PM Narendra Modi holds candid interaction with school students
PM Narendra Modi shares experiences of his life as a student
PM releases commemorative coins of Rs. 125 & Rs. 10 to mark birth anniversary Dr. Radhakrishnan
A teacher is known by the accomplishments of his students: PM Narendra Modi
A mother gives birth to a child, the teacher provides life: PM
A teacher can never retire, says Prime Minister Narendra Modi
Dr. Radhakrishnan was always a teacher even after becoming the President: PM Modi
Dr. APJ Abdul Kalam always wanted to be remembered as a teacher throughout his life: PM
I bow to all the teachers. It is the teachers who make generations: PM

मंच पर विराजमान मंत्री परिषद के मेरे सभी साथी विद्यार्थी मित्रों और सभी गुरुजन,

5 सितंबर भारत के भूतपूर्व राष्ट्रपति डॉ. राधाकृष्णन जी का जन्मदिन शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है। लेकिन कल कृष्ण का भी जन्मदिन आ गया और राधाकृष्ण का भी जन्मदिन आ गया और इसके कारण विद्यार्थियों से मिलने का मुझे आज मौका मिला है। कभी-कभी लोगों को लगता है कि शिक्षक दिवस पर विद्यार्थियों से क्यों समय बिताते हो। और मेरा अनुभव है कि शिक्षक की पहचान विद्यार्थी होता है। विद्य़ार्थी अपने करत्रूप से अपने पराक्रम से अपने गुरुजन का नाम रौशन करता है। और शायद ही दुनिया में कोई ऐसा व्यक्ति होगा, जो इस बात को स्वीकार न करता हो कि उसके जीवन को बनाने में उसकी माता का और उसके शिक्षक का योगदान न हो। हर व्यक्ति के जीवन में, कितने ही आप biography- autobiography पढ़ लें इस बात का जिक्र आता है - मां जन्म देती है और गुरू जीवन देता है। एक जीवन जीने की sense देता है। और हम लोगों के मन पर भी शिक्षक का इतना प्रभाव होता है अगर हम 8वीं कक्षा में पढ़ते हों और एकाद हमारे टीचर ने कह दिया कि रात को सोते समय pillow ऐसे रखो, हमने कभी उसको नहीं पूछा होगा कि आप ये कहां से लाए, पढ़ा था, कहां पढ़ा था, किस साइंस में है, कौन सा डॉक्टर कहता है, लेकिन हमारे मन में ऐसा रजिस्टर्ड हो जाता है, जब भी सोने के लिये जाते हैं तो वो टीचर याद आता है, वो pillow याद आता है। हम भूल नहीं सकते जीवन भर भूल नहीं सकते।

हर व्यक्ति के जीवन में अपने बचपन में अपने टीचर ने कही हुई कोई न कोई ऐसी बात होगी, जो हमारे जीवन का हिस्सा बन गई हो गई, लेकिन करीब-करीब हम सब लोग ऐसे होंगे कि टीचर ने हमें जो कठिन बात बताई होगी वो हम सब बिना भूले, भूल गए होंगे। और इसलिये विद्यार्थी के जीवन में शिक्षक का माहात्म्य क्या है और शिक्षक के जीवन में विद्यार्थी का महत्व क्या है। ये जब तक आपसी समझदारी विकसित नहीं होती है, तब तक एक gap बना रहता है।

कभी-कभी तो मुझे लगता है कि जिन शिक्षक मित्रों को लिखने की आदत हो, उन्होंने अपने जीवनकाल के यादगार विद्यार्थियों के जीवन पर कुछ लिखना चाहिए। जब मैं टीचर था तो पांचवीं कक्षा में एक ऐसा बच्चा था, ऐसा करता था, तब पता चलेगा कि शिक्षक ने विद्यार्थी के जीवन में कितना वो involve था। सिर्फ result आयें और अच्छे marks लाने वाले विद्यार्थी दिखाई दे रहे हैं और बाकी विद्यार्थी नजर ना आएं तो मैं मानता हूं कि वो शिक्षक अधूरा है। उसके साथ जीने वाले और हमें ये न भूलें कि एक उम्र के बाद विद्यार्थी सबसे ज्यादा, बालक सबसे ज्यादा समय किसी के साथ बिताता है, तो अपने शिक्षक के साथ बिताता है परिवार के साथ भी कम बिताता है और ऐसे समय शिक्षक का बहुत बड़ा दायित्व बनता है।

