ನಾವು ಜಾಗತಿಕ ಉದ್ವಿಗ್ನ ವಾತಾವರಣದ ನಡುವೆ ಭೇಟಿಯಾಗುತ್ತಿದ್ದೇವೆ. ಭಾರತ ಸದಾ ಶಾಂತಿಯ ಪರವಾಗಿದೆ. ಸದ್ಯದ ಪರಿಸ್ಥಿತಿಯಲ್ಲಿಯೂ ಸಹ ನಾವು ನಿರಂತರವಾಗಿ ಸಂವಾದ ಮತ್ತು ರಾಜತಾಂತ್ರಿಕತೆಯ ಹಾದಿಗೆ ನಾವು ಕರೆ ನೀಡುತ್ತೇವೆ. ಈ ಭೌಗೋಳಿಕ ರಾಜಕೀಯ ಒತ್ತಡದ ಪರಿಣಾಮವು ಕೇವಲ ಯುರೋಪಿಗೆ ಸೀಮಿತವಾಗಿಲ್ಲ. ಇಂಧನ ಮತ್ತು ಆಹಾರ ಧಾನ್ಯಗಳ ಬೆಲೆ ಏರಿಕೆಯು ಎಲ್ಲಾ ದೇಶಗಳ ಮೇಲೆ ಪರಿಣಾಮ ಬೀರುತ್ತಿದೆ. ಅಭಿವೃದ್ಧಿಶೀಲ ರಾಷ್ಟ್ರಗಳ ಇಂಧನ ಭದ್ರತೆ ಮತ್ತು ಸುರಕ್ಷತೆ ವಿಶೇಷವಾಗಿ ಅಪಾಯದಲ್ಲಿದೆ. ಈ ಸವಾಲಿನ ಸಮಯದಲ್ಲಿ, ಭಾರತವು ಅಗತ್ಯವಿರುವ ಅನೇಕ ದೇಶಗಳಿಗೆ ಆಹಾರ ಧಾನ್ಯಗಳನ್ನು ಪೂರೈಸಿದೆ. ಕಳೆದ ಕೆಲವು ತಿಂಗಳುಗಳಲ್ಲಿ ನಾವು ಸುಮಾರು 35,000 ಟನ್ಗಳಷ್ಟು ಗೋಧಿಯನ್ನು ಮಾನವೀಯ ನೆರವಾಗಿ ಆಫ್ಘಾನಿಸ್ತಾನಕ್ಕೆ ರವಾನಿಸಿದ್ದೇವೆ ಮತ್ತು ಅಲ್ಲಿ ಭಾರಿ ಭೂಕಂಪದ ನಂತರವೂ ಭಾರತವು ಪರಿಹಾರ ಸಾಮಗ್ರಿಗಳನ್ನು ತಲುಪಿಸಿದ ಮೊದಲ ದೇಶವಾಗಿದೆ. ಆಹಾರ ಭದ್ರತೆಯನ್ನು ಖಾತ್ರಿಪಡಿಸಿಕೊಳ್ಳಲು ನಾವು ನಮ್ಮ ನೆರೆಯ ಶ್ರೀಲಂಕಾಕ್ಕೆ ಸಹಾಯ ಮಾಡುತ್ತಿದ್ದೇವೆ.
