PM Modi addresses a virtual public meeting in Manipur

Published By : Admin | March 1, 2022 | 11:31 IST
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For them, Manipur was just a haven for corruption. Congress did not develop Manipur, keeping Manipur away from peace and prosperity: PM Modi on how Manipur was treated earlier
Development of Manipur and balanced development of Manipur is the priority of BJP: PM Modi
Our government is working continuously to give you a pucca house, to provide a gas connection, to provide a good road till your homes: PM Modi

Prime Minister Narendra Modi today addressed a virtual public meeting in Manipur. PM Modi started his address by bestowing honour upon the noted personalities who have shaped and glorified Manipur. PM Modi further told people that the whole country was watching how Manipur is voting for development in the first phase of elections.


PM Modi spoke on how people of Manipur were treated by past governments, PM Modi said, “For them, Manipur was just a haven for corruption. Congress did not develop Manipur, keeping Manipur away from peace and prosperity. Congress was responsible for separatism in the state in the name of hill and valley.” PM Modi further added that the BJP government wants development for all, linking each part of Manipur with the rest of the nation.


PM Modi iterated how Manipur and other north-east states are the centres of national unity, PM Modi said, “After becoming the Prime Minister, Atal Ji had created a separate ministry for its development. But, When the UPA government came to Delhi in 2004. The focus of the Congress was not on the development of Manipur but on looting Manipur.” PM Modi added that the state was in hands of such leaders who were known to be called ‘Mr. 10 per cent’ on the account of their corruption.


Talking about the success of Double Engine Sarkar in the state, PM Modi said, “Development of Manipur and balanced development of Manipur is the priority of BJP. CM Biren Singh Ji is readily available to the people of Manipur. Central government ministers now come frequently to Manipur and the Northeast. And I myself constantly review the development work of the Northeast. The Act East Policy is giving a new impetus to the development of Manipur.”


PM Modi also talked about the importance of start-ups and sports in the state. PM Modi told people that the Double Engine Sarkar is supporting five and a half thousand start-ups in the state and will further strengthen Manipur by creating two special economic zones. PM Modi further added “Our Manipur has given players like Mary Kom and Mirabai Chanu to the country. The youth here have exceptional sportsmanship. But, the youth had to wander for sports facilities. The double engine government has also done the work of establishing a sports university in Manipur.”


PM Modi finally addressed the issue of basic facilities in Manipur, PM Modi said, “Our government is working continuously to give you a pucca house, to provide a gas connection, to provide a good road till your homes.” PM Modi further iterated the success of the Jal Jeevan Mission in the state and the coverage of health under the Ayushman Yojana. PM Modi asked the support of the people of Manipur to continue the development in the state.

Click here to read PM's speech in Manipur

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July 06, 2022
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“Well-informed, better-informed society should be the goal for all of us, let us all work together for this”
“Agradoot has always kept the national interest paramount”
“Central and state governments are working together to reduce the difficulties of people of Assam during floods”
“Indian language journalism has played a key role in Indian tradition, culture, freedom struggle and the development journey”
“People's movements protected the cultural heritage and Assamese pride, now Assam is writing a new development story with the help of public participation”
“How can intellectual space remain limited among a few people who know a particular language”

असम के ऊर्जावान मुख्यमंत्री श्री हिमंता बिस्वा शर्मा जी, मंत्री श्री अतुल बोरा जी, केशब महंता जी, पिजूष हजारिका जी, गोल्डन जुबली सेलिब्रेशन कमिटी के अध्यक्ष डॉ दयानंद पाठक जी, अग्रदूत के चीफ एडिटर और कलम के साथ इतने लंबे समय तक जिन्‍होंने तपस्‍या की है, साधना की है, ऐसे कनकसेन डेका जी, अन्य महानुभाव, देवियों और सज्जनों,

असमिया भाषा में नॉर्थ ईस्ट की सशक्त आवाज़, दैनिक अग्रदूत, से जुड़े सभी साथियों, पत्रकारों, कर्मचारियों और पाठकों को 50 वर्ष - पांच दशक की इस स्‍वर्णिम यात्रा के लिए मैं बहुत-बहुत बधाई देता हूं, बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं। आने वाले समय में अग्रदूत नई ऊँचाइयो को छुये, भाई प्रांजल और युवा टीम को मैं इसके लिए शुभकामनाएं देता हूँ।

