ଭଦୋହିରେ କଂଗ୍ରେସ-ଏସପି ବିଜୟୀ ହେବାର କୌଣସି ସମ୍ଭାବନା ନାହିଁ: ୟୁପିର ଭଦୋହିରେ ପ୍ରଧାନମନ୍ତ୍ରୀ ମୋଦୀ

बोला विंध्यवासिनी मैया की, हर- हर महादेव। हम सीता मैया, बाबा हरिहरनाथ अउर सेमराध नाथ के चरण में प्रणाम करत हई। आज सीतानवमी के पावन दिन मुझे मां सीता की तीर्थभूमि पर आने का सौभाग्य मिला है। मैं सीता मैया, बाबा हरिहरनाथ और सेमराध नाथ के चरणों में श्रद्धापूर्वक प्रणाम करता हूं।

साथियों,

मैं काशी वाला हूं और काशी वालों के लिए तो भदोही अपना ही घर है और मुझे पक्का विश्वास है कि अगर मैं आपसे कुछ भी ना मांगू तो भी आप वोट देकर के भारी बहुमत के साथ यहां से कमल दिल्ली भेजने वाले हैं, लेकिन मैं आज आपके पास आया हूं आपके आशीर्वाद मांगने के लिए। इन दिनों दुनियाभर के अखबार वाले, टीवी वाले, कैमरा वाले हिंदुस्तान में चारों तरफ इस चुनाव का जायजा ले रहे हैं। लेकिन वो हैरान हो जाते हैं कि इतनी गर्मी और लोकतंत्र के प्रति इतना अद्भुत प्यार उनके दिमाग में ही नहीं बैठता है। गर्मी के मौसम में आपका ये उत्साह बता रहा है फिर एक बार.. फिर एक बार.. फिर एक बार।

साथियों,

भदोही के चुनाव की चर्चा आज पूरे प्रदेश में हो रही है। लोग पूछ रहे हैं भदोही में ये TMC कहां से आ गई? कांग्रेस का तो पहले से ही यूपी में कोई वजूद नहीं था, सपा भी मान चुकी है कि इस चुनाव में उसके लिए कुछ भी बचा नहीं है, सूपड़ा साफ हो गया है इसलिए, भदोही में ये सपा वाले मैदान छोड़कर के ही भाग गए। साथियों, भदोही में सपा, कांग्रेस के लिए जमानत बचाना भी मुश्किल हो गया इसलिए ये भदोही में सियासी प्रयोग कर रहे हैं। आप जानते हैं, इनका ये प्रयोग क्या है? ये यूपी में बंगाल की TMC राजनीति का ट्रायल करना चाहते हैं। आप जानते हैं TMC बंगाल में कैसी राजनीति करती है? न्यूज़ में, टीवी पर आपने जरूर देखा होगा, TMC राजनीति यानी तुष्टीकरण का जहरीला तीर, TMC राजनीति यानी राम मंदिर को अपवित्र बताना। TMC राजनीति यानी रामनवमी मनाने पर प्रतिबंध लगाना। TMC राजनीति यानी बांग्लादेशी घुसपैठियों को संरक्षण देना। TMC राजनीति यानी राजनीति की मुख्यधारा, वोट जिहाद के अलावा कुछ नहीं। TMC राजनीति यानी हिंदुओं की हत्या, दलितों- आदिवासियों का उत्पीड़न। TMC राजनीति यानी महिलाओं पर अत्याचार, मनीष शुक्ला जैसे कितने बीजेपी नेताओं की वहां हत्या हो गई और वहां TMC के विधायक आपको पता है क्या-क्या बोलते हैं? TMC के विधायक कहते हैं कि हिंदुओं को गंगा में डुबोकर मार देंगे।

साथियों,

समाजवादी पार्टी यूपी को इसी दिशा में लेकर जाना चाहती है। आप याद करिए, सपा सरकार में यूपी का क्या हाल था? आतंकियों को स्पेशल प्रोटोकॉल मिलता था। सपा सरकार आतंकी संगठन सिमी पर मेहरबान थी, इन्होंने सिमी के सरगना को जेल से छोड़ दिया था। बाद में यूपी में कई जगह बम धमाके हुए थे, लोगों की जान गई थी और ये बुआ- बबुआ का गठबंधन, वो जो पहले बुआ थी ना वो तो सपा वालों को पहचान गई बराबर, वो पहले वाली बुआ ने तो सपा वालों को छोड़ दिया अब ये बंगाल से बुआ लाये हैं और ये बुआ- बबुआ का खेल और इसलिए आपको इनसे सैकड़ों मिल दूर रहना ही अच्छा है।