ಜಾಗತಿಕ ಆಹಾರ ಭದ್ರತೆಯ ವಿಷಯದ ಕುರಿತಂತೆ ನನ್ನ ಬಳಿ ಕೆಲವು ಸಲಹೆಗಳಿವೆ. ಮೊದಲನೆಯದಾಗಿ, ನಾವು ರಸಗೊಬ್ಬರಗಳ ಲಭ್ಯತೆಯ ಮೇಲೆ ಹೆಚ್ಚಿನ ಗಮನ ಕೇಂದ್ರೀಕರಿಸಬೇಕು ಮತ್ತು ಜಾಗತಿಕ ಮಟ್ಟದಲ್ಲಿ ರಸಗೊಬ್ಬರಗಳ ಮೌಲ್ಯ ಸರಣಿಯನ್ನು ಸುಗಮ ಮಾಡಿಕೊಳ್ಳಬೇಕು. ನಾವು ಭಾರತದಲ್ಲಿ ರಸಗೊಬ್ಬರಗಳ ಉತ್ಪಾದನೆಯನ್ನು ಹೆಚ್ಚಿಸಲು ಪ್ರಯತ್ನಿಸುತ್ತಿದ್ದೇವೆ ಮತ್ತು ಆ ನಿಟ್ಟಿನಲ್ಲಿ ಜಿ-7 ದೇಶಗಳಿಂದ ಸಹಕಾರವನ್ನು ಪಡೆಯುತ್ತೇವೆ. ಎರಡನೆಯದಾಗಿ, ಜಿ-7 ದೇಶಗಳಿಗೆ ಹೋಲಿಸಿದರೆ ಭಾರತವು ಅಪಾರ ಕೃಷಿ ಮಾನವಶಕ್ತಿಯನ್ನು ಹೊಂದಿದೆ.
ಜಿ-7ನ ಕೆಲವು ದೇಶಗಳಲ್ಲಿ ಚೀಸ್ ಮತ್ತು ಆಲಿವ್ನಂತಹ ಸಾಂಪ್ರದಾಯಿಕ ಕೃಷಿ ಉತ್ಪನ್ನಗಳಿಗೆ ಹೊಸ ಜೀವನವನ್ನು ನೀಡಲು ಭಾರತೀಯ ಕೃಷಿ ಕೌಶಲ್ಯಗಳು ಸಹಾಯ ಮಾಡಿವೆ. ಜಿ-7 ತನ್ನ ಸದಸ್ಯ ರಾಷ್ಟ್ರಗಳಲ್ಲಿ ಭಾರತೀಯ ಕೃಷಿ ಪ್ರತಿಭೆಗಳ ವ್ಯಾಪಕ ಬಳಕೆಗಾಗಿ ರಚನಾತ್ಮಕ ವ್ಯವಸ್ಥೆಯನ್ನು ರಚಿಸಬಹುದೇ? ಭಾರತದ ರೈತರ ಸಾಂಪ್ರದಾಯಿಕ ಪ್ರತಿಭೆಗಳ ಸಹಾಯದಿಂದ ಜಿ7 ದೇಶಗಳಿಗೆ ಆಹಾರ ಭದ್ರತೆಯನ್ನು ಖಾತ್ರಿಪಡಿಸಲಾಗುವುದು.
ಮುಂದಿನ ವರ್ಷ ವಿಶ್ವ ಅಂತಾರಾಷ್ಟ್ರೀಯ ಸಿರಿಧಾನ್ಯ ವರ್ಷವನ್ನು ಆಚರಿಸುತ್ತಿದೆ. ಈ ಸಂದರ್ಭದಲ್ಲಿ, ನಾವು ರಾಗಿಯಂತಹ ಪೌಷ್ಟಿಕ ಪರ್ಯಾಯವನ್ನು ಉತ್ತೇಜಿಸುವ ಅಭಿಯಾನವನ್ನು ನಡೆಸಬೇಕು. ಜಗತ್ತಿನಲ್ಲಿ ಆಹಾರ ಭದ್ರತೆಯನ್ನು ಖಾತ್ರಿಪಡಿಸಿಕೊಳ್ಳಲು ಸಿರಿಧಾನ್ಯಗಳು ಅಮೂಲ್ಯವಾದ ಕೊಡುಗೆ ನೀಡಬಲ್ಲವು. ಕೊನೆಯದಾಗಿ ಭಾರತದಲ್ಲಿ ನಡೆಯುತ್ತಿರುವ 'ನೈಸರ್ಗಿಕ ಕೃಷಿ' ಕ್ರಾಂತಿಯತ್ತ ನಿಮ್ಮೆಲ್ಲರ ಗಮನ ಸೆಳೆಯಲು ಬಯಸುತ್ತೇನೆ. ನಿಮ್ಮ ತಜ್ಞರು ಈ ಪ್ರಯೋಗವನ್ನು ಅಧ್ಯಯನ ಮಾಡಬಹುದು. ಈ ವಿಷಯದ ಕುರಿತು ನಾವು ಪ್ರಬಂಧವನ್ನು ನಿಮ್ಮೆಲ್ಲರೊಂದಿಗೆ ಹಂಚಿಕೊಂಡಿದ್ದೇವೆ.
