और मई के महीने में भारत में मेडिकल ऑक्सीजन की डिमांड अकल्पनीय रूप से बढ़ गई थी। भारत के इतिहास में कभी भी इतनी मात्रा में मेडिकल ऑक्सीजन की जरूरत कभी भी महसूस नहीं की गई। इस जरूरत को पूरा करने के लिए युद्धस्तर पर काम किया गया। सरकार के सभी तंत्र लगे। ऑक्सीजन रेल चलाई गई, एयरफोर्स के विमानों को लगाया गया, नौसेना को लगाया गया। बहुत ही कम समय में लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन के प्रॉडक्शन को 10 गुना से ज्यादा बढ़ाया गया। दुनिया के हर कोने से, जहां कही से भी, जो कुछ भी उपलब्ध हो सकता था उसको प्राप्त करने का भरसक प्रयास  किया गया, लाया गया। इसी तरह ज़रूरी दवाओं के production को कई गुना बढ़ाया गया, विदेशों में जहां भी दवाइयां उपलब्ध हों, वहां से उन्हें लाने में कोई कोर-कसर बाकी नहीं छोड़ी गई।

साथियों,

कोरोना जैसे अदृश्य और रूप बदलने वाले दुश्मन के खिलाफ लड़ाई में सबसे प्रभावी हथियार, कोविड प्रोटोकॉल है, मास्क, दो गज की दूरी और बाकी सारी सावधानियां उसका पालन ही है। इस लड़ाई में वैक्सीन हमारे लिए सुरक्षा कवच की तरह है। आज पूरे विश्व में वैक्सीन के लिए जो मांग है, उसकी तुलना में उत्पादन करने वाले देश और वैक्सीन बनाने वाली कंपनियां बहुत कम हैं, इनी गिनी है। कल्पना करिए कि अभी हमारे पास भारत में बनी वैक्सीन नहीं होती तो आज भारत जैसे विशाल देश में क्या होता?  आप पिछले 50-60 साल का इतिहास देखेंगे तो पता चलेगा कि भारत को विदेशों से वैक्सीन प्राप्त करने में दशकों लग जाते थे। विदेशों में वैक्सीन का काम पूरा हो जाता था तब भी हमारे देश में वैक्सीनेशन का काम शुरू भी नहीं हो पाता था। पोलियो की वैक्सीन हो, Smallpox जहां गांव में हम इसको चेचक कहते हैं। चेचक की  वैक्सीन हो, हेपिटाइटिस बी की वैक्सीन हो, इनके लिए देशवासियों  ने दशकों तक इंतज़ार किया था। जब 2014 में देशवासियों ने हमें सेवा का अवसर दिया तो भारत में वैक्सीनेशन का कवरेज, 2014 में भारत में वैक्सीनेशन का कवरेज सिर्फ 60 प्रतिशत के ही आसपास था। और हमारी दृष्टि में ये बहुत चिंता की बात थी। जिस रफ्तार से भारत का टीकाकरण कार्यक्रम चल रहा था, उस रफ्तार से, देश को शत प्रतिशत टीकाकरण कवरेज का लक्ष्य हासिल करने में करीब-करीब 40 साल लग जाते। हमने इस समस्या के समाधान के लिए मिशन इंद्रधनुष को लॉन्च किया। हमने तय किया कि मिशन इंद्रधनुष के माध्यम से युद्ध स्तर पर वैक्सीनेशन किया जाएगा और देश में जिसको भी वैक्सीन की जरूरत है उसे वैक्सीन देने का प्रयास होगा। हमने मिशन मोड में काम किया, और सिर्फ 5-6 साल में ही वैक्सीनेशन कवरेज 60 प्रतिशत से बढ़कर 90 प्रतिशत से भी ज्यादा हो गई। 60 से 90,  यानि हमने वैक्सीनेशन की स्पीड भी  बढ़ाई और दायरा भी बढ़ाया।

