21st century is the century of knowledge, says Prime Minister Modi
India has the potential to become the manufacturing hub for the world: PM Narendra Modi
In history, whenever knowledge has been the driving force of the world, India has provided leadership: PM Modi
Today India is demographically the youngest country in the world, with young dreams full of energy: PM Narendra Modi
The current generation of youngsters don't want to be job seekers. The youth wants to be job creators: PM Modi
Global agencies say India is the fastest growing economy in the world: PM

मंच पर विराजमान सभी वरिष्‍ठ महानुभाव, नौजवान साथियों, और इस समय online नॉर्थ ईस्‍ट के कई विद्यार्थी भी इस समारोह में शरीक हैं। मैं उन सबका भी स्‍वागत करता हूं।

सब से पहले मैं आपसे क्षमा चाहता हूँ क्योंकि मुझे आने में बहुत विलंब हुआ, क्‍योंकि आज सुबह सिक्किम से मुझे चलना था। लेकिन weather साथ नहीं दे रहा था। बार बार समय बदलना पड़ रहा था। लेकिन आखिकार पहुंच ही गया। कभी-कभी देर होती है, लेकिन पहुंचता हूं। आज यहां दो महत्‍वपूर्ण कार्यक्रम हैं। एक तो IIIT का, नये भवन का शिलान्‍यास और दूसरा ICT Academy की शुरूआत। हम सुनते आए हैं कि 21वीं सदी हिन्‍दुस्‍तान की सदी है, लेकिन 21वीं सदी हिन्‍दुस्‍तान की सदी है इसका कारण क्‍या है। तो पूरा विश्‍व ये मानता है कि 21वीं सदी ये ज्ञान की सदी है। information की सदी है और इसलिए information , knowledge के क्षेत्र में जो अगुवाई करेगा वो दुनिया की अगुवाई करेगा। वो लीडरशिप करेगा और दूसरा महत्‍वपूर्ण कारण है आज भारत विश्‍व का सबसे युवा देश है। 65 प्रतिशत जनसख्‍ंया इस देश में 35 साल से कम उम्र की है, कई तो 35 से भी नीचे है। जिस देश मे सदियों से यह परंपरा रही है कि जब-जब मानव जाति नाजुक दौर से गुजरी है हमेशा हमेशा भारत ने नेतृत्‍व किया है और 21वीं सदी में demographic dividend ये हमारी ताकत है इतनी बड़ी संख्‍या में जिस देश के पास नौजवान हों उसके सपने भी नौजवान होते हैं और जवान सपनों में समर्पण का भाव भी होता है, ऊर्जा भी होती है। भारत इस परिस्थिति का फायदा कैसे उठाए, इस अवसर को भारत किस प्रकार से दुनिया के विश्‍व के पटल पर एक शक्ति के रूप में उभर सकें। ये अवसर भी है, चुनौती भी है और जिंदगी बिना चुनौतियों के कभी सफल नहीं होती है। जो चुनौतियों को पार करता है वो ही अवसर को पाता है और वही अवसर को सिद्धि में परिवर्तित कर सकता है। आज पूरे विश्‍व में जितने भी मानको पर चर्चा होती है चाहे वर्ल्‍ड बैंक का रिपोर्ट देख लीजिए। IMF का रिपोर्ट देख लीजिए। credit rating agency, global level की कुछ कहें, एक बात साफ साफ उभर करके आती है और सर्व दूर से एक ही प्रकार से आती है और वो ये कि आज बड़े देशों की सबसे तेज गति से आगे बढ़ने वाली कोई economy है। वो economy का नाम है हिन्‍दुस्‍तान।