ಗೌರವಾನ್ವಿತರೇ ,
ಲಿಂಗ ಸಮಾನತೆಗೆ ಸಂಬಂಧಿಸಿದಂತೆ ಇಂದು ಭಾರತದ ವಿಧಾನವು ‘ಮಹಿಳಾ ಅಭಿವೃದ್ಧಿ'ಯಿಂದ 'ಮಹಿಳಾ ನೇತೃತ್ವದ ಅಭಿವೃದ್ಧಿ'ಗೆ ಸಾಗುತ್ತಿದೆ. ಸಾಂಕ್ರಾಮಿಕ ಸಮಯದಲ್ಲಿ 6 ದಶಲಕ್ಷಕ್ಕೂ ಅಧಿಕ ಭಾರತೀಯ ಮಹಿಳಾ ಮುಂಚೂಣಿ ಕೆಲಸಗಾರರು ನಮ್ಮ ನಾಗರಿಕರನ್ನು ಸುರಕ್ಷಿತವಾಗಿರಿಸಿದ್ದಾರೆ. ನಮ್ಮ ಮಹಿಳಾ ವಿಜ್ಞಾನಿಗಳು ಭಾರತದಲ್ಲಿ ಲಸಿಕೆಗಳು ಮತ್ತು ಪರೀಕ್ಷಾ ಕಿಟ್ಗಳನ್ನು ಅಭಿವೃದ್ಧಿಪಡಿಸುವಲ್ಲಿ ದೊಡ್ಡ ಕೊಡುಗೆ ನೀಡಿದ್ದಾರೆ. ಭಾರತದಲ್ಲಿ ನಾವು ‘ಆಶಾ ಕಾರ್ಯಕರ್ತರು’ ಎಂದು ಕರೆಯುವ ಒಂದು ಮಿಲಿಯನ್ಗೂ ಅಧಿಕ ಮಹಿಳಾ ಸ್ವಯಂ ಸೇವಕರು ಗ್ರಾಮೀಣ ಆರೋಗ್ಯ ಖಾತ್ರಿಯಲ್ಲಿ ಸಕ್ರಿಯರಾಗಿ ತೊಡಗಿಸಿಕೊಂಡಿದ್ದಾರೆ. ಅವರನ್ನು ಕಳೆದ ತಿಂಗಳಷ್ಟೇ ವಿಶ್ವ ಆರೋಗ್ಯ ಸಂಸ್ಥೆಯು ಈ ಭಾರತೀಯ ಆಶಾ ಕಾರ್ಯಕರ್ತರಿಗೆ ‘2022 ಗ್ಲೋಬಲ್ ಲೀಡರ್ಸ್ ಅವಾರ್ಡ್' ನೀಡಿ ಗೌರವಿಸಿದೆ.
