Had these family-oriented parties been in the government, they would have got the vaccine first by breaking all the lines, says PM Modi
If any decision is against the interest of the country, opposition do not hesitate to take that decision. They act only to remain in power: PM Modi on vote bank politics
Congress or Samajwadi Party, has remained hostage to one family for the past several decades: PM Modi on ‘Parivarvad’ in politics

नमस्कार !

अमेठी और सुल्तानपुर के यहां के लोग जब प्यार देते हैं, तो जमकर के देते हैं। आज भी मैं वही स्नेह, वही अनुराग, वही अपनापन अनुभव कर रहा हूं और इसके लिए मैं आपका बहुत आभारी हूं। साथियो, उत्तर प्रदेश चुनाव के 4 चरण पूरे हो चुके हैं। चारों ही चरणों में लोगों ने एकजुट होकर बीजेपी को अपना आशीर्वाद दिया है। जो घोर परिवारवादी सोच रहे हैं, कि यूपी के लोग बंट जाएंगे, बिखर जाएंगे। देशहित को भूल जाएंगे। उत्तर प्रदेश के हितों को भूल जाएंगे। अपने इलाकों के हितों को भूल जाएंगे। उन सबके सारे गणित उल्टे पड़ गए हैं। उन्हें सच्चाई का पता 10 मार्च को लग जाने वाला है भाइयो। और इसलिए इस बार उत्तर प्रदेश रंगों वाली होली 10 को ही मनाना शुरू कर देगा। अमेठी-सुल्तानपुर के लोग तो जानते ही हैं कि परिवारवादियों की हमेशा से ही ये दिक्कत रही है। ये लोग जमीनी हकीकत से इतना दूर हैं, इतने आसमान में हैं, कि जमीन पर क्या चल रहा है, इन्हें दिखाई ही नहीं देता है। 

साथियो, 

आज दशकों बाद यूपी में ऐसा चुनाव हो रहा है जब कोई सरकार अपने किए विकास कार्यों के आधार पर, गरीबों के हित में किए गए कार्यों के आधार पर आज आपसे वोट मांग रहा है। वर्षों बाद ऐसा हुआ है जब यूपी की सरकार, सुधरी हुई कानून-व्यवस्था पर वोट मांग रहा है। वर्षों बाद ऐसा हुआ है जब यूपी में दंगे रुके हैं, अपराधियों की हिम्मत पस्त हुई है। वर्षों बाद ऐसा हुआ है जब मुख्यमंत्री अपने परिवार को आगे बढ़ाने, भ्रष्टाचार का आरोप ऐसी किसी भी मुसीबत को इस चुनाव के मैदान में झेल नहीं रहा है। और, वर्षों बाद ऐसा हुआ है, जब गरीब, मध्यम वर्ग, खुद आगे आकर कह रहा है- आएगी तो एनडीए ही, आएगी तो एनडीए ही, आएंगे तो योगी ही। 

भाइयो और बहनो, 

जो ये परिवारवादी लोग होते हैं, वो सत्ता में इसलिए आना चाहते हैं ताकि अपनी और अपने परिवार की ताकत बढ़ा सकें, और राजा-महाराजा की तरह आप पर राज कर सकें। हमें किसी ताकत के लिए सत्ता नहीं चाहिए, ना ही हमारी ताकत कोई बाहुबली या माफिया है। हमारी ताकत उत्तर प्रदेश की जनता है, उत्तर प्रदेश का गरीब है। उत्तर प्रदेश की माताएं-बहनें हैं। वो आज देख रहा है कि कैसे बीते पांच सालों में भाजपा सरकार ने उसकी भलाई के लिए काम किया है। वो जानता है कि हर सुख-दुख में हमारी सरकार उनके साथ खड़ी रही है। वो जानता है कि सरकार का योजनाओं का लाभ देने में, हम कभी भी न  जाति देखते हैं न मजहब देखते हैं। हम सिर्फ ईमानदारी से जो भी गरीब है, जो भी योजना का हकदार है,  उसकी आवश्यकता की पूर्ति का प्रयास करते हैं। इसलिए आज यूपी के लोग भाजपा को दिल से इतना आशीर्वाद दे रहे हैं।

भाइयो और बहनो, 

आज का दिन 24 फरवरी मेरे जीवन का विशेष दिन है क्योंकि आज ही पीएम किसान सम्मान निधि को तीन साल पूरे हुए हैं। जब 2019 में हमने ये योजना शुरू की थी तो कई लोग अफवाहें फैला रहे थे, भ्रम फैला रहे थे कि ये तो 2019 के चुनाव के पहले मोदी लाया है। एक बार चुनाव हो जाएगा, फिर मोदी बंद कर देगा। और कुछ हमारे विरोधी लोग हैं ना वो तो दिन-रात इसको चला भी रहे थे। लेकिन भाइयो और बहनो, हम जो भी काम करते हैं सोच-समझ कर करते हैं। ईमानदारी से करते हैं और लोगों की भलाई के लिए करते हैं। और आपने देखा, चुनाव हो गया, हम जीत भी गए और जो योजना शुरू की गई थी, तीन साल से अनवरत इस योजना का पैसा सीधे किसानों के बैंक खातों में जा रहा है। यहां अमेठी के किसानों को भी 450 करोड़ रुपये, साढ़े चार सौ करोड़ रुपये से ज्यादा इस योजना से सीधे मेरे किसानों के खाते में जमा हुए हैं। सुल्तानपुर के किसानों को भी 430 करोड़ रुपये से ज्यादा पीएम किसान योजना के मिले हैं। ये योजना कितने ही किसानों का, और खासकर के मेरे छोटे किसान भाई-बहनों का, उनका ये संबल बनी है। 

साथियो, 

आज आपके बीच आया हूं तो एक और बात भी बताना चाहता हूं। आज से 20 साल पहले, 24 फरवरी की ही वो तारीख थी, जब मैं पहली बार विधायक बना था। पहली बार, पहली बार जीवन में अचानक चुनाव के मैदान में आना पड़ा था और राजकोट के लोगों ने मुझे आशीर्वाद दिए और सेवा का यह सिलसिला शुरू हुआ।  मैंने जीवन में कभी सोचा नहीं था कि कभी मैं चुनावी दंगल में जाउंगा, चुनावी राजनीति में जाउंगा। जिस रास्ते पर जाने का मैंने कभी सोचा तक नहीं था, उस रास्ते पर चलने की शुरुआत 24 फरवरी को हुई थी, मैंने अपना पहला कदम बढ़ाया था। जनता-जनार्दन का सेवक बनकर, उनके लिए काम करने का वो संकल्प हर दिन के साथ और सशक्त हुआ है। यही सेवा भावना, भारतीय जनता पार्टी की पहचान है और चुनावी दुनिया में आने के बाद जिस तरह यूपी ने मुझे अपना लिया,  मां गंगा ने मुझ पर जिस प्रकार से स्नेह वर्षा की, आप लोगों ने  मुझे गले लगाया, इससे बड़ा जीवन में कोई सौभाग्य नहीं होता है। आपका ये स्नेह, आपका ये आशीर्वाद, मेरे जीवन की बहुत बड़ी पूंजी है। और पूंजी के नाम पर आपका प्यार ही तो यही एक मेरी अमानत है।

