Ayushman Bharat will transform health sector in India: PM Modi in Varanasi

Published By : Admin | March 12, 2018 | 17:59 IST
Govt is committed to the continuous development and upgradation of DLW, which is a symbol of the industrial development of Varanasi: PM Modi
There is immense potential for tourism in Varanasi, and all efforts should be made to keep the city clean: PM Modi
Waste to wealth… we are moving in this direction. Initiatives like the Kachra Mahotsav will further the cause of cleanliness: PM Modi
Ayushman Bharat scheme is going to transform the health sector. It will provide top quality healthcare to the poor: PM Modi
POSHAN Yojana will help us tackle problems like malnutrition among children: PM Modi

यहां उपस्थिति विशाल संख्‍या में पधारी हुईं माताएं-बहनें, भाइयों और नौजवानो।

ये मेरा सौभाग्‍य है कि आज मुझे बनारस के विकास की अनेक योजनाओं का शिलान्‍यास करने का, लोकार्पण करने का अवसर मिला। लेकिन मैं सबसे पहले आज बनारसवासियों को लाख-लाख धन्‍यवाद करना चाहता हूं, लाख-लाख अभिनंदन करना चाहता हूं। आज बनारस ने कमाल कर दिया। फ्रांस के राष्‍ट्रपति का जिस प्रकार से आज बनारस ने पलक-पांवड़े बिछा करके स्‍वागत किया, उनका जो सम्‍मान किया; फ्रांस के हर घर में लोग जरूर पूछेंगे कि बनारस कहां है, जहां फ्रांस के राष्‍ट्रपति का इतना बड़ा स्‍वागत-सम्‍मान होता है।

अगर हमने गाड़ी शायद तेज न चलाई होती, तो अभी भी हम रोड पर कार में लोगों का अभिवादन स्‍वीकार करते हुए वहां यात्रा कर रहे होते, इतनी भारी भीड़। गंगा के सभी घाट हों, मार्ग के हर रास्‍ते की एक-एक इंच भूमि हो, आज एक अद्भुत नजारा बनारस के लोगों के प्रेम ने, आपके आशीर्वाद ने, और यही हमारा प्‍यार फ्रांस और भारत की दोस्‍ती को प्रेम वर्षा से भिगो देता है और इसके लिए बनारस का जितना धन्‍यवाद करूं उतना कम है।

आज मुझे विन्धयवासिनी के चरणों में जाने का अवसर मिला था। पूरी दुनिया में सौर ऊर्जा का एक अभियान चलाने में भारत बहुत बड़ी भूमिका अदा कर रहा है। फ्रांस और भारत मिल करके सौर ऊर्जा पर एक बहुत बड़ा काम कर रहे हैं। दुनिया के अनेक देशों के मेहमान कल दिल्‍ली में आए थे, सबने मिल करके सूर्य देवता के सामर्थ्‍य को स्‍वीकार करते हुए आने वाले विकास के राजमार्ग को सूर्य-शक्ति के आधार पर चलाने की दिशा में महत्‍वपूर्ण फैसले लिए। और इसी के तहत मिर्जापुर में सोलार से उत्‍पादन करने वाली बिजली का एक प्रकल्‍प का मुझे लोकार्पण करने का अवसर मिला। ये एक प्रकार से हिन्‍दुस्‍तान के जीवन में बहुत बड़ा बदलाव लाने का अभियान है और मैं तो इसे आगे इतना बढ़ाना चाहता हूं कि रूफटॉप सोलार से घर की छत पर सोलार की पैनल लगी हो और घर में खाना पकाने का चूल्‍हा; अब गैस की भी जरूरत न पड़े- उस सोलार के चूल्‍हे से खाना पकाना हो जाए- खर्चा भी नहीं, पर्यावरण का नुकसान भी नहीं, clean cooking का एक बड़ा अभियान।

भारत में 25 करोड़ परिवार हैं, बहुत बड़ा मार्केट है और मैं नौजवानों से आग्रह करता हूं, आईआईटीएन से आग्रह करता हूं कि आइए इनोवेशन की स्‍पर्धा करे, ऐसी टेक्‍नोलॉजी को विकसित करे कि हमारी माताएं-बहनों को अब घर में चूल्‍हा जलाने में किसी पर निर्भर न रहना पड़े। सूर्यदेवता के आशीर्वाद से आराम से खाना पक जाए और घर में खाना पकाने में जो खर्च होता था फ्यूल में, वो भी बंद हो जाए। गरीब और मध्‍यम वर्ग के परिवार की एक बहुत बड़ी सेवा हो सकती है।

इतना ही नहीं, आज मुझे काशी और पटना को जोड़ने का, एक नई रेल सेवा शुरू करने का अवसर मिला है। लंबे अर्से से मांग थी कि काशी और पटना को जोड़ने वाली कोई तेज गति से चलने वाली ट्रेन शुरू हो। आज उसका शुभारंभ हुआ है। सुबह 6 बजे गाड़ी काशी से चलेगी, दस-सवा दस बजे पटना पहुंच जाएगी। और शाम को पांच बजे चलेगी, रात को नौ-साढ़े नौ-दस बजे काशी में वापस आ जाएगी। कम से कम समय में काशी और पटना को जोड़ने वाला तेज गति से चलने वाली ट्रेन का, आज काशी-पटना जनशताब्‍दी एक्‍सप्रेस का मुझे प्रारंभ करने का अवसर मिला। मैं रेलमंत्री जी को बधाई देता हूं, श्रीमान मनोज सिन्‍हा जी के नेतृत्‍व में जनसेवा के लिए रेल का उपयोग कैसे हो, उस पर अनेकविद् काम चल रहे हैं। और उसी का नतीजा है कि आज काशी और पटनावासियों की बहुत पुरानी इच्‍छा का आज अमल हो रहा है।