ಭಾರತದಲ್ಲಿ ಸ್ಥಳೀಯ ಸರ್ಕಾರದಿಂದ ಹಿಡಿದು ರಾಷ್ಟ್ರೀಯ ಸರ್ಕಾರದವರೆಗೆ ಎಲ್ಲಾ ಚುನಾಯಿತ ನಾಯಕರನ್ನು ಲೆಕ್ಕ ಹಾಕಿದರೆ, ಅವರಲ್ಲಿ ಅರ್ಧಕ್ಕಿಂತ ಹೆಚ್ಚು ಮಹಿಳೆಯರು ಮತ್ತು ಒಟ್ಟು ಅವರ ಸಂಖ್ಯೆ ಲಕ್ಷಾಂತರ ಇದೆ. ಭಾರತೀಯ ಮಹಿಳೆಯರು ಇಂದು ನಿಜವಾಗಿಯೂ ನಿರ್ಣಾಯಕ ನಿರ್ಧಾರ ತೆಗೆದುಕೊಳ್ಳುವಲ್ಲಿ ಸಂಪೂರ್ಣವಾಗಿ ತೊಡಗಿಕೊಂಡಿದ್ದಾರೆ ಎಂಬುದನ್ನು ಇದು ತೋರಿಸುತ್ತದೆ. ಮುಂದಿನ ವರ್ಷ ಭಾರತವು ಜಿ-20 ಅಧ್ಯಕ್ಷ ಸ್ಥಾನವಹಿಸಲಿದೆ, ಜಿ-20 ಪ್ಲಾಟ್ಫಾರ್ಮ್ ಅಡಿಯಲ್ಲಿ ಕೋವಿಡ್ ನಂತರದ ಚೇತರಿಕೆ ಸೇರಿದಂತೆ ಇತರ ಸಮಸ್ಯೆಗಳ ಕುರಿತು ನಾವು ಜಿ7-ದೇಶಗಳೊಂದಿಗೆ ನಿಕಟ ಸಂವಾದವನ್ನು ಮುಂದುವರಿಸುತ್ತೇವೆ.
आज मैं एक बेहद महत्वपूर्ण विषय पर विशेष कर देश की माता बहनों और बेटियों से बात करने के लिए आया हूं! आज भारत का हर नागरिक देख रहा है कि कैसे भारत की नारी शक्ति की उड़ान को रोक दिया गया। उनके सपनों को बेरहमी से कुचल दिया गया है। हमारे भरसक प्रयास के बावजूद हम सफल नहीं हो पाए, नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन नहीं हो पाया! और मैं इसके लिए सभी माताओं-बहनों, उनसे मैं क्षमा प्रार्थी हूं।
साथियों,
हमारे लिए देश हित सर्वोपरि है, लेकिन जब कुछ लोगों के लिए दल हित सब कुछ हो जाता है, दल हित, देश हित से बड़ा हो जाता है, तो नारी शक्ति को, देश हित को, इसका खामियाजा उठना पड़ता है। इस बार भी यही हुआ है। कांग्रेस, डीएमके, टीएमसी और समाजवादी पार्टी जैसे दलों की स्वार्थी राजनीति का नुकसान देश के नारी शक्ति को उठाना पड़ा है।
साथियों,
कल देश की करोड़ों महिलाओं की नजर संसद पर थी, देश की नारी शक्ति देख रही थी, मुझे भी यह देखकर बहुत दुख हुआ, कि जब ये नारी हित का प्रस्ताव गिरा, तो कांग्रेस, डीएमके, टीएमसी, सपा, जैसी परिवारवादी पार्टियां, खुशी से तालियां बजा रही थीं। महिलाओं से उनके अधिकार छिनकर ये लोग मेजें थपथपा रहे थे। उन्होंने जो किया वो केवल टेबल पर थाप नहीं थी, वो नारी के स्वाभिमान पर उसके आत्मसम्मान पर चोट थी और नारी सब भूल जाती है, अपना अपमान कभी नहीं भूलती, इसलिए संसद में कांग्रेस और उसके सहयोग के उन सबके व्यवहार की कसक हर नारी के मन में हमेशा रहेगी। देश की नारी जब भी अपने क्षेत्र में इन नेताओं को देखेगी, तो वो याद करेगी कि इन्हीं लोगों ने, इन्हीं लोगों ने, संसद में महिला आरक्षण को रोकने का जश्न मनाया था, खुशियां मनाई थीं। कल संसद में नारी शक्ति वंदन संशोधन का जिन दलों ने विरोध किया है, उनसे मैं दो टूक कहूंगा, ये लोग नारी शक्ति को फॉर ग्रांटेड ले रहे हैं, वो ये भूल रहे हैं, कि 21वीं सदी की नारी देश की हर घटना पर नजर रख रही है, वो उनकी की मंशा भाप रही है और सच्चाई भी भली भांति जान चुकी है। इसलिए महिला आरक्षण विरोध करके जो पाप विपक्ष ने किया है, इसकी उन्हें सजा जरूर मिलेगी। इन दलों ने संविधान निर्माताओं की भावनाओं का भी अपमान किया है और जनता द्वारा इसकी सजा से भी वो बच नहीं पाएंगे।
