दशकों तक, उत्तर प्रदेश उपेक्षा का शिकार रहा। विकास कुछ चुनिंदा क्षेत्रों तक ही सिमटा रहा, जिससे राज्य की बड़ी आबादी हाशिए पर चली गई और वंचित रह गई। राजनीतिक एजेंडों से प्रेरित सोच ने गरीबी और सामाजिक विभाजन को बढ़ाया और राष्ट्र तथा राज्य की प्रगति को बाधित किया। हालांकि, 2014 में एक परिवर्तनकारी बदलाव आया जब प्रधानमंत्री मोदी की सरकार ने राज्य के लिए तीव्र विकास के एक नए युग की शुरुआत की। 2047 तक भारत की पूरी क्षमता को साकार में उत्तर प्रदेश की महत्वपूर्ण भूमिका को पहचानते हुए, सरकार ने कृषि से लेकर उद्योग तक हर उपलब्ध संसाधन को जुटाकर राज्य के विकास को गति दी।
उत्तर प्रदेश में इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट पर बहुत ध्यान दिया गया है, जिसके कारण सड़क, रेलवे, एयरपोर्ट्स और वाटरवेज में उल्लेखनीय सुधार हुए हैं। 2014 से अब तक, यूपी में 2,450 किलोमीटर से अधिक नई रेल लाइनों का निर्माण किया गया है। पिछले पांच वर्षों में लगभग 4,000 किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्गों का निर्माण किया गया है। सरकार की रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर के आधुनिकीकरण की प्रतिबद्धता महत्वाकांक्षी दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (RRTS) कॉरिडोर में भी स्पष्ट है, जो 82.15 किमी में फैला है।
एयर कनेक्टिविटी को भी उल्लेखनीय बढ़ावा मिला है। पिछले पांच वर्षों में 'उड़ान' योजना के तहत आगरा, प्रयागराज, बरेली, कानपुर, हिंडन और कुशीनगर सहित यूपी के छह एयरपोर्ट्स से उड़ान सेवाएं शुरू गई है। हाल ही में, प्रधानमंत्री मोदी ने अयोध्या में महर्षि वाल्मीकि इंटरनेशनल एयरपोर्ट का उद्घाटन किया। इसके अलावा, यूपी में जल्द ही पांच और एयरपोर्ट बनने वाले हैं, जिनमें से जेवर में बनने वाला इंटरनेशनल एयरपोर्ट 2024 के अंत तक शुरू होने की उम्मीद है।
जन कल्याण को भी सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है, आवास, विद्युतीकरण और जल आपूर्ति में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। पीएम-आवास योजना के तहत 35 लाख से अधिक मकान पूरे हो चुके हैं, जबकि सौभाग्य योजना ने 91.8 लाख से अधिक घरों में बिजली पहुंचाई है। जल जीवन मिशन ने भी 1.35 करोड़ घरों में नल का जल कनेक्शन प्रदान किया है। प्रधानमंत्री श्रमयोगी मान-धन जैसी कल्याणकारी योजनाओं ने 6.68 लाख से अधिक असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को वित्तीय सुरक्षा प्रदान की है। उत्तर प्रदेश में गरीबी में सबसे अधिक गिरावट दर्ज की गई है, पिछले नौ वर्षों में 5.94 करोड़ लोग बहुआयामी गरीबी से बाहर आए हैं, जो कल्याणकारी योजनाओं की समाज के वंचित वर्गों के उत्थान में प्रभावशीलता को दर्शाता है
स्वास्थ्य क्षेत्र में भी उल्लेखनीय प्रगति हुई है। रायबरेली और गोरखपुर में दो AIIMS संस्थानों की स्थापना और यूपी में 4.95 करोड़ से अधिक आयुष्मान हेल्थ कार्डों के वितरण के साथ, राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार हुआ है। इसके अलावा, राज्य में 27 नए मेडिकल कॉलेजों को मंजूरी दी गई है, जबकि 11 सरकारी मेडिकल कॉलेजों को सुपर स्पेशलिटी ब्लॉकों (SSB) में अपग्रेड किया गया है।
महिलाओं के लिए आर्थिक भागीदारी और सामाजिक समावेशन बढ़ाने की पहल के साथ, महिला सशक्तिकरण में राज्य की प्रगति भी समान रूप से उल्लेखनीय रही है। 72.65 लाख से अधिक महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों में शामिल किया गया है, जिससे उन्हें आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त बनाया गया है। इसके अतिरिक्त, 1.83 लाख से अधिक महिला स्वामित्व वाले MSME को Udyam पोर्टल पर रजिस्टर किया गया है। यह, उद्यमिता में उनकी बढ़ती भूमिका को दर्शाता है।