आए दिन खबरें आती है कि दुनिया में ये हो रहा है। वो हो रहा है। पूरे विश्‍व में आर्थिक मंदी का माहौल है। विश्‍व आर्थिक संकट में घिरा हुआ है। ऐसे संकट के काल में एक अकेला हिन्‍दुस्‍तान अपने पैरों पर स्थिर खड़ा है और तेज गति से आगे भी बढ़ रहा है और ये भी विश्‍व मानता है कि आने वाले दिनों में भारत इससे भी अधिक गति से आगे बढ़ने वाला है। ये जो अवसर आया है। इस अवसर का फायदा अगर उठाना है। तो हमें हमारी युवा शक्ति पर ध्‍यान केन्द्रित करना होगा और इसलिए सरकार ने जिन बातों पर ध्‍यान दिया है वे बिखरी हुई चीजें नहीं हैं। सरकार में हैं कुछ करना पड़ता है चलो कुछ करते रहें ऐसा भी नहीं हैं। एक के बाद एक कदम एक दूसरे के साथ जुड़े हुए हैं, interlinked हैं। एक के बाद एक कदम अंतिम परिणाम को प्राप्‍त करने का अवसर है। पहली बार इस देश में skill development एक अलग department बनाया गया। पहले क्‍या था। हर department अपने-अपने तरीके से skill department का काम करता था। लेकिन जब इतने बड़े department के एक कोने में skill department चलता है तो उसमें focus नहीं रहता था। चीजें चलती थी, कागज पर सब दिखता था। लेकिन धरती पर नजर नहीं आता था। हमने अलग skill department बनाया और पूरे देश में 21वीं सदी के अनुकूल किस प्रकार का मैन पावर तैयार करना चाहिए, किस प्रकार का Human resource development करना चाहिए और न सिर्फ हिन्‍दुस्‍तान वैश्विक संदर्भ में global perspective में आप कल्‍पना कर सकते हैं जब दुनिया पूरी बूढ़ी हो, दुनिया के पास पैसे हों। उद्योग कारखाने लगे हुए हों। लेकिन चलाने के लिए नौजवान न हो तो क्‍या होगा। पूरी विश्‍व को 2030 के बाद बहुत बड़ी मात्रा में human resource की आवश्‍यकता पड़ने वाली है। globally man power पहुंचाने का काम अगर कोई कर सकता है तो हिन्‍दुस्‍तान कर सकता है। दूनिया के हर कोने में भारत का नौजवान जा करके उस देश के जीवन में बहुत बड़ा योगदान कर सकता है। वो दिन दूर नहीं है। जब पूरे global requirement को अगर ध्‍यान में रखें तो आज से हमारा प्रयास है कि हिन्‍दुस्‍तान में वो Human resource development हो वो man power तैयार हो जो आने वाले दिनों में global requirement को पूरी कर पाएं।

दूसरी तरफ भारत सिर्फ सेवादार बना रहे क्‍या ? ये बात हमें मंजूर नहीं है और इसलिए हमारे देश में Make in India का अभियान चलाया है। आज देश पेट्रोलियम पैदावार के बाद सबसे ज्‍यादा इम्‍पोर्ट जो पहली तीन चार चीजें हैं देश में जिसमे हमारी सबसे ज्‍यादा धन हमारे विदेश में जाता है। उसमें एक है electronic goods का import। चाहे लैपटॉप हो, चाहे मोबाइल फोन हो, चाहे electronic medical devices हो। अब जिस देश में ऐसी बढि़या IIT हो जिस गुवाहाटी के IT के, जो गुवाहाटी यहाँ के IIT के कारण पहचाना जाता है। यहां के IIT ने गुवाहाटी को एक नई पहचान दी है। लेकिन उस देश में electronic goods भी हमें इम्‍पोर्ट करना पड़े । ये अच्‍छी बात है क्‍या। Thermometer भी बाहर से लाना है। बीपी कम हुआ ठीक हुआ नहीं ठीक हुआ वो भी foreign का instrument तय करेगा क्‍या।

दोस्‍तों ये चीजे बदलनी है। मैं आज आपके बीच आया हूं चुनौती को ले करके, कम से कम electronic goods ये तो हम बना सकते हैं ऐसा नहीं हम दुनिया को दे सकते हैं। इस देश के पास टेलेंट की कमी नहीं है, इरादों की भी कमी नहीं है। हर नौजवान के पास कुछ न कुछ करने का इरादा है तो क्‍यों न हम हमारे देश की इस requirement को ध्यान में रखते हुए मेक इन इंडिया की बात को आगे बढ़ाएं। और दुनिया ने भारत के लोगों का लोहा माना है। आज सिलिकॉन मेले में जाइए। Address तो यूएसए का है। लेकिन चेहरा हिन्‍दुस्‍तानी है। हर तीसरी चौथी कंपनी का सीईओ हिन्‍दुस्‍तानी है। 50 परसेंट 60 परसेंट काम करने वाले नौजवान हिन्‍दुस्‍तानी है। इस देश के पास टेलेंट भी है।