 हमने बच्चों को कई जानलेवा बीमारियों से बचाने के लिए कई नए टीकों को भी भारत के टीकाकरण अभियान का हिस्सा बना दिया। हमने ये इसलिए किया, क्योंकि हमें हमारे देश के बच्चों की चिंता थी, गरीब की चिंता थी, गरीब के उन बच्चों की चिंता थी जिन्हें कभी टीका लग ही नहीं पाता था। हम शत प्रतिशत टीकाकरण कवरेज की तरफ बढ़ रहे थे कि कोरोना वायरस ने हमें घेर लिया। देश ही नहीं, दुनिया के सामने फिर पुरानी आशंकाएं घिरने लगीं कि अब भारत कैसे इतनी बड़ी आबादी को बचा पाएगा? लेकिन साथियों,जब नीयत साफ होती है, नीति स्पष्ट होती है, निरंतर परिश्रम होता है, तो नतीजे भी मिलते हैं। हर आशंका को दरकिनार करके भारत ने एक साल के भीतर ही एक नहीं बल्कि दो 'मेड इन इंडिया' वैक्सीन्स लॉन्च कर दीं। हमारे देश ने, देश के वैज्ञानिकों ने ये दिखा दिया कि भारत बड़े बड़े देशों से पीछे नहीं है। आज जब मैं आपसे बात कर रहा हूं तो देश में 23 करोड़ से ज्यादा वैक्सीन की डोज़ दी जा चुकी हैं।

साथियों,

हमारे यहाँ कहा जाता है- विश्वासेन सिद्धि: अर्थात, हमारे प्रयासों में हमें सफलता तब मिलती है, जब हमें स्वयं पर विश्वास होता है। हमें पूरा विश्वास था कि हमारे वैज्ञानिक बहुत ही कम समय में वैक्सीन बनाने में सफलता हासिल कर लेंगे। इसी विश्वास के चलते जब हमारे वैज्ञानिक अपना रिसर्च वर्क कर ही रहे थे तभी हमने लॉजिस्टिक्स और दूसरी तैयारियां शुरू कर दीं थीं। आप सब भली-भांति जानते हैं कि पिछले साल यानि एक साल पहले, पिछले साल अप्रैल में, जब कोरोना के कुछ ही हजार केस थे, उसी समय वैक्सीन टास्क फोर्स का गठन कर दिया गया था। भारत में, भारत के लिए वैक्सीन बनाने वाली कंपनियों को सरकार ने हर तरह से सपोर्ट किया। वैक्सीन निर्माताओं को क्लिनिकल ट्रायल में मदद की गई, रिसर्च और डवलपमेंट के लिए ज़रूरी फंड दिया गया, हर स्तर पर सरकार उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर चली। 

आत्मनिर्भर भारत पैकेज के तहत मिशन कोविड सुरक्षा के माध्यम से भी उन्हें हज़ारों करोड़ रुपए उपलब्ध कराए गये। पिछले काफी समय से देश लगातार जो प्रयास और परिश्रम कर रहा है, उससे आने वाले दिनों में वैक्सीन की सप्लाई और भी ज्यादा बढ़ने वाली है। आज देश में 7 कंपनियाँ, विभिन्न प्रकार की वैक्सीन का प्रॉडक्शन कर रही हैं। तीन और वैक्सीन का ट्रायल भी एडवांस स्टेज पर चल रहा है। वैक्सीन की उपलब्धता बढ़ाने के लिए दूसरे देशों की कंपनियों से भी वैक्सीन खरीदने की प्रक्रिया को तेज किया गया है। इधर हाल के दिनों में, कुछ एक्सपर्ट्स द्वारा हमारे बच्चों को लेकर भी चिंता जताई गई है। इस दिशा में भी 2 वैक्सीन्स का ट्रायल तेजी से चल रहा है। इसके अलावा अभी देश में एक 'नेज़ल' वैक्सीन पर भी रिसर्च जारी है। इसे सिरिन्ज से न देकर नाक में स्प्रे किया जाएगा। देश को अगर निकट भविष्य में इस वैक्सीन पर सफलता मिलती है तो इससे भारत के वैक्सीन अभियान में और ज्यादा तेजी आएगी।

