Prime Minister addresses special session of National Meet on Promoting Space Technology
Technology is the driving force of current generation: PM
Space science has an important role in achieving good governance: PM
Technology most powerful medium for good governance: PM
PM Modi urges scientists to devise ways to simplify lives of common man through technological solutions
There should be no "space" between common man and space, says PM Modi

साथियों, मैं 2014 जून में सरकार बनने के तुरंत बाद श्रीहरिकोटा गया था, क्योंकि इसी विभाग का मैं मंत्री भी हूं तो मंत्री के नाते भी मुझे इस विभाग के काम को समझना था, तो detailed presentation सब scientists ने मेरे सामने किया था और उस समय मैंने एक विषय रखा था कि Space technology का उपयोग सामान्य मानवी के लिए कैसे हो सकता है? हमारे सारे departments उस दृष्टि से क्या कर सकते हैं? और उसी में से तय हुआ था कि किस department में क्या हो रहा है, उसका एक लेखा-जोखा ले लिया जाए और जिन राज्यों में इस दिशा में कुछ न कुछ initiative लिए गए हैं, उसकी भी जानकारी इकट्ठी की जाए। और मेरे मन में प्रारंभ से ही था कि ज्यादातर सरकार का स्वभाव साहस का नहीं होता है। नई चीज करना, नई चीज को adopt करना, वो बहुत समय लगता है और ज्यादातर innovation होते हैं या initiative होते हैं तो एकाध उत्साही अधिकारी के आधार पर होते हैं। व्यवस्था के तहत बदलाव, व्यवस्था के तहत new initiative हो। ये जब तक हम ढांचा खड़ा नहीं करते, हम बदलते हुए युग में अपने आप को irrelevant बना देते हैं और इस बात को हमने स्वीकार करना होगा कि इस generation में हम पर technology एक driving force है, technology का बहुत बड़ी मात्रा में impact है और technology बहुत बड़ी मात्रा में solution का कारण भी है और इसलिए हमारे लिए आवश्यक होता है कि हम इन चीजों को समझें और हमारी आवश्यकता के अनुसार, हम इसे उपयोग में लाएं।

आज पूरे विश्व में Space के क्षेत्र में भारत ने अपनी गौरवपूर्ण जगह बनाई है। हमारे scientists ने, हर हिंदुस्तानी गर्व कर सके, ऐसे achievement किए हैं लेकिन जब से भारत ने Space Science ने पैर रखा, तब से एक विवाद चलता रहा है और वो विवाद ये चला है कि भारत जैसे गरीब देशों ने इस चक्कर में पड़ना चाहिए क्या, अगर हम आज Space में नहीं जाएंगे तो क्या फर्क पड़ता है, हम satellite के पीछे रुपए खर्च नहीं करेंगे तो क्या फर्क पड़ेगा? ये सवाल आज भी उठाए जाते हैं। डॉ. विक्रम साराभाई ने इसके लिए शुरू में एक बात बहुत अच्‍छी तरह बताई थी। उन्‍होंने कहा था कि ये सवाल उठना बहुत स्‍वाभाविक है कि भारत जैसे गरीब देशों ने इस स्‍पर्धा में क्‍यों जाना चाहिए और उन्‍होंने कहा था कि हम स्‍पर्धा के लिए नहीं जा रहे हैं। लेकिन हमारे देश के सामान्‍य मानवी की आवश्‍यकता की पूर्ति के लिए, हमारे प्रयासों में हम कम नहीं रहने चाहिए, हमारे प्रयास कम नहीं पड़ने चाहिए। जितने भी तौर-तरीके हैं, जितने भी माध्‍यम है जितनी भी व्‍यवस्‍था है, जितने भी innovations है, ये सारे भारत के सामान्‍य मानवी जीवन के बदलाव में उपयोग आ सकते हैं क्‍या? और उसमें हमें पीछे नहीं रहना चाहिए? विक्रम साराभाई ने उस समय जो दर्शन किया था, आज हम देख रहे हैं कि हम space के माध्यम से, हमारे science के माध्यम से, हमारे ISRO के माध्यम से, जो कुछ भी achieve हुआ है, आज हम देश के विकास में कहीं न कहीं इसको जोड़ने का, कम-अधिक मात्रा में सफल प्रयास हुआ है।

जब मैं ये presentation देख रहा था, मुझे इतनी खुशी हो रही थी कि सब department अब इस बात से जुड़े हैं, कुछ department चल पड़े हैं, कुछ department दौड़ते हुए आगे बढ़ रहे हैं और कई department इन नई-नई चीजों को कैसे सोचे व्यवस्था को कैसा उपयोग किया जाए? मैं कुछ दिन पहले बनारस में जो Loko-shed है, वहां पर एक high power engine के लोकापर्ण के लिए गया था, तो अंदर जो उनकी सारी नई-नई व्यवस्थाएं थी, उनको देख रहा था तो मैं, मैंने उनको एक सवाल पूछा, मैंने कहा हवाई जहाज में हम देखते हैं तो एक monitor होता है pilot के सामने और उसे पता रहता है कि इतने minute के बाद cloud आएगा, cloud का ये की ये घनता होगी इसके कारण जहाज में जर्क आ सकता हो वो warning भी देता है अंदर passenger को। मैंने कहा, ये technology तो है, क्या हमारे engine में, जो engine driver है, उसको हम इस प्रकार का monitor system दे सकते हैं क्या? और satellite connectivity हो और जहां भी unmanned crossing होते हैं, उसको पहले से ही warning मिले monitor पर, special प्रकार का lighting हो और horn बजे और 2-4 किलोमीटर पहले से शुरू हो सकता है क्या? वहां ऐसे ही देखते-देखते मेरे मन में विचार आया था। मैंने वहां जो, engineer वगैरह थे, उनके सामने विषय रखा। फिर हमारे scientist मिले तो मैंने उनके सामने रखा कि भई देखिए जरा इस पर क्या कर सकते हैं और मुझे खुशी है। इन 3-4 महीनों के कालखंड में उन्होंने उस काम को तैयार कर दिया और मुझे बता रहे थे कि बस आने वाले निकट दिनों में हम इसको roll-out करेंगे। unmanned crossing की समस्या का समाधान के लिए कई रास्ते हो सकते हैं लेकिन क्या satellite भी unmanned crossing में सुरक्षा के लिए काम आ सकता है क्या? हमारे scientists को काम दिया गया और मैं देख रहा हूं 3-4 महीने के भीतर-भीतर वो result लेकर के आ गए।

मेरी department के मित्रों से गुजारिश है कि आप भी एक छोटा सा cell बनाइए अपने department में, जो ये सोचते रहे, जिसकी technology की nature हो कि इसका क्या-क्या उपयोग हो सकता है, कैसे उपयोग हो सकता है? अगर वो इस बात को समझ ले और वो फिर जरा discuss करे, नीचे ground reality क्या है, उसको देखें और फिर हम ISRO को कहें कि देखिए हमारे सामने ये puzzle है, हमें लगता है कि इसका कोई रास्ता खोजना चाहिए, ये-ये व्यवस्थाएं चाहिए। आप देखिए उनकी team लग जाएगी। Technology किस हद तक काम आ सकती है, data collection का काम आपका है, conversion का काम आपका है और किस प्रकार से उसके परिणाम लाए जा सकते हैं। कई नए initiative हम ले सकते हैं।

जब 2014, जून में मैं ISRO में गया था, श्री हरिकोटा में मैंने बात की थी, जैसा अभी किरण जी ने बताया कि 20 department में कम-अधिक मात्रा में काम हो रहा था। आज 60 departments में space technology के उपयोग पर pro active गतिविधि हो रही है। थोड़ा सा प्रयास हुआ, छोटी-छोटी meeting हुई department की, मैं मानता हूं शायद हिंदुस्तान में और सरकार के इतिहास में, ये पहली बड़ी घटना होगी कि केंद्र और राज्य के करीब 1600 अधिकारी पूरा दिनभर एक ही विषय पर brainstorming करते हो, workshop करते हो और जिसके पास जानकारी हो, दूसरे को दे रहा है, जिसके पास जिज्ञासा है, वो पूछ रहा है। शायद हिंदुस्तान के सरकार के इतिहास में इतनी बड़ी तादाद में एक ही विषय के solution के लिए ये पहले कार्यक्रम हुआ होगा। लेकिन ये एक दिन का workshop, ये एक दिन का workshop नहीं है इसके पूर्व पिछले 6-8 महीनों से लगातार हर department के साथ, हर राज्य के साथ, scientists के साथ मिलना, बातचीत करना, विषयों को पकड़ना, समस्याओं को ढूंढना, solution को ढूंढना ये लगातार चला है और उसी का परिणाम है कि आज हम एक विश्वास के साथ यहां इकट्ठा हुए हैं कि हम समस्याओं का समाधान खोज सकते हैं।

