Text of PM’s address at Bangabandhu Convention Centre

Published By : Admin | June 7, 2015 | 19:30 IST

दो दिन की मेरी यात्रा आज समाप्त हो रही है। ये मेरा एक प्रकार से इस यात्रा का आखिरी कार्यक्रम है लेकिन मुझे ऐसा लग रहा है कि सचमुच में अब यात्रा शुरू हो रही है। मेर इस दो दिन की यात्रा और बांग्लादेश के नागरिकों ने, बांग्लादेश सरकार ने, प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति जी एवं मंत्रिगण ने जिस प्रकार से मेरा स्वागत किया, सम्मान किया, ये स्वागत सम्मान, नरेंद्र मोदी नाम के एक व्यक्ति का नहीं है, सवा सौ करोड़ भारतवासियों का है।

इस दो दिन की यात्रा के बाद न सिर्फ एशिया लेकिन पूरा विश्व बारीकी से post-mortem करेगा। कोई तराजू लेकर के बैठेंगे, क्या खोया-क्या पाया लेकिन अगर एक वाक्य में मुझे कहना है तो मैं कहूंगा कि लोग सोचते थे कि हम पास-पास हैं, लेकिन अब दुनिया को स्वीकार करना पड़ेगा कि हम पास-पास भी हें, साथ-साथ भी हैं।

मेरा बांग्लादेश के साथ एक emotional attachment है, और emotional attachment ये है कि मेरे जीवन में और राजनीतिक जीवन में, हम लोगों को जिनका मार्गदर्शन मिला, जिनकी उंगली पकड़कर के चलने का हमें सौभाग्य मिला, मेरी भारत मां से सपूत, भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी जी को आज बांग्लादेश ने विशेष सम्मान दिया। और सम्मान मिला एक मुक्ति योद्धा राष्ट्रपति के हाथों से। सम्मान मिला बंग-बंधु की बेटी की उपस्थिति में। और सम्मान लेने का सौभाग्य उस व्यक्ति के पास था, जिसने जवानी में, कभी राजनीति से जिसका कोई लेना-देना नहीं था। मैं वो इंसान हूं, बहुत देर से राजनीति में आया हूं, करीब-करीब 90 के आसपास। लेकिन मुझे अपने जीवन में सबसे पहला कोई राजनीतिक कार्यक्रम में हिस्सा लेने का सौभाग्य मिला, मैं युवा था, युवा राजनीतिक गतिविधियों से जुड़ने का सौभाग्य मिला लेकिन उस समय अखबारों में पढ़ते थे, बांग्लादेश लड़ाई के संबंध में, मुक्ति योद्धाओं की लड़ाई के संबंध में, यहां पर हो रहे जुल्म के संबंध में। और जैसे आपका खून खौलता था, हमारा खून भी खौलता था। जुल्म के खिलाफ यहां जो आवाज उठ रही थी, वो हमारे कान में गूंजती थी और यहां से उठी वो आवाज, इस प्रकार से हमें प्रेरित किया और मैं जीवन में पहली बार गांव छोड़कर के दिल्ली में भारतीय जनसंघ के द्वारा बांग्लादेश की मान्यता के लिए जो सत्याग्रह चल रहा था, उस सत्याग्रही बनने का सौभाग्य मुझे मिला था।

मेरे जीवन की ये पहली राजनीतिक गतिविधि थी, उसके बाद भी कभी नहीं की, कई सालों तक नहीं की, मैं सामाजिक जीवन से जुड़ा था और उस अर्थ में शायद ऊपर वाले की इच्छा होगी कि वो नाता आज नये रूप में मुझे आपके साथ जोड़ दिया। दुनिया में समृद्ध देशों की गतिविधियों की चर्चा बहुत होती है, लेकिन हम जैसे गरीब देश उसकी गतिविधियों पर दुनिया की नजर बहुत कम जाती है। बांग्ला,देश ने इस संघर्ष में से निकल करके विकास की यात्रा को आरंभ किया। और इतने कम समय में.. और यहां पर राजनीतिक संकट बार-बार आए हैं, उतार-चढ़ाव बार-बार आए हैं। सिर्फ मुक्ति यौद्धाओं वाली उस लड़ाई के बाद भी कठिनाईयां रही है। प्राकृतिक आपदाएं आए दिन बांग्लाादेश में अपनी पहचान बनाती रहती है। इन संकटों के बावजूद भी बांग्लापदेश ने कई क्षेत्रों में अप्रतीम काम किया है। लोगों का ध्याटन यहां की Garments Industries की तरफ तो जाता है और वे बधाई के पात्र हैं सारे और मैं भी चीन गया था तो वहां की एक Readymade Garment के एक CEO मुझे बता रहे थे कि मोदी जी आपका तो सवा सौ करोड़ का देश है। आप कर क्याm रहे हो? मैंने कहा क्याे हुआ भाई। अरे बोले तुम्हाहरे बगल में 17 करोड़ का देश आज दुनिया में नम्बेर-2 पर खड़ा है Garment की दुनिया में।

किसी को यह लगता होगा कि उस समय मोदी को क्यात लगा होगा। मैं दिल से कहता हूं, मुझे इतना आनंद आया, इतना आनंद आया... और आनंद इस बात का था कि हम जो कि Developing Countries की रेखा में जीने वाले लोग हैं वहां हमारा एक साथी, मेरा पडोसी, यह इतना बड़ा पराक्रम करें तो हमें आनंद आना स्वाेभाविक है। सूरज पहले यहां निकलता है लेकिन बाद में किरणें हमारे यहां भी तो पहुंचती है और इसलिए यहां जितना विकास होगा, जितनी ऊंचाईयां प्राप्तो करेंगे, वो रोशनी हम तक आने ही वाली है, यह मुझे पूरा भरोसा है। और इस अर्थ में, मैं कहता हूं आज Infant Mortality Rate हमारे देश में कई राज्यों को बांग्लाऊदेश से सीखने जैसा है कि उन्हों ने जिस प्रकार से Infant Mortality Rate के संबंध में, nutrition के संबंध में even girl child education के संबंध में... यह बातें हैं जो स्वामभाविक रूप से... क्योंेकि जब बांग्लाeदेश आता है न तो हमें इस बात का हमेशा गर्व होता है कि मेरे भी देश का कोई जवान था, जिसने अपना रक्तब दिया था इस बांग्लारदेश के लिए।

जिस बांग्लाादेश के सपनों को मेरे देश के जवानों ने खून से सींचा हो, उस बांग्लारदेश की तरक्कीभ - हम लोगों के लिए इससे बड़े कोई आनंद का विषय नहीं हो सकता। इससे बड़ा कोई गौरव का विषय नहीं हो सकता।

मैं प्रधानमंत्री जी को विशेष रूप से बधाई देना चाहता हूं। उन्हों ने एकमात्र अपना गोल बनाया है – Development, विकास। और लगातार 6% Growth कोई छोटी बात नहीं है। यह छोटा achievement नहीं है और इसके कारण जो बांग्लाऔदेश की आर्थिक व्यhवस्थाा की मजबूत नींव तैयार हो रही है, जो आने वाले दिनों में यहां के भविष्य को बनाने वाली है। यह मैं साफ-साफ देख सकता हूं। भारत और बांग्ला देश दोनों एक विषय में बड़े भाग्यहशाली है। भारत के पास भी 65% Population 35 साल से कम उम्र की है और बांग्लामदेश के पास भी 65% Population 35 साल से कम उम्र की है। यह जवानी से भरा हुआ देश है। उसके सपने भी जवान है। जिस देश के पास ऐसा सामर्थ्‍य हो और विकास को समर्पित नेतृत्वे हो, कुछ कर-गुजरने की उमंग हो, मैं विश्वायस से कहता हूं अब बांग्लाददेश की विकास यात्रा कभी रूक नहीं सकती है।

आज वक्तत बदल चुका है, दुनिया बदल चुकी है कोई एक कालखंड था, जब विस्तारवाद देशों की शक्ति की पहचान माना जाता था, कौन कितना फैलता है, कौन कहां-कहां तक पहुंचता है, कौन कितना सितम और जुल्म कर सकता है, उसके आधार पर दुनिया की ताकत नापी जाती थी। आज वक्त बदल चुका है, इस युग में, इस समय विस्तारवाद को कोई स्थान नहीं है, आज दुनिया को विकासवाद चाहिए, विस्तारवाद नहीं विकास वाद का युग है और यही मूलभूत चिंतन है।

बहुत कम लोग इस बात का मूल्यांकन कर पाए हैं कि भारत और बांग्लादेश के बीच Land boundary agreement क्या ये सिर्फ जमीन विवाद का समझौता हुआ है? अगर किसी को ये लगता है कि दो-चार किलोमीटर जमीन इधर गई और दो-चार किलोमीटर जमीन उधर गई, ये वो समझौता नहीं है, ये समझौता दिलों को जोड़ने वाला समझौता है। दुनिया में सारे युद्ध जमीन के लिए हुए हैं और ये एक देश है, बांग्लादेश भी गर्व करता है। मुझे आज आपके Tourism Minister मिले थे, वो कह रहे थे, हम बुद्ध circuit शुरू करना चाहते हैं Tourism के लिए। भारत भी, बुद्ध के बिना भारत अधूरा है और जहां बुद्ध है, वहां युद्ध नहीं हो सकता है और इसलिए दुनिया जमीन के लिए लड़ती हो, मरती हो लेकिन हम दो देश हैं जो जमीन को ही हमारे संबंधों का सेतु बनाकर के खड़ा कर देते हैं।

