राष्‍ट्रीय सुरक्षा सहलाहकार श्री अजीत डोवल जी, चीफ ऑफ आर्मी स्‍टॉफ जनरल दलबीर सिंह जी, लेफ्टि‍नेंट जनरल हुडा जी, एयर मार्शल सोमन जी और उपस्थित थल सेना और नभ सेना के सभी जांबाज अधिकारी एवं जवानों, आपको संबोधन करने का सौभाग्‍य मिला है जिसके साथ एक पराक्रमी जवान का नाम जुड़े हुआ है और सेना में पद से ज्‍यादा पराक्रम से सम्‍मान होता है।

सेना में पदित व्‍यवस्‍था रहती है लेकिन पराक्रम एक परंपरा रहती है और उस परंपरा को जो उत्‍तम तरीके से निभाते हैं, उस परंपरा के लिए पल-पल जीते हैं और प्रति पल उस पल के इंतजार में रहते हैं जब कि देश के लिए काम आएं। ये असामान्य भावना होती है। जीवन में एक ही तड़प हो, कि देश के लिए काम आएं। जो सेना का जवान निवृत्‍त होता है अब निवृत्ति के बाद कभी उससे मिलने का मौका मिले, पूछते हैं कि भई कैसा रहा कार्यकाल। अगर उसने, जीवन पे संकट झेलने का अवसर नहीं मिला है तो उसको रिटायर होने के बाद भी बेचैनी महसूस होती है। उसको लगता है, यार काम तो किया है, रोज परेड करते थे सभी, लेकिन काम नहीं आए। और काम का मतलब सेना के जवान के दिल में सिर्फ मारना नहीं होता है, सिर्फ मरना नहीं होता है, किसी के जीने के लिए जिंदगी खपा देना यही तो उसका सबसे बड़ा, बड़ा इंसप्रेशन होता है।

जितना सम्‍मान आप सबका है उससे अनेक गुणा सम्‍मान उस मां का है जिस मां ने आपको जन्‍म दिया है। मैं उन सभी माताओं को भी नमन करता हूं, जिसने मां भारती की रक्षा के लिए ऐसे वीर सपूतों को जन्‍म दिया है, संस्‍कार दिए हैं और जीने-मरने के लिए प्रेरणा दी है। कौन मां होती है जिसके दिल में ये भाव हो कि मैंने उसको जन्‍म तो दिया है लेकिन उसका जीवन मेरे काम आए न आए, भारत मां के लिए तो जरूर आए, मुझसे भी बढ़कर उसकी मां भारत मां है, ये असामान्‍य प्रेरणा मां देती है और इसलिए आपका जीवन सिर्फ सीमाओं का सुरक्षा करता है, ऐसा नहीं है। आपका जीवन सवा सौ करोड़ सपनों की भी सुरक्षा का विश्‍वास देता है। और उस सवा सौ करोड़ के सपनें क्‍या हैं? हमारी भारत माता विश्‍व गुरू बने, हमारी भारत माता जगत जननी बने। हमारे सवा सौ करोड़ भाई-बहन सुख-चैन की जिंदगी जीयें, गरीब से गरीब का बच्‍चा भी रात को भूखा न सो जाए, जीवन में कम से कम एक छत तो हो, सुलभ शिक्षा हो, और इसलिए आप सब सीमा के लिए नहीं हैं। आप सब सिर्फ भौगोलिक व्‍यवस्‍था की सुरक्षा के लिए नहीं हैं।

आपका जीवन परोक्ष रूप से कोटि-कोटि जीवनों की विकास की गारंटी देता है। और जब तक देश में शांति और सुरक्षा नहीं होगी, विकास असंभव होता है। विकास की पूर्व शर्त होती है शांति, सुरक्षा, भाईचारा, सदभावना। हमारी सेना भाईचारे की एक मिसाल है। न भाषा के भेद होते हैं, न ऊंच-नीच के भेद होते हैं, न अपना-पराया महसूस होता है। फौजी कहते ही एक अपनेपन का अहसास होता है। और ये रातोरात नहीं आता है। एक व्‍यवस्‍था के तहत संस्‍कार किए जाते हैं। हर पल इस संस्‍कार को जागरुक रखा जाता है, तब जाकर के आता है।

सेना भी तब तक सक्षम नहीं हो सकती हैं जब तक उसके पीछे की सारी व्‍यवस्‍थाएं सक्षम न हो। और पीछे की व्‍यवस्‍थाएं मतलब सिर्फ कैन्टोनमेंट नहीं होता है, सिर्फ सरकार नहीं होती है। जिस गांव में वो पैदा हुआ है उस परिवार तक पीछे की सारी व्‍यवस्‍था सुदृढ़ हो। जवान को पता होना चाहिए, विश्‍वास होना चाहिए कि मेरे बाद मेरा देश मेरे परिवार की चिंता करेगा। कोई कमी नहीं रखेगा, ये उसको भरोसा होना चाहि‍ए। और राष्‍ट्र का और सरकारों का ये दायित्‍व होता है कि भरोसे को कभी आंच नहीं आनी चाहिए। कभी भी सीमा पर बैठे जवान के मन में सवालिया निशान नहीं खड़ा होना चाहिए।