Technology का सर्वाधिक लाभ कम से कम खर्च में, हो सके उतनी सरलता से, गरीब से गरीब व्यक्ति को पहुंचे कैसे? यही हमारी सबसे बड़ी चुनौती है और आपने देखा होगा जैसे ये हरियाणा की एक घटना बताई गई कि उन्होंने उसका election का जो I-card है, उसको ही satellite technology का उपयोग करते हुए जोडकर के, उसके जमीन के document के साथ उसको, उन्होंने जोड़ दिया है। अब ये सब चीजें पड़ी थी, कहीं न कहीं पड़ी थी लेकिन किसी ने इसको दिमाग लगाया और जोड़ने का प्रयास किया तो एक नई व्यवस्था खड़ी हो गई।

हमारे सामने नया कुछ भी न करें। मान लो हम तय करें कि इस संबंध में नया कुछ नहीं होने वाला लेकिन कुछ उपलब्ध जानकारियां हैं, उपलब्ध technology है, उसी को हमारी आवश्यकता के अनुसार किस प्रकार से conversion किया जाए, इस पर भी हम mind apply करें तो हम बहुत बड़ी मात्रा में नए solution दे सकते हैं और easy delivery की व्यवस्था विकसित कर सकते हैं।

हमारी postal department, इतना बड़ा network है। उस network का उपयोग हम Satellite system के साथ जोड़कर के कहां-कहां कर सकते हैं? देश का सामान्‍य से सामान्‍य नागरिक और व्‍यवस्‍थाओं से जुड़ता हो या न जुड़ता हो, लेकिन वो post office से जरूर जुड़ता है। साल में एकाध बार तो उसका post office से संबंध आता ही-आता है। इसका मतलब यह है कि सरकार के पास एक ऐसी इकाई है, जो last bench तक सहजता से जुड़ी हुई है और post office एक ऐसी व्‍यवस्‍था है कि आज भी सामान्‍य मानवी को उस पर बड़ा भरोसा है। जिसको आदत होती है तो डाकिया कब आएगा वो देखता रहता है, डाकिया आया क्‍या, डाकिया गया क्‍या। भले महीने में एक बार डाक आती हो लेकिन बेटा बाहर तो डाकिया का इंतजार करती रहती है मां। ये जो विश्वास है, वो विश्वास के साथ इस technology का जुड़ना, नई-नई चीजों को जोड़ना, कितना बड़ा परिणाम दे सकता है।

जब मैं राज्य में काम कर रहा था तो ये किरण जी भी हमारे वहीं थे तो हमारी अच्छी दोस्ती थी तो मैं उनसे काफी कुछ जानता रहता था, क्या नया हो रहा है, क्या कर रहे हो, दुनिया को क्या देने वाले हो। उसमें से एक हमारा कार्यक्रम बना fishermen के लिए, fishermen को हम mobile के ऊपर जानकारी देते थे कि इतने longitude पर, latitude पर catch है और fish का एक स्वभाव रहता है कि जहां जमघट रहता है उसका तो करीब-करीब 24 घंटे वहीं रहती है और वो पहले fishing के लिए जाते थे तो घंटों तक वो boat लेके जाते थे, वो देखते रहते थे, वो जाल फेंकते रहते थे, फिर मिला, फिर आगे गए, घंटों तक उनको प्रक्रिया करनी पड़ती थी। ये व्यवस्था देने के बाद वो targeted जगह पर पहुंचता है, कम समय में पहुंचता है, डीजल-वीजल का खर्चा कम होता है और भरपूर मात्रा में cash मिलता है, fishing करके वापस आ जाता है, समय और शक्ति बच जाती है। technology वही थी, उसका उपयोग गरीब व्यक्ति के लिए कैसे होता है।

आज जैसे अभी बताया। मध्य प्रदेश ने आदिवासियों को, जमीन के पट्टे देने में इसका उपयोग किया। इससे भी एक कदम आगे हम काम कर सकते हैं। कई लोग, कई आदिवासी claim करते हैं कि भई यहां हम खेती करते थे, ये हमारी जमीन है, ये हमको मिलना चाहिए। गांव के लोग कहते हैं कि नहीं ये झूठ बोल रहा है, खेती नहीं करता था बेकार में जमीन हड़प करना चाह रहा है, उसका तो पैतृक जगह वो है, वहां करता था अब बच्चे बेकार में अलग हो गए हैं, सब झगड़े चलते रहते थे। लेकिन अब satellite से, पुरानी तस्वीरों को आधार पर उसको photographic system से, comparison से उसको बता सकते हैं कि यहां पर पहले forest था या खेती होती थी या कोई काम होता था, सारी चीजें निकालकर के हम उसको proof provide कर सकते हैं, एक आदिवासी hub को हम establish कर सकते हैं, just with the help of satellite. जिस scientist ने जिस समय satellite के लिए काम किया होगा तब उसे भी शायद पता नहीं होगा कि दूर-सुदूर जंगलों में बैठे हुए किसी आदिवासी के हक की लड़ाई, वो satellite के माध्यम से लड़ रहा है और उसको हक दिला रहा है, ये ताकत technology की है। जिस scientist ने उस काम को किया होगा, उसको जब पता चलेगा, अरे वाह मैने तो इस काम के लिए किया था, आदिवासी के हक के लिए मैं सफल हो गया, उसका जीवन धन्य हो जाता है। हमारा ये काम रहता है कि हम इन चीजों को कैसे उपयोग में लाएं। हम बहुत बड़ी मात्रा में लोगों का involvement करना चाहिए, क्या हर department, ideas के लिए young generation को invite कर सकते हैं कि भई हमारे सामने ये issue हैं, हमें technology के लिए, satellite या space system के लिए कैसे रास्ता निकालना चाहिए, आप student के सामने छोड़ दीजिए। आप देखिए वे exercise करेंगे, वो online आपके साथ जुड़ेंगे और नए-नए ideas देंगे। Department में एक cell बनाइए और young generation तो आजकल बड़ी techno-savvy होती है, उसमें से बनाइए, उसको कहिए कि देखे भाई आप जरा mind apply किजिए, आपको जरूर नए-नए ideas मिलेंगे और आपको इसका परिणाम भी मिलेगा।

हमारे देश में गरीब से गरीब व्यक्ति भी कुछ न कुछ दिमाग apply करने का स्वभाव रखता है। अगर भारत, innovative भारत इस पर अगर काम किया जाए, तो मैं नहीं मानता हूं कि हम कहीं पीछे नजर आएगें। हर प्रकार के, आपने देखा होगा कि कई अखबारों में पढ़ते हैं कि कोई किसान अपने खेत का पानी का पंप घर से ही operate करता है कैसे? Mobile Phone से operate करता है, उसने खुद ने technology develop की और mobile technology का उपयोग करता है और अपने घर से ही उसे पता चलेगा, बिजली आई है, तो अपने घर से ही वो पंप चालू कर देता है और पानी का काम शुरू हो जाता है, फिर उसके बाद वो खेत चला जाता है।

मुझे एक बार किसी ने बताया, कैसे दिमाग काम करता है सामान्य व्यक्ति का, वो व्यक्ति जिसने अपने घर में bio-gas का एक unit लगाया था, गांव के अंदर, किसान ने और अपने जो पशु थे उसका गोबर वगैरह डालता था, अपने घर में Kitchen में जो काम होता था वो गोबर डालता था और गैस पैदा करता था। अपने चूल्‍हे में requirement से भी ज्‍यादा गैस होने लगा। उसने बुद्धि का उपयोग कैसे किया, उसने tractor की tube में, अब tractor की tube कितनी बड़ी होती है, हमें अंदाजा है, वो गैस उसमें भर लेता था वो और scooter पर उसको उठाकर के, अब scooter पर कोई tractor की tube ले जाता है तो देखकर के डर लगता है कि क्या होगा, गैस tractor की tube में transport करके अपने खेत पर ले जाता था और अपने raw-wisdom से, उस गैस से वो अपना diesel engine को, जो उसने modify किया था, चलाता था और पानी निकालता था। अब देखिए कोई विज्ञान के तरीके, यानि सामान्य मानवी को भी ये मूलभूति सिद्धांत हो गए, वो उसमें से अपना रास्ता खोजता है और चीजों को apply करता है। हम किस प्रकार से इन चीजों पर सोचें नहीं तो ये सारा ज्ञान-विज्ञान भंडार बढ़ता ही चला जाएगा, लेकिन सामान्य मानवी की आवश्यकताओं के लिए हमारा विभाग क्या करता है।