मैंने आज यहां एक अखबार में, यहां के किसी एक writer ने लिखा था, मैं पूरा तो पढ़ नहीं पाया हूं लेकिन एक headline पढ़ी, उन्होंने बांग्लादेश और भारत के जमीन के समझौते को Berlin की दीवार गिरने की घटना के साथ तुलना की है। मैं कहता हूं कि उन्होंने बड़ी सोच के साथ रखा है। यही घटना दुनिया के किसी और भू-भाग में होता तो विश्व में बड़ी चर्चा हो जाती, पता नहीं Nobel Prize देने के लिए रास्ते खोले जाते, हमें कोई नहीं पूछेगा क्योंकि हम गरीब देश के लोग हैं लेकिन गरीब होने के बाद भी अगर हम मिलके चलेंगे, साथ-साथ चलेंगे, अपने सपनों को संजोने के लिए कोशिश करते रहेंगे, दुनिया हमें स्वीकार करे या न करे, दुनिया को ये बात को मानना पड़ेगा कि यही लोग हैं जो अपने बल-बूते पर दुनिया में अपना रास्ता खोजते हैं, रास्ता बनाते हैं, रास्ते पर चल पड़ते हैं।

यहां के नौजवान के सपने हैं। वक्त बहुत बदल चुका है, आप किसी भी नौजवान को पूछिए, उसके expression को पूछिए, आज 20 साल, 25 साल पहले जो हम सोचते थे, वो जवाब आज नहीं मिलेगा, वो कुछ और सोचता है, वो दुनिया को अपनी बाहों में कर लेना चाहता है, वो जगत के साथ जुड़ना चाहता है, वक्त बदल चुका है। ये हम लोगों का दायित्व है कि हमारी युवा पीढ़ी को विकास के लिए हम अवसर दें, शिक्षा के लिए अवसर दें, नई चीजों को प्राप्त करने के लिए अवसर दें। आज में जिस Dhaka University में आया हूं और मुझे आपने निमंत्रित किया है, यही तो Dhaka University है, जिसने बांग्लादेश को ज्ञान से संवारा है, बुद्धि से संवारा है। व्यक्ति-व्यक्ति में ज्ञान दीप जलाने का काम इस University ने किया है।

बीते हुए कल को हम इससे जुड़े थे, हमारे यहां भी जो लोग हैं, वो यहीं से शिक्षा-दीक्षा लेके आए थे, हर एक का नाम हम गर्व से कहते हैं और उसी प्रकार से आने वाले दिनों में भी जैसे अभी Vice Chancellor जी बताए थे cosmography के लिए Dhaka University के साथ मिलकर के काम करने वाले हैं क्योंकि Blue Economy ये आने वाले समय का एक बहुत बड़ा क्षेत्र है, उस Blue Economy पर कैसे हम मिलकर के बल दें, हमारी सामुद्रिक शक्ति, हम सार्क देश में से पांच देश ऐसे हैं, जो समुद्र से सटे हुए हैं। अगर हम समुद्र से सटे हुए देश हैं, हम Blue Economy को एक सामूहिक ताकत बनकर के काम काम करें, हम दुनिया को बहुत कुछ दे सकते हें और हमारी आने वाली पीढ़ी को विकास को नए अवसर दे सकते हैं, हमारा उस दिशा में प्रयास होना चाहिए।

हम पिछले दिनों नेपाल में मिले थे सार्क summit था, उस समय एक विषय पर मैंने बहुत बल दिया था, हम एक प्रस्ताव पारित करना चाहता थे और प्रस्ताव था connectivity का, हम सार्क देश एक-दूसरे से, हमारी connectivity हो, openness हो, आना-जाना सरल हो, उस पर कुछ फैसले करना चाहता था खैर हर कोई तो बांग्लादेश होता नहीं है, हमारी गाड़ी पटरी पर नहीं चढ़ी लेकिन अब पटरी पर नहीं चढ़ी तो हम इंतजार करके बैठे क्या? आज मैं गर्व के साथ कहता हूं जो काम हम सार्क में विधिवत रूप से नहीं कर पाए थे लेकिन आज बांग्लादेश, भारत, नेपाल और भूटान, चार देशों ने अपनी connectivity की priority तय कर ली है और ये हम मान के चलें सारे European Union की बात करते हैं, European Union की economy में जो बदलाव आया, उसके मूल में एक कारण ये है easy connectivity, सार्क देश भी इसी प्रकार से आगे बढ़ सकते हैं। सब चले या न चलें, कुछ तो चल पड़े हैं और इसलिए बांग्लादेश-भारत हम connectivity के लिए आज निर्णय लिए हैं।

रेल मार्ग हो, road मार्ग हो, हवाई मार्ग हो और अब तो निर्णय़ कर लिया समुद्री मार्ग का भी, वरना हमारा क्या हाल था, हिंदुस्तान में कुछ भेजना था तो via सिंगापुर भेजते थे। अब हिंदुस्तान और बांग्लादेश आमने-सामने ले जाओ, वो कहेगा भई ले जाओ और इसलिए मैं कहता हूं कितना बड़ा बदलाव आ रहा है ये हम साफ देख सकते हैं और ये बात निश्चित है, आज कोई भी देश कितना ही सामर्थ्यवान क्यों न हो, उसके पास धन-बल हो, जन-बल हो, शस्त्रों का बल हो तो भी आज वो अकेला कुछ नहीं कर सकता है। पूरी दुनिया inter dependent हो गई है, एक-दूसरे के सहारे के बिना अब विश्व नहीं चल सकता है और इसलिए भारत और बांग्लादेश ने इस भविष्य को पहचाना है, जाना है।

भारत और बांग्लादेश का vision साफ है और इसलिए हमने 22 जो निर्णय किए हैं, ये 22 निर्णय नंबर की दृष्टि से संतोष हो, ये बात नहीं है, एक से बढ़कर के एक सारे निर्णय़ आने वाले भविष्य का बदलाव करने के लिए बहुत बड़ी ताकत के रूप में उभरने वाले हैं, ये मैं आज विश्वास से कहकर के जाता हूं और मैं इसके लिए बांग्लादेश के दीर्घ दृष्टा नेतृत्व का अभिनंदन करता हूं, उनका धन्यवाद करता हूं कि हम इस प्रकार के महत्वपूर्ण फैसले कर पाए हैं। आज अगर हम satellite के द्वारा photo लें तो आप देखेंगे, ये सार्क के ही देश ऐसे हैं including India, जहां अभी भी अंधेरा नजर आता है, क्या हमारे यहां उजाला नहीं होना चाहिए? क्या हमारे यहां गरीब के घर में भी बिजली का दीया जलना चाहिए कि नहीं जलना चाहिए? और अगर ये जलना है तो बिजली चाहिए और बिजली प्राप्त होना, हम अगर मिलकर के काम करें, नेपाल हो, भूटान हो, भारत हो, बांग्लादेश हो - मैं नहीं मानता हूं कि फिर कभी इस इलाके में अंधेरा रह सकता है और साथ-साथ जब मैं कहता हूं, जब हमने त्रिपुरा में बिजली का कारखाना लगाया, अब वो बिजली कारखाने के बड़े-बड़े यंत्र ले जाने थे, बांग्लादेश की मदद नहीं मिलती तो हम वहां नहीं ले जा सकते थे। बांग्लादेश ने हमारी मदद की, समुद्री मार्ग से हमें जाने दिया और आज वहां बिजली का कारखाना शुरू हो गया और 100 मेगावाट बिजली बांग्लादेश को आना शुरू हो गया। 500 मेगावाट बिजली देने का हमने वादा किया था, कल हमने तय किया हे, 1000 मेगावाट बिजली बांग्लादेश को हम देंगे।

हम दोनों देश एक प्रकार से भाग्यशाली हैं और हम पर तपते सूरज की बड़ी कृपा है, अब तक तो वो परेशानी का कारण था लेकिन वही सूरज अब शक्ति का कारण बन गया है, Solar energy हमारी बहुत बड़ो वो दौलत हो सकती है। भारत और बांग्लादेश दोनों Solar energy के क्षेत्र में बहुत ही aggressively आगे बढ़ना चाहते हैं और दुनिया जो climate change के लिए चर्चा करती रहती है, हम धरती पर उसका अंत, जवाब ढूंढते हैं और जवाब पाकर के रहेंगे, हम उस दिशा में आगे बढ़ना चाहते हैं। मेरा कहना का तात्पर्य ये है कि हम यहां की जो युवा शक्ति है, यहां का जो talent है, भारत के पास जो शक्ति है, भारत के पास जो talent है, इसे जोड़कर के आगे बढ़ना चाहते हैं।

कल प्रधानमंत्री जी कह रही थीं कि space में अब हम जाना चाहते हैं, हम बंग-बंधु एक satellite की ओर जाना चाहते हैं, मैं उनसे ऐसे ही मजाक में कहा कि बंग-बंधु हमारे बिना कैसे हो सकते हैं, बंग- बंधु के साथ भारत बंधु भी तो रहेगा और मैंने कहा, हम आपके space programme में जुड़ना चाहते हैं। भारत ने space की ताकत परिचित करवा दी है अपनी दुनिया में, हमारी वो शक्ति है, वो बांग्लादेश के काम आनी चाहिए, मैंने कल सामने से offer किया है और हमने, मैंने सार्क देशों को कहा था, हम एक सार्क satellite छोड़ेंगे 2016 तक उस काम को हम सफलतापूर्वक करना चाहते हैं। उन सार्क satellite के द्वारा इन सार्क देशों को, यहां के किसानों को weather के संबंध में जानकारी मिले, कोई सामुद्रिक तुफान की संभावना हो, कोई हवा तेज चलने वाली हो, cyclone आने वाले हो, उसका पूर्वानुमान हो, शिक्षा के लिए काम आए, health के लिए काम आए, ये सार्क satellite भारत, सार्क देशों के लिए मतलब बांग्लादेश के लिए आने वाले दिनों में लाने वाला है।

