The last five years have witnessed historic transformation of the country with the right government and the right policies in place: PM Modi
Since 2014, millions of ordinary Indians have seen their standards of living getting raised and their aspirations finding a voice in this government: Prime Minister Modi0
The Congress shies away from discussing about national security and terrorism due to their votebank politics. However, we believe in giving nation’s security the highest priority: PM Modi in H.P.

भारत माता की… जय, भारत माता की जय।

सबसे पहले, मुझे आने में देर हो गई, आप लोगों को इंतजार करना पड़ा, मैं आप सब से क्षमा मांगता हूं। मंच पर विराजमान यहां के लोकप्रिय मुख्यमंत्री जी, भूतपूर्व मुख्यमंत्री गण, सभी वरिष्ठ नेता गण, इस चुनाव में हमारे उम्मीदवार और विशाल संख्या में हम सब को आशीर्वाद देने के लिए आए हुए मंडी, कुल्लू, रामपुर, किन्नौर, लाहौल, स्पीति, भरमौर और आस-पास के क्षेत्रों से आए सभी साथियों को नमस्कार।

साथियो, मंडी का ये लोकसभा क्षेत्र विराट है। आप बहुत दूर-दूर से यहां सफर कर के आए हैं। आपका ये जोश हम सभी के लिए, आपका ये प्यार मुझे अभिभूत कर देता है। ये मेरा सौभाग्य रहा है की हिमाचल में चप्पे-चप्पे से जुड़ने का मुझे अवसर मिला है। हिमाचल ने हमेशा मेरा बहुत ख्याल रखा है और इसलिए जब भी आपके बीच आता हूं तो कई पुरानी बातें, किस्से फिर से याद आ जाती हैं, उन दिनों में खो जाता हूं। साथियो, आज जब दिल्ली से चलने वाला था तो मुझे बताया गया की मंडी में आज मौसम शायद परेशान कर सकता है, बारिश हो सकती है, हेलिकॉप्टर उतरने में परेशानी हो सकती है तो मैं मन में ऐसे ही सोच रहा था, अफसर लोग मुझे बता रहे थे। लेकिन अगर बिजली महादेव चाहेंगे तो मोदी जरूर पहुंचेगा और सभा भी करेगा। बिजली महादेव के दर्शन के साथ भी एक पुराना वाक्या भी जुड़ा हुआ है।

साथियो, मुझे याद है एक बार जब मैं बिजली महादेव के दर्शन के लिए गया था तो अचानक से भारी बारिश हो गई। अच्छा मैं भी बिना किसी तैयारी के निकलता हूं, आदत भी वैसी है क्योंकि अक्सर इस इलाके में घूमते हुए जैसे ही बिजली महादेव का नाम सोचता था तो मैं निकल पड़ता था की फिर एक बार दर्शन कर के आते हैं। और उस जमाने में आज जैसे रास्ते भी नहीं थे, एक तरह से ट्रैकिंग कर के ही मंदिर तक पहुंचना होता था। पहाड़ों की तेज हवाओं में छाते का तो कोई मतलब ही नहीं था। ऐसे ही समय में एक बार जब बिजली महादेव जाना हुआ और जोर की बारिश हुई तब वहां थोड़ी दूरी पर एक चाय वाले सज्जन थे, छोटा सा तिरपाल लगाकर अपनी दुकान चलाते थे तो मैं वहीं उसी तिरपाल के नीचे 3-4 घंटे तक बैठा रहा, बारिश रुकने तक का इंतजार करता रहा और गर्म-गर्म चाय भी पीता रहा। मुझे किसी ने बताया की वो चाय वाले सज्जन आज भी अपने इस चाय वाले को याद करते हैं। मैं भी उन्हें याद करता हूं और आप के माध्यम से उन्हें नमस्कार पहुंचाता हूं।

भाइयो-बहनो, जब मैं आप के बीच यहां आऊं और सेपू-बड़ी की याद ना आए, ये हो नहीं सकता। अभी तो आपके सांसद जब भी आते थे तो थोड़ी बहुत लेकर आते थे। और जब मैं यहां रहता था परिवारों में खाना खाने के लिए जाता था तो जिन-जिन घरों में जाता था तो मैंने देखा था की सेपू-बड़ी मुझे बराबर खिलाया करते थे लेकिन अब अगली बार आऊंगा तो पैक कर के ले जाऊंगा। हिमाचल के लोगों की आत्मीयता, उनका अपनापन मेरे जीवन के वो पल हैं जो हमेशा मेरे साथ रहेंगे और कभी अटल जी के साथ आता था तो कई दिनों तक एक साथ रहने का मौका मिल जाता था। भाइयो-बहनो, 2014 में आपने चारों सीटों पर कमल खिलाए, चार की चार, फिर 2017 में आपने भरपूर प्यार दिया। अब आज फिर आपसे अपने लिए आशीर्वाद मांगने आया हूं और हिमाचल के तो चप्पे-चप्पे का मुझ पर अधिकार है और मेरा भी हिमाचल के हर इंसान पर अधिकार है, प्यार का। है कि नहीं है? आपका आशीर्वाद बना रहेगा ना?

