मेरे प्यारे देशवासियो,

क़रीब एक महीने के बाद, मैं फिर से आज आपके बीच आया हूं । एक महीना बहुत लम्बा समय होता है । बहुत सारी घटनाएं देश और दुनिया में होती रहती हैं । आप सबने भी उमंग और उत्साह के साथ दिवाली का पर्व मनाया । उत्सव ही हैं जो समय-समय पर जीवन में उमंग भरते रहते हैं,,,गरीब हो, अमीर हो, गाँव का हो, शहर का हो, हर किसी के जीवन में उत्सव का अपना महात्म्य रहता ही है । दिवाली के बाद आज मैं पहली बार मिल रहा हूँ आपसे । मेरी आपको बहुत बहुत शुभकामनायें हैं ।

पिछली बार जो मैने बातें की थी मुझे उन बातों के बाद एक नया अहसास हुआ है, एक नई अनुभूति हुई है । कभी कभी ऐसा सोचते हैं कि छोड़ो यार .....लोग बेकार हैं, लोगों को कुछ करना नहीं है... हमारा देश ही ऐसा है । मैं पिछले मेरे मन की बात और आज मैं कहता हूं ये सोच बदलना बहुत ही जरूरी है हमारा देश ऐसा नहीं है, हमारे देश के लोग ऐसे नहीं हैं । कभी कभी तो मुझे लगता है कि देश बहुत आगे है, सरकारें बहुत पीछे हैं । और जब मैं अनुभव से कहता हूं कि शायद सरकारों को भी अपनी सोच बदलना बहुत जरूरी है । और मैं इसलिये कह रहा हूं कि मैं देख रहा हूं कि ये युवा भारत ख़ास कर के कुछ न कुछ करने के लिये कमिटेड हैं, लालायित हैं, अवसर खोज रहा हैं । और अपने तरीके से कर भी रहा है । मैंने पिछली बार कहा था, कम से कम एक खादी का वस्त्र ख़रीदिये । मैंने किसी को खादीधारी बनने के लिये नहीं कहा था । लेकिन मुझे खादी भण्डार वालों से जानकारी मिली कि एक सप्ताह में करीब करीब सवा सौ परसेन्ट हंड्रेड एंड ट्वेंटी फाइव परसेन्ट बिक्री में वृद्धि हो गयी । एक प्रकार से पिछले वर्ष की तुलना में 2 अक्तूबर से एक सप्ताह में डबल से भी ज्यादा खादी की बिक्री हुई । इसका मतलब यह हुआ कि देश की जनता हम जो सोचते हैं, उससे भी कई गुना आगे है । मैं भारतवासियों को प्रणाम करता हूं ।

सफाई........... कोई कल्पना कर सकता है कि सफाई ऐसा जन आन्दोलन का रूप ले लेगा । अपेक्षायें बहुत हैं, और होनी भी चाहिये । और एक अच्छा परिणाम मुझे नज़र आ रहा है, सफाई अब दो हिस्सों में देखी जा रही है । एक जो पुरानी गन्दगी है, जो गन्दगी के ढ़ेर हैं, उसको सरकारी तंत्र...शासन में बैठे हुए लोग उसके लिये क्या उपाय करेंगे । बहुत बड़ी चुनौती है लेकिन ! आप जिम्मेवारी से भाग नहीं सकते । सभी सरकारों ने सभी म्यूनिसिपैलिटीज़ ने, इस जिम्मेवारी के लिये कदम उठाने ही पड़ेंगे क्योंकि जनता का दबाव बढ़ने वाला है । और मीडिया भी इसमें बहुत अच्छी भूमिका निभा रहा है । लेकिन जो दूसरा पहलू है जो बहुत ही उमंग वाला है, आनन्द वाला है और मन को संतोष देने वाला है । सामान्य मानव को लगने लगा है कि चलो पहले की बात छोड़ो, अब गंदगी नहीं करेंगे । हम नई गंदगी में इज़ाफ़ा नहीं करेंगे । मुझे सतना, मध्यप्रदेश के, कोई श्रीमान् भरत गुप्ता करके हैं, उन्होंने मेरे mygov पर एक मेल भेजा । उन्होंने अपना...रेलवे में दौरा जा रहे थे, उसका अपना अनुभव कहा...उन्होंने कहा कि साहब मैं पहले भी रेलवे में जाता था, इस बार भी रेलवे में गया लेकिन मैं देख रहा हूं कि रेलवे में हर पैसेन्जर...रेलवे में लोग खाते-पीते रहते हैं, कागज-वागज फेंकते रहते हैं...बोले कि कोई फेंकता नहीं था, इतना ही नहीं, ढूंढ़ते थे कि डिब्बे में कहीं डस्टबिन है क्या, कूड़ा कचरा उसमें डालें । और जब देखा कि भई रेलवे में ये व्यवस्था तो नहीं है तो उन्होंने खुद ने कोने में ही सब लोगों ने अपना कूड़ा कचरा इकट्ठा कर दिया । बोले ये मेरे लिये बहुत ही सुखद अनुभव था । मैं भरत जी का आभारी हूं कि उन्होंने ये जानकारी मुझे पहुंचाई । लेकिन मैं ये देख रहा हूं कि सबसे ज्यादा प्रभाव छोटे-छोटे बच्चों में हुआ है । सैंकड़ों परिवार ये बात की चर्चा करते हैं कि हमारा बच्चा अभी कहीं चॉकलेट खाता है तो कागज तुरन्त उठा लेता है । मैंने अभी एक... सोशल मीडिया में किसी का देखा था कि...किसी ने लिखा था...आज का मेरा हीरो...और आज का मेरा हीरो में उन्होंने किसी बच्चे की तस्वीर दी थी । और कहा था वो बच्चा खुद इन दिनों...कहीं पर भी कूड़ा कचरा है तो उठा लेता है...स्कूल जाता है तो उठा लेता है । अपने आप कर रहा है । आप देखिये...सबको लगने लगा है कि हमारा देश, हम गन्दा नहीं करेंगे । हम गन्दगी में इज़ाफ़ा नहीं करेंगे । और जो भी करते हैं वो शर्मिन्दगी महसूस करते हैं, तुरन्त कोई न कोई उनको टोकने वाला मिल जाता है । मैं इसे शुभ संकेत मानता हूं ।