भाइयो और बहनो, 

आज यूपी में आपको ऐसे परिवार खोजना मुश्किल होगा, जिसकी हमारी सरकार ने सेवाभाव से सहायता ना की हो। 100 साल के इस सबसे बड़े संकट में, ये कोरोना की महामारी, पूरी दुनिया को अपनी चपेट में ले लिया है। पूरी मानव जात, दुनिया के हर कोने में, इस महामारी ने क्या से क्या कर दिया, लेकिन हिंदुस्तान में भाजपा सरकार ने सबकी मदद का प्रयास अविरल जारी रखा। आज यूपी के 16 करोड़ से ज्यादा लोगों को वैक्सीन की पहली डोज मुफ्त लग चुकी है। करीब-करीब 12 करोड़ लोगों को दूसरी डोज भी मुफ्त लग गई है। भाइयो और बहनो, आप मुझे बताइये, आपको वैक्सीन का टीका लग गया, टीका लग गया, सबको लग गया, आपको कोई पैसा देना पड़ा, एक रुपया भी आपकी जेब से खर्चा करना पड़ा। टीका लगवाने के लिए रिश्वत देनी पड़ी। आपको कोई तकलीफ हुई। भाइयो और बहनो, इतनी तेजी से वैक्सीनेशन हमारे देश में पहले कभी नहीं हुआ है। इसी वैक्सीन ने कोरोना से लड़ने की ताकत हर एक नागरिक में बढ़ा दी है। इसी के कारण आज दुकानें खुली हैं, व्यापार खुला है, स्कूल-कॉलेज खुले हैं, फैक्ट्रियां खुलीं हैं। 

साथियो,

इन परिवारवादियों का वैक्सीन को लेकर जो रवैया रहा है, वो भी पूरे उत्तर प्रदेश, पूरे देश ने देखा है। इन लोगों ने भारत में बनी वैक्सीन को बदनाम करने की भरपूर कोशिश की और यहां तक कह दिया, आपको याद है न, यहां तक कह दिया ये भाजपा की वैक्सीन है। ये तो भाजपा की वैक्सीन है। और कुछ लोगों ने कहा ये तो भाजपा की वैक्सीन है, हम नहीं लगाएंगे। कोशिश यही थी, उनका इरादा यही था कि लोग डर जाएं, राजनीति का रंग लग जाए और लोग वैक्सीन ना लगवाएं और वैक्सीन न लगे, कोरोना का हमला होता रहे। लोग मुसीबत में फंसते रहें और मोदी बदनाम होता रहे, योगी बदनाम होता रहे, तबाही होती रहे। भाइयो-बहनो क्या ये सोच अच्छी है क्या। किसी का बुरा सोचना, ये अच्छी बात है क्या , क्या ऐसे लोगों को माफ किया जा सकता है क्या। इन्होंने गुनाह किया कि नहीं किया है। ऐसे गुनहगारों को आपका वोट मांगने के हक है क्या।  लेकिन इन लोगों की इज्जत ही इतनी ही जमीन पर पहुंच गई है। इनकी  क्रेडिबिलिटी इतनी खराब है कि खुद इनकी पार्टी के लोगों ने भी, उनके कार्यकर्ताओं ने भी इनकी बात नहीं सुनी और वैक्सीन लगवा दी। ये परिवारवादी बहकाते रहे, लेकिन उनके कार्यकर्ताओं ने भी रजिस्ट्रेशन करवाया और उन्होंने भी कोरोना वैक्सीन की डोज ले ली।

साथियो, 

भारत ने जिस तरह दुनिया का सबसे बड़ा वैक्सीनेशन कार्यक्रम चलाया, उस पर हर भारतीय को गर्व है। पहले दिन से ये अभियान नियमों के अनुसार चला। Discipline से चला। कोई भगदड़ नहीं, कोई ब्लैक मार्केटिंग नहीं। कोई मेरा तेरा नहीं, सब कुछ नियम से हुआ। इतने बड़े देश में जब कोरोना के कारण मुसीबतें सामने खड़ी हों, फिर भी सारा काम discipline से चले, ये हिंदुस्तान के लिए सिर ऊंचा करने की घटना है भाइयो। बहुत बड़ी बात है। और आप खुद भी गवाह हैं कि जब वैक्सीनेशन शुरू हुआ…जब वैक्सीनेशन शुरू हुआ, तो मोदी खुद दौड़कर सबसे पहले वैक्सीन लगवाने के लिए नहीं पहुंचा। हमने पहले स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े लोगों को, सफाई कर्मचारियों को,  बुजुर्गों को,  गंभीर बीमारी से ग्रसित लोगों को वैक्सीन लगवाने का मौका दिया। ये परिवारवादी सरकार में होते तो सारी लाइनें तोड़कर खुद सबसे पहले वैक्सीन लगवाते। आप ये भी देखिए, मैंने भी वैक्सीन तब लगवाई जब नियम से मेरा नंबर आया। आप सबको मालूम होगा,  मेरी मां सौ साल की उम्र है। उन्होंने भी लाइन नहीं तोड़ी। उन्होंने भी जब उनका नंबर आया नियम से तब वैक्सीन लगवाई,  इतना ही नहीं अभी बूस्टर डोज, तीसरे डोज की चर्चा चल रही है। मेरी मां ने नहीं लगवाया,  क्योंकि उम्र सौ साल है लेकिन कोई और बीमारी नहीं होने के कारण उनका नंबर नहीं लगता है, तो उन्होंने नहीं लगवाई। कानून नियमों का पालन प्रधानमंत्री भी करता है, प्रधानमंत्री की 100 साल की उम्र की मां भी करती है। ये परिवारवादी होते तो पहले खुद का वैक्सीनेशन होता और सामान्य लोग पीछे रह जाते।

साथियो, 

यूपी के 15 करोड़ लाभार्थियों को इस मुश्किल समय में मुफ्त राशन का डबल बेनिफिट मिल रहा है। यूपी के एक करोड़ 65 लाख गरीब परिवारों को हमारी सरकार ने मुफ्त गैस कनेक्शन दिया है। यूपी के 34 लाख गरीब परिवारों को हमारी सरकार ने पक्का घर बनाकर के दिया है। और ये जो घर मिल रहे हैं ना, वो भी हमारा आग्रह है, वो मकान का मालिकाना हक उस परिवार की महिला के नाम पर हो। महिलाओं को उसका हक मिले। यूपी की लाखों बहनें बीते 5 साल में अपने घर की मालकिन हो गई हैं, लखपति हो गई हैं। 

