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When BJP govt came to power in the centre, the work on fertiliser plants picked up speed: PM Modi in Talcher
I urge Naveen Babu to give priority to cleanliness in Odisha for the health of the people here: PM Modi in Odisha
PM Modi says Odisha has a lot left to do, especially in matters of cleanliness
Our Govt is making sure that whatever money is allotted, all of it reaches the people: PM Modi
Talcher fertilizer plant will be ready in 36 months, I will come again then, says PM Modi in Odisha

भारत माता की जय...

मंच पर विराजमान हम सबके वरिष्ठ नेता श्रीमान विश्वभूषण हरिचंदन जी, केंद्र में मंत्रिपरिषद के मेरे साथी श्रीमान जुएल जी,श्री धमेन्द्र प्रधान जी, विधायक दल के नेता केवी सिंहदेव जी,भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव श्रीमान अरुण सिंह जी, राष्ट्रीय प्रवक्ता और इसी धरती की संतान डॉ. संबित पात्रा जी, राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य हमारे बहुत पुराने तपस्वी कार्यकर्ता श्रीमान प्रताप सारंगी जी, हमारे वरिष्ठ नेता श्रीमान मनमोहन श्यामल जी, श्रीमान रुद्र नारायण पाणि जी,हमारे रुद्र नारायण पाणि जी की आवाज अभी भी पार्लियामेंट में गूंजती रहती है, वरिष्ठ नेता श्रीमती सूरमा पाणि जी।

जय जगन्नाथ, जय मां हिंगुला।

ओडिशा के लोगों का ये प्यार, ये स्नेह मेरे लिए बहुत बड़ा आशीर्वाद है और मैं अनुभव कर रहा हूं कि जब 2014 के पहले मुख्यमंत्री के बतौर ओडिशा में कुछ कार्यक्रमों के लिए आने का अवसर मिलता था, फिर 2013-14 में लोकसभा के चुनाव को लेकर आना होता था, 2014 के बाद कई बार प्रधानमंत्री के रूप में, कार्यकर्ता के रूप में आपके बीच में आने का मौका मिला, लेकिन मैं लगातार देख रहा हूं कि आपकी हर रैली पुरानी सारी रैलियों के रिकॉर्ड तोड़ देती है। आज भी मैं देख रहा हूं, आपने पुराने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। ये विराट जनसागर, ये उत्साह, ये उमंग, ओडिशा के लोग क्या सोच रहे हैं, इसका ये जीता-जागता उदाहरण है। ओडिशा के जन-मन में क्या है, ये साफ-साफ दिखाई दे रहा है। साथियो, ओडिशा की ये ऐतिहासिक और प्राकृतिक रूप से समृद्ध धरती, उस धरती पर आना मेरे लिए बहुत ही सुखद अनुभव है।

पूर्वी भारत के उदय के सपने का बड़ा आधार, ओडिशा की अपनी क्षमताएं यहां लोगों की असीम शक्ति है। आज मुझे दोहरी खुशी इसलिए भी है क्योंकि अब से कुछ देर पहले ही तालचेर फर्टिलाइजर प्लांट के पुनरुद्धार का कार्य शुरू हो गया है। इस काम परसरकार करीब-करीब 13 हजार करोड़ रुपये खर्च करने जा रही है। तालचेर के लोगों को,ओडिशा के लोगों को, खास कर के यहां की युवा पीढ़ी को मैं बहुत-बहुत बधाई देता हूं। साथियो, इस पवित्र भूमि को मां हिंगुला का आशीर्वाद प्राप्त है। उनकी असीम अनुकंपा से इस धरती को भरपूर प्राकृतिक संपदा भी मिली है। मान्यता तो ये है कि भगवान जगन्नाथ की रसोई की अग्नि स्वयं मां हिंगुला ही हैं। आजकल गणेश पूजा का उत्सव भी धूमधाम से मनाया जा रहा है। गणेश जी के आशीर्वाद से, माता हिंगुला के आशीर्वाद से तालचेर में शुरू हुआ ये कार्य नए ओडिशा के विकास की नई गाथा लिखेगा।

भाइयो और बहनो, ओडिशा की इस पवित्र भूमि पर अनेक पराक्रमी वीरों ने जन्म लिया है। महान नेता पवित्र मोहन प्रधान के नेतृत्व में प्रजामंडल आंदोलन आम जन के धैर्य और साहस की कहानियां आज भी हमें प्रेरणा दे रही हैं। इस आंदोलन की वानर सेना के सदस्य बालक बाजीराव की कहानी तो पराक्रम और साहस का एक अनूठा उदाहरण है। देश के लिए अपनी जान की परवाह न करने वाले ऐसे अनेक वीरोंमहेश चंद्र सुबाहु सिंह, सारंगधर दास, दाशरथ पाणी, वैष्णव पटनायक और मुसा मलिक को हम फिर आदरपूर्वक नमन करते हैं। यह भूमि वीर राजा सोमनाथ सिंह की भी है जिन्होंने अंग्रेजों की पराधीनता को स्वीकार नहीं किया और ओडिशा से उनको बाहर करने के लिए संघर्षरत रहे। इन वीरों के आशीर्वाद से तालचेर का फर्टिलाइजर प्लांट राष्ट्रनिर्माण की अहम धुरी बनेगा और ये मेरा विश्वास पक्का है। ये क्षेत्र ओडिशाके तटीय इलाकोंको पश्चिमी भाग से भी जोड़ता है और इसलिए फर्टिलाइजर प्लांट का आधुनिकीकरण होने के बाद पूरे-पूरे क्षेत्र के विकास को नई गति मिलना तय है।