इस समारोह के लिए श्रीमंत शंकरदेव का कला क्षेत्र का चुनाव भी अपने आप में अद्भुत संयोग है। श्रीमंत शंकरदेव जी ने असमिया काव्य और रचनाओं के माध्यम से एक भारत, श्रेष्ठ भारत की भावना को सशक्त किया था। उन्हीं मूल्यों को दैनिक अग्रदूत ने भी अपनी पत्रकारिता से समृद्ध किया है। देश में सद्भाव की, एकता की, अलख को जलाए रखने में आपके अखबार ने पत्रकारिता के माध्यम से बड़ी भूमिका निभाई है।

डेका जी के मार्गदर्शन में दैनिक अग्रदूत ने सदैव राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखा। इमरजेंसी के दौरान भी जब लोकतंत्र पर सबसे बड़ा हमला हुआ, तब भी दैनिक अग्रदूत और डेका जी ने पत्रकारीय मूल्यों से समझौता नहीं किया। उन्होंने न सिर्फ असम में भारतीयता से ओत-प्रोत पत्रकारिता को सशक्त किया, बल्कि मूल्य आधारित पत्रकारिता के लिए एक नयी पीढ़ी भी तैयार की।

आज़ादी के 75वें वर्ष में दैनिक अग्रदूत का स्वर्ण जयंती समारोह सिर्फ एक पड़ाव पर पहुंचना नहीं है, बल्कि ये आज़ादी के अमृतकाल में पत्रकारिता के लिए, राष्ट्रीय कर्तव्यों के लिए प्रेरणा भी है।

साथियों,

बीते कुछ दिनों से असम बाढ़ के रूप में बड़ी चुनौती और कठिनाइयों का सामना भी कर रहा है। असम के अनेक जिलों में सामान्य जीवन बहुत अधिक प्रभावित हुआ है। हिमंता जी और उनकी टीम राहत और बचाव के लिए दिनरात मेहनत कर रही है। मेरी भी समय-समय पर इसको लेकर वहां अनेक लोगों से बातचीत होती रहती है। मुख्‍यमंत्री जी से बातचीत होती रहती है। मैं आज असम के लोगों को, अग्रदूत के पाठकों को ये भरोसा दिलाता हूं केंद्र और राज्य सरकार मिलकर, उनकी मुश्किलें कम करने में जुटी हुई हैं।

साथियों,

भारत की परंपरा, संस्कृति, आज़ादी की लड़ाई और विकास यात्रा में भारतीय भाषाओं की पत्रकारिता की भूमिका अग्रणी रही है। असम तो पत्रकारिता के मामले में बहुत जागृत क्षेत्र रहा है। आज से करीब डेढ़ सौ वर्ष पहले ही असमिया में पत्रकारिता शुरू हो चुकी थी और जो समय के साथ समृद्ध होती रही। असम ने ऐसे अनेक पत्रकार, ऐसे अनेक संपादक देश को दिए हैं, जिन्होंने भाषाई पत्रकारिता को नए आयाम दिए हैं। आज भी ये पत्रकारिता सामान्य जन को सरकार और सरोकार से जोड़ने में बहुत बड़ी सेवा कर रही है।

साथियों,

दैनिक अग्रदूत के पिछले 50 वर्षों की यात्रा असम में हुए बदलाव की कहानी सुनाती है। जन आंदोलनों ने इस बदलाव को साकार करने में अहम भूमिका निभाई है। जन आंदोलनों ने असम की सांस्कृतिक विरासत और असमिया गौरव की रक्षा की। और अब जन भागीदारी की बदौलत असम विकास की नई गाथा लिख रहा है।

साथियों,

भारत के इस समाज में डेम्रोक्रेसी इसलिए निहित है क्योंकि इसमें विमर्श से, विचार से, हर मतभेद को दूर करने का रास्ता है। जब संवाद होता है, तब समाधान निकलता है। संवाद से ही संभावनाओं का विस्तार होता है| इसलिए भारतीय लोकतंत्र में ज्ञान के प्रवाह के साथ ही सूचना का प्रवाह भी अविरल बहा और निरंतर बह रहा है। अग्रदूत भी इसी परंपरा को आगे बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम रहा है।

