Elections are like festival for a democracy. I urge the people of Chhattisgarh to turn out in large numbers to vote: PM Modi
To take the country to newer heights of glory, it is necessary to focus on all-round development: PM Modi in Bilaspur
For the Congress, welfare of Chhattisgarh is not a priority. Their priority is to serve one family: PM Modi
Shocking that Congress leaders, who are out on bail question steps like demonetisation, which led to crackdown on several shell firms: PM

मंच पर विराजमान संसद में मेरे साथी श्रीमान लखन साहूजी, प्रदेश भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष जी, मंच पर विराजमान सभी नेतागण और इस चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के लोकप्रिय समाजसेवक-कार्यकर्ताबिल्हा से हमारे उम्मीदवार और प्रदेश के अध्यक्ष श्रीमान धर्मलाल कौशिक जी (यहीं पर आइए कमल लेकर के), बिलासपुर से भाई अमर अग्रवाल, मुंगेली से श्रीमान पुन्नूलाल जी, लोरमी से श्रीमान तोखन साहू जी, मस्तूरी से डॉक्टर कृष्णमूर्ति बांधी जी, कोटा से श्रीमान काशी साहू जी, बेलतारा से श्रीमान रजनीश जी, तखतपुर से बहन हर्षिता पांडे जी, मरवाही से श्रीमती अर्चना जी...आप सब भारत माता की जय बोल करके हमारे इन सभी साथियों को आशीर्वाद दीजिए। भारत माता की जय! भारत माता की जय! विराजिए।

फिर एक बार, बिलासपुर की धरती पर आने का अवसर मिला है। कई वर्षों तक आपके बीच संगठन का कार्य करने का मुझे सौभाग्य मिला और जब संगठन का कार्य करता था तो अनेक बार बिलासपुर आ करके यहाँ के लोगों से, पार्टी के कार्यकर्ताओं से मिल-बैठ करके बहुत कुछ सीखने को मिलता था, बहुत कुछ जानने को मिलता था। और, मैंने देखा था कि छत्तीसगढ़ के कार्यकर्ताओं का एक विशेष गुण जो मुझे हमेशा-हमेशा याद रहता है। वहाँ तो उस समय हमारी पार्टी छोटी थी, मध्य प्रदेश का हिस्सा थी, अभी छत्तीसगढ़ बनना बाकी था, एक प्रकार से पार्टी भी छोटी, अभाव की अवस्था। लेकिन मैं हमेशा देखता था, अभाव कितना भी क्यूँ न हो, लेकिन पार्टी के कार्यकर्ताओं के स्वभाव में इसका रत्ती भर भी असर नजर नहीं आता था। उनके उत्साह, उमंग, संकल्प में कभी भी निराशा का स्वर सुनाई नहीं देता था। और इसलिए, आज छत्तीसगढ़ में बार-बार भारतीय जनता पार्टी को आशीर्वाद मिल रहे हैं। छत्तीसगढ़ की जनता की सेवा करने का हमें लगातार सौभाग्य मिलता है। उसका एक कारण यहाँ के जनता-जनार्दन और सरकार के बीच में संगठन के कार्यकर्ताओं की मजबूत कड़ी है जो सरकार के कार्यक्रमों को जन-जन तक लेके जाते हैं और जनता की समस्याओं को सरकार तक पहुंचा करके उसके समाधान के लिए निरंतर प्रयास करते हैं।

भाइयो-बहनो, ये हमारा छत्तीसगढ़, ये हमारा बिलासपुर, ये हमारा कोरबा,ये सारा इलाका, एक प्रकार से छत्तीसगढ़ तो हमारे हिंदुस्तान का ‘धान का कटोरा’ है। और, यहाँ दाखिल होते ही दुबराज चावलउसकी याद आनाये बहुत स्वाभाविक है। ये काले सोने पर बैठी हुई छत्तीसगढ़ की सपनों की इमारत…मैं कल्पना कर सकता हूँ कि यहाँ के ऊर्जावान नौजवान किस प्रकार से इस काले सोने के द्वारा न सिर्फ छत्तीसगढ़ को बल्कि पूरे हिंदुस्तान को ऊर्जा भी दे रहे हैं, रोशनी भी दे रहे हैं, ये कमाल इस धरती ने कर के दिखाया है। ये हमारा छत्तीसगढ़...ये संत परंपरा की भूमि है, ये सत्य से साक्षात कराने वाले श्रद्धेय गुरु घासीदास जी की भूमि है, ये धरती सतनाम परंपरा की जन्मस्थली है।संत कबीर का संदेश, मैं तो काशी से एमपी हूँ, पिछले दिनों उनके समाधिस्थल पर गया तो यहाँ छत्तीसगढ़ से भी संत कबीर परंपरा के सारे लोग वहाँ पहुँच गए। गुजरात में भी नर्मदा के तट पर कबीर वर्ण है। जब मैं मुख्यमंत्री था तो देश भर के संत कबीर परंपरा के लोगों का एक बड़ा राष्ट्रीय अधिवेशन किया था, समाज के छोटे से तबके को भी अध्यात्म के साथ-साथ आजीविका का जीवन संदेश देने की ताकत उस परंपरा ने पैदा की है और उसका सौभाग्य भी मुझे मिला था।

आज प्रथम चरण का मतदान छत्तीसगढ़ में हो रहा है। जब तिथियाँ घोषित हुईं तो कई लोगों का मत था कि दिवाली के त्योहार होंगे, 4-5 दिन दिवाली के त्योहार में जाएंगे और दूसरे ही दिन मतदान होगा, तो चुनाव में गर्मी आएगी कि नहीं आएगी। कई पंडित एयरकंडीशंड कमरों में बैठ कर बहस कर रहे थे, लेकिन उनको बस्तर की जनता का मिजाज पता नहीं था। जब मैं यहाँ आया, तो लोग मुझे बताते हैं कि बहुत भारी मतदान की तरफ लोगों का झुकाव है। लोकतन्त्र में मतदान करना हर किसी का कर्तव्य है। मत किसको दें, किसको न दें, यह अपनी मर्जी है लेकिन मतदान करना-यह लोकतन्त्र का सबसे बड़ा उत्सव होता है। और,मुझे विश्वास है कि बम, बंदूक और पिस्तौल का दम दिखाने वालों को लोकतन्त्र की ताकत आज जवाब देकर के रहेगी।