साथियो, 

भाजपा सरकार की स्वामित्व योजना की वजह से आज यूपी के गांवों में लाभार्थियों को एक बहुत बड़ा वर्ग, जिनको लगातार उनके हक की चीजें सामने से उनके घर पहुंच रही हैं।  ये वो वर्ग है जिसको पहले की सरकारों के समय अपने घर, अपनी ज़मीन पर कब्ज़े की चिंता आए दिन सताती थी। अब हम ऐसी व्यवस्था कर रहे हैं कि कोई भूमाफिया, कभी आपका घर और आपकी जमीन को छू  भी नहीं सकेगा, ये व्यवस्था हम कर रहे हैं। हम आपके घर, आपकी ज़मीन का पक्का कानूनी दस्तावेज़, टेक्नोलॉजी की मदद से तैयार करके आपको घरौनी दे रहे हैं। पीएम स्वामित्व योजना के तहत यूपी के लाखों ग्रामीणों को घरौनी दी जा चुकी है। और आगे भी काम चल रहा है। बाकी  गांवों में भी ड्रोन के माध्यम से काम, ये आचार संहिता के कारण अफसर जरा दूसरे कामों में, इलेक्शन कमीशन की सेवा में हैं, लेकिन जैसे ही चुनाव का काम पूरा होगा, दनादन ये काम फिर से शुरू हो जाएगा। 

भाइयो और बहनो, 

आज अमेठी के लोगों के सामने, सुल्तानपुर के लोगों के सामने, मैं ऐसे दो विषयों की भी चर्चा करूंगा, जिसके हमारे देश के नागरिक, हमारे उत्तर प्रदेश के नागरिक, हमारे सुल्तानपुर-अमेठी के नागरिक इसके भुक्तभोगी रहे हैं। परेशानियां झेली हैं। ये विषय है, और वो देश के सामने है। लोकतंत्र के सामने है। बहुत बड़ी चुनौती है। और मैं चाहूंगा कि मेरे जो नवजवान हैं,  मेरी इस बात पर गौर करें, उस पर जरूर ध्यान दें। साथियो, ये विषय हैं,  पहला- वोटबैंक की पॉलिटिक्स और दूसरा परिवारवादी राजनीति। जब मैं दो विषयों की चर्चा करता हूं, तो ये परिवारवादी लोग मुंह पर ताले लगा देते हैं। और उनके जो इकोसिस्टम है ना वो भी बात को उलटकर दूसरी दिशा में ले जाती है।  आप देखिएगा, ये लोग कभी इसका जवाब नहीं देते, क्योंकि इनके दिल में खोट है। साथियो, वोटबैंक की पॉलिटिक्स और परिवारवादी राजनीति, दोनों ने देश का बहुत ज्यादा नुकसान किया है। जब आप वोटबैंक की पॉलिटिक्स करते हैं, किसी का तुष्टिकरण करते हैं तो इसका सीधा मतलब ये होता है कि समाज के एक बड़े वर्ग से आप विकास का हक छीन रहे हैं। जब आप परिवारवादी राजनीति करते हैं तो इसका सीधा मतलब ये होता है कि आप किसी साधारण व्यक्ति से आगे बढ़ने का अधिकार छीन रहे हैं। 

साथियो,

एक समय था जब इन नेताओं ने वोटबैंक पॉलिटिक्स को, तुष्टिकरण को बढ़ावा दिया। उसे खाद-पानी दिया। आज वोट बैंक की इसी पॉलिटिक्स ने, तुष्टिकरण की इसी राजनीति ने इन नेताओं को, इन राजनीतिक दलों को अपना बंधक बना दिया है। बंधक बना दिया है। अब वोट बैंक की पॉलिटिक्स ही इन दलों की, नेताओं की मजबूरी बन गयी है। इसलिए आज भी उनका हर फैसला इसी वोटबैंक की पॉलिटिक्स के हिसाब से ही होता है। ये फैसला अगर देशहित के खिलाफ हो तो भी ये नेता उस फैसले को लेने में जरा भी हिचकते नहीं हैं। उनको देश की नहीं, वोट बैंक की चिंता रहती है और इसलिए आप लोग देखते हैं कि ये लोग हमारी सेनाओं का अपमान करते हैं, हमारे पुलिस फोर्सेस का अपमान करते हैं। उनके मनोबल को तोड़ने की बातें करते हैं। क्योंकि ऐसी बातें करने से उनकी वोट को खुशी होती है। इसी सोच की वजह से ये लोग हमारे संविधान की परवाह नहीं करते, देश की संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल खड़े करते हैं। 

अभी आपने देखा है 56, ये आंकड़ा छोटा नहीं है 56 निर्दोष लोगों को कुछ ही मिनटों में अलग-अलग जगह बम धमाके करके 56 लोगों को मार दिया गया था, सैकड़ों लोगों को अपाहिज कर दिया था। ऐसा भयंकर मानवता के खिलाफ कृत्य करने वाले आतंकवादियों को,  38 आतंकवादियों को गुजरात की अदालत ने फांसी की सजा सुनाई है। अब मैं देख रहा हूं, मैंने कहा कि अदालत ने फांसी की सजा सुनाई है आप सब तालियां बजाने लगे गए, आपको अच्छा लगा कि नहीं लगा, न्याय मिला उससे आपको संतोष हुआ कि नहीं हुआ, आपको न्याय में विश्वास है कि नहीं है लेकिन आप देखिये, मानवता के दुश्मनों को फांसी हो गई। लेकिन वोटबैंक के डर से, वोट बैंक खिसक जाएगी तो क्या होगा, इन पार्टियों ने, अदालत के फैसले का स्वागत करने की भी हिम्म्त नहीं दिखाई, उनके मुंह पर ताले लग गए हैं भाइयो। जो लोग गुनहगार सिद्ध हो चुके हैं, उनके लिए भी अगर रहम नजर रखते हैं, क्या ऐसे लोगों को राजनीति में सत्ता में आने का हक है क्या? ऐसे लोगों को बाहर करना चाहिए कि नहीं करना चाहिए?

