एंकर- नमस्ते मोदी जी।

पीएम मोदी- नमस्कार भाई एएनआई वालों को।

एंकर- सर आपने समय दिया हमें इतने व्यस्त टाइम पर, बहुत शुक्रिया।

पीएम मोदी- एएनआई के तो दर्शकों की संख्या भांति- भांति की है। तो उन सभी दर्शकों को नमस्कार।

एंकर- मोदी जी अब लगभग आखिरी दौर आ गया है चुनाव का। क्या जो आपने लक्ष्य तय किया था 400 पार का, आपको लगता है कि वह पार हो रहा है क्योंकि विपक्ष तो कन्विंस्ड है कि ऐसा नहीं हो रहा है, वो कह रहे हैं कि 220-240 होगा।

पीएम मोदी- आखरी दौर शब्द प्रयोग किया आपने। मुझे उसमें बहुत सी चीजें नजर आ रही हैं। एक हमारा एक नया दौर शुरू होगा, उसका उसके अंदर संकेत है। दूसरा जो लोग बड़े सपने देख कर के बड़े वादे कर रहे थे उनके लिए भी आखिरी दौर है। तो चुनाव का आखिरी दौर इतना नहीं, उनकी स्थितियों का भी आखिरी दौर है।

एंकर- प्रधानमंत्री जी आरक्षण इतना बड़ा मुद्दा इस बार कैसे बन गया। आप तो माइक्रो चिप्स और मैन्युफैक्चरिंग इस पर बात हो रही थी, लेकिन आपको बार-बार अब आरक्षण पर बात करते हुए क्यों देखना पड़ रहा है?

पीएम मोदी- मुझे नहीं करना पड़ रहा है। मुझे सचेत करना है मेरे एससी, एसटी, ओबीसी और अति पिछड़े भाई-बहनों को। क्योंकि इनको अंधेरे में रख कर के ये लोग लूट चला रहे हैं। और चुनाव एक ऐसा समय है कि जो सबसे बड़ा संकट आ रहा है उससे देशवासियों को मुझे जागृत करना चाहिए। और इसलिए मैं आग्रहपूर्वक जनता-जनार्दन को समझा रहा हूं। क्योंकि ये दो चीजें हो रही है, एक भारत के संविधान की मूल भावना का हनन हो रहा है, संविधान की मर्यादाओं को तार-तार कर दिया जा रहा है और वह भी अपनी वोट बैंक की राजनीति के लिए। अब मुझे याद है मैंने हाउस में कभी कांग्रेस के नेताओं को सुना तो वे कहते थे कि पीएसयू का प्राइवेटाइजेशन कर रहे हैं आप। तो आप आरक्षण मिटा देना चाहते हैं। अब रियलिटी तो है नहीं, ये गपबाजी कर रहे थे। लेकिन मेरे सामने आया कि जो लोग इतने बड़े दलितों के हितैषी अपने आप को कहते हैं, आदिवासियों के हितैषी कहते हैं वे हकीकत में उनके घोर दुश्मन हैं। इन्होंने रातों-रात एजुकेशनल इंस्टिट्यूशन को माइनॉरिटी इंस्टिट्यूशन बना दिया। माइनॉरिटी इंस्टिट्यूशन बना दिया तो उन्होंने आरक्षण उसमें खत्म कर दिया। अब उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं था वैसा एक नियम बदल दिया उन्होंने। और यूनिवर्सिटी तक को माइनॉरिटी स्टेट्स दे दिया। अब दिल्ली में ही जामिया मिलिया जो यूनिवर्सिटी है उसको उन्होंने माइनॉरिटी बना दिया। उसमें सारे आरक्षण खत्म हो गए। एडमिशन में भी नहीं, नौकरी में भी नहीं और बाद में तो चीजें उभर करके आई कि करीब-करीब 10000 ऐसे इंस्टिट्यूशन हैं जिसको इस प्रकार से आरक्षण के जो एससी, एसटी, ओबीसी का अधिकार था वह पिछले दरवाजे से उसको छीन लिया गया है। संविधान की पीठ में छुरा घोंपा गया है। बाबा साहेब आंबेडकर ने जिस सपने से ये व्यवस्था खड़ी की थी उसको इन्होंने वोट बैंक के लिए गिरवी रख दिया। तो ये एक चिंताजनक बातें मेरे सामने जब आई तब मुझे लगा कि मेरा दायित्व बनता है कि मैं देश को अवगत कराऊं। इतने में इनका मेनिफेस्टो आया। इस मेनिफेस्टो ने और चौंका दिया। और इसलिए मेनिफेस्टो देखते ही मेरा पहला कमेंट था कि ये मेनिफेस्टो पर मुस्लिम लीग की छवि है। तो दो तीन दिन तो उनको लगा कि इसका जवाब देने की जरूरत नहीं है। ये अपने आप ही बात खत्म हो जाएगी। जब उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया मैं एक-एक चीज खोलने लगा। जैसे इस देश में वो ये कहें कि हम खेलकूद में भी माइनॉरिटी के लिए कोटा फिक्स करेंगे। आज पंजाब के मेरे बच्चे जो खेल जगत के अंदर बहुत अच्छा कर रहे हैं। बंगाल के मेरे नौजवान फुटबॉल में बहुत अच्छा कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश के हमारे नौजवान जो एथलीट्स में काफी अच्छा कर रहे हैं। अब वो अपनी जवानी उसमें खपा देते हैं। 10-12 साल की उम्र से लेकर के 25-30 साल की उम्र तक पहुंचने तक ये लोग इतना तप करते हैं जी, तपते हैं, शरीर को तपाते हैं, खिलाड़ी ऐसे ही नहीं बनता है जी। रात को नींद नहीं आती, सुबह चार बजे उठ करके चले जाते हैं। अब कहते नहीं ये माइनॉरिटी के लिए कोटा होगा। तो मेहनत करने वाला मेरा नौजवान जाएगा कहां जी? उनका क्या होगा? दूसरा उन्होंने कहा कि देश में अब जो टेंडर होंगे उस टेंडर में भी वे माइनॉरिटी के लिए आरक्षण करेंगे। मतलब यह हुआ, आज मान लीजिए कहीं पर बहुत बड़ा महत्वपूर्ण ब्रिज बन रहा है। कौन ब्रिज बनाएगा, तो जिसके पास ट्रैक रिकॉर्ड है, जिसके पास संसाधन है, जिसके पास कैपेबिलिटी है, जो परफॉर्म कर सकता है, सारे उसकी जो रिक्वायरमेंट है, पूरी करता है। उसमें कंपटीशन होती है और कंपटीशन में जो निकलता है उसको टेंडर मिलता है। ये कहते नहीं ये सब बंद। अब मुझे बताइए, अगर इसी प्रकार से सिर्फ धर्म के आधार पर कोटा दे देंगे वो ब्रिज बनेगा, लोग मारे जाएंगे तो कौन जिम्मेवार होगा? क्या वोट बैंक के लिए आप आने वाली पीढ़ियों को भी तबाह करना चाहते हैं। तो यह ऐसे विषय थे जो कांग्रेस ने अपनी वोट बैंक की खातिर मैदान में उतारे। तब मेरा कर्तव्य बनता है कि मैं मेरे दलित भाइयों के अधिकार के लिए लडूं, मेरे आदिवासी भाई-बहनों के अधिकार के लिए लडूं, मेरे ओबीसी पिछड़े भाई-बहनों के अधिकार के लिए लडूं और इसलिए मैं लड़ाई लड़ रहा हूं।

एंकर- तो ये जो परसेप्शन बनाया जा रहा है कि आप आए तो बिल्कुल आरक्षण ही खत्म कर देंगे। ये क्या इस पर क्या बोलेंगे?