एक अच्छी बात यह भी हो रही है कि इन दिनों मुझे जो लोग मिलने आते हैं, समाज के सभी क्षेत्र के लोग मिलते हैं । सरकारी अधिकारी हों, खेल के जगत के लोग हों, सिने जगत के लोग हों, व्यापार जगत के लोग हों, वैज्ञानिक हों...इन दिनों जब भी वो मेरे से बात करते हैं...तो दस मिनट की बात में चार पांच मिनट तो वे समाज सम्बंधित विषयों पर चर्चा करते हैं । कोई सफाई पर बात करता है, कोई शिक्षा पर बात करता है, कोई सामाजिक सुधार के संबंध में चर्चा करता है । कोई हमारा पारिवारिक जीवन नष्ट हो रहा है उस पर चर्चा कर रहा है । मैं समझता हूं कि वरना पहले तो ऐसा कोई व्यापारी आयेगा तो सरकार के पास तो अपने स्वार्थ की बात करेगा । लेकिन एक बड़ा बदलाव मैं देख रहा हूं । वो अपने स्वार्थ के बात की बातें कम, समाज संबंधित कुछ न कुछ ज़िम्मेवारियाँ लेने की बात ज्यादा करते हैं । ये चीजे हैं जो मैं जब जोड़ करके देखता हूं, तो मुझे ध्यान आता है कि एक...एक बहुत अच्छे बदलाव की दिशा में हम आगे बढ़ रहे है । और ये बात सही है...गन्दगी से बीमारी आती है, लेकिन बीमारी कहाँ आती है । क्या अमीर के घर में आती है क्या ! बीमारी सबसे पहले गरीब के घर पर ही दस्तक देती है । अगर हम स्वच्छता करते हैं न ! तो गरीबों का सबसे बड़ा...मदद करने का काम करते हैं । अगर मेरा कोई गरीब परिवार बीमार नहीं होगा तो उसके जीवन में कभी आर्थिक संकट भी नहीं आयेगा । वो स्वस्थ रहेगा तो मेहनत करेगा, कमायेगा, परिवार चलायेगा । और इसलिये मेरी स्वच्छता का सीधा सम्बन्ध...मेरे गरीब भाई बहनों के आरोग्य के साथ है । हम गरीबों के और अच्छी सेवा कर पायें या न कर पायें हम गन्दगी न करें न, तो भी गरीब का भला होता है । इसको इस रूप में हम लें अच्छा होगा ।

मुझे...जो चिट्ठियाँ आती है अनेक-अनेक प्रकार की चिट्ठियाँ आती हैं । लेकिन एक जो पिछले बार कहा था कि हमारे जो स्पेशली-एबल्ड चाइल्ड है । परमात्मा ने जिसे कुछ न कुछ कमी दी है । शारीरिक क्षति दी है, तो उसके विषय में मैं अपनी भावनायें सबके सामने रखी थीं । उस पर भी मैंने देखा है कि जो जो लोग इस क्षेत्र में काम कर रहे हैं वे अपनी सफलता की गाथायें मुझे भेज रहे हैं । लेकिन दो चीजें तो मुझे मेरी सरकार से पता चला । मेरे कहने के बाद हमारा जो एच.आर.डी. मिनिस्ट्री के अफसर हैं उनको लगा कि हमको भी कुछ करना चाहिये । और अफसरों ने मिल करके एक योजना बनाई । देखिये सरकार में बदलाव कैसे शुरू होता है इसका उदाहरण है । एक तो उन्होंने तय किया कि जो स्पेशली-एबल्ड चाइल्ड है अगर वो टैकनिकल एजुकेशन में जाना चाहता है तो उसको ऐसे एक हजार अच्छे स्पेशली-एबल्ड चाइल्ड को पसन्द करके उनको स्पेशल स्कॉलरशिप देने की उन्होंने योजना बनाई है । मैं विभाग के इन सारे अधिकारियों को जो विचार आया उनको बधाई देता हूं । दूसरा एक महत्वपूर्ण काम किया है उन्होंने कि जितनी केन्द्रीय विद्यालय हैं, और जितनी सैन्ट्र्ल यूनिवर्सिटीज हैं वहाँ पर स्पेशली-एबल्ड बच्चों के लिये आवश्यक होता है अलग इन्फ्रास्ट्र्क्चर...वो सीढ़ी पर नहीं चढ़ पाते तो उनके लिये ट्राइसाइकल चलाने वाला अलग व्यवस्था चाहिये । उनके लिये अलग प्रकार के टॉयलेट चाहिये । तो हमारे एच.आर.डी. मिनिस्ट्री के सब अधिकारियों ने मिल करके तय किया है कि केन्द्रीय विद्यालय और सेन्ट्र्ल यूनिवर्सिटी में एक लाख रूपये विशेष दिया जायेगा हर एक को । और एक लाख रूपये में वो स्पेशली-एबल्ड चाइल्ड के लिये जो आवश्यक इन्फ्रास्ट्र्क्चर खड़ा करना होगा, उसको खड़ा करेंगे । ये है शुभ शुरूआत...यही बाते हैं जो हमें बदलाव की ओर ले जायेंगी ।