साथियों,
सदन में नारी शक्ति वंदन संशोधन किसी से भी कुछ छिनने का नहीं था। नारी शक्ति वंदन संशोधन हर किसी को कुछ ना कुछ देने का था, देने के लिए संशोधन का था। ये 40 साल से लटके हुए नारी के हक को, 2029 के अगले लोकसभा चुनाव से उसका हक देने का संशोधन था।
नारी शक्ति वंदन संशोधन 21वीं सदी के भारत की नारी को नए अवसर देने, नई उड़ान देने, उसके सामने से बाधाएं हटाने का महायज्ञन था। देश की 50% यानी आधी आबादी को उसका अधिकार देने का साफ नियत के साथ, ईमानदारी के साथ किया गया एक पवित्र प्रयास था। नारी को भारत की विकास यात्रा में सहयात्री बनाने और सबको जोड़ने का प्रयास था। नारी शक्ति वंदन संशोधन समय की मांग है। नारी शक्ति वंदन संशोधन उत्तर, दक्षिण, पूर्व, पश्चिम, सभी राज्यों की हर राज्य की शक्ति में समान वृद्धि का प्रयास था। ये संसद में सभी राज्यों की आवाज को अधिक शक्ति देने का प्रयास था। राज्य छोटा हो, राज्य बड़ा हो, राज्य की आबादी कम हो या राज्य की आबादी ज्यादा हो। सब की समान अनुपात में शक्ति बढ़ाने की कोशिश थी। लेकिन इस ईमानदार प्रयास की कांग्रेस और उसके सहयोगियों ने सदन में पूरे देश के सामने भ्रूण हत्या कर दी है, भ्रूण हत्या कर दी है। ये कांग्रेस, टीएमसी, समाजवादी पार्टी, टीएमके जैसे दल, इस भ्रूण हत्या के गुनहगार हैं। ये देश के संविधान के अपराधी हैं, ये देश की नारी शक्ति के अपराधी हैं।
साथियों,
कांग्रेस महिला आरक्षण के विषय से ही नफरत करती है, उसने हमेशा से ही महिला आरक्षण को रोकने के लिए षड्यंत्र किए हैं। इस दिशा में पहले जितनी बार भी प्रयास हुए, हर बार कांग्रेस ने इसमें रो़ड़े अटकाए हैं। इस बार भी कांग्रेस और उसके साथियों ने महिला आरक्षण को रोकने के लिए एक के बाद एक नए झूठ का सहारा लिया। कभी संख्या को लेकर, कभी किसी और तरीके से, कांग्रेस और उसके साथियों ने देश को गुमराह करने की कोशिश की। ऐसा करके इन दलों ने भारत के नारी शक्ति के सामने अपना असली चेहरा सामने ला दिया है। अपना मुखौटा उतर दिया है।
साथियों,
मुझे व्यक्तिगत तौर पर आशा थी कि कांग्रेस अपनी दशकों पुरानी गलती सुधारेंगी। कांग्रेस अपने पापों का प्रायश्चित करेगी, लेकिन कांग्रेस ने इतिहास रचने का, महिलाओं के पक्ष में खड़े होने का, अवसर खो दिया। कांग्रेस खुद देश के अधिकांश हिस्सों में अपना वजूद खो चुकी है। कांग्रेस परजीवी की तरह क्षेत्रीय दलों के पीठ पर सवार होकर खुद को जिंदा रखे हुए है। लेकिन कांग्रेस, ये भी नहीं चाहती कि क्षेत्रीय दलों की ताकत बढ़े, इसलिए कांग्रेस ने इस संशोधन का विरोध करवारकर अनेक क्षेत्रीय दलों के भविष्य को अंधकार में धकेलना का राजनीतिक षड्यंत्र किया है।