साथियो, आपके ही आशीर्वाद से बीते पांच वर्ष में भारत हर प्रकार से तरक्की के नए रास्ते तय कर रहा है। आज पूरी दुनिया भारत की ताकत का लोहा मान रही है। भाइयो-बहनो, मुझे एहसास है की जब पुलवामा में हमारे जवान शहीद हुए थे तो हिमाचल के चप्पे-चप्पे में आक्रोश था और मैं आवाज सुनता था यहां से अरे मोदी जी आप तो हमारे हो, इंतजार किस चीज का करते हो, डांटते थे मुझे। हिमाचल के लोगों को मैंने वो हक दिया हुआ है। आप सभी चाहते थे की भारत आतंकी और उनके आकाओं को सजा दे। चाहते थे ना? आपके इस चौकीदार ने आपकी आवाज, आपकी भावनाओं की कद्र की और अपने वीर जवानों को सीमा पार करके आतंकियों को सजा देने की खुली छूट दे दी। आतंकी जहां ट्रेनिंग ले रहे थे, भारत पर हमले की साजिश कर रहे थे वहां हमारे वीर-जवानों ने घर में घुसकर उनको मारा। यही परिवर्तन भारत की शक्ति में बीते पांच वर्ष में आया है। भाइयो-बहनो, पूरे देश को भारत की शक्ति पर गर्व है लेकिन कांग्रेस के लोग, उनको ये पच नहीं रहा है। उनको हमारे देश के वीर सपूतों पर भरोसा नहीं है।

साथियो, 2016 में आपने देखा की हमारे वीर सपूतों ने सर्जिकल स्ट्राइक की तो कांग्रेस के नामदार ने पाकिस्तान के बजाए मुझे गालियां देना शुरू कर दिया। इस साल भी फरवरी में एयर स्ट्राइक के बाद, कांग्रेस के नामदार और उनके रागदरबारी फिर एक बार मोदी को गाली देने में जुटे हुए हैं। भाइयो-बहनो, कांग्रेस और उसके महामिलावटी साथी कैसी राजनीति करना चाहते हैं, ये भी आपको जानना बहुत जरूरी है। कांग्रेस कहती है की अलगाववादियों से बातचीत होनी चाहिए, देशद्रोह का कानून खत्म होना चाहिए, सैनिकों को मिला विशेष अधिकार, एक रक्षा कवच है वो खत्म होना चाहिए। मैं जरा मंडी में इतने बड़े जन सागर को सवाल पूछना चाहता हूं। आप जवाब देंगे? ऐसी मरी-मरी जवाब मंडी की नहीं होती है। अरे फोटो नहीं दिखानी है, जवाब दोगे क्या, मान लिया फोटो हर एक के पास है।

भाइयो-बहनो, मैं आपसे पूछना चाहता हूं, जो भारत के टुकड़े करने और हमारे जवानों को लाचार करने की साजिश करते हैं क्या उनकी जमानत जब्त होनी चाहिए कि नहीं? उनको सजा होनी चाहिए कि नहीं होनी चाहिए? हिमाचल की धरती से ऐसे दल और दल की विचारधारा को हमेशा-हमेशा के लिए विदाई देनी चाहिए कि नहीं देनी चाहिए?

भाइयो-बहनो, कांग्रेस और उससे जुड़े लोग, हमारे वीर जवानों और उनके परिवारों के लिए कैसी सोच रखते हैं। भाइयो-बहनो, ये हिमाचल वीर माताओं-बहनों की भूमि है, वीरों की भूमि है। यहां की माताएं वीर संतानों को जन्म देती हैं, जो देश के लिए जीते हैं और देश के लिए मरते हैं। शायद ही कोई ऐसा परिवार होगा जिसका बेटा सीमा पर मातृभूमि की रक्षा ना करता हो, देश के लिए खड़ा ना हो। लेकिन साथियो, मैं नहीं जानता हूं कि हिमाचल के मीडिया ने ये बात छापी है कि नहीं छापी है, मैं ये भी नहीं जानता हूं की हिमाचल के टीवी वीडियो वालों ने भी कभी इसको दिखाया कि नहीं दिखाया लेकिन ये बहुत गंभीर बात है जो मैं आपको बताना चाहता हूं।

