भारत माता की जय..!

आवाज दिल्ली तक सुनाई दे ऐसा करो...

भारत माता की जय..!

मंच पर बिराजमान भारतीय जनता पार्टी के सभी वरिष्ठ नेता गण और इस चुनाव में मंडी के उम्मीदवार श्रीमान डी. डी. ठाकुरजी, बल्ह के उम्मीदवार श्रीमान इन्द्र सिंहजी गांधी, नाचन के उम्मीदवार भाई श्री बिनोद कुमार, सुन्दर नगर के उम्मीदवार भाई श्री राकेश जाम्वालजी, मंचस्थ सभी महानुभाव और इतनी विशाल संख्या में पधारे हुए मेरे प्यारे भाईयों और बहनों..!

मैं जब हिमाचल आता हूँ, तो मुझे लगता है कि गुजरात के बाहर यह मेरा दूसरा घर है। मैंने बहुत वर्ष आप लोगों के बीच रह करके काम किया है, यहाँ के चप्पे-चप्पे से परिचित हूँ और मंडी आते ही मैंने पूछा कि भाई आज भी सेपु वड़ी खाई जाती है कि नहीं खाई जाती है..? मेरा यहाँ बड़ा गहरा लगाव रहा है। अगर मेरे यहाँ गुजरात में चुनाव ना होता, तो मैं कई दिनों तक आप के बीच में रहता और उन पुरानी यादों को ताज़ा करता, लेकिन जैसे आप कांग्रेस को उखाड़ फैंकने में लगे हो, गुजरात की जनता भी कांग्रेस को हमेशा-हमेशा के लिए विदाई देने में लगी हुई है।

भाइयों-बहनों, आज पूरे विश्व में गुजरात के विकास की चर्चा हो रही है। कहीं पर भी जाइए, लोग कहते हैं कि भाई, गुजरात ने कमाल कर दिया..! ये कमाल हु आ इसका राज क्या है? अगर मेरे हिमाचल के भाई-बहन उस राज़ को जान लेंगे, तो मैं आपको दावे से कहता हूँ कि आज जिस प्रकार से दुनिया में गुजरात चमक रहा है, मेरा हिमाचल भी दुनिया में चमकने लग जाएगा, यह मैं आपको वादा करता हूँ। भाईयों-बहनों, गुजरात की जनता ने एक बहुत बड़ा काम किया है और आम तौर पर हिन्दुस्तान में इस प्रकार का काम बहुत कम राज्यों में होता है और मेरे गुजरात के छह करोड़ गुजरातियों ने किया है। और वह काम किया है उन्होंने, पॉलिटिकल स्टेबिलिटी, राजनैतिक स्थिरता। लगातार वहाँ बीजेपी की सरकार बनती जा रही है, लगातार..! और पॉलिटिकल स्थिरता के कारण, राजनैतिक स्थिरता के कारण एक पॉलिटिकल पार्टी की जवाबदेही भी बन जाती है। जब पाँच साल में सरकारें आती-जाती रहती हैं, तो कोई जवाबदेही बनती ही नहीं है। आज मेरे गुजरात ने तीन-तीन बार मुझे चुन कर बैठाया है, तो लोग मुझे पूछ सकते हैं कि मोदीजी बताओ इसका क्या हुआ, उसका क्या हुआ..? लेकिन अगर पाँच साल में आए गए, तो फिर पूछने के लिए जगह ही नहीं रहती है और इसलिए भाइयों-बहनों, अगर गुजरात से मैं आपके लिए कोई संदेश लेकर आया हूँ तो वो मेरा संदेश मेरे हिमाचल के भाई-बहनों के लिए है कि आप हिमाचल में बार-बार सरकारें बदलने का प्रयोग बहुत कर चुके और उसके कारण हिमाचल में ना नीतियों की सुदृढ़ता रहती है, ना व्यवस्थाएं ठीक रहती है और बदलाव के बाद दो-दो साल तो नए बदलावों में स्थिर होने में चले जाते हैं और राज्य वहीं ढेर का ढेर रह जाता है। भाइयों-बहनों, मैं हिमाचल से प्रार्थना करने आया हूँ, इस देवभूमि से मैं प्रार्थना करने आया हूँ, इस पवित्र धरती के पवित्र नागरिकों से प्रार्थना करने आया हूँ कि आप भी गुजरात के नागरिकों की तरह राजनैतिक स्थिरता पर ध्यान केन्द्रित करें। भाजपा की सरकार को दुबारा चुनिए, धूमलजी को दुबारा चुनिए, और मैं आपको वादा करता हूँ, पाँच साल के बाद मेरे से हिसाब मांगना, जो तरक्की गुजरात ने की है, वैसी ही तरक्की हिमाचल करके दिखाएगा..!

भी कल, हिमाचल के दौरे पर ‘मौन मोहन’ सिंहजी आए थे और आज की सबसे बड़ी खबर यही है अखबारों में कि ‘मौन मोहन’ सिंहजी ने हिमाचल में जा कर के मौन तोड़ा, यह भी एक बड़ी खबर है..! पता ही नहीं चल रहा है कि देश की हालत के संबंध में प्रधानमंत्रीजी क्या सोच रहे हैं। भाइयों-बहनों, मैं हैरान हूँ, कुछ दिन पहले यहीं पर मंडी में मैडम सोनियाजी आई थी, प्रधानमंत्रीजी आए, और भी लोग बारी-बारी से आएंगे, लेकिन भाइयों-बहनों, मुझे खुशी होती, कम से कम मेरे दिल को एक संतोष मिलता कि मेरे देश के प्रधानमंत्री को, कांग्रेस पार्टी की अध्यक्षा मैडम सोनिया गांधी को इस देश के गरीबों की चिंता होती, कम से कम एक बार वह महंगाई पर कुछ बोलते, दर्द जताते, गरीबों के प्रति संवेदना जताते और देश की जनता को कहते, हिमाचल की जनता को कहते कि महंगाई को रोकने में हम विफल हुए हैं, लेकिन आप विश्वास किजीए, हम कभी ना कभी महंगाई कम करने का प्रयास करेंगे..! भाइयों-बहनों, मैं आपको एक सवाल पूछ सकता हूँ? आप लोगों को एक सवाल पूछूँ? सब लोग हाँ बोलो तो मैं पूछूँ..! क्या इन दोनों लोगों ने महंगाई के लिए एक शब्द बोला है..? महंगाई बढ़ रही है इसके लिए जवाब दिया है..? महंगाई बढ़ रही है इसके लिए कोई दर्द व्यक्त किया है..? भाइयों-बहनों, इस देश की गंभीर समस्या है महंगाई, और इसके बावजूद भी उनके सीने में दर्द तक नहीं है..! क्या देश के प्रधानमंत्री का कर्तव्य नहीं है कि वह जा कर के कहें कि भाई, जब हम चुनाव लड़ रहे थे तब हमने वादा किया था कि सौ दिन में हम महंगाई कम करेंगे, लेकिन दो-दो हजार दिन हो गए उसके बावजूद भी हम महंगाई कम नहीं कर पाए, ये एक हमारी गलती है, जनता हमें माफ करें..! इतना तो कहना चाहिए था कि नहीं..? लेकिन कांग्रेस पार्टी को इतना अहंकार है, कांग्रेस पार्टी को जन भावनाओं की परवाह नहीं है, देश के प्रवाहों की परवाह नहीं है, वह अपनी ही चाल चलते जाते हैं और इतना अहंकार है कि वो मानते हैं कि दुनिया तो उनके झोले में है, वह दुनिया को जैसे चाहें मरोड़ सकते हैं।