भाइयो और बहनो, 

जहां तक दूसरी बात है परिवारवादी राजनीति की, तो उससे भी देश का बहुत नुकसान होता है। परिवारवादी राजनीति में पार्टी का अध्यक्ष परिवार का होता है, पार्टी के सभी महत्वपूर्ण पदों पर परिवार के लोग ही जमकर बैठे होते हैं। महत्वपूर्ण पदों पर दावेदारी भी उसी परिवार के सदस्यों की होती है, पार्टी में कोई आंतरिक लोकतंत्र नहीं होता। पिता के बाद बेटा, फिर बेटे का बेटा,  या बेटी, बहू उन्हीं लोगों को पद पर रहने का हक मिल जाता है, ये परिवारवादी पार्टियां यही पहले पक्का कर लेती हैं। इन पार्टियों में जो परिवार को समर्पित होता है, उसी को वहां कुछ अवसर मिलता है। उनके लिए संविधान सुप्रीम नहीं होता है, परिवार का सुप्रीमो ही सुप्रीम होता है। वहां वो खुद के लिए कुछ नहीं कर पाता, देश के लिए कुछ नहीं कर पाता, उसको तो सिर्फ और सिर्फ परिवार के हित में ही काम करना होता है। ऐसी परिवारवादी पार्टियों में कार्यकर्ता के लिए स्पष्ट संदेश होता है- मेहनत आप करिए, फल हम खाएंगे।

साथियो,

इन घोर परिवारवादियों ने, सरकार चलाने का भी एक बहुत बड़ा फिक्स फॉर्मूला बना रखा है।  ये लोग अलग-अलग जिलों से मंत्री-वंत्री तो बना लेते हैं। अपने वोट बैंक के हिसाब से मंत्री भी ले आते हैं, लेकिन उन मंत्रियों के पास कोई अधिकार नहीं होता है। वो क्या करते हैं अपने परिवार के लोग जो चुनाव जीतकर के नहीं आये हैं। जो संविधान की व्यवस्था में नहीं हैं। उनको इलाके बांट देते हैं। भतीजों को कहते हैं ये दो जिले तुम्हारे,  भांजे को कहते हैं ये जिले तुम्हारे, बहन को कहते हैं ये जिला तुम्हारा। और अफसरों को भी मालूम होता है जो मंत्री बनाये हैं वो तो नाम के हैं, असली मंत्री तो परिवार में जिनको बनाया है सब कुछ उसी को। ये सुपर मिनिस्टर, मिनिस्टर के ऊपर सुपर मिनिस्टर वो परिवार का होता है, फिर जो विभाग होते हैं। खनन का काम भांजा देखेगा। हेल्थ का काम भतीजा देखेगा। विभागों को भी परिवार के सुपर मिनिस्टर को बांट दिया जाता है। और इसलिए नीचे सरकारी तंत्र को भी मालूम होता है। कोई काम-वाम करने की जरूरत नहीं, जनता का भला करने की जरूरत नहीं है। बस इस सुपर मिनिस्टर को संभालो। अपना CR ठीक रहेगा। अच्छा अच्छा पोस्टिंग मिलता रहेगा। और इसलिए सरकारी तंत्र भी बर्बाद हो जाता है।  

भाइयो और बहनो,

इस तरह चुपचाप परिवार में बैठे-बैठे लोग, सरकार में सुपर मिनिस्टर के नाते सारा कब्जा कर के बैठ जाते हैं। चोरी-छिपी से फाइलें भी तब तक क्लीयर नहीं होती है, जब तक की सुपर मिनिस्टर ने हां ना कहा हो। यानि मंत्री कोई भी हो, लेकिन परिवार का सदस्य ही उस मंत्रालय को चलाता है। उसी के काम से बात आगे बनती है। भाइयो-बहनो, क्या ये लोकतंत्र के लिए, संविधान के लिए सामान्य मानवी के आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए ये रास्ता उचित है क्या ? भाइयो-बहनो,  और इन सब परिस्थिति में वहां के अधिकारियों को परिवार का सदस्य ही कंट्रोल करता है। ट्रांसफर, पोस्टिंग भी वो सुपर मिनिस्टर कहेगा तभी होगी। जो संविधान के मर्यादाओं के बाहर बैठा हुआ है। भाइयो-बहनो, वही सुप्रीम होता है, परिवार की इच्छा आदेश वही सुप्रीम। इसलिए परिवारवादी पार्टियां डगर-डगर पर संविधान का अपमान करती हैं, संविधान को नकार देती हैं।

साथियो, 

परिवारवादी पार्टियां अगर सबसे ज्यादा नुकसान करती हैं तो वो है हमारी युवा प्रतिभा का, युवा टैलेंट का। जबकि आप देखेंगे, भाजपा में आज कोई अध्यक्ष है, कल कोई और अध्यक्ष बन जाता है। आज कोई एक भूमिका निभा रहा है कल कोई और वही भूमिका निभा सकता है। भाजपा, पिता एंड सन्स की प्राइवेट पार्टी नहीं है, और ना ही कभी हो सकती है। भाजपा में कौन किस परिवार का है इसका कोई महत्व नहीं है। हमारे यहां कार्यकर्ता का परिवार नहीं उसकी कर्मठता, उसका समर्पण, जनता के लिए सेवा करने का भाव, उसी को हम ध्यान में रखकर के हम पार्टी का विस्तार और विकास करते हैं।  और आप जनसंघ के जमाने से इसे देख सकते हैं।  हमारे यहां हमने इसी लोकतांत्रिक परंपरा को आज भी हम जीते हैं और आगे भी जीने का वादा करते हैं। 

भाइयो और बहनो,

भारतीय जनता पार्टी को जन्म हुए करीब चार दशक हो गए हैं। इन चार दशक में आप देखिए हमारे यहां पार्टी अध्यक्ष, सभी पार्टी अध्यक्ष अलग-अलग बने हैं, अलग-अलग इलाके के बने हैं। कोई  किसी परिवार के प्रभाव में हमारा अध्यक्ष नहीं बना है। जबकि पिछले चार-पांच दशकों में हमने कांग्रेस पार्टी में करीब-करीब एक ही परिवार का अध्यक्ष देखा है। साथियो, आजादी की लड़ाई के समय में कांग्रेस में कम-अधिक मात्रा में लोकतंत्र बचे हुए थे। जब बड़े-बड़े स्टॉलवर्ड लीडर हुआ करते थे, तब वहां अध्यक्ष बदले जाते थे, वहां लोकतंत्र बचा हुआ था, लेकिन कांग्रेस में आजादी के बाद जो दिक्कत आना शुरू हुई, जब एक ही परिवार ने पार्टी पर कब्जा शुरू कर दिया। कांग्रेस की देखा-देखी पूरे देश में बहुत सारी पार्टियां, ये कांग्रेस को देखकर के सीख गईं और पूरे लोकतंत्र को दीमक की तरह बहुत बड़ा नुकसान कर दिया। यहां यूपी में भी घोर परिवारवादियों ने कांग्रेस कल्चर को ही खुद में पूरा का पूरा उतार लिया है, उसी रंग में रंग गए हैं।  बीते कई दशकों से कांग्रेस हो या समाजवादी पार्टी, एक ही परिवार की बंधक बनी हुई है। 

