In an interview to ABP news during a roadshow in Bhubaneswar, Odisha, Prime Minister Narendra Modi spoke extensively about the BJP's development agenda for the state. The PM said that the love and affection of the people of Odisha towards the BJP reflected the state's mood clearly. He said that the current state government of the BJD was cut off from ground realities.

 

मनोज्ञा- 2014 में उम्मीद 2019 में भरोसा और 2024 में गारंटी का प्रतीक बनकर चुनाव के मैदान में उतरे प्रधानमंत्री नरेंद्र दामोदर दास मोदी हमारे साथ हैं। मोदी जी उड़ीसा में यह भीड़ देखकर क्या कहेंगे क्योंकि इस बार जो नारे लगे हैं 10 साल के कार्यकाल में कितना भरोसा है कि पिछले रिकॉर्ड टूटेंगे।

पीएम मोदी- आपने देखा होगा मैं जहां से मैंने ये लोगों के दर्शन का कार्यक्रम शुरू किया, लोगों का जो उत्साह है उनकी आंखों में जो एक चमक है उसके साथ-साथ अपार विश्वास की अनुभूति है और दोनों तरफ है ये विश्वास का भाव। मैं उड़ीसा में दो या तीन बार यहां अलग-अलग जगह पर गया हूं इस प्रकार का जुनून इस प्रकार का उत्साह बहुत ही कम देखा जा सकता है। लैंग्वेज का प्रॉब्लम होने के बावजूद भी मैंने देखा कि जो एक दिल का कनेक्ट है मनों का भाव है वह पूरी तरह जुड़ चुका है और मैं पक्का मानता हूं कि ये उड़ीसा की लाइफ में एक बहुत बड़ा टर्निंग पॉइंट है।

 

मनोज्ञा- गठबंधन की बात हुई थी बना नहीं इस बार कितना भरोसा है कि सीट और आंकड़े बढ़ जाएंगे ओडिशा में।

पीएम मोदी- हम पहले भी दो अलग अलग दल ही रहे हैं। हम इसके पूर्व भी अलग-अलग ही चुनाव लड़े हैं मुद्दों के आधार पर। संसद में हमें समर्थन मिलता रहा है, लेकिन असेंबली में हमारा हमेशा उनके साथ संघर्ष रहा है और कारण ये है कि उड़िया की संस्कृति उड़िया की मिट्टी की सुगंध इस गवर्नेंस में नजर नहीं आ रही है। सामान्य मानवी कट ऑफ फील करता है। इवेन राजा महाराजाओं के जमाने में भी जनता से कोई कनेक्ट होता था यहां कोई कनेक्ट नहीं है ऐसी स्थिति में भारतीय जनता पार्टी का दायित्व है जनसामान्य से जुड़ कर के उड़िया नागरिकों की आशा आकांक्षाओं को पूरा करना और भारतीय जनता पार्टी लगातार संघर्ष कर रही है। और लंबे संघर्ष के बाद उड़िया भारतीय जनता पार्टी का कमल खिलाने के लिए प्रतिबद्ध हो चुका है।

 

मनोज्ञा- अगर बंगाल की बात करूं तो एक जमाने में कोलकाता आर्थिक राजधानी रहा आप यह मानते हैं कि घुसपैठ और बाकी सारे मुद्दों ने और वोट बैंक की राजनीति ने उसे पीछे कर दिया?

पीएम मोदी- बंगाल पहले एक प्रकार से देश की आर्थिक राजधानी हुआ करता था। इस देश में जितने भी सामाजिक आर्थिक परिवर्तन आए कई शताब्दियों तक बंगाल ने उसका नेतृत्व किया है। और बंगाल की क्षमता पर आज भी मेरा भरोसा है। बंगाल के नौजवानों की क्षमता पर आज भी मेरा भरोसा है। लेकिन गलत नीतियों के कारण, गलत नेतृत्व के कारण, पहले लेफ्ट के कारण, बाद में टीएमसी के कारण और कांग्रेस ने तो बेड़ा गर्क करके ही रखा था। इन लोगों ने 50 साल में इसको तबाह करके रखा हुआ है। जिस प्रकार से वोट बैक की राजनीति हो रही है ममता जी पार्लियामेंट में जब थी, जिन मुद्दों को लेकर के पार्लियामेंट में वह पेपर उछालती थी, आज उन्हीं मुद्दों को वह सरेंडर हो गई है, और वह उसके लिए एक बहुत बड़ी सोने की खान जैसा बन गया है यह जो ममता जी में बदलाव आया है वो बंगाल का आदमी स्वीकार नहीं कर सकता है। वो मौके की तलाश में है और मैं देख रहा हूं कि पिछले असेंबली के चुनाव में हमें सिंगल डिजिट में थे हम 80-85 पर पहुंच गए। लोकसभा में इस बार में क्लीन स्वीप देख रहा हूं, उड़ीसा में भी पश्चिम बंगाल में भी।

 

