मेरे लिए सौभाग्य की बात है कि बहुत ही कम अवधि में मुझे दोबारा नेपाल की भूमि के दर्शन करने का सौभाग्य मिला है। इन दिनों विश्व के कई देशों में मेरा जाना हुआ है। कई वैश्विक स्तर की मीटिंगों में जाना हुआ है, लेकिन नेपाल के साथ मेरी जो स्मृतियाँ जुड़ी हुई हैं, नेपाल ने मुझे जो प्यार दिया है, अपनापन दिया है, वो मैं कभी भूल नहीं सकता हूं। इसके लिए मैं नेपाल का बहुत बहुत आभारी हूं।

आज ये Trauma Center का लोकार्पण हो रहा है। एक प्रकार से ये जीवन रक्षा का अभियान है। First Golden Hour, आकस्मिक परिस्थियों में इंसान की जिदंगी बचाने का बहुत महत्वपूर्ण समय होता है। उस First Golden Hour में अगर उपयुक्त सुविधा मिल जाए, proper treatment का सहारा मिल जाए, तो इंसान की जिंदगी बचाई जा सकती है। नेपाल और भारत की मैत्री का ये उत्तम नजराना है, जो एक प्रकार से जीवन की सौगात दे रहा है। जो नजराना जीवन की सौगात देता है, वो हमें जड़ों से जोड़ता है, हमें जीवन से जोड़ता है, हमें अरमान से जोड़ता है और हमें अरमान पूरे करने के लिए प्रयास करने की एक शक्ति भी देता है। इसलिए ये Trauma Center भारत और नेपाल के बीच एक जीवंत संबंध का उदाहरण बन रहा है।

आगे भी इस Trauma Center का upgradation करना होगा, technology support की आवश्यकता होगी, human resource development की आवश्यकता होगी। भारत भविष्य में भी इस काम में नेपाल के साथ रहेगा, पूरी सहायता करता रहेगा और हम चाहेंगे कि नेपाल अपने पैरों पर खड़े हो करके..इस Trauma Center को चलाने का उसमें सार्मथ्य आए। वहां तक जो भी मदद चाहिए, भारत खुले दिल से यहां के लोगों की ज़िंदगी बचाने के लिए सदा सर्वदा आपके साथ खड़ा है। और वो हमारे लिए सौभाग्य होगा। एक प्रकार से अपनों की सेवा करने का यह अवसर है और अपने यहाँ तो, सेवा परमोधर्म- ये शास्त्रों ने कहा है। और जिस शास्त्र ने हमें ‘सेवा परमोधर्म’ कहा है, उस शास्त्र से हम दोनों जुड़े हुए हैं। इसलिए एक सेवा का यह प्रकल्प है और मुझे गर्व है कि आज मुझे इस समारोह में लोकार्पण के काम में आने का अवसर मिला। भारत और नेपाल का एक अटूट नाता, एक जीवंत नाता, उसका एक जीवंत स्मारक हमारे सामने आज खड़ा हुआ है।

जब मैं पिछली बार आया था, तब भी मैंने सार्वजनिक रूप से कहा था कि मैं उस समय तो जनकपुर, मुक्तिनाथ और लुम्बिनी नहीं जा पाया था, मैंने कहा था कि मैं अगली बार आउंगा तो जाउंगा। इस बार भी मेरा इरादा था कि मैं by-road जाउं। By-road जाने का मेरा इरादा इसलिए था कि मैं खुद अनुभव करना चाहता था कि नेपाल से वहां आने वाले लोगों को वहां क्या दिक्कतें होती हैं, क्या तकलीफ होती हैं। भारत से उस तरफ जाने वाले लोगों को क्या दिक्कतें होती हैं, क्या तकलीफ होती हैं। उसे मैं खुद experience करना चाहता था और फिर मैं उसको ठीक करना चाहता था। लेकिन, समयाभाव के कारण मैं इस बार उसको नहीं कर पाया हूं। मैं विषेश रूप से जनकपुर, लुम्बिनी और मुक्तिनाथ - वहां के नागरिकों को जो कष्ट हुआ है, जो निराशा हुई है, मैं भलीभांति उनकी पीड़ा को समझ सकता हूं। लेकिन, मैं उन्हें विश्वास दिलाता हूं कि निकट भविष्य में जब भी मुझे अवसर मिलेगा मैं आपके बीच आउंगा। आपके प्यार को मैं भली-भांति दूर बैठे-बैठे भी अनुभव कर रहा हूं। और इसलिए वहां के सभी नागरिकों को मैं विश्वास दिलाता हूं। नेपाल के हर नागरिक का भारत पर पूरा अधिकार, भारतीयों पर पूरा अधिकार है, सरकार पर अधिकार है और भारत के प्रधानसेवक पर प्रधान अधिकार है।

मैं जब पिछली बार आया था, और आज मैं आया हूं, सौ दिन भी नहीं हुए हैं। लेकिन जब विश्वास का इजिंन किसी काम को लग जाता है, तो काम कितनी तेजी से होता है, कितना अच्छा हो सकता है, इसका मैं आज अनुभव कर रहा हूं। आज नेपाल और भारत के बीच भरोसे का, विश्वास का एक बहुत बड़ा horse power वाला इजिंन लग गया है, जो विश्वास का इजिंन है, भरोसे का इजिंन है। उसी के कारण 100 दिन के अंदर जिस प्रकार से नेपाल और भारत ने एक के बाद एक निर्णय किए, काम शुरू किया, 25-25, 30-30 साल से रूके हुए काम - ये आज आगे बढ़े हैं। हमारे यहां कहावत है - एक हाथ से ताली नहीं बजती है। ये संभव इसलिए हुआ है कि नेपाल सरकार, नेपाल के सभी राजनीतिक दल, नेपाल के प्रशासनिक व्यवस्था में जुड़े हुए अधिकारी - उन सब ने मिल करके आगे बढ़ने की शुरूआत की। आगे बढ़ाया। छोटी-मोटी रूकावटें आईं तो उन रूकावटों को भी बहुत बुद्धिमत्ता पूर्ण तरीके से, उसका निराकरण करते हुए, चीज़ों को ठोस रूप देने का काम किया है। इसलिए मैं आदरणीय प्रधानमंत्री जी का, उनकी सरकार का, सभी राजनीतिक दलों का, प्रशासनिक अधिकारियों का भारत की तरफ से हृदय से अभिनदंन करता हूं, कि उन्होंने ये काम न किया होता तो आज 100 दिन के भीतर भीतर 25-25, 30-30 साल से लटके हुए काम, अटके हुए काम आज पूरे न होते।