पीएम मोदी- इन्होंने ये पाप कर दिया है, उसके खिलाफ मैं बोल रहा हूं, इसलिए उनको झूठ बोलने के लिए ऐसी चीज का उपयोग करना पड़ रहा है।

एंकर- अभी कलकत्ता हाई कोर्ट का सर एक आर्डर आया है जिसमें 2010 के बाद जितने ओबीसी सर्टिफिकेट बांटे गए उसको खारिज कर दिया है।

पीएम मोदी- देखिए ये मोडस ऑपरेंडी है कि पहले इन्होंने कानून बना करके माइनॉरिटी को देने का पाप शुरू किया। पहले आंध्र में शुरू किया। सुप्रीम कोर्ट तक में वो हार गए। हाई कोर्ट ने उसको रिजेक्ट कर दिया। क्योंकि संविधान अलाउ करता नहीं है। तो इन्होंने चालाकी करके पिछले दरवाजे से खेल शुरू किया। और पिछले दरवाजे से खेल शुरू करने के लिए इन लोगों ने रातों-रात मुसलमान की सभी जातियों को ओबीसी बना दिया। सभी जातियों को ओबीसी बनाकर के जो ओबीसी का हक था वो रातों-रात डाका डाल दिया, लूट लिया। और इसके खिलाफ चुनाव की सरगर्मी चल रही है तब हम तो बोल ही रहे थे कि भई ये हो रहा है। कर्नाटक में हुआ है मैंने बताया था। हम बंगाल के लिए भी बोल चुके थे। लेकिन जब हाई कोर्ट का जजमेंट आ गया तब यह साफ हो गया कि इतना बड़ा धोखा हो रहा है। लेकिन इससे भी दुर्भाग्य की बात है कि इतना बड़ा वोट बैंक की राजनीति करने के लिए वे अब इनको भी गाली दे रहे हैं। जुडिशरी को गाली दे रहे हैं, न्यायपालिका को गाली दे रहे हैं और वो यहां तक कह रहे हैं कि कुछ भी हो जाए हम कोर्ट की बात मानने वाले नहीं है। ये जो स्थिति है वो किसी भी हालत में स्वीकार्य नहीं हो सकती है।

एंकर- सर केजरीवाल जी अभी जब जेल से बाहर आए तो उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री जी ही तय करते हैं कि कौन जेल जाएगा। वो कहते हैं सोरेन को और मुझे उनके इशारे पर जेल में डाला गया।

पीएम मोदी- अच्छा होगा ये लोग संविधान पढ़ लें। देश के कानून-नियम पढ़ लें। मुझे किसी को कुछ कहने की जरूरत नहीं है।

एंकर- सर इस बार चुनाव में हम देख रहे हैं कि पर्सनल अटैक्स बहुत हो रहे हैं। लाइक आप पर भी कई बातें बोली गई हैं और आपकी तरफ से भी कुछ लोगों को कुछ बोला गया है। तो पर्सनल अटैक्स किस लिए इस बार, आपको लगता है नहीं कि ये शैली नहीं होनी चाहिए चुनावों में।

पीएम मोदी- जहां तक मोदी का सवाल है मैं तो पिछले 24 साल से गालियां खा-खा-खा करके गाली प्रूफ हो गया हूं। मौत का सौदागर किसने कहा था। गंदी नाली का कीड़ा किसने कहा था। और मेरे यहां तो पार्लियामेंट में एक दिन हमारे एक साथी ने हिसाब लगाया था 101 गालियां गिनाई थी। तो चुनाव या चुनाव ना हो ये लोग मानते हैं कि गालियां देने का हक उनका ही है। और वे हताश-निराश इतने हो चुके हैं कि गालियां देना अपशब्द बोलना ये उनके शायद जेहन में है, उनके स्वभाव में हो गया है।

एंकर- प्रधानमंत्री जी एक आरोप विपक्ष और लगा रहा है कि ईडी, आईटी, सीबीआई इसका इस्तेमाल किया जा रहा है विरोधियों को दबाने के लिए।

पीएम मोदी- मेरा मीडिया को सवाल है कि विपक्ष ने आपको ये कूड़ा-कचरा पकड़ा दिया। वो कूड़ा-कचरा लेकर के आप हमारे पास पहुंच जाते हैं। मीडिया वाले रिसर्च करें कि सरकार के लिए क्या सवाल पूछने चाहिए। प्रधानमंत्री को क्या सवाल पूछना चाहिए। जो कूड़ा-कचरा फेंक रहा है उसको पूछो न तुम ये जो कह रहे इसका सबूत क्या है। कानून-नियम क्या है उसको पूछो ना। उसकी आपकी हिम्मत नहीं है। लेकिन वो जो कूड़ा-कचरा फेंकते हैं वो कूड़ा-कचरा लेकर के आप मेरे यहां आते हैं। यह ठीक है कि मैं रिसाइकल को मानता हूं तो मैं इस कूड़े-कचरा को रिसाइकल करके उसको खाद में परिवर्तित कर दूंगा। और उसमें से देश के लिए कुछ अच्छी चीज पैदा कर दूंगा। इसलिए वो तो मैं करूंगा, लेकिन सरकार क्या करती है। आज गांव के सरपंच को चेक बुक पर सही करने का अधिकार होता है। देश के प्रधानमंत्री को नहीं है। इतना नॉलेज नहीं है इन लोगों को। देश के प्रधानमंत्री के पास इस प्रकार का कोई अधिकार नहीं होता है। मोदी सरकार का मैंडेट क्या है। मोदी सरकार ने अपने अफसरों को कहा है कि मेरी सरकार करप्शन के विषय में जीरो टॉलरेंस। अब ये दफ्तर के अंदर बैठे हुए लोगों का काम है कि उसको लागू करें। और सचमुच में तो किसी जमाने में 10 साल में मनमोहन सिंह जी की सरकार थी 34 लाख रुप पकड़े गए थे। 34 लाख रुपये मतलब एक स्कूल बैग में आ जाए। वर्तमान में ईडी ने 10 साल में 2200 करोड़ रुपये पकड़ा है। ये तो टीवी पर दिखता है। ये तो कोई जूठबाजी हो नहीं सकती है। अब जो 2200 करोड़ देश को वापस लाया है ये उसका सम्मान होना चाहिए कि उसको गाली गलौज होना चाहिए। तो गाली गलौज कौन करता है जिसका पैसा गया है वह गाली गलौज कर रहा है। 2200 करोड़ जिसकी जेब से गया है, जिसने चोरी कर करके इकट्ठा किया था। वह पकड़ा गया, वो चिल्ला रहा है। इसका मतलब ये जो चोर पकड़े जा रहे हैं इसमें जिसकी भागीदारी होगी, वो चिल्लाएगा।