इतना ही नहीं भाइयों-बहनो, महंगाई क्या कम थी, जो उन्होंने आपसे गैस का सिलेंडर भी छीन लिया..? मेरी माताएं-बहने इतनी यहाँ बैठी हैं, मैं समझता नहीं हूँ, घर के अंदर और जहाँ ठंडा प्रदेश है वहाँ दिन में कितनी बार चीजों को गरम करना पड़ता है, खाना थोड़ी देर में ठंडा हो जाता है, बार-बार उसको गर्म करना पड़ता है, खाते-खाते भी उसे गर्म करना पड़ता है, और वहाँ पर गैस के सिलेंडर ले लें, तो क्या वो अपने पतिदेव को कच्चा खिलाएं क्या..? एक परिवार को स्वाभाविक तौर पर 24 सिलेंडर लगते हैं, उन्होंने कह दिया छह सिलेंडर..! क्या 18 सिलेंडर यह गरीब काला बाजारी से खरीद पाएगा? क्या फिर से उसे चूल्हे की ओर जाना पड़ेगा? क्या फिर से उसको जंगल काटने पडेंगे? क्या फिर से उसे हमारी यह हरी-भरी हिमाचल की धरती को बर्बाद करने की नौबत आएगी? लकड़ी काटने के लिए मजबूर किया जाएगा मेरे हिमाचल को..? पूरा देश जिस हिमाचल के लिए गर्व करता है, उस हिमाचल के पेड़-पौधे काट-काट कर खाना पकाने की नौबत आएगी, तो इसके लिए अगर कोई गुनाहगार होगा तो यह दिल्ली की सल्तनत गुनहगार होगी भाइयों-बहनों, यह लोग जिम्मेदार होंगे। मैं प्रेम कुमार धूमलजी का अभिनंदन करना चाहता हूँ। दिल्ली से कोई मदद ना होने के बाद भी, दिल्ली सिलेंडर छीनती चली जा रही है उसके बावजूद भी, उन्होंनें हिमाचल की मेरी माताओं और बहनों की चिंता की, बच्चे को गर्म खाना मिले इसकी चिंता की और उन्होंने हर परिवार में मुफ्त में चूल्हा देने का वादा किया। यह मैं धूमलजी का बहुत बड़ा एक एहम कदम मानता हूँ। और आज आपको गैस के कारण जो खर्चा होता है... और मित्रों, कांग्रेस की तरह वादे नहीं, आपको लाकर के दिखा दिया कि यह होगा। झूठे नारे नहीं, झूठे वादे नहीं..! भाइयों-बहनों, मैं इस एक कारण के लिए भी वोट देना होता, अगर मैं हिमाचल का नागरिक होता तो धूमलजी की यह करूणा के कारण, गरीब परिवारों के प्रति प्रेम के कारण, मेरा वोट जरूर धूमलजी को देकर के जाता, इतना बढिय़ा काम किया है, कोई और नहीं कर सकता था और दिल्ली सरकार के मुंह पर तमाचा है ये..! यह सिर्फ चूल्हा नहीं है, यह चूल्हा सिर्फ रसोई पकाएगा ऐसा नहीं, यह धूमलजी का चूल्हा पूरी कांग्रेस को खाख करके रख देगा भाइयों, पूरी कांग्रेस को खाख करके रख देगा। इनके कारोबार ही ऐसे हैं..! भाइयों-बहनों, मैं गुजरात की एक घटना सुनाता हूँ। मेरे प्रदेश में मैंने एक काम किया है। हमने पाइप लाइन से लोगों के घर गैस पहुंचाने का काम आरंभ किया। 300 गाँवों में वो काम मैं कर पाया। सात लाख परिवारों को घर के अंदर जैसे नल से पानी आता है वैसे नल से गैस आता है। अब मेरा सपना था कि पिछले वर्ष इस बात को बीस लाख तक मैं पहुंचाऊं, लेकिन कांग्रेसवालों को पता चल गया कि मोदी अगर गैस घर-घर इस प्रकार से पहुंचा देगा और उनके इस दिल्ली के सिलेंडरवाले गैस से आधी कींमत में, और यदि यह महिलाएं सभी यह मोदी की तरफ चली गई तो तो कांग्रेस की मिट्टी पलीद हो जाएगी, कांग्रेस कभी जिंदा नहीं रहेगी..! तो उन्होंने क्या किया..? उन्होंने, भारत सरकार ने एक कानून निकाला कि गैस की पाइप लाइन डालने का अधिकार सिर्फ भारत सरकार को है, कोई राज्य सरकार गैस की पाइप लाइन नहीं डाल सकता है। अब मुझे बताइए भइया, इतना ज़हर क्या..? क्या गुजरात हिन्दुस्तान में नहीं है क्या..? यह कोई विदेश में है क्या..? जिसकी इस प्रकार से पाइप लाइन काट डालने का निर्णय करते हो आप..! शोभा देता है आपको..? वरना आज मेरे गुजरात में बीस लाख परिवारों में पाइपलाइन से गैस होता, तीन करोड़ गैस के सिलेन्डर बच जाते, तीन करोड़ सिलेन्डर भारत सरकार के बचते और तीन करोड़ गैस सिलेन्डर बचने के कारण सालाना भारत सरकार की पन्द्रह हजार करोड़ रुपये सब्सिडी बच जाती, उनके जेब में पैसे बच जाते..! लेकिन क्योंकि गुजरात में मोदी को क्रेडिट मिल रही है, मेरे काम को रोक दिया है। भाइयों-बहनों, मैं चुप रहने वाला इंसान नहीं हूँ। उनको पता नहीं यह मोदी है, वो ईंट का जवाब पत्थर से देना जानता है। अब मैंने सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे खटखटाए हैं और मैं दिल्ली सरकार को झुका के रहूँगा दोस्तों, झुका के रहूँगा..!