मैं आज एक संतोश का भाव अनुभव कर रहा हूं कि मेरी पहली मुलाकात और दूसरी मुलाकात के बीच में तेज़ गति से एक के बाद एक फैसले हुए हैं। ये फैसले नेपाल के जीवन को तो ताकत देने वाले हैं, भारत को बहुत बड़ा संतोश देने वाले हैं। हमारे लिए नेपाल की खुशी, नेपाल का आनंद हमारी मुस्कुराहट का कारण बनता है। अगर नेपाल खुश नहीं तो हिंदूस्तान मुस्कुरा नहीं सकता है। इसलिए हमारे लिए नेपाल की खुशी, ये हमारे लिए संतोश की औषध है। वो संतोश की औषध हमें प्राप्त हुई है, उसके लिए नेपाल से संबंधित सभी जनों का मैं हृदय से आभार व्यक्त करता हूं।

खासतौर पर Hydro Power. कितने समय से यह लटका हुआ था, कितने विवाद चल रहे थे, आशंकाओं के बादल हर बार छाए रहते थे। लेकिन, यहां के सभी राजनीतिक दलों ने जिस प्रकार की दूर दृष्टि का परिचय करवाया है, और उसका परिणाम यह हुआ है कि Power Trade Agreement, 900 Megawatt Upper Karnali Project, Pancheshwar Development Authority, 900 मेगावाट क्षमता वाले Arun III Project - यानि एक के बाद एक। शायद 10 साल में एक चीज़ हो जाए तो भी बड़ा आनंद हो जाता है। यहां तो 100 दिन में इतने सारे काम आगे बढ़ गए। तो आप कल्पना कर सकते हैं कि दो देश मिल करके क्या नहीं कर सकते हैं।

उसी प्रकार से हमने कहा था Transmission Line के संबंध में। हम चाहते थे कि नेपाल को बिजली मिले, ज्यादा बिजली मिले। Transmission Line मज़बूत बनाने के लिए बहुत ही कम समय में काम पूरा हो जाएगा। 125 मेगावाट बिजली और यहां आना शुरू हो जाएगा। इतना ही नहीं, एक नई लाइन तैयार हो रही है, जिसकी क्षमता 1000 मेगावाट की है। अब नेपाल जगमगा उठेगा, ये मेरा पूरा विश्वास है। हमने पिछली बाद कहा था कि एक बिलियन डॉलर - यानि कि 10 हज़ार करोड़ नेपाली रूपयों की कीमत जिसकी होती है - कम ब्याज़ पर और लंबे समय के लिए हम देंगे। आज हम मिल रहे हैं, उसका Final Agreement हो जाएगा। ये भी काम एक प्रकार से आज पूरा हो गया, मान लीजिए।

हम एक Motor Vehicle Agreement पर करार कर रहे हैं और मैं मानता हूं कि नेपाल और भारत को जोड़ने के लिए ये बहुत ही उत्तम व्यवस्था हो रही है। उसी के तहत आज ही काठमांडू से दिल्ली Regular Bus Service शुरू करने का भी हमें सौभाग्य मिल रहा है। काठमांडू से दिल्ली जब Regular Bus Service शुरू होती है तो यहां के सामान्य मानव के जीवन में वो कितनी बड़ी आर्थिक रूप से सहायता करने वाली सुविधाजनक होती है, उसका आप अंदाज़ लगा सकते हैं।

लेकिन नेपाल और भारत के बीच चलने वाली ये टूरिज्म की दृश्टि से चलने वाली बस में यात्री भी उसका फायदा उठाते हैं, international यात्री भी प्राकृतिक सौदंर्य का अनुभव करने के लिए बस से सफर करना पसंद करते हैं। हम चाहते हैं कि नेपाल का टूरिज़्म भी बढ़े। लेकिन टूरिज़्म बढ़ता है, उसके लिए कुछ सुविधाएं चाहिएं। उसमें एक महत्वपूर्ण सुविधा होती है- connectivity. मैंने मेरे अफसरों को कहा है कि क्या हम - ये जो दिल्ली काठमांडू के बीच बस सर्विस चलेगी - वो बस सेवा Wi-Fi के साथ हो सकती है क्या? अगर Wi-Fi के साथ वो बस सेवा होगी तो टूरिस्ट जरूर पसंद करेगा क्योंकि वो बस में जाता रहेगा, वो दूनिया से अपना connect होता रहेगा, अपना आनंद लेता रहेगा। हमारे अफसरों ने कहा कि “साब मालूम नहीं है, हम ज़रा देखेंगे कि कितना संभव है।“ मैंने कहा तो है, अब देखते हैं technological अगर support मिल गया तो ये काम भी हम करवा देंगे। हम चाहते हैं, व्यवस्थाएं हों, व्यवस्थाएं आधुनिक हों और सुविधाजनक हों।

मैंने एक चिंता जताई थी कि भारत में हमारे नेपाल के लोग बहुत बड़ी मात्रा में हैं। नेपाल और भारत की रिश्तेदारी भी बहुत है, व्यापारिक संबंध भी है और इसलिए, यहां के फोन कॉल बहुत महंगे होते हैं। मैंने कहा था कि अमरीका बात करना सस्ता जाता है लेकिन Nepal-India बात करना महंगा जाता है। मैंने कहा था कि ये सस्ता होना चाहिए। मैं भारत गया, मैंने पूछा, “भई! ये क्या कर रहे हो? क्या हम नहीं मदद कर सकते?” लेकिन जब जाना तो बहुत आश्चर्य हुआ मुझे। भारत में तो इसका रेट सिर्फ 40 पैसा है, लेकिन यहां पर वो रेट शायद 3.50 रूपया है, नेपाल में, नेपाल authority जो है। मैं हैरान हो गया कि “भई अब क्या करूं? मैंने तो कह दिया है।“

मैंने कहा कि “ठीक है, हम कम लेते है। न के बराबर लेते हैं तो भी कुछ कम करें।“ मैंने 35% कम करने का फैसला कर लिया। लेकिन, अब मैं चाहता हूं, नेपाल की जो टेलीफोन सेवा हैं, वो भी उसमें कुछ कम करें ताकि नेपाल के लोगों को, और नेपाल से जुड़े हुए भारत के संबंधों में ये टेलीफोन का खर्चा थोड़ा कम होना चाहिए। मेरी तरफ से जो कर सकता हूं, उतना ज़रूर कर दिया है। मैं चाहूंगा कि यहां उस दिशा में कुछ हो।

Border Infrastructure - खासतौर से road मार्ग से जब हम आते हैं - तो वहां पर कुछ प्रश्न थे, पिछली बार, मैंने उसे तेज़ गति से आगे बढ़ाने के लिए काम किया है। कुछ पुराने contract की भी समस्याएं थीं, उसको भी रद्द करने के लिए कह दिया है। मैं मानता हूं छः महीने के भीतर-भीतर आपको सही रूप में वहां पर प्रगति दिखाई देगी।

