सचिवों के दो समूहों ने प्रधानमंत्री मोदी को अपने विचारों एवं सुझावों से अवगत कराया
सचिवों ने प्रधानमंत्री के समक्ष बजट के अभिनव तरीकों और प्रभावी कार्यान्वयन के बारे में अपने विचार एवं सुझाव रखे
सचिवों ने प्रधानमंत्री मोदी को स्वच्छ भारत और गंगा संरक्षण पर अपने विचारों से अवगत कराया

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के शासन के विभिन्न क्षेत्रों में परिवर्तन लाने के प्रति सचिवों को प्रोत्साहित करने के अनुरूप सचिवों के दो समूहो ने अपने विचार और सुझाव प्रधानमंत्री को प्रस्तुत किए। ये विचार और सुझाव “प्रगतिशील बजट और प्रभावी क्रियान्वयन” और “स्वच्छ भारत तथा गंगा पुनरोद्धार” से जुडे हैं।

इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री श्री राजनाथ सिंह,श्री अरूण जेटली,श्रीमती सुषमा स्वराज,श्री नितिन गडकरी,श्री मनोहर पर्रिकर तथा भारत सरकार के सभी सचिव उपस्थित थे। प्रस्तुतीकरण के दौरान और उसके बाद प्रधानमंत्री और कई केंद्रीय अन्य मंत्रियों ने प्रस्तुतीकरण से संबंधित प्रश्न पूछे और अपने विचार व्यक्त किए।

इससे पहले 12 जनवरी को सचिवों के पहले समूह ने “ऊर्जा संरक्षण और दक्षता” विषय पर अपनी प्रस्तुति पेश की थी।

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प्रधानमंत्री ने सुव्यवस्थित मानकों से मानवीय आचरण के मार्गदर्शन को दर्शाने वाले एक संस्कृत सुभाषितम् को साझा किया
May 20, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने आज एक संस्कृत सुभाषितम् साझा किया। इसका अभिप्राय है कि श्रेष्ठ आचरण एक दीपक की तरह है जो न केवल एक व्यक्ति को बल्कि पूरे समाज को आलोकित करता है। श्री मोदी ने कहा कि इसी आदर्श को अपनाकर हमारे देश के लोग आज पूरे संयम, क्षमता और कर्तव्य परायणता के साथ राष्ट्र निर्माण में जुटे हुए हैं।

प्रधानमंत्री ने एक्स पर अपनी पोस्ट में लिखा:

"श्रेष्ठ आचरण वह दीपक है, जिससे व्यक्ति के साथ-साथ समाज भी आलोकित होता है। इसी आदर्श को अपनाते हुए हमारे देशवासी आज पूरे संयम, सामर्थ्य और कर्तव्यनिष्ठा से राष्ट्र निर्माण में जुटे हुए हैं।”

तस्माच्छास्त्रं प्रमाणं ते कार्याकार्यव्यवस्थितौ।

ज्ञात्वा शास्त्रविधानोक्तं कर्म कर्तुमिहार्हसि।।"

क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए इसका निर्धारण व्यक्तिपरक राय या क्षणिक आवेग पर नहीं, बल्कि शास्त्र आधारित एक सुव्यवस्थित मानक के अनुसार होना चाहिए, जो आचरण को दिशा और अनुशासन प्रदान करता है। इसलिए, व्यक्ति को स्थापित मानकों की उस प्रणाली के अनुसार कार्य करना चाहिए, ताकि उसका आचरण संतुलित, मान्य और सार्थक हो सके।