Text of PM's address at the Inauguration of Pravasi Bharatiya Divas

Published By : Admin | January 8, 2015 | 21:39 IST

विशाल संख्या में यहां पधारे हुए, विश्व के कोने-कोने से आए हुए, मेरे प्यारे भाइयों और बहनों,

100 वर्ष पहले, एक प्रवासी भारतीय भारत आए और आज 100 साल के बाद सभी प्रवासी भारतीयों का एक प्रवासी गुजराती स्वागत करता है। भारत के नागरिक विश्व के 200 से ज्यादा अधिक देशों में बसे हैं और मैं विश्वास से कह सकता हूं कि उन 200 देशों में सिर्फ कोई एक भारतीय मूल का व्यक्ति वहाँ बसा है ऐसा नहीं है, वहाँ एक प्रकार से पूरा भारत बसा हुआ है। आप सबके माध्यम से भारत वैश्विक बना हुआ है। 100-150 साल पूर्व, हमारे पूर्वजों ने, साहसिक पूर्वजों ने, विश्व में जहां-जहां संभावनाएं थीं, कुछ नया करने की उमंग थी, गुलाम हिन्दुस्तान में संभावनाएं नहीं थी, उन्होंने साहस जुटाया और साहस जुटाकर दुनिया के अनेक भू-भाग में पहुंचे। सामुद्रिक यात्रा रहती थी, कठिन यात्रा रहती थी, कभी-कभी लक्ष्य तक पहुंच भी नहीं पाते थे। लेकिन उनका प्रयास रहा... कि अंजान जगह पर जाना है और अपने कौशल के द्वारा, अपने सामर्थ्य के द्वारा, अपने संस्कारों के द्वारा वहां पर अपनी जगह बनाने का प्रयास।

कुछ कालखंड ऐसा भी आया कि आज भारत के शिक्षित लोग, Professionals, जीवन में और नई ऊंचाइयों को पाने के लिए, ज्ञान वृद्धि के लिए, Exposure के लिए, विश्व में गए, उन्होंने भारत की एक नई पहचान बनाई। लेकिन वो एक कालखंड था, जब आप अपना प्राण प्रिय देश छोड़कर के, अपने स्वजनों को छोड़कर के, यार-दोस्तों को छोड़कर के, दुनिया के किसी और छोर पर चले जाते थे। कभी साहसिक स्वभाव के कारण, तो कभी संभावनाओं को तलाशने के लिए, तो कभी अवसर खोजने के लिए। वो समय था जब शायद यह जरूरी था।

किंतु मैं आप सबका स्वागत करते हुए आपको विश्वास दिलाता हूं, जब हमारे पूर्वज गए थे- संभावनाओं को तलाशने के लिए। अब भारत की धरती पर संभावनाएं अब आपका इंतजार कर रही हैं। वक्त बहुत तेजी से बदल चुका है। भारत एक नए सामर्थ्य के साथ उठ खड़ा हुआ है। और विश्व, भारत के प्रति बहुत आशा भरी नजरों से देख रहा है। आज गयाना, साइथ अफ्रीका, मॉरिशस - विशेष मेहमान के रूप में हमारे बीच विराजमान हैं। मैं जब मुख्यमंत्री नहीं था, उसके पहले, मुझे इन सभी स्थानों पर जाने का अवसर मिला और गयाना के आदरणीय राष्ट्रपति जी अपनी पार्टी का और उनके Founder पूर्व राष्ट्रपति जी का उल्लेख कर रहे थे. उनके सुपुत्र भरत जगदेव जी जब राष्ट्रपति थे, तब मेरा काफी उनसे सतसंग हुआ था और गयाना के लोग किसी भी समाज के क्यों न हो, किसी भी भाषा को क्यों न बोलते हो, लेकिन जिस किसी को मिलो वे गयाना की आजादी में भारत की प्रेरणा का उल्लेख अवश्य करते हैं।

महात्मा गांधी 100 साल पहले South Africa से चले थे और मातृभूमि की सेवा का सपना लेकर भारत मां को गुलामी की जंजीरों से मुक्त कराने के लिए मानवतावाद में विश्वास लेकर इस धरती पर आए थे। वो निकले थे South Africa से और आए थे हिंदुस्तान। आज South Africa भी हमारे बीच मौजूद है, जहां से गांधी लौटे थे। और African Congress और African National Congress का जन्म 8 जनवरी को हुआ था। आज 8 जनवरी है। आज ही का दिवस और तब उस समय महात्मा गांधी ने दीर्घदृष्टि से उस समय गांधीजी ने African National Congress के जन्म के समय विश्व पर को जो संदेश दिया था, उस संदेश में एक विश्वास झलकता था। उन्होने कहा था कि ये नवजागरण का, प्रेरणा बिंदू बनकर रहेगा। यह बात, उस समय, महात्मा गांधी ने कही थी।

आज भी मॉरिशस में 2 अक्टूबर मनाई जाती है, कभी हमारे यहां नहीं मनाई जाती होगी, ऐसी दो अक्टूबर आज भी मॉरिशस में मनाई जाती है। और मुझे सबके साथ मॉरिशस में सबके साथ दो अक्टूबर मनाने के लिए जाने का अवसर मिला था। और आज भी उनका जैसा उनके यहां जैसे हमारे महात्मा मंदिर इस प्रकार के कार्यक्रमों का केंद्र बना है, उनके यहां भी महात्मा गांधी के नाम से गांधी सभा गृह उनका सबसे बड़ा केंद्र बिंदु है। यानी कि हम देख सकते हैं कि कितना अपनापन है। आज शायद दुनिया के 70-80 ज्यादा देश होंगे, जहां पर महात्मा गांधी की प्रतिमा लगी हुई है।

कुछ दिन पहले में ऑस्ट्रेलिया गया था, वहां भी मुझे सौभाग्य मिला महात्मा गांधी के प्रतिमा के अनावरण का। कहने का तात्पर्य यह है कि इस "विश्व मानव" की पहचान, इस "युग पुरुष" की पहचान, विश्व को जितनी ज्यादा होगी और समय रहते होगी, कभी-कभी उलझनों में घिरी इस दुनिया को वैचारिक स्वतंत्रता का संदेश देने की क्षमता आज भी गांधी रखते हैं। आज भी गांधी के विचार विश्व को, और खास करके मानवतावाद को केंद्र में रखकर समस्या का समाधान कैसे हो सकता है, विकास की राह कैसे सरल हो सकती है, आखिरी छोर पर बैठे व्यक्ति की जिंदगी में बदलाव कैसे आ सकता है - शायद गांधी से बढ़कर के चिंतन कहीं नहीं है।

और हम सबका गर्व है, हमारे लिए सौभाग्य की बात है कि महात्मा गांधी विदेश की उस सारी दुनिया को अलविदा करके हमारे गांव और गरीब लोगों के लिए खप गए थे। और तभी तो आज इतिहास हर पल उन्हें स्मरण कर रहा है।

हमारे देश के लोग जो बाहर गए – अगर आप गयाना जाएंगे, भाषा बोलना तो कठिन है हमारे लोगों को, लेकिन होली अगर आप देखोगे गयाना की, तो वैसी ही रंगों में रंग जाते हैं जैसे हिंदुस्तान की धरती पर हम रंग जाते हैं। जब दीवाली मनाते हैं तो आप को लगेगा कि क्या दीये जगमगाते हैं, ऐसा लगता है कि हिंदुस्तान में रहने वाले हिन्दुस्तानियों को गुयाना में जलता हुआ दीप हमें प्रेरणा देने की ताक़त रखता है। ये हमारे लोगों ने विरासतें खड़ी की हैं, एक ताक़त कड़ी की है. और इसी ताकत को एक सकारात्मक काम के लिए इस्तेमाल करना, इस सामर्थ्य को विश्व में सार्थक पहचान कराने का वक्त आ चुका है। अब हम बिखरे-बिखरे, एक अकेले, किसी देश के एक कोने में - भले ही एक हिंदुस्तानी वहां अकेला होगा, लेकिन उसके साथ पूरा हिंदुस्तान जिन्दा है।

एक नई ज़िम्मेदारी मिलने के बाद, मुझे विश्व के 50 से अधिक राष्ट्राध्यक्षों से मिलने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है, बातचीत करने का मौका मिला है और इतने कम समय में इतनी बड़ी मात्रा में, करीब-करीब विश्व के सभी देशों के अध्यक्षों से मिलना और उनके साथ जो बातचीत हुई, खुले मन से बात हुई है। उन बातों से लगता है, दुनिया का समृद्ध से समृद्ध देश हो तब भी और दुनिया का गरीब से गरीब देश हो तब भी.... हर किसी की नजर हिंदुस्तान पर है। हर एक को लगता है कि हम जहां जाना चाहते हैं, शायद भारत के साथ कदम मिलाकर के हम चल सकते हैं। हर कोई अपनी एकाध-एकाध चीज के साथ भारत को जोड़कर के देख रहा है। ऐेसे अवसर बहुत कम आते हैं। अब हम हिंदुस्तान के लोग जो विदेशों में बसे हुए हैं, ये उनका कर्तव्य बनता है कि वे इस अवसर को मानव जाति के कल्याण की दृष्टि से और भारत की उत्कर्षता की दृष्टि हम काम में कैसे लगाएं? और मैं मानता हूं आज हर भारतीय एक शक्ति के रूप में वहां विराजित है। वो अगर संगठित शक्ति बनती है, अगर वे अपने आप में एक Driving force बनती है, तो हम अनेक नए परिणामों को प्राप्त कर सकते हैं।