मैं जब भी काशी आता हूं तो एक प्रकार से मेरा दूसरा घर बन जाता है, डीएलडब्‍ल्‍यू और काशी की पहचान अगर आध्‍यात्मिक spiritual दुनिया में अगर काशी की पहचान हर-हर महादेव से जुड़ करके हो जाती है तो काशी की औद्योगिक पहचान डीएलडब्‍ल्‍यू के द्वारा होती है। और इसलिए भारत सरकार डीएलडब्‍ल्‍यू का जितना ज्‍यादा विकास हो, जितना ज्‍यादा विस्‍तार हो, जितना ज्‍यादा आधुनिकीकरण हो, ज्‍यादा से ज्‍यादा लोगों को रोजगार के अवसर उपलब्‍ध हों; उसके लिए अनेक नई-नई योजनाएं डीएलडब्‍ल्‍यू के तहत भी करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है जो आने वाले दिनों में यहां के लोगों के जीवन में एक नई ऊर्जा भरने का काम उन योजनाओं से होगा।

आज करीब-करीब 800 करोड़ रुपया- होली का त्‍योहार अभी-अभी मनाया है, 800 करोड़ के विकास के काम इस होली के रंग में नए रंग भर देते हैं, होली के रंग में नई खुशबू भर देते हैं, होली के रंग में नया उमंग भर देते हैं। आज मुझे यहां गरीब परिवारों को आवास की चाबी देने का अवसर मिला। मैं उन्हें पूछ रहा था- पहले कहां रहते थे? हर कोई बता रहा था- कोई कच्‍चे घर में रहते थे, कोई कहता था झुग्‍गी-झोंपड़ी में रहते थे, कोई कहता था- ऐसे नहीं बिस्‍तरा रखते थे, कभी इधर चले गए, कभी उधर चले गए; ऐसे ही जिंदगी थी। मैंने उनको पूछा अब घर मिल गया तो अच्‍छा लग रहा है? घर जा करके देख के आए? अच्‍छा लगा? कोई कमी महसूस हुई? सारी बातें मैं पूछ रहा था। और बाद में मैं पूछता था अब बच्‍चों को पढ़ाओगे क्‍या? एकदम सबकी आंखें झुक जाती थीं, शरमा जाते थे। मैंने आग्रह किया कि आपकी जिम्‍मेदारी है- अब रहने के लिए अच्‍छा घर मिल गया है, आपको अपने बच्‍चों को पढ़ाना चाहिए।

लेकिन मुझे खुशी है कि योगीजी ने आ करके एक mission mode में आवास योजना को लागू करने के लिए बीड़ा उठाया है। भारत सरकार की योजना तो कोई आज की नहीं है, पुरानी सरकार के समय भी योजना थी। और मैंने यहीं काशी में कहा था कि वो नाम तक दे नहीं पाते थे, लेकिन योगीजी ने लाभार्थियों की लिस्‍ट बना दी, भारत सरकार के सामने प्रस्‍तुत कर दी, भारत सरकार ने धन आवंटन कर दिया और छह महीने के भीतर-भीतर पांच हजार से ज्‍यादा मकान बना करके लोगों को दे दिए गए। और आने वाले दिनों में आठ लाख परिवारों को मकान देने का हमारा सपना है और मुझे विश्‍वास है कि योगीजी के नेतृत्‍व में ये अवश्‍य संभव होगा और समय-सीमा में संभव होगा।

आज ये भी सही है कि विकास करना है तो infrastructure का बहुत महत्‍व है। Connectivity का बहुत महत्‍व है। रेल हो, रोड हो; ये बहुत आवश्‍यक होते हैं। आज शिवपुरी, फुलवरिया, चार लेन रोड की भी उसके निर्माण की शुरूआत हो रही है। दो रेलवे क्रॉसिंग, दो नए ओवरब्रिज उसी जगह पर बनाए जाएंगे। बनारस में रेलवे स्‍टेशनों के आधुनिकीकरण का काम हम चला रहे हैं।

आज मुझे अवसर मिला कचरा महोत्‍सव में। लोगों को बड़ा आश्‍चर्य होता होगा कि अब कचरा महोत्‍सव भी होने लगा। जिन लोगों को मोदी पसंद नहीं, वो तो इस पर भी आलोचना करेंगे कि मोदी को अब कुछ बचा नहीं है, अब कचरा महोत्‍सव कर रहा है। हमें स्‍वच्‍छता के अभियान को आगे बढ़ाना है। Waste में से Wealth create हो सकता है। कबाड़ को भी जुगाड़ करके उपयोगी चीजें बनाई जा सकती हैं और ये जनआंदोलन बन सकता है। और यहां जो आए हैं, मैं उनको कहूंगा, ये जो कचरा महोत्‍सव की प्रदर्शनी लगी है, आप जरूर उसको देखिए- छोटे-छोटे बच्‍चोंने, जो बोतलें हम फेंक देते हैं, जो अखबार फेंक देते हैं, उसमें से कितनी बढ़िया चीजें बनाई हैं। और घर के अंदर रखें तो लोग उसको देखने लिए लालायित हो जाएं।एक ही चीज का कितना उपयोग हो सकता है।

और मैंने यहां Musical party देखी, बड़ी शानदार Musical party, स्‍वच्‍छता के गीत गा रहे हैं, लेकिन उनके musical instrument क्‍या हैं, खाली डिब्‍बों से उन्‍होंने बढ़िया musical instrumentखड़े किए हैं। खाली डिब्‍बों को बजा-बजा करके बढ़िया संगीत का अस्‍वाद वो करा सकते हैं। यानी निकम्‍मी से निकम्‍मी चीज का भी उत्‍तम से उत्‍तम उपयोग कितना, कैसे हो सकता है वो आज इस कचरा महोत्‍सव में मैंने देखा है।

वाराणसी को स्‍वच्‍छता में प्राथमिकता देनी है। दुनिया भर के टूरिस्‍टों को वाराणसी आने के लिए मजबूर करना है। वाराणसी के पास सब कुछ है, सदियों से है लेकिन आज, आज अगर हमें करना है तो एक ही काम करना है, बाकी तो हमारे पूर्वज करके गए हैं। वाराणसी का नाम, शानो-शौकत हमारे पूर्वजों ने पैदा कर दी है, हमें सिर्फ वाराणसी को स्‍वच्‍छ रखना है।