एक और बात है, नेपाल और भारत के संबंधों में। एक तो, बहुत बड़ी मात्रा में नेपाल के लोग जो भारत में काम करते हैं, वो यहां आते हैं, भारत के टूरिस्ट यहां आते हैं। एक कठिनाई थी- 500 और 1000 रूपए के नोट। वो प्रतिबंधित थे। हमने नेपाल सरकार को प्रार्थना की थी। और हमने मिल करके एक निर्णय किया है कि अब भारत से 500 रूपए और 1000 रूपए के नोट 25 हज़ार की मर्यादा में, ये हम ला सकते हैं। इसके कारण, भारत में काम करने वाले जो लोग अपने घर वापस आते हैं, उनको साथ में पैसे लाने हों तो उनका सुविधा बनेगी। और जो टूरिस्ट आते हैं, टूरिस्ट के हाथ में भी पैसे रह पाएंगे। तो इस व्यवस्था को भी हमने निर्णय कर लिया है।

एक काम जिसका मेरा स्वयं का बहुत अच्छा अनुभव है। मैं जब गुजरात में काम करता था तो गुजरात के मुख्यमंत्री के नाते एक महत्वपूर्ण initiative हमने लिया था। हिंदुस्तान में हमने सबसे पहले इस काम को किया था, और वो था soil testing। आमतौर पर हम developing countries में मनुष्य का भी health card नहीं होता है। लेकिन हमने कोशिश की थी कि soil health card बने। किसान के पास जो जमीन है, उस जमीन में क्या गुण हैं, क्या अवगुण हैं, क्या अच्छाईयां हैं, क्या बिमारियां हैं, वो ज़मीन किस crop के लिए उपयुक्त है, किस crop के लिए अनउपयुक्त है, किस ज़मीन पर कौन सी दवाई सूट करेगी, कौन सी दवाई सूट नहीं करेगी - ये सारी चीज़ें soil testing से संभव होती हैं। ये करने से औसत एक एकड़ भूमि में किसान फसल तो ज्यादा कर ही सकता है, लेकिन साथ-साथ, जो फालतू खर्चे होते हैं- गलत दवाईयां डाल देता है, गलत fertilizer डाल देता है, गलत crop डाल देता है, वो सब उसका बच जाता है और करीब-करीब एक एकड़ भूमि में 15-20 हज़ार तो सहज रूप से उसकी मदद हो जाती है। ये soil testing का काम नेपाल में भी हो, ये बात मैंने पिछली बार प्रधानमंत्री जी से मैं जब मिला तो कही थी कि आपको लाभ होगा। तो उन्होंने कहा कि देखेंगे और मुझे लगा कि मैं सुझाव देके चला हूं, वो शोभा नहीं देता है, मुझे कुछ करना चाहिए। तो आज हम एक Mobile soil test laboratory नेपाल को भेंट दे रहे हैं। उसकी पूरी technology दे रहे हैं। उससे पता चलेगा कि निश्चित एरिया में इस प्रकार की जांच हो गई। आप देखिए, उसको अगर बाद में आप चलाएंगे तो बहुत लाभ होगा, तो एक बहुत बड़ा काम।

हमने पिछली बार कहा था कि people-to-people contact. देश जुड़ते हैं, तब जब जन जुड़ता है। और जन भी तब जुड़ता है जब मन जुड़ता है। लेकिन मन जुड़ने की, जन जुड़ने की प्रक्रिया कुछ व्यवस्था के तहत होती है। और इसलिए हम चाहते थे कि जन-जन संपर्क बढ़ना चाहिए। इसीलिए हमने Youth Exchange की बात की थी। मुझे खुशी है कि Youth Exchange Programme में पहली बैच already हिंदुस्तान पहुंची हुई है। इन दिनों कलकत्ता युनिवर्सिटी में वे नौजवान, सारे नेपाल के - वहां का नजारा देख रहे हैं, अभ्यास कर रहे हैं, वहां के लोगों से मिल रहे हैं, बातचीत कर रहे हैं।

तो एक एक चीज़ हम तेजी से कर रहे हैं।

दूसरा, मैंने कहा था - हम नेपाल को e-library देंगे। मुझे खुशी है कि नेपाल सरकार की तरफ से और नेपाल के कुछ प्रमुख लोगों की तरफ से, e-library उनको कैसी चाहिए, उसके बहुत अच्छे सुझाव आए। मैं मानता हूं कि हमारे लिए भी सीखने जैसे अच्छे सुझाव आए। मैं मानता हूं कि ये जो आपका सक्रिय योगदान था, तो e-library का काम बहुत तेजी से आगे बढ़ रहा है। जैसी आपकी अपेक्षा है, उन आपके सुझावों को संकलित करते हुए, उस e-library को हम प्रारंभ करेंगे। मैं मानता हूं कि वक्त बदल चुका है। 21वीं सदी ज्ञान की सदी है। जो ज्ञान के उपासक हैं, उनका ये युग आने वाला है। नेपाल और भारत की इस भूखंड की सांस्कृतिक ज्ञान की उपासना की संस्कृति रही है। नेपाल भी ज्ञान की उपासना वाली संस्कृति की विरासत को लेकर चल रहा है और इसलिए e-library उस ज्ञान वर्धन का एक बहुत बड़ा माध्यम बनेगी। ये युग ऐसा है कि जितनी highways की जरूरत है उतनी ही i-ways की जरूरत है। Highways भी चाहिए information-ways भी चाहिए। e-library एक प्रकार से i-ways का काम करेगी और जो हम नेपाल में प्रवेश करने वाले रास्ते ठीक करेंगे, वो highways का काम करेंगे। भारत आपकी highways की भी चिंता करेगा, i-ways की भी चिंता करेगा और उस काम को हम आगे बढ़ाएंगे।

हमारा सुरक्षा सहयोग भी.. बहुत ही एक विश्वास का वातावरण चाहिए। सुरक्षा का काम तब होता है, जब दो देश के बीच में अटूट विश्वास हो, भरोसा हो। और आज भारत और नेपाल के बीच में विश्वास का ताना बाना इतना मजबूत हुआ है कि जिसके कारण रक्षा के क्षेत्र में भी भारत और नेपाल मिल करके काम कर रहे हैं।

आज मेरे लिए खुशी की बात है कि हम एक ‘ध्रुव हेलीकॉप्टर’ जो सेना के काम आएगा, वो आज भारत की तरफ से नेपाल को हम समर्पित कर रहे हैं। मुझे विश्वास है कि नेपाल को एक अच्छा रक्षा कवच मिलेगा, वो एक नई ताकत बनेगा। यहां पर पुलिस एकेडेमी का काम भी, उसका foundation stone, उसकी चिंता भी हम करेंगे।