साथियो,

परिवारवादी पार्टियों का एक बहुत बड़ा नुकसान ये भी है कि जब परिवार के लोग कोई गलती करते हैं, बुरा काम करते हैं, भ्रष्टाचार करते हैं तो परिवार की इको सिस्टम ही उनको बचाने में काम में लग जाती है। उनको कोई सुधारने के लिए भी काम नहीं करता है। उनको संभालने का काम होता है। आखिर जिन पर भ्रष्टाचार का आरोप लगा है वो भी परिवार के सदस्य होते हैं। इसलिए कोई कुछ नहीं कर सकता है और कार्रवाई करनी है तो पारिवारिक रिश्ते, फैसलों के आड़े आ जाते हैं। भ्रष्टाचार अगर परिवार का सदस्य कर रहा हो तो उससे चुपचाप स्वीकार कर लिया जाता है। उसके बाद यही भ्रष्टाचार उस पार्टी का, उस सरकार का, रोजमर्रा का व्यवहार बन जाता है। इससे भी देश का बहुत नुकसान होता है। इसी ने उत्तर प्रदेश का भी दशकों तक बहुत नुकसान किया है। इसलिए यूपी के लोगों को वोटबैंक की पॉलिटिक्स करने वालों से, परिवारवाद की राजनीति करने वालों से बहुत सतर्क रहने की जरूरत है। और मेरे नौजवान आपको ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है। और अमेठी के लोग तो जानते हैं कि ये लोग किसी के नहीं होते हैं। आपने जिन्हें बरसों तक सर-आंखों पर बिठाया, सम्मान दिया, और जैसे ही आपने उनको भगाया, तो उन्होंने केरल में जाकर आपकी ही बुद्धि को कोसने की शुरुआत कर दी, आपकी समझ पर ही सवाल उठाने लगे।

भाइयो और बहनो,

विरोध और अवरोध जिनकी राजनीति है, वो ये करते ही रहेंगे, हम विकास की नीति, उस पर तेज़ गति से चलते रहेंगे। बीते 5 साल में अमेठी में ही पीएम आवास योजना के 60 हजार से ज्यादा घर बनाकर गरीबों को दिए गए हैं। बीते 5 साल में अमेठी में करीब-करीब 2 लाख शौचालय, जिसे हमारे उत्तर प्रदेश की बेटियों ने इज्जत घर नाम दिया है, दो लाख शौचालय बनवाए हैं। ये हमारी ही सरकार है जिसने अमेठी में मेडिकल कॉलेज का निर्माण शुरू करवाया है। ये हमारी ही सरकार है जिसने पुलिस लाइन स्वीकृत की है, गौरीगंज और जगदीशपुर में पुलिस फायर स्टेशन स्वीकृत किया है। घोर परिवारवादियों ने यहां की रायफल फैक्ट्री का क्या हाल बना रखा था, ये भी अमेठी के लोग जानते हैं। हमारी सरकार ने ये सुनिश्चित किया है कि अमेठी की फैक्ट्री में बनी एके-203 आधुनिक रायफल, देश की सुरक्षा बढ़ाएगी, पूरे अमेठी का नाम रोशन करेगी। ये काम पहले भी हो सकते थे। लेकिन परिवारवादियों के अपने स्वार्थ से फुरसत मिलेगी तभी तो आप लोगों के बारे में सोचेंगे।

साथियो,

योगी जी सरकार ने अमेठी और सुल्तानपुर को पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से भी जोड़ा है। आपका लखनऊ और दिल्ली का सफर भी आसान हो गया है। यहां के किसानों और पशुपालकों का दूध, फल-सब्ज़ी, तेज़ी से बड़े बाज़ारों तक पहुंचने का रास्ता बना है। अब हम इसके इर्दगिर्द बहुत बड़ा औद्योगिक गलियारा भी बनाने वाले हैं। इससे रोज़गार-स्वरोज़गार के अनेकों अवसर यहां खुलने वाले हैं।

साथियो, 

ये जितनी भी योजनाओं-परियोजनाओं पर डबल इंजन की सरकार काम कर रही है, वो तभी पूरी हो सकती हैं, जब यहां कानून का राज होगा। उत्तर प्रदेश का कोई भी मतदाता यहां ऐसी सरकार नहीं चाहता, जो यूपी के संकल्पों के सामने रोड़ा बनकर के खड़ी हो जाए। और आप ध्यान रखिए, आज हमारी योजनाओं से गरीबों को जो लाभ मिल रहा है, ये घोर परिवारवादी, उन योजनाओं को, या तो अपने चहेतों की बंदरबांट करेंगे या तो उसको ताले लगा देंगे। केंद्र की योजनाएं यूपी में लागू ना हों, क्या ऐसे दिन आप उत्तर प्रदेश में चाहते हैं। डबल इंजन सरकार का डबल बेनिफिट मिलते ही रहना चाहिए, ये हमारा संकल्प है। इसलिए आपको भारी संख्या में भाजपा के पक्ष में वोट डालना है, अपना दल हमारा साथी दल है, निषाद पार्टी हमारा साथी दल है, उनके उम्मीदवारों को भी जिताना है। आप सब इतनी बड़ी तादाद में हमें आशीर्वाद देने आए, मैं देख रहा हूं कि दूर-दूर तक लोग खड़े हैं। मैं आपका बहुत-बहुत आभारी हूं। मेरे साथ बोलिए..

भारत माता की जय

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March 28, 2026
The inauguration of Phase-I of Noida International Airport marks a major step in Uttar Pradesh’s growth story and India’s aviation future: PM
UP has now emerged as one of the states with the highest number of international airports in India: PM
Airports are not just basic facilities in any country, they give wings to progress: PM
Our government is making unprecedented investments in modern infrastructure to build a Viksit Bharat: PM

भारत माता की जय।

भारत माता की जय।

भारत माता की जय।

उद्धघाटन हो गया? उद्धघाटन हो गया? नहीं, अभी आधा काम हुआ है। मैंने सिर्फ वो पर्दा हटाया है, लेकिन मैं आज चाहता हूं इस एयरपोर्ट का उद्धघाटन यहां जो भी उपस्थित हैं, आप सब करें, और इसलिए आप अपना मोबाइल फोन निकालिये, अपने मोबाइल फोन का फ्लैश लाईट कीजिए और आपका इसका उद्धघाटन कर रहे हैं। आप दीया जलाकर के यहां उपस्थित हर व्यक्ति, आज इस एयरपोर्ट का उद्धघाटन कर रहा है। ये आपकी अमानत है, ये आपका भविष्य है, ये आपका पुरूषार्थ है और इसलिए इसका उद्धघाटन भी आपके हाथों से हो रहा है, आप अपने भारत माता की जय बोलकर के, हाथ ऊपर करके, फ्लैश लाईट पूरी तरह से दिखाइये। भारत माता जी जय। भारत माता जी जय। भारत माता जी जय। बहुत-बहुत धन्यवाद। अब उद्धघाटन हो गया।