मैं राजनीतिक क्षेत्र में संगठन का कार्य करता था। मैं ये चुनावी राजनीति और सत्‍ता की दुनिया में बहुत देर से आया। मैंने अपना जीवन इस प्रकार कैडर तैयार करने में लगाया। और मैं, कभी मेरी पार्टी के कार्यकर्ताओं को जब संबोधन करता था, तो मैं एक बात उनको बताता था, क्‍यों कि अब चुनाव राजनीति में रहता है, टिकट लेने की इच्‍छाएं रहती हैं, टिकट नहीं मिलती हैं तो मन परेशान रहता है, फिर कभी-कभी विकृति भी आ जाती हैं, कभी गलत करने का भी मन कर जाता है। ये राजनीतिक क्षेत्र का एक स्‍वभाव रहता है। तो मैं कार्यकर्ताओं के प्रशिक्षण में कहता था, और मुझे मन करता है आज आपको भी वो सुनाऊ। मैं उनको कहता था कि सेना का जवान राखी के त्‍यौहार पर बहन से राखी बंधवाने के लिए छुट्टी लेकर के अपने घर जाता चाहता है। लास्‍ट मूवमेंट छुट्टी मिली है। वो अपना विस्‍तरा गोल करके उठा करके भागता है। जो भी ट्रक मिल गया, टेंपो मिल गया, कहीं नजदीक के रेलवे स्‍टेशन पर पहुंचता है। जो पैसेंजर हैं उसको अंदर घुसने नहीं देते, आरक्षण नहीं है। और हमेशा रोज का झगड़ा होता है, जम्‍मू स्‍टेशन पर आप देखो, रोज का झगड़ा होता है। पैसेंजर फौजी को जाने नहीं देते। उसको बैठने के लिए जगह नहीं मिलती है, क्‍योंकि यहां के लोगों को रोज की आदत है। बेचारा खड़ा-खड़ा चौबीस घंटे, तीस घंटे, छत्‍तीस घंटे ट्रेन में खड़ा-खड़ा बिना आरक्षण अपने घर जाता है। किसी न किसी कारण से ट्रेन कहीं छूट जाती है। बहुत सपने ले करके बहन से राखी बंधवाने निकला है लेकिन एक दिन देर से पहुंचता है। उधर बहन प्रतीक्षा कर रही है, ट्रेन में सफर कर रहे जवान के मन में बहन का चित्र है। राखी दिखती है, पहुंच नहीं पाता है, मन में पीड़ा होती है। जब घर पहुंचता है, मां, बेटी, बहन सब रो रहे हैं, राखी बंधवा पाए तो खुशी होती है। मां बीमार होती है, छुटि्टयां बढ़ाने के लिए कोशिश करता है, छुट्टी बढ़ती नहीं है, वापिस आता है। मां का ऑपरेशन करना है, दुबारा जाता है। ऑपरेशन के लिए डॉक्‍टरों के घर-घर भटकता है। डॉक्‍टर कहता है पहले एडवांस में इतना पैसा दो। जेब में पैसा नहीं है। मन में गुस्‍सा आता है, डॉक्‍टर कैसा है, मैं फौजी हूं, देश के लिए मर रहा हूं, मेरी मां मर रही है वो ऑपरेशन नहीं कर रहा है। बच्चा स्‍कूल जाना चाहता है स्‍कूल वाला एडमिशन नहीं देता है। इतनी फीस दो तभी शायद एडमिशन फौज में रहा है तो मन करता है मैं तो भले ही सामान्य स्‍कूल में पढ़ा, लेकिन बच्‍चे को अच्‍छे स्‍कूल में पढ़ाऊंगा। फीस के पूरे पैसे नहीं, स्‍कूल एडमीशन देता नहीं। मन में गुस्‍सा आता है, ये कैसा डॉक्‍टर है, ये कैसी स्‍कूल है, ये कैसी रेल, जो मुझे राखी के दिन पहुंचाती नहीं। मां के ऑपरेशन के लिए नहीं पहुंचाती। मां का ऑपरेशन नहीं होता, मां मर जाती है। कितनी निगेटिव चीजें उसके मन पर सवार होती हैं। एक के बाद एक घटनाओं का अगर वो हिसाब लगाए तो लगता है, क्‍या, मैं इसके लिए मरूं ? ये जो मेरे बच्‍चों को स्‍कूल का एडमिशन देते हैं, क्‍या इनके लिए मरूं, ये वो लोग, जब मेरी मां मर रही थी, अस्‍पताल में ऑपरेशन नहीं कर रहे थे, उनके लिए मरूं ? ये सब होने के बावजूद सेना के जवान की ताकत देखिए, उसका मिजाज देखिए, उसका संस्‍कार देखिए, जब जरूरत पढ़ती है, बिगुल बजता है तो कंधे पर बंदूक उठाकर के ‘भारत मां की जय’ करके निकल पढ़ता है। कभी सोचता नहीं है कि डॉक्‍टर ने मेरी मां के साथ क्‍या किया था, स्‍कूल के टीचर ने मेरे बच्चे के साथ क्‍या किया था, राखी के दिन मां के, बहन के पास पहुंचा था कि नहीं पहुंचा था, कभी सोचता नहीं है, निकल पड़ता है। ‘भारत मां की जय’ करके टूट पड़ता है। ये छोटी चीज नहीं है। ये सामान्‍य चीज नहीं है। और तब मैं राजनैतिक कार्यकर्ताओं को कहा करता था कि कभी हम उस सेना के जवान से प्रेरणा लें, कुछ भी नहीं मिलता है, कभी आदर-सत्‍कार-सम्‍मान भी नहीं मिलता है लेकिन जरूरत पड़ी तो कंधे पर बंदूक उठा करके ‘भारत माता की जय’ करके चल पड़ता है। ये मिजाज, ये ताकत, किसी भी राष्‍ट्र के सम्‍मान संरक्षा के लिए, स्‍वाभिमान के लिए, गौरव के लिए अनिवार्य होती है। और भारत इस बात का गर्व करता है कि हमारे पास ऐसी फौज है।