साथियो, कर्नाटक में अभी चुनाव हुआ, एक-आध साल हुआ। कर्नाटक में कांग्रेस ने जिसे मुख्यमंत्री बनाया है और ये ऐसे मुख्यमंत्री हैं कर्नाटक के की उनके पिताजी कभी भारत के प्रधानमंत्री थे, भले टंपरेरी लेकिन थे। उनके मुख्यमंत्री ने क्या कहा, उन्होंने कुछ दिन पहले कहा की सेना में वही जाता है जो भूखा मरता है, जिसके पास, सुनिए अभी तो सुनिए। ये कैसे लोग हैं और जिसको कांग्रेस का मुख्यमंत्री बनाया है और ये शब्द मुख्यमंत्री के हैं। उन्होंने कहा, जिसके पास पेट भरने के लिए कुछ नहीं होता वो सेना में जाता है। आप मुझे बताइए, मैं आपके गुस्से का इंतजार करता हूं, दोस्तों। आप मुझे बताइए, क्या हिमाचल की बहादुर मां अपने बेटे को इसलिए फौज में भेजती है की वो उसे दो टाइम की रोटी नहीं खिला पाती। ये आपका अपमान है कि नहीं है, हर माता का अपमान है कि नहीं है? यहां के वीरों का अपमान है कि नहीं है? क्या हिमाचल के वीर जवान इसलिए फौज में जाते हैं क्योंकि उनके पास खाने के लिए कुछ नहीं होता। सेना में जाने वालों का ऐसा अपमान करने वालों को कांग्रेस सम्मान देती है, उन्हें मुख्यमंत्री बनाती है और आप ये भी कभी मत भूलिएगा की यहां की कांग्रेस और उसके महामिलावटी साथी हैं जो देश के सेनाध्यक्ष को पब्लिकली गली का गुंडा कहते हैं, जो वायु सेना के अध्यक्ष को झूठा कहते हैं। भाइयो-बहनो, सेना के वीर-जवानों के अपमान की आदत कांग्रेस को हमेशा से रही है लेकिन चाहे देश की सुरक्षा हो या फिर हमारे जवानों का सम्मान, आपका ये चौकीदार चौकन्ना है। जिस वन रैंक-वन पेंशन को कांग्रेस ने चार दशकों से लटका रखा था वो भारतीय जनता पार्टी की सरकार द्वारा ही लागू किया गया है। और ये कैसे झूठ बोलते हैं, कैसे आंख में धूल झोंकते हैं ये बड़ा नमूनेदार है उनका काम, आप सुनोगे, समझोगे तो चौंक जाओगे, दोस्तों। इतना बड़ा वन रैंक-वन पेंशन का मसला, 40 साल से देश के जवान मांग कर रहे थे लेकिन जब चुनाव आया 2014 का तो अंतरिम बजट आया तो इन्होंने क्या किया, देश के जवानों के साथ धोखा किया। टोकन 500 करोड़ रुपया लिख दिया वन रैंक-वन पेंशन के लिए। क्योंकि हमने चुनाव में वादा किया था और मंडी में मेरी सभा में बहुत विस्तार से कहा था उस समय, 2014 में। उन्होंने 500 करोड़ रुपया रख दिया और जाकर मालाएं पहन रहे थे। यहां पर उन्होंने, हिमाचल में भी पूर्व सैनिकों के, उनके दरबारियों को बुला कर के, 15 लोग ही आए थे ज्यादा नहीं आए थे क्योंकि यहां के सेना के जवान जागरूक हैं, किसी को कोई खरीद नहीं सकता इन जवानों को, वो मरने के लिए तैयार होते हैं लेकिन किसी के टुकड़ों पर पलने के लिए तैयार नहीं होते हैं, मैं हिमाचल के जवानों को जानता हूं। भाइयो-बहनो, इन 12-15 जवानों को इकट्ठा किया मालाएं पहनाईं और टीवी पर 24 घंटे दिखा रहे थे की वन रैंक-वन पेंशन हो गया।

भाइयो-बहनो, जब मैं आया और मैंने काम शुरू किया तो इनके पास पेंशन की सूची का भी ठिकाना नहीं था। देश के लिए मर मिटने वाले लोग, रिटायर हुए, उनका दफ्तर भी ठिकाना नहीं था। मुझे वो सारा ठीक करना पड़ा, कुछ लोग नेपाल में भी हैं, उनका भी ठीक करना पड़ा और ये 500 करोड़, आपके वोट छीन कर ले गए। मुझे अब तक वन रैंक-वन पेंशन में हमारे फौजी परिवारों को 35 हजार करोड़ रुपया मैंने पहुंचाया, कहां 500 करोड़ और कहां 35 हजार करोड़, ऐसा झूठ बोलने की इनकी आदत है। क्या ऐसे लोगों को माफ करोगे?

बरसों से कांग्रेस सरकार ने हमारे जवानों को बुलेटप्रूफ जैकेट के लिए तरसा रखा था। और जवान को बुलेटप्रूफ जैकेट ना मिलना मतलब हिमाचल की मेरी मां को रात में नींद नहीं आना, ये मतलब होता है। मां को चिंता रहती है की बेटा कैसे लौट के कब आएगा, इनको परवाह नहीं थी। भाइयो-बहनो, इतनी बड़ी कमी, हमारी सरकार बनने के बाद हमने उसे पूरा किया। भाइयो-बहनो, मंडी सहित हिमाचल के अनेक क्षेत्रों में हमारे सिख बंधु हमारी अर्थव्यवस्था को मजबूती दे रहे हैं। छोटे-मोटे व्यापारी, मैं मंडी आता था कभी कुछ खाने का मन कर जाए तो चला जाता था गुरुद्वारे पर। यहां इतना बड़ा योगदान है सिख परिवारों का। मैं उनको याद दिलाने आया हूं की कांग्रेस के नामदारों के कारण जो पाप 1984 में हुआ, उसका न्याय देने का काम हमारी सरकार कर रही है। पहली बार सिख दंगों में न्याय हुआ है, दोषियों को फांसी की सजा तक हो चुकी है। सिख दंगों पर कांग्रेस की क्या सोच रही है, ये उसने फिर कल सार्वजनिक की है। टीवी के सामने बोला है, कोई इधर-उधर की बात नहीं है। कांग्रेस ने कहा की सिख दंगा हुआ तो हुआ, सिखों का कत्लेआम हुआ तो हुआ, इतना अहंकार, इतनी संवेदनहीनता। भाइयो-बहनो, जिनके जरा भी परवाह नहीं है, जिनका अहंकार सातवें आसमान पर पहुंचा है ऐसे लोगों के जितनी सजा दी जाए वो कम है, भाइयो-बहनो।  