आज हमारी education quality हमें ठीक करनी है, ये ठीक है, कोई कहेगा कि इतने गांवों में बिजली नहीं है तो कैसे करोगे? इतने गांवों में broadband connectivity नहीं है तो कैसे करोगे? इतने गोवों में optical fiber network नहीं है, तो कहां करोगे? जिसको ये सोचना है, वो ये सोचेगा लेकिन ये भी तो सोचो कि भई इतने गांवों में है, इतने शहरों में है। कम से कम वहां long distance education के द्वारा the best quality of the teachers और हिंदुस्तान के बड़े शहर में बैठकर के studio में वो बच्चों को पढ़ाएं, मैं समझता हूं कि उस teacher को भी quality education की तरफ, उसका भी training होगा और long distance education वो करेगा और दूर-सुदूर जंगलों में भी, हमारे गांवों में हम अच्छी शिक्षा को improve कर सकते हैं।

अभी मुझे किरण जी बता रहे थे, हमारे health secretary ने जो कहा कि उनको broadband capacity की कोई समस्या है, मैं उनको पूछ रहा थे कि as per health is concerned हमारे पास access capability है। अगर हम इसका उपयोग करने के लिए सोचें, हमारे सेना के जवान सीमा पर हैं, उनको इसका उपयोग कैसे हो, उनकी requirement के लिए हम इस technology को कैसे जोड़ें? हम सीमा की सुरक्षा का बहुत बड़ा काम, हम इस technology के माध्यम से कर सकते हैं।

कभी-कभार जैसे हम बहुत बड़ा एक कार्यक्रम लेकर के चले हैं, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, ये प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना की सफलता का सबसे पहला कोई कदम है तो हमारे space technology का उपयोग है। हम बढिया सा contour तैयार कर सकते हैं, गांव का contour तैयार कर सकते हैं और उसके आधार पर तैयार कर सकते है कि पानी का प्रवाह किस तरफ है, पानी का quantum कितना हो सकता है, rain fall कितना हो सकता है और इसके आधार पर भविष्य की पूरी design हम technology के आधार पर हम बना सकते हैं। एक प्रकार से ये science Good Governance के लिए एक अहम role पैदा कर सकता है। पहले हम planning करते थे तो सामान्य अपने अनुभव के आधार पर करते थे। आज satellite के माध्यम से हम वो planning कर सकते हैं कि जिसके कारण हमारा खर्च भी बच सकता है, समय भी बच सकता है और आज road network बनाना है। आज आप देखिए दशरथ मांझी इतना बड़ा popular हो गया है, लेकिन कारण क्या था, सरकार ने road ऐसा बनाया कि एक गांव से दूसरे गांव जाना था तो पहाड़ के किनारे-किनारे जाता था और 50-60 किलोमीटर extra जाता था। दशरथ मांझी का raw-vision कहता था, जन्‍म से लाया होगा GIS system वो, उसको लगता था यहां सीधा चला जाउं तो दो किलोमीटर में पहुंच जाउंगा। और अपने हथोड़े से उसने वो रास्‍ता बना दिया। आज technology इतनी available है कि कोई दशरथ मांझी को अपनी जिन्‍दगी खपानी नहीं पड़ेगी। आप shortest way में अपना रास्‍ता खोज सकते हो, बना सकते हो।

हम इस technology का कैसे उपयोग करें? और उपयोग कर-करके हम इसे। देखिए हमारे यहां canal भी बनती है। ऐसे-ऐसे-ऐसे जब हेलीकॉप्‍टर या हवाई जहाज से जाते हैं तो बड़ी पीड़ा होती है कि ये canal भी इतने-इतने सांप की तरह क्‍यों जा रही है। तो एक तो बनाते समय देखा होगा कि चलो यहां से चले जाएं, या तो कोई decision making पर कोई pressure आया होगा कि यार इसका खेत बचाना है, जरा उधर ले जाओ तो सांप की तरह हम लेते चले गए लेकिन हमने अगर technology का प्रयोग करते, उस समय technology करने का अवसर मिला हो तो perfect alignment के साथ हम काम कर सकते थे।

हमारे जितने भी, अब देखिए encroachment का highways पर बड़े encroachment की चिंता होती है, satellite के द्वारा हम regular monitor कर सकते हैं कि हमारे highway पर encroachment हो रहा है, क्या हो रहा है, क्या गतिविधि हो रही है, हम आराम से कर सकते हैं, हम निकाल सकते हैं रास्ता।

हमारी wild life, हमारी wildlife क्यों गिनती करना का, पांच साल में एक बार करते हैं और wildlife की गिनती के लिए भी पचासों प्रकार के सवाल आते हैं, Camera लगते हैं, कोई उसके पैर का नाप ले लेता है, मैं मानता हूं हम satellite system से महीने भर observe करें तो हम चीजों को खोज सकते हैं कि इस प्रकार के जो हमारे wildlife हैं, इस प्रकार यहां रहता है, इनकी movement का ये area है, आप आराम से इन चीजों को गिन सकते हैं।

Technology का उपयोग इतनी सहजता से, सरलता से हो सकता है और मैं चाहता हूं कि हमारे सारे departments इस पर कैसे काम करें। हमारे पास बंजर भूमि बहुत बड़ी मात्रा में है। एक-एक इंच जमीन का सदुपयोग कैसे हो, इस पर हम कैसे काम कर सकते हैं।

हमारे जंगल कभी कट गए, इसकी खबर आती है। Red चंदन जहां, वहां कहते हैं कि कटाई बहुत होती है। क्या हमारा permanent high resolution वाले camera, regular हमें update नहीं दे सकते क्या कि भई Red चंदन वाला इलाका है, यहां कोई भी movement होगी तो हमें तुरंत पता चलेगा।

Mining..mining की विशेषता क्या होती है कि वो सारे system तो perfect होते हैं कागज पे, उसको mining का मिल जाता है contract मिल जाता है लेकिन जो उसको two square kilometer by two square kilometer area, मिला होगा, वो वहां शुरू नहीं करता है, उसके बगल में खुदाई करता है। अब कोई जाएगा तो उसको भी लगता है कि यार उसको तो contract मिला हुआ है, वो थोड़ा नापता है कि कितने फुट कहां है? लेकिन उसको अगर satellite system से watch किया जाए तो एक इंच इधर-उधर नहीं जा सकता, जो जगह उसको तय हुई है, वहीं पर ही mining कर सकता है और हम उसके vehicles को track कर सकते हैं कि दिन में कितने vehicle निकले, कितना गया और taxation system के साथ उसको जोड़ा जा सकता है, ये आराम से काम हो सकता है।

हमारे यहां road tax लेते हैं। कभी-कभार road tax में, हम technology का उपयोग करके, बहुत मात्रा में leakages बचा सकते हैं, just with the help of technology और हम बहुत व्यवस्थाओं को विकसित कर सकते हैं।

मेरा कहने का तात्पर्य ये है कि हमारे पास एक ऐसी व्यवस्था उपलब्ध है और एक लंबे अर्से तक हमारे scientists ने पुरुषार्थ करके इसको पाया है, हमारा दायित्व बनता है कि हम इसको सहज रूप से कैसे अपने यहां लागू करें और जो भी विभाग इसका आदि होगा, जिसको जरा स्वभाव होगा। आपने देखा होगा कि उसको लगता है कि इसने तो मेरे पूरे काम को बड़ा easy बना दिया है, बड़ा सरल कर दिया है. तो वो उसमें फिर involve होता चला जाएगा। जिसको ये पता नहीं कि भई इसका क्या है, अब दो साल के बाद retire होना है, तो मेरा क्या, छोड़ो यार, तुम कर लेना। जो ऊर्जा खो देते हैं जी, वो retire होने के बाद भी जिंदगी का मजा नहीं ले सकते हैं और इसलिए हम हर पल, हर पल भले ही हम senior most हैं, जिंदगी के आखिरी पड़ाव आता है, तो भी हम ऐसी कोई foot-print छौड़कर के जाएं ताकि हमारे बाद की नई पीढियों को सालों तक काम करने का अवसर मिले।