मुझे पिछले दिनों सियाचिन जाने का अवसर मिला । मैंने दिवाली देश के लिये मर मिटने वाले जवानों के बीच में बितायी । देश जब दीवाली मना रहा था, तब मैं सियाचीन गया था । क्योंकि उन्हीं की बदौलत तो हम दिवाली मना पा रहे हैं, तो मैं उनके बीच गया था । कितनी कठिनाइयों में वो जीवन गुजारा करते हैं, उसका अनुभव मैंने किया । मैं देश की रक्षा करने वाले जवानों को सैल्यूट करता हॅूं । लेकिन आज मुझे एक और गर्व की बात कहनी है । हमारे देश के जवान सुरक्षा के क्षेत्र में काम करते हैं । प्राकृतिक आपदा के समय जान की बाजी लगाकर हमारी रक्षा करने के लिए कोई भी साहस करने को तैयार हो जाते हैं । खेल-कूद में भी हमारे देश के जवान भारत का गौरव बढाते रहते हैं । आपको जानकर के खुशी होगी कि हमारे सेना के कुछ खिलाडियों ने ब्रिटेन में आयोजित एक बहुत ही प्रस्टीजियस, कम्ब्रिअन पेट्रोल की एक स्पर्धा होती है, करीब 140 देशों को पीछे छोडकर के हमारे इन जवानों ने गोल्ड मैडल दिलाया देश को । मैं इन जवानों का विशेष रूप से अभिनन्दन करता हॅूं ।

मुझे अभी एक अवसर मिला था हमारे देश के जवान, नौजवान विद्यार्थी, युवक-युवतियां, खेल-कूद में जो विजेता होकर आई थीं, उनसे मैंने एक चाय-पान का कार्यक्रम रखा था । मुझे एक नई उर्जा मिली । उनका उत्साह, उमंग मैं देख रहा था कि और देशों की तुलना में हमारी व्यवस्थायें, सुविधायें बहुत कम होती हैं लेकिन शिकायत की बजाय उमंग और उत्साह से और अधिक कुछ करने की बात कर रहे थे । अपने आपमें मेरे लिये, इन खिलाडियों के लिये चाय-पान का कार्यक्रम बहुत ही प्रेरक रहा था । मुझे बहुत अच्छा लग रहा था ।

एक बात की ओर मैं देशवासियों को, और मैं सच में मन से कहना चाहता हूँ और मेरे मन की बात है । और मुझे विश्वास है, देशवासियों को मेरे शब्दों पर भरोसा है, मेरे इरादों पर भरोसा है । लेकिन आज एक बार फिर मैं उसको अपनी तरफ से दोहराना चाहता हॅूं । जहां तक काले धन का सवाल है, ब्लैक मनी का सवाल है, मेरे देशवासी, आपके इस प्रधान सेवक पर भरोसा कीजिये, मेरे लिये ये आर्टिकल ऑफ फेथ है । भारत के गरीब का जो पैसा जो बाहर गया है वो पाई-पाई वापिस आनी चाहिए, ये मेरा कमिटमेंट है । रास्ते क्या हो, पद्धति क्या हो, उसके विषय में, मतभिन्नता हो सकती है । और लोकतंत्र में स्वाभाविक है लेकिन मेरे देशवासी मुझे जितनी समझ है और मेरे पास जितनी जानकारी है उसके आधार पर मैं आपको विश्वास दिलाता हॅूं कि हम सही रास्ते पर हैं । आज तो किसी को पता नही है, न मुझे पता है, न सरकार को पता है, नआपको पता है, न पहले वाली सरकार को ही पता था कि कितना धन बाहर है । हर कोई अपने अपने तरीके से, अलग-अलग आंकडे बताते रहते हैं । मैं उन आंकडों में उलझना नहीं चाहता हॅूं , मेरी प्रतिबद्धता ये है, दो रूपया है, पांच रूपया है, करोड है, अरब है कि खरब है जो भी है । ये देश के गरीबों का पैसा है, वापिस आना चाहिए । और मैं आपको विश्वास दिलाता हॅूं , मेरे प्रयासों में कोई कमी नहीं रहेगी । कोई कोताही नहीं बरती जायेगी । मुझे बस, आपका आशीर्वाद बना रहे । मैं आपके लिए जो भी करना पडेगा, जब भी करना पडेगा, जरूर करता रहॅूंगा । ये मैं आपको भरोसा देता हॅूं ।

मुझे एक चिट्ठी आई है । ............. श्रीमान् अभिषेक पारिख की तरफ से आई है । वैसे इस प्रकार की भावना मुझे, मैं प्रधानमंत्री नहीं था तब भी, कई माताओं, बहनों ने प्रकट की थी । कुछ डाक्टर मित्रों ने भी मेरे सामने ये बात प्रकट की थी और मैं भी भूतकाल में इस विषय पर अपनी भावनाओं को प्रगट करता रहा हॅूं । श्रीमान अभिषेक पारिख ने मुझे कहा है कि हमारी युवा पीढी में बहुत बडी तेजी से, नशे का सेवन, ड्रग की तरफ झुकाव बढ रहा है । उन्होंने मुझसे कहा है कि आप इस विषय पर अपनी मन की बात में जरूर चर्चा करें । मैं उनकी इस पीडा से सहमत हॅू । मैं अगली मन की बात जब करूंगा, मैं जरूर ये नशाखोरी, ये ड्ग्ज, ये ड्रग माफिया और उसके कारण भारत के युवा धन को कितना बडा संकट आ सकता है, उसकी चर्चा अगली बार मैं जरूर करूंगा । इस विषय में आपके भी कुछ अनुभव हों, आपको कुछ जानकारियां हों, इस नशे की आदत वाले बच्चों को अगर आपने बचाया हो, बचाने के अगर आपके कुछ तौर-तरीके हो किसी सरकारी मुलाजिम ने अगर कोई अच्छी भूमिका निभाई हो, अगर ऐसी कोई जानकारी आप मुझे देंगे, तो देशवासियों के सामने, इन अच्छे प्रयासों की बात पहुंचाउंगा और हम सब मिलकर हर परिवार में एक माहौल बनायेंगे कि फ्रस्टेशन के कारण कोई बच्चा इस रास्ते पर न चला जाये, जरूर हम इसकी विस्तार से चर्चा करेंगे ।