यानि विकास की जो हमारी कल्पना है, हम जिस रूप में आगे बढ़ना चाहते हैं और इसलिए मैं कहता हूं, हम पास-पास भी हैं, साथ-साथ भी हैं। बांग्लादेश ने अनेक खासकर के women empowerment के लिए जो काम किए हैं, मैं समझता हूं वो काबिले-दाद हैं। यहां के पुरुषों को कभी ईर्ष्या आती होगी कि प्रधानमंत्री महिला, Speaker महिला, leader of the opposition महिला, opposition party की leader महिला है और यहां की Pro Vice Chancellor महिला - ये सुनकर के गर्व होता है जी। हम Asian countries आज भी दुनिया के कुछ देशों में महिला के प्रमुख के रूप में स्वीकार करने की मानसिकता कम है, ये भू-भाग दुनिया में ऐसा है कि जहां पर नारी को राष्ट्र का नेतृत्व करने का अवसर बार-बार मिला है। चाहे हिंदुस्तान हो, बांग्लादेश हो, पाकिस्तान हो, इंडोनेशिया हो, आयरलैंड हो। अब देखिए इस भू-भाग में श्रीलंका, ये विशेषता है हमारी लेकिन फिर भी हम कहीं और होते तो दुनिया में जय-जयकार होता लेकिन हम गरीब हैं, हम पिछड़े हैं, कोई हमारी ओर देखने को तैयार नहीं, हम सम्मान से, गर्व से खड़े हो कि दुनिया को दिखाने के लिए हमारे पास ये ताकत है, दुनिया को मानना पड़ेगा कि women empowerment में भी हम दुनिया से कम नहीं हैं।

मैं दो दिन से यहां इधर-उधर जा रहा हूं तो मैं एक bill board देख रहा था और एक बिटिया, उसकी बड़ी तस्वीर लगी है और लिखा है, I am Made in Bangladesh आपकी महिला क्रिकेटर सलमा खातून को वो चेहरा - ये women empowerment है, ये youth की power का परिचय करवाता है और ये जब सुनते हैं तो कितना गर्व होता है। हमारे यहां, अभी-अभी क्रिकेट का दौर समाप्त हुआ और जब बांग्लादेश का नौजवान अल हसन, देखिए बांग्लादेश विकास करने की उसकी गति कितनी तेज है, क्रिकेट की दुनिया में बांग्लादेश की entry जरा देर से हुई लेकिन आज हिंदुस्तान समेत सभी क्रिकेट टीमों को बांग्लादेश की क्रिकेट टीम को कम आंकने की हिम्मत नहीं है। देर से आए लेकिन आप ने उन प्रमुख देशों में अपनी जगह बना ली है, ये बांग्लादेश की ताकत है।

कुछ वर्ष पहले मैंने जब निषाद मजूमदार और वासपिया, भूल तो नहीं गए न आप लोग, गरीब परिवार को दो बिटियां, गरीब परिवार से आईं और एवरेस्ट जाकर के आ गईं, ये बांग्लादेश की ताकत है और मुझे गर्व है कि मैं उस बांग्लादेश के साथ-साथ चलने के लिए आया हूं।

ये सामर्थ्य होता है कि हमें नई शक्ति मिलती है, कुछ बातें हैं जो अभी भी करनी है, ऐसा नहीं कि भई मैं यहां 40 घंटे में सबकुछ करके निकल जाऊंगा.. न... कुछ करना बाकी है। क्योंबकि मुझे सवा सौ करोड़ का देश है, अनेक राज्ये हैं, सबको साथ लेकर चलना होता है और बांग्ला देश के साथ-साथ चलता हूं तो मेरे राज्यों के भी तो साथ-साथ चलना होता है।

और जबस भी बांग्ला देश आया तो स्वाोभाविक है, तिस्ताथ के पानी की चर्चा होना बड़ा स्वाोभाविक है। गंगा और ब्रह्मपुत्र के पानी के संबंध में हम साथ चले हैं। और मुझे भरोसा है, और मेरा तो मत है - पंछी, पवन और पानी - तीन को वीजा नहीं लगता है। और इसलिए पानी यह राजनीतिक मुद्दा नहीं हो सकता है, पानी यह मानवता के आधार पर होता है, मानवीय मूल्योंी के आधार पर होता है। और उसको मानवीय मूल्यों के आधार पर समस्याै का समाधान करने का आधार हम मिलकर के करेंगे मुझे विश्वासस है रास्ते निकलेंगे, मैं विश्वाकस दिलाता हूं। कोशिश जारी रहनी चाहिए। विश्वातस टूटना नहीं चाहिए, विश्वागस डिगना नहीं चाहिए.. परिणाम मिलकर के रहता है।

कभी-कभार सीमा पर कुछ घटनाएं ऐसी हो जाती हैं कि दोनों तरफ तनाव हो जाता है। किसी भी निर्दोष की मौत हर किसी के लिए पीड़ादायी होती है। गोली यहां से चली या वहां से चली, उसका महत्व नहीं है, मरने वाला गरीब होता है, इंसान होता है। और इसलिए हमारी सीमा पर ऐसी वारदात न हो, और उसके कारण हमारे बीच तनाव पैदा करना चाहने वाले तत्वोंी को ताकत न मिलें यह हम दोनों देशों की जिम्मे दारी है और हम निभाएंगे, निभाते रहेंगे। ऐसा मुझे विश्वा स है।

इस बार कई महत्व्पूर्ण निर्णय हुए Human Trafficking के संबंध में कठोरता से काम लेने के लिए दोनों देशों ने निर्णय लिया है। illegal movement जो होता है, उसके कारण भारत में भी कई राज्यों में उसके कारण तनाव पैदा होता है। हमने दोनों ने मिलकर के इसकी चिंता व्यकक्त‍ की। Fake Currency करे कोई, खाएं कोई और बदनामी बांग्लाादेश को मिले? अब बांग्ला देश सरकार इस प्रकार की चीजों को चलने देना नहीं चाहती है। मैं बांग्ला देश सरकार की तारीफ करता हूं, उनका अभिनंदन करता हूं। यही तो चीजें हैं जो हमें साथ-साथ चलने के लिए हमारा हौसला बुलंद करते हैं और आज साथ-साथ चलते हैं, कल साथ-साथ दौड़ना भी शुरू कर देंगे। इसी से तो ताकत आती है, और उसी ताकत को लेकर के हम आगे बढ़ना चाहते हैं।

इतना ही नहीं, विकास की जब नई ऊंचाइयों को जब हमें पार करना है Defense के क्षेत्र में हम सहयोग कर रहे हैं, सहयोग करना चाहते हैं, सहयोग बढ़ाने चाहते हैं। इस बार हमने line of credit two billion dollar किया है। और यह करने का हमारा हौंसला बुलंद इसलिए हुआ है कि पहले जो line of credit दी थी अगर बहुत बढि़या ढंग से उसको किसी ने उपयोग किया तो बांग्लाeदेश ने किया है। और इसलिए यह नया जो line of credit का हमारा निर्णय है मुझे पूरा भरोसा है कि बांग्लाादेश उसका सही-सही उपयोग करेगा। हमने एक बड़ा महत्वणपूर्ण निर्णय किया है India SEZ बनाने का। भारत के लोग यहां आए पूंजी निवेश करे, यहां के नौजवानों को रोजगार दे। यहां का जो कच्चान माल है, उसको मूल्यं वृद्धि करे। यहां की economy को लाभ हो और भारत और बांग्ला्देश में trade deficit का जो फासला है, उसको कम करने में बहुत बड़ी ताकत बन जाएगा। हम नहीं चाहते कि बांग्ला्देश हिंदुस्ता न से तो माल लेता रहे और बांग्लाकदेश से कम सामान हिंदुस्ताेन आए, नहीं.. हम बराबरी चाहते हैं। हम भी चहाते हैं बांग्लाशदेश का माल हिंदुस्ता न में बिकना चाहिए। हम बराबरी से आपके मित्र राष्ट्र के रूप में खड़े हैं आपके साथ। और इसलिए हमारी भूमिका यही है कि हम किस प्रकार से आगे बढ़े, किस प्रकार से हम साथ चले, उसी को लेकर के हम चलना चाहते हैं।

आज दुनिया में कुछ संकटों का सामना भी हमें करना है। आने वाले दिनों में United Nation अपनी 70वीं सालग्रिहा मनाने जा रहा है। 70 साल की यात्रा कम नहीं होती। प्रथम और दूसरे विश्वर युद्ध की छाया में United Nation का जन्मय हुआ। तब दुनिया की स्थिति अलग थी, उस समय Industrial Revolution हुआ। आज Internet Revolution का कालखंड है। वक्तर बदल चुका है, लेकिन UN वहीं का वहीं है। आज भी UN पिछली शताब्दीं के कानून से चलता है, कई शताब्दी बदल चुकी, लेकिन UN नहीं बदला है। हम जो गरीब देश हैं उन्होंेने मिल बैठ करके United Nation भी अपनी 70वीं सालगिरहा बनाते समय विश्वह को नये नजरिए से देखे। बांग्लाiदेश जैसे छोटे-छोटे देश भारत बांग्ला देश जैसे गरीबी से लड़ रहे देश सार्क के देश जो गरीबी से जूझ रहे हैं, लड़ाई लड़ रहे हैं। उनकी समस्यासओं की ओर विश्वे ध्या न दे।