ये जो आज प्रयास किया उसमें मैने एक प्रकार से तीन पीढ़ी को इकट्ठा किया है। जो fresh अभी-अभी मसूरी से निकले हैं, वो नौजवान भी यहां बैठे हैं और जो सोचते होंगे कि भई 30 तारीख को retire होना है, अगली 30 तारीख को होना है, वो भी बैठे हैं, यानि एक प्रकार से तीन पीढ़ी यहां बैठी हैं, मैंने सबको इकट्ठा करने का प्रयास यही था कि junior लोगों को ज्यादा यहां बिठाए, उसका कारण ये है कि मैं चाहता हूं कि ये legacy आगे बढ़े, ऐसा न हो फिर नई team आए, उनको चिंता न हो कि क्या करें यार, पुराने वाले तो चले गए या पुरान वाले सोचें कि अब आखिर क्या करें कि अब एक बार चला लें।

हमारे लिए सबसे बड़ी आवश्यकता है, हर department एक-एक छोटा काम सोचें कि हम 2015 में, अभी भी हमारे पास तीन-चार महीने है। एक चीज identify करें। हमें लगता है कि सैटेलाइट सिस्‍टम से हम इसको उपयोग कर सकते हैं और फिर उसके लिए outsource करना पड़े, कुछ नौजवानों की मदद लेनी पड़े तो हम ले लेकिन कुछ करके दिखाएं। उसी प्रकार से, जैसा ये एक पूरे देश का workshop हुआ है। राज्‍यों से भी मेरा आग्रह है कि राज्‍य भी अपने राज्‍य की इसी प्रकार की दो-तीन पीढ़ियों को इकट्ठी करके एक पूरे दिन का brainstorming करें, भारत सरकार के कोई न कोई अधिकारी वहां जाएं और वे भी अपने लिए plan workout करें।

तीसरा मुझे आवश्‍यक लगता है कि ये सब होने के बाद भी decision making करने वालों को अगर हम sensitize नहीं करेंगे। उनको अगर परिचित नहीं करवाया कि ये चीजे क्‍या है। गांव का जो प्रधान है, वहां से ले करके MLA तक जितने भी elected लोग है, उनको कभी न कभी ऐसे institutions दिखाने का कार्यक्रम करना चाहिए। उनको बताना चाहिए कि देखिए भई आपके गांव की इतनी चीजों को satellite से हम organize कर सकते हैं। उसका विश्‍वास बढ़ जाएगा और वो इन चीजों को करेगा। एक बार हम और गांव के प्रधान को बुलाएंगे, तो वहां के पटवारी को भी आप जरूर बुलवाएंगे। तो एक गांव की पांच-सात प्रमुख लोगों की team होती है, जो सरकार को represent करती है, वे sensitize हो जाएगी। हमें इस चीज को नीचे तक percolate करना है। अगर हमें नीचे तक percolate करना है, तो मैं चाहूंगा कि इसके कारण हम कर सकते हैं। हम ये मानकर चले कि Good Governance के लिए, transparency के लिए, efficiency के लिए, accountability के लिए, real time delivery के लिए, real time monitoring के लिए technology हमारे पास सबसे ताकतवर माध्‍यम होता है। अगर हम Good Governance की बात करते हैं तो उसकी शुरूआत होती है perfect planning. perfect planning के अंदर आपको इतना बढ़िया database मिले, आपको maps मिले, आपको 3 D resolutions मिले, मैं नहीं मानता हूं कि planning में कोई कमी आ सकती है। अगर perfect planning है और proper road-map है implementation का और time frame में आपका goal set किए हैं, मैं मानता हूं कि हम जो चाहे वो परिणामों को technology के माध्‍यम से हमारा समय का span कम करते हुए, qualitative improvement करके हम परिणाम ला सकते हैं।

पिछले दिनों आपने देखा होगा कि दो ऐसी घटनाएं हुईं जो हमारे यहां बहुत ज्‍यादा notice में नहीं आईं है। लेकिन उसने हजारों लोगों की जिन्‍दगी को बचाया है, लाखों करोड़ो रुपयों का नुकसान बचाया है। पिछले वर्ष, नेपाल में, पहाड़ों में बर्फ की शिलाएं गिरी और बर्फ की शिलाएं गिरने के कारण जो पानी का प्रवाह बह रहा था वो सारा chock हो गया। अब बर्फ थे तो वो जम गए और उधर पानी जो रुकता गया वो भी जमता गया। अब हमारे सामने challenge ये आई कि जब गर्मी शुरू होगी और मान लीजिए ये पहाड़ जो बर्फ के पड़े हैं, वो एकदम से टूट गए और ये पूरा flow चल पड़ा तो नीचे कुछ नहीं बचेगा। बड़े-बड़े बर्फ के पहाड़ फिसलकर के नीचे आएंगे और गांव के गांव तबाह कर देंगे। हमारे यहां से NDRF की टीम गई, सेना के लोग गए, नेपाल सरकार को मदद की और bombarding करना पड़ा। हेलीकॉप्‍टर... कठिन था इलाका, गए हमारे जवान, bombarding करना पड़ा और उन पहाड़ों को शिलाओं को, बर्फ की शिलाओं को तोड़ा और पानी का प्रवाह शुरू किया। ये सारा संभव इसलिए हुआ कि satellite के द्वारा image मिली कि ये एक नया blockage शुरू हो रहा है। दू

सरी समस्‍या आई कोसी नदी पर। नेपाल में कोसी का जो हिस्‍सा है, landslide हुआ, पानी का प्रवाह बंद हो गया। उधर पानी जमता गया। मानते हैं, कल्‍पना कर सकते हैं मिट्टी का Dam बन जाए और पानी भर जाए और जिस दिन खुलेगा तो क्‍या होगा। सबसे पहले NDRF की टीमों को यहां से बिहार भेजा और कोसी के रास्‍ते पर जितने गांव थे सारे के सारे गांव खाली करवाए। लोग गुस्‍सा भी कर रहे थे, भई पानी तो है नहीं बारिश तो हो नहीं रही, आप क्‍यों खाली करवा रहे हो? उनको बड़ी मुश्‍किल से समझाया, दबाव भी डाला, उनको हटाया और उधर की तरफ उस पानी के प्रवाह को चालू करने के लिए रास्‍ते खोजते रहे, किस प्रकार से क्‍या समस्‍या का समाधान किया जाए। सदनसीब से रास्‍ते निकले और धीरे-धीरे-धीरे पानी का बहाव शुरू हुआ और हम एक बहुत बड़े संकट से बच गए और ये भी तब संभव हुआ, satellite का regular imaginary monitoring हो रहा था उससे पता चला कि इतना बड़ा संकट आने वाला है।

पिछले दिनों आपने देखा होगा, Vizag में जो हुदहुद आया और हमारे विभाग के लोग, राठौड़ यहां बैठे हैं। इतना perfect information दिया उन्‍होंने कि cyclone कितना दूर है, कितनी intensity है, किस angle से जा रहा है और कब वो आकर के Vizag को परेशान करेगा। मैं मानता हूं इतना perfect information था और just with the help of satellite technology और उसका परिणाम हुआ कि इतना बड़ा हुदहुद Vizag में आया, कम से कम नुकसान हुआ। हम disaster management की दृष्‍टि से, early warning की दृष्‍टि से, preparedness की दृष्‍टि से मानव जाति के कल्‍याण का एक बहुत बड़ा काम कर सकते हैं और इसलिए हम इन विषयों में जितने हम sensitize होते हैं, हमारे सारे department उस दिशा में सोचने लगते हैं कि हां भाई हमारे यहां ये young team है, दो-चार लोगों को हम लगाएंगे।

