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प्रधानमंत्री सुशील कोइराला जी, दक्षिण एशिया के मेरे सहयोगियों।

मैं काठमांडू लौटकर प्रसन्न हूं।

कोइराला जी, एक शानदार सम्मेलन के आयोजन पर बधाईयां।

एक बार फिर से आपकी गर्मजोशी से भरी मेहमाननवाजी के लिए नेपाल आपको धन्यवाद।

यहां उपस्थित पर्यवेक्षक देशों को बधाईयां।

यह मेरा पहला सार्क सम्मेलन है। लेकिन, आप में से ज्यादातर से मैं दूसरी बार मिल रहा हूं। मैंने पूरी दुनिया की बधाईयों के साथ पदभार ग्रहण किया। लेकिन प्यारे सहयोगियों, जिसने मेरा दिल छू लिया, वह दुनिया की एक चौथाई आबादी की शुभकामनाओं के साथ आपकी व्यक्तिगत उपस्थिति थी। क्योंकि मैं भारत के लिए जिस भविष्य का स्वप्न देखता हूं, मेरी इच्छा हमारे पूरे क्षेत्र के लिए वैसे ही भविष्य की है।

पिछला सम्मेलन तीन वर्ष पहले हुआ था। यहां उपस्थित हम में से केवल दो ही अड्डु में मौजूद थे। यहां तक कि प्रधानमंत्री शेख हसीना भी उनके फिर से चुने जाने के बाद यहां आई है। राष्ट्रपति राजपक्षे भी जल्द ही चुनाव का सामना करेंगे और मैं उन्हें शुभकामनाएं देता हूं। मैं विशेष रूप से हमारे सबसे नये सहयोगी, राष्ट्रपति गनी का स्वागत करता हूं।

हमारा क्षेत्र एक जीवंत लोकतंत्र का, समृद्ध विरासत का, युवाओं की अतुलनीय ताकत का और बदलाव तथा प्रगति के लिए मजबूत चाहत का क्षेत्र है।

पिछले कुछ महीनों में, मैंने पूरी दुनिया की यात्रा की है। प्रशांत के मध्य से लेकर अटलांटिक महासागर के दक्षिणी तट तक मैं एकीकरण का एक बढ़ता हुआ ज्वार देख रहा हूं। और, क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक साझेदारी, अंत: प्रशांत साझेदारी और अंत: अटलांटिक व्यापार एवं निवेश साझेदारी जैसे बड़े व्यापार समझौतों पर बातचीत बढ़ रही है।

क्योंकि सीमाओं के अवरोध प्रगति को अवरूद्ध करते हैं; अंतर्राष्ट्रीय साझेदारियां इसमें गति प्रदान करती हैं। क्योंकि, किसी भी व्यक्ति विशेष या राष्ट्र के जीवन में एक अच्छा पड़ोस एक सार्वभौमिक अभिलाषा होती है।

दक्षिण एशिया इस विश्व में कहां खड़ा होना चाहता है?

दुनिया में कहीं भी सामूहिक प्रयासों की उतनी जरूरत नहीं है, जितनी दक्षिण एशिया में; और कहीं भी यह उतनी विनम्र भी नहीं है। छोटी हो या बड़ी, हम एक ही चुनौती का सामना करते हैं – विकास के शिखर पर एक लंबी चढ़ाई की। लेकिन मुझे हमारी असीमित क्षमताओं में पूरा भरोसा है और आत्म विश्वास, जो हमारे देशों में से प्रत्येक से जुड़े नवाचारों और नवीन पहलों की कई प्रेरणादायी कहानियों से हमें मिलता है। हमें एक-दूसरे से काफी कुछ सीखना है और इससे भी ज्यादा – एक साथ मिलकर काम करना है।

यही वो उम्मीद और आकांक्षा थी, जिसने 30 वर्ष पहले सार्क के रूप में हमें एकजुट किया। तबसे हम एक साथ लंबी दूरी तय कर चुके हैं। हमारा प्रत्येक क्षेत्र में एक समझौता, एक संस्थान या सहयोग का एक ढांचा है। हमें कई सफलताएं भी मिली हैं।

फिर भी जब हम सार्क की बात करते हैं, तो आमतौर पर हमें दो प्रतिक्रियाएं सुनने को मिलती हैं – निराशावाद और संशयवाद की। दुख की बात है कि यह ऐसे क्षेत्र में है, जो हमारे युवाओं की आशावादिता से स्पंदित है।