साथियो, तालचेर का खाद कारखाना अब तक पहले की सरकारों की असफलता का प्रतीक है, विफलता का प्रतीक है। अब ये खाद कारखाना हमारी सरकार की सफलता का प्रतीक बनके रहेगा ये मैं आपको विश्वास दिला रहा हूं। यहां खाद कारखाना जीवन की और विकास की कभी अहम धुरी रहा करता था लेकिन पहले की सरकारों की नीतियां और नीयत ऐसी रही कि अनेक खाद के कारखाने बंद हुए और जो एक बार बंद हुए वो गए काम से, कभी शुरू नहीं हो पाए। साल 2000 में तब की सरकार ने तालचेर कारखाने को शुरू करने का फैसला तो लिया लेकिन सारी बातें कागज पे धरी की धरी रह गईं। जब केंद्र में भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व में सरकार बनी तो फिर एक बार काम में तेजी आई और उन रुकावटों को, उन कठिनाइयों को दूर किया गया जो खाद कारखाने के रास्ते में रुकावट बनकर के रुकी पड़ी थीं। आज इसी का नतीजा है कि ओडिशा के लोगों को ये शुभ अवसर देखने को मिला है। और जब मैं अभी प्लांट का पुनरुद्धार का कार्य प्रारंभ कर रहा था, तो मुझे सारा मैप पर दिखा रहे थे, तो मैंने हमारे हमारे भारत सरकार के सब लोग जो इस काममें जुटे हैं उनको पूछा कि बताओ भाई प्रोडक्शन कब शुरू करोगे, उत्पादन कब प्रारंभ करोगे, कारखाने का काम कब पूरा होगा। उन्होंने मुझे वादा किया है कि 36 महीने के अंदर काम पूरा कर दिया जाएगा।

तालचेर के मेरे प्यारे भाइयो-बहनो, मैं आपको विश्वास दिलाता हूं कि 36 महीने में काम पूरा होने के बाद मैं स्वयं फिर एक बार आपके बीच आऊंगा और इसका लोकार्पण करूंगा। देश के किसानों को, देश की कृषि व्यवस्था को मजबूत करने के लिए हजारों करोड़ रुपये खर्च करके बंद पड़े खाद कारखानों को खोलने का काम हमने तेज गति से आगे बढ़ाया है। यहां तालचेर के अलावा उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में, झारखंड के सिंदरी में, तेलंगाना के रामागुंदममें और बिहार के बरौनी में देश के पांच बड़े खाद कारखानों को फिर से जीवन देने का काम चल रहा है। भाइयो और बहनो, कई बार मैं सोचता हूं, तो हैरान रह जाता हूं कि जब हमारे देश में साधन थे, संसाधन थे, हमारे देश में सामर्थ्य था तो भी इन कारखानों को शुरू करने की गंभीर कोशिश पहले क्यों नहीं हुई। क्योंसिर्फ फाइलों पर ही काम हुआ, राजनीतिक वादे होते रहे, भाषण होते रहे लेकिन जमीन पर कुछ नजर नहीं आया है।

भाइयो और बहनो, पिछले चार-सवा चार साल में हमारी सरकार ने देश के गरीबों, देश के पिछड़ों और हमारे पिछड़े इलाकों को बैंकिंग सेवाओं से जोड़ने में पूरा जोर लगा दिया है। जन धन योजना की वजह से ओडिशा में भी एक करोड़ तीस लाख गरीबों के बैंक खाते खुल चुके हैं। केंद्र सरकार की तमाम योजनाओं का पैसाअब इन खातों में सीधे ट्रांसफर किया जा रहा है। साथियो, आपको याद होगा और ओडिशा वालों को ज्यादा याद रहना चाहिए, हमारे देश में एक प्रधानमंत्री थे, उन्होंने एक बार कहा था कि दिल्ली से एक रुपया भेजते हैं तो सिर्फ 15 पैसा गरीब तक पहुंचता है, ये बीच में कौन बिचौलिये थे जो एक रुपये का 15 पैसा कर देते थे। उन्हें बीमारी क्या थीउसका तो पता चला, लेकिन उस बीमारी से देश को कैसे बचाया जा सके इसके लिए न उनमें कोई दम था, न संकल्प शक्ति थी, न विजन था, न सामर्थ्य था। वो चोरी का सिलसिला चलता रहा। अब हमारी सरकार ये सुनिश्चित कर रही है कि जो पैसा दिल्ली से भेजा जाए वोशत-प्रतिशत, पूरा का पूरा गरीब के बैंक खाते में सीधा जमा हो जाए, बीच में कोई बिचौलिया ना हो। हमारे काम करने का तरीका है और ये तरीका इसलिए है कि हमारी नीति स्पष्ट है, हमारी नीयत साफ है।