उत्तरप्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, यहां के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी, उप-मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्या, ब्रजेश पाठक, केंद्रीय मंत्रिमंडल के मेरे सहयोगी श्री राममोहन नायडू जी, पंकज चौधरी जी, ज्यूरिक एयरपोर्ट के चेयरमैन जोसेफ फेल्डर जी, अन्य मंत्रिगण, सांसद, विधायक, अन्य महानुभाव और मेरे प्यारे भाइयों और बहनों।

मैं देख रहा हूं, आज जहां भी मेरी नजर पड़ रही है, सारे युवा मुझे नजर आ रहे हैं, उत्साह से भरे युवा हैं, जोश से भरे हुए युवा हैं, क्योंकि इन युवाओं को पता है, ये जो काम हो रहा है ना, ये नौजवानों के भविष्य को नई उड़ान देने वाला काम हो रहा है। आज हम विकसित यूपी-विकसित भारत अभियान का एक नया अध्याय शुरू कर रहे हैं। देश का सबसे बड़ा प्रदेश, आज देश के सबसे अधिक इंटरनेशनल एयरपोर्ट्स वाले राज्यों में से एक हो गया है। और आज मेरे लिए गर्व और प्रसन्नता के दो कारण हैं। एक तो ये है कि इस एयरपोर्ट का शिलान्यास भी करने का सौभाग्य आप सबने मुझे दिया था और आप सबने इस एयरपोर्ट के उद्धघाटन का सौभाग्य भी मुझे दिया, लेकिन मैंने उस सौभाग्य को आपके साथ बांट दिया और आपके हाथों से उद्धघाटन करवा दिया। दूसरा, जिस उत्तर प्रदेश ने मुझे अपना प्रतिनिधि चुना, जिस उत्तर प्रदेश ने मुझे सांसद बनाया, उसकी पहचान के साथ, उस उत्तर प्रदेश की पहचान के साथ इस भव्य एयरपोर्ट का नाम भी जुड़ गया है।

साथियों,

नोएडा का ये एयरपोर्ट, आगरा, मथुरा, अलीगढ़, गाजियाबाद, मेरठ, इटावा, बुलंदशहर, फरीदाबाद, इस पूरे क्षेत्र को बहुत बड़ा लाभ होने वाला है। हिन्दुस्तान को और उत्तर प्रदेश को तो होना ही होना है। ये एयरपोर्ट पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसानों, छोटे और लघु उद्योगों, यहां के नौजवानों के लिए, अनेक नए अवसर लेकर आने वाला है। यहां से दुनिया के लिए विमान तो उड़ेंगे ही, साथ ही, ये विकसित उत्तर प्रदेश की उड़ान का भी प्रतीक बनेगा। मैं उत्तर प्रदेश को, विशेष रूप से पश्चिम उत्तर प्रदेश की जनता को इस भव्य एयरपोर्ट के लिए बहुत-बहुत बधाई देता हूं।

साथियों,

आज का ये कार्यक्रम, भारत के नए मिज़ाज का प्रतीक है। आप सभी देख रहे हैं कि आज पूरा विश्व कितना चिंतित है। पश्चिम एशिया में एक महीने से युद्ध चल रहा है। युद्ध की वजह से कई सारे देशों में खाने-पीने के सामान, पेट्रोल-डीज़ल-गैस, खाद, ऐसी कई ज़रूरी चीज़ों का चारो तरफ संकट पैदा हो गया है। हर देश इस संकट का सामना करने के लिए कुछ न कुछ कोशिश कर रहा है, प्रयास कर रहा है। और हमारा भारत भी इस संकट का पूरी शक्ति से मुकाबला कर रहा है, देशवासियों की ताकत के भरोसे कर रहा है। भारत तो बहुत बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और गैस, ये जहां युद्ध चल रह है ना, इस युद्ध से प्रभावित इलाके से मंगाता रहा है। इसलिए सरकार हर वो कदम उठा रही है, जिससे सामान्य परिवारों पर, हमारे किसान भाई-बहनों पर, इस संकट का बोझ न पड़े।

साथियों,

संकट के इस समय में भी, भारत ने अपने तेज़ विकास को निरंतर जारी रखा है। मैं सिर्फ पश्चिमी उत्तर प्रदेश की ही बात करुं, तो पिछले कुछ सप्ताह में ही, ये चौथा बड़ा प्रोजेक्ट है, जिसका शिलान्यास या लोकार्पण हुआ है। इन कुछ ही सप्ताह में, इस दौरान नोएडा में बहुत बड़ी सेमीकंडक्टर फैक्ट्री का शिलान्यास हुआ, इसी कालखड में देश की पहली दिल्ली-मेरठ नमो-भारत ट्रेन ने गति पकड़ी, इसी कालखंड में मेरठ मेट्रो का विस्तार किया गया, और इतने कम समय में आज नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का आप सबके हाथों से उद्धघाटन भी हो गया।

साथियों,

ये सारे प्रोजेक्ट्स, यूपी के विकास के लिए, डबल इंजन सरकार के प्रयासों का शानदार उदाहरण हैं। सेमीकंडक्टर फैक्ट्री, भारत को टेक्नोलॉजी में आत्मनिर्भर बना रही है। मेरठ मेट्रो और नमो भारत रेल, तेज और स्मार्ट कनेक्टिविटी दे रही है। और ये हमारा जेवर एयरपोर्ट, पूरे उत्तर भारत को दुनिया से जोड़ रहा है। और आपने अभी वीडियो में देखा, ये ऐसा एयरपोर्ट बन रहा है, हर दो मिनट में एक जहाज उड़ेगा, हर दो मिनट में एक जहाज उड़ेगा। पहले सपा वालों ने नोएडा को अपनी लूट का ATM बना लिया था। लेकिन आज भाजपा सरकार में वही नोएडा, यूपी के विकास का सशक्त इंजन बन रहा है।

साथियों,

जेवर का ये एयरपोर्ट, डबल इंजन सरकार की कार्यसंस्कृति का भी बहुत अच्छा उदाहरण है। अब आप सोचिये, इस एयरपोर्ट को अटल बिहारी वाजपेयी जी की सरकार ने 2003 में ही फाइल में मंजूरी दे दी थी। 2003 में, आपमें से बहुत होंगे जिसका जन्म नहीं हुआ होगा, बहुत वो लोग होंगे जो उस समय 25-30 साल के 35 साल के हुए होंगे और आज रिटायर भी हो गए, लेकिन एयरपोर्ट नहीं बना। लेकिन केंद्र में कांग्रेस और यहां की पहले की सरकारों ने सालों तक इस एयरपोर्ट की नींव तक नहीं पड़ने दी। 2004 से 2014 तक ये एयरपोर्ट फाइलों में ही दबा रहा। जब हमारी सरकार बनी तो यूपी में सपा की सरकार थी। शुरु के दो-तीन सालों में सपा वालों ने इस पर काम नहीं होने दिया। लेकिन जैसे ही यहां भाजपा-NDA की सरकार बनी, दिल्ली में भाजपा-एनडीए की सरकार बनी, तो जेवर एयरपोर्ट की नींव भी पड़ी, निर्माण भी हुआ और अब ये शुरु भी हो गया है।