आज, क्षेत्र के वैश्विक व्यापार का 5 प्रतिशत से भी कम हमारे बीच होता है। इस सीमित स्तर पर भी क्षेत्र के आंतरिक व्यापार का 10 प्रतिशत से भी कम सार्क मुक्त व्यापार क्षेत्र के तहत होता है। भारतीय कंपनियां विदेशों में अरबों का निवेश कर रही है। लेकिन हमारे अपने क्षेत्र में एक प्रतिशत से भी कम का प्रवाह होता है। अभी भी, बैंकाक या सिंगापुर की यात्रा करना हमारे अपने क्षेत्र के भीतर यात्रा करने से भी ज्यादा कठिन है; और एक दूसरे से बातचीत करनी ज्यादा महंगी है।

हमने अपनी प्राकृतिक संपदा को साझेदारी वाली समृद्धि में बदलने में या अपनी सीमाओं को एक साझेदारी वाले भविष्य के लिए एक मोर्चे के रूप में बदलने में सार्क में कितना कुछ किया है?

फिर भी, दक्षिण एशिया धीरे-धीरे एकजुट हो रहा है। भारत और बांग्लादेश ने रेल, सड़क, बिजली और पारगमन के जरिये अपने सम्पर्कों को मजबूत किया है। भारत और नेपाल ने ऊर्जा में सहयोग के एक नये युग की शुरूआत की है; और, भारत और भूटान उन रिश्तों को लगातार मजबूत बना रहे है। श्रीलंका के साथ, हमने एक मुक्त व्यापार समझौते के जरिये व्यापार को रूपांतरित कर दिया है। हम मालदीव की तेल की जरूरत की पूर्ति करने के लिए जल्दी ही एक नये समझौते की शुरूआत करेंगे। दूरियां और कठिनाईयां भारत और अफगानिस्तान के रिश्तों के बीच आड़े नही आई है। भारत और पाकिस्तान के लोगों के बीच बस और रेलगाड़ी का सम्पर्क बना हुआ है। हमने दक्षिण एशिया के पांच साझेदारों को उनकी वस्तुओं पर 99.7 प्रतिशत की निशुल्क पहुंच उपलब्ध कराई है और दूसरों के साथ भी ऐसा करने को तैयार है।

भारत को पिछले एक दशक के दौरान दक्षिण एशिया में लगभग 8 अरब डॉलर की आर्थिक सहायता मुहैया कराने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है।

आज के समय में यह एक बड़ी रकम प्रतीत नहीं होती हो, लेकिन हम कृतज्ञ हैं कि हमें हमारे क्षेत्र में कुछ भाईयों और बहनों के जीवन में एक बदलाव लाने का अवसर प्राप्त हुआ। हम में से प्रत्येक ने अपनी खुद की पहल की है। बहरहाल, सार्क के रूप में हम उस गति के साथ बढ़ने में विफल रहे है, जितनी हमारे लोगों ने उम्मीद की थी। कुछ लोगों का तर्क है कि ऐसा इस क्षेत्र के विकास की कमी की वजह से हुआ। लेकिन, उसे वास्तव में हमें ज्यादा कुछ करने के लिए प्रेरित करना चाहिए था। या, ऐसा इसलिये है कि हम अपने मतभेदों की दीवारों के पीछे ठिठक गये हैं और अतीत के साये से बाहर निकलने में हिचकिचा रहे है।

इससे हमारे मतभेदों का समाधान नहीं होगा, लेकिन यह निश्चित रूप से हमें अवसरों से वंचित कर देगा। आज एक पंजाब से दूसरे पंजाब तक वस्तुओं का आवागमन दिल्ली, मुम्बई, दुबई और कराची के जरिये होता है, जिससे यात्रा 11 गुनी लंबी और लागत 4 गुनी महंगी हो जाती है।

अपने आकार और स्थान के कारण भारत की भी अपनी जिम्मेदारियां है। मैं जानता हूं कि आपकी भी बहुत सारी वस्तुओं को उनके गंतव्यों तक पहुंचने के लिए भारत की परिक्रमा करनी पड़ती है।

जरा सोचिये हम अपने उपभोक्ताओं के साथ – और अपने वातावरण के साथ क्या कर रहे हैं! हमें निश्चित रूप से हमारे उत्पादकों और उपभोक्ताओं के बीच दूरी को कम करना चाहिए और व्यापार के ज्यादा प्रत्यक्ष रास्तों का उपयोग करना चाहिए। मैं जानता हूं कि भारत को अग्रणी भूमिका का निर्वाह करना है और हम अपने हिस्से का काम करेंगे। मैं उम्मीद करता हूं, कि आप में से प्रत्येक भी ऐसा ही करेंगे।