साथियों,

इतने कम समय में वैक्सीन बनाना, अपने आप में पूरी मानवता के लिए बहुत बड़ी उपलब्धि है। लेकिन इसकी अपनी सीमाएं भी हैं। वैक्सीन बनने के बाद भी दुनिया के बहुत कम देशों में वैक्सीनेशन प्रारंभ हुआ, और ज्यादातर समृद्ध देशों में ही शुरू हुआ। WHO ने वैक्सीनेशन को लेकर गाइडलाइंस दीं। वैज्ञानिकों ने वैक्सीनेशन की रूप रेखा रखी। और भारत ने भी जो अन्य देशों की best practices थी , विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानक  थे, उसी आधार पर चरणबद्ध तरीके से वैक्सीनेशन करना तय किया। केंद्र सरकार ने मुख्यमंत्रियों के साथ हुई अनेकों बैठकों से जो सुझाव मिले, संसद के विभिन्न दलों के साथियों द्वारा जो सुझाव मिले, उसका भी पूरा ध्यान रखा। इसके बाद ही ये तय हुआ कि जिन्हें कोरोना से ज्यादा खतरा है, उन्हें प्राथमिकता दी जाएगी। इसलिए ही, हेल्थ वर्कर्स, फ्रंटलाइन वर्कर्स, 60 वर्ष की आयु से ज्यादा के नागरिक, बीमारियों से ग्रसित 45 वर्ष से ज्यादा आयु के नागरिक, इन सभी को वैक्सीन पहले लगनी शुरू हुई। आप कल्पना कर सकते हैं कि अगर कोरोना की दूसरी वेव से पहले हमारे फ्रंटलाइन वर्कर्स को वैक्सीन नहीं लगी होती तो क्या होता? सोचिए, हमारे डॉक्टर्स, नर्सिंग स्टाफ को वैक्सीन ना लगी तो क्या होता? अस्पतालों में सफाई करने वाले हमारे भाई-बहनों को, एंबुलेंस के हमारे ड्राइवर्स भाई - बहनों को वैक्सीन ना लगी होती तो क्या होता? ज्यादा से ज्यादा हेल्थ वर्कर्स का वैक्सीनेशन होने की वजह से ही वो निश्चिंत होकर दूसरों की सेवा में लग पाए, लाखों देशवासियों का जीवन बचा पाए।

लेकिन देश में कम होते कोरोना के मामलों के बीच, केंद्र सरकार के सामने अलग-अलग सुझाव भी आने लगे, भिन्न-भिन्न मांगे होने लगीं। पूछा जाने लगा, सब कुछ भारत सरकार ही क्यों तय कर रही है? राज्य सरकारों को छूट क्यों नहीं दी जा रही? राज्य सरकारों को लॉकडाउन की छूट क्यों नहीं मिल रही? One Size Does Not Fit All जैसी बातें भी कही गईं। दलील ये दी गई कि संविधान में चूंकि Health-आरोग्य, प्रमुख रूप से राज्य का विषय है, इसलिए अच्छा है कि ये सब राज्य ही करें। इसलिए इस दिशा में एक शुरूआत की गई। भारत सरकार ने एक बृहद गाइडलाइन बनाकर राज्यों को दी ताकि राज्य अपनी आवश्यकता और सुविधा के अनुसार काम कर सकें। स्थानीय स्तर पर कोरोना कर्फ्यू लगाना हो, माइक्रो कन्टेनमेंट जोन बनाना हो, इलाज से जुड़ी व्यवस्थाएं हो, भारत सरकार ने राज्यों की इन मांगों को स्वीकार किया।

साथियों,

इस साल 16 जनवरी से शुरू होकर अप्रैल महीने के अंत तक, भारत का वैक्सीनेशन कार्यक्रम मुख्यत: केंद्र सरकार की देखरेख में ही चला। सभी को मुफ्त वैक्सीन लगाने के मार्ग पर देश आगे बढ़ रहा था। देश के नागरिक भी, अनुशासन का पालन करते हुए, अपनी बारी आने पर वैक्सीन लगवा रहे थे। इस बीच, कई राज्य सरकारों ने फिर कहा कि वैक्सीन का काम डी-सेंट्रलाइज किया जाए और राज्यों पर छोड़ दिया जाए। तरह-तरह के स्वर उठे। जैसे कि वैक्सीनेशन के लिए Age Group क्यों बनाए गए? दूसरी तरफ किसी ने कहा कि उम्र की सीमा आखिर केंद्र सरकार ही क्यों तय करे? कुछ आवाजें तो ऐसी भी उठीं कि बुजुर्गों का वैक्सीनेशन पहले क्यों हो रहा है? भांति-भांति के दबाव भी बनाए गए, देश के मीडिया के एक वर्ग ने इसे कैंपेन के रूप में भी चलाया।

साथियों,

काफी चिंतन-मनन के बाद इस बात पर सहमति बनी कि राज्य सरकारें अपनी तरफ से भी प्रयास करना चाहती हैं, तो भारत सरकार क्यों ऐतराज करे? और भारत सरकार ऐतराज क्यों करे? राज्यों की इस मांग को देखते हुए, उनके आग्रह को ध्यान में रखते हुए 16 जनवरी से जो व्यवस्था चली आ रही थी, उसमें प्रयोग के तौर पर एक बदलाव किया गया। हमने सोचा कि राज्य ये मांग कर रहे हैं, उनका उत्साह है, तो चलो भई 25 प्रतिशत काम उन्ही की शोपित कर दिया जाये, उन्ही को दे दिया जाए। स्वभाविक है, एक मई से राज्यों को 25 प्रतिशत काम उनके हवाले दिया गया, उसे पूरा करने के लिए उन्होंने अपने-अपने तरीके से प्रयास भी किए। 