साथियों,
कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, डीएमके, टीएमसी और दूसरी पार्टियां, इतने वर्षों से हर बार वही बहाने, वही कुतर्क गढ़ते आए हैं, बनाते आए हैं, कोई ना कोई टेक्निकल पेंच फंसाकर, ये महिलाओं के अधिकारों पर डाका डालते रहे हैं। देश राजनीति का यह भद्दा पैटर्न बराबर समझ चुका है, और उसके पीछे की वजह भी जान चुका है।
भाइयों बहनों,
नारी शक्ति वंदन अधिनियम के विरोध की एक बड़ी वजह है, इन परिवारवादी पार्टियों का डर। इन्हें डर है, अगर महिलाएं सशक्त हो गईं, तो इन परिवारवादी पार्टियों का नेतृत्व खतरे में पड़ जाएगा। ये कभी नहीं चाहेंगे कि उनके परिवार के बाहर की महिलाएं आगे बढ़ें। आज पंचायतों में, लोकल बॉडीज में, जिन हजारों लाखों महिलाओं ने अपनी क्षमता को साबित किया है, जब आगे बढ़कर लोकसभा और विधानसभाओं में आना चाहती हैं, देश की सेवा करना चाहती हैं, परिवारवादियों के भीतर उनसे असुरक्षा की भावना बैठी हुई है। परिसीमन के बाद महिलाओं के लिए कहीं ज्यादा सीटें होंगी, महिलाओं का कद बढ़ेगा, इसीलिए, इन लोगों ने नारी शक्ति वंदन संशोधन का विरोध किया है। देश की नारीशक्ति कांग्रेस और उसके सहयोगियों को इस पाप के लिए कभी माफ नहीं करेगी।
मेरे प्रिय देशवासियों,
कांग्रेस और उसके साथी दल, डिलिमिटेशन पर लगातार, लगातार झूठ बोल रहे हैं। ये इस बहाने विभाजन की आग को सुलगाना चाहते हैं। क्योंकि, बांटो और राज करो, काँग्रेस ये पॉलिटिक्स अंग्रेजों से विरासत में सीखकर आई है। और, कांग्रेस आज भी उसी के सहारे चल रही है। कांग्रेस ने हमेशा देश में दरार पैदा करने वाली भावनाओं को हवा दी है। इसलिए, ये झूठ फैलाया गया कि डिलिमिटेशन यानी परिसीमन से कुछ राज्यों को नुकसान होगा! जबकि, सरकार ने पहले दिन से स्पष्ट किया है, कि न किसी
राज्य की भागीदारी का अनुपात बदलेगा, न किसी का representation कम होगा। बल्कि,सभी राज्यों की सीटें समान अनुपात में ही बढ़ेंगी। फिर भी काँग्रेस,DMK,TMC और समाजवादी पार्टी जैसे दल इसे मानने को तैयार नहीं हुए।
साथियों,
ये संशोधन बिल सभी दलों, और सभी राज्यों के लिए एक मौका था, एक अवसर था। ये बिल पास होता तो तमिलनाडु, बंगाल, यूपी, केरलम, हर राज्य की सीटें बढ़तीं। लेकिन अपनी स्वार्थी राजनीति की वजह से इन दलों ने, अपने राज्य के लोगों को भी धोखा दे दिया। जैसे कि, DMK के पास मौका था कि वो और ज्यादा तमिल लोगों को सांसद, विधायक बना सकती थी, तमिलनाडु की आवाज़ और मजबूत कर सकती थी! लेकिन, उसने वो मौका खो दिया। TMC के पास भी बंगाल के लोगों को आगे बढ़ाने का मौका था। लेकिन TMC ने भी ये मौका गवां दिया। समाजवादी पार्टी के पास भी मौका था कि वो महिला विरोधी छवि होने के दाग को कुछ कम कर सके। लेकिन सपा भी इसमें चूक गई। समाजवादी पार्टी लोहिया जी को तो पहले ही भूल चुकी है। सपा ने नारीशक्ति वंदन संशोधन का विरोध करके, लोहिया जी के सारे सपनों को पैरों तले रौंद दिया है। सपा महिला आरक्षण विरोधी है, ये यूपी की और देश की महिलाएं कभी नहीं भूलेंगी।