मेरे प्यारेभाइयो-बहनो, आज पूरे देश में स्वच्छता का मिशन तेज गति से काम कर रहा है। स्वच्छता का अभियान चल रहा है, हिंदुस्तान के हर छोटे-मोटे राज्य उसके साथ जुड़ रहे हैं। 2014 में ग्रामीण स्वच्छता का दायरा ओडिशा में केवल 10 प्रतिशत था, लेकिन जबसे भारत सरकार ने बीड़ा उठाया है, उसमें गति लाने का प्रयासकिया है, ओडिशाके जागरूक नागरिकों ने मेरी मदद की है, मेरा साथ दिया है, कंधे से कंधा मिलाकर के साथ दिया हैऔर उसके कारण 2014 में जो 10 प्रतिशत था वो अब करीब-करीब 55 प्रतिशत पहुंचा है। लेकिन देश किस गति से आगे बढ़ रहा है। देश ने जिस प्रकार से स्वच्छता का बीड़ा उठाया है, ओडिशा को बहुत कुछ करना बाकी है। यह न केवल राष्ट्रीय औसत से बहुत पीछे है, बल्कि ऐसे कई राज्यों से भी कम है जो कई अन्य मापदंडों से ओडिशा से पीछे हैं वो भी स्वच्छता के मुद्दे पे आगे निकल गए हैं और इसलिए हमें और भी आगे जाना है, और प्रयास करने हैं। मेरा विश्वास है कि आने वाले महीनों में इस अभियान को और तेज करके हम ओडिशा में भी संपूर्ण स्वच्छता का लक्ष्य हासिल करेंगे।

मैंने कुछ दिन पहले यहां के मुख्यमंत्री श्रीमान नवीन बाबू से भी आग्रह कियाथा कि देखिए देश स्वच्छता में काफी आगे बढ़ रहा है और ओडिशा पीछे रह जाएगा। शौचालय नहीं बन रहे हैं, ओपेन डेफिकेशन फ्री का मूवमेंट नहीं चल रहा है। मैंने उन्हें आग्रहपूर्वक संदेश भेजा था, लेकिन आज जब माता हिंगुला की धरती पर आया हूं, भगवान जगन्नाथ की धरती पर आया हूं, तब मैं नवीन बाबू को फिर से एक बार आग्रह करता हूं कि ओडिशा में वो स्वच्छता को प्राथमिकता दें। ये स्वच्छता स्वास्थ्य के साथ जुड़ी हुई है। ओडिशा के लोगों के उत्तम स्वास्थ्य के लिए उत्तम स्वच्छता की भी आवश्यकता है।

कुछ इस प्रकार से मेरे प्यारे भाइयो-बहनो, आने वाले दिनों में हम देश के लोगों के स्वास्थ्य से जुड़ा एक और भगीरथ कार्य कल से झारखंड की धरती से एक साथ हिंदुस्तान के गांव- गांव में प्रारंभ करने जा रहे हैं। ये कार्यक्रम है आयुष्मान भारत योजना के तहत कल से प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना PMJAYइसकी शुरुआत हो रही है। इस योजना के तहत देश के 10 करोड़ गरीब परिवारों को यानि कि करीब-करीब 50 करोड़ लोगों को मतलब अमेरिका, कनाडा, मेक्सिको उनकी पूरी जो जनसंख्या है उससे भी ज्यादा लोगों को,उनके परिवारों में अगरगंभीर बीमारी के इलाज के लिए आवश्यकता पड़ेगी तो साल भर में पांच लाख रुपये तक का हेल्थ एश्योरेंस दिया जाएगा। पांच लाख रुपया..यानि कोई गंभीर बीमारी होने की स्थिति में गरीब परिवार को तय अस्पतालों में पांच लाख रुपये तक का इलाज मुफ्त में मिलेगा। गरीब के घर में बीमारी आती है तो वो ब्याज के चक्कर में डूब जाता है, परिवार तबाह हो जाता है, मैं ऐसे परिवारों को बचाना चाहता हूं।