इतने बड़े काम में किस तरह की कठिनाइयां आती हैं, ये भी उनके ध्यान में आने लगा, उनको पता चला। पूरी दुनिया में वैक्सीनेशन की क्या स्थिति है, इसकी सच्चाई से भी राज्य परिचित हुए। और हमने देखा, एक तरफ मई में सेकेंड वेव, दूसरी तरफ वैक्सीन के लिए लोगों का बढ़ता रुझान और तीसरी तरफ राज्य सरकारों की कठिनाइयां। मई में दो सप्ताह बीतते-बीतते कुछ राज्य खुले मन से ये कहने लगे कि पहले वाली व्यवस्था ही अच्छी थी। धीरे-धीरे इसमें कई राज्य सरकारें जुड़ती चली गईं। वैक्सीन का काम राज्यों पर छोड़ा जाए, जो इसकी वकालत कर रहे थे, उनके विचार भी बदलने लगे। ये एक अच्छी बात रही कि समय रहते राज्य, पुनर्विचार की मांग के साथ फिर आगे आए। राज्यों की इस मांग पर, हमने भी सोचा कि देशवासियों को तकलीफ ना हो, सुचारू रूप से उनका वैक्सीनेशन हो, इसके लिए एक मई के पहले वाली, यानि 1 मई के पहले 16 जनवरी से अप्रैल अंत तक जो व्यवस्था थी, पहले वाली पुरानी व्यवस्था को फिर से लागू किया जाए।

 

साथियों,

आज ये निर्णय़ लिया गया है कि राज्यों के पास वैक्सीनेशन से जुड़ा जो 25 प्रतिशत काम था, उसकी जिम्मेदारी भी भारत सरकार उठाएगी। ये व्यवस्था आने वाले 2 सप्ताह में लागू की जाएगी। इन दो सप्ताह में केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर नई गाइड-लाइंस के अनुसार आवश्यक तैयारी कर लेंगी। संयोग है कि दो सप्ताह बाद, 21 जून को ही अंतरराष्ट्रीय योग दिवस भी है। 21 जून, सोमवार से देश के हर राज्य में, 18 वर्ष से ऊपर की उम्र के सभी नागरिकों के लिए, भारत सरकार राज्यों को मुफ्त वैक्सीन मुहैया कराएगी। वैक्सीन निर्माताओं से कुल वैक्सीन उत्पादन का 75 प्रतिशत हिस्सा भारत सरकार खुद ही खरीदकर राज्य सरकारों को मुफ्त देगी। यानि देश की किसी भी राज्य सरकार को वैक्सीन पर कुछ भी खर्च नहीं करना होगा। अब तक देश के करोड़ों लोगों को मुफ्त वैक्सीन मिली है।

 अब 18 वर्ष की आयु के लोग भी इसमें जुड़ जाएंगे। सभी देशवासियों के लिए भारत सरकार ही मुफ्त वैक्सीन उपलब्ध करवाएगी। गरीब हों, निम्न मध्यम वर्ग हों, मध्यम वर्ग हो या फिर उच्च वर्ग, भारत सरकार के अभियान में मुफ्त वैक्सीन ही लगाई जाएगी। हां, जो व्यक्ति मुफ्त में वैक्सीन नहीं लगवाना चाहते, प्राइवेट अस्पताल में वैक्सीन लगवाना चाहते हैं, उनका भी ध्यान रखा गया है। देश में बन रही वैक्सीन में से 25 प्रतिशत,  प्राइवेट सेक्टर के अस्पताल सीधे ले पाएं, ये व्यवस्था जारी रहेगी। प्राइवेट अस्पताल, वैक्सीन की निर्धारित कीमत के उपरांत एक डोज पर अधिकतम 150 रुपए ही सर्विस चार्ज ले सकेंगे। इसकी निगरानी करने का काम राज्य सरकारों के ही पास रहेगा।