और इसलिए ऐसे सभी देशों ने मिलकर के हमारी दुनिया को, युद्ध होता है तो कैसे काम करना है यह तो आता है, सीमा पर लड़ाई कैसे होगी, सेना क्याे करेगी, वायु सेना क्याक करेगी सब आता है। लेकिन Terrorism से कैसे निपटना अभी तक दुनिया को समझ नहीं आ रहा है कि रास्ते क्याि है? और UN भी गाइड नहीं कर पा रहा है। मुझे खुशी की बात है कि बांग्ला देश की प्रधानमंत्री महिला होने के बावजूद भी डंके की चोट पर कह रही है कि terrorism के संबंध में मेरा जीरो tolerance है। मैं शेख हसीना जी को अभिनंदन करता हूं जो हिम्म त के साथ यह कहे कि terrorism के साथ मेरा जीरो tolerance है। Terrorism इसको कोई सीमा नहीं हैं, भू-भाग नहीं है। भारत तो पिछले 40 साल से इसके कारण परेशान है। कितने निर्दोष लोगों की जिंदगी तबाह हो जाती है, कितना रक्तस बह रहा है और Terrorism से जुड़े हुए लोग क्याह पाया उन्होंरने? क्यास दिया दुनिया को उन्हों ने? और इसलिए Terrorism का रूप ऐसा है, जिसे कोई सीमाएं नहीं है। कोई भूभाग नहीं है। न उसके कोई आदर्श है, न कोई मूल्यई है, न कोई संस्कृ ति है, न कोई परंपरा है। अगर है तो उनका एक ही इरादा है और वो है मानवता की दुश्म नी। Terrorism मानवता का दुश्मोन है और इसलिए हम किसी भी पंत साम्प्रददाय के क्योंr न हो, किसी भी पूजा पद्धति को क्यों न मानते हो। हम पूजा-पद्धति में विश्वा्स करते हो या न करते हो। हम ईश्वतर या अल्ला ह में विश्वापस करते हो या न करते हो, लेकिन मानवता के खिलाफ यह जो लड़ाई चली है मानवतावादी शक्तियों का एक होना बहुत आवश्यतक है, जो भी मानवता में विश्वाचस करते हैं उन सभी देशों को एक होना बहुत अनिवार्य हुआ है। और हम इस आतंकवाद इस आतंकवादी मानसिकता इसको Isolate करे, उसको निहत्थेआ करे और मानवता की रक्षा के लिए हम आगे बढ़े। और इस काम में बांग्लावदेश की सरकार ने जीरो tolerance यह जो संकल्पे किया है मैं उनका गौरव करता हूं, मैं उनका अभिनंदन करता हूं।

और मैं साफ मानता हूं बांग्लाकदेश और भारत के बीच न सिर्फ बांग्लांदेश और भारत के बीच सार्क देशों में भी हमें Tourism को बढ़ावा देना चाहिए। Tourism को हमने बढ़ावा देना चाहिए। और Tourism है, Tourism Unites the World, Terrorism divides the World. हम एक दूसरे को जाने, पहचाने नई पीढ़ी मिले-जुले, बात करें, गर्व करें। और इसलिए terrorism के सामने लड़ने के लिए हमारा मेल-जोल जितना बढ़ेगा, एक दूसरे को पहचानने का अवसर जितना मिलेगा, एक नई शक्ति उसमें से उभर कर आती हैं। उस नई शक्ति को हमने आगे बढ़ाना है। और देश की दिशा में हमने प्रयास किया है।

UN Security Council में अभी भी हिंदुस्ता न को जगह नहीं मिली रही है। Permanent Membership नहीं मिल रही है। आप कल्पcना कर सकते हैं दुनिया की 1/6 Population - हर छठा व्यैक्ति हिंदुस्ता नी है, लेकिन उसको दुनिया की शांति के संबंध में चर्चा करने का हक नहीं है। कैसी सोच है? और वो देश...और मैं डंके की चोट पर दुनिया के सामने आंख मिलाकर के कह रहा हूं, वक्तो बदल चुका है, समय से पहले जान जाइये। हिंदुस्तानन वो देश है जो कभी जमीन के लिए किसी पर हमला नहीं किया है न कभी लड़ाई लड़ी है। हम प्रथम विश्वद युद्ध में 13 लाख हिंदुस्ताैन की सेना के जवान प्रथम विश्वु युद्ध में जुड़े, अपने लिए नहीं। भारत की सत्ताए बचाने के लिए नहीं है, भारत का भू-भाग बढ़ाने के लिए नहीं है। किसी और के लिए लड़े किसी और के लिए मरे और करीब-करीब 75 हजार लोग शहीद हुए, 75 हजार लोग, प्रथम विश्व युद्ध में। उसके बावजूद भी दुनिया में पूछ रही है शांति के लिए? हम विश्व की शांति के लिए उपयोगी है या नहीं, उसके लिए हमें सबूत देने पड़ रहे हैं?

द्वितीय विश्वि युद्ध हुआ 15 लाख से भी ज्याूदा हिंदुस्ता न की फौज किसी के लिए लड़ी, किसी के लिए मरी, किसी दुनिया के देश में जाकर के मरी। और उस समय हम सब एक थे, बांग्ला देश के भी बच्चेि थे उसमें जिन्हों ने द्वितीय विश्वं युद्ध में बलिदान दिए। तब विभाजन नहीं हुआ था, हम सब एक थे। करीब 90 हजार हमारे नौजवान उस युद्ध में शहीद हुए। आज भी United Nations बड़े गर्व से कहता है कि Peace keeping force उसमें अगर सबसे उत्तथम काम है तो भारत की सेना का होता है, उनके discipline का होता है। उसके बावजूद भी security council में permanent सीट के लिए भारत को तरसना पड़ता है।

इतना ही नहीं मैं दुनिया में क्या कभी कोई घटना मिल सकती है कि बांग्लाादेश में जब मुक्ति योद्धा अपना रक्तc बहा रहे थे अपनी जवानी जान की बाजी मुक्ति योद्धा लगा रहे थे। पता नहीं था कि कभी बांग्लानदेश बनेगा, कभी सत्ताा के सिंहासन पर जाने का अवसर मिलेगा। “एक अमार सोनार बांग्लाा” की प्रेरणा थी, बंगबंधू का नेतृत्वव था और हर बंगाली मरने के लिए तैयार हुआ था। उन दिनों को याद करें। हमारी आने वाली पीढ़ी को बताएं कि हम ही तो वो लोग थे। वो एक-एक मुक्ति योद्धा यहां बैठे हैं, मैं उनको नमन करता हूं और उनके साथ कंधे से कंधे मिलाकर के हिंदुस्तादन की फौज ने अपना रक्तब बहाया। और कोई कह नहीं सकता था कि यह रक्ता मुक्ति योद्धा का है। यह रक्तअ भारत की सेना के जवान का है। कोई फर्क महसूस नहीं होता था वो भावना की प्रबल उमंग थी।

और इतिहास देखिए 90 हजार जिन लोगों ने बांग्लातदेश के नागरिकों पर जुल्म किया था, ऐसे 90 हजार सेना को आत्मोसमर्पण के लिए भारत की सेना ने मजबूर किया था। आप कल्पनना कर सकते हैं जो पाकिस्ताकन आए दिन हिंदुस्तानन को परेशान करता रहता है, नाको दम ला देता है, terrorism को बढ़ावा की घटनाएं घटती रहती है। 90 हजार सैन्यज उसके कब्जेप में था, अगर विकृत मानसिकता होती तो पता नहीं निर्णय क्या करता। आज एक हवाई जहाज को कोई हाइजैक कर दे न, तो 25, 50, 100 Passenger के बदले में दुनिया भर की मांगे मनवा ले सकता है। भारत के पास 90 हजार सैनिक पाकिस्तारन के कब्जेा में थे, लेकिन यह हिंदुस्ता न का चरित्र देखिए, हिंदुस्ताजन की सेना का चरित्र देखिए। हमने बांग्लाजदेश के विकास की चिंता की, बांग्ला्देश के स्वा0भिमान की चिंता की, बांग्ला‍देश की धरती का उपयोग हमने पाकिस्तािन पर गोलियां चलाने के लिए नहीं किया। हमने बांग्ला देश के स्वािभिमान के लिए, मुक्ति यौद्धाओं के लिए लड़ाई लड़ी लेकिन उन 90 हजार का blackmail करके पाकिस्ताान के खिलाफ लड़ने के लिए हमने बांग्ला देश की भूमि का उपयोग नहीं किया है। क्यों्? हम चाहते थे कि बांग्लागदेश बंगबंधू के नेतृत्व9 में आगे बढ़े, विकास की नई ऊंचाईयों को पार करे। यह हमारा सपना था और इसलिए हमने हमारे सपनों को चूर कर दिया। हमारी मुसीबतों को हमने दफना दिया। और हमने 90 हजार सैनिक वापस दे दिए, 90 हजार सैनिक वापस देने की एकमात्र घटना की ताकत इतनी है कि पूरे विश्व ने भारत की शांति के प्रति प्रतिबद्धता कितनी है, विश्व शांति के लिए प्रतिबद्धता कितनी है, इसको नापने के लिए ये एक घटना काफी है और भारत को permanent membership के लिए रास्ते खुल जाने चाहिए. लेकिन मुझे मालूम है गरीब देशों को, developing countries को, हम जैसे इस इलाके में दूर-सदूर पड़े हुए लोगों को मिल बैठकर के लड़ाईय़ां पड़ेंगी। विश्व के रंगमंच पर हम सबको एक ताकत बनकर के उभरना पड़ेगा, हमारी समस्याओं का समाधान करने के लिए हम अपने आप कंधे से कंधा मिलाकर के समस्याओं का समाधान कर सकते हें। किसी की मदद से अगर दो साल में हो सकता है तो किसी की मदद के बिना 5 साल में भी तो होकर के रहेगा, हम झुकने वाले नहीं हैं।