मेरे भाइयो-बहनो, हिंदुस्तान के अधिकतम राज्य भारत सरकार की इस योजना से जुड़ गए हैं। जो राज्य जुड़ गए हैं, उस राज्य के गरीबों को इसका फायदा मिलने वाला है। आप मुझे बताइए भाइयो-बहनो, इसका फायदा ओडिशा के गरीबों को मिलना चाहिए कि नहीं मिलना चाहिए। पूरी ताकत से मुझे समझाइए, मिलना चाहिए कि नहीं मिलना चाहिए। क्या ऐसी योजना का लाभ लेना चाहिए कि नहीं लेना चाहिए, ओडिशा की सरकार को आगे आना चाहिए कि नहीं आना चाहिए, लेकिन मुझे समझ नहीं आ रहा है, हमारे नवीन बाबू को समझ नहीं आ रहा है। मैं आज आप के माध्यम से सार्वजनिक रूप से हमारे मित्र नवीन बाबू को फिर से आग्रह करूंगा कि ओडिशा के लाखों परिवारों की भलाई के लिए, गरीब परिवारों के स्वास्थ्य के लिए, गरीब परिवारों को मदद करने के लिए भारत सरकार ने जो योजना बनाई है आयुष्मान भारत योजना आप उसके साथ जुड़िए और हर परिवार को पांच लाख रुपये तक की मदद में आप भी आ जाइए, मैं निमंत्रण देता हूं। इस योजना से जुड़ने पर ओडिशा के लोग किसी भी राज्य में, अगर यहां से आपको दिल्ली भी जाना पड़े बीमारी में, तो उसका इलाज भी उस योजना के तहत आपका मुफ्त में हो जाएगा, लेकिन योजना होगी तो लाभ मिलेगा। अगर ओडिशा की सरकार नहीं जुड़ेगी, तो आपकी सेवा मैं नहीं कर पाऊंगा।

भाइयो और बहनो, ओडिशा में स्वास्थ्य सेवाएं किस स्थिति में रही हैं, ये किसी से छिपा नहीं है। जन्म के समय माता और बच्चे की होने वाली मृत्यु, ओडिशा के हेल्थ सेंटर की सच्चाई, मैं नहीं मानता हूं, उसके लिए अब कोई मुझे वर्णन करने की जरूरत है। सारी चीजें खुली किताब की तरह लोगों के सामने पड़ी हैं। इसलिए केंद्र सरकार का प्रयास है कि यहां स्वास्थ्य सुवाएं सुधरें। यहां के नागरिकों को बीमारियों के इलाज के लिए बड़े-बड़े शहरों की तरफ न जाना पड़े। आयुष्मान भारत के तहत आपके राज्य की बड़ी पंचायतों में वेलनेस सेंटर भी खोलने की तैयारी है। इसके अलावा राज्य में पांच नए मेडिकल कॉलेज भी खोले जा रहे हैं, बालासोर, बारीपडा, बोलांगीर, कोरापुट और पुरी में मेडिकल कॉलेज और राउरकेला में मेडिकल कॉलेज के लिए लगभग 570 करोड़ रुपये की मदद दी जा रही है। साथ ही तालचेर और सुंदरगढ़ में सुपर स्पेशिएलिटी हॉस्पिटल पर काम चल रहा है। कटक, बुर्ला और बहरामपुर के मौजूदा मेडिकल कॉलेजों के आधुनिकीकरण पर भी 360 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं।

भाइयो और बहनो, आज इस मंच पर आपके लोकप्रिय साथी श्रीमान धर्मेंद्र जी, श्रीमान जुएलजी जो मेरी सरकार की टीम में काम करते हैं, उनकी भी मैं प्रशंसा करूंगा क्योंकि उनकी योजनाओं के कारण सरकार की कई योजनाएं यहां लागू हुई हैं। बहनों-बेटियों को रसोईघर में धुएं से मुक्ति मिली है। ओडिशा में उज्ज्वला योजना के तहत 34 लाख से ज्यादा गरीब परिवार, महिलाओं को मुफ्त गैस कनेक्शन दिए गए हैं। ओडिशा ने एलपीजी गैस कनेक्शन के मामले में बहुत बड़ी छलांग लगाई है। 2014 में राज्य में सिर्फ 22 प्रतिशत लोगों के पास गैस कनेक्शन था, अब यह बढ़कर 60-65 प्रतिशत से ज्यादा हो गया है। उज्ज्वला योजना की वजह से न सिर्फ महिलाओं का, बल्कि उनके परिवार का भी स्वास्थ्य सुधर रहा है।
साथियो, केंद्र सरकार की कोशिश आपका जीवन आसान बनाने की है, आपके जीवन से बेवजह की चुनौतियां कम करने की है। इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए सिर्फ एक रुपये महीना और 90 पैसे प्रतिदिन के प्रीमियम पर ओडिशा के 50 लाख लोगों को सुरक्षा बीमा कवच दिया गया है। किसी अनहोनी की स्थिति में अब प्रधानमंत्री जीवन ज्योति योजना और प्रधानमत्री सुरक्षा बीमा योजना, इसके कहत दो-दो लाख रुपये इन गरीब परिवारों को मिल रहे हैं।

भाइयो और बहनो, किस गरीब का सपना नहीं होता कि उसके पास अपना एक घर हो। हर किसी का सपना होता है लेकिन दशकों तक घरों को लेकर भी नारे चलते रहे, बड़ी-बड़ी बातें कहीं, जमीन पर काम न के बराबर हुआ। पहले आवास योजनाओं के तहत किस तरह के घर मिलते थे, कितने घर मिलते थे, ये सारी बातें आपको भलीभांति पता हैं। अब भारतीय जनता पार्टी सरकार ने ठाना है कि साल 2022 तक जब आजादी के 75 साल मनाएंगे, देश में कोई बिना घर के न हो, हर गरीब के पास छत हो और इसके लिए पहले की योजनाओं में जितनी कमियां थीं उन्हें दूर किया गया है। केंद्र सरकार की आवास योजनाओं के तहत ओडिशा में बन रहे घरों में भी 40 प्रतिशत से ज्यादा की वृद्धि हुई है।

