प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने देश के युवाओं की क्षमता पर जोर देते हुए अपने एक संदेश में आत्मविश्वास और इच्छाशक्ति के महत्व को रेखांकित करने वाला एक संस्कृत सुभाषित साझा किया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की युवा शक्ति का दृढ़ संकल्प अतुलनीय है। उन्होंने कहा कि हमारे युवा मित्र जो भी करने का संकल्प लेते हैं, उसे पूरा कर लेते हैं और यही कारण है कि देश आज अपने सपनों को साकार कर रहा है।

प्रधानमंत्री ने ‘एक्‍स’ पर लिखा:

"भारतवर्ष की युवाशक्ति का दृढ़ संकल्प अतुलनीय है। हमारे युवा साथी जो ठान लेते हैं, वो करके दिखाते हैं। यही वजह है कि आज हमारा देश अपने सपनों को साकार कर रहा है।

न वा उ मां वृजने वारयन्ते न पर्वतासो यदहं मनस्ये।

मम स्वनात् कृधुकर्णो भयात एवेदनु द्यून्किरणः समेजात्।।"

आपके आत्मविश्वास की शक्ति गहन है। कोई भी आपके आत्मविश्वास को कुचल नहीं सकता। बड़े से बड़ा पहाड़ भी आपके लिए रूकावट नहीं बन सकता। आप सूरज से भी अधिक शक्तिशाली हैं, बस आपको अपनी इच्छाशक्ति को पहचानने की जरूरत है। 

Explore More
आज सम्पूर्ण भारत, सम्पूर्ण विश्व राममय है: अयोध्या में ध्वजारोहण उत्सव में पीएम मोदी

लोकप्रिय भाषण

आज सम्पूर्ण भारत, सम्पूर्ण विश्व राममय है: अयोध्या में ध्वजारोहण उत्सव में पीएम मोदी
PM SVANidhi: How India’s street vendors are being brought into the formal economy

Media Coverage

PM SVANidhi: How India’s street vendors are being brought into the formal economy
NM on the go

Nm on the go

Always be the first to hear from the PM. Get the App Now!
...
प्रधानमंत्री ने दृढ़ संकल्प, आत्मसंयम और बुद्धिमत्ता के गुणों पर आधारित संस्कृत सुभाषितम् साझा किया
June 02, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने आज एक संस्कृत सुभाषितम् साझा किया। इसका तात्‍पर्य है दृढ़ संकल्प और आत्म-संयम ही वह शक्तियां हैं जो कठिनतम मार्गों को भी सुगम बना देती हैं। श्री मोदी ने कहा कि आज हमारे युवा इसी दृढ़ संकल्प के साथ राष्ट्र निर्माण में निरंतर जुटे हुए हैं।

प्रधानमंत्री ने एक्‍स पर पोस्ट में लिखा:

"दृढ़ निश्चय और आत्म-संयम वह शक्ति है, जो कठिन से कठिन राह को भी आसान बना देती है। आज हमारे युवा साथी इसी संकल्प के साथ राष्ट्र निर्माण में निरंतर जुटे हुए हैं।

निश्चित्य यः प्रक्रमते नान्तर्वसति कर्मणः।

अबन्ध्यकालो वश्यात्मा स वै पण्डित उच्यते॥"

जो व्यक्ति किसी कार्य को भली-भांति सोच-समझकर दृढ़ निश्‍चय के साथ आरंभ करता है और बीच में अधूरा नहीं छोड़ता, जो समय का सदुपयोग करता है तथा अपनी इन्द्रियों पर पूर्ण नियंत्रण रखता है। ऐसा व्‍यक्ति ही वास्‍तव में बुद्धिमान होता है।