President Mukherjee's life will always remain a great source of inspiration for the entire nation: PM Modi
President Mukherjee has penned several books, held many positions in his political career: PM
Pranab Da has held many portfolios, be it commerce, defence, finance or foreign ministry: PM Modi
We must study our history. It gives detailed insights about our society: PM Modi
Fortunate to work with President Mukherjee as the Prime Minister: Narendra Modi

आदरणीय राष्‍ट्रपति जी, उपस्‍थित सभी वरिष्‍ठ महानुभाव हमारे शास्‍त्रों में सहत्र ग्रंथ दर्शन है जिसका एक विशेष महत्‍व है। 50 साल, 75 साल इससे भी बढ़ करके 80वीं जन्‍म जयंती सहत्र चंद्र दर्शन के रूप में मनायी जाती हैं और उसका तात्‍पर्य यह होता है कि जब व्‍यक्‍ति 80 वर्ष का होता है तब तक उसने एक हजार बार पूर्ण चंद्र के दर्शन किए होते हैं अपने जीवन काल में। हमारे बीच राष्‍ट्रपति महोदय सहत्र चंद्र दर्शन के बाद उस शीतलता की अनुभुति सारे राष्‍ट्र को करा रहे हैं। मैं आज हृदय से उनको अभिनंदन करता हूँ, उनको बधाई देता हूँ। और मुझे विश्‍वास है उनका दीर्घकालीन जीवन आने वाले अनेक वर्षों तक राष्‍ट्र के लिए एक बहुत बड़ी अमानत के रूप में काम आता रहेगा, प्रेरणा देता रहेगा और राष्‍ट्र को विकास की नई ऊँचाइयों पर ले जाने के हम सब के जो सपने हैं, उन सपनों को पूरा करने में उनके आशीर्वाद बने रहेंगे। मैं उनको बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूँ।

आज यहाँ दो ग्रंथों का लोकार्पण हुआ है। एक तो वो वैचारिक यात्रा है जिस यात्रा का प्रसाद समय-समय पर राष्‍ट्र को प्राप्‍त होता रहा है। आदरणीय राष्‍ट्रपति जी के द्वारा भिन्‍न- भिन्‍न विषयों पर जो बातें बताई गईं, अलग-अलग समय पर बताई गईं, एक प्रकार से विचार सम्पुट है, एक प्रकार से ये शासन व्यवस्था और समाज व्यवस्था के बीच एक दर्शन है, जो उस तत्कालीन अवस्था का भी परिचय देता है और वह आगे की सोच के लिए खिड़की भी खोलता है और उस अर्थ में ये जो उनकी विचार यात्रा का सम्पुट है जो व्‍याखानों के द्वारा समय-समय पर प्रकट हुआ है। वो आने वाले दिनों में अवश्य उपकारक होगा।