भारत ने Mars Mission किया। ऑरबिट में हम पहुंचे। दूनिया में हम पहले देश हैं जो Mars Orbit Mission में पहले ही ट्रायल में सफल हो गये। दुनिया के और देशों में सफलता 20-20-25 बार ट्रायल करने पर मिली। भारत को पहली बार मिल गई। और खर्चा कितना आप गुवाहाटी में एक किलोमीटर ऑटो रिक्‍शा में जाए तो दस रुपया लगता होगा। हम मार्स मिशन में सिर्फ सात रुपए किलोमीटर पर गए। हॉलीवुड की फिल्‍म का जो खर्चा होता है उससे कम खर्चें में हम मार्स मिशन पर पहुंचे। ये कैसे संभव हुआ। हमारे नौजवानों के talent के कारण, तजुर्बे के कारण। कुछ कर गुजरने के इरादे के कारण। जिस देश के पास ये सामर्थ्‍य हो तो वो देश का प्रधानमंत्री make in India का सपना क्‍यों न देखे। हमारा दूसरा क्षेत्र है Defence. क्‍या भारत अपनी सुरक्षा के लिए आजादी के 70 साल के बाद भी औरों पर dependent रहे। अश्रु गैस है न अश्रु गैस, रोने के लिए भी tear gas, वो भी बाहर से लाना पड़ता है। ये स्‍थिति अब बदलनी है दोस्‍तों। हम हमारी रक्षा के लिए जो आवश्‍यकताएं हैं वो तो हम बनाएं। इतना ही नहीं दुनिया को हम supply भी करे, ये ताकत हमारी होनी चाहिए।

हम मोबाइल के बिना जी नहीं सकते और आप में से कई लोग है, मेरे से जुड़े हुए हैं, फेसबुक पर, ट्वीटर पर। कुछ लोग मेरी Narendra Modi app पर भी कुछ न कुछ लिखते रहते हैं गुवाहाटी से। लेकिन मोबाइल फोन बाहर से लाना पड़ता है और इसलिए दोस्‍तों हमारे जो IITs है। हमारी IIIT है। हमारी technical institutions है। वहां make in India का मुझे माहौल create करना है। अभी से विद्यार्थी के मन में विचार होना चाहिए कि मैं शस्‍त्रार्थों की दुनिया में भारत को ये अमानत दूंगा ताकि दुनिया हमें कुछ न कर पाए।

हम ICT के क्षेत्र में जा रहे हैं। ICT हम व्‍यापार-धंधे के लिए नए-नए सॉफ्टवेयर बनाने की ताकत create कर रहे हैं, लेकिन दुनिया के सामने सबसे बड़ी चुनौती है और सारी दुनिया के सामने है। वो चुनौती है, cyber security की। हर कोई परेशान है, कहीं कोई हाई-जैक तो नहीं कर लेगा। मेरी पूरी फाइल चली तो नहीं जाएगी। मैं research कर रहा हूं, कोई उठा तो नहीं ले जाएगा। दुनिया को कोई ठप्‍प तो नहीं कर देगा। हवाई जहाज उड़ता होगा और cyber attack करके उसको वही रोक दिया जा सकता है और फिर वो नीचे ही आएगा। ये संकट है, दुनिया डरी हुई है। technology ने जहां-जहां पर हमको पहुंचाया है तो उसके साथ हमारे सामने चुनौतियां भी आई हैं। क्‍या हमारे विद्यार्थी, हमारे नौजवान विश्‍व को cyber security देने के लिए नेतृत्‍व नहीं कर सकते क्‍या? अगर दुनिया में किसी को भी cyber security की जरूरत होगी, भारत के नौजवान पर उसको भरोसा करना पड़ेगा, तब जाकर के उसका काम होगा। ये नहीं कर सकते क्‍या?

और इसलिए दोस्‍तों skill development से लेकर के make in India. दो दिन पहले आप में से कई लोग शायद मेरे साथ वीडियो कॉंफ्रेंस में जुड़े हुए होंगे। जब मैं दो दिन पहले दिल्‍ली में ‘स्‍टार्ट-अप’ का आरंभ किया। जब मैं पहले ‘स्‍टार्ट-अप’ कह रहा था तो कुछ लोगों को तो पता ही नही पड़ता, क्‍या कह रहा है ये। ‘स्‍टार्ट-अप इंडिया, स्‍टैंड-अप इंडिया’. जब लालकिले से हमने कहा तो ऐसे ही आकर के चला गया विषय। पता ही नहीं चला, कहीं रजिस्‍टर्ड ही नहीं हुआ। लेकिन अभी जब ‘स्‍टार्ट-अप’ का कार्यक्रम हुआ, लाखों नौजवानों ने रजिस्‍ट्रेशन कराया। एक नया mood बना है, देश में। नौजवान सोच रहा है मैं रोजगार के लिए apply नहीं करूंगा, मैं अपने पैरों पर नई चीज खोजकर के दुनिया के बाजार में ले आऊंगा, नए तरीके से ले आऊंगा।