भाइयों-बहनों, कांग्रेस का चरित्र देखिए। कांग्रेस ने लोक लाज भी छोड़ दी है, सार्वजनिक जीवन में अगर सबसे बड़ी कोई पूंजी हुआ करती थी, तो वह लोकलाज होती थी। और प्रभु राम के जमाने से लोकलाज का विषय चला आ रहा है और हमारे देश में लोकलाज का महत्व बहुत रहा है। लेकिन कांग्रेस ने लोकलाज छोड़ दी है। उनके एक ऊर्जा मंत्री थे। वे ऊर्जा मंत्री के जमाने में हिन्दुस्तान के 19 राज्यों में 48 घंटे के लिए अंधेरा हो गया, बिजली गुल हो गई। देश के 70 करोड़ नागरिकों को 48 घंटे तक अंधेरे में जिंदगी गुजारनी पड़ी। आपरेशन थियेटर में किसी का आधा आपरेशन हुआ है और बिजली चली गई, आपरेशन अटक गया। लोग ट्रेन में सफर कर रहे थे, बिजली चली गई, ट्रेन बीच रास्ते में अटक गई। सारे विश्व में 21वीं सदी हिन्दुस्तान की सदी की जहाँ चर्चा होती थी, पूरे विश्व के अखबारों ने लिखा कि यह कैसा देश है कि 21वीं सदी के पहले दशक के बाद भी लोगों को बिजली मुहैया नहीं करवा पा रहा है..! आधे-आधे पेज के लेख लिखे गए और आखिर में एक पैराग्राफ आता था और वह पैराग्राफ ये आता था कि एक तरफ पूरा हिन्दुस्तान अंधेरे में डूबा हुआ था, एक अकेला गुजरात ऐसा था जहाँ बिजली जगमगा रही थी..! लेकिन भाइयों-बहनों, मेरा विषय दूसरा है। जिस मंत्री के रहते हुए हिन्दुस्तान अंधेरे में डूब गया, जिस मंत्री के रहते हुए हिन्दुस्तान को दुनिया में नालेशी झेलनी पड़ी, उस मंत्री को उसी रात बिदाई कर देने की जरूरत थी। लेकिन यह दिल्ली की कांग्रेस का चरित्र देखिए, उनका कल्चर देखिए। लाज शर्म के बिना किस प्रकार से व्यवहार किया जाता है, लोकलाज की परवाह ना कर करना यह उनके जो तौर तरीके हैं वे देखिए, उन्होंने उसी मंत्री को एक ही हफ्ते में प्रमोशन दे दी, देश का गुह मंत्री बनाया..! अगर आप विफल हैं, गुनाह करते हो, गलत करते हो तो कांग्रेस में प्रमोशन मिलता है..! अभी उनके एक दूसरे मंत्री श्रीमान सलमान खुर्शीदजी, खुर्शीदजी हैं या कुर्सीजी हैं मालूम नहीं, उन पर बड़े गंभीर आरोप लगे, अपंग लोगों के पैसे ऐंठने के आरोप लगे। कोई इंक्वायरी नहीं हुई, कोई जानकारी नहीं आई, कुछ नहीं हुआ। उनका इस्तीफा लेना चाहिए था, देश के दिल में एक आग जल रही थी, लेकिन किया क्या..? कल उनका प्रमोशन कर दिया। आप गुनाह करो, प्रमोशन पाओ..! आप बेइमानी करो, प्रमोशन पाओ..! यही कांग्रेस के तौर तरीके हैं। कांग्रेस के एक मंत्री थे, पार्लियामेंट में पहले वो मिनीस्टर हुआ करते थे, उन पर आरोप लगे, पैसे की धांधली के, किक्रेट के, ढिकने, फलाने... उन्होंने संसद में खड़े होकर के कहा था कि जिस महिला के खाते में 50 करोड़ जमा हुए हैं, वो 50 करोड़ रुपये से मेरा कोई लेना-देना नहीं है। ससंद में कहा था और महीने भर के अंदर-अंदर उनकी शादी की पत्रिकाएं सब जगह घूमने लगीं..! भाइयों-बहनों, बता दीजिए, इस देश में कभी किसी ने 50 करोड़ की गर्ल फ्रेन्ड देखी है..? 50 करोड़ की गर्ल फ्रेन्ड, इस गरीब देश में..! और उस समय माहौल इतना खराब हो गया कि उनसे इस्तीफा ले लिया गया, अभी भी वे मामले वैसे के वैसे लटके हुए हैं। कल उनको भी फिर से एक बार मंत्री बना कर के बाइज्जत बरी कर दिया गया, कांग्रेस का यह कल्चर देखिए..! भाइयों-बहनों, आपके हिमाचल के साथ क्या हुआ? केन्द्र में एक मंत्री, हाई कोर्ट ने उनके खिलाफ आवाज उठाई और कांग्रेस को लगा कि अब जब न्यायालय ने आवाज़ उठाई है तो वीरभद्र सिंहजी का इस्तीफा ले लिया गया। इस्तीफा लेकर इनको कहते हैं कि ठीक है भाई, बस बहुत हो गया..! लेकिन क्या किया..? वहाँ से इस्तीफा लिया और यहाँ पूरा हिमाचल उनके हवाले कर दिया..! भाइयों-बहनों, यह उनके तौर तरीके हैं। मैं हैरान हूँ भाइयों, कांग्रेस किस कल्चर को देश में प्रवाहित करना चाहती है? और ऐसी कांग्रेस पार्टी को इस देश को क्यों झेलना चाहिए..? इतना ही नहीं भाइयों-बहनों, अभी एक स्टील कंपनी पर इनकम टैक्स की रेड हुई, तो उसमें नोट में पाया गया ‘वी.बी.एस.’, ‘वी.बी.एस.’ के नाम पर इतने रूपए..! इनकम टैक्स में खोज पड़ताल हुई। आप जानते हो यह ‘वी.बी.एस.’ कौन है..? भाइयों-बहनों, काग्रेंसवालों ने कह दिया कि यह वी.बी.एस. वीरभद्र सिंह नहीं है, यह तो वीरभ्रष्ट सिंह है। ये वीरभद्र सिंह नहीं है, ये तो वीरभ्रष्ट सिंह है, यह कोई और वी.बी.एस. होगा, हमारे वीरभद्र सिंह नहीं हो सकते। भाइयों-बहनों, कितने आरोप लग रहे हैं, लेकिन कांग्रेस को कोई परवाह नहीं है। भाइयों-बहनों, इक्का-दुक्का किसी ने भ्रष्टाचार किया हो तो यह देश उसको ठीक करने की ताकत रखता है, लेकिन सर्वोच्च स्थान पर जब भ्रष्टाचार शिष्टाचार बन जाए, भ्रष्टाचार के प्रति लापरवाही बरती जाए, भ्रष्टाचार के प्रति अनदेखी करने का स्वभाव बन जाए तो वह देश बहुत गहरे संकट में जाकर के गिरता है भाइयों-बहनों, कांग्रेस से डरने की इसलिए जरूरत है..! यह कोई इक्के-दुक्के व्यक्ति के भ्रष्टाचार का मुद्दा नहीं है, यह मुद्दा है कांग्रेस के भ्रष्टाचार को शिष्टाचार बनाने के चरित्र के सामने। और अगर भ्रष्टाचार को शिष्टाचार बनाया गया, तो देश कितना बर्बाद हो जाएगा इसका आप अंदाज़ा लगा सकते हो।