ये मुझे पूरा विश्वास है कि मतदान करके रहेंगे लोग, अधिकतम मतदान करके रहेंगेऔर, यही लोकतन्त्र का सामर्थ्य होता है। एक हफ्ते के बाद, 20 तारीख को हमारे बाकी क्षेत्रों का मतदान है। इस बार छत्तीसगढ़ को भारी मतदान करके एक नया विक्रम, एक नया रिकॉर्ड प्रस्थापित करना चाहिए। हर परिवार में संदेश जाना चाहिए कि पहले मतदान, फिर जलपान। और, इस बार पुरुषों और महिलाओं के बीच में स्पर्धा होनी चाहिए कि गाँव में ज्यादा पुरुष मत डालते हैं कि ज्यादा महिलाएं मत डालती हैं और इस बार महिलाओं को पुरुषों को पीछे छोड़ देना चाहिए। इतना भारी मतदान करना चाहिए! मतदान की लोकतन्त्र के उत्सव में बड़ी अहमियत है। और, मैं इलेक्शन कमीशन को भी बधाई देता हूँ कि इन दिनों इलेक्शन कमीशन भी अधिक मतदान के लिए अपनी तरफ से प्रयास करता है, प्रचार करता है, योजना बनाता है, लोगों को जागरूक करता है। इलेक्शन कमीशन ने एक बहुत बड़ी भूमिका निभाई है और यही लोकतन्त्र की ताकत होती है। और इसलिए, इलेक्शन कमीशनभी अधिकतम मतदान के लिए जो निरंतर प्रयास कर रहा है, इसके लिए बधाई का पात्र है।

भाइयो-बहनो, भारतीय जनता पार्टी एक ही मंत्र लेकर के राजनीति को नई दिशा देने में सफल हुई है। इस देश में सन् 52 से अनेक चुनाव हुए लेकिन हर चुनाव जाति-बिरादरी के नाम पर लड़ा गया, परिवार के नाम पर लड़ा गया, मेरे-तेरे के बँटवारे कर-कर के लड़ा गया, गाँव और शहर को बाँट करके लड़ा गया, अमीर और गरीब की खाई पैदा करके लड़ा गया। और, महीने-दो महीने ऐसी गर्मी पैदा की जाती थी कि अच्छी-अच्छे स्वस्थ मन से सोचने वाले भी उस प्रवाह में बह जाते थे। लेकिन भारतीय जनता पार्टी ने तय किया कि अगर इस देश को हमारे आजादी के दीवानों के सपनों जैसा बनाना है, देश को विकास की ऊंचाइयों पर ले जाना है, समृद्धि की तरफ ले जाना है, देश को गरीबी से मुक्त करना है, गाँव-गरीब के लोगों को उनका हक दिलाना है, तो देश को जात-पात के बँटवारे से बाहर लाना पड़ेगा,ऊंच-नीच के भेदभाव से ऊपर उठाना पड़ेगा। और इसलिए, भारतीय जनता पार्टी राजनीति में एक नई धारा लेकर के आई और वो धारा रही मंत्र:-संकल्प:और जहां अवसर मिला उसे करके दिखाया। वो मंत्र है विकास, विकास और विकास। तेज गति से विकास, चारों तरफ विकास, सम्पूर्ण विकास, सबका विकास- इसी मंत्र को लेकर के हम चले। और इसीलिए, हमारे विरोधी दलों को अभी भी समझ नहीं आ रहा है कि ये भारतीय जनता पार्टी के साथ मुक़ाबला कैसे करें।

जातिवाद का जहर कितना भी वो लोगों में डालने की कोशिश करें लेकिन आज हिंदुस्तान का गरीब से गरीब भी जाग गया है। वो विकास चाहता है, वो अपनी संतानों को विरासत में गरीबी देकर के जाना नहीं चाहता है, वो अपनी संतानों को विरासत में अशिक्षा देकर के नहीं जाना चाहता है। उसको तो झुग्गी-झोपड़ी में, जंगलों में जिंदगी काटनी पड़ी लेकिन उसके बच्चों को ऐसी मजबूरी में जीना न पड़े, ये सपना हिंदुस्तान का गरीब से गरीब भी देख रहा है। और उन सपनों को साकार करने के लिए संकल्प लेकर निकले हुए हमलोग हैं, हर इंसान का सपना साकार करने के लिए हम संकल्प लेकर के चल पड़े हैं। और इसलिए मेरे भाइयो-बहनो, आज छत्तीसगढ़ के किसी भी कोने में जाइए, 25 किलोमीटर किसी भी दिशा में जाइए, आपको कहीं न कहीं छत्तीसगढ़ के द्वारा विकास का काम होता नजर आएगा, कहीं न कहीं नजर आएगा।

भाइयो-बहनो, हमारे पास विकास का मजबूत इतिहास है जिसे हर तराजू पर तौला जा सकता है, हर मानदंड से नापा जा सकता है। हमने हर कसौटी पर विकास के मुद्दे पर परिणाम हासिल किए हैं, परिवर्तन हासिल किया है और उस विकास के इतिहास की ताकत ये है कि आज उज्ज्वल भविष्य का विश्वास पैदा हुआ है। ये उज्ज्वल भविष्य का विश्वास औरों की आलोचना करके पैदा नहीं होता है, गाली-गलौज करने से पैदा नहीं होता है, अनाप-शनाप भाषा बोलने से पैदा नहीं होता है। उज्ज्वल भविष्य का विश्वास पैदा होता है जब विकास की नींव पर किए गए कामों की हकीकत जनता-जनार्दन देखती है। तब ये विश्वास पैदा होता है और आज छत्तीसगढ़ के हर कोने में ये विश्वास मैं अनुभव कर रहा हूँ।