मैं जानता हॅूं कि मैं ...... ऐसे विषयों को हाथ लगा रहा हॅूं जिसके संबंध में सरकार सबसे पहले कटघरे में आती है । लेकिन हम कब तक चीजों को छुपाते रखेंगे । कब तक हम पर्दे के पीछे सब बातों को टालते रहेंगे । कभी न कभी तो अच्छे इरादे के लिए, संकट मोल लेना ही पडेगा । मैं भी ये हिम्मत कर रहा हॅूं । आपके प्रेम के कारण । आपके आशीर्वाद के कारण और मैं करता रहॅूंगा ।

कुछ लोगों ने ये भी मुझे कहा है मोदी जी, आप तो कह रहे थे कि हमें सुझाव दीजिये, फेस बुक पर दीजिये, ट्वीटर पर दीजिये, ई-मेल भेजिये । लेकिन देश का बहुत बडा वर्ग है, जिनके पास ये है ही नही तो वो क्या करें । आपकी बात सही है । ये सुविधा सब के पास नहीं है । तो मैं आपको कहता हॅूं कि मेरी मन की बात के संबंध में अगर आप कुछ कहना चाहते हैं तो गांव-गांव रेडियो पर तो मेरी बात को सुनते हैं तो आप,

मन की बात, आकाशवाणी, संसद मार्ग, नई दिल्ली

अगर चिट्ठी भी भेज देंगे, कुछ सुझाव देंगे तो जरूर मुझ तक पहुंच जायेगा । और मैं जरूर उसको गंभीरता से लॅूंगा । क्योंकि सक्रिय नागरिक, विकास की सबसे बडी पूंजी होता है । आप एक चिट्ठी लिखते हैं, मतलब है कि आप बहुत सक्रिय हैं । आप अपना अभिप्राय देते हैं ........ मतलब कि आप देश की बात के विषयों से कंसर्न है और यही तो देश की ताकत होती है । मैं आपको निमंत्रण देता हॅूं ।

मेरे मन की बात के लिये, आपके मन की बात भी जुडनी चाहिए । हो सकता है आप जरूर चिट्ठी लिखेंगे । मैं कोशिश करूंगा, फिर अगले महीने आपसे बात करने की । मेरा प्रयास रहेगा, जब भी बात करूंगा, रविवार को करूंगा, दिन के 11 बजे करूंगा । तो मुझे आप तक पहुंचने की सुविधा बढ रही है ।

अब मौसम बदल रहा है । धीरे-धीरे ठंड की शुरूआत हो रही है । स्वास्थ्य के लिये बहुत अच्छा मौसम होता है । कुछ लोगों के लिये मौसम खाने के लिये बहुत अच्छा होता है । कुछ लोगों के लिये अच्छे-अच्छे कपडे पहनने के लिये होता है । लेकिन इसके साथ-साथ स्वास्थ्य के लिये भी बहुत अच्छा मौसम होता है । इसे जाने मत दीजिये । इसका भरपूर उपयोग कीजिये ।

बहुत-बहुत धन्यवाद ।

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दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर इस पूरे क्षेत्र की तस्वीर बदल देगा: उत्तराखंड में पीएम मोदी
April 14, 2026
आज उद्घाटित दिल्ली-देहरादून आर्थिक गलियारा एक विश्व स्तरीय अवसंरचना परियोजना है जो कनेक्टिविटी को मजबूत करेगी, अर्थव्यवस्था और पर्यटन को बढ़ावा देगी: प्रधानमंत्री
उत्तराखंड ने अपने गठन के 25 वर्ष पूरे कर लिए हैं और अब यह अपने 26वें वर्ष में प्रवेश कर चुका है; आज दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे के उद्घाटन के साथ एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि अर्जित की गई: प्रधानमंत्री
देहरादून-दिल्ली आर्थिक गलियारा समस्‍त क्षेत्र को रूपांतरित कर देगा: प्रधानमंत्री
यह गलियारा समय बचाएगा, यात्रा सस्ती और तेज होगी, लोग पेट्रोल और डीजल पर कम व्‍यय करेंगे और किराए एवं माल ढुलाई लागत में कमी आएगी; इससे रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे: प्रधानमंत्री
हमारे पहाड़, ये वन क्षेत्र, देवभूमि की यह विरासत, ये बहुत ही पवित्र स्थान हैं; ऐसे स्थानों को स्‍वच्‍छ रखना हमारा कर्तव्य है: प्रधानमंत्री
इन क्षेत्रों में प्लास्टिक की बोतलें, कूड़े के ढेर देवभूमि की पवित्रता को ठेस पहुंचाते हैं; यह बहुत आवश्‍यक है कि हम देवभूमि के इन स्थलों, हमारे तीर्थ स्थलों को स्‍वच्‍छ और सुंदर रखें: प्रधानमंत्री

 

भारत माता की जय।

भारत माता की जय।

भारत माता की जय।

उत्तराखंड के राज्यपाल गुरमीत सिंह जी, यहां के लोकप्रिय और कर्मठ युवा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी जी, केंद्रीय मंत्रिमंडल के मेरे साथी नितिन गड़करी जी, अजय टमटा जी, टेक्नॉलोजी के माध्यम से जुड़े उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी, गर्वनर आनंदी बेन, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता जी, मंच पर उपस्थित प्रदेश भाजपा अध्यक्ष महेंद्र भट्ट जी, पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी जी, पूर्व मुख्यमंत्री भाई रमेश पोखरियाल, विजय बहुगुना जी, तीरथ सिंह रावत जी, त्रिवेंद्र सिंह रावत जी, उत्तराखंड सरकार के सभी मंत्रीगण, सांसद और विधायकगण और विशाल संख्या में पधारे मेरे प्यारे भाईयों बहनों।

