India is poised to continue its trajectory of success: PM Modi

Published By : Admin | November 17, 2023 | 20:44 IST
PM Modi urges the media to educate the public about the problematic use of artificial intelligence in generating 'deepfake' content
PM Modi expresses the belief that India's advancement is unstoppable, and the nation is poised to continue its trajectory of success
PM Modi reiterates his commitment to transform India into a 'Viksit Bharat,' emphasizing that these are not merely words but a ground reality

आप सब को दीपावली के पावन पर्व की अनेक-अनेक शुभकामनाएं। छठ का पर्व भी अब राष्ट्रीय पर्व बन गया है तो वो और खुशी की बात है। मैं देख रहा हूँ कि पहले कुछ राज्यों के पर्व ज्यादातर वहीं तक सीमित रहते थे। लेकिन इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की दुनिया का जैसे-जैसे प्रभाव बढ़ा है, उसका एक बात नजर आ रही है जैसे नवरात्रि- मैं देख रहा हूं कि ग्लोबल हो। दुर्गा पूजा- तो ग्लोबल हो गई है, इवेन काइट फ्लाइंग.. तो एक अच्छा संकेत है। छठ पूजा भी मैं देख रहा हूँ कि हिंदुस्तान के हर कोने में उसका महात्म्य है। ये ठीक है कि उसके मूलभूत तत्वों की चर्चा बहुत कम होती है। क्योंकि इसमें सबसे बड़ा संदेश ये है कि, कहा तो जाता है कि मनुष्य का स्वभाव है उगते सूरज की पूजा करना, लेकिन छठ पूजा उत्सव है जो डूबते सूरज की पूजा करना भी सीखाता है। और ये जीवन के लिए बहुत बड़ा संदेश है उसमें। तो इन सभी त्योहारों की मेरी तरफ से आप सबको बहुत-बहुत शुभकामनाएं हैं। बहुत कठिन समय से दुनिया गुजरी। कोविड ने, मानव जाति के इतिहास में जो बहुत बड़ी चीजें दर्दनाक है, उसमें से वो एक कालखंड रहा। और उस कालखंड के कारण हमारी जो व्यवस्थाएं होती है, जो नियमितता होती है, वह भी खंडित हुईं। तो पहले तो मैं जब यहां पार्टी का मैं संगठन का काम करता था, 11- अशोक रोड में रहता था, तब भी ऐसे अवसर पर सबसे मिलना हो जाता था। प्रधानमंत्री बनने के बाद भी एक मौका मिलता था लेकिन वो भी बीच में बहुत बड़ा गैप हो गया। लेकिन मैं देख रहा हूँ कि इस बार पूरी तरह, वो जो दबाव था कोविड का, पूरी तरह मुक्ति का आनंद इस बार उत्सवों में नजर आया है। सब दूर उत्सव उसी प्रकार से मनाए गए हैं।

लेकिन उस कालखंड में हमने कुछ साथियों को भी खोया। मैं व्यक्तिगत रूप से जिन पत्रकार मित्रों को जानता था, उनको खोया, कुछ उनके परिवारजनों को खोया, वो भी मुझे जानकारी मिली। और जब मैं इन दिनों, एक बात मैं जानता नहीं कि आज ऐसा विषय मुझे कहना चाहिए कि नहीं कहना चाहिए। लेकिन मैं अनुभव कर रहा हूं कि पिछले दिनों छोटी आयु के कुछ पत्रकारों को हमने खोया है। वैसे तो हमलोग दुनिया को पढ़ाते हैं, हम पढ़े-लिखे हैं तभी तो पढ़ाते हैं। लेकिन 40 के बाद कम से कम एक रेग्युलर मेडिकल चेकअप होना चाहिए। और जैसे हम लोगो की पब्लिक लाइफ है तो आपकी भी उतनी ही गति से पब्लिक लाइफ तनावपूर्ण और आपा-धापी की रहती है। हम कोई ऐसी व्यवस्था विकसित कर सकते हैं कि जिसमें मेडिकल चेकअप के लिए सरकार भी कोई व्यवस्था करे, आपके बिजनेस हाउसेस हैं वो भी कोई व्यवस्था करे, लेकिन 40 के बाद, हमारे फील्ड के जितने भी साथी हैं, उनके परिवारजन भी हैं। हम एक रेगुलर मेडिकल चेकअप का, क्योंकि मैं सचमुच में बहुत हैरान हूं कि 40-50 की आयु के लोग को हमने खो दिए हैं। ओर ये बड़ा ही दर्दनाक था जी। और कोविड वाले ही नहीं इसके सिवाय वाले भी खोए... तो ये मन को, जिसको जानते हैं, सालों से जानते हैं, कभी मिले नहीं, लेकिन देखते है उनकी बातों को सुनते हैं, कभी पढ़ते हैं तो एक लगाव तो होता ही है, वह आत्मीय संबंध होता है। और उनका जाना एक तरह से मन को पीड़ा देता है। मैं चाहूंगा की मेरी इंडिया टीम और आपके कुछ लोग मिलकर के इस पर हम कुछ अगर बना सकते हैं तो मुझे खुशी होगी कोई व्यवस्था हम विकसित करें।

