People have no expectations from the Congress party: PM Modi in Bengaluru

Published By : Admin | October 29, 2017 | 14:54 IST
People have no expectations from the Congress party: PM Modi
Why are Congress leaders lending their voice to those who want Azadi in Kashmir? This is an insult to our brave soldiers: PM Modi
Congress is disconnected with the aspirations of our country: PM Modi

भारत माता की जय। आप सब इतनी बड़ी संख्या में, आप सब इतनी बड़ी संख्या में और इतने उत्साह और उमंग के साथ यहां आए। मैं आपका बहुत-बहुत आभारी हूं। ऐसा लग रहा है, कर्नाटक की जनता अब ज्यादा चुनाव का इंतजार करने को तैयार नहीं है। देश के अन्य राज्य की तरह कर्नाटक भी विकास की यात्रा में तेज गति से जुड़ना चाहता है। और आने वाले चुनाव के बाद कर्नाटक भी विकास की मुख्य धारा में सम्मलित हो जाएगा, ये मेरा पूरा विश्वास है।

अब देश कांग्रेस पार्टी से कोई आशा अपेक्षा नहीं रखती है। मैं हैरान हूं कि इतने सालों तक केंद्र में जिन लोगों ने राज किया। देश की आंतरिक सुरक्षा, राष्ट्रीय सुरक्षा ये जिन लोगों की जिम्मेदारी थी। सरदार वल्लभ भाई पटेल जिन्होंने देश की एकता और अखंडता के लिए अहम फैसले लिए थे। कश्मीर के लिए इस देश के हजारों जवानों ने शहादत मोल ली थी। हर पल मातृभूमि की रक्षा के लिए, कश्मीर के निर्दोष नागरिकों की रक्षा के लिए देश के जवान अपना बलिदान देते रहे। हिन्दुस्तान का कोई राज्य ऐसा नहीं होगा, जहां के वीरों ने कश्मीर के लिए बलिदान न दिया। और अचानक, कल तक जो सत्ता में बैठे थे, वो आज अचानक यू टर्न ले लें। बेशर्मी के साथ बयान करे। कश्मीर की आजादी के साथ अपना स्वर मिला दे।

 

मैं पूछना चाहता हूं बंगलौर के भाइयों बहनों से।

क्या ऐसे लोग जो देश के वीरों के बलिदान पर अपनी राजनीति करे, तुच्छ राजनीति करे। क्या ऐसे लोगों से देश का भला  हो सकता है ...। हो सकता है ...। हो सकता है ...। इनको ये कहने में शर्म नहीं आ रही है। कांग्रेस पार्टी को इस बयान का हर पल जवाब देना पड़ेगा। जिन वीरों ने बलिदान दिया है, जिन मां ने अपना लाल दिया देश के लिए बलिदान दिया है, वो मां जवाब मांगती है। जिस बहन ने अपने भाई को देश के लिए बलिदान दिया है, वो बहन जवाब पूछती है। जिन बच्चों ने अपने पिता को देश के लिए बलिदान दिया है, वो बच्चे जवाब मांगते हैं। लेकिन कांग्रेस पार्टी बेशर्मी के साथ उस भाषा का प्रयोग करे जो कश्मीर की धरती पर अलगाववादी करते हैं। उस भाषा का प्रयोग करे जो पाकिस्तान में बोला जाता है।

भाइयों बहनों।

ये सरदार वल्लभ भाई पटेल की धरती है। और हम देश की एकता और अखंडता के साथ कोई समझौता करेंगे भी नहीं और होने देंगे भी नहीं। सर्जिकल स्ट्राइक हुआ। देश के वीर जवानों ने दुश्मनों के दांत खट्टे कर दिए। सारे भारत के लिए गौरव का पल था। कांग्रेस पार्टी उसको भी नहीं पचा पाई। कल के, कांग्रेस पार्टी के नेता के बयान को सुनकरके कल्पना कर सकता हूं कि सर्जिकल स्ट्राइक के प्रति नाराजगी का कारण क्या था। देश के वीर जवानों के पराक्रम, भारत की डिप्लोमेटिक ताकत, भारत का संयम, भारत का धैर्य, पूरी दुनिया ने डोकलाम में देखा। चीन कितना ही शक्तिशाली क्यों न हो, लेकिन धैर्य की कसौटी पर भारत खरा उतरा है। आज भारत के सामर्थ्य जिसको पूरा विश्व गौरवपूर्ण नजरों से देख रहा है, नजर कर रहा है। यही कांग्रेस के लोग आए दिन डोकलाम के नाम पर झूठी खबरें प्रसारित कर रहे थे।