विश्व में भारतीयों के प्रति जो आदर है, जो लगाव है, उसका कारण वहां रहने वाले भारतीयों के पास विपुल मात्रा में कोई सपंदा है, वो नहीं है। जिन मूल्यों को लेकर के वो जी रहे हैं, जिन सांस्कृतिक विरासत का वो प्रतिनिधित्व कर रहा है। और इसका परिणाम है आज दुनिया में किसी भी देश में वहां के नागरिक को जब पता चले कि हमारे पड़ोस वाले घर में कोई भारतीय परिवार रहने के लिए आने वाला है, तो सबसे ज्यादा खुशी उसको होती है कि “वाह बहुत अच्छा हो गया, हमारे बगल में भारतीय पड़ोसी आ गया है। हमारे बच्चों के विकास में बहुत काम आएगा।“

क्यों? क्योंकि Family values उसमें अपने आप सीख जाएगा। दुनिया के किसी भी देश में भारतीय को ये अनुभव नहीं आता है। नहीं-नहीं भाई हमारे मौहल्ले में नहीं, हमारी गली में नहीं, हमारी सोसायटी में नहीं, ऐसा कभी अनुभव नहीं आता है। ये कौनसी ताकत है? ये अपनापन, लगाव, दुनिया हमें स्वागत करने के लिए बांह फैलाकर के खड़ी रहती है उसका कारण क्या है? ये हमारे मूल्य हैं, हमारी सांस्कृति है, ये हमारे संस्कार हैं, हमारी इस विरासत को हम जी रहे हैं, उसी की वजह तो हो रहा है। और इसलिए हमारी ये जो बदौलत है उस बदौलत को हम कैसे आगे लेकर के जाएं। उस दिशा में हमें प्रयास करना चाहिए।

कभी-कभार लोगों को लगता है कि भई अब हम बाहर रहते हैं, सालों से चले गए, हम क्या कर सकते हैं? मैं समझता हूं ऐसा सोचने की जरूरत नहीं है। कोई एक-दो महीने पहले की घटना है मुझे किसी ने अखबार की एक कटिंग भेजी थी, Xerox भेजी थी उसकी और बड़ा Interesting था। मैं नाम वगैरह तो भूल गया। सूरत जिले में कोई एक NRI अपने गांव आते थे, हर साल आते थे। जब अपने गांव आते थे 15 दिन, महीना-दो महीना जितना दिन भी रुकते थे। वे सुबह झाड़ू लेकर के गांव की सफाई किया करते थे, गांव की गलियों में जाते थे कूड़ा-कचरा साफ किया करते थे और गांव वाले उनकी बड़ी मजाक उड़ाते थे। उनको लगता था इसका Screw ढीला हो गया है। सबको उनके प्रति बड़ी विचित्रता का भाव रहता था। लेकिन इस बार जब वो आए उन्होंने तो ये काम जब शुरू किया, वो तो पहले भी करते थे। अपने गांव में निकल पड़े, आते ही दुसरे दिन सुबह jetlag कुछ नहीं, बस वो ही काम। इस बार उन्होंने देखा पूरा गांव उनके साथ जुड़ गया था। और वो खबर मुझे किसी ने एक Press cutting भेजा था।

एक प्रवासी भारतीय मैं 100 साल पहले गांधी को देखता हूं – दुनिया को कैसे खड़ा कर दिया था। और एक छोटा सा नागरिक जिसका नाम-पहचान कुछ नहीं है लेकिन Commitment के साथ उसने अपने गांव को कैसे बदल दिया। इसका उदाहरण ये कहता हूं मैं ये। ऐसे तो एक हैं, अनेकों होंगे, अनेकों होंगे। जिन्होंने अपनी शक्ति, बुद्धि, समझ को रहते मां भारती की सेवा को लगाने का प्रयास किया होगा। और ये ही तो है हमारी ताकत।

आप देखिए दुनिया भारत को कितना प्यार कर रही है उसका उदाहरण देखिए। मुझे पहली बार UN में जाने का अवसर मिला। वहां मुझे भारत की तरफ से बोलना था तो बोलते-बोलते मैंने एक बात कही कि United Nation अनेक अंतरराष्ट्रीय दिवस मनाता है। Children day मनाता है, Women day मनाता है, Non-violence day मनाता है। क्यों न विश्व Yoga day मनाएं? अंतरराष्ट्रीय योग दिवस कैसे मनें, ये मैंने वहां प्रस्ताव रखा और United Nation के इतिहास की एक अद्भुत घटना घटी। 193 Countries है UN के Member. Out of 193 Countries 177 Countries ने Co-sponsor के नाते उस प्रस्ताव का समर्थन किया। इतना ही नहीं इस प्रकार के प्रस्तावों में आज तक जितना समर्थन मिला है ये Record breaking है। किसी भी प्रस्ताव को कभी भी इतने सारे देशों ने समर्थन किया ऐसा कभी नहीं हुआ। 40 से अधिक मुस्लिम Countries ने समर्थन किया। सामान्य रूप से इस प्रकार का प्रस्ताव पारित होने में उसकी प्रक्रिया बड़ी विशेष होने के कारण करीब-करीब दो साल लग जाते हैं। इस प्रस्ताव को पारित होने में मुश्किल से 100 दिन लगे। मैं इस चीज को विस्तार से इसलिए कह रहा हूं कि विश्व भारत को किस प्रकार से गले लगाने को तैयार है, ये उसकी एक छोटी सी झलक है।

इससे हम अंदाजा कर सकते हैं कि दुनिया हमें स्वीकार करने के लिए सज्य बैठी है और विश्व हमें स्वीकार करने के लिए सज्य बना है तब ये हमारा दायित्व बनता है कि हम अपने आप को विश्व की अपेक्षा के अनुसार अधिक सजग करें, अधिक सामर्थ्यवान बनाएं। दुनिया को देने के लिए हमारे पास क्या नहीं है? अगर आवश्यकता है, तो हमारे भीतर एक विश्वास की आवश्यकता है, अपने पर भरोसे की आवश्यकता है, और आखिरकार महात्मा गांधी ने आजादी दिलाई तो इसी मंत्र से दिलाई थी कि उन्होंने हर हिंदुस्तानी के दिल में आजादी की आग भर दी थी, आत्मविश्वास भर दिया था और झाड़ू लगाए तो भी आजादी के लिए करता हूं, बच्चों को पढ़ाएं तो भी आजादी के लिेए करता हूं, खादी पहने तो भी आजादी के लिए कर रहा हूं, सेवा का कोई प्रकल्प करें तो भी मैं आजादी के लिए कर रहा हूं। ऐसा एक जनांदोलन खड़ा कर दिया था।

हम भी - इस मानवतावाद की आज सबसे बड़ी ज़रूरत है तब - इन्हीं आदर्शों को लेकर के विश्व के सामने भारत एक आशा की किरण लेकर के बैठा है तब - अपने आप को सज्य करने का प्रयास हमारे लिए बहुत बड़ी आवश्यकता है।

ये प्रवासी भारतीय दिवस, जब अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री थे, तब 2003 में प्रारंभ हुआ और निरंतर चल रहा है। लेकिन बीच में थोड़ा-थोड़ा, आप लोगों का आने का मन नहीं करता था, बहुत कम लोग आते थे, कुछ लोग इसलिए आते थे कि आना पड़ता था। कुछ लोग इसलिए आते थे कि आए बिना रह नहीं सकते थे। लेकिन मैं हर बार आता था। और शायद केरल में जब हुआ था एक बार, तब मैं रूबरू तो नहीं जा पाया था तब मैंने Video Conferencing से प्रवासी भारतीय दिवस में हिस्सा लिया था। मैं समय इसलिए देता था, मैं जाने के लिए इसलिए उत्सुक रहता था, कि मैं Conviction से मानता हूं कि विश्व भर में फैला हुआ जो हिंदुस्तानी नागरिक है, वो आज के वैश्विक परिवेश में भारत की बहुत बड़ी ताकत है, भारत की पूंजी है। और इस पर हम जितना ध्यान देंगे, हम आसानी से विश्व फलक पर अपनी जगह बना सकते हैं।

और इसलिए, जिस प्रकार से विश्व में रहने वाले भारतीयों के साथ भारत का नाता महत्वपूर्ण है, उतना ही भारत के लिए, विश्व में रहने वाले भारतीयों के प्रति, नाभि का नाता उतना ही जरूरी है। ये one way नहीं है। ये दो तरफा है। और इस दो तरफा को बल देने का हमारा प्रयास है।

विश्व में रहने वाला हमारा हिंदुस्तानी, एक बात मैंने बराबर देखी है कि भारत में अगर कोई भी पीड़ादायक घटना हुई हो, कोई हादसा हुआ हो - हो सकता हो सालों से हिंदुस्तान छोड़कर गया हो, भाषा भी मालूम न हो, घटना घटी हो, भौगोलिक रूप से वो कहां है, वो भी मालूम न हो लेकिन हिंदुस्तान में हुआ है - इतना कान पर पड़ते ही या टीवी पर आंख से देखते ही दुनिया के किसी भी कोने में रहने वाले आंख में से आंसू टपकते हैं। उसको उतना ही दर्द होता है, जितना दर्द हिंदुस्तान में जो इस घटना को अनुभव कर रहा है, उसको पीड़ा होती है, उतनी ही मेरे देशवासी जो दुनिया में बसे हैं, उनको पीड़ा होती है।