विकास के रास्ते पर हमें चलना है, साथ मिलकर के चलना है और मेरी तो पहले दिन, हमारे यहां एक कहावत है हिंदुस्तान में, “पुत्र के लक्षण पालने में” यानि के जन्मते ही झूले में जो बच्चा होता है उसी से ही पता चला जाता है कि आगे चलकर के क्या होगा, ऐसी कहावत है शायद बांग्ला में भी होगी। मेरी सरकार का जन्म नहीं हुआ था, अभी तो जन्म होना बाकी था लेकिन हमने सार्क देशों के नेताओं को शपथ समारोह में बुलाया, सभी सार्क देशों को निमंत्रित किया, सम्मानपूर्वक निमंत्रित किया और शपथ उनके साक्ष्य में लिया, पहले ही दिन हमने संदेश दे दिया था कि हम सार्क देशों के साथ, मित्रता के साथ-साथ चलने के लिए निर्णायक हैं और हम चलना चाहते हैं ये भूमिका लेकर के हम चलते हैं, पहले ही दिन हमने परिचय करवा दिया है।

ये एक ऐसा भू-भाग है जिसके पास दुनिया को बहुत कुछ देने की ताकत है और उसी ताकत के भरोसे, हमारे पास क्या नहीं है? हमारे बीच एकता से हमें जोड़ने वाली ताकत कितनी तेज हैं, कला, संस्कृति, खान-पान, सब चीज, कोई ये सोच सकता है कि एक ही कवि दो देश के राष्ट्रगीत का रचियता हो? है, ये ही तो है, हमारे एकत्व को जोड़ता है, हम हमें जोड़ने वाली चीजों को उजागर करें, हमें जोड़ने वाली चीजों को लेकर के चलें और हम एक शक्ति बनकर के उभरें और विकास के मार्ग पर चलें और खुशी की बात है आपके प्रधानमंत्री जी और मेरी सोच perfectly match होती है, हमारे दिमाग में एक ही विषय है, विकास, विकास, विकास, उनके दिमाग में भी एक ही विषय है विकास, विकास, विकास। उन्होंने कहा हम 2021, जब बांग्लादेश अपनी golden jubilee बनाएगी तब हम अपनी आर्थिक स्थिति को वहां पहुंचाना चाहते हैं और इसलिए लगे हुए हैं।

आपकी इमारत कितनी ही मजबूत क्यों न हो लेकिन आपकी दिवार से सटी हुई पड़ोसी की इमारत अगर कच्ची हो जाए तो आपकी कितनी ही पक्की इमारत टिक सकती है क्या? कभी नहीं टिक सकती है और इसलिए भारत की इमारत कैसी ही क्यों न हो लेकिन बांग्लादेश की ताकत, भारत की ताकत समान होनी चाहिए, समान शक्ति से दोनों आगे बढ़ने चाहिए ताकि कभी कोई संकट न आए।

मेरा ये जो प्रवास रहा, समय तो जरा कम पड़ गया लेकिन मेरे लिए ये यात्रा यादगार रही है और उस यादगार यात्रा के साथ मैं आज जब भारत लौट रहा हूं, मन में जरूर रहेगा, मैं जब आज आया तो, मुझे कई लोग कह रहे थे, मोदी जी जरा ज्यादा दिन आ जाते, अच्छा होता, कुछ हमारे ग्रामीण इलाकों में जाते तो अच्छा होता, कई सारे सुझाव मेरे पास आए हैं। मुझे भी लगता है, कुछ कम रह गया, कुछ कम पड़ गया, अच्छा होता और मुझे कल हमारे ममता जी कह रही थीं, मोदी जी बांग्लादेश की मेहमाननवाजी आप कभी भूल नहीं सकते हैं. और मैंने अनुभव किया ऐसी उत्तम मेहमाननवाजी लेकिन आखिरकर मेरे जिम्मे भी कुछ duty है तो मेहमाननवाजी कितने दिन मै भुगतु यहां?

लेकिन मैं जरूर कभी न कभी चाहूंगा कि मैं फिर से एक बार जब बांग्लादेश आऊं, तब आप के आरोंग के समय मैने सुना है, handicraft के संबंध में काफी बड़ी नामना है। कभी आरोंग जाने का मन कर जाता है, कभी मन करता है नवाखली चला जाऊं जहां महात्मा गांधी का म्यूजिम बना हुआ है, बापू का आश्रम है, कभी नवाखली चला जाऊं। मेरा मन ये भी करता है कि हो सके तो मैं कुटिबाड़ी जा पाऊं और वहां ठाकुरबाड़ी देखूं फिर पौधा नदी में नाव के ऊपर, आप में से कुछ नौजवानों के साथ विशेषकर युवा मित्रों के साथ उस क्षेत्र के देखूं और वो भी अड्डा करते हुए, बिना अड्डा बांग्लादेश की यात्रा अधूरी रहती है और आज मैं मेरी इस यात्रा के आखिरी कार्यक्रम करके मैं सीधा ही यहां से हवाई अड्डे जा रहा हूं तो मैं यहीं आपके ही कवि के शब्दों के साथ में अपनी बात को समाप्त करूंगा, “आबार आशिबो, आबार आशिबो, फिरे धान सिदिंटिर तीरे, आऐ बांग्लाय, फिरे धान सिदिंटिर तीरे, आऐ बांग्लाय”।

मैं फिर एक बार आपके प्यार के लिए, इन गहरे संबंधों के लिए, भारत और बांग्लादेश के नौजवानों के सपनों के लिए इस यात्रा को हम एक नई ताकत के साथ आगे बढ़ाएंगे। जो सपने आपने संजोए हैं, वही सपने मेरे हैं, मैं जो सपने मेरे देश के लिए देखता हूं, वही सपने मैं आपके लिए भी देखता हूं। हम दोनों देश के युवा पीढ़ी की ताकत के भरोसे उन सपनों को संजोते हुए आगे बढ़ें, इसी शुभकामनाओं के साथ जय बांग्ला, जय हिंद।

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డామన్‌లో వివిధ అభివృద్ధి పనులకు శంకుస్థాపన...జాతికి అంకితం చేసిన సందర్భంగా ప్రధానమంత్రి ప్రసంగం
June 05, 2026
The launch of projects across healthcare, aviation, tourism and infrastructure marks a new development push for Daman that will transform lives across the UT: PM
The data released today reflects the strength of India's economy, with growth of 7.7% in FY 2025–26 and 7.8% in the quarter ending March 31: PM
Even amid severe global challenges, the collective efforts of 1.4 billion Indians have ensured that India is not only sustaining itself but also staying ahead of the curve: PM
The National Family Health Survey clearly reflects the government's focus on healthcare. While most deliveries in India earlier took place outside hospitals, today over 90% of all deliveries occur in hospitals: PM
Thanks to Mission Indradhanush, child immunization coverage in India has risen from 60% before 2014 to nearly 90% today: PM

భారత్ మాతా కీ జై! 

భారత్ మాతా కీ జై!

దాద్రా, నగర్ హవేలీ, డామన్, డయ్యూ అడ్మినిస్ట్రేటర్ ప్రఫుల్ భాయ్ పటేల్, పార్లమెంటులో నా సహచరులు కళాబెన్ డెల్కర్, డామన్ మున్సిపల్ కౌన్సిల్ ప్రెసిడెంట్ దీపికా తాండేల్ , డామన్ జిల్లా పంచాయతీ చైర్మన్ ధర్మ్ బాబు పటేల్, సిల్వస్సా మున్సిపల్ కౌన్సిల్ చైర్మన్ సోమనాథ్ దేవ్ రే , దాద్రా, నగర్ హవేలీ జిల్లా పంచాయతీ చైర్‌పర్సన్ నిషా భవ్‌సార్, డయ్యూ  మున్సిపల్ కౌన్సిల్ చైర్మన్ హరీష్ కపాడియా , డయ్యూ జిల్లా పంచాయతీ చైర్‌పర్సన్ కోటియా రంజితాబెన్, పెద్ద సంఖ్యలో తరలివచ్చిన నా ప్రియమైన సోదరీ సోదరులారా,

మీరంతా ఇక్కడకు ఎలాగైతే వచ్చారో అలాగే లక్షద్వీప్‌లో కూడా పెద్ద సంఖ్యలో ప్రజలు వీడియో కాన్ఫరెన్స్ ద్వారా మనతో అనుసంధానమయ్యారు. ఈరోజు లక్షద్వీప్‌లో అభివృద్ధికి ఒక కొత్త ఆరంభం జరిగింది. లక్షద్వీప్ ప్రజల జీవితాల్లో విప్లవాత్మక మార్పులు తీసుకువచ్చే ఒక కొత్త ప్రాజెక్టును ఈరోజు ప్రారంభించడంతో పాటు కొన్ని పథకాలకు శంకుస్థాపనలు కూడా చేశాం. 

 

మిత్రులారా, 

కొన్నేళ్ల క్రితం నేను మీ మధ్యకు  వచ్చినప్పుడు, మన డామన్ వేగంతో మినీ ఇండియాగా మారుతోందని చెప్పాను. ఈరోజు చూస్తుంటే, ఎడమ వైపు మొత్తం బెంగాల్,  కుడి వైపున మొత్తం అస్సాం కనిపిస్తోంది. డామన్ నిజంగానే మినీ ఇండియాకు  సజీవ ఉదాహరణగా మారింది. ఇక్కడి వైవిధ్యం, వివిధ ప్రాంతాల నుంచి వచ్చి ఇక్కడ కలసి నివసిస్తున్న మీరంతా మొత్తం భారత్ అందమైన రూపాన్ని ఆవిష్కరిస్తున్నారు. మాకు ఆశీస్సులు అందించడానికి ఇంత పెద్ద సంఖ్యలో ఇక్కడికి తరలివచ్చినందుకు మీ అందరికీ నా హృదయపూర్వక ధన్యవాదాలు.