देवभूमि उत्तराखंड़ की इस पावन धरती पर आप सभी को मेरा प्रणाम। बहुत बडी संख्या में आए हुए पूज्य संतगण को भी प्रणाम। उत्तराखंड का प्यारा भुलों-भैबंदों, बौड़ी-भूलियों, स्याणा-बुजुर्गों, आप सबु तैं नमस्कार! मेरो प्यारो दाजी भाई, दीदी-बैनी, आमा-बाबा सबई लाई मेरो तरफ़ देखी ढोग दिनछू।

इस कार्यक्रम से टेक्नोलॉजी के जरिये भी दिल्ली, यूपी से अनेक लोग जुड़े हैं, मैं सभी का अभिनन्दन करता हूं। सबसे पहले तो मैं आप सबकी क्षमा चाहता हूं, उत्तरप्रदेश और दिल्ली के कार्यक्रम में जुड़े हुए लोगों की भी क्षमा मांगता हूं, कि मुझे यहां पहुंचने में एक घंटे से भी ज्यादा देर हो गई, सब स्थान पर लंबे समय तक आप सबको इंतजार करना पड़ा, और कारण यही था, मैं निकला तो समय पर था, लेकिन करीब-करीब 12 किलोमीटर का रोड शो, काली मंदिर से लेकर के यहां तक, इतना उत्साह इतना उमंग, कि मेरे लिए तेज गति से गाड़ी चलाना बड़ा मुश्किल हो गया। तो धीरे-धीरे लोगों को प्रणाम करते-करते, जनता जनार्दन के आशीर्वाद लेते लेते यहां पहुंचने में मुझे एक घंटे से भी ज्यादा देरी हो गई, और इसके लिए मैं आपकी क्षमा मांगता हूं, और ऐसी धूप में 12 किलोमीटर ये जन सैलाब, ये उत्तराखंड़ का प्यार, माताओं-बहनों का आशीर्वाद, मैं आज उत्तराखंड़ से एक नई ऊर्जा लेकर के जाऊंगा, नई प्रेरणा लेकर के जाऊंगा और मैं इसके लिए हर किसी का हृदय से आभार व्यक्त करता हूं।

साथियों,

आज देश में पर्व त्योहार की उमंग है। विभिन्न हिस्सों में नववर्ष का आगमन हुआ है। मैं देशवासियों को बैसाखी, बोहाग बीहू और पुथांडु की शुभकामनाएं देता हूं!

साथियों,

अगले कुछ ही दिनों में, यमुनोत्री, गंगोत्री, बाबा केदारनाथ, बद्रीनाथ धाम की यात्रा भी शुरू होने जा रही है। इस पवित्र समय का, देश के कोटि-कोटि आस्थावान, श्रद्धाभाव से इंतज़ार करते हैं। मैं पंच बद्री, पंच केदार, पंच प्रयाग और यहां के आराध्य देवों को श्रद्धापूर्वक प्रणाम करता हूं। मैं संतला माता को भी नमन करता हूं। यहां आने से पहले मुझे, मां डाट काली के दर्शन करने का सौभाग्य मिला है। देहरादून शहर पर, मां डाट काली की बड़ी कृपा है। दिल्ली-देहरादून इकनॉमिक कॉरिडोर के इतने बड़े प्रोजेक्ट को पूरा करने में, माता डाट काली का आशीर्वाद बहुत बड़ी शक्ति रहा है।

साथियों,

उत्तराखंड राज्य अपनी स्थापना के 25 वर्ष पूरा करने के साथ ही छब्बीसवें वर्ष में प्रवेश कर चुका है। आज दिल्ली देहरादून एक्सप्रेस-वे के उद्घाटन के साथ इस प्रगति में एक और बड़ी उपलब्धि जुड़ी है। आपको याद होगा, बाबा केदार के दर्शन के बाद मेरे मुंह से अनायास निकला था, कि इस शताब्दी का तीसरा दशक उत्तराखंड का दशक होगा। मुझे बहुत खुशी है कि डबल इंजन सरकार की नीतियों, और उत्तराखंड के लोगों के परिश्रम से, ये युवा राज्य, विकास के नए आयाम जोड़ रहा है। ये प्रोजेक्ट भी, उत्तराखंड के विकास को नई गति देगा। इस एक्सप्रेसवे का बहुत बड़ा हिस्सा यूपी से होकर गुजरता है। इससे गाजियाबाद, बागपत, बड़ौत, शामली और सहारनपुर जैसे अनेक शहरों को भी बहुत फायदा होगा। टूरिज्म के लिहाज से ये प्रोजेक्ट बहुत अहम है। मैं पूरे देश को इस प्रोजेक्ट की बहुत-बहुत बधाई देता हूं।

साथियों,

आज डॉक्टर बाबा साहेब आंबेडकर की जयंती भी है। मैं बाबा साहेब को कोटि-कोटि देशवासियों की ओर से श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं। बीते दशक में हमारी सरकार ने जो नीतियां बनाईं, जो निर्णय लिए, वो संविधान की गरिमा को पुनर्स्थापित करने वाले रहे हैं। आर्टिकल 370 हटने के बाद आज पूरे देश में भारत का संविधान लागू है। जिन दर्जनों जिलों में माओवाद-नक्सलवाद खत्म हुआ है, वहां भी अब संविधान की भावना के अनुरूप काम हो रहा है। देश में समान नागरिक संहिता लागू हो, ये हमारे संविधान की अपेक्षा है। उत्तराखंड ने संविधान की इस भावना को आगे बढ़कर और उस भावना को आगे बढ़ाकर पूरे देश को राह दिखाई है।

