सर्कुलर इकोनॉमी हमारे ग्रह पर पड़ने वाले पारिस्थितिकीय प्रभावों को दूर करने का महत्‍वपूर्ण कदम साबित हो सकती है : प्रधानमंत्री
मजबूत भारत-ऑस्‍ट्रेलिया साझेदारी कोविड बाद की विश्‍व व्‍यवस्‍था को आकार देने में महत्‍वपूर्ण भूमिका निभा सकती है : प्रधानमंत्री

मित्रों,

पिछले वर्ष जून में प्रधानमंत्री मॉरिसन और मैंने सर्कुलर इकोनॉमी पर एक हैकथॉन आयोजित करने की संभावना के बारे में बातचीत की थी।

मुझे खुशी है कि हमारे विचार को इतनी जल्‍दी वास्‍तविक रूप मिल गया।

मैं अपने प्रिय मित्र, प्रधानमंत्री स्‍कॉट मॉरिसन का इस संयुक्‍त पहल को समर्थन देने के लिए शुक्रिया अदा करता हूं।

मैं, कोविड-19 महामारी के बावजूद सभी भागीदारों द्वारा दर्शायी गई प्रतिबद्धता के लिए उनकी प्रशंसा करता हूं।

मेरे लिए आप सभी विजेता हैं।

मित्रों,

आज जब पूरी मानवता जलवायु परिवर्तन द्वारा पेश चुनौतियों का सामना कर रही है, इस हैकथॉन की थीम पूरे विश्‍व के लिए प्रासंगिक है।

खपत आधारित आर्थिक मॉडलों ने हमारे ग्रह पर काफी प्रतिकूल प्रभाव डाला है।

हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि हम इस समूची पृथ्‍वी माता द्वारा प्रदान किेये जाने वाले संसाधनों के मालिक नहीं हैं, बल्कि आने वाली पीढि़यों के लिए इसके ट्रस्‍टी मात्र हैं।

यह पर्याप्‍त नहीं है कि हम अपनी उत्‍पादन प्रक्रियाओं को अधिक कुशल और कम प्रदूषण फैलाने वाली बनाएं।

इससे फर्क नहीं पड़ता कि कोई कितना तेज या धीमे गाड़ी चलाता है, यदि दिशा गलत है, तो यह तय है कि वह गलत जगह पर ही पहुंचेगा।

इसलिए हमें उचित दिशा ही तय करनी चाहिए।

हमें अपने खपत के तरीकों पर विचार करना चाहिए और यह देखना चाहिए कि हम इन तरीकों के पास्थितिकी तंत्र पर पड़ने वाले प्रभावों को किस तरह कम कर सकते हैं।

यही वह जगह है, जहां सर्कुलर इकोनॉमी की परिकल्‍पना सामने आती है।

यह हमारी बहुत सारी चुनौतियों के समाधान के लिए एक मुख्‍य कदम हो सकती है।

हमें वस्‍तुओं के पुनर्चक्रण और पुन:इस्‍तेमाल, कचरे का निष्‍पादन और संसाधनों की कुशलता में सुधार को अपनी जीवन शैली का अंग बनाना होगा।

हैकथॉन में भारतीय और ऑस्‍ट्रेलियाई छात्रों, स्‍टार्टअप्‍स और उद्यमियों ने अपने बहुत से नवाचार समाधान प्रस्‍तुत किए।

यह नवाचार, सर्कुलर इकोनॉमी के दर्शन के प्रति आपकी प्रतिबद्धता दर्शाते हैं।

मुझे इस बात में कोई शंका नहीं है कि आपके द्वारा पेश नवाचार हम दोनों देशों को सर्कुलर इकोनॉमी समाधानों को आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित करेंगे।

और इसके लिए, हमें अब इन नवाचारों को आगे बढ़ाने और आत्‍मसात करने के तरीके तलाशने होंगे।

मित्रों,

युवा शक्ति की ऊर्जा, नये विचारों और नवाचारों के प्रति उदारता से और खतरे मोल लेने की क्षमता से आती है।

आज के युवा भागीदारों द्वारा प्रदर्शित ऊर्जा और उत्‍साह भारत और ऑस्‍ट्रेलिया के बीच भविष्‍योन्‍मुखी साझीदारी का प्रतीक है।

मुझे युवा शक्ति की ऊर्जा, रचनात्‍मकता और नये विचारों में पूरा भरोसा है।

वे सिर्फ हम दो देशों के लिए ही नहीं, बल्कि समूचे विश्‍व के लिए सतत और समावेशी समाधान प्रस्‍तुत कर सकते हैं।

भारत-ऑस्‍ट्रेलिया की मजबूत साझेदारी कोविड बाद के विश्‍व को आकार देने में महत्‍वपूर्ण भूमिका अदा कर सकती है।

और, हमारे युवा, हमारे युवा नवोन्‍मेषक, हमारे स्‍टार्टअप्‍स इस साझेदारी में सबसे आगे होंगे।

धन्‍यवाद !

बहुत-बहुत धन्‍यवाद !

 

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प्रधानमंत्री ने विकसित भारत के निर्माण में आत्मविश्वास की शक्ति पर बल देते हुए संस्कृत सुभाषितम साझा किया
February 03, 2026

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने आज एक संस्कृत सुभाषितम को साझा किया, जिसमें विकसित भारत के स्‍वप्‍न को साकार करने में आत्मविश्वास की परिवर्तनकारी भूमिका पर बल दिया गया है।

एक्‍स पर एक पोस्ट में प्रधानमंत्री ने लिखा:

"आत्मविश्वास वह शक्ति है, जिसके बल पर सब कुछ संभव है। विकसित भारत के सपने को साकार करने में देशवासियों की यही शक्ति बहुत काम आने वाली है।

श्रीर्मङ्गलात् प्रभवति प्रागल्भ्यात् सम्प्रवर्धते।

दाक्ष्यात् तु कुरुते मूलं संयमात् प्रतितिष्ठति॥ "