कभी-कभी मैं पत्रकारिता के विद्यार्थ्‍िायों से बात करता हूँ तो एक कमी महसूस ज़रुर करता हूँ कि उनकी जो Text books होती हैं कि वो एक निश्चित विचारों से बधे हुए लोगों के articles हैं उनका एक compilation होता है और वही उनको पढ़ाया जाता है। अच्‍छा होगा अगर इस प्रकार के ग्रंथों का पत्रकारिता के विद्यार्थियों के लिए एक Project के रूप में अगर काम दिया जाए तो बहुत सारे विचारों की पार्श्‍वभूमि को समझने, घटनाओं की पार्श्‍वभूमि को समझने का उनको अवसर मिलता है। कोई भी निर्णय अचानक नहीं होता है एक बहुत बड़ी वैचारिक पार्श्‍वभूमि होती है, बहुत लंबी प्रक्रियाएं होती हैं। जब विरष्‍ठ पद पर बैठे हुए व्‍यक्‍ति के विचारों को उसके मूल स्‍वरूप में देखते हैं तब उन चीजों को समझने की सुविधा बनती है। और उस अर्थ में इस प्रकार का संकलन, इस प्रकार का संपादन आने वाले दिनों में नई पीढ़ी को बहुत बड़ी प्रेरणा दे सकता है। एक और भी ग्रंथ का विमोचन करने का सौभाग्‍य मिला और एक प्रकार से हमारे धरोहर की पहचान है। किसी न किसी कारण से हम इस बात के दोषी हैं एक समाज के रूप में we are not a history conscious Society और उसके कारण जो हमारी बहुमूल्‍य चीजें हैं उसका जो गौरव करना चाहिए उसकी जो हिफाजत करनी चाहिए, उसको संभालना, संवारना और नई पीढ़ी को संक्रमित करना, ये कुल मिला करके हमारा एक बहुत बड़ा देाष रहा है। हो सकता है ये मूल चिंतन ‘आत्‍मवत्‍सव भूतेषु’ का होने के कारण शायद माहात्‍मय नहीं लगा होगा। लेकिन जब देखते हैं दुनियां के सारे लोगों की तुलना में, तो हमारे पास क्‍या कुछ नहीं है। हिन्‍दुस्‍तान के हर कोने में हर कोई पत्‍थर के पास अपना एक इतिहास है, हर पत्‍थर को कहने के लिए बहुत कुछ बातें हैं। लेकिन न उसे कोई सुनने वाला रहा, न उसे कोई समझने वाला रहा और न ही उसे कोई शब्‍दों में जड़ने वाला रहा। और उसके कारण इतना बड़ा इतिहास पत्‍थर बन कर रह गया। समय की मांग होती है कि इस पत्‍थ्‍ार को फिर से एक बार जिंदा कर दिया जाए। ‘शिला से अहिल्‍या' की घटना रामायण में किस रूप में है मैं नहीं जानता हूँ लेकिन मैं इतना समझता हूँ कि भारत के हर कोने में पत्‍थरों में जकड़ा हुआ इतिहास अपने आप में एक बहुत बड़ी हमारी विरासत है। फिर से उसको एक बार हम जीवित कर सकते हैं। इस धरोहर पर जो ग्रंथ हैं उनमें वो प्रयास हैं कि हमारी ये व्‍यवस्‍थाएं, हमारी ये इमारतें किस परीप्रेक्ष्‍य में बनी ? कैसे बनी ? क्‍या निर्णय हुए ? क्‍या-क्‍या उसका पहलु है और ये सब दूर है। मैं समझता हूँ कि ....... विशेषकरके Omita जी की इस विषय में बड़ी रूचि रहती है, उन्‍होंने एक अच्‍छा काम किया है। मैं उनको विषेश रूप से बधाई देता हूँ। जिस टीम ने इस काम को किया है मैं उनको भी बधाई देता हूँ।

प्रणव दा! वो भाग्‍यवान व्‍यक्‍ति हैं जिनको माता सरस्‍वती के भी आशीर्वाद हैं और मां सरस्‍वती के आशीर्वाद होने के कारण वे कलम के भी धनी हैं। उन्‍होंने जो कुछ भी लिखा है, उनकी काफी किताबें हैं, उन किताबों में वो जो sharpness है, परिस्‍थ्‍िात का मूल्‍यांकन करने की कम शब्‍दों में, जो ताकत है वो अपने आप में एक बहुत बड़ी शकसीयत का परिचय करवाती है। सार्वजनिक जीवन इतना लंबा...... और वो भी उच्‍च पदों पर रहा हुआ सार्वजनिक जीवन। इतने साल संसद में रहना, भिन्‍न-भिन्‍न्‍ा पदों पर ....... शायद जितने प्रकार के Portfolios प्रणव दा ने संभाले हैं, शायद हिंदुस्‍तान के इतिहास में कोई एक व्‍यक्‍ति ने इतनी विविधता वाले Portfolios संभाले होंगे। ऐसा शायद कोई नहीं होगा। जिसने commerce भी देखा हो और Defence भी देखा हो, इधर Finance भी किया हो और Foreign Ministry भी की हो। ऐसा शायद ही ...... मैं नहीं मानता हूँ कि कहीं इस प्रकार का कोई व्‍यक्‍तित्‍व हमें मिल सकता है। यानि कितना गहरा अनुभव ! कितना व्‍यापक अनुभव ! और कितनी विविधताओं से भरा अनुभव। ये अपने आप में ....... और मेरे जैसे व्‍यक्‍ति को तो स्‍वाभाविक गौरव होता कि ऐसे महापुरूष के साथ मुझे काम करने का अवसर मिला है। ये अपने आप में एक बहुत बड़ा गर्व होता है, तो ये नसीब मुझे प्राप्‍त हुआ है मैं अपने आप में एक बहुत बड़ा गौरव अनुभव करता हूँ और आप में सब ने अनुभव किया होगा कि उनको कभी भी किसी चीज का Reference ढ़ूढ़ना नहीं पड़ता। वो इमारत के लिए कहेंगे तब भी उतनी बारीकी से कहेंगे, समय की चर्चा करेंगे तो भी उतनी बारीकी से करेंगे, व्‍यक्‍ति की चर्चा भी करेंगे तो भी उतनी बारीकी से करेंगे और पेड़ पौधे और संगीत की चर्चा करेंगे तो भी उतनी ही बारीकी से करते हैं। ये एक गहराई, ये व्‍यापकता ये अपने आप में तब संभव होती है, जो जीना जानता है। जीते तो सब लोग हैं, पद तो सब लोग संभालते हैं पद को शोभा भी देते हैं, बहुत लोग हैं, लेकिन जो जीना जानता है वो हर पल को अपने आप में समेटता है, हर ज्ञान को पचाता है, उसको अनुभव की कसौटी पर कसता है और तब जा करके वो अमृत धारा निरंतर बहती रहती है जो सहत्र चंद्र दर्शन के समय भी तेजोमय होती है और एक शीतलता भी देती है, प्रकाश भी देती है और वो आज हमारे राष्‍ट्रपति जी के द्वारा प्राप्‍त हो रही है। मैं उनको बहुत-बहुत वंदन करता हूँ प्रणाम करता हूँ और उनका अभिनंदन करता हूँ। और मुझे आज आने का अवसर मिला मेरा सौभाग्‍य है, बहुत-बहुत धन्‍यवाद !