साथियों,
ये माहौल इन दिनों इतना विविधता भरा है। और मैंने देखा है कि दीपावली की पर्व में रसोई घर भी बहुत बीज़ी होता है। भांति-भांति की चीजे बनती है। और मैं देख रहा हूँ कि इस बार खबरों के रसोई जो है, उसमें भी भरपूर मसाला है। क्योंकि पांच राज्य तो आपके हाथ में है ही है। वर्ल्ड कप भी है और आप में से कुछ लोगों को संकट की घड़ी में भी जाना पड़ा है। रिपोर्टिंग के लिए युद्ध भूमि में जाना पड़ा है। तो मसाला भरपूर है जी। लेकिन उस सोशल मीडिया भी नया मसाला आपको परोसता रहता है तो उसके कारण आपको जो रिपोर्टर्स हैं, उनके लिए मुसीबत बहुत बढ़ गई है। वरना गांव या दूर दराज जिलों में जो रिपोर्टर थे। वो ही आपके लिए अल्टीमेट वर्ल्ड था उसने जो भेजा आप मानते थे यार अपना आदमी है सही बताया होगा। लेकिन उसी समय एक सोशल मीडिया में नजर पड़ता है उस डिस्ट्रिक्ट से खबर है ये नहीं आ रही है, ये नहीं है वो है तो फिर आप उसको कहते हैं यार तू क्या भेजता है? तो प्रेशर उसका बढ़ रहा है और मैंने देखा है कि काफी मीडिया हाउस की एफिशियंसी इसलिए भी बढ़ रही है कि सोशल मीडिया की मदद से वो डिस्ट्रिक्ट लेवल की चीजों को वेरिफाइ कर रहा है। एक बड़ा बदलाव नजर आ रहा है। और मुझे पक्का विश्वास है कि ये बदलते हुए खास करके टेक्नोलॉजी की दुनिया है उसका प्रभाव बहुत तेजी से हमारी सभी व्यवस्था में बढ़कर आए। दो-तीन चीजें हैं जिसपर मैं आपकी मदद चाहता हूं। और मैं आशा करता हूँ कि, और मदद इसलिए चाहता हूं। और कोई किसी से इसलिए मांगता है कि जब पता है कि मदद मिलेगी। वो ऐसे ही सोने का जाल कोई पानी में नहीं डालता है। मैं तो नहीं डालता हूं। और मेरा भरोसा इसलिए है कि स्वच्छता का अभियान जो है, उसको जीस प्रकार से मीडिया ने तवज्जो दी, चाहे वो प्रिंट हो, चाहे वो इलेक्ट्रॉनिक मीडिया हो। एक प्रकार से उसको हरेक ने अपना काम माना और उसमें कभी पूर्णविराम नहीं आने दिया। उसमें नए-नए रंग भरते चले गए। उसमें लगातार उस व्यवस्था को, उस आंदोलन को, उस भावना को प्राणवान बनाया है, और इसके लिए मैं जब भी मौका मिलता है मीडिया जगत का अभिनन्दन करता हूं, धन्यवाद करता हूं, लेकिन उसमें मुसीबत ये हुई कि मेरी अपेक्षाएं बढ़ती गई। पहले तो अगर आप ये न करते तो मैं कहता ही नहीं, यार इनको क्या कहे, लेकिन अब आप करते हैं तो कहने का मन करता है।

दो चीज़े मुझे लगती है। एक- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के कारण, और उसमें भी डीप फेक के कराण जो एक नया संकट आ रहा है। भारत का बहुत बड़ा वर्ग ऐसा है जिसके पास वेरिफिकेशन के लिए या ऑथेंटिफिकेशन के लिए उसके पास को पैरालेल व्यवस्था नहीं है। और बाय एंड लार्ज आजादी की लड़ाई से लेकर के भारत में जिस चजों से मीडिया शब्द जुड़ता है उसकी एक इज्जत है। जैसे कोई भी व्यक्ति को गेरुए कपड़े है, तो हमारे यहां स्वाभाविक रूप से विरासत में इज्जत मिल जाती है उसको। वैसा मीडिया को भी है। एक विरासत का लाभ उसको मिलता है। और उसके कारन डीप-फेक भी हो तो भी वो भरोसा कर लेता है, यार ऐसे थोड़े ही आया होगा, कुछ तो होगा। और ये बहुत बड़े संकट की तरफ ले जाएगा समाज को और शायद वो असंतोष की आग भी बहुत तेजी से फैला सकता है। समाज जीवन की व्यवस्थाओं को और यह बहुत मुश्किल काम होता है, बहुत मुश्किल काम होता है। मान लीजिए कहीं कोई एक गलत चीज़ ने कोई समस्या पैदा कर दी। अगर सरकार को वहाँ पहुंचना है तो डिस्टेंस भी तो तो मैटर करता है। अब आपको तो डिस्टेन्स समय मैटर ही नहीं करता है, तुरंत पहुँच जाता है। अगर लोगों को एजुकेट कर सकते हैं हम हमारे कार्यक्रमों के द्वारा की आखिर है क्या? आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कैसे काम कर रहा है? डीप फेक क्या कर सकता है? और कितना बड़ा संकट पैदा कर सकता है? और उसमें जो चाहे वो बना सकते हैं जी ।

मैंने अभी एक वीडियो देखा है जिसमें मैं घर में गरबे कर रहा हूं। और मैं खुद भी देख रहा क्या बढ़िया बनाया है। जबकि मैं स्कूल एज के बाद मुझे मौका नहीं मिला कभी। स्कूल में बहुत अच्छा खेलता था गरबे, बहुत ही अच्छा खेलता था, लेकिन बाद में कभी मौका नहीं मिला। लेकिन अभी जैसे आज ही बनाया ऐसा वीडियो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की ताकत है, जिसने बना के रख दिया है और चल रहा है, और जो मुझे प्यार करते है वो भी इसको फॉर्वर्ड कर रहे हैं? मैं औरों का उदाहरण देना नहीं चाहता हूँ इसलिए मैंने दिया नहीं। मैंने अपना ही दिया, लेकिन एक चिंता का विषय है जी। हम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस हम जैसे सोसाइटी जो विविधताओँ से भरी है, पहले मूवी आते थे, एक आध कहावत उस मूवी में आ जाए, आती थी चली जाती थी। आज एक-आध कहावत आ जाए तो पूरी मूवी चलना बंद हो जाए, मुश्किल हो जाता है। कि तुमने उस समाज का अपमान किया, वो उस किया तिगुना किया, वो अरबों खरबों, करोड़ों रुपये कुछ भी खर्च किए हो कोई पूछने वाले नहीं है तुम जवाब दो कि तुमने ये क्या किया, ये हाल है। ऐसे में आप, इस शास्त्र को तो समझाने से तो कोई लाभ बहुत ज्यादा नहीं है, लेकिन उसके प्रभाव क्या हो रहे हैं उदाहरणों के साथ तो कोई भी वैसे, मुझे जब इस विषय को आगे बढ़ाने वाले चैट जेपीटी के लोग मिले थे तो मैंने उनको कहा था कि जैसे सिगरेट पे आता है कि इट्स कैंसरस। पीना या नहीं पीना ये तुम्हारी मर्जी लेकिन लिखा हुआ रहता है। ये हेल्थ के लिए हेजार्ड है ऐसा लिखा हुआ रहता है। मैंने कहा कि तुम्हारा जो भी चैट जेपीटी का उपयोग करता है या इस प्रकार से उपयोग करता है तो वहां आना चाहिए कि डीप फेक, फिर उसे देखे आनंद करे जो करना हो वो करे लेकिन आना चाहिए। उन्होंने भी कहा साहब मुझे भी बड़ी चिंता है कि मैंने कर तो दिया, लेकिन कैसे रुकेगा? तो ये बड़ा चिंता का विषय है।