जल हो, थल हो, नभ हो, ऐसे वीरवती, पराक्रमी, तपस्‍वी, त्‍यागी जवानों की शृंखला है जिसका नाम लेते ही सीना तन जाता है। ऐसे जवानों के बीच आता हूं, मुझे भी देश के लिए और कुछ ज्यादा करने की प्रेरणा मिलती है। मैं यहां आपको कहने के लिए नहीं आता हूं, मैं बीच-बीच चला जाता हूं आप लोगों के बीच मैं जब गुजरात का मुख्‍यमंत्री था, तो अकसर मैं दिवाली मनाने के लिए सीमा पर चला जाता था। इसलिए नहीं कि मुझे उनको कुछ कहना है, इसलिए कि इनके बीच जा करके देशभक्ति की मेरी बैट्री भी जरा ज्‍यादा चार्ज हो जाती है। मैं तो चार्जिंग के लिए आया हूं। आपका जीवन हमें चार्जिंग करता है, हमें प्रेरणा देता है। सेना के जवान समाज के साथ भी उनका तालमेल चाहते हैं, दूरी नहीं चाहते। और वो एक ताकत देती है। अगर सेना के जवानों का लेह-लद्दाख के जनता के साथ तालमेल न होता और एक गाय-बकरी चराने वाला, ताशी नागिया, उससे कोई सेना का अधिकारी की भेंट न हुई होती, तो करगिल में पाकिस्‍तान की घुसपैठ का पता शायद कई दिनों तक नहीं चलता। एक गाय-भैंस-बकरी चराने वाले व्‍यक्ति ने सेना के जवानों के संपर्क के कारण जानकारी दी और देश जग गया और युद्ध हम जीत गए।

आज युद्ध सीमा पर होते, करीब-करीब बंद हो गए हैं। हमारा दुभार्ग्‍य है कि हमारे पड़ोसी की मानसिकता ने, युद्ध करने की तो ताकत खो दी है लेकिन प्राक्‍सी वार के माध्‍यम से निर्दोष नागरिकों को मारने का सिलसिला चला रहा है। कितने निर्दोष लोगों को मार दिया जा रहा है। युद्ध में जितने जवान शहीद हुए, उससे ज्‍यादा जवान इन बुझदिलों की गोलियों से मरने के लिए मजबूर हो गए। ये प्राक्‍सी वार, ये संकट सिर्फ भारत का नहीं, पूरे विश्‍व का हो गया है। और इसलिए विश्‍व में जितना सैन्य शक्ति के ताकत की जरूरत खड़ी हुई है, उतनी ही मानवतावादी ताकतों का इकट्ठा आना आवश्‍यक हो गया है। विश्‍व की मानवतावादी शक्तियां जितनी एकत्र आएंगी, हिंसा पर उतारू लोगों को जितना अलग-थलग करेगी और मानवतावादी शक्तियां मिल करके उन शक्तियों को परास्‍त करेगी, मानवतावादी विचार की, मानवतावादी प्रकृति की, मानवतावादी शक्ति की, मानवतावादी परंपरा की सुरक्षा के लिए हम समर्पित हैं। और इसके लिए भारत वचनबद्ध है, भारत कतर्व्‍यबद्ध है, भारत प्रतिबद्ध है और उसी विश्‍वास के साथ आगे बढ़ना है।