मैं यह भी चाहता हूं कि ISRO भी जिस प्रकार से हमारे यहां अलग-अलग कार्यक्रम चलते हैं। हमारी space technology आखिर है क्या, हम students को तैयार करें, students को नीचे lecture देने के लिए भेजें, slideshow करें, एक अच्छी video बनाएं, लोगों को समझाएं कि भई क्या चीज है, कैसे काम आ सकती हैं, एक mass-education का कार्यक्रम ISRO ने initiate करना चाहिए, HRD ministry और बाकी ministry और state government इनकी मदद लेनी चाहिए, इनके लिए एक programming तैयार करना चाहिए और students, हमारे students को तैयार करना चाहिए, उनसे 1-2 week मांगने चाहिए कि भई आप 1 week, 2 week दीजिए, 10 स्कूल-कॉलेज में आपको जाना है, ये lecture देकर के आ जाइए, तो हमारी एक generation भी तैयार होगी इस चीजों से और जो सुनेंगे, उनको थोड़ा-थोड़ा परिचय होगा कि भई ये-ये चीजें हैं, ये करने वाला काम मुझे लगता है।

अभी 15 अगस्त को मैंने लालकिले पर से कहा था Start-up India-Stand up India, अभी जो बताया गया slide में करीब 3 हजार छोटे-मोटे private unit हैं जो हमारी इस गतिविधि के साथ जुड़े हुए हैं। मुझे लगता है कि, मैं कोई scientist तो नहीं हूं लेकिन इस क्षेत्र में विकास के लिए sky is the limit, हम इस प्रकार के हमारे जो scientific temper के जो नौजवान हैं, उनको Start-up के लिए प्रेरित कर सकते हैं क्या? हम उनको blue print दे सकते हैं क्या? कि भई ये 400 प्रकार के काम ऐसे हैं कि नौजवान आगे आए और वो कुछ उसमें innovation करे, कुछ manufacturing करे, कुछ चीजें बनाए, हमारे space science के लिए बहुत काम आने वाली हैं, या हमारे space science की utility के लिए नीचे काम आने वाली है या तो हम upgrade जाने के लिए करें या downgrade जाने के लिए करें लेकिन हम दोनों रास्ते पर कैसे काम करें हम इस पर सोच सकते हैं क्या? अगर हम इस व्यवस्था को विकसित कर सकते हैं तो Start-up India-Stand up India ये जो एक dream है उसमें innovation technology का भरपूर हम उपयोगक कर-करके और financial institution भी, वे भी इस दिशा में सोचें कि इस प्रकार से Start-up के लोग आते हैं जो science में कुछ न कुछ contribute करने वाले हैं तो उनके लिए विशेष व्यवस्था की जाए, ISRO के साथ मिलकर के की जाए, आप देखिए हमको एक बहुत बड़ा लाभ मिल सकता है।

हर एक department की चिंता था कि capacity building की, ये बात सही है कि हम स्वभाव से इन चीजों को स्वीकार करने के आदि न होने के कारण इस तरफ हमने ध्यान नहीं दिया है। हम जब recruitment करें, हमारे नए लोगों को तो recruitment करने पर इस प्रकार के विज्ञान से जुड़े हुए लोगों को ज्यादा लें, ताकि हमें capacity building के लिए सुविधा रहे। हमारे यहां पूछा जाए department में कि भई हमारे यहां department में कितने लोगों कि इस-इस चीज में रुचि है। तो फिर इनको 7 दिन, 10 दिन का एक course करवाया जा सकता है। अगर हम इस व्यवस्था का, human resource development अगर हो गया तो institutional capital building अपना आप आना शुरू हो जाएगा। सिर्फ financial resources से institutional capacity नहीं आती है, institutional capability का आधार structure नहीं होता है, building कैसा है, वो नहीं होता है, equipment कैसे होते हैं, वो नहीं होता है, financial arrangement कैसे हैं, वो नहीं होता है, उसका मूल आधार होता है, human resource कैसा है। अगर आपके पास उत्तम प्रकार का human resource होता है, तो आप में से कभी, मैं तो चाहता था कि यहां एक slide दिखानी चाहिए थी। भारत Space Science में गया और जिसका आज इतना बड़ा नाम होता है। पहला जो हमारा space का जो छोड़ने का था, उसकी पहली फोटो है तो साईकिल पर एक मजदूर उठाकर के ले जा रहा है। भारत का पहला जो space प्रयोग हुआ, वो एक गैराज के अंदर trial हुआ था। यानि उसकी गतिविधि गैराज में हुई थी और साईकिल पर उसका shifting होता था ले जाने का यानि वहां से अगर, इसका मतलब ये हुआ कि और व्यवस्थाओं की ताकत कम होती है, human resource की ताकत ज्यादा होती है, जिसने हमें आसमान की ऊंचाइयों को सैर करने के लिए ले गए, जबकि जमीन पर उसको साईकिल पर उठाकर ले जाया गया। ये दो चीजें हैं, ये जो चीजें हैं हमारे लिए इससे बड़ा कोई उदाहरण नहीं हो सकता है, इससे बड़ा कोई उदाहरण नहीं हो सकता है कि हमारे science में, हमारे भीतर की जो ताकत है, वो कितना बड़ा contribution कर सकती है, ये संभावनाएं हमारे पास पड़ी हुई हैं।

अच्छे planning के लिए, समय सीमा में implementation के लिए, हम इसका भरपूर उपयोग करें और मुझे विश्वास है कि आज पूरे दिनभर ये जो exercise हुई है, करीब 1600 अधिकारी और बहुत महत्वपूर्ण दायित्व संभालने वाले अधिकारियों के ये मंथन आने वाले दिनों में ऐसा न हो कि space technology in common man के बीच space रह जाए और इसलिए हमारा काम है common man और space technology के बीच में space नहीं रहना चाहिए। ये सपना पूरा करें, बहुत-बहुत शुभकामनाएं। धन्यवाद।

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देवियो और सज्जनों,

आज का दिन आप सभी ने मेरे लिए बहुत यादगार बना दिया है। मैं अभिभूत हूं। कृतज्ञ हूं। चैरेवेति-चैरेवेति के मंत्र का जाप करते हुए इस राजनीतिक यात्रा में अनेक उतार-चढ़ाव देखते हुए एक दिन यह पड़ाव भी आएगा। मैंने कभी सोचा नहीं था। निर्वाचित प्रधानमंत्री के रूप में निरंतर सबसे लंबी अवधि तक सेवा करने का अवसर, इसे मैं अपना परम सौभाग्य मानता हूं। आपने इस अवसर पर मुझे सम्मानित किया। इतना मान दिया। इसके लिए मैं आप सभी का बहुत-बहुत आभारी हूं।

साथियों,

इतने लंबे समय तक मां भारती की सेवा का सौभाग्य मिलना, ये ईश्वर की विशेष कृपा से ही संभव हो सकता है। और मेरे लिए तो जनता-जनार्दन ही ईश्वर का रूप है। और इसलिए मैंने इस सेवा कार्य को हमेशा एक साधना के रूप में ही देखा है। और ये साधना भी एकाकी नहीं रही है। ये एक सामूहिक यज्ञ है, जिसमें आप सब ने और अनेकों साथियों ने कर्त्तव्य भाव से अपना योदगान दिया है। मैं आज इस यात्रा के ऐसे सभी साथियों के प्रति भी अपना आभार प्रकट करता हूं।

साथियों,

इस अवसर पर एनडीए परिवार के सदस्यों ने एक resolution भी पेश किया है। ये आप सबकी आत्मीयता और उदारता है। क्योंकि, मैं इस यात्रा को अपनी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं मानता हूँ। ये हर दृष्टिकोण से, हम सबकी सामूहिक उपलब्धि है। ये NDA के हर घटक दल की एक समान उपलब्धि है। इसलिए, मैं इस प्रस्ताव को आप सभी को, भाजपा समेत हमारे NDA परिवार के सभी कार्यकर्ताओं को समर्पित करता हूँ।

साथियों,

भारत की जनता का नीर-क्षीर विवेक हमेशा अद्भुत रहा है। देश की जनता ने राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक स्थिरता का महत्व समझा है।
ये जनता-जनार्दन की परिपक्वता ही है...कि उसने लंबे समय तक मुझे इस तरह जनता की सेवा का अवसर दिया। 2014 के पहले के कई दशक...बहुत अस्थिरता और उथल-पुथल से भरे हुए थे। इसका देश को बहुत नुकसान भी उठाना पड़ा। लेकिन अब देश की जनता...एक स्थिर सरकार का काम भी देख रही है और उसकी निर्णायक क्षमताओं की प्रशंसक भी है। मैं आज देश की महान जनता को भी नमन करता हूं...जनता-जनार्दन का आभार व्यक्त करता हूं।