डॉक्टर राधाकृष्णन जी जीवन के सर्वोच्च स्थान पर पहुंचने के बावजूद भी अपने भीतर के शिक्षक को उन्होंने अमर बनाए रखा था। उसे कभी मरने नहीं दिया। शिक्षक कभी उम्र से बंधा नहीं होता, शिक्षक कभी रिटायर हो ही नहीं सकता, अगर वो सच्चा शिक्षक है तो। आपने देखा होगा कभी गांव में दादा होंगे 80 - 90 साल के वो टीचर रहे होंगे, तो 90 साल की उम्र में भी पोतों के पोते को भी बैठकर के पढ़ाते होंगे। पोता कहता होगा कि अब सिलेबस बदल गया है फिर भी दादा कहते होंगे नहीं ये पढ़ो। ये जो उसके रगों में शिक्षकत्व रहा है, वो उसे इस काम को करने की प्रेरणा देता है।

हम लोगों को, हम में से बहुत लोग हैं, विद्यार्थी मित्र तो सभी हैं, जिनको डॉ. राधाकृष्णन जी के जमाने में जीने का अवसर नहीं मिला। लेकिन अभी-अभी हमें डॉ. अब्दुल कलाम जी को तो निकट से हम लोगों ने देखा है। वे भी भारत के राष्ट्रपति थे और बच्चों को बहुत प्यार करते थे। और यानी सचमुच में उनका वो passion उनको किसी ने पूछा था एक बार कि आप क्या चाहेंगे लोग आपको कैसे याद रखें तो डॉ. एपीजी अब्दुल कलाम जी ने कहा कि लोग मुझे अगर याद रखना है तो टीचर के रूप में याद रखें। मेरे लिये, अब ये उनके सिर्फ शब्द नहीं थे, राष्ट्रपति पद से मुक्त होने के दूसरे ही दिन वे चेन्नई चले गए। और चेन्नई में जाकर के क्लास रूम में बच्चों को पढ़ाना शुरु कर दिया। और जीवन के अंतकाल में भी विद्यार्थियों के साथ अपने विचारों का विमर्श करते – करते ही उन्होंने अपना देह छोड़ दिया। यानी ये भीतर शिक्षक के प्रति अपने आप में संजोया हुआ समर्पण भाव, कितना उत्तम होगा के जिसके कारण वे एक पल भी जीवन में विद्यार्थी से अलग नहीं हो पाए, विद्या के मार्ग से अलग नहीं हो पाए और हर पल नई प्रतिभाओं को खोजते रहे।

हमारे देश में, इस बात को हमें स्वीकार करना होगा और दुनिया के हर देश में शिक्षक दिवस सिर्फ हमारे देश में मनाया जाता है, ऐसा नहीं है, दुनिया के कई देशों में मनाया जाता है। अलग-अलग inspiration होते हैं लेकिन मनाया जाता है। और उसका कारण यह है कि जो व्यवस्था है ये व्यवस्था निरंतर प्राणवान बनी रहनी चाहिए। विद्यार्थी का शिक्षक के प्रति आदर, शिक्षक का शिक्षा के प्रति समर्पण और विद्यार्थी और शिक्षक के बीच में एक अपनत्व का भाव, यही एक जोड़ी होती है, जो न सिर्फ ज्ञान परोसती है लेकिन जीवन जीने की कला भी सिखाती है और सपने संजोने की आदत भी बनाती है। और इसलिये हम लोगों का प्रयास रहना चाहिए और ये जरूरी नहीं है कि ये बड़े-बड़े लोग ही उत्तम शिक्षक होते हैं ऐसा नहीं होता है।