‘स्‍टार्ट-अप’ का एक माहौल बना है। वर्तमान में जो नई पीढ़ी है वो job-seeker नहीं बनना चाहती है, वो job-creator बनना चाहती है और सरकार ‘स्‍टार्ट-अप इंडिया, स्‍टैंड-अप इंडिया’ के भरोसे उसे बल देना चाहती है और इसलिए अभी आपने देखा होगा, हमने कई नई योजनाएं घोषित की है, नए initiative लिए हैं क्‍योंकि भारत दुनिया का ‘स्‍टार्ट-अप’ का capital बन सकता है जिस देश के पास इतनी talent हो, वो दुनिया का capital बन सकता है और मैंने ये देखा, आपने भी शायद टीवी पर इन चीजों को ध्‍यान से देखा होगा, नहीं देखा होगा तो इंटरनेट पर सारी चीजें इन दिनों available है। 22-25-27-30 साल के नौजवान अरबों-खरबों रुपयों का व्‍यापार करने लगे हैं और दो-तीन साल में करने लगे हैं और पांच हजार- दस हजार- 25 हजार लोगों को रोजगार दे रहे हैं just अपना दिमाग और technology का उपयोग करते हुए।

और जमाना App का है, हर चीज का App बनता है और दुनिया जुड़ जाती है। मैं भी अब जुड़ गया लेकिन हमारे नौजवानों की जो बुद्धिमत्‍ता है वो कुछ कर गुजरने की बुद्धिमत्‍ता है और इसलिए skill development से लेकर के ‘स्‍टार्ट-अप’ तक की यात्रा Make in India. पहले Make for India और बाद में Make for Global, ये requirement को पूरा करने के लिए हम आगे बढ़ना चाहते हैं और उसमें technical force एक बहुत बड़ी आवश्‍यकता है। हर हाथ में हुनर होना चाहिए। कभी-कभी हम लोग रोते बैठते हैं। हमारे देश में कुछ ये भी आदत है। समस्‍याएं होती है। हर किसी के नसीब में मक्‍खन पर लकीर करने का सौभाग्‍य नहीं होता है। पत्‍थर पर लकीर करने की ताकत होनी चाहिए और अगर हम अपने आप को युवा कहते हैं तो उसकी पहली शर्त यह होती है कि वो मक्‍खन पर लकीर करने के रास्‍ते न ढूंढे, वो पत्‍थर पर लकीर करने की ताकत के लिए सोचे। अगर यही इरादे लेकर के हम चलते हैं तो हम अपनी तो जिन्‍दगी बनाते हैं लेकिन कइयों की जिन्‍दगी में बदलाव लाने के लिए कारण भी बनते हैं।

तो भारत में हमारी जितनी भी academic institutions है, technical institutions है, हमारी Universities है। चाहे हमारी आईआईटी हो या हमारी आईटीआई हो, छोटी से छोटी technical इकाई से लेकर के, top most technical venture, इन दोनों के अंदर एकसूत्रता होनी चाहिए और हम देश की आवश्‍यकताओं की पूर्ति करने के लिए सामर्थ्‍यवान बने। समस्‍याएं अपने आप उसका रास्‍ता भी खोजकर के आती है। कोई समस्‍या ऐसी नहीं होती जिसकी कोख में समाधान भी पलता न हो। सिर्फ पहचानने वाला चाहिए। हर समस्‍या की कोख में समाधान भी पलता है, उस समाधान को पकड़ने वाला चाहिए, समस्‍या का समाधान निकल आता है।

मैं चाहूंगा मेरे नौजवान चीजों को देखे तो उसके मन में पहले ये न आए कि यार ऐसा क्यों है। जो सो है सो है, यार ये है ऐसा करेंगे तो ये नहीं रहेगा। हम बदलाव ला सकते हैं। हमारी विचार प्रक्रिया को हम बदले।

पिछले दिनों राष्‍ट्रपति भवन में स्‍कूल के कुछ बच्‍चों को बुलाया गया था। हमारे राष्‍ट्रपति जी ऐसे लोगों को काफी encourage करने के अनेक कार्यक्रम करते रहते हैं। तो उन्‍होंने कहा, मोदी जी एक बार आइए, जरा देखिए। आठवीं, नौवीं, दसवीं कक्षा के बच्‍चे थे और मैंने देखा कि ‘स्‍वच्‍छ भारत’ के विषय में technology क्‍या role कर सकती है, कौन-सी innovative equipment create किया जा सकता है जो स्‍वच्‍छ भारत के लिए next requirement जो process है उसको पूरा कर सके। आठवीं-नौवी कक्षा के बच्‍चों ने ऐसी-ऐसी चीजें बनाई थी, मैं हैरान था। इसका मतलब यह हुआ कि हर समस्‍या का समाधान करने के लिए हमारे पास सामर्थ्‍य होता है।