भाइयो-बहनो, वंशवाद और भ्रष्टाचार को जिस तरह कांग्रेस ने राष्ट्रीय राजनीति का हिस्सा बनाया, उसकी जड़े यहां हिमाचल में भी मजबूत की हैं। लेकिन 21वीं सदी का युवा भारत कुछ परिवारों के इस गिरोह से हिमाचल को भी मुक्ति दिला कर रहेगा। साथियो, टेररिज्म जहां दुनिया के तोड़ता है वहीं टूरिज्म दुनिया को जोड़ता है, टेररिज्म डिवाइड्स-टूरिज्म युनाइट्स। भाइयो-बहनो, मुझे याद है, मनाली में जो सोलांग वैली है वहां पर कितने टूरिस्ट आते हैं पैराग्लाइडिंग करने के लिए। मुझे भी जब पहले मौका मिलता था तो वहां जाकर पैराग्लाइडिंग मैं भी कर लेता था और मेरे जो ट्रेनर थे भाई रोशन ठाकुर, पता नहीं अब तो बहुत साल हो गए, मिला नहीं हूं मैं। रोशन ठाकुर से मैंने पैराग्लाइडिंग से जुड़ी बहुत सारी बाते सीखीं थीं। और मैंने सुना है उनकी बेटी ने इंटरनेशनल गेम में उसने भारत को अवार्ड दिलाया है उसने, मैंने उस दिन ट्वीट भी किया था। तब तो मुझे मालूम नहीं था की वो रोशन जी की बेटी है लेकिन बाद में उसने लिखा की मोदी जी आपको पता नहीं होगा, मैं रोशन की बेटी हूं, तो मुझे और आनंद हो गया। देखिए देश के प्रधानमंत्री का नाता कैसा होना चाहिए, नमूना है जी, रोशन की बेटी कहीं नाम ले के आ जाए और भारत के प्रधानमंत्री का सीना फूल जाए। लेकिन अब क्या करें आप लोगों ने मुझे ऐसा काम दे दिया है की अब मौका मुझे मिलता नहीं है। वो हिमाचल की जो खुशी भरी मेरी जिंदगी थी अब मैं उसमें समय नहीं दे पा रहा हूं लेकिन हिमाचल के आसमान में जो उड़ान, उसका रोमांच मैं कभी नहीं भूल सकता। यहां हिमाचल प्रदेश में टूरिज्म की संभावनाओं को और बढ़ाने के लिए भाजपा सरकार यहां के इंफ्रास्ट्रक्चर पर अभूतपूर्व काम कर रही है। गांव की सड़कें हों, हाईवे हो, रेल हो या फिर उड़ान योजना के तहत हवाई सेवा, पूरी निष्ठा के साथ विकास करने का प्रयास मैंने किया है। बिलासपुर-लेह रेललाइन सहित अनेक रेलवे प्रजेक्ट्स को यहां तेजी से पूरा किया जा रहा है। अटल जी ने जिस रोहतांग टनल का शिलान्यास किया था उस पर भी अब काम तकरीबन पूरा हो चुका है और 23 मई को चुनाव का नतीजा आएगा, 23 मई को इस समय तक चुनाव का नतीजा आ गया होगा। 23 मई को चुनाव का नतीजा आएगा तो फिर एक बार मोदी सरकार, तो उसके बाद इस टनल के उद्घाटन के लिए मैं ही आने वाला हूं।

साथियो, मोबाइल फोन कनेक्टिविटी भी हिमाचल प्रदेश के चप्पे-चप्पे तक पहुंच रही है। कनेक्टिविटी पर इतना जोर इसलिए दिया जा रहा है ताकि टूरिज्म इंडस्ट्री को लाभ मिल सके। साथियो, पर्यटन क्षेत्र जितना मजबूत होता है उतना ही स्थानीय अर्थव्यवस्था को फायदा पहुंचता है। चाहे हस्तशिल्प से जुड़े लोग हो, चाहे होटल इंडस्ट्री से जुड़े लोग हों, चाहे छोटे-छोटे दुकानदार हों, चाय वाले हों सब को बढ़ते हुए टूरिस्ट से फायदा होता है। जीएसटी के बाद खाने-पीने पर जो टैक्स कम हुआ है उसका लाभ भी होटल इंडस्ट्री को हो रहा है।

