PM Modi attends the inauguration of the World Culture Festival
India is so diverse and it has so much to contribute to the world: PM
I congratulate Sri Sri Ravi Shankar for spreading his message to various countries and representing Indian culture on a world stage: PM
This is a Kumbh Mela of culture: PM
परम पूज्य श्री श्री रविशंकर जी ....सभी वरिष्ठ महानुभाव ,
मैं भारत की धरती पर आप सबका हृदय से स्वागत करता हूं। भारत इतनी विविधताओं से भरा हुआ है, विश्व को देने के लिए भारत के पास क्या कुछ नहीं है। दुनिया सिर्फ आर्थिक हितों से ही जुड़ी हुई है ऐसा नहीं है, दुनिया मानवीय मूल्यों से भी जुड़ सकती है और जोड़ा जा सकता है और जोड़ना चाहिए भी।
भारत के पास वो सांस्कृतिक विरासत है, वो सांस्कृतिक अधिष्ठान है जिसकी तलाश दुनिया को है। हम दुनिया की उन आवश्यकताओं को कुछ न कुछ मात्रा में, किसी न किसी रूप में हम परिपूर्ण कर सकते है। लेकिन ये तब हो सकता है जब हमें हमारी इस महान विरासत पर गर्व हो, अभिमान हो।
अगर हम ही अपने आप को कोसते रहेंगे , हमारी हर चीज की हम बुराई करते रहेगे तो दुनिया हमारी ओर क्यों देखेगी?
मैं श्रीमान श्री श्री रविशंकर जी का इस बात के लिए अभिनंदन करता हूं कि 35 साल से छोटे से कार्यकाल का ये मिशन दुनिया के 150 से ज्यादा देशों में इसी ताकत के भरोसे अब फैल चुका है, उन देशों को अपना कर चुका है। आर्ट ऑफ लिविंग के माध्यम से विश्व को भारत की एक अलग पहचान कराने में इस कार्य ने बहुत बड़ा योगदान दिया है।
मैं अभी कुछ समय पहले जब मंगोलिया गया था। मैं हैरान था मंगोलिया में एक एस्टेडियम में आर्ट ऑफ लिविंग के सभी बंधुओं के द्वारा मेरा reception रखा गया था। उसमें भारतीय तो बहुत कम थे। पूरा स्टेडियम मंगोलियन नागरिकों से भरा हुआ था और उन्होंने भारत का तिरंगा झंडा हाथ में लेकर के जिस प्रकार से भारतीय संस्कृति का परिचय करवाया, यह अपने आप में बहुत ही प्रेरक था। जहां पर राजशक्ति और राजसत्ता की पहुंच नहीं होती है, ऐसे स्थानों पर भी अंतर्राष्ट्रीय संबंधों में soft power एक बहुत बड़ी अहम भूमिका अदा करता है।
आज हम एक ऐसे कुंभ मेले का दर्शन कर रहे हैं। यह कला का कुंभ मेला है। भारत के पास ऐसी समृद्धि थी कि यहां कला पूर्णतया विकसित हुई थी। यह धरती ऐसी है जहां हर पहर का संगीत अलग है। सुबह का संगीत अलग है तो शाम का अलग है और इसलिए बाजार में संगीत की दुनिया को खोजने जाएंगे, तन को डुलाने वाले संगीत से तो बाजार भरा पड़ा है लेकिन मन को डुलाने वाला संगीत तो हिन्दुस्तान में भरा है और दुनिया अब मन को डुलाना चाहती है और यही संगीत की साधना है जो दुनिया के मन को डुला सकती है।
जब कला के द्वारा किसी देश को देखा जाता है तो इस देश की अंतर्भूत ताकत को पहचाना जाता है। आज विश्व भारत की कला की शक्ति और कला साधना सदियों से करते आए हुए लोग आज विश्व को एक अनमोल भेंट दे रहे हैं। ऐसे अवसर पर यह समारोह प्रकृति ने भी कसौटी करी लेकिन यही तो आर्ट ऑफ लिविंग है। सुविधा और सरलता के बीच जीने के लिए जी सकते हैं, उसमें आर्ट नहीं होती है। जब अपने इरादे को लेकर के चलते है तब आर्ट ऑफ लिविंग चाहिए। जब अपने सपनों को लेकर के चलते है तब आर्ट ऑफ लिविंग चाहिए। जब संकटों से जूझते हैं तब आर्ट ऑफ लिविंग चाहिए। जब अपने लिए नहीं औरों के लिए जीते हैं तब आर्ट ऑफ लिविंग चाहिए। जब स्व से समस्ति की यात्रा करते हैं तब आर्ट ऑफ लिविंग चाहिए। जब मैं से छूटकर के हम की ओर चलते हैं तब आर्ट ऑफ लिविंग चाहिए।
