"SWAGAT initiative of Gujarat Government completes 10 years"
"SWAGAT online has become a ray of hope for the common people seeking redressal of their grievances: Shri Narendra Modi"
"From 24th April 2003, in the last 10 years over 2.80 lakh citizens’ questions received satisfactory answer"
"Over 90% of issues received resolved "
"SWAGAT online extremely popular in the 26 districts, 225 Talukas and the over 18,000 villages of Gujarat"

बेस्ट पब्लिक सर्विस के लिए यूनो एवं भारत सरकार का अवार्ड हासिल करने वाले

मुख्यमंत्री का स्वागत ऑनलाइन जनशिकायत निवारण कार्यक्रम के दस वर्ष पूरे

२४ अप्रैल-२००३ से दस वर्ष में २.८० लाख नागरिकों की समस्याओं का संतोषजनक निराकरण

९० फीसदी से अधिक समस्याओं का स्थल पर ही निराकरण

मुख्यमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा आम नागरिकों की शिकायतों एवं समस्याओं के न्यायी निराकरण के लिए शुरू किये गए स्वागत ऑनलाइन शिकायत निवारण कार्यक्रम (SWAGAT: State Wide Attention on Grivances by Application of Technology) को आज दस वर्ष पूरे हो गए। श्री मोदी ने कहा कि आम आदमी के न्याय तथा उसकी शिकायत के संतोषजनक निराकरण के लिए स्वागत ऑनलाइन आशा की किरण बन गया है।

राष्ट्र का इंटरनेशनल अवार्ड एवं भारत सरकार का नेशनल अवार्ड हासिल करने वाला यह कार्यक्रम श्री नरेन्द्र मोदी ने २४ अप्रैल-२००३ से राज्य स्तर पर सचिवालय के जनसंपर्क कक्ष में प्रत्येक महीने के चौथे गुरुवार के लिए शुरू किया था। उन्होंने रूबरू आने वाले आम आदमी की समस्या को सुनकर संबंधित विभाग के सचिव की मौजूदगी में तथा जिला कलक्टर को वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए उसके वाजिब एवं न्यायी निराकरण की टेक्नोलॉजी आधारित कार्यशैली विकसित की थी।

जिला स्तर पर कलक्टरों एवं प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा जिला स्वागत ऑनलाइन भी इसी दिन से शुरू हुआ था और क्रमशः १ जनवरी-२००८ से तहसील स्वागत ऑनलाइन और उसकी सफलता के बाद फरवरी-२०११ से ग्राम स्वागत कार्यक्रम क्रियान्वित करने से लोकतांत्रिक प्रशासन व्यवस्था में समाज के अंतिम व्यक्ति की समस्याओं के निराकरण की नई राह मुख्यमंत्री ने बनाई।

मुख्यमंत्री के स्वागत ऑनलाइन कार्यक्रम के एक दशक में कुल मिलाकर २,८०,७५४ नागरिकों द्वारा की गई शिकायतों-समस्याओं में से ९०.४४ फीसदी का निराकरण स्थल पर ही कर दिया गया। शेष समस्याएं नीति विषयक निर्णयों तथा सार्वजनिक सुविधा के दीर्घकालिक कदमों के संबंधित थी। श्री मोदी ने आज भी गुरुवार दोपहर बाद सचिवालय में स्वागत ऑनलाइन कार्यक्रम में शिरकत करने पहुंचे नागरिकों को सुना और उनकी समस्याओं के निराकरण के लिए जरूरी निर्देश दिये।

मुख्यमंत्री ने सभी जिला कलक्टरों एवं जिले के वरिष्ठ प्रशासकों को मार्गदर्शन दिया कि वे आम नागरिकों की शिकायतों को संवेदना एवं मानवीय अभिगम के साथ सुनें तथा प्रशासनिक घुमाव-फिराव से रास्ता निकालते हुए उन्हें उचित न्याय एवं संतोष की अनुभूति कराएं। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के अतिरिक्त प्रधान सचिव ए.के. शर्मा, विशेष कार्य अधिकारी जे.पी. मोढा, चन्द्रेश कोटक एवं जनसंपर्क के सहयोगी उपस्थित थे।

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पीएम ने 53वीं प्रगति बैठक की अध्यक्षता की
August 25, 2026
प्रधानमंत्री कार्यालयपीएम ने रेलवे, सड़क और ऊर्जा क्षेत्र की छह अहम ढ़ांचागत परियोजनाओं की समीक्षा की
समीक्षा किए गए प्रोजेक्ट्स 9 राज्यों में फैले हैं और इनमें कुल ₹30,000 करोड़ से ज़्यादा का निवेश किया गया है
पीएम ने कहा, ढ़ांचागत परियोजनाओं को अलग-अलग हिस्सों या पैकेज के बजाय एकीकृत प्रयास के तौर पर देखा जाना चाहिए
पीएम ने परियोजनाओं को लागू करने के सभी चरणों में लगातार सुधार और मंत्रालयों तथा राज्यों में सक्रियता से काम करने की संस्कृति पर ज़ोर दिया
पीएम ने कहा, रफ्तार के साथ-साथ गुणवत्ता भी ज़रूरी है
एग्रीस्टैक की समीक्षा करते हुए, पीएम ने कृषि डेटा से ज़्यादा फायदा उठाने के लिए एआई समेत नवीन डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल करने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया
साइबर फ्रॉड और 'डिजिटल अरेस्ट' के मामले में, पीएम ने प्रशिक्षण, जन-जागरूकता, साइबर-सुरक्षा से जुड़ी शिक्षा और आपसी तालमेल के साथ कार्रवाई करने पर ज़ोर दिया