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ಜಗತ್ತು ಈಗ ಭಾರತೀಯ ಸ್ಟಾರ್ಟ್‌ಅಪ್‌ಗಳನ್ನು ಹುಡುಕುತ್ತಿರಬೇಕು: ಸ್ಪೇಸ್ ಸ್ಟಾರ್ಟ್‌ಅಪ್ ಸಿಇಒಗಳೊಂದಿಗಿನ ಸಂವಾದದ ಸಂದರ್ಭದಲ್ಲಿ ಪ್ರಧಾನಿ ಮೋದಿ
August 23, 2026
ನೀತಿ ಸ್ಥಿರತೆ, ಜಾಗತಿಕ ಅವಕಾಶಗಳು ಮತ್ತು ಬಾಹ್ಯಾಕಾಶ ಕ್ಷೇತ್ರದಲ್ಲಿ ಭಾರತದ ಬೆಳೆಯುತ್ತಿರುವ ಸಾಮರ್ಥ್ಯಗಳನ್ನು ಪ್ರಧಾನಿ ಎತ್ತಿ ತೋರಿಸಿದರು
ಪ್ರಪಂಚದಾದ್ಯಂತ ಜನರು ತಮ್ಮ ಭವಿಷ್ಯವನ್ನು ನಿರ್ಮಿಸಲು ಭಾರತದತ್ತ ನೋಡುವಂತೆ ಮಾಡುವ ಪ್ರಭಾವಲಯವನ್ನು ನಾವು ಸೃಷ್ಟಿಸಬೇಕು: ಪ್ರಧಾನಿ
ವೆಚ್ಚದ ವಿಷಯದಲ್ಲಿ ನಾವು ಹೆಚ್ಚು ಸ್ಪರ್ಧಾತ್ಮಕರಾಗಿರುವುದರಿಂದ ನಾವು ತುಂಬಾ ವೇಗವಾಗಿ ನಮ್ಮನ್ನು ಸ್ಥಾಪಿಸಿಕೊಳ್ಳಬಹುದು; ನಮ್ಮ ಪ್ರತಿಭೆ ಮತ್ತು ನಮ್ಮ ಜನರ ಅಪಾಯ-ತೆಗೆದುಕೊಳ್ಳುವ ಸಾಮರ್ಥ್ಯವೂ ತುಂಬಾ ಹೆಚ್ಚಾಗಿದೆ: ಪ್ರಧಾನಿ