भाइयों बहनों।

जो सत्ता पर इतने साल रहे, देश की जनता ने इतना भरोसा किया, ये लोग ऐसे निकले, इस सोच के पले बढ़े थे।

भाइयों बहनों।

लग रहा था एक के बाद एक पराजय के बाद, कांग्रेस पार्टी में कुछ समझदार लोग, कांग्रेस को सही रास्ते पर लाने के लिए प्रयास करेंगे। लेकिन एक के बाद एक घटना देख रहा हूं, एक के बाद एक वक्तव्य सुन रहा हूं, गैर जिम्मेवार व्यवहार देख रहा हूं। तब ये लगता है कि अब कांग्रेस ने सुधरना नहीं है, ये तय कर लिया है। वर्ना पराजय से लोग सीखते हैं, समझते हैं, गलतियों को ठीक करते हैं। इनका अंहकार सातवें आसमान पर है। देश की जनता से वो कट चुके हैं। देश की आशा, आकांक्षाओं से छंट चुके हैं। इसी का परिणाम है कि आज इस प्रकार की भाषा बोली जाती है।

भाइयों बहनों।

मैं आज यहां एक आध्यात्मिक कार्यक्रम के अवसर पर आया हूं। प्रात: धर्मस्थल पर जाने का मौका मिला और शाम को एक महत्वपूर्ण रेल प्रोजेक्ट के लिए जा रहा हूं। आप इतनी बड़ी मात्रा में आकरके स्वागत सम्मान किया। मैं आपका ह्रदय से आभार व्यक्त करता हूं। धन्यवाद।

 

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Today, the world does not suffer from a shortage of resources; it suffers from a shortage of trust: PM Modi at G7 Summit in Evian, France
June 16, 2026

राष्ट्रपति मैक्रों,
Your Excellencies,

नमस्कार!

G-7 समिट में हमारे गर्मजोशी भरे स्वागत के लिए मैं राष्ट्रपति मैक्रों का हार्दिक आभार व्यक्त करता हूँ।

Friends,

आज का विश्व पहले से कहीं अधिक inter-connected और inter-dependent है। किसी भी देश की ऊर्जा सुरक्षा, खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य सुरक्षा, साइबर सुरक्षा और आर्थिक समृद्धि केवल उसकी सीमाओं के भीतर तय नहीं होती। Mobility, data, capital, technology, ये सभी हमें आपस में जोड़ते हैं।

ऐसे समय में Partnerships का महत्व स्वाभाविक रूप से बढ़ जाता है। लेकिन साझेदारियाँ तभी सफल होती हैं जब उनके केंद्र में विश्वास हो। आज सबसे महत्वपूर्ण Strategic Asset कोई mineral, technology या market नहीं, बल्कि आपसी विश्वास है।

विश्वास कि टेक्नॉलजी और supply chains को हथियार के रूप में नहीं, global good के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। विश्वास कि विकास के अवसर कुछ देशों तक सीमित नहीं रहेंगे। विश्वास कि वैश्विक संस्थान सभी देशों की आकांक्षाओं को पूरा करने में सक्षम होंगे।

Friends,

पिछली सदी में मानवता को दो विश्व युद्धों से गुज़रना पड़ा। अनेक बलिदानों के बाद विश्व समुदाय ने शांति, स्थिरता और समृद्धि की ओर बढ़ने के लिए व्यवस्थाएं विकसित की। इन व्यवस्थाओं का आधार भी trust ही था।

किन्तु अनेक दशकों से, अनेक पीढ़ियों के योगदान से बनाए गए विश्वास को आज चोट पहुँच रही है। कोविड ने हमें आईना दिखाया कि trust और solidarity के दावे कितने खोखले थे।

Today the world does not suffer from a shortage of resources; it suffers from a shortage of trust. And the future of our partnerships depends on building this trust.