साथियों,

एयरपोर्ट के अलावा ये क्षेत्र देश के दो बड़े फ्रेट कॉरिडोर्स का भी हब बन रहा है। ये फ्रेट कॉरिडोर मालगाड़ियों के लिए बिछाई गई स्पेशल पटरियां हैं। इससे उत्तर भारत की बंगाल और गुजरात के समंदर से कनेक्टिविटी बेहतर हो गई है। और दादरी वो स्थान है जहां ये दोनों कॉरिडोर्स आपस में मिलते हैं। यानी यहां किसान जो उगाते हैं, यहां उद्योग जो कुछ बनाते हैं, वो जमीन से, हवाई मार्ग से, दुनिया के कोने-कोने तक तेज़ी से जा पाएगा। ऐसी मल्टी-मोडल कनेक्टिविटी के कारण, यूपी दुनियाभर के निवेशकों के लिए बहुत बड़ा आकर्षण बन रहा है।

साथियों,

जिस नोएडा को पहले अंधविश्वास के कारण अपने हाल पर छोड़ दिया गया था, कुर्सी जाने के डर से पहले के सत्ताधारी यहां आने से डरते थे, मुझे याद है यहां की सपा सरकार थी और मैंने नोएडा आने का कार्यक्रम बनाया, तो मुख्यमंत्री इतने डरे हुए थे कि वो उस कार्यक्रम में नहीं आए और मुझे भी डराने की लोगों ने कोशिश की, कि नोएडा मत जाओ मोदी जी, अभी-अभी प्रधानमंत्री बने हो। मैंने कहा इस धरती का आशीर्वाद लेने जा रहा हूं, जो मुझे लंबे अर्से तक सेवा करने का मौका देगा। अब वही इलाका पूरी दुनिया का स्वागत करने के लिए तैयार है। ये पूरा क्षेत्र, आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को सशक्त कर रहा है।

साथियों,

इस क्षेत्र की अर्थव्यवस्था में, खेती-किसानी का बहुत महत्व है। मैं आज उन मेरे किसान भाई-बहनों का विशेष रूप से आभार व्यक्त करता हूं, जिन्होंने इस प्रोजेक्ट को साकार करने के लिए अपनी जमीनें दी है। उन किसानों के लिए जोरदार तालियां बजाइये दोस्तों, मेरे किसान भाई-बहनों के लिए जोरदार तालियां बजाइये। मेरे किसान भाई-बहन, आपके इस योगदान से ही, इस पूरे क्षेत्र में विकास का एक नया दौर शुरु होने जा रहा है। आधुनिक कनेक्टिविटी का जो विस्तार यहां हो रहा है, उससे पश्चिमी यूपी में फूड प्रोसेसिंग की संभावनाओं को और बल मिलेगा। अब यहां के कृषि उत्पाद दुनिया के बाज़ारों में और बेहतर तरीके से जा पाएंगे।

साथियों,

यहां मैं अपने किसान साथियों का एक और बात के लिए भी आभार व्यक्त करना चाहता हूं। आपके गन्ने से जो इथेनॉल बनाया गया है, उससे कच्चे तेल, कच्चे तेल पर देश की निर्भरता कम हुई है। अगर इथेनॉल का उत्पादन ना बढ़ता, पेट्रोल में उसकी ब्लेंडिंग ना बढ़ती, तो देश को हर वर्ष साढ़े चार करोड़ बैरल, साढ़े चार करोड़ बैरल यानी लगभग 700 करोड़ लीटर कच्चा तेल विदेशों से मंगवाना पड़ता। किसानों के परिश्रम ने देश को इस संकट के समय में इतनी बड़ी राहत दी है।

साथियों,

इथेनॉल से देश को तो फायदा हुआ ही है, किसानों को भी बहुत बड़ा लाभ हुआ है। इससे करीब डेढ़ लाख करोड़ रुपए की विदेशी मुद्रा बची है। यानी इथेनॉल न बनाते तो ये पैसा विदेश जाना जय था। बीते वर्षों में इतना सारा पैसा, देश के किसानों को मिला है, गन्ना किसानों को मिला है।

साथियों,

यहां के गन्ना किसानों ने तो पहले के वो दिन भी देखे हैं, जब कई-कई सालों तक गन्ने का बकाया लटका रहता था। लेकिन आज भाजपा की डबल इंजन सरकार के प्रयासों से गन्ना किसानों की स्थिति बेहतर हुई है।

साथियों,

किसी भी देश में एयरपोर्ट सिर्फ एक सामान्य सुविधा नहीं होता। ये एयरपोर्ट प्रगति को भी उड़ान देते हैं। साल 2014 से पहले, देश में सिर्फ 74 एयरपोर्ट थे। आज 160 से अधिक एयरपोर्ट्स देश में हैं। अब महानगरों के अलावा, देश के छोटे-छोटे शहरों में भी हवाई कनेक्टिविटी पहुंच रही है। पहले जो सरकारें रही हैं, वे मानती थीं कि हवाई यात्रा सिर्फ अमीरों के लिए ही होनी चाहिए। लेकिन भाजपा सरकार ने, सामान्य भारतीय के लिए हवाई यात्रा को आसान बना दिया है। हमारी सरकार ने उत्तर प्रदेश में हवाई अड्डों के नेटवर्क का तेज़ी से विस्तार करते हुए उनकी संख्या बढ़ाकर सत्रह कर दी है।

साथियों,

भाजपा सरकार का निंरतर प्रयास रहा है कि एयरपोर्ट भी बने और किराया-भाड़ा भी सामान्य परिवारों की पहुंच में रहे। इसलिए, हमने उड़ान योजना शुरु की थी। इस स्कीम के कारण, बीते कुछ सालों में एक करोड़ साठ लाख से अधिक देशवासियों ने उड़ान योजना से टिकट लेकर सस्ती दरों पर हवाई यात्रा की है। और मैं आपको एक और जानकारी देना चाहता हूं। हाल में ही केंद्र सरकार ने उड़ान योजना को और विस्तार दिया है। इसके लिए लगभग 29 हज़ार करोड़ रुपए की स्वीकृति दी गई है। आने वाले वर्षों में इसके तहत, छोटे-छोटे शहरों में 100 नए एयरपोर्ट और 200 नए हेलीपैड बनाने की योजना है। यूपी को भी इससे बहुत अधिक लाभ होगा।