आपने नया बजट देखा होगा, ‘वन बैंक, वन पेंशन’ का हमारा कमिटमेंट आपको खुशी जरूर देता होगा। आजादी के बाद देश का जवान प्रतिक्षा कर रहा था कि नेशनल वार मेमोरियल बनेंगे। मैं आपको वादा करता हूं, बनेगा, बड़े गौरव से, बड़े शान से बनेगा, और हिंदुस्‍तान के कोटि-कोटि जन उसमें से प्रेरणा लेंगे। ये लोग जो हमारे लिए जीये, हमारे लिए मरे। ये सदा सर्वदा प्रेरणा देता रहेगा। सेना आधुनिक बने, सेना को भी संसाधनों की कमी महसूस न हो, भारत सुरक्षा के क्षेत्र में स्‍वावलंबी बने। मैंने बजट में हमने बहुत बड़ा डिसिजन लिया है। सुरक्षा के लिए आवश्‍यक सब इंतजाम भारत में तैयार क्‍यों न हों, हमें बाहर से क्‍यों लाना पड़े। और डिफेंस में एफडीआईआई आए, बाहर से टेक्‍नालॉजी आए, यहीं पर निर्माण कार्य हो। सेना के हमारे निवर्तमान जवान, उसमें इंजीनियर भी हैं, टेक्‍नि‍कल स्‍टॉफ भी हैं, स्‍कि‍लड पर्सन हैं। मैं डिफेंस मैनुफैक्‍चर्स सिस्‍टम में निवृत्ति के बाद भी इनकी ताकत कैसे काम में लगे, विदेशी धन कैसे लगे और उत्‍तम से उत्‍तम सुरक्षा का संविधान हम कैसे तैयार करें, उस दिशा में हम बहुत योजनाबद्ध तरीके से आगे बढ़ रहे हैं। अब मुझे विश्‍वास है हम जो चाहते हैं वो सुफल हमें मिलेंगे।

मैं फि‍र एक इस भवन जिनके नाम पर मैं इस वीर जवान के माध्यम से सभी शहीदों के प्रति अपना आदर भाव और नमन व्‍यक्‍त करता हूं। आप सबके कर्तव्‍य, कौशलता और साहस का मैं गर्व करता हूं और आपके एक मुखिया के रूप में, एक साथी के रूप में आपको ये विश्‍वास दिलाता हूं, ये देश आपके लिए है, आपके बीच में है, आपके सामर्थ्‍य के लिए सदा-सर्वदा गर्व करता है, करता रहेगा। मेरी आप सबको बहुत-बहुत शुभकामनाएं हैं। मेरे साथ-साथ बोलिए- भारत माता की जय, वंदे मतरम, वंदे मातरम, वंदे मातरम, वंदे मातरम, वंदे मातरम, वंदे मातरम।

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इनोवेटिव आइडियाज, एनर्जी और संकल्प के साथ, युवा शक्ति राष्ट्र निर्माण में अग्रणी भूमिका निभा रही है: पीएम मोदी
January 12, 2026
नवोन्‍मेषी विचारों, ऊर्जा और उद्देश्य के साथ, युवा शक्ति राष्ट्र निर्माण में अग्रणी भूमिका निभा रही है: प्रधानमंत्री
स्वामी विवेकानंद के विचार युवाओं को निरंतर प्रेरित करते रहे हैं: प्रधानमंत्री
युवाओं पर स्पष्ट फोकस के साथ हमने कई योजनाएं आरंभ कीं; यहीं से भारत में स्टार्टअप क्रांति ने सही मायने में गति पकड़ी: प्रधानमंत्री
संस्कृति, कंटेंट और रचनात्मकता पर आधारित ऑरेंज इकोनॉमी में भारत उल्लेखनीय वृद्धि कर रहा है: प्रधानमंत्री
पिछले एक दशक में, हमने जो सुधारों की श्रृंखला शुरू की थी, वह अब एक रिफॉर्म एक्सप्रेस में बदल गई है; इन सुधारों के केंद्र में हमारी युवा शक्ति है: प्रधानमंत्री
युवाओं को राष्ट्र को दासता की मानसिकता से मुक्त करने का संकल्प लेना चाहिए: प्रधानमंत्री

केंद्रीय मंत्रिमंडल के मेरे साथी, सभी सांसदगण, विकसित भारत यंग लीडर्स चैलेंज के विनर्स, अन्य महानुभाव और देशभर से यहां आए मेरे सभी युवा साथी, विदेशों से जो नौजवान आएं हैं, उनको भी यहां एक नया अनुभव मिला होगा। आप लोग थक नहीं गए? दो दिन से यही कर रहे हैं, तो अब क्या सुन- सुनके थक नहीं जाओगे? वैसे तो बैक सीट में मैंने जितना कहना था, कह दिया था। जब मैंने पहली बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी, तब मैं समझता हूं आप में से बहुत सारे युवा ऐसे होंगे, जिनका जन्म भी नहीं हुआ होगा। और जब मैंने 2014 में प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी, तब आप में से ज्यादातर लोगों को बच्चा कहा जाता होगा। लेकिन पहले मुख्यमंत्री के रूप में और फिर अभी प्रधानमंत्री के रूप में, मुझे हमेशा युवा पीढ़ी पर बहुत ज्यादा विश्वास रहा है। आपका सामर्थ्य, आपका टैलेंट, मैं हमेशा आपकी एनर्जी से, खुद भी एनर्जी पाता रहा हूं। और आज देखिए, आज आप सभी विकसित भारत के लक्ष्य की बागडोर थामे हुए हैं।