ಪ್ರಧಾನಮಂತ್ರಿ: ನೀವು ಹೊಸ ಕ್ಷೇತ್ರದಲ್ಲಿ ಧೈರ್ಯ ತೋರಿಸಿದ್ದೀರಿ. ಅತ್ಯಂತ ಮುಖ್ಯವಾದ ವಿಷಯವೆಂದರೆ ನೀವು ಸರ್ಕಾರದ ಮಾತನ್ನು ನಂಬಿದ್ದೀರಿ. ನಾವು ಯಾವುದೇ ನಿರ್ಧಾರಗಳನ್ನು ತೆಗೆದುಕೊಂಡರೂ, ನಾವು ಅವುಗಳಲ್ಲಿ ಸ್ಥಿರವಾಗಿರಬೇಕು, ನಾವು ಅವುಗಳನ್ನು ಮತ್ತೆ ಮತ್ತೆ ಬದಲಾಯಿಸಬಾರದು ಎಂಬುದು ನನ್ನ ಅಭಿಪ್ರಾಯ. ಇದರಿಂದಾಗಿ ಅಪಾಯ ಸ್ವೀಕರಿಸಲು ಬಯಸುವ ಯಾರಾದರೂ ನಂಬಿಕೆ ಅಥವಾ ವಿಶ್ವಾಸ ಹೊಂದಬಹುದು, ಸರಿ, ಏನಾದರೂ ತಪ್ಪಾದಲ್ಲಿ ಅದು ನನ್ನ ತಪ್ಪಿನಿಂದಾಗಿರುತ್ತದೆ, ಆದರೆ ಯಾರೂ ನನ್ನನ್ನು ಕೈಬಿಡುವುದಿಲ್ಲ. ಇದು ನಮ್ಮ ಪ್ರಯತ್ನವಾಗಿತ್ತು - ಆ ನಂಬಿಕೆ ಮತ್ತು ವಿಶ್ವಾಸವನ್ನು ಸೃಷ್ಟಿಸುವುದು.

ಸಿಇಒ: ನಾವು ಭಾರತದ ಮೊದಲ ಬಾಹ್ಯಾಕಾಶ ತಂತ್ರಜ್ಞಾನ ಯುನಿಕಾರ್ನ್ ಹೊಂದಿದ್ದೇವೆ. ಜುಲೈ 18ರಂದು ನಾವು ಭಾರತದ ಮೊದಲ ಖಾಸಗಿ ರಾಕೆಟ್ ಅನ್ನು ಯಶಸ್ವಿಯಾಗಿ ಉಡಾಯಿಸಿದ್ದೇವೆ, ಉಪಗ್ರಹಗಳ ಉಡಾವಣೆ ಮಾಡಿದ್ದೇವೆ. ಇದು ಕೇವಲ ಆರಂಭ. ಸಾಮಾನ್ಯವಾಗಿ, ಇದು ಸ್ಕೈರೂಟ್‌ಗೆ ಮಾಡುವ ಒಂದು ಪೂರ್ವಸಿದ್ಧತಾ ಅಭ್ಯಾಸವಷ್ಟೆ, ಇದು ಕೇವಲ ಆರಂಭ. ಮುಂದಿನ ವರ್ಷದ ಮಧ್ಯಭಾಗದ ವೇಳೆಗೆ ನಾವು ತಿಂಗಳಿಗೆ ಒಂದು ಉಡಾವಣೆ ನಡೆಸುತ್ತೇವೆ. ಈ ವಲಯವನ್ನು ಖಾಸಗಿ ರಂಗಕ್ಕೆ ತೆರೆದಿರುವುದಕ್ಕೆ ನಿಮಗೆ ಧನ್ಯವಾದಗಳು ಸರ್. ಈಗಾಗಲೇ 3 ಕಾರ್ಖಾನೆಗಳನ್ನು ನಿರ್ಮಿಸಲಾಗಿದೆ. ನಾವು ಈಗಾಗಲೇ ತಿಂಗಳಿಗೆ ಒಂದು ರಾಕೆಟ್ ಸಾಮರ್ಥ್ಯವನ್ನು ಹೊಂದಿದ್ದೇವೆ. ಇದು ಸಹ ಕೇವಲ ಆರಂಭ. ನಮ್ಮ ಭವಿಷ್ಯದ ಕನಸು ವಾರಕ್ಕೆ ಒಂದು ಉಡಾವಣೆ ಮತ್ತು ದಿನಕ್ಕೆ ಹಲವಾರು ಉಡಾವಣೆಗಳನ್ನು ಮಾಡುವ ಉದ್ದೇಶ ಹೊಂದಿದ್ದೇವೆ.