दुनिया-दुनिया वाराणसी में आने के लिए प्रेरित हो जाएगी, और उस अभियान को चलाने के लिए आज यहां पर 17 साल बाद जो आवश्‍यकताएं होने वाली हैं, एक प्रकार से 20 साल के बाद भी जो जरूरतें होंगी, उनको आज पूरा करने की दृष्टि से सीवर पानी के treatment का व्‍यवस्‍थाका भी एक plant का अभियान शुरू किया गया है। करीब 600 करोड़ रुपये के खर्च से ये treatment plant आपके यहां लगने वाला है। और उसके कारण आने वाले दिनों में लोगों को कितना लाभ होगा, इसका मैं अदांज कर सकता हूं।

आपने देखा होगा काशी में जाएं तो तार लटकते थे। काशी को उन तार के झुंड से मुक्ति दिलाने का मैंने अभियान चलाया है। और देश भर में ये अंडरग्राउंड तार डालने का काम शुरू किया, बनारस से किया था। बनारस में भी वो काम बहुत तेजी से चल रहा है।

उसी प्रकार से अभी जब योगीजी ने investment summit किया था, उस समय मैंने घोषित किया था एक defense manufacturing corridor का, और defense manufacturing corridor के कारण 20 हजार करोड़ रुपये और करीब-करीब ढाई लाख लोगों के रोजगार, इसकी संभावनाएं उसके अंदर पड़ी हुई हैं। उस काम को भी आगे बढ़ाने की दिशा में योगीजी की सरकार और भारत सरकार मिल करके तेज गति से आगे बढ़ रहे हैं।

मैं योगीजी को इस बात के लिए भी अभिनंदन करना चाहता हूं कि उन्‍होंने किसानों का विशेष ख्‍याल रखा है। पहले उत्‍तर प्रदेश में एमएसपी घोषित होता था लेकिन धान की खरीदी नहीं होती थी। मुझे खुशी है कि पहले की तुलना में धान की खरीदी योगीजी के प्रयत्‍नों के कारण चार गुना बढ़ गई है। किसानों को उनकी पैदावार का पैसा मिलने का अवसर प्राप्‍त हुआ है।

इतना ही नहीं, गन्‍ने के किसानों का भुगतान उसकी गति, उसका क्‍वांटम, ये भी 40 प्रतिशत बढ़ोत्‍तरी हुई है। तो आप कल्‍पना कर सकते हैं कि विकास की इन योजनाओं का लाभ काशी के चाहे infrastructure का काम हो, चाहे कृषि क्षेत्र का काम हो, चाहे बिजली का काम हो, चाहे रेल मार्ग की गति बढा़ने का काम हो, नई रेल लाइन चालू करने का काम हो, ऐसे अनेक projects, उसका आज शिलान्‍यास और लोकार्पण करने का आज मुझे अवसर मिला है।

हमें सबने मिल करके काशी को विकास की नई ऊंचाइयों पर ले जाना है। अनेकविद् योजनाएं ले करके राज्‍य सरकार और भारत सरकार काशी में, पूर्वी उत्‍तर प्रदेश में काम कर रही है। आने वाले दिनों में हम एक बहुत महत्‍वपूर्ण योजना देशवासियों के लिए लागू करने जा रहे हैं।‘आयुष्‍मान भारत’, इस ‘आयुष्‍मान भारत’ के तहत इंश्‍योरेंस कंपनी के साथ मिल करके, बीमा योजना की व्‍यवस्‍था करके गरीब से गरीब परिवार भी, अगर उसके यहां कोई बीमार हो जाए- तो एक व्‍यक्ति बीमार नहीं होता है, पूरा परिवार बीमार हो जाता है। आर्थिक स्थिति तबाह हो जाती है। परिवार के सारे सपने, सारी योजनाएं तितर-बितर हो जाती हैं। इसलिए गरीब बीमार हो तो झेल लेता है, अस्‍पताल जाने की हिम्‍मत नहीं करता। उसके लिए खर्च संभव नहीं होता है, गिरवी रखने के लिए कुछ होता नहीं अपने पास। क्‍या मेरे देश के नागरिकों का ये हाल होगा?

भाइयो, बहनों ये मुझे मंजूर नहीं है।और इसलिए हमने योजना बनाई है कि ऐसे गरीब परिवार होंगे जहां उपचार के लिए संभावना नहीं है, देश में दस करोड़ परिवार- यानी करीब-करीब 50 करोड़ नागरिक, 50 करोड़ नागरिक, अगर उनके परिवार में कोई बीमारी आई, तो ‘आयुष्‍मान भारत’ योजना के तहत एक साल में पांच लाख रुपये तक का अस्‍पताल का खर्चा भारत सरकार और इंश्‍योरेंस कम्‍पनी मिल करके देगी। इसका परिणाम ये होगा कि गरीब जो पहले अस्‍पताल जाने से कतराता था, वो अब छोटी बीमारी होगी तो भी जाएगा। क्‍योंकि उसको मालूम है कि पैसे मोदी सरकार देने वाली है। उसे विश्‍वास है कि बीमार रहना ठीक नहीं है, रोजी-रोटी कमानी है तो मुझे पहले उपचार करवाना चाहिए, वो कराएगा।

जो प्राइवेट पार्टी हैं, जो छोटे-छोटे शहरों में अस्‍पताल खोलते नहीं हैं, बनाते नहीं हैं, क्‍योंकि उनको लगता है कि लोग आएंगे नहीं, आएंगे तो पैसे देंगे नहीं। लेकिन अब पैसे मिलना संभव हो गया है तो लोग भी अपने प्राइवेट अस्‍पताल बनाएंगे। देश में अस्‍पतालों का एक जाल बनेगा। आरोग्‍य की दृष्टि से सेवाएं उपलब्‍ध करवाने वाले लोग तैयार होंगे। आरोग्‍य के क्षेत्र में नए रोजगार पैदा होंगे। और देश को स्‍वस्‍थ बनाने की‍ दिशा में एक बहुत बड़ा अहम काम हम कर पाएंगे।

हमारे देश में कुपोषण एक बहुत बड़ी समस्‍या है। हमने पोषण मिशन की शुरूआत की है। करीब 9 हजार करोड़ रुपया लगा करके आने वाले वर्षों में हमारे बच्‍चे उम्र के हिसाब से उसका वजन हो, उम्र के हिसाब से उनकी ऊंचाई हो, तंदुरुस्‍त हों, malnutrition की समस्‍या से मुक्‍त हो, इसके लिए आवश्‍यक पोषण की व्‍यवस्‍था कैसे हो? प्रशिक्षण की व्‍यवस्‍था कैसे हो? खास करके माताओं की ट्रेनिंग कैसे हो ?