भाइयों-बहनों, मैं कभी-कभी बहुत परेशान हो जाता हूँ। भारत एक संघीय ढ़ांचा है, राज्यों के समूह से बना हुआ देश है। यह संविधान निर्माताओं ने कहा हुआ है, लेकिन जहाँ-जहाँ भाजपा की सरकारें हैं, उन सरकारों को विफल करने के लिए षड़यंत्र करना, उनके विकास के अंदर रोड़े अटकाना, यह दिल्ली सरकार का स्वाभाव बन गया है। मेरे पत्रकार मित्रों से भी मैं कहूँगा कि समय की मांग है कि वर्तमान कांग्रेस के चरित्र का एनालिसिस करने की जरूरत है, एक नए दृष्टिकोण से इसका रिसर्च करने की जरूरत है। जिस जमाने में कांग्रेस का झंडा चारों ओर फहराता था, पंचायत से लेकर के पार्लियामेंट सब ओर शासन करती थी और कहीं कोई राज्य अगर उभर कर आता था और विरोधी दल की सरकार बनती थी तो इस देश में दो दशक ऐसे गए, यह बहुत गंभीर सवाल मैं उठा रहा हूँ आज इस मंडी की सभा में, दो दशक तक कांग्रेस ने क्या किया..? अगर विरोधी दल की कहीं पर भी कोई सरकार बनी हो, कितना ही बहुमत क्यों ना आया हो, साम-दाम-दंड-भेद जो भी शस्त्र काम आए उसका उपयोग करके उस सत्तारूढ़ पार्टी को डिवाइड करना, एम.एल.ए. को खरीद फरोख्त करना, लोभ-लालच देना और विरोधी दलों की सरकारों को गिराना... 20 साल तक कांग्रेस इस काम को करती रही। और अगर कांग्रेस विरोधी दल की सरकार और वो दल के अंदर के बहुमत को डिवाइड नहीं कर सकती थी, तो धारा 356 का दुरूपयोग करना, किसी ना किसी नाम से जोड़ कर के उन सरकारों को गिरा देना, लेकिन हिन्दुस्तान में ना विपक्ष को पनपने देना, ना किसी दल की सरकार को पनपने देना, बीस साल तक लगातार कांग्रेस ने संवैधानिक संस्थाओं का दुरूपयोग करते हुए हिन्दुस्तान के राजनैतिक दलों को कुचलने की लगातार कोशिश की थी। लेकिन अब कांग्रेस के बस का रोग नहीं रहा है, अब राज्यों को कुचल नहीं पाते हैं, किसी राज्य की सरकारों को तोड़ नहीं पाते हैं, धारा 356 का अनाप-शनाप दुरूपयोग नहीं कर पा रहे हैं और इसलिए पिछले दस साल से, मेरे पत्रकार मित्रों, अध्ययन करिए, देश के पॉलिटिकल पंडितों से मैं कहना चाहता हूँ कि अध्ययन कीजिए, कांग्रेस की रणनीति क्या है..? जो कांग्रेस 20 सालों तक सरकारों को तोडऩे के लिए संविधान का उपयोग करती थी, वह कांग्रेस आज अपने विरोधी दल के प्रमुख राजनेताओं के चरित्र पर कीचड़ उछालने के लिए षड़यंत्र करती है, संवैधानिक संस्थाओं का दुरूपयोग करती है, जितनी भी इन्वेस्टीगेशन की एजेंसीज उनके पास है, उसका दुरूपयोग करती है और कोई भी दल उभरने लगा हो तो उनके व्यक्तियों पर आरोप जड़ देना, झूठी बातें फैला देना, मीडिया के अंदर एक धारी कथाएं चालू करवा देना... एक नया षड़यंत्र चालू किया और हिन्दुस्तान में विरोधी दल का कोई नेता अछूता नहीं है जिस पर कांग्रेस ने इस प्रकार से पिछले दस साल में गंभीर आरोप ना लगाए हों। चरित्र हनन का रास्ता अपनाया है..! और बाद में क्या करते हैं..? सी.बी.आई. का राजनैतिक दुरूपयोग। जब पार्लियामेंट में वोट की जरूरत पड़े, तो सी.बी.आई. को मैदान में उतार दो। मेरे गुजरात में तो मित्रों, मैं दावे से कहता हूँ, मेरे गुजरात में कांग्रेस पार्टी चुनाव नहीं लड़ रही है। आपको जान कर के आश्चर्य होगा, मेरे गुजरात के अंदर चुनाव के मैदान में कांग्रेस है ही नहीं, उम्मीदवार कांग्रेस के हैं, लेकिन चुनाव सी.बी.आई. लड़ रही है मेरे राज में, सी.बी.आई. चुनाव लड़ रही है..! यह तौर तरीके अपनाए जाते हैं।