साथियो, पर्यटन बढ़ाने के सरकार के तमाम प्रयासों की वजह से ही देश में आने वाले विदेशी पर्यटकों की संख्या एक करोड़ के पार हो गई है। जब ये पर्यटक बढ़ते हैं तो देश में आने वाली विदेशी मुद्रा भी बढ़ती है। बीते चार-पांच साल में इसमें भी करीब 50 प्रतिशत बढ़ोतरी हुई। इतना ही नहीं भाजपा सरकार के दौरान देश में स्वीकृत होटलों की संख्या भी 50 प्रतिशत वृद्धि हुई है। साथियो, किसानों के काते में आ रही सीधी मदद हो, आयुष्मान भारत के तहत मिल रहा मुफ्त इलाज हो या फिर बहनों को मिल रही रसोई गैस हो, सबको सुरक्षा-सबको सम्मान का हमारा काम जारी रहेगा। आपको पूरी शक्ति से कमल खिलाना है, जब आप कमल के निशान पर बटन दबाओगे तो आपका वोट सीधा मोदी के खाते में आएगा। भाइयो-बहनो, फिर से एक बार आप इतनी बड़ी तादाद में आशीर्वाद देने के लिए आए, प्यार बरसाने आए और मेरे अपने घर में मुझे ऐसा मान-सम्मान मिलता है मेरा ताकत भी बहुत बढ़ जाती है। हिमाचल ने मुझे वो ताकत दी है। अपनेपन से जैसे घर के एक बेटे को संभालते हैं वैसे हिमाचल ने मुझे संभाला है और आपने जो मेरे पर विश्वास किया है। पांच साल में मेरे हिमाचल को कभी नीचा ना देखना पड़े ऐसा एक काम नहीं किया। ये आपके आशीर्वाद के कारण है, ये आपके साथ मिले संस्कारों के कारण है। इन सबके साथ मैं उंगली पकड़ कर सीखा हूं जी, ये सब बड़े-बड़े लोग रहे मेरे सामने, उन्होंने मुझे उंगली पकड़कर चलाया है। ऐसे लोगों के बीच जब आया हूं, मुझे विश्वास है आपका प्यार बना रहेगा। और आपने 14 जिताया, 17 जिताया, 19 में हैट्रिक करने की जिम्मेदारी आपकी है।  

मेरे साथ बोलिए… भारत माता की जय, भारत माता की जय, भारत माता की जय।

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This is the New India that leaves no stone unturned for development: PM Modi
March 23, 2026
Today, India is moving forward with a new confidence; Now India faces challenges head-on: PM
From the Gulf to the Global West and from the Global South to neighbouring countries, India is a trusted partner for all: PM
What gets measured gets improved and ultimately gets transformed: PM
This is the new India, It is leaving no stone unturned for development: PM

नमस्कार!

पिछले कुछ समय में मुझे एक-दो बार टीवी9 भारतवर्ष देखने का मौका मिला है। नॉर्मली भी युद्धों और मिसाइलों पर आपका बहुत फोकस होता है और आजकल तो आपको कंटेंट की ओवरफीडिंग हो रही है। बड़े-बड़े देश टीवी9 को इतना सारा कंटेंट देने पर तुले हुए हैं, लेकिन On a Serious Note, आज विश्व जिन गंभीर परिस्थितियों से गुजर रहा है, वो अभूतपूर्व है और बेहद गंभीर है। और इन स्थितियों के बीच, आज टीवी-9 नेटवर्क ने विचारों का एक बेहद महत्वपूर्ण मंच बनाया है। आज इस समिट में आप सभी India and the world, इस विषय पर चर्चा कर रहे हैं। मैं आप सबको बधाई देता हूं। इस समिट के लिए अपनी शुभकामनाएं देता हूं। सभी अतिथियों का अभिनंदन करता हूं।

साथियों,

आज जब दुनिया, conflicts के कारण उलझी हुई है, जब इन conflicts के दुष्प्रभाव पूरी दुनिया पर दिख रहे हैं, तब India and the world की बात करना बहुत ही प्रासंगिक है। भारत आज वो देश है, जिसकी अर्थव्यवस्था तेजी से आगे बढ़ रही है। 2014 के पहले की स्थितियों को पीछे छोड़कर के आज भारत एक नए आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है। अब भारत चुनौतियों को टालता नहीं है बल्कि चुनौतियों से टकराता है। आप बीते 5-6 साल में देखिए, कोरोना की महामारी के बाद चुनौतियां एक के बाद एक बढ़ती ही गई हैं। ऐसा कोई साल नहीं है, जिसने भारत की, भारतीयों की परीक्षा न ली हो। लेकिन 140 करोड़ देशवासियों के एकजुट प्रयास से भारत हर आपदा का सामना करते हुए आगे बढ़ रहा है। इस समय युद्ध की परिस्थितियों में भी भारत की नीति और रणनीति देखकर, भारत का सामर्थ्य देखकर दुनिया के अनेकों देश हैरान हैं। हमारे यहां कहावत है, सांच को आंच नहीं। 28 फरवरी से दुनिया में जो उथल-पुथल मची है, इन कठोर विपरीत परिस्थितियों में भी भारत प्रगति के, विकास के, विश्वास के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है। इन 23 दिनों में भारत ने अपनी Relationship Building Capacity दिखाई है, Decision Making Capacity दिखाई है और Crisis Management Capacity दिखाई है।