पिछले चार साल में प्रधानमंत्री आवास योजना समेत दूसरी केंद्रीय योजनाओं के तहत राज्य के करीब-करीब 10 लाख घरों के निर्माण के लिए स्वीकृति दे दी गई है। जबकि पहले की सरकार के 10 साल के शासन में सिर्फ सात लाख घरों की स्वीकृति दी गई। घरों के निर्माण के ये अंतर गवाह हैं कि हमारी सरकार ओडिशा के गरीब भाई-बहनों को घर देने के लिए कितनी गंभीर है।

भाइयो और बहनो, केंद्र सरकार ये भी सुनिश्चित करने की कोशिश कर रही है कि ओडिशा में किसी भी गरीब को भूखा सोने की नौबत नहीं आनी चाहिए। कभी-कभी ये जानकारियां लोगों को नहीं होती हैं तभी हमें मजबूरन बताना पड़ रहा है मेरे ओडिशा के प्यारे भाइयो-बहनो, ओडिशा में जो चावलगरीबों को एक रुपये प्रति किलो दिया जाता है, उस एक किलो चावल के पीछे 25 रुपया से 30 रुपया भारत सरकार के खजाने से देते हैं। तब जाकर के एक रुपये किलो चावल आपकी थाली में आता है। ये जानकारी लोगों को है ही नहीं, उनको पता ही नहीं है, सारा पैसा दिल्लीसे आता है।राज्य के 85 लाख से ज्यादा परिवारों को इसका लाभ मिल रहा है। इस योजना के लिए केंद्र सरकार नवीन बाबू की सरकार को हर महीने लगभग 450 करोड़ रुपये देती है। इसके अलावा जो वितरण प्रणाली है, उसका आधुनिकीकरण करके ये सुनिश्चित किया जा रहा है कि गरीबों का अधिकार कोई बिचौलिया छीन न ले।

भाइयो और बहनो, जब नीयत साफ हो, देश का हित सबसे आगे हो, तो ऐसे फैसले लिए जाते हैं जिन्हें लेने का हौसला दूसरों में कहीं नजर नहीं आता है। हमारी सरकार आर्थिक ही नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय के लिए भी निरंतर कार्य कर रही है। दशकों से देश में ओबीसी कमीशन को संवैधनिक दर्जा देने की मांग हमारे पिछड़े समुदाय के भाई-बहन कर रहे थे। इस मांग को पूरा करने का काम भी इसी सरकार ने किया है। अब ओबीसी कमीशन के पास जितनी जिम्मेदारियां हैं, उतने ही उचित उसके पास अब अधिकार भी हैं।

तीन दिन पहले ही केंद्र सरकार ने एक और ऐसा फैसला लिया है, जिसकी आवश्यकता दशकों से महसूस की जा रही थी लेकिन पहले की कोई भी सरकार इसका जिक्र तक करने से डरती थी। ये फैसला है तीन तलाक पर। तीन तलाक किस तरह हमारी मुस्लिम बहनों की जिंदगी को तबाह कर रहा है, ये हम भलीभांति जानते हैं लेकिन वोट खोने के डर से इस समस्याके बारे में कोई बात तक करने को तैयार नहीं था। हमारी सरकार ने जब लोकसभा में तीन तलाक से जुड़ा कानून पास कराया तो उसे राज्यसभा में रोकने की कोशिश की गई। लेकिन हम मुस्लिम बहनों-बेटियों को इस कुप्रथा के चंगुल से निकालने के लिए संकल्पबद्ध हैं, प्रतिबद्ध हैं। अब तीन तलाक पर ऑर्डिनेंस (अध्यादेश) लाकर इसे गैरकानूनी घोषित कर दिया गया है। हमारी निरंतर कोशिश रहेगी कि इस पर संसद से भी जल्द से जल्द मुहर लगवाई जाए।

साथियो, आपके आशीर्वाद से ओडिशा भी देश के विकास में कंधे से कंधा मिलाकर के आगे बढ़ने के लिए तैयार है। रुकावट क्या है, वो मुझे कहने की जरूरत नहीं है, मुसीबत कहां है वो मुझे समझाने की जरूरत नहीं है। भारतीय जनता पार्टी के पक्ष में आपका ये समर्थन इस बात का गवाह है कि नए ओडिशा के सपने को आप जल्द से जल्द पूरा करना चाहते हैं। आपके इस सपने को पूरा करने के लिए, ओडिशा के इस सपने को पूरा करने के लिए केंद्र सरकार हर तरह से आपके साथ है।
एक बार फिर आप सभी को तालचेर में हो रहे नवनिर्माण की बहुत-बहुत बधाई। फिर से एक बार 36 महीने पर काम पूरा होने पर आपके आशीर्वाद से यहां उद्घाटन के लिए आऊंगा।