हम वो लोग जो अहम् ब्रह्मास्मि से शुरू करते हैं और वसुधैव कुटुम्बकम की यात्रा करते हैं यह आर्ट ऑफ लिविंग है। हम वो लोग है जिन्होंने उपनिषद से उपग्रह तक की यात्राएं की हैं और यही जीवन जीने की कला हमारे ऋषियों ने, मुनियों ने, ज्ञानियों ने, तपस्वियों ने हमें विरासत में दी है। संकटों से जूझ रहा मानव, व्यक्तिगत जीवन में समस्याओं से जूझ रहा मानव... भारत की पारिवारिक समस्या, परिवार family, यह ऐसी धरोहर हमारी दुनिया जब जानती है उसको अचरज होता है। हमने यह कला सीखी है, सदियों से सीखी है। लेकिन अगर उसमें खरोच आ रही है तो उसको फिर से ठीक-ठाक करने की आवश्यकता है |
मैं श्री श्री रविशंकर जी के माध्यम से यह जो काम चल रहा है इसका अभिनंदन करता हूं, बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं और सभी कलाकारों को, सभी साधकों को, सभी आर्ट ऑफ लिविंग के कार्यकर्ताओं को इस भव्य समारोह के द्वारा भारत की विशिष्ट छवि विश्व के सामने पहुंचाने के लिए बहुत-बहुत बधाई देता हूं|
India is not just progressing, India is moving to the Next: PM Modi
March 12, 2026
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We have One goal, one destination, ‘Viksit Bharat’: PM
Despite many global crises, the world's leaders and experts look to India with great hope: PM
If you want to be part of the future, you have to be in India : PM
India is not just progressing; India is moving to the Next level : PM
India will make every effort to ensure that its farmers and citizens are protected from the burden of global challenges : PM
आज 12 मार्च का दिन बहुत ऐतिहासिक है। 12 मार्च, 1930 को महात्मा गांधी ने साबरमती आश्रम से दांडी यात्रा शुरू की थी। ये भारत के स्वतंत्रता आंदोलन का एक टर्निंट प्वाइंट था। क्योंकि इस यात्रा ने देश के कोने-कोने को एक लक्ष्य के साथ जोड़ दिया था और ये लक्ष्य था- भारत की आजादी। आज इस ऐतिहासिक यात्रा के करीब 100 वर्षों के आसपास हम भारतीय फिर एक नई यात्रा पर निकले हैं। ये यात्रा है- विकसित भारत की यात्रा। हमारा लक्ष्य एक है, हमारी मंजिल एक है - विकसित भारत। और इस लक्ष्य की प्राप्ति में ऐसी समिट्स में हुआ मंथन इनसे निकला अमृत बड़ी भूमिका निभाता है। मैं आप सभी का आभारी हूं आपने मुझे नेक्स्ट समिट के लिए आमंत्रित किया। यहां देश से दुनिया से बहुत सारे साथी आए हैं, कुछ पुराने परिचित भी हैं, मैं आप सभी का अभिनंदन करता हूं।
साथियों,
21वीं सदी का ये कालखंड ना भूतो न भविष्यति जैसा है। एक तरफ युद्ध की विभिषिका है, सप्लाई चेन फिर से तहस-नहस हो रही है संयुक्त राष्ट्र जैसी वैश्विक संस्थाओं की प्रासंगिकता पर सवालिया निशान लग रहा है, और ऐसे कालखंड में हमारा भारत इन विपरीत परिस्थितियों में भी आगे बढ़ रहा है। आज दुनिया इतिहास के जिस महत्वपूर्ण पड़ाव पर खड़ी है, उस पड़ाव पर जिस देश के नाम सबसे ज्यादा चर्चा में है- वो है भारत। वर्तमान में इतने सारे संकटों के बीच दुनिया का हर गंभीर नेतृत्व हर जानकार भारत को लेकर बहुत उम्मीदों से भरा हुआ है। अभी हाल ही में फिनलैंड के प्रेसिडेंट एलेक्जेंडर स्टब भारत आए थे। उन्होंने कहा कि अब