भाइयो-बहनो, हमने विकास की एक के बाद एक नई ऊंचाइयों को पार किया है। लेकिन आज, जरा मैं हमारे विरोधियों से पूछना चाहता हूँ कि क्या कारण था जब छत्तीसगढ़ मध्य प्रदेश का हिस्सा था तब मध्य प्रदेश भी बीमारू में गिना जाता था, तब छत्तीसगढ़ का इलाका भी बीमारू गिना जाता था, पिछड़ा इलाका गिना जाता था, विकास का नामोनिशान नजर नहीं आ रहा था? 40-40, 50-50 साल तक आपने राज किया था, आपने ये दुर्दशा क्यूँ की थी?और मैं बताता हूँ, अगर ये छत्तीसगढ़ नया बनने के बावजूद भी उनके पास रहा होता तो आज जो चीजें देख रहे हैं आप, वहाँ तक पहुँचते-पहुँचते शायद 50 साल और लग जाते और तब भी शायद पहुँच नहीं पाते। और उसका कारण है उनकी राजनीति-एक परिवार से शुरू होती है और उस परिवार में आकर के पूरी होती है।

हमारी राजनीति गरीब की झोपड़ी से शुरू होती है और गरीब की जिंदगी को बदल कर रहे बिना चैन से सोना नहीं, इस इरादे से हमारी राजनीति चलती है। और इसलिए, हमने विकास को प्राथमिकता दी है। कौन है जो ये नहीं चाहता है कि उसके बच्चों को अच्छी शिक्षा मिले, कौन गरीब जो झुग्गी-झोपड़ी में जीता है, फुटपाथ पर जिंदगी गुजरता है, कौन नहीं चाहता है कि उसको भी रहने के लिए अच्छा-खासा पक्का घर मिले, कौन नहीं चाहता है? जो माँ लकड़ी का चूल्हा जला करके बच्चों के लिए खाना पकाती थी, कौन माँ नहीं ये चाहती हो कि हमें इस धुएँ से मुक्ति मिल जाए, लकड़ी के इस चूल्हे से मुक्ति मिल जाए, हमें भी गैस का सिलेंडर मिल जाए?कौन गरीब नहीं चाहता, फुटपाथ पर सब्जी बेचने वाला भी सोचता है कि सामने बैंक का मकान है, वो भी रोज सब्जी बेचते-बेचते सोचता है कि वो दिन कब आएगा जब मैं भी इस बैंक के दरवाजे खोल करके अंदर जा पाऊँगा, मैं भी कुछ रुपये जमा कर पाऊँगा? वो सपना फुटपाथ पर बैठकर सब्जी बेचने वाला भी हमेशा देखता है।

लेकिन ये परिवारों में पले-बढ़े लोग, परिवार के लिए जीने-मरने वाले लोग, वो डिस्कनेक्ट थे, सामान्य मानवी की आशाओं-आकांक्षाओं से सैकड़ों मील की उनकी दूरी थी। और इसलिए,नारे दे देते थे लेकिन उसको पूरा करने के लिए न उनके पास नीति थी, न नीयत थी, न ही कांग्रेस को कभी ऐसा नेतृत्व मिला है जो देश की भलाई के लिए जीने-मरने के इरादे से काम करते हों। और इसलिए भाइयो-बहनो, हमने करके दिखाया है। और, आज मैं आपसे कहने आया हूँ। आप देखिए, अभी कांग्रेस ने अपना संकल्प पत्र निकाला है। खैर, लोगों ने ज्यादा नोटिस नहीं किया है। लेकिन उन्होंने छत्तीसगढ़ के लिए 36 प्वाइंट निकाले पर वो जो प्रेस कॉन्फ्रेंस थीजिसमें मैनिफेस्टो दिया गया उसे सभी अखबारवालों ने नोटिस किया कि छत्तीसगढ़ के लिए 36 प्वाइंट लेकिन वो घोषणा पत्र जारी करते समय नामदार को 150 बार सर, सर, सर कहा गया, 150 बार! यानि उनके लिए छत्तीसगढ़ का महत्त्व कम था, नामदार को.... यही उनके लिए सबकुछ था।

भाइयो-बहनो, ये हमारा छत्तीसगढ़, आप देखिए परिवार गैस का कनेक्शन के लिए कितनी पहले मुसीबत हुआ करती थी कांग्रेस में। नेताओं के घर में चप्पल घिसने पड़ते थे तब जाकर के गैस का सिलेंडर मिलता था।हमने सामने से जाकर के मुफ्त में 26 लाख परिवारों को अकेले छत्तीसगढ़ में गैस का सिलेंडर पहुंचाया और ये हमारे बिलासपुर में डेढ़ लाख परिवारों को गैस का कनेक्शन दे चुके हैं। वादे नहीं, कर चुके हैं।

भाइयो-बहनो, हमने प्रधानमंत्री जनधन योजना के तहत 1 करोड़ 30 लाख से अधिक खाते खोले। छत्तीसगढ़ के अंदर 1 करोड़ 30 लाख परिवारों का बैंक में आना-जाना होना मतलब गरीब से गरीब के लिए बैंक के दरवाजे हमने खोल दिए हैं। और, मेरे देश का गरीब, उसकी अमीरी अमीरों से भी ज्यादा उजागर होती है। गरीबों को मैंने कहा था कि एक भी पैसा नहीं रखोगे, खाता खुलेगा। लेकिन मेरे गरीबों की अमीरी देखिए, उन्होंने करीब 90 हजार करोड़ रुपये बैंकों में जमा कराए और उनके पैसों की बचत हो गई।