साथियों,

साल 2014 में जब NDA की जीत हुई थी... तब मैंने कहा था कि आज देश के सामान्य मानवी में एक नई आशा का उदय हुआ है। इस आशा का, इस उम्मीद का संरक्षण...हम सभी का बहुत बड़ा दायित्व था। देश के लोगों ने कांग्रेस के विश्वासघात के बाद...अपना भरोसा हमें सौपा था। मुझे आज संतोष है...गर्व है...की एनडीए परिवार के तौर पर हमने देश के विश्वास को हमेशा और मजबूत किया है। 2014 में आशा का उदय होता सूरज..आज नए आत्मविश्वास के प्रकाशपुंज में बदल गया है। भारत के लोगों ने पहली बार ये देखा है कि जब सही नीयत से सरकार चलती है...तो तेज गति से विकास भी होता है। एनडीए सरकार के इन 12 वर्षों में 25 करोड़ से ज्यादा लोगों का गरीबी से बाहर निकलना...ये दिखाता है कि हमारी नीतियां सही हैं, हमारी दिशा सही है। ये सफलता आज देश के हर उस व्यक्ति को एक भरोसा देती है... कि एक दिन उसका संघर्ष भी खत्म होगा...एक दिन उसके सपने भी पूरे होंगे। और मैं मानता हूं...कल जो गरीब था...आज जो नियो मिडिल क्लास बना है...उसे अब हमें पीछे नहीं होने देना है। इसलिए सरकार के नाते जनप्रतिनिधि के नाते...हमें दिन रात काम करना है, परिश्रम की पराकाष्ठा करनी है। इस संकल्प के साथ...कि 140 करोड़ का ये देश हमसे जो उम्मीदें लगाए बैठा है...वो जरूर पूरी हों। भारत का युवा...भारत की नारीशक्ति...भारत का मध्यम वर्ग...भारत के किसान...सबकी आकांक्षाएं..उनकी Aspirations हमें पूरी करनी हैं। आज देश का हर नागरिक विकसित भारत के सपने से भरा हुआ है। विकसित भारत का सपना अब किसी एक व्यक्ति का नहीं रहा। किसी सरकार का नहीं रहा। किसी दल का नहीं रहा। देश के जन-जन का सपना बन चुका है। संकल्प बन चुका है। और इस सपने की पूर्ति के लिए हमें अपना हर पल समर्पित करना है।

साथियों,

NDA के 12 वर्षों की एक बड़ी सफलता ये भी है कि देश काँग्रेस के कुचक्र से आज़ाद हुआ है। काँग्रेस ने देश को लाचारगी, बेचारगी और हीनभावना के गर्त में गिरा दिया था। देश को यही एहसास कराया जाता था कि भारत में विकास धीरे-धीरे ही होता है...भारत में तेज विकास संभव ही नहीं है। और बड़ी ही चतुराई से, इस धीमी विकास को एक नाम दिया था- हिंदू ग्रोथ रेट! यानी, कार्यशैली काँग्रेस की...दायित्व कांग्रेस का, विफलता कांग्रेस की...लेकिन, कलंक देश की बड़ी हिंदू आबादी के नाम लगाया गया। जबकि, असल में इस कुसंस्कृति का नाम होना चाहिए था- कांग्रेस ग्रोथ रेट! इस कांग्रेस ग्रोथ रेट में ना गवर्नेंस थी...ना नीति...ना नीयत और ना ही निर्णय!

साथियों,

जब पहली बार अटल जी के नेतृत्व में एनडीए सरकार आई... तब जाकर हमें एक झलक दिखी कि विकास में गति कैसे आती है... लेकिन, दुर्भाग्य से 2004 में देश फिर से अस्थिरता के बवंडर में...और कांग्रेस के शिकंजे में फंस गया। विकास तो दूर की बात है...देश को कांग्रेस ने एक के बाद एक हजारों करोड़ रुपए के घोटालों में घसीट दिया।

साथियों,

देश का भाग्य फिर तब बदला... जब 2014 में NDA की सरकार बनी। देश ने देखा कि...जब नीयत, नीति और निर्णय तीनों एक साथ काम करते हैं...तो विकास की गति कैसी होती है। देश ने देखा कि जो काम दशकों में होते थे, वो काम महीनों में होने लगे हैं। 2014 में 74 एयरपोर्ट थे... 2026 में 160 से अधिक एयरपोर्ट तक...2014 में एक हजार किलोमीटर एक्सप्रेसवे से...2026 में छह हजार सात सौ किलोमीटर एक्सप्रेसवे तक...2014 में सिर्फ 5 शहरों में मेट्रो से... 2026 में 20 से ज्यादा शहरों में मेट्रो तक। 2014 में 700 करोड़ रुपये डिफेंस एक्सपोर्ट से...2026 में 23 हजार करोड़ रुपये के डिफेंस एक्सपोर्ट तक...देश ने बहुत लंबी यात्रा तय की है।

साथियों,

2014 में देश में केवल 25 करोड़ इंटरनेट यूज़र थे। आज 100 करोड़ से अधिक यूज़र इंटरनेट से जुड़े हैं। 2014 में डिजिटल पेमेंट्स ना के बराबर थे। आज भारत डिजिटल ट्रांजैक्शन में नंबर 1 देश है। 2014 में भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर मोबाइल बाहर से मंगाता था। आज भारत 33 करोड़ से अधिक मोबाइल हैंडसेट खुद बनाता है। 2014 में सोलर क्षमता केवल ढाई गीगावॉट थी। आज यह 150 गीगावॉट से अधिक है। 2014 में एथेनॉल ब्लेंडिंग केवल डेढ़ प्रतिशत थी। आज यह 20 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। 2014 में देश में एक भी सेमीकंडक्टर यूनिट नहीं थी। आज देश में बन रही 10 से ज्यादा सेमीकंडक्टर यूनिट्स...भारत को आधुनिकता की तरफ ले जा रही हैं।

साथियों,

हमने देश की जरूरतों को अपनी नीतियों और निर्णयों का आधार बनाया। नई सोच से नए फैसले लिए। हमने युवाओं के लिए skill development ministry बनाई। सहकारी क्षेत्र को मजबूती देने के लिए अलग cooperative ministry बनाई। हमारे मछुवारे भाई-बहनों के लिए अलग फिशरीज मिनिस्ट्री बनाई... हमारा फोकस क्लियर था- विकास की इस दौड़ में कोई पीछे ना छूटे..।

साथियों,

हमने दिव्यांगजनों के लिए कानून बनाया। आदिवासियों के लिए जनमन जैसी योजनाएं शुरू कीं। पशुपालकों और मछुवारों को पहले किसान क्रेडिट कार्ड का लाभ नहीं मिलता था। हमने उन्हें भी इस सुविधा से जोड़ा। और इतना ही नहीं....हमारी सरकार ने रेहड़ी-पटरी वालों को भी स्वनिधि क्रेडिट कार्ड की सुविधा दी।

साथियों,

सवाल यह है कि अगर 12 साल में इतना कुछ हो सकता है…तो फिर दशकों तक क्यों नहीं हुआ? ये कांग्रेस ग्रोथ रेट और NDA ग्रोथ रेट का अंतर है। एक व्यवस्था लोगों को इंतज़ार कराती थी। आज की व्यवस्था परिणाम दिखाती है। एक व्यवस्था काम अटकाती-भटकाती थी। आज की व्यवस्था कहती है… काम अभी होगा...समय पर होगा, और बड़े पैमाने पर होगा।

और इसलिए साथियों,

2014 से 2026 की कहानी केवल आंकड़ों की कहानी नहीं है। यह उस भारत की कहानी है जिसने पहली बार अपनी पूरी क्षमता के साथ दौड़ना शुरू किया है। वो भारत...जो अब बड़े लक्ष्य तय कर रहा है... और उन लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए जी-तोड़ मेहनत कर रहा है।


साथियों,

NDA के 12 वर्षों की उपलब्धियां की एक और विशेषता है। हमें ये उपलब्धियां... वैश्विक अस्थिरता और अशांति के दौर में हासिल हुई हैं। एक स्थिर सरकार होने का लाभ क्या होता है ये बार-बार इस दौर ने साबित किया है। कोरोना के समय को हम कभी नहीं भूल सकते... जब हर तरफ हाहाकार मचा था। लेकिन भारत उस हालात का मुकाबला करते हुए भी सफलता से आगे बढ़ा।