मुझे याद है जब गुजरात में कच्छ का भूकंप आया था, विश्व का कोई हिंदुस्तानी ऐसा नहीं होगा, जिसने उस समय गुजरात के आंसू पोंछने का प्रयास न किया हो। ये विश्व भर में फैला हुआ हमारा भाई - जिसको हिंदुस्तान के प्रति इस प्रकार का लगाव है, इस प्रकार का नाता है। यहां के दुख के लिए दुखी, यहां के सुख के लिए सुखी। जब मंगलयान की सफलता हुई, Mars orbit पर हम लोग पहुंचे, पहले प्रयास में पहुंचे। सिर्फ हिंदुस्तान नाचा था, नहीं, दुनिया भर में पहुंचा हुआ हिंदुस्तानी भी नाचा था। उसके लिए गर्व की बात थी कि मेरा देश ये प्रगति कर रहा है। इस ताकत को हम कैसे आगे बढ़ाएं, उस दिशा में हम सोच रहे हैं।

मैं जानता हूं जब मैं मुख्यमंत्री भी नहीं था, प्रधानमंत्री भी नहीं था, तब भी मैं विश्व के कई लोगों से मिलता था तो मैं उनकी शिकायतें भी जरा सुनता रहता था। तब मैं देखता था कि भरी शिकायतें रहती थीं। हमने आने के बाद कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की थीं। जब मैं विदेश प्रवास पर था तो चाहे ऑस्ट्रेलिया हूं, चाहे फिजी रहा, चाहे अमेरिका गया। जो बातें मैंने बताई थीं कि हम ये करेंगे। आज मैं गर्व के साथ आपको हिसाब देता हूं कि हमने जो कहा था वो सब पूरा कर दिया है। हमने कहा था कि PIO card holder को आजीवन वीजा दिया जाएगा - वो काम हो चुका है। अब आपको Embassy के चक्कर काटने की जरूरत नहीं पड़ेगी। दूसरी एक समस्या थी - वो क्यों थी वो अभी भी मेरी समझ मैं नहीं आता है - जो PIO card holder थे और भारत में आकर के रहते थे, उनको हर सप्ताह पुलिस स्टेशन जाना पड़ता था। कुछ सिखाने के लिए नहीं - हाजिरी लगानी पड़ती थी। और मैं जब ये सुनता था तो मैं सोचता था कि क्यों ये सब हो रहा है? लेकिन जब ये काम करने की जिम्मेवारी मेरी आई, ये नियम अब समाप्त कर दिया गया है। ये एक स्वाभिमान का विषय है, सम्मान का विषय है, ये सिर्फ कोई Administrative decision के रूप में न देखा जाए। आज सरकार में बैठे हुए लोगों के लिए आपके सम्मान का महत्व क्या है, वो इस निर्णय में दिखाई देता है।

एक मैंने कहा था क्योंकि कईयों ने मुझे कहा था कि ये PIO अलग OCI अलग क्यों - ये हमारे साथ भेद-भाव क्यों? तो मैंने हमारे अफसरों से पूछा, गोलमोल-गोलमोल जवाब आते रहते थे। आगे का मैंने कहा, जो होगा, सो होगा कर दो एक बार। अब हमने घोषणा तो कर दी। जब हम यहां आये तो सारा कानून बदलना था, बड़ी लंबी प्रक्रिया थी। खैर उस प्रक्रिया से भी हम निकल चुके हैं, और आज मैं गर्व के साथ आपको हिसाब दे सकता हूं कि अब PIO और OCI card दोनों व्यवस्थाओं को merge कर दिया गया है और सबको एक ही प्रकार की सुविधाएं मिल पाएंगी।

उसी प्रकार से - Visa on Arrival। आप जानते हैं, आपको क्या-क्या तकलीफें झेलनी पढ़ी हैं भूतकाल में। मैं जानता हूं। और इसलिए अब Visa on Arrival। इसलिए अब Visa on Arrival। आपके लिए ये सुविधा कर दी गई है। करीब दुनिया के 43 Countries को इसका benefit already हमने कर दिया है। उसी प्रकार से Electronic travel authorization - ये व्यवस्था भी कर दी है ताकि Online Correspondence से भी आप ये काम कर सकते हैं। आपका समय सबसे ज्यादा बचे और हमारी Embassy एक प्रकार से आपके लिए सर्वाधिक उपयोगी हो उस दिशा के महत्वपूर्ण कदम इस सरकार ने already उठा लिए हैं।

दिल्ली में एक प्रवासी भारतीय केंद्र, उसकी स्थापना का निर्णय हुआ था। अब उसका भवन तैयार हो गया है। थोड़े ही दिनों में वो भी प्रारंभ हो जाएगा और मैं मानता हूं कि इसका लाभ आने वाले दिनों में सभी प्रवासी भारतीयों को मिलेगा।

कुछ लोगों को लगता है कि प्रवासी भारतीयों के साथ ये जो मेल-मिलाप है कुछ अपेक्षाओं से है। मैं समझता हूं कि ये अपेक्षाओं के लिए नहीं है। अपनों से मिलना, यही अपने आप में एक ताकत होती है। मिल-बैठकर के एक-दूसरे के सुख-दुख बांटना ये भी अपने आप में एक बहुत बड़ा ऊर्जा का केंद्र बन जाता है और इसलिए ये हमारा मेल-मिलाप उसकी अपनी एक विशेषता है - और अब तो युवा पीढ़ी जिनका जन्म ही वहां हुआ Second generation, Third generation है। वे युवक भी इन दिनों बहुत बड़ी मात्रा में शरीख होते हैं कयोंकि उनको भी भारत के लिए कुछ न कुछ करने की उमंग रहती है।

जिनके मन में कुछ करना है उनके लिए बहुत कुछ है। लेकिन हर चीज पाउंड और डॉलर से ही होती है, ये मानने की आवश्यकता नहीं है। मैंने ऐसे लोग देखे हैं, गुजरात में हम जब भूकंप के लिेए काम कर रहे थे, Canada से एक बच्ची आई थी उससे मैं मिला था, मुस्लिम परिवार से थी। उसका जन्म शायद African country में हुआ और बाद में उसका परिवार Canada में Shift हुआ था। उसके पिता ने, उसकी माता ने कभी हिंदुस्तान देखा नहीं था लेकिन कच्छ के भूक्ंप के बाद वो आई, कच्छ में रही और महीनों तक उसने कच्छ में काम किया था। ये ताकत जो है, इसको हमने समझने की आवश्यकता है।

हमारे पास ज्ञान है, हमारे पास अनुभव है, हमारे पास एक विशिष्ट परिस्थिति में काम करने का Exposure है, हम एक अलग प्रकार के Discipline से गुजरे हुए लोग हैं। ये वो चीजें हैं जो हम अपने यहां Inject कर सकते हैं, इसको ला सकते हैं। और यहां रहकर के, कुछ समय अपने लोगों के साथ कुछ समय बिताकर के हम इन चीजों को कर सकते हैं। और ये भी देश की बहुत बड़ी सेवा होती है।

इन दिनों स्वच्छ भारत का एक अभियान चलाया है। लेकिन एक बहुत बड़ा महत्वपूर्ण काम, जो मैं जानता हूं कि आप सब के दिलों में भी वो उतनी ही ताकत रखता है। आप के दिलों को भी छूने के लिए उस बात में उतना ही सामर्थ्य है। और वो है मां गंगा की सफाई। आप इस प्रकार की Technology से परिचित हैं, आप इस तरह के काम से परिचित हैं। एक नमामी गंगे फंड create भी किया गया है कि दुनिया के जो भी लोग गंगा के अंदर अपना योगदान चाहते हैं वो आर्थिक मदद करना चाहते हैं वो दे सकते हैं, जो आकर के समय देना चाहते हैं वो दे सकते हैं। जो ज्ञान परोसना चाहते हैं वो ज्ञान दे सकते हैं, जो Technology लाना चाहते हैं वो Technology ला सकते हैं। एक प्रकार से विश्व भर में फैले हुए समाज जिसके मन में गंगा के प्रति और गंगा की क्या ताकत है।।। पूरे मॉरिशस को कोई एक जगह जोड़ती है, कोई एक जगह आंदोलित करती है तो मॉरिशस का गंगा सागर है। तालाब तो मॉरिशस के लोगों ने खुद बनाया है, तालाब है, लेकिन गंगा जी से लेकर के वहां जाकर जल डाला है। जल तो थोड़ा ही डाला लेकिन उन्होंने उसमें से एक भाव जब पैदा किया कि ये गंगा का प्रतिनिधित्व करती है और आज भी शिवरात्रि का मेले देखो तो पूरे मॉरिशस के मूल भारतीयों को जोड़ने का कोई एक जगह है तो वो गंगा सागर है। हिंदुस्तान से दूर गंगा नाम से बना हुआ एक तालाब भी पूरे मॉरिशस को सांस्कृतिक विरासत को जगाने की प्रेरणा दे सकता है और जब शौकत अली जी को सुनोगे तो आपक पता चलेगा किस प्रकार से उसने वहां के जीवन को बदला है। यो मां गंगा है - ढाई-तीन हजार किलोमीटर लंबी, हिंदुस्तान की 40 प्रतिशत जनसंख्या जिसके साथ सीधी-सीधी जुड़ी हुई है - और मेरे लिए गंगा की सफाई जिस प्रकार से Environment का विषय है, गंगा की सफाई श्रृद्धा का विषय है, गंगा की सफाई सांस्कृतिक विरासत का विषय है, उसी प्रकार से गंगा की सफाई उन 40 प्रतिशत उस भू-भाग में रहने वाले भाईयों-बहनों की आर्थिक उन्नति का बी प्रतीक बन सकता है और इसलिए उस काम को हमें करना है और जिन राज्यों से मां गंगा गुजरती है। वहां पर आर्थिक उन्नति के लिए हम जितना करे उतना कम है। चाहे उत्तर प्रदेश हो, बिहार हो, झारखंड हो, उत्तराखंड हो, पश्चिम बंगाल हो - ये सारा इलाका है, जहां पर आर्थिक उन्नति की बहुत संभावनाएं पड़ी और उन संभावनाओं को तराशने के लिए मां गंगा एक बहुत बड़ा केंद्र बिंदू बन सकती है। गंगा के किनारे पर विकास हो सकता है, 120 से ज्यादा शहर हैं गंगा के किनारे पर, छह हजार से ज्यादा गांव हैं, ढाई हजार किलोमीटर लंबा है और काशी जैसा तीर्थ क्षेत्र हो, हरिद्वार, ऋषिकेश, गंगोत्री, यमुनोत्री हो क्या कुछ नहीं है!