भाइयो-बहनो, प्रधानमंत्री आवास योजना...आप देखिए, जब कांग्रेस पार्टी की सरकारें थीं, उस समय जिस रफ्तार से घर बनते थे...हमने 4 साल में जो घर बनाए हैं, उतने घर बनाने के लिए कांग्रेस की रफ्तार से काम हुआ होता तो मैं मानता हूं कि कम से कम 30 साल लग जाते इतने घर बनाने में जितने घर हमने 4 साल में बनाए हैं। अब आप कल्पना करें कि 30 साल लग जाते तो कितना महंगा हो जाता वो मकान? आप कल्पना कीजिये कि 30 साल हो जाते तो झुग्गी-झोपड़ी में जीने वाला गरीब, उसके बेटे के बेटे भी, शादियाँ हो गई होतीं झुग्गी-झोपड़ी में, घर न मिलता। ये सरकार है कि जो 30 साल के बाद मिलने की संभावना थी उसे हमने 4 साल के भीतर-भीतर करके दिखाया है। भाइयो-बहनो, 6 लाख से अधिक घर छत्तीसगढ़ में गरीब परिवारों को मिले हैं।

इसमें से डेढ़ लाख हमारे आदिवासी परिवारों को मिले हैं। इतना ही नहीं, ये मेरे बिलासपुर इलाके में 40 हजार प्रधानमंत्री आवास योजना के घर मिले हैं। ये चर्चा कांग्रेस के लोग नहीं करेंगे, हमारे विरोधी नहीं करेंगे और जो माँ-बेटे रुपयों की हेराफेरी में जमानत पर घूम रहे हैं वो आज मोदी को प्रमाण पत्र दे रहे हैं। खुद रुपयों की हेराफेरी में जमानत पर जो जी रहे हैं, जमानत पर बाहर घूम रहे हैं, वो औरों को ईमानदारी के सर्टिफिकेट बाँट रहे हैं। नोटबंदी का हिसाब मांगते हैं। अरे ये नोटबंदी का कारण ही था कि फर्जी कंपनियाँ पकड़ी गईं और फर्जी कंपनियाँ पकड़ी गईं, उसी के कारण तो आपका कारोबार पकड़ा गया और उसी कारण आपको जमानत पर निकलना पड़ा। ये नोटबंदी के कारण आपको जमानत लेनी पड़ी, ये आप भूल क्यूँ जाते हो?

लोग मुझे पूछते हैं कि मोदी जी, सरकारें पहले भी थीं। आप पहले की तुलना में इतने ज्यादा रोड बनाते हो, पहले की तुलना में इतनी तेज गति से रेलवे का काम कर रहे हो, पहले की तुलना में इतने व्यापक रूप से बिजली पहुँचाने का काम कर रहे हो, पहले की तुलना में आप रेल का इलेक्ट्रिफिकेशन कर रहे हो, पहले की तुलना मेंआप इतने बड़े-बड़े स्कूल खोल रहे हो,IIM खोल रहे हो,IIT खोल रहे हो, आप एम्स खोल रहे हो, ये इतने रुपये लाते कहाँ से हो? कइयों को लगता है कि मोदी रुपये लाता कहाँ से है? मेरे भाइयो-बहनो, ये रुपये पहले भी थे, ये रुपये मोदी के नहीं हैं, ये रुपये आपके ही हैं। लेकिन पहले, पहले ये रुपये किसी के बिस्तर के नीचे छुपे हुए थे, किसी के बोरे में भर करके रखा हुआ था, किसी के कबर्ड भरे पड़े हुए रहते थे। ये नोटबंदी लगी, ये सबको बाहर आना पड़ा। और वही रुपये हैं जो आज इतना सारा काम हो रहा है। ये रुपये आपके हैं और उसको आपके लिए खर्च करने में मेरी सरकार पूरी ताकत से लगी हुई हैऔर आपका जीवन बदलना, इस संकल्प को लेकर के चल पड़ी है। ये तेज गति से काम इसीलिए हो रहा है।

इस देश में शक्ति में कमी नहीं है, इस देश के संकल्प में कमी नहीं है, इस देश के जनता-जनार्दन के आत्मविश्वास में कमी नहीं है। इस देश के सामान्य मानवी के सपने उतने ही महत्वपूर्ण हैं जितने कि इस देश के अमीर से अमीर लोगों के होते हैं। लेकिन रुपये कहीं न कहीं चले जाते थे। और, कांग्रेस के ही एक प्रधानमंत्री, एक परिवार की तीसरी पीढ़ी के प्रधानमंत्री (क्यूंकि वहाँ तो सबकुछ परिवार के लिए ही है), वो तीसरी पीढ़ी के प्रधानमंत्री ने कहा था कि दिल्ली से 1 रुपया निकलता है, 15 पैसा पहुंचता है। ये कौन सा पंजा था जो 85 पैसे मार लेता था? वो कौन सा पंजा था जो रुपया घिस-घिस के 15 पैसा बना देता था? ये नोटबंदी ने उन 85 पैसों को बाहर निकाला है। जो उनके पिताजी कह के गए थे, उनको बाहर निकालने का काम किया है। भाइयो-बहनो, जो लोग भ्रष्टाचार में ड़ूबे हुए हैं, जिनपे भ्रष्टाचार के आरोप लगे हुए हैं, जिनको भ्रष्टाचार के सिवाय काम करने का कोई तरीका आता नहीं है,ऐसे लोगों से देश ज्यादा अपेक्षा नहीं करता है। और इसलिए भाइयो-बहनो, हमें विकास की राह पे जाना है। विकास को हमने प्राथमिकता दी है।

