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Published By : Admin | April 4, 2024 | 19:10 IST

India’s Holistic Growth Uplifting India to New Heights under Leadership of PM Modi

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Today, the entire country and entire world is filled with the spirit of Bhagwan Shri Ram: PM Modi at Dhwajarohan Utsav in Ayodhya

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Text of PM’s address during inauguration of Sri Guru Bhairavaikya Mandira in Mandya, Karnataka
April 15, 2026
India is a vibrant civilization that has been thriving for thousands of years : PM
There are very few examples in the world where traditions remain continuously intact for such a long period: PM
In our society, from time to time, such great personalities have continued to emerge, who have not remained confined merely to spiritual guidance : PM
They have lived among the people, understood their joys and sorrows, felt their struggles, and shown the way to lead society out of sorrow, suffering, and hardship: PM
My first appeal is that we all resolve to save water and manage it better: PM
My second appeal is related to trees and nature, Under the ‘Ek Ped Maa Ke Naam’ campaign, millions of people have planted trees in the name of their mothers; Let us also plant trees in honor of our mother and resolve to protect Mother Earth: PM
My third appeal is regarding cleanliness; Be it a religious site, a public place, a village or a city, maintaining cleanliness everywhere is our responsibility: PM
My fourth appeal is related to Swadeshi and self-reliance; Let us adopt Indian products, strengthen Indian manufacturers and industries: PM
My fifth appeal is related to appreciating the beauty of our country; Let us know our country, travel within it and promote domestic tourism: PM
My sixth appeal to the farmers is that they move towards natural farming: PM
My seventh appeal is related to healthy eating; Obesity is becoming a major challenge in our country. To address this, make an effort to reduce the amount of oil in your food by 10%: PM
My eighth appeal is related to yoga, sports, and fitness. We must all make these an integral part of our lives: PM
My ninth appeal is related to the spirit of service: PM

परमपूज्य जगतगुरू श्री श्री श्री डॉक्टर निर्मलानंदनाथ महास्वामी जी, पूर्व प्रधानमंत्री आदरणीय एच डी देवेगौड़ा जी, यहां के राज्यपाल श्रीमान थावर चंद गहलोत जी, परमपूज्य जगतगुरू स्वामी परमात्मानंद जी सरस्वती जी, केंद्र में मेरे सहयोगी एच डी कुमार स्वामी, शोभा करंदलाजे जी, कर्नाटका के नेता प्रतिपक्ष आर अशोका जी, राज्य के मंत्री एन चेलुवराय स्वामी जी, सभी पूज्य संत, अन्य सभी महानुभाव और विशाल संख्या में पधारे हुए सभी भाईयों और बहनों।

साथियों,

आज मेरा मन कुछ ऐसे भावों से भरा है, जिसे शब्दों में प्रकट करना मुश्किल है। श्री काल भैरो मंदिर में दर्शन और पूजन, श्री गुरु भैरवैक्य मंदिर के भव्य उद्घाटन का साक्षी बनना, ऐतिहासिक ज्वाला पीठ में समय बिताना, आध्यात्मिक ऊंचाई पर पहुंचे संतों का सान्निध्य प्राप्त करना, और अब यहां उपस्थित जनसमूह के दर्शन करना, ये अनुभव हमेशा हमेशा मेरे साथ रहेगा। मैं इसे अपना सौभाग्य मानता हूं, कि मुझे आप सभी के बीच आने का अवसर मिला। मैं आप सभी को इस अवसर की अनेक-अनेक शुभकामनाएं देता हूं।

साथियों,

कर्नाटका आना मेरे लिए बहुत प्रसन्नता की बात होती है। हर बार यहां आकर मुझे नई प्रेरणा मिलती है। लेकिन आज सक्करे नगरा मधुर मंड्या जिले का ये दौरा कई वजहों से महत्वपूर्ण है। ये धरती Sugarcane की sweetness के लिए जानी जाती है, और यहां के लोगों की बातों में वैसी ही sweetness दिखती भी है। उनका अपनापन, उनका स्वागत करने का भाव दिल को छू जाता है। मैं अक्सर कहता हूं कि कर्नाटका तत्वज्ञान और तंत्रज्ञान, दोनों में समृद्ध है। यानी दर्शन की गहराई और टेक्नोलॉजी की शक्ति, दोनों यहां मौजूद हैं। श्री आदि चुंचनगिरी महासंस्थान मठ जैसे आध्यात्मिक केंद्र इस महान भूमि की महान देन हैं। ये संस्था तत्वज्ञान, आध्यात्मिकता और नैतिक मूल्यों के माध्यम से समाज को दिशा देती है।