दूसरी मेरी एक अपेक्षा है जीसको मैं समझता हूं कि आप जरूर मदद कर सकते हैं। किसी भी समाज में, व्यक्ति में, राष्ट्र जीवन में कुछ पल आते हैं, कुछ कालखंड आता है। जो हमें बहुत बड़ी ऊँचाई पर जाने के लिए जम्प दे देता है। आज मैं जो वैश्विक परिस्थितियां देख रहा हूँ, जिस जगह पर हूं वहां ज्यादा गहराई में देखने का अवसर मिलता है। मैं समझता हूँ शायद ऐसा काल हम लोगों के सामने हम देख पा रहे हैं। हमारा ये कालखंड उस भव्यता की तरफ जाने वाला कालखंड से जुड़ा हुआ है। विकसित भारत की बात ये शब्द नहीं है दोस्तों, ये जमीनी सच्चाई है। पूरी संभावना है। अब जैसे इस बार वोकल फॉर लोकल आप सबने भी मेरी मदद की। ठीक है, अभी तो लोगो का दिमाग दिए तक रहता है उनको लगता है वोकल फॉर लोकल मतलब दीया खरीदना। उन्हें ये मालूम नहीं कि मैं गणेश चतुर्थी में छोटी आंख वाले गणेशजी क्यों लेता हूं और कहां से लेता हूं ? हमारे देश के गणेश जी तो छोटी आंखों की हो ही नहीं सकते। लेकिन लेता है पता नहीं उसको। अगर हम वोकल फॉर लोकल, इस विषय को जितना बल दिया, और मैं इस छठ पूजा के साथ जोड़ करके हिसाब लगाऊं, तो इस एक वीक में साढ़े चार लाख करोड़ से ज्यादा का कारोबार हुआ है। ये देश के लिए बहुत बड़ी बात बात है और उसमें हर छोटे मोटे व्यक्ति की जिंदगी में कमाई होती है। और मैं इसी ताकत के आधार पर कहता हूँ की हम विकसित भारत के विषय को बहुत सफलतापूर्वक आगे बढ़ा सकते हैं, लेकिन उसके लिए एक विश्वास पैदा करना होता है, सकारात्मक चीजों से लोगों को, किसी की वाहवाही करने की जरूरत नहीं है। असत्य को दबाने की जरूरत नहीं है, वो मैं आपसे अपेक्षा भी नहीं करूंगा। लेकिन जो चीजों में सामर्थ्य है, जो देश को आगे बढ़ा सकता है, ऐसी चीजों को हम बल दे सकते हैं और ये भी सही है कि विकास आर्थिक पावतें ये अब केंद्र में रहने वाली है आने वाले 25 साल तक। क्योंकि विश्व भी हमारा मूल्यांकन उस बात पर कर रहा है और इन दिनों जहां हम हैं और जिस प्रकार से बढ़ रहे हैं, विश्व उसको स्वीकार कर रहा है। मैं अभी आपके बीच आया हूं, लेकिन मैं चुनाव के मैदान से नहीं आया हूं, मैं ग्लोबल साउथ समिट में से आया हूँ। 130 देशों का ग्लोबल साउथ समिट में होना, ये अपनेआप में, मैं मानता हूं जो आपके यहाँ जो विदेश मंत्रालय की चीजें देखता होंगे उन्हें लगता होगा कि भाई ये बहुत बड़ी बात है। यानि, कुछ तो है जिसके कारण यह हो रहा है। हम, 2047, विकसित भारत का मिजाज, आप देखिए, दांडी यात्रा, भारत का मीडिया का ध्यान बहुत कम गया था।

महात्मा गाँधी जब दांडी.. भारत में उस समय जो भी मीडिया पैदा हुआ था वो सिर्फ आजादी की लड़ाई के लिए पैदा हुआ था। वो अंग्रेजों के खिलाफ़ जंग के लिए भी तैयार था। लेकिन उसके बावजूद भी उसको दांडी यात्रा की ताकत नजर नहीं आई थी। पहली बार जब एक विदेशी पत्रकार ने उसकी स्टोरी की उसके बाद देश में लोगों को चौकन्ना कर दिया कि ये क्या हो रहा है? वरना लगता यही था की यार छोटे से रूट पर ढाई सौ लोग चल रहे हैं। और एक चुटकी भर नमक उठाकर होना क्या है? क्योंकि उस पत्रकार ने लिखा था कि ये कोई बहुत बड़े रिवोल्यूशन का ये मजबूती है इसमें। और उसके बाद हिंदुस्तान के मीडिया ने भी उस चीज़ को और वो एक ऐसा टर्निंग प्वाइंट बन गया कि जिसने देश को विश्वास पैदा कर दिया कि अब आजादी लेकर रहेंगे। ये अपनेआप में बहुत बड़ा... मैं समझता हूँ कि को के संकट में, दुनिया की तुलना में हमारा जो कुछ भी अचीवमेंट है उसने भारत के लोगों में विश्वास पैदा किया है, दुनिया में भी पैदा किया है कि भारत अब रुकने वाला नहीं है। आप कैसे मदद कर सकते हैं? लोगों को कैसे मोटिवेट कर सकते हैं? आगे बढ़ने के सपने, अब जैसे साढ़े 13 करोड़ लोगों का 5 साल में गरीबी से बाहर आना, वो तो एक विषय, लेकिन इतने परिवार जब न्यू मिडिल क्लास बनते हैं तो उसके एसपेरेशन का लेवल अपर मिडल क्लास का होता है। वो भी चाहते है मेरे घर में टीवी आ जाए, कोई चाहता है अब पंखा नहीं ऐसी आ जाए, वो भी चाहता है चेयर नहीं सोफा आ जाए। जो उसके एस्पिरेशन है वो किसी की बराबरी में बैठने के होते हैं। वो चाहता है वो घर के बाहर साइकिल नहीं अब घर के बाहर गाड़ी खड़ी होनी चाहिए। ये नहीं, ये बहुत बड़ा उसका इको इफेक्ट होता है इस व्यवस्थाओं पर। और वो, मैं मानता हूँ आज जो इस दिवाली में इतना बड़ा मार्केट उसके पीछे एक कारण ये एस्पिरेशनल सोसाइटी है। जो बहुत तेजी से बराबरी करना चाहती है। और आज उसकी जेब में बैंक अकाउंट है, रुपे कार्ड है। रेहडी पटरी ठेले वाले लोग उनको, दो राउंड, तीन राउंड बैंक से लोन के लिए फोन प मैसेज आता है कि भाई तुम्हारा कारोबार अच्छा है, तुम और लोन ले लो। और एन पी एम हार्डली वन परसेंट। एक बड़ा इंटरेस्टिंग उदाहरण मैंने कई बार आपने मुझे सुना भी होगा, लेकिन मैं दोबारा उसको रिपीट करने में आपका समय ले रहा हूँ। मैं मध्य प्रदेश में शहडोल क्षेत्र में गया था। दो चीजे मुझे बड़ी ही यानी इंस्पायर कर गई। एक तो मेरा कार्यक्रम था, मैं एक आदिवासी गांव में समय बिताना चाहता था, तो मैं शहडोल के पास गया था। तो वहां पर वुमेन्स के सेल्फ हेल्प ग्रुप हैं।