साथियों,
आज दुनिया के बड़े-बड़े देशों की अर्थव्यवस्थाएं संघर्ष कर रही हैं। तब भी, 2025-26 में भारत ने “सेवन प्वाइंट सेवन परसेंट” की ग्रोथ रेट हासिल की है। और पिछला क्वार्टर तो..जो 31 मार्च को खत्म हुआ, उसमें भी भारत की ग्रोथ “सेवन प्वाइंट एट परसेंट” रही है। ये सफलता इतनी आसान नहीं है दोस्तो। हम फ्रैजाइल फाइव के कठघरे के बाहर निकलकर...आज दुनिया की तेजी से आगे बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बन चुके हैं।

साथियों,

कल के विकसित भारत की गारंटी है- आज का आकांक्षी भारत! आकांक्षी भारत के गर्भ में विकसित भारत पल रहा है। आज के भारत की आकांक्षाएँ बड़ी हैं, सपने बड़े हैं। इसीलिए, उसके संकल्प और लक्ष्य भी उतने ही बड़े हैं। देश की इन आकांक्षाओं का वाहक हमारा मिडिल क्लास है...नियो मिडिल क्लास है। इसीलिए, हमारी सरकार मध्यम वर्ग की aspirations को पूरा करने में लगी है। मिडिल क्लास की ease of living… उसकी quality of life... उसके लिए नए अवसर, और नई संभावनाएं...हमने हर फ्रंट पर काम किया है।

साथियों,

2014 से पहले, मिडिल क्लास कानून की उलझनों का सबसे बड़ा शिकार था। जटिल टैक्स सिस्टम...आमदनी के सीमित स्रोत और टैक्स का बड़ा बोझ... खराब गवर्नेंस की मार....ये सब सामान्य मानवी के लिए डेली लाइफ की चुनौतियाँ होती थीं। लेकिन, हमने मिडिल क्लास की परेशानियों को समझा...हमने मिडिल क्लास की आकांक्षाओं को समझा। और इसलिए...आज 12 लाख रुपए तक की आमदनी पूरी तरह से टैक्स फ्री है। आज देश में सरल और फेसलेस टैक्स सिस्टम है। अच्छे इनफ्रास्ट्रक्चर से उनका जीवन आसान हुआ है।

साथियों,

बीते 12 वर्षों में मिडिल क्लास परिवार के बच्चों के लिए हर क्षेत्र में नए अवसर बने हैं। मध्यम वर्ग के घर का सपना पूरा हो सके, सरकार इसमें भी मदद कर रही है। घर में इलाज के खर्च का बोझ कम हो... इसके लिए आयुष्मान भारत योजना में, बिना आय सीमा के, बुजुर्गों को भी शामिल किया गया है। GST reform का भी बहुत बड़ा लाभ देश के मध्यम वर्ग को हुआ है। उसके लिए हेल्थ insurance सस्ता हुआ है। उसके सपनों से जुड़ी चीजें सस्ती हुई हैं। इन प्रयासों का परिणाम है कि आज देश का मिडिल क्लास अनिश्चितताओं से मुक्त हो रहा है। वो भरपूर आत्मविश्वास के साथ देश की विकास यात्रा को गति दे रहा है।

साथियों,

हमारे लिए दल से हमेशा, अगर बड़ा कुछ है तो हमारा देश है। दल से बड़ा देश है। और जब नेशन फर्स्ट, देश प्रथम की भावना से काम होता है...तो कोई भी निर्णय कठिन नहीं होता। इसलिए, ऐसे फैसले जिन्हें पहले असंभव समझा जाता था...जो देश के सुरक्षित भविष्य के लिए अनिवार्य थे...हमने बहुत ही सधे हुए तरीके से उन फैसलों को भी लिया। पहले सरकारें आर्टिकल 370 की बात तक करने से डरती थीं। हमने उसे खत्म करके पूरे देश में एक संविधान लागू किया। पहले नॉर्थ ईस्ट से बम-बंदूक और ब्लॉकेड जाने का नाम नहीं लेते थे। हमने नॉर्थ ईस्ट में शांति भी लौटाई, और स्थिरता भी लेकर आए। पहले भारत आतंकी हमलों के बाद चुपचाप दर्द सहता रहता था। हमने आतंकवादियों पर सर्जिकल स्ट्राइक की...एयर स्ट्राइक की। ऑपरेशन सिंदूर में दुनिया ने भारत का सामर्थ्य देखा।

साथियों,

पहले ये मान लिया गया था कि नक्सलवाद-माओवाद अब कभी नहीं खत्म होने वाले। कभी खत्म हो ही नहीं सकते। हमने देश को नक्सलवाद-माओवाद के उस जहर से मुक्त करके दिखाया है।

साथियों,

महिलाओं को आरक्षण...तीन तलाक के खिलाफ कानून...CAA का कानून...भारतीय न्याय संहिता...सैनिकों को वन रैंक वन पेंशन...NDA सरकार राष्ट्रहित में कोई भी काम करने से पीछे नहीं रही। और हम सभी को इस बात पर गर्व है। मैं आज देश को फिर आश्वस्त करूंगा...देशहित के बड़े फैसलों का ये सिलसिला और भी तेज होगा। तेजज गति से आगे बढ़ेगा।

साथियों,

बीते 12 वर्षों में देश ने जो कुछ हासिल किया, वो दुनिया देख रही है। लेकिन अब हमें अपनी दृष्टि आगे की ओर रखनी है। हमें 2047 के लक्ष्य को देखते हुए, उस लक्ष्य को पूरा करने के लिए अपनी स्पीड को और बढ़ानी होगी। हमारा बेंचमार्क अब ये होना चाहिए...कि बीते 12 वर्षों में जो स्पीड और स्केल हमारी रही है...उसको हम और अधिक बड़ा और व्यापक कैसे बना सकते हैं। आज ग्लोबल ग्रोथ में भारत की हिस्सेदारी लगातार बढ़ रही है। इसलिए, भारत को अब ग्लोबल पैरामीटर्स, ग्लोबल कंपीटिशन और ग्लोबल परस्पेक्टिव देखना है। दुनिया भारत से सोल्यूशन चाहती है...दुनिया, भारत में वैश्विक सप्लाई चेन का एक भरोसेमंद पार्टनर देख रही है। और हमें दुनिया की इन अपेक्षाओं पर खरा उतरकर दिखाना है। हमें ये समय गंवाना नहीं है। और मैं बार-बार कहता हूं, यही समय है-सही समय है।

साथियों,

हमें फ्यूचरिस्टिक टेक्नॉलॉजी में खुद को श्रेष्ठ रखना है। हमें सिर्फ दुनिया जैसा नहीं करना, हमें दुनिया से एक कदम आगे रहना है। अब जैसे एनर्जी सिक्योरिटी है...बीते 12 वर्षों में हमने ऊर्जा में आत्मनिर्भरता के लिए अभूतपूर्व काम किया। मैंने लाल किले से समुद्र मंथन अभियान की घोषणा की थी। ये बहुत ही महत्वकांक्षी मिशन है। बीते दिनों में ऑयल एंड गैस के एक्सप्लोरेशन को लेकर काफी पॉजिटिव खबरें आ रही हैं। यानि आने वाला समय अनेक संभावनाओं से भरा हुआ है। और हमें हर संभावना का पूरा फायदा उठाना है।

साथियों,

अब हमें 500 गीगावॉट, रीन्युएबल एनर्जी के टारगेट को जल्द से जल्द पूरा करना है। सोलर एनर्जी को लेकर तो काम तेज़ी से चल रहा है...लेकिन अब हमें...न्यूक्लियर एनर्जी के लक्ष्यों को भी तेज़ी से हासिल करना है। अभी हमने दुनिया को दिखाया है...कि भारत फास्ट ब्रीडर रिएक्टर टेक्नॉलॉजी में कितना आगे पहुंच गया है। ये टेक्नॉलॉजी, हमें न्यूक्लियर एनर्जी में आत्मनिर्भरता की तरफ ले जाएगी। इसी तरह...ग्रीन हाइड्रोजन और ग्रीन अमोनिया के मामले में, भारत बहुत तेज़ी से काम कर रहा है। आने वाले समय में ये टेक्नॉलॉजी...भारत को ग्लोबल ग्रीन एनर्जी मैप में सबसे प्रमुख नाम बना पाएगी। और ये नाम बनना पक्का है।