दुनिया की दिशा, ग्लोबल साउथ तय करेगा और उस दिशा को निर्धारित करने वाली सबसे बड़ी शक्ति होगा - भारत। इससे पहले कनाडा के पीएम कार्नी ने भी कहा था कि अगले तीन दशकों में दुनिया की Economic Gravity जिस सेंटर की ओर शिफ्ट हो रही है, उसका नाम भारत है। फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों भी मानते हैं कि भारत दुनिया के सबसे बड़े मुद्दों को सुलझाने वाला एक इनएविटेबल पार्टनर बन चुका है। आज टेक वर्ल्ड और अर्थ जगत के ग्लोबल लीडर्स के बयानों का निचोड़ निकालें तो एक ही भाव सामने आता है, अगर आप भविष्य का हिस्सा बनना चाहते हैं, तो आपको भारत से जुड़ना ही होगा, भारत में होना ही होगा।
साथियों,
अभी-अभी भारत ने टी-ट्वेंटी वर्ल्ड कप जीता है। हर कोई खुश है और भारत में तो क्रिकेट का मामला ऐसा है कि अगर किसी ऑफिस में कोई करोड़ों की बात चलती हो, कोई बढ़िया प्रेज़ेंटेशन चल रहा होता है विदेश के मेहमान प्रेज़ेंटेशन कर रहे हों फिर भी वो जरा स्लाइड से नजर हटा कर के वो स्कोर क्या देखता है। और कोई न कोई तो पूछ ही लेता है- भाई स्कोर क्या हुआ ठीक ऐसी ही स्थिति, आज भारतीय अर्थव्यवस्था की है। आज हर कोई इकॉनॉमी की रनिंग कमेंट्री चाहता है। भारत की इकॉनॉमी का पिछले महीने क्या स्टेटस था आज क्या हाल है ये सब जानने के लिए देशवासी उत्सुक रहते हैं। मुझे याद नहीं पड़ता, इतनी उत्सुकता देश में पहले थी या नहीं थी ? और थी तो कब थी? ये दिखाता है कि आज भारतीयों की एस्पिरेशन्स और आत्मविश्वास किस स्तर पर हैं। यही, दुनिया के भारत पर भरोसे का सबसे बड़ा कारण भी है।
और साथियों,
निश्चित तौर पर जब इतनी सारी उम्मीदें जुड़ी हों, दुनिया की नजर हमारे देश पर हो तो हम सभी की जिम्मेदारी और ज्यादा जाती है।
साथियों,
आज का भारत सिर्फ आगे नहीं बढ़ रहा। भारत खुद को Next Level पर ले जा रहा है। आज देश में Next Generation फिजिकल इंफ्रास्ट्रक्चर बन रहा है, हम नेक्स्ट जेनरेशन डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की ओर बढ़ रहे हैं UPI ने Digital Payments को Next Phase में पहुँचा दिया है। आज भारत दुनिया में सबसे तेज़ real-time digital payments करने वाला देश बना है।
साथियों,
भारत आज नेक्स्ट जेनरेशन रिफॉर्म्स भी कर रहा है, वो Reform एक्सप्रेस पर सवार है। कभी भारत में कई काम, कई निर्णय Next to Impossible माने जाते थे, आज भारत वो निर्णय भी ले रहा है। कभी कहा जाता था कि Article 370 हटाना नामुमकिन है। लेकिन आज जम्मू-कश्मीर में Article 370 की दीवार गिर चुकी है। कभी लगता था कि देश में सबका बैंकिंग सिस्टम से जुड़ना असंभव है। लेकिन आज 50 करोड़ से ज्यादा जनधन खातों ने ये संभव कर दिखाया है। कभी लगता था कि ट्रिपल तलाक को खत्म करना असंभव है। लेकिन आज मुस्लिम बहनों को इस अन्याय से मुक्ति मिली है। कभी महिलाओं को लोकसभा और विधानसभा में तैंतीस परसेंट आरक्षण भी असंभव लगता था। लेकिन आज इसके लिए कानून बन चुका है। कभी अंतरिक्ष और advanced technology को लेकर भी भारत की लिमिट्स बताई जाती थीं। लेकिन आज मून मिशन, Semiconductor Mission, क्वांटम मिशन, ये सब भारत को Next फ्रंटियर of Technology की ओर ले जा रहे हैं।
साथियों,
आज का भारत केवल सपने नहीं देख रहा। भारत उन्हें सच कर रहा है। इसीलिए आज दुनिया कह रही है- India is not just progressing. India is moving to the Next.