साथियों,

साल 2047 में, जब हमारी आजादी के 100 साल होंगे, वहां तक की यात्रा भारत के लिए भी अहम है, और यही वो समय है, जो आपके जीवन में भी सबसे महत्वपूर्ण है, यानी बड़ी golden opportunity है आपके लिए। आपका सामर्थ्य, भारत का सामर्थ्य बनेगा, आपकी सफलता, भारत की सफलता को नई ऊंचाइयां जरूर देगी। मैं आप सभी को विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग में सहभागिता के लिए बहुत-बहुत बधाई देता हूं। मैं इस विषय पर आगे विस्तार से बात जरूर करूंगा, लेकिन पहले बात आज के विशेष दिन की।

साथियों,

आप सभी जानते हैं कि आज स्वामी विवेकानंद जी की जन्म जयंती है। स्वामी विवेकानंद जी के विचार, आज भी हर युवा के लिए प्रेरणा हैं। हमारे जीवन का लक्ष्य क्या है, purpose of life क्या है, कैसे हम नेशन फर्स्ट की भावना के साथ अपना जीवन जीएं। हमारे हर प्रयास में समाज का,देश का हित हो, इस दिशा में स्वामी विवेकानंद जी का जीवन हम सभी के लिए बहुत बड़ा मार्गदर्शक है, प्रेरक है। स्वामी विवेकानंद का स्मरण करते हुए, हर साल 12 जनवरी को हम राष्ट्रीय युवा दिवस मनाते हैं, और उन्हीं की प्रेरणा आज 12 जनवरी को विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग के लिए चुना गया है।

साथियों,

मुझे खुशी है कि बहुत ही कम समय में विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग इतना बड़ा प्लेटफॉर्म बन गया है। एक ऐसा प्लेटफॉर्म, जहां देश के विकास की दिशा तय करने में युवाओं की सीधी भागीदारी होती है। करोड़ों नौजवानों का इससे जुड़ना, 50 लाख से अधिक नौजवानों की रजिस्ट्री, 30 लाख से अधिक युवाओं का विकसित भारत चैलेंज में हिस्सा लेना, देश के विकास के लिए अपने विचार शेयर करना, इतने बड़े स्केल पर युवाशक्ति का एंगेज होना, अपने आप में अभूतपूर्व है। दुनिया के अनेक देशों में आमतौर पर थिंक टैंक, यह शब्द बहुत प्रचलित है। थिंक टैंक की चर्चा भी होती है। और उस थिंक टैंक का प्रभाव भी बहुत होता है। वे एक प्रकार से ओपिनियन मेकर्स का एक समूह बन जाता है। लेकिन शायद, आज जो मैंने प्रेजेंटेशन देखें और जिस प्रकार से challenging होते-होते आप लोगों ने, यहां तक जो लाए हैं। मैं समझता हूं कि ये अपने आप में, ये इवेंट institutionalized तो हुआ है, एक अपने आप में, दुनिया में अनोखी थिंक टैंक के रूप में उसने अपनी जगह बना ली। एक निश्चित विषय को लेकर, निश्चित लक्ष्य को लेकर के लाखों लोगों का मंथन होना, इससे बड़ा थिंकिंग क्या हो सकता है? और मुझे लगता है कि इसके साथ थिंक टैंक शब्द बैठता नहीं है, क्योंकि टैंक शब्द इसलिए आया होगा, छोटा सा होता है, ये तो विशाल है, सागर से भी विशाल है और समय से भी आगे है, और विचारों में समंदर से भी ज्यादा गहरा है। और इसलिए थिंक टैंक शब्द, टैंक वाले शब्द से भी सीमित नहीं किया जा सकता, ऐसा इसका अनुभव है। और जिन विषयों को आज आपने चर्चा में लिया हैं, जैसे खासतौर पर Women Led Development और Youth Participation in Democracy, ऐसे गंभीर विषयों पर जिस प्रकार से विचार आपने रखें हैं, ये प्रशंसनीय है। थोड़ी देर पहले आपने यहां जो प्रजेंटेशन रखे, अलग-अलग थीम्स को लेकर प्रभावी बात रखी है। ये दिखाता है कि हमारी अमृत पीढ़ी, विकसित भारत के निर्माण के लिए कितनी संकल्पित है। इससे ये भी स्पष्ट होता है कि भारत में जेन-ज़ी का मिज़ाज क्या है। भारत का जेन-ज़ी कितनी creativity से भरा हुआ है। मैं आप सभी युवा साथियों को मेरा युवा भारत संगठन से जुड़े सभी नौजवानों को इस आयोजन के लिए और इसकी सफलता के लिए, मैं बहुत-बहुत बधाई देता हूं, आप सबका अभिनंदन करता हूं।

साथियों,

मैंने जब अभी आपसे बातचीत शुरू की तो 2014 का जिक्र किया था। तब यहाँ बैठे ज़्यादातर युवा 8–10 साल के ही रहे होंगे। अखबार पढ़ने की उनकी आदत भी नहीं डेवलप हुई होगी। आपने पॉलिसी पैरालिसिस का वो पुराना दौर नहीं देखा, जब उस समय की सरकार की इसलिए आलोचना होती थी कि वो समय पर फैसले नहीं लेती। और जो फैसले होते भी थे, वो ज़मीन पर ठीक से लागू नहीं होते थे। नियम-कायदे ऐसे थे, जिससे हमारा नौजवान कुछ नया करने के बारे में सोच भी नहीं सकता था। देश का युवा परेशान था कि इतनी बंदिशों में वो जाए तो, जाए कहां।