भाइयो-बहनो, अब यहां से मुझे झारसुगुड़ा जाने का कार्यक्रम है। वहां भी नए ओडिशा से जुड़ी अनेक परियोजनाओं की शुरुआत होगी। आप यहां आए, इतना स्नेह, इतना आशीर्वाद दिया, मैं हृदय से आप सबका बहुत-बहुत धन्याद करता हूं।

जय जगन्नाथ
जय जगन्नाथ
जय जगन्नाथ।।

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100 crore vaccinations a reflection of the strength of the country: PM Modi
October 22, 2021
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“100 crore vaccinations are not just a figure, but a reflection of the strength of the country”
“A success of India and the success of every countryman”
“If the disease does not discriminate, then there cannot be any discrimination in the vaccination. That's why it was ensured that the VIP culture of entitlement does not dominate the vaccination campaign”
“Acceptance that India enjoys in the world as a pharma hub will be further strengthened.”
“Government made public participation the first line of defence in the country's fight against the pandemic”
“The entire vaccination program of India has been Science-born, Science-driven and Science-based”
“Today not only are record investments coming in Indian companies but new employment opportunities are also being created for the youth. With record investment in start-ups, unicorns are emerging”
“Just like Swachh Bharat Abhiyan is a mass movement, in the same way, buying things made in India, buying things made by Indians, being Vocal for Local has to be put into practice”
“No matter how good the cover is, no matter how modern the armour is, even if armour gives a complete guarantee of protection, weapons are not given up while the battle is on. There is no reason to get careless. Celebrate our festivals with utmost precautions”

नमस्कार, मेरे प्यारे देशवासियों !

आज मैं अपनी बात की शुरुआत एक वेद वाक्य के साथ करना चाहता हूँ।

कृतम् मे दक्षिणे हस्ते,

जयो मे सव्य आहितः।

इस बात को भारत के संदर्भ में देखें तोबहुत सीधा- साधाअर्थयही है कि हमारे देशने एक तरफ कर्तव्य का पालन किया तो दूसरी तरफ उसे बड़ी सफलता भी मिली। कल 21 अक्टूबर को भारत ने 1 बिलियन, 100 करोड़ वैक्सीन डोज़ का कठिन लेकिन असाधारण लक्ष्य प्राप्त किया है। इस उपलब्धि के पीछे 130 करोड़ देशवासियों की कर्तव्यशक्ति लगी है, इसलिए ये सफलता भारत की सफलता है, हर देशवासी की सफलता है। मैं इसके लिए सभी देशवासियों को हृदय से बधाई देता हूँ।

साथियों,

100 करोड़ वैक्सीन डोज, ये केवल एक आंकड़ा नहीं है। ये देश के सामर्थ्य का प्रतिबिंब है, इतिहास के नए अध्याय की रचना है। ये उस नए भारत की तस्वीर है जो कठिन लक्ष्य निर्धारित कर, उन्हें हासिल करना जानता है। ये उस नए भारत की तस्वीर है जो अपने संकल्पों की सिद्धि के लिए परिश्रम की पराकाष्ठा करता है। 

साथियों,

आज कई लोग भारत के वैक्सीनेशन प्रोग्राम की तुलना दुनिया के दूसरे देशों से कर रहे हैं। भारत ने जिस तेजी से 100 करोड़ का, वन बिलियन का आंकड़ा पार कियाहै , उसकी सराहना भी हो रही है। लेकिन, इस विश्लेषण में एक बात अक्सर छूट जाती है कि हमने ये शुरुआत कहाँ से की है! दुनिया के दूसरे बड़े देशों के लिए वैक्सीन पर रिसर्च करना, वैक्सीन खोजना, इसमें दशकों से उनकीमहारथ, expertise थी। भारत, अधिकतर इन देशों की बनाई वैक्सीन्स पर ही निर्भर रहता था।हम बाहर से मंगवाते थे, इसी वजह से जब 100 साल की सबसे बड़ी महामारी आई, तो भारत पर सवाल उठने लगे। क्या भारत इस वैश्विक महामारी से लड़ पाएगा? भारत दूसरे देशों से इतनी वैक्सीन खरीदने का पैसा कहां से लाएगा? भारत को वैक्सीन कब मिलेगी? भारत के लोगों को वैक्सीन मिलेगी भी या नहीं? क्या भारत इतने लोगों को टीका लगा पाएगा, कि महामारी को फैलने से रोक सके? भांति-भांति के सवाल थे, लेकिन आज ये 100 करोड़ वैक्सीन डोज, हर सवाल का जवाब दे रहा है। भारत ने अपने नागरिकों को 100 करोड़ वैक्सीन डोज लगाई हैं, और वो भी मुफ्त।बिना पैसे लिए।

साथियों,

100 करोड़ वैक्सीन डोज का एक प्रभाव ये भी होगा कि दुनिया अब भारत को कोरोना से ज्यादा सुरक्षित मानेगी । एक फार्मा हब के रूप में भारत को दुनिया में जो स्वीकृति मिली हुई है, उसे और मजबूती मिलेगी। पूरा विश्व आज भारत की इस ताकत को देख रहा है, महसूस कर रहा है।