साथियों,

आज जब दुनिया इतने सारे खेमों में बंटी हुई है, भारत ने अभूतपूर्व और अकल्पनीय bridges बनाए हैं। Gulf से लेकर Global West तक, Global South से लेकर पड़ोसी देशों तक भारत सभी का trusted partner है। कुछ लोग पूछते हैं, हम किसके साथ हैं? तो उनको मेरा जवाब यही है कि हम भारत के साथ हैं, हम भारत के हितों के साथ हैं, शांति के साथ हैं, संवाद के साथ हैं।

साथियों,

संकट के इसी समय में जब global supply chains डगमगा रही हैं, भारत ने diversification और resilience का मॉडल पेश किया है। Energy हो, fertilizers हों या essential goods अपने नागरिकों को कम से कम परेशानी हो, इसके लिए भारत ने निरंतर प्रयास किया है और आज भी कर रहे है।

साथियों,

जब राष्ट्रनीति ही राजनीति का मुख्य आधार हो, तब देश का भविष्य सर्वोपरि होता है। लेकिन जब राजनीति में व्यक्तिगत स्वार्थ हावी हो जाता है, तब लोग देश के फ्यूचर के बजाय अपने फ्यूचर के बारे में सोचते हैं। आप ज़रा याद कीजिए 2004 से 2010 के बीच क्या हुआ था? तब कांग्रेस सरकार के समय पेट्रोल-डीजल और गैस की कीमतों का संकट आया था और तब कांग्रेस ने देश की नहीं बल्कि अपनी सत्ता की चिंता की। उस वक्त कांग्रेस ने एक लाख अड़तालीस हज़ार करोड़ रुपए के ऑयल बॉन्ड जारी किए थे और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जी ने खुद कहा था कि वो आने वाली पीढ़ी पर कर्ज का बोझ डाल रहे हैं। यह जानते हुए भी कि ऑयल बॉन्ड का फैसला गलत है, जो रिमोट कंट्रोल से सरकार चला रहे थे, उन लोगों ने अपनी सत्ता बचाने के लिए यह गलत निर्णय किया क्योंकि जवाबदेही उस समय नहीं होनी थी, उस बॉन्ड पर री-पेमेंट 2020 के बाद होनी थी।

साथियों,

बीते 5-6 वर्षों में हमारी सरकार ने कांग्रेस सरकार के उस पाप को धोने का काम किया है, और इस धुलाई का खर्चा कम नहीं आया है, ऐसी लाँड्री आपने देखी नहीं होगी। 1 लाख 48 हज़ार करोड़ रुपए की जगह, देश को 3 लाख करोड़ रुपए से अधिक की पेमेंट करनी पड़ी क्योंकि इसमें ब्याज भी जुड़ गया था। यानी हमने करीब-करीब दोगुनी राशि चुकाने के लिए मजबूर हुए। आजकल कांग्रेस के जो नेता बयानों की मिसाइलें दाग रहे हैं, मिसाइल आई तो टीवी9 को मजा आएगा, उनकी इस विषय का जिक्र आते ही बोलती बंद हो जाती है।

साथियों,

पश्चिम एशिया में बनी परिस्थितियों पर मैंने आज लोकसभा में अपना वक्तव्य दिया है। दुनिया में जहां भी युद्ध हो रहे हैं, वो भारत की सीमा से दूर हैं। लेकिन आज की व्यवस्थाओं में कोई भी देश युद्धों से दुष्प्रभाव से दूर रहे, ऐसा संभव नहीं होता। अनेक देशों में तो स्थिति बहुत गंभीर हो चुकी है। और इन हालातों में हम देख रहे हैं कि राजनीतिक स्वार्थ से भरे कुछ लोग, कुछ दल, संकट के इस समय में भी अपने लिए राजनीतिक अवसर खोज रहे हैं। इसलिए मैं टीवी9 के मंच से फिर कहूंगा, यह समय संयम का है, संवेदनशीलता का है। हमने कोरोना महासंकट के दौरान भी देखा है, जब देशवासी एकजुट होकर संकट का सामना करते हैं, तो कितने सार्थक परिणाम आते हैं। इसी भाव के साथ हमें इस युद्ध से बनी परिस्थितियों का सामना करना है।

साथियों,

दुनिया की हर उथल-पुथल के बीच, भारत ने अपनी प्रगति की गति को भी बनाए रखा है। अगर मैं 28 फरवरी को युद्ध शुरू होने के बाद, बीते 23 दिनों का ही ब्यौरा दूं, तो पूरब से पश्चिम तक, उत्तर से दक्षिण तक देश में हजारों करोड़ के डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स का काम हुआ है। दिल्ली मेट्रो रेल के महत्वपूर्ण कॉरिडोर्स का लोकार्पण, सिलचर का हाई स्पीड कॉरिडोर का शिलान्यास, कोटा में नए एयरपोर्ट का शिलान्यास, मदुरै एयरपोर्ट को इंटरनेशनल एयरपोर्ट का दर्जा देना, ऐसे अनेक काम बीते 23 दिनों में ही हुए हैं। बीते एक महीने के दौरान ही औद्योगिक विकास को गति देने के लिए भव्य स्कीम को मंजूरी दी गई है। इसके तहत देशभर में 100 plug-and-play industrial parks विकसित किए जाएंगे। देश में Small Hydro Power Development Scheme को भी हरी झंडी दी गई है। इससे आने वाले वर्षों में 1,500 मेगावाट नई hydro power capacity जोड़ी जाएगी। इसी दौरान जल जीवन मिशन को साल 2028 तक बढ़ाने का निर्णय लिया गया है। किसानों के हित में भी अनेक बड़े निर्णय लिए गए हैं। बीते एक महीने में ही पीएम किसान सम्मान निधि के तहत 18 हजार करोड़ रुपए से अधिक सीधे किसानों के खातों में ट्रांसफर किए गए हैं। और जो हमारे MSMEs हैं, जो हमारे निर्यातक हैं, उनके लिए भी करीब 500 करोड़ रुपए के राहत पैकेज की भी घोषणा की गई है। यह सारे कदम इस बात का प्रमाण हैं कि विकसित भारत बनाने के लिए देश कितनी तेज गति से काम कर रहा है।