साथियों,
महिलाओं के आरक्षण का विरोध करके, कांग्रेस ने फिर एक बात सिद्ध कर दी है। कांग्रेस, एक एंटी रिफॉर्म पार्टी है। 21वीं सदी के विकसित भारत के लिए, जो भी निर्णय, जो भी रिफॉर्म्स ज़रूरी हैं, जो भी निर्णय देश ले रहा है, कांग्रेस उन सबका विरोध करती है, उसे खारिज कर देती है, उस काम के अंदर खलल डालती है। यही कांग्रेस का इतिहास है और यही कांग्रेस की नेगेटिव पॉलिटिक्स है।
साथियों,
ये वही कांग्रेस है, जिसने जनधन-आधार-मोबाइल की त्रिशक्ति का विरोध किया। कांग्रेस ने, डिजिटल पेमेंट्स का विरोध किया, कांग्रेस ने, GST का विरोध किया, कांग्रेस ने, सामान्य वर्ग के गरीबों को आरक्षण का विरोध किया, कांग्रेस ने, ट्रिपल तलाक के विरुद्ध कानून का विरोध किया। कांग्रेस ने, आर्टिकल 370 हटाने का विरोध किया। हमारा संविधान, हमारे कोर्ट, जिस यूनिफॉर्म सिविल कोड, समान नागरिक आचार संहिता को, यूसीसी को ज़रूरी बताते हैं, कांग्रेस उसका भी विरोध करती है। Reform का नाम सुनते ही कांग्रेस, विरोध की तख्ती लेकर दौड़ पड़ती है। ऐसा कोई भी काम जिससे देश मजबूत होता है, कांग्रेस उसमें बाधाएं खड़ी करने के लिए पूरी शक्ति लगा देती है। कांग्रेस, वन नेशन वन इलेक्शन का विरोध करती है, कांग्रेस, देश से घुसपैठियों को भगाने का विरोध करती है, कांग्रेस, मतदाता सूची के शुद्धिकरण, SIR का विरोध करती है, कांग्रेस, वक्फ बोर्ड में Reform का विरोध करती है।
साथियों,
कांग्रेस ने, शरणार्थियों को सुरक्षा देने वाले CAA कानून तक का विरोध किया। इस पर झूठ बोलकर-अफवाहें फैलाकर देश में बवंडर खड़ा कर दिया। कांग्रेस, माओवादी-नक्सली हिंसा को समाप्त करने के देश के प्रयासों में भी रुकावटें डालती है। कांग्रेस का एक ही पैटर्न रहा है, कोई भी Reform आए तो झूठ बोलो, भ्रम फैलाओ। इतिहास साक्षी है, कांग्रेस ने हमेशा यही नेगेटिव रास्ता चुना है।
साथियों,
जो भी कार्य देश के लिए जरूरी फैसला होता है, कांग्रेस इसको कार्पेट के नीचे डाल देती है। कांग्रेस के इसी रवैये की वजह से भारत विकास की उस ऊंचाई पर नहीं पहुंच पाया, जिसका भारत हकदार है। आजादी के समय, उस दौर में हमारे साथ और भी कई देश आजाद हुए थे। ज्यादातर देश हमसे बहुत आगे निकल गए, और इसकी वजह थी, कि कांग्रेस हर Reform को रोककर बैठी रही। लटकाना-भटकाना- अटकाना यही कांग्रेस का सिद्धांत रहा है, यही कांग्रेस का वर्क कल्चर रहा है। कांग्रेस ने पड़ोसी देशों के साथ सीमा-विवादों को लटकाया, कांग्रेस ने पाकिस्तान के साथ पानी के बंटवारे से जुड़े विवादों को लटकाया, कांग्रेस ने ओबीसी आरक्षण के निर्णय को 40 साल तक लटकाए रखा। कांग्रेस ने सैनिकों के लिए वन रैंक वन पेंशन को 40 साल तक रोके रखा।