इस विरासत को लेकर कर हम आगे बढ़ना चाहते हैं। मैं आपको निमंत्रण देता हूं। आइए। आपका ज्ञान, बुद्धि, सामर्थ्य जो कुछ भी हो इसके साथ जुडि़ए। जो Environment में विश्वास करते हैं उनके लिए भी वहां भरपूर काम है, जो Inclusive growth में विश्वास करते हैं, उनके लिए वहां भरपूर काम है, जो Rural development में विश्वास करते हैं, उनके लिए वहां भरपूर काम है, जो Adventure चाहते हैं उनके लिए भी भरपूर काम है।

मां गंगा सबको समेटे हुए हैं, मां गंगा से जुडऩे का अवसर मतलब है हजारों साल से पुरानी संस्कृति से जुडने का अवसर। इस अवसर को हम लें, और उसी का उपयोग करें, यह मैं आपसे प्रार्थना करता हूँ। आज भारत विकास यात्रा पर कहां से कहां पहंच रहा है, उसके लिए आपका समय नहीं लेना चाहता। क्योंकि 11 तारीख को मैं एक दुसरे अवसर पर फिरसे इस सभाग्रह में आ रहा हूँ। उस समय काफी विस्तार से बातें करनी होंगी क्योंकि आर्थिक विषयों से जुड़ा हुआ वह कार्यक्रम है लेकिन मैं चाहता हूं कि आपकी शक्ति और सामर्थ्य, हमारे यहां शास्त्रों में एक बहुत ही बढ़िया श्लोक विदेश में रहने वाले लोगों के लिए है, बहुत अच्छा है। मैं उसका ज़िक्र यहाँ करना चाहता हूँ। शास्त्र कहते हैं:

यस्तु संचरते देशान् सेवते यस्तु पण्डितान् | तस्य विस्तारिता बुधिस्तैलबिन्दुरिवाम्भसि ||

उसका सीधा meaning यह है, कि जो विश्व में भ्रमण करता है, वो इतना ज्ञान और अनुभव अर्जित करता है, और वो ज्ञान-अनुभव इतना पैना होता है, इतना ताकतवर होता है, कि कितना ही गहरा समंदर क्यों न हो, पानी का कितना ही बड़ा सागर क्यों न हो, लेकिन उसपर एक तेल बिंदु पड़े, तो जिस प्रकार से वो उसपर प्रभावी होकर के फैल जाता है – यह विश्व भर में भ्रमण करके पाया हुआ ज्ञान भी उतना ही ताक़तवर होता है, यह मन्त्र कह रहा है। और वो ताक़त के धनी आप हैं। वो ताक़त के धनी आप हैं।

उस ताक़त का उपयोग, माँ भारती की सेवा के लिए कैसे लगे, आने वाले दिनों में, भारत जो विकास की ऊचाइयों को पार कर रहा है, आप भी उसके साथ जुड़िये, इस महान सांस्कृतिक विरासत से विश्व को परिचित कराइए, और जिस मन्त्र को लेकर के, हमारे पूर्वजों ने कल्पना की थी – हम ही तो लोग थे, जिन्होंने पहली बार विशवास से कहा था: “वसुधैव कुतुम्भकम”। The whole world is a family।

पूरे विश्व को जिसने परिवार माना है, वो हमारा DNA है। वो हमारी संस्कृति है। पूरे विश्व को जिसने परिवार माना है, उसका एक दायित्व बनता है कि मानवतावाद के विषय को लेकर के पूरे विश्व में हम एक ताक़त के साथ पहुंचें। फिर एक बार – Guyana के राष्ट्रपतिजी हमारे बीच आये, उनका स्वागत करता हूँ, उनका आभार व्यक्त करता हूँ। South Africa की विदेश मंत्रीजी हमारे बीच आयीं, उनका भी स्वागत करता हूँ, उनका अभिनन्दन करता हूँ। और Mauritius के उप-प्रधान मंत्रीजी हमारे बीच आये, मैं उनका भी आभार व्यक्त करता हूँ।

आज के अवसर पर, राष्ट्र्पिताजी के 100 साल पहले वापिस आने की ख़ुशी में भारत सरकार ने सौ रूपएका और दस रूपए का सिक्का आज हमें दिया है, और उसकी प्रकार से पोस्टल स्टाम्प भी आपके सामने रखा है। पोस्टल स्टाम्प, और ये सिक्के इतिहास की धरोहर बनते हैं। आज भी आपने देखा होगा, पुरातात्त्विक विभाग जो रहता है – Archaeological Department – वो इतिहास की कड़ी जोड़ने के लिए, पुराने coin जो मिलते हैं, वो उसकी सबसे बड़ी ताक़त होते हैं। उसके आधार पर वो तय करते हैं, कि 400 साल पहले कहाँ कौन सी currency थी, और वो currency 2000km दूर, सात समंदर पार, कहाँ-कहाँ पर दिखाई दी – उसके आधार पर 1000 साल पहले कैसा विश्व व्यापार था, किस प्रकार के सांस्कृतिक सम्बन्ध थे, ये सारी कड़ी जोड़ने में यह काम आता है। सिक्कों का महत्त्व आज भी उतना ही है, और विश्व में कई ऐसे लोग हैं, जो इस प्रेरणा को लेकर के चलते हैं।

मेरे मन में एक विचार है। विदेश में रहे हुए हमारे मित्र उस काम को अगर कर सकें तो ज्यादा अच्छा होगा। क्या हम इस प्रवासी भारतीय दिवस पर - विशेष योगदान करने वाले लोगों का तो हमें सम्मान करने का सौभाग्य मिलता है – जिन्होंने अपने-अपने, जो अपनी कर्म भूमि है, वहां भारत का झंडा ऊंचा रखने के लिए कुछ न कुछ योगदान किया होगा। लेकिन क्या भविष्य में, अगर विदेश की जो Young Team है, वो आगे आये तो।।। मैं इस कार्यक्रम को भारत के माध्यम से करना नहीं चाहता – बाहर के लोग करें तो मेरे मनन में विचार है – कि हम आज का जो Information Technology का युग है, Communication की नयी दुनिया है, उसका उपयोग करते हुए, “भारत को जानो” – ऐसी एक प्रति वर्ष एक Quiz Competition कर सकते हैं? Online Quiz Competition।

भारत के सम्बन्ध में ही सवाल हों। और भारत से बाहर रहने वाले लोग उसमें शरीक हों, उसमें हिस्सा लें। और उसमें जिसका नंबर आये, उनका सम्मान प्रवासी भारतीय दिवस में होता रहे, ताकि साल भर हमारी युवा पीढी को online जाकर के, Quiz Competition में जुड़ करके, ज्यादा से ज्यादा marks पाने का प्रयास हो, और पूरे विश्व में, भारत को जानने का एक बहुत बढ़ा आन्दोलन खड़ा हो जाए। उस दिशा में हम प्रयास कर सकते हैं।

मैं फिर एक बार आप सबको प्रवासी भारतीय दिवस पर बहुत बहुत शुभकामनायें देता हूँ। और पूज्य बापू ने, भारत आकर के, भारत को गुलामी की जंजीरों से मुक्त कराया। और इतना ही नहीं, भारत के मानवतावाद का सन्देश था, उसे पूरे विश्व को पहुंचाया, ऐसे युगपुरुष के भारत आगमन का यह शताब्दी का पर्व हम मना रहे हैं। तब हम भी, जहां भी हों – नाभि से नाता जुडा रहे। मिट्टी से नाता जुडा रहे। अपनों के लिए कुछ न कुछ कर गुजरने का हौसला बुलंद बना रहे – इसी अपेक्षा के साथ, सबको बहुत बहुत शुभकामनायें।

धन्यवाद।

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Transcript for PM Modi’s interacts with BJP booth Karyakartas of Assam for Mera Booth Sabse Mazboot
March 30, 2026
‘Seva, Sangathan, and Samarpan’, PM Modi says Assam’s BJP karyakartas embody the true spirit of the organisation
When every booth becomes strong, victory becomes certain, and Assam’s future becomes brighter: PM Modi lauding the efforts of BJP karyakartas
The importance of protecting Assam’s identity and tackling issues like illegal infiltration is not just a political issue but one of security, culture and justice: PM Modi
Over a dozen key peace agreements have brought lasting stability, especially in regions like Bodoland: PM Modi

नमस्कार साथियों।

मुझे पक्का विश्वास है हर बूथ पर बहुत बड़ी मात्रा में बड़े उत्साह के साथ कार्यकर्ता जुटे हुए हैं। सबसे पहले तो मां कामाख्या को नमन करते हुए मां कामाख्या मोह सेवा जनालु जॉय आई होम ओ के नमस्कार जोनैशु।

ब्रह्मपुत्र घाटी से लेकर बराक वैली तक पहाड़ से लेकर पठार तक असम बीजेपी के सभी कार्यकर्ता साथियों का मैं अभिनंदन करता हूं। मैं भी आपकी तरह एक कार्यकर्ता ही हूं और पार्टी जो दायित्व सौंपती है उसे निभाने के लिए जो भी मुझसे हो सकता है मैं करता हूं। मुझे असम में आपके बीच आकर काम करना होता है। इस दौरान आप में से बहुत सारे साथियों के दर्शन का सौभाग्य मिलता है। आज बूथ के स्तर पर काम करने वाले आप सभी कार्यकर्ताओं से सीधे बातचीत का अवसर मिला है। और मैं जानता हूं कि आप सभी आज-कल बहुत व्यस्त हैं। हर कार्यकर्ता के मन में एक ही भाव, एक ही संकल्प है। मोर बूथ सभा तो के मजबूत, यानी मेरा बूथ सबसे मजबूत। असम में बीजेपी एनडीए की हैट्रिक लगे। इसके लिए आप सभी जबरदस्त मेहनत कर रहे हैं।

दूसरी तरफ यह बोहाग बिहू और अन्य उत्सवों का भी समय है। इनसे जुड़ी तैयारियां भी रहती हैं। मैं जानता हूं असम में बीजेपी एनडीए को लेकर बहुत अधिक समर्थन है। लेकिन आप लोग जमीन पर जो अनुभव कर रहे हैं, जो आपके विचार हैं, मैं उन्हें जानने के लिए बहुत उत्सुक हूं। तो चलिए बातचीत शुरू करते हैं। सबसे पहले कौन बात करेंगे मेरे साथ?