साथियों,

Management की दुनिया में एक सिद्धांत कहा जाता है - What gets measured, gets managed. लेकिन मैं इसमें एक बात और जोड़ना चाहता हूं, What gets measured, gets improved और ultimately, gets transformed. क्योंकि आकलन जागरूकता पैदा करता है। आकलन जवाबदेही तय करता है और सबसे महत्वपूर्ण आकलन संभावनाओं को जन्म देता है।

साथियों,

अगर आप 2014 से पहले के 10-11 साल और 2014 के बाद के 10-11 साल का आप आकलन करेंगे, तो यही पाएंगे कि कैसे इसी सिद्धांत पर चलते हुए, भारत ने हर सेक्टर को Transform किया है। जैसे पहले हाईवे बनते थे, करीब 11-12 किलोमीटर प्रति दिन की रफ्तार से, आज भारत करीब 30 किलोमीटर प्रतिदिन की स्पीड से हाईवे बना रहा है। पहले पोर्ट्स पर शिप का Turnaround Time, 5-6 दिन का होता था। आज वही काम, करीब-करीब 2 दिन से भी कम समय में पूरा हो रहा है। पहले Startup Culture के बारे में चर्चा ही नहीं होती थी। 2014 से पहले, हमारे देश में 400-500 स्टार्ट अप्स ही थे। आज भारत में 2 लाख से ज्यादा रजिस्ट्रर्ड स्टार्ट अप्स हैं। पहले मेडिकल education में सीटें भी सीमित थीं, करीब 50-55 हजार MBBS seats थीं, आज यह बढ़कर सवा लाख से ज्यादा हो चुकी हैं। पहले देश के Banking system से भी करोड़ों लोग बाहर थे। देश में सिर्फ 25 करोड़ के आसपास ही बैंक account थे। वहीं जनधन योजना के माध्यम से 55 करोड़ से ज्यादा बैंक अकाउंट खुले हैं। पहले हमारे देश में airports की संख्या भी 70 से कम थी। आज एयरपोर्ट्स की संख्या भी बढ़कर 160 से ज्यादा हो चुकी है।

साथियों,

पहले भी योजनाएं तो बनती थीं, लेकिन आज फर्क है, आज परिणाम दिखते हैं। पहले गति धीमी थी, आज भारत fastrack पर है। पहले संभावनाएं भी अंधकार में थीं, आज संकल्प सिद्धियों में बदल रहे हैं। इसलिए दुनिया को भी यह संदेश मिल रहा है कि यह नया भारत है। यह अपने विकास के लिए कोई कोर-कसर बाकी नहीं छोड़ रहा है।

साथियों,

आज हमारा प्रयास है कि अतीत में विकास का जो असंतुलन पैदा हो गया था, उसको अवसरों में बदला जाए। अब जैसे हमारा पूर्वी भारत है। हमारा पूर्वी भारत संसाधनों से समृद्ध है, दशकों तक वहां जिन्होंने सरकारें चलाई हैं, उनकी उपेक्षा ने पूर्वी भारत के विकास पर ब्रेक लगा दी थी। अब हालात बदल रहे हैं। जिस असम में कभी गोलियों की आवाज सुनाई देती थी, आज वहां सेमीकंडक्टर यूनिट बन रही है। ओडिशा में सेमीकंडक्टर से लेकर पेट्रोकेमिकल्स तक अनेक नए-नए सेक्टर का विकास हो रहा है। जिस बिहार में 6-7 दशक में गंगा जी पर एक बड़ा पुल बन पाया था एक, उस बिहार में पिछले एक दशक में 5 से ज्यादा नए पुल बनाए गए हैं। यूपी में कभी कट्टा मैन्युफैक्चरिंग की कहानियां कही जाती थीं, आज यूपी, मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग में दुनिया में अपनी पहचान बना रहा है।