युवाओं की क्षमता का दोहन करने के लिए शिक्षा और कौशल विकास को प्राथमिकता दी गई है, स्किल इंडिया के तहत 39.5 लाख से अधिक उम्मीदवारों को प्रशिक्षित किया गया है। राज्य भर में रोजगार मेलों ने रोजगार के अवसर प्रदान किए हैं, केवल 2020-21 के बाद से ही 4.26 लाख से अधिक युवाओं को रोजगार मिल चुका है।
इसके अलावा, प्रधानमंत्री मुद्रा योजना जैसी स्कीम के माध्यम से उद्यमिता को प्रोत्साहित किया गया है, जिससे इच्छुक उद्यमियों को 3.8 करोड़ से अधिक ऋण दिए गए हैं। स्टार्टअप्स के लिए सरकार के समर्थन के परिणामस्वरूप लगभग 10,000 संस्थाओं को मान्यता दी गई है।
इसके अलावा, राज्य ने ईज ऑफ डूइंग बिजनेस रैंकिंग में उल्लेखनीय प्रगति की है और अब यह देश भर में दूसरे स्थान पर है। उत्तर प्रदेश अब इस्टर्न और वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर और देश के दो प्रमुख डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में कार्य करता है, जिनमें से एक उत्तर प्रदेश में है। इसके अतिरिक्त, लखनऊ और हरदोई में पीएम-Mitra पार्क जैसी पहल से राज्य में रोजगार के कई अवसर पैदा होने की उम्मीद है।
उत्तर प्रदेश में कृषि विकास के प्रयासों को उत्पादकता और स्थायित्व बढ़ाने पर केंद्रित किया गया है। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-KISAN) के माध्यम से अब तक 2.62 करोड़ से अधिक लाभार्थियों को 64,330 करोड़ रुपये से अधिक वितरित किए जा चुके हैं। इसके साथ ही, प्रधानमंत्री किसान मानधन योजना (PM-KMY) में अब तक उत्तर प्रदेश से 2.52 लाख किसानों ने पंजीकरण कराया है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) के कार्यान्वयन से 2016-17 से अब तक उत्तर प्रदेश में 3.6 करोड़ किसान आवेदनों को बीमा कवरेज प्रदान किया गया है और 4,830 करोड़ रुपये का दावा भुगतान किया गया है। इसके अलावा, उत्तर प्रदेश में 1181 किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) का पंजीकरण हुआ है और 2015-16 से 2022-23 तक "पर ड्राप मोर क्रॉप" योजना के माध्यम से 4.26 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में माइक्रो इरीगेशन की गई है, जिससे जल संसाधनों का कुशल उपयोग हुआ है और कृषि उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इन पहलों ने उत्तर प्रदेश में कृषि क्षेत्र को मजबूत बनाने और किसानों की आय बढ़ाने में मदद की है।
पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए उत्तर प्रदेश ने भी कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। स्वदेश दर्शन और PRASAD योजना के तहत वाराणसी, अयोध्या, मथुरा-वृन्दावन और पवित्र गंगा नदी के तट जैसे प्रमुख पर्यटन स्थलों को विकसित करने के लिए परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। इन प्रयासों के जरिए राज्य न केवल धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देना चाहता है, बल्कि सांस्कृतिक विरासत और प्राकृतिक सौंदर्य को भी प्रदर्शित करना चाहता है।
इस प्रकार, प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ने जो प्रगति की है, वह दूरदर्शी शासन और समावेशी विकास की बदलावकारी क्षमता को प्रदर्शित करती है। निरंतर गति और सामूहिक संकल्प के साथ, उत्तर प्रदेश एक समावेशी और टिकाऊ विकास मॉडल के रूप में उभरने के लिए तैयार है, जो भारत के वैश्विक आर्थिक महाशक्ति बनने की यात्रा में महत्वपूर्ण योगदान देगा।




