ఈ రోజు, మా గ్రామంలోని యువత సోషల్ మీడియా హీరోలు: లోహర్దగాలో ప్రధాని మోదీ
కాంగ్రెస్ విధానమే దేశంలో నక్సలిజం రక్తపు హింసకు దారి తీసింది: లోహర్దగాలో ప్రధాని మోదీ

सब आयो बाबा, भाई-बहिन, दीदी, बुचु आउर बॉक्साइट नगरी लोहरदगा कर परिवारजन के मोर झारखंडी जोहार! भाई मैं यह तय नहीं कर पा रहा हूँ, कि यह चुनाव सभा है या विजय सभा है। सबसे पहले जितने लोग पंडाल में है, उससे ज्यादा लोग वहां धूप में खड़े हैं, और उससे भी ज्यादा वहां आ रहे हैं। मैंने हेलिकॉप्टर में से देखा, शायद मेरी सभा पूरी होने के बाद भी, लोग आते होंगे।

भाइयों, बहनों,

यह दृश्य, यह जागरूकता, यह अदभूत है। लेकिन जो इतनी बड़ा तादात में पीछे धूप में तप रहे हैं, शायद वो मुझे देख नहीं पाते होंगे, शायद मेरी आवाज भी पहुंचती होगी की नहीं पहुंचती होगी लेकिन वो तपस्या कर रहे हैं। मैं सबसे पहले, उनको जो ये असुविधा हो रही है, इसके लिए क्षमा मांगता हूँ। औऱ दूसरा मैं आपको विश्वास दिलाता हूँ, कि आप जो ताप में तप रहे हैं, मोदी आपकी इस तपस्या को बेकार नहीं जाने देगा। मैं विकास करके, ये प्यार को सवाया करके लौटाऊंगा। मैं भगवान बिरसा मुंडा को श्रद्धापूर्वक नमन करता हूं। पिछले वर्ष उनके जन्म दिवस पर ही, मुझे उनके गांव जाने का सौभाग्य मिला था। और मुझे वहां की मिट्टी, माथे पर चढ़ाने का गौरव प्राप्त हुआ था। मैं देश का पहला प्रधानमंत्री हूं, जिसे उनके गांव जाकर, उस मिट्टी को श्रद्धा पूर्वक नमन किया औऱ मुझे वो सौभाग्य मिला। भाइयों और बहनों, भगवान बिरसा मुंडा मेरे लिए सिर्फ एक नाम नहीं हैं। वे मेरे लिए प्रेरणा हैं। भगवान बिरसा मुंडा के जीवन ने, उनके जीवन को जब याद करते हैं, तब मुझे हर चुनौती से जीतना सिखाया है। चुनौती से जीतने की प्ररेणा दी है। आप देखते हैं, मैं गरीबों के लिए, आदिवासियों के लिए काम करता हूं तो मुझे कितनी ही गालियां पड़ती हैं, लेकिन मैं सिर्फ आपकी सेवा में जुटा रहता हूं। आपको याद होगा, मैंने स्वच्छ भारत अभियान शुरू किया, तो कांग्रेस और इंडी गठबंधन वाले कहने लगे, झाड़ू लगाने से क्या होगा? शौचालय बनाने से क्या होगा? आज गांव-गांव में देखिए, हालात बदले हैं। मैंने जब मोबाइल का डेटा सस्ता किया। गांव-गांव में कॉमन सर्विस सेंटर खोले। जब हर गांव तक इंटरनेट पहुंचाने की ठानी, तो झामुमो वाले और कांग्रेस वाले कहते थे गांव वालों को क्या इसका फायदा? गांव वाला तो अनपढ़ है! आज मेरे गांव का युवा सोशल मीडिया का हीरो है। कांग्रेस वालों ने इंटरनेट को अमीरों की चीज बना दिया था। मैंने इंटरनेट को गरीबों के घर पहुंचा दिया है। गरीबों की ऊंगलियों पर नाच रहा है इंटरनेट।

साथियों,

आज देश में गरीब की चिंता, आपका ये गरीब का बेटा मोदी वही कर रहा है। कांग्रेस के राज में राशन सड़ता रहता था। आदिवासी क्षेत्रों में बच्चे भूख से मरते थे। और कांग्रेस अनाज गोदामों पर ताला लगाकर बैठ गई थी। और उस समय सोनिया जी के सरकार के डॉ प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से प्रेस वालों ने पूछा कि अनाज भींग रहा है, सड़ रहा है। गरीबों को बांट दीजिए न, उन्होंने कहा इतने बड़े देश में ऐसा संभव नही है, नहीं दे सकते हैं। ये मोदी का कमाल देखिए, आपने मोदी को वोट दिया, मोदी को बिठाया, अनाज के सारे गोदाम खोल दिए, औऱ आज देश में मुफ्त राशन की योजना चल रही है। और मैंने गारंटी दी है आने वाले पांच साल औऱ बढाऊंगा, औऱ हैरानी देखिए ये कांग्रेस के शाही परिवार को, जो ये गरीब का चूल्हा जलता रहे, गरीब का बच्चा भूखा न रहे, इसलिए मुफ्त में आनाज दे रहा हूँ, तो उनको तकलीफ हो रही है। चिल्ला रहे हैं औऱ पूछ रहे हैं कि मोदी अपने आपको समझता क्या है? ये आदिवासियों को, गरीबों को मुफ्त में आनाज देता क्यों है? अरे! तुम कौन होते हो भाई? इस देश के मालिक यही हैं, इस देश का खजाना इन्हीं लोगों के लिए है। ये नहीं खाएगें तो कौन खाएगा? शाही परिवार कुछ भी कहे, लेकिन मोदी ने आपको मुफ्त राशन देने की गारंटी दे कर रखी है। धरती इधर की उधर हो जाए, आपको मुफ्त राशन मिलने से कोई रोक नहीं सकता। क्योंकि ये मोदी की गारंटी है।