अगर इंडिया के पास million problem है तो हिन्‍दुस्‍तान के पास billion brain भी है और इसलिए दोस्‍तों नया भवन तो मिलेगा। हिन्‍दुस्‍तान के पूर्वी छोर में ये ज्ञान का सूरज ऐसा तेज होकर के निकले कि पूरे हिन्‍दुस्‍तान को ज्ञान से प्रकाशित कर दे, ये मेरी आप सबको शुभकामनाएं हैं। बहुत-बहुत धन्‍यवाद।

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April 20, 2026

ಗೌರವಾನ್ವಿತ ಅಧ್ಯಕ್ಷ ಲೀ,

ಎರಡೂ ದೇಶಗಳ ಗಣ್ಯ ಪ್ರತಿನಿಧಿಗಳೇ,

ಮಾಧ್ಯಮ ಮಿತ್ರರೇ,

ನಮಸ್ಕಾರ!

ಅಧ್ಯಕ್ಷ ಲೀ ಅವರನ್ನು ಭಾರತಕ್ಕೆ ಅವರ ಮೊದಲ ಭೇಟಿಯಲ್ಲಿ ಸ್ವಾಗತಿಸಲು ನನಗೆ ತುಂಬಾ ಸಂತೋಷವಾಗಿದೆ. ಅವರ ಜೀವನವು ಅಭ್ಯುದಯ, ಸೇವೆ ಮತ್ತು ಸಮರ್ಪಣೆಯ ಸ್ಪೂರ್ತಿದಾಯಕ ಉದಾಹರಣೆಯಾಗಿ ನಿಂತಿದೆ. ಅವರು ಎದುರಿಸಿದ ಪ್ರತಿಯೊಂದು ಸವಾಲು ಜನರಿಗೆ ಸೇವೆ ಸಲ್ಲಿಸುವ ಅವರ ಸಂಕಲ್ಪವನ್ನು ಮತ್ತಷ್ಟು ಬಲಪಡಿಸಿದೆ. ಇದು ಭಾರತಕ್ಕೆ ಅವರ ಮೊದಲ ಭೇಟಿಯಾಗಿದ್ದರೂ, ನಮ್ಮ ಮೊದಲ ಭೇಟಿಯಿಂದಲೇ ಅವರ ದೇಶದ ಮೇಲಿನ ಪ್ರೀತಿ ಮತ್ತು ಬಾಂಧವ್ಯ ಸ್ಪಷ್ಟವಾಗಿದೆ.

 

ಸ್ನೇಹಿತರೇ,

ಎಂಟು ವರ್ಷಗಳ ಅಂತರದ ನಂತರ ಕೊರಿಯಾ ಅಧ್ಯಕ್ಷರ ಭಾರತ ಭೇಟಿ ಬಹಳ ಮಹತ್ವದ್ದಾಗಿದೆ. ಪ್ರಜಾಪ್ರಭುತ್ವ ಮೌಲ್ಯಗಳು, ಮಾರುಕಟ್ಟೆ ಆರ್ಥಿಕತೆ ಮತ್ತು ಕಾನೂನಿನ ಆಡಳಿತದ ಗೌರವವು ನಮ್ಮ ಎರಡೂ ರಾಷ್ಟ್ರಗಳ ಡಿಎನ್‌ಎಯಲ್ಲಿ ಆಳವಾಗಿ ಹುದುಗಿದೆ. ಇಂಡೋ-ಪೆಸಿಫಿಕ್ ಪ್ರದೇಶದ ಬಗ್ಗೆ ನಮಗೆ ಸಾಮಾನ್ಯ ಸಮಾನ ದೃಷ್ಟಿಕೋನವಿದೆ. ಈ ಹಂಚಿಕೆಯ ತತ್ವಗಳ ಆಧಾರದ ಮೇಲೆ, ಕಳೆದ ದಶಕದಲ್ಲಿ ನಮ್ಮ ಸಂಬಂಧವು ಹೆಚ್ಚು ಕ್ರಿಯಾತ್ಮಕ ಮತ್ತು ವ್ಯಾಪಕವಾಗಿದೆ.