मुझे कभी एक बार किसी ने अनुभव बताया था। एक आंगनवाड़ी में काम करने वाली एक महिला थी, आंगनवाड़ी में काम करने वाली worker थी। वो खुद पाचवीं कक्षा तक पढ़ी होगी। ज्यादा पढ़ी नहीं होगी। पांचवी सातवीं कक्षा में और आंगनवाड़ी आते हैं उनको बच्चे गीत करना, खेलाना-खेलना ऐसे ही छोटे मोटे कार्यक्रम रहते हैं आंगनवाडी में। लेकिन इस महिला में आंगनवाड़ी worker में उन बच्चों के प्रति इतना लगाव था कि गरीब होने के बावजूद उसने काम शुरु किया। देखिए संस्कार कैसे करती है टीचर अपनी जो साड़ी थी, गरीब परिवार में साड़ी पुरानी हो तो उसको जितना लंबा हो खींच सकें, खींचते हैं और बाद में सोचते हैं जब बर्तन बेचने वाला आएगा तब इसके बदले में कुछ बर्तन खरीद लेंगे। कोई न कोई चीज खरीदने का प्रयास करेंगे। ये आंगनबाड़ी worker जो कि गरीब, उसने क्या किया अपनी जो पुरानी साड़ी थी छोटे छोटे टुकड़े करके हाथ से उसके बार्डर को ठीक करके छोटे छोटे handkerchief बनाया। बाजार से अपने जेब के पैसों से safety pin ले आई और उसके आंगनवाड़ी में 20-22 बच्चे आते थे जब वो स्कूल आते थे, तो उसके यहां handkerchief लगाकर करके पिन लगा देती थी और बच्चों को समझाती थी कैसे हाथ पोछना है, कैसे नाक पोंछना है, handkerchief का कैसे उपयोग करना है। वो regular सीखाती थी। और बच्चे जब वापस जाते थे तब फिर वो निकाल देती थी और घर ले जाकर के दूसरे दिन धो करके ले आती थी। आप मुझे बताइये एक टीचर ने उन बच्चों के जीवन को कितना बड़ा संस्कार दिया होगा। ये जो involvement होता है ये जब विद्यार्थी के प्रति शिक्षक का भक्तिभाव होता है। तब जाकर करके सहज रुप से प्रवृति बनती है और उस प्रवृति से हम जिस प्रकार का जीवन चाहते हैं। जीवन बनता है। जैसे एक कुम्हार मिट्टी की लोंदा लेकर करके उसको संभालता भी है और उसको shape भी देता रहता है। एक हाथ से संभालता है और shape भी देता रहता है।

टीचर भी एक-एक बालक के जीवन को संवारता है। आज शिक्षक दिवस पर विद्यार्थी के मन में भी शिक्षक के प्रति वो भाव आवश्‍यक है और शिक्षक के लिए भी। ये और व्‍यवसाय जैसा नहीं है। ये उससे कुछ प्‍लस 1 है। एक डॉक्‍टर ऑपरेशन करके अगर किसी की जिन्‍दगी बना दे, बचा ले। कठिन से कठिन ऑपरेशन करके, तो देशभर के अखबारों में उसकी story छपती है। लेकिन एक टीचर ऐसे जीवनकाल में सौ डॉक्‍टर बना दे, तो उस टीचर की तरफ ध्‍यान नहीं जाता है। आज का समय उन तपस्‍याओं का स्‍मरण करने का समय है कि अगर हमें अच्‍छे डॉक्‍टर मिले होंगे, अच्‍छे इंजीनियर मिले होंगे, अच्‍छे साइंटिस्‍ट मिले होंगे, तो उसके पीछे कोई न कोई शिक्षक होगा, जिसने उसे बनाया होगा और जो देश को बनाने में लगा होगा।