उसकी कुछ बहनों को उन्होंने बुलाया था और कुछ यूथ को बुलाया था। नौजवानों को। जब मैं नौजवानों से मिला तो मैंने पूछा आपका गांव? तो बोले मिनी ब्राज़ील है। अब मैं इतने साल मध्य प्रदेश में संगठन का काम किया था। मैं मुख्यमंत्री रहा, लेकिन मैंने कभी सुना नहीं था। मेरा कान सतर्क हो गया। मैंने कहा कि ये मिनी ब्राज़ील क्या है। बोले साहब हमारे हर गली में फुटबॉल क्लब है और बोले हमारी यहां, और एक कोई मुस्लिम सज्जन थे नाम उनका मैं भूल गया। वे पहले खेलते थे, फिर शायद उनको फिजिकल प्रॉब्लम हुआ, फिर वो फौज के रूप में काम किया। वे उस गांव के थे, उन्होंने इसको एक मिशन मोड में लिया और परिणाम ये कि, मुझे बता रहे थे कि साहब हमारे कुछ घर ऐसे हैं जहां की चार-चार पीढ़ी के लोग। फुटबॉल के नेशनल प्लेयर रहे हैं। और बोले हमारे यहां गांव में जब फुटबॉल का फेस्टिवल होता है, यार मैं एक बार फेस्टिवल करते हैं तो अगल-बगल के 20,000 लोग तो दर्शक होते हैं। छोटे बच्चे फुटबॉल। 80 साल के बुजुर्ग फुटबॉल। मैंने कहा भाई मानना पड़ेगा शायद ब्राजिल में भी ऐसा नहीं होगा। अब ये हमारे देश की ताकत है। दूसर- मैं उन महिलाओं को मिला। तो मैंने कहा आप लोगों को बुलाया तो इसे सेलेक्ट कैसे कर लिया ? तो बोले हमें बताया गया कि जो लखपति है वो आ सकते हैं। मैंने कहा ये क्या है? तो बोले हमारा जो वुमेन सेल्फ हेल्प ग्रुप हैं। हम पिछले 11 बहनें हैं किसी में 13 हैं तेरा हैं, और हम सभी लोग एक साल में एक लाख रुपये से ज्यादा कमाने वाली बहने हैं। ये मेरे लिए एक बड़ी खुशी की बात थी और उसी में से मैं इंस्पायर हो कर के मैंने भी एक टारगेट तय किया है। कि हम दो करोड़ महिलाएं जो वुमेन सेल्फ हेल्प ग्रुप से जुड़ी है, दो करोड़ लखपति महिलाएं बनाने का काम एचीव करेंगे। दो करोड़ लखपति बनाने का यह ड्रीम देखने का इंस्पिरेशन मेरा वहां था। और ये सारे लोग कोई पांचवीं, आठवीं, नौवीं पड़े हुए थे। कोई ज्यादा पढ़े नहीं थे। मैंने एक बहन से पूछा, मैंने कहा बहन इतने पैसे कमा रहे हो तो क्या कर रहे हो? तो उसने कहा गहने खरीदे हैं। मेरा भी मुझे था शायद पहला जवाब तो यही आएगा और वो स्वाभाविक है कोई मैं अन्याय नहीं कर रहा हूँ, लेकिन स्वाभाविक था। क्योंकि उसको सुरक्षा दिखती है उसमें। जीवन की सुरक्षा का वो एक साधन है उसके लिए। वो मौसक का साधन नहीं है। हमारे यहाँ ये गलत सोच है।

उसको लगता है कि मेरे जीवन में संकट के समय ये काम आने वाला है तो इस सोशल सिक्योरिटी हमारे यहां। तो उसने मुझे कहा गहने खरीदना है मुझे, कुछ महीने के लिए। फिर एक दूसरी महीना ने हाथ ऊपर किया। मैंने कहा आपने क्या किया? आप क्या पढ़ी हैं, मैं आठवीं या नौवीं में कुछ बताया। 30-32 साल की उम्र होगी। बोली, मैं लखपति दीदी हूं। मैंने कहा क्या करती हो क्या किया पैसों का? बोले मेरे पति मजदूरी करते हैं, और वो साइकिल पर जाते हैं। तो मैंने उनके लिए स्कूटी खरीदी और उनको गिफ्ट की। एक आदिवासी महिला मुझे कह रही है कि मेरे पति मजदूरी करने के लिए साइकिल पर जाते हैं। मैंने उनके लिए स्कूटी खरीदी। अब मेरे लिए साइकिल और स्कूटी नहीं है। मेरे दिमाग में स्थिर होता है कि मेरा देश की ताकत यहां है। यह एस्पिरेशन जो है ना, ये मिज़ाज है वो मेरे देश को बदलेगा। फिर मैंने कहा आगे क्या हुआ उसका? बोली कि फिर मुझे किसी ने बताया कि हमको अब बैंक से लोन मिल सकता है क्योंकि हम एक लखपति हैं 2 साल से मैं इतना कमाती हूँ। तो बोले मैं बैंक वालों से मिली। अब मुझे कुछ आता नहीं थी, लेकिन मुझे किसी ने स्थानीय सरकार के किसी व्यक्ति ने मदद की। तो बोले मुझे पता चला कि मैं बैंक से लोन ले सकती हूं तो बोला मैंने सोचा कि मैं ट्रैक्टर के लिए लोन लूं। मैंने कह ये हिम्मत कहाँ से आई तुम्हारी, कहां साइकिल, कहां स्कूटी और कहां ट्रैक्टर?, बोले नहीं बैंक से पैसा मिलता था और मुझे लगता था कि मैं पैसे दे दूंगी वापस। तो बोले मैंने ट्रैक्टर लिया। मैंने ट्रैक्टर मेरे पति को गिफ्ट किया, मेरे पति को मैंने ड्राइविंग सिखवाया और बोले मेरे पति आजकल आठ से 10 गांवों में ट्रैक्टर से खेत जोतने की मजदूरी करते हैं।