पंकज हजारिका- नमस्कार। मैं पंकज हजारिका असम के सुनीतपुर जिले के नौद विधानसभा क्षेत्र से मैं बोल रहा हूं।

पीएम- पंकज जी नमस्कार। मुझे बहुत अच्छा लगा। आपसे बात करने का मौका मिला। अच्छा पंकज जी मैं जाना चाहता हूं। असम ने अस्थिरता और अशांति का एक लंबा दौर देखा। बीते दशक में स्थिति बिल्कुल बदल गई है। जब आप पुराने लोगों से मिलते हैं तो वह इसको लेकर क्या कहते हैं?

पंकज हजारिका- मैं मानता हूं कि सन 2016 से पहले असम में जो हुआ वो बहुत एक दुखजनक माहौल चल रहा था। बाद में जब भाजपा गवर्नमेंट आया उस समय पर असम में एक नया परिवर्तन देख रहा है। सभी किसानों, व्यवसायियों और शिक्षक सभी जनों के लिए एक आमूल परिवर्तन हुआ। जैसे एक प्रगति का दौर नया दौर चल रहा है। अभी-अभी किसानों ने व्यवसायियों ने अपने काम आराम से धूमधाम से शांति से कर रहा है। अभी प्रगति के एक नया दौर आसाम में दिख रहा है सभी जनों के लिए और किसान का आय बढ़ गया। किसान का मन में शांति आ गया। इसी माहौल से गांव-गांव से लोग बहुत खुश है।

पीएम- जब लोगों से मिलते हैं तो लोग आपसे क्या पूछते हैं? आपको क्या बताते हैं लोग, पुराने लोग जब मिलते हैं ?

पंकज हजारिका- पुराने लोगों को एक प्रकार से मुक्ति मिल गया, जब से भाजपा गवर्नमेंट आई है। जो भाजपा गवर्नमेंट आने वाली है.. टेन इयर्स आसाम में भाजपा गवर्नमेंट को हुआ है। पहले तो आसाम में लूटपाट, घर्षण, उग्रवाद से शांति का कोई उपाय नहीं मिला। जब से टेन इयर्स असम में गवर्नमेंट भाजपा का हुआ है। अभी सभी एक शांति से प्रगति से उन्नयन से एक नया धारा, एक नया दिशा बन गया। ये बोल रहा है सर।

पीएम- यह जो नए वोटर है उनका तो उस समय जन्म भी नहीं हुआ होगा या अगर होंगे तो पांच सात आठ 10 के साल के उम्र के होंगे। उनको तो उस समय का कुछ पता नहीं होगा। तो उन सबको कौन बताता है?

पंकज हजारिका- हमलोगों का जो कार्यकर्ता है जो सभी लोगों के लिए एक नया माहौल बना रहा है। मेरा बूथ सबसे मजबूत हर बूथ में हर घर-घर में जाकर हम हमारा जो कार्यकर्ता है सभी लोग उस दिशा में एक नया रास्ता दिखाया और बुजुर्गों ने वो बच्चा लोगों को बताया कि पहले तो असम का क्या व्यवस्था है क्या माहौल चल रहा है वो नया यूथ को वो रास्ता दिखा दिया।

पीएम- पंकज जी आपने बिल्कुल सही कहा। हमने वह समय देखा है जब अस्रम का एक बड़ा बड़ा हिस्सा हिंसा की आग में झुलस रहा था। लेकिन आज ब्रह्मपुत्र की लहरों में एक नया आत्मविश्वास है, क्योंकि भाजपा की डबल इंजन सरकार ने स्थायी शांति के लिए प्रयास किए हैं। पिछले 10 वर्षों में 12 बड़े शांति समझौते हो चुके हैं। साथियों यह जो पुराने दिन है वो असम के बूढ़े, बड़े और बुजुर्गों को याद है। लेकिन जो 18-20-22 साल के युवा है जो फर्स्ट टाइम वोटर्स हैं इनके दिमाग में बीते 10 साल की शांति ही है। वैसे ही हमारी माताओं बहनों को भी बार-बार इन चीजों को याद कराना चाहिए। इसलिए एक सक्रिय बूथ कार्यकर्ता होने के नाते आपका दायित्व और बढ़ जाता है। यह जरूरी है कि फर्स्ट टाइम वोटर्स को कांग्रेस के पुराने दिनों की याद दिलाएं और बताएं कि जरा सी गलती असम को फिर से उस दौर में गिरा सकती है, वापस ले जा सकती है। आप अपनी बात परिवार के उदाहरण से भी समझा सकते हैं। जब घर में शांति होती है तो घर के लोग भी आगे बढ़ते हैं। वैसे ही राज्य के डेवलपमेंट के लिए शांति पहली जरूरत होती है और यही बीजेपी एनडीए सरकार कर रही है। मेरा एक और काम करिएगा। जब आप युवाओं से मिले तो आप पुराने अखबारों की कटिंग 10 साल पहले के फोन पर पुराने वीडियो ये सब जरूर उनको दिखाना चाहिए। आपके मोबाइल फोन पर सब रेडी रहना चाहिए और जब कोई देखता है ना तो फिर उसको मानता है और आज-कल जो एआई के द्वारा जो फालतू चीजें बना करके सर्कुलेट की जाती है उससे भी बचने के लिए उनको समझाना चाहिए।

साथियों,

आपको लोगों को कांग्रेस की नीति भी याद दिलानी है। कांग्रेस कागज पर तो समझौता करती थी, ताकि अखबारों में छप जाए लोग गुमराह हो जाए और गलती से वोट भी डाल दे। लेकिन जैसे ही कांग्रेस सरकार बनती थी समझौते कूड़े कचरे के ढेर में चले जाते थे। कोई समझौता आगे बढ़ता नहीं था। फिर दंगे फसाद में असम हमारा फंस जाता था। हमारी नई पीढ़ी फंस जाती थी। जबकि बीजेपी मीडिया में जगह पाने के लिए काम नहीं करती। शांति स्थापित करने के लिए काम करती है। आपके बच्चों का भविष्य उज्जवल बनाने के लिए काम करती है। और हम ईमानदारी से शांति के लिए समझौते कर रहे हैं। और असम के लोगों ने भी देखा है 10 साल में करके दिखाया। आप अपने बूथ पर फर्स्ट टाइम वोटर्स के लिए विशेष कार्यक्रम करिए। जैसे त्योहारों का मौसम है। इसमें आप भजन संध्याएं या ऐसी कोई आयोजन बूथ पर कर सकते हैं। इसमें विरासत का उत्सव भी होगा और विकसित असम बनाने के लिए बीजेपी क्या कर रही है? इस पर भी अच्छी चर्चा हो सकती है। पंकज जी बहुत अच्छा लगा आपसे बात करके। चलिए आगे बढ़ते हैं.. अब कौन मेरे साथ बात करेंगे?

धनेश्वर जी- नमस्ते माननीय मोदी जी।

पीएम- नमस्ते

धनेश्वर जी- नमस्ते मोदी जी, मैं तामलपुर जिले के क्षेत्र के 43 नौ तामलपुर विधानसभा क्षेत्र से धनेश्वर बासुमतारी बोल रहा हूं सर।

पीएम- धानेश्वर जी आपके जिम्मे अभी क्या है।

धनेश्वर जी- मेरा मैं अभी 2016 से भारतीय जनता पार्टी का एक कार्यकर्ता हूं और वर्तमान में शक्ति केंद्र प्रमुख की जिम्मेदारी निभा रहा हूं।

पीएम- और आप व्यवसाय क्या करते हैं जीवन में?

धनेश्वर जी- - जीवन में मैं एक व्यवसायी हूं। मेरा कपड़ों का एक छोटा सा व्यवसाय है। जिसे सीएम ट्रिपल ए योजना की मदद से शुरू किया था। इसके साथ हमारे घर में पाट और मुगा उद्योग भी है, जहां हम कपड़े तैयार करते हैं।

पीएम- तो आपके पिता-माता ने आपका नाम धनेश्वर रखा है, तो सचमुच में धनेश्वर है क्या आप?

धनेश्वर जी- थैंक यू। थैंक यू सर। सर

पीएम- अच्छा धनेश्वर जी मैं कुछ समय पहले ही बोडोलैंड में आया था। वहां जो बदलाव हो रहा है वह सचमुच में बहुत अद्भुत है। आज बोडोलैंड विकास के नए रास्ते पर है। आप तो इसी क्षेत्र के निवासी हैं। जब आप लोगों से मिलते हैं लोगों से बात करते हैं और स्वाभाविक है जहां भी जाते होंगे चुनाव की चर्चा होती होगी और आप भाजपा वाले हैं तो ज्यादा करते होंगे। तो लोग इन सारे बातों पर यह जो बोडोलैंड में बदलाव आया है क्या बातें करते हैं?