यानि अनगिनत चीज़ें, सौ दिन के भीतर-भीतर, अनगिनत चीज़ों का एक के बाद एक हो जाना, ये अपने आप में ही दो सरकारों के बीच विश्वास की ताकत कितनी बड़ी गति देती है, कितना बड़ा परिणाम देती है।

मेरा ये सौभाग्य रहा कि पिछली बार जब मैं आया, तब आपकी संविधान सभा को संबोधित करने का मुझे अवसर मिला था। Constituent Assembly को संबोधित करने का अवसर मिला था। एक प्रकार से नेपाल के सभी stake holdres कहिए, नेपाल की सभी क्रीम कहिए - उस सभी विशाल समूह के सामने मैं आया था। तब मैंने कहा था कि नेपाल जितना जल्द अपना सविंधान बनाएगा, उतना ही नेपाल के भविष्य के लिए वो एक नई ताकत मिलेगी। नेपाल के संविधान के निर्मिति में जितना विलंब होगा, वो विलंब नेपाल के लिए अच्छा नहीं होगा। संविधान आप बनाएं, आपके तरीके से बनाइए, आपके निर्णय होंगे, भारत का उसमें कोई दखल नहीं हो सकता, होना भी नहीं चाहिए। लेकिन, आपकी खुशी, हमें मुस्कुराहट देती है और इसलिए भी संविधान का जल्दी बनना बहुत ज़रूरी है। मेरा यह भी आग्रह था कि संविधान के अंदर एक ऐसा गुलदस्ता बने कि नेपाल के हर कोने में रहने वाले व्यक्ति को लगे कि मेरा भी फूल उस गुलदस्ते में है। मेरे फूल की महक भी उस गुलदस्ते में है। कभी मधेसी को यह नहीं लगना चाहिए कि हमारा पूछने वाला कौन? कहीं पहाड़ी को यह नहीं लगना चाहिए कि हमारा पूछने वाला कौन? माओवादी को यह नहीं लगना चाहिए कि हमारा पूछने वाला कौन? ये संविधान ऐसा होना चाहिए कि जिसमें हर किसी की आवाज़ हो, हर किसी के सपने हों, हर किसी के अरमान हों, हर किसी को काम करने का अवसर हो। इस काम में नेपाल की संविधान सभा बहुत अच्छे ढंग से आगे बढ़ रही है, लेकिन समय बहुत जा रहा है।

इसलिए मैं आज सार्वजनिक रूप से आज नेपाल के सभी राजनीतिक नेताओं से आग्रह करूंगा कि सविंधान का निर्माण सहमति से ही करने से फायदा होगा। संख्या के बल पर संविधान का निर्माण कभी भी नेपाल का भला नहीं करेगा। सहमति से संविधान बने और आगे चलकर भी - आज भी, भारत का संविधान, इतने वर्ष हो गए, हर वर्ष हम कुछ न कुछ amendment करते ही जाते हैं। और वो amendment दो तिहाई से करते हैं। एक बार सविंधान सहमति से बने, बाद में संसद बने और संसद में दो चार चीज़े जोड़नी, कम करनी लगती हैं, तो आप दो तिहाई बहुमत से ज़रूर कर सकते हैं। लेकिन, पहला प्रारूप अगर सबको अपना नहीं लगता है तो नेपाल को बहुत बड़ी कठिनाई आएगी।

आपके एक मित्र देश के नाते, आपको दुख हो, आपको कठिनाई हो और हमें समझ हो, तो वो स्थिति हम देखना नहीं चाहते हैं। फिर एक बार, आज सार्वजनिक रूप से, जिस प्रकार से ज़िंदगी बचाने के लिए ये Trauma Center काम आ रहा है, उसी प्रकार से नेपाल के सपनों को संवारने के लिए संविधान एक अवसर बन करके आ रहा है। मैं चाहूंगा कि संविधान की पवित्रता, उसी पवित्र भाव से..और मैंने कहा था कि ऋषि-मन होगा तो संविधान बनेगा, संविधान सभा में बैठे हर व्यक्ति का ऋषि-मन होना चाहिए और ऋषि-मन को लेकर संविधान का निर्माण होगा, ये मैंने आग्रह से कहा था।

मैं आज फिर नेपाल की धरती पर आया हूं। मैं विश्वनाथ की धरती पर काम करता हूं, पशुपतिनाथ की धरती पर आया हूं। तो मेरा भी आपको प्रार्थना करने का हक बन जाता है। मैं प्रार्थना करने आया हूं। मैं उसी धरती से आया हूं। बोध गया से मैं आज एक पौधा ले करके आया हूं, जो हमारे एम्बेसेडर लुम्बिनी में जा करके उसको रोपित करने वाले हैं। एक ऐसा संदेश ले करके आया हूं जो हमें सांस्कृतिक प्राणशक्ति देता रहता है और उस भरोसे भी मैं कह सकता हूं कि मैं प्रार्थना करता हूं कि आप संविधान बनाने के काम में विलंब मत कीजिए। सहमति से बनाने का ही प्रयास कीजिए और सारे रास्ते नए संकटों को जन्म देंगे। मैं अयोध्या और जनकपुरी का नाता जानता हूं, इसलिए भी हम लोगों को आपसे प्रार्थना करने का हक बनता है कि आप सहमति से संविधान का निर्माण कीजिए, जल्द कीजिए। लोगों की आशाओं पर आप खरे उतरें।

आप देखिए कि आप लोगों का नेतृत्व नेपाल को कहां से कहां पहुंचाएगा और युग इस भूभाग के भविष्य का है। एशिया के भविष्य का समय है। नेपाल को ये मौका चूकना नहीं चाहिए। विश्व के अंदर एक ताकत बन करके नेपाल ने खड़े होना चाहिए। लोकतांत्रिक व्यवस्था नेपाल को एक नई ताकत देगी, नई पहचान देगी, विश्व नेपाल को स्वीकार करने लग जाएगा। ये स्थिति आपके हाथों में है, मौका आपके पास है। 30-40 दिन का समय बचा है। मैं विश्वास करता हूं कि इस काम को आप आगे बढ़ाएंगे।