और बोले कि छह महीने के अंदर ट्रैक्टर के लोन की पूरी भरपाई हो जाएगी और मैं आज गर्व से कह सकती हूँ कि मेरा परिवार लखपति है। शहडोल के पास एक ट्राइबल गांव का ये मिज़ाज। एक आदिवासी 30- 32 साल की बेटी के मन में ये कॉन्फिडेंस। ये मुझे कहता है कि देश 2047 में विकसित हो करके रह सकता है अगर हम सब की ताकत लग जाए। और ये कोई किसी पार्टी का एजेंडा नहीं है, भले ही ये इस पार्टी के स्थान पर है, लेकिन पार्टी का कार्यक्रम नहीं है, देश का है और मुझे इसमें आपकी मदद चाहिए। अब उसमें कैसे, जैसे मान लीजिए आप ही तय करेंगे कि 10 ऐसे शहर देश में, वो आपके बिजनेस हाउसेस आज बड़े इवेंड करते हैं, इसी मुद्दे पर की इकॉनमी वन ट्रिलियन कब तक होगी और कैसे हो सकती है। इस शहर की चर्चा करते हैं। इस शहर की वन ट्रिलियन है तीन ट्रिलियन कैसे हो सकती है? बताइए आइए सब विद्वान आइये बैठिये मेरे साथ चर्चा कीजिए, आप बुलाइए अपने स्टूडियो पर आप सबमिट कीजिये। 10 सिटी सिर्फ 10 सिटी पकड़िए साहब। वहाँ आप 2 साल तक ये मोमेंटम लाइए, कोई न कोई बिज़नेस हाउस एक-दो समिट कर ले। हर महीने दो महीने कोई न कोई समिट हो रहा है, और विषय चर्चा में चल रहा है कि भाई इस शहर को मुझे मेरे राज्य का इकॉनमी का ड्राइविंग इंजन बना देना है। बन जाएगा जी। पक्का बच जाएगा। और इसलिए मुझे जो दूसरी मदद आपसे चाहिए वो दूसरी मदद मुझे ये चाहिए। ओर त्योहार में तो कुछ मांग भी सकते हैं, जी। और मैं तो ऐसा इंसान हूं, जीसको मांगने का पूरा हक है। और इसलिए मैं आपसे मांग रहा हूं। कि आप कुछ ना कुछ योजना बनाइए कि ये 10 शहर अपनी इकोनॉमी को डबल करने के लिए क्या कर सकते हैं? क्या योजना है, और वही ड्राइविंग फोर्स बनने वाला है, जी। मुझे पूरी समझ है इन चीजों की। मुझे उन विद्वानों की लिस्ट में मेरा नाम नहीं हो सकता है, लेकिन धरती के आंकड़े निकालोगे तो दिखाई दूंगा कहीं पर दोस्तों, पक्का दिखाई दूंगा और इसी विश्वास के साथ मैं आप सबसे दीपावली की और मैं गुजराती हूँ, हमारे लिए नया वर्ष होता है, आपको बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूँ। आप के उज्ज्वल भविष्य के लिए आपकी व्यक्तिगत जीवन में भी इच्छित सारी सिद्धियां आपको प्राप्त हो, आपके परिवारजन को भी सुख, शांति, समृद्धि और उससे भी बड़ा संतोष मिले। इसी भावना के साथ आप सब आए। मैं आपका हृदय से आभार व्यक्त करता हूँ, बहुत बहुत धन्यवाद।

 

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New India is finishing tasks at a rapid pace: PM Modi
February 25, 2024
Dedicates five AIIMS at Rajkot, Bathinda, Raebareli, Kalyani and Mangalagiri
Lays foundation stone and dedicates to nation more than 200 Health Care Infrastructure Projects worth more than Rs 11,500 crore across 23 States /UTs
Inaugurates National Institute of Naturopathy named ‘Nisarg Gram’ in Pune
Inaugurates and dedicates to nation 21 projects of the Employees’ State Insurance Corporation worth around Rs 2280 crores
Lays foundation stone for various renewable energy projects
Lays foundation stone for New Mundra-Panipat pipeline project worth over Rs 9000 crores
“We are taking the government out of Delhi and trend of holding important national events outside Delhi is on the rise”
“New India is finishing tasks at rapid pace”
“I can see that generations have changed but affection for Modi is beyond any age limit”
“With Darshan of the submerged Dwarka, my resolve for Vikas and Virasat has gained new strength; divine faith has been added to my goal of a Viksit Bharat”
“In 7 decades 7 AIIMS were approved, some of them never completed. In last 10 days, inauguration or foundation stone laying of 7 AIIMS have taken place”
“When Modi guarantees to make India the world’s third largest economic superpower, the goal is health for all and prosperity for all”

भारत माता की जय!

भारत माता की जय!

मंच पर उपस्थित गुजरात के लोकप्रिय मुख्यमंत्री श्रीमान भूपेंद्र भाई पटेल, केंद्र में मंत्रिपरिषद के मेरे सहयोगी मनसुख मांडविया, गुजरात प्रदेश भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष और संसद में मेरे साथी सी आर पाटिल, मंच पर विराजमान अन्य सभी वरिष्ठ महानुभाव, और राजकोट के मेरे भाइयों और बहनों, नमस्कार।

आज के इस कार्यक्रम से देश के अनेक राज्यों से बहुत बड़ी संख्या में अन्य लोग भी जुड़े हैं। कई राज्यों के माननीय मुख्यमंत्री, माननीय गवर्नर श्री, विधायकगण, सांसदगण, केंद्र के मंत्रीगण, ये सब इस कार्यक्रम में वीडियो कांफ्रेंसिंग से हमारे साथ जुड़े हैं। मैं उन सभी का भी हृदय से बहुत-बहुत अभिनंदन करता हूं।