भाइयों- बहनों,

मैं आज बबुआ से, समाजवादी शहजादे से एक सवाल करना चाहता हूं। बुआ तो आपकी इतनी करीबी हैं। बंगाल से यहां तक आपके पास आई है कभी आपने अपनी नई बुआ को पूछा कि वो बंगाल में यूपी- बिहार वालों को बाहरी क्यों कहती है? हमारा देश एक है, हम सभी भारतीय हैं, हम भारत माता की संतान हैं, फिर बंगाल में जाने वाले यूपी के लोगों को TMC गाली क्यों देती है? जरा बबुआ अपनी बुआ से जरा पूछ तो लो और गाली देने के बाद यहां यूपी में आकर यूपी से ही वोट भी मांगती है। यूपी के लोगों को TMC- सपा ने क्या समझ रखा है? साथियों, TMC- सपा की वो कौनसी चीज है जो इनको जोड़ती है, उनको जोड़ने वाली एक ही चीज है वो है तुष्टिकरण। तुष्टीकरण के ये ठेकेदार भारत की पहचान बदलना चाहते हैं। ये वही लोग हैं, जो कोर्ट में भगवान राम को काल्पनिक बताते थे। इनके समय में अयोध्या की सड़कों और घाटों की क्या दशा हुआ करती थी? बनारस में घाटों और गलियों की क्या दशा होती थी? मुझे बताइये ये दुर्दशा देखकर के आपको पीड़ा होती थी कि नहीं होती थी? जरा पूरी ताकत से बताइये आपको पीड़ा होती थी कि नहीं होती थी? क्या सपा वाले, कांग्रेस वाले, टीएमसी वाले क्या कभी भी मंदिर बनने देते क्या? मंदिर बनने देते क्या? आज भव्य राम मंदिर हमारी आंखों के सामने है, जय श्री राम.. जय श्री राम। आपको अब रामलला जी टेंट से निकलकर के भव्य मंदिर में गए आपको गर्व होता है कि नहीं होता है? रामलला जब टेंट में थे हम सबको पीड़ा होती थी कि नहीं होती थी? रामलला भव्य राम मंदिर में विराजित हो चुके हैं? लेकिन ये लोग अभी तक इसे स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं। सपा के नेता कह रहे हैं कि राम मंदिर बेकार है। कांग्रेस के शहजादे कोर्ट के फैसले को बदलकर राम मंदिर पर ताला डालना चाहते हैं और रामलला को फिर से टेंट में जीने के लिए मजबूर करना चाहते हैं। आप इनके ये मंसूबे कामयाब होने देंगे क्या? उन्हें जवाब मिलेगा कि नहीं मिलेगा? भाइयों- बहनों, ये बीजेपी ही है जो अयोध्या में भव्य राम मंदिर पर गर्व करती है। ये बीजेपी ही है, जिसने बनारस में बाबा का धाम संवारा है और ये बीजेपी ही है, जो मां विंध्यवासिनी का धाम भी बनवा रही है। मां विंध्यवासिनी के आशीर्वाद से ये अभियान रुकने वाला नहीं है।

साथियों,

बीजेपी ने दिन-रात मेहनत करके यूपी की छवि बदली है। आज यूपी की पहचान एक्सप्रेस-वे से हो रही है। यूपी में 6 एक्सप्रेस-वे हैं। 5 नए और एक्सप्रेस-वे बन रहे हैं। यहां भदोही में ही आप देखिए बनारस से हंडिया तक सिक्स लेन बन चुका है। भदोही रिंग रोड फेज-2 का काम भी हो रहा है। मछलीशहर से बनारस तक नेशनल हाईवे का काम हो रहा है। 2017 तक यूपी में केवल 7 एयरपोर्ट थे। आज यूपी में 17 एयरपोर्ट हैं.. 17, और 3 एयरपोर्ट और बन रहे हैं। बनारस से देश- विदेश के लिए इतनी फ्लाइट उड़ने लगी है। हमारे भदोही में रेलवे लाइंस भी अब डबल हो गईं हैं। साथियों, भदोही और इस पूरे क्षेत्र ने पहली बार चारों तरफ विकास देखा है। विकास के इन कामों का फायदा यहां के किसानों को मिलेगा। इसका फायदा भदोही के कालीन उद्योग को मिलेगा। आपको पता होगा और गर्व भी होगा कि हमने जो नया संसद का भवन बनाया है ना, शानदार भवन बना है, वहां भी ये हमारे भदोही की कालीन लगी है। भदोही की कालीन को वन डिस्ट्रिक्ट, वन प्रॉडक्ट ओडीओपी वाली लिस्ट में ऊपर रखा गया है।

भाइयों- बहनों,

बीजेपी सरकार में वन डिस्ट्रिक्ट, वन प्रॉडक्ट योजना बहुत तेज गति से आगे बढ़ रही है। (आपका उत्साह पूरा हो जाए उसके बाद मैं बोलूंगा। साथियों, मैं सच में कहता हूं जब रात को बिस्तर पर जाता हूं ना तो मुझे दिनभर आप लोगों के चेहरे याद आते हैं, जो दिनभर मैंने देखा है वो रात में एक के बाद एक घटना मेरे सामने और मैं देखता हूं कितना प्यार, कितने आशीर्वाद बाल, वृद्ध सभी बच्चे, बूढ़े, मातायें, बहनें, भाइयों- बहनों, ये ईश्वर कृपा के बिना संभव नहीं है इतना प्यार, इतने आशीर्वाद मां विंध्यवासिनी की कृपा के बिना कैसे हो सकता है भाई) तो भाइयों, तो मैं कह रहा था कि हम वोकल फोर लोकल, वन डिस्ट्रिक्ट- वन प्रॉडक्ट उसपर जी- जान से जुटे हैं। सपा सरकार में क्या था, सपा सरकार में वन डिस्ट्रिक्ट, वन माफिया। हर डिस्ट्रिक्ट का अलग माफिया, हर डिस्ट्रिक्ट में अलग माफिया का साम्राज्य, हर जिले इन लोगों ने एक-एक माफिया को ठेके पर देकर रखा था। यहां व्यापारी सुरक्षित नहीं था, बहन- बेटियां सुरक्षित नहीं थीं। युवाओं का कोई भविष्य नहीं होता था लेकिन जब से योगी जी आए हैं और ये सब उनके साथ ही सरकार में हैं, पूरा माहौल बदल गया है अब जनता नहीं डरती माफिया डरते हैं।