साथियों,

भारत का एविएशन सेक्टर, बहुत तेज़ से गति और विकास कर रहा है। जैसे-जैसे भारत में नए-नए एयरपोर्ट बन रहे हैं, वैसे-वैसे नए हवाई जहाज़ों की ज़रूरत भी बढ़ती जा रही है। इसलिए देश की अलग-अलग एयरलाइन्स ने सैकड़ों नए जहाजों के ऑर्डर दिए हैं। ये जो नई सुविधाएं हैं, नए जहाज आ रहे हैं, इनको उड़ाने वाले, इनमें सर्विस देने वाले, मेंटनेस से जुड़े, ऐसे हर काम के लिए बहुत बड़ी संख्या में वर्कफोर्स की ज़रूरत रहेगी। ये युवाओं के लिए बहुत बड़ा अवसर है। इसलिए हमारी सरकार, एविएशन सेक्टर में ट्रेनिंग की सुविधाओं का भी विस्तार कर रही है।

साथियों,

आप जब अपनी कोई गाड़ी खरीदते हैं, तो ये जरूर देखते हैं कि उस गाड़ी बनाने वाली कंपनी का सर्विसिंग सेंटर आसपास है या नहीं है। आप जानकर हैरान हो जाएंगे कि हमारे देश में हवाई जहाजों की सर्विसिंग, यानी उनके मैंटनेंस, रिपेयर एंड ओवरहॉल की पुख्ता व्यवस्थाएं ही नहीं थीं। भारत के 85 एयरपोर्ट, 85 परसेंट हवाई जहाजों को आज भी मैंटनेंस, रिपेयर एंड ओवरहॉल यानी MRO के लिए, इस काम के लिए विदेश भेजना पड़ता है। इसलिए हमारी सरकार ने ठाना है कि MRO सेक्टर में भी भारत को आत्मनिर्भर बनाएंगे। अब भारत में ही, बहुत बड़े पैमाने पर MRO सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। आज यहां जेवर में भी MRO सुविधा का शिलान्यास हुआ है। ये सुविधा जब तैयार हो जाएगी, तो ये देश-विदेश के विमानों को सेवा देगी। इससे देश को कमाई भी होगी, हमारा पैसा भी देश में ही रहेगा, और युवाओं को अनेक रोजगार भी मिलेंगे।

साथियों,

आज हमारी सरकार की प्राथमिकता देश के नागरिकों की सुविधा है। देश के नागरिक का समय बचे और उसकी जेब पर ज्यादा बोझ भी न पड़े, ये हमारा लक्ष्य है। मेट्रो और वंदे भारत जैसी आधुनिक रेल सेवाओं का इसी भाव से ही विस्तार किया जा रहा है। दिल्ली-मेरठ नमो भारत रेल, इसका कितना फायदा हो रहा है, ये भी हम सब देख रहे हें। अभी तक नमो भारत, ढाई करोड़ से अधिक लोग सफर कर चुके हैं। दिल्ली-मेरठ के जिस सफर में पहले घंटों लग जाते थे, अब वो सफर मिनटों में ही पूरा हो रहा है।

साथियों,

विकसित भारत के विकसित आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमारी सरकार अभूतपूर्व निवेश कर रही है। बीते 11 वर्षों में इंफ्रास्ट्रक्चर का बजट छह गुणा से अधिक बढ़ाया गया है। इन वर्षों में 17 लाख करोड़ रुपये हाईवे और एक्सप्रेसवे पर खर्च किए गए हैं, एक लाख किलोमीटर से अधिक के हाईवे का निर्माण किया गया है। 2014 तक रेलवे में सिर्फ 20 हजार किलोमीटर रूट का बिजलीकरण हुआ था। जबकि 2014 के बाद से 40 हजार किलोमीटर से ज्यादा रेलवे ट्रैक का बिजलीकरण किया गया है। आज ब्रॉडगेज नेटवर्क का लगभग शत-प्रतिशत बिजलीकरण हो चुका है। आज कश्मीर घाटी हो या नॉर्थ ईस्ट की राजधानियां, ये पहली बार रेल नेटवर्क से जुड़ रही हैं। पोर्ट यानी बंदरगाहों की क्षमता, बीते दशक में दोगुने से अधिक हुई है। देश में नदी जलमार्गों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है। विकसित भारत के निर्माण के लिए जरूरी हर क्षेत्र में भारत तेज़ी से काम कर रहा है।

साथियों,

विकसित भारत बनाने के लिए सबका प्रयास बहुत ज़रूरी है। ये आवश्यक है कि 140 करोड़ देशवासी कड़े से कड़ा परिश्रम करे, और वैश्विक संकटों का एकजुट होकर सामना करें। अभी जो युद्ध चल रहा है, इससे पैदा हुए संकटों का सामना कैसे करना है, इसके बारे में मैंने संसद में भी विस्तार से बताया है। मेरी कल देश के सभी मुख्यमंत्रियों से भी लंबी चर्चा हुई है और बड़ी सकारात्मक चर्चा हुई है। मैं आज आप सभी जनता-जनार्दन से फिर कहूंगा, मैं देशवासियों से फिर से कहूंगा। हमें शांत मन से, धैर्य के साथ, एकजुटता के साथ, मिल जुलकर के, इस संकट का सामना करना है। ये पूरे विश्व में परेशानी पैदा करने वाला संकट है। हमें अपने देश की सबसे ज्यादा चिंता करनी है। और यही हम भारतीयों की सबसे बड़ी ताकत है। मैं यूपी के, देश के सभी राजनीतिक दलों से भी आग्रहपूर्वक कहना चाहता हूं, विनती पूर्वक कहना चाहता हूं, इस प्रकार के संकट में ऐसी बातें करने से बचें, जो देश के लिए नुकसानदायक हैं। जो भारतीयों के हक में है, जो भारत के हित में है, वही भारत सरकार की नीति और रणनीति है। राजनीति के लिए गलत बयानबाज़ी करने वाले, राजनीतिक बहस में तो कुछ नंबर पा लेंगे, लेकिन देश को नुकसान पहुंचाने वाली हरकतों को देश की जनता कभी माफ नहीं करती। कोरोना के महासंकट के दौरान भी, कुछ लोगों ने अफवाहें फैलाईं, वैक्सीन को लेकर झूठ बोले, ताकि सरकार का काम मुश्किल हो, देश को नुकसान हो। परिणाम क्या हुआ? जनता ने चुनावों के दौरान ऐसी राजनीति को नकार दिया, ठुकरा दिया। मुझे पूरा भरोसा है, कि देश के सभी राजनीतिक दल भी इससे सबक सीखेंगे और देश के एकजुट प्रयासों को वो बल देंगे, ताकत देंगे। इसी आग्रह के साथ, एक बार फिर से उत्तर प्रदेश को इस शानदार एयरपोर्ट के लिए बहुत-बहुत शुभकामनाएं।

मेरे साथ बोलिये-

भारत माता की जय!

वंदे मातरम्!

वंदे मातरम्!

वंदे मातरम्!

वंदे मातरम्!

वंदे मातरम्!

वंदे मातरम्!

वंदे मातरम्!

वंदे मातरम्!

वंदे मातरम्!

बहुत-बहुत धन्यवाद।