साथियों,

कांग्रेस के पाप की लिस्ट बनाएं, तो कई दिन निकल जाएंगे। ये कांग्रेस ही है जिसने लोहरदग्गा, खूंटी, गुमला जैसे जिलों को पिछड़ा कहकर बदहाल छोड़ दिया था। ये ज्यादातर मेरे आदिवासी जिले हैं। यहां बिजली, पानी, सड़क, स्कूल, अस्पताल, ऐसा कोई भी काम ठीक से नहीं हुआ था। आपने मोदी को वोट दिया। मोदी ने इन जिलों को विकास को अपना मिशन बनाया। मैंने इनको पिछड़े नहीं, बैकवर्ड नहीं, मैंने इनको आकांक्षी जिले घोषित किया। यहां क्या-क्या काम चल रहा है, कौन सी सुविधा पहुंची? कौन सी सुविधा अभी नहीं मिली है? अफसर काम करते हैं कि नहीं करते हैं? मैं मेरे दिल्ली के कमरे में, स्क्रिन पर लगातार उसे देखता रहता हूँ, क्या चलता है। मॉनिटर करता हूं। आज ये आकंक्षी जिले, देश के बाकी जिलों से भी कहीं तेज़ी से विकास करने की राह पर आ गए हैं।

साथियों,

आदिवासियों में भी जो अतिपिछड़े हैं, उनको कोई पूछता ही नहीं था। मोदी उनके लिए पीएम जनमन योजना ले कर आया, इस योजना पर 24 हजार करोड़ रूपए खर्च किए जा रहे हैं। इससे आदिवासियों में भी अति पिछड़े साथियों के लिए भी, विशेषतौर पर घर, बिजली पानी जैसे काम किए जा रहे हैं। औऱ जानते हैं, इन योजना के लिए, मुझे सबसे ज्यादा सुझाव किसने दिया, इस पूरे विषय को विस्तार से मेरे सामने किसने रखा? हमारी आदरणीय राष्ट्रपति द्रौपदी मूर्मू जी ने, ये योजना शुरू होने के पीछे राष्ट्रपति जी ने जो उड़ीसा में झारखंड में जो समय बिताया, उसकी बड़ी भूमिका रही है। लेकिन झारखंड के मेरे भाई औऱ बहनों, आपको याद रखना है, कि द्रौपदी मूर्मू जी को, एक आदिवासी बेटी को, राष्ट्रपति बनाने का सबसे ज्यादा विरोध इंडी गठबंधन ने किया था।

भाइयों और बहनों,

मोदी को आपकी भावनाओं की कद्र है, आपकी जरूरतों की चिंता है, इसका एक उदाहरण डिस्ट्रिक्ट मिनरल फंड भी है। ये क्षेत्र तो बॉक्साइट का बहुत बड़ा उत्पादक है। पहले खनिज निकलता था और जहां से निकला उस क्षेत्र को कोई नहीं पूछता था। मोदी ने कांग्रेस के जमाने की ये नीति भी बदल डाली। मोदी ने तय किया कि इस संपदा का एक हिस्सा स्थानीय विकास के लिए लगना चाहिए। इसके लिए हमने डिस्ट्रिक्ट मिनरल फंड बनाया। इससे झारखंड को भी 12 हजार करोड़ रुपए मिले हैं, जो पहले एक पाई नहीं मिलती थी। भाइयों और बहनों, जहां सरकारें भ्रष्ट हो, वहां बजट कितना भी हो, विकास संभव ही नहीं है। जिस बाल्टी में छेद किया हो, उसमें कितना ही पानी भरो, बाल्टी भरेगी क्या? बाल्टी भरेगी क्या? यहां भ्रष्टाचार का छेद ऐसा लगा हुआ है कि सीधा पाइप उनके घर में जाता है। ऊपर से रूपया डालो, नीचे से पाइप से उनके घर में पहुंच जाता है। झारखंड इन्हीं मुसीबतों से गुजरा है। आप देखिए, पेपर लीक का मामला। इस राज्य में कोई ऐसा एक्जाम नहीं है, कोई ऐसा पेपर नहीं है,जो लीक नहीं होता हो। मेरे नौजवानों का क्या होगा भाई, और मैंने देखा कि झारखंड सरकार में बैठे लोग सुधरने वाले नहीं है, तो मुझे दिल्ली से ही डंडा चलाना पड़ेगा। और इसलिए मोदी ने, ये जो पेपर लीक वाले माफिया हैं न, उनके विरुद्ध में एक बहुत कड़ा कानून बना दिया है। ये बच्चों के, नौजवानों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वालों को अब जिंदगी जेल में गुजारनी पड़ेगी।