मनोज्ञा- विपक्ष के मुख्यमंत्री जेल जा रहे हैं फिर उनको बेल मिल जा रही है आरोप लगाते हैं कि मोदी जी अपनी एजेंसी का इस्तेमाल करते हैं विपक्ष को शांत रखने या पीछे रखने के लिए।

पीएम मोदी- इस देश में, अकेले ईडी की मैं बात करूं तो ईडी के जितने केसेस हुए हैं उसमें सिर्फ 3 पर पॉलिटिशियन हैं, 97 पर ब्यूरोक्रेट्स है, ड्रग माफिया है, गन रनर है, लैंड माफिया है, सैंड माफिया है, ये लोग है सिर्फ 3 पर्सेंट पोलिटिशियन हैं। दूसरा जो नोटों के ढेर निकल रहे हैं वो तो सीधा सबूत है और वह पॉलिटिशन के यहां से निकलते है, और नोटों के ऐसे ढेर निकलते हैं चाहे पश्चिम बंगाल हो चाहे झारखंड हो या अन्य राज्य हो बैंक के मशीन नोटे गिनते-गिनते हाने लग जाती हैं। यह हालत हुई है और इसलिए हिंदुस्तान के लोगों के ना करीब-करीब सवा लाख करोड़ रुपया जप्त हुआ है। अब ये निर्दोष लोग होते तो इतने पैसे आए कहां से?

 

मनोज्ञा- जब आप विपक्ष की बात कर रहे हैं तो विपक्ष यह कहता है कि विकास की अगर इतनी भरोसा है तो फिर धर्म और धर्म के नाम पर आरक्षण की बात क्यों की जाती है?

पीएम मोदी- हमने नहीं की है। कांग्रेस पार्टी भारत के संविधान की भावना के पीठ में छुरा भोंक रही है, बाबा साहेब आंबेडकर ने जो कहा था उसे उल्टा कर रही है। वे धर्म के आधार पर आरक्षण करने जा रहे हैं। हम इसको रोकने के लिए प्रतिबद्ध है, और मोदी की गारंटी है जब तक मोदी जिंदा है मैं एससी एसटी ओबीसी उनके आरक्षण में से रती भर भी धर्म के आधार पर आरक्षण नहीं होने दूंगा। मैं इसके लिए जीवन भर लड़ता रहूंगा।

 

मनोज्ञा- मेरा आखरी सवाल महिलाओं और युवाओं का आपको बहुत समर्थन मिला है इस बार कितना भरोसा है?

पीएम मोदी- ऐसा है कि समाज के सभी वर्गों का और देश के सभी भूभाग से अपार जन समर्थन है। यह मेरा सौभाग्य है कि माताओं-बहनों का मुझ पर विशेष कृपा रही है और मैं तो मानता हूं माताएं बहने सिर्फ वोट नहीं वो मेरा रक्षा कवच है। वो मेरे लिए हमेशा मन्नत करती है और गांव की किसी गरीब महिला जिसने मुझे कभी देखा नहीं जिसने मेरा नाम नहीं सुना है आप पूछोगे तो पूरा नाम मालूम नहीं है अकेला मोदी पता है क्या हूं मैं वह भी पता नहीं, वह कहती है कि दिल्ली में मेरा एक बेटा बैठा है। जीवन में इससे बड़ा संतोष क्या हो सकता है।

 

मनोज्ञा- 4 जून को रिजल्ट आएगा मोदी जी उस दिन क्या कर रहे होंगे?

पीएम मोदी- 4 जून को हिंदुस्तान के पोलिटिकल इतिहास में सबसे ज्यादा विक्रम के साथ भारतीय जनता पार्टी और एनडीए का विजय होगा।

मनोज्ञा- दिलचस्प है मुकाबला कैमरा पर्सन सूरज पांडे के साथ मनोज्ञ लोईवाल, उड़ीसा, एबीपी न्यूज़।

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Today, the world does not suffer from a shortage of resources; it suffers from a shortage of trust: PM Modi at G7 Summit in Evian, France
June 16, 2026

राष्ट्रपति मैक्रों,
Your Excellencies,

नमस्कार!

G-7 समिट में हमारे गर्मजोशी भरे स्वागत के लिए मैं राष्ट्रपति मैक्रों का हार्दिक आभार व्यक्त करता हूँ।

Friends,

आज का विश्व पहले से कहीं अधिक inter-connected और inter-dependent है। किसी भी देश की ऊर्जा सुरक्षा, खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य सुरक्षा, साइबर सुरक्षा और आर्थिक समृद्धि केवल उसकी सीमाओं के भीतर तय नहीं होती। Mobility, data, capital, technology, ये सभी हमें आपस में जोड़ते हैं।

ऐसे समय में Partnerships का महत्व स्वाभाविक रूप से बढ़ जाता है। लेकिन साझेदारियाँ तभी सफल होती हैं जब उनके केंद्र में विश्वास हो। आज सबसे महत्वपूर्ण Strategic Asset कोई mineral, technology या market नहीं, बल्कि आपसी विश्वास है।