फिर एक बार, ये Trauma Center यहां के किसी भी पीड़ित को बचाने के काम आएगा, भारतवासियों को बहुत संतोश होगा। हमारे लिए एक प्रकार से ‘सेवा परमोधर्म’, जीव-दया का ये काम हुआ है, एक मन के संतोश के साथ, मुझे इस अवसर पर आने का अवसर मिला, मैं आपका बहुत बहुत आभारी हूं। प्रधानमंत्री जी का बहुत बहुत आभारी हूं। उनके परिवार में संकट होने के बाद भी, जिस उमंग और उत्साह के साथ इस पूरे सार्क समिट की आप चिंता कर रहे हैं। पूरा नेपाल अभिनंदन का अधिकारी है। मैं ऐयरपोर्ट से उतरा हूं, मैं देख रहा हूं, क्या उत्साह है, क्या उमंग है। आपने सार्क देशों के सभी नेताओं का दिल जीत लिया है। इन व्यवस्थाओं के लिए नेपाल ने जो ताकत दिखाई है, अपनापन दिखाया है, बहुत बहुत अभिनंदन के अधिकारी हैं। प्रधानमंत्री जी को और पूरे नेपाल को मैं हृदय से नमन करता हूं, बहुत बहुत अभिनंदन करता हूं।

धन्यवाद।

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आज उत्तर प्रदेश और पूरा देश वर्ल्ड-क्लास इंफ्रास्ट्रक्चर के नए दौर का गवाह बन रहा है: मेरठ में पीएम मोदी
February 22, 2026
आज उत्तर प्रदेश और पूरा देश विश्व स्तरीय अवसंरचना के एक नए युग का साक्षी बन रहा है: प्रधानमंत्री
मेरठ मेट्रो, नमो भारत ट्रेन और RRTS के नए सेक्शन के उद्घाटन से NCR में लोगों की जिंदगी और भी आसान, सुगम और सुविधाजनक हो जाएगी: पीएम
हमारी कार्य संस्कृति ऐसी है कि एक बार किसी कार्य की नींव रख दी जाए, तो उसे पूरा करने के लिए दिन-रात काम किया जाता है, यही कारण है कि अब परियोजनाएं पहले की तरह लंबित नहीं रहती: प्रधानमंत्री
चाहे नमो भारत हो या मेट्रो सेवा, मुझे दोनों की नींव रखने का अवसर मिला और आज मुझे इनका उद्घाटन करने का सौभाग्य भी प्राप्त हुआ है: प्रधानमंत्री
देश में पहली बार ऐसा हो रहा है कि नमो भारत और मेट्रो रेल एक ही स्टेशन और एक ही ट्रैक पर चलेंगी: प्रधानमंत्री
एक ही प्लेटफॉर्म से शहर के भीतर यात्रा की जा सकेगी और उसी स्टेशन से दिल्ली से आने-जाने की सीधी सुविधा भी उपलब्ध होगी: प्रधानमंत्री
आज विश्व के कई विकसित देश भारत के साथ व्यापार समझौते कर रहे हैं: प्रधानमंत्री
आज विकसित देश भारत के साथ साझेदारी करने के लिए उत्सुक हैं, ऐसा इसलिए है क्योंकि वे भारत के विकास में अपना भविष्य देखते हैं और भारत की युवा शक्ति में आशा देखते हैं: प्रधानमंत्री
आज, विश्व को लगता है कि भारत वह शक्ति है जो 21वीं सदी की चुनौतियों का समाधान प्रदान कर सकती है: प्रधानमंत्री
मेरठ-हापुड़ क्षेत्र लंबे समय से चौधरी चरण सिंह जी के विजन का गवाह रहा है। उन्हें भारत रत्न से सम्मानित करना हमारी सरकार का सौभाग्य रहा है: पीएम

भारत माता की जय।

भारत माता की जय।

भारत माता की जय।

उत्तर प्रदेश के लोकप्रिय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी, केंद्रीय मंत्रिमंडल के मेरे साथी पंकज चौधरी जी, जयंत चौधरी जी, उत्तर प्रदेश के उप-मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक जी, यूपी सरकार के मंत्रीगण, सांसद में मेरे साथीगण, विधायकगण, और विशाल संख्या में आए हुए मेरे प्यारे भाइयों और बहनों!

बाबा औघड़नाथ की इस पावन धरती पर, मेरठ की क्रांतिधरा पर, आज विकसित उत्तर प्रदेश, विकसित भारत, इसके लिए नई क्रांति को ऊर्जा मिल रही है। आज पहली बार, एक ही मंच से नमो भारत रैपिड रेल और मेट्रो सेवा का, एक ही दिन शुभारंभ हो रहा है। विकसित भारत की कनेक्टिविटी कैसी होगी, ये उसकी एक शानदार झांकी है। शहर के भीतर के लिए मेट्रो, और ट्विन सिटीज के विजन को गति देने के लिए नमो भारत जैसी आधुनिक ट्रेन, मुझे संतोष है, ये काम उत्तर प्रदेश में हुआ है।

भाइयों और बहनों,

आज का ये कार्यक्रम, भाजपा की डबल इंजन सरकार की कार्य-संस्कृति को भी दर्शाता है। और हमारी कार्य संस्कृति क्या है? हमारी कार्य संस्कृति है कि जिस काम का शिलान्यास किया जाए, उसे पूरा करने के लिए, दिन रात एक कर दिया जाए। और इसलिए अब परियोजनाएं पहले की तरह लटकती, भटकती नहीं हैं। नमो भारत या मेट्रो सेवा, दोनों का शिलान्यास करने का अवसर आप सबने मुझे दिया था। और आज मुझे ही इनके लोकार्पण का भी सौभाग्य मिला है।

साथियों,

थोड़ी देर पहले मैंने मेरठ मेट्रो में सफर किया है। इस दौरान मेरी स्कूल-कॉलेज के अनेक युवाओं से और अन्य यात्रियों से बातचीत हुई है। सबका यही कहना था, कि इतने शानदार काम की उन्होंने कल्पना भी नहीं की थी। और सब के सब लोग, वो पुराने दिनों को याद कर रहे थे। और खासतौर पर बहनों-बेटियों ने मुझे बताया, कुछ साल पहले तक शाम होते ही, पूरे रूट में सन्नाटा छा जाता था। यहां डर और भय का माहौल होता था। अब एक तरफ कानून-व्यवस्था भी सुधरी है और दूसरी तरफ, लोगों को सुविधापूर्ण और सुरक्षित यात्रा का भी माध्यम मिला है।

और साथियों,

मुझे खुशी है कि ये नमो भारत रैपिड रेल से, ये नारी-शक्ति के सामर्थ्य का प्रतीक भी बनी है। इसमें ट्रेन ऑपरेटर, स्टेशन कंट्रोल स्टाफ, ऐसे अधिकतर काम में हमारी बेटियां ही कार्यरत हैं, बेटियां ही नेतृत्व कर रही हैं। मैं आप सभी को, उत्तर प्रदेश को, और दिल्ली वासियों को देश की पहली नमो भारत रैपिड रेल सेवा और मेरठ मेट्रो के लिए बहुत-बहुत बधाई देता हूं।

