Loknayak JP and Nanaji Deshmukh devoted their lives towards the betterment of our nation: PM
Loknayak JP was deeply popular among youngsters. Inspired by Gandhiji’s clarion call, he played key role during ‘Quit India’ movement: PM
Loknayak JP fought corruption in the nation. His leadership rattled those in power: Prime Minister
Initiatives have to be completed on time and the fruits of development must reach the intended beneficiaries, says PM Modi
Strength of a democracy cannot be restricted to how many people vote but the real essence of a democracy is Jan Bhagidari: PM Modi

ପ୍ରଧାନମନ୍ତ୍ରୀ ଶ୍ରୀ ନରେନ୍ଦ୍ର ମୋଦୀ ଆଜି ନୂଆଦିଲ୍ଲୀର ପୁସାଠାରେ ଭାରତୀୟ କୃଷି ଗବେଷଣା ପରିଷଦ ପରିସରରେ ଆୟୋଜିତ ନାନାଜୀ ଦେଶମୁଖଙ୍କ ଜନ୍ମ ଶତବାର୍ଷିକୀ ସମାରୋହର ଉଦ୍ଘାଟନୀ ଉତ୍ସବରେ ଯୋଗ ଦେଇଛନ୍ତି ।

ପ୍ରଧାନମନ୍ତ୍ରୀ ଏହି ଅବସରରେ “ପ୍ରଯୁକ୍ତି ଏବଂ ଗ୍ରାମୀଣ ଜୀବନ” ବିଷୟବସ୍ତୁ ଉପରେ ଆୟୋଜିତ ଏକ ପ୍ରଦର୍ଶନୀ ପରିଦର୍ଶନ କରିଥିଲେ । ଏହି ପ୍ରଦର୍ଶନୀରେ ଗ୍ରାମୀଣ ବିକାଶ ମନ୍ତ୍ରଣାଳୟର ଉତ୍ତମ କାର୍ଯ୍ୟଶୈଳୀ ଏବଂ ପ୍ରୟୋଗ ସହିତ ଯୋଜନା ଏବଂ ଉପକ୍ରମଗୁଡ଼ିକ ପ୍ରଦର୍ଶିତ ହୋଇଛି । ସେ କେତେକ ନବସୃଜନକାରୀ ଏବଂ ହିତାଧିକାରୀଙ୍କ ସହିତ ମଧ୍ୟ ଆଲୋଚନା କରିଥିଲେ ।

 

 

ପ୍ରଧାନମନ୍ତ୍ରୀ ନାନାଜୀ ଦେଶମୁଖ ଏବଂ ଲୋକମାନ୍ୟ ଜୟପ୍ରକାଶ ନାରାୟଣଙ୍କୁ ପୁଷ୍ପମାଲ୍ୟ ଅର୍ପଣ କରି ଶ୍ରଦ୍ଧାଞ୍ଜଳି ଜଣାଇଥିଲେ । ସେ ନାନାଜୀ ଦେଶମୁଖଙ୍କ ଉପରେ ଏକ ସ୍ମାରକୀ ଡାକ ଟିକେଟ ଉନ୍ମୋଚନ କରିଥିଲେ ।

ପ୍ରଧାନମନ୍ତ୍ରୀ ଦୀଶା ପୋର୍ଟାଲକୁ ମଧ୍ୟ ଉନ୍ମୋଚନ କରିଥିଲେ । ସାଂସଦ ଏବଂ ବିଧାୟକମାନଙ୍କ ପାଇଁ ଏହି ସ୍ମାର୍ଟ ପ୍ରଶାସନିକ ପୋର୍ଟାଲ ବିକଶିତ କରାଯାଇଛି । ଏହି ଗୋଟିଏ ପୋର୍ଟାଲ ମାଧ୍ୟମରେ ସେମାନେ ନିଜ ନିର୍ବାଚନ ମଣ୍ଡଳୀରେ ବିଭିନ୍ନ ମନ୍ତ୍ରଣାଳୟ ଅଧୀନରେ କାର୍ଯ୍ୟକାରୀ ହେଉଥିବା ଯୋଜନା ଏବଂ କାର୍ଯ୍ୟକ୍ରମଗୁଡିକର କାର୍ଯ୍ୟକାରୀତା ତଦାରଖ କରିପାରିବେ । ବର୍ତ୍ତମାନ ସୁଦ୍ଧା 20ଟି ମନ୍ତ୍ରଣାଳୟର 41ଟି କାର୍ଯ୍ୟକ୍ରମ ଏବଂ ଯୋଜନାର ତଥାବଳୀକୁ ଏହି ପୋର୍ଟାଲ ସହ ସମନ୍ୱିତ କରାଯାଇସାରିଲାଣି ।