भाइयों-बहनों, जहाँ-जहाँ भारतीय जनता पार्टी की सरकारें हैं उनके साथ अन्याय करना, विकास की राह में रोड़े अटकाना और ऐसा व्यवहार किया जाता है कि जैसा किसी दुश्मन देश के राज्य के साथ किया जाए, यह भाजपा के राज्यों के साथ यह दिल्ली की सरकार करती है, यह मैं सार्वजनिक रूप से मैं उन पर आरोप लगाता हूँ। भाइयों-बहनों, मैं हमेशा देखता हूँ कि किस प्रकार से उन्होंने भाजपा सरकारों को विफल करने का प्रयास किया है। आप हिमाचल में देखिए, यहाँ पर रास्तों का काम प्रमुख काम होता है क्योंकि कभी भी पहाड़ ढह जाता है, जमीन ढह जाती है, नुकसान होता रहता है। भारत सरकार बहुत बड़ी-बड़ी बातें करती है और मैडम सोनियाजी यहाँ आकर बोली कि 10,000 करोड़ दिया है, 10,000 करोड..! मैडम, मैं यह पूछना चाहता हूँ कि क्या यह 10,000 करोड़ देहज में आए हुए हैं क्या..? यह हिन्दुस्तान की सौ करोड़ जनता की मेहनत की कमाई के पैसे हैं, यह आपकी व्यक्तिगत संपत्ति नहीं है। यह आपकी व्यक्तिगत संपत्ति नहीं है, यह दिल्ली कान खोल कर सुन ले और आप हम लोगों को रूपयों के नाम पर दबा नहीं सकते हो। भारतीय जनता पार्टी जनता जर्नादन को समर्पित पार्टी है, हम जनता के विकास के लिए लगे हुए लोग हैं। भाइयों-बहनों, कभी कोई इस प्रकार का व्यवहार नहीं करता है। अरे, हमारे यहाँ अगर हम पड़ौस के घर से कभी एक प्याला भर अगर हम चीनी लाए हों, तो कभी वो कहता है कि अरे, उस दिन तुम्हारे यहाँ मेहमान आए थे तो मैंने चीनी दी थी, ऐसा कोई बोलता है क्या, कोई बोलता है..? कोई मैडम बोलती है, माताएं-बहनें बोलती है क्या..? अरे, वह रोज का व्यवहार होता है। यह आकर के बोलती है 10,00 करोड़ दिया..! अरे मैडम सोनियाजी, अगर आपको राज चलाना नहीं आता है तो दिल्ली का दौर छोड़ दीजिए, आपके पास हिसाब-किताब मांगने के लिए सारी संस्थाएं हैं और आज तक धूमलजी पर उंगली उठाने का साहस दिल्ली की आपकी एक भी संवैधानिक संस्था ने किया नहीं है..! अरे, उनको पूछ लीजिए, उनके पास हिसाब पड़ा है, प्लानिंग कमीशन के पास हिसाब पड़ा है, देश के हिसाब-किताब से चलता है। लेकिन लोगों को भ्रमित करने के लिए... और मैं तो हैरान हूँ, ‘मौन मोहन’ सिंहजी भी यही बोल कर गए..! यह अच्छा लगा मुझे कि ‘मौन मोहन’ सिंहजी ने एक आधा वाक्य ये कहा कि भाई, हिमाचल में विकास तो हुआ है। ये तो कहा, लेकिन बाद में कहा कि लेकिन पैसे दिल्ली के थे..! भाइयों-बहनों, दिल्ली हिन्दुस्तान की राजधानी है और हिमाचल हिन्दुस्तान का एक अंग है और हिमाचल को हिन्दुस्तान से अलग करके बोलने की भाषा हिन्दुस्तान के संविधान का अपमान है।

भाइयों-बहनों, धूमलजी मेरे बहुत अच्छे मित्र रहे हैं। जिस प्रकार से वे हिमाचल को नई ऊंचाइयों पर ले गए हैं, मैंने बहुत निकट से जाना है। और मैं हिमाचल की मिट्टी से बहुत घुला-मिला इंसान हूँ, मैं देख रहा हूँ प्रगति को। और आज मैं गुजरात की धरती से आपसे खास मांगने आया हूँ और मैं आपसे चाहता हूँ कि 4 तारीख को आप भारी मतदान करें और भारतीय जनता पार्टी के कमल के निशान पर बटन दबाएं और भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी आवाज़ प्रकट करें, कमल के निशान पर बटन दबा कर के महंगाई के खिलाफ अपना आक्रोश व्यक्त करें, कमल पर बटन दबा कर के दिल्ली की सल्तनत को उखाड़ फैंकने का संकल्प करें और भाइयों-बहनों, जो पाप दिल्ली में चल रहे हैं, उस पाप को इस देवभूमि में मत आने दीजिए मेरे भाइयों, उस पाप को इस देवभूमि में मत आने दीजिए..! यह हिन्दुस्तान की पवित्र जगह है, यह मेरा हिमाचल हिन्दुस्तान का पवित्र स्थान है, हिन्दुस्तान की देवभूमि है, कृपा करके इस देवभूमि में यह दिल्ली के पाप को प्रवेश मत करने दीजिए भाईयों, मत घुसने दीजिए, यह हिमाचल को सुरक्षित रखिए..! और धूमलजी इसको सुरक्षित रखेंगे यह मेरा पूरा विश्वास है। हिमाचल के भाइयों-बहनों ने मेरा स्वागत किया, सम्मान किया, मैं आपका बहुत बहुत आभारी हूँ..! मेरे साथ बोलेंगे...

भारत माता की जय...!

दोनों मुट्ठी बंद करके पूरी ताकत से बोलिए,

भारत माता की जय...!  भारत माता की जय...!  भारत माता की जय...!

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आज 12 मार्च का दिन बहुत ऐतिहासिक है। 12 मार्च, 1930 को महात्मा गांधी ने साबरमती आश्रम से दांडी यात्रा शुरू की थी। ये भारत के स्वतंत्रता आंदोलन का एक टर्निंट प्वाइंट था। क्योंकि इस यात्रा ने देश के कोने-कोने को एक लक्ष्य के साथ जोड़ दिया था और ये लक्ष्य था- भारत की आजादी। आज इस ऐतिहासिक यात्रा के करीब 100 वर्षों के आसपास हम भारतीय फिर एक नई यात्रा पर निकले हैं। ये यात्रा है- विकसित भारत की यात्रा। हमारा लक्ष्य एक है, हमारी मंजिल एक है - विकसित भारत। और इस लक्ष्य की प्राप्ति में ऐसी समिट्स में हुआ मंथन इनसे निकला अमृत बड़ी भूमिका निभाता है। मैं आप सभी का आभारी हूं आपने मुझे नेक्स्ट समिट के लिए आमंत्रित किया। यहां देश से दुनिया से बहुत सारे साथी आए हैं, कुछ पुराने परिचित भी हैं, मैं आप सभी का अभिनंदन करता हूं।