एक समय था, जब देश के सारे प्रमुख कार्यक्रम दिल्ली में ही होकर रह जाते थे। मैंने भारत सरकार को दिल्ली से बाहर निकालकर देश के कोने-कोने तक पहुंचा दिया है और आज राजकोट पहुंच गए। आज का ये कार्यक्रम भी इसी बात का गवाह है। आज इस एक कार्यक्रम से देश के अनेकों शहरों में विकास कार्यों का लोकार्पण और शिलान्यास होना, एक नई परंपरा को आगे बढ़ा रहा है। कुछ दिन पहले ही मैं जम्मू कश्मीर में था। वहां से मैंने IIT भिलाई, IIT तिरुपति, ट्रिपल आईटी DM कुरनूल, IIM बोध गया, IIM जम्मू, IIM विशाखापट्टनम और IIS कानपुर के कैंपस का एक साथ जम्‍मू से लोकार्पण किया था। और अब आज यहां राजकोट से- एम्स राजकोट, एम्स रायबरेली, एम्स मंगलगिरी, एम्स भटिंडा, एम्स कल्याणी का लोकार्पण हुआ है। पांच एम्स, विकसित होता भारत, ऐसे ही तेज गति से काम कर रहा है, काम पूरे कर रहा है।

साथियों,

आज मैं राजकोट आया हूं, तो बहुत कुछ पुराना भी याद आ रहा है। मेरे जीवन का कल एक विशेष दिन था। मेरी चुनावी यात्रा की शुरुआत में राजकोट की बड़ी भूमिका है। 22 साल पहले 24 फरवरी को ही राजकोट ने मुझे पहली बार आशीर्वाद दिया था, अपना MLA चुना था। और आज 25 फरवरी के दिन मैंने पहली बार राजकोट के विधायक के तौर पर गांधीनगर विधानसभा में शपथ ली थी, जिंदगी में पहली बार। आपने तब मुझे अपने प्यार, अपने विश्वास का कर्जदार बना दिया था। लेकिन आज 22 साल बाद मैं राजकोट के एक-एक परिजन को गर्व के साथ कह सकता हूं कि मैंने आपके भरोसे पर खरा उतरने की पूरी कोशिश की है।

आज पूरा देश इतना प्यार दे रहा है, इतने आशीर्वाद दे रहा है, तो इसके यश का हकदार ये राजकोट भी है। आज जब पूरा देश, तीसरी बार-NDA सरकार को आशीर्वाद दे रहा है, आज जब पूरा देश, अबकी बार-400 पार का विश्वास, 400 पार का विश्वास कर रहा है। तब मैं पुन: राजकोट के एक-एक परिजन को सिर झुकाकर नमन करता हूं। मैं देख रहा हूं, पीढ़ियां बदल गई हैं, लेकिन मोदी के लिए स्नेह हर आयु सीमा से परे है। ये जो आपका कर्ज है, इसको मैं ब्याज के साथ, विकास करके चुकाने का प्रयास करता हूं।

साथियों,

मैं आप सबकी भी क्षमा चाहता हूं, और सभी अलग-अलग राज्यों में माननीय मुख्यमंत्री और वहां के जो नागरिक बैठे हैं, मैं उन सबसे भी क्षमा मांगता हूं क्योंकि मुझे आज आने में थोड़ा विलंब हो गया, आपको इंतजार करना पड़ा। लेकिन इसके पीछे कारण ये था कि आज मैं द्वारका में भगवान द्वारकाधीश के दर्शन करके, उन्हें प्रणाम करके राजकोट आया हूं। द्वारका को बेट द्वारका से जोड़ने वाले सुदर्शन सेतु का लोकार्पण भी मैंने किया है। द्वारका की इस सेवा के साथ-साथ ही आज मुझे एक अद्भुत आध्यात्मिक साधना का लाभ भी मिला है। प्राचीन द्वारका, जिसके बारे में कहते हैं कि उसे खुद भगवान श्रीकृष्ण ने बसाया था, आज वो समुद्र में डूब गई है, आज मेरा सौभाग्य था कि मैं समुद्र के भीतर जाकर बहुत गहराई में चला गया और भीतर जाकर मुझे उस समुद्र में डूब चुकी श्रीकृष्‍ण वाली द्वारका, उसके दर्शन करने का और जो अवशेष हैं, उसे स्पर्श करके जीवन को धन्य बनाने का, पूजन करने का, वहां कुछ पल प्रभु श्रीकृष्ण का स्मरण करने का मुझे सौभाग्य मिला। मेरे मन में लंबे अर्से से ये इच्छा थी कि भगवान कृष्ण की बसाई उस द्वारका भले ही पानी के भीतर रही हो, कभी न कभी जाऊंगा, मत्था टेकुंगा और वो सौभाग्य आज मुझे मिला। प्राचीन ग्रंथों में द्वारका के बारे में पढ़ना, पुरातत्वविदों की खोजों को जानना, ये हमें आश्चर्य से भर देता है। आज समंदर के भीतर जाकर मैंने उसी दृश्य को अपनी आंखों से देखा, उस पवित्र भूमि को स्पर्श किया। मैंने पूजन के साथ ही वहां मोर पंख को भी अर्पित किया। उस अनुभव ने मुझे कितना भाव विभोर किया है, ये शब्दों में बताना मेरे लिए मुश्किल है। समंदर के गहरे पानी में मैं यही सोच रहा था कि हमारे भारत का वैभव, उसके विकास का स्तर कितना ऊंचा रहा है। मैं समुद्र से जब बाहर निकला, तो भगवान श्रीकृष्ण के आशीर्वाद के साथ-साथ मैं द्वारका की प्रेरणा भी अपने साथ लेकर लाया हूं। विकास और विरासत के मेरे संकल्पों को आज एक नई ताकत मिली है, नई ऊर्जा मिली है, विकसित भारत के मेरे लक्ष्य से आज दैवीय विश्वास उसके साथ जुड़ गया है।

साथियों,

आज भी यहां 48 हज़ार करोड़ से ज्यादा के प्रोजेक्ट्स आपको, पूरे देश को मिले हैं। आज न्यू मुंद्रा-पानीपत पाइपलाइन प्रोजेक्ट का शिलान्यास हुआ है। इससे गुजरात से कच्चा तेल सीधे हरियाणा की रिफाइनरी तक पाइप से पहुंचेगा। आज राजकोट सहित पूरे सौराष्ट्र को रोड, उसके bridges, रेल लाइन के दोहरीकरण, बिजली, स्वास्थ्य और शिक्षा सहित अनेक सुविधाएं भी मिली हैं। इंटरनेशनल एयरपोर्ट के बाद, अब एम्स भी राजकोट को समर्पित है और इसके लिए राजकोट को, पूरे सौराष्‍ट्र को, पूरे गुजरात को बहुत-बहुत बधाई! और देश में जिन-जिन स्‍थानों पर आज ये एम्स समर्पित हो रहा है, वहां के भी सब नागरिक भाई-बहनों को मेरी तरफ से बहुत-बहुत बधाई।