साथियों,

सपा कांग्रेस जात-पात के नाम पर गांव, गरीब, मजदूर, किसान का वोट लूट लेते थे। फायदा किसको होता था? ये जो वोट उठाकर के ले जाते थे ना मुट्ठी भर उन परिवारों को फायदा होता था। उनकी कोठियां बन गईं और बड़े-बड़े महल बन गए। उन्होंने किसी गरीब का मकान कभी नहीं बनाया, कभी किसान को कोई फायदा नहीं मिला, हमारी माताओं- बहनों की चिंता पहले किसी सरकार ने की है क्या? गरीब की चिंता, गरीब का बेटा जब प्रधान सेवक बना मेरे लिए सबसे बड़ा काम है, गरीब को गरीबी से बाहर निकालना।

भाइयों- बहनों,

मैं मां विंध्यवासिनी के चरणों में खड़ा हूं और मां विंध्यवासिनी की भूमि है, पवित्र भूमि है और उस पवित्र भूमि से कह रहा हूं ये मोदी है जिसने अभी भी खुद का कोई घर नहीं बनाया है, खुद की रहने की अपनी कोई जगह नहीं है। चार दीवारें भी मेरे नाम पर नहीं है, मेरे पास नहीं है, मैंने अपना घर तो नहीं बनाया लेकिन गरीब मां का बेटा हूं ना मैंने 4 करोड़ गरीब परिवारों के लिए घर बनायें हैं। मोदी ने देश में 14 करोड़ घरों तक पाइप से पानी पहुंचाया है और जब मैंने पाइप से पानी पहुंचाया ना मतलब वो एक सिर्फ पाइप नहीं है मैंने उन माताओं- बहनों की पीढ़ियों की मुसीबतों को खत्म किया है तब जाकर के मातायें- बहनें आशीर्वाद देती हैं। यूपी के सवा दो परिवारों को इसका लाभ मिला है, हमने हमारी माताओं- बहनों के लिए शौचालय बनवायें और यूपी ने तो मुझे बताया कि मोदी जी हमारे लिए शौचालय नहीं हमारे लिए तो इज्जत घर है और बाद में तो मैं देशभर में कहने लगा कि इज्जत घर कहते हैं हमारे यूपी के लोग। मैं उनकी तकलीफ जानता था उन्हें धुएं से आजाद करने के लिए मुफ्त गैस सिलेंडर दिए, आज 80 करोड़ लोगों को मुफ्त राशन मिल रहा है।

भाइयों- बहनों,

ये हमारे किसान मोदी के आने के बाद अनाज पैदा करने लगे क्या? मोदी के आने पहले भी तो धान पैदा करते थे ना, अनाज पैदा करते थे ना, ये सोनिया जी की एक रिमोट वाली सरकार चलती थी मेरे आने के पहले उनको पूछा सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि गरीबों को अनाज दे दो मुफ्त में उस समय के प्रधानमंत्री ने कहा नहीं हम गरीबों को एक रत्ती भर भी अनाज नहीं दे सकते, हम इतना बोझ नहीं वहन कर सकते हैं वो गरीबी क्या जाने ये जब आपका बेटा, आपका सेवक जो गरीबी को जी कर आया था बैठा ना 80 करोड़ लोगों को मुफ्त राशन पहुंच रहा है क्योंकि मेरे मन में एक ही भाव है कि गरीब का चूल्हा जलता रहना चाहिए, गरीब का बच्चा भूखा नहीं रहना चाहिए और मैं गारंटी देता हूं आने वाले पांच साल भी ये मुफ्त राशन मिलता रहेगा। यूपी में ढाई करोड़ से ज्यादा किसानों को किसान सम्मान निधि के 70 हजार करोड़ रुपये मिल चुके हैं, 70 हजार करोड़ रुपये मोदी के काम क्या हैं ये आप सब जानते हैं, जानते हैं ना? और इसलिए मैं काम गिनाने नहीं आया हूं अगले पांच वर्षों में और क्या होगा उसकी मैं आपको गारंटी देने आया हूं। अगले पांच वर्षों में इन योजनाओं से एक भी गरीब छूटेगा नहीं और आप मेरा एक काम करेंगे, क्यों चुप हो गए अभी तो बहुत नारेबाजी कर रहे थे, मेरा एक काम करेंगे जरा हाथ ऊपर करके बताइए.. करेंगे, अभी आप गांव- गांव जाते होंगे, अलग- अलग मोहल्ले में जाते होंगे, दूर- दूर इलाकों में जाते होंगे कहीं पर भी ऐसे परिवार आपकी नजर में आये जो अभी कच्चे घर में रहते हैं, झोपड़ी में रहते हैं कोई परिवार ध्यान में आये जिसको नल से जल योजना का लाभ नहीं मिला है तो आप उनके नाम-पता लिखकर के मुझे भेज देना और उनको बता देना, उनको बता देना कि मोदी जी ने हमको भेजा है जब 4 जून के बाद मोदी जी नई सरकार बनायेंगे उसके बाद जो घर बनेंगे आपका घर पक्का है उसमें बता देना। ये मोदी की गारंटी है बता देना और मेरे लिए तो आप सब मेरे मोदी हैं, आप ही मोदी हैं।