कभी स्वच्छ भारत अभियान का मजाक उड़ाना, कभी टूरिज्म डेवलपमेंट का मज़ाक उड़ाना…आज हर क्षेत्र में भारत विकास की नई ऊंचाइयों को पार कर रहा है। भाइयो-बहनो, हम आयुष्मान भारत योजना लाए। हमारा मत है कि देश के अंदर बच्चों को पढ़ाई, युवा को कमाई, किसान को सिंचाई और बुजुर्गों को दवाई- ये पूरा प्रबंध होना चाहिए। एक के बाद एक हम ऐसी योजनाएँ ला रहे हैं, जिससे हमारे सामान्य मानवी की आशा-आकांक्षाओं को पूर्ण कर पाएँ। आयुष्मान भारत-अभी तो योजना अभी-अभी शुरू की है, मुश्किल से महीना-सवा महीना पूरा हुआ है। लेकिन इस आयुष्मान भारत योजना के तहत अकेले छत्तीसगढ़ में 42 लाख परिवारों को इसका सीधा-सीधा लाभ मिलने वाला है। और लाभ क्या है? गंभीर बीमारी आई घर में तो इलाज के लिए बड़ा से बड़ा ऑपरेशन करना होगा तो गरीब को अब सोचने की जरूरत नहीं है। ये दिल्ली सरकार के खजाने से पैसे आएंगे और गरीब को साल में 5 लाख रुपये तक का खर्चा सरकार देगी। भाइयो-बहनो,पिछले दिनों पूरे देश में लाखों परिवार, कोई 2 साल से, 5 साल से पैसों के अभाव में अस्पताल नहीं जाते थे, उपचार नहीं कराते थे, गंभीर बीमारियों में बिस्तर पर पड़े हुए थे, जवान बेटे बिस्तर पर जिंदगी गुजार रहे थे, बेटियाँ परेशान थीं, बुजुर्गों को तकलीफ थी।

जैसे ये योजना आई, लाखों की तादाद में ऐसे गरीबों ने अस्पताल के दरवाजे खटखटाए और ये आयुष्मान भारत जिसके कारण उनका तत्काल उपचार हुआ, ऑपरेशन हुआ और वो आज अपने घर में एक नई आशा और विश्वास के साथ फिर से वापस चले गए हैं और ये निरंतर चल रहा है। छत्तीसगढ़ में भी हजारों ऐसे परिवारों ने आयुष्मान भारत योजना के तहत आज काम लिया है।करीब देश भर में 2 लाख से ज्यादा लोगों का उपचार पिछले 30-40 दिन में हो गया है। ये बहुत बड़ा काम है। ये वो लोग हैं जो शायद मरना पसंद करते लेकिन अस्पताल जाना पसंद नहीं करते। अगर जाते तो भी कर्जदार हो जाते, कर्ज लेना पड़ता और बेटे के बेटे भी वो कर्ज नहीं चुका पाते। वो काम इस बेटे ने कर दिया है, भाइयो-बहनो, इस बेटे ने किया है। और इसलिए भाइयो-बहनो, गरीब के कल्याण, सामान्य मानवी की जिंदगी में बदलाव- इस काम को लेकर के हम चल रहे हैं। तब भाइयो-बहनो, ये हमारा बिलासपुर स्मार्ट सिटी बनना चाहिए। इसे स्मार्ट सिटी बनाना है हमें। और इसके लिए, भारत सरकार पूरी तरह आपको योजनाओं में मदद करके बिलासपुर को बदल करके रखेगी, ये मैं आपको विश्वास दिलाता हूँ।

हमारी सरकार ने एक डिस्ट्रिक्ट मिनरल फंड की योजना बनाई। अब छत्तीसगढ़ में ब्लैक गोल्ड, काला सोना चला जाता था। लेकिन यहाँ के लोगों को क्या मिलता था? डिस्ट्रिक्ट मिनरल फंड बनाया और डिस्ट्रिक्ट के लिए बनाया। उसके कारण छत्तीसगढ़ के ऐसे इलाकों को करीब 3 हजार करोड़ रुपया मिला है, 3 हजार करोड़ रुपया! और उससे विकास की नई योजनाएँ साकार हो रही हैं।

भाइयो-बहनो, भारतीय जनता पार्टी छत्तीसगढ़ ने जो मैनिफेस्टो घोषित किया है, जो संकल्प पत्र घोषित किया है, उसके लिए भी मैं उनको बधाई देता हूँ। छत्तीसगढ़ को नक्सलवाद से मुक्त करने का बीड़ा अगर कोई पूरा कर सकता है तो हम ही कर सकते हैं और कोई नहीं कर सकते। अरे जिन्होंने जन्म दिया, जिन्होंने पाला-पोसा, वो उसको खत्म करेंगे क्या? करेंगे क्या? हम ही कर सकते हैं, वे कभी नहीं कर सकते क्यूंकि उनका तो सारा कारोबार ही है और इसलिए उनके बचाव में बोलते रहते हैं, क्रांतिकारी कह देते हैं। मैं छत्तीसगढ़ की भारतीय जनता पार्टी को बधाई देता हूँ कि उन्होंने मल्टी-स्पेशलिटी अस्पताल हर जिले में बनाने का संकल्प किया है। ये बहुत बड़ा काम है। भारत सरकार की योजना और ये मल्टी-स्पेशलिटी हॉस्पिटल, उसके पनपने के लिए बहुत सुविधा बन जाएगी। फिर, छत्तीसगढ़ में डॉक्टरों की भी संख्या बढ़ती चली जाएगी, यहाँ के बच्चों को मेडिकल पढ़ने का मौका मिलेगा। हेल्थ के सेक्टर में पीछे मुड़ कर देखने की नौबत नहीं आएगी। देश इस गंभीर समस्या से बाहर निकल जाएगा, इस विश्वास के साथ हम आगे बढ़ रहे हैं।