साथियों,

मेरठ की इस धरती से मेरा भी एक विशेष नाता रहा है। जब 2014 के चुनाव हुए, 2019 के चुनाव हुए और 2024 के लोकसभा चुनाव हुए, तो मेरठ से ही मेरी चुनावी सभाओं की शुरुआत हुई। मेरठ के आप लोगों ने, यहां के किसानों ने, उद्यमियों ने, लघु उद्योगों से जुड़े श्रमिकों ने, कारीगरों ने, दुकानदारों ने, मुझे हमेशा बहुत आशीर्वाद दिया है।

और साथियों,

मैंने तब भी कांग्रेस और सपा-बसपा को कहा था कि अपनी जहरीली राजनीति छोड़िए और आइए, विकास के मुद्दे पर मुकाबला करके देखते हैं।

साथियों,

इन दलों ने तो अपनी जहरीली राजनीति नहीं बदली, लेकिन भाजपा ने विकास और अपनी नीति रीति, अपनी नीयत में अगर एक बात को सर्वोपरि रखा, तो वो है विकास, देश का विकास। इसका एक उदाहरण हमारी मेट्रो भी है, मेरठ मेट्रो भी है।

साथियों,

2014 से पहले भारत में मेट्रो का विस्तार, बहुत ही धीमी गति से हो रहा था। हालत ये थी कि कांग्रेस सरकार के समय में देश के सिर्फ 5 शहरों में ही मेट्रो चल पाई थी। जबकि आज भाजपा सरकार में देश के 25 से ज्यादा शहरों में मेट्रो चलने लगी है। आज भारत, मेट्रो के मामले में दुनिया का तीसरा बड़ा नेटवर्क बन चुका है। यूपी में मेरठ के अलावा भी कई सारे शहरों में मेट्रो पर काम चल रहा है।

साथियों,

बीते 11 वर्षों में देश के दर्जनों शहरों तक मेट्रो पहुंची, क्योंकि भाजपा सरकार देश की जनता को सुविधा देना चाहती है, देशवासियों को हाई-स्पीड, जाम और प्रदूषण से मुक्त सुविधा, ऐसे हर प्रकार की व्यवस्था देना चाहती है। इसलिए, आज नमो भारत जैसी आधुनिक सेमी-हाईस्पीड ट्रेन चल रही है, वंदे भारत ट्रेन चल रही है।

साथियों,

कांग्रेस-सपा की जब दिल्ली में सरकार थी, तब ये सब संभव ही नहीं था। क्योंकि तब इंफ्रास्ट्रक्चर के प्रोजेक्ट्स घोटालों में ही गुम हो जाते थे। मेट्रो जैसे और उससे जुड़ी अधिकतर टेक्नॉलॉजी भी हमें विदेशों से आयात करनी पड़ती थी। हमने घोटाले भी बंद किए, और देश को आत्मनिर्भरता के रास्ते पर भी आगे बढ़ाया। क्योंकि भाजपा की प्राथमिकता, देश का विकास है, देशवासियों की सुविधा और समृद्धि है। आप यहीं देखिए, मेरठ वासियों का, पश्चिम यूपी वासियों का जीवन कैसे बदलने वाला है। सराय काले खां, आनंद विहार, गाज़ियाबाद और मेरठ, इन स्टेशनों पर भारतीय रेल, मेट्रो और बस अड्डों को आपस में जोड़ा गया है। देश में ये पहली बार हो रहा है, जब एक ही स्टेशन, एक ही ट्रैक पर नमो भारत और मेट्रो रेल चलेगी। यानी एक ही प्लेटफॉर्म से आप शहर के भीतर भी यात्रा कर पाएंगे, और उसी स्टेशन से सीधे दिल्ली भी आ-जा सकते हैं। इससे मेरठ के आप जैसे हजारों साथियों को फायदा होगा, जो पढ़ाई के लिए, नौकरी के लिए, अन्य कामकाज के लिए, रोज़ाना दिल्ली आते-जाते हैं। जो लोग दिल्ली में नौकरी करते हैं और जिनका घर मेरठ में है, उनके लिए अब दिल्ली में किराए के घर में रहने की मजबूरी भी खत्म हुई है।

साथियों,

आज भाजपा की डबल इंजन सरकार, आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर पर जो इतना सारा पैसा खर्च कर रहा है, उससे आपका पैसा भी बचता है और युवाओं को रोजगार भी मिलता है। यहां पश्चिम यूपी में ही देखिए, कैसे नए-नए एक्सप्रेसवे बन रहे हैं, डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर बन रहे हैं, जेवर में इंटरनेशनल एयरपोर्ट बन रहा है, ये प्रोजेक्ट जब बनते हैं तब भी रोजगार मिलते हैं, और बाद में नए उद्योग लगते हैं, नए कारोबार आते हैं, उससे भी रोजगार पैदा होते हैं।

साथियों,

उत्तर प्रदेश की ये धरती तो श्रम की धरती है, ये सृजन की धरती है। यहां के किसान हों, पशुपालक हों, छोटे-लघु उद्यमी हों, बुनकर-शिल्पकार हों, ये सभी विरासत और विकास के मंत्र को साकार कर रहे हैं। ऐसे में जब भारत का सामर्थ्य बढ़ता है, तो उत्तर प्रदेश के इन सभी साथियों को भी फायदा होता है।

साथियों,

आप आजकल देख रहे हैं कि दुनिया के प्रति और दुनिया के लोगों के मन में भारत के प्रति कितनी आस्था है, लोग कितने आशावान हैं। दुनिया के अनेक विकसित देश, आज भारत के साथ व्यापारिक समझौते कर रहे हैं। एक समय था, जब कांग्रेस की सरकार चाहकर भी विकसित देशों के साथ समझौते नहीं कर पाती थी। क्योंकि तब घोटालों के लिए बदनाम कांग्रेस सरकार से समझौते करने में दुनिया को हिचक होती थी। लेकिन आज विकसित देश, भारत के साथ जुड़ने के लिए उत्सुक हैं। क्योंकि उनको भारत के विकास में अपना भविष्य दिखता है, उनको भारत की युवाशक्ति में उम्मीद दिखती है। आज दुनिया को लगता है, कि भारत वो ताकत है, जो इक्कीसवीं सदी की चुनौतियों का समाधान दे सकता है।