ಸಿಇಒ: ನಾವು ವಿಶ್ವದ ಅತ್ಯಾಧುನಿಕ ಎಂಜಿನ್‌ಗಳಲ್ಲಿ ಒಂದಾದ ಎಂಜಿನ್ ತಯಾರಿಸಿದ್ದೇವೆ. ಸರ್, ನಾವು ಅದನ್ನು ಸಿದ್ಧಪಡಿಸಿದ್ದೇವೆ ಮತ್ತು ಅದರ ಪರೀಕ್ಷೆ ನಡೆಯುತ್ತಿದೆ.

ಪ್ರಧಾನಮಂತ್ರಿ: ಹೂಡಿಕೆದಾರರಿಗೆ ನಂಬಿಕೆ, ವಿಶ್ವಾಸ ಮೂಡಿದೆಯೇ?

ಸಿಇಒ: ಸರ್, ಸ್ಕೈರೂಟ್‌ನ ಮೊದಲ ಉಡಾವಣೆಯ ನಂತರ ಅವರ ವಿಶ್ವಾಸ ಹೆಚ್ಚಾಗಿದೆ.

ಪ್ರಧಾನಮಂತ್ರಿ: ಒಳ್ಳೆಯದು. ಆ ಮಾರ್ಗವು ನಿಮಗೆ ಸಹಾಯ ಮಾಡುತ್ತಿದೆಯೇ?

ಸಿಇಒ: ಇದು ಬಹಳಷ್ಟು ಸಹಾಯ ಮಾಡುತ್ತಿದೆ.

ಪ್ರಧಾನಮಂತ್ರಿ: ಈಗ ಜಗತ್ತು ಭಾರತದ ಸ್ಟಾರ್ಟ್ ಅಪ್ ಗಳನ್ನು ಹುಡುಕುತ್ತಿರಬಹುದು, ಇದರ ಹಿಂದೆ ಯಾರಿದ್ದಾರೆ ಎಂದು ಆಶ್ಚರ್ಯ ಪಡುತ್ತಿರಬಹುದು. ಏಕೆಂದರೆ ಏನೇ ಒಂದು ಪ್ರಗತಿ ಆದಾಗ, ತಕ್ಷಣ ಜನರ ಗಮನ ಅಲ್ಲಿಗೆ ಹೋಗುತ್ತದೆ.

ಸಿಇಒ: ಬಾಹ್ಯಾಕಾಶ ಉದ್ಯಮವು ತೆರೆದುಕೊಂಡ ನಂತರ, ನಾವು ಒಂದು ಉತ್ತಮ ಪ್ರವೃತ್ತಿಯನ್ನು ನೋಡಿದ್ದೇವೆ ಎಂದು ನಾನು ಭಾವಿಸುತ್ತೇನೆ. ಅಮರಿಕ ಮತ್ತು ಯುರೋಪಿನಲ್ಲಿರುವ ನಮ್ಮ ನಾಗರಿಕರು ಮತ್ತೆ ನಮ್ಮೊಂದಿಗೆ ಕೆಲಸ ಮಾಡಲು ಬಯಸುತ್ತಿದ್ದಾರೆ.

ಪ್ರಧಾನಮಂತ್ರಿ: ನಾವು ಅನೇಕ ಜನರನ್ನು ಸಂಪರ್ಕಿಸಬೇಕು. ಮೆಹ್ತಾ ಹೇಳಿದಂತೆ, ಈಗ ವಿದೇಶಕ್ಕೆ ಹೋಗಿದ್ದ ಜನರು ಹಿಂತಿರುಗುತ್ತಿದ್ದಾರೆ. ವಿಶ್ವಾದ್ಯಂತ ಜನರು ತಮ್ಮ ಜೀವನ ಕಂಡುಕೊಳ್ಳಲು ಬಯಸಿದರೆ, ಅವರು ಭಾರತಕ್ಕೆ ಬರಬೇಕು ಎಂದು ಭಾವಿಸುವಂತಹ ಪ್ರಭಾವಲಯವನ್ನು ನಾವು ಸೃಷ್ಟಿಸಬೇಕು ಎಂದು ನಾನು ನಂಬುತ್ತೇನೆ. ಯಾವುದಾದರೂ ಭಾರತೀಯ ಸ್ಟಾರ್ಟಪ್‌ಗೆ ಸೇರಿ. ಯಾವುದಾದರೂ ಭಾರತೀಯ ಬಾಹ್ಯಾಕಾಶ ಸಂಸ್ಥೆಗೆ ಸೇರಿ. ಇಡೀ ಪ್ರತಿಭಾನ್ವಿತ ಗುಂಪನ್ನು ಒಂದು ಆಯಸ್ಕಾಂತದಂತೆ, ನಿಮ್ಮ ಕಾರಣದಿಂದಾಗಿ ನಾವು ಆಕರ್ಷಿಸಬಹುದು, ಅದು ನಮಗೆ ಬಹಳ ದೊಡ್ಡ ಶಕ್ತಿಯಾಗಬಹುದು ಎಂದು ನಾನು ದೃಢವಾಗಿ ನಂಬುತ್ತೇನೆ.