साथियों,

21वीं सदी का ये कालखंड ना भूतो न भविष्यति जैसा है। एक तरफ युद्ध की विभिषिका है, सप्लाई चेन फिर से तहस-नहस हो रही है संयुक्त राष्ट्र जैसी वैश्विक संस्थाओं की प्रासंगिकता पर सवालिया निशान लग रहा है, और ऐसे कालखंड में हमारा भारत इन विपरीत परिस्थितियों में भी आगे बढ़ रहा है। आज दुनिया इतिहास के जिस महत्वपूर्ण पड़ाव पर खड़ी है, उस पड़ाव पर जिस देश के नाम सबसे ज्यादा चर्चा में है- वो है भारत। वर्तमान में इतने सारे संकटों के बीच दुनिया का हर गंभीर नेतृत्व हर जानकार भारत को लेकर बहुत उम्मीदों से भरा हुआ है। अभी हाल ही में फिनलैंड के प्रेसिडेंट एलेक्जेंडर स्टब भारत आए थे। उन्होंने कहा कि अब दुनिया की दिशा, ग्लोबल साउथ तय करेगा और उस दिशा को निर्धारित करने वाली सबसे बड़ी शक्ति होगा - भारत। इससे पहले कनाडा के पीएम कार्नी ने भी कहा था कि अगले तीन दशकों में दुनिया की Economic Gravity जिस सेंटर की ओर शिफ्ट हो रही है, उसका नाम भारत है। फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों भी मानते हैं कि भारत दुनिया के सबसे बड़े मुद्दों को सुलझाने वाला एक इनएविटेबल पार्टनर बन चुका है। आज टेक वर्ल्ड और अर्थ जगत के ग्लोबल लीडर्स के बयानों का निचोड़ निकालें तो एक ही भाव सामने आता है, अगर आप भविष्य का हिस्सा बनना चाहते हैं, तो आपको भारत से जुड़ना ही होगा, भारत में होना ही होगा।

साथियों,

अभी-अभी भारत ने टी-ट्वेंटी वर्ल्ड कप जीता है। हर कोई खुश है और भारत में तो क्रिकेट का मामला ऐसा है कि अगर किसी ऑफिस में कोई करोड़ों की बात चलती हो, कोई बढ़िया प्रेज़ेंटेशन चल रहा होता है विदेश के मेहमान प्रेज़ेंटेशन कर रहे हों फिर भी वो जरा स्लाइड से नजर हटा कर के वो स्कोर क्या देखता है। और कोई न कोई तो पूछ ही लेता है- भाई स्कोर क्या हुआ ठीक ऐसी ही स्थिति, आज भारतीय अर्थव्यवस्था की है। आज हर कोई इकॉनॉमी की रनिंग कमेंट्री चाहता है। भारत की इकॉनॉमी का पिछले महीने क्या स्टेटस था आज क्या हाल है ये सब जानने के लिए देशवासी उत्सुक रहते हैं। मुझे याद नहीं पड़ता, इतनी उत्सुकता देश में पहले थी या नहीं थी ? और थी तो कब थी? ये दिखाता है कि आज भारतीयों की एस्पिरेशन्स और आत्मविश्वास किस स्तर पर हैं। यही, दुनिया के भारत पर भरोसे का सबसे बड़ा कारण भी है।

और साथियों,

निश्चित तौर पर जब इतनी सारी उम्मीदें जुड़ी हों, दुनिया की नजर हमारे देश पर हो तो हम सभी की जिम्मेदारी और ज्यादा जाती है।

साथियों,

आज का भारत सिर्फ आगे नहीं बढ़ रहा। भारत खुद को Next Level पर ले जा रहा है। आज देश में Next Generation फिजिकल इंफ्रास्ट्रक्चर बन रहा है, हम नेक्स्ट जेनरेशन डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की ओर बढ़ रहे हैं UPI ने Digital Payments को Next Phase में पहुँचा दिया है। आज भारत दुनिया में सबसे तेज़ real-time digital payments करने वाला देश बना है।

साथियों,

भारत आज नेक्स्ट जेनरेशन रिफॉर्म्स भी कर रहा है, वो Reform एक्सप्रेस पर सवार है। कभी भारत में कई काम, कई निर्णय Next to Impossible माने जाते थे, आज भारत वो निर्णय भी ले रहा है। कभी कहा जाता था कि Article 370 हटाना नामुमकिन है। लेकिन आज जम्मू-कश्मीर में Article 370 की दीवार गिर चुकी है। कभी लगता था कि देश में सबका बैंकिंग सिस्टम से जुड़ना असंभव है। लेकिन आज 50 करोड़ से ज्यादा जनधन खातों ने ये संभव कर दिखाया है। कभी लगता था कि ट्रिपल तलाक को खत्म करना असंभव है। लेकिन आज मुस्लिम बहनों को इस अन्याय से मुक्ति मिली है। कभी महिलाओं को लोकसभा और विधानसभा में तैंतीस परसेंट आरक्षण भी असंभव लगता था। लेकिन आज इसके लिए कानून बन चुका है। कभी अंतरिक्ष और advanced technology को लेकर भी भारत की लिमिट्स बताई जाती थीं। लेकिन आज मून मिशन, Semiconductor Mission, क्वांटम मिशन, ये सब भारत को Next फ्रंटियर of Technology की ओर ले जा रहे हैं।

साथियों,

आज का भारत केवल सपने नहीं देख रहा। भारत उन्हें सच कर रहा है। इसीलिए आज दुनिया कह रही है- India is not just progressing. India is moving to the Next.

साथियों,

देश के विकास का एक बहुत बड़ा आधार होता है कि हम चुनौतियों से कैसे मुकाबला कर रहे हैं। हम सभी जानते हैं कि वैश्विक परिस्थितियाँ अचानक बदलती हैं। बीते वर्षों में हमने पहले कोरोना की आपदा देखी फिर रूस-यूक्रेन का संकट देखा और अब हमारे बहुत पास में ही एक और बड़ा युद्ध चल रहा है। इस युद्ध ने पूरे विश्व को बहुत बड़े ऊर्जा संकट में धकेल दिया है।

साथियों,

ऐसी विकट परिस्थितियों में बहुत अहम है कि एक देश के तौर पर हम इसका कैसे मुकाबला करते हैं। संकट काल एक प्रकार से, पूरे राष्ट्र की परीक्षा होती है। शांति के साथ धैर्य के साथ हमें परिस्थितियों से निपटना होता है जनविश्वास बढ़ाकर जनता को जागरूक करते हुए, हमें चलना होता है। और इसमें हर किसी की भूमिका होती है। हर राजनीतिक दल की, मीडिया की, सामाजिक संस्थाओं की, इंडस्ट्री की, युवाओ की गांव की शहर की हर किसी की भूमिका अहम होती है। और हमने कोरोना काल में देखा है जब सब मिलकर चलते हैं तो संकट से मुकाबले के लिए देश का सामर्थ्य कई गुणा बढ़ जाता है। आज देश के सामने एक और चुनौती है और इसलिए हमें मिलकर प्रयास करने होंगे, राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखते हुए अपने कर्तव्य निभाने होंगे।

साथियों,

आजकल बहुत चर्चा LPG को लेकर हो रही है। कुछ लोग हैं जो पैनिक क्रिएट करने का प्रयास कर रहे हैं, अपना एजेंडा चलाना चाहते हैं। मैं इस समय उन पर राजनीतिक टिप्पणी नहीं करना चाहता. लेकिन इतना जरूर कहूंगा कि ऐसा करके वो जनता के समक्ष खुद तो एक्सपोज़ हो ही रहे हैं और देश का भी बड़ा नुकसान कर रहे हैं।