साथियों,

आज की दुनिया में हम कहीं भी रहें, हमारी मातृभाषा में निकलने वाला अखबार हमें घर से जुड़े होने का एहसास कराता है। आप भी जानते हैं कि असमिया भाषा में छपने वाला दैनिक अग्रदूत सप्ताह में दो बार छपता था। वहां से शुरू हुआ इसका सफर पहले दैनिक अखबार बनने तक पहुंचा और अब ये ई-पेपर के रूप में ऑनलाइन भी मौजूद है। दुनिया के किसी भी कोने में रहकर भी आप असम की ख़बरों से जुड़े रह सकते हैं, असम से जुड़े रह सकते हैं।

इस अखबार की विकास यात्रा में हमारे देश के बदलाव और डिजिटल विकास की झलक दिखती है। डिजिटल इंडिया आज लोकल कनेक्ट का मजबूत माध्यम बन चुका है। आज जो व्यक्ति ऑनलाइन अख़बार पढ़ता है, वो ऑनलाइन पेमेंट भी करना जानता है। दैनिक अग्रदूत और हमारा मीडिया असम और देश के इस बदलाव का साक्षी रहे हैं।

साथियों,

आज़ादी के 75 वर्ष जब हम पूरा कर रहे हैं, तब एक प्रश्न हमें ज़रूर पूछना चाहिए। Intellectual space किसी विशेष भाषा को जानने वाले कुछ लोगों तक ही सीमित क्यों रहना चाहिए? ये सवाल सिर्फ इमोशन का नहीं है, बल्कि scientific logic का भी है। आप ज़रा सोचिए, बीती 3 औद्योगिक क्रांतियों में भारत रिसर्च एंड डेवलपमेंट में पीछे क्यों रहा? जबकि भारत के पास knowledge की, जानने-समझने की, नया सोचने नया करने की परंपरा सदियों से चली आ रही है।

इसका एक बड़ा कारण ये है कि हमारी ये संपदा भारतीय भाषाओं में थी। गुलामी के लंबे कालखंड में भारतीय भाषाओं के विस्तार को रोका गया, और आधुनिक ज्ञान-विज्ञान, रिसर्च को इक्का-दुक्का भाषाओं तक सीमित कर दिया गया। भारत के बहुत बड़े वर्ग का उन भाषाओं तक, उस ज्ञान तक access ही नहीं था। यानि Intellect का, expertise का दायरा निरंतर सिकुड़ता गया। जिससे invention और innovation का pool भी limited हो गया।

21वीं सदी में जब दुनिया चौथी औद्योगिक क्रांति की तरफ बढ़ रही है, तब भारत के पास दुनिया को lead करने का बहुत बड़ा अवसर है। ये अवसर हमारी डेटा पॉवर के कारण है, digital inclusion के कारण है। कोई भी भारतीय best information, best knowledge, best skill और best opportunity से सिर्फ भाषा के कारण वंचित ना रहे, ये हमारा प्रयास है।

इसलिए हमने राष्ट्रीय शिक्षा नीति में भारतीय भाषाओं में पढ़ाई को प्रोत्साहन दिया। मातृभाषा में पढ़ाई करने वाले ये छात्र कल चाहे जिस प्रोफेशन में जाएं, उन्हें अपने क्षेत्र की जरूरतों और अपने लोगों की आकांक्षाओं की समझ रहेगी। इसके साथ ही अब हमारा प्रयास है कि भारतीय भाषाओं में दुनिया का बेहतरीन कंटेंट उपलब्ध हो। इसके लिए national language translation mission पर हम काम कर रहे हैं।

प्रयास ये है कि इंटरनेट, जो कि knowledge का, information का बहुत बड़ा भंडार है, उसे हर भारतीय अपनी भाषा में प्रयोग कर सके। दो दिन पहले ही इसके लिए भाषीनी प्लेटफॉर्म लॉन्च किया गया है। ये भारतीय भाषाओं का Unified Language Interface है, हर भारतीय को इंटरनेट से आसानी से कनेक्ट करने का प्रयास है। ताकि वो जानकारी के, ज्ञान के इस आधुनिक स्रोत से, सरकार से, सरकारी सुविधाओं से आसानी से अपनी भाषा से जुड़ सके, संवाद कर सके।