साथियों,

आज का दिन सिर्फ राजकोट और गुजरात के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए भी ऐतिहासिक है। दुनिया की 5वीं बड़ी अर्थव्यवस्था का हेल्थ सेक्टर कैसा होना चाहिए? विकसित भारत में स्वास्थ्य सुविधाओं का स्तर कैसा होगा? इसकी एक झलक आज हम राजकोट में देख रहे हैं। आज़ादी के 50 सालों तक देश में सिर्फ एक एम्स था और भी दिल्ली में। आज़ादी के 7 दशकें में सिर्फ 7 एम्स को मंजूरी दी गई, लेकिन वो भी कभी पूरे नहीं बन पाए। और आज देखिए, बीते सिर्फ 10 दिन में, 10 दिन के भीतर-भीतर, 7 नए एम्स का शिलान्यास और लोकार्पण हुआ है। इसलिए ही मैं कहता हूं कि जो 6-7 दशकों में नहीं हुआ, उससे कई गुना तेजी से हम देश का विकास करके, देश की जनता के चरणों में समर्पित कर रहे हैं। आज 23 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 200 से अधिक हेल्थ केयर इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स का भी शिलान्यास और लोकार्पण हुआ है। इनमें मेडिकल कॉलेज हैं, बड़े अस्पतालों के सैटेलाइट सेंटर हैं, गंभीर बीमारियों के लिए इलाज से जुड़े बड़े अस्पताल हैं।

साथियों,

आज देश कह रहा है, मोदी की गारंटी यानि गारंटी पूरा होने की गारंटी। मोदी की गारंटी पर ये अटूट भरोसा क्यों है, इसका जवाब भी एम्स में मिलेगा। मैंने राजकोट को गुजरात के पहले एम्स की गारंटी दी थी। 3 साल पहले शिलान्यास किया और आज लोकार्पण किया- आपके सेवक ने गारंटी पूरी की। मैंने पंजाब को अपने एम्स की गारंटी दी थी, भटिंडा एम्स का शिलान्यास भी मैंने किया था और आज लोकार्पण भी मैं ही कर रहा हूं- आपके सेवक ने गारंटी पूरी की। मैंने यूपी के रायबरेली को एम्स की गारंटी दी थी। कांग्रेस के शाही परिवार ने रायबरेली में सिर्फ राजनीति की, काम मोदी ने किया। मैंने रायबरेली एम्स का 5 साल पहले शिलान्यास किया और आज लोकार्पण किया। आपके इस सेवक ने गारंटी पूरी की। मैंने पश्चिम बंगाल को पहले एम्स की गारंटी दी थी, आज कल्याणी एम्स का लोकार्पण भी हुआ-आपके सेवक ने गारंटी पूरी कर दी। मैंने आंध्र प्रदेश को पहले एम्स की गारंटी दी थी, आज मंगलगिरी एम्स का लोकार्पण हुआ- आपके सेवक ने वो गारंटी भी पूरी कर दी। मैंने हरियाणा के रेवाड़ी को एम्स की गारंटी दी थी, कुछ दिन पहले ही, 16 फरवरी को उसकी आधारशिला रखी गई है। यानि आपके सेवक ने ये गारंटी भी पूरी की। बीते 10 वर्षों में हमारी सरकार ने 10 नए एम्स देश के अलग-अलग राज्यों में स्वीकृत किए हैं। कभी राज्यों के लोग केंद्र सरकार से एम्स की मांग करते-करते थक जाते थे। आज एक के बाद एक देश में एम्स जैसे आधुनिक अस्पताल और मेडिकल कॉलेज खुल रहे हैं। तभी तो देश कहता है- जहां दूसरों से उम्मीद खत्म हो जाती है, मोदी की गारंटी वहीं से शुरू हो जाती है।

साथियों,

भारत ने कोरोना को कैसे हराया, इसकी चर्चा आज पूरी दुनिया में होती है। हम ये इसलिए कर पाए, क्योंकि बीते 10 वर्षों में भारत का हेल्थ केयर सिस्टम पूरी तरह से बदल गया है। बीते दशक में एम्स, मेडिकल कॉलेज और क्रिटिकल केयर इंफ्रास्ट्रक्चर के नेटवर्क का अभूतपूर्व विस्तार हुआ है। हमने छोटी-छोटी बीमारियों के लिए गांव-गांव में डेढ़ लाख से ज्यादा आयुष्मान आरोग्य मंदिर बनाए हैं, डेढ़ लाख से ज्यादा। 10 साल पहले देश में करीब-करीब 380-390 मेडिकल कॉलेज थे, आज 706 मेडिकल कॉलेज हैं। 10 साल पहले MBBS की सीटें लगभग 50 हज़ार थीं, आज 1 लाख से अधिक हैं। 10 साल पहले मेडिकल की पोस्ट ग्रेजुएट सीटें करीब 30 हज़ार थीं, आज 70 हज़ार से अधिक हैं। आने वाले कुछ वर्षों में भारत में जितने युवा डॉक्टर बनने जा रहे हैं, उतने आजादी के बाद 70 साल में भी नहीं बने। आज देश में 64 हज़ार करोड़ रुपए का आयुष्मान भारत हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन चल रहा है। आज भी यहां अनेक मेडिकल कॉलेज, टीबी के इलाज से जुड़े अस्पताल और रिसर्च सेंटर, PGI के सैटेलाइट सेंटर, क्रिटिकल केयर ब्लॉक्स, ऐसे अनेक प्रोजेक्ट्स का शिलान्यास और लोकार्पण किया गया है। आज ESIC के दर्जनों अस्पताल भी राज्यों को मिले हैं।

साथियों,

हमारी सरकार की प्राथमिकता, बीमारी से बचाव और बीमारी से लड़ने की क्षमता बढ़ाने की भी है। हमने पोषण पर बल दिया है, योग-आयुष और स्वच्छता पर बल दिया है, ताकि बीमारी से बचाव हो। हमने पारंपरिक भारतीय चिकित्सा पद्धति और आधुनिक चिकित्सा, दोनों को बढ़ावा दिया है। आज ही महाराष्ट्र और हरियाणा में योग और नेचुरोपैथी से जुड़े दो बड़े अस्पताल और रिसर्च सेंटर का भी उद्घाटन हुआ है। यहां गुजरात में ही पारंपरिक चिकित्सा पद्धति से जुड़ा WHO का वैश्विक सेंटर भी बन रहा है।