भाइयों-बहनों,

अगर हमारे पास, सौ रूपया, दो सौ रूपया, हजार रूपया हो, तो हम ऐसे बाँध करके रखते हैं, इतना संभाल करके रखते हैं, कि जरूरत पड़ेगी तो काम आएगा। हमारी माताएं, बहनें घर के अनाज के अंदर कपड़े में पैसे सोना, चांदी बांध करके रख देती हैं, ताकि जरूरत पड़े तो काम आ जाए। एक-एक रूपए की कीमत होती है लेकिन झारखंड में देखिए, कांग्रेस के सांसद के घर से नोटों के ढेर निकले, नोटों के ढेर। और नोटों के ढेर इतने बड़े थे कि बैंकों से मशीन लाए गिनने के लिए, तो ये मशीन भी हांफने लगे। मुझे बताइए, भाई बहन ये पैसा किसका है, ये आपका है कि नहीं है? ये पैसा आपका है कि नहीं है? ये पैसा आपके पसीने का है कि नहीं है? ये पैसा आपके हक का है कि नहीं है? किसने उनको चोरी करने का अधिकार दिया भाई। एक मुख्यमंत्री भ्रष्टाचार के गंभीर मामलों में जेल में बंद है। अब आप मुझे बताइए, कोई आपके घर में चोरी कर जाए, तो आप उसको सजा चाहेंगे की नहीं चाहेंगे? अगर आपके घर में कोई चोर घुस जाए, और आपका कुछ ले करके चला जाए तो आप उसको पकड़ना चाहते हैं कि नहीं चाहते हैं? आप चाहते हैं कि नहीं चाहते हैं कि उसे सजा मिले? चाहते हैं कि नहीं चाहते हैं? अगर आपके घर में कोई चोरी कर जाए, उसको जेल भेजना चाहते हैं तो ये झारखंड भी तो आपका घर ही है न, ये झारखंड आप ही का है न, उसमें कोई चोरी कर जाए, तो वो जेल जाना चाहिए की नहीं चाहिए? सजा होनी चाहिए की नहीं होनी चाहिए?

साथियों,

जिसने झारखंड को लूटा, उस पर कानून के तहत कार्रवाई हो रही है। और अदालत इस काम पर ठप्पे पर ठप्पा मार करके, अदालत डंके की चोट पर कह रहा है, हां चोरी की है। भाइयों-बहनों, मोदी का एक ही संकल्प है, भ्रष्टाचार हटाओ और ये इंडी अलायंस वाले कहते हैं भ्रष्टाचारी बचाओ। वे रैलियां करते हैं, वे किस के लिए करते हैं, नौ जवानों को रोजगार मिलेगा, इसके लिए रैली नहीं। कारखाना खुलेगा, इसके लिए रैली नहीं।किसानों का भला होगा उसके लिए रैली नहीं। महिलाओं का भला होगा, इसके लिए रैली नहीं। रैली करते हैं, कभी दिल्ली में करते हैं, कभी रांची में करते हैं, सारे इक्ट्ठे होते हैं हाथ ऊंचा करते हैं, क्यों भ्रष्टाचारी बचाओ, भ्रष्टाचारी बचाओ। अरे चुनाव के समय भी भ्रष्टाचारी बचाओं की रैलियां कर रहे हो, मतलब तुम्हें इस देश में कुछ लेना देना नहीं है। भाईयों-बहनों, मैं आपको गारंटी देता हूं-आने वाले 5 साल में ऐसे सभी भ्रष्टाचारियों पर कानून का डंडा चलेगा, चलेगा, चलेगा।

