प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने तमिलनाडु में मरक्कनम- पुडुचेरी (46 किलोमीटर) 4-लेन राजमार्ग के निर्माण को मंज़ूरी दे दी है। इस परियोजना का विकास हाइब्रिड एन्युइटी मोड (एचएएम) के तहत किया जाएगा, जिसकी कुल पूंजीगत लागत 2,157 करोड़ रुपये होगी।

वर्तमान में, चेन्नई, पुडुचेरी, विलुप्पुरम और नागपट्टिनम के बीच संपर्क मौजूदा 2-लेन राष्ट्रीय राजमार्ग 332ए (एनएच-332ए) और संबंधित राज्य राजमार्गों पर निर्भर है, जहां यातायात की अधिकता के कारण, विशेष रूप से घनी आबादी वाले क्षेत्रों और गलियारे वाले प्रमुख कस्बों में, काफी भीड़भाड़ रहती है। इन चुनौतियों का समाधान करने के लिए, यह परियोजना मरक्कनम से पुडुचेरी तक लगभग 46 किलोमीटर लंबे एनएच-332ए को 4-लेन में अपग्रेड करेगी। इससे मौजूदा गलियारे पर भीड़भाड़ कम होगी, सुरक्षा में सुधार होगा और चेन्नई, पुडुचेरी, विलुप्पुरम और नागपट्टिनम जैसे तेजी से बढ़ते शहरों की आवागमन संबंधी जरूरतें पूरी होंगी।

यह परियोजना दो प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्गों (एनएच-32, एनएच-332) और दो राज्य राजमार्गों (एसएच-136, एसएच-203) को जोड़ती है, जिससे तमिलनाडु के प्रमुख आर्थिक, सामाजिक और लॉजिस्टिक केंद्रों तक निर्बाध संपर्क सुनिश्चित होता है। इसके अतिरिक्त, उन्नत गलियारा दो रेलवे स्टेशनों (पुडुचेरी, चिन्नाबाबूसमुद्रम), दो हवाई अड्डों (चेन्नई, पुडुचेरी) और एक छोटे बंदरगाह (कुड्डालोर) से जुड़कर मल्‍टी-मॉडल इंटीग्रेशन को बढ़ाएगा, जिससे पूरे क्षेत्र में माल ढुलाई और यात्रियों की शीघ्र आवाजाही संभव होगी।

परियोजना के पूरा होने पर, मरक्कनम-पुडुचेरी खंड क्षेत्रीय आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा, प्रमुख धार्मिक और आर्थिक केंद्रों के बीच संपर्क को मजबूत करेगा, पुडुचेरी में पर्यटन को बढ़ावा देगा और व्यापार एवं औद्योगिक विकास के नए रास्ते खोलेगा। यह परियोजना लगभग 8 लाख मानव-दिवस प्रत्यक्ष और 10 लाख मानव-दिवस अप्रत्यक्ष रोजगार भी पैदा करेगी, और आसपास के क्षेत्रों में विकास, प्रगति और समृद्धि के नए रास्ते खोलेगी।

गलियारे का मानचित्र

परिशिष्ट - I: परियोजना विवरण

विशेषता

विवरण

परियोजना का नाम

4-लेन मराक्कनम - पुडुचेरी खंड (एनएच 332ए)

गलियारा

चेन्नई-पुडुचेरी-नागापट्टिनम-तूतीकोरिन-कन्याकुमारी आर्थिक गलियारा (ईस्ट कोस्ट रोड - ईसीआर)

लंबाई (किमी)

46.047

कुल सिविल लागत (करोड़ रुपये में)

1,118

भूमि अधिग्रहण लागत (करोड़ रुपये में)

442

कुल पूंजीगत लागत (करोड़ रुपये में)

2,157

तरीका

हाइब्रिड एन्युइटी मोड (एचएएम)

बाईपास

पुडुचेरी बाईपास (ग्रीनफील्ड एक्सेस नियंत्रित) – 34.7 किमी

जुड़ी हुई प्रमुख सड़कें

राष्ट्रीय राजमार्ग – एनएच-32, एनएच -332

राज्य राजमार्ग – एसएच-136, एसएच -203

जुड़े हुए आर्थिक/सामाजिक/ परिवहन नोड

हवाई अड्डे: चेन्नईपुडुचेरी

रेलवे स्टेशन: पुडुचेरीचिन्नाबाबूसमुद्रम

छोटा बंदरगाह: कुड्डालोर

आर्थिक नोड्स: मेगा फूड पार्कफार्मा क्लस्टरफिशिंग क्लस्टर

सामाजिक नोड: अरुलमिगु मनाकुला मंदिरपैराडाइज बीच

जुड़े हुए प्रमुख शहर/कस्बे

चेन्नईमरक्कनमपुडुचेरी

रोजगार सृजन की संभावना

लाख मानव दिवस (प्रत्यक्ष) और 10 लाख मानव दिवस (अप्रत्यक्ष)

वित्तीय वर्ष 2025 में वार्षिक औसत दैनिक यातायात (एएडीटी)

अनुमानित 17,800 यात्री कार इकाइयां (पीसीयू)