ಮತ್ತು ಇಂದು, ಅಧ್ಯಕ್ಷ ಲೀ ಅವರ ಭೇಟಿಯೊಂದಿಗೆ, ಈ ವಿಶ್ವಾಸಾರ್ಹ ಪಾಲುದಾರಿಕೆಯನ್ನು ಭವಿಷ್ಯದ ಪಾಲುದಾರಿಕೆಯಾಗಿ ಪರಿವರ್ತಿಸಲು ನಾವು ಸಜ್ಜಾಗಿದ್ದೇವೆ. ಚಿಪ್‌ಗಳಿಂದ ಹಡಗುಗಳವರೆಗೆ, ಪ್ರತಿಭೆಯಿಂದ ತಂತ್ರಜ್ಞಾನದವರೆಗೆ ಮತ್ತು ಪರಿಸರದಿಂದ ಶಕ್ತಿಯವರೆಗೆ, ಎಲ್ಲಾ ವಲಯಗಳಲ್ಲಿ ಸಹಕಾರಕ್ಕಾಗಿ ನಾವು ಹೊಸ ಅವಕಾಶಗಳನ್ನು  ಕಂಡುಕೊಳ್ಳುತ್ತೇವೆ. ಒಟ್ಟಾಗಿ, ನಮ್ಮ ಎರಡೂ ರಾಷ್ಟ್ರಗಳ ಪ್ರಗತಿ ಮತ್ತು ಸಮೃದ್ಧಿಯನ್ನು ನಾವು ಖಚಿತಪಡಿಸಿಕೊಳ್ಳುತ್ತೇವೆ.

ಸ್ನೇಹಿತರೇ,

ಭಾರತ ಮತ್ತು ಕೊರಿಯಾ ನಡುವಿನ ದ್ವಿಪಕ್ಷೀಯ ವ್ಯಾಪಾರ ಇಂದು ಇಪ್ಪತ್ತೇಳು ಶತಕೋಟಿ ಡಾಲರ್‌ಗಳನ್ನು ತಲುಪಿದೆ. ಇದನ್ನು 2030ರ ವೇಳೆಗೆ ಐವತ್ತು ಶತಕೋಟಿ ಡಾಲರ್‌ಗಳಿಗೆ ಕೊಂಡೊಯ್ಯಲು ನಾವು ಇಂದು ಹಲವಾರು ಪ್ರಮುಖ ನಿರ್ಧಾರಗಳನ್ನು ತೆಗೆದುಕೊಂಡಿದ್ದೇವೆ.

ಎರಡೂ ದೇಶಗಳ ನಡುವಿನ ಹಣಕಾಸಿನ ಹರಿವನ್ನು ಸುಗಮಗೊಳಿಸಲು, ನಾವು ಭಾರತ-ಕೊರಿಯಾ ಹಣಕಾಸು ವೇದಿಕೆಯನ್ನು ಪ್ರಾರಂಭಿಸಿದ್ದೇವೆ. ವ್ಯಾಪಾರ ಸಹಕಾರವನ್ನು ಬಲಪಡಿಸಲು, ನಾವು ಕೈಗಾರಿಕಾ ಸಹಕಾರ ಸಮಿತಿಯನ್ನು ಸ್ಥಾಪಿಸಿದ್ದೇವೆ. ನಿರ್ಣಾಯಕ ತಂತ್ರಜ್ಞಾನಗಳು ಮತ್ತು ಪೂರೈಕೆ ಸರಪಳಿಗಳಲ್ಲಿ ಸಹಯೋಗವನ್ನು ಹೆಚ್ಚಿಸಲು, ನಾವು ಆರ್ಥಿಕ ಭದ್ರತಾ ಸಂವಾದವನ್ನು ಪ್ರಾರಂಭಿಸುತ್ತಿದ್ದೇವೆ.

ಕೊರಿಯನ್ ಕಂಪನಿಗಳು, ವಿಶೇಷವಾಗಿ ಸಣ್ಣ ಮತ್ತು ಮಧ್ಯಮ ಗಾತ್ರದ ಕಂಪನಿಗಳು, ಭಾರತಕ್ಕೆ ಪ್ರವೇಶಿಸಲು ಅನುಕೂಲವಾಗುವಂತೆ, ನಾವು ಕೊರಿಯನ್ ಕೈಗಾರಿಕಾ ವಸಾಹತನ್ನು (ಪಟ್ಟಣವನ್ನು)  ಸಹ ಸ್ಥಾಪಿಸುತ್ತೇವೆ. ಇದಲ್ಲದೆ, ಮುಂದಿನ ವರ್ಷದೊಳಗೆ, ನಾವು ಭಾರತ-ಕೊರಿಯಾ ವ್ಯಾಪಾರ ಒಪ್ಪಂದವನ್ನು ಮೇಲ್ದರ್ಜೆಗೇರಿಸುತ್ತೇವೆ.