एंकर- थोड़े से अलग मुद्दे पर आते हैं। कश्मीर में हम इस बार देख रहे हैं रिकॉर्ड वोटिंग हो रही है। ऐसे-ऐसे इलाकों में रिकॉर्डतोड़ वोटिंग हो रही है जहां पर ऐसा सोचा नहीं जा सकता था। इस पर आपका क्या आकलन है, आप कैसे देखते हैं।

पीएम मोदी- पहले तो मैं चाहूंगा कि कश्मीर की जो स्थिति बदली है उसके संदर्भ में सबसे तो पहले मैं मेरे देश के न्याय तंत्र को प्रार्थना करना चाहता हूं कि अगर सरकार किसी काम को करने के लिए... उसका एक डिजाइन होती है, उसकी स्ट्रेटेजी होती है। ऐसी समस्याओं के समाधान के लिए उस स्ट्रेटेजी के तहत काम करना होता था। अब उसके लिए कभी मुझे इंटरनेट बंद करना पड़ा। कोई एनजीओ कोर्ट चला गया और वो कोर्ट के अंदर बड़ा इशू बन गया। आज समझिए कि भले मैंने कुछ समय के लिए इंटरनेट बंद किया था, लेकिन आज बड़े गर्व के साथ वहां के बच्चे कहते हैं कि 5 साल से इंटरनेट बंद नहीं हुआ है। 5 साल से हमें सब सुविधाएं मिल रही हैं। कुछ दिन तकलीफ हुई, लेकिन अच्छे काम के लिए हुई थी। अब वो अदालत के अंदर जब विवादों में चढ़ जाता है, तब चीजें गड़बड़ा जाती हैं। तो ऐसे जो एनजीओ हैं जिन्होंने अदालतों के भरोसे लड़ाई लड़ना शुरू किया है एक तो देश को उनसे बचाना बहुत जरूरी है। दूसरा वहां का सामान्य मानवी जब मतदान करता है ना तब वो सिर्फ किसी को जिताता ऐसा नहीं है जी। मतदान करता है मतलब भारत के संविधान को गले लगाता है। मतदान करता है तब भारत की सरकार बनाने में वह गर्व के साथ भागीदारी करता है। मतदान करता है मतलब कि भारत के सार्वभौमत्व के प्रति अपना समर्पण व्यक्त करता है। दूसरा उनको विश्वास हुआ ये सरकार ऐसी है कि जहां फेयरनेस है। हम भरोसा कर सकते हैं कि ये सही होगा। और जब उसको ये विश्वास हो जाता है कि कोई हेराफेरी नहीं हो रही तो पक्का वोट करने के लिए उत्साह से आता है। और उसका परिणाम है कि आज मतदान यानी 40-40 साल के रिकॉर्ड टूट चुके हैं। मेरे लिए सबसे बड़ी संतोष की बात है कि मेरे कश्मीर के मेरे भाई-बहन, मेरे परिवारजन उमंग और उत्साह के साथ मतदान के लिए आगे आए। उन्होंने मतदान करके दुनिया को एक मैसेज दे दिया है। जो लोग आशंकाएं करते थे, उनको एक मैसेज दे दिया है।

एंकर- सर ये क्या विंडिकेशन है 370 को जो आपने हटाया, इससे क्या लगता है कि ये आपका विंडिकेशन है।

पीएम मोदी- 370 ये सिर्फ पांच-चार परिवारों का ही एजेंडा था। ये ना कश्मीर की जनता का एजेंडा था। ना देश के लोगों का एजेंडा था। ये अपने फायदे के लिए ये 370 की ऐसी एक दीवार बनाकर बैठे थे ताकि कोई झांक ना पाए। और कहते थे 370 हटेगी तो आग लग जाएगी। वो कहते थे 370 हटेगी तो कश्मीर चला जाएगा। आज ये सत्य हो गया कि 370 हटने के बाद ज्यादा एकता की अनुभूति हो रही है। कश्मीर के लोगों का अपनापन ज्यादा बढ़ रहा है और इसलिए इसका सीधा परिणाम चुनावों में भी दिखाई देता है, टूरिज्म में दिखाई दे रहा है ,जी 20 समिट वहां होती है, बड़े शांत से कश्मीर ने उनका स्वागत किया, पूरी दुनिया का। और इसलिए कैसे झूठी की दीवारें खड़ी करके देश को टुकड़ों में देखा गया इसका यह उदाहरण है और उसको मैंने ध्वस्त किया है।

एंकर- सर वेल्थ क्रिएटर्स को लेकर भी एक नैरेटिव आता है। कभी राहुल गांधी जी बोलते हैं कि आप कुछ परिवार को बढ़ा रहे हैं। अभी आपने हाल में उनको बोला तो क्या लगता है कि देश में जो वेल्थ क्रिएटर है उन पर राजनीति होनी चाहिए।

पीएम मोदी- मैं फिर कहता हूं जो लोग ये कूड़ा-कचरा फेंक रहे हैं उनको पूछो, ये तुम कहां से लाए हो। उनसे बात करो भाई। आप उनसे तो कुछ पूछते नहीं हो। और इसलिए मैं समझता हूं कि चर्चाएं उनके साथ करें तो ज्यादा अच्छा होगा।

एंकर- सर उड़ीसा में अभी चुनाव होने हैं अभी हाल में। उधर आपकी देखा जाए तो काफी अच्छे संबंध थे नवीन पटनायक जी के साथ। उन्होंने कई मुद्दों पर आपको सपोर्ट किया। अब आप लोगों का अलायंस नहीं है और आपस में एक दूसरे से लड़ रहे हैं। किस तरह से आप देखते हैं।