साथियों,

बाबा साहेब का जीवन, गरीबों को, वंचितों को, शोषितों को न्यायपूर्ण व्यवस्था देने के लिए समर्पित था। हमारी सरकार आज उसी भावना के साथ, हर गरीब, हर वंचित को सच्चा सामाजिक न्याय देने में जुटी है। और सामाजिक न्याय का एक बहुत बड़ा माध्यम, देश का संतुलित विकास है, सबको सुविधा है, सबकी समृद्धि है। इसलिए ही बाबा साहेब आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर की, औद्योगीकरण की भरपूर वकालत करते थे।

साथियों,

भविष्य की दशा और दिशा क्या होगी, अक्सर लोग, इसके लिए हाथ की रेखाओं को देखते हैं, दिखाते हैं। जो भविष्य वक्ता होते हैं ना, वो हस्त रेखाएं देखते हैं, और हर व्यक्ति के भविष्य के विषय में बताते हैं। मैं इस विज्ञान को तो नहीं जानता हूं, लेकिन कहते हैं कि ये भी एक शास्त्र है। अब ये तो हो गई व्यक्ति के भाग्य की जो उसके हाथ में रेखाएं हैं उसकी बात, लेकिन मैं अगर इसी संदर्भ मे बात को, इसी संदर्भ को राष्ट्र-जीवन से जोड़कर के देखूं, तो राष्ट्र की भाग्य रेखाएं कौन सी होती हैं? राष्ट्र की भाग्य रेखाएं ये हमारी ये सड़कें होती हैं, हमारे हाईवे होते हैं, हमारे एक्सप्रेसवे होते हैं, एयरवे, रेलवे, वॉटरवे, ये हमारे राष्ट्र की भाग्य रेखाएं होती हैं। और बीते एक दशक से हमारा देश, विकसित भारत बनाने के लिए विकास की ऐसी ही भाग्य रेखाओं के निर्माण में जुटा हुआ है। ये विकास रेखाएं सिर्फ आज की सुविधाएं नहीं हैं, ये आने वाली पीढ़ियों की समृद्धि की गारंटी हैं और ये मोदी की भी गारंटी है। बीते दशक से हमारी सरकार राष्ट्र की इन विकास-रेखाओं पर अभूतपूर्व निवेश कर रही है। मैं आपको एक आंकड़ा देता हूं। अभी नितिन जी ने बहुत सारे आंकड़ें सिर्फ उत्तराखंड़ से संबंधित बताए हैं आपको। देखिए साल 2014 तक ऐसे इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए साल में, पूरे देश में, 2 लाख करोड़ रुपए भी खर्च नहीं होते थे। ये मैं पूरे हिन्दुस्तान की बात बताता हूं, 2 लाख करोड़ भी नहीं होते थे, आज ये छह गुना अधिक, 12 लाख करोड़ रुपए से भी ज्यादा हो चुका है। यहां उत्तराखंड में ही, सवा दो लाख करोड़ रुपए से अधिक के इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स पर काम जारी है। 2014 के पहले पूरे देश के लिए 2 लाख करोड़, आज अकेले उत्तराखंड़ के लिए सवा दो लाख करोड़ रूपया। कभी उत्तराखंड के गांवों में सड़क के इंतज़ार में पीढ़ियां बदल जाती थीं। आज डबल इंजन सरकार के प्रयासों से, अब सड़क गांव तक पहुंच रही है, जो गांव पहले वीरान पड़ गए थे, वो फिर से जीवंत हो रहे हैं। चारधाम महामार्ग परियोजना हो, रेल परियोजनाओं का विस्तार हो, केदारनाथ और हेमकुंड साहिब रोपवे हो, विकास की ये रेखाएं, इस क्षेत्र के कोने-कोने में जीवन की भी भाग्य रेखाएं बन रही हैं।

साथियों,

21वीं सदी का भारत आज जिस स्पीड और जिस स्केल पर काम कर रहा है, उसकी पूरी दुनिया चर्चा कर रही है। मैं आपको उत्तराखंड, पश्चिमी यूपी और दिल्ली का ही उदाहरण देता हूं। कुछ सप्ताह पहले ही, दिल्ली मेट्रो का विस्तार हुआ, मेरठ में मेट्रो-सेवा की शुरुआत हुई, दिल्ली-मेरठ नमो-भारत रेल देश को समर्पित की गई, नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट की शुरुआत हुई, हवाई जहाजों के लिए MRO फेसिलिटी पर काम शुरू हुआ, और आज, देहरादून-दिल्ली एक्सप्रेसवे शुरु हो रहा है।

साथियों,

इतने छोटे से रीजन में ये सब इतने कम समय में हो रहा है। कल्पना कीजिए, देश में कितने बड़े पैमाने पर इंफ्रास्ट्रक्चर बन रहा है। और इसलिए ही मैं कहता हूं - 21वीं सदी का भारत, आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर के जिस नए युग में प्रवेश कर रहा है, वो अभूतपूर्व है, अकल्पनीय है।

साथियों,

आज भारत के अलग-अलग हिस्सों को जोड़ने वाले, अनेक इकोनॉमिक कॉरिडोर्स, उस पर काम चल रहा है। जैसे दिल्ली-मुबंई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर, बेंगलुरू-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर, ईस्ट कोस्ट इकोनॉमिक कॉरिडोर, अमृतसर-कोलकाता इंडस्ट्रियल कॉरिडोर, ऐसे बहुत से इकोनॉमिक कॉरिडोर देश में बनाए जा रहे हैं। ये इकोनॉमिक कॉरिडोर, प्रगति के नए द्वार हैं, गेटवे हैं, डोर हैं। और इनसे उम्मीदों की डोर भी जुड़ी हुई है। ये इकोनॉमिक कॉरिडोर, सड़क के अलावा नए-नए व्यापार-कारोबार का मार्ग बनाते हैं। फैक्ट्रियों के लिए, गोदामों के लिए पूरा नेटवर्क, उसका आधार तैयार करते हैं।