बुनियादी ढांचा हमारे क्षेत्र की सबसे बड़ी कमजोरी है और सबसे महती आवश्यकता भी। जब मैंने सड़क मार्ग द्वारा काठमांडू आने का विचार किया, तो इससे भारत में कई अधिकारी परेशान हो गये। वह सीमा पर सड़कों की स्थिति देखकर चिंतित थे। भारत में बुनियादी ढांचे का विकास मेरी सबसे बड़ी प्राथमिकता है और मैं हमारे क्षेत्र में ढांचागत परियोजनाओं के वित्त पोषण के लिए भारत में एक विशिष्ट उद्देश्य सुविधा का भी गठन करना चाहता हूं, जो हमारे सम्पर्क और व्यापार को बढ़ाये।

हम भारत में व्यवसाय करने को सरल बनाने की बात करते है। इसे हम अपने क्षेत्र तक विस्तारित करे। मैं यह सुनिश्चित करने का वायदा करता हूं कि सीमा पर हमारी सुविधाएं व्यापार में तेजी लाएंगी, मंदी नही। आईऐ हम सभी अपनी प्रक्रियाओं को सरल बनाये, सुविधाओं को बेहतर करे, अपने मानदंडों को समान बनाये और अपने कागज़ी कार्यों को कम बोझिल बनाये। भारत सार्क के लिए 3-5 वर्षों के लिए व्यापार वीजा देगा। हम अपने व्यवसाय को एक सार्क बिजनेस ट्रेवलर कार्ड के जरिये और अधिक आसान बना सकते हैं। महानुभावों, भारत का सार्क देशों के साथ एक विशाल व्यापार अधिशेष है। मेरा विश्वास है कि यह न तो सही है और न ही निर्वहनीय। हम आपकी चिंताओं को दूर करेंगे और भारत में एक समान अवसर प्रदान करेंगे। लेकिन, मैं आपको भारतीय बाजार के लिए उत्पादन करने के लिए भारतीय निवेश आकर्षित करने और आपके युवाओं के लिए रोजगारों का सृजन करने के लिए प्रोत्साहित करता हूं। मैं भविष्य की ओर भी देखता हूं जब आपकी कंपनियां अपने देशों में निवेश के लिए भारत में आसानी से फंड जुटा सकती हैं; और जब हमारे पास सीमा पार औद्योगिक गलियारे होंगे, जिससे हम अपने सीमावर्ती राज्यों में प्राकृतिक समन्वयों और संबंधित जीवनों का लाभ उठा सकते है।

मेरा यह भी विश्वास है कि अगर हम एक दूसरे के शहरों और गांवों को प्रकाशित कर सकते है, तो हम अपने क्षेत्र के लिए एक सुनहरे भविष्य का निर्माण कर सकते हैं। या, एक ऐसे भविष्य का सामना कर सकते है, जब कोई अंतरिक्ष से हमारी ओर नीचे देखे और कहे कि यह दुनिया का सबसे अंधकारपूर्ण कोना है। आईये, हम बिजली को किसी भी अन्य वस्तु की तरह देखें, जिसमें हम निवेश और व्यापार कर सकते है। भारत इस क्षेत्र में इन नवीन पहलों का पूरा समर्थन करेगा। हमें महत्वाकांक्षापूर्वक सौर ऊर्जा और सूक्ष्म ग्रिडों का उपयोग करने पर भी विचार करना चाहिए, जिससे हम शीघ्रता से पूरे क्षेत्र में गांवों को स्वच्छ बिजली मुहैया करा सकें।

जब हम अपने देशों के सामान्य नागरिकों के जीवनों को जोड़ते है, तो हमारे संबंध और मजबूत हो जाते हैं। यहीं वजह है कि रेल और सड़क के जरिये सम्पर्क और सेवायें इतनी महत्वपूर्ण हैं। हमें अपने को वायु मार्ग से भी ज्यादा से ज्यादा जोड़ना चाहिए। हम न केवल अपने लोगों के जीवन में अंतर ला पायेगे, बल्कि क्षेत्र में पर्यटन को भी बढ़ावा देंगे। हमें अपनी साझी विरासत और विविधता की ताकत का अपने क्षेत्र के भीतर उपयोग करना चाहिए और विश्व के सामने दक्षिण एशिया को पेश करना चाहिए। हम बौद्ध सर्किट के साथ शुरूआत कर सकते हैं लेकिन हमें वहां रूकना नहीं है।