साथियों,

आपको भी पता है कि जब गरीब आगे बढ़ता है, तो उसके लाख दुश्मन हो जाते हैं। कांग्रेस-झामुमो और इंडी गठबंधन वालों को आज भी ये बर्दाश्त नहीं हो रहा है कि एक गरीब मां का बेटा कैसे पीएम बन गया? और इसलिए ये लोग मोदी के खिलाफ नए-नए झूठ फैलाते रहते हैं। आजकल इनका नया झूठ है, मोदी आएगा तो आरक्षण खत्म कर देगा, दी आएगा संविधान बदल देगा। अरे!मुर्खों के सरदार, ये मोदी तो दस साल से आय़ा हुआ है भाई, ये दस साल से प्रधानमंत्री है। और शान से सरकार चला रहा है। औऱ दस साल में मैंने ये पाप नहीं किया है। क्योंकि मैं भारत के संविधान की भक्ति करता हूँ, मैं बाबा साहेब अंबेडकरकी पूजा करने वाले लोगों में से हूँ। सच्चाई ये है कि खुद इनके चेहरे से मोदी ने नकाब उतार दिया है। साथियों,अपने 60 साल के शासन में कांग्रेस ने देश को परिवारवाद दिया, भ्रष्टाचार दिया। इसके अलावा एक और रास्ते पर कांग्रेस चली, और रास्ता है तुष्टिकरण, appeasement, वोट बैंक पोलिटिक्स। कांग्रेस जो चश्मा पहनती है, उसमें एक ही वोटबैंक दिखता है, औऱ वो है मुस्लिम वोटबैंक। कांग्रेस की इस नीति का बहुत बड़ा नुकसान हर किसी ने उठाया है। जबकि भाजपा, सबका साथ-सबका विकास की बात करती है। भाजपा सरकार की नीतियों में किसी के साथ भेदभाव नहीं होता। लेकिन कांग्रेस को ये करना ही नहीं है, समझने का तो सवाल ही नहीं उठता। आप देखिए,कैसे-कैसे खेल खेल रही है कांग्रेस। इंडी गठबंधन वाले खुद SC/ST/OBC को आरक्षण का जो हक मिला है न, उसमें डाका डालने का प्लान कर रहे हैं। उसमें से चोरी करने का खेल चल रहा है। जब संविधान बना था, 75 साल पहले तब सबने मिलकर यह तय किया, तब तो हमारे में से बहुत लोग हैं जो पैदा भी नहीं हुए थे, उस समय तय हुआ था, बाबा साहेब अंबेडकर ने तय किया था कि हमारे देश में धर्म के आधार पर आरक्षण नहीं होगा। दलितों को, आदिवासियों को, पिछड़ों को संविधान के तहत आरक्षण मिलेगा। लेकिन कांग्रेस आपका हक छीनकर, संविधान को तोड़ मरोड़ कर, मुसलमानों को आरक्षण देना चाहती है। आपका हक लूटना चाहती है, इसलिए आपको बहुत सतर्क रहने की जरूरत है। साथियों, मैं आपके बीच आया हूँ तो एक गारंटी दे रहा हूँ। ये मोदी की गारंटी है। जब तक मोदी जिंदा है, जब तक मोदी जिंदा है, मैं दलित आदिवासी ओबीसी इस आरक्षण में से रत्ती भर भी उनको चोरी नहीं करने दूंगा, ये मेरी आपको गारंटी है।

साथियों,

कांग्रेस की कुनीतियों ने ही देश को नक्सलवाद की खूनी हिंसा दी। माओवाद ने हमारी कितनी ही माताओं के लाड़लों का जीवन बरबाद कर दिया, 10 सालों में मोदी ने माओवादी हिंसा के देश के एक बड़े हिस्से को मुक्त कराया है। लेकिन कांग्रेस आज भी माओवादी, नक्सलियों का समर्थन कर रही है। अपना वोटबैंक बचाने के लिए कांग्रेस आतंकवादियों पर भी कार्रवाई नहीं करती। बहुत मेहनत के बाद आतंकवादियों के स्लीपर सेल को हम तोड़े पाए हैं। लेकिन झारखंड में जो किया जा रहा है, वो खतरनाक है। यहां घुसपैठियों को बढ़ावा देने का और आदिवासी परिवारों की ज़मीन हड़पने का खेल हो रहा है। संथाल में PFI जैसे प्रतिबंधित संगठन कैसे अपना रैकेट चला रहे हैं? कैसे आदिवासियों के साथ ठगी कर रहे हैं? कैसे आदिवासी बेटियों के साथ अत्याचार कर रहे हैं। जमीन के लिए आदिवासी बेटियों के साथ क्या क्या नहीं किया जा रहा है। आदिवासी बेटियों को विशेष तौर पर टारगेट किया जा रहा है। जब लोग इसके खिलाफ आवाज उठाते हैं, तो इंडी-गठबंधन वाले कहते हैं- मोदी के खिलाफ वोट जिहाद करो, वोट जिहाद। पहले हमने लव जिहाद सुना था, फिर हमने लैंड जिहाद सुना था, अब वोट जिहाद,ये अब कुछ भी कर लें, कितनी जिहाद कर लें, अब ये देश पीछे हटने वाला नही है। और मोदी डरने वाला नहीं है। मोदी के रहते कोई मेरे आदिवासी भाई-बहनों के जीवन से खिलवाड़ नहीं कर पाएगा। और ये मोदी की गारंटी है।