और इसलिए हम सब के लिए हमारे शिक्षकों के प्रति और एक जमाना था, जब मैं छोटा था, गांव में शिक्षक तो इतना आदर का केन्‍द्र होता था। परिवार में कोई भी सुप्रसंग हो तो सबसे पहले बच्‍चों को कहते थे घरवाले, देखो भई तुम्‍हारे टीचर के यहां ये रखकर आ जाओ, देकर आ जाओ। ये प्रसाद टीचर के यहां रख दो। यानी एक इस प्रकार का पूरे गांव की एक सम्‍मानजनक व्‍यवस्‍था। इन व्‍यवस्‍थाओं को हमें फिर से विकसित करना होगा। अब हर चीज रुपयों पैसों से होती नहीं है। संस्‍कार से होती है, अपनेपन से होती है, उसके माहात्म्य से होती है। इस प्रकार के कार्यक्रमों के द्वारा उन चीजों को पनपाने का प्रयास है, एक व्‍यापक रूप में बने।

शिक्षक दिवस पहले भी मनाया जाता था, लेकिन क्‍या होता था। कुछ स्‍कूल में होता था तो उस दिन एक-आध टीचर अगर बड़ा उत्‍साही हो, initiative लेता है तो सुबह assembly में डॉ. राधाकृष्‍णन के जीवन पर कुछ बता देता था। या तो फिर कहते थे कि भई आज टीचर बनना है, तो विद्यार्थी भी क्‍या सोचते थे कि टीचर बनना है, मतलब कपड़े बदलना। पहले स्‍कूल की uniform में आते थे तो आज कुछ टीचर जैसे कपड़े पहनकर आना है। बच्‍चियां हैं, तो साड़ी पहनकर आना। फिर क्‍लासरूम में जा करके, एक-आध चीज पढ़ाना और ख़ुशी करना। ये इससे आगे नहीं होता था। हमारी कोशिश है कि इस प्रेरक पर्व को, हमारी व्‍यवस्‍थाओं में प्राण कैसे लाया जाएं। व्‍यवस्‍था को प्राणमान कैसे बनाया जाए। इसका माहात्म्य कैसे बढ़ाया जाए और इसी के लिए कोशिश कर रहे हैं।

मेरे लिए खुशी की बात है कि मुझे विद्यार्थियों के साथ गप्पा-गोष्‍ठी करने का अवसर मिल जाता है। क्‍योंकि बालक मन जितना हमको सिखा पाता है उतना कोई नहीं सिखा पाता। बालक का जो observation होता है, वो सही होता है। यानी एक प्रकार से घटनाओं का सही दर्पण अगर कहीं है, तो बालक उस घटना को किस नजरिए से देखता है, वो उसका सही दर्पण होता है और उस देशभर के बालकों से आज बात करने का मुझे अवसर मिला है। मैं विभाग का आभारी हूं।

आज यहां दो और काम हुए। एक डॉ. राधाकृष्‍णन जी का 125 रुपए का एक coin एक 10 रुपए का coin, इसको भारत सरकार के वित्‍त मंत्रालय ने आज इसको देश के सामने रखा है। और दूसरा एक “कला उत्‍सव” की website का भी launching हुआ है। हमारे देश में college के student के लिए तो youth-festival होता है, लेकिन अब वक्‍त बदल चुका है। हमारे छोटे-छोटे बालकों में भी इतनी talent होती हैं। उनको अवसर मिलना चाहिए और देश robot तैयार करना नहीं चाहता है। हम कितने पढ़े-लिखे क्‍यों न हो, हमें कितना ही ज्ञान engineering का, technology का क्‍यों न हो, लेकिन हमें robot बनने से बचना है। हमारे भीतर संवेदनाएं हों और ये कला, साधना से आती है। कला के साक्षात्‍कार से आती है। कला के साथ सहजता से आती है और बिना कला के जीवन एक प्रकार से robot सा बन जाता है। इस कला उत्‍सव के माध्‍यम से हमारे स्‍कूल के जो बालक है उनको अवसर मिले, उनकी प्रतिभा को निखार मिले। लेकिन ये सिर्फ नाट्य-नृत्‍य का कार्यक्रम नहीं है इसके अंदर एक कल्‍पना है कि कोई न कोई एक theme हो। जैसे मान लीजिए हम एक बार theme तय करेंगे कि बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ। तो उस कला उत्‍सव में जितने ड्रामा आएंगे, उसी विषय पर आने चाहिए, गीत आए तो उसी विषय पर आने चाहिए, नृत्‍य आए तो उसी विषय पर आने चाहिए। तो पूरे देश में कला उत्‍सव के साथ-साथ एक सामाजिक दायित्‍व का माहौल भी बनेगा और इसलिए उसको वेबसाइट पर रखा है। मैं चाहूंगा कि देश भर के सभी स्‍कूल के लोग इसके साथ अपने आप को जोड़ेंगे और कला उत्‍सव को सचमुच में एक उत्‍सव के रूप में तैयार करेंगे। मैं अपेक्षा करता हूं।