जैसा कि हम समृद्धि के लिए पुल बनाने की कोशिश करते है, हमें बिना किसी उम्मीद के साथ जी रहे लाखों लोगों के प्रति अपनी जिम्मेदारियों से आंखें नहीं मूंदनी चाहिए। हमें अपने हृदय के आवेग के साथ तो काम करना ही चाहिए, विज्ञान की ताकत का भी उपयोग करना चाहिए।

स्वास्थ्य के क्षेत्र में, भारत तपेदिक और एचआईवी के लिए सार्क क्षेत्रीय सुप्रा रेफरेंस लैबोरेट्री की स्थापना में फंड की कमी की पूर्ति करेगा। हम दक्षिण एशिया के बच्चों के लिए एक-में-पांच टीकों की पेशकश करते हैं। हम पोलियो मुक्त देशों की निगरानी और चौकसी का समर्थन करेंगे और जहां भी यह फिर से दिखाई देगा टीके मुहैया करायेंगे और ऐसे लोगों के लिए जो ईलाज के लिए भारत आ रहे हैं, भारत रोगी और एक परिचारक के लिए तत्काल मेडिकल वीजा मुहैया करायेगा।

सूचना प्रौद्योगिकी ने गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के मार्ग की सभी बाधाओं को दूर कर दिया है। भारत ऑन लाइन कोर्स और ई-लाईब्रेरी के जरिये हमारे दक्षिण एशियाई छात्रों के साथ जुड़ने को तैयार है। जब हम भारत के नेशनल नॉलेज नेटवर्क की स्थापना करेंगे तो इसे सार्क क्षेत्र तक विस्तारित करके प्रसन्न होंगे। एक दक्षिण एशियाई विश्वविद्यालय का स्वप्न नई दिल्ली में एक वास्तविकता बन चुका है, लेकिन वास्तव में दक्षिण एशियाई बनने के लिए प्रत्येक सार्क देश में कम से कम एक विश्वविद्यालय के साथ इसकी साझेदारी भी होनी चाहिए। सार्क क्षेत्र के लिए भारत का नया तोहफा एक उपग्रह के रूप में है जो शिक्षा, टेलीमेडिसिन, आपदा प्रबंधन, संसाधन प्रबंधन, मौसम और संचार के क्षेत्र में हमें बेहद लाभ पहुंचाएगा। हम अगले साल अपने दक्षिण एशियाई सहयोगियों के लिए भारत में एक सम्मेलन का आयोजन कर रहे हैं जो आर्थिक विकास और सुशासन में स्पेस टेक्नोलॉजी की हमारी सामूहिक क्षमता को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा। साथ ही, हमारी योजना इस उपग्रह को 2016 में सार्क दिवस पर शुभारंभ करने की है।

पड़ोसी के रूप में हमें अच्छे और बुरे समय में साथ रहना है। आपदा प्रबंधन में भारत की क्षमता और अनुभव दक्षिण एशिया के लिए सदा उपलब्ध रहेगा। साथ ही, पूरे विश्व में जहां भी हम युद्ध और आपदा जैसी परिस्थितियों में फंसे भारतीयों की मदद के लिए जाएंगे, वहां हमारा लक्ष्य सभी दक्षिण एशियाई नागरिकों की मदद करना भी होगा।

संपन्न सार्क के लिए सुरक्षित दक्षिण एशिया की मजबूत नींव डालनी होगी। यदि हम एक-दूसरे और अपने लोगों की सुरक्षा को लेकर संवेदनशील है तो हमारी दोस्ती गहरी होगी, आपसी सहयोग बढ़ेगा और पूरे क्षेत्र में स्थिरता को बढ़ावा मिलेगा।

आज जब हम 2008 में मुंबई में उस खौफनाक आतंकी घटना को याद करते हैं तो हमें अपने लोगों को खोने का कभी न खत्म होने वाला दर्द महसूस होता है। आतंकवाद और अंतर्राष्ट्रीय अपराधों से लड़ने के लिए हमने जो प्रतिज्ञा की है उसे पूरा करने के लिए हमें साथ मिलकर काम करना होगा।