సోదరీ,సోదరులారా,

డామన్, డయ్యూకు అనేకసార్లు వచ్చే అవకాశం నాకు లభించింది.  దాద్రా, నగర్ హవేలీలను కూడా నేను సందర్షిస్తూనే ఉంటాను. నేను ముఖ్యమంత్రిగా లేదా ప్రధాన మంత్రిగా లేని రోజుల్లో కూడా ఇక్కడికి ఎన్నోసార్లు వచ్చేవాడిని. కానీ ఇప్పుడు నేను ఇక్కడికి వచ్చి ఇక్కడి సుపరిపాలనను, పాలనా నమూనాను చూస్తుంటే చాలా సంతోషంగా అనిపిస్తోంది. ప్రతిసారీ నేను గతంతో పోల్చి చూసుకున్నప్పుడు ఈ ప్రాంతం అభివృద్ధి పథంలో ఎన్నో మైళ్ల దూరం ముందుకు సాగిందని నాకు అనిపిస్తుంది.

మిత్రులారా, 

దశాబ్దాలుగా దాద్రా, నగర్ హవేలీ, డామన్,  డయ్యూ ప్రజలు అభివృద్ధి గురించి కలలు కన్నారు. ఆ కలలు కన్న పూర్వ తరాల వారు వెళ్లిపోయారు. కానీ, తమ తల్లిదండ్రులు, తాతముత్తాతలు కన్న కలలు ఈరోజు తమ కళ్ల ముందే సాకారం కావడం ప్రస్తుత తరం వారు స్వయంగా చూస్తున్నారు. ఈరోజు కూడా ఇక్కడ అనుసంధానం, ఆరోగ్యం, విద్య, పర్యాటకం, పట్టణ మౌలిక సదుపాయాలకు సంబంధించిన అనేక ప్రాజెక్టులను ప్రారంభించడంతో పాటు, కొన్నింటికి శంకుస్థాపనలు కూడా చేశాం. ఈ అభివృద్ధి పనులు డామన్ ప్రజలకే కాకుండా ఈ కేంద్రపాలిత ప్రాంతం మొత్తానికి జీవనాన్ని మరింత సులభతరం చేస్తాయి. యువతకు సరికొత్త అవకాశాలను సృష్టిస్తాయి. ఈ పనుల వెనుక ప్రఫుల్ భాయ్ పటేల్  దూరదృష్టి, ఆయన, ఆయన బృందం పడిన కష్టం స్పష్టంగా కనిపిస్తోంది. ఇందుకు గాను నేను ప్రఫుల్ భాయ్‌ని, ఆయన బృందాన్ని కూడా అభినందిస్తున్నాను. లక్షద్వీప్, దాద్రా, నగర్ హవేలీ ప్రజలకు ఈ సందర్భంగా నా హృదయపూర్వక అభినందనలు, శుభాకాంక్షలు.

 

మిత్రులారా, 

నేను ఈరోజు మీ మధ్యకు వచ్చిన తరుణంలో, ఒక సంతోషకరమైన వార్త అందింది. నేను ఈ ఉదయం ఢిల్లీ నుంచి బయలుదేరినప్పటికీ, ఇప్పుడే అందిన గణాంకాలు, అందిన వార్త నిజంగా ఎంతో సంతోషాన్ని కలిగిస్తున్నాయి. ఈ ఆనందాన్ని నేను మీతో కూడా పంచుకోవాలని అనుకుంటున్నాను. ఈరోజు వచ్చిన గణాంకాలు భారత ఆర్థిక వ్యవస్థ పునాది ఎంత బలంగా ఉందో స్పష్టంగా తెలియజేస్తున్నాయి. ఇప్పుడే ముగిసిన 2025-26 ఆర్థిక సంవత్సరంలో భారత్ 7.7 శాతం వృద్ధి రేటును సాధించింది. మార్చి 31తో ముగిసిన చివరి త్రైమాసికంలో  కూడా భారత వృద్ధి రేటు 7.8 శాతంగా నమోదైంది. ప్రపంచంలోనే అత్యంత వేగంగా వృద్ధి చెందుతున్న పెద్ద ఆర్థిక వ్యవస్థ మనదే. ఇది ప్రతి భారతీయుడు గర్వించదగ్గ విషయం. ఇదే మన దేశ ప్రగతి వేగం. ఈరోజు దేశం సంస్కరణల  ఎక్స్ప్రెస్ లా  దూసుకుపోతోంది. ఇంతటి భారీ మౌలిక సదుపాయాల అభివృద్ధిని దేశం నేడు కళ్లారా చూస్తోంది. పేదల సంక్షేమం కోసం ఇంత పెద్ద ఎత్తున పనులు జరుగుతున్నాయి. ఈ అన్ని ప్రయత్నాల ఫలితంగానే, ఈరోజు మన దేశం ప్రపంచంలోనే అత్యంత వేగంగా వృద్ధి చెందుతున్న పెద్ద ఆర్థిక వ్యవస్థగా ముందుకు సాగుతోంది. ప్రపంచమంతా సంక్షోభాల్లో కొట్టుమిట్టాడుతోందని, ప్రపంచ దేశాల ఆర్థిక వ్యవస్థలన్నీ ప్రశ్నార్థకంలో మునిగిపోయాయని మనందరికీ తెలుసు. అయితే, అంతర్జాతీయంగా ఇంతటి గడ్డు కాలం నడుస్తున్నప్పటికీ, 140 కోట్ల మంది దేశప్రజల సామూహిక ప్రయత్నాలతో భారత్ తనను తాను నిలబెట్టుకోవడమే కాకుండా, అందరికంటే ముందుండటంలోనూ విజయం సాధిస్తోంది. ఆర్థిక రంగంలో ఈ సరికొత్త శిఖరాన్ని అధిరోహించినందుకు దేశప్రజలందరికీ నేను ఎన్నో అభినందనలు తెలియజేస్తున్నాను. ప్రపంచవ్యాప్తంగా నెలకొన్న ఈ సంక్షోభాలను ఎదుర్కొంటూనే, మన దేశం దృఢ సంకల్పంతో, సంస్కరణ, పనితీరు, మార్పు పథంలో అత్యంత వేగంగా ముందుకు సాగుతుందని నేను దేశానికి మరోసారి హామీ ఇస్తున్నా. ఇది దేశప్రజలకు నా హామీ.

మిత్రులారా, 

ఈరోజు మనకు అభివృద్ధి ఎంత ముఖ్యమో, మన అభివృద్ధి నమూనా సుస్థిరంగా ఉండేలా చూసుకోవడం కూడా అంతే ముఖ్యం. ఈరోజు ప్రపంచ పర్యావరణ దినోత్సవం రోజున మన కేంద్రపాలిత ప్రాంతం ఈ సంకల్పాన్ని నిజం చేస్తోంది. ఈరోజు ఒకవైపు వేల కోట్ల రూపాయల విలువైన అభివృద్ధి ప్రాజెక్టులకు ఇక్కడ శంకుస్థాపనలు, ప్రారంభోత్సవాలు జరిగాయి. అదే సమయంలో, అమ్మ పేరిట ఒక మొక్క (ఏక్ పేడ్ మా కే నామ్) కార్యక్రమం కింద ఇక్కడ దాదాపు లక్షా ఒక్క చెట్లను, లక్ష మొక్కలను నాటడం జరుగుతోంది. ఇది ప్రభుత్వ భవనాలలో 100 శాతం సౌరశక్తిని వినియోగించే అద్భుతమైన ఘనతను సాధించిన కేంద్రపాలిత ప్రాంతమని చెప్పడానికి నేను ఎంతో గర్విస్తున్నాను. ఈరోజు డయ్యూలో పగటిపూట విద్యుత్ అవసరాలన్నీ కేవలం సౌరశక్తి ద్వారానే తీరుతున్నాయి, ఈ ప్రక్రియను మనం మరింత ముందుకు తీసుకెళ్లాల్సి ఉంది. ఇళ్లలో కూడా సౌరశక్తి ద్వారానే విద్యుత్ అందుబాటులోకి రావాలి. అంతేకాదు, మిగిలిన అదనపు విద్యుత్ ద్వారా కుటుంబాలు ఆదాయాన్ని కూడా గడించాలి. ఇందుకోసం రూఫ్‌టాప్ సోలార్ ప్లాంట్ల ఏర్పాటుకు శ్రీకారం చుట్టాం. ఈ విజయాలను సాధించినందుకు మీ అందరికీ అభినందనలు. 

 

మిత్రులారా, 

దీనితో పాటు, ప్రస్తుతం డామన్ ప్రజలు పరిశుభ్రత ప్రచారం నిర్వహిస్తున్నారని కూడా నాకు సమాచారం అందింది. డామన్ ప్రజా జీవిత సంస్కృతిలో పరిశుభ్రత ఎలా ఒక భాగమైపోయిందో ఇది తెలియజేస్తోంది. ఈ సంస్కృతి ఇక్కడి పరిశుభ్రత ప్రయత్నాలలో స్పష్టంగా కనిపిస్తోంది. ప్రజల భాగస్వామ్యంతో కూడిన ఈ ప్రయత్నాలకు గాను డామన్ ప్రజలను నేను అభినందిస్తున్నాను.