साथियों,

बीते वर्षों में भाजपा की सरकार ने जो वैश्विक समझौते किए हैं, उससे लघु और कुटीर उद्योगों से जुड़े लोगों को भी बहुत फायदा होगा। इसका फायदा, मेरठ के स्पोर्ट्स का सामान बनाने वालों को होगा, मेरठ की ही कैंची, खुर्जा की क्रॉकरी, मुरादाबाद का पीतल, बागपत का होम फर्निशिंग उद्योग, सहारनपुर की लकड़ी की नक्काशी, लैदर, टेक्स्टाइल, ज्वैलरी से जुड़े उद्योग, ऐसे हर लघु और कुटीर उद्योगों को इन समझौतों का बहुत बड़ा लाभ होने वाला है। भाजपा की प्राथमिकता, देश के छोटे-बड़े शहरों के सामर्थ्य को, दुनिया के कोने-कोने तक ले जाना है, यूपी के अलग-अलग जिलों की पहचान बढ़ाना है।

साथियों,

हमारा मेरठ और ये पूरा क्षेत्र, लघु उद्योगों का, MSMEs का बहुत बड़ा सेंटर है। इस वर्ष जो केंद्र सरकार का बजट आया है, उसमें हमने लघु उद्योगों के लिए 10 हजार करोड़ रुपए के विशेष फंड की घोषणा की है। इससे यूपी के MSMEs को लोन मिलना बहुत आसान हो जाएगा। बजट में हमने कपड़ा उद्योग के लिए, बुनकर समाज के लिए, महात्मा गांधी ग्राम स्वराज योजना की घोषणा की है। इससे खादी, हैंडलूम, हस्तशिल्प को विश्व बाज़ार तक पहुंचाने में मदद मिलेगी।

साथियों,

पहले छोटे कारीगर केवल 10 लाख रुपए तक का सामान कूरियर से भेज सकते थे। अब यह सीमा पूरी तरह हटा दी गई है। इससे मेरठ सहित, यूपी के सभी बुनकर, और अन्य छोटे उद्यमी, ऑनलाइन ऐप के ज़रिए, अमेरिका या यूरोप के ग्राहकों को भी अपने प्रोडक्ट आसानी से भेज पाएंगे।

साथियों,

मेरठ-हापुड़ और आसपास के इस क्षेत्र ने, चौधरी चरण सिंह जी के विजन को शुरुआती दिनों से देखा है। ये हमारी सरकार का सौभाग्य रहा, कि हमें चौधरी चरण सिंह जी को भारत रत्न देने का सौभाग्य मिला। भाजपा की डबल इंजन सरकार, उनके विजन पर चलते हुए किसानों की आय बढ़ाने के लिए लगातार काम कर रही है। इसके लिए फूड-प्रोसेसिंग पर बहुत बल दिया जा रहा है। पीएम किसान सम्मान निधि का पैसा भी छोटे किसानों के बहुत काम आ रहा है। अब तक यूपी के किसानों को पीएम किसान सम्मान निधि के तहत, लगभग 95 हज़ार करोड़ रुपए मिल चुके हैं। इसमें मेरठ के किसानों को भी लगभग 800 करोड़ रुपए मिले हैं।

भाइयों और बहनों,

एक तरफ आज देशवासी, भारत को विकसित बनाने के लिए दिन-रात मेहनत कर रहे हैं। लेकिन देश में ही कुछ राजनीतिक दल हैं, जो भारत की इस सफलता को पचा नहीं पा रहे। अभी आपने देखा, भारत में दुनिया का सबसे बड़ा AI सम्मेलन हुआ। दुनियाभर के 80 से अधिक देशों से प्रतिनिधि दिल्ली आए। दुनिया के करीब 20 देशों के राष्ट्राध्यक्ष भारत आए, लाखों लोग हिन्दुस्तान के कोने-कोने से दिल्ली में जुटे थे। दुनिया के विकासशील देशों में ऐसा सम्मेलन आज तक कभी नहीं हुआ। मैं जरा मेरठ के लोगों को पूछना चाहता हूं, ये जो एआई सम्मेलन हुआ, आपको गर्व हुआ की नहीं हुआ? पूरी ताकत से बातइये, आपको गर्व हुआ की नहीं हुआ? आपका माथा ऊंचा हुआ कि नहीं हुआ? आपका सीना चौड़ा हुआ कि नहीं हुआ, ये काम भारत के लिए हुआ कि नहीं हुआ है? भारत के युवाओं के लिए हुआ कि नहीं हुआ है? भारत के भाग्य को बदलने के लिए हुआ है कि नहीं हुआ है? 21वीं सदी में लीडरशिप लेने के लिए हुआ है कि नहीं हुआ है? पूरा देश गर्व से भर गया। लेकिन कांग्रेस और इसके इकोसिस्टम ने क्या किया?

साथियों,

कांग्रेस ने भारत के एक वैश्विक आयोजन को, अपनी गंदी और नंगी राजनीति का अखाड़ा बना दिया। समारोह स्थल पर विदेशी अतिथियों के सामने कांग्रेस के नेता कपड़े उतारकर पहुंच गए, मैं कांग्रेस वालों को पूछता हूं, देश तो जानता है आप पहले से ही नंगे हो, फिर कपड़े उतारने की जरूरत क्या पड़ी। कांग्रेस के नेताओं ने वहां जो कुछ किया, वो दिखाता है कि देश की सबसे पुरानी पार्टी, वैचारिक रूप से कितनी दिवालिया हो गई है, कितनी दरिद्र हो गई है।

साथियों,

कोई कल्पना नहीं कर सकता है, हम तो वो लोग हैं, जो गांव में किसी के यहां शादी ब्याह होता है, तो पूरा गांव उसे सफल बनाने में जी-जान से जुट जाता है। ताकि मेहमान, गांव की एक अच्छी छवि लेकर जाएं। कांग्रेस तो अपने ही देश को बदनाम करने में जुटी है।