पीएम मोदी- हिंदुस्तान के सभी राजनीतिक दलों के नेताओं के साथ हमारे संबंध अच्छे ही हैं और लोकतंत्र में हमारी दुश्मनी नहीं होती है, संबंध अच्छे होने ही चाहिए। अब सवाल यह है कि मैं मेरे संबंधों को संभालूं कि उड़ीसा के भाग्य की चिंता करूं। तब मैंने रास्ता चुना कि मैं उड़ीसा के उज्ज्वल भविष्य के लिए अपने आप को खपा दूंगा। उसके लिए मेरे संबंधों को मुझे अगर बलि चढ़ाना पड़ेगा तो मैं उड़ीसा की भलाई के लिए बलि चढ़ाऊंगा। और चुनाव के बाद मैं कन्विंस करूंगा हरेक को कि भई मुझे किसी से दुश्मनी नहीं है। लेकिन 25 साल से उड़ीसा में प्रगति नहीं हो रही है। सबसे बड़ी चिंता ऐसी है एक ऐसी टोली है जिसने पूरे उड़ीसा की व्यवस्था को कब्जा कर लिया है। ऐसा लगता है पूरी व्यवस्था को बंधक बना दिया है। और जब इतना बंधक बना दिया है तो बहुत स्वाभाविक है कि उड़ीसा अगर उन बंधनों से बाहर आएगा तो उड़ीसा खिलेगा। उड़ीसा की अस्मिता का सवाल है, इतने प्राकृतिक संसाधन हैं उड़ीसा के पास। एक समृद्ध राज्य के गरीब लोग देख कर के दुख होता है। हिंदुस्तान के समृद्ध राज्यों में उड़ीसा है इतनी प्राकृतिक संपदा है। और हिंदुस्तान के गरीब लोगों के राज्य में भी उड़ीसा है तो इसके लिए सरकार जिम्मेवार है। और इसलिए उड़ीसा के लोगों को उनका हक मिलना चाहिए। उड़ीसा को उसकी अस्मिता मिलनी चाहिए। उड़ीसा का भाग्य बदलने वाला है। सरकार बदल रही है। मैंने कहा है कि उड़ीसा की वर्तमान सरकार की एक्सपायरी डेट 4 जून है। और 10 जून को बीजेपी का मुख्यमंत्री उड़ीसा में शपथ लेगा।

एंकर- मोदी जी बंगाल में भी ताबड़तोड़ एक टक्कर की लड़ाई चल रही है। बहुत कैंपेनिंग वहां पर आपने की है और अभी आप शायद फिर जाने वाले हैं बंगाल। क्या लगता है आपके प्रॉस्पेक्ट कैसे रहेंगे बंगाल में।

पीएम मोदी- एक तो मुझे लगता है कि एएनआई के जो फुट सोल्जर्स हैं एक बार उनको वेरीफाई कर देना चाहिए कि वो कहां से रिपोर्टिंग आपको भेजते हैं। बंगाल के चुनाव में टीएमसी पार्टी अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है। आपने देखा होगा पिछले असेंबली के चुनाव में हम तीन थे। तीन में से बंगाल की जनता ने हमें 80 पर पहुंचा दिया। हमें लोकसभा के अंदर भारी बहुमत पिछले चुनाव में मिला था। इस बार पूरे हिंदुस्तान में द बेस्ट परफॉर्मिंग स्टेट कोई होगा तो पश्चिम बंगाल होने वाला है। भारतीय जनता पार्टी को सर्वाधिक सफलता पश्चिम बंगाल में मिल रही है। और पश्चिम बंगाल का चुनाव एकतरफा है जनता जनार्दन उसको लीड कर रही है। और उसके कारण सरकार में बैठे हुए लोग, टीएमसी के लोग बोखला हुए हैं, लगातार हत्याएं हो रहे हैं, हमले हो रहे हैं, भाजपा कार्यकर्ताओं को चुनाव के पहले जेलों में बंद कर दिया जा रहा है। ये सारे जुल्मों के बावजूद मतदान भी जनता ज्यादा कर रही है और वोट भी ज्यादा हो रहा है।

एंकर- मोदी जी आपके हिसाब से तो लगभग आपका तय है आना। और सबको लगता है ऐसा ज्यादातर लोग आपको प्रिडिक्ट कर रहे हैं कि आप वापस आ रहे हैं। तो मोदी 3.0 में यह देश क्या उम्मीदें रखे आपसे।

पीएम मोदी- विकसित भारत। वन पॉइंट एजेंडा विकसित भारत। चलिए बहुत-बहुत धन्यवाद भैया, नमस्कार।

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Today, India is becoming the key growth engine of the global economy: PM Modi
December 06, 2025
India is brimming with confidence: PM
In a world of slowdown, mistrust and fragmentation, India brings growth, trust and acts as a bridge-builder: PM
Today, India is becoming the key growth engine of the global economy: PM
India's Nari Shakti is doing wonders, Our daughters are excelling in every field today: PM
Our pace is constant, Our direction is consistent, Our intent is always Nation First: PM
Every sector today is shedding the old colonial mindset and aiming for new achievements with pride: PM

आप सभी को नमस्कार।

यहां हिंदुस्तान टाइम्स समिट में देश-विदेश से अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित हैं। मैं आयोजकों और जितने साथियों ने अपने विचार रखें, आप सभी का अभिनंदन करता हूं। अभी शोभना जी ने दो बातें बताई, जिसको मैंने नोटिस किया, एक तो उन्होंने कहा कि मोदी जी पिछली बार आए थे, तो ये सुझाव दिया था। इस देश में मीडिया हाउस को काम बताने की हिम्मत कोई नहीं कर सकता। लेकिन मैंने की थी, और मेरे लिए खुशी की बात है कि शोभना जी और उनकी टीम ने बड़े चाव से इस काम को किया। और देश को, जब मैं अभी प्रदर्शनी देखके आया, मैं सबसे आग्रह करूंगा कि इसको जरूर देखिए। इन फोटोग्राफर साथियों ने इस, पल को ऐसे पकड़ा है कि पल को अमर बना दिया है। दूसरी बात उन्होंने कही और वो भी जरा मैं शब्दों को जैसे मैं समझ रहा हूं, उन्होंने कहा कि आप आगे भी, एक तो ये कह सकती थी, कि आप आगे भी देश की सेवा करते रहिए, लेकिन हिंदुस्तान टाइम्स ये कहे, आप आगे भी ऐसे ही सेवा करते रहिए, मैं इसके लिए भी विशेष रूप से आभार व्यक्त करता हूं।