विश्वास कि टेक्नॉलजी और supply chains को हथियार के रूप में नहीं, global good के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। विश्वास कि विकास के अवसर कुछ देशों तक सीमित नहीं रहेंगे। विश्वास कि वैश्विक संस्थान सभी देशों की आकांक्षाओं को पूरा करने में सक्षम होंगे।

Friends,

पिछली सदी में मानवता को दो विश्व युद्धों से गुज़रना पड़ा। अनेक बलिदानों के बाद विश्व समुदाय ने शांति, स्थिरता और समृद्धि की ओर बढ़ने के लिए व्यवस्थाएं विकसित की। इन व्यवस्थाओं का आधार भी trust ही था।

किन्तु अनेक दशकों से, अनेक पीढ़ियों के योगदान से बनाए गए विश्वास को आज चोट पहुँच रही है। कोविड ने हमें आईना दिखाया कि trust और solidarity के दावे कितने खोखले थे।

Today the world does not suffer from a shortage of resources; it suffers from a shortage of trust. And the future of our partnerships depends on building this trust.

अमेरिका के राष्ट्रपति रोनल्ड रेगन ने कहा था: Trust but Verify. यह आज के समय में भी प्रासंगिक है। भावी पीढ़ियों के प्रति हमारा दायित्व है कि हम नए युग के अनुरूप trusted rules based order का निर्माण करें।

Friends,

भारत ने सदैव विश्व को एक परिवार के रूप में देखा है। हमारे सभी प्रयास “सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय” यानि, welfare and happiness for all के मूल सिद्धांत पर आधारित रहे हैं।

भारत का अनुभव दिखाता है कि विकास सबसे अधिक प्रभावी तब होता है जब वह लोगों की आकांक्षाओं से जुड़ा हो। यही सिद्धांत हमारी अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों का भी आधार है। इसी सोच के साथ भारत ने International Solar Alliance, Coalition for Disaster Resilient Infrastructure, ग्लोबल बायोफ्यूल्स एलायंस, Mission LiFE, और “एक पेड़ माँ के नाम” जैसी वैश्विक पहलों को आगे बढ़ाया है।

संकट के समय भारत ने First Responder के रूप में सभी देशों की सहायता करना अपना दायित्व समझा है। कोविड महामारी के दौरान भारत ने डेढ़ सौ से अधिक देशों को दवाइयाँ और vaccines उपलब्ध कराईं।

श्रीलंका में cyclone हो, अफगानिस्तान में भूकंप हो, मोज़ाम्बिक में floods हों, या क्यूबा और जमैका में hurricane, भारत ने सदैव "Humanity First" के सिद्धांत पर कार्य किया है। हमारी विकास साझेदारियाँ भी इसी भावना को प्रतिबिंबित करती हैं। हमारे प्रयास पार्टनर देशों में capacity building और कौशल विकास पर केन्द्रित रहे हैं।

भारत का मानना है: The true test of partnership is not what we build for others, but what we enable others to build for themselves.

Friends,

आज ग्लोबल साउथ की विश्व समुदाय से बहुत उम्मीदें हैं। किन्तु उनकी अपेक्षा सहारे की नहीं, साथ की है। वे वैश्विक विकास के लाभार्थी नहीं, उसके भागीदार बनना चाहते हैं।

हमें donor–recipient की सोच से आगे बढ़कर, equal पार्टनर्स के रूप में काम करना होगा। उनके पास-पास नहीं, साथ-साथ चलना होगा। साझेदारी को dependency के बजाय, dignity से जोड़ना होगा। इन प्रयासों से हम भावी पीढ़ियों के सतत विकास की मजबूत नींव रख सकेंगे।

Friends,

अंतरराष्ट्रीय साझेदारियाँ और वैश्विक एकजुटता तभी सार्थक बन सकती हैं, जब हम साझा चुनौतियों का मिलकर समाधान करें। भारत का दृढ विश्वास है कि विश्व के विभिन्न हिस्सों में चल रहे तनावों और युद्धों का स्थायी समाधान dialogue, diplomacy और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के मार्ग से ही संभव है।

हम west asia में शांति प्रयासों में हुई प्रगति का स्वागत करते हैं। इस संघर्ष से west asia में हमारे मित्र देशों को जान-माल का नुकसान झेलना पड़ा है। होर्मुज़ स्ट्रेट में maritime ट्रेड में आई बाधा के कारण पूरे विश्व की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचा। भारत के कई civilians को जान गंवानी पड़ी। Global maritime ट्रेड के माध्यम से सभी देशों को आपस में जोड़ने वाले नाविकों की सुरक्षा हमारा दायित्व है। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि समुद्री मार्ग सुरक्षित रहें, और Seafarers बिना भय के अपना कार्य कर सकें।

Friends,

भारत इन विषयों पर सभी पार्टनर्स के साथ मिलकर काम करने के लिए पूरी तरह से तैयार है।

बहुत-बहुत धन्यवाद।