साथियों,

देहरादून-दिल्ली इकोनॉमिक कॉरिडोर से भी इस पूरे क्षेत्र का कायाकल्प होने जा रहा है। पहला फायदा तो ये है कि इससे समय बचेगा, आना-जाना सस्ता और तेज होगा, लोगों का पेट्रोल-डीजल कम खर्च होगा, किराया-भाड़ा कम होगा, और दूसरा बड़ा फायदा रोजगार का होगा। अभी इसके निर्माण में 12 हजार करोड़ रुपए खर्च हुए, तो हज़ारों श्रमिकों को काम मिला है। साथ ही, जो इंजीनियर हैं, अन्य स्किल्ड वर्कफोर्स हैं, ट्रांसपोर्ट से, उससे जुड़े साथी हैं, उनको भी बहुत बड़ी मात्रा में काम मिला है। किसानों और पशुपालकों की उपज भी, अब तेज़ गति से, बड़ी मंडियों और बड़े बाज़ारों तक पहुंचेगी।

साथियों,

इस शानदार एक्सप्रेस-वे से उत्तराखंड के टूरिज्म को बहुत ही बड़ा फायदा होगा। देहरादून, हरिद्वार, ऋषिकेश, मसूरी और चारधाम यात्रा के लिए ये सबसे प्रमुख मार्ग बनेगा। और हम सभी जानते हैं, जब टूरिज्म का विकास होता है, तो हर कोई कुछ न कुछ कमाता है। होटल हो, ढाबे वाले हो, टैक्सी हो, ऑटो हो, होम स्टे हो, सबको इसका फायदा होता है।

साथियों,

मुझे खुशी है कि आज उत्तराखंड, विंटर टूरिज्म, विंटर स्पोर्टस और wed in india, शादी के लिए, बहुत बेहतरीन डेस्टिनेशन बनता जा रहा है।

साथियों,

उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था के लिए बारहमासी पर्यटन बहुत जरूरी है। इसलिए मेरा सर्दियों में होने वाली धार्मिक यात्राओं को लेकर बहुत आग्रह रहा है। और मुझे खुशी है कि हर साल इन यात्राओं में लोगों की संख्या बढ़ रही है। आपको याद होगा, मैं 2023 में आदि कैलाश और ओम पर्वत की यात्रा पर गया था। पहले बहुत जाता था, बीच में बिल्कुल जा नहीं पाया, कई वर्षों के बाद मैं गया, और मुझे मुख्यमंत्री जी बता रहे थे, गर्वनर साहब बीच मे आए, वो भी बता रहे थे कि 2023 में वहां गया और उसके बाद, बहुत बड़ी संख्या में श्रद्धालु वहां जा रहे हैं। पहले वहां कुछ सौ लोग ही सर्दियों में यात्रा के लिए जाते थे। साल 2025 में, करीब-करीब 40 हजार से अधिक लोगों ने इन पवित्र स्थानों की यात्रा की है। कभी एक हजार नहीं होते थे, अगर चालीस हजार पहुंचते हैं तो यहां के लोगों की रोजी-रोटी की कितनी बड़ी ताकत आ जाती है। इसी तरह साल 2024 में शीतकालीन चारधाम यात्रा में, करीब अस्सी हज़ार श्रद्धालु आए थे। 2025 में ये संख्या डेढ़ लाख पार कर चुकी है।

साथियों,

हम ऐसा विकसित भारत बनाने में जुटे हैं, जहां प्रगति भी हो, प्रकृति भी हो और संस्कृति भी हो। और इसलिए, आज होने वाले हर निर्माण को, इन्हीं त्रिवेणी, प्रगति, प्रकृति और सांस्कृति की त्रिवेणी, इन्हीं मूल्यों के आधार पर विकसित किया जा रहा है। इंफ्रास्ट्रक्चर से इंसानों को भी सुविधा हो, और वहां रहने वाले वन्यजीवों को भी असुविधा न हो, ये हमारा प्रयास है। और इसलिए ही इस एक्सप्रेसवे पर, करीब 12 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड वाइल्ड लाइफ कॉरिडोर भी बनाया गया है। हाथियों को भी असुविधा न हो, इसका भी ध्यान रखा गया है।

वैसे साथियों,

मैं आज देशभर के सभी पर्यटकों और तीर्थयात्रियों से भी एक आग्रह करना चाहता हूं। हमारे पहाड़, ये वन क्षेत्र, ये देवभूमि की धरोहर, ये बहुत ही बहुत पवित्र स्थान हैं। ऐसे स्थानों को साफ-सुथरा रखना, ये हम सभी का कर्तव्य है। यहां रहने वालों का भी और यात्री के रूप में आने वालों का भी। इन इलाकों में प्लास्टिक की बोतलें, कूड़े-कचरे का ढेर, ये देवभूमि की पवित्रता को ठेस पहुंचाता है। इसलिए बहुत आवश्यक है कि हम देवभूमि के इन स्थलों को, हमारे इन तीर्थ स्थलों को स्वच्छ रखें, सुंदर रखें।

साथियों,

अगले वर्ष हरिद्वार में कुंभ का भी आयोजन होना है। हमें आस्था के इस संगम को दिव्य-भव्य और स्वच्छ बनाने में कोई कोर-कसर बाकी नहीं छोड़नी है।