साथियों,

मैं जब आपको इतना तवज्जो दे रहा हूं तो इसके पीछे मैं अपनी ताकत लगा दूंगा। तीन करोड़ नये घर बनाऊंगा, तीन करोड़ कोई रह ना जाये। भाइयों- बहनों, मेरी एक और बड़ी इच्छा है और मैं इसके पीछे लग गया हूं, मेरी इच्छा है जो सामान्य जीवन जीने वाली हमारी मातायें- बहनें हैं ऐसी तीन करोड़ बहनों को, तीन करोड़ बहनों को मैं मैं लखपति दीदी बनाऊंगा।

भाइयों- बहनों,

मैं आपकी भी एक चिंता कम करना चाहता हूं.. बताऊं, आपकी एक चिंता कम करना चाहता हूं.. बताऊं, आपकी इच्छा हो तो करूं नहीं तो नहीं, बताऊं। देखिए आजकल हर परिवार में बुजुर्ग माता-पिता होते हैं या दादा- दादी होते हैं या चाचा- चाची होते हैं या नाना- नानी होते हैं हर परिवार में 70 से ऊपर की आयु का कोई ना कोई तो बुजुर्ग होते ही होते हैं अब जो बेटा कमाता है या जो बेटी कमाती है उसको अपने मां-बाप की तो चिंता करनी होती जो बुजुर्ग है और अपने बच्चों की भी चिंता करनी होती है और उसमें भी बुजुर्ग को 70 साल के बाद छोटी- मोटी बीमारी तो आ ही जाती है लेकिन मानो कोई बड़ी बीमारी आ गई तो तो वो बेटे- बेटी जो कितनी मेहनत करें ना बच्चे संभाल पाते हैं, ना माता-पिता की सेवा कर पाते हैं तो मैंने एक काम तय किया है आप का बोझ कम करना जो बेटे- बेटी कमाते हैं और जिनके घर में 70 से ऊपर की आयु के लोग हैं आपकी चिंता मुक्त करने के लिए मैंने तय किया है कि आपके परिवार में कोई भी आपके इलाके का कोई भी जो भी 70 साल के ऊपर का होगा अगर वो बीमारी में है तो अब उनके बेटे- बेटी को इलाज का खर्चा नहीं करना पड़ेगा, वो आपका बेटा मोदी करेगा। आपके माता-पिता की सेवा वैसे ही मैं करूंगा जैसे आप करते हैं और ये मोदी की गारंटी है।

साथियों,

मोदी ये सब कैसे कर सकता है? मोदी ये सब कर सकता है आपके वोट की ताकत से, मोदी के साथ आपके वोट की मजबूती बनी हुई है। 25 मई को आपका वोट केवल मेरे अनन्य साथी डॉक्टर विनोद कुमार बिंद को और जब आप वोट देंगे ना विनोद जी को, तो वोट सिर्फ उनको नहीं जाएगा वो मेरे खाते में आ जाएगा तो विनोद जी को भारी मतों से जितायेंगे, विजयी बनाएंगे, एक कमल दिल्ली को भेजेंगे। अच्छा मेरा एक काम करोगे, जरा हाथ उपर के बताओ, करोगे सबके सब बताइये.. करोगे, अच्छा ऐसा करना यहां से जाने के बाद ज्यादा से ज्यादा घरों में जाना, ज्यादा से ज्यादा परिवारों में जाना और जाकर के कहना कि अपने मोदी जी आए थे, मोदी जी ने आपको प्रणाम भेजा है। मेरा प्रणाम पहुंचा देंगे, हर परिवार में मेरा प्रणाम पहुंचा देंगे, बोलिए, भारत माता की.. भारत माता की.. भारत माता की.. बहुत-बहुत धन्यवाद।

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February 27, 2026

इजराइल की हवा यहाँ भी पहुँच गई है।

नमस्कार!

नेटवर्क 18 के सभी पत्रकार, इस व्यवस्था को देखने वाले सभी साथी, यहां उपस्थित सभी महानुभाव, देवियों और सज्जनों!

आप सभी राइजिंग भारत की चर्चा कर रहे हैं। और इसमें strength within पर आपका जोर है, यानी साधारण शब्दों में कहूं, तो देश के अपने खुद के सामर्थ्य पर आपका फोकस है। और हमारे यहां तो शास्त्रों में कहा गया है - तत् त्वम असि! यानी जिस ब्रह्म की खोज मे हम निकले हैं, वो हम ही हैं, वो हमारे भीतर ही है। जो सामर्थ्य हमारे भीतर है उसे हमें पहचानना है। बीते 11 वर्षों में भारत ने अपना वही सामर्थ्य पहचाना है, और इस सामर्थ्य को सशक्त करने के लिए आज देश निरंतर प्रयास कर रहा है।