साथियों,

इस बार समिट की थीम है- Transforming Tomorrow. मैं समझता हूं जिस हिंदुस्तान अखबार का 101 साल का इतिहास है, जिस अखबार पर महात्मा गांधी जी, मदन मोहन मालवीय जी, घनश्यामदास बिड़ला जी, ऐसे अनगिनत महापुरूषों का आशीर्वाद रहा, वो अखबार जब Transforming Tomorrow की चर्चा करता है, तो देश को ये भरोसा मिलता है कि भारत में हो रहा परिवर्तन केवल संभावनाओं की बात नहीं है, बल्कि ये बदलते हुए जीवन, बदलती हुई सोच और बदलती हुई दिशा की सच्ची गाथा है।

साथियों,

आज हमारे संविधान के मुख्य शिल्पी, डॉक्टर बाबा साहेब आंबेडकर जी का महापरिनिर्वाण दिवस भी है। मैं सभी भारतीयों की तरफ से उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं।

Friends,

आज हम उस मुकाम पर खड़े हैं, जब 21वीं सदी का एक चौथाई हिस्सा बीत चुका है। इन 25 सालों में दुनिया ने कई उतार-चढ़ाव देखे हैं। फाइनेंशियल क्राइसिस देखी हैं, ग्लोबल पेंडेमिक देखी हैं, टेक्नोलॉजी से जुड़े डिसरप्शन्स देखे हैं, हमने बिखरती हुई दुनिया भी देखी है, Wars भी देख रहे हैं। ये सारी स्थितियां किसी न किसी रूप में दुनिया को चैलेंज कर रही हैं। आज दुनिया अनिश्चितताओं से भरी हुई है। लेकिन अनिश्चितताओं से भरे इस दौर में हमारा भारत एक अलग ही लीग में दिख रहा है, भारत आत्मविश्वास से भरा हुआ है। जब दुनिया में slowdown की बात होती है, तब भारत growth की कहानी लिखता है। जब दुनिया में trust का crisis दिखता है, तब भारत trust का pillar बन रहा है। जब दुनिया fragmentation की तरफ जा रही है, तब भारत bridge-builder बन रहा है।

साथियों,

अभी कुछ दिन पहले भारत में Quarter-2 के जीडीपी फिगर्स आए हैं। Eight परसेंट से ज्यादा की ग्रोथ रेट हमारी प्रगति की नई गति का प्रतिबिंब है।

साथियों,

ये एक सिर्फ नंबर नहीं है, ये strong macro-economic signal है। ये संदेश है कि भारत आज ग्लोबल इकोनॉमी का ग्रोथ ड्राइवर बन रहा है। और हमारे ये आंकड़े तब हैं, जब ग्लोबल ग्रोथ 3 प्रतिशत के आसपास है। G-7 की इकोनमीज औसतन डेढ़ परसेंट के आसपास हैं, 1.5 परसेंट। इन परिस्थितियों में भारत high growth और low inflation का मॉडल बना हुआ है। एक समय था, जब हमारे देश में खास करके इकोनॉमिस्ट high Inflation को लेकर चिंता जताते थे। आज वही Inflation Low होने की बात करते हैं।

साथियों,

भारत की ये उपलब्धियां सामान्य बात नहीं है। ये सिर्फ आंकड़ों की बात नहीं है, ये एक फंडामेंटल चेंज है, जो बीते दशक में भारत लेकर आया है। ये फंडामेंटल चेंज रज़ीलियन्स का है, ये चेंज समस्याओं के समाधान की प्रवृत्ति का है, ये चेंज आशंकाओं के बादलों को हटाकर, आकांक्षाओं के विस्तार का है, और इसी वजह से आज का भारत खुद भी ट्रांसफॉर्म हो रहा है, और आने वाले कल को भी ट्रांसफॉर्म कर रहा है।

साथियों,

आज जब हम यहां transforming tomorrow की चर्चा कर रहे हैं, हमें ये भी समझना होगा कि ट्रांसफॉर्मेशन का जो विश्वास पैदा हुआ है, उसका आधार वर्तमान में हो रहे कार्यों की, आज हो रहे कार्यों की एक मजबूत नींव है। आज के Reform और आज की Performance, हमारे कल के Transformation का रास्ता बना रहे हैं। मैं आपको एक उदाहरण दूंगा कि हम किस सोच के साथ काम कर रहे हैं।

साथियों,

आप भी जानते हैं कि भारत के सामर्थ्य का एक बड़ा हिस्सा एक लंबे समय तक untapped रहा है। जब देश के इस untapped potential को ज्यादा से ज्यादा अवसर मिलेंगे, जब वो पूरी ऊर्जा के साथ, बिना किसी रुकावट के देश के विकास में भागीदार बनेंगे, तो देश का कायाकल्प होना तय है। आप सोचिए, हमारा पूर्वी भारत, हमारा नॉर्थ ईस्ट, हमारे गांव, हमारे टीयर टू और टीय़र थ्री सिटीज, हमारे देश की नारीशक्ति, भारत की इनोवेटिव यूथ पावर, भारत की सामुद्रिक शक्ति, ब्लू इकोनॉमी, भारत का स्पेस सेक्टर, कितना कुछ है, जिसके फुल पोटेंशियल का इस्तेमाल पहले के दशकों में हो ही नहीं पाया। अब आज भारत इन Untapped पोटेंशियल को Tap करने के विजन के साथ आगे बढ़ रहा है। आज पूर्वी भारत में आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर, कनेक्टिविटी और इंडस्ट्री पर अभूतपूर्व निवेश हो रहा है। आज हमारे गांव, हमारे छोटे शहर भी आधुनिक सुविधाओं से लैस हो रहे हैं। हमारे छोटे शहर, Startups और MSMEs के नए केंद्र बन रहे हैं। हमारे गाँवों में किसान FPO बनाकर सीधे market से जुड़ें, और कुछ तो FPO’s ग्लोबल मार्केट से जुड़ रहे हैं।

साथियों,

भारत की नारीशक्ति तो आज कमाल कर रही हैं। हमारी बेटियां आज हर फील्ड में छा रही हैं। ये ट्रांसफॉर्मेशन अब सिर्फ महिला सशक्तिकरण तक सीमित नहीं है, ये समाज की सोच और सामर्थ्य, दोनों को transform कर रहा है।

साथियों,

जब नए अवसर बनते हैं, जब रुकावटें हटती हैं, तो आसमान में उड़ने के लिए नए पंख भी लग जाते हैं। इसका एक उदाहरण भारत का स्पेस सेक्टर भी है। पहले स्पेस सेक्टर सरकारी नियंत्रण में ही था। लेकिन हमने स्पेस सेक्टर में रिफॉर्म किया, उसे प्राइवेट सेक्टर के लिए Open किया, और इसके नतीजे आज देश देख रहा है। अभी 10-11 दिन पहले मैंने हैदराबाद में Skyroot के Infinity Campus का उद्घाटन किया है। Skyroot भारत की प्राइवेट स्पेस कंपनी है। ये कंपनी हर महीने एक रॉकेट बनाने की क्षमता पर काम कर रही है। ये कंपनी, flight-ready विक्रम-वन बना रही है। सरकार ने प्लेटफॉर्म दिया, और भारत का नौजवान उस पर नया भविष्य बना रहा है, और यही तो असली ट्रांसफॉर्मेशन है।