उन सारे विषयों का एक बीड़ा उठाया है और प्रधानमंत्री पोषण मिशन योजना PMPM करके हमने लाए हैं। और आने वाले दिनों में ये पोषण मिशन योजना गरीब से गरीब परिवार हो, मध्‍यम वर्ग का परिवार हो, 12-14-16 साल की बेटियां हों, अगर 12-14-16 साल की बेटियां, उसका अगर तंदुरुस्‍त नहीं होंगी, उसका शारीरिक विकास उम्र के हिसाब से नहीं होता होगा! अगर कुछ ही वर्षों में वो मां बनेगी तो कभी वो मां भी मर सकती है, पैदा होने वाला बच्‍चा भी मर सकता है। या तो पैदा होने वाला बच्‍चा किसी न किसी बीमारी को ले करके पैदा हो सकता है और जिंदगी भर उस मां को उस बच्‍चे की सेवा करने में खप जाना पड़ता है। इन सबसे मुक्ति दिलाने के लिए ये प्रधानमंत्री पोषण मिशन योजना को लागू करने की दिशा में हम चल रहे हैं।

काशीवासियों, विकास की इन सारी योजनाओं का लाभ हमारी काशी को मिले। हमारी गंगा से जुड़ी हुई सारी योजनाएं तेज गति से आगे बढ़ रही हैं और उसका लाभ भी आने वाले दिनों में मिलने वाला है।

मैं फिर एक बार योगीजी की सरकार को अनेकविद् प्रकल्‍प तेज गति से चलाने के लिए, भारत सरकार की योजनाओं को भी तेज गति से लागू करने के लिए मैं हृदयपूर्वक बहुत-बहुत बधाई देता हूं और फिर एक बार आज काशीवासियों ने जो अद्भुत स्वागत-सम्‍मान किया है, इसके लिए सिर झुका करके नमन करता हूं।

बहुत-बहुत धन्‍यवाद

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The world is seeing India as a bright spot of growth and hope: PM Modi at Economic Times World Leaders Forum 2026
August 21, 2026
The world sees India as a bright spot for growth and hope: PM
Today, India is implementing next-generation reforms at the policy level and undertaking reforms at governance level: PM
Increasing production was met with punishment earlier but today, our government is providing incentives for boosting production
India has political stability and continuity in its policies: PM
Earlier, the approach of regulations was, 'prohibited unless permitted’; We are changing this approach and taking it towards 'permitted unless prohibited’: PM
The relationship between the government and citizens should be based on trust, not suspicion: PM
Today, we are shaping policies that are pro-people, pro-growth and pro-development: PM

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आप सबके बीच आकर के खुश होना बहुत स्वाभाविक भी है। इस साल समिट का फोकस Shared Future पर है। पिछले कुछ वर्षों में दुनिया ने अनेक उतार-चढ़ाव देखे हैं। और इन अनुभवों ने एक बात बहुत स्पष्ट कर दी है, कोई चाहे या ना चाहे, हर देश का भविष्य, उसका फ्यूचर, एक-दूसरे से जुड़ा हुआ ही है, Isolation में कुछ संभव नहीं है। इसीलिए Shared Futures की ये theme, आज और भी अधिक प्रासंगिक हो गई है। और भारत तो हमेशा से इसी भावना को लेकर चला है। जी-20 की अध्यक्षता में इसलिए ही भारत का मंत्र रहा, One Earth, One Family, One Future. Shared Future की ये भावना और इसके साथ जुड़ा दायित्वबोध, 21वीं सदी के इस विश्व की अनेक समस्याओं का समाधान देता है।

साथियों,

आज दुनिया में growth को लेकर के कई तरह की चिंताएं हैं। दुनिया ने बड़ा भयंकर एक रूप देखा है इन दिनों। Resources का वेपनाइजेशन हो रहा है। अविश्वास का वातावरण विश्व के लिए अनेक नई चुनौतियां लेकर के आ रहा है। लेकिन ऐसे समय में भी, दुनिया भारत को growth और hope के bright spot के रूप में देख रही है। भारत ने पिछले 10-12 साल में अपनी 25 करोड़ आबादी को गरीबी से बाहर निकाला है। इतना ही नहीं, अगर आने वाले दिनों की चर्चा करें, तो IMF का forecast है कि भारत दुनिया की fastest growing major economy बना रहेगा। और भारत निरंतर वो कदम उठा रहा है, जो उसके विकास को गति दे रहे हैं।

Friends,

अभी पिछले हफ्ते ही, 15 अगस्त को मैंने लाल किले से सप्त-धारा की सप्त-शक्तियों की बात की है। मैन्यूफैक्चरिंग, टेक्नोलॉजी और इनोवेशन, फूड प्रोसेसिंग, ग्रीन और ब्लू इकोनॉमी समेत, मैंने ऐसे सात सेक्टर्स की बात की है, जिन पर भारत का आज बहुत ज्यादा फोकस है। और इसलिए भारत आज, Policy level पर, नेक्स्ट जनरेशन reforms कर रहा है, ताकि हमारा future सुरक्षित हो। Governance पर reforms कर रहा है, Ease of Living के लिए reforms कर रहा है। पिछली बार जब मैं इसी मंच के माध्यम से आपसे जुड़ा था, तब भी मैंने कहा था, ये Reforms हमारे लिए Compulsion नहीं है। ये हमारा commitment है, ये हमारा conviction है।

साथियों,

2014 में, जब हमारी सरकार बनी, तो उसके बाद से ही रिफॉर्म्स ने कैसे देश की दिशा और दशा बदली है, मैं इसका एक बहुत दिलचस्प उदाहरण आपको देना चाहता हूं। यहां मौजूद शायद ही किसी को PLP के बारे में पता होगा, कोई है, जिसको PLP के बारे में पता है? अपना हाथ उठाएं। यहां इतने मीडिया के दिग्गज बैठे हैं, PLP आपको पता है? और आप सुनकर के हैरान हो जाएंगे। PLP यानी प्रोडक्शन लिंक्ड पनिशमेंट, इसके बारे में किसी को पता नहीं है। और एक दूसरा टर्म आपने जरूर सुना है PLI, ये ज्यादातर लोगों को पता होगा। PLI- यानी प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव।