साथियों,

सामर्थ्य किसी देश में अचानक पैदा नहीं होता, सामर्थ्य पीढ़ियों में बनता है। वो ज्ञान से, परंपरा से, परिश्रम से और अनुभव से निखरता है, लेकिन इतिहास के एक लंबे कालखंड में, गुलामी की इतनी शताब्दियों में, हमारे सामर्थ्यवान होने की भावना को ही हीनता से भर दिया गया था। दूसरे देशों से आयातित विचारधारा ने समाज में कूट-कूट कर ये भर दिया था, कि हम अशिक्षित हैं और अनुगामी यानी, फॉलोअर हैं, हमारे यहां ये भी कहा गया है – यादृशी भावना यस्य, सिद्धिर्भवति तादृशी। यानी जैसी जिसकी भावना होती है, उसे वैसी ही सिद्धि प्राप्त होती है। जब भावना में ही हीनता थी, तो सिद्धि भी वैसी ही मिल रही है। हम विदेशी तकनीक की नकल करते थे, विदेशी मुहर का इंतजार करते थे, ये वो गुलामी थी जो राजनीतिक और भौगोलिक से ज्यादा मानसिक गुलामी थी। दुर्भाग्य से आजादी के बाद भी, भारत गुलामी की मानसिकता से बाहर नहीं निकल पाया। और इसका नुकसान हम आज तक उठा रहे हैं। इसका ताजा उदाहरण, हम ट्रेड डील्स में हो रही चर्चा में देख रहे हैं। कुछ लोग चौंक गए हैं कि अरे ये क्या हो गया, कैसे हो गया, विकसित देश भारत से ट्रेड डील्स करने में इतने उत्सुक क्यों हैं। इसका उत्तर है हताशा, निराशा से बाहर निकल रहा आत्मविश्वासी भारत। अगर देश आज भी 2014 से पहले वाली निराशा में होता, फ्रेजाइल फाइव में गिना जाता, पॉलिसी पैरालिसिस से घिरा होता, अगर ये हाल होते तो कौन हमारे साथ ट्रेड डील्स करता, अरे हमारी तरफ देखता भी नहीं।

लेकिन साथियों,

बीते 11 वर्षों में देश की चेतना में नई ऊर्जा का प्रवाह हुआ है। भारत अब अपने खोये हुए सामर्थ्य को वापस पाने का प्रयास कर रहा है। एक समय में जब भारत का वैश्विक अर्थव्यवस्था में सबसे ज्यादा दबदबा था, तो हमारा क्या सामर्थ्य था? भारत की मैन्युफैक्चरिंग, भारत के प्रोडक्टस की क्वालिटी, भारत की अर्थ नीति, अब आज का भारत फिर से इन बातों पर फोकस कर रहा है। इसलिए हमने मैन्युफैक्चरिंग पर काम किया, हमने मेक इन इंडिया पर बल दिया, हमने अपनी बैंकिंग सिस्टम को सशक्त किया, महंगाई जो डबल डिजिट की दर से भाग रही थी, उसका कंट्रोल किया और भारत को दुनिया का ग्रोथ इंजन बनाया। भारत का यही सामर्थ्य है कि दुनिया के विकसित देश सामने से भारत के साथ ट्रेड डील करने के लिए खुद आगे आ रहे हैं।

साथियों,

जब किसी राष्ट्र के भीतर, छिपी हुई उसकी शक्ति जागती है, तो वह नई उपलब्धियां हासिल करता है। मैं आपको कुछ और उदाहरण देता हूं। जैसे मैं जब कभी दूसरी देशों के हेड ऑफ द गर्वमेंट से मिलता हूं, तो वो जनधन, आधार और मोबाइल की इतनी शक्ति के बारे में सुनने के लिए बहुत उत्सुक होते हैं। जिस भारत में एटीएम भी, दुनिया की विकसित देशों की तुलना में काफी समय बाद आया, उस भारत ने डिजिटल पेमेंट सिस्टम में ग्लोबल लीडरशिप कैसे हासिल कर ली? जहां पर सरकारी मदद की लीकेज को कड़वा सच मान लिया गया था, वो भारत डीबीटी के जरिये 24 लाख करोड़ रूपये, यानी Twenty four trillion रुपीज कैसे लाभार्थियों को भेज पा रहा है? भारत का डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, आज पूरे विश्व के लिए चर्चा का विषय बन चुका है।

साथियों,

दुनिया हैरान होती है, कि जिस भारत में 2014 तक, करीब तीन करोड़ परिवार अंधेरे में थे, वो आज सोलर पावर कैपेसिटी में दुनिया के टॉप के देशों में कैसे आ गया? जिस भारत के शहरों में पब्लिक ट्रांसपोर्ट सुधरने की कोई उम्मीद ना थी, वो भारत आज दुनिया का तीसरा बड़ा मेट्रो नेटवर्क वाला देश कैसे बन गया? जिस भारत के रेलवे की पहचान सिर्फ लेट-लतीफी और धीमी-रफ्तार से होती थी, वहां वंदे भारत, नमो भारत, ऐसी सेमी-हाईस्पीड कनेक्टिविटी कैसे संभव हो पा रही है?