साथियों,

कांग्रेस के नेताओं को मोदी से नफरत है, ये लोग मेरी कब्र खोदना चाहते हैं, मेरी मां को गाली देने से भी उनको कोई परहेज नहीं है, उन्हें भाजपा से विरोध है, उन्हें एनडीए से विरोध है, ठीक है आपकी राजनीति में यही करना जरूरी है, चलो भई समझ सकते हैं, हम इसको भी सहन कर लेंगे। लेकिन कांग्रेस को याद रखना चाहिए था, कि AI ग्लोबल समिट, ये बीजेपी का समारोह नहीं था और न ही उस समय बीजेपी का कोई नेता वहां मौजूद था, ये देश का कार्यक्रम था, देश के सम्मान का कार्यक्रम था, देश के लोगों के पसीने से, लेकिन कांग्रेस ने परसो सारी मर्यादाएं तोड़ दीं। और पूरा देश, कांग्रेस की इस रीति नीति पर थू-थू हो रही है। लेकिन दुर्भाग्य देखिए, इतनी पुरानी पार्टी के नेता लाजने के बजाय गाजते हैं, बेशर्मी के साथ देश की बेज्जती करने वालों का जयकारा कर रहे हैं। और ये मामला कांग्रेस की हरकतों का लगातार चल रहा है। पार्लियामेंट में क्या किया, पार्लियामेंट में खुद परफोर्म कर नहीं पा रहे, तो अपने साथी दलों को भी बोलने का मौका नहीं देते, पार्लियामेंट को चलने नहीं देते। और उसका सबसे बड़ा नुकसान, कांग्रेस के जो साथी दल है ना उनको हो रहा है, अब वो समझ गए हैं। ये अभी दिल्ली में जो उन्होंने नंगापन दिखाया, उनके सारे साथी दल चौंक गए हैं, सबने किनारा कर लिया, और मैं नम्रता पूर्वक देश के मीडिया को भी एक रिक्वेस्ट करना चाहता हूं, वैसे मैं मीडिया को हर प्रकार से झेलने के लिए ईश्वर मुझे शक्ति दे, प्रार्थना करता रहता हूं। लेकिन आज मैं उनको प्रार्थना कर रहा हूं कि कृपा करके हम जब इस प्रकार की हरकतों की आलोचना करें, तो आप ये हेडलाइन मत बनाइये, कि मोदी ने विपक्ष को धो डाला, आप कांग्रेस को बचाने की ये चालाकियां बंद कीजिए। ये विपक्ष – विपक्ष करके आप कांग्रेस को बचा रहे हैं और विपक्ष में जो और साथी बैठे हैं, वो भी समझ गए हैं कि पाप कांग्रेस करती है और भुगतना उनको पड़ता है, और कांग्रेस की इकोसिस्टम हर बार बचकर निकलने का ये खेल खेलती है, कि पाप कांग्रेस करे, आलोचना कांग्रेस की हो, गुस्सा कांग्रेस पर हो, लेकिन मीडिया में कांग्रेस नहीं दिखती, विपक्ष शब्द दिखता है, क्यों भई, क्यों कांग्रेस को बचा रहे हो। ऐसा करने से आप न कांग्रेस को बचा पाते हो, न कांग्रेस को सुधरने के लिए मजबूर करते हो। अगर आप एक बार छापना शुरू कर दोगे, बोलना शुरू कर दोगे, ये जनरल विपक्ष का दोष नहीं, और देखिए दिल्ली में जो हुआ, क्या उसमें कोई टीएमसी के लोगों ने पाप किया है, नहीं किया है, डीएमके के लोगों ने पाप किया है, नहीं किया है, बसपा के लोगों ने पाप किया है, नहीं किया है, फारूख अब्दुल्ला जी की पार्टी ने पाप किया है, नहीं किया है, सिर्फ और सिर्फ, सरफिरे नेता, कांग्रेस के बेलगाम नेता, देश को तबाह करने पर तुले हुए हैं। अगर आपको प्रधानमंत्री की कुर्सी पर बैठना है, तो पहले आपको जनता के दिल जीतने पड़ेंगे। महिला एमपीओं को भेजकर के सीट पर कब्जा करने से आप प्रधानमंत्री नहीं बन सकते हो, और माताओं-बहनों को इस प्रकार से आगे करने की क्या मजबूरी है आपकी, क्या इतने खोखले हो गए हो आप लोग।

साथियों,

कांग्रेस देश के लिए बोझ बन गई है, और मुझे इस बात का संतोष है कि दिल्ली में जो घटना घटी, कांग्रेस के सभी साथी दलों ने, कांग्रेस की भरपूर आलोचना करने की हिम्मत दिखाई है। मैं विपक्ष के इन साथियों का सच्चाई के साथ और देश के गौरव के साथ खड़े रहने के लिए, उनका मैं सार्वजनिक रूप से आभार व्यक्त करता हूं।

साथियों,

भाजपा सरकार के लिए देश का विकास, यूपी का विकास सर्वोपरि है। लेकिन आप याद करिए, 10 साल पहले तक, यूपी की चर्चा किन बातों के लिए होती थी? हर किसी को, मेरठ के दंगे, पश्चिम यूपी में क्रिमिनलों की गैंग, खराब सड़कें, बिजली की कटौती और पिछड़ेपन की परिस्थितियां, यही कुछ चर्चा में रहता था। पश्चिमी यूपी के अपराध पर फिल्में बनती थीं, फिल्में। सपा सरकार ने यूपी का ये हाल करके रखा था। लेकिन आज यूपी को विकास के लिए जाना जा रहा है। आज हमारे यूपी को, ब्रह्मोस के लिए, मोबाइल फोन बनाने और एयरपोर्ट के लिए, पर्यटकों की सुविधा लगातार बढ़ती संख्या के लिए जाना जाता है। यूपी, स्पोर्टिंग इकोसिस्टम में भी अपनी पहचान बढ़ा रहा है। मेरठ में स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी का काम तेजी से पूरा किया जा रहा है।

साथियों,

सपा राज में जो अपराधी बेखौफ घूमा करते थे, वो आज योगी जी की सरकार में जेलों में दिन बिता रहे हैं। आज किसी की हिम्मत नहीं है, कि कॉलेज से पढ़कर निकल रही हमारी किसी बेटी का अपमान कर सके।

साथियों,

जब कानून व्यवस्था सुधरती है, तो व्यापार-कारोबार और दुकानदारी के लिए भी माहौल बनता है। इसलिए आज यूपी की अर्थव्यवस्था में भी जबरदस्त उछाल देखने को मिल रहा है। योगी जी के नेतृत्व में यूपी देश का बड़ा मैन्यूफैक्चरिंग हब बन रहा है। कल ही मुझे यूपी की पहली सेमीकंडक्टर फैक्ट्री का शिलान्यास करने का अवसर मिला है। इस सेमी-कंडक्टर फैक्ट्री के बनने से यूपी का सामर्थ्य और ज्यादा बढ़ जाएगा। इससे यहां नए निवेश, नए रोजगार के लिए अद्भुत संभावनाएं बनेंगी। मैं आपको विश्वास दिलाता हूं, भाजपा की डबल इंजन सरकार, ऐसे ही यूपी को देश की सबसे बड़ी इकॉनॉमी बनाने के लिए काम करती रहेगी। यूपी विकसित होगा, तो ही भारत विकसित होगा। एक बार फिर आप सभी को नमो भारत ट्रेन और मेट्रो प्रोजेक्ट के लिए बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं। ये वंदे मातरम के 150 वर्ष मना रहे हैं। मेरे साथ बोलिये-

वंदे मातरम् !

वंदे मातरम् !

वंदे मातरम् !

वंदे मातरम् !

वंदे मातरम् !

वंदे मातरम् !

वंदे मातरम् !

वंदे मातरम् !

वंदे मातरम् !

वंदे मातरम् !

वंदे मातरम् !

वंदे मातरम् !