మిత్రులారా, 

కేంద్రపాలిత ప్రాంతాలుగా  దాద్రా,నగర్ హవేలీ, డామన్, డయ్యూ భారతదేశ అస్తిత్వానికి, వారసత్వానికి ప్రతీకలు. అందుకే, వీటి అభివృద్ధి కోసం మనం నిర్దేశించుకున్న లక్ష్యాలు సాధరణమైనవి  కావు. గత సంవత్సరం నేను సిల్వస్సాకు వచ్చినప్పుడు మీకు సింగపూర్ ఉదాహరణ చెప్పడం నాకు గుర్తుంది. ఒకప్పుడు సింగపూర్ కేవలం ఒక చిన్న మత్స్యకార గ్రామం అని నేను చెప్పాను. కానీ సింగపూర్ ప్రజలు కలలు కన్నారు. పెద్ద పెద్ద లక్ష్యాలను నిర్దేశించుకున్నారు. ఈరోజు అదే సింగపూర్ ప్రపంచంలోనే అతిపెద్ద వ్యాపార కేంద్రంగా అవతరించింది. ఈరోజు దాద్రా, నగర్ హవేలీ, డామన్, డయ్యూ కూడా సరిగ్గా అలాంటి కలనే కంటున్నాయి. నమో ఎయిర్‌పోర్ట్, దమన్‌గంగా నదిపై నిర్మించనున్న ఐకానిక్ బ్రిడ్జి, బీచ్ ఫ్రంట్ లో నిర్మించబోయే కన్వెన్షన్ సెంటర్ వంటి ప్రాజెక్టులు -  ఇలాంటి మౌలిక సదుపాయాల ద్వారా మనం భవిష్యత్తు కోసం పెద్ద పెద్ద సంకల్పాలకు పునాది వేస్తున్నాం. ఈ ప్రాజెక్టుల వల్ల మీ ప్రయాణాలు మరింత సులభతరం అవుతాయి. ఇక్కడ వ్యాపార రంగంలో సరికొత్త అవకాశాలు వస్తాయి. డామన్‌కు ఇరువైపులా అభివృద్ధి వేగం మరింత పుంజుకుంటుంది.

మిత్రులారా, 

ఇక్కడ ఆతిథ్య రంగ ఆర్థిక వ్యవస్థకి సంబంధించిన అవకాశాలు పెరుగుతాయి, దీనితో పాటు ట్రాన్స్‌పోర్ట్ నగర్ వంటి సౌకర్యాలు కూడా ఇక్కడి వాణిజ్యానికి, రవాణా రంగానికి సరికొత్త వేగాన్ని అందిస్తాయి.

మిత్రులారా, 

ఈ ప్రాంతంలో సముద్ర ఆధారిత ఆర్థిక వ్యవస్థ కోసం మనం సిద్ధం చేసిన లక్ష్యం అత్యాధునిక మౌలిక సదుపాయాల బలం ద్వారానే సాకారం అవుతుంది. అందువల్లనే, ఈరోజే లక్షద్వీప్‌లోని కల్పేని,  కద్మత్ దీవులలో ఆధునిక నౌకాశ్రయాలకు శంకుస్థాపన జరుగుతోంది. ఈ ప్రయత్నాలన్నీ బ్లూ ఎకానమీ రంగంలో దేశ బలాన్ని మరింత పెంచుతాయి. నేను ముందు చెప్పినట్లుగా, ఇవి లక్షద్వీప్ రూపురేఖలను, భవితవ్యాన్ని మార్చివేసే సరికొత్త కార్యక్రమాలు.

మిత్రులారా, 

పేదలు, వెనుకబడినవారు, గిరిజనులు, మధ్యతరగతి ప్రజల జీవితాలలో మార్పు రావడం బీజేపీ ప్రభుత్వంలో, మా ఎన్డీయే ప్రభుత్వంల, మాకు అభివృద్ధికి సంబంధించిన మొదటి ప్రామాణికం.  ఇందుకోసం ఆరోగ్య రంగం మాకు అత్యంత ప్రాధాన్యత కలిగిన రంగం. గత కొన్నేళ్లుగా, దేశం ఆరోగ్య సంరక్షణ దిశగా ఒక సమగ్రమైన దృక్పథంతో ముందుకు సాగింది. చికిత్సకు సంబంధించిన ప్రతి సమస్యనూ మేం పరిష్కరించాం. ఈరోజు అత్యంత పేదవాడికి కూడా ఆయుష్మాన్ కార్డ్ అందుబాటులో ఉంది. వారికి 5 లక్షల రూపాయల వరకు ఉచిత వైద్య చికిత్స భరోసా లభిస్తోంది. వ్యాధులను సకాలంలో గుర్తించడానికి  ప్రధానమంత్రి ఆయుష్మాన్ ఆరోగ్య కేంద్రాలు ఏర్పాటయ్యాయి. జన ఔషధి కేంద్రాల ద్వారా తక్కువ ధరలకే మందులు కూడా లభిస్తున్నాయి. ఈ సౌకర్యాలను మరింత మెరుగ్గా, ఆధునికంగా మార్చేందుకు ఈరోజు  ఆయుష్మాన్ భారత్ డిజిటల్ మిషన్ ద్వారా ఆరోగ్య సేవలను సాంకేతికతతో అనుసంధానించడం జరుగుతోంది.

 

మిత్రులారా, 

ఆయుష్మాన్ కార్డులు, జన ఔషధి కేంద్రాల వల్ల పేద మధ్యతరగతి ప్రజలకు దాదాపు 2.25 లక్షల కోట్ల రూపాయలు వృథాగా ఖర్చు కాకుండా ఆదా అయ్యాయి.

సోదరీ,సోదరులారా

కేంద్ర ప్రభుత్వ విధానాల వల్ల ఈ ప్రాంత ప్రజలకు కూడా ఎంతో మేలు చేకూరింది. ఒకప్పుడు ఇక్కడ మెరుగైన చికిత్సా సౌకర్యాల కొరత ఉండేది. కనీసం ఒక మెడికల్ కాలేజీ కూడా ఇక్కడ ఉండేది కాదు. కానీ ఇప్పుడు ఇక్కడ ఒక మెడికల్ కాలేజీ ఏర్పాటయింది. అందులో పోస్ట్-గ్రాడ్యుయేషన్ చదువులు కూడా ప్రారంభమయ్యాయి. సిల్వస్సాలోని నమో హాస్పిటల్ గత ఏడాది కాలంగా వేలాది మంది ప్రజలకు సేవలందిస్తోంది. ఈరోజు డామన్‌లో కూడా నమో హాస్పిటల్ ప్రారంభోత్సవం జరిగింది. ఈ ప్రాంత ప్రజలకు ఇప్పుడు మరింత మెరుగైన ఆరోగ్య సంరక్షణ సౌకర్యాలు అందుబాటులోకి వస్తాయి.

మిత్రులారా, 

జాతీయ కుటుంబ ఆరోగ్య సర్వే ఫలితాలను చూస్తే మా ప్రభుత్వం ఆరోగ్య రంగానికి ఎంతటి ప్రాధాన్యత ఇస్తుందో స్పష్టంగా అర్థమవుతుంది. ఒకానొక సమయంలో భారతదేశంలో అత్యధిక శాతం ప్రసవాలు ఆసుపత్రులలో జరిగేవి కావు. కానీ ఈరోజు దేశంలో 90 శాతానికి పైగా ప్రసవాలు ఆసుపత్రులలోనే జరుగుతున్నాయి. దీనివల్ల మాతృ మరణాల రేటు, శిశు మరణాల రేటు గణనీయంగా తగ్గాయి. మిషన్ ఇంద్రధనుష్ కారణంగా, బాలల వ్యాక్సినేషన్ రంగంలో కూడా భారత్ అద్భుతమైన పురోగతిని సాధించింది. 2014 కంటే ముందు, దేశంలో కేవలం 60 శాతం మంది పిల్లలకు మాత్రమే పూర్తి స్థాయిలో వ్యాక్సినేషన్  అందేది. కానీ ఈరోజు ఆ సంఖ్య దాదాపు 90 శాతానికి పెరిగింది. ఆరోగ్య భద్రత రంగంలో కూడా ఒక పెద్ద మార్పు వచ్చింది. 2014 కంటే ముందు, 30 శాతం కంటే తక్కువ కుటుంబాలు మాత్రమే ఆరోగ్య బీమా పథకాలతో అనుసంధానమై ఉండేవి. ఈరోజు ఆయుష్మాన్ భారత్ ఆ గణాంకాలను కూడా పూర్తిగా మార్చేసింది. ఇప్పుడు 60 శాతానికి పైగా కుటుంబాలు ఈ ఆరోగ్య భద్రతా రక్షణను పొందుతున్నాయి.

 

మిత్రులారా, 

ఆరోగ్య రంగంలో ప్రభుత్వం చేపట్టిన ఈ ప్రయత్నాల వల్ల ఎవరైనా అత్యధికంగా లబ్ధి పొంది ఉంటే, అది నా దేశంలోని మహిళా శక్తి మాత్రమే.

మిత్రులారా, 

ఇంతకుముందు ఈ ప్రాంతానికి చెందిన యువత ఉన్నత చదువుల కోసం వెలుపలి ప్రాంతాలకు వెళ్లాల్సి వచ్చేది. కానీ ఈరోజు ఇక్కడ ఒకటి కాదు, అనేక జాతీయ స్థాయి విద్యాసంస్థలు ఏర్పాటయ్యాయి. ఇటీవలి సంవత్సరాలలో ఇక్కడ సరికొత్త పాఠశాల భవనాలను నిర్మించారు. పాఠశాలల్లో స్మార్ట్ తరగతి గదులు  కూడా అందుబాటులోకి వచ్చాయి. వీటి ద్వారా 40 వేల మందికి పైగా విద్యార్థులు లబ్ధి పొందుతున్నారు. ఈ కేంద్రపాలిత ప్రాంతం విద్యారంగంలో క్రమక్రమంగా ముందుకు సాగుతుండటం నాకు ఎంతో సంతోషాన్ని కలిగిస్తోంది. ఇక్కడ స్వామి వివేకానంద ఎడ్యుకేషన్ హబ్ వంటి అనేక నిర్మాణ పనులు జరుగుతున్నాయి.