 

ସେ ମଧ୍ୟ ‘ଗ୍ରାମ ସମ୍ବାଦ’ କାର୍ଯ୍ୟକ୍ରମର ଶୁଭାରମ୍ଭ କରିଥିଲେ । ଏହି ନାଗରିକ କୈନ୍ଦ୍ରିକ ମୋବାଇଲ ଆପ୍ ଗ୍ରାମୀଣ ଭାରତର ନାଗରିକମାନଙ୍କୁ ସେବା ଯୋଗାଇଦେବ ଏବଂ ସଶକ୍ତ କରିପାରିବ । ଏହି ଆପ୍ ମାଧ୍ୟମରେ ଗ୍ରାମ ପଞ୍ଚାୟତସ୍ତରରେ ନାଗରିକମାନେ ବିଭିନ୍ନ ଗ୍ରାମୀଣ ବିକାଶ କାର୍ଯ୍ୟକ୍ରମର ସୂଚନା ଗ୍ରହଣ କରିପାରିବେ । ବର୍ତ୍ତମାନ ଏହି ଆପ୍ ରେ ଗ୍ରାମୀଣ ବିକାଶ ମନ୍ତ୍ରଣାଳୟର 7ଟି କାର୍ଯ୍ୟକ୍ରମ ସନ୍ନିବେଶିତ ହୋଇଛି ।

ପ୍ରଧାନମନ୍ତ୍ରୀ ଡିଜିଟାଲ ମାଧ୍ୟମରେ 11ଟି ଗ୍ରାମୀଣ ସ୍ୱରୋଜଗାର ତାଲିମ ପ୍ରତିଷ୍ଠାନ (ଆରଏସ୍ଇଟିଆଇ) କୋଠା ଏବଂ ଭାରତୀୟ କୃଷି ଗବେଷଣା ପରିଷଦଠାରେ ଏକ ଫେନୋମିକ୍ସ ପ୍ଳାଣ୍ଟକୁ ଉଦ୍ଘାଟନ କରିଥିଲେ ।

ଏହି ଅବସରରେ ସେଠାରେ ଉପସ୍ଥିତ ସ୍ୱୟଂ ସହାୟକ ଗୋଷ୍ଠୀ ପ୍ରତିନିଧି, ପଞ୍ଚାୟତ ପ୍ରତିନିଧି, ଜଳ ସଂରକ୍ଷଣ କ୍ଷେତ୍ରର ନବସୃଜନକାରି ଏବଂ ପ୍ରଧାନମନ୍ତ୍ରୀ ଆବାସ ଯୋଜନାର ହିତାଧିକାରୀମାନଙ୍କ ସମେତ 10 ହଜାରରୁ ଉର୍ଦ୍ଧ୍ଵ ଲୋକଙ୍କୁ ପ୍ରଧାନମନ୍ତ୍ରୀ ଉଦ୍ବୋଧନ ଦେଇଥିଲେ ।

ସେ କହିଥିଲେ ଯେ ଆଜି ଦୁଇ ଜଣ ମହାନ ନେତାଙ୍କ ଜନ୍ମବାର୍ଷିକୀ । ନାନାଜୀ ଦେଶମୁଖ ଏବଂ ଲୋକନାୟକ ଜୟପ୍ରକାଶ ନାରାୟଣ ରାଷ୍ଟ୍ରର କଲ୍ୟାଣ ପାଇଁ ସେମାନଙ୍କ ଜୀବନକୁ ସମର୍ପି ଦେଇଥିଲେ ।