जो लघु और सीमांत किसान हैं हमारे, भूमिहीन कृषि मजदूर हैं और 60 साल से ऊपर के हैं, उनको 1000 रुपये का पेंशन देने का एक बहुत ही नवीनतम काम का हमारे छत्तीसगढ़ की भारतीय जनता पार्टी ने बीड़ा उठाया है। ऐसे कई काम जिनसे किसानों को कितना लाभ होगा जिसका हम अंदाजा कर सकते हैं। भाइयो-बहनो, लघु उद्योग हों, नौजवानों के रोजगार का विषय हो, एक नया छत्तीसगढ़ बनाने का सपना हो और संकल्प हो। और, छत्तीसगढ़ पुरुषार्थ में विश्वास करता है, छत्तीसगढ़ साहस करने में विश्वास करता है,छत्तीसगढ़ सपनों को पूरा करने के लिए सामर्थ्य के साथ आगे बढ़ने में विश्वास करता है।

मैं आपसे आग्रह करने आया हूँ कि फिर एक बार भारतीय जनता पार्टी को वोट देकर के, डॉक्टर रमन सिंह जी की काम करने वाली सरकार को फिर से काम करने का मौका दीजिए। और, आज छत्तीसगढ़ की उम्र 18 साल है। घर में बेटे-बेटी भी 18 साल के हो जाते हैं ना तो परिवार के जो मुखिया होते हैं उनका सोचने का तरीका बदल जाता है। 18 साल के बेटे-बेटी के लिए नए तरीके से सोचा जाता है। उनके नए सपने होते हैं, नए संकल्प होते हैं,उन्हें नई दुनिया में जाना होता है। 18 साल तक तो घर में एक अवस्था होती है, 18 साल के बाद दूसरी अवस्था होती है। अब छत्तीसगढ़ 18 साल का हुआ है। आप इस छत्तीसगढ़ के मालिक हैं, आप छत्तीसगढ़ के माँ-बाप हैं। 18 साल के छत्तीसगढ़ को आगे कैसे बढ़ाना है, ये निर्णय आपका है। और, कोई समझदार मालिक, कोई समझदार माँ-बाप, 18 साल की उम्र में बच्चे के संबंध में कोई गलती नहीं करता है, कभी गलती नहीं करता है। अगर गलती कर देता है तो वो बेटा ही उसके लिए समस्या बन जाता है।

भाइयो-बहनो, मुझे विश्वास है…छत्तीसगढ़ के मेरे प्यारे भाइयो-बहनो, हमारे रिकॉर्ड को देखते हुए, विकास के संकल्प को देखते हुए, आने वाले दिनों में 18 साल की उमरिया वाला मेरा छत्तीसगढ़ जो अब तेजतर्रार जवान की तरह दौड़ने वाला है तब कोई आकर के कहीं ब्रेक न लगा दे, इसकी चिंता आपको करनी है। और इसलिए भारतीय जनता पार्टी के कमल निशान पर बटन दबा करके फिर से एक बार भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनानी है, इसी एक अपेक्षा के साथ आज मैं आपके बीच आया हूँ। मुझे पूरा विश्वास है कि छत्तीसगढ़ फिर एक बार कमल के रंग में रंग जाएगा, फिर एक बार विकास की नई ऊंचाइयों की ओर तेज गति से आगे बढ़ेगा। इस विश्वास के साथ, आप सबको बहुत शुभकामनाएँ देते हुए, हमारे सभी उम्मीदवारों को बहुत शुभकामनाएँ देते हुए मैं मेरी वाणी को विराम देता हूँ।
मेरे साथ दोनों हाथ मुट्ठी बंद करके ज़ोर से बोलिए- भारत माता की जय! भारत माता की जय! भारत माता की जय!

बहुत-बहुत धन्यवाद।

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Shri Ram Nath Kovind’s autobiography will become a treasure for Indian democracy and Indian society: PM Modi
August 12, 2026
Today, we have the opportunity to release the autobiography of Shri Ram Nath Kovind ji; I am happy to be a part of this program: PM
His journey reflects a life dedicated to public service and the progress of our nation:PM
My prolonged acquaintance with Kovind Ji and his special affection and warmth towards me have been my greatest assets: PM
Mahatma Gandhi, Babasaheb Ambedkar, Jyotiba Phule, and Savitribai Phule dreamed of a new India where the poorest and the most disadvantaged could reach the top: PM
Individuals like Kovind Ji have transformed their own lives and also played a pivotal role in bringing their dream and vision for India to fruition: PM
Even after retiring as President; he is working on 'One Nation, One Election'; Its resolution can start a new chapter in Democracy: PM


हमारे पूर्व राष्ट्रपति श्रीमान रामनाथ कोविंद जी, लोकसभा के अध्यक्ष आदरणीय ओम बिरला जी, श्रीमती सविता कोविंद जी, सभाग्रह में सभी वरिष्ठ जन बैठे हैं, सबका उल्लेख नहीं कर पाऊंगा, लेकिन मेरे लिए बहुत आनंद है कि एक पारिवारिक कार्यक्रम लग रहा है।

भाइयों-बहनों,

आज हमें श्री रामनाथ कोविंद जी की आत्मकथा के विमोचन का अवसर मिला है। मुझे खुशी है कि मुझे भी इस कार्यक्रम का हिस्सा बनने का सौभाग्य मिला है। कोविंद जी से मेरा बहुत लंबा परिचय रहा है, उन्हें करीब से जानने का भी अवसर मिला और राष्ट्रपति के रूप में उनका मार्गदर्शन और इस सबके साथ-साथ उनका मेरे प्रति विशेष स्नेह, उनकी आत्मीयता, ये मेरी बहुत बड़ी पूंजी रही है। मैंने उनके जीवन को जितना समझा है, उनकी कार्यक्षमताओं को जितना जाना है, मैं पूरे विश्वास से कह सकता हूं कि श्री रामनाथ कोविंद जी की ऑटो-बायोग्राफ़ी अपने आप में भारतीय लोकतंत्र और भारतीय समाज के लिए एक धरोहर बनेगी। कोविंद जी की जीवन यात्रा, समाज और राष्ट्र के लिए उनका योगदान, ऐसा कितना कुछ है जिसके बारे में मैं विस्तार से बात कर सकता हूं, लेकिन बुक रिलीज़ में केवल ‘कर्टन रेज़र’ ही होना चाहिए। आप सब किताब का पूरा लाभ पढ़कर ही लें, तो ही ज्यादा अच्छा है।