भारत के लिए सार्क क्षेत्र पर हमारा दृष्टिकोण पांच स्तंभों पर निर्भर है। वे हैं – व्यापार, निवेश, सहायता, सभी क्षेत्रों में सहयोग, हमारे लोगों के बीच आपसी संवाद और इन सभी के लिए मजबूत सूचना तंत्र (कनेक्टिविटी), यहीं आज के समय की मांग है। यह सोशल मीडिया का युग है जहां सीमाएं मायने नहीं रखती। दक्षिण एशिया में एक नए जागरण की शुरुआत हुई है। एक-दूसरे से जुड़े भाग्य व मंजिलों को नई पहचान और अवसरों को साझा करने की नई उम्मीद इस जागरण की विशेषता है।

हमारे संबंध और प्रगाढ़ होंगे।

सार्क के जरिए और इससे बाहर भी।

हम सभी में और कुछेक आपस में।

हम सभी अपनी मंजिलों के लिए अपने पथ का चुनाव कर सकते हैं। लेकिन जब हम एक-दूसरे का हाथ पकड़कर कदम आगे बढ़ाते हैं तो मार्ग सुगम हो जाता है यात्रा तेज होती है और मंजिल भी बिलकुल पास दिखती है।

ये सारी बातें, जितनी मैं आपको कह रहा हूं उतनी ही बातें मैं अपने देशवासियों और अपनी सरकार को भी कहता हूं।

हम हिमालय की गोद में मिल रहे हैं। वही हिमालय जिसने हमें सदियों से पोसा है। आज वह हमें एकजुट कार्य करने को कह रहा है।

हमें संकीर्णता को आशावाद में बदलने के लिए साथ काम करना होगा।

दक्षिण एशिया की बढ़ती हुई उम्मीदों को हमें शांति और संपन्नता के एक विस्तृत क्षेत्र में परिवर्तित करना है।

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भारत हिम्मत हारने वाला देश नहीं है, हम लड़ेंगे और जीतेंगे : प्रधानमंत्री मोदी
May 14, 2021
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पश्चिम बंगाल के किसानों को पहली बार पीएम किसान योजना का लाभ मिलना शुरू हुआ है
एमएसपी पर गेहूं की खरीद ने इस साल नए रिकॉर्ड बनाए हैं
सरकार पूरी ताकत से कोविड-19 के खिलाफ लड़ाई लड़ रही है

आप सभी किसान साथियों से ये चर्चा अपने आप में एक नई उम्‍मीद जगाती है, नया विश्‍वास पैदा करती है। आज जैसा अभी हमारे मंत्री जी श्रीमान नरेंद्र सिंह तोमर जी बता रहे थे आज भगवान बसवेश्वर जयंती है, परशुराम जयंती भी है। आज अक्षय तृतीया का भी पावन पर्व है। और मेरी तरफ से देशवासियों को ईद की भी मुबारक।

कोरोना के इस समय में समस्त देशवासियों का हौसला बढ़े, इस महामारी को परास्त करने का संकल्प और दृढ़ हो, इस कामना के साथ आप सब किसान भाईयों से जो मेरी बातचीत हुई है अब मैं इसको आगे बढ़ाउंगा। इस कार्यक्रम में उपस्थित कृषि और किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र श्रीमान सिंह तोमर जी, केंद्रीय मंत्रिमंडल के मेरे अन्य सहयोगी गण, सभी मुख्यमंत्री, राज्य सरकारों के आदरणीय मंत्रिगण, सांसदगण, विधायकगण और देश भर के मेरे किसान भाईयों और बहनों,

आज बहुत ही चुनौतीपूर्ण समय में हम ये संवाद कर रहे हैं। इस कोरोना काल में भी देश के किसानों, हमारे कृषि क्षेत्र मे अपने दायित्व को निभाते हुए, अन्न की रिकॉर्ड पैदावार की है, आप कृषि में नए-नए तरीके आजमा रहे हैं। आपके प्रयासों को पीएम किसान सम्मान निधि की एक और किश्त और मदद करने वाली है। आज अक्षय तृतीया का पावन पर्व है, कृषि के नए चक्र की शुरुआत का समय है और आज ही करीब 19 हज़ार करोड़ रुपए किसानों के बैंक खातों में सीधे ट्रांसफर किए गए हैं। इसका लाभ करीब-करीब 10 करोड़ किसानों को होगा। बंगाल के किसानों को पहली बार इस सुविधा का लाभ मिलना शुरू हुआ है। आज बंगाल के लाखों किसानों को पहली किश्त पहुंची है। जैसे-जैसे राज्य से किसानों के नाम केंद्र सरकार को मिलेंगे, वैसे-वैसे लाभार्थी किसानों की संख्या और बढ़ती जाएगी।