ପ୍ରଧାନମନ୍ତ୍ରୀ କହିଥିଲେ ଯେ, ଲୋକନାୟକ ଜୟପ୍ରକାଶ ନାରାୟଣ ଯୁବକମାନଙ୍କ ମଧ୍ୟରେ ବିଶେଷ ଲୋକପ୍ରିୟ ଥିଲେ । ଲୋକନାୟକ ଜୟପ୍ରକାଶ ନାରାୟଣଙ୍କ ଭଳି ଡ.ଲୋହିଆ ମଧ୍ୟ ‘ଭାରତ ଛାଡ଼’ ଆନ୍ଦୋଳନରେ ମହାତ୍ମାଗାନ୍ଧୀଙ୍କ ଦ୍ୱାରା ଅନୁପ୍ରାଣିତ ହୋଇ ସକ୍ରିୟ ଭାବେ କାର୍ଯ୍ୟ କରିଥିଲେ । ପ୍ରଧାନମନ୍ତ୍ରୀ କହିଥିଲେ ଯେ ଲୋକନାୟକ ଜୟପ୍ରକାଶ ନାରାୟଣ କେବେ ବି କ୍ଷମତା ରାଜନୀତି ପ୍ରତି ଆଗ୍ରହୀ ନଥିଲେ ଏବଂ ଦୁର୍ନୀତି ବିରୋଧରେ ସର୍ବଦା ଲଢ଼ିଥିଲେ ।

 ସେ କହିଥିଲେ ଯେ ନାନାଜୀ ଦେଶମୁଖ ଗ୍ରାମୀଣ ବିକାଶ ପ୍ରତି ନିଜକୁ ସମର୍ପି ଦେଇଥିଲେ । ଗ୍ରାମଗୁଡ଼ିକୁ ଆତ୍ମନିର୍ଭରଶୀଳ ଏବଂ ଦାରିଦ୍ର୍ୟମୁକ୍ତ କରିବା ଲାଗି ସେ ପ୍ରୟାସ କରିଥିଲେ ।

 

ପ୍ରଧାନମନ୍ତ୍ରୀ କହିଥିଲେ ଯେ ସହରାଂଚଳରେ ଥିବା ସୁବିଧାଗୁଡ଼ିକ ଗ୍ରାମାଂଚଳରେ ମଧ୍ୟ ଉପଲବ୍ଧ ହେବା ଆବଶ୍ୟକ । ସେ କହିଥିଲେ ଯେ ଗଣତନ୍ତ୍ରର ବାସ୍ତବ ମହକ ଜନଭାଗିଦାରୀ ଏବଂ ଲୋକମାନଙ୍କୁ ସହରାଂଚଳ ଏବଂ ଗ୍ରାମାଂଚଳର ବିକାଶ ସହିତ ଯୋଡ଼ିବାରେ ରହିଛି । ସରକାରଙ୍କ ସହିତ ନିୟମିତ ବାର୍ତ୍ତାଳାପର ଆବଶ୍ୟକତା ରହିଛି ବୋଲି ସେ କହିଥିଲେ ।

ପରିମଳ ସୁବିଧାର ଅଭାବ ଗ୍ରାମାଂଚଳର ବିକାଶରେ ବାଧକ ସାଜୁଥିବା ଉଲ୍ଲେଖ କରି ପ୍ରଧାନମନ୍ତ୍ରୀ ସରକାର କାହିଁକି ଗ୍ରାମାଂଚଳରେ ଶୌଚାଳୟ ନିର୍ମାଣ କରିବାକୁ ଚାହୁଁଛନ୍ତି ସେ ସମ୍ପର୍କରେ କହିଥିଲେ ।