साथियों,

कोविंद जी की जीवन यात्रा को आप उनके शब्दों में जानें, उनकी लेखनी को, उनके अनुभवों को देश की नई पीढ़ी पढ़े, इससे हर किसी को काफी कुछ सीखने को मिलेगा। मैं रामनाथ कोविंद जी को इस आत्मकथा के लिए बहुत-बहुत बधाई देता हूं।

साथियों,

कोविंद जी ने अपनी इस पुस्तक को बहुत ही सटीक नाम दिया है- “Triumph of the Indian Republic: My Life, My Struggles” कहने का भाव ये कि जीवन और जीवन के संघर्ष उनके व्यक्तिगत हैं, लेकिन उन संघर्षों के परिणामस्वरूप मिली जीत, भारत के गणतंत्र की है, भारत के लोकतंत्र की है।

साथियों,

हम सब अक्सर अनुभव करते हैं कि इंसान का एक स्वभाव होता है, लोग अपनी सफलता का श्रेय खुद को देते हैं और जीवन की मुश्किलों के लिए, कठिनाइयों के लिए समाज को जिम्मेदार ठहराते हैं। लेकिन, जब हृदय उदार हो, भारतीय संस्कार हों, तब व्यक्ति समाज की कमियाँ निकालने में समय नहीं गँवाता, वो उसके सकारात्मक पक्ष पर फोकस करता है, वो अपनी सफलता में समाज को बराबर का भागीदार मानता है। कोविंद जी की आत्मकथा और उसका शीर्षक इसके उदाहरण हैं। आप उनका जीवन देखिए, एक बेहद सामान्य परिवार में, कानपुर देहात में उनका जन्म हुआ। कोविंद जी ने अभी भी कुछ वर्णन किया और अपनी किताब में भी लिखा है, कैसे गर्मी के मौसम में एक दिन उनके घर में आग लग गई, उनकी माँ अपनी चिंता छोड़कर घर की चीजों को बचा रही थीं। आखिर, एक सामान्य परिवार में, माँ के लिए एक-एक चीज बच्चों के पालन-पोषण का जरिया होती है। उसी कोशिश में, आग में फंसकर उनकी माता जी की मृत्यु हो गई। आप कल्पना कर सकते हैं, छोटी सी उम्र में इस तरह की घटना, माँ को इस तरह खो देना, ये कितना दर्दनाक रहा होगा। मैं तो भाग्यशाली रहा हूं, मेरी मां 100 साल से भी अधिक जीवित रही और मुझे आशीर्वाद देती रही। उसके बावजूद भी, आज भी मैं मां की कमी महसूस करता हूं।

साथियों,

उनके जीवन का एक ऐसा दर्दनाक ये घटनाक्रम था, कोई भी इससे टूट सकता था, लेकिन कोविंद जी को उन मुश्किलों ने मजबूत किया। पड़ोस की एक माता जी ने उनके पालन-पोषण में मदद की। इससे उन्होंने समाज की एकता और सौहार्द की ताकत को समझा। इस घटना के बाद कोविंद जी के जीवन में उनके पिता की भूमिका और बड़ी हो गई और जिस तरह से उन्होंने अपने परिवार को संभाला, बच्चों को संस्कार दिये, इसीलिए, कोविंद जी अपने पिता को अपना हीरो मानते हैं।

साथियों,

बचपन के इन संघर्षों के बीच, कोविंद जी ने शिक्षा को, अपने सामर्थ्य को बढ़ाने का मार्ग बनाया। उन्होंने मेहनत की, उन्होंने संसाधनों की कमी को कमजोरी नहीं बनने दिया। और, एक ऐसे मुकाम तक पहुंचे, जिसकी कल्पना भी तब लोगों ने नहीं की थी। वो भारत जैसे विशाल देश के राष्ट्रपति बने।

साथियों,

इतने बड़े पद पर पहुंचने के बाद भी कोविंद जी का विनम्र व्यक्तित्व, उनकी सादगी ऐसे ही कायम रही। मुझे याद है प्रधानमंत्री के तौर पर मैं राष्ट्रपति भवन में उनसे मिलने जाता था। प्रोटोकॉल के हिसाब से जो बातें नहीं हो सकती हैं, वो बातें वो करते थे। वो प्रधानमंत्री को छोड़ने के लिए गाड़ी के दरवाजे तक आते थे। मैं शुरू में उनको प्रार्थना करता रहता था, प्लीज आप ऐसा मत कीजिए, लेकिन उन्होंने जीवन के आखिर तक अपनी उस विनम्रता को कभी छोड़ा नहीं। राष्ट्रपति बनने के बाद जब वे अपने गांव परौंख गए, तो उन्होंने वहाँ अपने गुरुओं के पैर छूकर उन्हें प्रणाम किया। गाँव की मिट्टी को नमन करके उन्होंने गाँव के सामान्य लोगों का धन्यवाद किया। पूरे देश ने वो भावुक दृश्य देखा था। उनके इस आचरण ने दुनिया के सामने भारत के संस्कारों की ऐसी तस्वीर सामने रखी, जिस पर हर भारतवासी गर्व करता है।