साथियों,

हमारे शास्त्रों में कहा गया है-प्राप्य आपदं न व्यथते कदाचित्, उद्योगम् अनु इच्छति चा प्रमत्तः॥ अर्थात्, विजेता आपदा आने पर उससे परेशान होकर हार नहीं मानते, बल्कि उद्यम करते हैं, परिश्रम करते हैं, और परिस्थिति पर जीत हासिल करते हैं। कोरोना से लड़ाई में 130 करोड़ से अधिक भारतीयों ने अभी तक की यात्रा आपसी सहयोग, दिन रात मेहनत करके तय की है। आगे भी हमारा रास्ता हमारे श्रम और सहयोग से ही मजबूत होगा। हम वैक्सीन प्राप्त करने की गति भी बढ़ाएंगे और वैक्सीनेशन अभियान को भी और गति देंगे। हमें याद रखना है कि, भारत में वैक्सीनेशन की रफ्तार आज भी दुनिया में बहुत तेज है, अनेक विकसित देशों से भी तेज है। हमने जो टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म बनाया है- Cowin, उसकी भी पूरी दुनिया में चर्चा हो रही है। अनेक देशों ने भारत के इस प्लेटफॉर्म को इस्तेमाल करने में रुचि भी दिखाई है। हम सब देख रहे हैं कि वैक्सीन की एक एक डोज कितनी महत्वपूर्ण है, हर डोज से एक जिंदगी जुड़ी हुई है। केंद्र सरकार ने ये व्यवस्था भी बनाई है कि हर राज्य को कुछ सप्ताह पहले ही बता दिया जाएगा कि उसे कब, कितनी डोज मिलने वाली है। मानवता के इस पवित्र कार्य में वाद-विवाद और राजनीतिक छींटाकशी, ऐसी बातों को कोई भी अच्छा नहीं मानता है। वैक्सीन की उपलब्धता के अनुसार, पूरे अनुशासन के साथ वैक्सीन लगती रहे, देश के हर नागरिक तक हम पहुंच सकें, ये हर सरकार, हर जनप्रतिनिधि, हर प्रशासन की सामूहिक जिम्मेदारी है।

प्रिय देशवासियों,

टीकाकरण के अलावा आज एक और बड़े फैसले से मैं आपको अवगत कराना चाहता हूं। पिछले वर्ष जब कोरोना के कारण लॉकडाउन लगाना पड़ा था तो प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत, 8 महीने तक 80 करोड़ से अधिक देशवासियों को मुफ्त राशन की व्यवस्था हमारे देश ने की थी। इस वर्ष भी दूसरी वेव के कारण मई और जून के लिए इस योजना का विस्तार किया गया था। आज सरकार ने फैसला लिया है कि प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना को अब दीपावली तक आगे बढ़ाया जाएगा। महामारी के इस समय में, सरकार गरीब की हर जरूरत के साथ, उसका साथी बनकर खड़ी है। यानि नवंबर तक 80 करोड़ से अधिक देशवासियों को, हर महीने तय मात्रा में मुफ्त अनाज उपलब्ध होगा। इस प्रयास का मकसद यही है कि मेरे किसी भी गरीब भाई-बहन को, उसके परिवार को, भूखा सोना ना पड़े।

साथियों,

देश में हो रहे इन प्रयासों के बीच कई क्षेत्रों से वैक्सीन को लेकर भ्रम और अफवाहों की  चिंता बढ़ाती है। ये चिंता भी मैं आपके सामने व्यक्त करना चाहता हूं। जब से भारत में वैक्सीन पर काम शुरू हुआ, तभी से कुछ लोगों द्वारा ऐसी बातें कही गईं जिससे आम लोगों के मन में शंका पैदा हो। कोशिश ये भी हुई कि भारत के वैक्सीन निर्माताओं का हौसला पस्त पड़ जाए और उनके सामने अनेक प्रकार की बाधाएं आएं। जब भारत की वैक्सीन आई तो अनेक माध्यमों से शंका-आशंका को और बढ़ाया गया। वैक्सीन न लगवाने के लिए भांति-भांति के तर्क प्रचारित किए गए। इन्हें भी देश देख रहा है। जो लोग भी वैक्सीन को लेकर आशंका पैदा कर रहे हैं, अफवाहें फैला रहे हैं, वो भोले-भाले भाई-बहनों के जीवन के साथ बहुत बड़ा खिलवाड़ कर रहे हैं।

ऐसी अफवाहों से सतर्क रहने की जरूरत है। मैं भी आप सबसे, समाज के प्रबुद्ध लोगों से, युवाओं से अनुरोध करता हूँ, कि आप भी वैक्सीन को लेकर जागरूकता बढ़ाने में सहयोग करें। अभी कई जगहों पर कोरोना कर्फ्यू में ढील दी जा रही है, लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि हमारे बीच से कोरोना चला गया है। हमें सावधान भी रहना है, और कोरोना से बचाव के नियमों का भी सख्ती से पालन करते रहना है। मुझे पूरा विश्वास है, हम सब कोरोना से इस जंग में जीतेंगे, भारत कोरोना से जीतेगा। इन्हीं शुभकामनाओं के साथ, आप सभी देशवासियों का बहुत बहुत धन्यवाद!