साथियों,

हमारी सरकार का ये निरंतर प्रयास है कि गरीब हो या मध्यम वर्ग, उसको बेहतर इलाज भी मिले और उसकी बचत भी हो। आयुष्मान भारत योजना की वजह से गरीबों के एक लाख करोड़ रुपए खर्च होने से बचे हैं। जन औषधि केंद्रों में 80 परसेंट डिस्काउंट पर दवा मिलने से गरीबों और मध्यम वर्ग के 30 हजार करोड़ रुपए खर्च होने से बचे हैं। यानि सरकार ने जीवन तो बचाया, इतना बोझ भी गरीब और मिडिल क्लास पर पड़ने से बचाया है। उज्ज्वला योजना से भी गरीब परिवारों को 70 हज़ार करोड़ रुपए से अधिक की बचत हो चुकी है। हमारी सरकार ने जो डेटा सस्ता किया है, उसकी वजह से हर मोबाइल इस्तेमाल करने वाले के करीब-करीब 4 हजार रुपए हर महीने बच रहे हैं। टैक्स से जुड़े जो रिफॉर्म्स हुए हैं, उसके कारण भी टैक्सपेयर्स को लगभग ढाई लाख करोड़ रुपए की बचत हुई है।

साथियों,

अब हमारी सरकार एक और ऐसी योजना लेकर आई है, जिससे आने वाले वर्षों में अनेक परिवारों की बचत और बढ़ेगी। हम बिजली का बिल ज़ीरो करने में जुटे हैं और बिजली से परिवारों को कमाई का भी इंतजाम कर रहे हैं। पीएम सूर्य घर- मुफ्त बिजली योजना के माध्यम से हम देश के लोगों की बचत भी कराएंगे और कमाई भी कराएंगे। इस योजना से जुड़ने वाले लोगों को 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली मिलेगी और बाकी बिजली सरकार खरीदेगी, आपको पैसे देगी।

साथियों,

एक तरफ हम हर परिवार को सौर ऊर्जा का उत्पादक बना रहे हैं, तो वहीं सूर्य और पवन ऊर्जा के बड़े प्लांट भी लगा रहे हैं। आज ही कच्छ में दो बड़े सोलर प्रोजेक्ट और एक विंड एनर्जी प्रोजेक्ट का शिलान्यास हुआ है। इससे रिन्यूएबल एनर्जी के उत्पादन में गुजरात की क्षमता का और विस्तार होगा।

साथियों,

हमारा राजकोट, उद्यमियों का, श्रमिकों, कारीगरों का शहर है। ये वो साथी हैं जो आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में बहुत बड़ी भूमिका निभा रहे हैं। इनमें से अनेक साथी हैं, जिन्हें पहली बार मोदी ने पूछा है, मोदी ने पूजा है। हमारे विश्वकर्मा साथियों के लिए देश के इतिहास में पहली बार एक राष्ट्रव्यापी योजना बनी है। 13 हज़ार करोड़ रुपए की पीएम विश्वकर्मा योजना से अभी तक लाखों लोग जुड़ चुके हैं। इसके तहत उन्हें अपने हुनर को निखारने और अपने व्यापार को आगे बढ़ाने में मदद मिल रही है। इस योजना की मदद से गुजरात में 20 हजार से ज्यादा लोगों की ट्रेनिंग पूरी हो चुकी है। इनमें से प्रत्येक विश्वकर्मा लाभार्थी को 15 हजार रुपए तक की मदद भी मिल चुकी है।

साथियों,

आप तो जानते हैं कि हमारे राजकोट में, हमारे यहाँ सोनार का काम कितना बड़ा काम है। इस विश्वकर्मा योजना का लाभ इस व्यवसाय से जुड़े लोगों को भी मिला है।

साथियों,

हमारे लाखों रेहड़ी-ठेले वाले साथियों के लिए पहली बार पीएम स्वनिधि योजना बनी है। अभी तक इस योजना के तहत लगभग 10 हज़ार करोड़ रुपए की मदद इन साथियों को दी जा चुकी है। यहां गुजरात में भी रेहड़ी-पटरी-ठेले वाले भाइयों को करीब 800 करोड़ रुपए की मदद मिली है। आप कल्पना कर सकते हैं कि जिन रेहड़ी-पटरी वालों को पहले दुत्कार दिया जाता था, उन्हें भाजपा किस तरह सम्मानित कर रही है। यहां राजकोट में भी पीएम स्वनिधि योजना के तहत 30 हजार से ज्यादा लोन दिए गए हैं।

साथियों,

जब हमारे ये साथी सशक्त होते हैं, तो विकसित भारत का मिशन सशक्त होता है। जब मोदी भारत को तीसरे नंबर की आर्थिक महाशक्ति बनाने की गारंटी देता है, तो उसका लक्ष्य ही, सबका आरोग्य और सबकी समृद्धि है। आज जो ये प्रोजेक्ट देश को मिले हैं, ये हमारे इस संकल्प को पूरा करेंगे, इसी कामना के साथ आपने जो भव्‍य स्‍वागत किया, एयरपोर्ट से यहां तक आने में पूरे रास्ते पर और यहां भी बीच में आकर के आप के दर्शन करने का अवसर मिला। पुराने कई साथियों के चेहरे आज बहुत सालों के बाद देखे हैं, सबको नमस्ते किया, प्रणाम किया। मुझे बहुत अच्छा लगा। मैं बीजेपी के राजकोट के साथियों का हृदय से अभिनंदन करता हूं। इतना बड़ा भव्य कार्यक्रम करने के लिए और फिर एक बार इन सारे विकास कामों के लिए और विकसित भारत के सपने को साकार करने के लिए हम सब मिलजुल करके आगे बढ़ें। आप सबको बहुत-बहुत बधाई। मेरे साथ बोलिए- भारत माता की जय! भारत माता की जय! भारत माता की जय!

बहुत-बहुत धन्यवाद!

डिस्क्लेमर: प्रधानमंत्री के भाषण का कुछ अंश कहीं-कहीं पर गुजराती भाषा में भी है, जिसका यहाँ भावानुवाद किया गया है।