साथियों,

हालत ये थी कि अगर किसी एग्जाम के लिए, जॉब के लिए अप्लाई करना होता था, तो सर्टिफिकेट अटेस्ट कराने के लिए अफसरों और नेताओं के साइन लेने में ही दम निकल जाता था। फिर फीस का डिमांड ड्राफ्ट बनाने के लिए बैंकों और पोस्ट-ऑफिस के चक्कर लगाने पड़ते थे। अपना कोई बिजनेस शुरु करना होता था, तो बैंक कुछ हज़ार रुपए के लोन के लिए 100 गारंटी मांगते थे। आज ये बातें बहुत असामान्य लगती हैं, लेकिन एक दशक पहले तक यही सबकुछ चलता था।

साथियों,

आपने यहां स्टार्ट-अप्स को लेकर प्रेजेंटेशन दिया, मैं आपको स्टार्ट-अप इकोसिस्टम का ही उदाहरण देता हूं, कि इसमें जो परिवर्तन होता है, वो कैसे हुआ है। दुनिया में 50-60 साल पहले स्टार्ट अप कल्चर शुरु हुआ, धीरे-धीरे वो मेगा-कॉर्पोरेशन्स के युग में बदल गया, लेकिन इस पूरी जर्नी के दौरान भारत में स्टार्ट अप्स के बारे में बहुत कम चर्चा होती थी। साल 2014 तक तो देश में 500 से भी कम रजिस्टर्ड स्टार्ट-अप हुआ करते थे। स्टार्ट अप कल्चर के अभाव में, हर क्षेत्र में सरकार का ही दखल हावी रहा। हमारा युवा टैलेंट, उसका सामर्थ्य, उसे अपने सपने पूरे करने का मौका ही नहीं मिला।

साथियों,

मुझे अपने देश के युवाओं पर भरोसा है, आपके सामर्थ्य पर भरोसा है, इसलिए हमने एक अलग राह चुनी। हमने युवाओं को ध्यान में रखते हुए, एक के बाद एक नई स्कीम्स बनाई, यहीं से Startup Revolution ने भारत में असली गति पकड़ी। Ease of Doing Business reforms, Startup India, Digital India, Fund of Funds, Tax और compliance simplification, ऐसे अनेक Initiatives लिए गए। ऐसे सेक्टर,जहां पहले सिर्फ सरकार ही सबकुछ थी, सबकुछ उसी की चलती थी, उनको युवा इनोवेशन, युवा एंटरप्राइज़ के लिए ओपन किया गया। इसका जो प्रभाव हुआ, वो भी एक अलग ही सक्सेस स्टोरी बन चुका है।

साथियों,

आप स्पेस सेक्टर को ही लीजिए, 5-6 साल पहले तक स्पेस सेक्टर को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी सिर्फ ISRO पर थी। हमने स्पेस को प्राइवेट एंटरप्राइज के लिए ओपन किया, इससे जुड़ी व्यवस्थाएं बनाईं, संस्थाएं तैयार कीं और आज स्पेस सेक्टर में 300 से अधिक स्टार्ट-अप्स काम कर रहे हैं। देखते ही देखते हमारे स्टार्टअप Skyroot Aerospace ने अपना रॉकेट 'विक्रम-S' तैयार कर लिया है। एक और स्टार्ट अप अग्निकुल Cosmos ने दुनिया का पहला 3D प्रिंटेड इंजन बनाकर सबको चौंका दिया, ये सब स्टार्टअप की कमाल है। भारत के स्पेस स्टार्टअप्स अब लगातार कमाल करके दिखा रहे हैं।

साथियों,

मैं अब आपसे एक सवाल करता हूं। आप कल्पना करिए कि अगर ड्रोन उड़ाने पर चौबीसों घंटे अनेकों तरह की पाबंदी लगी रहती, तो क्या होता? ये थी। पहले हमारे यहां ड्रोन उड़ाना या बनाना, दोनों कानूनों के जाल में फंसा हुआ था। लाइसेंस लेना पहाड़ चढ़ने जैसा काम था और इसे केवल सुरक्षा के नजरिए से ही देखा जाता था। हमने नए नियम बनाए, नियम आसान किए, इसके कारण आज हमारे यहां कितने ही युवाओं को ड्रोन से जुड़े सेक्टर में आगे बढ़ने का मौका मिला है। युद्ध-क्षेत्र में मेड इन इंडिया ड्रोन देश के दुश्मनों को धूल चटा रहे हैं, और कृषि क्षेत्र में हमारी नमो ड्रोन दीदियां खेती में ड्रोन टेक्नोलॉजी का उपयोग कर रही हैं।