साथियों,

ये चुनाव एक मज़बूत देश के लिए मजबूत सरकार बनाने के लिए है। इसलिए, लोहरदगा से हमारे समीर ओरान जी और खूंटी के कुछ लोग भी यहां आए हैं, वहां हमारे अर्जुन मुंडा जी चुनाव लड़ रहे हैं। बीजेपी औऱ एनडीए, हमारे महतो जी हम साथ मिल करके झारखंड का भविष्य बना रहे हैं। साथियों, 13 मई को इनको मिला, एक-एक वोट सीधा मोदी के खाते में जाएगा। आपका वोट जैसा ही कमल दबाया, तो समझ लिजिए मोदी को मिल गया। अच्छा मेरा एक काम करेंगे? मेरा एक काम करेंगे? जरा हाथ ऊपर कर के बताइए, मेरा काम करेंगे? देखिए, घर-घर जाइएगा और हर घर में जा कर कहना कि मोदी जी आए थे, मोदी जी ने जोहार कहा है, जय श्री राम कहा है। बोलिए! भारत माता की जय, भारत माता की जय, भारत माता की जय,
बहुत बहुत धन्यवाद।

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आदरणीय सभापति जी,

सदन की ओर से, मेरी तरफ से, मैं श्रीमान हरिवंश जी को बहुत-बहुत बधाई देता हूं और शुभकामनाएं भी देता हूं। राज्यसभा उपसभापति के रूप में लगातार तीसरी बार निर्वाचित होना, यह अपने आप में इस सदन का आपके प्रति जो गहरा विश्वास है और बीते हुए कालखंड में आपके अनुभव का जो सदन को लाभ मिला है, सबको साथ लेकर चलने का आपका जो प्रयास रहा है, उसको एक प्रकार से सदन ने आज एक मोहर लगा दी है और यह अपने आप में यह एक अनुभव का सम्मान है, एक सहज कार्य शैली का सम्मान है और एक सहज कार्य शैली की स्वीकृति भी है। हमने सबने हरिवंश जी के नेतृत्व में सदन की शक्ति को और अधिक प्रभावी होते हुए भी देखा है और मैं कह सकता हूं कि केवल सदन की कार्यवाही का संचालन ही नहीं, वह अपने जीवन के जो भूतकाल के अनुभव हैं, उसको भी बहुत ही सटीक तरीके से सदन को समृद्ध करने में उपयोग लाते हैं। उनका यह अनुभव पूरी कार्यवाही को, संचालन को और सदन के माहौल को और अधिक परिपक्व को बनाता है। मुझे विश्वास है, उपसभापति जी का नया कार्यकाल उसी भावना, संतुलन और समर्पण के साथ आगे बढ़ेगा और हम सबके प्रयासों से सदन की गरिमा को नई ऊंचाई प्राप्त होगी।