मैं फिर एक बार आज डॉ. राधाकृष्‍णन जी को नमन करता हूं, देश के सभी गुरूजनों को नमन करता हूं और सभी शिक्षकों से अपेक्षा करता हूं कि हमारा काम है पीढ़ियों को बनाना, पीढ़ियों को बढ़ाना, वहीं देश को बढ़ाएंगे। उस काम को हम सब मिलकर करें, इसी अपेक्षा के साथ बहुत-बहुत धन्‍यवाद।

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नीमागेल्ला नन्ना नमस्कारागलु।

आज चैत्र नवरात्र के पावन अवसर पर मुझे ताई चामुंडेश्वरी के आशीर्वाद लेने का अवसर मिल रहा है। मैं ताई चामुंडेश्वरी, ताई भुवनेश्वरी और ताई कावेरी के चरणों में प्रणाम करता हूँ। मैं सबसे पहले आदरणीय देवगौड़ा जी का हृदय से आभार व्यक्त करता हूं। आज भारत के राजनीति पटल पर सबसे सीनियर मोस्ट राजनेता हैं। और उनके आशीर्वाद प्राप्त करना ये भी एक बहुत बड़ा सौभाग्य है। उन्होंने आज जो बातें बताईं, काफी कुछ मैं समझ पाता था, लेकिन हृदय में उनका बहुत आभारी हूं। 

साथियों

मैसुरु और कर्नाटका की धरती पर शक्ति का आशीर्वाद मिलना यानि पूरे कर्नाटका का आशीर्वाद मिलना। इतनी बड़ी संख्या में आपकी उपस्थिति, कर्नाटका की मेरी माताओं-बहनों की उपस्थिति ये साफ बता रही है कि कर्नाटका के मन में क्या है! पूरा कर्नाटका कह रहा है- फिर एक बार, मोदी सरकार! फिर एक बार, मोदी सरकार! फिर एक बार, मोदी सरकार!

साथियों,

आज का दिन इस लोकसभा चुनाव और अगले five years के लिए एक बहुत अहम दिन है। आज ही बीजेपी ने अपना ‘संकल्प-पत्र’ जारी किया है। ये संकल्प-पत्र, मोदी की गारंटी है। और देवगौड़ा जी ने अभी उल्लेख किया है। ये मोदी की गारंटी है कि हर गरीब को अपना घर देने के लिए Three crore नए घर बनाएंगे। ये मोदी की गारंटी है कि हर गरीब को अगले Five year तक फ्री राशन मिलता रहेगा। ये मोदी की गारंटी है कि- Seventy Year की आयु के ऊपर के हर senior citizen को आयुष्मान योजना के तहत फ्री चिकित्सा मिलेगी। ये मोदी की गारंटी है कि हम Three crore महिलाओं को लखपति दीदी बनाएँगे। ये गारंटी कर्नाटका के हर व्यक्ति का, हर गरीब का जीवन बेहतर बनाएँगी।