साथियों,

भारत, हजारों वर्षों से चलती आ रही एक जीवंत सभ्यता है। दुनिया में बहुत कम ऐसे उदाहरण मिलते हैं जहां परंपराएं इतनी लंबी अवधि तक निरंतर बनती रहती हैं। जब हम श्री आदि चुंचनगिरी महासंस्थान मठ को देखते हैं, तो हमें इस निरंतरता का साक्षात रूप दिखाई देता है। इस पवित्र मठ का इतिहास लगभग दो हजार वर्षों का है। इसकी गुरु परंपरा, इसका आध्यात्मिक दर्शन, और इसकी सेवा की परंपरा ने पीढ़ियों तक इस भूमि को समृद्ध किया है। इसी परंपरा में जगद्गुरु श्री श्री श्री डॉ. बालगंगाधरनाथ महास्वामीजी जैसे महान संत हुए, जिन्होंने इस विरासत को नई ऊंचाई दी। आज जगद्गुरु श्री श्री श्री डॉ. निर्मलानंदनाथ महास्वामीजी उसी धारा को नई ऊर्जा और गति और समर्पण के साथ सबको साथ लेकर के आगे बढ़ा रहे हैं।

 

साथियों,

हमारे समाज में समय समय पर ऐसे महान व्यक्तित्व आते रहे हैं, जो केवल आध्यात्मिक मार्गदर्शन तक सीमित नहीं रहे। वे लोगों के बीच रहे, उन्होंने लोगों के सुख-दुख को समझा, उनके संघर्ष को महसूस किया, और समाज को दुख से, पीड़ा से, कठिनाई से बाहर निकालने का रास्ता दिखाया। जगद्गुरु श्री श्री श्री डॉ. बालगंगाधरनाथ महास्वामीजी भी ऐसी ही दिव्य विभूति थे। वो शरीर से हमारे साथ अभी नहीं हैं, लेकिन वे यहां मौजूद हैं। उन्होंने लोगों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए कई स्तरों पर कार्य किया। उनमें गहरी आध्यात्मिक शक्ति थी, लेकिन उनका जीवन केवल साधना तक सीमित नहीं था। गांव की पृष्ठभूमि से आने के कारण वे ग्रामीण युवाओं की आकांक्षाओं को समझते थे, सामान्य मानवी की चुनौतियों को समझते थे। इसलिए, उनके लिए भक्ति का अर्थ समाज से दूर जाना नहीं, बल्कि समाज के लिए आगे बढ़कर जिम्मेदारी उठाना था।

साथियों,

महास्वामीजी ने एजुकेशन के क्षेत्र में सैकड़ों संस्थान स्थापित किए, जहां प्राइमरी लेवल से लेकर मेडिकल और इंजीनियरिंग जैसे प्रोफेशनल कोर्स तक की शिक्षा दी जा रही है। इसका लाभ सबसे ज्यादा गरीब और ग्रामीण परिवारों से आने वाले बच्चों को मिला है। हेल्थ के क्षेत्र में भी उनका विजन उतना ही ट्रांसफॉर्मेटिव था। उन्होंने ऐसे healthcare institutions बनाए, जहां आज भी सेवाभाव से काम हो रहा है। उनका मानना था कि quality healthcare कुछ लोगों का विशेष अधिकार नहीं होनी चाहिए, बल्कि हर नागरिक तक पहुंचनी चाहिए।

साथियों,

आज हमारी सरकार भी इसी विजन के साथ काम कर रही है। आयुष्मान भारत योजना के तहत करोड़ों गरीबों का अस्पताल में मुफ्त इलाज किया गया है। हमने इस योजना को 70 वर्ष से अधिक उम्र के सभी वरिष्ठ नागरिकों तक भी बढ़ाया है, ताकि उन्हें गरिमा के साथ बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मिल सके।

साथियों,

आज इस श्री गुरु भैरवैक्य मंदिर में उपस्थित होना, और जगतगुरू श्री श्री श्री डॉ. बालगंगाधरनाथ महास्वामीजी का आशीर्वाद प्राप्त करना मेरे लिए सौभाग्य की बात है। हम सभी जानते हैं, महास्वामीजी करुणा की प्रतिमूर्ति थे। उनकी करुणा केवल मनुष्यों तक सीमित नहीं थी, वो सभी जीवों तक फैली हुई थी। Peacocks की रक्षा के लिए उन्होंने जो सामाजिक आंदोलन खड़ा किया, वो इसका उदाहरण है। और आज मुझे स्मृति चिन्ह में भी स्वामी जी ने Peacock ही दिया है। ये केवल पर्यावरण संरक्षण का काम नहीं है, ये हमारी सांस्कृतिक चेतना से भी जुड़ा हुआ है, क्योंकि peacock हमारे देश का राष्ट्रीय पक्षी है और भगवान सुब्रह्मण्य का वाहन भी है। वैसे दिल्ली में आप सब देशवासियों की कृपा से भारत सरकार ने मुझे जो सरकारी निवास स्थान दिया है, वहां भी peacock बहुत हैं। और कई से तो मेरी अच्छी दोस्ती भी हो गई है। मैं तो प्रत्यक्ष देखता हूं कि peacock कितना शांत और सुंदर पक्षी है।