साथियों,

भारत में आए एक और बदलाव की चर्चा मैं यहां करना ज़रूरी समझता हूं। एक समय था, जब भारत में रिफॉर्म्स, रिएक्शनरी होते थे। यानि बड़े निर्णयों के पीछे या तो कोई राजनीतिक स्वार्थ होता था या फिर किसी क्राइसिस को मैनेज करना होता था। लेकिन आज नेशनल गोल्स को देखते हुए रिफॉर्म्स होते हैं, टारगेट तय है। आप देखिए, देश के हर सेक्टर में कुछ ना कुछ बेहतर हो रहा है, हमारी गति Constant है, हमारी Direction Consistent है, और हमारा intent, Nation First का है। 2025 का तो ये पूरा साल ऐसे ही रिफॉर्म्स का साल रहा है। सबसे बड़ा रिफॉर्म नेक्स्ट जेनरेशन जीएसटी का था। और इन रिफॉर्म्स का असर क्या हुआ, वो सारे देश ने देखा है। इसी साल डायरेक्ट टैक्स सिस्टम में भी बहुत बड़ा रिफॉर्म हुआ है। 12 लाख रुपए तक की इनकम पर ज़ीरो टैक्स, ये एक ऐसा कदम रहा, जिसके बारे में एक दशक पहले तक सोचना भी असंभव था।

साथियों,

Reform के इसी सिलसिले को आगे बढ़ाते हुए, अभी तीन-चार दिन पहले ही Small Company की डेफिनीशन में बदलाव किया गया है। इससे हजारों कंपनियाँ अब आसान नियमों, तेज़ प्रक्रियाओं और बेहतर सुविधाओं के दायरे में आ गई हैं। हमने करीब 200 प्रोडक्ट कैटगरीज़ को mandatory क्वालिटी कंट्रोल ऑर्डर से बाहर भी कर दिया गया है।

साथियों,

आज के भारत की ये यात्रा, सिर्फ विकास की नहीं है। ये सोच में बदलाव की भी यात्रा है, ये मनोवैज्ञानिक पुनर्जागरण, साइकोलॉजिकल रेनसां की भी यात्रा है। आप भी जानते हैं, कोई भी देश बिना आत्मविश्वास के आगे नहीं बढ़ सकता। दुर्भाग्य से लंबी गुलामी ने भारत के इसी आत्मविश्वास को हिला दिया था। और इसकी वजह थी, गुलामी की मानसिकता। गुलामी की ये मानसिकता, विकसित भारत के लक्ष्य की प्राप्ति में एक बहुत बड़ी रुकावट है। और इसलिए, आज का भारत गुलामी की मानसिकता से मुक्ति पाने के लिए काम कर रहा है।

साथियों,

अंग्रेज़ों को अच्छी तरह से पता था कि भारत पर लंबे समय तक राज करना है, तो उन्हें भारतीयों से उनके आत्मविश्वास को छीनना होगा, भारतीयों में हीन भावना का संचार करना होगा। और उस दौर में अंग्रेजों ने यही किया भी। इसलिए, भारतीय पारिवारिक संरचना को दकियानूसी बताया गया, भारतीय पोशाक को Unprofessional करार दिया गया, भारतीय त्योहार-संस्कृति को Irrational कहा गया, योग-आयुर्वेद को Unscientific बता दिया गया, भारतीय अविष्कारों का उपहास उड़ाया गया और ये बातें कई-कई दशकों तक लगातार दोहराई गई, पीढ़ी दर पीढ़ी ये चलता गया, वही पढ़ा, वही पढ़ाया गया। और ऐसे ही भारतीयों का आत्मविश्वास चकनाचूर हो गया।

साथियों,

गुलामी की इस मानसिकता का कितना व्यापक असर हुआ है, मैं इसके कुछ उदाहरण आपको देना चाहता हूं। आज भारत, दुनिया की सबसे तेज़ी से ग्रो करने वाली मेजर इकॉनॉमी है, कोई भारत को ग्लोबल ग्रोथ इंजन बताता है, कोई, Global powerhouse कहता है, एक से बढ़कर एक बातें आज हो रही हैं।

लेकिन साथियों,

आज भारत की जो तेज़ ग्रोथ हो रही है, क्या कहीं पर आपने पढ़ा? क्या कहीं पर आपने सुना? इसको कोई, हिंदू रेट ऑफ ग्रोथ कहता है क्या? दुनिया की तेज इकॉनमी, तेज ग्रोथ, कोई कहता है क्या? हिंदू रेट ऑफ ग्रोथ कब कहा गया? जब भारत, दो-तीन परसेंट की ग्रोथ के लिए तरस गया था। आपको क्या लगता है, किसी देश की इकोनॉमिक ग्रोथ को उसमें रहने वाले लोगों की आस्था से जोड़ना, उनकी पहचान से जोड़ना, क्या ये अनायास ही हुआ होगा क्या? जी नहीं, ये गुलामी की मानसिकता का प्रतिबिंब था। एक पूरे समाज, एक पूरी परंपरा को, अन-प्रोडक्टिविटी का, गरीबी का पर्याय बना दिया गया। यानी ये सिद्ध करने का प्रयास किया गया कि, भारत की धीमी विकास दर का कारण, हमारी हिंदू सभ्यता और हिंदू संस्कृति है। और हद देखिए, आज जो तथाकथित बुद्धिजीवी हर चीज में, हर बात में सांप्रदायिकता खोजते रहते हैं, उनको हिंदू रेट ऑफ ग्रोथ में सांप्रदायिकता नज़र नहीं आई। ये टर्म, उनके दौर में किताबों का, रिसर्च पेपर्स का हिस्सा बना दिया गया।

साथियों,

गुलामी की मानसिकता ने भारत में मैन्युफेक्चरिंग इकोसिस्टम को कैसे तबाह कर दिया, और हम इसको कैसे रिवाइव कर रहे हैं, मैं इसके भी कुछ उदाहरण दूंगा। भारत गुलामी के कालखंड में भी अस्त्र-शस्त्र का एक बड़ा निर्माता था। हमारे यहां ऑर्डिनेंस फैक्ट्रीज़ का एक सशक्त नेटवर्क था। भारत से हथियार निर्यात होते थे। विश्व युद्धों में भी भारत में बने हथियारों का बोल-बाला था। लेकिन आज़ादी के बाद, हमारा डिफेंस मैन्युफेक्चरिंग इकोसिस्टम तबाह कर दिया गया। गुलामी की मानसिकता ऐसी हावी हुई कि सरकार में बैठे लोग भारत में बने हथियारों को कमजोर आंकने लगे, और इस मानसिकता ने भारत को दुनिया के सबसे बड़े डिफेंस importers के रूप में से एक बना दिया।