 

ಸ್ನೇಹಿತರೇ,

ಇಂದು, ನಾವು ಮುಂದಿನ ದಶಕದ ಯಶೋಗಾಥೆಗಳಿಗೆ ಅಡಿಪಾಯ ಹಾಕುತ್ತಿದ್ದೇವೆ. ಎ.ಐ., ಸೆಮಿಕಂಡಕ್ಟರ್‌ಗಳು ಮತ್ತು ಮಾಹಿತಿ ತಂತ್ರಜ್ಞಾನದಲ್ಲಿ ನಮ್ಮ ಪಾಲುದಾರಿಕೆಯನ್ನು ಮತ್ತಷ್ಟು ಗಾಢವಾಗಿಸಲು, ನಾವು ಭಾರತ-ಕೊರಿಯಾ ಡಿಜಿಟಲ್ ಸೇತುವೆಯನ್ನು ಪ್ರಾರಂಭಿಸುತ್ತಿದ್ದೇವೆ. ಹಡಗು ನಿರ್ಮಾಣ, ಸುಸ್ಥಿರತೆ, ಉಕ್ಕು ಮತ್ತು ಬಂದರುಗಳಂತಹ ಕ್ಷೇತ್ರಗಳಲ್ಲಿ ನಾವು ತಿಳುವಳಿಕಾ ಒಡಂಬಡಿಕೆಗಳಿಗೆ  ಸಹಿ ಹಾಕುತ್ತಿದ್ದೇವೆ.

ಸಂಸ್ಕೃತಿ ಮತ್ತು ಸೃಜನಶೀಲ ಕೈಗಾರಿಕೆಗಳಲ್ಲಿ ಪರಸ್ಪರ ಸಹಕಾರದ ಮೂಲಕ, ನಾವು ಚಲನಚಿತ್ರ, ಅನಿಮೇಷನ್ ಮತ್ತು ಗೇಮಿಂಗ್‌ನಲ್ಲಿಯೂ ಹೊಸ ಮೈಲಿಗಲ್ಲುಗಳನ್ನು ಸ್ಥಾಪಿಸುತ್ತೇವೆ. ಇಂದಿನ ವ್ಯಾಪಾರ ವೇದಿಕೆಯು ಈ ಅವಕಾಶಗಳನ್ನು ಸ್ಪಷ್ಟ ಫಲಿತಾಂಶಗಳಾಗಿ ಪರಿವರ್ತಿಸಲು ವೇದಿಕೆಯಾಗಿ ಕಾರ್ಯನಿರ್ವಹಿಸುತ್ತದೆ.

ಸ್ನೇಹಿತರೇ,

ಭಾರತ ಮತ್ತು ಕೊರಿಯಾ ಸಾವಿರಾರು ವರ್ಷಗಳ ಹಿಂದಿನ ಸಾಂಸ್ಕೃತಿಕ ಸಂಬಂಧಗಳನ್ನು ಹಂಚಿಕೊಂಡಿವೆ. ಎರಡು ಸಹಸ್ರಮಾನಗಳ ಹಿಂದಿನ ಅಯೋಧ್ಯೆಯ ರಾಜಕುಮಾರಿ ಸುರಿರತ್ನ ಮತ್ತು ಕೊರಿಯಾದ ರಾಜ ಕಿಮ್ ಸುರೋ ಅವರ ಕಥೆಯು ನಮ್ಮ ಹಂಚಿಕೆಯ ಪರಂಪರೆಯ ಭಾಗವಾಗಿದೆ.

ಇಂದು, ಕೆ-ಪಾಪ್ ಮತ್ತು ಕೆ-ನಾಟಕಗಳು ಭಾರತದಲ್ಲಿ ಹೆಚ್ಚು ಜನಪ್ರಿಯವಾಗುತ್ತಿವೆ. ಅದೇ ರೀತಿ, ಕೊರಿಯಾದಲ್ಲಿಯೂ ಭಾರತೀಯ ಸಿನಿಮಾ ಮತ್ತು ಸಂಸ್ಕೃತಿಯ ಮನ್ನಣೆ ಬೆಳೆಯುತ್ತಿದೆ. ಅಧ್ಯಕ್ಷ ಲೀ ಸ್ವತಃ ಭಾರತೀಯ ಸಿನಿಮಾದ ಅಭಿಮಾನಿಯಾಗಿರುವುದು ನಮಗೆ ಸಂತೋಷ ತಂದಿದೆ. ಈ ಸಾಂಸ್ಕೃತಿಕ ಸಂಪರ್ಕವನ್ನು ಮತ್ತಷ್ಟು ಬಲಪಡಿಸಲು, ನಾವು 2028 ರಲ್ಲಿ ಭಾರತ-ಕೊರಿಯಾ ಸ್ನೇಹ ಉತ್ಸವವನ್ನು ಆಯೋಜಿಸುತ್ತೇವೆ.