साथियों,

उत्तराखंड में नंदा देवी राजजात यात्रा भी होती है। ये आस्था का उत्सव तो है ही, ये हमारी सांस्कृतिक चेतना का भी जीवंत उदाहरण है। जहां मां नंदा को बेटी मानकर पूरे सम्मान के साथ विदा किया जाता है। इस यात्रा में बहनों-बेटियों की भागीदारी, इसे विशेष बनाती है। मैं मां नंदा को प्रणाम करते हुए, देशभर की बहनों-बेटियों को भी विशेष संदेश देना चाहता हूं। विकसित भारत के निर्माण में आपकी बहुत बड़ी भूमिका है। इस देश की बेटियों की, इस देश की माताओं की, बहनों की बहुत बड़ी भूमिका मैं देख रहा हूं। और बहनों-बेटियों की सुविधा, सुरक्षा और लोकतंत्र में भागीदारी, ये डबल इंजन सरकार की बहुत बड़ी प्राथमिकता है। आप अभी देख रही हैं, कि दुनिया में कितना बड़ा संकट आया है। इससे दुनिया के विकसित देशों में भी कितना हाहाकार मचा है। ऐसे मुश्किल हालात में भी, सरकार का निरंतर प्रयास है कि हमारी बहनों को कम से कम परेशानी हो।

साथियों,

बहनों-बेटियों की भागीदारी का एक और महत्वपूर्ण पड़ाव अब देश के सामने है। 4 दशकों के इंतज़ार के बाद संसद ने, नारीशक्ति वंदन अधिनियम पारित किया था। इससे विधानसभा और लोकसभा में महिलाओं के लिए तैंतीस प्रतिशत आरक्षण तय हो गया। सभी दलों ने आगे आकर इस महत्वपूर्ण कानून को समर्थन दिया। अब महिलाओं को ये जो हक मिला है ना, इस हक को लागू करने में देर नहीं होनी चाहिए। अब ये लागू होना चाहिए। अब जो 2029 में लोकसभा के चुनाव होंगे, अब तब से लेकर विधान सभा के भी चुनाव आते रहेंगे, जो भी चुनाव आते रहेंगे, 2029 से ही ये लागू हो जाना चाहिए। ये देश की भावना है, ये देश की हर बहन-बेटी की इच्छा है। मातृशक्ति की इसी इच्छा को नमन करते हुए, 16 अप्रैल से संसद में विशेष चर्चा तय की गई है। देश की बहनों-बेटियों के हक से जुड़े इस काम को, सभी राजनीतिक दल मिलकर के सर्वसम्मति से आगे बढ़ाएं, उसको पूरा करे। और मैंने आज देश की सभी बहनों के नाम एक खुला पत्र लिखा है, सोशल मीडिया में शायद ये मेरा पत्र आप तक पहुंचा होगा, हो सकता है टीवी और अखबार वाले भी इस पत्र का जिक्र करते होंगे। मैंने बड़े आग्रह के साथ देश की माताओं-बहनों को इस कार्य में भागीदार बनने के लिए निमंत्रित किया है। मुझे पक्का विश्वास है कि पत्र मेरे देश की माताएं-बहनें जरूर पढ़ेंगी। एक एक शब्द पर मनन करेंगी, और इतना बड़ा पवित्र कार्य करने के लिए 16-17-18 को संसद में आने वाले सभी सांसदों को उनके आशीर्वाद भी मिलेंगे। मैं आज देवभूमि से देश के सभी दलों से फिर अपील करूंगा कि नारीशक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन का जरूर समर्थन करें। 2029 में हमारे देश की 50 प्रतिशत जनसंख्या हमारी माताएं-बहनें, हमारी बेटियां, उनको उनका हक हम देकर रहें।

साथियों,

मैं उत्तराखंड आउं और फौज की बात ना हो, तो बात अधूरी ही रहती है। ये गढ़ी कैंट, ये सभा स्थल, ये उत्तराखंड की महान सैन्य परंपरा का प्रमाण है। यहां पास ही देश की रक्षा सुरक्षा से जुड़े कई संस्थान हैं, 1962 की लड़ाई में, शहीद जसवंत सिंह रावत जी के शौर्य को देश कभी भुला नहीं सकता।

साथियों,

सेना के सामर्थ्य को सशक्त करना हो, या हमारे सैनिक परिवारों की सुविधा और सम्मान हो, हमारी सरकार इसके लिए निरंतर प्रयासरत है। वन रैंक वन पेंशन के माध्यम से हमारी सरकार ने, अब तक करीब सवा लाख करोड़ रुपए पूर्व फौजियों को उनके खाते में जमा कर दिए हैं। उत्तराखंड के भी हजारों परिवारों को इसका लाभ मिला है। इसके अलावा, इस वर्ष पूर्व फौजियों के लिए health scheme का बजट भी छत्तीस प्रतिशत बढ़ाया गया है। 70 वर्ष और इससे अधिक के ex-servicemen के लिए, दवाईयों की door step home delivery भी शुरू की गई है। पूर्व फौजियों के बच्चों की एजुकेशन ग्रांट भी डबल की गई है। और बेटियों के विवाह के लिए जो सहायता मिलती है, उसको भी 50 हज़ार से बढ़ाकर एक लाख रुपए किया गया है।

साथियों,

देशभक्ति, देवभक्ति और प्रगति, ऐसे हर आयाम को जोड़ते हुए, हमें देश को विकसित बनाना है। एक बार फिर दिल्ली-वासियों को, उत्तर प्रदेश वासियों को, और एक प्रकार से देशवासियों को, इस शानदार एक्सप्रेसवे की मैं बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूं।

मेरे साथ बोलिये-

भारत माता की जय!

भारत माता की जय!

वंदे मातरम!

वंदे मातरम!

वंदे मातरम!

वंदे मातरम!

वंदे मातरम!

वंदे मातरम!

वंदे मातरम!

बहुत-बहुत धन्यवाद !