साथियों,

गुलामी की मानसिकता ने शिप बिल्डिंग इंडस्ट्री के साथ भी यही किया। भारत सदियों तक शिप बिल्डिंग का एक बड़ा सेंटर था। यहां तक कि 5-6 दशक पहले तक, यानी 50-60 साल पहले, भारत का फोर्टी परसेंट ट्रेड, भारतीय जहाजों पर होता था। लेकिन गुलामी की मानसिकता ने विदेशी जहाज़ों को प्राथमिकता देनी शुरु की। नतीजा सबके सामने है, जो देश कभी समुद्री ताकत था, वो अपने Ninety five परसेंट व्यापार के लिए विदेशी जहाज़ों पर निर्भर हो गया है। और इस वजह से आज भारत हर साल करीब 75 बिलियन डॉलर, यानी लगभग 6 लाख करोड़ रुपए विदेशी शिपिंग कंपनियों को दे रहा है।

साथियों,

शिप बिल्डिंग हो, डिफेंस मैन्यूफैक्चरिंग हो, आज हर सेक्टर में गुलामी की मानसिकता को पीछे छोड़कर नए गौरव को हासिल करने का प्रयास किया जा रहा है।

साथियों,

गुलामी की मानसिकता ने एक बहुत बड़ा नुकसान, भारत में गवर्नेंस की अप्रोच को भी किया है। लंबे समय तक सरकारी सिस्टम का अपने नागरिकों पर अविश्वास रहा। आपको याद होगा, पहले अपने ही डॉक्यूमेंट्स को किसी सरकारी अधिकारी से अटेस्ट कराना पड़ता था। जब तक वो ठप्पा नहीं मारता है, सब झूठ माना जाता था। आपका परिश्रम किया हुआ सर्टिफिकेट। हमने ये अविश्वास का भाव तोड़ा और सेल्फ एटेस्टेशन को ही पर्याप्त माना। मेरे देश का नागरिक कहता है कि भई ये मैं कह रहा हूं, मैं उस पर भरोसा करता हूं।

साथियों,

हमारे देश में ऐसे-ऐसे प्रावधान चल रहे थे, जहां ज़रा-जरा सी गलतियों को भी गंभीर अपराध माना जाता था। हम जन-विश्वास कानून लेकर आए, और ऐसे सैकड़ों प्रावधानों को डी-क्रिमिनलाइज किया है।

साथियों,

पहले बैंक से हजार रुपए का भी लोन लेना होता था, तो बैंक गारंटी मांगता था, क्योंकि अविश्वास बहुत अधिक था। हमने मुद्रा योजना से अविश्वास के इस कुचक्र को तोड़ा। इसके तहत अभी तक 37 lakh crore, 37 लाख करोड़ रुपए की गारंटी फ्री लोन हम दे चुके हैं देशवासियों को। इस पैसे से, उन परिवारों के नौजवानों को भी आंत्रप्रन्योर बनने का विश्वास मिला है। आज रेहड़ी-पटरी वालों को भी, ठेले वाले को भी बिना गारंटी बैंक से पैसा दिया जा रहा है।

साथियों,

हमारे देश में हमेशा से ये माना गया कि सरकार को अगर कुछ दे दिया, तो फिर वहां तो वन वे ट्रैफिक है, एक बार दिया तो दिया, फिर वापस नहीं आता है, गया, गया, यही सबका अनुभव है। लेकिन जब सरकार और जनता के बीच विश्वास मजबूत होता है, तो काम कैसे होता है? अगर कल अच्छी करनी है ना, तो मन आज अच्छा करना पड़ता है। अगर मन अच्छा है तो कल भी अच्छा होता है। और इसलिए हम एक और अभियान लेकर आए, आपको सुनकर के ताज्जुब होगा और अभी अखबारों में उसकी, अखबारों वालों की नजर नहीं गई है उस पर, मुझे पता नहीं जाएगी की नहीं जाएगी, आज के बाद हो सकता है चली जाए।

आपको ये जानकर हैरानी होगी कि आज देश के बैंकों में, हमारे ही देश के नागरिकों का 78 thousand crore रुपया, 78 हजार करोड़ रुपए Unclaimed पड़ा है बैंको में, पता नहीं कौन है, किसका है, कहां है। इस पैसे को कोई पूछने वाला नहीं है। इसी तरह इन्श्योरेंश कंपनियों के पास करीब 14 हजार करोड़ रुपए पड़े हैं। म्यूचुअल फंड कंपनियों के पास करीब 3 हजार करोड़ रुपए पड़े हैं। 9 हजार करोड़ रुपए डिविडेंड का पड़ा है। और ये सब Unclaimed पड़ा हुआ है, कोई मालिक नहीं उसका। ये पैसा, गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों का है, और इसलिए, जिसके हैं वो तो भूल चुका है। हमारी सरकार अब उनको ढूंढ रही है देशभर में, अरे भई बताओ, तुम्हारा तो पैसा नहीं था, तुम्हारे मां बाप का तो नहीं था, कोई छोड़कर तो नहीं चला गया, हम जा रहे हैं। हमारी सरकार उसके हकदार तक पहुंचने में जुटी है। और इसके लिए सरकार ने स्पेशल कैंप लगाना शुरू किया है, लोगों को समझा रहे हैं, कि भई देखिए कोई है तो अता पता। आपके पैसे कहीं हैं क्या, गए हैं क्या? अब तक करीब 500 districts में हम ऐसे कैंप लगाकर हजारों करोड़ रुपए असली हकदारों को दे चुके हैं जी। पैसे पड़े थे, कोई पूछने वाला नहीं था, लेकिन ये मोदी है, ढूंढ रहा है, अरे यार तेरा है ले जा।

साथियों,

ये सिर्फ asset की वापसी का मामला नहीं है, ये विश्वास का मामला है। ये जनता के विश्वास को निरंतर हासिल करने की प्रतिबद्धता है और जनता का विश्वास, यही हमारी सबसे बड़ी पूंजी है। अगर गुलामी की मानसिकता होती तो सरकारी मानसी साहबी होता और ऐसे अभियान कभी नहीं चलते हैं।