साथियों,

डिफेंस सेक्टर भी पहले सरकारी कंपनियों पर ही निर्भर था। हमारी सरकार ने इसको भी बदला, भारत के डिफेंस इकोसिस्टम में स्टार्ट अप्स के लिए दरवाजे खोले। इसका बहुत बड़ा फायदा हमारे युवाओं को ही मिला। आज भारत में 1000 से अधिक डिफेंस स्टार्ट अप्स काम कर रहे हैं। आज एक युवा ड्रोन बना रहा है, तो दूसरा युवा एंटी-ड्रोन सिस्टम बना रहा है, कोई AI कैमरा बना रहा है, कोई रोबोटिक्स पर काम कर रहा है।

साथियों,

डिजिटल इंडिया ने भी भारत में क्रिएटर्स की एक नई कम्युनिटी खड़ी कर दी है। भारत आज 'ऑरेंज इकोनॉमी' यानि कल्चर, कंटेंट और क्रिएटिविटी का अभूतपूर्व विकास होते देख रहा है। भारत मीडिया, फिल्म, गेमिंग, म्यूज़िक,डिजिटल कंटेंट,VR-XR जैसे क्षेत्रों में एक बड़ा ग्लोबल सेंटर बन रहा है। अभी यहां पर एक प्रेजेंटेशन में हमारे कल्चर को एक्सपोर्ट करने की बात आई। मैं तो आप नौजवानों से आग्रह करता हूं, हमारी जो कहानियां हैं, कहानी- किस्से हैं, रामायण है, महाभारत है, बहुत कुछ है। क्या हम उसमें गेमिंग की दुनिया में ले जा सकते है, इन चीजों को? पूरी दुनिया में गेमिंग एक बहुत बड़ा मार्केट है, बहुत बड़ी इकोनॉमी है। हम अपनी माइथोलॉजी की कथाओं को लेकर के भी गेमिंग की दुनिया में नए-नए खेल ले जा सकते हैं, हमारे हनुमान जी पूरी दुनिया की गेमिंग को चला सकते हैं। हमारा कल्चर भी एक्सपोर्ट हो जाएगा, आधुनिक रूप में हो जाएगा, टेक्नोलॉजी का उपयोग होगा। और आजकल भी मैं देख रहा हूं, हमारे देश के इस कई स्टार्टअप है, जो गेमिंग की दुनिया में बहुत बढ़िया भारत की बातें कह रहे हैं, और बच्चों को भी खेलते-खेलते भारत को समझना सरल हो जाता है।

साथियों,

'वर्ल्ड ऑडियो-विजुअल एंड एंटरटेनमेंट समिट' यानि WAVES युवा क्रिएटर्स के लिए एक बहुत बड़ा लॉन्च-पैड बन गई है। यानि सेक्टर कोई भी हो, आपके लिए आज भारत में अनंत संभावनाओं के द्वार खुल रहे हैं। इसलिए मेरा आज यहां इस आयोजन से जुड़े सभी युवाओं से, देश के युवाओं से आह्वान है, आप अपने आइडिया के साथ आगे बढ़िए, रिस्क लेने से पीछे मत हटिए, सरकार आपके साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रही है।

साथियों,

बीते दशक में बदलाव का, रिफॉर्म्स का जो सिलसिला हमने शुरु किया, वो अब रिफॉर्म एक्सप्रेस बन चुका है। और इन रिफॉर्म्स के केंद्र में आप हैं, हमारी युवाशक्ति है। GST में हुए नेक्स्ट जेनरेशन रिफॉर्म्स से युवाओं और आंत्रप्रन्योर्स के लिए प्रोसेस और आसान हो गई है। अब 12 लाख रुपए तक की इनकम पर टैक्स ज़ीरो हो गया है, इससे नई नौकरी वालों या नया बिजनेस शुरु करने वाले नौजवानों को, उनके पास बहुत ज्यादा बचत होने की संभावना बढ़ गई है ।

साथियों,

आप सभी जानते हैं, आज बिजली सिर्फ रोशनी का माध्यम नहीं है, आज AI, Data सेंटर्स, सेमीकंडक्टर, मैन्युफेक्चरिंग, ऐसे हर इकोसिस्टम के लिए ज्यादा बिजली की ज़रूरत है। इसलिए आज भारत Assured Energy सुनिश्चित कर रहा है। सिविल न्यूक्लियर एनर्जी से जुड़ा रिफॉर्म यानि शांति एक्ट इसी लक्ष्य के साथ किया गया है। इससे न्यूक्लियर सेक्टर में तो हज़ारों नये जॉब्स पैदा होंगे ही, बाकी सेक्टर्स पर भी इसका मल्टीप्लायर effect होने वाला है।

साथियों,

दुनिया के अलग-अलग देशों की अपनी जरूरतें हैं,अपनी डिमांड है। वहां वर्कफोर्स लगातार घट रही है। हमारा प्रयास है कि भारत के युवा दुनियाभर में बन रहे अवसरों के लिए तैयार हों। इसलिए, स्किल डवलपमेंट से जुड़े सेक्टर्स में भी लगातार रिफॉर्म किया जाना चाहिए, और हम कर रहे हैं। नई नेशनल एजुकेशन पॉलिसी के बाद, अब हायर एजुकेशन से जुड़े रेगुलेशन्स को रिफॉर्म किया जा रहा है। विदेशी यूनिवर्सिटीज़ भी अब भारत में अपने कैंपस खोल रही हैं। हाल में ही हज़ारों करोड़ रुपए के निवेश के साथ पीएम सेतु प्रोग्राम शुरु किया गया है। इससे हमारे हज़ारों ITI अपग्रेड किए जाएंगे, ताकि युवाओं को इंडस्ट्री की वर्तमान और भविष्य की ज़रूरतों के हिसाब से ट्रेन किया जा सके। बीते समय में दुनिया के अलग-अलग देशों के साथ भारत ने ट्रेड डील्स की हैं। ये भी भारत के युवाओं के लिए नए-नए अवसर लेकर आ रही हैं।