 

साथियों,

पीएम किसान सम्मान निधि से विशेष रूप से छोटे और मझोले किसानों को अधिक लाभ हो रहा है। आज के कठिन समय में ये राशि इन किसान परिवारों के बहुत काम आ रही है। अभी तक इस योजना के तहत देश के लगभग 11 करोड़ किसानों के पास लगभग 1 लाख 35 हज़ार करोड़ रुपए पहुंच चुके हैं मतलब की सवा लाख करोड़ से भी ज्‍यादा सीधे किसानों के खाते में, कोई बिचौलिया नहीं। इनमें से सिर्फ कोरोना काल में ही 60 हज़ार करोड़ रुपए से ज्यादा पहुंचे हैं। ज़रूरत के समय देशवासियों तक सीधी मदद पहुंचे, तेज़ी से पहुंचे, जिसको ज़रूरत है, उस तक पूरी पारदर्शिता के साथ पहुंचे, यही सरकार का निरंतर प्रयास है।

भाइयों और बहनों,

तेजी से, सीधे किसानों तक लाभ पहुंचाने का ये काम उपज की सरकारी खरीद में भी बहुत व्यापक स्केल पर किया जा रहा है। कोरोना की मुश्किल चुनौतियों के बीच जहां किसानों ने कृषि और बागबानी में रिकॉर्ड उत्पादन किया है, वहीं सरकार भी हर साल MSP पर खरीद के नए-नए रिकॉर्ड बना रही है। पहले धान की और अब गेहूं की भी रिकॉर्ड खरीद हो रही है। इस वर्ष, अभी तक बीते वर्ष की तुलना में लगभग 10 प्रतिशत अधिक गेहूं एमएसपी पर खरीदा जा चुका है। अभी तक गेहूं की खरीद का लगभग 58 हज़ार करोड़ रुपए सीधे किसानों के खाते में पहुंच चुका है। सबसे बड़ी बात ये कि अब किसान जो उपज मंडी में बेच रहा है, उसको अब अपने पैसे के लिए लंबा इंतज़ार नहीं करना पड़ता, परेशान नहीं होना पड़ता। किसान के हक का पैसा सीधा उसके बैंक खाते में जमा हो रहा है। मुझे संतोष है कि पंजाब और हरियाणा के लाखों किसान पहली बार डायरेक्ट ट्रांसफर की इस सुविधा से जुड़े हैं। अभी तक पंजाब के किसानों के बैंक खाते में करीब 18 हज़ार करोड़ रुपए, और हरियाणा के किसानों के बैंक खाते में 9 हज़ार करोड़ रुपए सीधे उनके बैंक अकाउंट में जमा हो चुके हैं। अपना पूरा पैसा अपने बैंक खाते में पाने का संतोष क्या होता है ये पंजाब और हरियाणा के किसान भी अनुभव भी कर रहे हैं और मुखर हो कर बोल भी रहे हैं। मैंने सोशल मीडिया में इतने वीडियो देखें हैं किसानों के खासकर के पंजाब के किसानों के कि इस प्रकार से उनको पैसा पहुंचाना और वो भी पूरा-पूरा पैसा पहुंचाना उसका संतोष इतने उमंग के साथ वो बता रहे हैं।