साथियों,

भारत का वैक्सीनेशन अभियान 'सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, और सबका प्रयास' का सबसे जीवंत उदाहरण है। कोरोना महामारी की शुरुआत में ये भी आशंकाएं व्यक्त की जा रही थीं कि भारत जैसे लोकतंत्र में इस महामारी से लड़ना बहुत मुश्किल होगा। भारत के लिए, भारत के लोगों के लिए ये भी कहा जा रहा था कि इतना संयम, इतना अनुशासन यहाँ कैसे चलेगा? लेकिन हमारे लिए लोकतन्त्र का मतलब है- 'सबका साथ' । सबको साथ लेकर देश ने 'सबको वैक्सीन', 'मुफ़्त वैक्सीन' का अभियान शुरू किया। गरीब-अमीर, गाँव-शहर, दूर-सुदूर, देश का एक ही मंत्र रहा कि- अगर बीमारी भेदभाव नहीं करती, तो वैक्सीन में भी भेदभाव नहीं हो सकता ! इसलिए, ये सुनिश्चित किया गया कि वैक्सीनेशन अभियान पर VIP कल्चर हावी न हो। कोई कितने ही बड़े पद पर क्यों ना रहा हो, कितना ही धनी क्यों ना रहा हो, उसे वैक्सीन सामान्य नागरिकों की तरह हीमिलेगी।

साथियों,

हमारे देश के लिए ये भी कहा जा रहा था कि यहाँ ज़्यादातर लोग टीका लगवाने ही नहीं आएंगे। दुनिया के कई बड़े विकसित देशों में आज भी वैक्सीन हेजिटेंसी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। लेकिन भारत के लोगों ने 100 करोड़ वैक्सीन डोज लेकर ऐसे लोगों को निरुत्तर कर दिया है।

साथियों,

किसी अभियान में जब 'सबका प्रयास' जुड़ जाता है, तो परिणाम अद्भुत ही होते हैं। हमने महामारी के खिलाफ देश की लड़ाई में जनभागीदारी को अपनी पहली ताकत बनाया, फ़र्स्ट लाइन ऑफ डिफेंस बनाया। देश ने अपनी एकजुटता को ऊर्जा देने के लिए ताली, थाली बजाई, दिये जलाए। तब कुछ लोगों ने कहा था कि क्या इससे बीमारी भाग जाएगी? लेकिन हम सभी को उसमें देश की एकता दिखी, सामूहिक शक्ति का जागरण दिखा। इसी ताकत ने कोविड वैक्सीनेशन में आज देश को इतने कम समय में 100 करोड़ तक पहुंचाया है। कितनी ही बार हमारे देश ने एक दिन में एक करोड़ टीकाकरण का आंकड़ा पार किया है। ये बहुत बड़ा सामर्थ्य है, प्रबंध कौशल है, टेक्नोलॉजी का बेहतरीन इस्तेमाल है, जो आज बड़े-बड़े देशों के पास नहीं है।

साथियों,

भारत का पूरा वैक्सीनेशन प्रोग्राम विज्ञान की कोख में जन्मा है, वैज्ञानिक आधारों पर पनपा है, और वैज्ञानिक तरीकों से चारों दिशाओं में पहुंचा है। हम सभी के लिए गर्व करने की बात है कि भारत का पूरा वैक्सीनेशन प्रोग्राम, Science Born, Science Driven और Science Based रहा है। वैक्सीन बनने से पहले और वैक्सीन लगने तक, इस पूरे अभियान में हर जगह साइन्स और साईंटिफ़िक अप्रोच शामिल रही है। हमारे सामने चुनौती मैन्यूफैक्चरिंग को लेकर भी थी, प्रॉडक्शन को स्केलअप करने की भी थी। इतना बड़ा देश, इतनी बड़ी आबादी! उसके बाद अलग- अलग राज्यों में, दूर-दराज इलाकों में समय से वैक्सीन पहुंचाना! ये भी किसी भागीरथ कार्य से कम नहीं था। लेकिन, वैज्ञानिक तौर तरीकों और नए नए इनोवेशन से देश ने इन चुनौतियों के समाधान तलाशे। असाधारण स्पीड से संसाधनों को बढ़ाया गया। किस राज्य को कितनी वैक्सीन कब मिलनी चाहिए, किस इलाके में कितनी वैक्सीन पहुंचनी चाहिए, इसके लिए भी वैज्ञानिक फॉर्मूले के तहत काम हुआ। हमारे देश ने कोविन प्लेटफ़ार्म की जो व्यवस्था बनाई है, वो भी विश्व में आकर्षण का केंद्र है। भारत में बने कोविन प्लेटफ़ॉर्म ने, न केवल आम लोगों को सहूलियत दी, बल्कि हमारे मेडिकल स्टाफ के काम को भी आसान बनाया।