साथियों,

आज युद्ध से जो ये वैश्विक संकट आया है उसके प्रभाव से कोई देश अछूता नहीं है। कम अधिक मात्रा में हर कोई शिकार है, भारत सरकार भी, इस संकट से निपटने के लिए कोई कसर बाकी नहीं छोड़ रही है। और हम अलग-अलग स्तरों पर प्रयास कर रहे हैं। बीते दिनों, दुनिया के कई देशों के शीर्ष नेताओं से मेरी इसको लेकर बातचीत हुई है। सप्लाई चेन में जो बाधाएं आई हैं, उससे हम कैसे पार पाएं, इसके लिए भी निरंतर प्रयास चल रहे हैं।

साथियों,

भारत के तेज विकास के लिए अलग-अलग एनर्जी सोर्सेस को बढ़ावा देना निरंतर जरूरी रहा है। और इसको मजबूत करने के लिए हमने दो स्तरों पर एक साथ काम किया है। पहला देश में एनर्जी एक्सेस बढ़े हमने इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया।

और दूसरा- Energy के लिए हमें सिर्फ विदेशों पर निर्भर ना रहना पड़े, इसके लिए Energy सेक्टर में आत्मनिर्भरता पर बल दिया। अब मैं आपको Gas सेक्टर के ही कुछ आंकड़े देता हूं। साल 2014 तक देश में सिर्फ 14 करोड़ LPG कनेक्शन थे। यानि देश के करीब-करीब आधे परिवारों पास ही LPG कनेक्शन था। आज दोगुने से भी अधिक यानि करीब 33 करोड़ घरेलू LPG कनेक्शन हैं। बीते 11 वर्षों में हमने अपनी बॉटलिंग कैपेसिटी को दोगुना किया है। डिस्ट्रिब्यूशन सेंटर भी 13 हज़ार से बढ़कर 25 हज़ार से अधिक हो गए हैं 2014 में देश में सिर्फ 4 LNG Terminals थे, आज इनकी संख्या भी बढ़कर दोगुनी हो गई है। गैस पाइपलाइन जो करीब साढ़े तीन हज़ार किलोमीटर होती थी उसको 10 हज़ार किलोमीटर तक विस्तार दिया है। क्योंकि करीब 60 परसेंट LPG विदेशों से आती है इसलिए देश के बड़े पोर्ट्स पर इंपोर्ट टर्मिनल कैपैसिटी भी बहुत बढ़ाई गई है।

साथियों,

साल 2014 से पहले तक देश में सिर्फ 25-26 लाख घरों में ही, पाइप से सस्ती गैस यानि PNG की सुविधा थी। आज ये संख्या भी सवा करोड़ से अधिक पहुंच गई है। 2014 में देश में CNG पर चलने वाली गाड़ियां भी 10 लाख से ज्यादा नहीं थी। आज ये संख्या 70 लाख से अधिक है। और ये तभी संभव हो पा रहा है क्योंकि बीते दशक में देश के 600 से अधिक जिलों में City Gas Distribution network स्थापित किए गए हैं।

साथियों,

इस वैश्विक संकट ने एक बार फिर दिखाया है कि किसी भी देश का आत्मनिर्भर होना इतना अधिक जरूरी क्यों है। इसलिए ही बीते वर्षों में हमने भारत को एनर्जी सेक्टर्स में आत्मनिर्भर बनाने के लिए होलिस्टिक तरीके से काम किया है।

साथियों,

पेट्रोलियम पर निर्भरता को कम करने के लिए हमने इथेनॉल पर, बायोफ्यूल पर बल दिया। 2014 से पहले देश में सिर्फ एक-डेढ़ परसेंट इथेनॉल ब्लेंडिंग कैपेसिटी ही थी। आज हम पेट्रोल में 20 परसेंट इथेनॉल ब्लेंडिंग के करीब पहुंच रहे हैं। अगर ये काम न किया होता तो हमें बीते 11 वर्षों में करीब 18 करोड़ बैरल अतिरिक्त तेल विदेशों से खरीदना पड़ता। आज की स्थिति देखें तो इथेनॉल के कारण हमें प्रतिवर्ष करीब साढ़े चार करोड़ बैरल कम ऑयल इंपोर्ट करना पड़ रहा है। यानि करीब डेढ़ लाख करोड़ रुपए की बचत तो देश को सिर्फ इसी से हुई है।

साथियों,

भारत में पेट्रोलियम का बहुत बड़ा कंज्यूमर हमारी रेलवे भी है। हमारे देश में रेलवे लाइनों के इलेक्ट्रिफिकेशन का काम 60 साल पहले शुरू हुआ था। बावजूद इसके 2014 तक सिर्फ 20 परसेंट रेलवे रूट का इलेक्ट्रिफिकेशन ही हो पाया था। बाकी रेलवे रूट्स पर हजारों डीजल इंजन चला करते थे। आज भारत में ब्रॉडगेज नेटवर्क का करीब-करीब 100 percent बिजलीकरण हो चुका है। इससे, साल 2024-25 में ही भारतीय रेलवे ने करीब 180 करोड़ लीटर डीज़ल की बचत की है। अगर इलेक्ट्रिफिकेशन न हुआ होता तो हर वर्ष इतना डीज़ल बनाने के लिए एक्स्ट्रा क्रूड ऑयल इंपोर्ट करना पड़ता। ऐसे ही, हमने मेट्रो का नेटवर्क बढ़ाया, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी पर फोकस किया।

ऐसे ही एक और बहुत बड़ा काम हमने रीन्युएबल एनर्जी को लेकर किया है। आज हमारी टोटल installed power generation capacity का आधा हिस्सा रीन्यूएबल सोर्स से आता है। हमारी कुल रिन्यूएबल क्षमता आज 250 गीगावाट के ऐतिहासिक आंकड़े को पार कर गई है। आप सोचिए साल 2014 में भारत की सोलर पावर कैपेसिटी सिर्फ दो गीगावॉट थी, आज ये करीब चालीस गुणा बढ़कर hundred and thirty गीगावॉट हो चुकी है। घरेलू उपयोग में गैस के अलावा बिजली अधिक से अधिक काम आए इसके लिए पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना लागू की गई। अभी तक इस स्कीम के तहत करीब 30 लाख परिवारों ने रूफटॉप सोलर लगाए हैं।

साथियों,

इसके अलावा हमने गोबरधन स्कीम पर भी काम किया। इसके तहत Compressed Biogas बनाने पर काम किया गया। अभी तक देश में 100 से अधिक प्लांट चालू हो चुके हैं और 600 से ज्यादा पर काम चल रहा है।