साथियों,

हमें अपने देश को पूरी तरह से, हर क्षेत्र में गुलामी की मानसिकता से पूर्ण रूप से मुक्त करना है। अभी कुछ दिन पहले मैंने देश से एक अपील की है। मैं आने वाले 10 साल का एक टाइम-फ्रेम लेकर, देशवासियों को मेरे साथ, मेरी बातों को ये कुछ करने के लिए प्यार से आग्रह कर रहा हूं, हाथ जोड़कर विनती कर रहा हूं। 140 करोड़ देशवसियों की मदद के बिना ये मैं कर नहीं पाऊंगा, और इसलिए मैं देशवासियों से बार-बार हाथ जोड़कर कह रहा हूं, और 10 साल के इस टाइम फ्रैम में मैं क्या मांग रहा हूं? मैकाले की जिस नीति ने भारत में मानसिक गुलामी के बीज बोए थे, उसको 2035 में 200 साल पूरे हो रहे हैं, Two hundred year हो रहे हैं। यानी 10 साल बाकी हैं। और इसलिए, इन्हीं दस वर्षों में हम सभी को मिलकर के, अपने देश को गुलामी की मानसिकता से मुक्त करके रहना चाहिए।

साथियों,

मैं अक्सर कहता हूं, हम लीक पकड़कर चलने वाले लोग नहीं हैं। बेहतर कल के लिए, हमें अपनी लकीर बड़ी करनी ही होगी। हमें देश की भविष्य की आवश्यकताओं को समझते हुए, वर्तमान में उसके हल तलाशने होंगे। आजकल आप देखते हैं कि मैं मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत अभियान पर लगातार चर्चा करता हूं। शोभना जी ने भी अपने भाषण में उसका उल्लेख किया। अगर ऐसे अभियान 4-5 दशक पहले शुरू हो गए होते, तो आज भारत की तस्वीर कुछ और होती। लेकिन तब जो सरकारें थीं उनकी प्राथमिकताएं कुछ और थीं। आपको वो सेमीकंडक्टर वाला किस्सा भी पता ही है, करीब 50-60 साल पहले, 5-6 दशक पहले एक कंपनी, भारत में सेमीकंडक्टर प्लांट लगाने के लिए आई थी, लेकिन यहां उसको तवज्जो नहीं दी गई, और देश सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग में इतना पिछड़ गया।

साथियों,

यही हाल एनर्जी सेक्टर की भी है। आज भारत हर साल करीब-करीब 125 लाख करोड़ रुपए के पेट्रोल-डीजल-गैस का इंपोर्ट करता है, 125 लाख करोड़ रुपया। हमारे देश में सूर्य भगवान की इतनी बड़ी कृपा है, लेकिन फिर भी 2014 तक भारत में सोलर एनर्जी जनरेशन कपैसिटी सिर्फ 3 गीगावॉट थी, 3 गीगावॉट थी। 2014 तक की मैं बात कर रहा हूं, जब तक की आपने मुझे यहां लाकर के बिठाया नहीं। 3 गीगावॉट, पिछले 10 वर्षों में अब ये बढ़कर 130 गीगावॉट के आसपास पहुंच चुकी है। और इसमें भी भारत ने twenty two गीगावॉट कैपेसिटी, सिर्फ और सिर्फ rooftop solar से ही जोड़ी है। 22 गीगावाट एनर्जी रूफटॉप सोलर से।

साथियों,

पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना ने, एनर्जी सिक्योरिटी के इस अभियान में देश के लोगों को सीधी भागीदारी करने का मौका दे दिया है। मैं काशी का सांसद हूं, प्रधानमंत्री के नाते जो काम है, लेकिन सांसद के नाते भी कुछ काम करने होते हैं। मैं जरा काशी के सांसद के नाते आपको कुछ बताना चाहता हूं। और आपके हिंदी अखबार की तो ताकत है, तो उसको तो जरूर काम आएगा। काशी में 26 हजार से ज्यादा घरों में पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के सोलर प्लांट लगे हैं। इससे हर रोज, डेली तीन लाख यूनिट से अधिक बिजली पैदा हो रही है, और लोगों के करीब पांच करोड़ रुपए हर महीने बच रहे हैं। यानी साल भर के साठ करोड़ रुपये।

साथियों,

इतनी सोलर पावर बनने से, हर साल करीब नब्बे हज़ार, ninety thousand मीट्रिक टन कार्बन एमिशन कम हो रहा है। इतने कार्बन एमिशन को खपाने के लिए, हमें चालीस लाख से ज्यादा पेड़ लगाने पड़ते। और मैं फिर कहूंगा, ये जो मैंने आंकडे दिए हैं ना, ये सिर्फ काशी के हैं, बनारस के हैं, मैं देश की बात नहीं बता रहा हूं आपको। आप कल्पना कर सकते हैं कि, पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना, ये देश को कितना बड़ा फायदा हो रहा है। आज की एक योजना, भविष्य को Transform करने की कितनी ताकत रखती है, ये उसका Example है।

वैसे साथियों,

अभी आपने मोबाइल मैन्यूफैक्चरिंग के भी आंकड़े देखे होंगे। 2014 से पहले तक हम अपनी ज़रूरत के 75 परसेंट मोबाइल फोन इंपोर्ट करते थे, 75 परसेंट। और अब, भारत का मोबाइल फोन इंपोर्ट लगभग ज़ीरो हो गया है। अब हम बहुत बड़े मोबाइल फोन एक्सपोर्टर बन रहे हैं। 2014 के बाद हमने एक reform किया, देश ने Perform किया और उसके Transformative नतीजे आज दुनिया देख रही है।

साथियों,

Transforming tomorrow की ये यात्रा, ऐसी ही अनेक योजनाओं, अनेक नीतियों, अनेक निर्णयों, जनआकांक्षाओं और जनभागीदारी की यात्रा है। ये निरंतरता की यात्रा है। ये सिर्फ एक समिट की चर्चा तक सीमित नहीं है, भारत के लिए तो ये राष्ट्रीय संकल्प है। इस संकल्प में सबका साथ जरूरी है, सबका प्रयास जरूरी है। सामूहिक प्रयास हमें परिवर्तन की इस ऊंचाई को छूने के लिए अवसर देंगे ही देंगे।

साथियों,

एक बार फिर, मैं शोभना जी का, हिन्दुस्तान टाइम्स का बहुत आभारी हूं, कि आपने मुझे अवसर दिया आपके बीच आने का और जो बातें कभी-कभी बताई उसको आपने किया और मैं तो मानता हूं शायद देश के फोटोग्राफरों के लिए एक नई ताकत बनेगा ये। इसी प्रकार से अनेक नए कार्यक्रम भी आप आगे के लिए सोच सकते हैं। मेरी मदद लगे तो जरूर मुझे बताना, आईडिया देने का मैं कोई रॉयल्टी नहीं लेता हूं। मुफ्त का कारोबार है और मारवाड़ी परिवार है, तो मौका छोड़ेगा ही नहीं। बहुत-बहुत धन्यवाद आप सबका, नमस्कार।