साथियों,
कांग्रेस के इस रवैये ने हमेशा देश का बहुत बड़ा नुकसान किया है। कांग्रेस के हर विरोध, हर अनिर्णय, हर छल-प्रपंच का खामियाजा देश ने भुगता है, देश की पीढ़ियों ने भुगता है। आज देश के सामने जितनी भी बड़ी चुनौतियां हैं, वो कांग्रेस के इसी रवैये से उपजी हुई हैं। इसलिए, ये लड़ाई सिर्फ एक कानून की नहीं है, ये लड़ाई, कांग्रेस की उस एंटी-रिफॉर्म मानसिकता के साथ है, जिसमें सिर्फ नेगेटिविटी है, नकारात्मकता है। और मुझे इसमें कोई संदेह नहीं है, कि देश की सभी बहनें-बेटियां, कांग्रेस की इस मानसकिता को करारा जवाब देकर रहेगी।
साथियों,
कुछ लोग देश की महिलाओं के सपने टूटने को सरकार की नाकामी बता रहे हैं। लेकिन, ये विषय कामयाबी या नाकामयाबी क्रेडिट का था ही नहीं। मैंने संसद में भी कहा था, आधी आबादी को उनका हक मिल जाने दीजिये, मैं इसका क्रेडिट, विज्ञापन छपवाकर विपक्ष के सभी लोगों को दे दूँगा। लेकिन, महिलाओं को दक़ियानूसी सोच से देखने वाले फिर भी अपने झूठ पर अड़े रहे, कायम रहे!
साथियों,
नारीशक्ति को भागीदारी दिलाने की लड़ाई दशकों से चल रही है। वर्षों से मैं भी इसके लिए प्रयास करने वालों में से एक हूं। कितनी ही महिलाएं ये विषय मेरे सामने उठाती रही हैं। कितनी ही बहनों ने पत्र के द्वारा मुझे सारी बातें बताई हैं। मेरे देश की माताएं-बहनें-बेटियां, मैं जानता हूं, आज आप सब दुखी हैं। मैं भी आपके इस दुःख में दुःखी हूँ। आज भले ही, बिल पास कराने के लिए जरूरी 66 परसेंट वोट हमें नहीं मिला हो, लेकिन मैं जानता हूं, देश की 100 परसेंट नारीशक्ति का आशीर्वाद हमारे साथ है। मैं देश की हर नारी को विश्वास दिलाता हूं, हम महिला आरक्षण के रास्ते में आने वाले हर रुकावट को खत्म करके रहेंगे, हटाकर के रहेंगे। हमारा हौसला भी बुलंद है, हमारी हिम्मत भी अटूट है और हमारा इरादा भी अडिग है। महिला आरक्षण का विरोध करने वाली पार्टियां, ये देश की नारी शक्ति को संसद और विधानसभाओं में उनकी भागीदारी बढ़ाने से कभी भी रोक नहीं पाएंगे, सिर्फ वक्त का इंतजार है। नारी शक्ति के सशक्तीकरण का बीजेपी-एनडीए का संकल्प अक्षुण्ण है। कल हमारे पास संख्याबल नहीं था, लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि हम हार गए। हमारा आत्मबल अजेय है। हमारा प्रयास रुकेगा नहीं, हमारा प्रयास थमेगा नहीं। हमारे पास आगे अभी और मौके आएंगे, हमें आधी आबादी के सपनों के लिए, देश के भविष्य के लिए, इस संकल्प को पूरा करना ही है। आप सबका बहुत-बहुत धन्यवाद।