ಸಿಇಒ: ಮುಂದಿನ 18 ತಿಂಗಳಲ್ಲಿ ನಾವು ಜಾಗತಿಕ ಮಟ್ಟದ ನಿಲ್ದಾಣ ಜಾಲವನ್ನು ಸ್ಥಾಪಿಸಲು ಬಯಸುತ್ತೇವೆ ಎಂಬುದು ನಮ್ಮ ದೃಷ್ಟಿಯಾಗಿದೆ.

ಸಿಇಒ: 5 ವರ್ಷ ಅಥವಾ 15 ವರ್ಷಗಳ ಕಾಲ ಬಾಹ್ಯಾಕಾಶದಲ್ಲಿ ಒಂದು ಸ್ಥಳದಿಂದ ಮತ್ತೊಂದು ಸ್ಥಳಕ್ಕೆ ಚಲಿಸಲು ಉಪಗ್ರಹಗಳು ಬಳಸುವ ಎಂಜಿನ್‌ಗಳನ್ನು ನಾವು ತಯಾರಿಸುತ್ತೇವೆ. ಜಾಗತಿಕವಾಗಿ ನಮಗೆ ಉತ್ತಮ ಸ್ಪಂದನೆ ಅಥವಾ ಪ್ರತಿಕ್ರಿಯೆ ವ್ಯಕ್ತವಾಗಿದೆ. ಸರ್, ನಿಮ್ಮ ಪ್ರಯತ್ನವು ಇದರಲ್ಲಿಯೂ ಬಹಳ ಮುಖ್ಯವಾಗಿದೆ, ಏಕೆಂದರೆ ಈಗ ಭಾರತೀಯ ಕಂಪನಿಗಳು ರಫ್ತಿಗೆ ಸರ್ಕಾರದ ಬೆಂಬಲ ಪಡೆಯುತ್ತಿವೆ.

ಪ್ರಧಾನಮಂತ್ರಿ: ವೆಚ್ಚದ ವಿಷಯದಲ್ಲಿ ನಾವು ತುಂಬಾ ಸ್ಪರ್ಧಾತ್ಮಕವಾಗಿದ್ದೇವೆ, ಪ್ರತಿಭೆಯಲ್ಲಿ ಯಾವುದೇ ಪ್ರಶ್ನೆಯಿಲ್ಲ, ನಮ್ಮ ಜನರ ಅಪಾಯ ಸ್ವೀಕರಿಸುವ ಸಾಮರ್ಥ್ಯ ಹೇಗಾದರೂ ಹೆಚ್ಚಾಗಿದೆ. ಅದರಿಂದ ನಾವು ಬೇಗನೆ ನಮ್ಮ ಸ್ಥಾನವನ್ನು ಪಡೆಯಬಹುದು.

ಸಿಇಒ: ಈ ರೋಬೋಟಿಕ್ ಬಾಹ್ಯಾಕಾಶ ನೌಕೆ ಬಾಹ್ಯಾಕಾಶಕ್ಕೆ ಹೋಗುತ್ತದೆ, ನಿಷ್ಕ್ರಿಯ ಅಥವಾ ಸತ್ತ ಉಪಗ್ರಹವನ್ನು ಭೌತಿಕವಾಗಿ ಸೆರೆಹಿಡಿಯುತ್ತದೆ ಮತ್ತು ಅದನ್ನು ಕಕ್ಷೆಯಿಂದ ಹೊರಹಾಕುತ್ತದೆ.