साथियों,

खेती में नए समाधान, नए विकल्प देने के लिए सरकार निरंतर प्रयास कर रही है। जैविक खेती को बढ़ावा देना ऐसा ही प्रयास है। इस प्रकार की फसलों में लागत भी कम है, ये मिट्टी और इंसान के स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है और इनकी कीमत भी ज्यादा मिलती हैं। थोड़ी देर पहले इस प्रकार की खेती में जुटे देशभर के कुछ किसानों से मेरी बातचीत भी हुई है। उनके हौसले, उनके अनुभवों को जानकर मैं बहुत उत्साहित हूं। आज गंगा जी के दोनों ओर करीब 5 किलोमीटर के दायरे में जैविक खेती को व्यापक स्तर पर प्रोत्साहित किया जा रहा है ताकि वो जो खेत में उपयोग किया गया केमिकल है, बारिश के समय जो पानी बहकर के गंगा जी में न चला जाए और गंगा जी प्रदूषित न हों, इसलिए गंगा जी के दोनों तट के 5-5 किलोमीटर के करीब-करीब ये जैविक उत्‍पादक को विशेष बल दिया जा रहा है। ये जैविक उत्पाद नमामि गंगे के ब्रांड के साथ बाज़ार में उपलब्ध किए जा रहे हैं। इसी तरह भारतीय प्राकृतिक कृषि पद्धति को, उसको भी व्यापक स्तर पर प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसके साथ-साथ सरकार की ये निरंतर कोशिश है कि छोटे और सीमांत किसानों को बैंकों से सस्ता और आसान ऋण मिले। इसके लिए बीते डेढ़ साल से किसान क्रेडिट कार्ड उपलब्ध कराने का एक विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इस दौरान 2 करोड़ से ज्यादा किसान क्रेडिट कार्ड जारी किए गए हैं। इन कार्ड्स पर किसानों ने 2 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा का ऋण बैंकों से लिया है। इसका बहुत बड़ा लाभ पशुपालन, डेयरी और मछली पालन से जुड़े किसानों को भी मिलना शुरू हुआ है। अभी हाल ही में सरकार ने एक और अहम फैसला लिया है और मैं चाहूंगा कि मेरे किसान भाईयों-बहनों को ये सरकार के निर्णय से खुशी होगी, उनके लिए ये बहुत लाभकर्ता होगा। सरकार ने निर्णय किया है कि कोरोना काल को देखते हुए, KCC ऋण के भुगतान या फिर नवीनीकरण की समय सीमा को बढ़ा दिया गया है। ऐसे सभी किसान जिनका ऋण बकाया है, वो अब 30 जून तक ऋण का नवीनीकरण कर सकते हैं। इस बढ़ी हुई अवधि में भी किसानों को 4 प्रतिशत ब्याज पर जो ऋण मिलता है, जो लाभ मिलता है, वो लाभ भी चालू रहेगा, मिलता रहेगा।

साथियों,

गांव का, किसान का कोरोना के विरुद्ध भारत की लड़ाई में बहुत बड़ा योगदान रहा है। ये आपके ही श्रम का परिणाम है कि आज इस कोरोना काल में भारत दुनिया की सबसे बड़ी मुफ्त राशन की योजना चला रहा है। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के माध्यम से पिछले वर्ष आठ महीने तक गरीबों को मुफ्त राशन दिया गया था। इस बार मई और जून महीने में देश के 80 करोड़ से ज्यादा साथियों को राशन मिले, इसका प्रबंध किया गया है। इस पर भी केंद्र सरकार 26 हजार करोड़ रुपए, हमारे गरीब के घर में चूल्‍हा जले, इसलिए खर्च कर रही है। मैं राज्य सरकारों से आग्रह करूंगा कि गरीबों को इस राशन के वितरण में कोई परेशानी ना आए, ये सुनिश्‍चत करें।