Click here to read the full text speech

Explore More
ଶ୍ରୀରାମ ଜନ୍ମଭୂମି ମନ୍ଦିର ଧ୍ଵଜାରୋହଣ ସମାରୋହରେ ପ୍ରଧାନମନ୍ତ୍ରୀଙ୍କ ଅଭିଭାଷଣ

ଲୋକପ୍ରିୟ ଅଭିଭାଷଣ

ଶ୍ରୀରାମ ଜନ୍ମଭୂମି ମନ୍ଦିର ଧ୍ଵଜାରୋହଣ ସମାରୋହରେ ପ୍ରଧାନମନ୍ତ୍ରୀଙ୍କ ଅଭିଭାଷଣ
India’s Defence Exports Explode: ₹40,000 Crore Milestone Signals a New Manufacturing Era

Media Coverage

India’s Defence Exports Explode: ₹40,000 Crore Milestone Signals a New Manufacturing Era
NM on the go

Nm on the go

Always be the first to hear from the PM. Get the App Now!
...
Text of PM’s remarks during inauguration of Swaminarayan Hindu Temple in Paris
September 06, 2026

पूज्य महंत स्वामी, फ्रांस सरकार के सम्मानित प्रतिनिधिगण, उपस्थित अतिथिगण, इंडियन कम्युनिटी के मेरे साथी, देश दुनिया से जुड़े सभी हरि भक्त, देवियों और सज्जनों, जय स्वामीनारायण!

आज फ्रांस की राजधानी पेरिस में भव्य स्वामीनारायण मंदिर का लोकार्पण हो रहा है। यह लोकार्पण भारत और फ्रांस के सांस्कृतिक संबंधों का नया युग स्तंभ है। पूज्य संत जनों और सनातन परंपरा के श्रेष्ठ जनों के आशीर्वाद के साथ आज इस लोकार्पण का मंच ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ के भाव का मंच बन गया है। भगवान स्वामीनारायण की कृपा और हमारे संतों का स्नेह, संतों का आशीर्वाद, मेरा सौभाग्य है कि मुझे ऐसे पुण्य अवसरों से जुड़ने का अवसर हमेशा मिलता रहता है। आज भी मैं भले ही पेरिस में आप सबके बीच उपस्थित नहीं हूं, लेकिन मन से और हृदय से, मैं स्वयं को आपके बीच ही अनुभव कर रहा हूं।

साथियों,

आज इस अवसर पर मैं परम पूज्य प्रमुख स्वामी जी महाराज का भी श्रद्धापूर्वक स्मरण करता हूं। प्राचीन काल में भारत का जो सांस्कृतिक आध्यात्मिक वैभव था, उन्होंने उसके पुनर्जागरण का एक अभियान शुरू किया था। आज उसका प्रकाश यूरोप समेत पूरी दुनिया में फैल रहा है। 2024 में अबू धाबी में भव्य मंदिर का लोकार्पण हुआ था। आज वहां हजारों लोग दर्शन करने जाते हैं और अब यहां पेरिस में स्वामीनारायण मंदिर का निर्माण सृजन की यह निरंतरता, यह संतों की संकल्प शक्ति का ही प्रमाण है। मैं पुनीत कार्य के लिए पूज्य महंत स्वामी का आभार प्रकट करता हूं, मैं उनके चरणों में प्रणाम करता हूं। मैं BAPS स्वामीनारायण संस्था को और करोड़ों हरि भक्तों को इस अवसर पर हृदय की गहराई से बधाई देता हूं।

साथियों,

BAPS के माध्यम से जब अलग-अलग देश में मंदिरों की प्राण प्रतिष्ठा होती है, तो वहां भारत के प्राचीन विचार और मानवीय मूल्य भी साथ-साथ ही जाते हैं और भारत का विचार कहता है ‘समानं मनः सह चित्तमेषाम्’ अर्थात हमारे मन समान हो, हमारे हृदय साथ जुड़े। इसलिए आज जब फ्रांस में इतना भव्य मंदिर बनकर तैयार हुआ है, यह फ्रांस की विविधता को तो समृद्ध करेगा ही, इससे भारत और फ्रांस के सांस्कृतिक संबंधों को भी ऊर्जा मिलेगी।