साथियों,
देश के विकास का एक बहुत बड़ा आधार होता है कि हम चुनौतियों से कैसे मुकाबला कर रहे हैं। हम सभी जानते हैं कि वैश्विक परिस्थितियाँ अचानक बदलती हैं। बीते वर्षों में हमने पहले कोरोना की आपदा देखी फिर रूस-यूक्रेन का संकट देखा और अब हमारे बहुत पास में ही एक और बड़ा युद्ध चल रहा है। इस युद्ध ने पूरे विश्व को बहुत बड़े ऊर्जा संकट में धकेल दिया है।
साथियों,
ऐसी विकट परिस्थितियों में बहुत अहम है कि एक देश के तौर पर हम इसका कैसे मुकाबला करते हैं। संकट काल एक प्रकार से, पूरे राष्ट्र की परीक्षा होती है। शांति के साथ धैर्य के साथ हमें परिस्थितियों से निपटना होता है जनविश्वास बढ़ाकर जनता को जागरूक करते हुए, हमें चलना होता है। और इसमें हर किसी की भूमिका होती है। हर राजनीतिक दल की, मीडिया की, सामाजिक संस्थाओं की, इंडस्ट्री की, युवाओ की गांव की शहर की हर किसी की भूमिका अहम होती है। और हमने कोरोना काल में देखा है जब सब मिलकर चलते हैं तो संकट से मुकाबले के लिए देश का सामर्थ्य कई गुणा बढ़ जाता है। आज देश के सामने एक और चुनौती है और इसलिए हमें मिलकर प्रयास करने होंगे, राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखते हुए अपने कर्तव्य निभाने होंगे।
साथियों,
आजकल बहुत चर्चा LPG को लेकर हो रही है। कुछ लोग हैं जो पैनिक क्रिएट करने का प्रयास कर रहे हैं, अपना एजेंडा चलाना चाहते हैं। मैं इस समय उन पर राजनीतिक टिप्पणी नहीं करना चाहता. लेकिन इतना जरूर कहूंगा कि ऐसा करके वो जनता के समक्ष खुद तो एक्सपोज़ हो ही रहे हैं और देश का भी बड़ा नुकसान कर रहे हैं।
साथियों,
आज युद्ध से जो ये वैश्विक संकट आया है उसके प्रभाव से कोई देश अछूता नहीं है। कम अधिक मात्रा में हर कोई शिकार है, भारत सरकार भी, इस संकट से निपटने के लिए कोई कसर बाकी नहीं छोड़ रही है। और हम अलग-अलग स्तरों पर प्रयास कर रहे हैं। बीते दिनों, दुनिया के कई देशों के शीर्ष नेताओं से मेरी इसको लेकर बातचीत हुई है। सप्लाई चेन में जो बाधाएं आई हैं, उससे हम कैसे पार पाएं, इसके लिए भी निरंतर प्रयास चल रहे हैं।
साथियों,
भारत के तेज विकास के लिए अलग-अलग एनर्जी सोर्सेस को बढ़ावा देना निरंतर जरूरी रहा है। और इसको मजबूत करने के लिए हमने दो स्तरों पर एक साथ काम किया है। पहला देश में एनर्जी एक्सेस बढ़े हमने इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया।