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने सक्रिय शासन और समय पर काम पूरा करने के लिए बनाए गए आईसीटी-आधारित, मल्टी-मॉडल प्लेटफॉर्म प्रगति की 53वीं बैठक की आज सेवा तीर्थ में अध्यक्षता की।

बैठक के दौरान, प्रधानमंत्री ने रेलवे, सड़क और ऊर्जा क्षेत्रों से जुड़ी छह प्रमुख बुनियादी ढांचागत परियोजनाओं की समीक्षा की। ये परियोजनाएं नौ राज्यों में फैली हुई हैं और इनकी कुल लागत ₹30,000 करोड़ से अधिक है। संपर्क को मजबूत करने, औद्योगिक और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने और सार्वजनिक सेवाओं में सुधार के लिए महत्वपूर्ण इन परियोजनाओं की समीक्षा करते वक्त समय-सीमा का पालन, अलग-अलग एजेंसियों के बीच तालमेल, लंबित मुद्दों के समाधान और काम को तेजी से पूरा करने पर विशेष जोर दिया गया।

प्रधानमंत्री ने इस बात पर ज़ोर दिया कि ढ़ांचागत परियोजनाओं में देरी से सिर्फ़ लागत ही नहीं बढ़ती, बल्कि नागरिकों, व्यवसायों और अर्थव्यवस्था को मिलने वाले लाभ भी टल जाते हैं। उन्होंने कहा कि ढ़ांचागत परियोजनाओं को अलग-अलग हिस्सों, टुकड़ों या पैकेजों के बजाय एक एकीकृत इकाई के तौर पर देखा और उनकी निगरानी की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि अलग-अलग पैकेजों में हो रही प्रगति का नतीजा आखिर में संपूर्ण परियोजना के वक्त पर पूरा होने और उसके चालू होने के रूप में निकलना चाहिए। इसलिए मंत्रालयों और राज्यों से कहा गया कि वे काम को शुरू से लेकर अंत तक पूरा करने का नज़रिया अपनाएं और उन अहम कमियों को दूर करें, जिनसे पूरे प्रोजेक्ट के चालू होने और फ़ायदे मिलने में देरी हो सकती है। उन्होंने मंत्रालयों और राज्य सरकारों में सक्रिय कार्य-संस्कृति को बढ़ावा देने और परियोजनाओं को लागू करने के हर स्तर पर ज़्यादा ज़िम्मेदारी लेने का आह्वान किया।

प्रधानमंत्री ने खास तौर पर बड़े परिवहन और ढ़ांचागत परियोजनाओं की योजना बनाते समय, जहाँ भी संभव हो, ढ़ांचागत सेवाओं के लिए कॉमन यूटिलिटी कॉरिडोर की संभावना तलाशने पर ज़ोर दिया। उन्होंने मंत्रालयों और राज्यों से कहा कि वे योजना बनाने के चरण में ही ऐसी एकीकृत कार्यप्रणालियों पर विचार करें और उनकी तकनीकी व आर्थिक व्यवहार्यता को ध्यान में रखें।

प्रधानमंत्री ने कहा कि काम को तेज़ी से पूरा करने के साथ-साथ उसकी गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने मंत्रालयों, राज्यों और काम को लागू करने वाली एजेंसियों से आधुनिक तकनीकों को अपनाने और हर चरण पर गुणवत्ता सुनिश्चित करने व निगरानी को मज़बूत करने का आह्वान किया।

डिजिटल कृषि मिशन के तहत एग्रीस्टैक की समीक्षा करते हुए, प्रधानमंत्री ने कृषि डेटा से ज़्यादा फ़ायदा उठाने के लिए एआई जैसी नई डिजिटल तकनीकों का इस्तेमाल करने की ज़रूरत पर बल दिया। उन्होंने कहा कि इनपुट प्लानिंग से लेकर प्रोसेसिंग तक, पूरी कृषि मूल्य श्रृंखला में डेटा इकोसिस्टम का असरदार ढंग से इस्तेमाल किया जाना चाहिए, ताकि बेहतर जानकारी के आधार पर कदम उठाए जा सकें, सही लोगों तक मदद पहुंचाई जा सके और डेटा के आधार पर फ़ैसले लिए जा सकें। उन्होंने एग्रीस्टैक व्यवस्था बनाने में राज्यों और केंद्र सरकार की कोशिशों की तारीफ की और किसानों के लिए बेहतर नतीजे पाने के लिए इसके इस्तेमाल को और मज़बूत करने का आह्वान किया।

साइबर धोखाधड़ी के मामलों, जिनमें डिजिटल अरेस्ट की घटनाएं भी शामिल हैं, की समीक्षा के दौरान प्रधानमंत्री ने कहा कि प्रशिक्षण, जागरूकता और शिक्षा पर लगातार ध्यान देकर ऐसे मामलों की रोकथाम को मज़बूत किया जाना चाहिए। उन्होंने लगातार और खास तौर पर बुज़ुर्गों, युवाओं और कमज़ोर वर्गों के लिए जागरूकता अभियान चलाने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया, ताकि उन्हें धोखाधड़ी के आम तरीकों, चेतावनी के संकेतों और सुरक्षित डिजिटल तौर-तरीकों के बारे में जानकारी दी जा सके। उन्होंने इससे जुड़े कर्मचारियों की क्षमता बढ़ाने के लिए नियमित ट्रेनिंग की भी बात कही, ताकि साइबर धोखाधड़ी के नए तरीकों की पहचान की जा सके और उन पर तेज़ी से कार्रवाई की जा सके।