आदरणीय सभापति जी,

हरिवंश जी का जन्म यूपी के गांव में हुआ और सहज रूप से ग्रामीण पृष्ठभूमि के कारण उन्हें अपने गांव के विकास में विद्यार्थी काल से भी कुछ ना कुछ करते रहे। उनकी शिक्षा-दीक्षा काशी में हुई और इन सारे विषयों पर मुझे भूतकाल में बोलने का अवसर मिला, तो मैं काफी कुछ कह चुका हूं। इसलिए मैं आज इसको दोहराता नहीं हूं। एक बात का उल्लेख आज जरूर मैं करूंगा, आज 17 अप्रैल है और 17 अप्रैल 1927, हमारे पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर जी की जन्म जयंती भी है और विशेषता यह है कि आज 17 अप्रैल को आप जब तीसरी बार इस दायित्व को संभालने जा रहे हैं और वह भी चंद्रशेखर जी की जन्म जयंती पर और चंद्रशेखर जी के साथ आपका जुड़ाव, उनके प्रति आपका लगाव और एक प्रकार से आप उनके सहयात्री रहे, उनके पूरे कार्यकाल में, तो यह एक अपने आप में एक बहुत ही बड़ा सुयोग है। अपने चंद्रशेखर जी के जीवन पर किताबें भी लिखी हैं और चंद्रशेखर जी के एक वृहद जीवन को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का एक बहुत बड़ा काम भी आपने किया है और इसलिए आपके लिए एक बहुत बड़ा विशेष अवसर बन जाता है कि चंद्रशेखर जी की जन्म जयंती पर आपके तीसरा कार्यकाल का प्रारंभ हो रहा है। हरिवंश जी का सार्वजनिक जीवन केवल संसदीय कामों तक सीमित नहीं रहा है। पत्रकारिता के उच्च मानदंड, यह आज भी आदर्श के रूप में रेखांकित किए जाते हैं। लंबा जीवन पत्रकारिता का रहा है, लेकिन पत्रकारिता में भी उन्होंने उच्च मानदंड को हमेशा आधार माना। हम सब जानते हैं, उनके लेखनी में धार है, लेकिन उनकी वाणी में और व्यवहार में सौम्‍यता और शिष्‍टता भरी-भरी रहती है, यह अपने आप में और मैं जब गुजरात में था, तब भी मैं उनकी लेखों को पढ़ने की मेरी आदत रही थी और मैं देखता था कि वह अपना पक्ष बड़ी दृढ़ता के साथ रखते थे और मैं अनुभव करता था कि उसमें काफी अध्ययन के बाद उसका निचोड़ उसमें प्रकट होता था। पत्रकारिता में भी अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने का उनका निरंतर प्रयास रहा और एक सफल प्रयास भी रहा और हम देखते हैं, सदन में भी चाहे पॉलिसी हो या प्रोसेस हो, उन बातों का कहीं ना कहीं छाया हमें हमेशा नजर आती है और यह हम सबके लिए सुखद अनुभव है। वह समाज की वास्तविकताओं के साथ गहरे जुड़ाव के साथ काम करने वाले व्यक्ति रहे हैं। मैं तो कहूंगा, जो चाहे लोकसभा हो या राज्यसभा हो, जो नए सांसद आते हैं, जो हरिवंश जी से बहुत कुछ सीख सकते हैं, बहुत कुछ बातें करके उनसे जान सकते हैं, क्योंकि जब वह पत्रकारिता में थे, तो उनकी कॉलम चलती थी, हमारा सांसद कैसा हो, हमारा पार्लियामेंट मेंबर कैसा हो, तब उनको शायद पता नहीं होगा, कभी उनको ही बैठना पड़ेगा। लेकिन वह लिखते थे और वह बातों में बहुत व्यापकता रहती थी। सदन की गरिमा और बैठने वाले सदस्य का दायित्व, अब उसके आचार विचार को लेकर भी बहुत गहरा उनका अध्ययन रहता था और उन बातों का उपयोग आज हमारे सदन के साथी, उनके साथ बैठकर के बहुत कुछ जान सकते हैं, सीख सकते हैं। समय की पाबंदी एक डिसिप्लिन लाइफ में और अपने कर्तव्‍यों के प्रति गंभीरता, यह आपकी विशेषता रही है और शायद इसी के कारण आप सर्व स्वीकृत व्‍यक्‍तित्‍व आपका विकसित हुआ है। हमने देखा होगा जब से वह राज्यसभा के सदस्य बने हैं, मैं कह सकता हूं कि पूर्ण समय वह सदन में होते हैं। सभापति जी की अनुपस्थिति में सदन को संभालने का काम तो करते ही हैं, लेकिन बाकी समय भी यहां कमेटी का कोई भी व्यक्ति बैठा हो, तो भी वह सदन में हमेशा अपनी मौजूदगी रहती है। हर बात को सुनते हैं, उस समय सदन का जो संचालन करते हैं, उनके कार्य को भी देखते हैं और यह इसके पीछे उनको अपना जो दायित्व है, उसके प्रति उनकी जो प्रतिबद्धता है, उसके कारण यह संभव होता है और यह हम सबके लिए सीखने जैसा है और मैंने देखा है कि वह पूरा समय इन चीजों के लिए वह खपा देते हैं।

आदरणीय सभापति जी,

उपसभापति के तौर पर सदन को कैसे चलाया, सदन में सदस्य के तौर पर क्या योगदान दिया, इस बारे में हम स्वाभाविक रूप से एक सकारात्मक चर्चा करते रहते हैं। लेकिन सदन के बाहर, जनता के बीच वह कैसे अपने लोकतांत्रिक और सामाजिक दायित्‍वों को निभाते हैं, यह भी हम सार्वजनिक जीवन में जो लोग हैं, उनके लिए सचमुच में ध्यान आकर्षित करने वाले विषय हैं और हमें उसको देखना चाहिए। मैं अपने अनुभव से कह सकता हूं कि काम सराहनीय तो है ही हैं, अनुकरणीय भी हैं। हमारा देश युवा देश है और मैंने देखा है कि हरिवंश जी ने अपने समय का उपयोग सबसे ज्यादा युवाओं के बीच में बिताना पसंद किया है। युवाओं में लगातार गंभीर विषयों पर जागरूकता बने, एक प्रकार से लोक शिक्षा का काम निरंतर चलता रहे, यह अपने आप में वह लगातार करते रहते हैं, तो देश भर में उनका भ्रमण रहता है। वह मीडिया की नजरों में बहुत ज्यादा रहने का उनका शौक नहीं है, लेकिन भ्रमण और कार्यक्रमों की संख्या उनकी लगातार चलती रहती है। 2018 में, जब उन्होंने राज्यसभा के उपसभापति की भूमिका निभानी शुरू की, उसके बाद जो मेरी जानकारी है, कॉलेजेस और यूनिवर्सिटीज में 350 कार्यक्रम किए हैं। यह एक बहुत बड़ा काम है। देश की यूनिवर्सिटीज और कॉलेजेस में 350 से अधिक कार्यक्रम, जाना-आना, उनके साथ बैठना, बातें करना, उसके लिए विषयों की तैयारी करना, यह अपने आप में बहुत बड़ा, एक प्रकार से आपने बृहतस्य के रूप में इस काम को किया है और युवाओं से ही जुड़ने के लक्ष्य को आपने जरा भी ओझल नहीं होने दिया है। और विकसित भारत का सपना युवाओं के लिए भी क्यों होना चाहिए, इस मूल विषय को अलग-अलग तरीके से जिस प्रकार से विद्यार्थियों का मूड हों, वह बताते रहते हैं। विद्यार्थियों में, युवा पीढ़ी में एक आत्मविश्वास कैसे पैदा हो, निराशा से वह हमेशा-हमेशा बाहर रहें, इन सारे विषयों की चर्चा वह करते हैं। उनके कुछ ऐतिहासिक रेफरेंस के साथ बात करते हैं कि हम ऐसे क्या कारण हैं कि हम जितनी तेजी से जाना चाहिए था, आगे नहीं जा पाए, अब अवसर क्या आया है, सारी बातें हो और देश इतनी बड़ी छलांग लगा सकता है, उसका आत्मविश्वास भरने का काम उनके द्वारा होता है। आजकल देश में लिटरेचर फेस्टिवल, एक बड़ा सिलसिला चला है और अब तो वह टीयर-2, टीयर-3 सिटीज़ तक भी वह सिलसिला चला है। लिटरेचर फेस्टिवल्स में भी हरिवंश जी का अक्सर जाना होता है और उस समाज का, उस तबके को भी वह अपने विचारों से प्रभावित करते रहते हैं, प्रेरित करते रहते हैं।