ಸಿಇಒ: ಬಾಹ್ಯಾಕಾಶದಲ್ಲಿ ಇಂಧನ ಕೇಂದ್ರವನ್ನು ಸ್ಥಾಪಿಸುವ ದೃಷ್ಟಿಯೊಂದಿಗೆ ಡಾಕಿಂಗ್ ಮತ್ತು ಇಂಧನ ತುಂಬುವ ತಂತ್ರಜ್ಞಾನಗಳಲ್ಲಿ ಕೆಲಸ ಮಾಡುತ್ತಿರುವ ಮೊದಲ ಭಾರತೀಯ ಕಂಪನಿ ನಾವಾಗಿದ್ದೇವೆ.

ಸಿಇಒ: ನನ್ನ ಹೆಸರು ಅಂತರಿಕ್ಷ್, ನನ್ನ ಸಹ-ಸಂಸ್ಥಾಪಕಿ ಮೋನಿಕಾ ಕೂಡ ಇಲ್ಲಿದ್ದಾರೆ. ಸರ್, ನಾವು ಭಾರತದ ಮೊದಲ ಬಾಹ್ಯಾಕಾಶ ಫಾರ್ಮಾ ಸ್ಟಾರ್ಟ್ ಅಪ್. ನಾವು ಬಾಹ್ಯಾಕಾಶಕ್ಕೆ ಹೋಗಬಹುದಾದ, ಅಲ್ಲಿ ಔಷಧಗಳನ್ನು ತಯಾರಿಸಬಹುದಾದ ಮತ್ತು ಬಾಹ್ಯಾಕಾಶದಿಂದ ಹಿಂದಿರುಗಬಹುದಾದ ಉಪಗ್ರಹಗಳನ್ನು ತಯಾರಿಸುತ್ತಿದ್ದೇವೆ.

ಪ್ರಧಾನಮಂತ್ರಿ: ನಿಮ್ಮ ಹೆಸರು ಅಂತರಿಕ್ಷ್-ನಿಮ್ಮ ಕುಟುಂಬ ಈಗಾಗಲೇ ಈ ಕ್ಷೇತ್ರದಲ್ಲಿದೆಯೇ?

ಸಿಇಒ: ಇಲ್ಲ ಸರ್, ನನ್ನ ತಾಯಿ ನನಗೆ ಈ ಹೆಸರು ಇಟ್ಟಿದ್ದಾರೆ.

ಸಿಇಒ: ಒಂದು ಉಡಾವಣೆಯ ನಂತರ, ಕಳೆದ 1 ತಿಂಗಳಲ್ಲಿ ನಾವು 8 ಉಡಾವಣಾ ಗುತ್ತಿಗೆ ಒಪ್ಪಂದಗಳನ್ನು ಪಡೆದಿದ್ದೇವೆ.

ಪ್ರಧಾನಮಂತ್ರಿ: ಒಳ್ಳೆಯದು, ಒಳ್ಳೆಯದು.

ಸಿಇಒ: ಹೆಚ್ಚಾಗಿ ಅವೆಲ್ಲವೂ ಅಂತಾರಾಷ್ಟ್ರೀಯ ಒಪ್ಪಂದಗಳಾಗಿವೆ.

ಸಿಇಒ: ಸರ್, ಇದೀಗ ನಾವು 1 ದಶಲಕ್ಷ ರೈತರೊಂದಿಗೆ ಈ ನಾವೀನ್ಯತೆಯನ್ನು ಪ್ರಾರಂಭಿಸಲು ಯೋಜಿಸಿದ್ದೇವೆ.

ಸಿಇಒ: ಸರ್ ಇದು ನಿಮಗಾಗಿ, ಆದ್ದರಿಂದ ಒಂದು ನೆನಪು ಉಳಿಯುತ್ತದೆ.

ಪ್ರಧಾನಮಂತ್ರಿ: ಅದ್ಭುತ.

ಸಿಇಒ: ನೀವು ಖಾಸಗಿ ರಂಗಕ್ಕೆ ಬಾಹ್ಯಾಕಾಶ ವಲಯವನ್ನು ತೆರೆದಿದ್ದರಿಂದ ಖಾಸಗಿ ಉಪಗ್ರಹಗಳು ಈಗ ಭಾರತದ ಸೌಂದರ್ಯವನ್ನು ತೋರಿಸುತ್ತಿವೆ.