साथियों,

आज चारों तरफ एक विश्वास है, उत्साह है, उमंग है। समाज से लेकर इकोनॉमी, हम हर तबके पर देखे optimism, optimism, optimism ही नज़र आता है। एक्सपर्ट्स और देश-विदेश की अनेक एजेंसीज भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर बहुत सकारात्मक हैं। आज भारतीय कंपनियों में ना सिर्फ रिकॉर्ड इंवेस्टमेंट आ रहा है बल्कि युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी बन रहे हैं। स्टार्ट-अप्स में रिकॉर्ड इन्वेस्टमेंट के साथ ही रिकॉर्ड स्टार्ट-अप्स, यूनिकॉर्न बन रहे हैं। हाउसिंग सेक्टर में भी नई ऊर्जा दिख रही है। पिछले महीनों में किए गए कई सारे रीफॉर्म्स- कई सारे इनिशिएटिव, गति शक्ति से लेकर नई ड्रोन पॉलिसी तक भारत की अर्थव्यवस्था को और तेजी से आगे बढ़Iने में बड़ी भूमिका निभाएंगे। कोरोना काल में कृषि क्षेत्र ने हमारी अर्थव्यवस्था को मजबूती से संभाले रखा। आज रिकॉर्ड लेवल पर अनाज की सरकारी खरीद हो रही है, किसानों के बैंक खातों में सीधे पैसा जा रहा है। वैक्सीन के बढ़ते हुए कवरेज के साथ-साथ आर्थिक-सामाजिक गतिविधियां हों, खेल जगत हो, टूरिज्म हो, इंटरटेमेंट हो, सब तरफ सकारात्मक गतिविधियां तेज हो रही हैं। आने वाले त्योहारों का मौसम इसे और गति देगा, औरशक्ति देगा।

साथियों,

एक जमाना था जब Made in ये country, made in वो country का बहुत क्रेज हुआ करता था। लेकिन आज हर देशवासी ये साक्षात अनुभव कर रहा है कि Made in India की ताकत बहुत बड़ी है। और इसलिए, आज मैं आपसे फिर ये कहूंगा कि हमें हर छोटी से छोटी चीज, जो Made in India हो, जिसे बनाने में किसी भारतवासी का पसीना बहा हो, उसे खरीदने पर जोर देना चाहिए। और ये सबके प्रयास से ही संभव होगा। जैसे स्वच्छ भारत अभियान, एक जन-आंदोलन है, वैसे ही भारत में बनी चीज खरीदना, भारतीयों द्वारा बनाई चीज खरीदना, Vocal for Local होना, ये हमें व्यवहार में लाना ही होगा। और मुझे विश्वास है, सबके प्रयास से हम ये भी करके रहेंगे। आप याद करिए, पिछली दीवाली, हर किसी के मन-मस्तिष्क में एक तनाव था। लेकिन इस दीवाली, 100 करोड़ वैक्सीन डोज के कारण, एक विश्वास का भाव है। अगर मेरे देश की वैक्सीन मुझे सुरक्षा दे सकती है तो मेरे देश का उत्पादन, मेरे देश में बने सामान, मेरी दीवाली और भी भव्य बना सकते हैं। दीवाली के दौरान बिक्री एक तरफ और बाकी साल की बिक्री एक तरफ होती है।हमारे यहाँ दीवाली के समय त्योहारों के समय ब्रिकी एकदम बढ़ जाती है। 100 करोड़ वैक्सीन डोज, हमारे छोटे-छोटे दुकानदारों, हमारे छोटे-छोटे उद्यमियों, हमारे रेहड़ी-पटरी वाले भाइयों-बहनों, सभी के लिए आशा की किरण बनकर आई है।

साथियों,

आज हमारे सामने अमृत महोत्सव के संकल्प हैं, तो ऐसे में हमारी ये सफलता हमें एक नया आत्मविश्वास दिलाती है। हम आज कह सकते हैं कि देश बड़े लक्ष्य तय करना और उन्हें हासिल करनाबखूबीजानता है। लेकिन, इसके लिए हमें सतत सावधान रहने की जरूरत है। हमें लापरवाह नहीं होना है। कवच कितना ही उत्तम हो, कवच कितना ही आधुनिक हो, कवच से सुरक्षा की पूरी गारंटी हो, तो भी जब तक युद्ध चल रहा है, हथियार नहीं डाले जाते। मेरा आग्रह है, कि हमें अपने त्योहारों को पूरी सतर्कता के साथ ही मनाना है।और जहां तक मास्क का सवाल है, कभी- कभी ज़रा लेकिन अब तो डिजाइन की दुनिया भी मास्क में प्रवेश कर चुकी है मेरा इतना ही कहना है जैसे हमें जूते पहनकर ही बाहर जाने की आदत लग गई है, बस वैसे ही मास्क को भी एक सहज स्वभाव बनाना ही होगा।जिनको अभी तक वैक्सीन नहीं लगी है, वो इसे सर्वोच्च प्राथमिकता दें। जिन्हें वैक्सीन लग गई है, वो दूसरों को प्रेरित करें। मुझे पूरा भरोसा है कि हम सब मिलकर प्रयास करेंगे, तो कोरोना को और जल्द हरा पाएंगे। आप सभी को आने वाले त्योहारों की एक बार फिर बहुत-बहुत शुभकामनायें।बहुत- बहुतधन्यवाद !