साथियों,

आज जब हम Ten Year पहले के समय को याद करते हैं, तो हमें लगता है कि हम कितना आगे आ गए। डिजिटल इंडिया ने हमारे जीवन को तेजी से बदला है। बीजेपी का संकल्प-पत्र, अब भविष्य के और बड़े परिवर्तनों की तस्वीर है। ये नए भारत की तस्वीर है। पहले भारत खस्ताहाल सड़कों के लिए जाना जाता था। अब एक्सप्रेसवेज़ भारत की पहचान हैं। आने वाले समय में भारत एक्सप्रेसवेज, वॉटरवेज और एयरवेज के वर्ल्ड क्लास नेटवर्क के निर्माण से विश्व को हैरान करेगा। 10 साल पहले भारत टेक्नालजी के लिए दूसरे देशों की ओर देखता था। आज भारत चंद्रयान भी भेज रहा है, और सेमीकंडक्टर भी बनाने जा रहा है। अब भारत विश्व का बड़ा Innovation Hub बनकर उभरेगा। यानी हम पूरे विश्व के लिए सस्ती मेडिसिन्स, सस्ती टेक्नोलॉजी और सस्ती गाडियां बनाएंगे। भारत वर्ल्ड का research and development, R&D हब बनेगा। और इसमें वैज्ञानिक रिसर्च के लिए एक लाख करोड़ रुपये के फंड की भी बड़ी भूमिका होगी। कर्नाटका देश का IT और technology hub है। यहाँ के युवाओं को इसका बहुत बड़ा लाभ मिलेगा।

साथियों,

हमने संकल्प-पत्र में स्थानीय भाषाओं को प्रमोट करने की बात कही है। हमारी कन्नड़ा देश की इतनी समृद्ध भाषा है। बीजेपी के इस मिशन से कन्नड़ा का विस्तार होगा और उसे बड़ी पहचान मिलेगी। साथ ही हमने विरासत के विकास की गारंटी भी दी है। हमारे कर्नाटका के मैसुरु, हम्पी और बादामी जैसी जो हेरिटेज साइट्स हैं, हम उनको वर्ल्ड टूरिज़्म मैप पर प्रमोट करेंगे। इससे कर्नाटका में टूरिज्म और रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।

साथियों,

इन सारे लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए भाजपा जरूरी है, NDA जरूरी है। NDA जो कहता है वो करके दिखाता है। आर्टिकल-370 हो, तीन तलाक के खिलाफ कानून हो, महिलाओं के लिए आरक्षण हो या राम मंदिर का भव्य निर्माण, भाजपा का संकल्प, मोदी की गारंटी होता है। और मोदी की गारंटी को सबसे बड़ी ताकत कहां से मिलती है? सबसे बड़ी ताकत आपके एक वोट से मिलती है। आपका हर वोट मोदी की ताकत बढ़ाता है। आपका हर एक वोट मोदी की ऊर्जा बढ़ाता है।

साथियों,

कर्नाटका में तो NDA के पास एचडी देवेगौड़ा जी जैसे वरिष्ठ नेता का मार्गदर्शन है। हमारे पास येदुरप्पा जी जैसे समर्पित और अनुभवी नेता हैं। हमारे HD कुमारास्वामी जी का सक्रिय सहयोग है। इनका ये अनुभव कर्नाटका के विकास के लिए बहुत काम आएगा।