సొదరీ,సోదరులారా, 

ఈ విద్యా విప్లవంలో మన కుమార్తెలు వెనుకబడిపోకూడదన్నది కూడా మా సంకల్పం. ఇందుకోసం ఎన్నో పెద్ద పెద్ద ప్రయత్నాలు జరుగుతున్నాయి. ఇక్కడి కుమార్తెలకు సరస్వతి సైకిల్ యోజన, సరస్వతి విద్యా యోజన'వంటి పథకాలు ఎంతగానో సహాయపడుతున్నాయి.

మిత్రులారా, 

ఈరోజు దేశంలోని యువతకు డిగ్రీలతో పాటు సరైన దిశా నిర్దేశం కూడా లభించాలన్నదే భారతదేశ ప్రయత్నం. స్థానిక ప్రతిభను ప్రపంచవ్యాప్త అవకాశాలతో అనుసంధానించేలా వారికి తగిన అవకాశాలు, పరిజ్ఞానం లభించాలి. డిజైన్, న్యాయశాస్త్రం, ఇంజనీరింగ్, వైద్య విద్య, ఐటీ, డ్రోన్, పునరుత్పాదక ఇంధనం వంటి రంగాలలో మన ప్రస్తుత సన్నద్ధత భారతదేశ మానవ వనరులను మరింత బలోపేతం చేస్తుంది. అందువల్లనే, వృత్తివిద్యా సంస్థల విస్తరణ అత్యంత ప్రాధాన్యత సంతరించుకుంది.

 

మిత్రులారా, 

ఈరోజు  నేషనల్ ఇన్‌స్టిట్యూట్ ఆఫ్ ఫ్యాషన్ టెక్నాలజీ 18వ క్యాంపస్‌కు శంకుస్థాపన జరిగింది. ఈ సంస్థ ఇక్కడి యువతకు అంతర్జాతీయ స్థాయి పరిజ్ఞానాన్ని, అవకాశాలను అందిస్తుంది. ఐటీఐ, డామన్‌లో డ్రోన్ టెక్నీషియన్ వంటి సరికొత్త కోర్సులు కూడా ప్రారంభమయ్యాయి. పీఎం విశ్వకర్మ, పీఎం సూర్య ఘర్ ఉచిత విద్యుత్ పథకానికి  సంబంధించిన శిక్షణా కార్యక్రమాలు కూడా ఇక్కడి యువతకు ఎంతో ప్రయోజనంచేకూరుస్తున్నాయి.

మిత్రులారా, 

దేశంలో క్రీడలను కూడా ఒక సరికొత్త ఆలోచనతో ముందుకు తీసుకువెడుతున్నాం. మన క్రీడలు ఇకపై కేవలం పెద్ద నగరాలకో లేదా పెద్ద పెద్ద స్టేడియాలకో మాత్రమే పరిమితం కాదు. ఖేలో ఇండియా వంటి ప్రయత్నాలు యువత తమ ప్రతిభను చాటుకోవడానికి ఒక సరికొత్త వేదికను అందించాయి. దీనివల్ల, క్రీడల రంగంలో చిన్న చిన్న ప్రాంతాల నుంచి కూడా పిల్లలు జాతీయ స్థాయికి దూసుకువస్తున్నారు. ఈ ప్రాంతం కూడా దానివల్ల ఎంతో లబ్ధి పొందింది. ఈరోజు డయ్యూ సముద్ర తీర క్రీడలకు ఒక పెద్ద కేంద్రంగా ఆవిర్భవించింది. ఘోఘ్లా బీచ్‌లో నిర్వహించిన బీచ్ గేమ్స్ ఈ ప్రాంతం వైపు దేశం దృష్టిని ఆకర్షించేలా చేశాయి. ఈరోజు ఇక్కడ ఆధునిక క్రీడా మౌలిక సదుపాయాలు నిరంతరం అభివృద్ధి చెందుతున్నాయి. ఖాన్వేల్‌లోని ఫుట్‌బాల్ సెంటర్,  డామన్‌లోని వాలీబాల్ ట్రైనింగ్ సెంటర్ ఇక్కడి క్రీడా సంస్కృతిని మరింత బలోపేతం చేస్తున్నాయి.

మిత్రులారా, 

ఈరోజు దేశం ప్రధాన దృష్టి పర్యాటక రంగం పైనే ఉంది. పర్యాటక రంగం ద్వారా స్థానిక కళలు, సంస్కృతిని ప్రోత్సహించాలన్నదే మా ప్రయత్నం. చిన్న చిన్న ప్రాంతాలను కూడా పెద్ద పెద్ద అవకాశాలతో అనుసంధానించాలి. దేఖో అప్నా దేశ్ వంటి ప్రయత్నాలు దేశంలోని వైవిధ్యాన్ని తెలుసుకోవడానికి ప్రజలను ఎంతగానో ప్రేరేపించాయి. ఈరోజు భారతదేశంలో వారసత్వ పర్యాటకం, సముద్ర తీర పర్యాటకం, పర్యావరణ హిత పర్యాటకం, సాహస పర్యాటకం వంటివి సరికొత్త శక్తిని పుంజుకుంటున్నాయి.

మిత్రులారా, 

దాద్రా, నగర్ హవేలీ, డామన్,డయ్యూలలో పర్యాటక రంగం  కూడా అపారమైన అవకాశాలు ఉన్న రంగం. ఈ ప్రాంతంలో సహజసిద్ధమైన అందాలున్నాయి. అందుకే పర్యాటక రంగానికి సంబంధించి దేశం అమలు చేసిన విధానాల వల్ల దాద్రా, నగర్ హవేలీ, డామన్, డయ్యూలకు ఎంతో మేలు జరిగింది. 2021లో దాదాపు 6 లక్షల మంది పర్యాటకులు ఇక్కడికి వచ్చారు. 2025 నాటికి ఈ సంఖ్య దాదాపు 50 లక్షలకు పెరిగింది. అంటే కేవలం కొద్ది సంవత్సరాల వ్యవధిలోనే పర్యాటకుల రాక దాదాపు పది రెట్లు పెరిగింది. మెరుగైన మౌలిక సదుపాయాలు, మెరుగైన వసతులు, పరిశుభ్రమైన సముద్ర తీరాల వల్లే ఇది సాధ్యమైంది. డామన్ నైట్ మార్కెట్, రామ్‌సేతు సీ-ఫ్రంట్, నమోపథ్ సీ-ఫ్రంట్, నానీ డామన్ కోట, గంగేశ్వర్ ఆలయ సముదాయం వంటి అనేక ప్రదేశాలు ఈరోజు ఈ మొత్తం ప్రాంతానికి ఒక సరికొత్త గుర్తింపుగా మారుతున్నాయి.

మిత్రులారా, 

దాద్రా, నగర్ హవేలీ, డామన్,డయ్యూల కలలను సాకారం చేయడానికి మనం ఇక్కడి పారిశ్రామిక బలాన్ని కూడా మరింత పెంచాల్సి ఉంది. ఈ కేంద్రపాలిత ప్రాంతం మనిషి తయారీ నూలు రంగంలో తనకంటూ ఒక ప్రత్యేక గుర్తింపును సంపాదించుకోవడం ఎంతో గర్వకారణం. దాద్రా,నగర్ హవేలీలను జాతీయ మ్యాన్-మేడ్ ఫైబర్ క్యాపిటల్ గా గుర్తిస్తారు. ప్లాస్టిక్ ఎగుమతుల్లో కూడా ఈ ప్రాంతం నిరంతరం పురోగమిస్తోంది. ఇక్కడి పరిశ్రమలకు, ఎంఎస్ఎంఈలకు మద్దతుగా నిలిచేందుకు ప్రభుత్వం కూడా నిరంతర ప్రయత్నాలు చేస్తోంది. ఇక్కడి ఎంఎస్ఎంఈలు, ఇతర పరిశ్రమలకు కోట్ల రూపాయల పైగా ఆర్థిక సహాయం అందించాం. ఈ కేంద్రపాలిత ప్రాంతంలోని చిన్న, కుటీర పరిశ్రమలకు సరికొత్త అవకాశాలు లభిస్తున్నాయి. రాబోయే కాలంలో ఈ ప్రాంతం తయారీ రంగానికి ఒక పెద్ద కేంద్రంగా మారుతుందని నా గట్టి విశ్వాసం. 

మిత్రులారా, 

సున్నితమైన పాలన, అభివృద్ధి దృక్పథం  తోడైనప్పుడు క్షేత్రస్థాయిలో మార్పు అనేది అత్యంత వేగంగా రూపుదిద్దుకుంటుంది. దాద్రా, నగర్ హవేలీ, డామన్, డయ్యూలలో మా ప్రయత్నాల ఫలితాలను చూడటం ఎంతో సంతృప్తిని కలిగిస్తోంది. ఈ గడ్డపై ఉన్న ప్రజలపై నాకు పూర్తి నమ్మకం ఉంది. ఇక్కడి యువత, ఇక్కడి తల్లులు,  అక్కాచెల్లెళ్ళు, ఇక్కడి రైతులు, కళాకారులు, కార్మికులు,  పారిశ్రామికవేత్తలు రాబోయే సంవత్సరాల్లో ఈ అభివృద్ధి ప్రయాణాన్ని మరింత ముందుకు తీసుకువెళతారు. మీ కలలను సాకారం చేసుకోవడానికి కేంద్ర ప్రభుత్వం మీకు ఎల్లప్పుడూ అండగా, భుజం భుజం కలిపి నిలుస్తుందని నేను మీకు హామీ ఇస్తున్నాను. ఈ నమ్మకంతో, ఈ అభివృద్ధి ప్రాజెక్టుల సందర్భంగా మీ అందరికీ మరొక్కసారి నా హృదయపూర్వక అభినందనలు.  నాతో కలిసి పలకండి.. భారత్ మాతా కీ జై! భారత్ మాతా కీ జై! భారత్ మాతా కీ జై!

మీ అందరికీ ధన్యవాదాలు.