साथियों,

पेट्रोल-डीज़ल के क्षेत्र में हमने कैपेसिटी बिल्डिंग की दिशा में भी व्यापक प्रयास किया है। 2014 से पहले भारत के पास strategic पेट्रोलियम रिज़र्व यानि संकट के समय के लिए कच्चा तेल स्टोर करने की कैपेसिटी ना के बराबर थी। आज हमारे पास, 50 लाख टन से अधिक का strategic पेट्रोलियम रिज़र्व है। और इससे भी अधिक कैपेसिटी पर काम चल रहा है। बीते दशक में अपनी रिफाइनिंग कैपेसिटी में भी हमने सालाना 40 मिलियन टन से अधिक की वृद्धि की है। तभी भारत आज दुनिया के सबसे बड़े refining hubs में से एक बना है। यानि आप अंदाजा लगा सकते हैं कि हम भारत को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कितने बड़े पैमाने पर और कितनी बड़ी दिशाओ में काम कर रहे हैं। ये युद्ध की वजह से जो संकट बना है, उसका मुकाबला भी हम जरूर कर पाएंगे। मेरा 140 करोड़ देशवासियों पर पूरा भरोसा है। जैसे एक साथ संगठित होकर कोविड के संकट से हमने देश को बाहर निकाला था उसी प्रकार हम इस वैश्विक संकट को भी पार कर लेंगे। और मैं फिर दोहराउंगा जहां तक सरकार का प्रश्न है, हम किसी भी प्रकार के प्रयत्न या प्रयास में कोई कमी नहीं आने देंगे। हमारे हर निर्णय में जनता का हित सर्वोपरि रहेगा।

साथियों,

यूक्रेन युद्ध से लेकर आज तक हमने ये देखा है कि कैसे इसका प्रभाव वैश्विक मार्केट से लेकर दुनिया के नागरिकों पर पड़ता रहा है। लेकिन भारत सरकार का हमेशा से हर संभव प्रयास रहा है कि युद्ध से बनी परिस्थितियों का बोझ भारत के नागरिकों पर ना पड़े। जैसे जब रूस-यूक्रेन का संकट बढ़ा था , तो उस कालखंड में फर्टिलाइजर की कीमतें आसमान छूने लगी थीं। इसके बावजूद यूरिया की जो बोरी अंतरराष्ट्रीय बाजार में 3000 रुपए में मिल रही थी वो हमने अपने किसानों को सिर्फ 300 रुपए में दी थी। दुनिया में 3000 रुपया चल रहा था हमारे यहाँ 300 में दिया जा रहा था , इस बार भी हमारा हर संभव प्रयास होगा कि देश के किसान देश के नागरिकों के जीवन पर युद्ध का कम से कम प्रभाव पड़े।

साथियों,

आज के इस अहम समय में... आज इस मंच से राज्य सरकारों से भी एक अनुरोध है। ये जरूरी है कि कालाबाज़ारी न हो, अफवाहें न फैलें इसलिए स्थिति की गंभीरता से मॉनीटरिंग आवश्यक है जो कालाबाजारी कर रहे हैं, उनके खिलाफ कड़े एक्शन भी जरूरी हैं।

साथियों,

बीता एक दशक, आत्मनिर्भरता के साथ-साथ संवेदनशील गवर्नेंस का भी रहा है। हमारे देश का एक बड़ा हिस्सा, वहां रहने वाले लोग दिल्ली में बैठी कांग्रेस सरकारों की सोच से भी दूर रहे। लेकिन हमारी सरकार ने विकास की दौड़ में पीछे रह गए लोगों को गवर्नेंस की प्राथमिकताओं से जोड़ा। आज इन इलाकों में हाउसिंग हो, रोड्स हों, स्कूल-हॉस्पिटल हों ऐसे इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण के लिए ही Aspirational District योजना, Aspirational ब्लाक योजना पीएम जनमन योजना जैसी स्पेशल अभियान चलाए जा रहे हैं।

साथियों,

कांग्रेस की सरकारों का एक बहुत बड़ा पाप ये भी रहा कि उन्होंने देश के एक बड़े हिस्से को माओवादी आतंक की आग में जलने के लिए छोड़ दिया था। देश के करीब-करीब हर बड़े राज्य का बहुत बड़ा हिस्सा माओवादी आतंक की गिरफ्त में था। लेकिन साथियों,

बीते सालों में देश ने इस स्थिति को बदलने का संकल्प लिया। हम बुलंद हौसले के साथ आगे बढ़े। और इसका नतीजा आज देश देख रहा है। साल 2013 में 180 से अधिक जिले, 180 से ज्यादा डिस्ट्रिक्ट माओवादी आतंक से प्रभावित थे। आज माओवादी आतंक से प्रभावित जिलों की संख्या सिंगल डिजिट में पहुंच चुकी है।

साथियों,

बीते एक साल में ही 2100 से ज्यादा नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है 900 से ज्यादा गिरफ्तारियां हुईं हैं, और जो हथियार छोड़ने के लिए तैयार नहीं थे, ऐसे 300 से अधिक कट्टर नक्सलियों को सुरक्षा बलों ने मार गिराया है। इसका परिणाम ये हुआ कि जो इलाके कभी डर के साए में जीने को मजबूर थे वहां आज विकास की नई ऊर्जा का संचार हो रहा है।

साथियों,

भारत आज जिस गति से आगे बढ़ रहा है, उसकी प्रगति की गति को रोकना असंभव है। 140 करोड़ भारतीयों की आकांक्षा आज next level पर है। मैं जानता हूं कि जब एक सपना पूरा होता है तो नए सपने, नई आकाक्षाएं जन्म लेती हैं। मैं इसे बोझ नहीं मानता, बल्कि जनता के विश्वास की पूंजी मानता हूं। हां...देश में मेरे कुछ ऐसे शुभचिंतक हैं जिनको लगता है कि उम्मीदों के बोझ तले मोदी कभी तो दबेगा, कभी तो कुचला जाएगा लेकिन उनकी नीयत इतनी खोटी है, कि उनकी उम्मीदें पूरी ही नहीं होती, और देशवासियों का आशीर्वाद जब तक है तब तक ये पूरी होंगी भी नहीं। अब सिर्फ 140 करोड़ भारतीयों की आशाएं और आकांक्षाएं ही पूरी होंगी। भारत हर सेक्टर में आत्मनिर्भर बनेगा भारत हर हाल में विकसित बनेगा।

इसी भावना के साथ मैं अपनी बात को विराम देता हूं।

आप सभी का फिर से बहुत-बहुत आभार।

धन्यवाद