साथियों,

ये दोनों टर्म, भारत के दो अलग-अलग Time Period को डिफाइन करते हैं। आजकल Explainer का जमाना है, तो मैं आपको Explain करता हूं।

साथियों,

आज की युवा पीढ़ी को ये सुनकर हैरानी होगी, कि हमारे देश में एक समय ऐसा भी था, कि अगर कोई कंपनी तय लिमिट से ज्यादा प्रॉडक्शन कर दे, तो उसे पनिशमेंट दिया जाता था। ये पहले की लाइसेंस राज वाली सरकारों का, PLP यानी प्रोडक्शन लिंक्ड पनिशमेंट मॉडल था। ऐसे भी उदाहरण रहे हैं कि अगर किसी फैक्ट्री ने ज्यादा डिमांड देखते हुए ज्यादा प्रॉडक्शन कर दिया, तो उसे नोटिस भेज दिया जाता था। मजबूरी में वो कंपनी अपना प्रॉडक्ट मार्केट में बेचने के बजाय, उसे खुद ही नष्ट कर देती थी।

साथियों,

आज जो लोग Make In India और आत्मनिर्भर भारत अभियान का मजाक उड़ाते हैं, उनके पुरखों की सोच यही थी, PLP यानी प्रोडक्शन लिंक्ड पनिशमेंट। ऐसा करने के पीछे एक विशेष तरह की विकृत मानसिकता काम करती थी। ऐसी मानसिकता वाले लोग हमेशा चाहते थे कि जरूरी चीजों की किल्लत बनी रहे। देश के नागरिकों को अभाव में रखना उनकी पॉलिसी थी। वो चाहते थे कि जनता उनके सामने हाथ जोड़े, हाथ फैलाए, आप समझ गए मैं किन लोगों की बात कर रहा हूं। लोगों से हाथ जुड़वाने के बाद उपकार करना, उन सरकारों का तरीका था, इसलिए वो प्रोडक्शन लिंक्ड पनिशमेंट मॉडल पर चलते थे। आप कल्पना कर सकते हैं, ऐसे करके उन लोगों ने Employment Generation के बेसिक principal का गला घोंट दिया था। और हैरानी ये, इन लोगों के दरबारियों ने again I repeat, इन लोगों के दरबारियों ने, कभी इसके खिलाफ कोई आवाज नहीं उठाई।

साथियों,

हर reform की शुरुआत सबसे पहले, आपके सोचने के तरीके, आपके मानसिक, किस रेंज में आप काम कर रहे हैं, इस सोच के reform से ही होती है। जहां पहले production बढ़ाने पर पनिशमेंट मिलता था, वहीं आज हमारी सरकार production बढ़ाने पर incentive दे रही है। और आज PLI स्कीम की सक्सेस दुनिया देख रही है। सिर्फ इस एक योजना की वजह से, मैं सारी योजनाओं की बात नहीं करता हूं, एक की बात करता हूं, करीब ढाई लाख करोड़ रुपए का actual investment हुआ है। 22 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा का production और sales हुई है। 15 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा का exports हुआ है, और 14 लाख से ज्यादा direct और indirect jobs बनी हैं। और मैं फिर याद दिलाउंगा, ये आंकड़े सिर्फ एक स्कीम के हैं। आप सोचिए, पहले का लाइसेंस राज वाली सरकार का पनिशमेंट मॉडल जहां बेरोजगारी बढ़ाता था, वहीं आज का हमारा incentive मॉडल लाखों नई जॉब्स क्रिएट कर रहा है।

साथियों,

आज भारत में ये तेज विकास, ये तेज रिफॉर्म इसलिए हो रहे हैं, क्योंकि भारत में और जिसका अभी सत्य ने उल्लेख किया, political stability है, हमारी policy में continuity है। पहले देश में रिफॉर्म्स की बात करने वाले घोषणा तो कर देते थे, बाद में भूल जाते थे। लेकिन हमने रिफॉर्म्स को लेकर एक क्लियर रोडमैप बनाया। इस रोडमैप की प्रमुख दिशा रही है- गवर्नेंस लेवेल के रिफॉर्म्स हों! इसके लिए, आज 21वीं सदी के भारत में, हम सिर्फ regulations नहीं बदल रहे हैं, हम regulation की पूरी philosophy बदल रहे हैं। पहले regulations की अप्रोच थी- “Prohibited unless permitted.” यानी जब तक सरकार इजाजत ना दे, तब तक आप वो काम नहीं कर सकते। हम इस approach को बदलकर, “Permitted unless prohibited” की तरफ ले जा रहे हैं। यानी, जो काम कानून ने स्पष्ट रूप से मना नहीं किया है, उसके लिए हर कदम पर permission की कोई जरूरत नहीं होनी चाहिए। और इसके पीछे सोच बहुत सीधी है, सरकार और नागरिक के रिश्ते का आधार, Suspicion नहीं, trust होना चाहिए।

साथियों,

यही सोच आपको Jan Vishwas बिल में भी दिखाई देती है। मैं मानता हूं, हर procedural गलती को criminal offence मान लेना ठीक नहीं है। इसीलिए अनेक offences को decriminalise किया गया है। कई मामलों में जेल की जगह केवल आर्थिक penalty का प्रावधान किया गया है। Government और enterprise के रिश्ते में, हम इसी reform mindset को आगे बढ़ा रहे हैं। बीते वर्षों में 40 हजार से ज्यादा compliances हटाए गए हैं, 40 thousand. डेढ़ हजार से ज्यादा, 15 hundred, डेढ़ हजार से ज्यादा, पुराने और बेकार हो चुके कानून हमने खत्म किए, और जब इन सारे reforms को एक साथ देखते हैं, तो अंदाजा होता है, हमारी industries और businesses के कंधों से कितना बड़ा बोझ कम हुआ है।