साथियों,

कर्नाटका उस महान परंपरा का वाहक है, जो देश की एकता और अखंडता के लिए अपना सब कुछ बलिदान करना सिखाता है। यहाँ सुत्तुरू मठ के संतों की परंपरा है। राष्ट्रकवि कुवेम्पु के एकता के स्वर हैं। फील्ड मार्शल करियप्पा का गौरव है। और मैसुरु के राजा कृष्णराज वोडेयर के द्वारा किए गए विकास कार्य आज भी देश के लिए एक प्रेरणा हैं। ये वो धरती है जहां कोडगु की माताएं अपने बच्चों को राष्ट्रसेवा के लिए सेना में भेजने के सपना देखती है। लेकिन दूसरी तरफ कांग्रेस पार्टी भी है। कांग्रेस पार्टी आज टुकड़े-टुकड़े गैंग की सुल्तान बनकर घूम रही है। देश को बांटने, तोड़ने और कमजोर करने के काँग्रेस पार्टी के खतरनाक इरादे आज भी वैसे ही हैं। आर्टिकल 370 के सवाल पर काँग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि कश्मीर का दूसरे राज्यों से क्या संबंध? और, अब तो काँग्रेस देश से घृणा की सारी सीमाएं पार कर चुकी है। कर्नाटका की जनता साक्षी है कि जो भारत के खिलाफ बोलता है, कांग्रेस उसे पुरस्कार में चुनाव का टिकट दे देती है। और आपने हाल में एक और दृश्य देखा होगा, काँग्रेस की चुनावी रैली में एक व्यक्ति ने ‘भारत माता की जय’ के नारे लगवाए। इसके लिए उसे मंच पर बैठे नेताओं से परमीशन लेनी पड़ी। क्या भारत माता की जय बोलने के लिए परमीशन लेनी पड़े। क्या ऐसी कांग्रेस को देश माफ करेगा। ऐसी कांग्रेस को कर्नाटका माफ करेगा। ऐसी कांग्रेस को मैसुरू माफ करेगा। पहले वंदेमातरम् का विरोध, और अब ‘भारत माता की जय’ कहने तक से चिढ़!  ये काँग्रेस के पतन की पराकाष्ठा है।

साथियों,

आज काँग्रेस पार्टी सत्ता के लिए आग का खेल खेल रही है। आज आप देश की दिशा देखिए, और काँग्रेस की भाषा देखिए! आज विश्व में भारत का कद और सम्मान बढ़ रहा है। बढ़ रहा है कि नहीं बढ़ रहा है। दुनिया में भारत का नाम हो रहा है कि नहीं हो रहा है। भारत का गौरव बढ़ रहा है कि नहीं बढ़ रहा है। हर भारतीय को दुनिया गर्व से देखती है कि नहीं देखती है। तो काँग्रेस के नेता विदेशों में जाकर देश को नीचा दिखाने के कोई मौके छोड़ते नहीं हैं। देश अपने दुश्मनों को अब मुंहतोड़ जवाब देता है, तो काँग्रेस सेना से सर्जिकल स्ट्राइक के सबूत मांगती है। आतंकी गतिविधियों में शामिल जिस संगठन पर बैन लगता है। काँग्रेस उसी के पॉलिटिकल विंग के साथ काम कर रहा है। कर्नाटका में तुष्टीकरण का खुला खेल चल रहा है। पर्व-त्योहारों पर रोक लगाने की कोशिश हो रही है। धार्मिक झंडे उतरवाए जा रहे हैं। आप मुझे बताइये, क्या वोटबैंक का यही खेल खेलने वालों के हाथ में देश की बागडोर दी जा सकती है। दी जा सकती है।

साथियों, 

हमारा मैसुरु तो कर्नाटका की कल्चरल कैपिटल है। मैसुरु का दशहरा तो पूरे विश्व में प्रसिद्ध है। 22 जनवरी को अयोध्या में 500 का सपना पूरा हुआ। पूरा देश इस अवसर पर एक हो गया। लेकिन, काँग्रेस के लोगों ने, उनके साथी दलों ने राममंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा जैसे पवित्र समारोह तक पर विषवमन किया! निमंत्रण को ठुकरा दिया। जितना हो सका, इन्होंने हमारी आस्था का अपमान किया। कांग्रेस और इंडी अलायंस ने राममंदिर प्राण-प्रतिष्ठा का बॉयकॉट कर दिया। इंडी अलांयस के लोग सनातन को समाप्त करना चाहते हैं। हिन्दू धर्म की शक्ति का विनाश करना चाहते हैं। लेकिन, जब तक मोदी है, जब तक मोदी के साथ आपके आशीर्वाद हैं, ये नफरती ताक़तें कभी भी सफल नहीं होंगी, ये मोदी की गारंटी है।