और दूसरा- Energy के लिए हमें सिर्फ विदेशों पर निर्भर ना रहना पड़े, इसके लिए Energy सेक्टर में आत्मनिर्भरता पर बल दिया। अब मैं आपको Gas सेक्टर के ही कुछ आंकड़े देता हूं। साल 2014 तक देश में सिर्फ 14 करोड़ LPG कनेक्शन थे। यानि देश के करीब-करीब आधे परिवारों पास ही LPG कनेक्शन था। आज दोगुने से भी अधिक यानि करीब 33 करोड़ घरेलू LPG कनेक्शन हैं। बीते 11 वर्षों में हमने अपनी बॉटलिंग कैपेसिटी को दोगुना किया है। डिस्ट्रिब्यूशन सेंटर भी 13 हज़ार से बढ़कर 25 हज़ार से अधिक हो गए हैं 2014 में देश में सिर्फ 4 LNG Terminals थे, आज इनकी संख्या भी बढ़कर दोगुनी हो गई है। गैस पाइपलाइन जो करीब साढ़े तीन हज़ार किलोमीटर होती थी उसको 10 हज़ार किलोमीटर तक विस्तार दिया है। क्योंकि करीब 60 परसेंट LPG विदेशों से आती है इसलिए देश के बड़े पोर्ट्स पर इंपोर्ट टर्मिनल कैपैसिटी भी बहुत बढ़ाई गई है।
साथियों,
साल 2014 से पहले तक देश में सिर्फ 25-26 लाख घरों में ही, पाइप से सस्ती गैस यानि PNG की सुविधा थी। आज ये संख्या भी सवा करोड़ से अधिक पहुंच गई है। 2014 में देश में CNG पर चलने वाली गाड़ियां भी 10 लाख से ज्यादा नहीं थी। आज ये संख्या 70 लाख से अधिक है। और ये तभी संभव हो पा रहा है क्योंकि बीते दशक में देश के 600 से अधिक जिलों में City Gas Distribution network स्थापित किए गए हैं।
साथियों,
इस वैश्विक संकट ने एक बार फिर दिखाया है कि किसी भी देश का आत्मनिर्भर होना इतना अधिक जरूरी क्यों है। इसलिए ही बीते वर्षों में हमने भारत को एनर्जी सेक्टर्स में आत्मनिर्भर बनाने के लिए होलिस्टिक तरीके से काम किया है।
साथियों,
पेट्रोलियम पर निर्भरता को कम करने के लिए हमने इथेनॉल पर, बायोफ्यूल पर बल दिया। 2014 से पहले देश में सिर्फ एक-डेढ़ परसेंट इथेनॉल ब्लेंडिंग कैपेसिटी ही थी। आज हम पेट्रोल में 20 परसेंट इथेनॉल ब्लेंडिंग के करीब पहुंच रहे हैं। अगर ये काम न किया होता तो हमें बीते 11 वर्षों में करीब 18 करोड़ बैरल अतिरिक्त तेल विदेशों से खरीदना पड़ता। आज की स्थिति देखें तो इथेनॉल के कारण हमें प्रतिवर्ष करीब साढ़े चार करोड़ बैरल कम ऑयल इंपोर्ट करना पड़ रहा है। यानि करीब डेढ़ लाख करोड़ रुपए की बचत तो देश को सिर्फ इसी से हुई है।
साथियों,
भारत में पेट्रोलियम का बहुत बड़ा कंज्यूमर हमारी रेलवे भी है। हमारे देश में रेलवे लाइनों के इलेक्ट्रिफिकेशन का काम 60 साल पहले शुरू हुआ था। बावजूद इसके 2014 तक सिर्फ 20 परसेंट रेलवे रूट का इलेक्ट्रिफिकेशन ही हो पाया था। बाकी रेलवे रूट्स पर हजारों डीजल इंजन चला करते थे। आज भारत में ब्रॉडगेज नेटवर्क का करीब-करीब 100 percent बिजलीकरण हो चुका है। इससे, साल 2024-25 में ही भारतीय रेलवे ने करीब 180 करोड़ लीटर डीज़ल की बचत की है। अगर इलेक्ट्रिफिकेशन न हुआ होता तो हर वर्ष इतना डीज़ल बनाने के लिए एक्स्ट्रा क्रूड ऑयल इंपोर्ट करना पड़ता। ऐसे ही, हमने मेट्रो का नेटवर्क बढ़ाया, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी पर फोकस किया।