साथियों,

आज जगद्गुरु श्री श्री श्री डॉ. निर्मलानंदनाथ महास्वामीजी अपने गुरु की परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। उनके दिखाए मार्ग पर चलकर लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रहे हैं। अपने गुरु के सम्मान में श्री गुरु भैरवैक्य मंदिर का निर्माण करना केवल एक संरचना बनाना नहीं है, ये एक भाव को साकार करना है। आने वाले समय में यह स्थान निश्चित रूप से सेवा, साधना और प्रेरणा का केंद्र बनेगा।

साथियों,

श्री आदि चुंचनगिरी महासंस्थान मठ, अन्न, अक्षर, आरोग्य, अध्यात्म, आश्रय, अरण्य, आकलु, अनुकंपा और अनुबंध, इन नौ सिद्धांतों पर कार्य करता है। इसी भावना से मैं आप सभी के सामने नौ ऐसे क्षेत्र रखना चाहता हूं, जहां हम सभी मिलकर एक सामूहिक संकल्प ले सकते हैं। मैं अपने 9 आग्रह आपके सामने रखता हूं।

साथियों,

ये हमारा मंड्या पानी के महत्व को समझता है। यह पूरा क्षेत्र मां कावेरी के आशीर्वाद से पला-बढ़ा है। और इसलिए मेरा पहला आग्रह है कि हम सभी पानी बचाने और पानी के बेहतर प्रबंधन का संकल्प लें। मेरा दूसरा आग्रह पेड़ और प्रकृति से जुड़ा है। ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत करोड़ों लोगों ने अपनी माताओं के नाम पर पेड़ लगाए हैं। हम भी अपनी मां के सम्मान में पेड़ जरूर लगाएं और धरती माता की रक्षा का संकल्प लें। मेरा तीसरा आग्रह स्वच्छता को लेकर है। धार्मिक स्थल हो, सार्वजनिक स्थान हो, गांव हो या शहर, हर जगह स्वच्छता बनाए रखना, ये हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है, ये हमारा कर्तव्य है। मेरा चौथा आग्रह स्वदेशी और आत्मनिर्भरता से जुड़ा है। हम भारतीय उत्पादों को अपनाएं, भारतीय मैन्युफैक्चरर्स और उद्योगों को मजबूत करें। वोकल फॉर लोकल के मंत्र को लेकर के जियें। मेरा पांचवां आग्रह देश की सुंदरता को देखने से जुड़ा है। हम अपने देश को जानें, हम देश के अलग-अलग कोने में घूमें, डोमेस्टिक टूरिज्म को बढ़ावा दें।

साथियों,

मंड्या मेहनती किसानों की भूमि है। मेरा छठा आग्रह किसानों से है कि वे केमिक्ल मुक्त, केमिक्ल फ्री प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ें। मेरा सातवां आग्रह स्वस्थ खानपान से जुड़ा है। अभी हमारे बीच आदरणीय श्री देवेगौड़ा जी मौजूद हैं। वे ‘रागी मुद्दे’ को लोकप्रिय बनाने के लिए जाने जाते हैं। ये पूरा क्षेत्र रागी के महत्व को समझता है। युवा पीढ़ी भी मिलेट्स को अपने भोजन में शामिल करे। हमारे देश में ओबेसिटी, मोटापा एक बड़ी चुनौती बन रही है। इससे निपटने के लिए, भोजन में तेल की मात्रा 10 प्रतिशत कम करने का भी प्रयास करें। मेरा आठवां आग्रह योग, खेल और फिटनेस से जुड़ा है। हम सभी को इन्हें अपने जीवन का हिस्सा बनाना चाहिए। मेरा नौवां आग्रह सेवा भावना से जुड़ा है, जिसे आप लोग अपने कार्यों से लगातार सिद्ध कर रहे हैं।

साथियों,

जरूरतमंद की सेवा समाज को मजबूत बनाती है, इससे आपके जीवन में एक बड़ा उद्देश्य जुड़ता है। यदि हम सभी इन नौ आग्रहों पर ईमानदारी और संकल्प के साथ आगे बढ़ें, तो हम विकसित कर्नाटका और विकसित भारत की दिशा में तेजी से आगे बढ़ सकते हैं। मैं एक बार फिर, आप सभी को इस अवसर की बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं। मैं जगद्गुरु श्री श्री श्री डॉ. निर्मलानंदनाथ महास्वामीजी, और श्री आदि चुंचनगिरी महासंस्थान मठ का आभार व्यक्त करता हूं, कि मुझे इस पावन अवसर पर, इस पवित्र भूमि में, इस तपो भूमि में, आपने आमंत्रित किया, कुछ पल आपके साथ बिताने का अवसर मिला, मैं हृदय से आप सबका धन्यवाद करता हूं, आप सबका धन्यवाद करता हूं। बहुत-बहुत शुभकमानाएं। धन्यवाद।