अमेरिका के राष्ट्रपति रोनल्ड रेगन ने कहा था: Trust but Verify. यह आज के समय में भी प्रासंगिक है। भावी पीढ़ियों के प्रति हमारा दायित्व है कि हम नए युग के अनुरूप trusted rules based order का निर्माण करें।

Friends,

भारत ने सदैव विश्व को एक परिवार के रूप में देखा है। हमारे सभी प्रयास “सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय” यानि, welfare and happiness for all के मूल सिद्धांत पर आधारित रहे हैं।

भारत का अनुभव दिखाता है कि विकास सबसे अधिक प्रभावी तब होता है जब वह लोगों की आकांक्षाओं से जुड़ा हो। यही सिद्धांत हमारी अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों का भी आधार है। इसी सोच के साथ भारत ने International Solar Alliance, Coalition for Disaster Resilient Infrastructure, ग्लोबल बायोफ्यूल्स एलायंस, Mission LiFE, और “एक पेड़ माँ के नाम” जैसी वैश्विक पहलों को आगे बढ़ाया है।

संकट के समय भारत ने First Responder के रूप में सभी देशों की सहायता करना अपना दायित्व समझा है। कोविड महामारी के दौरान भारत ने डेढ़ सौ से अधिक देशों को दवाइयाँ और vaccines उपलब्ध कराईं।

श्रीलंका में cyclone हो, अफगानिस्तान में भूकंप हो, मोज़ाम्बिक में floods हों, या क्यूबा और जमैका में hurricane, भारत ने सदैव "Humanity First" के सिद्धांत पर कार्य किया है। हमारी विकास साझेदारियाँ भी इसी भावना को प्रतिबिंबित करती हैं। हमारे प्रयास पार्टनर देशों में capacity building और कौशल विकास पर केन्द्रित रहे हैं।

भारत का मानना है: The true test of partnership is not what we build for others, but what we enable others to build for themselves.

Friends,

आज ग्लोबल साउथ की विश्व समुदाय से बहुत उम्मीदें हैं। किन्तु उनकी अपेक्षा सहारे की नहीं, साथ की है। वे वैश्विक विकास के लाभार्थी नहीं, उसके भागीदार बनना चाहते हैं।

हमें donor–recipient की सोच से आगे बढ़कर, equal पार्टनर्स के रूप में काम करना होगा। उनके पास-पास नहीं, साथ-साथ चलना होगा। साझेदारी को dependency के बजाय, dignity से जोड़ना होगा। इन प्रयासों से हम भावी पीढ़ियों के सतत विकास की मजबूत नींव रख सकेंगे।

Friends,

अंतरराष्ट्रीय साझेदारियाँ और वैश्विक एकजुटता तभी सार्थक बन सकती हैं, जब हम साझा चुनौतियों का मिलकर समाधान करें। भारत का दृढ विश्वास है कि विश्व के विभिन्न हिस्सों में चल रहे तनावों और युद्धों का स्थायी समाधान dialogue, diplomacy और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के मार्ग से ही संभव है।

हम west asia में शांति प्रयासों में हुई प्रगति का स्वागत करते हैं। इस संघर्ष से west asia में हमारे मित्र देशों को जान-माल का नुकसान झेलना पड़ा है। होर्मुज़ स्ट्रेट में maritime ट्रेड में आई बाधा के कारण पूरे विश्व की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचा। भारत के कई civilians को जान गंवानी पड़ी। Global maritime ट्रेड के माध्यम से सभी देशों को आपस में जोड़ने वाले नाविकों की सुरक्षा हमारा दायित्व है। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि समुद्री मार्ग सुरक्षित रहें, और Seafarers बिना भय के अपना कार्य कर सकें।

Friends,

भारत इन विषयों पर सभी पार्टनर्स के साथ मिलकर काम करने के लिए पूरी तरह से तैयार है।

बहुत-बहुत धन्यवाद।