ऐसे ही एक और बहुत बड़ा काम हमने रीन्युएबल एनर्जी को लेकर किया है। आज हमारी टोटल installed power generation capacity का आधा हिस्सा रीन्यूएबल सोर्स से आता है। हमारी कुल रिन्यूएबल क्षमता आज 250 गीगावाट के ऐतिहासिक आंकड़े को पार कर गई है। आप सोचिए साल 2014 में भारत की सोलर पावर कैपेसिटी सिर्फ दो गीगावॉट थी, आज ये करीब चालीस गुणा बढ़कर hundred and thirty गीगावॉट हो चुकी है। घरेलू उपयोग में गैस के अलावा बिजली अधिक से अधिक काम आए इसके लिए पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना लागू की गई। अभी तक इस स्कीम के तहत करीब 30 लाख परिवारों ने रूफटॉप सोलर लगाए हैं।
साथियों,
इसके अलावा हमने गोबरधन स्कीम पर भी काम किया। इसके तहत Compressed Biogas बनाने पर काम किया गया। अभी तक देश में 100 से अधिक प्लांट चालू हो चुके हैं और 600 से ज्यादा पर काम चल रहा है।
साथियों,
पेट्रोल-डीज़ल के क्षेत्र में हमने कैपेसिटी बिल्डिंग की दिशा में भी व्यापक प्रयास किया है। 2014 से पहले भारत के पास strategic पेट्रोलियम रिज़र्व यानि संकट के समय के लिए कच्चा तेल स्टोर करने की कैपेसिटी ना के बराबर थी। आज हमारे पास, 50 लाख टन से अधिक का strategic पेट्रोलियम रिज़र्व है। और इससे भी अधिक कैपेसिटी पर काम चल रहा है। बीते दशक में अपनी रिफाइनिंग कैपेसिटी में भी हमने सालाना 40 मिलियन टन से अधिक की वृद्धि की है। तभी भारत आज दुनिया के सबसे बड़े refining hubs में से एक बना है। यानि आप अंदाजा लगा सकते हैं कि हम भारत को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कितने बड़े पैमाने पर और कितनी बड़ी दिशाओ में काम कर रहे हैं। ये युद्ध की वजह से जो संकट बना है, उसका मुकाबला भी हम जरूर कर पाएंगे। मेरा 140 करोड़ देशवासियों पर पूरा भरोसा है। जैसे एक साथ संगठित होकर कोविड के संकट से हमने देश को बाहर निकाला था उसी प्रकार हम इस वैश्विक संकट को भी पार कर लेंगे। और मैं फिर दोहराउंगा जहां तक सरकार का प्रश्न है, हम किसी भी प्रकार के प्रयत्न या प्रयास में कोई कमी नहीं आने देंगे। हमारे हर निर्णय में जनता का हित सर्वोपरि रहेगा।
साथियों,
यूक्रेन युद्ध से लेकर आज तक हमने ये देखा है कि कैसे इसका प्रभाव वैश्विक मार्केट से लेकर दुनिया के नागरिकों पर पड़ता रहा है। लेकिन भारत सरकार का हमेशा से हर संभव प्रयास रहा है कि युद्ध से बनी परिस्थितियों का बोझ भारत के नागरिकों पर ना पड़े। जैसे जब रूस-यूक्रेन का संकट बढ़ा था , तो उस कालखंड में फर्टिलाइजर की कीमतें आसमान छूने लगी थीं। इसके बावजूद यूरिया की जो बोरी अंतरराष्ट्रीय बाजार में 3000 रुपए में मिल रही थी वो हमने अपने किसानों को सिर्फ 300 रुपए में दी थी। दुनिया में 3000 रुपया चल रहा था हमारे यहाँ 300 में दिया जा रहा था , इस बार भी हमारा हर संभव प्रयास होगा कि देश के किसान देश के नागरिकों के जीवन पर युद्ध का कम से कम प्रभाव पड़े।