साथियों,

गवर्नेंस रिफॉर्म्स की इस प्रक्रिया, उस पर हम निरंतर काम कर रहे है। अभी संसद के मॉनसून सत्र में हमने ‘बैंकर्स बुक एविडेंस बिल’ पारित किया है। और वो भी तब जब विपक्ष ने संसद में लगातार गतिरोध बनाया हुआ था। हमने देश की सेवा करने का काम रूकने नहीं दिया। अब इस कानून ने 19वीं सदी के अंग्रेजी कानून को रिप्लेस किया है। अब बैंकों के डिजिटल रिकॉर्ड्स की स्वीकार्यता को कानूनी मान्यता दी गई है। इससे कानूनी उलझनें कम होंगी, सिस्टम में पारदर्शिता होगी, Ease of Doing Business बढ़ेगा।

साथियों,

गवर्नेंस में रिफॉर्म का एक मतलब ये भी है कि सिस्टम ऐसे बनें, जिसमें एक-एक मानव जीवन और उसके समय के प्रति संवेदनशीलता हो। मैं रेलवे का उदाहरण देता हूं। हमारी रेलवेज में भी इसी अप्रोच के साथ काम हुआ है। आज साढ़े 6 हजार से ज्यादा रेलवे स्टेशनों पर इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग की व्यवस्था है। 10 हजार से ज्यादा लेवल क्रॉसिंग गेट्स को भी इंटरलॉकिंग से जोड़ा जा चुका है। इससे ह्यूमन एरर से होने वाले हादसों की आशंका बहुत कम हुई है।

साथियों,

जब 2014 में हमारी सरकार आई, तो करीब 9 हजार फाटक ऐसे थे जो Un-Manned थे। इन्हें हटाना कोई रॉकेट साइंस नहीं था। Un-Manned क्रॉसिंग्स की वजह से हजारों लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी, लेकिन पहले की सरकारों को इससे बहुत फर्क नहीं पड़ता था। हमने मिशन मोड में, गत दस वर्ष में, इन Un-Manned क्रॉसिंग्स को समाप्त कर दिया। हमने रोड ओवर ब्रिज और रोड अंडर ब्रिज बनाने की गति भी कई गुना बढ़ा दी। और इसी का नतीजा है कि 2014 के पहले के मुकाबले ट्रेन दुर्घटनाओं की संख्या में Ninety Percent तक की कमी आई है, 90, Ninety Percent. 12 साल पहले जहां एक साल में करीब डेढ़ सौ रेल दुर्घटनाएं होती थीं, वहीं अब इनकी संख्या घटकर 15-20 रह गई है। और हम इसे और कम से कम करने का प्रयास लगातार कर रहे हैं।

साथियों,

Railways में स्वच्छता भी गवर्नेंस रिफॉर्म का एक बड़ा उदाहरण है। एक समय था, जब रेल पटरियों पर गंदगी और human waste एक बड़ी समस्या हुआ करती थी। आज स्थिति पूरी तरह बदल गई है। 2014 से पहले हमारी ट्रेनों में जहां लगभग 12 हजार बायो-टॉयलेट्स लगाए गए थे, वहीं 2014 के बाद ट्रेनों में 3 लाख 60 हजार से ज्यादा बायो-टॉयलेट्स लगाए गए हैं। यानी, 97 प्रतिशत से ज्यादा बायो-टॉयलेट्स पिछले 12 वर्षों में लगे हैं। ये बदलाव सिर्फ सफाई का नहीं, यात्रियों की गरिमा, स्वच्छता और आधुनिक भारत के निर्माण की दिशा में गवर्नेंस का एक नया मॉडल है। ये करोड़ों यात्रियों को बेहतर अनुभव देने का अभियान भी है।

साथियों,

गवर्नेंस की क्वालिटी का एक और पैमाना, और वो पैमाना है - समय। जो प्रोजेक्ट शुरू हो, वो समय पर पूरा हो। और जो सर्विस लोगों को मिले, वो भी समय की कसौटी पर खरी उतरे। दिल्ली-मेरठ नमो भारत रैपिड रेल सिस्टम इसका बहुत अच्छा उदाहरण है। इस कॉरिडोर पर 160 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से ट्रेनें चल रही हैं। ये हमारे देश में पहले कभी सोचा नहीं जा सकता था। अब तक 4 करोड़ से ज्यादा यात्री इसमें ट्रैवल कर चुके हैं। और इसका एक और अहम फैक्टर है, जिसकी चर्चा नहीं होती है। दिल्ली मेरठ नमो भारत रैपिड रेल की पंक्चुअलिटी 99.9 परसेंट है। वरना हम तो हर चीज में कहते हैं, लेट हो तो कहते थे, ये तो इंडियन टाइम है। वक्त बदला है, ये मैं छोटी-छोटी चीजें इसलिए बताता हूं, कि हमें अंदाज आए कि कितने बड़े व्यापक स्तर पर काम हो रहा है। इसी तरह, Delhi Metro की पंक्चुअलिटी। Delhi Metro की पंक्चुअलिटी 99.9 परसेंट है। और ये punctuality, New York, Hong Kong और Paris जैसे शहरों की Metro से करीब-करीब बराबर हो चुकी है। ये सिर्फ समय पर चलती हुई Metro और नमो रेपिड रेल की कहानी नहीं है, ये समय के साथ बदलते हुए भारत की पहचान है। मैं जानता हूं कि अभी भी, और र्मैं कोई इतने से संतोष मानकर बैठने वाला व्यक्ति नहीं हूं, अभी भी इस दिशा में हमें बहुत कुछ करना है, बहुत कुछ बाकी है, लेकिन हम लगातार कर रहे हैं। लेकिन एक शुरूआत तो हुई है और ये शुरुआत सराहनीय है।

साथियों,

हमारे रिफॉर्म्स रोडमैप का एक और बड़ा आयाम है- पॉलिसी लेवल पर होने वाले रिफॉर्म्स! आज हम ऐसी policies बना रहे हैं, जो pro-people हों, Pro-growth हों, pro development हों! पॉलिसीज़ देश और देश के लोगों की जरूरत के हिसाब से होनी चाहिए न कि पॉलिसीज़ बनाकर देश को उनके हिसाब से चलने को मजबूर होना पड़े! मैं आपको एक और Interesting उदाहरण देना चाहता हूं। कुछ साल पहले तक हमारे यहाँ देश का नक्शा बनाना भी गैर-कानूनी था, मैप बनाए तो गैर कानूनी था, आप जेल चले जाएंगे। बिना परमिशन के आप देश में मैपिंग का काम भी नहीं कर सकते थे। आप सोचिए, विदेशी सैटेलाइट टेक्नोलॉजी के जरिए भारत के किसी भी कोने को मैप कर सकती थी, लेकिन भारत में भारतीयों पर भारत का मैप बनाने पर पाबंदी लगी हुई थी।