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प्रधानमंत्री ने पश्चिम एशिया में वर्तमान संघर्ष के संदर्भ में स्थिति और राहत उपायों की समीक्षा के लिए CCS बैठक की अध्यक्षता की
March 22, 2026
आवश्यक वस्तुओं की लगातार उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए अल्पकालिक, मध्यकालिक और दीर्घकालिक उपायों पर विस्तार से चर्चा की गई
किसानों के लिए उर्वरकों के वैकल्पिक स्रोतों पर भी चर्चा की गई ताकि भविष्य में इनकी लगातार उपलब्धता सुनिश्चित हो सके
रसायन, फार्मास्यूटिकल्स, पेट्रोकेमिकल्स और अन्य औद्योगिक क्षेत्रों के लिए आवश्यक आयात के स्रोतों में विविधता लाने के लिए कई उपायों पर चर्चा की गई
भारतीय सामानों को बढ़ावा देने के लिए निकट भविष्य में नए निर्यात स्थलों को विकसित किया जाएगा
प्रधानमंत्री ने निर्देश दिया कि सरकार के सभी अंग मिलकर काम करें ताकि नागरिकों को कम से कम असुविधा हो
मंत्रियों और सचिवों का समूह बनाया जाए जो 'संपूर्ण सरकार' दृष्टिकोण के साथ पूरी लगन से काम करे: प्रधानमंत्री का निर्देश
क्षेत्रीय समूह सभी हितधारकों के परामर्श से काम करें: प्रधानमंत्री
प्रधानमंत्री ने राज्य सरकारों के साथ उचित समन्वय सुनिश्चित करने को कहा ताकि ज़रूरी वस्तुओं की कालाबाज़ारी और जमाखोरी न हो

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने पश्चिम एशिया में वर्तमान संघर्ष के संदर्भ में स्थिति और चल रहे तथा प्रस्तावित राहत उपायों की समीक्षा के लिए मंत्रिमंडल की सुरक्षा मामलों कीसमिति (सीसीएस) की बैठक की अध्यक्षता की।

कैबिनेट सचिव ने वैश्विक स्थिति और भारत सरकार के सभी संबंधित मंत्रालयों/विभागों द्वारा अब तक उठाए गए तथा नियोजित राहत उपायों पर विस्तृत प्रस्तुति दी। कृषि, उर्वरक, खाद्य सुरक्षा, पेट्रोलियम, बिजली, एमएसएमई, निर्यातक, शिपिंग, व्यापार, वित्त, आपूर्ति श्रृंखला और अन्य सभी प्रभावित क्षेत्रों में अपेक्षित प्रभाव और उससे निपटने के लिए उठाए गए उपायों पर चर्चा की गई। देश में समग्र वृहद-आर्थिक परिदृश्य और आगे किए जाने वाले उपायों पर भी चर्चा की गई।

पश्चिम एशिया में वर्तमान संघर्ष का वैश्विक अर्थव्यवस्था पर महत्वपूर्ण अल्पकालिक, मध्यकालिक और दीर्घकालिक प्रभाव पड़ेगा। बैठक में भारत पर इसके प्रभाव का आकलन किया गया और तत्काल तथा दीर्घकालिक, दोनों तरह के जवाबी उपायों पर चर्चा की गई।

भोजन, ऊर्जा और ईंधन सुरक्षा सहित आम आदमी के लिए आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता का विस्तृत आकलन किया गया। आवश्यक वस्तुओं की लगातार उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए अल्पकालिक, मध्यमकालिक और दीर्घकालिक उपायों पर विस्तार से चर्चा की गई। किसानों पर पड़ने वाले असर और खरीफ मौसम के लिए उनकी खाद की ज़रूरतों का आकलन किया गया। पिछले कुछ वर्षों में खाद का पर्याप्त भंडार बनाए रखने के लिए जो कदम उठाए गए हैं, उनसे समय पर खाद की उपलब्धता और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित होगी। भविष्य में खाद की लगातार उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए खाद के वैकल्पिक स्रोतों पर भी चर्चा की गई।

यह भी तय किया गया कि सभी बिजली संयंत्रों में कोयले का पर्याप्त भंडार होने से भारत में बिजली की कोई कमी नहीं होगी।

केमिकल्स, फार्मास्यूटिकल्स, पेट्रोकेमिकल्स और अन्य औद्योगिक क्षेत्रों के लिए ज़रूरी आयात के स्रोतों में विविधता लाने के लिए कई उपायों पर चर्चा की गई। इसी तरह, भारतीय सामानों को बढ़ावा देने के लिए निकट भविष्य में निर्यात के नए गंतव्य विकसित किए जाएंगे।

विभिन्न मंत्रालयों द्वारा प्रस्तावित कई उपायों को सभी हितधारकों से परामर्श के बाद आने वाले दिनों में तैयार और लागू किया जाएगा।

प्रधानमंत्री ने निर्देश दिया कि मंत्रियों और सचिवों का समूह बनाया जाए, जो 'संपूर्ण सरकार' दृष्टिकोण के तहत पूरी लगन से काम करे। प्रधानमंत्री ने यह भी निर्देश दिया कि क्षेत्रीय समूह सभी हितधारकों के साथ परामर्श से काम करें।

प्रधानमंत्री ने कहा कि यह संघर्ष लगातार बदलती हुई स्थिति है और इससे पूरी दुनिया किसी न किसी रूप में प्रभावित है। ऐसी स्थिति में, नागरिकों को इस संघर्ष के प्रभाव से बचाने के लिए हर संभव प्रयास किए जाने चाहिए। प्रधानमंत्री ने निर्देश दिया कि सरकार के सभी अंग मिलकर काम करें, ताकि नागरिकों को कम से कम असुविधा हो। प्रधानमंत्री ने राज्य सरकारों के साथ उचित समन्वय सुनिश्चित करने के लिए भी कहा, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि आवश्यक वस्तुओं की कालाबाज़ारी और जमाखोरी न हो।