साथियों,
आज के इस अहम समय में... आज इस मंच से राज्य सरकारों से भी एक अनुरोध है। ये जरूरी है कि कालाबाज़ारी न हो, अफवाहें न फैलें इसलिए स्थिति की गंभीरता से मॉनीटरिंग आवश्यक है जो कालाबाजारी कर रहे हैं, उनके खिलाफ कड़े एक्शन भी जरूरी हैं।
साथियों,
बीता एक दशक, आत्मनिर्भरता के साथ-साथ संवेदनशील गवर्नेंस का भी रहा है। हमारे देश का एक बड़ा हिस्सा, वहां रहने वाले लोग दिल्ली में बैठी कांग्रेस सरकारों की सोच से भी दूर रहे। लेकिन हमारी सरकार ने विकास की दौड़ में पीछे रह गए लोगों को गवर्नेंस की प्राथमिकताओं से जोड़ा। आज इन इलाकों में हाउसिंग हो, रोड्स हों, स्कूल-हॉस्पिटल हों ऐसे इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण के लिए ही Aspirational District योजना, Aspirational ब्लाक योजना पीएम जनमन योजना जैसी स्पेशल अभियान चलाए जा रहे हैं।
साथियों,
कांग्रेस की सरकारों का एक बहुत बड़ा पाप ये भी रहा कि उन्होंने देश के एक बड़े हिस्से को माओवादी आतंक की आग में जलने के लिए छोड़ दिया था। देश के करीब-करीब हर बड़े राज्य का बहुत बड़ा हिस्सा माओवादी आतंक की गिरफ्त में था। लेकिन साथियों,
बीते सालों में देश ने इस स्थिति को बदलने का संकल्प लिया। हम बुलंद हौसले के साथ आगे बढ़े। और इसका नतीजा आज देश देख रहा है। साल 2013 में 180 से अधिक जिले, 180 से ज्यादा डिस्ट्रिक्ट माओवादी आतंक से प्रभावित थे। आज माओवादी आतंक से प्रभावित जिलों की संख्या सिंगल डिजिट में पहुंच चुकी है।
साथियों,
बीते एक साल में ही 2100 से ज्यादा नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है 900 से ज्यादा गिरफ्तारियां हुईं हैं, और जो हथियार छोड़ने के लिए तैयार नहीं थे, ऐसे 300 से अधिक कट्टर नक्सलियों को सुरक्षा बलों ने मार गिराया है। इसका परिणाम ये हुआ कि जो इलाके कभी डर के साए में जीने को मजबूर थे वहां आज विकास की नई ऊर्जा का संचार हो रहा है।
साथियों,
भारत आज जिस गति से आगे बढ़ रहा है, उसकी प्रगति की गति को रोकना असंभव है। 140 करोड़ भारतीयों की आकांक्षा आज next level पर है। मैं जानता हूं कि जब एक सपना पूरा होता है तो नए सपने, नई आकाक्षाएं जन्म लेती हैं। मैं इसे बोझ नहीं मानता, बल्कि जनता के विश्वास की पूंजी मानता हूं। हां...देश में मेरे कुछ ऐसे शुभचिंतक हैं जिनको लगता है कि उम्मीदों के बोझ तले मोदी कभी तो दबेगा, कभी तो कुचला जाएगा लेकिन उनकी नीयत इतनी खोटी है, कि उनकी उम्मीदें पूरी ही नहीं होती, और देशवासियों का आशीर्वाद जब तक है तब तक ये पूरी होंगी भी नहीं। अब सिर्फ 140 करोड़ भारतीयों की आशाएं और आकांक्षाएं ही पूरी होंगी। भारत हर सेक्टर में आत्मनिर्भर बनेगा भारत हर हाल में विकसित बनेगा।