साथियों,

आज टेक्नोलॉजी के इस दौर में, इस एक पाबंदी से कितने स्टार्टअप्स की हत्या हो सकती थी! कितने ideas implement होने से वंचित रह सकते थे! हमने इस व्यवस्था को भी बदला। हमने Geospatial डेटा का Deregulation किया और आज Geospatial डेटा कितने ही स्टार्टअप्स का आधार बन रहा है।

साथियों,

आज आप लगातार ड्रोन्स की उपयोगिता बढ़ते हुए देख रहे हैं। एग्रीकल्चर में, डिफेंस में, डिलिवरी में, शूटिंग में, कंटेंट क्रिएशन में, ये सब संभव ही नहीं होता, अगर सरकार ने इससे जुड़े नियमों में Reform नहीं किए होते। पहले देश में ड्रोन फ्लाइंग पूरी तरह नियमों में, बंधनों में जकड़ी हुई थी। हमने उसे बंधनों से आजाद किया, और आज भारत की ड्रोन इंडस्ट्री, एक अभूतपूर्व उड़ान के साथ आगे बढ़ रही है।

साथियों,

पहले border areas को लेकर सरकारों की सोच थी कि बॉर्डर पर roads और infrastructure बढ़ेगा, तो उसका फायदा दुश्मन भी उठा सकता है। हमने इस सोच को बदला। हमने कहा, Border infrastructure कमजोरी नहीं, देश की ताकत है। और इसीलिए आज border areas में roads, bridges और tunnels का network तेजी से बढ़ रहा है। सिर्फ 2024 और 2025 में ही, BRO के 250 infrastructure projects देश को समर्पित किए गए हैं। सोच बदली, तो border infrastructure की तस्वीर भी बदल गई।

साथियों,

एक उदाहरण न्यूक्लियर रिफॉर्म्स का भी है। एक ऐसे समय में, जब विकास पूरी तरह से energy dependent है, बंदिशों और प्रतिबंधों के कारण, देश अपने न्यूक्लियर potential का इस्तेमाल नहीं कर पा रहा था। हमने शांति बिल के जरिए इसमें भी बड़ा रिफॉर्म किया है। आज भारत में न्यूक्लियर एनर्जी में प्राइवेट सेक्टर के लिए रास्ता खुल चुका है। इसी तरह, हमने एक बड़ा पॉलिसी रिफॉर्म डिफेंस सेक्टर में भी किया। 200 साल के पहले जो व्यवस्था चली आ रही थी, उसे बदलकर हमने 40 से ज्यादा ordnance फैक्ट्रीज़ को मर्ज करके 7 फैक्ट्रीज़ बना दी। और उसका परिणाम हमें देखने को मिल रहा है। आज भारत अपनी रक्षा जरूरतों के लिए भी आत्मनिर्भर बन रहा है, और 2014 की तुलना में, हमारा डिफेंस एक्सपोर्ट 55 गुना बढ़ा है। और इसलिए, कई बार रिफॉर्म्स हमारे जीवन में इस तरह घुल-मिल जाते हैं कि हमारा उनकी तरफ ध्यान ही नहीं जाता। आप सोचिए, आपका कोई सामान्य दिन आज कैसे बीतता है। आप सुबह उठते हैं, फोन पर घर का सामान ऑर्डर कर देते हैं, और जब तक ऑफिस के लिए रेडी होते हैं, वो सारा सामान आपके घर आकर के पहुंच जाता है। आपकी गली के स्ट्रीट वेंडर से लेकर, आपकी गाड़ी के शो रूम तक, आपकी सारी पेमेंट्स, सिर्फ एक क्यूआर कोड स्कैन करके हो जाती है। अगर आपकी बेटी, किसी दूसरे शहर में पढ़ती है, तो आप फोन से उसे पैसे भेज सकते हैं, और वो पैसा, कुछ सेकंड्स में उसके पास भी पहुंच जाता है। कई बार तो बिटिया क्यूआर ही शेयर कर देती है कि ‘पापा-मां मैंने ये ड्रेस ले ली है, इसकी पेमेंट कर दीजिए, और आप उसकी शॉपिंग अपने घर बैठे-बैठे करवा देते हैं। ये चीजें Remarkable हैं, लेकिन अब ये कोई भारत के लोगों को कम से कम हैरानी नहीं होती, बाहर के लोग आते हैं, उनको आश्चर्य होता है, अच्छा ऐसे होता है। भारत के लोगों का रूटीन हो गया है। ये भारत के सामान्य मानवी के जीवन का हिस्सा बन चुका है। आप सोचिए, 2014 से पहले ऐसी कितनी ही बातें क्या पॉसिबल थीं?

साथियों,

भारत ने बीते 10-12 सालों में Ease of Living से जुड़े जो रिफॉर्म्स किए हैं, उसकी वजह से लोगों का, खासतौर पर हमारे मिडिल क्लास का जो जीवन बदला है, वो दुनिया के कई विकसित देशों में आज भी एक सपना ही है।

साथियों,

आज दुनिया का सबसे सस्ता डेटा भारत में है, हम सस्ते और अच्छे स्मार्टफोन्स बना रहे हैं। अभी सत्या ने उसका वर्णन किया। भारत दुनिया के fastest 5G rollouts करने वाले देशों में से एक है। हमने आधार को बैंकिंग, मोबाइल कनेक्टिविटी और सर्विसेज से जोड़कर, ई-के.वाई.सी और Digital Authentication जैसी सर्विसेज को पॉसिबल किया है। आज आपको अगर बैंक अकाउंट खोलना है, तो उसके लिए बैंक जाने तक की जरूरत नहीं है। सरकार ने बैंक को ही, आपके पास पहुंचा दिया है। आज चाहे कोई बिल जमा करना हो, कोई टिकट करानी हो, किसी सरकारी दफ्तर में जाने की जरूरत नहीं पड़ती, ये सारा काम ऑनलाइन हो जाता है। इनकम टैक्स की फाइलिंग का काम आसान हुआ है। ऐसी व्यवस्था बनी है कि फॉर्म में मैक्सिमम जानकारियां पहले से भरी होती हैं। आप ये इन्फॉर्मेशन वेरिफाई करते हैं, कुछ जोड़ना है तो जोड़ देते हैं, और सबमिट करते हैं, आपका काम पूरा हो जाता है। पहले जो रिफंड आने में महीनों लगते थे, अब वो भी कुछ ही दिनों में आ जाता है।