आदरणीय सभापति जी,

मैंने उनके जीवन का एक प्रसंग जो सुना है, शायद हो सकता है, सार्वजनिक तौर में मेरी जानकारी सटीक ना भी हो। मैंने सुना है कि 1994 में हरिवंश जी पहली बार विदेश यात्रा की और वह अमेरिका गए। जब अमेरिका गए, तो अपने सारे कार्यक्रमों के अलावा उनसे पूछा गया कि आप कहीं और जाना चाहते हैं, कुछ करना चाहते हैं। तो उन्होंने आग्रह से कहा कि मैं जरूर यह विकसित देश है, तो मैं उसकी यूनिवर्सिटी को देखना-समझना चाहता हूं और वहाँ की ऐसी कौन सी शिक्षा और कल्चर है, जिसके कारण यह देश इतना आगे बढ़ रहा है और उन्होंने काफी समय अपने निर्धारित कार्यक्रमों के सिवाय वह पहली अमेरिका की यात्रा में सिर्फ और सिर्फ यूनिवर्सिटीज में बिताया, उसका अध्ययन करने का काम किया। यानी यह जो ललक थी उनके मन में, यह अगर यह विकसित देश की यूनिवर्सिटी से जो निकलता है, तो हिंदुस्तान की यूनिवर्सिटीज़ भी ऐसी हों, ताकि विकसित भारत का सपना वहीं से रेखांकित किया जा सके।

आदरणीय सभापति जी,

MPs को MPLAD फंड के संबंध में तो काफी चर्चा रहती है और एक बड़ा प्रसंगी का विषय भी रहता है MPs में और कभी-कभी तो यह भी संघर्ष रहता है कि MPLAD फंड इतना है और वहां उधर एमएलए फंड ज्यादा है, उसकी चर्चा रहती है। लेकिन एमपी फंड का उपयोग कैसे हो, MPLAD जो फंड की बातें हैं, उसमें हरिवंश जी के विचारों को तो मैंने स्वयं भी सुना है, मैं प्रभावित हूं इससे, लेकिन हमारी भी कुछ मजबूरी रही है। शायद हम उनकी अपेक्षा के अनुसार उसको कर नहीं पाए हैं, क्योंकि सबको ऐसे विषय में साथ लेना जरा कठिन होता है। लेकिन उन्होंने खुद की उस जिम्मेदारी को कैसे निभाया है, मैं समझता हूं वह भी हम लोगों ने, उन्होंने यह MPLAD फंड था, जो अपने जो विचार हैं, उसके विचार को भी नीचे धरातल पर उतारने के लिए उपयोग किया, शिक्षा क्षेत्र और युवा पीढ़ी, यह उसके सारे केंद्र में रहा, MPLAD फंड उन्होंने इस्तेमाल करने के लिए एक मिसाल पेश की है। उन्होंने विश्वविद्यालय, शिक्षण संस्थानों में ऐसे अध्ययन केंद्र स्थापित किया और उसका प्रभाव लंबे अरसे तक रहने वाला है और उसमें भी उन्होंने प्रोजेक्ट ओरिएंटेड, समस्या के समाधान को केंद्र में रखा। जैसे लुप्त होती जा रही भारतीय भाषाओं, उनके संरक्षण के लिए उन्होंने आईआईटी पटना में एक अध्ययन केंद्र के लिए MPLAD फंड का उपयोग किया, तो उस काम को वह लगातार वहां हो रहा है। एक और उन्होंने काम किया, जो बिहार में कुछ क्षेत्र हैं, जहां भयावह भूकंप की घटनाएं रोज घटती रहती हैं, नेपाल में भी एक छोटा सा भूकंप आ जाए, तो भी उस क्षेत्र का प्रभावित करता है। इस काम को ध्यान में रखते हुए उन्होंने MPLAD फंड से सेंटर फॉर अर्थक्वेक इंजीनियरिंग के रूप में एक स्टडी सेंटर रिसर्च के लिए खुलवाया है। यानी वह स्टडी का काम करना, रिसर्च करना, उस पर लगातार काम कर रहा है। हम जानते हैं कि जैसा मैंने कहा है, जय प्रकाश जी का गांव सिताब दियारा हरिवंश जी वहीं हैं और वहां गंगा और घाघरा दो नदी के बीच में एक गांव है, तो हमेशा ही जल के कारण जो कटाव की समस्या रहती है, वो गांव परेशान रहता है और नदी धारा भी बदलती रहती है, तो विनाश भी बहुत होता रहता है। उसको भी ध्यान में रखते हुए उन्होंने MPLAD फंड से इसके वैज्ञानिक अध्ययन के लिए उन्होंने पटना की आर्यभट्ट नॉलेज यूनिवर्सिटी में एक नदी अध्ययन केंद्र खुलवाया है। पटना के ही चंद्रगुप्त प्रबंधन संस्था में वो बिजनेस इनक्यूबेशन एंड इनोवेशन सेंटर बनवा रहे हैं। एआई के इस दौर में मगध विश्वविद्यालय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सेंटर बनाया है। यानी MPLAD फंड का एक निर्धारित दिशा में काम कैसे किया जा सकता है, इसका एक उदाहरण आपने प्रस्तुत किया है।