साथियों,

100 साल बाद आई इतनी भीषण महामारी कदम-कदम पर दुनिया की परीक्षा ले रही है। हमारे सामने एक अदृश्य दुश्मन है और ये दुश्‍मन बहुरूपिया भी है और इस दुश्‍मन के कारण, इस कोरोना वायरस के कारण हम अपने बहुत से करीबियों को खो चुके हैं। बीते कुछ समय से जो कष्ट देशवासियों ने सहा है, अनेकों लोग जिस दर्द से गुजरे हैं, तकलीफ से गुजरे हैं, वो मैं भी उतना ही महसूस कर रहा हूं। देश का प्रधान सेवक होने के नाते, आपकी हर भावना का मैं सहभागी हूं। कोरोना की सेकेंड वेव से मुकाबले में, संसाधनों से जुड़े जो भी गतिरोध थे, वो तेजी से दूर किए जा रहे हैं। युद्ध स्‍तर पर काम करने के प्रयास हो रहा है। आपने देखा होगा, सरकार के सभी विभाग, सारे संसाधन, हमारे देश के सुरक्षा बल, हमारे साइंटिस्ट, हर कोई दिन रात कोविड की चुनौती का मुकाबला करने में एकजुट है। देश के अलग-अलग हिस्सों में तेजी के साथ कोविड अस्पताल बन रहे हैं, नई टेक्नोलॉजी से ऑक्सीजन प्लांट लगाये जा रहे हैं। हमारी तीनों सेनाएं- वायुसेना, नेवी, आर्मी सभी पूरी शक्‍ति से इस काम में जुटे हैं। ऑक्सीजन रेल, इसने कोरोना के खिलाफ इस लड़ाई को बहुत बड़ी ताकत दी है। देश के दूर-सुदूर हिस्सों में ये स्पेशल ट्रेन्स, ये ऑक्‍सीजन रेल ऑक्सीजन पहुंचाने में जुटीं हैं। ऑक्सीजन टैंकर्स ले जाने वाले ट्रक ड्राइवर्स, बिना रुके काम कर रहे हैं। देश के डॉक्टर्स हों, नर्सिंग स्टाफ हो, सफाई कर्मचारी हों, एंबुलेंस के ड्राइवर्स हों, लैब में काम करने वाले सज्‍जन हों, सैंपल कलेक्ट करने वाले हों, एक-एक जीवन को बचाने के लिए चौबीसों घंटे जुटे हुए हैं। आज देश में जरूरी दवाइयों की आपूर्ति बढ़ाने पर युद्ध स्तर पर काम किया जा रहा है। सरकार और देश के फार्मा सेक्टर ने पिछले कुछ दिनों में जरूरी दवाइयों का उत्पादन कई गुना बढ़ाया है। बाहर से भी दवाइयां मंगवाई जा रही हैं। इस संकट के समय में, दवाइयों और जरूरी वस्तुओं की जमाखोरी और कालाबाजारी में भी कुछ लोग अपने निहित स्‍वार्थ के कारण लगे हुए हैं। मैं राज्य सरकारों से आग्रह करूंगा कि ऐसे लोगों पर कठोर से कठोर कार्रवाई की जाए। ये मानवता के खिलाफ का कृत्‍य है। भारत हिम्मत हारने वाला देश नहीं है। न भारत हिम्मत हारेगा और न कोई भारतवासी हिम्मत हारेंगे। हम लड़ेंगे और जीतेंगे।

साथियों,

आज के इस कार्यक्रम में, मैं देश के सभी किसानों को, गांव में रहने वाले सभी भाइयों-बहनों को कोरोना से फिर सतर्क करना चाहता हूं। ये संक्रमण अभी गांव में भी तेजी से पहुंच रहा है। देश की हर सरकार इससे निपटने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। इसमें गांव के लोगों की जागरूकता, हमारी पंचायती राज से जुड़ी जो भी व्यवस्थाएं हैं, उनका सहयोग, उनकी भागीदारी उतनी ही आवश्यक है। आपने देश को कभी निराश नहीं किया है, इस बार भी आपसे यही अपेक्षा है। कोरोना से बचाव के लिए आपको खुद पर, अपने परिवार पर, सामाजिक स्तर पर जो भी ज़रूरी कदम हैं, आवश्‍यकताएं हैं, उसे हमें उठाने ही हैं। मास्क लगातार पहनना बहुत ज़रुरी है। वो भी ऐसा पहनना है कि नाक और मुंह पर पूरी तरह से ढका रहे। दूसरी बात, आपको किसी भी प्रकार के खांसी, सर्दी ज़ुकाम, बुखार, उल्टी-दस्त, जैसे लक्षणों को सामान्य मान कर नहीं चलना है। पहले तो खुद को यथासंभव दूसरों से अलग करना है। फिर जल्द से जल्द कोरोना टेस्ट करना है। और जब तक रिपोर्ट ना आए तब तक डॉक्टरों ने जो दवा बताई हैं, वो ज़रूर लेते रहना है।

साथियों,

बचाव का एक बहुत बड़ा माध्यम है, कोरोना का टीका। केंद्र सरकार और सारी राज्य सरकारें मिलकर ये निरंतर प्रयास कर रही हैं कि ज्यादा से ज्यादा देशवासियों को तेज़ी से टीका लग पाए। देशभर में अभी तक करीब 18 करोड़ वैक्सीन डोज दी जा चुकी है। देशभर के सरकारी अस्पतालों में मुफ्त टीकाकरण किया जा रहा है। इसलिए जब भी आपकी बारी आए तो टीका ज़रूर लगाएं। ये टीका हमें कोरोना के विरुद्ध सुरक्षा कवच देगा, गंभीर बीमारी की आशंका को कम करेगा। हां, टीका लगाने के बाद भी मास्क और दो गज़ की दूरी के मंत्र को अभी हमें छोड़ना नहीं है। एक बार फिर सभी किसान साथियों को मैं बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं।

बहुत-बहुत धन्यवाद !