साथियों,

आज बड़े-बड़े एक्सपर्ट्स का अनुभव है...कि जिन देशों ने मैन्युफेक्चरिंग के पूरे इकोसिस्टम पर 80-90 के दशक में काम किया...उन्हें उसका फायदा, इस सदी में मिलना शुरु हुआ। भारत ने 10-12 वर्ष पहले जिस इकोसिस्टम पर काम करना शुरु किया...उसका लाभ अब देश को मिलना शुरू हो गया है। 2014-15-16 के कालखंड में जो बात नींव डाली गई थी, उसके फल अब दिखाई देने लगे हैं। भारत तेजी से दुनिया का मैन्युफेक्चरिंग पावरहाउस बनने की ओर आगे बढ़ रहा है।

साथियों,

एनर्जी, मिनरल्स, चिप, बैटरी स्टोरेज, स्पेस...ड्रोन...डेटा सेंटर्स, क्वांटम कंप्यूटिंग, आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस......ऐसे हर सेक्टर, हर टेक्नॉलॉजी एक दूसरे से जुड़ी हुई है...य़े एक दूसरे की पूरक हैं। भारत इनके लिए विदेशों पर निर्भर नहीं रह सकता। क्योंकि ये भारत की आर्थिक और स्ट्रीटिजिक, हर प्रकार की सिक्योरिटी से जुड़े विषय हैं। तभी भारत, सेमीकंडक्टर इकोसिट्म पर इतना फोकस कर रहा है। तभी, क्रिटिकल मिनरल्स को लेकर मिशन मोड पर काम चल रहा है...

साथियों,

शिपिंग सेक्टर में भारत आत्मनिर्भरता के नए लक्ष्यों के साथ आगे बढ़ा है। हम एक ऐसे फ्यूचर की तरफ बढ़ रहे हैं...जहां हम मेड इन इंडिया शिप्स पर ट्रेड करेंगे...और कंटेनर भी मेड इन इंडिया होंगे...शिप मैंटेनेस और रिपेयर से लेकर स्क्रैपिंग तक की सर्विसेज भी भारत देगा। यही विजन हमारा एविएशन सेक्टर के लिए है। आज हम मेड इन इंडिया ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट बना रहे हैं...वो दिन दूर नहीं...जब भारत मेड इन इंडिया सिविल एयरक्राफ्ट भी बनाएगा। देशवासी मेड इन इंडिया विमान में ही यात्रा करेंगे। वो दिन में देख रहा हूं दोस्तो।

साथियों,

ये सदी, टेक्नॉलॉजी की है, डेटा की है। आज विश्व के सबसे बड़े और आधुनिक डेटा सेंटर्स में एक सेंटर्स भारत में बन रहे हैं। यही भारत को ग्लोबल सप्लाई और वैल्यू चेन का मजबूत पिलर बनाएगी। हमने UPI के माध्यम से दुनिया को दिखाया है...कि भारत कम से कम और कम से कम समय में टेक्नॉलॉजी का इतना विस्तार कर सकता है...हमने दिखाया है कि हमारे युवाओं का सामर्थ्य क्या है। अब AI, Deep Tech और Advanced Technologies में हमारे युवा नया दमखम दिखाने के इरादे से आगे बढ़ रहे हैं।

साथियों,

आने वाले समय में दो और सेक्टर्स में भारत का सामर्थ्य पूरी दुनिया देखेगी। ये सेक्टर हैं, टूरिज्म और स्पोर्ट्स। ये दोनों भारत की इकॉनॉमी के भी मजबूत पिलर बनेंगे। विशेष रूप से कॉन्फ्रेंस, एग्जिबिशन और कॉन्सर्ट के मामले में भारत, एक ग्लोबल डेस्टिनेशन बनने के लिए अब पूरी तरह सज रहा है। आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर से इस सेक्टर को बहुत पुश मिलेगा। और स्पोर्ट्स में तो भारत के युवा कमाल का प्रदर्शन कर रहे हैं। और हर दिन, उनकी परफॉर्मेंस निखरती ही जा रही हैं। भारत, दुनिया की biggest sports लीग की धरती बनता जा रहा है। आने वाले सालों में हमारी ये ख्याति और बुलंद होगी। ओलंपिक्स के लिए हमारी तैयारियां भी...भारत की एस्पिरेशन का ही प्रतिबिंब है। हमें छोटा नहीं सोचना है...हमें लक्ष्य ऊंचे रखने हैं...और उन्हें प्राप्त करने के लिए पूरी ताकत लगा देनी है।

साथियों,

आज भारत रिफॉर्म एकेसप्रेस पर सवार होकर तेजी से आगे बढ़ रहा है। हमारे लिए Reform कोई Compulsion नहीं है। Reform हमारा Conviction है। और देश भी निरंतर रिफॉर्म्स को सपोर्ट कर रहा है।

साथियों,

देशवासियों की सहभागिता भी हमारी बहुत बड़ी शक्ति है। ये 12 वर्ष सरकार और समाज की सहभागिता का उत्सव मनाने वाले रहे हैं। बीते 12 वर्षों में मैंने जो भी सहयोग देश से मांगा...देशवासियों ने दिल खोलकर के साथ दिया है। मैंने स्वच्छता का आग्रह किया...तो पूरा देश निकल पड़ा। मैंने देश से डिजिटल पेमेंट अपनाने का आवाहन किया। तो भारत रियल टाइम ट्रांजैक्शन में दुनिया में सबसे आगे निकल गया। मैंने कोरोना महामारी के दौरान एकजुटता का...संयम का आग्रह किया... तो देश ने एकजुट होकर उस महामारी का सामना किया। जनता ने कभी हमें निराश नहीं किया।

साथियों,

आनेवाले समय में भी इसी जन-विश्वास और जनभागीदारी के साथ हमें आगे बढ़ना है। सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास ये हमारा मंत्र रहा है। सबका प्रयास ही विकसित भारत के निर्माण की असली ऊर्जा है। हमें हर राज्य, हर शहर, हर गांव को जोड़ना है। अब समय आ गया है कि राज्यों के बीच नई प्रकार की तंदुरुस्त स्पर्धा, स्वस्थ स्पर्धा हो। स्पर्धा इस बात की हो कि कौन सा राज्य सबसे तेज़ी से ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी बनता है। स्पर्धा इस बात की हो कि कौन सा शहर इनोवेशन का सबसे बड़ा केंद्र बनता है। स्पर्धा इस बात की हो कि कौन सा क्षेत्र रोजगार सृजन में सबसे आगे निकलता है। भारत की प्रगति... राज्यों की ऐसी प्रगति से ही होने वाली है। आइए, अगले दशक को उपलब्धियों के साथ-साथ, श्रेष्ठता का भी दशक बनाएं। आइए, राजनीति की स्पर्धा से ऊपर उठकर विकास की स्पर्धा को राष्ट्रीय संस्कार बनाएं। 12 वर्षों की यात्रा उपलब्धियों की रही है। आने वाले वर्ष और भी नई सिद्धियों के होंगे...और भी बड़ी सिद्धियों के होंगे। इसी विश्वास के साथ, आप सभी का मैं फिर से अंत:करणपूर्वक आपके साथ सहयोग, समर्थन के लिए आभार व्यक्त करता हूं। मैं सिर झुका करके देश के कोटि-कोटि नागरिकों को नमन करता हूं। उनके आशीर्वाद ने हमें ऊर्जा दी है। शक्ति दी है। प्रेरणा दी है। प्रोत्साहन दिया है। ये जनता-जनार्दन के चरणों में सिर झुकाकर प्रणाम करते हुए आइए, एक नए विश्वास के साथ, हर संकल्प को पूरा करने के सामर्थ्य को जुटाते हुए हम चल पड़ें। देशवासियों के सपनों को हमारे संकल्प बनाएं। हमारा पल-पल देशवासियों के संकल्पों को साकार करने की यात्रा का अहम पड़ाव बनता चले। इसी भावना के साथ देशवासियों के ऊपर पूरा भरोसा करते हुए आओ निकल पड़ें। बहुत-बहुत धन्यवाद!