साथियों,

एक समय था, जब भारत नई टेक्नोलॉजी का सिर्फ और सिर्फ कंज्यूमर था। आज भारत नई टेक्नोलॉजी का निर्माता भी है और नए मानक भी स्थापित कर रहा है। और ऐसा इसलिए हुआ है क्योंकि हमने अपने सामर्थ्य को पहचाना है, जिस Strength Within की आप चर्चा कर रहे हैं, ये उसका ही उदाहरण है।

साथियों,

जब हम गर्व से आगे बढ़ते हैं, तो दुनिया हमें जिस नजर से देखती रही है, वो नजर भी बदली है। आप याद कीजिए, कुछ साल पहले तक दुनिया में, ग्लोबल मीडिया में, भारत के किसी इवेंट की कितनी कम चर्चा होती थी। भारत में होने वाले इवेंट्स को उतनी तवज्जो ही नहीं दी जाती थी। और आज देखिए, भारत जो करता है, जो एक्शन यहां होते हैं, उसका वैश्विक विश्लेषण होता है। AI समिट का उदाहरण आपके सामने है, इसी भवन में हुआ है। AI समिट में 100 से ज्यादा देश शामिल हुए, ग्लोबल नॉर्थ हो या फिर ग्लोबल साउथ, सभी एक साथ, एक ही जगह, एक टेबल पर बैठे। दुनिया के बड़े-बड़े कॉर्पोरेशन्स हों या फिर छोटे-छोटे स्टार्ट अप्स, सभी एक साथ जुटे।

साथियों,

अब तक जितनी भी औद्योगिक क्रांतियां आई हैं, उनमें भारत और पूरा ग्लोबल साउथ सिर्फ फॉलोअर रहा है। लेकिन आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के इस युग में, भारत निर्णयों में सहभागी भी है और उन्हें शेप भी कर रहा है। आज हमारे पास खुद का AI स्टार्टअप इकोसिस्टम है, डेटा-सेंटर में निवेश करने की ताकत है और AI डेटा को स्टोर करने के लिए, प्रोसेस करने के लिए, जिस पावर की सबसे ज्यादा ज़रूरत है, उस पर भी भारत तेजी से काम कर रहा है। हमने न्यूक्लियर पावर सेक्टर में जो Reform किया है, वो भी भारत के AI इकोसिस्टम को मजबूती देने में मदद करेगा।

साथियों,

AI समिट का आयोजन पूरे भारत के लिए गौरव का पल था। लेकिन दुर्भाग्य से देश की सबसे पुरानी पार्टी ने, देश के इस उत्सव को मैला करने का प्रयास किया। विदेशी अतिथियों के सामने कांग्रेस ने सिर्फ कपड़े नहीं उतारे, बल्कि इसने कांग्रेस के वैचारिक दिवालिएपन को भी expose कर दिया है। जब नाकामी की निराशा-हताशा मन में हो, और अहंकार सिर चढ़कर बोलता हो, तब देश को बदनाम करने की ऐसी सोच सामने आती है। ज़ाहिर है, कांग्रेस की इस हरकत से देश में गुस्सा है। इसलिए, इन्होंने अपने पाप को सही ठहराने के लिए महात्मा गांधी जी को आगे कर दिया। कांग्रेस हर बार ऐसा ही करती है। जब अपने पाप को छुपाना हो तो कांग्रेस बापू को आगे कर देती है, और जब अपना गौरवगान करना हो, तो एक ही परिवार को सारा क्रेडिट देती है।

साथियों,

कांग्रेस अब विचारधारा के नाम पर केवल विरोध की टूलकिट बनकर रह गई है। और ये अंध-विरोध की मानसिकता इतनी बढ़ गई है, कि ये देश को हर मंच, हर प्लेटफॉर्म पर नीचा दिखाने से नहीं चूकते। देश कुछ भी अच्छा करे, देश के लिए कुछ भी शुभ हो रहा हो, कांग्रेस को विरोध ही करना है।

साथियों,

मेरे पास एक लंबी सूची है, देश की संसद की नई इमारत बनी, उसका विरोध। संसद के ऊपर अशोक स्तंभ के शेरों का विरोध। अब जिनके बब्बर शेर सामान्य नागरिकों के जूते खाकर के भाग रहे थे, उनके संसद भवन के शेर के दांत देखकर के डर लग गया उनको। कर्तव्य भवन बना, उसका भी विरोध। सेनाओं ने सर्जिकल स्ट्राइक की, उसका भी विरोध। बालाकोट में एयर स्ट्राइक हुई, उसका भी विरोध। ऑपरेशन सिंदूर हुआ, उसका भी विरोध। यानी देश की हर उपलब्धि पर कांग्रेस के टूलकिट से एक ही चीज निकलती है- विरोध।

साथियों,

देश ने आर्टिकल 370 की दीवार गिराई, देश खुश हुआ। लेकिन कांग्रेस ने विरोध किया। हमने CAA का कानून बनाया- उसका विरोध। हम महिला आरक्षण कानून लाए- उसका विरोध। तीन तलाक के विरुद्ध कानून लाए- उसका विरोध। हम UPI लेकर आए, उसका विरोध। स्वच्छ भारत अभियान लेकर आए, उसका विरोध। देश ने कोरोना वैक्सीन बनाई, तो उसका भी विरोध।