धनेश्वर जी- बोडोलैंड शांति समझौते के बाद पूरे क्षेत्र में बहुत ही सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है। पहले जहां इस इलाके में संघर्ष और अस्थिरता की बात होती थी। आज वहां विकास और शांति की बात हो रही है। सड़क, शिक्षा और रोजगार के अवसर पहले से काफी बढ़ रहे हैं। जिससे लोगों की जिंदगी में सुधार आया है। जब हम बोडो समाज के लोगों से बात करते हैं तो वे बताते हैं कि अब उन्हें अपने भविष्य को लेकर भरोसा और उम्मीद महसूस होती है। खासकर युवा को कि सोच में बड़ा बदलाव आया है। अब वे हिंसा की बजाय शिक्षा, कौशल और अपने काम धंधे पर ध्यान दे रहे हैं। यह बदलाव ना केवल बदलन बल्कि पूरे उत्तर पूर्व के लिए एक प्रेरणा है।

पीएम- अच्छा ये जो बागुरूंबा का कार्यक्रम इतना बड़ा गुवाहाटी में हुआ और पूरी दुनिया में उसकी चर्चा चल रही है। दुनिया के बड़े-बड़े देशों के साथ लोग उसकी तुलना करते हैं। यह सब देखकर के बोडोलैंड के लोगों को क्या लगता है?

धनेश्वर जी- बोडो समाज के लोग बहुत उत्साह हुआ कि मोदी जी ने हमारे बोडो समाज की बागुरूंब को विश्व दरबार में जो लेके गया ये हमारे लिए बहुत प्रेरणादायक है ये आपको बहुत बोडो समाज ने धन्यवाद ज्ञापन किया सर आपको बहुत लोगों ने

पीएम- धनेश्वर जी आप सच्चे अर्थ में धनेश्वर भी बनें, दिल के भी धनेश्वर बने, विचारों के भी धनेश्वर बने और असम को भी धनेश्वर बनाए। आपने बहुत अच्छी तरह से बताया है। जिस बोडोलैंड की संस्कृति इतनी समृद्ध है उसके साथ दशकों तक कांग्रेस ने धोखा किया। मुझे इस बात को लेकर बहुत संतोष होता है कि आज वहां शांति और समृद्धि आ रही है। एक समय बोडोलैंड में कर्फ्यू ही ज्यादा रहता था। बम बारूद के ही धमाके सुनाई देते थे। आज वहां खाम और सिफुंग की धुनें फिर से गूंज रही है। और जैसा आपने कहा आज दिल्ली से लेकर गुवाहाटी तक और मैं तो कहता हूं दुनिया में बागुरंबा की अद्भुत छटा का ही जलवा दिखता है। ये देश के हर उस क्षेत्र के लिए बहुत बड़ा मॉडल है। जहां अतीत में अशांति रही है। वहां आज शांति का सूरज निकला है।

धनेश्वर जी मैं सभी कार्यकर्ताओं से कहना चाहूंगा कि बोडोलैंड के मेरे बूथ कार्यकर्ता साथी चुनाव से पहले अपनेपने बूथ पर ऐसे कार्यक्रम करें जहां वह साथी शामिल हो, जिन्होंने बंदूके छोड़ी है। फिर उनके अनुभव सुने और लोगों को सुनाए और इतना ही नहीं जिन माताओं के बेटे घर वापस आए हैं। वह माताएं बहने बहुत आशीर्वाद देती है। जब मैं 2014 के बाद एक कार्यक्रम में बोले आया था और सब माताओं को मैंने कहा कि मुझे आपके बच्चे वापस लाने हैं और आज मुझे संतोष है वो सारे संतान वापस आए बंदूक छोड़कर के कलम को हाथ लगाए हैं। कई ऐसे साथी भी होंगे जो बरसों तक जंगलों में रहे हैं। और अब पहली बार वोट दे रहे हैं। उनका विशेष अभिनंदन हो। ऐसे समारोह भी रखे जा सकते हैं। आपके बूथ में केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं के जो लाभार्थी हैं उनसे तो बार-बार मिलना है। उन्हें कहना है कि वोटिंग के दिन टोली बनाकर एक साथ ही वोट डालने चले। गाजे बाजे हुए साथ निकलना चाहिए। जैसे उत्सव है ना वैसा माहौल बनाना चाहिए। बोल में आज बहुत बड़े स्तर पर इंफ्रास्ट्रक्चर का काम हो रहा है। ऐसा हर काम जो आपके बूथ में आपके ब्लॉक में हो रहा है। उसके क्या फायदा होंगे? यह विस्तार से बताना है। जिनको गैस का सिलेंडर मिला होगा। जिनको बिजली का कनेक्शन मिला होगा। जिनको पीएम किसान सम्मान निधि का पैसा मिला होगा। जिनको पीएम आवास योजना का घर मिला होगा। ऐसे कई काम है। इन सब के लोगों की लिस्ट बनानी चाहिए। किसको क्या-क्या मिला है और उन सब से बात करनी चाहिए। और आप एक काम कर सकते हैं शांति की दीवार वाल आर्ट ऐसा कुछ कर सकते हैं क्या? जैसे बोडोलैंड टेरिटोरियल रीजन में गांवों में स्थानीय कलाकारों से दीवारों पर बोडो लोक कला में पहले और अब का चित्रण करवाएं। हो सके तो अपने अपने बूथ के युवा साथियों को भी इसे जोड़ें और मैं मानता हूं कि वहां तो हमारे एनडीए के साथी भी चुनाव लड़ रहे हैं। उनके भी सबको विजय बनाना है। हर बूथ पर एनडीए के सब साथियों को मिलकर काम करना है। और यह बीजेपी की जिम्मेवारी ज्यादा है कि अन्य दलों के लोगों को भी साथ लेकर के उनके साथ काम करना है। चलिए धनेश्वर जी मुझे बहुत अच्छा लगा। अब किसी और एक साथी से सुनते हैं। हां जी.. बताइए कौन है हमारे साथ?

डिंपी जी - नमस्कार। मैं दीपी दास

पीएम- डिंपी दास जी नमस्ते…अपने बारे में बताइए..

डिंपी जी - नमस्कार मैं भारतीय युवा मसा की नौगांव जिले का वाइस प्रेसिडेंट हूं। असम के नौगांव जिले का रहा विधानसभा समष्टि के अंतर्गत खाही भांतिपुरी की रहने वाली हूं।

पीएम- डिंपी जी आप और भी कुछ काम करती हैं भाजपा के सिवाय

डिंपी जी- मैं 9 साल से बीजेपी से समाज सेवा के कार्य में जुड़ी हुई हूं। मेरे परिवार में मेरी मां जी, मेरा छोटा भाई, ताऊ जी, ताई जी और चाचू रहते हैं। उसके साथ में मैं अपने आपके द्वारा जो एक स्कीम मिली थी मुझे पीएमएमएसवाई का उसी को लेके मैंने कुछ जमीन लीज पे लेके एक न्यू पोंड का जो फिश फार्मिंग है वो शुरू किया और उसी के साथ में बच्चों को पढ़ाती भी हूं और युवाओं के साथ में मिलकर ये भारतीय जनता पार्टी के साथ में जुड़ी हुई हूं और बाकी जन कल्याण का कार्य कर रही हूं।

पीएम- डिंपी जी आप इतनी बढ़िया हिंदी कैसे बोलती है?

डिंपी जी- मैं कोशिश करती हूं।

पीएम - बहुत बढ़िया बोल रही हैं आप।

डिंपी जी- धन्यवाद।

पीएम- आप भाषण भी करती हैं क्या?

डिंपी जी- कभी-कभी कर लेती हूं।

पीएम- अच्छा चलिए मुझे कभी आपका भाषण सुनना पड़ेगा। अच्छा मैंने सोशल मीडिया पर देखा कि हमारी कार्यकर्ता बहनें देर रात तक बिना डर प्रचार कर रही है। देर-देर रात तक लोगों के घर जा रही हैं। 10 साल पहले तक यह संभव नहीं था। यह जो डर भय खत्म हुआ है इसको लेकर असम की बहनें क्या कह रही है?