साथियों,

Twenty twenty-four का लोकसभा चुनाव अगले five years नहीं, बल्कि twenty forty-seven के विकसित भारत का भविष्य तय करेगा। इसीलिए, मोदी देश के विकास के लिए अपना हर पल लगा रहा है। पल-पल आपके नाम। पल-पल देख के नाम। twenty-four बाय seven, twenty-four बाय seven for Twenty Forty-Seven.  मेरा ten years का रिपोर्ट कार्ड भी आपके सामने है। मैं कर्नाटका की बात करूं तो कर्नाटका के चार करोड़ से ज्यादा लोगों को मुफ्त राशन मिल रहा है। Four lakh fifty thousand गरीब परिवारों को कर्नाटका में पीएम आवास मिले हैं। One crore fifty lakh से ज्यादा गरीबों को मुफ्त इलाज की गारंटी मिली है। नेशनल हाइवे के नेटवर्क का भी यहाँ बड़ा विस्तार किया गया है। मैसुरु से बेंगलुरु के बीच एक्सप्रेसवे ने इस क्षेत्र को नई गति दी है। आज देश के साथ-साथ कर्नाटका में भी वंदेभारत ट्रेनें दौड़ रही हैं। जल जीवन मिशन के तहत Eight Thousand से अधिक गांवों में लोगों को नल से जल मिलने लगा है। ये नतीजे बताते हैं कि अगर नीयत सही, तो नतीजे भी सही! आने वाले Five Years में विकास के काम, गरीब कल्याण की ये योजनाएँ शत प्रतिशत लोगों तक पहुंचेगी, ये मोदी की गारंटी है।

साथियों,

मोदी ने अपने Ten year साल का हिसाब देना अपना कर्तव्य माना है। क्या आपने कभी काँग्रेस को उसके sixty years का हिसाब देते देखा है? नहीं न? क्योंकि, काँग्रेस केवल समस्याएँ पैदा करना जानती है, धोखा देना जानती है। कर्नाटका के लोग इसी पीड़ा में फंसे हुये हैं। कर्नाटका काँग्रेस पार्टी की लूट का ATM स्टेट बन चुका है। खाली लूट के कारण सरकारी खजाना खाली हो चुका है। विकास और गरीब कल्याण की योजनाओं को बंद किया जा रहा है। वादा किसानों को मुफ्त बिजली का था, लेकिन किसानों को पंपसेट चलाने तक की बिजली नहीं मिल रही। युवाओं की, छात्रों की स्कॉलर्शिप तक में कटौती हो रही है। किसानों को किसान सम्मान निधि में राज्य सरकार की ओर से मिल रहे four thousands रुपए बंद कर दिये गए हैं। देश का IT hub बेंगलुरु पानी के घनघोर संकट से जूझ रहा है। पानी के टैंकर की कालाबाजारी हो रही है। इन सबके बीच, काँग्रेस पार्टी को चुनाव लड़वाने के लिए hundreds of crores रुपये ब्लैक मनी कर्नाटका से देशभर में भेजा जा रहा है। ये काँग्रेस के शासन का मॉडल है। जो अपराध इन्होंने कर्नाटका के साथ किया है, इसकी सजा उन्हें Twenty Six  अप्रैल को देनी है। 26 अप्रैल को देनी है।

साथियों,

मैसूरु से NDA के उम्मीदवार श्री यदुवीर कृष्णदत्त चामराज वोडेयर, चामराजनागर से श्री एस बालाराज, हासन लोकसभा से एनडीए के श्री प्रज्जवल रेवन्ना और मंड्या से मेरे मित्र श्री एच डी कुमार स्वामी,  आने वाली 26 अप्रैल को इनके लिए आपका हर वोट मोदी को मजबूती देगा। देश का भविष्य तय करेगा। मैसुरु की धरती से मेरी आप सभी से एक और अपील है। मेरा एक काम करोगे। जरा हाथ ऊपर बताकर के बताइये, करोगे। कर्नाटका के घर-घर जाना, हर किसी को मिलना और मोदी जी का प्रणाम जरूर पहुंचा देना। पहुंचा देंगे। पहुंचा देंगे।

मेरे साथ बोलिए

भारत माता की जय

भारत माता की जय

भारत माता की जय

बहुत बहुत धन्यवाद।