साथियों,

आज ई-संजीवनी की मदद से, शायद इसकी चर्चा अभी बहुत कम होती है, ई-संजीवनी की मदद से, गांव के दूर दराज के लोग भी, कहीं से भी डॉक्टर्स के साथ सीधी अपनी चर्चा करके अपने उपचार का रास्ता लेते हैं। और इससे जिन लोगों को अस्पताल जाने के लिए कई किलोमीटर का सफर करना पड़ता था, आज डॉक्टर उनके घर पर, उनकी स्क्रीन पर उपलब्ध है। अब तक ये आंकड़ा भी आपको जरूर आश्चर्य करेगा। यानी भारत ने टेक्नोलॉजी को किस प्रकार से अडाप्ट किया है, सामान्य मानवीय के जीवन को कैसे सरल किया है। अब तक ईं-संजीवनी के तहत करीब-करीब 50 करोड़ टेली-कंसल्टेशंस हो चुकी हैं।

साथियों,

आज भारत में Travel Experience बदल रहा है, भारत के नागरिकों की यात्राएं पूरी तरह बदल गई हैं। यहां इस हॉल में ऐसा व्यक्ति खोजना मुश्किल होगा, जिसने एयरपोर्ट पर डिजी यात्रा का इस्तेमाल ना किया हो। ऐसे ही आजकल बहुत सारा काम Seamless तरीके से हो रहा है। हाइवे पर फास्ट टैग चल रहे हैं, ताकि आप बिना रुके टोल देकर आगे बढ़ सकें। Ease of Living का सही अर्थ यही है। समय की बचत हो रही है, जीवन आसान हो रहा है, और करोड़ों लोग अपनी प्रगति पर फोकस कर पा रहे हैं।

साथियों,

Politics में अक्सर वही फैसले headlines बनते हैं, जिनका असर आज दिखाई दे, यानी उसकी उमर 24 घंटे हो। पहले की सरकारों ने इलेक्शन सामने देख कर भी घोषणाएं करने का फॉर्मूला अपनाया। लेकिन ऐसी घोषणाओं से देश नहीं बदला। देश बदलने वाले फैसले वो होते हैं, जिनका प्रभाव जमीन पर दिखे, जो वर्तमान और भविष्य, दोनों को ध्यान में रखकर के लिए गए होने चाहिए।

साथियों,

पीएम कुसुम योजना और पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना इसका बहुत बड़ा यूनीक Example है। कुसुम योजना से किसानों को बिजली की चिंता से मुक्ति मिली है। और सूर्यघर योजना से मिडिल क्लास को बहुत फायदा हुआ है।

साथियों,

मैं ये जानता हूं कि अगर मैंने ये अनाउंस कर दिया होता कि आज से लाखों-लाख परिवारों के लिए बिजली मुफ्त है, तो सारा मीडिया, सारी स्क्रीन्स, सारे न्यूजपेपर्स, बड़ी-बड़ी हेडलाइन बनाकर के खबर दे देते कि मोदी जी ने आज अनाउंस कर दिया है। लेकिन हमने कुछ दूसरे अप्रोच से काम शुरू किया। हमने हर घर की छत पर एक सूरज उगाने की ठान ली, और आज देश के 50 लाख से ज्यादा परिवार, पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना से जुड़े हैं। सरकार ने 22 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा इन परिवारों को दिए हैं, ये सोलर सिस्टम लगाने के लिए, ताकि उनकी छत पर सोलर प्लांट लगाकर सोलर पावर पैदा की जा सके। अब ये परिवार, एक्स्ट्रा बिजली को, बिजली ग्रिड में बेचकर, पैसे भी कमा रहे हैं। खुद का बिल तो जीरो हुआ, कमाई भी होने लगी। इस योजना से लोगों के सपनों को भी विस्तार मिल रहा है। बिजली बिल कम हुआ है, तो अब घर में फ्रिज, कूलर, वाशिंग मशीन, टीवी जैसी चीजें लोग खरीदकर रखने लगे हैं। अब ये डर नहीं होता कि बिजली कटौती की वजह से दूध फट जाएगा, अब चिंता नहीं रहती है। अब स्कूल जाने वाले बच्चे रातभर चैन से सो पाते हैं। मैं फिर कहता हूं- इलेक्शन हो या ना हो, लेकिन ये सूर्यघर और उसकी रोशनी बनी रहेगी, इस प्लांट का फायदा, सालों तक देश के परिवारों को होता रहेगा।

साथियों,

आने वाले समय में Ease of Living और Ease of Doing Business का और विस्तार होगा। देश के Youth के लिए, नारीशक्ति के लिए, Farmers के लिए, गरीब और Middle Class के लिए, हमारी सरकार लगातार काम करती रहेगी, हमारी Reform Express और अधिक गति से आगे बढ़ने वाली है। विकसित भारत का लक्ष्य पूरा करने के लिए, हम पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम करते रहेंगे। और मैं, मेरे लिए भारत का future अगर सुनिश्चित हो गया ना, तो दुनिया के future में भी स्थिरता लाने का बहुत बड़ा काम इसी धरती से होने वाला है। इस आत्मविश्वास के साथ भारत जितना स्टेबल होगा, भारत का future जितना सुरक्षित होगा, विश्व को सुरक्षत्व का एहसास देने की ताकत यहीं से पैदा होने वाली है। इस सामर्थ्य के साथ, इसी संकल्प के साथ, मैं एक बार फिर, आज के इस कार्यक्रम में मुझे आमंत्रित करने के लिए, Economic Times की पूरी टीम का हृदय से बहुत-बहुत धन्यवाद करता हूं। वन्दे मातरम् !