साथियों,

पूर्वी भारत का एक और बड़ा राज्य पश्चिम बंगाल है। पश्चिम बंगाल, एक समय में भारत के कल्चर, एजुकेशन, इंडस्ट्री और ट्रेड का हब होता था। बीते 11 वर्षों में केंद्र सरकार ने पश्चिम बंगाल के विकास के लिए बड़ी मात्रा में निवेश किया है। लेकिन दुर्भाग्य से, आज वहां एक ऐसी निर्मम सरकार है, जो विकास पर ब्रेक लगाकर बैठी है। TV9 बांग्ला के जो दर्शक हैं, वो जानते हैं कि बंगाल में आयुष्मान योजना पर निर्मम सरकार ने ब्रेक लगाया हुआ है। पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना पर ब्रेक लगाया हुआ है। पीएम आवास योजना पर ब्रेक लगाया हुआ है। चाय बागान श्रमिकों के लिए शुरू हुई योजना के लिए ब्रेक लगाया हुआ है। यानी विकास और जनकल्याण से ज्यादा प्राथमिकता निर्मम सरकार अपने राजनीतिक स्वार्थ को दे रही है।

साथियों,

देश में इस तरह की राजनीति की शुरुआत जिस दल ने की है, वो अपने गुनाहों से बच नहीं सकती और वो पार्टी है - कांग्रेस। कांग्रेस पार्टी की राजनीति का एक ही लक्ष्य रहा है, किसी भी तरह विकास का विरोध और कांग्रेस यह तब से कर रही है, जब मैं गुजरात में था। गुजरात में वर्षों तक जनता ने हमें आशीर्वाद दिया, तो कांग्रेस ने उस जनादेश को स्वीकार नहीं किया। उन्होंने गुजरात की छवि पर सवाल उठाए, उसकी प्रगति को कटघरे में खड़ा किया और जब यही विश्वास पूरे देश में दिखाई दिया, तो कांग्रेस का विरोध भी रीजनल से नेशनल हो गया।

साथियों,

जब राजनीति में विरोध, विकास के विरोध में बदल जाए, जब आलोचना देश की उपलब्धियों पर सवाल उठाने लगे, तब यह सिर्फ सरकार का विरोध नहीं रह जाता, यह देश की प्रगति से असहज होने की मानसिकता बन जाती है। आज कांग्रेस इसी मानसिकता की गुलाम बन चुकी है। आज स्थिति यह है कि देश की हर सफलता पर प्रश्न उठाया जाता है, हर उपलब्धि में कमी खोजी जाती है और हर प्रयास के असफल होने की कामना की जाती है। कोविड के समय, देश ने अपनी वैक्सीन बनाई, तो कांग्रेस ने उस पर भी संदेह जताया। Make in India की बात हुई, तो कहा गया कि यह सफल नहीं होगा, बब्बर शेर कहकर इसका मजाक उड़ाया गया। जब देश में डिजिटल इंडिया अभियान शुरू हुआ, तो उसका मजाक उड़ाया गया। लेकिन हर बार यह कांग्रेस का दुर्भाग्य और देश का सौभाग्य रहा कि भारत ने हर चुनौती को सफलता में बदला। आज भारत दुनिया की सबसे बड़ी वैक्सीनेशन ड्राइव का उदाहरण है। भारत डिजिटल पेमेंट्स में दुनिया का अग्रणी देश है। भारत मैन्युफैक्चरिंग और स्टार्टअप्स में नई ऊंचाइयों को छू रहा है।

साथियों,

लोकतंत्र में विरोध जरूरी होता है। लेकिन विरोध और विद्वेष के बीच एक रेखा होती है। सरकार का विरोध करना लोकतांत्रिक अधिकार है। लेकिन देश को बदनाम करना, यह कांग्रेस की नीयत पर सवाल खड़ा करता है। जब विरोध इस स्तर तक पहुंच जाए कि देश की उपलब्धियां भी असहज करने लगें, तो यह राजनीति नहीं, यह दृष्टिकोण की समस्या है। अभी हमने ग्लोबल AI समिट में भी देखा है। जब पूरी दुनिया भारत में जुटी हुई थी, तो कांग्रेस के लोग कपड़े फाड़ने वहां पहुंच गए थे। इन लोगों को देश की इज्जत की कितनी परवाह है, यह इसी से पता चलता है। इसलिए आज आवश्यकता है कि देशहित को, दलहित से ऊपर रखा जाए क्योंकि अंत में राजनीति से ऊपर, राष्ट्र होता है, राष्ट्र का विकास होता है।

साथियों,

आज का यह दिन भी हमें यही प्रेरणा देता है। आज के ही दिन शहीद भगत सिंह, शहीद राजगुरु और शहीद सुखदेव ने देश के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया था। आज ही, समाजवादी आंदोलन के प्रखर आदर्श डॉ. राम मनोहर लोहिया जी की जयंती भी है। यह वो प्रेरणाएं हैं, जिन्होंने देश को हमेशा स्व से ऊपर रखा है। देशहित को सबसे ऊपर रखने की यही प्रेरणा, भारत को विकसित भारत बनाएगी। यही प्रेरणा भारत को आत्मनिर्भर बनाएगी। मुझे पूरा विश्वास है कि टीवी9 की यह समिट भी भारत के आत्मविश्वास और दुनिया के भरोसे पर, भारतीयों पर जो भरोसा है, उस भरोसे को और सशक्त करेगी। आप सभी को मेरी तरफ से बहुत-बहुत शुभकामनाएं हैं और आपके बीच आने का अवसर दिया, आप सबसे मिलने का मौका लिया, इसलिए बहुत-बहुत धन्यवाद!

नमस्‍कार!