आदरणीय सभापति जी,

हम सभी ने अनुभव किया है कि लोग जब अपने गांव से स्थानांतरण करते हैं, एक दूसरे शहर में जाते हैं, तो जीवन में एक प्रकार से गांव से कट जाते हैं। हरिवंश जी का जीवन आज भी गांव से जुड़ा रहता है, अपने गांव से जुड़ा रहता है। वह लगातार वहां के सुख दुख के साथी बन करके वह अपना जो भी कंट्रीब्यूशन कर सकते हैं, वह करते रहते हैं।

आदरणीय सभापति जी,

जिस संसद की नई इमारत में बैठे हैं, उसका जब निर्माण कार्य चल रहा था, तब मुझे उनके साथ निकट से काम करने का अवसर आया। और मैं अनुभव कर रहा था कि जो विचार मेरे मन में आते थे, मैं हरिवंश जी से कहता था, हम ऐसा करें तो कैसा होगा, दो दिन में वो बराबर परफेक्ट उसको लेकर आते थे, कहीं नामकरण करना है, उसके पहचान इस सदन की कैसे बने, तो काफी कुछ कंट्रीब्यूशन सदन के निर्माण में, उसकी आर्ट गैलरी में, विभिन्न द्वार के नाम रखने हों, यानी हर प्रकार से मेरे एक साथी के रूप में हम दोनों को और मुझे बड़ा आनंददायक रहा वो अनुभव काम का।

आदरणीय सभापति जी,

हरिवंश जी के सदन को चलाने की कुशलता को तो हम भली भांति देखे हैं, लेकिन साथ-साथ उन्होंने राज्यों की विधानसभाएं, विधान परिषदें और वहां जो प्रीसाइडिंग ऑफिसर्स हैं, उनको भी कैसे मदद रूप होना, उनके लिए किस प्रकार से आवश्यक उनके ट्रेनिंग के लिए काम किया जाना, उसके लिए भी काफी समय दिया और उन्होंने लगातार उनके लिए समय दिखाया। कॉमनवेल्थ पार्लियामेंट्री एसोसिएशन में भी उन्होंने भारत की डेमोक्रेटिक व्यवस्था की छाप छोड़ने में बहुत बड़ी सक्रिय भूमिका निभाई है। मुझे पूरा विश्वास है कि 21वीं सदी का यह दूसरा क्वार्टर यह सदन को बहुत कुछ कंट्रीब्यूट करना है। देश को प्रगति के पथ पर ले जाने में, विकास के लक्ष्य को प्राप्त करने में, मुझे विश्वास है कि सदन के द्वारा बहुत कुछ होगा और उसके कारण पीठाधीश सबका दायित्व बहुत बड़ा होता है। हम सबका बड़े विश्वास से मैं कह सकता हूं कि सभी साथी आप जो चाहते होंगे, उसको पूरा करने के लिए सहयोग करते रहेंगे और आपके काम को कठिनाइयों में ना परिवर्तित करें इसके लिए ताकि आप ज्यादा आउटकम दे सकते हैं और मुझे विश्वास है सब लोग इसको करेंगे और मैंने पहले भी कहा था कि हरि कृपा पर है सब कुछ और हरि तो यहां के भी है, हरि वहां के भी है और हरि यही बैठेंगे। तो हरि कृपा बनी रहे। इसी एक अपेक्षा के साथ मेरी आपको बहुत-बहुत शुभकामनाएं हैं।

बहुत-बहुत धन्यवाद!