साथियों,

लोकतंत्र में विपक्ष का मतलब सिर्फ अंध-विरोध नहीं होता, डेमोक्रेसी में विपक्ष का मतलब वैकल्पिक विजन होता है। इसलिए देश की प्रबुद्ध जनता, कांग्रेस को सबक सिखा रही है, आज से नहीं, बीते चार दशकों से लगातार ये काम देश की जनता कर रही है। मैं जो कहने जा रहा हूं, मीडिया के साथी उसका भी ज़रा एनालिसिस करिएगा। आपको पता लगेगा कि कांग्रेस के वोट चोरी नहीं हो रहे, बल्कि देश के लोग अब कांग्रेस को वोट देने लायक ही नहीं मानते। और इसकी शुरुआत 1984 के बाद ही होनी शुरू हो गई थी। 1984 में कांग्रेस को 39 परसेंट वोट मिले थे, और 400 से अधिक सीटें मिली थीं। इसके बाद हुए चुनावों में कांग्रेस के वोट कम ही होते चले गए। और आज कांग्रेस की हालत ये है कि, देश में सिर्फ, सिर्फ चार राज्य ऐसे बचे हैं, जहां कांग्रेस के पास 50 से ज्यादा विधायक हैं। बीते 40 वर्षों में युवा वोटर्स की संख्या बढ़ती गई और कांग्रेस साफ होती गई। कांग्रेस, परिवार की गुलामी में डूबे लोगों का एक क्लब बनकर रह गई है। इसलिए पहले मिलेनियल्स ने कांग्रेस को सबक सिखाया, और अब जेन जी भी तैयार बैठी है।

साथियों,

कांग्रेस और उसके साथियों की सोच इतनी छोटी है, कि उन्होंने दूरदृष्टि से काम करने को भी गुनाह बना दिया है। आज जब हम विकसित भारत 2047 की बात करते हैं, तो कुछ लोग पूछते हैं— “इतनी दूर की बात अभी क्यों कर रहे हो?” कुछ लोग ये भी कहते हैं कि तब तक मोदी जिंदा थोड़ी रहेगा, सच्चाई यह है कि राष्ट्र निर्माण कभी भी तात्कालिक सोच से नहीं होता। वो एक बड़े विजन, धैर्य और समय पर लिए गए निर्णयों से होता है। मैं कुछ और तथ्य नेटवर्क 18 के दर्शकों के सामने रखना चाहता हूं। भारत हर साल विदेशी समुद्री जहाजों से मालढुलाई पर 6 लाख करोड़ रुपये से अधिक खर्च करता है किराए पर। फर्टिलाइजर के आयात पर हर साल सवा दो लाख करोड़ रुपये खर्च होते हैं। पेट्रोलियम आयात पर हर साल 11 लाख करोड़ रुपये खर्च होते हैं। यानी हर वर्ष लाखों करोड़ रुपये देश से बाहर जा रहे हैं। अगर यही निवेश 20–25 वर्ष पहले आत्मनिर्भरता की दिशा में किया गया होता, तो आज ये पूंजी भारत के इंफ्रास्ट्रचर, रिसर्च, इंडस्ट्री, किसान और युवाओं की क्षमताओं को मजबूत कर रही होती। आज हमारी सरकार इसी सोच के साथ काम कर रही है। विदेशी जहाजों को 6 लाख करोड़ रुपए ना देना पड़े इसलिए भारतीय शिपिंग और पोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत किया जा रहा है। फर्टिलाइजर का domestic प्रोडक्शन बढ़ाने के लिए नए प्लांट लग रहे हैं, नैनो-यूरिया को बढ़ावा दिया जा रहा है। पेट्रोलियम पर निर्भरता कम करने के लिए एथेनॉल ब्लेंडिंग, ग्रीन हाइड्रोजन मिशन, सोलर और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को प्राथमिकता दी जा रही है।

और साथियों,

हमें भविष्य की ओर देखते हुए भी आज ही निर्णय लेने हैं। इसलिए आज भारत में सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम का निर्माण हो रहा है। रक्षा उत्पादन में, मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग में, ड्रोन टेक्नोलॉजी में, क्रिटिकल मिनरल्स सेक्टर में, और उसमें निवेश, आने वाले दशकों की आर्थिक सुरक्षा की नींव है। 2047 का लक्ष्य कोई राजनीतिक नारा नहीं है। यह उस ऐतिहासिक भूल को सुधारने का संकल्प भी है, जहाँ कांग्रेस की सरकारों के समय कई क्षेत्रों में समय रहते निवेश नहीं किया। आज अगर हम ख़ुद स्वदेशी जहाज, स्वदेशी शिप्स बनाएँगे, ख़ुद एनर्जी का प्रोडक्शन करेंगे, ख़ुद नई टेक्नोलॉजी डेवलप करेंगे, तो आने वाली पढ़ियाँ इम्पोर्ट के बोझ की नहीं, एक्सपोर्ट की क्षमता पर चर्चा करेंगी। राष्ट्र की प्रगति “आज की सुविधा” से नहीं, “कल की तैयारी” से तय होती है। और दूरदृष्टि से की गई मेहनत ही 2047 के आत्मनिर्भर, सशक्त और समृद्ध भारत की आधारशिला है। और इसके लिए कांग्रेस अपने कितने ही कपड़े फाड़ ले, हम निरंतर काम करते रहेंगे।