इंटरनेट को करोड़ों-करोड़ भारतीयों को अपनी भाषा में उपलब्ध कराना सामाजिक और आर्थिक, हर पहलू से महत्वपूर्ण है। सबसे बड़ी बात ये एक भारत, श्रेष्ठ भारत को मज़बूत करने, देश के अलग-अलग राज्यों से जुड़ने, घूमने-फिरने और कल्चर को समझने में ये बहुत बड़ी मदद करेगा।

साथियों,

असम सहित पूरा नॉर्थ ईस्ट तो टूरिस्ट, कल्चर और बायोडायवर्सिटी के लिहाज़ से बहुत समृद्ध है। फिर भी अभी तक ये पूरा क्षेत्र उतना explore नहीं हुआ है, जितना होना चाहिए। असम के पास भाषा, गीत-संगीत के रूप में जो समृद्ध विरासत है, उसे देश और दुनिया तक पहुंचना चाहिए। पिछले 8 वर्षों से असम और पूरे नॉर्थ ईस्ट को आधुनिक कनेक्टिविटी के हिसाब से जोड़ने का अभूतपूर्व प्रयास चल रहा है। इससे असम की, नॉर्थ ईस्ट की, भारत की ग्रोथ में भागीदारी लगातार बढ़ रही है। अब भाषाओं के लिहाज़ से भी ये क्षेत्र डिजिटली कनेक्ट होगा तो असम की संस्कृति, जनजातीय परंपरा और टूरिज्म को बहुत लाभ होगा।

साथियों,

इसलिए मेरा अग्रदूत जैसे देश के हर भाषाई पत्रकारिता करने वाले संस्थानों से विशेष निवेदन रहेगा कि डिजिटल इंडिया के ऐसे हर प्रयास से अपने पाठकों को जागरूक करें। भारत के tech future को समृद्ध और सशक्त बनाने के लिए सबका प्रयास चाहिए। स्वच्छ भारत मिशन जैसे अभियान में हमारे मीडिया ने जो सकारात्मक भूमिका निभाई है, उसकी पूरे देश और दुनिया में आज भी सराहना होती है। इसी तरह, अमृत महोत्सव में देश के संकल्पों में भी आप भागीदार बनके इसको एक दिशा दीजिए, नई ऊर्जा दीजिए।

असम में जल-संरक्षण और इसके महत्व से आप भलीभांति परिचित हैं। इसी दिशा में देश इस समय अमृत सरोवर अभियान को आगे बढ़ा रहा है। देश हर जिले में 75 अमृत सरोवरों के लिए काम कर रहा है। इसमें पूरा विश्‍वास है कि अग्रदूत के माध्‍यम से असम का कोई नागरिक ऐसा नहीं होगा जो इससे जुड़ा नहीं होगा, सबका प्रयास नई गति दे सकता है।

इसी तरह, आज़ादी की लड़ाई में असम के स्थानीय लोगों का, हमारे आदिवासी समाज का इतना बड़ा योगदान रहा है। एक मीडिया संस्थान के रूप में इस गौरवशाली अतीत को जन जन तक पहुंचाने में आप बड़ी भूमिका निभा सकते हैं। मुझे यकीन है, अग्रदूत समाज के इन सकारात्मक प्रयासों को ऊर्जा देने का अपना कर्तव्‍य जो पिछले 50 साल से निभा रहा है, आने वाले भी अनेक दशकों तक निभाएगा, ऐसा मुझे पूरा विश्‍वास है। असम के लोगों और असम की संस्कृति के विकास में वो लीडर के तौर पर काम करता रहेगा।

Well informed, better informed society ही हम सभी का ध्येय हो, हम सभी मिलकर इसके लिए काम करें, इसी सदिच्छा के साथ एक बार फिर आपको स्वर्णिम सफर की बधाई और बेहतर भविष्य की अनेक-अनेक शुभकामनाएं!