साथियों,

गुलामी के सैकड़ों साल में हमारे देश ने आर्थिक और सामाजिक रूप से बहुत कुछ खोया था। हमारे पूर्वजों ने सदियों तक संघर्ष किया। महात्मा गांधी, बाबा साहब अंबेडकर, ज्योतिबा फुले, सावित्रबाई फुले, ऐसी कितनी ही महान विभूतियों ने भारत के नवनिर्माण का सपना देखा था। एक ऐसा भारत जहां गरीब से गरीब, वंचित से वंचित को शिखर तक पहुँचने का अवसर मिल सके। कोविंद जी जैसे व्यक्तित्वों ने अपने श्रम और काबिलियत से केवल खुद का जीवन ही बदला, इतना नहीं है, उन्होंने सदियों के उस स्वप्न को, उस विज़न को भी साकार करने में अपनी अहम भूमिका निभाई है। और इस दिशा में हम सबके प्रयास अभी भी जारी हैं। हमें भविष्य में कोविंद जी जैसे अनेकों युवा चाहिए, जो परेशानियों से परास्त न हों, जो मुश्किलों के सामने मायूस न हों, बल्कि अपनी मेहनत से हर मंजिल को आसान बनाने का हौसला रखें। इसी बदलाव से सशक्त भारत के निर्माण का संकल्प पूरा होगा। यहीं से आत्मनिर्भर और विकसित भारत का रास्ता बनेगा।

साथियों,

ऐसे युवाशक्ति के निर्माण के लिए जो प्रेरणा चाहिए, कोविंद जी की ऑटोबायोग्राफ़ी उसका अहम स्रोत बन सकती है।

साथियों,

कोविंद जी ने अपनी जीवनी में मोरारजी भाई देसाई के साथ अनुभवों के बारे में भी इसमें विस्तार से बताया है। कोविंद जी के भीतर देशसेवा की जो भावना थी, मोरारजी भाई के साथ काम करके उन्हें जो सीखने को मिला, जो रास्ता मिला। कोविंद जी ने राजनीति और समाजसेवा को अपना मार्ग बनाया। वो अपने कर्तव्यों के लिए समर्पित रहे। सेवा को उन्होंने अपना लक्ष्य बनाकर काम किया। संसद में उनका कार्यकाल गवाह है। राज्यपाल के रूप में भी उन्होंने एक उदाहरण प्रस्तुत किया। राष्ट्रपति के रूप में भी हमें उनकी यही कर्तव्यनिष्ठा दिखाई देती रही। यहाँ तक कि राष्ट्रपति जैसे सर्वोच्च पद से सेवामुक्त होने के बाद भी उन्होंने विश्राम नहीं लिया है। वो अभी भी ‘एक देश, एक चुनाव’ One Nation, One Election जैसे महत्वपूर्ण विषय पर काम कर रहे हैं। देश को जगा रहे हैं। ये एक ऐसा विषय है, जिसका समाधान देश के लोकतंत्र का नया अध्याय शुरू कर सकता है। मैं मानता हूँ, कोविंद जी की इस कर्तव्यनिष्ठा और सेवाभाव से देश के लोग बहुत कुछ सीख सकते हैं।

साथियों,

सामाजिक जीवन में सक्रिय रहते हुये ऑटोबायोग्राफ़ी के लिए समय निकाल पाना बहुत मुश्किल होता है। कोविंद जी ने ये काम हम सबके लिए किया है, क्योंकि उनके जीवन में ऐसा कितना कुछ है, जिसमें गरीब वंचित तबके से आए तमाम लोग अपने जीवन की परछाई देख सकते हैं। कैसे एक साधारण परिवार मुश्किल हालातों में भी जीवन की शुचिता और ईमानदारी से समझौता नहीं करता, कैसे वही आदर्श आगे चलकर हमारे जीवन का आधार बनते हैं, हमारे कठिन समय के मूल्य किस तरह जीवनभर हमें रोशनी देते हैं, कैसे इस पवित्रता से हमें राष्ट्र सेवा की शक्ति मिलती है। अलग-अलग पदों का दायित्व निभाते हुए, कोविंद जी ने समाज को निरंतर इसकी प्रेरणा दी है।

साथियों,

मुझे विश्वास है, कोविंद जी की ऑटोबायोग्राफ़ी, इसमें उनके जीवन की ही नहीं, बल्कि हमारे लोकतंत्र की भी अहम स्मृतियाँ सुरक्षित होंगी। मैं एक बार फिर उन्हें उनकी आत्मकथा के लिए शुभकामनाएं देता हूं। और मैं खास करके युवा पीढ़ी से आग्रह करूंगा, रील का जमाना है, सोशल मीडिया में इनफ्लुएंसर आपको खींच के कहीं-कहीं ले जाते हैं। इस शॉर्टकट के युग में भी एक बात हम जरूर याद रखें, रेलवे स्टेशन पर लिखा हुआ होता है, कुछ लोगों को पटरी पर कूद कर के जाने की आदत होती है, ब्रिज पर नहीं जाते। तो वहां लिखा होता है, शॉर्टकट विल कट यू शॉर्ट। और अगर शॉर्टकट के रास्ते से भी कहीं बाहर निकलना है, तो मैं नौजवानों को कहूंगा आपको जिसका भी पसंद हो ऑटोबायोग्राफी जरूर पढ़ें। ऑटोबायोग्राफी उस कालखंड की इतिहास की घटनाओं को अलग तरीके से समझने का अवसर देती है। इतिहास से काफी निकट होता है वो कालखंड बायोग्राफी का और इसलिए मैं जरूर चाहूंगा कि कोविंद जी की जो मेहनत है, वो आने वाली पीढ़ियों को काम आए, युवा पीढ़ी को विशेष रूप से काम आए। बहुत-बहुत शुभकामनाएं। बहुत-बहुत धन्यवाद।