साथियों,

राष्ट्र निर्माण की, Nation Building की एक बहुत अहम शर्त होती है- नेक नीयत की। कांग्रेस और उसके साथी दल, इसमें भी फेल रहे हैं। कांग्रेस और उसके साथियों ने कभी नेक नीयत के साथ काम नहीं किया। गरीब का दुख, उसकी तकलीफ से भी इन्हें कोई वास्ता नहीं है। जैसे बंगाल में आज तक आयुष्मान भारत योजना लागू नहीं हुई। अगर नेक नीयत होती तो क्या गरीबों को 5 लाख रुपए तक मुफ्त इलाज देने वाली इस योजना को बंगाल में रोका जाता क्या? नहीं। आप भी जानते हैं कि देश में पीएम आवास योजना के तहत गरीबों के लिए पक्के घर बनवाए जा रहे हैं। नेटवर्क 18 के दर्शकों को मैं एक और आंकड़ा देता हूं। तमिलनाडु के गरीब परिवारों के लिए, करीब साढ़े नौ लाख पक्के घर एलोकेट किए गए हैं, साढ़े नौ लाख। लेकिन इनमें से तीन लाख घरों का निर्माण अटक गया है, क्यों, क्योंकि DMK सरकार गरीबों के इन घरों के निर्माण में दिलचस्पी नहीं दिखा रही। इसकी वजह क्या है? इसकी वजह है, नीयत नेक नहीं है।

साथियों,

मैं आपको एग्रीकल्चर सेक्टर का भी उदाहरण देता हूं। कांग्रेस के समय में खेती-किसानी को अपने हाल पर छोड़ दिया गया था। छोटे किसानों को कोई पूछता नहीं था, फसल बीमा का हाल बेहाल था, MSP पर स्वामीनाथन कमेटी की रिपोर्ट फाइलों में दबा दी गई थी, कांग्रेस बजट में घोषणाएं जरूर करती थी, लेकिन ज़मीन पर कुछ नहीं होता था, क्योंकि उसकी नीयत ही नहीं थी। हमने देश के किसानों के लिए नेक नीयत के साथ काम करना शुरू किया, और आज उसके परिणाम दुनिया देख रही है। आज भारत दुनिया के बड़े एग्रीकल्चर एक्सपोर्टर्स में से एक बन रहा है। हमने हर स्तर पर किसानों के लिए एक सुरक्षा कवच बनाया है। पीएम किसान सम्मान निधि के माध्यम से किसानों के खाते में चार लाख करोड़ रुपए से अधिक जमा किए गए हैं। हमने लागत का डेढ़ गुणा MSP तय किया और रिकॉर्ड खरीद भी की है। मैं आपको सिर्फ दाल का ही आंकड़ा देता हूं। UPA सरकार ने 10 साल में सिर्फ 6 लाख मीट्रिक टन दाल, किसानों से MSP पर खरीदी- 6 लाख मीट्रिक टन। और हमारी सरकार अभी तक, करीब 170 लाख मीट्रिक टन, यानी लगभग 30 गुणा अधिक दाल MSP पर खरीद चुकी है। अब आप तय करिये, कौन किसानों के लिए काम करता है।

साथियों,

यूपीए सरकार किसान क्रेडिट कार्ड के जरिए भी किसानों को मदद देने में कंजूसी करती थी। अपने 10 साल में यूपीए सरकार ने सात लाख करोड़ रुपए का कृषि ऋण किसानों को दिया। 7 lakh crore rupees. जबकि हमारी सरकार इससे चार गुणा अधिक यानी 28 लाख करोड़ रुपए दे चुकी है। यूपीए सरकार के दौरान जहां सिर्फ पांच करोड़ किसानों को इसका लाभ मिलता था, आज ये संख्या दोगुने से भी अधिक करीब-करीब 12 करोड़ किसानों को पहुंची है। यानी देश के छोटे किसान को भी पहली बार मदद मिली है। हमारी सरकार ने पीएम फसल बीमा योजना का सुरक्षा कवच भी किसानों को दिया। इसके तहत करीब 2 लाख करोड़ रुपए किसानों को संकट के समय मिल चुके हैं। हम नेक नीयत से काम कर रहे हैं, इसलिए भारत के किसानों का आत्मविश्वास बढ़ रहा है, उनकी प्रोडक्टिविटी बढ़ रही है, और आय में भी वृद्धि हो रही है।

साथियों,

21वीं सदी का एक चौथाई हिस्सा बीत चुका है। अब अगला चरण भारत के विकास का निर्णायक दौर है। वर्तमान में लिए गए निर्णय ही भविष्य की दिशा तय करेंगे। हमें अपने सामर्थ्य को पहचानते हुए, उसे बढ़ाते हुए आगे चलना है। हर व्यक्ति अपने क्षेत्र में श्रेष्ठता को लक्ष्य बनाए, हर संस्था excellence को अपना संस्कार बनाए, हम सिर्फ उत्पाद न बनाएं, best-quality product बनाएं, हम सिर्फ रुटीन काम न करें, world-class काम करें, हम क्षमता को performance में बदलें। मैंने लाल किले से कहा है- यही समय है, सही समय है। यही समय है, भारत को नई ऊँचाइयों पर ले जाने का। एक बार फिर आप सभी को बहुत-बहुत शुभकामनाएं, बहुत-बहुत धन्यवाद। नमस्कार।