डिंपी जी- जी आज असम में सब लोग महिलाएं बहुत सुरक्षित है। क्योंकि पहले आज की भाजपा सरकार जो हर महिलाओं के ऊपर आने वाली परेशानियों को आने ही नहीं देती है। उसी वजह से सब लोग बहुत सेफ हैं और पहले हमारी लड़की लोग महिलाएं लोग रात क्या दिन में भी सुरक्षित नहीं थे लेकिन आज जब से भाजपा सरकार बनी हुई है तब से लेके हर महिलाएं बहुत सुरक्षित है और रात में देर तक कार्य कर सकती हैं। कोई डर नहीं है और मैं भी सुरक्षित हूं। इसलिए मैं दिल से कहती हूं कि एक बार फिर से मोदी सरकार क्योंकि ये जो आज के दिनों की परिस्थिति है और पहले जो कांग्रेस सरकार के दिन में लड़की लोग और मैं भी उस टाइम में एकदम ही सेफ नहीं थे। दिन में भी सेफ नहीं थी। रात की बात तो बहुत दूर की बात थी। लेकिन आज सब लोग बहुत सुरक्षित है, कुशल है और मैं फिर से भगवान से भी विनती करती हूं और कि फिर से भाजपा सरकार बने। आने वाले और सालों तक मतलब ऐसे ही सुरक्षित महिलाएं रहें।

पीएम- देखिए हम राजनीतिक दल के नेताओं के लिए तो जनता जनार्दन ही हमारा भगवान है। बूथ में जो परिवार है वही हमारे भगवान हैं। हमें उनकी सेवा करनी है। उनको जीवन में सब सुख मिलेंगे तो भगवान अपने आप प्रसन्न हो जाएगा।

डिंपी जी आपने बहुत अच्छे तरीके से बताया। मुझे बहुत संतोष हुआ। आपकी बातों से मुझे पूरा विश्वास हो गया है कि आप केंद्र और राज्य की योजनाओं को प्रभावी तरीके से रख रहेंगे। नारी शक्ति का आत्मविश्वास ही नए असम की ताकत है। बीजेपी की डबल इंजन सरकार तो पूरे देश की बहनों की पहली पसंद है। असम में भी हम यही अनुभव कर रहे हैं। अच्छा मैं कुछ काम बताने चाहता हूं। सारे बूथ के कार्यकर्ताओं को बताता हूं। डिंपी जी के माध्यम से बताता हूं।

देखिए कुछ काम तो करने ही करने हैं। आप सभी कार्यकर्ता Namo ऐप में जरूर जाए। आपका मोबाइल में Namo ऐप तो होना ही चाहिए। वहां बहुत विस्तार से आपको हर वो जानकारी मिलेगी जो हमारी सरकार महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए कर रही है। डबल इंजन सरकार का क्या फायदा होता है? यह आप जरूर लोगों को बताएं। जैसे असम की हमारी सरकार अरुणोदय योजना चला रही है। इसके तहत 40 लाख बहनों को आर्थिक सहायता दी है। ऐसे ही केंद्र सरकार लखपति दीदी अभियान चला रही है। इसके तहत देश में 3 करोड़ लखपति दीदी बन चुकी है। इनमें असम में भी अनेक बहने लखपति बन चुकी हैं। और अब हमने 6 करोड़ लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य रखा है। 3 करोड़ और बनाने का। आप एक काम यह भी कीजिएगा कि आपके बुथ में जो लखपति दीदी है उनके वीडियो रिकॉर्ड कीजिए। उनका अनुभव सुनाइए और औरों को भी प्रेरित करेगा। उसको सोशल मीडिया पर डालिए। डिजिटल जमाना है तो क्या हम लाभार्थी बहनों के साथ कोई शॉर्ट वीडियो वगैरह बना सकते हैं? जिसमें हमारी बहनें अपना एक्सपीरियंस शेयर करें और वीडियो हम जन-जन तक पहुंचाएं। साथियों आने वाले दिनों में किसी महिला कार्यकर्ता के घर पर मोहल्ले की सभी महिलाओं की छोटी-छोटी बैठक हो। हमें ऐसे प्रयास करना चाहिए। हमारी बहुत सारी बहनें हस्तशिल्प से जुड़ी हैं। बिहू के अवसर पर तो गमोसा और अन्य पारंपरिक वस्त्रों का महत्व और बढ़ जाता है। ऐसे पारंपरिक वस्त्रों को उपहार में देने का विशेष अभियान हमें चलाना चाहिए। यह वोकल फॉर लोकल के प्रति बीजेपी के कमिटमेंट को भी आगे बढ़ाएगा। एक आग्रह मुझे बूथ की सभी बहनों से करना है। उन्हें कहना है कि वे जिम्मेदारी ले कि वोटिंग के दिन परिवार का हर सदस्य बूथ पर पहुंच जाए। वोटिंग से जुड़ी पर्ची और अन्य जरूरी दस्तावेज भी समय पर तैयार रहे। सुनिश्चित करने के लिए भी बहनें उनको प्रोत्साहित करना चाहिए। और मैंने जैसा कहा जब पोलिंग के जाए ना तो 20-20 25-25 लोगों के जुलूस निकाल के जाना चाहिए। गाने बजाने चाहिए, ढोल बजाने चाहिए। एक उत्सव का माहौल बनाना चाहिए। चलिए डिंपी जी बहुत अच्छा लगा। अब आगे बढ़ते हैं। कौन बात करेंगे?

देवराज जी- नमस्कार आदरणीय प्रधानमंत्री जी। मैं देवराज सिग्नार बात कर रहा हूं।

पीएम- देवराज जी, आपको बहुत- बहुत नमस्कार। क्या करते हो बताइए जरा।

देवराज जी- मैं 108 बोकाजन कंस्टिच्युएंसी जिला कारबंग से बात कर रहा हूं। और मैं पिछले 15 सालों से बीजेपी के कार्यकर्ता हूं। और मैं अभी हम मेरा खुद एक इंजीनियर हू और मैं अभी इलेक्शन का माहौल है। मैं जोरों शोरों से भाजपा के लिए दिन रात करके मैं मेहनत कर रहा हूं।

पीएम- अच्छा देवराज जी अभी इन दिनों घुसपैठियों का विषय असम के लिए तो जीवन मरण का इशू बन चुका है। कांग्रेस ने किस प्रकार से घुसपैठियों को जमीन पर कब्जे करने दिए। बट हमारी कोशिश है कि हमारे नौजवानों के रोजगार कोई आकर के छीन ना ले। हमारी कोशिश है कि हमारे गरीब आदिवासी भाई बहनों के दलित भाई बहनों की जमीन कोई छीन ना ले आकर के विदेशों से। हमारी कोशिश ये है कि हमारी माताओं बहनों के सम्मान को कोई लूट ना ले। और इसलिए घुसपैठियों से देश को मुक्त करना बहुत जरूरी है। और सरकार लगातार कोशिश कर रही है। सरकार यह जो प्रयास कर रही है उसका लोगों में क्या चर्चा है? जी बताइए..

देवराज जी- ये डिस्ट्रिक्ट बॉर्डर जैसे हमारे कारग जिला में घुसपैठ हमेशा से लोगों की बहुत बड़ी चिंता रही है। पहली बात तो यह है कि घुसपैठिये जितने भी यहां कारबिंग जिला में हमारे यहां डिस्ट्रिक्ट में जितने भी यहां पे घुसपैठिए घुसे हैं ये ये कांग्रेसियों ने पिछले 15 सालों से अपना वोट बैंक बना के रखा है। तो जैसे हमारे जो मुख्यमंत्री हेमंत जी ने जो पांच सालों से जो कोशिश है घुसपैठियों को यहां से खदेड़ने के लिए या बाहर निकालने के बांग्लादेशियों को वापस भेजने की जो कोशिश है उसमें हम सब जितने भी यहां पे असमिया लोग है हम लोग दिन-रात मेहनत करके उनको अपना सर्वस्व मानते हैं इसको। जैसे कि हम लोगों का जमीन पे ये लोग कब्जा करते ये हमारे जमीन को छीन रहे हैं। हमारे रोटी मकान को छीन रहे हैं। हर चीज को मतलब कि हिस्सा मांग रहे हैं। तो इस चीज को हम लोग कभी एक्सेप्ट नहीं कर सकते।

पीएम- देवराज जी आपने बहुत अच्छे से स्थिति को समझाया और पुरानी परिस्थितियां कैसी थी लेकिन इसको अभी भी नई पीढ़ी को बताना पड़ेगा और इससे क्या-क्या संकट आने वाले हैं यह भी समझाना होगा। यह जो घुसपैठियों का मुद्दा है यह सिर्फ चुनाव का मुद्दा नहीं है। यह असम की पहचान, असम की सुरक्षा देश की सुरक्षा का मुद्दा है। एक किसानों की जमीन, आदिवासियों की, गरीबों की रोजीरोटी, महिलाओं की सुरक्षा से जुड़ा विषय है। आप देखिए कांग्रेस ने बीते दशकों में जो अवैध कब्जे होने दिए, इससे असम में कितनी परेशानी हुई है। हमारे आस्था के, सांस्कृति के स्थानों तक को उन्होंने छोड़ा नहीं है। किसानों की जमीनों को नहीं छोड़ा गया। जहां घुसपैठिए बढ़ जाते हैं, वह मेहनत मजदूरी के काम पर कब्जा कर लेते हैं। इसलिए जरूरतमंद लोगों को काम मिलना कम हो जाता है।

साथियों,

मैं असम के सभी कार्यकर्ताओं से कहना चाहूंगा, आपके पास इनके इलाके के अपने ब्लॉक, अपने जिले में जो अवैध कब्जे हैं उनकी पूरी जानकारी होनी चाहिए। उससे क्या क्या असर वहां बीते दशकों में हुआ है। इस के विषय में विस्तार से लोगों को बताया जाए। आपके क्षेत्र में घुसपैठियों से जो पीड़ित लोग रहे उनके वीडियो आप शेयर कर सकते हैं। हमें लोगों को बताना है कि कांग्रेस ने अतिक्रमण दिया और बीजेपी अधिकार दे रही है। और मैं पक्का मानता हूं असम के लोग अतिक्रमण से मुक्ति चाहते हैं और अधिकार पाना चाहते हैं। आप सभी को एक काम और करना है। उन लोगों की सूची बनानी है जो वोटर तो हैं लेकिन जिन्हें बूथ तक जाने में असुविधा हो सकती है। ऐसे लोगों को बूथ तक पहुंचाने के लिए आपको व्यवस्था करनी होगी। जो युवा वोटर्स अपने गृह क्षेत्र से बाहर हैं। उन्हें घर आकर वोट देने के लिए प्रेरित करना है। कई साथी कामकाज के लिए भी अन्य राज्यों में गए होंगे या गांव से शहर गए होंगे। उनको भी अभी से संपर्क करके बुलाना है और उनके परिवार को भी कहना चाहिए कि वो बच्चों बाहर है तो फोन करें, चिट्ठी लिखें, बुलाएं। चलिए मुझे बहुत अच्छा लगा। देवराज जी आपसे बात कर करके आइए। अब हमारे साथ कौन बात करेगा?