ಅದೇ ಸಮಯದಲ್ಲಿ, ಜನರಿಂದ ಜನರಿಗೆ ಸಂಬಂಧಗಳನ್ನು ಮತ್ತಷ್ಟು ಬಲಪಡಿಸಲು, ನಾವು ಶಿಕ್ಷಣ, ಸಂಶೋಧನೆ ಮತ್ತು ಪ್ರವಾಸೋದ್ಯಮದಲ್ಲಿ ಸಹಕಾರವನ್ನು ಉತ್ತೇಜಿಸುತ್ತೇವೆ.

ಸ್ನೇಹಿತರೇ,

ಜಾಗತಿಕ ಉದ್ವಿಗ್ನತೆಯ ಈ ಸಮಯದಲ್ಲಿ, ಭಾರತ ಮತ್ತು ಕೊರಿಯಾ ಒಟ್ಟಾಗಿ ಶಾಂತಿ ಮತ್ತು ಸ್ಥಿರತೆಯ ಸಂದೇಶವನ್ನು ರವಾನಿಸುತ್ತವೆ. ಇಂದು ಕೊರಿಯಾ ಅಂತರರಾಷ್ಟ್ರೀಯ ಸೌರ ಒಕ್ಕೂಟ ಮತ್ತು ಇಂಡೋ-ಪೆಸಿಫಿಕ್ ಸಾಗರ ಉಪಕ್ರಮಕ್ಕೆ ಸೇರುತ್ತಿರುವುದು ನಮಗೆ ಸಂತೋಷ ತಂದಿದೆ. ನಮ್ಮ ಹಂಚಿಕೆಯ ಪ್ರಯತ್ನಗಳ ಮೂಲಕ, ನಾವು ಶಾಂತಿಯುತ, ಪ್ರಗತಿಪರ ಮತ್ತು ಎಲ್ಲರನ್ನೂ ಒಳಗೊಂಡ ಇಂಡೋ-ಪೆಸಿಫಿಕ್‌ಗೆ ಕೊಡುಗೆ ನೀಡುವುದನ್ನು ಮುಂದುವರಿಸುತ್ತೇವೆ.

 

ಸಮಕಾಲೀನ ಜಾಗತಿಕ ಸವಾಲುಗಳನ್ನು ಎದುರಿಸಲು ಜಾಗತಿಕ ಸಂಸ್ಥೆಗಳಲ್ಲಿ ಸುಧಾರಣೆಗಳು ಅಗತ್ಯವೆಂದು ನಾವು ಒಪ್ಪುತ್ತೇವೆ.

ಘನತೆವೆತ್ತರೇ,

ಸುಮಾರು ನೂರು ವರ್ಷಗಳ ಹಿಂದೆ, ಭಾರತದ ಮಹಾನ್ ಕವಿ ರವೀಂದ್ರನಾಥ ಟ್ಯಾಗೋರ್ ಅವರು ಕೊರಿಯಾವನ್ನು "ಪೂರ್ವದ ದೀಪ" ಎಂದು ಕರೆದರು. ಇಂದು, 2047ರ ವೇಳೆಗೆ ಅಭಿವೃದ್ಧಿ ಹೊಂದಿದ ಭಾರತದ ನಮ್ಮ ದೃಷ್ಟಿಕೋನವನ್ನು ಸಾಕಾರಗೊಳಿಸುವತ್ತ ನಾವು ಕೆಲಸ ಮಾಡುತ್ತಿರುವಾಗ, ಕೊರಿಯಾ ಈ ಪ್ರಯಾಣದಲ್ಲಿ ಪ್ರಮುಖ ಪಾಲುದಾರನಾಗಿ ನಿಂತಿದೆ.

 

ನಮ್ಮ ಪಾಲುದಾರಿಕೆಯ ಮೂಲಕ, ನಮ್ಮ ಎರಡು ರಾಷ್ಟ್ರಗಳ ಮಾತ್ರವಲ್ಲದೆ ಇಡೀ ಪ್ರಪಂಚದ ಪ್ರಗತಿ ಮತ್ತು ಸಮೃದ್ಧಿಗೆ ದಾರಿ ಮಾಡಿಕೊಡೋಣ.

ತುಂಬಾ ಧನ್ಯವಾದಗಳು.