साथियों,

बीते वर्षों में भारत और फ्रांस के संबंध नई ऊंचाइयों तक पहुंचे हैं। मेरे मित्र, प्रेसिडेंट मैक्रों के साथ मिलकर दोनों देश एक Special Global Strategic Partnership बना रहे हैं। Technology, AI और Defence से लेकर Space और Climate Action तक हम एक नई गति और नई ऊर्जा के साथ मिलकर के आगे बढ़ रहे हैं। हम 2026 को India-France Year of Innovation के रूप में भी सेलिब्रेट कर रहे हैं। भारत-फ्रांस की ये Strategic Partnership इसलिए भी खास है, क्योंकि ये हमारे पुराने सांस्कृतिक-राजनैतिक सम्बन्धों की मजबूत बुनियाद पर टिकी है। इतिहास गवाह है, फ्रांस में भारतीय सैनिकों के बलिदान का इतिहास आज भी मन-मंदिर में जीवित है। भाषा से जुड़े विषयों में रुचि रखने वाले लोग यह भी जानते हैं कि फ्रेंच स्कॉलर्स ने संस्कृत को लोकप्रिय बनाने में कितनी अहम भूमिका निभाई है। रामकृष्ण परमहंस और स्वामी विवेकानंद पर रोमाँ रोलाँ की की लेखनी हमारी सोसाइटीज़ को और करीब लाई है। पेरिस से पुडुचेरी के अरबिंदो आश्रम तक 'The mother' की spiritual journey, उसने कितने ही भारतीय और फ्रेंच साधकों को inspire किया है।

साथियों,

दशकों पहले श्रील प्रभुपाद स्वामी भी फ्रांस आए थे। इस्कॉन के जरिए भारत फ्रांस के बीच आध्यात्मिक सम्बन्धों का नया अध्याय उन्होंने शुरू किया था। आज योग भी भारत-फ्रांस के people to people कनेक्ट का एक माध्यम बन चुका है। 'इंटरनेशनल योगा डे' पर एफिल टॉवर के सामने से आने वाली तस्वीरें फ्रांस में योग की लोकप्रियता का उदाहरण बनती हैं और अब BAPS के इस भव्य मंदिर के जरिए, हमारे उन सांस्कृतिक सम्बन्धों में एक नया अध्याय जुड़ रहा है।

साथियों,

इन दिनों, भारत फ्रांस Joint Ventures की संभावनाओं पर बातें होती हैं। स्वामीनारायण मंदिर ने इस संभावना में भी एक नया आयाम जोड़ा है। यह मंदिर 'मेड इन इंडिया' है और 'बिल्ट इन फ्रांस' है। इसके काफी पत्थरों को भारत में तराशा गया है। भारत की प्राचीन प्रतिभा यहाँ फ्रांस में आधुनिक इंजीनियरिंग से आकर जुड़ चुकी है। पेरिस में इस भव्य मंदिर ने आकार लिया है। इसलिए, मैं आशा करता हूँ, यह मंदिर सदियों तक भारत और फ्रांस के बीच सहयोग और संभावनाओं का भी प्रतीक बनकर उभरेगा।

साथियों,

स्वामीनारायण मंदिर हमेशा से भक्ति के साथ-साथ सेवा का माध्यम भी रहे हैं। मुझे बताया गया है, यह मंदिर भी सेवा प्रकल्पों का वैसा ही केंद्र बनेगा। मुझे विश्वास है कि यहाँ से भारतीय संस्कृति के जो स्वर निकलेंगे, उनका लाभ पूरे यूरोप में लोगों को मिलेगा। भविष्य में मुझे जब भी समय मिलेगा, मैं इस मंदिर में दर्शन करने का प्रयास अवश्य करूंगा। इन्हीं शब्दों के साथ, एक बार फिर आज के इस लोकार्पण समारोह में सम्मिलित सभी अतिथिगणों को, सभी परिवारों को, सभी हरि भक्तों को और पूरी Indian Diaspora को मेरी ओर से इस शुभारंभ पर्व की ढेरों शुभकामनाएं!

बहुत-बहुत धन्यवाद!

मर्सी बोकू!

जय स्वामीनारायण!