अर्जुन जी- नमस्कार मोदी जी मैं अर्जुन ग्वाला बोल रहा हूं।

पीएम- अर्जुन जी नमस्ते बताइए अर्जुन जी अपने विषय में पहले तो जानना चाहूंगा।

अर्जुन जी- मोदी जी मैं अर्जुन गोवाला असम 86 तिनसुकिया विधानसभा अलकादा चाय बागान के निवासी हूं। मैं संघ से जुड़ा हुआ व्यक्ति हूं। बचपन से ही मैं संघ से प्यार करता हूं। और वर्तमान में बीजेपी तिनसुकिया किसान मोर्चा का सेक्रेटरी हूं और माकुम विधानसभा क्षेत्र का प्रभारी हूं। और मेरा घर चाय बागान में है। और मैं छोटा सा एक गसरी दुकान है और छोटा सा एक चाय बागान है। चाय का खेती करता हूं।

पीएम- बच्चे पढ़ते हैं अर्जुन जी।

अर्जुन जी- हां, मेरा दो बच्चा है। एक सिक्स में गया है और एक छोटा है मोदी जी। एक साल दो महीना हुआ है। अच्छा।

पीएम- लेकिन बच्चों को पढ़ाना पक्का। हां। बीजेपी का काम भी करना है लेकिन घर को भी संभालना है और बच्चों को तो जरूर पढ़ाना है। अच्छा, अर्जुन जी श्री कृष्ण को ग्वाला कहते थे। आप तो अर्जुन गोवाता है। यह हमारे जो चाय बागान के साथी हैं। उनसे मेरी भी कई बार बात हुई है। पिछले दिनों गुवाहाटी में भी मुझे कई लोगों से मिलने का मौका मिला। भूमि के पट्टे मिलने से बहुत खुश है। और मैं मानता हूं जब जमीन का पट्टा मिल जाता है ना तो जीवन का एक बहुत बड़ा आधार मिल जाता है। घर को पता मिल जाता है। जिंदगी को पता मिल जाता है। और पूरी परिवार की भावी पीढ़ी के लिए एक सुरक्षा का कवच बन जाता है। यह कोई एक टुकड़ा नहीं है। यह आपके बच्चों के भविष्य का एक मजबूत नीव है। आप जब हमारे चाय बागान के लोगों को मिलते हैं तो उनके अंदर इन विषयों की क्या चर्चा होती है? वो क्या कहते हैं?

अर्जुन जी- मोदी जी पहले तो जो आपके इतिहास जो सिद्धांत है जो चाय बागान के लोग 200 साल से असम में रह रहा था वो आपके ये सिद्धांत के लिए बहुत-बहुत आभारी है और ये जो चाय बागान के मदद भाइयों बहनों को पिता को जो जमीन का अधिकार मिला है उसमें वो लोग बहुत खुश है। कांग्रेस के समय में जब उन लोगों को बगान में जब किसी समस्या का विषय में बोला जाता था तो उस समय में वो लोग बोलता था यह कुंभानी करेंगे हम लोग करने वाला नहीं है। सिर्फ उन लोगों का भूत समय नहीं याद पड़ता था। नहीं तो उन्नयन के दिख में उन उन्नति के दिख में चाहे जनगष्ठी जो आदिवासी भाई बहन है उसको याद नहीं करता था। यह जमीन का जो अधिकार मिला है, इसमें हम लोगों का माता-पिता भाइयों बहनों आपसे बहुत खुश है और आपसे बहुत आभार व्यक्त करते हैं मोदी जी।

पीएम- अर्जुन जी मुझे बहुत अच्छा लगा आपसे बात करके। आप लोगों को पता ही है कुछ दिन पहले ही जब मैं गुवाहाटी आया था तब एक बड़ा प्रोग्राम हुआ था। उसमें टी गार्डन के साथियों को भूमि पट्टे सौंपने का अवसर मिला था। और जब एक चाय वाले को चाय बागान के लोगों को भूमि के पट्टे देने का जो आनंद होता है ना वह अद्भुत होता है जो मुझे था। अच्छा जब भी हम चाय बागानों के बारे में बात करते हैं तो देश के हर नागरिक को असम की चाय पर गर्व होता है। असम वालों को तो स्वाभाविक है डबल गर्व होता है। इसलिए टी गार्डन में काम करने वाले परिवारों को हम उसी गौरव के भाव से देखते हैं।

साथियों,

अगले कुछ दिनों में आपको एक और काम करना है। चाय बागानों में जो बूथ है वहां के कार्यकर्ता एक दिन किसी चाय के बागान में ही टी गार्डन वर्कर्स की एक टिफिन बैठक करिए या फिर चाय पर चर्चा कीजिए। ये सब क्या कहते हैं? खुलकर के उनको सुनिए। और पुराने उनकी क्या मुसीबतें थी? कैसे उनको असहाय छोड़ दिया गया था। कंपनियों के भरोसे जीने के लिए मजबूर कर दिया था। यह सारी बातें पुराने लोग बताएंगे और उसमें नई पीढ़ी को भी बिठाइए। बीते 10 सालों में सरकार ने बहुत कुछ किया है। लेकिन अभी भी हमसे लोगों को बहुत सारी अपेक्षाएं हैं।

जब आप उनकी बात सुनेंगे और हमें भी उससे नया काम करने का उत्साह मिलेगा। उनको भी विश्वास होगा कि उनकी बात सरकार तक पहुंच रही है और इसके कारण हम कर भी पाएंगे। हमको बताइए कि जो भूमि दस्तावेज है यह केवल कागज का टुकड़ा नहीं है। यह हजारों परिवारों के सुरक्षित भविष्य की गारंटी है। यह काम बीजेपी सरकार इसलिए कर रही है ताकि चाय बागान में कठिन परिश्रम करने वाले साथियों को सम्मान का जीवन मिले। इन साथियों को जमीन का पट्टा मिलने से कौन-कौन सी योजना का लाभ मिलेगा? इसकी पूरी सूची उन्हें बताइए। एक काम आप और कर सकते हैं। आप पश्चिम बंगाल में जो टी गार्डन के साथी है उनकी खराब स्थिति के बारे में जानकारी दें। वहां बीजेपी सरकार नहीं है। बंगाल की सरकार तो केंद्र की योजनाओं तक चाय बागान के साथियों तक नहीं पहुंचने देती। पता नहीं उनकी क्या दुश्मनी है। यह दिखाता है कि डबल इंजन की बीजेपी सरकार कितनी जरूरी है। अगर सिर्फ कोई असम के टी गार्डन के काम और बंगाल के टी गार्डन के काम कंपैरिजन करेंगे तो सब कहेंगे कि असम के टी गार्डन के लोगों के लिए बहुत काम हुआ है और बंगाल के टी गार्डन के लोगों के लिए कुछ नहीं हुआ है। तो लोगों को फर्क साफ-साफ नजर आएगा। अर्जुन जी बहुत अच्छा लगा। मैं समझता हूं कि आप लोग चुनाव के काम में बहुत व्यस्त है। मुझे ज्यादा समय लेना नहीं चाहिए। आखिर में कुछ बातें मैं जरूर बताना चाहता हूं और उसके बाद हमारा ये ऑडियो ब्रिज का कार्यक्रम पूरा करेंगे।

सारे प्रदेश के हजारों कार्यकर्ताओं से आज मैं बात कर रहा हूं। जिन पांच साथियों से बात की है, वह एक प्रकार से आपके ही प्रतिनिधि है। मतलब कि मैं असम के हजारे छोटे-मोटे सब कार्यकर्ताओं के साथ बात कर रहा हूं। और आपसे जो बातें सुनी उसमें जो आपने जो विश्वास जताया है. यह सुनने वाले किसी का भी विश्वास और मजबूत कर देता है। और अब यह तय है कि इस बार असम वोटिंग के रिकॉर्ड तो तोड़ेगा ही। हमें विजय के भी नए रिकॉर्ड बनाना है। और विजय के नए रिकॉर्ड बनाना है तो उसकी पहली शर्त है बूथ में नए रिकॉर्ड बनाना। ज्यादा से ज्यादा मतदान का रिकॉर्ड। मतदान करने वाले लोग भाजपा के लिए वोट करें, एनडीए के लिए वोट करें। यह पक्का करना चाहिए। असम के कोने-कोने से एक ही आवाज सुनाई दे रही है। आखो ए बार बीजेपी सरकार

आपने बीते 10 11 वर्षों में बार-बार शानदार काम किया है। बीजेपी के हर कार्यकर्ता ने अपने दायित्व को हर बार अच्छे से निभाया है। एनडीए के हर साथी के साथ मिलकर आपने हर उम्मीदवार को विजय बनाने की भरपूर मेहनत की है। अब मतदान के लिए बहुत कम समय है। इसलिए आने वाले 8-10 दिनों में आपको दिन रात जुड़ना है। पहले मतदान फिर जलपान यही हमारा लक्ष्य होना चाहिए। देखिए साथियों आप ही मेरे हाथ, पैर, कान, नाक आप ही सब है मेरे लिए तो आपको अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखना होगा इन दिनों गर्मी बहुत है। पानी बहुत पीजिए। आप कितनी मेहनत क्यों ना करें लेकिन पानी का बोतल साथ ही रखिए। पानी जरूर पीजिए ताकि आप इस समय इस गर्मी में के समय में इतनी दौड़ धूप में कोई कठिनाई पैदा ना हो। एक बार फिर आप सभी को मेरी ढेर सारी शुभकामनाएं। बहुत-बहुत धन्यवाद।