साथियों,

कोई भी देश बिना आत्मविश्वास के आत्मनिर्भर नहीं हो सकता,विकसित नहीं हो सकता। और इसलिए,अपने सामर्थ्य,अपनी विरासत,अपने साजो-सामान पर गौरव का अभाव, हमें खलता है, हमारे पास उसके प्रति एक कमिटमेंट चाहिए, गौरव का भाव होना चाहिए। और हमें बड़ी मजबूती के साथ, गौरव के साथ मजबूत कदमों से आगे बढ़ना चाहिए। आपने ब्रिटिश राजनेता मैकाले के बारे में ज़रूर पढ़ा होगा, उसने गुलामी के कालखंड में शिक्षा-तंत्र के माध्यम से भारतीयों की ऐसी पीढ़ी बनाने के लिए काम किया, जो मानसिक रूप से गुलाम हो। इससे भारत में स्वदेशी के प्रति,अपनी परंपराओं के प्रति,अपने प्रोडक्ट्स,अपने सामर्थ्य के प्रति हीन-भावना पनपी। सिर्फ स्वदेशी होना और इंपोर्टेड होना ही, विदेशी होना और इंपोर्टेड होना ही, इसी को श्रेष्ठता की गारंटी मान लिया, अब ये कोई गले उतरने वाली चीज है क्या? हमें मिलकर गुलामी की इस मानसिकता को खत्म करना है। दस साल बाद, मैकाले के उस दुस्साहस को 200 वर्ष पूरे हो रहे हैं, और ये पीढ़ी की जिम्मेवारी है कि 200 साल पहले का जो पाप है ना, वो धोने के लिए अभी 10 साल बचे हैं हमारे पास। और ये युवा पीढ़ी धोकर के रहेगी, मुझे पूरा भरोसा है। और इसलिए देश के हर युवा को संकल्प लेकर इस मानसिकता से देश को बाहर निकालना है।

साथियों,

हमारे यहां शास्त्रों में कहा गया है, और यहां पर स्टार्टअप, यहां जो प्रेजेंटेशन हुआ, उसमें भी उसका उल्लेख किया गया- आ नो भद्राः क्रतवो यन्तु विश्वतः यानि हमारे लिए सभी दिशाओं से कल्याणकारी और शुभ और श्रेष्ठ विचार आने दें। आपको भी दुनिया की हर बेस्ट प्रेक्टिस से सीखना है, लेकिन अपनी विरासत, अपने आइडियाज़ को कमतर आंकने की प्रवृत्ति को कभी हावी नहीं होने देना है। स्वामी विवेकानंद जी का जीवन हमें यही तो सिखाता है। उन्होंने दुनियाभर में भ्रमण किया, वहां की अच्छी बातों की प्रशंसा की, लेकिन उन्होंने भारत की विरासत को लेकर फैलाए गए भ्रम को तोड़ने के लिए निरंतर प्रयास किए, कठोरता उन्होंने घाव किए उस पर। उन्होंने विचारों को सिर्फ इसलिए नहीं स्वीकार किया, क्योंकि वे पॉपुलर थे, बल्कि उन्होंने कुरीतियों को चैलेंज किया, स्वामी विवेकानंद जी एक बेहतर भारत बनाना चाहते थे। उसी स्पिरिट के साथ, आज आप युवाशक्ति को आगे बढ़ना है। और यहां, अपनी फिटनेस का भी ध्यान रखना है, खेलना है, खिलखिलाना है। मुझे आप सभी पर अटूट भरोसा है। आपका सामर्थ्य,आपकी ऊर्जा पर मेरा विश्वास है। इन्हीं शब्दों के साथ आप सभी को एक बार फिर से युवा दिवस की बहुत-बहुत शुभकामनाएं। मैं एक और सुझाव देना चाहता हूं। ये जो हमारा डायलॉग का कार्यक्रम चल रहा है, क्या आप कभी योजना करके अपने स्टेट में, स्टेट को विकसित बनाने के लिए डायलॉग, ये कार्यक्रम शुरू करें। और थोड़े समय के बाद हम डिस्ट्रिक्ट को विकसित बनाने के लिए भी डायलॉग शुरू करें, इस दिशा में जाएंगे। लेकिन हर राज्य में एक कार्यक्रम राज्य के नौजवान मिलकर के ताकि एक थिंक टैंक, जिसको कहा गया, ये थिंक वेब बन जाएगा, ये दिशा में हम करें। मेरी पूरी शुभकामनाएं आपके साथ हैं। बहुत-बहुत धन्यवाद दोस्तों।